प्राइमरी का मास्टर ● इन |
- UPTET - 2021 पेपर लीक होने के मामले में परीक्षा नियामक प्राधिकारी संजय उपाध्याय पर गिरी गाज, शासन ने किया निलंबित
- यूपी : टैबलेट-मोबाइल देने के लिए आईटी क्षेत्र का सबसे बड़ा टेंडर, तीन महीने में करनी होगी आपूर्ति
- UGC ने सभी विश्वविद्यालयों व कालेजों को दिए खाली पदों को भरने के निर्देश, 31 दिसम्बर तक खाली पदों की मांगी जानकारी
- राज्य स्तर पर होने वाली राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा 2021-22 के लिए 24 दिसंबर तक आवेदन कर सकेंगे
- रसोइयों ने मांगा चतुर्थ श्रेणी कर्मियों का दर्जा तो कस्तूरबा विद्यालय की चतुर्थ श्रेणी कर्मियों ने भी स्थायीकरण करने की भरी हुंकार
- खुशखबरी! छत्रपति शाहू जी महाराज विवि कानपुर ने शुल्क किया माफ, छात्रों को फ्री मिलेगी डिग्री
- UPTET एग्जाम के लिए जल्द तय होगी नई तारीख
- नियामक प्राधिकारी कार्यालय की भूमिका हर परीक्षा में रही संदिग्ध, शिक्षक भर्ती में भी उठे थे सवाल
- पेपर लीक पर क्या बोले सीएम योगी और बेसिक शिक्षा मंत्री, जानिए महत्वपूर्ण बातें।
- फिर पर्चा लीक : शुचिता को छिन्न-भिन्न करने वालों के विरुद्ध सरकार की कठोर कार्रवाई का इंतजार
- उठ रहे सवाल : सरकारी प्रेस में क्यों नहीं छपवाते पेपर, प्रश्न पत्र छापने वाली एजेंसी की भूमिका को लेकर प्रश्नचिन्ह
- UPTET परीक्षा निरस्त होने से आगामी शिक्षक भर्ती भी होगी प्रभावित, विधानसभा चुनाव की अधिसूचना की आशंका से अभ्यर्थी परेशान
| Posted: 30 Nov 2021 03:48 AM PST यूपीटीईटी-2021 पेपर लीक होने के मामले में परीक्षा नियामक प्राधिकारी संजय उपाध्याय पर गिरी गाज, शासन ने किया निलंबित UP TET-2021 Paper Viral Case उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता (टीईटी) परीक्षा-2021 का पेपर वायरल होने के मामले में योगी आदित्यनाथ सरकार ने परीक्षा नियामक प्राधिकारी संजय उपाध्याय को निलंबित कर दिया है। संजय उपाध्याय पर ही इस परीक्षा के आयोजन की जिम्मेदारी थी। लखनऊ । उत्तर प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा 2021 का रविवार को पेपर इंटरनेट मीडिया पर वायरल होने के मामले में सीएम योगी आदित्यनाथ की कार्रवाई जारी है। परीक्षा निरस्त करने और मामले की जांच उत्तर प्रदेश एसटीएफ को सौंपने के बाद सरकार ने एक और बड़ा एक्शन लिया है। उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता (टीईटी) परीक्षा-2021 का पेपर वायरल होने के मामले में योगी आदित्यनाथ सरकार ने परीक्षा नियामक प्राधिकारी संजय उपाध्याय को निलंबित कर दिया है। संजय उपाध्याय पर ही इस परीक्षा के आयोजन की जिम्मेदारी थी। सरकार ने पेपर लीक होने के मामले को उनकी बड़ी चूक माना है। निलंबन की अवधि में संजय उपाध्याय को लखनऊ में उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा निदेशक के कार्यालय से सम्बद्ध किया है। उत्तर प्रदेश शासन में बेसिक शिक्षा विभाग के विशेष सचिव आरवी सिंह ने बताया कि संजय उपाध्याय के स्थान पर अभी किसी की तैनाती नहीं हुई है। शीघ्र ही किसी की तैनाती की जाएगी। उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा का पेपर इंटरनेट मीडिया पर वायरल होने की गाज सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी संजय कुमार उपाध्याय पर गिरी है। 28 नवम्बर को इसका पेपर लीक होने के बाद से ही एक्शन में आए सीएम योगी आदित्यनाथ ने जिम्मेदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए थे। सचिव परीक्षा नियामक संजय उपाध्याय को शुचितापूर्ण, नकलविहीन और शांतिपूर्ण ढंग से यूपी-टीईटी न किराने का प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया है। यूपी टीईटी मामले में शासन को अभी जांच रिपोर्ट नहीं मिली है। महत्वपूर्ण परीक्षा की व्यवस्था संभाल न पाने और प्रथम दृष्टया गोपनीयता न बरतने पर कार्रवाई की गई है।