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Thursday, August 12, 2021

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मुख्यमंत्री ने सड़क मार्ग से पटना के आसपास के गंगा नदी के कई इलाकों तथा विभिन्न घाटों का लिया जायजा, अधिकारियों को दिये आवश्यक दिशा-निर्देश

Posted: 11 Aug 2021 09:25 AM PDT

मुख्यमंत्री ने सड़क मार्ग से पटना के आसपास के गंगा नदी के कई इलाकों तथा विभिन्न घाटों का लिया जायजा, अधिकारियों को दिये आवश्यक दिशा-निर्देश

मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने आज सड़क मार्ग से पटना के आसपास के गंगा नदी के कई इलाकों तथा विभिन्न घाटों का जायजा लिया। उन्होंने पटना मुख्य नहर के दीघा लॉक तथा एल0सी0टी0 घाट पर सुरक्षा दीवार का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान दीघा घाट, भद्रघाट, कंगन घाट एवं गांधी घाट पहुंचकर गंगा के बढ़े हुए जलस्तर का भी मुआयना किया। जे0पी0 सेतु पर रुककर गंगा की धारा का अवलोकन करने के पष्चात् मुख्यमंत्री ने जे0पी0 सेतु होते हुए सोनपुर एवं हाजीपुर के क्षेत्रों का भी जायजा लिया। उन्होंने महात्मा गांधी सेतु पर रुककर गंगा नदी की धारा एवं जलस्तर का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गंगा किनारे जहां भी घनी आबादी है और वहां पानी का रिसाव हो रहा है तो उसे बंद करने का उपाय करायें। गंगा नदी के जिन घाटों पर ज्यादा पानी आ गया है, वहां पर बैरिकेडिंग करायें।
निरीक्षण के दौरान जल संसाधन मंत्री श्री संजय कुमार झा, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री दीपक कुमार, आपदा प्रबंधन विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री प्रत्यय अमृत, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री चंचल कुमार, जल संसाधन विभाग के सचिव श्री संजीव हंस, पटना प्रमंडल के आयुक्त श्री संजय कुमार अग्रवाल, मुख्यमंत्री के सचिव श्री अनुपम कुमार, पटना के जिलाधिकारी श्री चंद्रशेखर सिंह, वरीय पुलिस अधीक्षक श्री उपेन्द्र शर्मा सहित अन्य वरीय अधिकारी उपस्थित थे।

निरीक्षण के उपरांत गांधी घाट पर पत्रकारों से बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि गंगा नदी के जलस्तर में वृद्धि हो रही है तथा इसके जलस्तर में और वृद्धि होने की संभावना व्यक्त की गई है। कल गंगा नदी में बढ़ रहे जलस्तर को लेकर हमने बैठक की थी। उस बैठक में जलस्तर को लेकर पूरी जानकारी दी गई। आज हमने गंगा नदी के आसपास के कई इलाकों का दौरा कर अधिकारियों के साथ पूरी स्थिति को देखा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 में जब गंगा नदी के जलस्तर में वृद्धि हुई थी, उस दौरान गंगा नदी के किनारे वाले 12 जिलों में बाढ़ से बचाव को लेकर पूरी तैयारी की गई थी। हमने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वर्ष 2016 में गंगा नदी के किनारे वाले जिलों में बाढ़ के पानी से जो असर हुआ था, उसे ध्यान में रखते हुए इस बार भी पूरी तैयारी रखें।
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आज 12 अगस्त 2021, गुरूवार का दैनिक पंचांग एवं राशिफल - सभी १२ राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन ? क्या है आप की राशी में विशेष ? जाने प्रशिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. प्रेम सागर पाण्डेय से |

Posted: 11 Aug 2021 09:11 AM PDT

आज 12 अगस्त 2021, गुरूवार का दैनिक पंचांग एवं राशिफल - सभी १२ राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन ? क्या है आप की राशी में विशेष ? जाने प्रशिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. प्रेम सागर पाण्डेय से |

श्री गणेशाय नम: !!

दैनिक पंचांग

12 अगस्त 2021, गुरूवार

पंचांग   

🔅 तिथि  चतुर्थी  दिन  03:33:06

🔅 नक्षत्र  उत्तरा फाल्गुनी  दिन  10:04:25

🔅 करण :

           विष्टि  15:27:01

           बव  26:37:23

🔅 पक्ष  शुक्ल 

🔅 योग  सिद्ध  16:11:16

🔅 वार  गुरूवार 

सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ

🔅 सूर्योदय  05:30:08

🔅 चन्द्रोदय  09:16:00 

🔅 चन्द्र राशि  कन्या 

🔅 सूर्यास्त  18:30:03

🔅 चन्द्रास्त  21:42:59 

🔅 ऋतु  वर्षा 

हिन्दू मास एवं वर्ष

🔅 शक सम्वत  1943  प्लव

🔅 कलि सम्वत  5123 

🔅 दिन काल  13:15:26 

🔅 विक्रम सम्वत  2078 

🔅 मास अमांत  श्रावण 

🔅 मास पूर्णिमांत  श्रावण 

शुभ और अशुभ समय

शुभ समय   

🔅 अभिजित  11:59:28 - 12:52:29

अशुभ समय   

🔅 दुष्टमुहूर्त :

                    10:13:24 - 11:06:26

                    15:31:35 - 16:24:36

🔅 कंटक  15:31:35 - 16:24:36

🔅 यमघण्ट  06:41:17 - 07:34:19

🔅 राहु काल  14:05:24 - 15:44:50

🔅 कुलिक  10:13:24 - 11:06:26

🔅 कालवेला या अर्द्धयाम  17:17:38 - 18:10:40

🔅 यमगण्ड  05:48:15 - 07:27:41

🔅 गुलिक काल  09:07:07 - 10:46:33

दिशा शूल   

🔅 दिशा शूल  दक्षिण 

चन्द्रबल और ताराबल

ताराबल 

🔅 भरणी, कृत्तिका, रोहिणी, मृगशिरा, पुनर्वसु, आश्लेषा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, विशाखा, ज्येष्ठा, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, पूर्वाभाद्रपद, रेवती 

