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Monday, September 7, 2020

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सुलतानपुर : कायाकल्प योजना में हुई गड़बड़ी, निरीक्षण में खुली पोल

Posted: 06 Sep 2020 11:17 PM PDT

सुलतानपुर : कायाकल्प योजना में हुई गड़बड़ी, कतिमय बीईओ व प्रधानाध्यापकों की मिली से हुआ बंदरबांट, बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों के निरीक्षण में स्कूलों में मिली धांधली।

सुल्तानपुर : परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों को सजाने-संवारने और मरम्मत आदि के लिए शासन से भेजी गई धनराशि खर्च में गड़बड़ी की बात सामने आई है। बीएसएफ के निरीक्षण में इसकी पोल खुली है। पता लगा है कि कतिपय प्रधानाध्यापक और खंड शिक्षा अधिकारियों ने गड़बड़ी की है।




प्रदेश सरकार की ओर से परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के कायाकल्प के लिए कम्पोजिट ग्रांट एकमुश्त मिली थी। बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से धनराशि के आवंटन के लिए स्कूल में नामांकित बच्चों का पैमाना निर्धारित किया गया था। एक स्कूलों में 100 बच्चों के नामांकन पर 25 हजार रुपए तथा इससे अधिक बच्चों का नामांकन होने पर 50 हजार रुपए की धनराशि मिली थी। धनराशि मिलने के बाद प्रधानाचार्यों ने खण्ड शिक्षा अधिकारियों से मिलकर धनराशि निकाल ली। कतिपय स्कूलों में मात्र दिखावे के लिए कार्य किया गया।

तमाम ऐसे विद्यालय हैं जिनकी मरम्मत होनी थी, मगर उसमें जरूरी कार्य नहीं कराए गए। कोरोना काल का बहाना लेकर प्रधानाध्यापकों और खण्ड शिक्षाधिकारियों ने कम्पोजिट ग्रांट के पैसे को इधर-उधर कर दिया। जानकार बताते है कि कतिपय प्रधान अध्यापकों ने प्रमाण के तौर पर कराए गए कार्य व उसमें लगे सामानों की रसीद बनवाकर अपने बचावकारास्ता निकाल लिया है। यह जरूर है कि बनवाई गई रसीद जीएसटी वाली नहीं है। बीएसए ने स्कूलों के निरीक्षण के बहाने जब कायाकल्प के धनराशि के खर्च की जांच की तो उसकी पोल खुल गई।

इन स्कूलों की हुई जांच : बल्दीराय ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय कम्पोजिट उच्च प्राथमिक विद्यालय हेमनापुर में बीएसए की जांच में कायाकल्प के पैसे से कोई कार्य नहीं होना पाया गया। प्राथमिक विद्यालय वलीपुर, प्राथमिक विद्यालय चकिया में भी कायाकल्प योजना के पैसे का कोई कार्य हुआ । बीएसए ने यहां पर खुद जांच की थी। जानकार बताते है कि यह जांच का सिर्फ नमूना है। बड़े स्तर पर जांच हुई तो प्रधानाध्यापकों के साथ बीईओ की भी कलई खुल जाएगी। इसके अलावा धनपतगंज ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय सरैयामाफी, उच्च प्राथमिक विद्यालय रामनगर चेती, प्राथमिक विद्यालय रामनगर चेती में भी कायाकल्प योजना से कार्य नहीं होने की जानकारी बीईओ की जांच में सामने आई है।

मुख्य विकास अधिकारी : अतुल वत्स ने कायाकल्प योजना में गड़बड़ी की बात सामने आने पर कहा है कि सरकारी धन का दुरूपयोग चिंता का विषय है। इसकी जांच कराई जाएगी। कायाकल्प योजना को लेकर जल्द ही बैठक कराएंगे। कार्यपूर्ति की जानकारी लेकर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

गोरखधंधा : कतिपय बीईओ व प्रधानाध्यापकों की मिलीभगत से बंदरबांट हुआ, बेसिक शिक्षा अधिकारी की जांच में कई स्कूलों की खुली पोल

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प्राइवेट में फीस देना भारी, बच्चे चले स्कूल सरकारी

Posted: 06 Sep 2020 07:25 PM PDT

प्राइवेट में फीस देना भारी, बच्चे चले स्कूल सरकारी

कोरोना के चलते बजट घटा : सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को अब प्रथम श्रेणी न्यूनतम अर्हता, शुल्क प्रतिपूर्ति का लाभ60 फीसद नंबर आवश्यक

Posted: 06 Sep 2020 06:37 PM PDT

कोरोना के चलते बजट घटा : सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को अब प्रथम श्रेणी न्यूनतम अर्हता, शुल्क प्रतिपूर्ति का लाभ60 फीसद नंबर  आवश्यक


प्रदेश में अब सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों केब60 फीसद नंबर  होने पर ही उन्हें शुल्क प्रतिपूर्ति का लाभ मिल पाएगा। इससे कम अंकों पर वे आवेदन नहीं कर सकेंगे। 60 फीसद की न्यूनतम अर्हता के साथ मेरिट के आधार पर शुल्क प्रतिपूर्ति का भुगतान किया जाएगा। मेरिट बढ़ भी सकती है। समाज कल्याण विभाग ने यह बदलाव प्रतिपूर्ति के नियमों में किया है।

