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Sunday, November 21, 2021

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मेलों से नहीं दृष्टिकोण में परिवर्तन से होगा बचपन संरक्षित

Posted: 20 Nov 2021 10:54 PM PST

मेलों से नहीं दृष्टिकोण में परिवर्तन से होगा बचपन संरक्षित

लेखक: प्रियंक कानूनगो, अध्यक्ष, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR)
बाल अधिकार एक ऐसा विषय है जिसे वैश्विक स्तर पर जितनी अहमियत दी गई है उसकी तुलना में हमारे देश में आजादी के बाद 6-7 दशक तक यह अनदेखा रहा और इसी अनदेखी के चलते समय की मांग के अनुसार न तो कोई नई दृष्टि विकसित हो पाई है और न ही हम अपनी उस पंरपरा को संजोकर रख पाए जिसमें बच्चा समाज की जिम्मेदारी होता था और पूरा समाज उसके विकास तथा संरक्षण के लिए कार्य करता था। किसी बच्चे के विकास और संरक्षण के लिए सबसे जरूरी यह होता है कि उसके प्रति समाज और सरकार का दृष्टिकोण क्या है। अगर आजादी के बाद से देखे तो लंबे समय में ऐसा कोई भी दृष्टिकोण विकसित नहीं हुआ जिसमें बच्चे के हित्त को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उसके विकास और संरक्षण की दिशा में पर्याप्त कार्य हुआ हो। इसके उलट अनदेखी के कारण भारत की पुरातन परंपरा भी धूमिल पड़ने लगी जहां समाज ने ही बच्चे को संरक्षण दिया और उसके विकास के समान अवसर मुहैया कराए।

वैश्विक स्तर पर प्रयासो की बात करें तो बाल अधिकारों की महत्ता को समझते हुए संयुक्त राष्ट्र महासभा के द्वारा 20 नवंबर को इसे विशेष रूप से बाल अधिकार दिवस के रूप में निर्धारित किया गया है। हालांकि ऐसा नहीं है कि भारत में बच्चों को लेकर ऐसा प्रयास नहीं किया गया है। बाल दिवस एक ऐसा ही प्रयास है। किंतु अगर दृष्टिकोण की बात करें तो अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जहां बच्चों के अधिकारों को प्राथमिकता दी गई है वहीं भारतीय बाल दिवस लोक लुभावन मेलों से परे अपनी पहचान नहीं बना पाया और इसका समाज के दृष्टिकोण में बदलाव की कोई छाप दृष्टिगोचर नहीं हुई । जबकि ऐतिहासिक रूप से, भारत अपने सांस्कृतिक लोकाचार और सामाजिक आचरण के माध्यम से बच्चों के अधिकारों की पुरजोर वकालत और मान्यता देता रहा है। यह स्वतंत्रता के बाद हमारे संविधान में विशिष्ट अधिकारों में अनुवादित हो गया और कालांतर में बाल अधिकार संरक्षण संबंधित कानूनों में समाहित हुए। हाल ही में किशोर न्याय अधिनियम, 2015 और पोक्सो अधिनियम, 2012 के तहत संशोधन जैसे बच्चों के लिए ऐतिहासिक प्रावधान किए गए हैं, जिससे इन्हें और अधिक प्रभावी बना गया है। इसके अलावा, पीएम केयर्स ने कोविड से प्रभावित सभी बच्चों को संरक्षण प्रदान करने का महत्वपूर्ण कार्य किया गया है।

भारतीय परिपेक्ष्य में मनाए जाने वाले बाल दिवस में लुभावन और मनोरंजन के साधनों को प्राथमिकता दी गई है न कि ऐसे प्रयासों को जो बच्चों को मानसिक और आत्मिक तौर पर सशक्त करे और उनका संरक्षण सुनिश्चित करे। भवनों और मॉल में आयोजित होने वाले मेलों और आयोजनों में केवल वही बच्चे पंहुच पाते हैं जिनकी अधिकारो तक पहुंच है, किंतु यह आय़ोजन असल जरूरत वाले बच्चों की पंहुच से दूर रहे और न हीं उन बच्चों के जीवन में इससे कोई अमूलचूल परिवर्तन आया जो आज भी सड़क पर जीवन व्यतीत करने तथा भिक्षावृति व बाल मजदूरी में अपना बचपन खो रहे हैं। इन्हीं लोक लुभावन आयोजनों में अंतर्राष्ट्रीय बाल अधिकार दिवस भी धूमिल पड़ गया और बच्चों के अधिकार के असल मुद्दों की चर्चा के परे हम मेले के आयोजनों में फंसे रहे।

बाल अधिकारों के प्रति दृष्टिकोण में बदलाव समय की गहरी मांग है और बच्चों के अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए समग्र समाधान आधारित दृष्टोकण को अपनाने की जरूरत है। उल्लेखनीय है कि गरीबी और परिवार की असक्षमता एक ऐसा कारण है जिसका खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ता है और वह कभी बाल मजदूरी के लिए मजबूर होते हैं तो कभी तस्करों के चंगुल में फंसकर मानसिक औऱ शारीरिक शोषण का शिकार होते हैं। इस समस्या की ओर कभी गंभीरता से नहीं सोचा गया। इस समस्या का समाधान भी हमारी वर्तमान व्यवस्था में उपलब्ध है, जिसे चिन्हित कर एनसीपीसीआर ने परिवार को उन सभी योजनाओं से जोड़ने का कार्य शुरू किया है, जिससे अंततः बच्चे परिवार में रह पाए और उनका लालन पालन बच्चे के नजरिए से सबसे उपयुक्त इकाई परिवार में हो सके।

यहां पर एक और बात जिसपर सबसे ज्यादा ध्यान देने की है वह है बच्चे के विकास में समग्र समाज की भूमिका। चूंकि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और समाज से परे उसके विकास और जीवन की अपनी सीमाएं हैं। इसलिए अगर बच्चों के अधिकारों को सुनिश्चित करना है तो समाज के हर एक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। इसके लिए आवश्यक है कि बच्चों के अधिकारों के प्रति जागरूकता लाने के लिए देश को बाल दिवस से बाल अधिकार दिवस की ओर कदम बढ़ाना पडेगा और सांकेतिकता से अधिक सार्थक प्रयास किए जाने की अवश्यकता है।
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पावन हुई अयोध्या लौट राम घर आए

Posted: 20 Nov 2021 10:50 PM PST

पावन हुई अयोध्या लौट राम घर आए

पावन हुई अयोध्या प्रभु राम के मन भायी
हुआ अवतरण श्रीराम का खुशियां मनाई

दशरथ कौशल्या घर जन्मे प्रभु ने किया निहाल 
त्रिलोकी के नाथ आए जग में ऐसी नहीं मिसाल

अमर हो गए काग भुसुण्ड इच्छित वर पाये 
पावन हुई अयोध्या जब लौट राम घर आए

अल्पकाल सब विद्या मुनि विश्वामित्र से पाए
ताड़क वन में ताड़का मारी ऋषि मुनि हर्षाए

मारीच सुबाहु को भी मिला कर्मों का परिणाम 
शीला अहिल्या तार प्रभु राम जनकपुरी आए

शिव धनुष चाप चढ़ाकर सीता संग ब्याह रचाये
धन्य हुई अयोध्या सारी श्री राम लौट घर आए

रावण सरीखे असुर मार हर लिया धरा का भार 
लंका राज दिया विभीषण प्रभु जग के तारणहार

नारायण नर रूप सकल सृष्टि सब हरसाये 
पावन हुई अयोध्या लौट राम घर आए

दीप जले जगमग हुई आज अवधपुरी सारी
मंगल गीत गाने लगे घर-घर नर और नारी

खूब सजावट अवध में ढोल नगाड़े बजने लगे
आ गए अब राजाराम सारे दरबार सजने लगे

पुष्प वर्षा की देवन ने खूब शंख बजाए 
पावन हुई अयोध्या लौट राम घर आये
रचनाकार
कवि काशीनाथ मिश्रा 
नवलगढ़ जिला झुंझुनू राजस्थान


सम्प्रेषण कर्ता रमाकांत सोनी
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संस्कृति का उन्नायक महामना मदनमोहन मालवीय