चन्द्रबल 

🔅 मेष, कर्क, कन्या, वृश्चिक, धनु, मीन 

🌹विशेष वैनायिकी श्रीगणेश चतुर्थी व्रतदुर्वा गणपति। 🌹

पं.प्रेम सागर पाण्डेय्

राशिफल 12 अगस्त 2021, गुरूवार

मेष (Aries): निजी प्रयासों में बेहतर बने रहेंगे। प्रेम में सफलता मिलेगी। प्रियजन से भेंट संभव है। प्रतियोगी अच्छा करेंगे। आर्थिक पक्ष हितकर रहेगा। दिन शुभ।

शुभ रंग  =  पीला

शुभ अंक  :  9

वृषभ (Tauras): कम बोलें ज्यादा करें की नीति अपनाएं। बड़ों के प्रति विनम्र और कृतज्ञ रहें। घरेलु मामलों में स्मार्ट डिले की पॉलिसी रखें। दिन सामान्य से शुभकारक।

शुभ रंग  =  उजला

शुभ अंक  :  4

मिथुन (Gemini): सूचना और जनसंपर्क बेहतर बने रहेंगे। आवश्यक कार्याें को आज ही पूरा कर लेने की सोच रखें। रक्त संबंध मजबूत होंगे। दिन श्रेष्ठ फलकारक।

शुभ रंग  =  पींक

शुभ अंक  :  8

कर्क (Cancer): मूल्यवान भेंट की प्राप्ति संभव है। उल्लेखीय कार्याें को आगे बढ़ाने का समय है। अपनों का साथ मिलेगा। काम को बोझ न समझें। सहजता से आगे बढ़े।

शुभ रंग  =  उजला

शुभ अंक  :  4

सिंह (Leo): अनोखी कोशिशों को समर्थन और सहयोग मिलेगा। जो सही लगे उसे निसंकोच आगे बढ़ाते रहें। प्रभावशीलता बनी रहेगी। दिन हितकारक।

शुभ रंग  =  लाल

शुभ अंक  :  5

कन्या (Virgo): कार्याें को निस्वार्थ कर्मयोगी की भांति करें। सफलता मिलेगी लेकिन तुरंत इसकी अपेक्षा न रखें। खर्च बढ़ा हुआ रहेगा। चापलूसों से सतर्क रहें।

शुभ रंग  =  पींक

शुभ अंक  :  8

तुला (Libra): करियर कारोबार बेहतर बने रहेंगे। आर्थिक उन्नति का समय है। लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए यथासंभव प्रयास करें। दिन श्रेष्ठ फलकारक। तेजी दिखाएं।

शुभ रंग  =  केशरी

शुभ अंक  :  1

वृश्चिक (Scorpio): प्रभावशीलता बढ़त पर रहेगी। सभी वर्गाें का सहयोग जुटाने में सफल रहेंगे। घर परिवार में सुख सौख्य बना रहेगा। दिन जिम्मेदारी बढ़ाने वाला।

शुभ रंग  =  लाल

शुभ अंक  :  8

धनु (Sagittarius): आस्था और आत्मविश्वास से असंभव को संभव कर दिखाएंगे। भ्रमण मनोरंजन में रुचि रहेगी। शुभ सूचना मिल सकती है। दिन भाग्यवर्धक।

शुभ रंग  =  पीला

शुभ अंक  :  9

मकर (Capricorn): बड़ी योजनाएं छोटी अनदेखियों से अधिक प्रभावित होती हैं। जो भी करें उसे पुख्ता करने का प्रयास करें। व्यक्तिगत मामलों में सतर्क रहें। दिन सामान्य।

शुभ रंग  =  उजला

शुभ अंक  :  4

कुंभ (Aquarius): महत्वपूर्ण प्रयासों में तेजी आएगी। स्थायित्व बढ़ेगा। दाम्पत्य में विश्वास और निजता को बल मिलेगा। भूमि भवन के मामले पक्ष में रह सकते हैं। दिन हितकर।

शुभ रंग  =  पीला

शुभ अंक  :  9

मीन (Pisces): आवश्यक कार्याें के पूरा होने तक विश्राम से बचें। लापरवाही से काम प्रभावित होने की आशंका है। लेन देन में सतर्क रहें। खर्च पर अंकुश रखें। दिन सामान्य।

शुभ रंग  =  पीला

शुभ अंक  :  9

 प्रेम सागर पाण्डेय् ,नक्षत्र ज्योतिष वास्तु अनुसंधान केन्द्र ,नि:शुल्क परामर्श -  रविवार , दूरभाष  9122608219  /  9835654844
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मुख्यमंत्री ने शहीद दिवस पर अमर स्वतंत्रता सेनानियों को याद कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की

Posted: 11 Aug 2021 06:52 AM PDT

मुख्यमंत्री ने शहीद दिवस पर अमर स्वतंत्रता सेनानियों को याद कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की

पटना 11 अगस्त 2021:- मुख्यमंत्री श्री नीतीष कुमार ने आज शहीद दिवस के अवसर पर 01 अणे मार्ग स्थित 'लोक संवाद' में 11 अगस्त 1942 को देष की आजादी के लिये शहीद हुये सात अमर शहीदों- उमाकांत प्रसाद सिंह, रामानन्द सिंह, सतीश प्रसाद झा, जगतपति कुमार, देवी प्रसाद चैधरी, राजेन्द्र सिंह एवं राम गोविन्द सिंह के कुर्बानियों को याद करते हुयेे उनके तैलचित्र पर पुष्प अर्पित कर अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

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आत्म-निर्भर खनन: नए अवसरों की तलाश