इंटर में 60, स्नातक में 55 फीसद अंक अनिवार्य : नई नियमावली के अनुसार स्नातक स्तर पर शुल्क प्रतिपूर्ति का आवेदन करने वालों के लिए 12वीं में न्यूनतम 60 फीसद अंक अनिवार्य हैं, स्नातकोत्तर कोर्स की शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए स्नातक में न्यूनतम 55 प्रतिशत अंक होने चाहिए।

कोरोना के चलते बजट घटा : कोरोना संक्रमण का असर सामान्य वर्ग की छात्रवृत्ति व प्रतिपूर्ति के बजट पर भी पड़ा है। सरकार ने वर्ष 2020-21 का बजट 325 करोड़ रुपये कम करके 500 करोड़ कर दिया है। ऐसे में न्यूनतम अर्हता बढ़ाकर आवेदनों की संख्या कम करने का प्रयास किया जा रहा है।

पिछड़े वर्ग के लिए 50 फीसद अंक अनिवार्य : पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग में पहले से ही 50 फीसद अंक की अनिवार्यता है। जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी एसपी सिंह ने बताया कि बजट के आधार पर मेरिट सूची बनती है। वर्ष 2019-20 में 67 फीसद तक अंक पाने वालों को ही लाभ मिल सका था।

गोरखपुर : कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की शिक्षिकाओं का मानदेय होगा आधा, आक्रोश

Posted: 06 Sep 2020 06:30 PM PDT

कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की शिक्षिकाओं का मानदेय होगा आधा, आक्रोश


गोरखपुर। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में 12 वर्षों से अध्यापन करने वाली जिले की 23 शिक्षिकाओं का मानदेय जल्द ही आधा हो जाएगा। शासन की नई नियमावली के तहत अब इन विद्यालयों में कंप्यूटर, आर्ट एंड क्रॉफ्ट और शारीरिक शिक्षा की शिक्षिकाओं से पूर्णकालिक के बजाय अंशकालिक शिक्षक के रूप में काम लिया जाएगा। शासन के निर्देश पर शिक्षिकाओं को अंशकालिक शिक्षक के रूप में समायोजित करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। अगले सप्ताह तक प्रक्रिया को पूरा कर लिया जाएगा, वहीं शिक्षिकाओं ने सरकार से फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है।

कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय संघर्ष मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष देश दीपक दूबे ने कहा कि पूर्णकालिक शिक्षकों के रूप में अध्यापन करने वाली शिक्षिकाओं को अब तक त्र 22 हजार का मानदेय मिल रहा था। मगर अब उन्हें अंशकालिक करने पर मानदेय त्र 9800 हो जाएगा। सरकार नियमों में अचानक बदलाव कर शिक्षिकाओं की परेशानी बढ़ा रही है। पहले ही नौ शिक्षकों और छह उर्दू की शिक्षिकाओं को नए नियमावली के तहत बाहर किया जा रहा है। दूसरी तरफ जो बच गए हैं, उनके मानदेय में कटौती की जा रही है। जो न्याय संगत नहीं हैं। उन्होंने सरकार से फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है।

शासन के निर्देश के मुताबिक कार्रवाई शुरू की गई है। एक सप्ताह के अंदर पूरी रिपोर्ट शासन को मुहैया कराने की समय सीमा दी गई है। नियम के मुताबिक पूर्णकालिक शिक्षकों को अंशकालिक शिक्षक के रूप में तब्दील किया जा रहा है। -बीएन सिंह, बीएसए

चालू सत्र के लिए कम की जा सकती है शुल्क भरपाई की राशि, समाज कल्याण विभाग कर रहा विचार, शासन को प्रस्ताव भेजने की तैयारी

Posted: 06 Sep 2020 06:15 PM PDT

चालू सत्र के लिए कम की जा सकती है शुल्क भरपाई की राशि, समाज कल्याण विभाग कर रहा विचार, शासन को प्रस्ताव भेजने की तैयारी।

लखनऊ :  चालू सत्र के लिए विभिन्न पाठ्यक्रमों की शुल्क भरपाई की राशि कम की जा सकती है। कोरोना काल में ऑनलाइन कक्षाओं के कारण शिक्षण संस्थानों पर कम हुए व्यय-भार को देखते हुए इस पर विचार किया जा रहा है। हालांकि इस मामले में कोई अंतिम फैसला शासन स्तर से ही होगा।

