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Saturday, December 18, 2021

प्राइमरी का मास्टर ● इन

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देश का पहला निपुण भारत निगरानी केंद्र गोरखपुर में

Posted: 17 Dec 2021 05:32 PM PST

देश का पहला निपुण भारत निगरानी केंद्र गोरखपुर में

भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा लागू  की गई निपुण (नेशनल इनोशिएटिव फार प्रोफिशिएंसी इन रीडिंग विद अंडरस्टैंडिंग एंड न्यूमेरसी) भारत योजना के तहत देश का पहला निपुण भारत निगरानी कर (मानीटरिंग सेंटर) गोरखपुर में स्थापित किया जा रहा है। विकास भवन में बनाए जा रहे इस केंद्र से बेसिक शिक्षा में बड़ा बदलाव आएग। परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे की नियमित रूप से वास्तविक समय में निगरानी हो सकेगी। बच्चे ने कितना सोखा, उसके सीखने की प्रगति कैसी है रोज स्कूल आता है या नहीं, स्कूल में मध्याहन भोजन की स्थिति क्या है कितने बच्चे स्कूल छोड़ दे रहे। है आदि बिन्दुओं पर भी समय से छटा उपलब्ध हो सकेगा और उसके आधार पर सुधार किया जाएगा। लक्ष्य है कि 2026-27 तक हर बच्चा तीसरी कक्षा के अंत तक पढ़ने लिखने एवं अंकगणित सीखने की क्षमता विकसित सके। 88 लाख रुपये की लागत से स्थापित किए जा रहे इस केंद्र का लोकार्पण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को करेंगे। मुख्यमंत्री यहाँ निगरानी केंद्र को कार्यप्रणाली पर केंद्रित चार मिनट का वीडियो भी देखेंगे।

जिलाधिकारी विजय किरन आनंद की पहल पर विकास भवन में इस अत्याधुनिक की स्थापना हो रहा है। मुख्य विकास अधिकारी  इंद्रजीत सिंह को इसके संचालन की जिम्मेदारी दे गई है। इस केंद्र में एक नियंत्रण कक्ष को भी स्थापना की गई। है। इसमें 16 एकेडमिक रिसोर्स पर्सन  (एआरपी) एवं शिक्षकों को नियुक्त किया जाएगा। केंद्र में 16 कंप्यूटर लगाए गए हैं। इसे काल सेंटर के रूप में भी विकसित किया गया है। केंद्र में हाई स्पीड इंटरनेट की सुविधा होगी। यहां एक बड़ी एलईडी स्क्रीन भी लगाई गई है। नियंत्रण कक्ष सुबह नौ से शाम पांच बजे तक संचालित होगा जिले में 2493 परिषदीय विद्यालयों में 600 स्मार्ट क्लास हैं। मुख्यमंत्री के आगमन को देखते हुए जिलाधिकारी ने शुक्रवार की शाम केंद्र का निरीक्षण किया। इस दौरान मुख्य विकास अधिकारी इंजीत सिंह, बेसिक शिक्षा अधिकारी रमेंद्र प्रताप सिंह, विजय जायसवाल आदि उपस्थित रहे।

निपुण भारत योजना के तहत विकास भवन में निपुण भारत निगरानी केंद्र स्थापित किया गया है। गोरखपुर पहला जिला है, जहां ऐसा केंद्र स्थापित किया गया है। बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे कितना सीख पा रहे हैं, इसकी रियल टाइम निगरानी हो सकेगी। यह केंद्र बेसिक शिक्षा में बड़े बदलाव लेकर आएगा
विजय किरन आनंद जिलाधिकारी

