दिव्य रश्मि न्यूज़ चैनल |
- चाचा-भतीजे का गठबंधन
- सदन से सड़क तक चुनावी सफर
- Liked on YouTube: विधुत विभाग की लापरवाही के कारण मांझी के लोग लगातार कष्ट झेल रहें है परन्तु उनकी सुध लेनेवालाकोईनहीं
- नेपाली कांग्रेस को देउबा पर भरोसा
- केएमसी पर ममता की पहली जीत
- किम जोंग ने हंसने पर लगायी रोक
- अजहर व हाफिज जैसे आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रहा पाक: अमेरिका
- रात के अंधेरे में चीनी सैनिक कर रहे खतरनाक अभ्यास
| Posted: 18 Dec 2021 01:24 AM PST चाचा-भतीजे का गठबंधन(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा) उत्तर प्रदेश की राजनीति में 16 दिसम्बर को एक नया अध्याय शुरू हुआ जब सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने चाचा शिवपाल यादव के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। यादव परिवार की वर्षों पुरानी कलह को खत्म कर चाचा-भतीजे में सुलह हो गयी है। आज से तीन साल पहले भी अखिलेश यादव ने कहा था कि चाचा शिवपाल यादव को 2022 में राज्यसभा भेजूंगा लेकिन तब इसे मजाक माना गया था। अब 2022 के विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव ने छोटी-छोटी पार्टियों को जोड़कर सशक्त मोर्चा बनाया है। अखिलेश और शिवपाल के मिलने के बाद सैफई में जश्न मनाया गया। दरअसल, भाजपा के बढ़ते प्रभाव ने दोनों को यह सीख दे दी कि अलग-अलग रहकर कुछ भी हासिल नहीं किया जा सकता है। पहले सीटों को लेकर कहा जा रहा था कि शिवपाल यादव सौदेबाजी कर सकते हैं लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। दोनों में झगड़े की कई वजहें थीं जो समय के थपेड़े में अब निरर्थक हो गयी है। शिवपाल और अखिलेश का साथ दूसरी पार्टियों को भी गठबंधन के लिए मजबूर कर सकता है। इटावा के सैफई में पांच साल के लंबे अंतराल के बाद सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के पैतृक गांव सैफई में समाजवादी परिवार के एक होने का जश्न मनाया गया। लखनऊ में चाचा शिवपाल की भतीजे अखिलेश की मुलाकात और गठबंधन की सूचना आते ही सैफई में दीपावली जैसा उत्सव मनाया गया। अखिलेश और शिवपाल के मिलन के बाद उनके गृह नगर सैफई में जश्न का माहौल था। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने जमकर आतिशबाजी की और लोगों ने एक दूसरे को मिठाइयां खिलाकर बधाई दी। ऐसा प्रतीत होता था कि अखिलेश और शिवपाल के मिलन के बाद एक बार फिर से सैफई के लोग दीपावली मना रहे हैं। हालांकि अभी आधिकारिक तौर पर इसका ऐलान नहीं किया गया है ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि एक सप्ताह के भीतर गठबंधन का ऐलान हो सकता है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 के लिए चाचा-भतीजे में सुलह की खबर के बाद अब यूपी की राजनीति गरमा चुकी है। अखिलेश यादव ने शिवपाल यादव के साथ अपनी तस्वीर ट्वीट कर इस बात की जानकारी भी दी। जानकारी मिलने पर सपा व प्रसपा के कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर दौड़ गई। अखिलेश यादव ने ट्विटर पर चाचा शिवपाल सिंह यादव के साथ तस्वीर पोस्ट करते हुए जानकारी दी कि प्रगतिशील सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जी से मुलाकात हुई और गठबंधन की बात तय हुई। क्षेत्रीय दलों को साथ लेने की नीति समाजवादी पार्टी को निरंतर मजबूत कर रही है और सपा व अन्य सहयोगियों को ऐतिहासिक जीत की ओर ले जा रही है। बता दें कि समाजवादी पार्टी में पड़ी फूट के बाद शिवपाल सिंह यादव ने प्रगतिशील समाजवादी पार्टी का गठन कर लिया था। भरोसेमंद सूत्रों ने बताया कि अखिलेश यादव और शिवपाल सिंह यादव की 45 मिनट की मुलाकात में सीटों पर भी फैसला हो गया है। बताया जा रहा है कि समाजवादी पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव प्रगतिशील समाजवादी पार्टी को चुनाव में 5 से 7 सीटें देने को तैयार हैं। इस मुद्दे पर अखिलेश और शिवपाल के बीच बंद कमरे में लंबी बातचीत चली है। सूत्रों ने बताया कि अखिलेश ने यह भी संकेत दिया है कि शिवपाल सिंह यादव के लोगों को और एडजस्ट किया जाएगा। बताया जा रहा है कि शिवपाल सिंह यादव के खेमे के लोग सपा के सिंबल पर भी लड़ सकते हैं। इस 45 मिनट की मुलाकात में दोनों लोगों के हाव-भाव प्रसन्नता वाले थे। इस मौके पर अखिलेश यादव ने चाचा शिवपाल सिंह यादव के पैर छूकर आशीर्वाद भी लिया। समाजवादी पार्टी में तत्कालीन मुख्यमंत्री और अखिलेश यादव और उनके चाचा शिवपाल यादव के बीच का झगड़ा सपा के लिए