अब सरकार का लक्ष्य 28 दिसंबर से पहले परीक्षा कराने का है। माना जा रहा है कि सरकार 26 दिसंबर को परीक्षा का आयोजन कराएगी। प्रदेश में बीते रविवार को दो पालियों में प्रस्तावित यूपी-टीईटी का पेपर लीक होने के कारण परीक्षा निरस्त करनी पड़ी थी। इससे सरकार की काफी किरकिरी हुई थी। परीक्षा में 21 लाख से अधिक अभ्यर्थियों को शामिल होना था। प्रथम पाली में दस से साढ़े बारह बजे तक प्रदेश भर में 2554 केंद्रों पर प्राथमिक स्तर की परीक्षा का आयोजन किया जाना था और द्वितीय पाली में 2:30 से पांच बजे तक 1754 केंद्रों पर उच्च प्राथमिक स्तर की परीक्षा का आयोजन होना था। टीईटी प्राथमिक स्तर की परीक्षा के लिए 13.52 लाख और टीईटी उच्च प्राथमिक स्तर की परीक्षा के लिए 8.93 लाख अभ्यर्थियों ने रजिस्ट्रेशन कराया था। सरकार अब इनकी परीक्षा फिर से कराने की योजना बना रही है। इसके लिए किसी भी अभ्यर्थी को दोबारा कोई भी शुल्क नहीं देना होगा। |
| यूपी : टैबलेट-मोबाइल देने के लिए आईटी क्षेत्र का सबसे बड़ा टेंडर, तीन महीने में करनी होगी आपूर्ति Posted: 29 Nov 2021 05:26 PM PST यूपी : टैबलेट-मोबाइल देने के लिए आईटी क्षेत्र का सबसे बड़ा टेंडर, तीन महीने में टैबलेट व मोबाइल की आपूर्ति करनी होगी लखनऊ : प्रदेश में युवाओं को मुफ्त टैबलेट और मोबाइल वितरण के लिए आईटी क्षेत्र का अब तक का सबसे बड़ा 4700 करोड़ रुपये का टेंडर खुला है। इसके लिए सैमसंग, लावा, विशटल व एसर जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने टेंडर दाखिल किए हैं। टेंडर किस कंपनी को मिलेगा, यह दिसंबर के पहले हफ्ते में पता चलेगा। यूपीडेस्को टेंडर हासिल करने वाली कंपनी को आपूर्ति का आदेश जारी करेगा। कंपनी को तीन महीने में टैबलेट व मोबाइल की आपूर्ति करनी होगी। प्रदेश में स्नातक व स्नातकोत्तर समेत अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत 68 लाख विद्यार्थियों को इसका वितरण किया जाना है। यूपीडेस्को में सोमवार शाम ऑनलाइन निविदा खोली गई। आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार ने बताया कि टैबलेट के लिए विशटल(आईरिस), सैमसंग (विजन) और एसर (सेलकॉन) कंपनी ने टेंडर दाखिल किया है। वहीं, स्मार्टफोन के लिए लावा, सैमसंग (सेलकॉन) और सैमसंग (यूनाइटेड) ने टेंडर दाखिल किया है। बृहस्पतिवार तक सभी फर्मों की तकनीकी निविदा की जांच करने के बाद अर्ह योग्य फर्मों की वित्तीय निविदा खोली जाएगी। दिसंबर के पहले सप्ताह तक वित्तीय निविदा निस्तारित कर चुनी गई फर्म को कार्य का आदेश जारी किया जाएगा। यूपीडेस्को के एक अधिकारी ने बताया कि टैबलेट और मोबाइल खरीद का टेंडर देश में आईटी के क्षेत्र का सबसे बड़ा टेंडर है।दिसंबर में शुरू हो जाएगी आपूर्ति 40 फीसदी आपूर्तिअपर मुख्य सचिव अरविंद ने बताया कि कंपनी को आदेश जारी होने की तारीख से तीन माह की अवधि में टैबलेट व मोबाइल की आपूर्ति करनी होगी। पहले महीने में 40 फीसदी आपूर्ति करनी होगी। यानी वर्क ऑर्डर जारी होने से 30 दिन के अंदर यानी दिसंबर से जनवरी के प्रथम सप्ताह तक आपूर्ति करनी होगी। दूसरे और तीसरे महीने में 30-30 प्रतिशत आपूर्ति करनी होगी। |
| Posted: 29 Nov 2021 05:20 PM PST UGC ने सभी विश्वविद्यालयों व कालेजों को दिए खाली पदों को भरने के निर्देश, 31 दिसम्बर तक खाली पदों की मांगी जानकारी अध्यापकों के खाली पदों को भरने में दिखाएं तेजी: यूजीसी नई दिल्ली: उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए सरकार ने देशभर के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों के खाली पदों को भरने की एक बड़ी मुहिम शुरू की है। इसकी शुरुआत केंद्रीय विश्वविद्यालयों से की गई है, जिसे अब आगे बढ़ाते हुए देशभर के सभी विश्वविद्यालयों और कालेजों को भी जोड़ा गया है। इन सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को फिलहाल शिक्षकों के खाली पड़े पदों को तेजी से भरने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही शिक्षकों के खाली पदों का ब्योरा 31 