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Wednesday, December 8, 2021

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CBSE Board Exam 2021: परीक्षा को लेकर सीबीएसई बोर्ड की नई गाइडलाइन, अब ऐसे भरी जायेगी OMR शीट

Posted: 07 Dec 2021 06:00 PM PST

CBSE Board Exam 2021: परीक्षा को लेकर सीबीएसई बोर्ड की नई गाइडलाइन, अब ऐसे भरी जायेगी OMR शीट



CBSE Board Exam 2021 सीबीएसई ने प्रथम चरण की चल रही बोर्ड परीक्षा को लेकर नया विशेष निर्देश जारी किया है। बोर्ड ने सभी प्रधानाचार्यों व केंद्र व्यवस्थापकों से ओएमआर शीट पर प्रश्नों का उत्तर देते समय बड़े (कैपिटल) अक्षरों का इस्तेमाल करने को कहा है।


केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने प्रथम चरण की चल रही बोर्ड परीक्षा को लेकर नया विशेष निर्देश जारी किया है। बोर्ड ने सभी प्रधानाचार्यों व केंद्र व्यवस्थापकों से ओएमआर (आप्टिकल मार्क रिकग्निशन) शीट पर प्रश्नों का उत्तर देते समय बड़े (कैपिटल) अक्षरों का इस्तेमाल करने को कहा है। बोर्ड ने यह निर्णय कापियों के मूल्यांकन में आ रही परेशानियों के मद्देनजर लिया है।


मूल्यांकन के दौरान आ रही परेशानियों के मद्देनजर बोर्ड ने लिया निर्णय
बोर्ड ने कहा है कि अंग्रेजी के छोटे (स्माल) अक्षरों के इस्तेमाल से कापियों का मूल्यांकन करते समय ए और डी तथा बी और डी में भ्रम की स्थिति पैदा हो जा रही थी। परीक्षा केंद्रों पर पेपर समाप्त होने के बाद मूल्यांकन के दौरान ए, बी, सी व डी में एकरूपता देखने को मिल रही थी। जिससे मूल्यांकन में कई तरह की समस्याएं पैदा हो रही थी। ऐसे में इसका एक मात्र उपाय शेष प्रश्नपत्रों की परीक्षाओं में अंग्रेजी के बड़े (कैपिटल) अक्षरों का इस्तेमाल है।


अब से लेकर परीक्षा के अंत तक उत्तर लिखने में कैपिटल अक्षरों को प्रयोग करेंगे विद्यार्थी

इस समय सीबीएसई प्रथम चरण की 10वीं तथा 12वीं की परीक्षाएं चल रही है। परीक्षा के बाद बोर्ड द्वारा उत्तर कुंजी जारी की जा रही है। जिसके बाद शाम चार बजे तक परीक्षा केंद्रों पर ही उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कर नंबर बोर्ड की वेबसाइट पर अपलोड कर दी जा रही है।


मूल्यांकन के दौरान परीक्षक छोटे व बड़े अक्षरों के बीच अंतर नहीं कर पा रहे थे। जिससे मूल्यांकन में अधिक समय लग रहा था। इसलिए बोर्ड ने अब से लेकर अंत तक होने वाली परीक्षाओं में उत्तर अंग्रेजी के बड़े (कैपिटल) अक्षरों में देने का निर्देश दिया है। विद्यालय के सभी प्रधानाचार्यों को निरीक्षण कार्य पर जाने वाले शिक्षकों और छात्रों को इस निर्देशों की जानकारी देेने को कहा गया है। 

यूपी बोर्ड की परीक्षा के साथ ही होंगी मदरसा बोर्ड की परीक्षाएं, मदरसों में भी चलेंगी प्री-प्राइमरी कक्षाएं, इंग्लिश मीडियम पर भी होगा विचार

Posted: 07 Dec 2021 05:18 PM PST

यूपी बोर्ड की परीक्षा के साथ ही होंगी मदरसा बोर्ड की परीक्षाएं,  मदरसों में भी चलेंगी प्री-प्राइमरी कक्षाएं, इंग्लिश मीडियम पर भी होगा विचार



उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड ने राज्य के अनुदानित व मान्यता प्राप्त मदरसों में प्री प्राइमरी कक्षाएं चलेंगी। इसके लिए के.जी.(किंडर गार्डन) की तर्ज पर प्री-प्राइमरी कक्षाओं को शुरू करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। नवगठित मदरसा बोर्ड की बुधवार को होने वाली बैठक में इस पर निर्णय होगा। इसी बैठक में बेसिक शिक्षा की तर्ज पर कुछ मदरसों में पूरी तरह इंगलिश मीडियम की पढ़ाई शुरू करने पर भी फैसला हो सकता है।


बोर्ड के सूत्रों के अनुसार अगले साल यूपी मदरसा बोर्ड की वार्षिक परीक्षाएं विधान सभा चुनाव खत्म होने के बाद यानि 15 मार्च के बाद उ.प्र.माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की हाईस्कूल व इण्टरमीडियट की परीक्षाओं के साथ ही करवाए जाने पर विचार किया जा रहा है।


ऐसा इसलिए भी ताकि मदरसा बोर्ड के परीक्षार्थी साथ-साथ हाईस्कूल व इण्टरमीडियट की परीक्षा न दे सकें। पूर्व में कई मामले ऐसे भी सामने आए हैं जिनमें मदरसों के परीक्षार्थी मदरसा बोर्ड की परीक्षा के साथ उ.प्र.माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की परीक्षा में भी बैठे और दोनों बोर्ड की परीक्षाएं उत्तीर्ण कर प्रमाण पत्र प्राप्त किये और इन प्रमाण पत्रों का बेजा इस्तेमाल किया।