मुसीबत बन गया और सोमवार को लखनऊ में पार्टी के घर की रार सभी ने देखी। कहने के लिए तो यह झगड़ा पिछले एक-दो महीने से ही सामने आया लेकिन दोनों के बीच मनमुटाव कई साल पुराना था। चाचा-भतीजे के बीच झगड़े का घटनाक्रम डिंपल यादव की राजनीति में एंट्री के समय ही शुरू हुआ। विधानसभा उपचुनाव में डिंपल यादव की हार के बाद अमर सिंह और शिवपाल यादव पर आरोप लगे। वहीं से चाचा-भतीजे का झगड़ा बढ़ने लगा था। फिरोजाबाद जैसी मजबूत सीट से डिंपल 2009 में उपचुनाव हार गई थीं। इसी सीट से जीतकर अखिलेश यादव सांसद बने थे। माना गया कि अखिलेश ने यह सीट छोड़ी तो जनता में नाराजगी दिखी और डिंपल को हार का सामना करना पड़ा। यूपी विधानसभा चुनाव 2012 में सपा को बहुमत हासिल हुआ तो मुलायम सिंह ने पुत्र को सीएम की कुर्सी पर बैठा दिया। शिवपाल और कई अन्य बड़े नेताओं को पहले तो लगा कि प्रदेश की कमान भले ही अखिलेश को दी गई हो लेकिन असल सरकार नेताजी ही चलाएंगे। लेकिन धीरे-धीरे अखिलेश ने अपना प्रभाव बढ़ाते हुए अपने स्तर पर फैसले करने शुरू किए और पार्टी में भी अपना रुतबा बढ़ाना शुरू किया। यहीं से शिवपाल यादव और बाकी नेताओं की चिढ़ बढ़ने लगीं। अमर सिंह की सपा में वापसी पर भी अखिलेश यादव ने आपत्ति जताई लेकिन पिता से लेकर चाचा तक सभी को उनकी आपत्ति नागवार गुजरी। अखिलेश के चाहने के बावजूद भी अमर सिंह को ससम्मान सपा में वापस लाया गया।मुख्तार अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल के विलय के सवाल पर भी अखिलेश ने सख्त रुख अख्तियार किया तो विलय रद्द किया गया। तब से चाचा शिवपाल खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे थे। दरअसल, यूपी की सत्ता में एक अहम केंद्र होने के बावजूद शिवपाल को शायद इस विलय के न होने से सार्वजनिक रूप से शर्मिंदगी झेलनी पड़ी होगी। अंसारी की पार्टी के विलय पर विवाद के बाद शिवपाल ने ही सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया। उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा देने की भी चेतावनी दी। शिवपाल के आरोपों के हफ्ते भर बाद अखिलेश यादव ने पहले अपने दो मंत्रियों और फिर अगले ही दिन मुख्य सचिव दीपक सिंघल को हटा दिया, जो शिवपाल के करीबी माने जाते थे। बस इसके बाद तो आग मानो पूरी तरह सुलग गई और यूपी की सियासत में इस आग का धुआं और गुब्बार फैल गया। हालांकि 2018 में समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने चाचा शिवपाल सिंह यादव के साथ अन्तर्कलह से इंकार किया। उन्होंने कहा कि चाचा विधायक हैं, फिर उस सीट पर चुनाव हो ये ठीक नहीं, लेकिन मैं आप सबको यकीन दिलाता हूं कि 2022 में चाचा शिवपाल सिंह यादव को मैं राज्यसभा का टिकट दे दूंगा। उन्होंने कहा कि जब कुर्सी थी तो झगड़ा था, अब कुर्सी नहीं है तो झगड़ा भी नहीं है। उन्होंने कहा कि चाचा से कोई झगड़ा नहीं है। नेता जी ने मुझे जो आदेश दिया था वो मैंने पूरा किया। उन्होंने दावा किया है कि उनके परिवार में कोई झड़गा नहीं है। उनका परिवार नहीं टूटा है। अखिलेश यादव का यह बयान पार्टी और परिवार में चल रहे अन्तर्कलह को खत्म करने की दिशा में बढ़ाया गया कदम माना जा रहा था एक चैनल से बातचीत के दौरान सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने परिवार के अन्तर्कलह व टूटने पर किए सवाल पर कहा कि किसी का भी परिवार नहीं टूटना चाहिए। हमारा परिवार भी नहीं टूटा है। अखिलेश ने कहा कि कुर्सी थी तो झगड़ा था। अब कुर्सी नहीं तो कोई झगड़ा नहीं। शिवपाल को लेकर किए सवाल पर उन्होंने कहा कि कोई मनमुटाव नहीं है। हम होली पर मिले थे। मैंने उनके पैर छुए और उन्होंने मुझे आशीर्वाद दिया। उस समय अखिलेश यादव की बातें होली के रंग की तरह लगी थीं लेकिन 2019 की हार के बाद दोनों को हकीकत समझ में आ गयी है। (हिफी) हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 18 Dec 2021 01:22 AM PST सदन से सड़क तक चुनावी सफर(डॉ. दिलीप अग्निहोत्री-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा) वर्तमान सरकार दीनदयाल उपाध्याय की सोच के आधार पर अंतिम व्यक्ति के लिए काम कर रही है। सबका साथ सबका विकास मूलमंत्र को साकार किया जा रहा है। योजनाओं में कोई भेदभाव नहीं किया। देश और दुनिया की यूपी के प्रति धारणा बदली है। राज्य में कई जिलों में माफिया हावी होते थे। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का समय करीब आ रहा है। सभी राजनीतिक दल अपने अपने ढंग से रणनीति बना रहे है। उस पर अमल किया जा रहा है। इसी दौरान उत्तर प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र आयोजित हुआ। विपक्ष ने इस बार भी सदन से लेकर विधान सभा के ठीक सामने सड़क पर हंगामा किया। पिछले अनेक सत्रों में ऐसा ही नजारा रहा है। सरकार को घेरना विपक्ष का अधिकार व कर्तव्य है किंतु यह विरोध विधानसभा मार्ग तक ही सीमित रहा है। सत्ता पक्ष ने पिछली बार की तरह इस बार भी विधाई कार्यों की दृष्टि से लाभ उठाया। उसे विधेयक पारित कराने व अपनी बात रखने में सफलता मिली। विपक्ष अधिकांश समय हंगामा ही करता रहा। वैचारिक व नीतिगत स्तर पर वह प्रदेश की सबसे बड़ी पंचायत में अपनी पूरी बात नहीं रख सका क्योंकि यहां बिपक्षी पार्टियों में हंगामे की प्रतिस्पर्धा चल रही थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सदन में सरकार की उपलब्धियों को गिनाया। विपक्ष पर जम कर हमला बोला। इस तरह सत्ता पक्ष अपना पक्ष जनता तक पहुंचाने में सफल रहा। मुख्यमंत्री ने सदन में बयान दिया। इसके अलावा वह प्रधानमंत्री के साथ एक वर्चुअल कार्यक्रम में शामिल हुए। इसके माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने का सन्देश दिया गया। जाहिर है कि सदन के भीतर व बाहर दोनों जगह सत्ता पक्ष का चुनावी सफर मजबूती से आगे बढ़ा है। योगी आदित्यनाथ ने सपा पर हमला बोला लेकिन नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चैधरी को सच्चा समाजवादी बताया। इस कथन से योगी आदित्यनाथ ने राजनीतिक निशाना साधने का प्रयास किया। उनका निहितार्थ यह था नेता प्रतिपक्ष अपनी ही पार्टी में अपवाद की तरह है। दूसरी तरफ वर्तमान सरकार राम मनोहर लोहिया,डॉ आंबेडकर के सपनों को साकार कर रही है। इसके अंतर्गत गरीबों वंचितों के लिए कल्याणकारी योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है। डॉ लोहिया ने साठ साल पहले कहा था कि इस देश में जिस दिन कोई सरकार आम लोगों को चूल्हा देगी, बिजली, देगी, पानी देगी, स्वास्थ्य सुविधाएं देगी, शौचालय देगी, उस सरकार को पच्चीस सालों तक दुनिया की कोई ताकत हटा नहीं पाएगी। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्तमान केंद्र व उत्तर प्रदेश सरकार इस नीति पर अमल कर रही है। इसलिए डॉ लोहिया की भविष्यवाणी सही साबित होगी। इसके पहले सरकार ने आठ हजार करोड़ रुपये से अधिक का दूसरा अनुपूरक बजट विधानसभा में पेश किया। वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने इस दौरान वित्तीय वर्ष के पहले चार महीनों का एक लाख अड़सठ हजार करोड़ रुपये से अधिक का लेखानुदान भी सदन में प्रस्तुत किया। विपक्ष के सदस्यों ने सत्र के प्रथम दिवस भी लखीमपुर कांड को लेकर हंगामा किया था। वह धरने पर भी बैठे थे। योगी आदित्यनाथ ने 16 दिसम्बर को विधानसभा में मोहम्मद अली जिन्ना को लाखों हिन्दुओं का हत्यारा बताया। उन्होंने कहा कि जिन्ना भारत का आदर्श कभी नहीं बन सकता है। जिन्ना का नाम सरदार पटेल के साथ लेना देश का बहुत बड़ा अपमान है। उन्होंने समाजवादी पार्टी पर डॉ भीमराव आम्बेडकर व कांशीराम के अपमान का भी आरोप लगाया। कहा कि डॉ राममनोहर लोहिया के समाजवाद से सपा बहुत दूर है। योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में अनुपूरक बजट पर चर्चा के दौरान अपने पांच साल का ब्यौरा रखा। कहा कि उत्तर प्रदेश का विधान मंडल पहला विधान मंडल है जिसने सस्टेनेबल डेवलपमेन्ट पर चर्चा की। महात्मा गांधी की एक सौ पचासवीं जयंती पर विशेष सत्र आयोजित कर चर्चा की गई। वर्तमान सरकार दीनदयाल उपाध्याय की सोच के आधार पर अंतिम व्यक्ति के लिए काम कर रही है। सबका साथ सबका विकास मूलमंत्र को साकार किया जा रहा है। योजनाओं में कोई भेदभाव नहीं किया। देश और दुनिया की यूपी के प्रति धारणा बदली है। राज्य में कई जिलों में माफिया हावी होते थे। उन पर लगाम लगा है। उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है। कानून व्यवस्था दुरुस्त होने और अच्छा माहौल बनने से उत्तर प्रदेश में निवेश आया है। मोबाइल का डिस्प्ले स्क्रीन पहले देश में नहीं बनता था। चीन से आता था। आज हमारे उत्तर प्रदेश में डिस्प्ले बन रहा है। मल्टीनेशनल कम्पनियां उत्तर प्रदेश में निवेश करना चाह रही हैं। बहुत सी कम्पनिया निवेश की हैं। देश में उत्तर प्रदेश आज दूसरी अर्थव्यवस्था है। पहले की सरकारों ने इसी प्रकार से काम किया होता तो उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर होता। यहां का प्रत्येक नागरिक इसका हक रखता है। योगी ने कहा कि देश में