Posted: 11 Aug 2021 06:48 AM PDT

आत्म-निर्भर खनन: नए अवसरों की तलाश

 जब भारत ने 1991 में नई औद्योगिक नीति को अपनाया, तो हम उदार, वैश्विक और बाजार संचालित आर्थिक विश्व व्यवस्था का हिस्सा बन गए और हमारे लगभग सभी व्यापार क्षेत्र स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, नयी कंपनियों और नए निवेश के लिए खुल गए। हालाँकि, भारत का खनन क्षेत्र, नई औद्योगिक नीति से अलग और अप्रभावित रहा। बाद में, नई औद्योगिक नीति में सार्वजनिक क्षेत्र के लिए आरक्षित उद्योगों की संख्या, केवल दो (परमाणु ऊर्जा और रेलवे) तक सीमित कर दी गयी थी। नई औद्योगिक नीति में की गयी कल्पना के अनुरूप, खनन क्षेत्र में न तो कोई घरेलू या विदेशी निवेश आया और न ही वाणिज्यिक खनन के लिए कंपनियों की महत्वपूर्ण भागीदारी सामने आयी। खान एवं खनिज विकास और विनियमन अधिनियम (एमएमडीआर अधिनियम) 1957, द्वारा खानों और सभी खनिजों के विकास और विनियमन के लिए कानूनी ढांचा निर्धारित किया गया था। अधिनियम में प्रतिबंध संबंधी कई प्रावधान थे। भारत के खनन क्षेत्र का भाग्य अपरिवर्तित रहा, क्योंकि यह दशकों तक प्रतिबंधित (कैप्टिव) खनन और अंतिम उपयोग प्रतिबंध की बाधाओं के अधीन रहा, जिसमें कोयला ब्लॉक पहले-आओ; पहले-पाओ के आधार पर आवंटित किए जाते थे। परिणामस्वरूप, कोयले के लिए दुनिया का चौथा सबसे बड़ा भंडार, अबरख और बॉक्साइट के लिए 5वां सबसे बड़ा तथा लौह अयस्क और मैंगनीज के लिए 7वां सबसे बड़ा भंडार होने के बावजूद, अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए हम मुख्य रूप से आयात पर निर्भर हैं। दशकों से आयात और निम्न-स्तर के उत्पादन पर हमारी निर्भरता, सत्ता में बैठे लोगों की नीति और नियामक विफलता को दर्शाती है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में हमारी सरकार ने 2015 में एमएमडीआर अधिनियम में संशोधन पेश किया और खनन उद्योग को पारदर्शी नीलामी व्यवस्था के तहत लाया गया। 2015 के संशोधन का एक अन्य महत्वपूर्ण सुधार था - खनन पट्टाधारकों के योगदान से खनन प्रभावित क्षेत्रों के कल्याण के लिए जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ) की स्थापना करना। इन सुधारों के जरिये खनिज ब्लॉकों को मनमाने ढंग से आवंटित करने की प्रथा समाप्त कर दी गयी और एक नई खनन व्यवस्था की शुरुआत हुई, जो सामाजिक रूप से जिम्मेदार और दीर्घकालिक थी। इस प्रकार भारत के खनन क्षेत्र में महत्वपूर्ण परिवर्तनों की श्रृंखला की शुरूआत  हुई। सुधार एक सतत प्रक्रिया है और भारत के खनन क्षेत्र जैसे विशाल क्षेत्र के लिए, कोई भी सुधार लाना एक प्रक्रिया के तहत ही हो सकता है, जिसमें कई चरण, परामर्श और विचार शामिल हों। पिछले दो वर्षों में समय-समय पर किये गए सुधार; आर्थिक विकास और रोजगार सृजन में तेजी लाने तथा कोविड -19 महामारी के प्रतिकूल प्रभाव का मुकाबला करने के उद्देश्य से किये गए हैं।

पिछले 5 वर्षों में हमारे अनुभव और कई हितधारकों के साथ परामर्श व उनके सुझावों के आधार पर, हमारी सरकार द्वारा खनन क्षेत्र में कुछ बहुत महत्वपूर्ण संरचनात्मक सुधार किये गए। अधिनियम और संबंधित नियमों में संशोधन के जरिये खनन क्षेत्र में 'कारोबार में आसानी' को ध्यान में रखते हुए अधिकांश परिवर्तन किये गए हैं। प्रतिबंधित (कैप्टिव) और गैर- प्रतिबंधित (नॉन-कैप्टिव) खानों के बीच अंतर के परिणामस्वरूप खनन क्षेत्र में वांछित खनन कार्य नहीं हो पाया और इससे पर्यावरण के लिए खतरा भी पैदा हुआ। हाल के खनिज सुधारों द्वारा इस अंतर को समाप्त करने के लिए एमएमडीआर अधिनियम के प्रावधानों में संशोधन किया गया है। पट्टेदार को खुले बाजार में खनिजों की बिक्री की अनुमति देने से खनन उद्योग में उत्पादन और दक्षता बढ़ाने में मदद मिलेगी। दूसरे, इन सुधारों के माध्यम से, हमारा लक्ष्य उन सरकारी कंपनियों के खनिज ब्लॉकों को मुक्त करना है, जिन्हें अभी तक विकसित नहीं किया गया है। इस संशोधन के बाद, राज्य सरकारों द्वारा कई खनिज ब्लॉकों को आरक्षित की श्रेणी से हटाया जायेगा और उन्हें नीलाम किया जाएगा। 2021 के संशोधन के माध्यम से किया गया एक अन्य महत्वपूर्ण सुधार है - एमएमडीआर अधिनियम की धारा 10 (ए) (2) (बी) के तहत विरासत के मुद्दों को समाप्त करना। इस सुधार से लगभग 500 ब्लॉक नीलामी व्यवस्था के तहत आ जायेंगे, जो अब तक लंबित मामलों के कारण बंद पड़े थे। खनन में आत्म-निर्भर बनने के लिए, हमें अपनी खनन प्रथाओं और अन्वेषण गतिविधियों में पर्याप्त सुधार लाकर अपना आयात कम करना होगा और घरेलू उत्पादन बढ़ाना होगा।   

