प्राइमरी का मास्टर ● इन |
- यूपी सरकार की DBT एक्सप्रेस पर ब्रेक, एप के जरिये सम्बद्ध एडेड प्राथमिक / जूनियर विद्यालय बच्चों के डेटा अपलोड में हुए रहे फिस्सडी
- डीएलएड प्रशिक्षुओं ने मांगी प्राथमिक शिक्षक भर्ती, अन्यथा करेंगे आंदोलन
- तीन से छह वर्ष तक के बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने की तैयारी, होगा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण, कक्षा एक के दाखिले में दाखिले से पहले मजबूत होगी नींव
- छात्रों के साल भर के टेस्ट और परीक्षा के अंक यूपी बोर्ड की साइट पर करने होंगे अपलोड
- नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अमल में उच्च शिक्षण संस्थान आएं आगे, सभी संस्थानों में गठित होगा एक NEP सेल
| Posted: 19 Nov 2021 05:19 PM PST यूपी सरकार की DBT एक्सप्रेस पर ब्रेक, एप के जरिये सम्बद्ध एडेड प्राथमिक / जूनियर विद्यालय बच्चों के डेटा अपलोड में हुए रहे फिस्सडी ■ डीबीटी एप पर अभिभावकों का ब्योरा नहीं कर रहे अपलोड ■ एडेड व राजकीय माध्यमिक से संबद्ध छह से आठ तक में बड़ी संख्या में छात्र लखनऊ : सरकार प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले सभी छात्र-छात्रओं के अभिभावकों के बैंक खाते में धन भेजना चाहती है। एक करोड़ 20 लाख लोगों को धन भेजा जा चुका है, लेकिन इसमें संबद्ध प्राइमरी स्कूल बाधा बने हैं। वहां के शिक्षक अभिभावकों का ब्योरा अपलोड नहीं कर रहे हैं। बेसिक शिक्षा विभाग ने इस संबंध में कई पत्र भेजे हैं, अनसुनी होने पर जिला विद्यालय निरीक्षकों को निर्देश दिए गए हैं। प्रदेश सरकार पहली बार बेसिक शिक्षा परिषद और अशासकीय सहायताप्राप्त के प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र-छात्रओं की यूनीफार्म, स्कूल बैग, जूता-मोजा और स्वेटर का धन उनके अभिभावकों के बैंक खाते में भेज रही है। अब तक एक करोड़ बीस लाख के खातों में धन भेजा जा चुका है शेष 60 लाख अभिभावकों के खाते में धन भेजने की प्रक्रिया चल रही है। बेसिक शिक्षा निदेशक डा. सर्वेंद्र विक्रम बहादुर सिंह ने बताया कि डीबीटी योजना में संबद्ध प्राइमरी विद्यालय बाधा बने हैं, वे पढ़ने वाले छात्र-छात्रओं के अभिभावकों का ब्योरा एप पर अपलोड नहीं कर रहे हैं। डा. सिंह ने कहा कि एडेड और राजकीय माध्यमिक कालेजों में छह से आठ तक की कक्षाएं लंबे समय से संचालित की जा रही हैं। ऐसे कालेजों की संख्या पांच हजार के करीब है और वहां छात्र-छात्रएं भी बढ़ी संख्या में हैं। सरकार की योजना का लाभ देने के लिए इन स्कूलों के प्रधानाध्यापक और प्रबंधकों को पत्र भेजा गया है, अनसुनी होने पर जिला विद्यालय निरीक्षकों को पत्र लिखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि संबद्ध प्राइमरी का ब्योरा अपलोड होते ही यह प्रक्रिया लगभग पूरी हो जाएगी। निदेशक ने यह भी कहा है कि जिन अभिभावकों को बच्चों की सामग्री के लिए धन मिल गया है, वे चारों वस्तुएं खरीद करके और बच्चों को देकर ही स्कूल भेजें। इसमें ग्राम प्रधान, पंचायत सदस्य और शिक्षक भी अभिभावकों को प्रेरित करें। बेसिक शिक्षा के प्रमुख सचिव दीपक कुमार ने कहा है कि डीबीटी के तहत अभिभावकों के खाते में धन भेजा जा रहा है। |