पचास ऐसी योजनाएं हैं जो कभी तीस पैतीस नम्बर पर रहा करती थीं। आज ऐसी योजनाएं नम्बर एक पर हैं। सरकार को पौने पांच वर्ष होने जा रहे हैं। सही मायने में साढ़े तीन साल ही काम किया। करीब बीस महीना कोरोना ले गया। दुनिया की बड़ी बड़ी ताकतें कोरोना के सामने नत मस्तक हुईं। भारत देश में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में लोगों को कोरोना से ही नहीं बचाया बल्कि रोजगार को भी बचाने का काम किया। भारत के मुकाबले अमेरिका में मौत के आंकड़े ज्यादा थे। जबकि भारत की आबादी ज्यादा है। इससे यह साबित होता है कि मोदी के नेतृत्व में देश ने कोविड के खिलाफ मजबूत लड़ाई लड़ी है। हमारे पास कोरोना से लड़ने के लिए जांच लैब तक नहीं थी। आज उत्तर प्रदेश चार लाख जांच हर दिन करने की क्षमता रखता है। प्रारम्भिक काल में कोरोना के खिलाफ लड़ाई के दौरान पीपीई किट,मास्क के लिए भी केंद्र पर या अन्य राज्यों पर निर्भर थे। आज उत्तर प्रदेश में सब कुछ बन रहा है। अठारह करोड़ लोगों को वैक्सीन दी गयी। डबल इंजन की सरकार पन्द्रह करोड़ लोगों को डबल राशन भी दे रही है। पांच वर्षों के एक भी दंगा नहीं हुआ है। प्रदेश में सत्रह नगर निगम हैं। उनमें से दस शहरों को केंद्र सरकार स्मार्ट सिटी योजना में शामिल कर लिया है। उन शहरों का विकास हो रहा है। जो शहर केंद्र से छूट गए हैं, उन्हें राज्य सरकार विकसित कर रही है। (हिफी) हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 18 Dec 2021 01:13 AM PST विधुत विभाग की लापरवाही के कारण मांझी के लोग लगातार कष्ट झेल रहें है परन्तु उनकी सुध लेनेवालाकोईनहीं बिहार के मांझी से हमारे संवाददाता विजय कुमार सिंह सामान्य जनता की समस्या को लेकर आप के समक्ष रख रहें है | विधुत विभाग की लापरवाही के कारण मांझी के लोग लगातार कष्ट झेल रहें है परन्तु उनकी सुध लेनेवाला कोई नहीं है | दिव्य रश्मि ! धर्म, राष्ट्रवाद , राजनीति , समाज एवं आर्थिक जगत की खबरों का चैनल है | जनता की आवाज़ बनने के उदेश्य से हमारे सभी साथी कार्य करते है अत: हमारे इस मुहीम में आप के साथ की आवश्यकता है |हमारे खबरों को लगातार प्राप्त करने के लिए हमारे चैनल को सबस्क्राइब करना न भूले और बेल आइकॉन को अवश्य दबाए | खबर पसंद आने पर👉 हमारे "चैनल" को Subscribe, वीडियो को Like 👍 & Share↪ , जरुर करें चैनल को सब्सक्राइब करें खबर को शेयर जरूर करें Facebook : https://ift.tt/3dbFiJU Twitter https://twitter.com/DivyaRashmi8 instagram : https://ift.tt/35ARrp0 visit website : https://ift.tt/3d6mwRK via YouTube https://www.youtube.com/watch?v=GIyaoquh7Z0 |
| नेपाली कांग्रेस को देउबा पर भरोसा Posted: 18 Dec 2021 12:14 AM PST नेपाली कांग्रेस को देउबा पर भरोसा(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा) भारत में कांग्रेस भले ही दुर्दिन का शिकार हो गयी है लेकिन हमारे पड़ोसी देश नेपाल में सबसे बड़ी लोकतांत्रिक पार्टी नेपाली कांग्रेस ने वामपंथियों को पछाड़कर सत्ता पर कब्जा कर लिया है। शेर बहादुर देउबा पांचवीं बार प्रधानमंत्री बने हैं। पार्टी को भी देउबा पर भरोेसा है। इसलिए एक बार फिर उन्हंे पार्टी का अध्यक्ष चुना गया है। भारत के प्रति नरम रवैया अपनाने वाली नेपाली कांग्रेस के सत्ता में रहने और मजबूत संगठन के चलते अच्छे भविष्य की उम्मीद की जा सकती है। पूर्व प्रधानमंत्री और वामपंथी नेता केपी शर्मा ओली ने तो कई विवाद खड़े कर दिये थे और उनका झुकाव चीन की तरफ ज्यादा था। नेपाली कांग्रेस में भी गुटबाजी से इनकार नहीं किया जा सकता क्योंकि शेर बहादुर देउबा को पार्टी का अध्यक्ष बनने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला के भतीजे शेखर कोइराला से मुकाबला करना पड़ा। नेपाल की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक पार्टी नेपाली कांग्रेस ने 15 दिसम्बर को एक बार फिर प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा को पार्टी का अध्यक्ष चुना। नेपाली कांग्रेस के 14वें महाअधिवेशन के अनुसार, देउबा को दूसरे चरण के चुनाव में 2733 मत मिले और उन्होंने शेखर कोइराला को मात दी, जिन्हें 1855 मत मिले थे। कोइराला ,पूर्व प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला के भतीजे हैं। मतदान में कुल 4,623 वोट डाले गए थे और 35 मतों को अवैध घोषित कर दिया गया। पहले चरण के चुनाव में कोई फैसला नहीं हो सका था क्योंकि पांच उम्मीदवारों में से किसी को भी 50 प्रतिशत से अधिक मत का स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था। पार्टी के नियमों के मुताबिक, पार्टी का अध्यक्ष बनने के लिए उम्मीदवार को 50 प्रतिशत से अधिक मत प्राप्त करने होते हैं। अगर ऐसा नहीं होता तो पहले और दूसरे चरण के मतदान में सर्वाधिक वोट पाने वाले उम्मीदवारों के बीच मुकाबला होता है। 