Posted: 20 Nov 2021 10:43 PM PST

संस्कृति का उन्नायक महामना मदनमोहन मालवीय

सत्येन्द्र कुमार पाठक
भारतीय संस्कृति के उन्नायक भारत रत्न महामना मदनमोहन मालवीय का जन्म प्रयागराज के निवासी पंडित ब्रजनाथ मालवीय की पत्नी मुना देवी के गर्भ से 25 दिसम्बर 1861 ई. को हुआ एवं 85 वर्षीय मालवीय जी का निधन 12 नवंबर 1946 ई. में हुआ था । मदनमोहन मालवीय जी भारत के पहले और अन्तिम व्यक्ति , काशी विश्वविद्यालय के प्रणेता , महामना की सम्मानजनक उपाधि से विभूषित , पत्रकारिता, वकालत, समाज सुधार, मातृ भाषा तथा भारतमाता की सेवा में अपना जीवन अर्पण करने वाले महामानव और युग का आदर्श पुरुष थे । मालवीयजी सत्य, ब्रह्मचर्य, व्यायाम, देशभक्ति तथा आत्मत्याग में अद्वितीय और मृदुभाषी थे। भारतीय संसद भवन में भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद द्वारा मालवीय जी का तैलचित्र का विमोचन 19 दिसंबर 1957 ई. को किया गया था ।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष के पद पर 1909–10; 1918–19; 1930-1931; 1932-1933 एवं बनारस, ब्रिटिश भारत राष्ट्रीयता भारतीय राजनैतिक पार्टी हिन्दू महासभा , भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ,विद्या अर्जन , प्रयाग विश्वविद्यालय
कलकत्ता विश्वविद्यालय , धर्म हिन्दू अनेक संस्थाओं के जनक एवं सफल संचालक के रूप में उनकी अपनी विधि व्यवस्था का सुचारु सम्पादन की थी । भारत सरकार ने २४ दिसम्बर २०१४ को उन्हें भारत रत्न से अलंकृत किया।[
मालवीयजी अपने माता-पिता से उत्पन्न कुल सात भाई बहनों में पाँचवें पुत्र थे। मालवीय जी का परिवार भारत के मालवा प्रान्त से प्रयाग आए थे । संस्कृत साहित्य के विद्वान एवं श्रीमद भागवत के वाचक पिता पंडित ब्रजनाथ द्वारा मदनमोहन मालवीय को पंडित की उपाधि दिया गया था । पाँच वर्ष की आयु में उन्हें उनके माँ-बाप ने संस्कृत भाषा में प्रारम्भिक शिक्षा लेने हेतु पण्डित हरदेव धर्म ज्ञानोपदेश पाठशाला में भर्ती होने के बाद प्राइमरी परीक्षा उत्तीर्ण के पश्चात विद्यालय में भेज दिये गये थे । प्रयाग की विद्यावर्धिनी सभा से शिक्षा पूर्ण कर इलाहाबाद के जिला स्कूल पढने के दौरान मकरन्द के उपनाम से कवितायें लिखनी प्रारम्भ की। उनकी कवितायें पत्र-पत्रिकाओं में खूब छपती थीं। 1879 में म्योर सेण्ट्रल कॉलेज इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मैट्रीकुलेशन उत्तीर्ण करने के बाद हैरिसन स्कूल के प्रिंसपल ने उन्हें छात्रवृत्ति देकर कलकत्ता विश्वविद्यालय से 1884 ई० में बी०ए० की उपाधि प्राप्त की थी । हृदय की महानता के कारण भारतवर्ष में 'महामना' से पूज्य मालवीयजी को संसार में सत्य, दया और न्याय पर आधारित सनातन धर्म सर्वाधिक प्रिय था। करुणामय हृदय, भूतानुकम्पा, मनुष्यमात्र में अद्वेष, शरीर, मन और वाणी के संयम, धर्म और देश के लिये सर्वस्व त्याग, उत्साह और धैर्य, नैराश्यपूर्ण परिस्थितियों में भी आत्मविश्वासपूर्वक दूसरों को असम्भव प्रतीत होने वाले कर्मों का संपादन, वेशभूषा और आचार विचार में मालवीयजी भारतीय संस्कृति के प्रतीक तथा ऋषियों के प्राणवान स्मारक थे। मालवीयजी का बचपन में अपने पितामह प्रेमधर श्रीवास्तव ने 108 दिन निरन्तर 108 बार श्रीमद्भागवत का पारायण किया था, से राधा-कृष्ण की अनन्य भक्ति, पिता ब्रजनाथजी की भागवत-कथा से धर्म-प्रचार एवं माता मूनादेवी से दुखियों की सेवा करने का स्वभाव प्राप्त हुआ था। धनहीन किन्तु निर्लोभी परिवार में पलते हुए भी देश की दरिद्रता तथा अर्थार्थी छात्रों के कष्ट निवारण के स्वभाव से उनका जीवन ओतप्रोत था।
मालवीय जी ने प्रयाग की धर्म ज्ञानोपदेश तथा विद्याधर्म प्रवर्द्धिनी पाठशालाओं में संस्कृत का अध्ययन समाप्त करने के पश्चात् म्योर सेंट्रल कालेज से 1884 ई० में कलकत्ता विश्वविद्यालय की बी० ए० की उपाधि ली। इस बीच अखाड़े में व्यायाम और सितार पर शास्त्रीय संगीत की शिक्षा वे बराबर देते रहे। उनका व्यायाम करने का नियम इतना अद्भुत था कि साठ वर्ष की अवस्था तक वे नियमित व्यायाम करते ही रहे। सात वर्ष के मदनमोहन को धर्मज्ञानोपदेश पाठशाला के देवकीनन्दन मालवीय माघ मेले में ले जाकर मूढ़े पर खड़ा करके व्याख्यान दिलवाते थे। कांग्रेस के द्वितीय अधिवेशन में अंग्रेजी के प्रथम भाषण से प्रतिनिधियों को मन्त्रमुग्ध कर देने वाले मृदुभाषी मालवीयजी भारत देश के सर्वश्रेष्ठ हिन्दी, संस्कृत और अंग्रेजी के व्याख्यान वाचस्पतियों में प्रसिद्ध हुए थे । हिन्दू धर्मोपदेश, मन्त्रदीक्षा और सनातन धर्म प्रदीप ग्रथों में परतन्त्र भारत देश की विभिन्न समस्याओं पर बड़ी कौंसिल से लेकर असंख्य सभा सम्मेलनों में दिये गये हजारों व्याख्यानों के रूप में भावी पीढ़ियों के उपयोगार्थ प्रेरणा और ज्ञान के अमित भण्डार हैं। उनके बड़ी कौंसिल में रौलट बिल के विरोध में निरन्तर साढ़े चार घण्टे और अपराध निर्मोचन इंडेमनिटी बिल पर पाँच घण्टे के भाषण निर्भयता और गम्भीरतापूर्ण दीर्घवक्तृता के लिये स्मरणीय हैं। म्योर कालेज के मानसगुरु महामहोपाध्याय पं० आदित्यराम भट्टाचार्य के साथ 1880 ई० में स्थापित हिन्दू समाज में मालवीयजी भाग लेने के दसूरण प्रयाग में वाइसराय लार्ड रिपन का आगमन हुआ। रिपन स्थानीय स्वायत्त शासन स्थापित करने के कारण भारतवासियों में जितने लोकप्रिय थे। प्रिसिपल हैरिसन के कहने पर मालवीय जी का स्वागत संगठित करके मालवीयजी ने प्रयाग वासियों के हृदय में अपना विशिष्ट स्थान बना लिया। कालाकाँकर के देशभक्त राजा रामपाल सिंह के अनुरोध पर मालवीयजी ने हिन्दी अंग्रेजी समाचार पत्र हिन्दुस्तान का 1887 से सम्पादन करके दो ढाई साल तक जनता को जगाया। उन्होंने कांग्रेस के ही एक अन्य नेता पं0 अयोध्यानाथ का उनके इण्डियन ओपीनियन के सम्पादन में हाथ बँटाया और 1907 ई0 में साप्ताहिक अभ्युदय को निकालकर सम्पादित किया। सरकार समर्थक समाचार पत्र पायोनियर के समकक्ष 1909 में दैनिक 'लीडर' अखबार निकालकर लोकमत निर्माण का महान कार्य सम्पन्न किया तथा दूसरे वर्ष मर्यादा पत्रिका भी प्रकाशित की। 1924 ई0 में दिल्ली आकर हिन्दुस्तान टाइम्स को सुव्यवस्थित किया तथा सनातन धर्म को गति प्रदान करने हेतु लाहौर से विश्वबन्द्य पत्र को प्रकाशित करवाया था ।हिन्दी के उत्थान में मालवीय जी की भूमिका ऐतिहासिक है। भारतेंदु हरिश्चंद्र के नेतृत्व में हिन्दी गद्य के निर्माण में संलग्न मनीषियों में 'मकरंद' तथा 'झक्कड़सिंह' के उपनाम से विद्यार्थी जीवन में रसात्मक काव्य रचना के लिये ख्यातिलब्ध मालवीयजी ने देवनागरी लिपि और हिन्दी भाषा को पश्चिमोत्तर प्रदेश व अवध के गवर्नर सर एंटोनी मैकडोनेल के सम्मुख 1898 ई0 में विविध प्रमाण प्रस्तुत करके कचहरियों में प्रवेश दिलाया। 1910 ई. में हिन्दी साहित्य सम्मेलन के प्रथम अधिवेशन काशी के अध्यक्षीय अभिभाषण में हिन्दी के स्वरूप निरूपण में मालवीय जी कहा कि "उसे फारसी-अरबी के बड़े बड़े शब्दों से लादना जैसे बुरा है, वैसे ही अकारण संस्कृत शब्दों से गूँथना भी अच्छा नहीं और भविष्यवाणी की कि एक दिन यही भाषा राष्ट्रभाषा होगी।" सम्मेलन के एक अन्य वार्षिक अधिवेशन (बम्बई-1919) के सभापति पद से उन्होंने हिन्दी उर्दू के प्रश्न को, धर्म का नहीं अपितु राष्ट्रीयता का प्रश्न बतलाते हुए उद्घोष किया कि साहित्य और देश की उन्नति अपने देश की भाषा द्वारा ही हो सकती है। समस्त देश की प्रान्तीय भाषाओं के विकास के साथ-साथ हिन्दी को अपनाने के आग्रह के साथ यह भविष्यवाणी भी की कि कोई दिन ऐसा भी आयेगा कि जिस भाँति अंग्रेजी विश्वभाषा हो रही है उसी भाँति हिन्दी का भी सर्वत्र प्रचार होगा। इस प्रकार उन्होंने हिन्दी को अन्तर्राष्ट्रीय रूप का लक्ष्य दिया था । कांग्रेस के निर्माताओं में मालवीयजी ने द्वितीय अधिवेशन कलकत्ता-1886 से लेकर अन्तिम साँस तक स्वराज्य के लिये कठोर तप किया। एनी बेसेंट ने कहा था कि "मैं दावे के साथ कह सकती हूँ कि विभिन्न मतों के बीच, केवल मालवीयजी भारतीय एकता की मूर्ति बने खड़े हुए हैं।" असहयोग आन्दोलन के आरम्भ तक नरम दल के नेताओं के कांग्रेस को छोड़ देने पर मालवीयजी उसमें डटे रहे और कांग्रेस ने उन्हें चार बार सभापति निर्वाचित करके सम्मानित किया- लाहौर (1909 में), दिल्ली 1918 और 1931 तथा कलकत्ता 1933 हुए है । अन्तिम दोनों बार सत्याग्रह के कारण पहले ही गिरफ्तार कर लिये गये। स्वतन्त्रता के लिये उनकी तड़प और प्रयासों के परिचायक फैजपुर कांग्रेस (1936) में राष्ट्रीय सरकार और चुनाव प्रस्ताव के समर्थन में मालवीयजी के ये शब्द स्मरणीय हैं कि मैं पचास वर्ष से कांग्रेस के साथ हूँ। सम्भव है मैं बहुत दिन न जियूँ और अपने जी में यह कसक लेकर मरूँ कि भारत अब पराधीन है। किंतु फिर भी मैं यह आशा करता हूँ कि मैं इस भारत को स्वतन्त्र देख सकूँगा। 1921 ई0 में कांग्रेस के नेताओं ने जेल भर जाने पर किंकर्तव्यविमूढ़ वाइसराय लॉर्ड रीडिंग को प्रान्तों में स्वशासन देकर गान्धीजी से सन्धि कर लेने को मालवीयजी ने भी सहमत कर लिया था परन्तु 4 फ़रवरी 1922 के चौरीचौरा काण्ड ने इतिहास को पलट दिया। गान्धीजी ने बारदौली की कार्यकारिणी में बिना किसी से परामर्श किये सत्याग्रह को अचानक रोक दिया। इससे कांग्रेस जनों में असन्तोष फैल गया और यह खुसुरपुसुर होने लगी कि बड़ा भाई के कहने में आकर गान्धीजी ने यह भयंकर भूल की है। गान्धीजी स्वयं भी पाँच साल के लिये जेल भेज दिये गये। इसके परिणामस्वरूप चिलचिलाती धूप में इकसठ वर्ष के बूढ़े मालवीय ने पेशावर से डिब्रूगढ़ तक तूफानी दौरा करके राष्ट्रीय चेतना को जीवित रखा। इस भ्रमण में उन्होंने धारा 144 का उल्लंघन भी किया जिसे सरकार खून का घूँट समझकर पी गयी। परन्तु 1930 के सविनय अवज्ञा आन्दोलन में उसी ब्रिटिश सरकार ने उन्हें बम्बई में गिरफ्तार कर लिया जिस पर श्रीयुत् भगवान दास (भारतरत्न) ने कहा था कि मालवीयजी का पकड़ा जाना राष्ट्रीय यज्ञ की पूर्णाहुति समझी जानी चाहिये। उसी साल दिल्ली में अवैध घोषित कार्यसमिति की बैठक में मालवीयजी को पुन: बन्दी बनाकर नैनी जेल भेज दिया गया। यह उनकी जीवनचर्या तथा वृद्धावस्था के कारण यथार्थ में एक प्रकार की तपस्या थी। परन्तु सैद्धान्तिक मतभेद के कारण हिन्दू विश्वविद्यालय में प्रिंस ऑव वेल्स का स्वागत और कांग्रेस स्वराज पार्टी के समकक्ष कांग्रेस स्वतंत्र दल व रैमजे मैकडॉनल्ड के साम्प्रदायिक निर्णय पर, जिसकी स्वीकृति को मालवीयजी ने राष्ट्रीय आत्महत्या माना था । सनातन धर्म व हिन्दूसंस्कृति की रक्षा और संवर्धन में मालवीयजी का योगदान अनन्य है। जनबल तथा मनोबल में नित्यश: क्षयशील हिन्दू जाति को विनाश से बचाने के लिये उन्होंने हिन्दू संगठन का शक्तिशाली आन्दोलन चलाया और स्वयं अनुदार सहधर्मियों के तीव्र प्रतिवाद झेलते हुए भी कलकत्ता, काशी, प्रयाग और नासिक में भंगियों को धर्मोपदेश और मन्त्रदीक्षा दी। राष्ट्रनेता मालवीयजी ने, स्वयं पं0 जवाहरलाल नेहरू ने लिखा है, अपने नेतृत्वकाल में हिन्दू महासभा को राजनीतिक प्रतिक्रियावादिता से मुक्त रखा और अनेक बार धर्मों के सहअस्तित्व में अपनी आस्था को अभिव्यक्त किया है । प्रयाग के भारती भवन पुस्तकालय, मैकडोनेल यूनिवर्सिटी हिन्दू छात्रालय और मिण्टो पार्क के जन्मदाता, बाढ़, भूकम्प, सांप्रदायिक दंगों व मार्शल ला से त्रस्त दुःखियों के आँसू पोंछने वाले मालवीयजी को ऋषिकुल हरिद्वार, गोरक्षा और आयुर्वेद सम्मेलन तथा सेवा समिति, ब्वॉय स्काउट तथा अन्य कई संस्थाओं को स्थापित अथवा प्रोत्साहित करने का श्रेय प्राप्त हुआ, किन्तु उनका अक्षय-र्कीति-स्तम्भ तो काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में उनकी विशाल बुद्धि, संकल्प, देशप्रेम, क्रियाशक्ति तथा तप और त्याग साक्षात् मूर्तिमान हैं। विश्वविद्यालय के उद्देश्यों में हिन्दू समाज और संसार के हित के लिये भारत की प्राचीन सभ्यता और महत्ता की रक्षा, संस्कृत विद्या के विकास एवं पाश्चात्य विज्ञान के साथ भारत की विविध विद्याओं और कलाओं की शिक्षा को प्राथमिकता दी गयी है । मैदान मोहन मालवीय भारतीय संस्कृति के उन्नायक और राष्ट्रीय सांस्कृतिक विरासत के प्रणेता थे ।
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बाल संरक्षण एवं अधिकार से समाज का विकास संभव