प्रदेश सरकार सभी वर्गों के गरीब छात्रों को छात्रवृत्ति के साथ शुल्क भरपाई की सुविधा देती है। अनुसूचित जाति व जनजाति के परिवारों की सालाना आमदनी ढाई लाख रुपये और शेष वर्गों के लिए दो लाख रुपये सालाना आमदनी होने पर यह सुविधा दी जाती है। कोई भी छात्र न्यूनतम 75 फीसदी उपस्थिति होने पर इस सुविधा का लाभ ले सकता है। हालांकि, अभी तक यह व्यवस्था ऑनलाइन क्लासेज के आधार पर थी। पहली बार इसे ऑनलाइन पढ़ाई के आधार पर करने पर भी सहमति बन चुकी है। समाज कल्याण विभाग के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक ऑनलाइन पढ़ाई में जहां छात्रों का डाटा, लैपटॉप, कंप्यूटर या स्मार्टफोन का खर्च बढ़ जाता है, वहीं शिक्षण संस्थानों पर भार कम होता है। विद्यार्थियों के शिक्षण संस्थान में न आने से उनके कई तरह के खर्चे (बिजली-पानी व प्रयोगशाला आदि से संबंधित) बचते हैं। इसी आधार पर शुल्क प्रतिपूर्ति की राशि भी कम करने पर विचार किया जा रहा है। जिस अनुपात में शुल्क प्रतिपूर्ति की राशि कम की जाएगी, उसी अनुपात में शिक्षण संस्थानों को भी अपनी फीस कम करनी होगी।



शासन के एक उच्च पदस्थ सूत्र ने बताया कि इस संबंध में तमिलनाडु में लागू व्यवस्था का अध्ययन कराया जा रहा है। इसके लिए केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अधिकारियों से भी संपर्क साधा गया है। अध्ययन के निष्कर्षों के आधार पर समाज कल्याण विभाग इस बाबत ठोस प्रस्ताव तैयार करके शासन को भेजेगा। सभी संबंधित विभागों से बात करके शासन इस मुद्दे पर उचित निर्णय लेगा।

इस तरह होती है शुल्क भरपाई : प्रदेश में अनुसूचित जाति व जनजाति के छात्रों की पूरी फीस की भरपाई की जाती है, जबकि सामान्य और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए कोचिंग की व्यवस्था लागू है। इसके तहत समूह-1 के पाठ्यक्रमों में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों के लिए अधिकतम 50 हजार हजार, समूह-3 में 20 हजार रुपये की प्रतिपूर्ति की जाती है। इसी तरह समूह-2 के पाठ्यक्रमों में अधिकतम 30 और समूह-4 के पाठ्यक्रमों में अधिकतम 10 हजार रुपये की शुल्क प्रतिपूर्ति की जाती है।


प्रदेश में अब सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों के 60 फीसद नंबर होने पर ही उन्हें शुल्क प्रतिपूर्ति का लाभ मिल पाएगा। इससे कम अंकों पर वे आवेदन नहीं कर सकेंगे। 60 फीसद की न्यूनतम अर्हता के साथ मेरिट के आधार पर शुल्क प्रतिपूर्ति का भुगतान किया जाएगा। मेरिट बढ़ भी सकती है। समाज कल्याण विभाग ने यह बदलाव प्रतिपूर्ति के नियमों में किया है।


इंटर में 60, स्नातक में 55 फीसद अंक अनिवार्य : नई नियमावली के अनुसार स्नातक स्तर पर शुल्क प्रतिपूर्ति का आवेदन करने वालों के लिए 12वीं में न्यूनतम 60 फीसद अंक अनिवार्य हैं, स्नातकोत्तर कोर्स की शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए स्नातक में न्यूनतम 55 प्रतिशत अंक होने चाहिए।



कोरोना के चलते बजट घटा : कोरोना संक्रमण का असर सामान्य वर्ग की छात्रवृत्ति व प्रतिपूर्ति के बजट पर भी पड़ा है। सरकार ने वर्ष 2020-21 का बजट 325 करोड़ रुपये कम करके 500 करोड़ कर दिया है। ऐसे में न्यूनतम अर्हता बढ़ाकर आवेदनों की संख्या कम करने का प्रयास किया जा रहा है।

पिछड़े वर्ग के लिए 50 फीसद अंक अनिवार्य : पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग में पहले से ही 50 फीसद अंक की अनिवार्यता है। जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी एसपी सिंह ने बताया कि बजट के आधार पर मेरिट सूची बनती है। वर्ष 2019-20 में 67 फीसद तक अंक पाने वालों को ही लाभ मिल सका था।


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दूरदर्शन उत्तर प्रदेश (DD UP) चैनल पर यूपी बोर्ड की कक्षा- 10 व 12 हेतु शैक्षणिक प्रसारण के तृतीय चरण की समय सारिणी

Posted: 06 Sep 2020 05:47 PM PDT


दूरदर्शन उत्तर प्रदेश (DD UP) चैनल पर यूपी बोर्ड की कक्षा- 10 व 12 हेतु शैक्षणिक प्रसारण के तृतीय चरण की समय सारिणी


अनलॉक-4 : पूरे इंतजाम के साथ स्कूल खोलने की तैयारियां तेज

Posted: 06 Sep 2020 05:42 PM PDT

पूरे इंतजाम के साथ स्कूल खोलने की तैयारियां तेज

अनलॉक-4
अनलॉक 4 स्कूलों में छात्रों के आने को मंजूरी मिली है। कक्षा 9 से 12 के ऐसे छात्र जो अपने शिक्षकों से कुछ