दिसंबर तक देने को कहा गया है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने देशभर के सभी विश्वविद्यालयों और कालेजों को इस संबंध में दिए गए अपने निर्देश में कहा है कि जितनी जल्द ही वह शिक्षकों के खाली पदों को भरने का काम पूरा करें। इस संबंध में उठाए गए कदमों की जानकारी भी उन्हें दें। यूजीसी के मुताबिक नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति आने के बाद देशभर में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए जिस तेजी के साथ मुहिम छेड़ी गई है, उनमें शिक्षकों के खाली पदों को भरना बेहद जरूरी है क्योंकि इसके बगैर इस लक्ष्य को हासिल करना मुश्किल है। बता दें कि नीति में भी शिक्षकों के खाली पदों को भरने पर जोर दिया गया है। |
| राज्य स्तर पर होने वाली राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा 2021-22 के लिए 24 दिसंबर तक आवेदन कर सकेंगे Posted: 29 Nov 2021 05:17 PM PST राज्य स्तर पर होने वाली राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा 2021-22 के लिए 24 दिसंबर तक आवेदन कर सकेंगे प्रयागराज : राज्य स्तर पर होने वाली राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा 2021-22 इस बार 16 जनवरी को होगी। इसके लिए आनलाइन आवेदन प्रक्रिया 27 नवंबर से शुरू हो चुकी है। अभ्यर्थी 24 दिसंबर तक आवेदन कर सकेंगे। डाक द्वारा या अन्य किसी माध्यम से आवेदन पत्र स्वीकार नहीं किए जाएंगे। मनोविज्ञानशाला की निदेशक ऊषा चंद्रा ने बताया कि परीक्षा के लिए आनलाइन आवेदन संबंधी विस्तृत जानकारी www.entdata.co.in पर हासिल की जा सकती है। इस परीक्षा में किसी मान्यता प्राप्त विद्यालय में पढ़ने वाले कक्षा दस के विद्यार्थी ही शामिल हो सकते हैं। अनुसूचित जाति एवं जनजाति के अभ्यर्थियों को 30 रुपये व अन्य अभ्यर्थियों को 50 रुपये आनलाइन जमा करना होगा। 📌 आवेदन करने के लिए यहां जाएं क्लिक करके: |
| Posted: 29 Nov 2021 04:48 PM PST रसोइयों ने मांगा चतुर्थ श्रेणी कर्मियों का दर्जा तो कस्तूरबा विद्यालय की चतुर्थ श्रेणी कर्मियों ने भी स्थायीकरण करने की भरी हुंकार लखनऊ। उप्र. मिड-डे मील वर्कर्स यूनियन के बैनर तले रसोइयों ने सोमवार को प्रदर्शन कर चतुर्थ श्रेणी राज्य कर्मियों का दर्जा देने की मांग की। उधर, कस्तूरबा गांधी विद्यालय की चतुर्थ श्रेणी कर्मियों ने भी स्थायीकरण करने की हुंकार भरी। ईको गार्डन में हुए प्रदर्शन के दौरान ऑल इंडिया सेंट्रल कांउसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस (एक्टू) के प्रदेश अध्यक्ष विजय विद्रोही ने कहा कि 1500 रुपये महीने मानदेय पर कार्य करना गुलामी करने जैसा है। इसके बावजूद पांच माह से पैसा नहीं मिला है। प्रदेश संयोजक साधना पांडे ने रसोइयों को कम से कम 21 हजार मानदेय देने, बकाया भुगतान करने की मांग की। इस मौके पर सरोजनी देवी, सुनीता मौजूद रहीं। उधर, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय चतुर्थ श्रेणी संविदा कर्मचारी यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष आरबी लाल गौतम ने कहा कि रसोइयों अतिरिक्त कार्य न लिया जाए। |
| खुशखबरी! छत्रपति शाहू जी महाराज विवि कानपुर ने शुल्क किया माफ, छात्रों को फ्री मिलेगी डिग्री Posted: 29 Nov 2021 09:53 AM PST खुशखबरी! छत्रपति शाहू जी महाराज विवि ने शुल्क किया माफ, छात्रों को फ्री मिलेगी डिग्री छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के लाखों छात्र-छात्राओं के लिए अच्छी खबर है। वर्ष 2020 या इससे पहले पास होने वाले छात्रों को डिग्री के लिए कोई शुल्क नहीं देना होगा। सिर्फ घर मंगाने के लिए कोरियर का 200 रुपये शुल्क ऑनलाइन जमा करना होगा। सीएसजेएमयू से प्रति वर्ष चार से पांच लाख छात्र-छात्राएं विभिन्न पाठ्यक्रमों की पढ़ाई पूरी कर निकलते हैं। विश्वविद्यालय से डिग्री लेने का शुल्क अभी तक 800 रुपये था। वर्ष 2013 से पहले के छात्रों को 1300 रुपये डिग्री शुल्क देना होता था। साथ ही, 200 रुपये घर तक डिग्री पहुंचाने का चार्ज था। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के निर्देश पर कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक की अगुवाई में परीक्षा समिति में डिग्री का शुल्क माफ करने का फैसला लिया गया है। विश्वविद्यालय में करीब 10 लाख से अधिक डिग्रियां बनी रखी हैं, जिन्हें संबंधित छात्र लेने नहीं आ रहे हैं। रजिस्ट्रार डॉ. अनिल कुमार यादव ने बताया कि छात्रों को आवेदन करना होगा और डिग्री उनके घर पहुंच जाएगी। वर्ष 2007 से अब तक के छात्र ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। इससे पहले के छात्रों को ऑफलाइन आवेदन करना होगा। |
| UPTET एग्जाम के लिए जल्द तय होगी नई तारीख Posted: 29 Nov 2021 04:42 PM PST UPTET एग्जाम के लिए जल्द तय होगी नई तारीख लखनऊ। उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी)-2021 की नई तारीख जल्द तक तय की जाएगी। सोमवार को दिनभर परीक्षा की तारीख को लेकर मशक्कत चलती रही। बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी ने बताया कि 26 नवंबर को टीईटी कराने की तिथि प्रस्तावित की गई है। उन्होंने बताया कि अधिकारियों को परीक्षण करने के निर्देश दिए हैं कि 26 दिसंबर को कोई अन्य भर्ती या पात्रता परीक्षा तो प्रस्तावित नहीं है। UPTET 2021 New Exam Date : क्या 26 दिसंबर को होगी यूपीटीईटी परीक्षा? जानिए यूपी सरकार का जवाब यूपी सरकार ने उन खबरों का खंडन किया है जिनमें कहा जा रहा है कि यूपीटीईटी परीक्षा की नई तिथि का ऐलान कर दिया गया है। कुछ मीडिया संस्थानों में 26 दिसंबर को परीक्षा के आयोजन की खबरें प्रसारित होने के बाद यूपी सरकार ने यह स्पष्टीकरण जारी किया। बेसिक शिक्षा विभाग की सचिव अनामिका सिंह ने बताया कि अभी टीईटी की नई तारीख तय नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि नई तिथि और विभागीय जांच पर निर्णय मंगलवार तक किया जाएगा। यूपी सरकार ने कहा कि अभी उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी) की नई तिथि को लेकर कोई फैसला नहीं लिया गया है। गौरतलब है कि पेपर लीक होने के चलते रविवार को यूपीटीईटी परीक्षा निरस्त कर दी गई थी। सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया, 'कुछेक मीडिया संस्थान द्वारा 26 दिसंबर को परीक्षा की नई तिथि घोषित किये जाने का समाचार चलाया जा रहा है। इस सम्बंध में सूचनार्थ है कि यूपीटीईटी की नई परीक्षा तिथि का अभी कोई निर्णय नही लिया गया है, भ्रामकता की स्थिति न उत्पन्न हो इसलिए ऐसी खबर न प्रसारित की जाए।' |
| नियामक प्राधिकारी कार्यालय की भूमिका हर परीक्षा में रही संदिग्ध, शिक्षक भर्ती में भी उठे थे सवाल Posted: 29 Nov 2021 04:51 PM PST नियामक प्राधिकारी कार्यालय की भूमिका हर परीक्षा में रही संदिग्ध, शिक्षक भर्ती में भी उठे थे सवाल लखनऊ। सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा हो या शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी), उत्तर प्रदेश परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय हमेशा संदेह के दायरे में रहा है। सरकार की ओर से जब जब बड़ी जिम्मेदारी दी गई, संस्था ने सरकार की छवि को कटघरे में खड़ा करने के साथ ही लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य पर प्रश्न चिह्न लगा है। सरकार की ओर से बेसिक शिक्षा परिषद में सहायक अध्यापक भर्ती लिखित परीक्षा कराने के निर्णय के बाद 2017-18 में पहली बार परीक्षा नियामक प्राधिकारी को इसकी जिम्मेदारी दी गई। परिणाम जारी होने के बाद जब अभ्यर्थियों ने आंदोलन किया तो उच्च न्यायालय के आदेश पर जांच कराई गई। पहली बार हुई जांच में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का पता चला। वहीं तत्कालीन परीक्षा नियामक प्राधिकारी सचिव सुक्ता सिंह और रजिस्ट्रार जिवेंद्र सिंह को निलंबित किया गया। हालांकि सुक्ता सिंह को