Posted: 20 Nov 2021 07:55 AM PST

बाल संरक्षण एवं अधिकार से समाज का विकास संभव 

जहानाबाद । अंतरराष्ट्रीय बाल अधिकार दिवस के अवसर पर सच्चिदानंद शिक्षा एवं समाज कल्याण संस्थान की ओर से आयोजित बाल संरक्षण एवं अधिकार विषय संगोष्टी के पर जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन के उपाध्यक्ष साहित्यकार व इतिहासकार सत्येन्द्र कुमार पाठक ने कहा कि बाल संरक्षण और अधिकार से समाज का विकास संभव है । संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों में अंतरराष्ट्रीय बाल दिवस व इंटरनेशनल चिल्ड्रेन डे 20 नवंबर 1954 को सार्वभौमिक बाल दिवस के रूप में बाल अधिकारों को समर्पित दिन के रूप में मनाया गया था । बाल अधिकारों में सबसे प्रमुख अधिकार जीवन जीने का अधिकार, संरक्षण का अधिकार, सहभागिता का अधिकार और विकास का अधिकार माने जाते हैं । अंतर्राष्ट्रीय एकजुटता को बढ़ावा देना, दुनिया भर में बच्चों के बीच जागरूकता और बच्चों के कल्याण के लिए काम करना है. विश्व बाल दिवस को बच्चों के अधिकारों की वकालत करने और उन्हें बढ़ावा देने के लिए प्रेरित करता है. बच्चें ही हमारा भविष्य हैं, लेकिन अगर बच्चें अपने अधिकारों से वंचित रह जाएंगे तो एक बेहतर दुनिया का निर्माण नहीं किया जा सकेगा । हमारी पीढ़ी को ये मांग करनी चाहिए कि सरकार, व्यवसाय और समुदायों के नेता अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करें और अब बाल अधिकारों के लिए कार्रवाई करें. यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध होना चाहिए कि हर बच्चे को, हर अधिकार प्राप्त हो । अंतर्राष्ट्रीय बाल दिवस व इंटरनेशनल चिल्ड्रेन डे सबसे पहले सन 1954 में 20 नवंबर को मनाया गया था. इस बाल अधिकारों को अपनाया गया था. बाल अधिकारों को चार अलग-अलग भांगों में बांटा गया है - जीवन जीने का अधिकार, संरक्षण का अधिकार, सहभागिता का अधिकार और विकास का अधिकार. के है । भारत में 14 नवंबर को मनाया जाता है बाल दिवस भारत में बाल दिवस देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के जन्मदिन 14 नवंबर को मनाया जाता है. पंडित नेहरू बच्चों को बेहद प्यार करते थे और यही कारण है कि बाल दिवस उनकी जयंती के मौके पर मनाया जाता है । बाल दिवस 1 जून को चीन में , 4 अप्रैल को , पाकिस्तान में , 1 जुलाई, को अमेरिका में , जून के दूसरे रविवार को ब्रिटेन में 30 अगस्त, जापान में 5 मई, पश्चिमी जर्मनी में 20 सितम्बरऔर 14 नवंबर को भारत में को बाल दिवस मनया जाता हैं । विश्व बाल अधिकार दिवस पर समाज बल संरक्षण और अधिकार के लिए कार्य करे ताकि भावी समाज का विकास कर सके । इस अवसर पर संस्थान के कार्यक्रम पदाधिकारी पप्पू कुमार , उर्वशी ने बल अधिकार पर विचार दिए ।
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मुख्यमंत्री ने की गन्ना उद्योग विभाग की समीक्षा

Posted: 20 Nov 2021 07:48 AM PST

मुख्यमंत्री ने की गन्ना उद्योग विभाग की समीक्षा

पटना, 20 नवम्बर 2021:- मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने आज 1 अणे मार्ग स्थित संकल्प में गन्ना उद्योग विभाग की समीक्षा की। गन्ना उद्योग विभाग के सचिव श्री एन0 सरवन कुमार ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से विभाग में किये जा रहे कार्यो के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने पेराई सत्र 2021-22 के लिए ईख मूल्य की दर का निर्धारण, वर्ष 2010 से 2021 तक गन्ना मूल्य की दर, परिचालित चीनी मिलों की संख्या, चीनी मिलों की पेराई क्षमता, डिस्टीलरी की क्षमता, आदि के संबंध में विस्तृत जानकारी दी।
प्रस्तुतीकरण के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2006-07 से गन्ना किसानों के लिए कई कदम उठाये गये हैं। पूर्व के कई वर्षों में गन्ना के मूल्य में वृद्धि की गई। सरकार के स्तर से ईख मूल्य अनुदान भी दिये गये। गन्ना उत्पादन को बढ़ावा देने के लिये गन्ना उद्योग को प्रोत्साहित किया गया। क्षेत्रीय विकास परिषद(जे0डी0सी0) कमीशन में छूट एवं ईख क्रय कर में छूट की सुविधा दी गई। गन्ने की अधिक उत्पादकता के लिए अच्छे किस्म के गन्ने की प्रजाति को बढ़ावा दिया गया। उन्होंने कहा कि सीतामढ़ी जिले के गन्ना किसानों को रीगा के अलावा अन्य चीनी मिलों तक गन्ना पहुंचाने के लिए आवागमन सब्सिडी पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी जारी रखें ताकि गन्ना किसानों को चीनी मिलों तक गन्ना पहुंचाने में किसी प्रकार की असुविधा नहीं हो। उन्होंने कहा कि हमलोग गन्ना किसानों की बेहतरी के लिए लगातार कार्य कर रहे हैं। बैठक में गन्ना उद्योग मंत्री श्री प्रमोद कुमार, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री दीपक कुमार, मुख्य सचिव श्री त्रिपुरारी शरण, विकास आयुक्त श्री आमिर सुबहानी, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री चंचल कुमार, गन्ना उद्योग सह कृषि विभाग के सचिव श्री एन0 सरवन कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव श्री अनुपम कुमार, ईखायुक्त श्री गिरिवर दयाल एवं मुख्यमंत्री के विशेष कार्यपदाधिकारी श्री गोपाल सिंह उपस्थित थे।
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कृषि कानून वापस लेने पर जो चिलगोजे चक्र पटल कर रहे हैं

Posted: 20 Nov 2021 07:34 AM PST

कृषि कानून वापस लेने पर जो चिलगोजे चक्र पटल कर रहे हैं, समझें.

कभी कभी दुश्मन को भी, गले लगाना पड़ता है,
रण क्षेत्र में कभी कभी, पीछे हट जाना पड़ता है।
इसका मतलब यह नहीं, कि हमने मानी हार यहाँ,
ताकत को संजोकर फिर, सबक सिखाना पड़ता है।
कभी कह रहे हमें शिखंडी, कभी नपुंशक कहते हो,
चक्रव्यूह के भेदन में तो, हुनर दिखाना पड़ता है।
सभी विपक्षी ताल ठोकते, मर्यादाओं के तार तोड़ते,
हमको तो अपनों का भी, गुस्सा सहना पड़ता है।
कभी कन्हैया, ओवेशी, टिकैत की तुम बात करो,
कुछ संसद की मजबूरी हैं, हाथ मिलाना पड़ता है।
दुश्मन के हमलों को तो, चुटकी में निपटा दें हम,
अपनों के हमलों पर, मौन रह जाना पड़ता है।
नहीं भरोसा तोडा हमने, कुछ हम पर विश्वास करो,
नहीं बचेंगें देश के दुश्मन, जड़ से मिटाना पड़ता है।
डॉ अ कीर्तिवर्धन
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हमने दुनिया को सत्य दिया: भागवत

