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Saturday, November 27, 2021

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सात अफ्रीकी देशों के नागरिकों की यात्रा पर प्रतिबंध: बाइडन

Posted: 27 Nov 2021 06:04 AM PST

सात अफ्रीकी देशों के नागरिकों की यात्रा पर
प्रतिबंध: बाइडन

वाशिंगटन। अमेरिका कोरोना वायरस के नए वैरिएंट के चलते दक्षिण अफ्रीका एवं सात अन्य अफ्रीकी देशों के गैर-अमेरिकी नागरिकों की यात्रा पर सोमवार से पाबंदी लगाएगा। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन ने ट्वीट करके लिखा है कि, डब्ल्यूएचओ ने एक नए कोविड वैरिएंट की पहचान की है, जो दक्षिणी अफ्रीका से फैल रहा है। एहतियात के तौर पर जब तक हमारे पास अधिक जानकारी नहीं है, मैं दक्षिण अफ्रीका और सात अन्य देशों से हवाई यात्रा पर प्रतिबंध लगाने का आदेश दे रहा हूं। बता दें कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इसको लेकर सभी देशों को आगाह किया है। कोरोना पर डब्ल्यूएचओ के तकनीकी सलाहकार समूह ने अपनी समीक्षा के बाद कहा कि कोविड-19 का वैरिएंट बेहद संक्रामक है। समूह ने इसे सबसे चिंताजनक वैरिएंट करार देने की सिफारिश की है। डब्ल्यूएचओ ने इस वायरस को ओमिक्रॉन नाम दिया है। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag

भारत से लिपुलेख व काला पानी वापस लेंगे: ओली

Posted: 27 Nov 2021 06:01 AM PST

भारत से लिपुलेख व काला पानी वापस लेंगे: ओली

काठमांडू। नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री और मुख्य विपक्षी दल सीपीएन-यूएमएल के अध्यक्ष के पी शर्मा ओली ने शुक्रवार को वादा किया कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आती है तो वह भारत से कालापानी, लिम्पियाधुरा और लिपुलेख क्षेत्रों को बातचीत के जरिए वापस ले लेंगे। लिपुलेख दर्रा कालापानी के पास एक सुदूर पश्चिमी बिंदु है, जो नेपाल और भारत के बीच एक विवादित सीमा क्षेत्र है। भारत और नेपाल दोनों कालापानी को अपने क्षेत्र के अभिन्न अंग के रूप में दावा करते हैं। भारत उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के हिस्से के रूप में और नेपाल धारचूला जिले के हिस्से के रूप में इस पर दावा करता है।
काठमांडू से 160 किलोमीटर दक्षिण में चितवन में नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (एकीकृत माक्र्सवादी-लेनिनवादी) के 10वें आम सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए ओली ने दावा किया कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में वापस आती है तो वह भारत से बातचीत के माध्यम से लिम्पियाधुरा, कालापानी और लिपुलेख जैसे विवादित क्षेत्रों को वापस ले लेगी। उन्होंने कहा, हम बातचीत के जरिए समस्याओं के समाधान के पक्ष में हैं, न कि पड़ोसियों से दुश्मनी करके।
भारत द्वारा उत्तराखंड में लिपुलेख दर्रे को धारचूला से जोड़ने वाली 80 किलोमीटर लंबी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सड़क आठ मई, 2020 को खोले जाने के बाद द्विपक्षीय संबंध तनावपूर्ण हो गये थे। नेपाल ने सड़क के उद्घाटन का विरोध करते हुए दावा किया था कि यह उसके क्षेत्र से होकर गुजरती है। कुछ दिनों बाद, नेपाल लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा को अपने क्षेत्रों के रूप में दिखाते हुए एक नया नक्शा लेकर आया।हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag

छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों ने नशा मुक्ति दिवस मनाया

Posted: 27 Nov 2021 05:50 AM PST

छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों ने नशा मुक्ति दिवस मनाया 

जितेन्द्र कुमार सिन्हा

नशा मुक्ति दिवस के अवसर पर मध्य विद्यालय सिपारा के 180 छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों ने  प्रभातफेरी निकालकर नशा मुक्ति दिवस मनाया और घूम घूम कर आम जनता को जागरूक किया। शिक्षक और बच्चों ने स्लोगन के जरिये आम नागरिकों को नशा नहीं करने तथा नशीली पदार्थ से होने वाली हानियों के बारे में भी जागरूक किया।  
मध्य विद्यालय सिपारा की शिक्षिका समाजसेवी राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित एवं राजकीय शिक्षक सम्मान से सम्मानित शिक्षिका डॉ नम्रता आनंद एवं विद्यालय के प्रधानाध्यापक कृष्ण नंदन प्रसाद ने बढ़ चढ़कर प्रभात फेरी कार्यक्रम को सफल बनाया और लोगों को शराबबंदी नशा मुक्ति का संदेश दिया।
    