14 दिसम्बर को दूसरे चरण का चुनाव हुआ था। इस सबसे पुरानी पार्टी के 13 पदाधिकारियों- एक अध्यक्ष, दो उपाध्यक्ष, दो महासचिव, आठ संयुक्त महासचिव और केन्द्रीय कार्य समिति के 121 सदस्यों के चयन के लिए ये चुनाव कराए गए थे। यह भी ध्यान देने की बात है कि नेपाली कांग्रेस के प्रमुख शेर बहादुर देउबा 5वीं बार देश के प्रधानमंत्री नियुक्त किए गए हैं। यह कदम कम्युनिस्ट पार्टी के नेता और कार्यवाहक प्रधानमंत्री की भूमिका निभा रहे केपी शर्मा ओली के लिए बड़ा झटका था। राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने संविधान के अनुच्छेद 76(5) के तहत उन्हें प्रधानमंत्री नियुक्त किया। यह पांचवीं बार है जब देउबा (74) ने नेपाल के प्रधानमंत्री के तौर पर सत्ता में वापसी की है। उनकी नियुक्ति उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए फैसले के बाद हुई है। कोर्ट ने के पी शर्मा ओली को हटाते हुए प्रधानमंत्री पद के लिए देउबा के दावे पर मुहर लगाई थी।राष्ट्रपति कार्यालय ने देउबा को उनकी नियुक्ति के बारे में सूचित किया था। इससे पहले शेर बहादुर देउबा 4 बार प्रधानमंत्री रह चुके हैं। इसमें पहली बार सितंबर 1995- मार्च 1997, दूसरी बार जुलाई 2001- अक्टूबर 2002, तीसरी बार जून 2004- फरवरी 2005 और चैथी बार जून 2017-फरवरी 2018 तक- प्रधानमंत्री रह चुके हैं। संवैधानिक प्रावधान के तहत प्रधानमंत्री के तौर पर नियुक्ति के बाद देउबा को 30 दिनों के अंदर सदन में विश्वास मत हासिल करना था। सुप्रीम कोर्ट ने प्रधानमंत्री ओली के 21 मई के संसद की प्रतिनिधि सभा को भंग करने के फैसले को रद्द कर दिया था और देउबा को प्रधानमंत्री नियुक्त करने का आदेश दिया था। प्रधान न्यायाधीश चोलेंद्र शमशेर राणा के नेतृत्व वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा था कि प्रधानमंत्री के पद पर ओली का दावा असंवैधानिक है। इससे पूर्व नेपाल के विपक्षी दलों ने पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा के नेतृत्व में नई सरकार बनाने का दावा पेश करने का फैसला किया था। इसके बाद नेपाल में चल रहे राजनीतिक संकट के हालात में नया मोड़ आ गया। नेपाल के पीएम केपी शर्मा ओली ने भी सरकार बनाने का दावा पेश किया। उन्होंने सीपीएन-यूएमएल के 121, जनता समाजवादी पार्टी के 32 और कुछ अन्य छोटे दलों के समर्थन पत्र के साथ राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी से मुलाकात की। ओली का दावा था कि वो इन दलों के समर्थन से संसद में बहुमत साबित कर देंगे। विपक्षी गठबंधन के नेता नई सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी के आधिकारिक आवास पर पहुंचे। नेपाली कांग्रेस (एनसी), कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर), जनता समाजवादी पार्टी (जेएसपी) के उपेंद्र यादव नीत धड़े और सत्तारूढ़ सीपीएन-यूएमएल के माधव नेपाल नीत धड़े समेत विपक्षी गठबंघन ने प्रतिनिधि सभा में 149 सदस्यों का समर्थन होने का दावा किया है। इन सदस्यों में नेपाली कांग्रेस के 61, सीपीएन (माओइस्ट सेंटर) के 48, जेएसपी के 13 और यूएमएल के 27 सदस्यों के शामिल होने का दावा किया गया। विपक्षी गठबंधन के नेता 149 सांसदों के हस्ताक्षर के साथ सरकार बनाने का दावा करने वाला पत्र राष्ट्रपति को सौंपने के लिए उनके सरकारी आवास शीतल निवास पहुंचे। इस पत्र में शेर बहादुर देउबा को प्रधानमंत्री बनाने की सिफारिश की गई। देउबा 2017 में आम चुनावों के बाद से विपक्ष के नेता थे। राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने राजनीतिक दलों को नयी सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए समय दिया था। सरकार ने राष्ट्रपति भंडारी से सिफारिश की थी कि नेपाल के संविधान के अनुच्छेद 76 (5) के अनुरूप नयी सरकार बनाने की प्रक्रिया शुरू की जाए क्योंकि प्रधानमंत्री ओली को 10 मई को उनके दोबारा चुनाव के बाद प्रतिनिधि सभा में 30 दिन के अंदर बहुमत साबित करना था। नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली के नेतृत्व वाले मुख्य विपक्षी दल सीपीएन-यूएमएल ने बुधवार को संसद के नए सत्र को बाधित किया और उन 14 सांसदों को निलंबित