हमारी सरकार ने बार-बार इस बात पर बल दिया है कि हमारी समृद्ध खनिज सम्पदा हमारे औद्योगिक, आर्थिक एवं वाणिज्यिक विकास का केंद्र बिंदु हैI पिछले कुछ दशकों से खनिजों की वैश्विक मांग में लगातार वृद्धि हुई है और नवीनतम प्रौद्योगिकियों की भारी मांग के चलते इसमें और बढ़ोतरी होने की सम्भावना हैअन्य क्षेत्रों के साथ-साथ उपभोक्ता उत्पादों, लोक अभियांत्रिकी (सिविल इंजीनियरिंग), रक्षा क्षेत्र, परिवहन और ऊर्जा (बिजली) उत्पादन के बुनियादी ढाँचे की जरूरतों को पूरा करने के लिए खनिजों की आपूर्ति को निरंतर बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गयी हैI  खनिजों की बढती मांग को देखते हुए अब बहुत आवश्यक हो गया है कि देश में खनिजों के उत्पादन को बढ़ाया जाए और इसके लिए वर्तमान में जारी अथवा अर्ध-विकसित क्षेत्रों में उत्खनन किए जाएंI  खनन को बढ़ाने के लिए हमारी सरकार ने 2015 में राष्ट्रीय खनन अन्वेषण न्यास (एनएमईटी) की स्थापना की थी और इस पहल को आगे बढ़ाते हुए हमने एनएमईटी को अब एक स्वायत्त शासी निकाय बना दिया हैI मान्यताप्राप्त निजी एजेंसियों को अनुमति दे दी है कि वे इस वर्ष किए गए खनन सुधारों के अनुरूप खनन कार्य शुरू करें I एनएमईटी के एक स्वायत्त शासी निकाय बनने के बाद भारत में खनन कार्यों में बहुत वृद्धि होगी और इसकी कार्य-प्रणाली में तेजी आएगी I इससे हमें अपनी भूगर्भीय-क्षमता को हासिल करने और खनन के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप काम करने में सहायता मिलेगी I 2021 के खनन सुधारों के तहत एक और बहुत महत्वपूर्ण संशोधन खनिजों के एक नए समूह का गठन है, जिसे भूस्तरीय (सतही) खनिज कहा जाता है- जिसमें चूना पत्थर, लौह अयस्क, बॉक्साइट और कोयला एवं लिग्नाइट शामिल हैं। खनिजों के इस वर्ग के लिए, खनन पट्टे के सन्दर्भ में अन्वेषण मानकों की आवश्यकताओं को युक्तिसंगत बनाते हुए इसे जी3 स्तर तक और समग्र पट्टे के लिए जी4 स्तर तक कम किया गया है तथा नीलामी व्यवस्था को आसान बनाकर; नीलामी में अधिक ब्लॉकों की शामिल करने की सुविधा प्रदान की गई है ।

जिन सुधारों का उल्लेख किया गया है, वे एमएमडीआर (संशोधन) अधिनियम, 2021 द्वारा लाए गए क्रांतिकारी परिवर्तनों की झलक भर हैं और हम भारत के खनन उद्योग और सभी खनिज समृद्ध राज्यों में पहले से हो रहे सकारात्मक विकास को देख रहे हैं। जिन खदानों में काम नहीं हो रहा है, उनके लिए  सम्बन्धित राज्य पुन: आवंटन की प्रक्रिया प्रारम्भ कर कर रहे हैं, और सार्वजनिक उपक्रमों की उन खदानों, जिनमें अभी तक उत्पादन शुरू नहीं किया गया है, की भी राज्य सरकारों द्वारा नीलामी की जा रही है। इन कानूनी संशोधनों के बाद बड़ी संख्या में ब्लॉकों को नीलामी प्रक्रिया में शामिल करने में मदद मिली है और हमने चालू वर्ष में खनन क्षेत्र का बेहतरीन प्रदर्शन देखा है। केंद्र सरकार के निरंतर प्रयासों और राज्य सरकारों के सहयोग के कारण, यह गर्व की बात है कि 17 ब्लॉकों की नीलामी की गई है, 27 नए एनआईटी जारी किए गए हैं और आने वाले महीनों के लिए 103 एनआईटी हेतु प्रक्रिया चालू कर दी गई है।

प्रधानमंत्री श्री मोदी के सक्रिय नेतृत्व में सरकार बनने के बाद से हमने हमेशा ही सहकारी संघवाद और सबका-साथ, सबका-विकास के आदर्श वाक्य का पालन किया है। ये सुधार, केंद्र और खनिज-संपन्न राज्यों के बीच मजबूत सहकारी संघवाद के प्रतीक हैं और राज्यों ने गर्मजोशी से इन खनन सुधारों का स्वागत किया है। ऊर्जा क्षेत्र की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने और भविष्य में खनिजों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए, भारत को स्थायी और सामाजिक रूप से उत्तरदायित्व को ध्यान में रखते हुए अन्वेषण और उत्पादन दोनों को बढ़ाने की जरूरत है। एमएमडीआर अधिनियम, 1957, एमईएमसी नियम और खनिज (नीलामी) नियम में संशोधन के जरिये हमारी सरकार द्वारा खनन क्षेत्र में सुधार किये गए हैं। पिछले कुछ महीनों में नीलामी प्रक्रिया का सफल कार्यान्वयन हुआ है और इसके सकारात्मक परिणाम सामने आये हैं। यह उस यात्रा की शुरुआत है, जिसे भारत इन सुधारों के साथ प्रधानमंत्री मोदी के आत्म-निर्भर खनन क्षेत्र और आत्म-निर्भर भारत की दिशा में शुरू कर रहा है।

(केंद्रीय कोयला, खान और संसदीय कार्य मंत्री श्री प्रहलाद जोशी)
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स्वतंत्र्यता दिवस के निमित्त राष्ट्रध्वज का मास्क बेचनेवाले ई-कॉमर्सजालस्थल तथा दुकानो पर कानूनी कार्रवाई की जाए ! - सुराज्य अभियान

Posted: 11 Aug 2021 06:43 AM PDT

स्वतंत्र्यता दिवस के निमित्त राष्ट्रध्वज का मास्क बेचनेवाले ई-कॉमर्स
जालस्थल तथा दुकानो पर कानूनी कार्रवाई की जाए ! - सुराज्य अभियान