डॉ नम्रता आनंद ने कहा कि विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चे हर घर से आते हैं, जिनके द्वारा नशा मुक्ति का संदेश हर घर तक पहुंच जाएगा। उन्होंने कहा कि यह सरकार की बहुत अच्छी योजना है कि प्रभात फेरी निकालकर बच्चों द्वारा उनके घर तक संदेश पहुंचाया जाए। 

स्कूल के प्रधानाध्यापक कृष्ण नंदन प्रसाद ने कहा कि नशा करने से सिर्फ एक व्यक्ति नहीं पूरा का पूरा परिवार नष्ट हो जाता है। इसलिए हम बच्चों के साथ घूम घूम कर बच्चों के माध्यम से सभी अभिभावकों को किसी भी प्रकार का नशा नहीं करने का संदेश पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं।
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शपथ समारोह की नौटंकी

Posted: 27 Nov 2021 05:22 AM PST

शपथ समारोह की नौटंकी

भुलेटन भगत अपनी झोपड़ी के बाहर खुले आकाश के नीचे ताड़ की टुटही चटाई पर बैठे सुबह की कुनकुनी धूप सेंक रहे थे। उनका दाहिना हाथ गाल पर टिका था और बाएं हाथ से सामने खुले अखवार के पन्ने पलट रहे थे। अगल-बगल में ढेर सारी कूट की दफ्तियाँ बिखरी पड़ी थी, जिनपर नशा-विमुक्ति और शराब-बन्दी के पैगाम आड़े-तिरछे हरूफ़ों में लिखे हुये थे। चेहरे पर डीजे-डिजीटल-लाइट की तरह तीखे विचारों की तरंगे तैर रही थी, जिसे कोई भी समझदार आदमी आसानी से भाँप सकता था। नासमझों के लिए तो दुनिया में विचारों का कोई मोल ही नहीं होता।
ये सब क्या है भगतजी—मैंने पूछा और पँवलग्गी करके, चटाई पर बैठ गया।
भगतजी ने अखबार मेरी ओर बढ़ाते हुए कहा—" ये देखो बचवा ! आज का ताज़ा खबर और ये सब देखो कूट-कागज की विलखती दफ्तियाँ, जिन्हें कल के ज़श्न-ए-जुलूश में इस्तेमाल किया गया था। तुम्हें शायद पता हो, सिर्फ दफ्तियाँ ही नहीं इस्तेमाल हुयी थी, बल्कि शहर के सारे स्कूलों के बच्चे भी इस्तेमाल हुए थे—नशाबन्दी के इस्तेहार में। दफ्तियाँ तो जुलूश के बाद फेंक दी गयी कूड़े के ढेर पर, किन्तु हमारे नवनिहालों का क्या होगा, जिन्हें पढ़ने-लिखने के ख्याल से स्कूलों में भेजा जाता है, परन्तु सरकारी विज्ञापनों के लिए इस्तेमाल किया जाता है—जन-जागरूकता अभियान के नाम पर। सेलेब्रेटियों को तो पैसा मिलता है हर जरूरी-बे-जरूरी चीजों के इस्तेमाल के इस्तेहार के लिए, चाहे वो सामान समाज-राष्ट्र-मानवता के हित में हो या अनहित में। उन्हें सिर्फ दौलत-शोहरत से वास्ता होता है। हित-अनहित से क्या लेना-देना। परन्तु ये बच्चे ! इन्हें इस्तेहार का मोहरा बनाने का क्या तुक? "
मैंने सिर हिलाते हुए हामी भरी— बिलकुल सही कह रहे हैं भगतजी । हमेशा कुछ न कुछ सरकारी नौटंकियाँ चलती रहती हैं। खासकर सरकारी स्कूलों में पढ़ाई के अलावे बाकी के सब काम चलते रहता है। पिछले साल ही देखा था अपने गांव के हेडमास्टर साहब को बच्चों से घिरे हुए, डुगडुग्गी बजाकर जन-जागरूकता अभियान चलाते हुए। इस बार तो सुनते हैं कि सभी सरकारी दफ़्तरों में, यहाँ तक कि अदालतों में भी शपथ-ग्रहण समारोह हुआ—नशाविमुक्ति अभियान के तहत ।
आँखें तरेतते हुए भगतजी, जरा गम्भीर होकर बोले—" मंत्रीजी से चूक हो गयी होगी। सलाहकार ने शायद सुझाया नहीं होगा उन्हें । क्या ही अच्छा होता— ' चकलों और कोठों ' पर भी शपथ-समारोह मनाये जाते— नशा-विमुक्ति के। लगना ही क्या है शपथ लेने में, इसी बहाने समाहोह का एक मौका तो मिला न। शपथ लेने वाला भलीभाँति जानता है और शपथ दिलाने वाला भी कि शपथ लेने में कोई हर्ज़ नहीं है। देखते ही हो कि अदालतों की कारवाई शपथ-ग्रहण के साथ ही शुरु होती है। बिना कस़म के ग़वाही कबूली नहीं जाती। जबकि जज साहब भी बखूबी वाकिफ़ हैं कि कस़म खाना और टॉफी खाना बिलकुल एक जैसी बात है। सच्चाई के कब्र पर सजा-धजा झूठ जितने बेखौफ होकर अदालतों में तहलका मचाता है, उतना तो वेश्यालयों में भी झूठ का व्यापार नहीं चलता । छोटे-बड़े मानिन्दों को संविधान की शपथ दिलायी जाती है। बात-बात में पवित्र संविधान की दुहाई दी जाती है। किन्तु संविधान की कितनी इज्जत-मर्यादा का खयाल करते हैं हमारे ये रहनुमा, सभी वाकिफ़ हैं इससे। राजनैतिक सभाओं की तो बात ही दीगर है, लोकतन्त्र के पवित्र मन्दिर में भी आए दिन संविधान की मर्यादा तारतार होती है और हम खबरें देखने-सुनने-पढ़ने से ज्यादा और कुछ नहीं कर पाते। "