●ऐसे होगी निगरानी

जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान डायट के शिक्षकों द्वारा हर महीने प्रश्न पत्र तैयार किए जाएंगे। इन्हें स्कूलों पर भेजा जाएगा। बच्चों को इसे हल करने को दिया जाएगा और उसके बाद स्कूल के शिक्षक ओएमआर शीट पर बच्चों द्वारा दिए गए उत्तर भरेंगे।
एक ओएमआर शीट पर आठ बच्चों के उत्तर भरे जा क्षमता को बढ़ाया जाएगा। सभी स्कूली की जियो सकते हैं।
सरल एप के जरिए ओएमआर शीट स्कैन किया जाएगा। स्कैन करने पर यह ओएमआर आनलाइन निगरानी केंद्र पर आ जाएंगे। यहां बच्चों के सीखने की प्रगति का अध्ययन किया जाएगा और जहां कमिया होगी वहा एआरपी को भेजकर बच्चों की सीखने की टैगिंग भी होगी, जिसके जरिए उनकी निगरानी हो सकेंगी।
इसके अलावा मिशन प्रेरणा, आपरेशन कायाकला, मध्याहन भोजन योजना, समावेशी शिक्षा समेत विद्यालय स्तर पर संचालित सभी योजनाओं की निगरानी भी हो सकेगी।

UP Board Exam 2022: यूपी बोर्ड की 10वीं -12वीं परीक्षा देंगे 51.74 लाख छात्र

Posted: 17 Dec 2021 05:29 PM PST

UP Board Exam 2022: यूपी बोर्ड की 10वीं -12वीं परीक्षा देंगे 51.74 लाख छात्र

UP Board Exam 2022: उत्तर प्रदेश बोर्ड की हाईस्कूल (10वीं) और इंटरमीडिएट (12वीं) परीक्षा 2022 में 51,74,583 छात्र-छात्राएं शामिल होंगे। परीक्षा फॉर्म भरने की अंतिम तिथि 15 दिसंबर तक 10वीं के 27,83,742 और 12वीं के 23,91,841 कुल 51,74,583 विद्यार्थियों ने आवेदन किया है।


इससे पहले अंतिम तिथि 20 नवंबर तक कक्षा 10 व 12 के लिए 51.55 लाख छात्र-छात्राओं ने फॉर्म भरा था। वहीं कक्षा 9 में 31,92,815 और 11 में 26,78,123 कुल 58,70,938 छात्र-छात्राओं का अग्रिम पंजीकरण हुआ है।

16 से 18 दिसंबर तक ऑनलाइन आवेदन पत्र में संशोधन का अवसर दिया गया है। ये चौथा मौका था जब यूपी बोर्ड ने अग्रिम पंजीकरण और बोर्ड परीक्षा फॉर्म भरने की तारीख बढ़ाई थी। साल 2021 में कोरोना काल में बिना परीक्षा प्रोन्नत 10वीं-12वीं के छात्र-छात्राओं को 2022 की बोर्ड परीक्षा में नि:शुल्क शामिल होने का मौका दिया गया था।

वहीं इस साल 31 जुलाई को घोषित 2021 के 10वीं-12वीं के परिणाम से असंतुष्ट छात्र-छात्राओं के अनुरोध पर फिर से आवेदन लिए गए हैं।साल 2021 के लिए पंजीकृत छात्र-छात्राओं को 2022 की परीक्षा देने के बावजूद 2021 का ही प्रमाणपत्र-सह-अंकपत्र प्रदान किया जाएगा।

दिव्यांग छात्रों की राष्ट्रीय छात्रवृत्ति के आवेदन की अंतिम तिथि 31 दिसम्बर

Posted: 17 Dec 2021 05:16 PM PST

दिव्यांग छात्रों की राष्ट्रीय छात्रवृत्ति के आवेदन की अंतिम तिथि 31 दिसम्बर


लखनऊ : केन्द्रीय सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय के अधीन संचालित दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की ओर से दिव्यांगजन विद्यार्थियों के लिए संचालित राष्ट्रीय छात्रवृत्ति योजना में आवेदन करने की अंतिम तिथि 31 दिसम्बर तय की गयी है। पहले यह अंतिम तिथि 15 दिसम्बर थी। 