       भारतीय राष्ट्रध्वज करोडों भारतीयों के लिए राष्ट्राभिमान का विषय हैकुछ अपवाद छोडकर उसका अन्य किसी भी बात के लिए उपयोग करना कानूनन संज्ञेय एवं अप्रतिभू (गैरजमानतीअपराध है । ऐसा होते हुए भी इस संवेदनशील विषय को गंभीरता से न लेते हुए 'रेड-बबल' जैसे इ-कॉमर्स जालस्थलों तथा दुकानसडक पर 15 अगस्ट के निमित्त से भारतीय राष्ट्रध्वज के रंगवाला मास्क बनाकर उनकी बडी मात्रा में बिक्री जारी है । उनपर राष्ट्रध्वज का अनादर करने के प्रकरण में अपराध प्रविष्ट कर कानूनी कार्रवाई की जाएतथा ऐसे मास्क की बिक्रीउत्पादन एवं वितरण न होइस दृष्टि से शासन तत्काल उचित कार्यवाही करेऐसी मांग हिन्दू जनजागृति समिति के सुराज्य अभियान के माध्यम से केंद्रीय गृहमंत्री श्रीअमित शाह से की गई ।

        राष्ट्रध्वज कोई सजावट करने का माध्यम नहीं है । इस प्रकार के मास्क का उपयोग करने पर छींकनाउसे थूक लगनावह अस्वच्छ होनातथा अंत में उपयोग के उपरांत कचरे में डालना आदि के कारण राष्ट्रध्वज का अनादर होगा । ऐसा करना 'राष्ट्रीय मानचिन्हों का गलत प्रयोग रोकना कानून 1950', धारा व के अनुसारतथा 'राष्ट्र गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971' की धारा के अनुसार व 'राज्य प्रतीक और नाम (अनुचित उपयोग की रोकथामअधिनियम, 1950', इन तीनों कानून के अनुसार दंडनीय अपराध है । अतः शासन इसका कठोरता से पालन करेऐसी मांग भी निवेदन द्वारा की गई है । विगत वर्ष अरुणाचल प्रदेश सरकार ने अशोकचक्र युक्त तिरंगे के साठ हजार मास्क विद्यार्थियों में वितरित किए थे । ऐसा करना ध्वजसंहिता का उल्लंघन है । अतइस विषय में केंद्र सरकार राज्यों को मार्गदर्शक सूचना दे । वर्ष 2011 में प्रविष्ट जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुंबई उच्च न्यायालय ने शासन को इस संदर्भ में निर्देश दिया था कि 'शासन राष्ट्रध्वज का होनेवाला अपमान और अनादर रोके ।' तदनुसार कार्यवाही करेंऐसी मांग समितिने ज्ञापन द्वारा की गयी है ।
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मत करना घमंड

Posted: 11 Aug 2021 06:39 AM PDT

मत करना घमंड

           ~ डॉ रवि शंकर मिश्र "राकेश"
          """""""""""""""""""""""""""
अखंड रहो, ब्रम्हदंड रखो, 
अडिग रहो, 
जीवन के मूल्यों पर, 
साथ-साथ चलना सीखो, 
सत् कर्म से किस्मत लिखो, 
ध्यान रहे हरदम, 
पूर्वज की अरमानों का, 
हो न पाए खण्ड। 
पर मत करना घमंड।। 
ध्वज फहराओ, 
जगह - जगह, 
यश और कीर्ति का, 
ज्ञान का दीप जलाओ, 
सभी को गले लगाओ, 
सुहृदय इंसान हो, 
चाहे हो उदण्ड। 
पर मत करना घमंड।। 
प्रज्ज्वलित हो'  
दीप समान,
प्रकाशित करो, 
धरा और नभ को, 
निरंतर दूर हो तिमिर, 
अज्ञान का जग में, 
नहीं हो कोई मानदंड। 
पर मत करना घमंड।। 
बढ़े चलो, अहर्निश, 
प्रगति के पथ पर, 
नैतिकता के रथ पर, 
कोई छुट न पाए पीछे, 
सब को साथ ले कर चलना है, 
कम्पकपाती ठंढ हो, 
या गर्मी पड़े प्रचंड। 
पर मत करना घमंड।। 

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11 अगस्त के दिन ही सन 1947 में बलोचिस्तान को आजादी मिली थी :धर्म चन्द्र पोद्दार

Posted: 11 Aug 2021 03:49 AM PDT

11 अगस्त के दिन ही सन 1947 में बलोचिस्तान को आजादी मिली थी :धर्म चन्द्र पोद्दार 


बलोचिस्तान के स्वतंत्रता दिवस पर जानकारी देते हुए हिंद बलोच फोरम जमशेदपुर के महासचिव धर्म चंद्र पोद्दार ने बताया कि पाकिस्तान 14 अगस्त 1947 को बना और यह मुल्क पैदा होते ही खुराफात में लग गया । 

कहा कि पाकिस्तान पहले से नहीं था । इसका निर्माण ही 14 अगस्त 1947 को किया गया । 

अपनी पैदाइश के 7 महीने 13 दिन बाद ही 27 मार्च सन 1948 को पाकिस्तान ने सैन्य बल का प्रयोग कर बलोचिस्तान पर कब्जा कर उसे अपना गुलाम बना लिया । 

तब से लेकर आज तक बलोचिस्तान अपनी आजादी की लड़ाई लड़ रहा है । 

कहा कि आज यह आजादी की लड़ाई निर्णयात्मक स्थिति में है । 

हजारों बलोचवासियों को पाकिस्तानी सेना के द्वारा अपहरण करके मार दिया गया है ।  वहां के क्रांतिकारी अपने देश की आजादी के लिए प्राण तक न्योछावर कर रहे हैं । 

अब यह लोग अपनी आजादी के लिए कुछ भी करने को तत्पर है ।

कहा कि सोचने वाली बात है कि  जो मुल्क अंग्रेजों से आजादी मिलने के मात्र 7 महीने 17 दिन के बाद फिर से गुलाम  हो जाए तो वहां की जनता पर क्या बीतती होगी ।