बोर्ड के चेयरमैन डा.इफ्तेखार जावेद ने बातचीत में कहा कि उनका पूरा प्रयास मदरसों की शिक्षा का आधुनिकीकरण किये जाने पर है। इसीलिए मदरसों की शिक्षा प्रणाली को आधुनिक विषयों के साथ सूचना प्रौद्योगकी औार तकनीक से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। इसी क्रम में मदरसा शिक्षण को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए स्मार्ट क्लास, आधुनिक प्रयोगशाला, ई-बुक, ई-लाइब्रेरी जैसी सुविधाओं को अपनाए जाने पर भी बोर्ड की बैठक में निर्णय लिये जा सकते हैं।


यूपी मदरसा बोर्ड को किसी भाषा वि.वि.या संस्थान से जोड़ते हुए मान्यता या सम्बद्धता के बारे में बोर्ड के चेयरमैन ने कहा कि इस पर विचार होगा। बताते चले कि यूपी मदरसा बोर्ड के मुंशी, मौलवी, आलिम, फाजिल, कामिल आदि पाठ्यक्रमों की किसी वि.वि.या संस्थान से मान्यता न होने की वजह से इन परीक्षाओं को पास करने वाले छात्र-छात्राओं के प्रमाण पत्रों को नौकरियों में कोई अहमियत नहीं दी जाती। 

69,000 भर्ती : उत्तरमाला के एक सवाल के उत्तर पर हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन न होने से खफा अभ्यर्थी नियुक्ति के लिए धरने पर बैठे

Posted: 07 Dec 2021 04:50 PM PST

69,000 भर्ती :  उत्तरमाला के एक सवाल के उत्तर पर हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन न होने से खफा अभ्यर्थी नियुक्ति के लिए धरने पर बैठे



प्रयागराज : बेसिक शिक्षा की 69,000 शिक्षक भर्ती में जारी की गई उत्तरमाला में एक सवाल के जवाब को हाई कोर्ट ने भी गलत मानकर याची अभ्यर्थियों को राहत दी है। आदेश दिया था कि यदि एक अंक पाने से अभ्यर्थी चयन मेरिट में आ जाता है तो उसे नियुक्ति दी जाए। 


हाई कोर्ट के 25 अगस्त के आदेश के 100 दिन से ज्यादा बीत जाने पर भी याचियों को कोई राहत नहीं दी गई। चयन मेरिट सूची को लेकर कोई पहल न होने पर मंगलवार को प्रदेश भर से आए अभ्यर्थी उत्तर प्रदेश परीक्षा नियामक प्राधिकारी (पीएनपी) कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए। हाई कोर्ट के आदेश का अनुपालन न किए जाने से एक अंक से चयन से वंचित किए गए अभ्यर्थियों में गुस्सा है। 


पीएनपी कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे अभ्यर्थी दुर्गेश शुक्ल, राम मिश्र, प्रसून दीक्षित, रोहित शुक्ल ने कहा कि हाई कोर्ट के आदेश का जल्द पालन किया जाय। कोर्ट के आदेशानुसार जो याची एक नंबर से प्रभावित हो रहे हैं और जो गुणांक में आ रहे हैं, उन्हें सरकार जल्द से जल्द नियुक्ति दे। 


उनका दावा है कि इससे करीब एक हजार अभ्यर्थियों को राहत मिलेगी। परीक्षा नियामक प्राधिकारी सचिव अनिल भूषण चतुर्वेदी की अनुपस्थिति में धरने पर बैठे अभ्यर्थियों से मिलने रजिस्ट्रार पहुंचे। अभ्यर्थी उनसे लिखित आश्वासन चाह रहे थे, लेकिन सचिव के न होने पर वह अभ्यर्थियों को संतुष्ट नहीं कर सके। इससे असंतुष्ट अभ्यर्थियों का कहना है कि जब तक उन्हें लिखित आदेश नहीं मिलेगा, तब तक उनका धरना चलता रहेगा।

केन्द्रीय अल्पसंख्यक प्री मैट्रिक, पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना में प्राप्त हए 14.33 लाख आवेदन

Posted: 07 Dec 2021 03:58 PM PST

केन्द्रीय अल्पसंख्यक प्री मैट्रिक, पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना में प्राप्त हए 14.33 लाख आवेदन

केन्द्र सरकार की छात्रवृत्ति योजना में प्रदेश के 14 लाख 33 हजार अल्पसंख्यक छात्र-छात्राओं ने आवेदन किया है। इन दिनों इन आवेदन पत्रों के दोहरे सत्यापन का कार्य चल रहा है। राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक आर.पी.सिंह ने बताया कि इन 14 लाख 35 हजार आवेदकों में प्री मैट्रिक, पोस्ट मैट्रिक कक्षाओं के अलावा इंजीनियरिंग, मेडिकल, मैनेजमेंट व अन्य व्यासायिक पाठ्यक्रमों के छात्र-छात्राएं शामिल हैं।


उन्होंने केन्द्रीय छात्रवृत्ति योजना में प्री मैट्रिक कक्षाओं में कक्षा एक से पांच तक प्रति छात्र-छात्रा एक हजार रूपये, कक्षा छह से दस तक पांच हजार रूपये और कक्षा दस से बारह तक के छात्र-छात्राओं को बारह हजार रूपये और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के छात्र-छात्राओं को पन्द्रह से बीस हजार रूपये की छात्रवृत्ति दी जाती है।

एक सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि इन सभी आवेदनों के ब्यौरे का सत्यापन करके पूरा ब्यौरा पीएफएमएस के जरिये केन्द्र को भेजा जाएगा और दिसम्बर के अंत या जनवरी की शुरूआत में वहां से इन आवेदकों के बैंक खातों में छात्रवृत्ति की राशि हस्तांतरित कर दी जाएगी।

उन्होंने प्रदेश सरकार की छात्रवृत्ति व फीस भरपाई योजना में राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में ही करीब छह से सात लाख आवेदन आते हैं और इन आवेदकों में प्री मैट्रिक कक्षाओं में तीन हजार रूपये की छात्रवृत्ति दी जाती है जबकि पोस्ट मैट्रिक कक्षाओं और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के आवेदकों को फीस भरपाई और छात्रवृत्ति दोनों ही सुविधाएं मिलती हैं।