Posted: 20 Nov 2021 07:25 AM PST

हमने दुनिया को सत्य दिया: भागवत

(मनीषा स्वामी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)
पिछले दिनों छत्तीसगढ़ में  घोष सम्मेलन का आयोजन हुआ था। इसके समापन समारेाह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने भारत की संस्कृति के बारे में मुख्य रूप से चर्चा की। उन्हांेने कहा कि हजारों हजार वर्ष पूर्व भी हमारे पूर्वज यहां से पूरी दुनिया मंे गये और वहां उन्हांेने किसी को बदलने की कोशिश नहीं की बल्कि सत्य का ज्ञान कराया। इसीलिए हमारे देश से दुश्मनी निभाने वाले चीन के लोग भी यह कहते हुए नहीं सकुचाते कि भारत ने 2000 वर्ष पूर्व अपनी जिस संस्कृति का प्रभाव जमाया था, उसकी याद सुखद है। श्री भागवत का संकेत बुद्ध के बेटे द्वारा चीन मंे बौद्ध धर्म के प्रचार से है। हमारे देश का इतिहास यही रहा कि हमने किसी से कुछ भी छीना नहीं। भगवान राम ने बालि का वध किया तो किष्किंधा का नरेश उसके भाई सुग्रीव को बनाया और लंका में ंरावण का वध किया तो उसके भाई विभीषण को राजा बनाया। इन दोनों स्थानों पर भगवान राम ने सत्य की शिक्षा दी। बालि से कहा 'अनुज वधू, भगिनी सुत नारी, सुनु सठ ये कन्या समचारी।' इसी प्रकार रावण को यह सत्य सिखाया कि अहंकार नहीं करना चाहिए। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने घोष शिविर में कहा कि सत्य की हमेशा जीत होती है, असत्य की नहीं। श्री भागवत ने पहले भी कहा था कि हम सभी भारतीयों का डीएनए एक है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले के मदकू द्वीप में आयोजित घोष शिविर के समापन समारोह में कहा, ''हम सभी को अपने पूर्वजों के उपदेशों को स्मरण करना है। हमारे पूर्वजों के पुण्य का स्मरण करा देने वाले इस क्षेत्र में संकल्प लेना है कि संपूर्ण विश्व को शांति सुख प्रदान करा देने वाला विश्वगुरु भारत गढ़ने के लिए हम सुर में सुर मिलाकर एक ताल में कदम से कदम मिलाकर सौहार्द और समन्वय के साथ आगे बढ़ेंगे। मुंगेली जिले से होकर बहने वाली शिवनाथ नदी में स्थित मदकू द्वीप में 16 नवंबर से 19 नवंबर तक घोष शिविर का आयोजन किया गया था।
उन्होंने इस अवसर पर कहा, सत्यमेव जयते नानृतम्। सत्य की ही जीत होती है, असत्य की नहीं। झूठ कितनी भी कोशिश कर लेकिन झूठ कभी विजयी नहीं होता है। भागवत ने कहा, ''यहां विविधता में एकता है और एकता में विविधता है। भारत ने कभी किसी का बुरा नहीं चाहा। पूर्व में हमारे पूर्वज यहां से पूरी दुनिया में गए और उन्होंने वहां के देशों को अपना धर्म (सत्य) दिया लेकिन हमने कभी किसी को बदला नहीं, जो जिसके पास था उसे उसके पास ही रहने दिया। हमने उन्हें ज्ञान दिया, विज्ञान दिया, गणित और आयुर्वेद दिया तथा उन्हें सभ्यता सिखाई। इसलिए हमारे साथ लड़ने वाले चीन के लोग भी यह कहते हुए नहीं सकुचाते कि भारत ने 2000 वर्ष पूर्व ही चीन पर अपनी संस्कृति का प्रभाव जमाया था, क्योंकि उस प्रभाव की याद ही सुखद है दुखद नहीं है। संघ प्रमुख ने कहा कि दुनिया उसी को पीटती है जो दुर्बल है। स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि दुर्बलता ही पाप है। बलशाली का मतलब है संगठित होना। अकेला व्यक्ति बलशाली नहीं हो सकता है। कलयुग में संगठन ही शक्ति मानी जाती है। हम सभी को साथ लेकर चलेंगे, हमें किसी को बदलने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने घोष प्रदर्शन को लेकर कहा, ''आपने अभी देखा होगा कि इस शिविर में सभी अलग-अलग वाद्य यंत्र बजा रहे थे। वाद्य यंत्र बजाने वाले लोग भी अलग थे लेकिन सभी का सुर मिल रहा था। इस सुर ने हमें बांधकर रखा है। इसी तरह हम अलग-अलग भाषा, अलग-अलग प्रांत से हैं, लेकिन हमारा मूल एक ही है। यह हमारे देश का सुर है और यह हमारी ताकत भी है।
इससे पूर्व इसी वर्ष 4 जुलाई को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा था कि सभी भारतीयों का डीएनए एक है और मुसलमानों को 'डर के इस चक्र मेंश् नहीं फंसना चाहिए कि भारत में इस्लाम खतरे में है। वह राष्ट्रीय मुस्लिम मंच द्वारा यहां हिन्दुस्तानी प्रथम, हिन्दुस्तान प्रथम विषय पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि लोगों में इस आधार पर अंतर नहीं किया जा सकता कि उनका पूजा करने का तरीका क्या है। आरएसएस प्रमुख ने लिंचिंग (पीटकर मार डालने) की घटनाओं में शामिल लोगों पर हमला बोलते हुए कहा, 'वे हिन्दुत्व के खिलाफ हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि लोगों के खिलाफ लिंचिंग के कुछ झूठे मामले दर्ज किए गए हैं। भागवत ने कहा, 'भय के इस चक्र में न फंसें कि भारत में इस्लाम खतरे में है। उन्होंने कहा कि देश में एकता के बिना विकास संभव नहीं है। आरएसएस प्रमुख ने जोर देकर कहा कि एकता का आधार राष्ट्रवाद और पूर्वजों का गौरव होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिन्दू-मुस्लिम संघर्ष का एकमात्र समाधान 'संवाद है, न कि 'विसंवाद। भागवत ने कहा, 'हिन्दू-मुस्लिम एकता की बात भ्रामक है क्योंकि वे अलग नहीं, बल्कि एक हैं। सभी भारतीयों का डीएनए एक है, चाहे वे किसी भी धर्म के हों। उन्होंने कहा, 'हम एक लोकतंत्र में हैं। यहां हिन्दुओं या मुसलमानों का प्रभुत्व नहीं हो सकता। यहां केवल भारतीयों का वर्चस्व हो सकता है। भागवत ने अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए कहा कि वह न तो कोई छवि बनाने के लिए कार्यक्रम में शामिल हुए हैं और न ही वोट बैंक की राजनीति के लिए। उन्होंने कहा कि संघ न तो राजनीति में है और न ही यह कोई छवि बनाए रखने की चिंता करता है। आरएसएस प्रमुख ने कहा, 'यह (संघ) राष्ट्र को सशक्त बनाने और समाज में सभी लोगों के कल्याण के लिए अपना कार्य जारी रखता है।
हिन्दुस्तान निश्चित रूप से एक खूबसूरत देश है। इस खूबसूरती को बरकरार रखने के लिए कई लोग अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यहां की विविधताएं ही लोगों को एक धागे में पिरो कर रखती हैं। अभी हाल ही में एक खबर सुकून देगी। पश्चिम बंगाल के रहने वाले गरीब मुस्लिम शख्स ने काली मंदिर बनाने के लिए अपनी जमीन दान दे दी। इस खबर के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर चर्चा हो रही है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के भीमपुर गांव में करीब 450 लोग रहते हैं, जिसमें 150 लोग मुस्लिम परिवार के हैं। गांव में स्थित एक खाली जगह में काली मां की पूजा प्रत्येक साल होती है। चूंकि यह क्षेत्र बांग्लादेश की सीमा के अंतर्गत आता है। ऐसे में बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स से इजाजत लेनी पड़ती है। इस बार बीएसएफ ने इजाजत नहीं दी। इस समस्या का हल गांव के मुस्लिम समुदाय के व्यक्ति हनन मंडल ने निकाला। उन्होंने अपनी खाली पड़ी जमीन को हिन्दू समुदाय को दे दी, ताकि काली पूजा आसानी से हो सके। रिटायर्ड प्रशासनिक अधिकारी नजीब जंग ने भी कहा था कि सबका खून हिंदुस्तान की मिट्टी में है। भागवत के संबोधन को लेकर उन्होंने कहा, भागवतजी ने अपने विचार साफ किए, उन्होंने स्पष्टीकरण भी दिया है। मुझे 1985-86 याद आता है। जहां दिमाग है उसे खोला जाए। भागवत ने कहा, सब एक ही डीएनए से आते हैं, यह राजनीतिक बयान नहीं है, हिंदुत्व का बयान नहीं है। हिंदु का बयान है, इस बयान की हमें जरूरत थी।
हनन मंडल के इस कार्य से पूरे गांव में खुशी की लहर फल गयी थी।। हिन्दू समुदाय के लोग कहते हैं कि यही हमारी एकता है। जो नेता लोग हमें बांटने की कोशिश कर रहे हैं। उनके लिए ये एक मिसाल है। देखा जाए तो ये एक वाकई में धार्मिक मिसाल है। हिंदुस्तान का एकजुट होना जरूरी है, हमारा एकजुट होना जरूरी है। (हिफी)

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बुन्देलखण्ड में जय जवान जय किसान

Posted: 20 Nov 2021 07:21 AM PST

बुन्देलखण्ड में जय जवान जय किसान

(डॉ. दिलीप अग्निहोत्री-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)
प्रधानमंत्री की बुंदेलखंड यात्रा विकास और आत्मनिर्भर भारत अभियान की दृष्टि से महत्वपूर्ण रही। इस दौरान झांसी में जय जवान और महोबा में जय किसान का उद्घोष चरितार्थ हुआ। तीन कृषि कानून वापसी की घोषणा के कुछ देर बाद प्रधानमंत्री बुंदेलखंड की धरती पर पहुंचे। यहां के किसानों का दर्द अलग रहा है। दशकों तक ये किसान पानी के अभाव में पलायन को विवश रहे है। अपने मवेशियों को लावारिस छोड़ देने के अलावा इनके पास कोई विकल्प नहीं है। विगत करीब पांच वर्षों में बुंदेलखंड के विकास की अनेक योजनाओं का क्रियान्वयन सुनिश्चित हुआ। सिंचाई व हर घर नल से जल योजना को अभियान के रूप में संचालित किया गया। इस क्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने महोबा में तीन हजार दो सौ चैसठ करोड़ रुपये से अधिक लागत की नौ विकास परियोजनाओं का लोकार्पण किया। दो हजार छह सौ करोड़ रुपये से अधिक लागत की अर्जुन सहायक परियोजना सहायक सिंचाई परियोजनाओं में भवानी बांध परियोजना, रतौली बांध परियोजना एवं मसगांव चिल्ली स्पिंरकलर सिंचाई परियोजनाओं का लोकार्पण किया गया।
महोबा में मार्ग सुदृढ़ीकरण, विकासखण्ड कबरई में पेयजल परियोजना, कीरत सागर एवं मदन सागर में पर्यटन विकास की परियोजना तथा विकासखण्ड जैतपुर में राजकीय इण्टर कॉलेज का लोकार्पण हुआ। सिंचाई परियोजनाओं से महोबा, बांदा, हमीरपुर एवं ललितपुर जनपदों में सिंचाई की बेहतर सुविधाएं सुलभ होंगी। इससे यहां के फसल चक्र में व्यापक परिवर्तन आएगा। यहां के कृषक अब ज्वार, बाजरा बोने अथवा खेत खाली छोड़ने के स्थान पर धान, गन्ना, मूंगफली, सरसों, गेहूं आदि की खेती आसानी से कर सकेंगे। इस प्रकार वे अपनी फसल से कहीं ज्यादा पैदावार एवं कहीं ज्यादा उसका मूल्य प्राप्त कर सकेंगे। नरेंद्र मोदी ने कहा कि बुन्देल, परिहार और चंदेल राजाओं के काल में यहां ताल तालाब बनवाये गए थे। वह जल संरक्षण का एक उदाहरण है। सिंध, बेतवा, धसान, केन और नर्मदा जैसी नदियां यहां है। पूर्ववर्ती सरकारों की कार्यपद्धति के कारण अर्जुन सहायक परियोजना वर्षों तक अधूूरी पड़ी रही। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रदेश में सरकार बनने के बाद इस परियोजना को पूरा किया गया। मसगांव, चिल्ली स्प्रिंकलर योजना जैसी आधुनिक तकनीक से सिंचाई की सुविधा बढ़ेंगी। केन बेतवा लिंक का समाधान भी सभी पक्षों से संवाद कर केन्द्र सरकार ने निकाला। केन बेतवा लिंक से यहां के लाखों किसानों को लाभ मिलेगा। केन्द्र सरकार ने बीज से लेकर बाजार तक हर स्तर पर किसानों के हित में भी कदम उठाए हैं। बीते सात वर्षों में साढ़े सोलह सौ से अधिक अच्छी क्वालिटी के बीज तैयार किए गए हैं। इनमें से अनेक बीज कम पानी में अधिक पैदावार देते हैं।
बुन्देलखण्ड की मिट्टी के अनुकूल मोटे अनाज, दलहन और तिलहन पर विशेष फोकस किया जा रहा है। विगत वर्षों में दलहन और तिलहन की रिकॉर्ड खरीद की गई है। सरसों, मसूर जैसी अनेक दालों के लिए चार सौ रुपए प्रति कुन्तल तक न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाया गया है। देश को खाद्य तेल में आत्मनिर्भर बनाने के लिए राष्ट्रीय मिशन शुरु किया गया है। इससे विदेश से खाद्य तेल के आयात पर हर वर्ष व्यय होने वाले अस्सी हजार करोड़ रुपए देश के किसानों के पास आएंगे। किसान सम्मान निधि के अन्तर्गत अब तक एक लाख बासठ हजार करोड़ रुपए सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजे गए हैं। छोटे किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा से जोड़ा गया है। बुन्देलखण्ड एक्सप्रेस वे और उत्तर प्रदेश डिफेंस इण्डस्ट्रियल कॉरिडोर यहां के विकास को बुलंद करेंगे। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अर्जुन सहायक परियोजना महोबा, बांदा तथा हमीरपुर की लगभग ढाई लाख एकड़ भूमि को सिंचाई की सुविधा मिलेगी। चार लाख जनता को पेयजल उपलब्ध होगा। विगत सात वर्षों में बारह सिंचाई परियोजनाएं पूर्ण की गईं। हर घर नल परियोजना को लागू किया गया।
रानी लक्ष्मी बाई की जयंती पर उनके महल से जय जवान का नारा गुंजा। नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रीय रक्षा समर्पण पर्व पर तीनों सेनाओं को देश में ही डिजाइन और विकसित हथियार सौंपे। इसमें सबसे प्रमुख स्वदेश निर्मित लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर एलसीएच है। स्वदेशी रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए चार सौ करोड़ रुपये की उत्तर प्रदेश रक्षा उद्योग गलियारा परियोजना का भी शिलान्यास किया। यह परियोजना भारत डायनेमिक लिमिटेड को सौंपी गई है। इसके अंतर्गत टैंकरोधी लक्षित मिसाइलों का उत्पादन संयंत्र तैयार किया जाएगा। नरेंद्र मोदी ने कहा कि लंबे समय से भारत को दुनिया के सबसे बड़े हथियार खरीदार देशों में गिना जाता रहा है। आज देश का मंत्र मेक इन इंडिया मेक फॉर वर्ल्ड है। भारत अपनी सेनाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए काम कर रहा है। सेनाओं की ताकत बढ़ने के साथ ही भविष्य में देश की रक्षा के लिए सक्षम युवाओं के लिए जमीन भी तैयार हो रही है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दावा किया कि जल्दी ही नब्बे प्रतिशत रक्षा उपकरण भारत में ही बनने लगेंगे। एलसीएच दुनिया का एकमात्र अटैक हेलीकॉप्टर है जो हथियारों और ईंधन के काफी भार के साथ पांच मीटर की ऊंचाई पर लैंडिंग और टेक ऑफ कर सकता है। हेलीकॉप्टर बीस एमएम बुर्ज गन,सतत एमएम रॉकेट लॉन्चिंग सिस्टम, एयर टू ग्राउंड और एयर टू एयर लॉन्चिंग मिसाइल सिस्टम से लैस है। एलसीएच दो इंजन वाला हेलीकॉप्टर पांच से आठ टन वर्ग का लड़ाकू हेलीकॉप्टर है। एलसीएच में प्रभावी लड़ाकू भूमिकाओं के लिए उन्नत तकनीकों और चुपके सुविधाओं को शामिल किया गया है। इसे दुश्मन की वायु रक्षा, काउंटर विद्रोह, खोज और बचाव, टैंक विरोधी, काउंटर सर्फेस फोर्स ऑपरेशंस इत्यादि जैसी भूमिकाओं को पूरा करने के लिए डिजाइन किया गया है।
प्रधानमंत्री ने नौसेना प्रमुख करमबीर सिंह को एडवांस इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट शक्ति सौंपा। इसे रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन डीआरडीओ की हैदराबाद में स्थित इलेक्ट्रॉनिक्स अनुसंधान प्रयोगशाला डीएलआरएल ने डिजाइन और विकसित किया है। यह प्रणाली भारतीय नौसेना की पिछली पीढ़ी के ईडब्ल्यू सिस्टम की जगह लेगी। मिसाइल हमलों के खिलाफ भारतीय नौसेना के जहाजों की रक्षा के लिए इस सिस्टम को वाइडबैंड इलेक्ट्रॉनिक सपोर्ट मेजर्स ईएसएम और इलेक्ट्रॉनिक काउंटर मेजर ईसीएम के साथ एकीकृत किया गया है। शक्ति ईडब्ल्यू प्रणाली समुद्री युद्ध के मैदान में आधुनिक रडार और जहाज-रोधी मिसाइलों के खिलाफ रक्षा की एक इलेक्ट्रॉनिक परत प्रदान करेगी। पहली शक्ति प्रणाली आईएनएस विशाखापत्तनम पर स्थापित की गई है और इसे स्वदेशी विमान वाहक आईएनएस विक्रांत पर भी स्थापित किया जा रहा है। वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल चंडी प्रसाद मोहंती को स्वदेश में विकसित स्विच वन यूएवी ड्रोन सौंपा। यह भारत की सीमाओं पर निगरानी के लिए कठोर वातावरण और उच्च ऊंचाई के तहत भारतीय सेना के सबसे अधिक मांग वाले निगरानी अभियानों का समर्थन करेगा। स्वदेश में विकसित एमआर ट्वेंटी हेक्साकॉप्टर ड्रोन भी सौंपा गया। इससे आगे के क्षेत्रों में ऊंचाई पर तैनात सैनिकों को सुविधा पहुंचाई जाएगी।
प्रधानमंत्री ने झांसी किला परिसर कार्यक्रम में तीन हजार चार सौ पच्चीस करोड़ रुपए की परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। (हिफी)हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag

हिन्दी व भारतीय भाषाओं की प्रतिष्ठा

Posted: 20 Nov 2021 07:13 AM PST

हिन्दी व भारतीय भाषाओं की प्रतिष्ठा

(हृदयनारायण दीक्षित-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)
ध्वनि का रूप नहीं होता। संसार रूपों से भरापूरा है। समाज रूप को नाम देता है। नाम शब्द ध्वनि होते हैं। भारतीय चिंतन में शब्द को ब्रह्म कहा गया है। प्रत्येक शब्द का अर्थ होता है। प्रत्येक शब्द ध्वनि होता है। ध्वनि के रूप का अर्थ निश्चित हो जाने के बाद शब्द का जन्म होता है। शब्दों के व्यवस्थित प्रयोग से भाषा बनती है। भाषा सामाजिक सम्पदा है। भाषा सामाजिक सरोकारों का उपकरण है। भाषा समाज गढ़ने का भी माध्यम है। समाज ही भाषा गढ़ता है। भाषा संस्कृति की संवाहक है। शब्द भाषा के घटक हैं। भाषा और शब्द मूल्यवान हैं। वृहदारण्यक उपनिषद में शब्द को ब्रह्म कहा गया है। ऐतरेय उपनिषद् में वाणी के उद्भव का विवरण है। शब्द की क्षमता विराट है। पुराणों के अनुसार ईश्वर को भी शब्द से प्राप्त किया जा सकता है। वैदिक स्तुतियाँ शब्द ही हैं। बाइबिल के अनुसार प्रारम्भ में शब्द ही था। भाषा मनुष्य द्वारा रचित सबसे बड़ी सम्पदा है। भाषा से इतिहास है, भाषा से संस्कृति है, भाषा से प्रीति है और भाषा से सभ्यता। हिन्दी भारत की स्वाभाविक प्रीति है। राष्ट्र हिन्दी में व्यक्त होता है, हिन्दी में दुखी होता है और हिन्दी में ही आनन्दित। हिन्दी भारत की राजभाषा है। लेकिन दुर्भाग्य से हिन्दी को वह स्थान नहीं मिला जिसका उसे अधिकार है। यहां अंग्रेजी का आकर्षण है।
अंग्रेजी के वर्चस्व और आकर्षण से आह्त महात्मा गाँधी ने लिखा था पृथ्वी पर हिन्दुस्तान ही एक ऐसा देश है जहाँ माँ-बाप अपने बच्चों को अपनी मातृभाषा के बजाय अंग्रेजी पढ़ाना पसंद करेंगे। अंग्रेजी को अन्तर्राष्ट्रीय भाषा कहा जाता है, लेकिन भारत में एक प्रतिशत लोग भी अंग्रेजी नहीं जानते। जापान, रूस, चीन आदि देशों में अंग्रेजी की कोई हैसियत नहीं है। भारत के बाहर अमेरिका, पाकिस्तान, नेपाल, इण्डोनेशिया, बांग्लादेश, फ्रंास, जर्मनी, सउदी अरब, रूस आदि देशों में लाखों हिन्दी भाषी हैं। एशिया महाद्वीप के 48 देशों में ही भारत छोड़ किसी भी देश की मुख्य भाषा अंग्रेजी नहीं है। अजर वैजानकी भाषा, अजेरी और तुर्की, अरमेनियम की अरमेनियम, इजराइल की हिब्रू, इरान की फारसी, सउदी अरब, सीरिया, जार्डन, यमन, बहरीन, कुवैत की भाषा अरबी है। चीन, ताइवान, सिंगापुर की मंदारिन दोनों कोरिया की कोरियाई, लंका की सिंहली है।
भारतीय संविधान सभा में राजभाषा पर लम्बी बहस चली थी। पंडित नेहरू ने कहा था हमने अंगे्रजी इस कारण स्वीकार की कि वह विजेता की भाषा थी। अंग्रेजी चाहे कितनी ही अच्छी हो, किन्तु उसे हम सहन नहीं कर सकते।" बेशक अंग्रेजी विजेता की भाषा थी। 1947 के बाद हिन्दी भी विजेता की भाषा है। अंग्रेज जीते। अंग्रेजी लाये। हम भारत के लोग स्वाधीनता संग्राम जीते लेकिन अपनी मातृ भाषा को प्रतिष्ठित नहीं कर पाये। 12 सितम्बर, 1949 को एन0जी0 आयंगर ने संविधान सभा में हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने का प्रस्ताव रखा। 15 वर्ष अंग्रेजी को जारी रखने का कारण बताया। कहा कि हम अंग्रेजी को एकदम नहीं लागू कर सकते। हमें यह मानना चाहिए कि हिन्दी समुन्नत भाषा नहीं है। दुर्भाग्य से राजभाषा के प्रस्तावक आयंगर ही हिन्दी को कमतर बता रहे थे। स्वाधीनता संग्राम की भाषा हिन्दी थी। अंग्रेज स्वाभाविक ही अंग्रेजी को वरीयता दे रहे थे। प्रत्येक भाषा के संस्कार होते हैं। भारत में अंग्रेजी भाषा के साथ विदेशी संस्कार भी आए। प्रभु वर्ग के मन वचन में अंग्रेजी का आकर्षण बढ़ा। गाँधी जी ने कहा था कि अंग्रेजी ने हिन्दुस्तानी राजनीतिज्ञों के मन में घर कर लिया है। मैं इस बात को अपने देश और मानवता के प्रति अपराध मानता हँू।" गाँधी जी ने बी.बी.सी. पर कहा दुनिया वालों को बता दो, गाँधी अंग्रेजी नहीं जानता।
अंग्रेजी हिन्दी की तरह व्यवस्थित व्याकरण अनुशासित भाषा नहीं है। हिन्दी में दुनिया की श्रेष्ठ भाषा संस्कृत के संस्कार है। अमेरिकी भाषा वैज्ञानिक ब्लूम फील्ड ने 'लैंगवेज' में लिखा था कि यार्कशाय के व्यक्ति की अंग्रेजी को अमेरिकी नहीं समझ पाते। भाषाविद चिंतक डाॅ0 रामविलास शर्मा ने भाषा और समाज में लिखा है कि अंग्रेजी के भारतीय प्रोफेसरों को हालीवुड की फिल्म दिखाइए। पूछिए कि वे कितना समझे। व्याकरण, लिपि और शब्द ध्वनि की भिन्नता के कारण अंग्रेजी बोलने के अनेक ढंग हैं लेकिन हिन्दी सुबोध है।
भाषा संस्कृति की संवाहक होती है। गाँधी जी ने लखनऊ में अखिल भारतीय भाषा सम्मेलन में कहा मेरी हिन्दी टूटी-फूटी है, मैं टूटी-फूटी हिन्दी ही बोलता हँू। अंग्रेजी बोलने में मुझे पाप लगता है। संविधान सभा में सेठ गोविन्ददास ने हिन्दी का पक्ष रखा। आर.बी. धुलेकर ने हिन्दी को राष्ट्रभाषा बताया। मैं कहता हँू कि वह राजभाषा है। राष्ट्रभाषा भी। अंग्रेजी की टक्कर हिन्दी से थी, हिन्दी की टक्कर भारतीय भाषाओं से नहीं है। सभी भारतीय भाषाएं भारतीय संस्कृति की संवाहक हैं। अंग्रेजी राजकाज की भाषा थी और हिन्दी राष्ट्रभाषा। अंग्रेजी भारतीय प्रीति-रीति-नीति और संस्कृति की भाषा नहीं है।
जीवन की सभी गतिविधियों में न्यायपालिका का काम अनिवार्य है। राष्ट्र जीवन की सभी गतिविधियों में न्यायपालिका की उपस्थिति है। न्याय किसी भी समाज का उच्चतम क्षेत्र होता है। व्यथित वादी देश की किसी भी भाषा में अपना अभ्यावेदन दे सकते हैं। यह अधिकार संविधान ने दिया है। न्यायालय कार्यवाही की भाषा मातृभाषा ही होनी चाहिए। इससे वादी व प्रतिवादी अपना पक्ष आसानी से समझ जाते हैं। न्यायालय की कार्यवाही उनकी समझ में आसानी से आती है। अंगेे्रजी की न्यायिक कार्यवाही वादी प्रतिवादी नहीं समझ सकते। न्यायालयों में मातृभाषा का चलन जरूरी है।
इंग्लैण्ड में पहले पार्लियामेंट नहीं थी। सन् 1300 तक विधि और प्रशासन की भाषा लैटिन थी फिर फ्रेंच भाषा का प्रयोग होने लगा। एडवर्ड तृतीय के समय लोग अपना प्रतिवेदन अंग्रेजी में देते थे, लेकिन अधिनियम लैटिन या फ्रेंच में ही बनते थे। धीरे-धीरे अंग्रेजी ने फ्रेंच और लैटिन को विस्थापित किया। ब्रिटेन में भी न्यायपालिका के क्षेत्र में अंग्रेजी को काफी संघर्ष करना पड़ा। क्रामवेल के समय माँग उठी कि विधि और न्याय के क्षेत्र में अंग्रेजी भाषा का ही प्रयोग हो। सन् 1650 में तय हुआ कि न्यायालयों की भाषा अंग्रेजी हो। ब्रिटेन में भी अंग्रेजी भाषा के न्यायालयों में प्रवेश के लिए काफी संघर्ष चला था। हिन्दी भाषा के लिए हम सबके प्रयास भी वैसे ही है। संविधान के अनुसार जब तक संसद विधि द्वारा उपबंध न करे तब तक उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों में तथा विधेयकों, अधिनियमों की भाषा अंग्रेजी रहेगी। अनुच्छेद-348 के अनुसार उच्चतम न्यायालय, उच्च न्यायालय संसद के सदन व राज्य विधानमंडल के सदन में पुरःस्थापित विधेयक के अधिकृत पाठ राष्ट्रपति व राज्यपाल के अध्यादेश अंग्रेजी में होंगे।
अनुच्छेद-348 के खण्ड-2 में कहा गया है कि "खण्ड-1 के खण्ड-क में किसी बात के होते हुए भी किसी राज्य का राज्यपाल, राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से उस उच्च न्यायालय की कार्यवाहियों में, जिसका मुख्य स्थान उस राज्य में है हिन्दी भाषा का या उस राज्य के शासकीय प्रयोजनाओं के लिए प्रयोग होने वाली किसी अन्य भाषा का प्रयोग प्राधिकृत कर सकेगा।" इसलिए उच्च न्यायालयों में अंग्रेजी के बजाय हिन्दी या किसी क्षेत्र विशेष में बोलने वाली भाषा का उपयोग संविधान सम्मत है। यही समय की माँग है। उ.प्र. के वाराणसी में इसी माँग को लेकर एक सम्मेलन हुआ। इसका उद्घाटन केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया। हिन्दी सहित सभी भारतीय भाषाओं की प्रतिष्ठा प्रशंसा हुई। (हिफी)