कहा कि आज बलोचिस्तान की जो स्थिति है वह बहुत ही चिन्ताजनक है ।  पाकिस्तानी हुक्मरान के द्वारा किस प्रकार से जुल्म ढाए जा रहे हैं यह देखकर विश्व के किसी भी व्यक्ति का कलेजा कांप उठेगा । 

वहां के हालात यह है कि पाकिस्तानी सेना रेप सेल चला रही है । वहां बलोचिस्तान की लड़कियों व महिलाओं के साथ रेप करने का काम कर रही है ।

जुल्म यहां तक बढ़ा हुआ है कि पाकिस्तान आर्मी ऑर्गन सेल भी चला रही है । वहां पर बलूची लोगों एवं उनके बच्चों के अंग जैसे दिल , जिगर , फेफड़ा , किडनी व आंखें आदि निकाल कर उनको बिक्री किया जाता है । महिलाओं व बच्चों को मार दिया जाता है ।

भारत को बलोचिस्तान को आजाद करवाने के निमित्त कुछ ऐसा करना चाहिए कि बलोचिस्तान शीघ्र आजाद हो सके ।  

कहा कि बलोचिस्तान के आजाद होने से मां हिंगलाज भवानी का मंदिर जो लगभग 2 लाख वर्ष से भी अधिक पुराना है और जहां हिंदुओं के साथ-साथ बलोच लोग भी मत्था टेकने जाते हैं । 

बताया कि आज बलोच भाई-बहन ही मां हिंगलाज भवानी के मंदिर को सुबह शाम साफ सफाई करते हैं । पानी से धोते हैं एवं प्रतिदिन सुबह-शाम पूजा अर्चना करते हैं ।
मां हिंगलाज भवानी के मंदिर को बलोच लोग नानी मां का मंदिर कहते हैं ।

वह हमारा 51 शक्तिपीठों में से एक मंदिर है । जहां बलोचिस्तान के आजाद होने के बाद हम सभी भी दर्शन करने के लिए जा सकेंगे ।

श्री पोद्दार ने भारत के प्रधानमंत्री से मांग की है कि बलोचिस्तान को आजाद करवाने के मामले में अति शीघ्र कदम उठाएं ।

पोद्दार ने बलोचिस्तान वासियों को स्वतंत्रता दिवस की बधाई दी है और शुभकामनाएं प्रकट करते हुए कहा है कि अब बलोचिस्तान शीघ्र ही आजाद होगा ।

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अमर शहीद खुदीराम

Posted: 11 Aug 2021 03:27 AM PDT

अमर शहीद खुदीराम

           --:भारतका एक ब्राह्मण.
           संजय कुमार मिश्र "अणु"
एक छोटा बच्चा-
लड़ने लगा स्वतंत्रता संग्राम।
जानकार बताते हैं-
था उसका नाम खुदीराम।।
देख देश की दुर्दशा
पाला आजादी का नशा
और करने लगा वह-
अपने तौर पर सब इंतजाम।।
भयभीत था अंग्रेज देख आतंक
उसके नाम घोषणा कि-
जिंदा या मुर्दा का इनाम।।
देश के गद्दारों ने दिया,
उन गोरे लोगों का साथ-
और पकड़ा गया वह एक साम।।
पकड़कर उसे रखा गया,
मुजफ्फरपुर के जेल में-
करने को उसका काम तमाम।।
पर वह था बड़ा दिलेर
वंदे मातरम गाने वाला छोटा शेर
देशवासियों को दिया आजादी का पैगाम।।
आजादी के इतिहास में,
आज भी स्वर्णाक्षरों में दर्ज है-
उस अमर शहीद का नाम।।
हे अमर्त्य वीर,
करता "मिश्र अणु" सलाम।
मां भारती के लाल-
अमर शहीद खुदीराम!!
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वलिदाद अरवल (बिहार)
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गायत्री मंत्र के हर शब्द का है खास अर्थ,जप के चमत्कारिक फायदे

Posted: 11 Aug 2021 03:23 AM PDT

गायत्री मंत्र के हर शब्द का है खास अर्थ,जप के चमत्कारिक फायदे

[ आलेख  :  मानस पुत्र (  पंडित )  संजय कुमार झा 
सभी हिन्दू शास्त्रों में लिखा है कि मंत्रों का मंत्र महामंत्र है गायत्री मंत्र। यह प्रथम इसलिए कि विश्व की प्रथम पुस्तक ऋग्वेद की शुरुआत ही इस मंत्र से होती है। कहते हैं कि ब्रह्मा ने चार वेदों की रचना के पूर्व 24 अक्षरों के गायत्री मंत्र की रचना की थी।
 

* यह मंत्र इस प्रकार है-
¦¦¦. " ॐ भूर्भुव: स्व: ॐ तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्  ॐ" ¦¦¦
*  गायत्री मंत्र का अर्थ :
- पृथ्वीलोक, भुवर्लोक और स्वर्लोक में व्याप्त उस सृष्टिकर्ता प्रकाशमान परमात्मा के तेज का हम ध्यान करते हैं, वह परमात्मा का तेज हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर चलने के लिए प्रेरित करे।

दूसरा अर्थ :
- उस प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूप परमात्मा को हम अंत:करण में धारण करें। वह परमात्मा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग में प्रेरित करे।
 
तीसरा अर्थ :
- ॐ : सर्वरक्षक परमात्मा, भू : प्राणों से प्यारा, भुव : दुख विनाशक, स्व : सुखस्वरूप है, तत् : उस, सवितु : उत्पादक, प्रकाशक, प्रेरक, वरेण्य : वरने योग्य, भर्गो : शुद्ध विज्ञान स्वरूप का, देवस्य : देव के, धीमहि : हम ध्यान करें, धियो : बुद्धि को, यो : जो, न : हमारी, प्रचोदयात् : शुभ कार्यों में प्रेरित करें।
 
<<<  स्वामी विवेकानंद कहते हैं इस मंत्र के बारे में कि हमें उसकी महिमा का ध्यान करना चाहिए जिसने यह सृष्टि बनाई  >>>
 