शिक्षामित्र की चुनाव ड्यूटी में कोरोना से मौत पर मुआवजे पर विचार का हाईकोर्ट का निर्देश

Posted: 06 Dec 2021 05:37 PM PST

शिक्षामित्र की चुनाव ड्यूटी में कोरोना से मौत पर मुआवजे पर विचार का हाईकोर्ट का निर्देश



प्रयागराज : इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जिलाधिकारी बिजनौर को सरकारी शासनादेश के तहत सभी पहलुओं पर विचार करके एक माह में याची को मुआवजे के भुगतान पर निर्णय लेने का निर्देश दिया है। याची की पत्नी शिक्षामित्र थी। जिसे पंचायत चुनाव में ड्यूटी पर भेजा गया था। कोरोना के कारण उसकी मौत हो गई। 



यह आदेश न्यायमूर्ति प्रीङ्क्षतकर दिवाकर व न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव की खंडपीठ ने गिरीश कुमार की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है। याची का कहना है कि एक जून 2021 के शासनादेश के तहत उसने जिलाधिकारी को प्रत्यावेदन देकर मुआवजे की मांग की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस पर हाई कोर्ट की शरण ली है। शासनादेश में चुनाव ड्यूटी पर कोरोना से मौत पर सरकारी सहायता दिये जाने का उपबंध किया गया है।

UPTET इसी माह - तारीख जल्द घोषित होगी, बेसिक शिक्षा मंत्री ने किया दावा

Posted: 06 Dec 2021 05:27 PM PST

UPTET  इसी माह - तारीख जल्द घोषित होगी,  बेसिक शिक्षा मंत्री ने किया दावा


लखनऊ। बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी ने सोमवार को कहा कि शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी- 2021) दिसंबर में ही आयोजित की जाएगी। जल्द ही नई तिथि घोषित की जाएगी।



भाजपा प्रदेश मुख्यालय पर आयोजित एक कार्यक्रम में मीडिया के सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि घोषणा के मुताबिक प्रश्न पत्र लीक होने के (28 नवंबर) एक महीने की अवधि में ही दोबारा परीक्षा कराई जाएगी। प्रश्न पत्र लीक मामले में प्रथम दृष्टया दोषी सचिव, परीक्षा नियामक प्राधिकारी संजय उपाध्याय को निलंबित किया है। एसटीएफ ने उन्हें गिरफ्तार भी किया है। जांच में जो भी अधिकारी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।


प्रदेश के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में एल०टी० ग्रेड के रिक्त पदों पर चयन हेतु अधियाचन लोक सेवा आयोग को प्रेषित किये जाने हेतु सूचना प्रेषित करने विषयक

Posted: 07 Dec 2021 06:08 PM PST

प्रदेश के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में एल०टी० ग्रेड के रिक्त पदों पर चयन हेतु अधियाचन लोक सेवा आयोग को प्रेषित किये जाने हेतु सूचना प्रेषित करने विषयक।

एलटी ग्रेड शिक्षकों के रिक्त पदों का मांगा ब्योरा, भर्ती शीघ्र

राजकीय विद्यालयों में शिक्षक भर्ती को मांगा रिक्त पदों का ब्योरा, साढ़े तीन साल बाद शुरू होने जा रही भर्ती



सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में प्रशिक्षित स्नातक, प्रवक्ता और प्रधानाचार्य भर्ती की प्रक्रिया शुरू होने के बाद अब राजकीय विद्यालयों में सहायक अध्यापकों की भर्ती शुरू करने की तैयारी है। अपर निदेशक राजकीय डॉ. अंजना गोयल ने सोमवार को सभी संयुक्त शिक्षा निदेशकों को 10 दिसंबर तक रिक्त पदों की सूचना ई-मेल पर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। ताकि उन्हें 


नियुक्ति के लिए उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग को भेजा जा सके।
पूर्व में जनपदीय अधिकारियों से प्राप्त सूचना के अनुसार रिक्त पदों पर चयन के लिए अधियाचन (रिक्त पदों की सूचना) शिक्षा निदेशालय की ओर से लोक सेवा आयोग को भेजा गया था। लेकिन कुछ बिंदुओं पर आपत्ति करते हुए आयोग ने निदेशालय को वापस भेज दिया। अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा आराधना शुक्ला ने फिर से रिक्तियों को अपडेट करते हुए समेकित अधियाचन तत्काल आयोग को भेजने के निर्देश दिए हैं।


निर्धारित प्रोफार्मा पर सूचना मांगी है ताकि उत्तर प्रदेश अधीनस्थ शिक्षा (प्रशिक्षित स्नातक श्रेणी) पुरुष/महिला संवर्ग में रिक्त पदों का संवर्गवार, विषयवार और आरक्षणवार स्पष्ट सूचना तैयार कर आयोग को भेजी जा सके। मंडल में स्थित डायट में कार्यरत एवं प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत सहायक अध्यापकों की भी सूचना निर्धारित प्रारूप पर अलग से मांगी गई है। गौरतलब है कि एडेड कॉलेजों में शिक्षक भर्ती के लिए माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड रिक्त पदों की सूचना तीन नवंबर से ऑनलाइन ले रहा है।


शिक्षा निदेशालय में नहीं सेवा विवरण

पुरुष व महिला संवर्ग में कार्यरत शिक्षकों का संपूर्ण सेवा विवरण शिक्ष्ज्ञा निदेशालय में उपलब्ध न होने, पिछले दो सालों में ऑनलाइन व ऑफलाइन स्थानान्तरण के माध्यम से पुरुष विद्यालयों में अधिक संख्या में महिला शिक्षकों के ट्रांसफर होने के कारण स्थिति परिवर्तित होने, स्कूल में स्वीकृत पद और उसके प्रति कार्यरत शिक्षकों की स्पष्ट सूचना संवर्गवार/आरक्षणवार न होने के कारण निदेशालय स्तर पर रिक्त पदों का ब्योरा तैयार करने में कठिनाई हो रही है।