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कृषि कानून और पंजाब की सियासत

Posted: 20 Nov 2021 07:10 AM PST

कृषि कानून और पंजाब की सियासत

(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सभी को चैंकाते हुए 19 नवम्बर को गुरुनानक जयंती के दिन तीनों विवादास्पद कृषि कानून वापस लेने की घोषणा कर दी। सरकार के इस फैसले का पंजाब की राजनीति पर सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ेगा। किसान आंदोलन मंे पंजाब और हरियाणा के किसानों का ही योगदान सबसे ज्यादा था। इसीलिए केन्द्र सरकार मंे शामिल पंजाब के शिरोमणि अकाली दल ने साथ छोड़ दिया था। हरसिमरत कौर ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि बाद मंे बीएसएफ को ज्यादा अधिकार देने का मामला भी शिरोमणि अकाली दल ने उठाया था। इसी तरह कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह स्वयं ट्रैक्टर रैली कर चुके थे। उन्होंने किसानों को कांग्रेस के साथ जोड़ रखा था। नवजोत सिद्धू को लेकर कैप्टन का विरोध बढ़ा और उन्होंने कांग्रेस छोड़कर नयी पार्टी बना ली है। वे चुनाव में भाजपा का साथ देने की बात भी कह चुके हैं। खुलकर साथ इसीलिए नहीं दे रहे थे कि किसानों का आंदोलन जारी था। अब वह कह रहे हैं कि भाजपा के साथ आने मंे कोई गुरेज नहीं है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिद्धू भी मोदी के इस कदम का स्वागत कर रहे हैं। राज्य में एक तीसरा पक्ष आम आदमी पार्टी का है। इस पार्टी के नेता अरविन्द केजरीवाल भी सरकार के कदम का स्वागत कर रहे हैं। इसलिए शिरोमणि अकाली दल और कैप्टन अमरिंदर सिंह का साथ भाजपा को मिल सकता है जो चैथे स्थान से काफी ऊपर उठ सकती है। मोदी का यह फैसला पंजाब की राजनीति में काफी बड़ा परिवर्तन कर सकता है।
मोदी सरकार की ओर से पिछले साल लागू किए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ हो रहे आंदोलन में बड़ी संख्या में पंजाब के किसान थे। वहीं, इस आंदोलन ने सबसे ज्यादा उथल-पुथल मचाई। मोदी सरकार की ओर से 19 नवम्बर को गुरुनानक जयंती पर कृषि कानूनों को वापस लिए जाने की घोषणा के बाद पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी ट्वीट कर इस घोषणा पर खुशी जताई। कांग्रेस से अलग हो चुके वरिष्ठ नेता ने गुरु नानक जयंती के मौके पर काले कृषि कानूनों को वापस लेने पर पीएम मोदी का आभार जताया। अमरिंदर सिंह ने कृषि आंदोलन के दौरान कई बार प्रधानमंत्री मोदी और सरकार में शीर्ष के वरिष्ठ मंत्रियों से मुलाकात की थी। कैप्टन ने अपने ट्वीट में लिखा कि बेहतरीन खबर! मैं पीएम मोदी का आभारी हूं कि उन्होंने गुरुनानक जयंती के पवित्र अवसर पर हर पंजाबी की मांग को रखते हुए 3 काले कानूनों को वापस ले लिया। मैं आशान्वित हूं कि केंद्र सरकार किसानों के विकास के लिए आगे काम करती रहेगी। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बीते अगस्त में प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की थी और उनसे कृषि कानूनों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करने का अनुरोध किया था। पीएम मोदी से मुलाकात के दौरान उन्हें दो अलग-अलग पत्र भी सौंपे थे। इस पत्र में उन्होंने तीन कृषि कानूनों की तत्काल समीक्षा और रद्द करने का आह्वान करते हुए कहा था कि इन तीनों कानून को लेकर पंजाब और अन्य राज्यों में किसानों के बीच व्यापक आक्रोश है। साथ ही किसानों को उन लोगों की श्रेणियों में शामिल करने की मांग की थी जो मुफ्त कानूनी सहायता प्राप्त करने के योग्य हैं। बता दें कि सरकार ने किसान नेताओं से कई चरणों में बातचीत की थी। हर बार सरकार का यही कहना था कि वो कानूनों में संशोधन कर देगी लेकिन उन्हें वापस नहीं करेगी।
पंजाब के कद्दावर कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने प्रतिक्रिया देते हुए इसे किसान मोर्चा के सत्याग्रह को मिली ऐतिहासिक कामयाबी का परिणाम बताया है। पंजाब राज्य कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिद्धू ने ट्वीट में लिखा, काले कानूनों को रद्द करना सही दिशा में एक कदम।किसान मोर्चा के सत्याग्रह को ऐतिहासिक सफलता मिली। आपके बलिदान का यह परिणाम है। पंजाब में एक रोड मैप के माध्यम से खेती को पुनर्जीवित करना पंजाब सरकार के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। गौरतलब है कि देश के नाम अपने संबोधन में पीएम ने इनकानूनों को वापस लेने का ऐलान करते हुए कहा कि हमारी सरकार किसानों के हित में हरसंभव प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि कृषि कानून छोटे किसानों की मदद के लिए लाए गए थे।
तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों को पास हुए एक साल पूरे हो गए हैं। 17 सितंबर, 2020 को किसानों के हितों के मद्देनजर नरेंद्र मोदी सरकार ने 3 केंद्रीय कृषि कानून पास किए थे। इस बीच तीनों कृषि कानूनों को पास हुए एक साल पूरे होने पर शिरोमणि अकाली दल ने काला दिवस मनाया।
शिरोमणि अकाली दल की अगुवाई में संसद तक एक मार्च भी निकाला। मार्च के मद्देनजर दिल्ली पुलिस ने कई जगहों पर बैरिकेडिंग हुई थी, जिससे जगह-जगह रास्ते बंद रहे। नई दिल्ली में तो धारा 144 लागू कर दी गई थी। ऐसे में लोगों को जगह-जगह जाम का सामना करना पड़ा। वहीं, नियमों का उल्लंघन करने पर दिल्ली पुलिस ने 11 अकाली कार्यकर्ताओं पर मामला दर्ज किया था। अकाली दल के कार्यकर्ताओं ने रकाबगंज गुरुद्वारा से संसद भवन तक मार्च निकाला है। इस मार्च में पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री और अकाली दल नेता सुखबीर सिंह बादल भी शामिल हुए। मार्च में पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर ने भी शिरकत की थी। शिरोमणि अकाली दल के प्रतिनिधिमंडल ने तिकुनिया कांड में काल कवलित हुए लवप्रीत के घर जाकर परिवारीजन से मुलाकात की और शोक जताया। प्रतिनिधिमंडल ने परिवार को न्याय मिलने तक सहयोग देने व मदद करने का भी आश्वासन दिया। केंद्रीय मंत्री रही हरसिमरत कौर बादल ने किसानों की हत्या को घृणित बताते हुए प्रदेश सरकार पर लापरवाही से काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जबतक केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अपने पद से इस्तीफा नहीं दे देते हैं तब तक पीड़ितों को न्याय नहीं मिल सकता है। उन्होंने सरकार द्वारा दिए गए मुआवजे को भी अपर्याप्त बताया। पंजाब में सीमा सुरक्षा बलके अधिकार क्षेत्र के विस्तार को लेकर की शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने केंद्र सरकार के इस फैसले का विरोध किया था। सुखबीर सिंह ने पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ चंडीगढ़ राजभवन के बाहर विरोध प्रदर्शन किया है। अब, प्रधानमंत्री मोदी की तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा से पंजाब की राजनीति का परिदृश्य ही बादल गया है। शिरोमेण अकाली दल और कैप्टन अमरिंदर सिंह भाजपा के साथ खड़े हो सकते हैं।
उधर, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरिवंद केजरीवाल कहते हैं इन कानूनों को वापस लेने की मांग पर अड़े किसानों ने आंदोलन करते हुए अपने 700 से ज्यादा भाईयों को खोया, उन सभी किसानों का बलिदन अमर रहेगा। केजरीवाल ने यह भी कहा कि आने वाली पीढ़ियां यह याद रखेंगी कि किस तरह देश के किसानों ने किसानी और किसानों को बचाने के लिए अपनी जान की बाजी लगा दी थी। इसका किसानों पर कोई असर नहीं दिख रहा है क्योंकि उन्होंने मोदी की घोषणा का स्वागत किया है। (हिफी)

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अफगानिस्तान में हावी हो रहा है इस्लामिक स्टेट

Posted: 20 Nov 2021 07:07 AM PST

अफगानिस्तान में  हावी हो रहा है इस्लामिक स्टेट

काबुल। अफगानिस्तान पर कब्जा करने वाला तालिबान देश से नियंत्रण खोता जा रहा है। देश के लगभग हर प्रांत में आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट की मौजूदगी बढ़ती जा रही है। अफगानिस्तान के लिए यूएन की राजदूत ने बताया कि इस्लामिक स्टेट तेजी से बढ़ रहा है। अब यह सभी 34 प्रांतों में मौजूद है संयुक्त राष्ट्र की विशेष राजदूत डेबोरा लियोन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को बताया कि तालिबान इस्लामिक स्टेट-खोरासान (आईएसकेपी) के विस्तार को रोकने के लिए संदिग्ध आईएसकेपी आतंकियों की गिरफ्तारी या हत्या कर रहा है।
लियोन ने बताया, 'यह एक ऐसा क्षेत्र है, जिसपर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को सबसे अधिक ध्यान देने की जरूरत है।' उन्होंने ये बात ऐसे वक्त में कही है, जब तालिबान के कट्टर दुश्मन इस्लामिक स्टेट ने काबुल में शिया मुस्लिमों पर दो घातक हमले किए हैं। जिसमें कम से कम एक व्यक्ति की मौत हुई है, जबकि छह अन्य लोग घायल हुए हैं। यूएन की राजदूत ने कहा कि 'तालिबान आईएसकेपी के बढ़ते प्रभाव को रोकने में असमर्थ है। वह पहले कुछ प्रांतों या राजधानी तक ही सीमित था लेकिन अब लगभग सभी प्रांतों में मौजूद है और तेजी से सक्रिय हो रहा है।'

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पाक को धार्मिक उग्रवाद से खतरा: फवाद चैधरी