कुछ समय बाद बहाल कर लखनऊ स्थित निदेशालय में महत्वपूर्ण पद पर तैनाती दी गई। वहीं, 2019-20 में 69000 सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा में भी प्रयागराज में प्रश्न पत्र लीक होने का मामला सामने आया। हालांकि पुलिस के स्तर पर प्रारंभिक जांच में प्रश्न पत्र लीक नहीं माना गया, पर कुछ लोगों को गिरफ्तार किया गया। गलत प्रश्नों को लेकर भी अभ्यर्थियों ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। परीक्षा नियामक प्राधिकारी की ओर से आयोजित डीएलएड परीक्षा के प्रश्न पत्र पहले भी कई बार लीक होते रहे ह UPTET से पहले शिक्षक भर्ती परीक्षा और डीएलएड में भी हुई थी किरकिरी, PNP पर लगातार लगते रहे दाग ■ 68500 शिक्षक भर्ती में पीएनपी सचिव सहित कई पर हुई कार्रवाई ■ नकल के खेल में डीएलएड की कौशांबी में रद की गई थी परीक्षा प्रयागराज : यह तो जांच में सामने आएगा कि उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी)-2021 का पर्चा आउट करने में किस-किस की भूमिका रही, लेकिन उत्तर प्रदेश परीक्षा नियामक प्राधिकारी (पीएनपी) की परीक्षाओं पर दाग पहले भी लगते रहे हैं। बेसिक शिक्षा की 68500 शिक्षक भर्ती में तो मनमानी की इंतहा हो गई थी। परीक्षा एजेंसी के स्तर पर कापियां बदले जाने से लेकर फेल को पास और पास को फेल करने का खेल बड़े स्तर पर हुआ था, जिसमें हाई कोर्ट के कड़े रुख के बाद कई अफसरों पर कार्रवाई हुई थी। इसके अलावा डीएलएड परीक्षा भी पर्चा आउट होने के कारण रद करनी पड़ी थी। 68500 शिक्षक भर्ती में कापी बदले जाने का मामला लेकर महिला अभ्यर्थी राधिका देवी कोर्ट गई तो बड़े स्तर पर गड़बड़ी किए जाने का मामला सामने आया। परीक्षा संस्था की ओर से याची राधिका की कापी कोर्ट में प्रस्तुत की गई तो वह उसकी थी ही नहीं। यह मामला सामने आने के बाद फेल किए गए कई अभ्यर्थी कोर्ट पहुंच गए। खेल इस स्तर पर हुए थे कि कई अभ्यर्थियों के अंक दूसरे की कापी पर चढ़ा दिए गए थे। इसके चलते तमाम फेल अभ्यर्थी पास तो तमाम पास अभ्यर्थी फेल हो गए थे। हाई कोर्ट के आदेश पर आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों की कापियों का पुनर्मूल्यांकन कराया गया तो करीब 4500 अभ्यर्थी सफल हुए थे। मामले में हाई कोर्ट के सख्त रुख के बाद तत्कालीन सचिव, परीक्षा नियंत्रक सहित कई अफसरों पर कार्रवाई हुई थी। इस भर्ती परीक्षा में आरक्षण निर्धारण में भी खेल किया गया था। आरक्षण निर्धारण विवाद के कारण बाद में 6127 अन्य अभ्यर्थी चयनित घोषित किए गए थे। गड़बड़ी के स्तर का अनुमान इससे भी लगता है कि 68500 शिक्षक भर्ती के कई अभ्यर्थी अभी भी लटके हुए हैं और उसके बाद आई 69000 शिक्षक भर्ती पूरी हो गई। पीएनपी की डीएलएड परीक्षा भी सवालों के घेरे में आई थी। कौशांबी में पर्चा आउट होने पर परीक्षा को निरस्त करना पड़ा था। इसके अलावा यूपीटीईटी भी इसके पहले विवादित रही है। पर्चा आउट कराने व नकल के आरोप लगे। हालांकि कार्रवाई कुछ नहीं हुई। |
| पेपर लीक पर क्या बोले सीएम योगी और बेसिक शिक्षा मंत्री, जानिए महत्वपूर्ण बातें। Posted: 28 Nov 2021 05:25 PM PST सीएम योगी आदित्यनाथ बोले- पेपर लीक के दोषियों के खिलाफ रासुका व गैंगस्टर एक्ट के तहत होगी कार्रवाई, जब्त होगी संपति UPTET : दोबारा टीईटी परीक्षा होने पर अभ्यर्थियों को मिलेगी मुफ्त बस सुविधा, योगी आदित्यनाथ ने किया ऐलान यूपी एसटीएफ करेगी पेपर लीक मामले की जांच: बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपीटीईटी परीक्षा का पर्चा लीक करने वालों पर सख्त कार्रवाई करने का निर्देश देते हुए कहा कि परीक्षा दोबारा होने पर अभ्यर्थियों को मुफ्त बस यात्रा की सुविधा दी जाएगी। उनका प्रवेश पत्र ही रोडवेज बस का टिकट होगा। उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा 2021 का पेपर रविवार को इंटरनेट मीडिया पर लीक होने के बाद प्रदेश सरकार और शासन तत्काल एक्शन में आ गया। सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस प्रकरण में गिरफ्त में आए लोगों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई का निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश में हम नकल माफिया को ठहरने नहीं देंगे। गिरफ्तार सभी के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई होगी। इसके साथ ही इन लोगों की अवैध संपति को भी जब्त किया जाएगा। हम इनकी सारी अवैध संपति पर बुलडोजर भी चलवाएंगे। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि टीईटी पेपर लीक करने वालों के घरों पर सरकार का बुलडोजर चलेगा। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि इस शरारत करने वालों को किसी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। टीईटी परीक्षा को स्थगित कर दिया गया है। अभ्यर्थियों को दोबारा परीक्षा केंद्रों तक जाने के लिए मुफ्त बस सेवा दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे निर्देश पर एसटीएस ने पेपर लीक मामले की जांच शुरू कर दी है। इसके साथ ही प्रयास किया जा रहा है कि किसी भी अभ्यर्थी को कहीं पर भी परेशानी ना हो। सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश सरकार यूपी टीईटी के अभ्यर्थियों के साथ खड़ी है। अब एक महीने के अंदर पारदर्शी तरीके से यह परीक्षा आयोजित होगी। इसमें शामिल होने के लिए किसी भी अभ्यर्थी से कोई भी अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। इसके साथ ही परीक्षा देने वाले सभी अभ्यर्थियों को आने-जाने के लिए भी बसों में नि:शुल्क यात्रा की सुविधा दी जाएगी। हमारे नौजवान बहनों-भाइयों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जायेगा। आप सबको हुई असुविधा के लिए जिम्मेदार लोगों को सजा जरूर मिलेगी। आपकी सरकार शुचितापूर्वक एवं पारदर्शी तरीके से परीक्षा सम्पन्न कराने के लिए कृतसंकल्पित है। पेपर लीक होने के प्रकरण पर उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा मंत्री डॉ. सतीश द्विवेदी ने कहा कि यूपी टीईटी की परीक्षा के पेपर लीक होने की सूचना मिली है। इसी कारण दोनों पालियों की परीक्षा तत्काल प्रभाव से निरस्त की जा रही है। अब पुन: एक महीने के भीतर अभ्यर्थियों से बिना कोई शुल्क लिए परीक्षा कराई जाएगी। इसके साथ ही इस प्रकरण में एफआईआर कराने के निर्देश दिए गए है और यूपी एसटीएफ को जांच सौंपी जा रही है ताकि दोषियों को चिन्हित करके उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सके। यूपी के बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी ने रविवार को कहा कि यूपीटीईटी परीक्षा का पेपर लीक मामले की जांच यूपी पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) करेगी और एक माह के भीतर ही दोबारा परीक्षा करायी जाएगी। डॉ. द्विवेदी ने बताया कि एक माह के भीतर अभ्यर्थियों से बिना किसी शुल्क लिए परीक्षा कराई जाएगी। पेपर लीक मामले में यूपी एसटीएफ जांच कर रही है। कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया है। दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है। शीघ्र ही दोषियों को गिरफ्तार करके उनके विरुद्ध कारवाई की जाएगी। इस बार परीक्षा निर्विवाद ढंग से संपन्न कराई जाएगी। गौरतलब है कि रविवार को पेपर लीक होने के बाद यूपीटीईटी की परीक्षा निरस्त कर दी गयी थी। पेपर शुरू होने के बाद परीक्षा रद्द होने का फरमान आने से अथ्यर्थी मायूस हुए और कई स्थानों पर उनकी संचालकों के साथ तीखी झडप भी हुई। |