साढ़े तीन साल बाद शुरू होने जा रही भर्ती

राजकीय स्कूलों में सहायक अध्यापक (प्रशिक्षित स्नातक या एलटी ग्रेड) पद पर तकरीबन साढ़े तीन साल बाद भर्ती शुरू होने जा रही है। इससे पहले आयोग ने जून 2018 में एलटी ग्रेड शिक्षकों के 10768 पदों पर भर्ती शुरू की थी।


प्रयागराज राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में शीघ्र ही एलटी ग्रेड शिक्षकों की भर्ती होगी। इसके लिए शिक्षा निदेशक माध्यमिक ने प्रदेश के सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों को पत्र जारी कर उनके यहां रिक्त पदों का ब्योरा मांगा है। विद्यालयों में आरक्षणवार सूची उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है कि कितने सामान्य, ओबीसी, एससी, विकलांग पुरुष और महिला शिक्षकों के पद रिक्त हैं। 


सूची मिलने के बाद विभाग भर्ती के लिए लोकसेवा आयोग को अधियाचन भेजेगा। निदेशक ने कहा कि पूर्व में रिक्त पदों का ब्योरा उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग को भेजा गया था, जिस पर कई बिंदुओं पर आपत्ति जताते हुए आयोग ने अधियाचन वापस कर दिया था। इसके बाद पुनः सभी बिंदुओं को सम्मिलित करते हुए समेकित अधियाचन तत्काल आयोग को भेजा जाना है। इसके मद्देनजर अपने मंडल के रिक्त पदों की सूचना नियमानुसार आरक्षण के साथ तत्काल विवरण भेजने का निर्देश जारी किया गया है। 


IGNOU PhD Admission: इग्नू में पीएचडी एडमिशन के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू, ये रहा पूरा विवरण

Posted: 06 Dec 2021 04:07 PM PST

IGNOU PhD Admission: इग्नू में पीएचडी एडमिशन के लिए  रजिस्ट्रेशन शुरू, ये रहा पूरा विवरण


IGNOU PhD Admission 2021: इग्नू पीएचडी एडमिशन के लिए राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) की ऑफिशियल वेबसाइट nta.ac.in पर रजिस्ट्रेशन शुरू हो गए हैं।

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) की पीएचडी एंट्रेंस परीक्षा के लिए आज से रजिस्ट्रेशन शुरू हो गए हैं। राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) की ऑफिशियल वेबसाइट nta.ac.in पर एप्लीकेशन फॉर्म उपलब्ध हैं और जो छात्र पीएचडी में एडमिशन लेना चाहते हैं वे इस वेबसाइट पर जाकर रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। उम्मीदवार 22 दिसंबर तक रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। परीक्षा 16 जनवरी, 2022 को आयोजित की जाएगी।


क्रेडिट/डेबिट कार्ड/नेट बैंकिंग/यूपीआई के माध्यम से रजिस्ट्रेशन फीस जमा करने की आखिरी तारीख 23 दिसंबर है। परीक्षा 180 मिनट की अवधि की होगी और सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक आयोजित की जाएगी।


योग्यता

परीक्षा में उपस्थित होने के लिए आवश्यक पात्रता शर्त के बारे में, इग्नू का कहना है कि उन उम्मीदवारों को इस परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाती है, जिनके पास यूजीसी द्वारा मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से संबंधित विषय में कम से कम 55% अंकों (सामान्य श्रेणी के लिए) या इसके समकक्ष ग्रेड 'बी' के साथ मास्टर डिग्री है।


इंटरव्यू के लिए ये उम्मीदवार होंगे शॉर्टलिस्ट
विश्वविद्यालय के मुताबिक जो छात्र एंट्रेंस परीक्षा में कम से कम 50% अंक प्राप्त करते हैं (एससी / एसटी / ओबीसी (गैर क्रीमी लेयर) / अलग-अलग विकलांग व्यक्तियों के मामले में 45%) वे इंटरव्यू के लिए शॉर्टलिस्ट किए जाएंगे। इंटरव्यू के लिए चयनित उम्मीदवारों को विषय विशिष्ट डॉक्टरेट अनुसंधान समिति के समक्ष सिनोपसिस की प्रजेंटेशन के लिए बुलाया जाएगा।


IGNOU PhD Entrance Exam के लिए इन स्टेप्स से करें रजिस्ट्रेशन

स्टेप 1: सबसे पहले ऑफिशियल वेबसाइट ignou.nta.ac.in पर जाएं।
स्टेप 2: अब वेबसाइट पर दिए गए IGNOU PhD Registration 2021 के लिंक पर क्लिक करें।
स्टेप 3: अब New Registration पर क्लिक करें और मांगी गई हर जानकारी सबमिट कर अपना लॉग इन जनरेट कर लें।

स्टेप 4: इसके बाद एप्लीकेशन नंबर और पासवर्ड की मदद से लॉग इन करें।
स्टेप 6: अब अपना एप्लीकेशन फॉर्म भरें।
स्टेप 7: फोटो और साइन अपलोड करें।
स्टेप 8: आवेदन फीस जमा करें।
स्टेप 9: सभी प्रक्रिया को पूरा करने के बाद एप्लीकेशन का प्रिंट ले लें।


पेपर लीक न होता तो भी मुश्किल था यूपी-टीईटी कराना, जानिए क्यों? पेपर लीक के शोर में सारी अनियमितताएं दबी रह गई।

Posted: 06 Dec 2021 04:02 PM PST

पेपर लीक न होता तो भी मुश्किल था यूपी-टीईटी कराना, जानिए क्यों? पेपर लीक के शोर में सारी अनियमितताएं दबी रह गई।


उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपी-टीईटी) का पेपर 28 नवंबर को लीक न होता तो भी परीक्षा सकुशल संपन्न कराना मुश्किल होता। पहली बार यूपी-टीईटी के प्रश्नपत्र और ओएमआर शीट (उत्तरपत्रक) छापने वाले बदरपुर नई दिल्ली के प्रिंटिंग प्रेस आरएसएम फिरसर्व लिमिटेड ने इतनी गड़बड़ियां की थी की परीक्षा के लिए पेपर बंटने के बाद ही केंद्र व्यवस्थापकों और अफसरों के हाथ-पांव फूल गए थे।