मैंने कहा — एकदम से ट्रन्च सोने की तरह खरी-खरी बात कह रहे है भगतजी। दरअसल शपथ के शब्द तो होंठ बुदबुदाते हैं न, दिल-व-दिमाग को उसकी कोई खबर नहीं होती। उन तक उन्हें पहुँचने ही नहीं दिया जाता। शपथ-वाक्य और गरिमा को गुटके की पीक की तरह, पिच्चऽ से फेंक दिया जाता है, क्योंकि गलती से भीतर चला गया यदि, तो भारी बेचैनी पैदा कर देगा। हालाँकि ऐसे भी धुरन्धर होते हैं, जो कड़ा से कड़ा गुटका हलक से नीचे भेज कर, पचा भी जाते हैं।
भगतजी ने हामी भरी— " सही कहा तुमने। संदेश हो या आदेश, अनुनय हो या आग्रह, बिलकुल ऊपर-ऊपर निकल जाता है। ज़ेहन में कुछ घुसने की गुँजाइश हो तब न। हित-अनहित की बात सोचने-विचारने का समय हो तब न। गम्भीर से गम्भीर बातें भी यूँ ही निकल जाती हैं। तुम ये न समझो कि इस शपथ-समारोह की आलोचना करके, शराब-बन्दी और नशा-विमुक्ति अभियान के खिलाफ़त में हूँ। शराब कोई अच्छी चीज तो है नहीं। लोग शराब पीकर गम भुलाने की बात करते हैं, किन्तु 'हम' भुलाने की कवायद है शराब। एक गैर जिम्मेदाराना हरकत है शराब पीना। इससे व्यक्ति और समाज का नुकशान ही नुकशान है ।
" किन्तु सोचने वाली बात है कि हर बात के लिए हमें नियम-कानून का ही सहारा क्यों लेना पड़ता है ? शपथ की वैशाखी क्यों टेकने की जरुरत पड़ती है? और सबसे हास्यास्पद और सोचनीय बात तो ये है कि नियम-कानून और शपथ की अवहेलना होती है। इनकी मर्यादा भंग होती है। इससे आम समझ वालों के लिए यही संदेश जाता है कि कानून सिर्फ तोड़ने के लिए होता है। कसम सिर्फ खाने के लिए होता है।
" कहने को तो शराब-वन्दी कानून वर्षों पहले लागू हो गया था सूबे में। किन्तु क्या हस्र हुआ सभी जानते हैं। टैक्स-हानि के रूप में सरकारी खजाने को भले ही खामियाज़ा उठाना पड़ा इस कानून से, किन्तु शराबी और शराब के कारोबार में कुछ खास फ़र्क नहीं आया। सीमा पार का कारोबार शुरु हो गया। नदी के दियारों और जंगल-पहाड़ों में नयी-नयी भट्टियाँ खुल गयी। हुक्मरानों और थानेदारों की चाँदी कटने लगी।
" सोचने वाली बात है कि गाय पालने के लिए कोई खास सहयोग नहीं मिलता, जबकि मुर्गी,सूअर,मछली पालन के लिए प्रोत्साहन और सब्सीडी मिलता है। 'चिखना' का इन्तज़ाम रहेगा जबतक 'ठर्रे' तो चलेंगे ही तबतक। 'गोरस' को बढ़ावा नहीं मिलेगा जबतक, 'महुआरस' तो चलेगा ही तबतक। इसे रोकने में कोई क़वायद कामयाब नहीं हो सकता।
" हम ट्रेन में टिकट इसलिए लेकर चलते हैं कि टी.टी.ई. का डर होता है। हेलमेट इसलिए पहनते हैं कि ट्रैफिक पुलिस का डर होता है... ऐसी सोच जबतक रहेगी, तब तक कुछ खास होने से रहा। गाड़ी यदि खटारा है तो भला टायर या ड्राईवर बदलने से क्या होने को है !
" सच्चाई ये है कि मानवता का बोध जब तक नहीं होगा, नैतिकता की समझ जब तक नहीं होगी, लोकहित और राष्ट्रहित की भावना का सूरज जबतक अन्तर्मन में उदित नहीं होगा तब तक विशेष परिवर्तन नहीं हो सकता । अतः उचित है कि इस दिशा में हम और हमारी सरकारें कुछ सोचें-विचारे-करें। "भगतजी की टुटही चटाई पर बैठा मैं सोचने लगा—काश ! इस 'बौड़म' से इन्सान वाली सोच हम सबकी हो जाती।
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हालावाद के जनक हरिवंश राय बच्चन