| डीएलएड प्रशिक्षुओं ने मांगी प्राथमिक शिक्षक भर्ती, अन्यथा करेंगे आंदोलन Posted: 19 Nov 2021 04:59 PM PST डीएलएड प्रशिक्षुओं ने मांगी प्राथमिक शिक्षक भर्ती, अन्यथा करेंगे आंदोलन प्रयागराज : परिषदीय विद्यालयों में प्राथमिक शिक्षक भर्ती की मांग कर रहे डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजूकेशन (डीएलएड) प्रशिक्षितों ने अब समय सीमा तय की है। सरकार से मांग की है कि 28 नवंबर को होने वाली शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के पहले शिक्षक भर्ती घोषित की जाए, अन्यथा टीईटी व केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (एसटीईटी) प्राप्त अभ्यर्थी सामूहिक रूप से लखनऊ में आंदोलन करेंगे। रिक्त पदों पर कोर्ट में हलफनामा दे चुकी है सरकार डीएलएड प्रशिक्षण प्राप्त अभ्यर्थी विनोद पटेल और अभिषेक तिवारी का कहना है कि 69 हजार भर्ती के बाद प्राथमिक शिक्षकों की कोई भर्ती नहीं आई। वर्तमान में टीईटी व सीटीईटी पास अभ्यर्थियों की संख्या करीब सात लाख है। प्रदेश के प्राथमिक विद्यालय में शिक्षकों के पद भी रिक्त हैं। इसकी स्वीकारोक्ति सरकार सुप्रीम कोर्ट में दिए हलफनामे में कर भी चुकी है। इसके अलावा प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में छात्र व शिक्षक अनुपात में शिक्षकों के रिक्त पदों का आकलन करने के लिए गठित की गई त्रिस्तरीय समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, ताकि रिक्त पदों की जानकारी स्पष्ट हो सके। इसके साथ सभी पदों को जोड़कर भर्ती विज्ञापन जारी किया जाए, ताकि बेरोजगारों को लाभ मिल सके। सरकार से ठोस आश्वासन चाहते हैं अभ्यर्थी उल्लेखनीय है कि इसी मांग को लेकर पिछले दिनों उत्तर प्रदेश परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय पर प्रशिक्षित अभ्यर्थियों ने प्रदर्शन भी किया था। प्रतियोगी सरकार से भर्ती को लेकर ठोस आश्वासन चाहते हैैं। इसके लिए वह अब लखनऊ में आंदोलन की तैयारी कर रहे हैैं। अभ्यर्थियों ने कहा है कि उनका यह आंदोलन भर्ती विज्ञापन जारी होने तक चलेगा। |
| Posted: 19 Nov 2021 04:50 PM PST स्कूल जाने के लिए नौनिहालों को तैयार करेंगी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ■ तीन से छह वर्ष तक के बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ेंगी ■ होगा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण ■ कक्षा एक के दाखिले में दाखिले से पहले मजबूत होगी नींव गोरखपुर : प्ले- वे की तर्ज पर जिले की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तीन से छह साल तक के बच्चों को स्कूल के लिए तैयार करेंगी। प्री-प्राइमरी शिक्षा के तहत बेसिक शिक्षा विभाग व जिला कार्यक्रम अधिकारी संयुक्त रूप से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करेंगे। प्रशिक्षण तीन चरणों में होगा। पहले चरण का प्रशिक्षण 29 नवंबर को, इसके बाद जनवरी व मार्च में होगा। प्रशिक्षण जिले के सभी ब्लाकों में एक साथ आयोजित होगा। शासन के निर्देश