सबसे बड़ी गड़बड़ी हुई कि कई केंद्रों पर अभ्यर्थियों की संख्या से कम प्रश्नपत्र भेजे गए थे। नियमत: प्रत्येक केंद्र पर परीक्षार्थियों की संख्या से 10 प्रतिशत अधिक प्रश्नपत्र भेजे जाते हैं ताकि पेपर डैमेज हो तो उसे बदला जा सके। लेकिन प्रयागराज के ही एक केंद्र पर आवंटित 450 अभ्यर्थियों के लिए 408 प्रश्नपत्र ही पैकेट में निकले थे।

पेपर पैकिंग में यह चूक कई अन्य जिलों में हुई थी और परीक्षा शुरू होने के बाद कई जिलों के जिलाधिकारियों ने शासन को फोन करके यह बात बताई थी। इसके अलावा ओएमआर शीट पर ए, बी, सी, डी सीरीज भी नहीं लिखी थी। प्रयागराज में पेपर जिस ट्रक से भेजा गया उसे लेकर आने वाला व्यक्ति अनुभवहीन था। वह अफसरों के सामने ही प्रिंटिंग प्रेस का नाम बताने लगा।
जबकि प्रिंटिंग प्रेस का नाम किसी को कभी नहीं बताया जाता। 


पेपर जिन गत्ते के डिब्बों (कर्टन) में पैक करके भेजे गए थे वे भी बहुत सुरक्षित नहीं थे। सूत्रों के अनुसार पेपर का ट्रक लेकर आने वाले व्यक्ति के पास रिसीविंग नहीं थी। अफसरों ने उसे प्रिंटिंग प्रेस से मंगवाने को कहा तो व्हाट्सएप पर मंगाकर दिखाने लगा।
इसके बाद उसे ई-मेल से रिसीविंग परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय और वहां से जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय भेजने को कहा गया। इसमें चार घंटे लग गए और पेपर का ट्रक कलेक्ट्रेट में बाहर खड़ा रहा। हालांकि पेपर लीक के शोर में सारी अनियमितताएं दबी रह गई।

उधार के ऑफिस से यूपीटीईटी करा रहा परीक्षा नियामक कार्यालय, डेढ़ दर्जन से ज्यादा परीक्षाएं कराने वाला PNP कार्यालय 1872 से एक ही ढर्रे पर चल रहा

Posted: 06 Dec 2021 04:02 PM PST

उधार के ऑफिस से यूपीटीईटी करा रहा परीक्षा नियामक कार्यालय,  डेढ़ दर्जन से ज्यादा परीक्षाएं कराने वाला PNP कार्यालय 1872 से एक ही ढर्रे पर चल रहा


उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपी-टीईटी) पेपर लीक के बाद से चर्चा में आया परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय उधार के ऑफिस से कई महत्वपूर्ण परीक्षाएं करा रहा है। 150 साल पुराने कार्यालय में बैठने की जगह तक नहीं है। यही कारण है कि परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय के सचिव और रजिस्ट्रार समेत 75 फीसदी स्टाफ राज्य विज्ञान शिक्षा संस्थान में बैठता है और वहीं से तकरीबन डेढ़ दर्जन परीक्षाएं संचालित की जाती हैं।



पूर्व में रजिस्ट्रार विभागीय परीक्षाएं के नाम से चर्चित इस संस्था के पुराने कार्यालय में पूरे स्टाफ के बैठने की जगह नहीं है। परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय ने अपनी वेबसाइट पर जिस कार्यालय की फोटो लगाई है वह भी राज्य विज्ञान शिक्षा संस्थान की है। चूंकि राज्य विज्ञान शिक्षा संस्थान के निदेशक के पास ही सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी का अतिरिक्त प्रभार होता है।


इसलिए परीक्षा नियामक का काम विज्ञान शिक्षा संस्थान से होता है। परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय की ओर से कई बार शासन को एक अलग से कार्यालय आवंटित करने के लिए प्रस्ताव भेजा जा चुका है। कुछ समय पहले जिला विद्यालय निरीक्षक के पुराने कार्यालय को परीक्षा नियामक के लिए आवंटित भी किया लेकिन शिफ्टिंग नहीं हो सकी।


अब जबकि इस कार्यालय को यूपी-टीईटी समेत बेसिक शिक्षा परिषद और सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूल की शिक्षक भर्ती जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा जिम्मा मिल चुका है, उसके बावजूद सुविधा के नाम पर कुछ नहीं है।



1872 से एक ही ढर्रे पर चल रहा पीएनपी कार्यालय

प्रदेश की शिक्षा गुणवत्ता में निरन्तर सुधार करने के उद्देश्य से इस विभाग की स्थापना रजिस्ट्रार विभागीय परीक्षाएं, उत्तर प्रदेश के नाम से 1872 के आस-पास हुई थी। वर्ष 1921 में माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) के गठन से पूर्व प्रदेश की सभी शैक्षिक परीक्षाओं का उत्तरदायित्व इस विभाग का था। हालांकि इतना लंबा समय बीतने और जिम्मेदारी में कई गुना इजाफा होने के बावजूद कार्यालय पुराने ढर्रे पर ही चल रहा है। विभाग के पुनर्गठन का प्रस्ताव भी कई बार शासन को भेजा गया लेकिन कुछ नहीं हुआ। अधिकारी, स्टाफ और सुविधाएं न बढ़ने के कारण परीक्षाएं कराना मुश्किल होता जा रहा है।