| फिर पर्चा लीक : शुचिता को छिन्न-भिन्न करने वालों के विरुद्ध सरकार की कठोर कार्रवाई का इंतजार Posted: 28 Nov 2021 05:35 PM PST UPTET : भारी पड़े नक़ल माफिया और जालसाज, बड़े स्तर की तैयारी और दावों की कश्ती पर सवार सरकारी मशीनरी फेल, परीक्षा एजेंसी से लेकर कोषागार के बीच की कड़ी संदेह के घेरे में फिर पर्चा लीक : शुचिता को छिन्न-भिन्न करने वालों के विरुद्ध सरकार की कठोर कार्रवाई का इंतजार उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी) 2021 का प्रश्नपत्र लीक होना जितना सनसनीखेज है, उतना ही दुर्भाग्यपूर्ण भी। 21 लाख से अधिक परीक्षार्थियों के भविष्य से जुड़ी इस परीक्षा के रद होने से उनके स्वजन समेत करीब एक करोड़ लोगों को तगड़ा झटका लगा है। इसे भांपते हुए ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक महीने के अंदर दोबारा परीक्षा कराने का एलान करके परीक्षार्थियों के साथ खड़े होने का भरोसा दिया है। परीक्षा केंद्रों तक आने-जाने के लिए अभ्यर्थियों को मुफ्त बस यात्र की सुविधा भी दी जाएगी। पर्चा लीक करने वालों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराने और उनकी संपत्तियां जब्त करने का आश्वासन भी दिया गया है। यह आश्वस्ति अपनी जगह है लेकिन, बड़ा सवाल यह है कि कोई साल्वर गैंग इतनी बड़ी परीक्षा की शुचिता भंग करने में सफल कैसे हो गया। उत्तर प्रदेश परीक्षा नियामक प्राधिकारी (पीएनपी) की परीक्षाओं पर पूर्व में दाग लगे होने के बावजूद इसी एजेंसी को यूपीटीईटी का जिम्मा क्यों दिया गया, इसका भी जवाब खोजना ही पड़ेगा। यूपी-बिहार समेत कई राज्यों के साल्वर और उनके सहयोगियों की गिरफ्तारी बताती है कि पर्चा लीक करने वालों का गैंग कितना बड़ा है और उसका दायरा कितना विस्तृत। यह परीक्षा एजेंसी के साथ-साथ संगठित अपराध पर नजर रखने वाली एजेसियों की भी बड़ी विफलता है। स्पेशल टास्क फोर्स साल्वर गैंग और उनके नेटवर्क को तोड़ने की कोशिश करेगी ही लेकिन, इससे इतना स्पष्ट है कि पूर्व की घटनाओं से अभी कोई सबक नहीं लिया गया है। डीएलएड परीक्षा भी पर्चा आउट होने के कारण रद करनी पड़ी थी। पीएनपी की ही देखरेख में हुई 68,500 शिक्षक भर्ती परीक्षा का प्रकरण हाई कोर्ट पहुंचने पर पता लगा कि कई अभ्यर्थियों की कापी के अंक दूसरों को चढ़ा दिए गए थे। अदालती आदेश पर हुए पुनमरूल्यांकन में करीब साढ़े चार हजार अभ्यर्थी सफल हुए थे। हालांकि, यह भर्ती अभी तक अटकी ही है। बहरहाल, यूपीटीईटी की शुचिता को छिन्न-भिन्न करने वालों के विरुद्ध सरकार को इतनी कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए कि भविष्य में कोई इसकी हिमाकत न कर सके। UPTET जैसी बड़ी परीक्षा में अफसर केंद्रों पर नकल रोकने का प्रबंध करते रह गए और माफिया उसके पहले ही पर्चा पार कर ले गए। प्रदेश के सभी जिलों में परीक्षा कराने के लिए परीक्षा एजेंसी ने प्रश्नपत्र दो से तीन दिन पहले कोषागार में भेज दिए गए थे। रविवार को परीक्षा केंद्रों पर पहुंचाए जाने के पहले ही प्रश्नपत्र इंटरनेट मीडिया पर वायरल हो गया। इससे परीक्षा एजेंसी से लेकर कोषागार के बीच की कड़ी संदेह के घेरे में आ गई है। इस परीक्षा को सुचितापूर्ण और नकल विहीन कराने के लिए बढ़े स्तर पर रणनीति बनाई गईं थी। इसके लिए परीक्षा संस्था उत्तर प्रदेश परीक्षा नियामक प्राधिकारी (पीएनपी), शासन, प्रशासन, पुलिस ब शिक्षा विभाग के अधिकारी लगे हुए थे। मुख्य सचिब ने 22 नवंबर को सभी मंडलायुक्त, जिलाधिकारी तथा पुलिस आयुक्त और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों को पारदर्शी तरीके से परीक्षा कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा ने 25 नवंबर को प्रदेश के मंडल एबं जिला स्तर के अधिकारियों संग बीडियो कान्फ्रेंसिंग कर निर्देश देने के साथ की गई तैयारियों को परखा था. लाइव सीसीटीबी सर्बिलांस के माध्यम से प्रदेश के प्रत्येक परीक्षा केंद्रों की समस्त गतिविधियों को कंट्रोल रूम से सीधे देखने की व्यवस्था की गई थी। इस बड़े स्तर की तैयारी और दाबे पर नकल माफिया व जालसाज भारी पड़ गए। पूरी सरकारी मशीनरी और उसकी भारी भरकम व्यवस्था को इस कदर विफल कर दिया कि आयोजकों के पास पूरी परीक्षा को ही निरस्त करने के सिवाय दूसरा विकल्प ही नहीं रह गया था। |