शास्त्रकारों ने गायत्री की सर्वोपरि शक्ति, स्थिति और उपयोगिता को एक स्वर से स्वीकार किया है।
इस संदर्भ में पाए जाने वाले अगणित प्रमाणों में से कुछ नीचे प्रस्तुत हैं:-
 
* सर्वेषां जपसूक्तानां ऋचांश्च यजुषां तथा।
साम्नां चौकक्षरादीनां गायत्री परमो जप:।।
-वृहत् पाराशर स्मृति।
अर्थ : समस्त जप सूत्रों में समस्त वेद मंत्रों में, एकाक्षर बीज मंत्रों में गायत्री ही सर्वश्रेष्ठ है।

* इति वेद पवित्राण्य भिहितानि एभ्य सावित्री विशिष्यते। -शंख स्मृति
अर्थ : यों सभी वेद के मंत्र पवित्र हैं, पर इन सब में गायत्री मंत्र सर्वश्रेष्ठ है।
 
* सप्त कोटि महामंत्रा, गायत्री नायिका स्मृता।
आदि देवा ह्मुपासन्ते गायत्री वेद मातरम्।।
-कूर्म पुराण
अर्थ : गायत्री सर्वोपरि सेनानायक के समान है। देवता इसी की उपासना करते हैं। यही चारों वेदों की माता है।
 
* तदित्पृचा समो नास्ति मंत्रों वेदचतुष्टये।
सर्ववेदाश्च यज्ञाश्च दानानि च तपांसि च।।
समानि कलपा प्राहुर्मुनयो न तदित्यृक्।।
-याज्ञवल्क्य
अर्थ : गायत्री के समान चारों वेदों में कोई मंत्र नहीं है। समस्त वेद, यज्ञ, दान, तप मिलकर भी एक कला के बराबर भी नहीं हो सकते, ऐसा ऋषियों ने कहा है l 
 
* दुर्लभा सर्वमंत्रेषु गायत्री प्रणवान्विता।
न गायत्र्यधिंक किचित् त्रयीषुपरिगीयते।।
-हारीत
अर्थ : इस संसार में गायत्री के समान परम समर्थ और दुर्लभ मंत्र कोई नहीं है। वेदों में गायत्री से श्रेष्ठ कुछ और नहीं है।
 
* नास्ति गंगा, समं तीर्थ, न देव: केशवात्पर:।
गायत्र्यास्तु परं जाप्यं न भूतं न भविष्यति।
-अत्रि ऋषि
अर्थ : गंगा के समान कोई तीर्थ नहीं, केशव के समान कोई देवता नहीं और गायत्री से श्रेष्ठ कोई जप न कभी हुआ है और न कभी होगा।
 
* गायत्री सर्वमंत्रणां शिरोमणिस्तथा स्थिता।
विद्यानामपि तेनैतां साधने सर्वसिद्धये।।
त्रिव्याहृतियुतां देवीमोंकारयुगसम्पुटाम्।।
उपास्यचतुरो वर्गान्साधयेद्यो न सोsन्धधी:।।
देव्या द्विजत्वमासाद्य श्रेयसेsन्यरतास्तु ये।
 ते रत्नानिवां‍छन्ति हित्वा चिंतामणि करात्।
-महा वार्तिक
अर्थ : गायत्री सब मंत्रों तथा सब विद्याओं में शिरोमणि है। उससे इंद्रियों की साधना होती है। जो व्यक्ति इस उपासना के द्वारा धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष इन चारों पदार्थों को प्राप्त करने से चूकते हैं, वे मंदबुद्धि हैं। जो द्विज गायत्री मंत्र के होते हुए भी अन्य मंत्रों की साधना करते हैं वे ऐसे ही हतभागी हैं, जैसे कि चिंतामणि को फेंककर छोटे-छोटे चमकीले पत्थर ढूंढने वाले हैं।
 
* यथा कथं च जप्तैषा त्रिपदा परम पावनी।
सर्वकामप्रदा प्रोक्ता विधिना किं पुनर्नृय।।
अर्थ : हे राजन! जैसे-तैसे उपासना करने वाले की भी गायत्री माता कामना पूर्ण करती है, फिर विधिवत साधना करने के सत्परिणामों का तो कहना ही क्या?
 
* कामान्दुग्धे विप्रकर्षत्वलक्ष्मी,
पुण्यं सुते दुष्कृतं च हिनस्ति।
शुद्धां शान्तां मातरं मंगलाना, धेनुं धीरां गायत्रीमंत्रमाहु:।। -वशिष्ठ
अर्थ : गायत्री कामधेनु के समान मनोकामनाओं को पूर्ण करती है, दुर्भाग्य, दरिद्रता आदि कष्टों को दूर करती है, पुण्य को बढ़ाती है, पाप का नाश करती है। ऐसी परम शुद्ध शांतिदायिनी, कल्याणकारिणी महाशक्ति को ऋषि लोग गायत्री कहते हैं।
 
प्राचीनकाल में महर्षियों ने बड़ी-बड़ी तपस्याएं और योग-साधनाएं करके अणिमा-महिमा आदि ऋद्धि-सिद्धियां प्राप्त की थीं। इनकी चमत्कारी शक्तियों के वर्णन से इतिहास-पुराण भरे पड़े हैं। वह तपस्या थी ‍इसलिए महर्षियों ने प्रत्येक भारतीय के लिए गायत्री की नित्य उपासना करने का निर्देश दिया था।
 
* चत्वारिश्रंगा त्रयो अस्य पादा, द्वे शीर्षे सप्त हस्तासोsअस्य।
त्रिधा बद्धो वृषभो रोरवीति, महादेवो मर्त्यां अविवेश।। -यजुर्वेद 17/19
अर्थात : चार सींग वाला, तीन पैर वाला, दो सिर वाला, सात हाथों वाला, तीन जगह बंधा हुआ, यह गायत्री महामंत्ररूपी वृषभ जब दहाड़ता है, तब महान देव बन जाता है और अपने सेवक का कल्याण करता है।
चार सींग : चार वेद।
तीन पैर : आठ-आठ अक्षरों के तीन चरण।
दो सिर : ज्ञान और विज्ञान।
सात हाथ : सात व्याहृतियां जिनके द्वारा सात विभूतियां मिलती हैं।
 
