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Tuesday, January 13, 2026

Aajtak News Update

 
बुधवार, 14 जनवरी 2026
 
सुप्रभात नई दिल्ली
 
 
आपके लिए
संभल हिंसा मामले में चंदौसी की CJM कोर्ट ने तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी और इंस्पेक्टर अनुज तोमर सहित 12 पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है. यह आदेश घायल युवक आलम के पिता यामीन की याचिका पर आया. आरोप है कि आलम को गोली मारी गई थी. हालांकि एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने कहा कि एफआईआर फिलहाल दर्ज नहीं होगी और आदेश के खिलाफ अपील की जाएगी.
आजतक की पड़ताल उन प्राइवेट अस्पतालों के खिलाफ है, जो जीवन बचाने के नाम लूट की दुकान चला रहे हैं. लखनऊ से लेकर मुंगेर और रांची से लेकर भोपाल तक, प्राइवेट अस्पतालों में मरीजों को नोट छापने की मशीन समझ लिया गया है. आज हम आपको उन परिवारों की रोंगटे खड़े कर देने वाली दास्तां बताएंगे, जिनकी इलाज के दौरान गाढ़ी कमाई भी गई और अपनों की जान भी गंवानी पड़ी.
ऑपरेशन सिंदूर के महज चार दिन बाद 14 मई 2025 को शाम 4:59 बजे पाकिस्तान ने अमेरिका के साथ अपने संबंधों को रीसेट करने की कोशिश की थी, जिसमें वह काफी हद तक कामयाब भी रहा. पाकिस्तान की इस कोशिश का एक महत्वपूर्ण हिस्सा पूर्व अमेरिकी राजदूत पॉल डब्ल्यू. जोन्स की ओर से विदेश विभाग को भेजा गया एक खास ईमेल था. इस ईमेल के जरिए पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर की आगामी वाशिंगटन यात्रा के एजेंडे और रणनीतिक बिंदुओं पर चर्चा की थी.
सुनिए
 
  German Chancellor से लेकर French President तक क्यों मिलाना चाहते हैं PM Modi से हाथ? : Padhaku Nitin World Affairs  
 
 
  MP: शहर में कहीं भी कोई घटना हो वो आदमी मौजूद रहता है | भौंचक  
 
 
देखिये
 
सरकार ने क्विक कॉमर्स कंपनियों की 10 मिनट डिलीवरी सेवा पर रोक लगा दी है. Blinkit, Swiggy, Zepto और Zomato जैसी प्रमुख कंपनियों ने यह सुनिश्चित किया है कि वे अब अपने ब्रांड या सोशल मीडिया पर 10 मिनट की डिलीवरी का वादा नहीं करेंगी. श्रम मंत्रालय ने डिलीवरी पार्टनर्स की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए कहा कि इस सेवा मॉडल में जल्दी डिलीवरी के दबाव के कारण कई बार ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन होता है.
 
 
 
 
इंदौर में दूषित पानी के कारण हुई जनता की मौत ने मोहन यादव सरकार की संवेदनशीलता पर गंभीर प्रश्न चिन्ह लगा दिया है. प्रदेश भर में जल सुनवाई के दौरान आजतक की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि भोपाल में पानी की जांच के लिए जो कर्मचारी जिम्मेदार थे, उन्हें पूरी जानकारी न देते हुए जांच का कार्य सौंपा गया. यह लापरवाही जनता की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन गई है. रिपोर्ट ने सरकार की प्रशासनिक संवेदनशीलता और लापरवाही को उजागर किया है, जो इस गंभीर समस्या के समाधान में बाधक साबित हो रही है.
 
 
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