Posted: 20 Nov 2021 07:04 AM PST

पाक को धार्मिक उग्रवाद से खतरा: फवाद चैधरी

इस्लामाबाद। पाकिस्तान के सूचना मंत्री फवाद चैधरी ने देश के दुश्मनों को लेकर बड़ा बयान दिया है। फवाद चैधरी ने कहा कि इस समय पाकिस्तान को भारत, अमेरिका या फिर किसी और देश से खतरा नहीं है। पाकिस्तान को देश के भीतर ही धार्मिक उग्रवाद से सबसे बड़ा खतरा है। उन्होंने ये बात इस्लामाबाद में आतंकवाद के मसले पर हुई कॉन्फ्रेंस के दौरान कही।
चैधरी ने कहा कि उग्रवादी ताकतें देश को तोड़ने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने कहा, 'हमें भारत से कोई संभावित खतरा नहीं है। हमारे पास दुनिया की छठी सबसे बड़ी सेना है, हम एक परमाणु शक्ति हैं और भारत हमारा मुकाबला नहीं कर सकता।' फवाद चैधरी ने आगे कहा, 'हमें अमेरिका से कोई खतरा नहीं है, यूरोप से कोई खतरा नहीं है, हमें अगर सबसे बड़ा खतरा है, तो वो खुद (उग्रवाद के कारण) से है।' उन्होंने कहा कि करीब 300 साल पहले पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा, पंजाब और अन्य क्षेत्रों में कोई धार्मिक उग्रवाद नहीं था, वह सूफियों की सरजमीं थी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के इन इलाकों में धार्मिक कट्टरता नहीं थी, जो आज के समय में देखने को मिल रही है। मंत्री ने खेद जताते हुए कहा कि आधुनिक पाकिस्तान को उग्रवाद से एक गंभीर खतरे का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने यह स्वीकार किया कि इस खतरे का मुकाबला करने के लिए अब तक किए गए उपाय काफी नहीं हैं। फवाद चैधरी ने कहा कि ना तो सरकार और ना ही राज्य समस्या से निपटने के लिए पर्याप्त रूप से तैयार थे और सरकार को तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) से निपटने के लिए पीछे हटना पड़ा।

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सवा घंटे कमला हैरिस बनीं अमेरिका की राष्ट्रपति

Posted: 20 Nov 2021 06:59 AM PST

सवा घंटे कमला हैरिस बनीं अमेरिका की राष्ट्रपति

वाशिंगटन। अमेरिका की उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने कुछ देर के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति पद की जिम्मेदारी संभाली। व्हाइट हाउस ने कहा कि हैरिस के पास कुल एक घंटे 25 मिनट तक राष्ट्रपति पद का अधिकार रहा। इस दौरान राष्ट्रपति जो बाइडेन नियमित कोलोनस्कॉपी जांच कराने के लिए वाल्टर रीड नेशनल मिलिट्री मेडिकल सेंटर में भर्ती थे। व्हाइट हाउस के प्रेस कार्यालय ने कहा कि सत्ता के अस्थायी हस्तांतरण की घोषणा करने वाले कांग्रेस को आधिकारिक पत्र सुबह 10.10 बजे भेजा गया थे।
व्हाइट हाउस ने एक बयान में कहा, राष्ट्रपति ने 11 बजकर 35 मिनट पर अपने पद की जिम्मेदारियों को फिर से संभाल लिया। बाइडन (78) ने दिसंबर 2019 में अपने शरीर की पूरी जांच कराई थी और तब चिकित्सकों ने उन्हें स्वस्थ और राष्ट्रपति का कर्तव्य सफलतापूर्वक निभाने के लिए उपयुक्त पाया था।
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और प्रथम महिला जिल बाइडेन ने सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव की 552वीं जयंती पर सिख समुदाय को शुभकामनाएं दीं और कहा कि समानता, शांति और सेवा के उनके दूरदर्शी संदेश आज उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितने कि पांच सदी पहले थे। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag

समझौतों का उल्लंघन कर रहा बीजिंग: जयशंकर

Posted: 20 Nov 2021 06:49 AM PST

समझौतों का उल्लंघन कर रहा बीजिंग: जयशंकर

सिंगापुर। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत और चीन अपने संबंधों को लेकर विशेषतौर पर खराब दौर से गुजर रहे हैं क्योंकि बीजिंग ने समझौतों का उल्लंघन करते हुए कुछ ऐसी गतिविधियां कीं जिनके पीछे उसके पास अब तक विश्वसनीय स्पष्टीकरण नहीं है। विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि चीन के नेतृत्व को इस बात का जवाब देना चाहिए कि द्विपक्षीय संबंधों को वे किस ओर ले जाना चाहते हैं। भारत ने चीन को बता दिया है कि शांति और स्थिरता बहाली के लिए पूर्वी लद्दाख से सैनिकों को वापस बुलाने की प्रक्रिया में प्रगति जरूरी है और संपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने का यही आधार है।
ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में 16 सितंबर को अपने चीनी समकक्ष वांग यी के साथ मुलाकात में जयशंकर ने इस बात पर जोर दिया था कि दोनों पक्षों को पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर अन्य बचे विवाद के मुद्दों को जल्द हल करने की दिशा में काम करना चाहिए और इस दौरान द्विपक्षीय समझौतों और प्रोटोकॉल का पूरी तरह से पालन होना चाहिए। यहां ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमिक फोरम में वृहद सत्ता प्रतिस्पर्धा उभरती हुई विश्व व्यवस्था विषय पर आयोजित गोष्ठी में एक सवाल के जवाब में जयशंकर ने कहा, ''मुझे नहीं लगता कि चीन को इस बारे में कोई संदेह है कि हमारे संबंधों में हम किस मुकाम पर खड़े हैं और क्या गड़बड़ है।

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योग्य पेय पीने पर सकारात्मकता निर्माण होती है ! - शोध का निष्कर्ष

Posted: 20 Nov 2021 04:41 AM PST

'महर्षि अध्यात्म विश्‍वविद्यालय' द्वारा पेय पदार्थों पर शोध लंदन की अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक परिषद में प्रस्तुत !

योग्य पेय पीने पर सकारात्मकता निर्माण होती है ! - शोध का निष्कर्ष

सकारात्मक प्रभामंडलवाले पेय पदार्थों का हम पर विलक्ष्ण सकारात्मक प्रभाव होता है । इसलिए शारीरिक और मानसिक दोनों स्तरों पर स्वास्थ में सुधार होता है और रोगों का संकट अल्प होता है, साथ ही नकारात्मक कष्ट होने की संभावना भी अल्प होती है, ऐसा प्रतिपादन महर्षि अध्यात्म विश्‍वविद्यालय के श्री. शॉन क्लार्क ने किया । लंडन, युनाइटेड किंगडम में आयोजित 'सेवनटीन इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन न्यूट्रिशन एंड हेल्थ' इस अंतरराष्ट्रीय परिषद में वे बोल रहे थे । इस परिषद का आयोजन 'अलाईड एकॅडमीज, यूके' ने किया था । श्री. क्लार्क ने 'पेय पदार्थों का व्यक्ति पर आध्यात्मिक दृष्टि से होनेवाला परिणाम', यह शोधनिबंध प्रस्तुत किया । इस शोधनिबंध के लेखक महर्षि अध्यात्म विश्‍वविद्यालय के संस्थापक परात्पर गुरु डॉ. जयंत बाळाजी आठवलेजी तथा सहलेखक श्री. शॉन क्लार्क हैं ।
महर्षि अध्यात्म विश्‍वविद्यालय की ओर से प्रस्तुत यह 84वां प्रस्तुतीकरण था । महर्षि अध्यात्म विश्‍वविद्यालय की ओर से अब तक 15 राष्ट्रीय और 68 अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक परिषदों में शोधनिबंध प्रस्तुत किए गए हैं । इनमें से 9 अंतरराष्ट्रीय परिषदों में शोधनिबंधों को 'सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार' प्राप्त हुआ है ।
1. श्री. क्लार्क ने अपने प्रस्तुतीकरण में पेय पदार्थों से संबंधित महर्षि अध्यात्म विश्‍वविद्यालय का निम्न शोध प्रस्तुत किया । 'अन्न और पेय पदार्थों में सकारात्मक अथवा नकारात्मक स्पंदन होते हैं । इसलिए उनके सेवन के उपरांत व्यक्ति के प्रभामंडल पर तत्काल उनका परिणाम होता है । महर्षि अध्यात्म विश्‍वविद्यालय ने 8 पेय पदार्थों का व्यक्तियों के प्रभामंडल पर होनेवाले सूक्ष्म परिणाम का अध्ययन किया । 11.4 प्रतिशत अलकोहलवाली रेड वाईन की प्रभामंडल सर्वाधिक नकारात्मक थी । तदुपरांत क्रमश: व्हिस्की, बियर और कोला यह पेय नकारात्मक प्रभामंडलवाली थी । बोतल बंद पानी का प्रभामंडल भी नकारात्मक था । नारियल पानी, संतरे का रस, देसी गाय का दूध और आध्यात्मिक शोध केंद्र का पानी इनमें नकारात्मक प्रभामंडल नहीं था, केवल सकारात्मक प्रभामंडल था ।
2. मुंबई के एक ही भाग के दो घरों के जल के नमूनों का अध्ययन करने पर दिखाई दिया कि 'जिस घर में व्यक्ति आध्यात्मिक साधना करनेवाले होते हैं, उस घर के जल का प्रभामंडल सकारात्मक होता है तथा जिस घर में कोई भी आध्यात्मिक साधना नहीं करता, वहां के जल का प्रभामंडल नकारात्मक होता है ।' इसलिए घर के सात्त्विक वातावरण का सकारात्मक परिणाम जल पर भी होता है, यह दिखाई दिया ।
3. एक जांच में एक पुरुष और एक महिला दोनों को प्रतिदिन एक पेय इस प्रकार आठ भिन्न-भिन्न पेय पीने के लिए दिए गए । प्रतिदिन पेय पीने के 5 मिनिट और 30 मिनिट उपरांत उन दोनों की युनिवर्सल ऑरा स्कैनर (यूएएस) द्वारा जांच की गई ।
इस जांच से प्राप्त निष्कर्षों के अनुसार व्यक्ति के प्रभामंडल पर सकारात्मक परिणाम करनेवाले पेय में से देसी गाय का दूध पीने पर दोनों की सकारात्मक प्रभामंडल में 500 से 600 प्रतिशत वृद्धि हुई और नकारात्मक प्रभामंडल लगभग 91 प्रतिशत अल्प हुई, अर्थात दोनों प्रकार की प्रभामंडल पर सर्वाधिक सकारात्मक परिणाम देसी गाय के दूध का हुआ । नारियल पानी पीने पर एक की सकारात्मक प्रभामंडल 900 प्रतिशत और दूसरे की 291 प्रतिशत बढी । संतरे का रस पीने पर सकारात्मक प्रभामंडल में 358 प्रतिशत वृद्धि हुई और नकारात्मक प्रभामंडल 85 प्रतिशत अल्प हुई । आध्यात्मिक शोध केंद्र के पानी के कारण नकारात्मक प्रभामंडल विलक्ष्ण प्रमाण में अल्प हुई ।
व्यक्ति के प्रभामंडल पर नकारात्मक परिणाम करनेवाले पेय में से व्हिस्की, बियर और वाईन इन अल्कोहलवाले पेयों के कारण जांच के दोनों व्यक्तियों की सकारात्मक प्रभामंडल पेय पीने के पांच मिनिट उपरांत ही पूर्णत: नष्ट हुई । उन पर सर्वाधिक नकारात्मक परिणाम बियर का हुआ । बियर पीने के उपरांत दोनों में से एक का नकारात्मक प्रभामंडल 5000 प्रतिशत बढा । वाईन पीने के 30 मिनिट उपरांत की गई जांच में महिला का नकारात्मक प्रभामंडल 3691 प्रतिशत और पुरुष का 1396 प्रतिशत बढा था । कोला पेय का भी दोनों पर नकारात्मक परिणाम हुआ ।

4. जीडीवी बायोवेल उपकरण का उपयोग कर किए गए अध्ययन में वाईन पीने के पूर्व व्यक्ति के सभी कुंडलिनी चक्र लगभग सीधी रेषा में और उचित आकार में थे, अर्थात वह व्यक्ति स्थिर आणि ऊर्जावान थी; परंतु वाईन पीने के उपरांत उसकी कुंडलिनी चक्र अव्यवस्थित और कुछ चक्र आकार में छोटे हुए, अर्थात वह व्यक्ति अस्थिर हुई तथा उसकी क्षमता भी घट गई ।

5. एक पार्टी में सहभागी हुए दस लोगों पर की गई एक जांच में अल्कोहलवाले पेय पीनेवाले और बिना अल्कोहल का पेय पीनेवाले सभी का सकारात्मक प्रभामंडल नष्ट हुआ पाया गया । उस पार्टी में आध्यात्मिक दृष्टि से सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि करनेवाली कोई भी कृति न होने से वातावरण के नकारात्मक स्पंदनों का परिणाम बिना अल्कोहलवाले पेय पीनोंवालों पर हुआ और उनकी नकारात्मक प्रभामंडल में वृद्धि हुई ।

6. सकारात्मक स्पंदनवाले गाय का दूध, नारियल का पानी, संतरे (फलों) का रस यह पेय भी व्यक्ति और समाज के लिए आध्यात्मिक दृष्टि से लाभदायक होते हैं, यह इन शोध द्वारा ध्यान में आया ।
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आज 21 नवम्बर 2021, रविवार का दैनिक पंचांग एवं राशिफल - सभी १२ राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन ? क्या है आप की राशी में विशेष ? जाने प्रशिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. प्रेम सागर पाण्डेय से |

Posted: 20 Nov 2021 04:36 AM PST

आज 21 नवम्बर 2021, रविवार का दैनिक पंचांग एवं राशिफल - सभी १२ राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन ? क्या है आप की राशी में विशेष ? जाने प्रशिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. प्रेम सागर पाण्डेय से |

श्री गणेशाय नम: !!