पर इसकी तैयारी शुरू हो है। आंगनबाड़ी केंद्रों के प्री-नर्सरी व में तब्दील होने से प्राथमिक विद्यालयों की गुणवत्ता में इजाफा होगा। अब तक जो बच्चे सीधे प्राथमिक विद्यालयों में कक्षा एक में दाखिला लेते थे। उन्हें पढ़ाई के लिए तैयार करने में शिक्षकों को काफी मेहनत करनी पड़ती थी। ऐसे में जब आंगनबाड़ी केंद्र प्री-प्राइमरी विद्यालय बन जाएंगे तो वहां शुरुआती दौर में बच्चों को पठन-पाठन की जानकारी दी जाएगी। यह उनके लिए कक्षा एक में दाखिले से पहले नींव मजबूती का भी काम करेगा। निर्देश के मुताबिक सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को निर्धारित तिथियों में प्रशिक्षित करने का कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा। खेल-खेल में पढ़ाने का सीखेंगी तरीका : जिले में वर्तमान में 41 सौ आंगनबाड़ी केंद्रों पर 3650 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तैनात हैं। जिन्हें प्रशिक्षित किया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें बच्चों को खेल-खेल में पढ़ाने का तरीका बताया जाएगा। साथ यह भी सिखाया जाएगा कि कैसे गीत, कविताएं और कहानियां शिक्षा का आधार बन सकती हैं। यह भी बताया जाएगा कि उनके कार्य का मूल्यांकन कैसे किया जाएगा, ताकि वे ये सुनिश्चित कर सकें कि उनका पढ़ाया हुआ बच्चों की समझ में आया भी है या नहीं। |
| छात्रों के साल भर के टेस्ट और परीक्षा के अंक यूपी बोर्ड की साइट पर करने होंगे अपलोड Posted: 19 Nov 2021 04:24 PM PST छात्रों के साल भर के टेस्ट और परीक्षा के अंक यूपी बोर्ड की साइट पर करने होंगे अपलोड लखनऊ : यूपी बोर्ड के स्कूलों को छात्रों के साल भर के अंक माध्यमिक शिक्षा परिषद की वेसबाइट पर अपलोड करना होगा। यह व्यवस्था इसी साल से लागू की गई है। यूनिट टेस्ट, अर्द्घवार्षिक परीक्षा के अलावा वार्षिक और प्री बोर्ड परीक्षा के अंक भी अपलोड होंगे। ऐसे में स्कूलों को अंकों का रिकॉर्ड अपने पास रखना होगा। बोर्ड जैसे ही अंक अपलोड करने का आदेश जारी करेगा सभी स्कूलों को यह प्रक्रिया शुरू कर देनी होगी। यह बदलाव कोरोना के दौरान उत्पन्न स्थितियों से हुई परेशानी के बाद किया गया। गत वर्ष कोरोना की वजह से स्कूलों में परीक्षाएं नहीं हो पाईं। कई स्कूलों ने अर्द्घवार्षिक नहीं कराई तो कई ने अंतिम परीक्षा और प्री बोर्ड परीक्षा कराई तो उसके अंकों का रिकॉर्ड नहीं रख पाए। कई स्कूलों को अंतिम गृह परीक्षा के बीच में ही कोरोना की वजह स्कूल को बंद करना पड़ा। इस बार बोर्ड परीक्षा नहीं हुई और कक्षा नौ से 12 तक स्कूली परीक्षा व टेस्ट के औसत अंक के आधार पर बोर्ड रिजल्ट जारी किया गया। अधिकांश स्कूलों के पास भी परीक्षाओं का रिकॉर्ड न तो था और न ही करा पाए। ऐसे में इस बार से सभी टेस्ट और परीक्षाओं के अंकों को माध्यमिक शिक्षा परिषद की वेबसाइट पर अपलोड करने का निर्णय लिया गया। ताकि बोर्ड को रिजल्ट को लेकर कोई परेशानी हो तो उसके पास पहले से ही औसतन अंकों का आधार हो। राजकीय जुबिली इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य धीरेंद्र मिश्रा ने बताया कि अर्द्घवार्षिक