डेढ़ दर्जन परीक्षाएं कराता है पीएनपी

परीक्षा नियामक प्राधिकारी (पीएनपी) कार्यालय डेढ़ दर्जन से अधिक परीक्षाएं कराता है। यूपी-टीईटी, शिक्षक भर्ती परीक्षा के अलावा बीटीसी (डीएलएड), विशिष्ट बीटीसी, मृतक आश्रित बीटीसी, उर्दू बीटीसी प्रशिक्षण परीक्षा, शिक्षामित्रों की पत्राचार प्रशिक्षण परीक्षा, सीटी नर्सरी व डीपीएड प्रवेश व प्रशिक्षण परीक्षा, डिप्लोमा इन गाइडेन्स साइकोलॉजी, आंग्लभाषा डिप्लोमा, पुस्तकालय विज्ञान प्रमाणपत्र, जूनियर हाईस्कूल व हाईस्कूल स्तरीय उर्दू प्रवीणता, एकीकृत छात्रवृत्ति, राज्य स्तरीय राष्ट्रीय प्रतिभा खोज (प्रथम चरण) और राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति परीक्षा कराता है।

शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने की बेसिक शिक्षा मंत्री आवास के घेराव की कोशिश, दिया धरना

Posted: 05 Dec 2021 05:50 PM PST

शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने की बेसिक शिक्षा मंत्री आवास के घेराव की कोशिश, दिया धरना


लखनऊ। परिषदीय स्कूलों में 69 हजार शिक्षक भर्ती में 22 हजार सीटों को जोड़कर भर्ती प्रक्रिया पूरी करने की मांग को लेकर अभ्यर्थियों ने रविवार को डालीबाग स्थित बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री सतीश द्विवेदी के आवास के घेराव की कोशिश की।



अभ्यर्थी मंत्री आवास परिसर में जैसे ही घुसे पुलिस ने उन्हें बाहर निकाल कर मुख्य गेट बंद कर दिया। इससे नाराज अभ्यर्थी गेट के समक्ष धरने पर बैठ गए। उन्होंने कहा कि सरकार एक तरफ राम राज्य का दावा कर रही है तो दूसरी तरफ युवाओं को रोजगार देने के बजाय लाठियों से पीटा जा रहा है। अभ्यर्थियों ने काफी देर तक नारेबाजी की। बाद में पुलिस ने सभी को वाहन से ईको गार्डन ले जाकर छोड़ दिया।

निजी स्कूलों में जन सूचना अधिकारी तैनात करने के आदेश पर हाईकोर्ट की रोक

Posted: 06 Dec 2021 05:37 AM PST

निजी स्कूलों में जन सूचना अधिकारी तैनात करने के आदेश पर हाईकोर्ट की रोक


लखनऊ । इलाहबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने प्रदेश निजी स्कूलों में जन सूचना अधिकारी तैनात करने के राज्य सूचना आयोग के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। इससे पहले गत 6 सितंबर को कोर्ट ने एक गैर सहायता प्राप्त स्कूल के मामले लगा दी थी। इसी आधार पर यूपी प्राइवेट स्कूल्स एसोसिएशन ने याचिका दाखिल कर आदेश का लाभ प्रदान करने की गुजारिश की थी। इस पर कोर्ट ने कहा है कि प्राइवेट स्कूल्स एसोसिएशन भी पूर्व में पारित आदेश का लाभ पाने का हकदार है। इससे निजी स्कूलों में जन सूचना अधिकारी तैनात करने के सूचना आयोग के आदेश पर फिलहाल रोक लग गई है।


न्यायमूर्ति राकेश श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति शमीम अहमद की खंडपीठ ने यह आदेश यूपी प्राइवेट स्कूल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अतुल कुमार व एक अन्य व्यक्ति की याचिका पर दिया। याची एसोसिएशन का कहना था कि निजी स्कूल राज्य या किसी स्थानीय प्राधिकरण से कोई अनुदान या सहायता नहीं ले रहे हैं। ऐसे में ये स्कूल आरटीआई अधिनियम 2005 के तहत परिभाषित लोक प्राधिकरण के तहत नहीं आते। लिहाजा आयोग राज्य सरकार को ऐसा कोई सामान्य निर्देश नहीं दे सकता कि सभी प्राइवेट स्कूलों में भी जन सूचना अधिकारी तैनात किए जाएं।



हाईकोर्ट ने राज्य सूचना आयोग के आदेश पर रोक लगाई

लखनऊ: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने यूपी के आदेश पर रोक लगा दी है। राज्य सूचना आयोग ने मुख्य सचिव को यूपी राज्य में संचालित सभी गैर सहायता प्राप्त स्कूलों को निर्देशित करने का निर्देश दिया था कि सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत किसी के द्वारा मांगी गई सूचना उपलब्ध कराने के लिए अपने-अपने स्कूल में जन सूचना अधिकारी की नियुक्ति करें। यह आदेश न्यायमूर्ति राकेश श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति मोहम्मद की पीठ द्वारा पारित किया गया था।

शमीम अहमद ने अध्यक्ष अतुल कुमार के माध्यम से गैर-सहायता प्राप्त निजी स्कूलों के संघ, उत्तर प्रदेश प्राइवेट स्कूल एसोसियेशन द्वारा दायर एक रिट याचिका पर तर्क दिया कि निजी स्कूल किसी भी राज्य या स्थानीय प्राधिकरण से कोई अनुदान सहायता प्राप्त नहीं कर रहे हैं। अतः आरटीआई अधिनियम, 2005 के तहत परिभाषित 'लोक प्राधिकरण' की परिभाषा के तहत नहीं आते हैं।

रिट याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता रवि प्रकाश गुप्ता ने रिट याचिका में तर्क दिया है कि धारा 18 के तहत अपने मूल अधिकार क्षेत्र में शक्ति का प्रयोग करते हुए, मुख्य सचिव को धारा 19(8)(ए)(पप) के तहत ऐसा कोई सामान्य निर्देश नहीं दिया जा सकता है। इसी प्रकार, राज्य सूचना आयोग द्वारा किया गया ऐसा निर्देश भी उसके सलाहकार क्षेत्राधिकार से संबंधित धारा 25(5) के तहत नहीं दिया जा सकता है।