करने की मांग की जो उनकी पार्टी छोड़कर माधव कुमार नेपाल की पार्टी में शामिल हो गए थे। संसद के निचले सदन का नौवां सत्र पहले दिन सीपीएन-यूएमएल (एकीकृत माक्र्सवादी-लेनिनवादी) द्वारा बाधित करने के बाद थोड़े समय के लिए दो बार स्थगित किया गया। पार्टी ने सीपीएन-यूएमएल के 14 पूर्व सांसदों के निलंबन की मांग करते हुए संसद की कार्यवाही बाधित की। इन सांसदों ने माधव कुमार नेपाल के नेतृत्व में नई पार्टी बना ली। माधव कुमार नेपाल ने तत्कालीन सीपीएन- यूएमएल को छोड़कर नई पार्टी सीपीएन-यूनिफाइड सोशलिस्ट का गठन कर लिया था, जो अब संसद में चैथी सबसे बड़ी पार्टी बन गई है। उनके धड़े ने प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा की गठबंधन सरकार में शामिल होने का फैसला किया था। (हिफी) हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 18 Dec 2021 12:11 AM PST केएमसी पर ममता की पहली जीत(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा) भाजपा से लड़ाई में तृणमूल कांगे्रस (टीएमसी) की नेता और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी छोटी से छोटी जीत को भी सेलिब्रेट करती हैं। इससे उनका राजनीतिक आधार भी मजबूत होता है। अभी 16 दिसम्बर को एक छोटी सी जीत से टीएमसी नेताओं के चेहरे खिल उठे। राज्य में विधानसभा चुनाव के बाद पिछले महीने (नवम्बर में ) हुए उपचुनाव में भी ममता बनर्जी ने भाजपा को पटकनी दी थी। अब 19 दिसम्बर को कोलकाता नगर निगम (केएमसी) के चुनाव होने हैं। इन चुनावों में भी भाजपा ही मुख्य प्रतिद्वन्द्वी है। भाजपा ने कलकत्ता उच्च न्यायालय में एक अपील दायर करके मांग की थी कि राज्य की पुलिस पर भरोसा नहीं है, इसलिए केएमसी चुनाव में केन्द्रीय पुलिस बल की तैनाती का निर्देश दिया जाए। कलकत्ता उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने भाजपा की यह मांग खारिज कर दी है। टीएमसी इसे केएमसी चुनाव में अपनी पहली जीत मान रही है। न्यायालय ने चुनाव आयोग को यह निर्देश जरूर दिया है कि कोलकत्ता के 144 बूथों पर सीसीटीवी कैमरे लगवाकर ही मतदान करवाया जाए। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने 16 दिसम्बर को निर्देश दिया कि कोलकाता नगर निगम चुनाव के लिए सुरक्षा राज्य पुलिस बल प्रदान करेगा। अदालत ने यह निर्देश चुनाव के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती के अनुरोध वाली बंगाल भाजपा की एक अर्जी खारिज करते हुए दिया। न्यायमूर्ति राजशेखर मंथा ने निर्देश दिया कि कोलकाता पुलिस आयुक्त चुनाव प्रक्रिया के दौरान उम्मीदवारों या अन्य सभी की शिकायतों का ध्यान रखेंगे। भाजपा राज्य इकाई ने 14 दिसंबर को उच्च न्यायालय के समक्ष एक याचिका दायर की थी, जिसमें कोलकाता निकाय चुनाव के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती का अनुरोध किया गया था। भाजपा इकाई ने अर्जी में आशंका व्यक्त की थी कि उसके उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं को धमकी और हमलों का सामना करना पड़ सकता है। भाजपा ने पहले इस मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की थी लेकिन शीर्ष अदालत ने उसे उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के लिए कहा था। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 144 वार्ड वाले कोलकाता नगर निगम (केएमसी) के 19 दिसंबर को होने वाले चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। प्रदेश भाजपा के उपाध्यक्ष प्रताप बंदोपाध्याय ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा था कि पार्टी पुराने और नए चेहरों दोनों को उनके 'ट्रैक रिकॉर्ड' और जनाधार को ध्यान में रखते हुए मैदान में उतारना चाहती है। बंदोपाध्याय ने कहा, 'हमने 50 महिलाओं और 48 युवाओं को मैदान में उतारा है। सूची में एक पूर्व कर्नल और पांच वकीलों के अलावा स्कूल के शिक्षक, प्रोफेसर, डॉक्टर हैं। पार्टी ने उन्हें चुना है जिनकी साफ-सुथरी छवि और अच्छा 'ट्रैक रिकॉर्ड' है। इसीलिए भाजपा ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था कि किसी को डराया-धमकाया न जा सके। कलकत्ता उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने चुनाव आयोग को नगर निगम चुनाव के लिए कोलकाता के 144 बूथों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने का निर्देश दिया है। राज्य निर्वाचन आयोगकी ओर से जारी की गई अधिसूचना के अनुसार, 144 वार्ड में 21 दिसंबर को मतगणना की जाएगी। राज्य निर्वाचन आयुक्त