| Posted: 28 Nov 2021 04:44 PM PST उठ रहे सवाल : सरकारी प्रेस में क्यों नहीं छपवाते पेपर, प्रश्न पत्र छापने वाली एजेंसी की भूमिका को लेकर प्रश्नचिन्ह पेपर लीक के बाद एक बड़ा सवाल उठ रहा है कि गवर्नमेंट प्रेस से प्रश्न पत्र क्यों नहीं छपवाए जाते? प्राइवेट लोगों के हाथ में यह काम क्यों सौंपा जाता है? जब यूपी बोर्ड की परीक्षा के लिए करोड़ों कापियां राजकीय मुद्रणालय में छपवाई जा सकती हैं तो पेपर छपवाने जैसे गोपनीय कार्य को निजी लोगों के हाथ में क्यों दिया जाता है। प्रिंटिंग फर्म की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही इस प्रकरण में प्रिंटिंग फर्म की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है। इससे पहले परीक्षा नियामक प्राधिकारी की ओर से कराई गई 68500 शिक्षक भर्ती परीक्षा में भी प्रिंटिंग फर्म ने भारी अनियमितताएं की थी। ऐसे अभ्यर्थियों को पास कर दिया गया था जो परीक्षा में शामिल ही नहीं हुए। लखनऊ : प्रतियोगी परीक्षाओं में नकल व प्रश्नपत्र लीक होने के आरोप लगना आम बात है। लगभग हर परीक्षा के दौरान व बाद में ऐसी बातें सामने आती रही हैं, लेकिन सत्य से सरोकार न होने से आरोप सिरे से खारिज होते रहे हैं। इस बार परीक्षा की सुबह की जगह शनिवार शाम को ही इंटरनेट पर प्रश्नपत्र व हल सामग्री वायरल हुई तो एसटीएफ ने उसकी जांच कराई। प्रश्नपत्र सही मिला और कुछ ही घंटों में पेपर कई जिलों के वाट्सएप ग्रुपों पर पहुंच गया। पुलिस महानिरीक्षक कानून व्यवस्था प्रशांत कुमार ने पत्रकारों को बताया कि पेपर शनिवार को ही वायरल हुआ। प्रश्नपत्र परीक्षा संस्था परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय प्रयागराज ने तैयार कराकर एजेंसी के माध्यम से छपवाया था। प्रश्नपत्र कौन सी एजेंसी छाप रही है, ये गोपनीय होता है, इसीलिए एडीजी ने पेपर छापने वाली एजेंसी का नाम लेने तक से परहेज किया। सिर्फ यही कहा कि इसकी एसटीएफ छानबीन कर रही है। |
| Posted: 28 Nov 2021 04:27 PM PST UPTET परीक्षा निरस्त होने से आगामी शिक्षक भर्ती भी होगी प्रभावित, विधानसभा चुनाव की अधिसूचना की आशंका से अभ्यर्थी परेशान उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपी-टीईटी) निरस्त होने से बेरोजगारों को झटका लगा है। डीएलएड (बीटीसी) और बीएड प्रशिक्षित बेरोजगार लंबे समय से भर्ती शुरू करने की मांग कर रहे थे। 69000 भर्ती के बाद से दूसरी नियुक्ति प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी थी। यूपी-टीईटी के आयोजन से बेरोजगारों में नई भर्ती की उम्मीद जगी थी कि विधानसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने से पहले सरकार नई भर्ती शुरू कर सकती है। लेकिन परीक्षा निरस्त होने से बेरोजगारों की उम्मीदों को झटका लगा है। नई शिक्षक भर्ती के लिए युवाओं ने 15 नवंबर को प्रयागराज में बड़ा प्रदर्शन किया था। अभ्यर्थियों का कहना है कि टीईटी और सीटीईटी पास बेरोजगार प्रशिक्षुओं की संख्या लगभग 10 लाख है। अकेले डीएलएड और बीटीसी के ही पांच लाख से ज्यादा प्रशिक्षित बेरोजगार हैं। डीएलएड 2017 बैच के आलोक मिश्रा का कहना है कि 2019 में 69000 भर्ती आने के बाद से कोई भर्ती नहीं आई है। वैसे भी 1.37 लाख शिक्षामित्रों का सहायक अध्यापक पद पर समायोजन सुप्रीम कोर्ट से जुलाई 2017 में निरस्त होने के बाद दो किस्तों में 68500 और 69000 भर्ती निकाली गई थी। इस लिहाज से देखा जाए तो पिछले पांच साल में कोई नए पद पर भर्ती शुरू नहीं हो सकी है। प्रदेश सरकार ने 69000 शिक्षक भर्ती के मामले में सुप्रीम कोर्ट में जून 2020 में इस बात को स्वीकार किया था कि परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में 51,112 पद खाली थे। हर साल औसतन 12 हजार प्राइमरी शिक्षक रिटायर होते हैं। ऐसे में सहायक अध्यापकों के एक लाख से अधिक पद खाली हैं। अब टीईटी एक महीने टलने से आशंका है कि कहीं बीच में ही विधानसभा चुनाव की अधिसूचना जारी न हो जाए। ऐेसा होता है तो नई भर्ती की उम्मीद अगली सरकार से ही करनी होगी। |
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