श्री गुप्ता ने न्यायालय के समक्ष तर्क दिया कि न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति सुरेश कुमार गुप्ता की एक समन्वय पीठ ने 14 जुलाई, 2021 को एक गैर सहायता प्राप्त स्कूल सिटी मोंटेसरी द्वारा दायर मामले में राज्य सूचना आयोग के इस आदेश के संचालन पर पहले ही रोक लगा दी है। स्कूल जो रिट याचिकाकर्ता संघ के सदस्यों के लिए भी लागू किया जा सकता है, क्योंकि राज्य आयोग के इस आदेश का उन पर भी प्रभाव पड़ेगा। उत्तर प्रदेश राज्य में याचिकाकर्ता संघ के सदस्य होने पर इस स्थगन आदेश के संचालन का विस्तार करते हुए, न्यायालय ने आरटीआई कार्यकर्ता और अन्य को नोटिस जारी किया और यूपी और राज्य सूचना आयोग रिट याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए आदेश पारित किया है।

रिट याचिका में यह तर्क दिया गया था कि राज्य सूचना आयोग ने गलती से देखा कि वंचित समूहों के छात्रों को 25 प्रतिशत मुफ्त प्रवेश के एवज में बच्चों के निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा अधिनियम, 2009 की धारा 12(2) के तहत निजी स्कूलों की प्रतिपूर्ति राशि राज्य द्वारा सहायता अनुदान के लिए जिसे 'वित्तपोषित' माना जा सकता है, ऐसे स्कूल को आरटीआई अधिनियम, 2009 की धारा 2 (एच) के तहत 'सार्वजनिक प्राधिकरण' के दायरे में लाया जा सकता है। यह स्पष्ट किया कि केवल सहायक, अनुदान, छूट, विशेषाधिकार आदि प्रदान करना, जैसे कि पर्याप्त मात्रा में धन उपलब्ध कराना नहीं कहा जा सकता है, जब तक रिकार्ड नहीं दिखाता है कि फंडिंग उस निकाय के लिए इतनी बड़ी थी, जो व्यावहारिक रूप से इस तरह के फंडिंग से चलती है और लेकिन इस तरह के फंडिंग के लिए, यह अस्तित्व के लिए संघर्ष करेगा।

याचिकाकर्ता द्वारा यह तर्क दिया गया था कि एजुकेशनल एंड कल्चरल ट्रस्ट मामले में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों में 25 प्रतिशत मुफ्त प्रवेश की वैधता की जांच करते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि आरक्षण (93वें संवैधानिक संशोधन के तहत संवैधानिक रूप से अनुमत) छात्रों के पक्ष में है। निजी स्कूलों में सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों को संविधान के अनुच्छेद 15 में खंड (5) डालने से गैर सहायता प्राप्त स्कूलों को सहायता प्राप्त स्कूलों के बराबर नहीं लाया जाएगा। मुफ्त प्रवेश के बदले इस तरह की प्रतिपूर्ति गैर सहायता प्राप्त निजी स्कूलों को सहायता प्राप्त स्कूलों के बराबर नहीं बना देगी।

CTET 2021: एडमिट कार्ड होने वाले हैं जारी, जानें उत्तर प्रदेश के इन शहरों में होगा CTET परीक्षा का आयोजन

Posted: 05 Dec 2021 04:18 PM PST

CTET 2021:  एडमिट कार्ड होने वाले हैं जारी, जानें उत्तर प्रदेश के इन शहरों में होगा CTET परीक्षा का आयोजन


CTET 2021 के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों का एडमिट कार्ड जल्द ही जारी किया जाएगा। इस बार इसका आयोजन 16 दिसंबर 2021 से 13 जनवरी 2022 के बीच किया जाना है।


केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा 16 दिसंबर से आयोजित की जाने वाली केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (CTET) 2021 के लिए अभ्यर्थियों का एडमिट कार्ड जल्द ही जारी किया जा सकता है। साल में 2 बार आयोजित की जाने वाली यह परीक्षा कोरोना महामारी की वजह से इस बार थोड़े देर से आयोजित हो रही है। गौरतलब है कि 16 दिसंबर 2021 से शुरू होकर यह परीक्षा 13 जनवरी 2022 तक चलेगी। CTET 2021 के लिए अभ्यर्थियों से 19 सितंबर से 25 अक्टूबर के बीच आवेदन मांगे गए थे। 

जल्द ही जारी होगा एडमिट कार्ड : 

16 दिसंबर से शुरू होने वाली CTET 2021 के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड का इंतजार जल्द ही समाप्त होने वाला है। दरअसल विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक CBSE, CTET 2021 के लिए एडमिट कार्ड इसी सप्ताह में जारी कर सकता है। एडमिट कार्ड जारी होने के बाद अभ्यर्थी उसे आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर डाउनलोड कर सकते हैं। अभ्यर्थियों को एडमिट कार्ड से संबंधित जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर नजर बनाए रखनी चाहिए।

उत्तर प्रदेश के इन शहरों में बनेंगे परीक्षा केंद्र :

केंद्रीय स्तर पर आयोजित की जाने वाली CTET 2021 के सफल आयोजन के लिए देश भर के 300 से भी अधिक शहरों में परीक्षा केंद्र बनेंगे। नोटिफिकेशन में दी गई जानकारी के मुताबिक इन परीक्षा केंद्रों में से 22 उत्तर प्रदेश में स्थित हैं। उत्तर प्रदेश में CTET के परीक्षा केंद्र आगरा, अलीगढ़, बरेली, बस्ती, बिजनौर, बिलासपुर, फैजाबाद (अयोध्या), फिरोजाबाद, गाज़ियाबाद, गाजीपुर, गोरखपुर, झांसी, कानपुर, लखनऊ, मथुरा, मेरठ, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, नोएडा (ग्रेटर नोएडा), प्रयागराज (इलाहाबाद), सीतापुर तथा वाराणसी शहर में बनेंगे। अभ्यर्थियों को उनके परीक्षा केंद्र की जानकारी एडमिट कार्ड के माध्यम से दी जाएगी।