सौरव दास ने कहा, ' केएमसी चुनाव के लिए 19 दिसंबर को मतदान होगा और 21 दिसंबर को मतगणना की जाएगी। आज से आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। हमने अधिसूचना जारी कर दी है।' इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने भाजपा की उस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें पश्चिम बंगाल सरकार, राज्य चुनाव आयोग और अन्य पदाधिकारियों को व्यापक कार्य योजना तैयार करने और कोलकाता में स्वतंत्र और निष्पक्ष नगरपालिका चुनाव सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त केंद्रीय पुलिस बल तैनात करने का निर्देश देने की मांग की गई थी। जज जस्टिस एल नागेश्वर राव और जज जस्टिस बीआर गवई की पीठ ने राज्य भाजपा को याचिका वापस लेने और अपनी शिकायतों और राहत की मांग को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट जाने के लिए कहा था भाजपा चाहती थी कि राज्य की राजधानी में 19 दिसंबर को होने वाले नगर निकाय चुनावों के सुचारू और निष्पक्ष संचालन के लिए अधिक केंद्रीय बलों को तैनात किया जाए। पश्चिम बंगाल भाजपा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने कहा कि निकाय चुनावों की अधिसूचना और भाजपा द्वारा इसके लिए उम्मीदवारों की सूची को अंतिम रूप देने के बाद पार्टी के उम्मीदवारों को धमकाया गया और दबाव बनाया गया। उन्होंने यह भी कहा कि हालांकि शिकायत दर्ज की गई है, लेकिन अब तक राज्य पुलिस ने कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की है। पीठ ने पूछा, 'क्यों 32 (संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत, एक याचिका सीधे सुप्रीम कोर्ट में दायर की जाती है)।' न्यायालय ने कहा कि हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की जानी चाहिए, जो सुरक्षा और अन्य स्थानीय पहलू के बारे में अधिक जानकार है। प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता शमिक भट्टाचार्य कहते हैं- भाजपा निगम चुनाव लड़ने के लिए तैयार है। हमने ढाई महीने पहले 75 प्रतिशत नामों पर फैसला कर लिया था।' भाजपा द्वारा कलकत्ता उच्च न्यायालय के समक्ष एक ही चरण में राज्य के सभी नगर निकायों के चुनाव कराने के लिए दायर याचिका के बारे में भट्टाचार्य ने कहा कि पार्टी इस मामले पर न्यायपालिका के निर्णय का इंतजार करेगी। भाजपा चुनाव प्रबंधन समिति के प्रभारी प्रताप बनर्जी ने कहा, 'हमने केएमसी चुनाव लड़ने के लिए लगभग 48-50 युवा चेहरों और लगभग 50 महिलाओं को मैदान में उतारा है। पांच वकील, एक पूर्व कर्नल, तीन डॉक्टर और चार शिक्षक/प्रोफेसर मैदान में हैं। हमने करीब 21 कारोबारियों और छात्रों को भी मौके दिए हैं और हम अच्छे नतीजों की उम्मीद कर रहे हैं।' बहरहाल कोलकाता निकाय चुनावों में केंद्रीय बलों की तैनाती की मांग वाली भाजपा की याचिका खारिज कर दी गयी है। इससे पूर्व सुप्रीम कोर्ट ने भाजपा की उस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया जिसमें पश्चिम बंगाल सरकार, राज्य चुनाव आयोग और अन्य पदाधिकारियों को व्यापक कार्य योजना तैयार करने और कोलकाता में स्वतंत्र और निष्पक्ष नगरपालिका चुनाव सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त केंद्रीय पुलिस बल तैनात करने का निर्देश देने की मांग की गई थी। टीएमसी इसी को अपनी जीत मान रही है लेकिन कोलकाता के नागरिक 19 दिसम्बर को क्या फैसला सुनाते हैं, इसका पता तो 21 दिसम्बर को ही चल पाएगा। ध्यान देने की बात यह है कि ममता बनर्जी कोलकाता नगर निगम चुनाव से ही वामपंथी सत्ता को चुनौती देने मैदान में उतरी थीं। (हिफी) हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| किम जोंग ने हंसने पर लगायी रोक Posted: 18 Dec 2021 12:07 AM PST किम जोंग ने हंसने पर लगायी रोकप्योंगयांग। उत्तर कोरिया अपने अजीब कायदे-कानून और फैसलों के लिए दुनियाभर में मशहूर है। अब यहां के तानाशाह किंग जोंग उन ने जनता के हंसने पर बैन लगा दिया है। दरअसल, उत्तर कोरिया अपने पूर्व नेता किम जोंग इल की 10वीं बरसी मना रहा है। इसलिए अगले 11 दिनों तक उत्तर कोरिया के नागरिकों को शोक मनाना होगा। इस दौरान वो न तो खुश रह सकते हैं और न ही हंस सकते हैं। अगर कोई शराब पीता हुआ मिल गया, तो उसे सीधे मौत की सजा होगी। डेली मेल की खबर के मुताबिक, किम जोंग इल ने उत्तर कोरिया पर 1994 से 2011 तक शासन किया। कोरिया के क्रूर तानाशाह किम जोंग इल की मौत 17 दिसंबर 2011 को 69 साल की उम्र में हार्ट अटैक से हो गई थी। इल के बाद उनके तीसरे और सबसे छोटे बेटे किम जोंग उन ने देश की कमान संभाली। अब उनके निधन के 10 साल पूरे होने पर उत्तर कोरिया के लोगों को 11 दिनों का 'सख्त' शोक मनाने का आदेश दिया गया है। रेडियो फ्री एशिया से बात करते हुए सिनुइजू शहर के एक निवासी ने बताया कि शोक अवधि के दौरान हम शराब पीना, हंसना या दूसरी खुशनुमा गतिविधियां नहीं कर सकते हैं। इस दौरान लोग अपना जन्मदिन नहीं मना सकते। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| अजहर व हाफिज जैसे आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रहा पाक: अमेरिका Posted: 18 Dec 2021 12:04 AM PST अजहर व हाफिज जैसे आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रहा पाक: अमेरिकाइस्लामाबाद। पाकिस्तान आतंकवाद का मुकाबला करने और जैश-ए-मोहम्मद के संस्थापक मसूद अजहर और लश्कर-ए-तैयबा साजिद मीर जैसे 2008 के मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड सहित आतंकवादियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त कदम उठाने में नाकामयाब रहा है। एक नई अमेरिकी रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी गई है। इस तरह पाकिस्तान 'आतंक का गढ़' बनता जा रहा है और इमरान सरकार खान की सरकार आतंक रोकने में फेल रही है। इस रिपोर्ट में कहा गया कि पाकिस्तान ने बिना किसी देरी या भेदभाव के सभी आतंकवादी संगठनों को खत्म करने की अपनी प्रतिबद्धता में बहुत ही सीमित प्रगति हासिल की है। अमेरिकी विदेश विभाग ने 2020 'कंट्री रिपोर्ट्स ऑन टेररिज्म' रिपोर्ट में कहा, 'पाकिस्तान ने आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए अपनी 2015 की राष्ट्रीय कार्य योजना के सबसे कठिन पहलुओं पर सीमित प्रगति की। खास तौर पर बिना किसी देरी या भेदभाव के सभी आतंकवादी संगठनों को खत्म करने के अपने वादे पर पाकिस्तान टिका नहीं है।' वहीं, अमेरिकी रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय सुरक्षा एजेंसियां आतंकी खतरों को बाधित करने में प्रभावी रहे हैं। साथ ही आतंकवाद की जांच से संबंधित जानकारी के लिए अमेरिका द्वारा किए गए अनुरोधों का समय पर ढंग से जवाब देती हैं। पाकिस्तान को लेकर रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि फरवरी में और फिर नवंबर में, लाहौर की एक आतंकवाद विरोधी अदालत ने लश्कर के संस्थापक हाफिज सईद को आतंकी वित्तपोषण के कई मामलों में दोषी ठहराया और उसे पांच साल, छह महीने जेल की सजा सुनाई लेकिन अन्य आतंकी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करने में विफल रही है। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| रात के अंधेरे में चीनी सैनिक कर रहे खतरनाक अभ्यास Posted: 18 Dec 2021 12:02 AM PST रात के अंधेरे में चीनी सैनिक कर रहे खतरनाक अभ्यासबीजिंग। भारत से तनाव के बीच चीन कुछ बड़ा करने की फिराक में नजर आ रहा है। चीन के सैनिक रात के अंधेरे में खतरनाक सैन्य अभ्यास कर रहे हैं। चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की ज्वाइंट मिलिट्री ब्रिगेड ने तिब्बत में बायोलॉजिकल (जैविक), एंटी न्यूक्लियर वॉरफेयर और रासायनिक हथियारों के साथ युद्ध अभ्यास किया है। तिब्बत से सटे पूर्वी लद्दाख की सीमा पर भारत और चीन के बीच विवाद चल रहा है, जो अब तक जारी है। पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी ने खुद अपने आधिकारिक न्यूज पोर्टल पर इस युद्ध अभ्यास के बारे में जानकारी दी है। इसके मुताबिक, नवंबर के आखिर में चीनी सेना ने तिब्बत मिलिट्री रीजन (टीएमआर) में बहुत बड़ा युद्धाभ्यास किया। तिब्बत मिलिट्री रीजन चीन के पांच सैन्य कमांड में सबसे विशाल वेस्टर्न थियेटर कमांड के जिम्मे आता है। नवंबर के अंत में आयोजित 24 घंटे लंबे इस अभ्यास की खबर पीएलए न्यूज पोर्टल में प्रकाशित हुई है। प्रकाशित खबर में ड्रिल की प्रकृति और उसमें शामिल सैनिकों का वर्णन किया गया, लेकिन विशेष रूप से यह नहीं बताया गया अभ्यास तिब्बत में कहां आयोजित किया गया था। इसमें लिखा है, 'तिब्बत सैन्य क्षेत्र कमान के तहत एक संयुक्त सैन्य ब्रिगेड ने नवंबर के अंत में बर्फीले पठार पर वास्तविक युद्ध का अभ्यास किया है।' इसकी हेडिंग में लिखा है, 'तिब्बत सैन्य क्षेत्र की सिंथेटिक ब्रिगेड ने क्रॉस-डे और नाइट मोबाइल मल्टी-आर्म कोऑर्डिनेटेड वास्तविक युद्ध अभ्यास' किया। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
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