Posted: 27 Nov 2021 04:38 AM PST

हालावाद के जनक हरिवंश राय बच्चन 

जहानाबाद । सच्चिदानंद शिक्षा एवं समाज कल्याण संस्थान की ओर से आयोजित हालावाद के प्रवर्तक हरिवंश राय बच्चन की जयंती के अवसर पर जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन जहानाबाद के उपाध्यक्ष साहित्यकार व इतिहासकार सत्येन्द्र कुमार पाठक ने कहा कि हरिवंशराय बच्चन की कविताएं दिल को छू जाने वाली एवं हर उम्र के लोगों को प्रभावित करती है । उनकी कविता सच्चाई का आइना में जिंदगी की हकीकत की एक अलग ही परिभाषा पढ़ने को मिलती है ।भारतीय साहित्य के प्रसिद्ध कवि हरिवंश राय बच्चन का जन्म 27 नवबंर 1907 को इलाहाबाद के प्रतापगढ़ जिले के एक छोटे से गांव बापूपट्टी में हुआ था । एक साधारण कायस्थ परिवार में जन्मे बच्चे प्रताप नारायण श्रीवास्तव और सरस्वती देवी के बड़े बेटे थे. इनको बचपन में लाड़ से बच्चन कहा जाता था । बाद में हरिवंश राय बच्चन ने अपने नाम से श्रीवास्तव हटाकर बच्चन लगा दिया था । 1926 में श्यामा बच्चन से विवाह हुआ था, जो उस समय 14 वर्ष की थी.1936 में उनका लंबी बीमारी के चलते निधन हो गया । 1942 में बच्चन जी ने तेजी सूरी से दूसरी शादी की थी । तेजी बच्चन से अमिताभ और अजिताभ पुत्र हैं । कुशल साहित्यकार कवि और लेखक हरिवंश राय की शुरुआती शिक्षा म्यूनिसिपल स्कूल, कायस्थ पाठशाला और गवर्नमेंट स्कूल से हुई थी. हरिवंश राय ने 1938 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में एम.ए. किया और सन् 1939 में काशी विश्वविद्यालय से बी.टी.सी. की डिग्री हासिल की थी. वह यहां 1942 से 1952 तक प्रवक्ता रहे. इसके बाद इंग्लैंड चले गए. वहां इन्होंने कैंब्रिज विश्वविद्यालय से इंग्लिश लिटरेचर में पीएचडी की उपाधि मिली. हरिवंश राय दूसरे ऐसे भारतीय थे जिन्हें कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से इंग्लिश लिटरेचर में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त हुई थी । ऑल इंडिया रेडियो अलाहाबाद में काम करते थे । सन् 1955 में भारत सरकार के विदेश मंत्रालय में इन्होंने हिंदी विशेषज्ञ के पद पर संभाला था । 1966 में राज्य सभा के सदस्य हुए थे । भारत सरकार ने हरिवंश राय को साहित्य अकादमी अवार्ड दिया गया. हिंदी साहित्य में इनके विशेष योगदान के लिए1976 में पद्म भूषण से सम्मानित किया था. हरिवंशराय को सरस्वती सम्मान, नेहरु अवार्ड, लोटस अवार्ड से नवाजा गया था । हरिवंश राय बच्चन, एक ऐसे कवि थे जो 20 वीं सदी में भारत के सर्वाधिक प्रशंसित हिंदी भाषी कवियों में से एक थे. अवधी, हिन्दी भाषा पर इनकी खास पकड़ थी । कविताओं ने भारतीय