परीक्षा से दो बार यूनिट टेस्ट कराए जा चुके हैं। इस बार यूनिट टेस्ट के साथ बाकी परीक्षाओं को भी वेबसाइट पर अपलोड करने का निर्देश है। यूनिट टेस्ट के अंक तो आंतरिक मूल्यांकन के अंक के तौर पर लिया जाएगा। अभी अर्द्घवार्षिक परीक्षाएं चल रही हैं। इसके बाद कक्षा 10 और 12 के छात्रों की प्री बोर्ड परीक्षाएं होंगी। जबकि बाकी कक्षाओं की गृह परीक्षा होगी। इस दौरान भी यूनिट टेस्ट होंगे। इन सभी के अंक ऑनलाइन अपलोड होंगे। उन्होंने बताया कि इसलिए सभी शिक्षकों को इसके रिकॉर्ड रखने के निर्देश दिए हैं। बोर्ड जब भी वेबसाइट पर अपलोड करने को कहेगा अपने स्कूल की लॉगइन आईडी से अपलोड कर दिया जाएगा। |
| Posted: 19 Nov 2021 04:20 PM PST नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अमल में उच्च शिक्षण संस्थान आएं आगे, सभी संस्थानों में गठित होगा एक NEP सेल ■ सभी संस्थानों में गठित होगा एक एनईपी सेल ■ उठाए गए कदमों को लागू करने के लिए तय करनी होगी समय सीमा नई दिल्ली: नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) को तय समयसीमा में लागू कराने की जवाबदेही अब सिर्फ सरकार की ही नहीं होगी, बल्कि उच्च शिक्षण संस्थानों की भी होगी। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने इसे लेकर एक अहम कदम उठाया है। इसके तहत देश भर के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को अब अपने यहां एक एनईपी सेल गठित करना होगा जो नीति के अमल से जुड़े पहलुओं पर मुस्तैदी से काम करेगा, योजना बनाएगा और साथ ही यूजीसी को इसकी जानकारी भी देगा। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब उच्च शिक्षण संस्थानों के पास इसे लागू करने के लिए कोई तंत्र नहीं है। साथ ही इसके लिए कोई समर्पित टीम भी नहीं थी, जो इसके प्रविधानों को प्रमुखता से लागू कराने की दिशा में पहल कर सकें। यही वजह है कि यूजीसी ने अब सभी संस्थानों को इसके लिए एनईपी सेल गठित करने की सिफारिश की है। इस टीम का काम होगा कि वह नीति के अमल को लेकर उठाए गए कदमों को संस्थान में तय समयसीमा में लागू करने की योजना बनाए। साथ ही उसे लागू भी कराए। इस दौरान नीति के अमल में किसी स्तर पर कोई दिक्कत सामने आ रही है तो यह टीम सीधे यूजीसी से संपर्क कर सकती है। साथ ही इसका तुरंत समाधान भी निकाल सकती है। यूजीसी ने इसके साथ ही उच्च शिक्षण संस्थानों में गठित होने वाले इन सेल को उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार सहित दूसरे अहम कदमों का भी जिम्मा सौंपा है। जिसमें शिक्षकों को प्रशिक्षण देने, कौशल विकास को गति देने, मानव मूल्यों को मजबूती देने के लिए मुहिम चलाना आदि शामिल हैं। फिलहाल उच्च शिक्षण संस्थानों में नीति के अमल को लेकर जो अहम कदम उठाए गए हैं उनमें एकेडमिक बैंक आफ क्रेडिट स्कीम को लागू करना, उच्च शिक्षा के क्षेत्र में पढ़ाई छोड़ने और शुरू करने के लिए ढेरों विकल्प मुहैया कराने, ओपन लर्निग से जुड़े कोर्स को शुरू करने, विदेशी छात्रों की मदद के लिए कार्यालय स्थापित करना आदि शामिल हैं। |
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