21 नवम्बर 2021, रविवार का दैनिक पंचांग

🔅 तिथि द्वितीया सायं 05:32:14

🔅 नक्षत्र मृगशिरा समस्त दिन /रात्रि

🔅 करण गर 19:49:48

🔅 पक्ष कृष्ण

🔅 योग सिद्ध 29:48:04

🔅 वार रविवार

☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ

🔅 सूर्योदय 06:39:15

🔅 चन्द्रोदय 18:47:00

🔅 चन्द्र राशि वृषभ - 21:10:28 तक

🔅 सूर्यास्त 17:21:10

🔅 चन्द्रास्त 08:22:59

🔅 ऋतु हेमंत

☀ हिन्दू मास एवं वर्ष

🔅 शक सम्वत 1943 प्लव

🔅 कलि सम्वत 5123

🔅 दिन काल 10:37:21

🔅 विक्रम सम्वत 2078

🔅 मास अमांत कार्तिक

🔅 मास पूर्णिमांत मार्गशीर्ष

☀ शुभ और अशुभ समय

☀ शुभ समय

🔅 अभिजित 11:45:30 - 12:27:59

☀ अशुभ समय

🔅 दुष्टमुहूर्त 16:00:27 - 16:42:56

🔅 कंटक 10:20:31 - 11:03:00

🔅 यमघण्ट 13:10:29 - 13:52:58

🔅 राहु काल 16:05:45 - 17:25:25

🔅 कुलिक 16:00:27 - 16:42:56

🔅 कालवेला या अर्द्धयाम 11:45:30 - 12:27:59

🔅 यमगण्ड 12:06:44 - 13:26:25

🔅 गुलिक काल 14:46:05 - 16:05:45

☀ दिशा शूल

🔅 दिशा शूल पश्चिम

☀ चन्द्रबल और ताराबल

☀ ताराबल

🔅 अश्विनी, कृत्तिका, रोहिणी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुष्य, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, उत्तराभाद्रपद

☀ चन्द्रबल

🔅 वृषभ, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु, मीन

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पं.प्रेम सागर पाण्डेय्

21 नवम्बर 2021, रविवार का दैनिक राशिफल

मेष (Aries): खर्च में संयम रखने की सलाह आपको देते हैं, क्योंकि आज धन खर्च का विशेष योग है। धन संबंधी एवं लेन-देन संबंधी सभी कार्यों में सावधानी रखने की जरूरत है। किसी के साथ विवाद न हो, इसका ध्यान रखें। मित्रों एवं परिवारजनों के साथ मनमुटाव होने की और आरोग्य बिगड़ने की आशंका है। आज का दिन मध्यम फलदायी है।

शुभ रंग = गुलाबी

शुभ अंक : 8

वृषभ (Tauras) : आज का दिन आपकी रचनात्मक और कलात्मक शक्तियों में वृद्धि होगी। मानसिक रूप से आज आप वैचारिक स्थिरता की अनुभूति करोगे, जिसके परिणामस्वरुप आप लगन के साथ काम कर पाएँगे। अपना आर्थिक उत्तदायित्व अच्छी तरह से निभा पाएँगे।आर्थिक योजना बना सकेगें। आभूषण, सौंदर्य प्रसाधन और मनोरंजन के पीछे खर्च होगा। परिवार के सदस्यों के साथ आनंदपूर्वक समय बीतेगा। आप के आत्मविश्वास में वृद्धि होगी।

शुभ रंग = आसमानी

शुभ अंक : 7

मिथुन (Gemini): आज आपका दिन शारीरिक और मानसिक अस्वस्थता के साथ व्यग्रतापूर्ण तरीके से बीतेगा। शारीरिक कष्ट, विशेषकर आंखों में पीड़ा होने की संभावना है। परिवारजनों और स्नेहियों के साथ कोई घटना घटने की संभावना है। आज कोई भी कार्य बिना विचारे नहीं करने की सलाह देते है। आपकी बात-चीत या व्यवहार से किसी को कोई भ्रम न हो इसका ध्यान रखें। दुर्घटना से संभलना अनिवार्य है। आय की अपेक्षा खर्च अधिक होगा। मानसिक चिंता के कारण मन व्यग्र रहेगा। अनुचित कार्यों में शक्ति का व्यय होगा। आध्यात्मिकता और ईश्वरीय शक्ति सहायक सिद्ध होगी।

शुभ रंग = हरा

शुभ अंक : 3

कर्क (Cancer) : आज का दिन आपके लिए बहुत लाभकारी है। आपकी आय में वृद्धि होगी। किसी अन्य तरीके से भी आर्थिक लाभ होगा। मित्रों के साथ भेंट होगी। स्त्री मित्रों से विशेष लाभ मिलेगा। व्यापार में लाभ होगा। संतान और जीवनसाथी से सुख मिलेगा। विवाह के योग हैं। संतान से मुलाकात होगी। शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। चिंता से मुक्ति का अनुभव करेंगे। मित्रों के साथ किसी प्राकृतिक स्थान पर जाने की योजना बन सकती है। आज का दिन भोजन सुख के लिए अच्छा है।

शुभ रंग = गुलाबी

शुभ अंक : 8

सिंह (Leo) : आप के व्यवसाय हेतु आज का दिन बहुत अच्छा एवं श्रेष्ठ है। आज हर काम सफलतापूर्वक संपन्न होगा। उच्च पदाधिकारियों की आप पर कृपादृष्टि रहेगी। आज आपका प्रभुत्व चरम सीमा पर रहेगा। पिता की ओर से लाभ के संकेत है। सरकारी कार्यों में लाभ मिलेगा। आरोग्य अच्छा रहेगा। गृहस्थजीवन मधुरतापूर्ण होगा। जमीन, मकान एवं संपत्ति के सौदे सफल रहेंगे।

शुभ रंग = लाल

शुभ अंक : 5

कन्या (Virgo) : आज आपका दिन अच्छा रहेगा। सगे-संबंधी के साथ प्रवास का आयोजन हो सकता है। स्त्री मित्रों से लाभ होना संभव है। धार्मिक कार्य तथा धार्मिक यात्रा में व्यस्त रहेंगे। विदेश में रहनेवाले स्नेहिजनों के समाचार से आनंद होगा। भाई-बंधु से लाभ होने की संभावना है। आज का दिन आर्थिक लाभ का दिन है।

शुभ रंग = हरा

शुभ अंक : 3

तुला (Libra) : आज आपको नए कार्य की शुरुआत करने की सलाह देते है। भाषा और व्यवहार पर संयम रखना आपके हित में होगा। द्वेष से दूर रहिए और हितशत्रुओं से सावधान रहें । तबीयत का ध्यान रखें। रहस्यमय बातें और गूढ़विद्या के प्रति आप आकर्षित होंगे। आध्यात्मिक सिद्धि प्राप्त करने के लिए अच्छा समय है। संभवतः पानी और स्त्री से दूर रहें। गहन चिंतन के द्वारा मन की शांति प्राप्त कर पाएंगे।

शुभ रंग = आसमानी

शुभ अंक : 7

वृश्चिक (Scorpio): आज आपका दिन कुछ भिन्न तरीके से बीतेगा । स्वयं के लिए आप समय निकाल पाएंगे। मित्रों के साथ घूमना-फिरना, मौज-मस्ती, मनोरंजन, छोटे पर्यटन तथा भोजन और वस्त्र-परिधान इत्यादि से आप बहुत आनंदित रहेंगे। मान-सम्मान में वृद्धि होगी और सम्मानित किये जाने की संभावना है। वाहन सुख प्राप्त होगा। प्रियजन से मुलाकात से मन प्रसन्न रहेगा एवं वैवाहिक सुख का पूर्ण आनंद प्राप्त होगा।

शुभ रंग = गुलाबी

शुभ अंक : 8

धनु (Sagittarius): आज आप के लिए आर्थिक लाभ का दिन है। घर में शांति और आनंद का वातावरण रहेगा, जो कि आपके मन को प्रसन्न रखेगा। नौकरी करनेवाले लोगों को नौकरी से लाभ और सहकर्मियों से सहयोग मिलेगा। कार्यसिद्धि तथा यश मिलेगा। शारीरिक स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। आपके नीचे कार्य करनेवालों का सहयोग मिलेगा। मातृपक्ष से अच्छे समाचार मिलेंगे। प्रतिस्पर्धिओं पर विजय मिलेगी। अपनी वाणी पर संयम रखिएगा। स्त्री मित्रों से भेंट होगी।

शुभ रंग = पींक

शुभ अंक : 1

मकर (Capricorn) : आज आपका मन चिंताग्रस्त और दुविधायुक्त रहेगा। ऐसी मनोदशा में आप किसी भी कार्य में दृढ़ निश्चय नहीं रह पाएंगे। आज के दिन कोई भी महत्त्वपूर्ण कार्य न करें क्योंकि आज भाग्य साथ नहीं देगा। संतान के स्वास्थ्य की चिंता रहेगी। घर में बड़ों का स्वास्थ्य थोड़ा बिगड़ सकता है। कार्यालय में उच्च पदाधिकारियों की अप्रसन्नता का सामना करना पडेगा। निरर्थक व्यय बढ़ेगा। संतानों के साथ मतभेद होंगे।

शुभ रंग = केशरी

शुभ अंक : 8

कुंभ (Aquarius) : आज आप के स्वभाव में प्रेम छलकेगा। इस कारण मानसिक रूप से व्यग्रता का अनुभव होगा। धनोपार्जन सम्बंधित योजना बन सकती है। स्त्रियों के आभूषण, वस्त्र, सौंदर्य-प्रसाधन के पीछे धन खर्च होगा। माता से लाभ होने की संभावना है। जमीन, मकान एवं वाहन आदि के सौदों में ध्यान रखना अतिआवश्यक है। विद्योपार्जन करनेवालों को विद्याप्राप्ति में सफलता मिलेगी। स्वभाव में हठीलापन टालिएगा।

शुभ रंग = क्रीम

शुभ अंक : 2

मीन (Pisces) : आज आपका दिन शुभ फलदायी होगा, आपकी सृजनात्मक और कलात्मक शक्तियों में वृद्घि होगी। वैचारिक स्थिरता के कारण आपके कार्य आज अच्छी तरह से संपन्न कर पाएंगे। महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए आज का दिन शुभ है। जीवनसाथी के साथ समय अच्छी तरह से बितेगा। मित्रों के साथ छोटे पर्यटन का सफल आयोजन होगा। भाई-बंधुओं से लाभ होगा। कार्य में सफलता मिलेगी। मान-सम्मान मिलेगा, प्रतिस्पर्धियों पर विजय प्राप्त कर सकेंगे।

शुभ रंग = पींक

शुभ अंक : 1 
प्रेम सागर पाण्डेय् ,नक्षत्र ज्योतिष वास्तु अनुसंधान केन्द्र ,नि:शुल्क परामर्श - रविवार , दूरभाष 9122608219 / 9835654844
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