हिन्दी साहित्य में बहुत परिवर्तन किया था, इनकी शैली पहले के कवियों से काफी अलग थी । नई सदी में हालावाद का जनक कहा जाता हैं. इनकी रचनाओं ने काव्य में नयी धारा का संचार किया है । हरिवंश राय बच्चन का स्वभाव तेज होने के कारण एंग्री मेन कहा गया है । अमिताभ ने अपने पिता की कई कविताओं को अपनी आवाज दी है । हरिवंशराय जी ने 18 जनवरी 2003 में अंतिम सांस ली थी । काव्य संग्रह: मधुशाला, मधुकलश, मधुबाला, एकांत संगीत, निशा निमंत्रण, आरती और अंगारे, आकुल-अंतर, टूटी-फूटी कड़ियां, मिलन यामिनी, नए पुराने, झरोखे, बुध और नाच घर. आत्मकथा - इन्होंने चार खंडों में अपनी आत्मकथा लिखी जो इस प्रकार है-क्या भूलूं क्या याद करूं, नीड़ का निर्माण फिर, बसेरे से दूर, दसद्वार से सोपान तक. अनुवाद – हैमलेट, जनगीता, मैकबेथ और डायरी है । इस अवसर पर संस्थान के कार्यक्रम पदाधिकारी पप्पू कुमार , पी एन बी के सेवानिवृत्त अधिकारी सत्येन्द्र कुमार मिश्र , उर्वशी ,प्रियंका आदि ने बच्चन जी के कीर्तित्व और रचनाओं पर प्रकाश डाला ।
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ब्राह्मण समाज द्वारा किया गया जरूरतमंद परिवार की कन्याओं के विवाह में सहयोग

Posted: 27 Nov 2021 04:14 AM PST

ब्राह्मण समाज द्वारा किया गया जरूरतमंद परिवार की कन्याओं के विवाह में सहयोग

दिव्य शाकद्वीपीय ब्राह्मण समिति व अखिल भारतीय ब्राह्मण एकता परिषद, गोरखपुर के संयुक्त प्रयास से संगठन के माध्यम से आह्वान करने पर समाज के उदारमना सहयोगी स्वजनों ने मानवता का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत कर समाज के एक अत्यंत निर्धन जरूरतमंद परिवार की दो कन्याओं के विवाह में हरसंभव सहयोग करने का बीड़ा उठाया। देश-प्रदेश के सुहृद बंधुओं ने इस आह्वान पर धनधान्य, गृहस्थी के उपयोगी उपहार आदि प्रदान कर विवाह सकुशल संपन्न कराने में भरपूर सहयोग प्रेषित कर कन्या के विवाहोपरांत सुखद दाम्पत्य जीवन की मंगल कामनाएं की। संस्था के अध्यक्ष श्री शरद चन्द्र पाण्डेय जी के अशोक नगर, बशारतपुर स्थित आवास पर समस्त देय सामग्री एकत्रित कर उक्त दोनों कन्याओं की माता को संस्था के पदाधिकारियों व सहयोगी बंधुओं के उपस्थिति में सौंपा गया। महामंत्री अमरनाथ मिश्र, संगठन मंत्री अनन्त मिश्र, संयुक्त मंत्री रजनीश मिश्र के साथ ही समाजसेविका श्रीमती कुमुद त्रिपाठी व समाजबंधु श्री अवधेश पाण्डेय, रामेश्वर दयाल मिश्र, राजेंद्र मिश्र, राजेश त्रिपाठी आदि ने भी अपनी सशक्त सहभागिता व गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई।

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