एक क्लास में अधिकतम 15 से 20 बच्चे आएंगे

प्राइवेट छात्रों की मद्देनजर शुरू कर दिए हैं। सक्सेना इंटर कॉलेज के प्रबंधक पंकज सक्सेना ने बताया की बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए उन्होंने एक क्लास में अधिकतम 15 से 20 बच्चों को ही आने की अनुमति दी है। इसके अलावा स्कूल के सैनिटाइजेशन की व्यवस्था की गई है। छात्रों को भी घर से मास्क, ग्लब्स सैनिटाइजर लेने को कहा जाएगा। अभिभावकों की अनुमति के साथ स्कूल जा सकते हैं। 21 सितंबर से स्कूलों में 50% टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ बुलाने की भी अनुमति मिल गई है। इन सबके मद्देनजर शहर के स्कूलों में तैयारियां शुरू हो गई हैं। स्कूल प्रबंधन अपने अपने स्तर पर इंतजाम करने के दावे कर रहे हैं।

सुरक्षा के लिए तैयारियों पर विशेष

स्कूलों को दो शिफ्ट में चलाने का विचार

अनएडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन की ओर से उप मुख्यमंत्री चलाने का सुझाव

फर्रुखाबाद : सम्प्रेक्षण गृह से शिक्षक सम्बद्ध, बीईओ ने नहीं दिया कार्यमुक्ति प्रमाण पत्र

Posted: 06 Sep 2020 05:33 PM PDT

फर्रुखाबाद : रोक के बाद भी तीन शिक्षकों को बीएसए ने सम्प्रेक्षण गृह से किया सम्बद्ध, जिले में सम्बद्ध हैं 56 शिक्षक, बीईओ ने नहीं दिया कार्यमुक्ति प्रमाण पत्र

फर्रुखाबाद :  बीएसए ने दूरदराज के ब्लाकों में तैनात तीन शिक्षकों को राजकीय संप्रेक्षण गृह में संबद्ध किया है। उनको विद्यालय से कार्यमुक्त करने का आदेश खंड शिक्षा अधिकारियों को दिया है। ये स्थिति तब है जब शासन से शिक्षकों के संबद्धीकरण पर रोक है। जिले में 56 शिक्षक संबद्ध हैं, इनको रिलीव कर किसी भी शिक्षक के संबद्ध न होने का प्रमाण पत्र अभी तक बीईओ ने नहीं दिया। जिले में पहले से 56 शिक्षक मूल विद्यालय से दूसरे स्कूल या बीएसए कार्यालय से संबद्ध हैं।




इनका संबद्धीकरण समाप्त कर मूल विद्यालय में भेजने का आदेश स्कूल शिक्षा महानिदेशक विजय किरन आनंद ने दिया था। उन्होंने बीएसए से शिक्षकों को मूल विद्यालय के लिए रिलीव करने और किसी शिक्षक के संबद्ध न होने का प्रमाण पत्र मांगा था। संबद्ध शिक्षकों को मूल विद्यालय रिलीव नहीं किया गया है। बीएसए ने 14 अगस्त को प्राथमिक विद्यालय खजुरिया शमसाबाद के सहायक अध्यापक अभयकांत, प्राथमिक विद्यालय कायमगंज के अध्यापक अनुराग सोमवंशी व प्राथमिक विद्यालय धनी नासा के सहायक अध्यापक विजय प्रताप को राजकीय संप्रेक्षण गृह जखा फतेहगढ़ में संबद्ध कर दिया है। इनको किशोर अपचारियों को ऑनलाइन शिक्षा देने की जिम्मेदारी दी है।


 बीएसए लालजी यादव ने बताया कि किशोर अपचारियों को ऑनलाइन पढ़ाने के लिए राजकीय संप्रेक्षण गृह जखा के अधीक्षक ने पत्र भेजा था। उन्होंने चार शिक्षकों के नाम दिए थे, तीन शिक्षकों को ही संबद्ध किया गया है। अधीक्षक कमलेश कुमार ने बताया कि पिछले सत्र में यही शिक्षक तैनात थे, इस कारण इन्हीं को संबद्ध करने के लिए बीएसए को पत्र भेजा था।




पाठ्यक्रम को सफल-सुगम बनाएं शिक्षक : राज्यपाल

Posted: 06 Sep 2020 05:25 PM PDT

पाठ्यक्रम को सफल-सुगम बनाएं शिक्षक : राज्यपाल

लखनऊ विशेष संवाददाता

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा है कि शिक्षकों की मदद करने और ई लर्निंग को प्रोत्साहन देने के लिए शिक्षा की पहुंच और गुणवत्ता में सुधार लिये निरंतर कार्य करना होगा। कहा कि ई-पाठशाला विविधई-पुस्तक आदि ऐसी ही शिक्षण सामग्री की पहुंच दूरस्थ अंचलों के छात्रों तक बनानी होगी।

राज्यपाल ने यह बात रविवार को उद्भव सोशल वेलफेयर सोसाइटी, बरेली द्वारा आयोजित 'कोविड-19 महामारी एवं शिक्षक की भूमिका' विषयक वेबिनार में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कही राज्यपाल ने कहा कि आज के युग में शिक्षक की भूमिका

ई-कांफ्रेंस में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल।

अत्यन्त महत्वपूर्ण है। एक आदर्श शिक्षक के सभी व्यवहारों का असर उसके शिष्य पर पड़ता है।