PhD की तैयारी में जुटे छात्रों को जोर का झटका, प्रवेश के लिए NET अनिवार्य होगा

Posted: 05 Dec 2021 04:06 PM PST

PhD की तैयारी में जुटे छात्रों को जोर का झटका,  प्रवेश के लिए NET अनिवार्य होगा



अब पीएचडी में प्रवेश तथा उच्च शिक्षा के तहत प्राध्यापक की नौकरी आसान नहीं रही। यूजीसी की ओर से नए सत्र से पीएचडी में प्रवेश के लिए राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) को अनिवार्य कर दिया गया है। ऐसे में जहां पीएचडी में प्रवेश लेना कठिन होगा, वहीं बगैर नेट उत्तीर्ण पीएचडी कर रहे शोधार्थियों के लिए मुश्किलें भी बढ़ेंगी। हालांकि, यूजीसी के इस फैसले से उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के आसार जताये जा रहे हैं।


उच्च शिक्षा में किसी भी विषय पर पीएचडी करने के लिए अब तक सिर्फ संबंधित विवि की प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण करनी अनिवार्य थी। जिसके बाद विवि प्रबंधन की ओर से सीटों के सापेक्ष काउंसिलिंग के बाद संबंधित शोधार्थी को रिक्त सीट आवंटित की जाती थी। हालांकि नेट और जेआरएफ परीक्षा उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को इसका लाभ अधिमान अंकों के तौर पर सिर्फ नौकरी में मिलता था। यही कारण था, कि उच्च शिक्षा में लगातार युवाओं ने पीएचडी में प्रवेश लेना शुरू कर दिया।


प्रवेश परीक्षा के आधार पर अभ्यर्थियों को मेरिट के तहत प्रवेशित कर लिया जाता था। लेकिन एकाएक पीएचडी धारकों की संख्या में इजाफा होने तथा शोध परिणाम शून्य होने की दशा में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की ओर से नया नियम लागू कर दिया गया है। नए रेगुलेशन एक्ट के तहत अब पीएचडी में प्रवेश के लिए नेट परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी। ऐसे में कहा जा सकता है, कि नींव मजबूत होगी तो उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। यूजीसी के इस फैसले को उच्च शिक्षा के पक्ष में बेहतर कहा जा सकता है। 


नए सत्र से सभी केंद्रीय विवि में संयुक्त प्रवेश परीक्षा से दाखिला

Posted: 05 Dec 2021 03:47 PM PST

नए सत्र से सभी केंद्रीय विवि में संयुक्त प्रवेश परीक्षा से दाखिला



नई दिल्‍ली : देशभर के सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों में दाखिले के लिए संयुक्त प्रवेश परीक्षा कराने की योजना इस साल भले ही पूरी नहीं हो पाई, लेकिन सरकार ने आने वाले नए शैक्षणिक सत्र में इसे पूरी तरह से लागू करने के लिए कम कस ली है। फिलहाल इसकी तैयारी तेजी से चल रही है। सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों से इस संबंध में सहमति पत्र लिए जा रहे हैं। साथ ही पाठ्यक्रमों आदि का ब्यौरा भी जुटाया जा रहा है। 


विद्यार्थियों के लिहाज से यह कदम काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि अभी उन्हें किसी कोर्स में दाखिले के लिए कई विश्वविद्यालयों में आवेदन करना पड़ता है। साथ ही सभी जगह प्रवेश परीक्षा में भी शामिल होना होता है। इस दौरान जिस विश्वविद्यालय में दाखिले की प्रक्रिया पहले शुरू होती है, उनमें वह दाखिला ले लेता है, लेकिन बाद में पसंद के विश्वविद्यालय में दाखिला मिलने पर वह वहां चला जाता है। ऐसे में आर्थिक नुकसान और मानसिक तनाव से गुजरना होता है।

यूपी में छात्रवृत्ति के लिए आवेदन की तिथि बढ़ी, अब दस जनवरी तक हो सकेंगे आवेदन

Posted: 05 Dec 2021 09:33 AM PST

वित्तीय वर्ष /शैक्षणिक सत्र 2021-22 मैं दशमोत्तर छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति कक्षा 11-12 एवं अन्य दशमोत्तर कक्षाओं से संबंधित छात्रों को छात्रवृत्ति/शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए आवेदन करने और छात्रवृत्ति वितरण तथा अन्य कार्यों से तृतीय चरण की समय सारणी निर्मित किए जाने के संबंध में

यूपी में छात्रवृत्ति के लिए आवेदन की तिथि बढ़ी, अब दस जनवरी तक हो सकेंगे आवेदन


छात्रवृत्ति के ऑनलाइन आवेदन से वंचित छात्र-छात्राओं के लिए एक मौका और मिला है। शासन की मंजूरी के बाद समाज कल्याण विभाग ने तृतीय चरण की प्रक्रिया शुरू कराई है। जिसके मुताबिक अब छात्र-छात्राओं के फार्म दस जनवरी तक भरे जा सकेंगे।


 शासन ने शैक्षिक सत्र 2021-22 में दशमोत्तर छात्रवृत्ति कक्षा 11 व 12 एवं अन्य दशमोत्तर कक्षाओं से संबंधित छात्रों को छात्रवृत्ति शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए आवेदन करने एवं छात्रवृत्ति वितरण तथा अन्य कार्यों हेतु तृतीय चरण की समय-सारणी के अंतर्गत कार्रवाई पूर्ण कराने के निर्देश दिए गए हैं। दस जनवरी तक छात्रवृत्ति के लिए आवेदन किया जा सकता है।


 जनपद स्तरीय विभागीय अधिकारी के डिजिटल सिग्नेचर से लॉक डाटा के आधार पर बैंक, कोषागार के ई-पेमेंट के तहत पीएफएमएस से छात्र-छात्राओं के आधार लिंक बैंक खातों में सीधे धनराशि अंतरित की जाएगी।




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