तीन जगह बंधा हुआ : ज्ञान, कर्म, उपासना से।
अंत में : जब यह वृषभ दहाड़ता है, तब देवत्व की दिव्य परिस्थितियां उत्पन्न होती हैं जिसके सान्निध्य में रहकर सब कुछ पाया जा सकता है। देवी भागवत पुराण के अश्वपति उपाख्यान में अनुदान का वर्णन इस प्रकार आता है-
* तत: सावित्र्युपाख्यानं तन्मे व्याख्यातुमर्हसि।
पुरा केन समुद्‍भूता सा श्रुता च श्रुते: प्रसू:।।
केन वा पूजिता लोके प्रथमे कैश्च वा परे।।
ब्राह्मणा वेदजननी प्रथमे पूजिवा मुने।द्वितीये च वेदगणैस्तत्पश्चाद्विदुषां गणै:।।
तदा चाश्वपतिर्भूप: पूजयामास भारत।
तत्पश्चात्पूजयामासुवर्णाश्‍चत्वार एव च।।
- देवी भागवत (सावित्री उपाख्‍यान)
 
* नारदजी ने भगवान से पूछा- प्रख्‍यात हैं कि श्रुतियां गायत्री से उत्पन्न हुई हैं, कृपा करके उस गायत्री की उत्पत्ति बताइए।
 भगवान ने कहा- देव जननी गायत्री की उपासना सर्वप्रथम ब्रह्माजी ने की, फिर देवता उनकी आराधना करने लगे, फिर विद्वान, ज्ञानी-तपस्वी उसकी साधना करने लगे। राजा अश्वपति ने विशेष रूप से उसकी तपश्चर्या की और फिर तो चारों वर्ण (रंग) उस गायत्री की उपासना में तत्पर हो गए।
 
( आप भी गायत्री मंत्र की शक्ति और शुभ प्रभाव से सफलता चाहते हैं, तो गायत्री मंत्र जप से जुड़े नियमों का ध्यान जरूर रखें )
 
यदि आपको सिद्धियां प्राप्त करना हो या मोक्ष तो इस मंत्र का जाप करते रहने से यह इच्छा भी पूरी हो जाती है, लेकिन शर्त यह है कि इसके जाप के पहले व्यक्ति को द्विज बनना पड़ता है। हर तरह के व्यसन छोड़ना पड़ते हैं।

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तख्त श्री गुरूगोबिन्द सिंह जी महाराज की जन्म स्थली पटना साहिब गुरूद्वारा क्षुद्र राजनीति का रणक्षेत्र बन गया है:- राकेश कपूर

Posted: 11 Aug 2021 03:15 AM PDT

तख्त श्री गुरूगोबिन्द सिंह जी महाराज की जन्म स्थली पटना साहिब गुरूद्वारा क्षुद्र राजनीति का रणक्षेत्र बन गया है:- राकेश कपूर  

पटना जिला सुधार समिति के महासचिव राकेश कपूर  ने हमारे संवाददाता को बतायाकि तख्त श्री हरमिंदर जी गुरूद्वारा प्रबंधक कमिटी की अनैतिक हरकतों से गुरु घर की नष्ट होती मर्यादा को बचाने के संबंध में हमने एक प्रार्थना पत्र  श्री मान् जिला सत्र न्यायाधीश सह संरक्षक तख्त श्री हरमिंदर जी गुरूद्वारा प्रबंधक कमिटी, सिविल कोर्ट, पटना को सौपी है जिसमे हमने माँग की है कि  पटना साहिब गुरूद्वारा में इन दिनों क्षुद्र राजनीति का अड्डा बनता चला जा रहा है। पटना साहिब गुरूद्वारा पर पंजाब के सिख अपना नियंत्रण बनाना चाहते हैं। 

उल्लेखनीय है कि पिछली सदी के 80 के दशक में पटना साहिब गुरूद्वारा पर पंजाब के सिखों ने अकालियों के सहयोग से सुश्री निर्लेप कौर के नेतृत्व में कब्जा कर उन्हें गुरूद्वारा प्रबन्धक कमिटी का अध्यक्ष बना दिया था। उसके बाद से ही अकालियों की मंशा इस तख्त पर कब्जे की बनी हुई है। 

सिखों के दूसरे सबसे बड़े धार्मिक तख्त श्री गुरूगोबिन्द सिंह जी महाराज की जन्म स्थली पटना साहिब गुरूद्वारा क्षुद्र राजनीति का रणक्षेत्र बन गया है। यहाँ प्रबन्धक कमिटी के आपसी विवाद के कारण तलवार बाजी से लेकर पत्थर बाजी की घटना आम बात हो गई है।

मालूम हो कि इन विवादों के पीछे तख्त के जत्थेदार ज्ञानी रंजीत सिंह, गोहर ए मसकीन का भी बहुत बड़ा हाथ है। इसकी चर्चा संगत के बीच भी होती है। ये ग्रंथी के साथ-साथ प्रंबंधक कमिटी के सदस्यों को गुमराह कर अपना उल्लू सीधा करते हैं। ऐसा आजतक किसी मुख्य ग्रंथी ने नहीं किया। इनके व्यवहारों से तख्त की मर्यादा का हनन होता है। ये तख्त की सेवा की जगह प्रबंधक कमिटी की राजनीति गतिविधियों में ज्यादा दिलचस्पी रखते हैं ऐसी चर्चा संगतों के बीच है। धार्मिक स्थलों पर इस तरह की घटनाओं से श्रद्धालुओं को ठेस तो पहुंचती ही है, साथ ही इस पवित्र स्थल की मर्यादा भी घटती है। अतः हमने श्रीमान संरक्षक महोदय से अनुरोध किया है कि  धर्म की आड़ में राजनीति की रोटी सेंकने वालों पर ठोस कार्रवाई करते हुए अंकुश लगाने की कृपा करें। साथ-साथ जत्थेदार ज्ञानी रंजीत सिंह, गोहर ए मसकीन को सेवा कार्यों तक सीमित रहने के लिए आदेश देने की कृपा करें। 

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