इसलिए शिक्षक को चाहिए कि वह अपने विषय की पाठ्यवस्तु को इतना सहज, सरल, सुगम, सुरुचिपूर्ण एवं आनन्ददायक बनाकर पढ़ाए, ताकि बच्चों को यह पता भी न चले कि उसने अपना पाठ कब याद कर लिया।

ऑनलाइन शिक्षा : साधन विहीन बच्चों की पढ़ाई के लिए अपील

Posted: 06 Sep 2020 05:20 PM PDT

साधन विहीन बच्चों की पढ़ाई के लिए अपील

ऑनलाइन शिक्षा

कोरोना काल में अनिवार्य हुई ऑनलाइन पढ़ाई से वंचित बच्चों की मदद के लिए माध्यमिक शिक्षा विभाग गांव-गांव लोगों से अपील कर रहा है। जिले के 1057 माध्यमिक स्कूलों में कक्षा 9 से 12 तक के पंजीकृत 3,06,470 छात्र-छात्राओं में से 58,230 बच्चों के पास टीवी, स्मार्टफोन, लैपटॉप, टैबलेट एवं इंटरनेट सुविधा नहीं है। ऐसे बच्चों को पढ़ाई से जोड़े रखने के लिए जिला विद्यालय निरीक्षक आरएन विश्वकर्मा की अपील ग्राम पंचायत भवनों पर चस्पा की जा रही है जिसमें साधन संपन्न लोगों से अनुरोध किया है कि आस-पड़ोस के उन बच्चों को अपने घर में टीवी पर शैक्षणिक कार्यक्रमों के

प्रसारण देखने की अनुमति दें। प्रधानाचार्य अवकाश के दिनों में शिक्षकों की टोली बनाकर सहयोग के लिए गांव-गांव अपील करा रहे हैं। कक्षा 9 व 11 के बच्चों के स्वयं प्रभा चैनल-22 पर सुबह 11 से एक बजे तक शैक्षणिक कार्यक्रमों का प्रसारण हो रहा है जिसका रिपीट प्रसारण 4.30 से 6.30 बजे तक किया जा रहा है। इसी प्रकार कक्षा 10 व 12 के बच्चों के दूरदर्शन पर 1 से 2 बजे तक, 2.30 से 3, 3.30से 5 और 5.30 से 6.30 बजे तक प्रसारण हो रहा है।

संयुक्त शिक्षा निदेशक दिव्यकांत शुक्ल ने इस अभिनव प्रयोग की प्रस्तुति शासन में भी की है। यह प्रयोग सफल होने पर मंडल के अन्य जिलों में भी लागू किया जाएगा।

आज के युग में शिक्षक की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण : राज्यपाल

Posted: 06 Sep 2020 05:07 PM PDT

आज के युग में शिक्षक की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण : राज्यपाल


राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने कहा है कि  शिक्षकों की मदद करने और ई-लर्निंग को प्रोत्साहन देने के लिए शिक्षा की पहुंच और गुणवत्ता में सुधार के लिये निरंतर कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि ई-पाठशाला विविध ई-पुस्तक आदि ऐसी ही शिक्षण सामग्री की पहुंच दूरस्थ अंचलों के छात्रों तक बनानी होगी। राज्यपाल  ने यह बात रविवार को उद्भव सोशल वेलफेयर सोसाइटी, बरेली द्वारा आयोजित 'कोविड-19 महामारी एवं शिक्षक की भूमिका' विषयक वेबिनार में वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से कही।  उन्होंने कहा कि एक गुरू और शिक्षक अपने विद्यार्थियों को हर परिस्थिति और समस्याओं से निपटने की राह भी दिखाता है और आगे बढ़ने की प्रेरणा भी देता है।

राज्यपाल ने  कहा कि आज के युग में शिक्षक की भूमिका अत्यन्त महत्वपूर्ण है। एक आदर्श शिक्षक के सभी व्यवहारों का असर उसके शिष्य पर पड़ता है। इसलिए शिक्षक को चाहिए कि वह अपने विषय की पाठ्यवस्तु को इतना सहज, सरल, सुगम, सुरूचिपूर्ण एवं आनन्ददायक बनाकर पढ़ाए, ताकि बच्चों को यह पता भी न चले कि उसने अपना पाठ कब याद कर लिया। श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने कहा कि कोविड-19 के कारण शिक्षण की क्रमबद्धता बाधित होने से शिक्षकों सहित देश के भावी कर्णधारों के समक्ष भविष्य का प्रश्न अत्यंत स्वाभाविक है।

उन्होंने कहा कि इसीलिए शिक्षण प्रक्रिया में, ऑनलाइन शिक्षण व्यवस्था को लाया गया है। इसने शिक्षाशास्त्र के नए प्रारूपों को गति दी है। वास्तव में शिक्षक ही शिक्षा की वह धुरी है जो समस्त सुधारों और दूरगामी लक्ष्यों को जमीनी स्तर पर मूर्त रूप देता है। इस अवसर पर केन्द्रीय श्रम एवं रोजगार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  संतोष गंगवार, शिक्षा संस्कृति, उत्थान न्यास, नई दिल्ली के राष्ट्रीय सचिव  अतुल भाई कोठारी, राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद, नई दिल्ली के क्षेत्रीय निदेशक डॉ0 विजय कुमार  भी आनलाइन जुड़े हुए थे।

हरदोई : लापरवाह बीईओ से बीएसए ने किया जवाब-तलब

Posted: 06 Sep 2020 03:44 PM PDT

सुरसा ब्लॉक के लापरवाह बीईओ से जवाब-तलब

हरदोई  : बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में व्यवस्थाएं सुधारने के लिए तैनात किए गए खंड शिक्षा अधिकारी अपने दायित्वों का पालन करने में घोर लापरवाही बरत रहे हैं। इससे बेलगाम शिक्षक व कर्मचारी मनमानी करके अव्यवस्था फैलाए हैं। इसकी एक झलक शनिवार को स्कूलों के औचक निरीक्षण के दौरान बीएसए ने खुद देखी। नाराजगी जताई। बीईओ से स्पष्टीकरण मांगा। वहीं एक अनुचर का वेतन रोकने के निर्देश दिए।



शनिवार को सुबह 11 बजे बीएसए हेमन्तराव अचानक बीआरसी सुरसा में पहुंच गए। जमीनी हकीकत का निरीक्षण किया तो कमियां देखकर दंग रह गए। अनुचार कुसुमा देवी 21 अगस्त से बिना किसी सूचना के अनुपस्थित पाई गईं। बीआरसी परिसर में चौतरफा गंदगी फैली मिली। छानबीन करने पर पता चला कि प्राथमिक विद्यालय एवं उच्च प्राथकिम स्कूल तुर्तीपुर, उच्च प्राथमिक स्कूल फर्दापुर, प्राथमिक विद्यालय सुरसा, प्राइमरी स्कूल ओदरा में कार्यरत अध्यापकों ने बालक व बालिकाओ को दो-दो सेट मुफ्त ड्रेस वितरण के लिए कपड़ा के संबंध में निविदा में 9 अगस्त की तिथि प्रकाशित कराई। जबकि इस दिन रविवार था।

बीएसए का कहना है कि खंड शिक्षा अभिकारी भगवान राव को निर्देश दिए गए हैं कि वे उक्त कमियों के संबंध में अपना स्पष्टीकरण समुचित साक्ष्यों के साथ तीन दिन के अंदर बीएसए कार्यालय में दें। ऐसा प्रतीत होता है कि बीईओ की लापरवाहीपूर्ण पर्यवेक्षण के कारण उपरोक्त विज्ञप्ति निविदा खोलने का दिन गलत तरीके से रविवार अंकित किया गया। ऐसा करके टेंडर के नियमों का पालन नहीं किया गया। इस मामले में अभी तक बीईओ ने कोई उचित कार्रवाई नहीं की। न ही उन्हें मामले की जानकारी दी। जिलाधिकारी को भी निरीक्षण आख्या भेजी गई है।

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हरदोई : 15 सितम्बर तक ड्रेस वितरण का काम पूरा होने के नहीं आसार, स्वयं सहायता समूहों को चार लाख से ज्यादा सिलनी हैं ड्रेस पर सिलीं 50 हजार, तो क्या कमीशनखोरी के चक्कर में हो रहा विलंब?

Posted: 06 Sep 2020 03:38 PM PDT

हरदोई : 15 सितम्बर तक ड्रेस वितरण का काम पूरा होने के नहीं आसार, स्वयं सहायता समूहों को चार लाख से अधिक ड्रेस सिलकर करनी है तैयार।

हरदोई : जिले के बेसिक शिक्षा विभाग के करीब चार हजार स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र छात्राओं को मुफ्त ड्रेस वितरण में कोरोना, बजट आवंटन में देरी के बाद अब जिम्मेदारों की लापरवाही बाधक बन गई है। यही वजह है कि जिले में 15 सितंबर तक शत प्रतिशत बच्चों को ड्रेस मिल जाने का लक्ष्य पूरा होने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। अभिभावकों ने सांसदों, विधायकों से इस मामले में दखल देने की मांग की है ताकि गुणवत्तायुक्त ड्रेस समय से विद्यार्थियों तक पहुंच सके।

जिले में करीब पौने पांच लाख बच्चों को ड्रेस वितरित की जानी है। एक बच्चे को दो सेट ड्रेस मिलेगी, जिसकी कीमत शासन से 600 रुपये निर्धारित की गई है।




मांग के सापेक्ष 75 फीसदी बजट शासन ने जारी करदिया है। शेष धनराशि सत्यापन के बाद भेजी जाएगी। जो धनराशि आई है उसे पीएफएमएस के जरिए स्कूल प्रबंधन समिति के खातों में भेज दिया गया है।

जिन स्कूलों में 167 या इससे ज्यादा बच्चे अध्ययनरत हैं वहां पर टेंडर प्रक्रिया के जरिए ड्रेस बंटवाई जानी हैं। वहीं जिन स्कूलों में 166 या इससे कम बच्चे हैं वहां पर स्वयं सहायता समूहों से सिलवाकर ड्रेस बांटनी हैं। इसके लिए प्रबंध समिति कपड़ा खरीदकर समूहों को उपलब्ध कराएगी। विभागीय जानकारों के मुताबिक पहले 31 अगस्त तक की समयसीमा ड्रेस वितरण के लिए निर्धारित की गई थी।

शासन-प्रशासन ने दावा किया था कि समय से ड्रेस बंट जाएगी लेकिन ऐसा नहीं हो सका है। इसलिए 15 सितंबर तक की समय सीमा और बढ़ा दी गई है।

इसके बावजूद शत प्रतिशत बच्चों को ड्रेस वितरण मिलने की उम्मीदें टूटने लगी हैं क्योंकि ड्रेस वितरण की प्रगति बेहद धीमी है।

मानीटरिंग में भी केवल कागजी घोड़े दौड़ाए जा रहे हैं। अब तक कितनी ड्रेस बंट चुकी हैं इसकी जानकारी तक जिम्मेदार नहीं दे पा रहे हैं।

चार से ज्यादा ड्रेस सिलनी हैं पर सिलीं 50 हजार : स्वयं सहायता समूहों को 4 लाख से ज्यादा ड्रेस सिलकर तैयार करनी हैं, लेकिन अब तक 70 हजार ड्रेस तैयार करने का ही आर्डर मिला है। वहीं 50 हजार ड्रेस ही अब तक सिल सकी हैं। इसका भुगतान अभी शून्य है। समितियों को ड्रेस सिलने की जिम्मेदारी मिले दो महीने से भी ज्यादा समय बीत चुका है। अब शेष एक सप्ताह में साढ़े तीन लाख से ज्यादा ड्रेस तैयार कराने की राह भी काफी मुश्किल है।

तो क्या कमीशनखोरी के चक्कर में हो रहा विलंब :  ड्रेस वितरण में राजनीतिक दलों के नेताओं से जुड़े ठेकेदार भी सक्रिय हो गए हैं। चर्चा है कि सियासी पहुंच के कारण वे मनमानी पर उतारू हैं। वहीं ब्लाकों के अधिकारी भी खुश हुए बगैर उन्हें हरी झंडी देने में आनाकानी कर रहे हैं। कमीशनखोरी के इस खेल में सेटिंग के चक्कर में भी विलंब होने की बातें जानकार बता रहे हैं। बीते दिनों बीएसए को भी निरीक्षण के दौरान स्कूल में कपड़ा विभागीय नियमानुसार नहीं मिला था।

95 फीसदी से ज्यादा स्कूल प्रबंधन समितियों के खाते में बजट भेज दिया गया है। कुछ जगहों पर तकनीकी फाल्ट सामने आई है। इसे भी जल्द दूर कर खाते में धनराशि पहुंचा दी जाएगी। हेडटीचरों को निर्देश दिए गए हैं कि वे जल्द से जल्द धनराशि का आहरण कर बच्चों को ड्रेस वितरित करा दें।
-अमित वर्मा, जिला समन्वयक

कपड़ा खोलने में कोई दिक्कत नहीं है। तेजी से ड्रेस सिलने में समूह की महिलाएं जुटी हुई हैं। ड्रेस सिलाई का रेट भी निर्धारित हो गया है। 140 रुपये एक पैंट-शर्ट सिलने पर मिलेंगे। आपूर्ति होने के बाद भुगतान कराया मिलेगा। समय से समस्त ड्रेस सिलकर तैयार हो जाएंगी। किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं हैं। कोरोना के चक्कर में थोड़ा विलम्ब जरुर हुआ लेकिन अब कोई समस्या नहीं है। समय के साथ ड्रेस तैयार है।
-विपिन चौधरी, डीसी एनआरएलएम


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फर्रुखाबाद : शिक्षकों के गले की फांस बना ऑनलाइन प्रशिक्षण

Posted: 06 Sep 2020 03:13 PM PDT

फर्रुखाबाद : शिक्षकों के गले की फांस बना ऑनलाइन प्रशिक्षण।

फर्रुखाबाद : परिषदीय स्कूलों में ऑनलाइन प्रशिक्षण के लिए दीक्षा एप और मानव सम्पदा पोर्टल का लिंक करने के निर्देश दिए है। कुछ शिक्षक-शिक्षिकाएं ऐसे हैं जो एंड्रइड मोबाइल चलाने में सक्षम नही हैं। उन्हें प्रशिक्षण लेने में दिक्कत आ रही है।






परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों को आनलाइन प्रशिक्षित करने का शासन का फरमान उनके गले की फांस बन गया है। पहले तो चुनिंदा शिक्षकों को शासन के बताए एप डाउन लोड कराने के निर्देश थे। जैसे तैसे उनको डाउनलोड करही पाए थे कि शासन ने दीक्षा एप और मानव सम्पदा को लिंक करने के निर्देश जारी हो गए। लिंक करने के आदेश आते ही मोबाइल चलाने में अक्षम शिक्षक शिक्षकों का सिर दर्द बढ़ गया है। कोरोना के चलते एक जगह पर भीड़ इकट्ठा करने परमनाही है। इसके चलते आनलाइन प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जनपद में लगभग 25 से 30 फीसद शिक्षकों की उम्र पचास से पचपन वर्ष के आसपास है। यह शिक्षक न तो तकनीकी रूप से दक्ष है और न ही मोबाइल पर प्रशिक्षण में सक्षम हैं। खासकर अधिकतर महिला शिक्षक ऐसी हैं जिनके लिए प्रशिक्षण में शामिल होना चुनौती है। कुछ दिनों पहले ही शासन ने शिक्षकों को ऑनलाइन प्रशिक्षित करने के लिए दीक्षा एप को मानव संपदा पोर्टल से लिंक का आदेश जारी कर दिया है।

अनलाइन प्रशिक्षण के लिए  शिक्षकों को दीक्षा एप से मानव संपदा से लिक करना अनिवार्य। इसके लिए एआरपी एकेडमिक रिसोर्स पर्सन) विद्यालयों में जाकर शिक्षकों को बता रहे हैं। यदि किसी को समस्या आ रही है तो उसका निदान किया जा रहा है। - लालजी यादव, बीएसए

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तदर्थ शिक्षकों के भर्ती मामले में सुप्रीमकोर्ट के आदेश पर माध्यमिक शिक्षा विभाग ने शासन से मांगा मार्गदर्शन

Posted: 06 Sep 2020 02:51 PM PDT

तदर्थ शिक्षकों की भर्ती मामले में शासन से मांगा मार्गदर्शन।

प्रदेश के सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत तदर्थ शिक्षकों की नियुक्ति के मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर माध्यमिक शिक्षा विभाग ने शासन से मार्गदर्शन मांगा है। अपर निदेशक माध्यमिक डॉ. महेन्द्र देव ने संयुक्त सचिव शिक्षा अनुभाग 5 को 4 सितंबर को पत्र लिखकर फैसले की जानकरी देते हुए आगे की कार्रवाई के लिए आदेश देने का अनुरोध किया है। सर्वोच्च न्यायालय ने जुलाई 2021 से पहले चयन एवं पदस्थापन की कार्रवाई पूरी करने के आदेश दिए हैं।



नई भर्ती में तदर्थ शिक्षक आवेदन कर सकेंगे और उन्हें उनकी सेवा के आधार पर भारांक मिलेगा। इस संबंध में यदि कोई वाद न्यायालय के समक्ष आएगा तो वह मान्य नहीं होगा। तदर्थ शिक्षकों को भारांक प्राप्त करने के लिए अपनी पूर्व की सेवाओं की प्रामाणिकता संबंधित आवश्यक अभिलेख चयन बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत करना होगा। भारांक के अतिरिक्त तदर्थ रूप से की गई प्रामाणिक सेवाओं की गणना शिक्षकों के सेवानिवृत्तिक लाभ के लिए की जाएगी। शासन व चयन बोर्ड को निर्देशित किया गया है कि शिक्षकों के चयन के लिए नियमित परीक्षाएं कराई जाएं। ताकि भविष्य में इस तरह की परिस्थिति का सामना न करना पड़े और विद्यालयों में पठन-पाठन कार्य सुचारु रूप से हो सके।


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फतेहपुर : कस्तूरबा विद्यालय के एक चौथाई बालिकाएं ही कर पा रहीं पढ़ाई

Posted: 06 Sep 2020 02:32 PM PDT

फतेहपुर : कस्तूरबा विद्यालय के एक चौथाई बालिकाएं ही कर पा रहीं पढ़ाई।

कस्तूरबा विद्यालय के एक चौथाई बालिकाएं ही कर पा रहीं पढ़ाई।

फतेहपुर : कोरोना संक्रमण काल में बच्चों की शिक्षा अनवरत जारी रखने के लिए तमाम तरह की कवायदे तो की जा रही हैं लेकिन इनकी जमीनी हकीकत कुछ और बयां कर रही है। खासकर बेसिक विभाग द्वारा संचालित कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालयों की छात्राओं से आनलाइन पढ़ाई पहुंच से दूर दिख रही है। इसका कारण है कि गरीब छात्राओं के अभिभावकों के पास न ही स्मार्ट मोबाइल हैं और न ही उन्हें रीचार्ज कराने की व्यवस्था। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि बीते मार्च माह से पढ़ाई पूरी तरह से बाधित है।




कोरोना काल में स्कूलों की बंदी के बाद सरकार की ओर से ऑनलाइन क्लॉसेज को बढ़ावा देने की मुहिम में कस्तूरबा विद्यालय की छात्राएं पिछड़ गईं हैं। सरकार करोड़ों रुपए खर्च कर कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय खोलकर गांवों की गरीब बच्चियों को शिक्षित कर रही है। लेकिन बीते मार्च से कोरोना संक्रमण शुरू हो जाने के बाद से इन विद्यालयों के बच्चे घर भेज दिए गए। अब इन विद्यालयों पर स्टाफ तो है, बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई कराई जा रही है। लेकिन आनलाइन कक्षाएं छात्राओं तक बिना संसाधन के नहीं पहुंच पा रही हैं। कहने को तो स्टाफ इन बच्चियों को भी शिक्षित करने की सरकारी मुहिम में जुटा हुआ है। लेकिन अभिभावकों के पास एंड्रायड मोबाइल न होने से करीब एक चौथाई छात्राएं पढ़ाई से दूर हैं। डीसी विवेक कुमार बताते हैं कि जिले के सभी 10 बॉ विद्यालयों में छात्राओं के पढ़ाई के लिए आनलाइन व्यवस्था की गई है। इसके लिए स्टाफ विद्यालय पहुंच कर स्टडी मैटेरियल उपलब्ध करा रहे हैं।

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