यह छात्रवृत्ति शैक्षणिक सत्र 2021-22 के लिए उपलब्ध करायी जाएगी। केन्द्र सरकार द्वारा निर्धारित समय सारिणी के अनुसार ऑनलाइन आवेदन करने की अन्तिम तिथि 15 दिसम्बर से बढ़ाकर 31 दिसम्बर कर दी गयी है। छात्रवृत्ति की पात्रता की शर्तें एवं विस्तृत जानकारी भारत सरकार के सुसंगत दिशा-निर्देश में वर्णित प्रतिबंधों के अनुसार होगी।

हाईकोर्ट : छात्राओं को भी मातृत्व अवकाश जैसे लाभ का अधिकार, जानें पूरा मामला

Posted: 17 Dec 2021 05:13 PM PST

हाईकोर्ट : छात्राओं को भी मातृत्व अवकाश जैसे लाभ का अधिकार, जानें पूरा मामला


प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि विभिन्न संवैधानिक न्यायालयों द्वारा तय किए गए कानून के तहत बच्चे को जन्म देना महिला का मौलिक अधिकार है। किसी भी महिला को उसके इस ‌अधिकार और मातृत्व सुविधा देने से वंचित नहीं किया जा सकता है।


 कोर्ट ने एपीजे अब्दुल कलाम विश्वविद्यालय लखनऊ द्वारा अंडर ग्रेजुएट छात्राओं को मातृत्व लाभ देने के लिए नियम नहीं बनाने की निंदा करते हुए विश्वविद्यालय को इस संबंध में नियम बनाने का निर्देश दिया है, जिसमें छात्राओं के बच्चे को जन्म देने के पूर्व व जन्म देने के बाद सहयोग करने व अन्य मातृत्व लाभ शामिल हों। साथ ही छात्राओं को परीक्षा पास करने के लिए अतिरिक्त अवसर व समयावधि बढ़ाने के नियम हों। कोर्ट ने विश्वविद्यालय को चार माह में निर्णय लेने के लिए कहा है।


एपीजे अब्दुल कलाम विश्वविद्यालय से संबद्ध कानपुर के कृष्णा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉ‌लाजी की बीटेक छात्रा सौम्या तिवारी की याचिका पर न्यायमूर्ति अजय भनोट ने याची को बीटेक के द्वितीय व तृतीय सेमेस्टर के दो प्रश्नपत्रों में सम्मलित होने के लिए अतिरिक्त अवसर देने का निर्देश दिया है। 


कोर्ट ने कहा कि विश्वविद्यालय छात्राओं को मातृत्व लाभ देने से मना नहीं कर सकता। ऐसा करना संविधान के अनुच्छेद 14, 15(3) और अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है। विश्वविद्यालय के अधिवक्ता ने कहा कि विश्वविद्यालय में ऐसा कोई नियम नहीं है जिसके आधार पर अंडर ग्रेजुएट छात्रा को मातृत्व लाभ दिया जाए। 


इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि विश्वविद्यालय छात्रा को इस आधार पर मातृत्व संबंधी लाभ देने से इनकार नहीं कर सकता है कि उसने ऐसा कोई नियम, परिनियम नहीं बनाया है। ऐसा करना छात्रा के मौलिक अधिकार का हनन करना होगा। विश्वविद्यालय इस संबंध में नियम बनाने के लिए कानूनन बाध्य है।


विश्चवविद्यालय अनुदान आयोग के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार के निर्देश पर यूजीसी ने सकुर्लर जारी कर देश के सभी विश्चविद्यालयों को छात्राओं को भी मातृत्व संबंधी लाभ दिए जाने को लेकर नियम बनाने के लिए कहा है जबकि एआईसीटीई के अधिवक्ता का कहना था कि उनकी ओर से इस संबंध में नियम बनाने के लिए कोई रोक नहीं है। 


विश्वविद्यालयों के पास खुद के नियम व परिनियम बनाने की शक्ति है जिसका प्रयोग कर वे नियम बना सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि एआईसीटीई सहित अन्य तमाम रेग्युलेटरी बॉडी पीजी छात्राओं को ही मातृत्व संबंधी लाभ देने के नियम बनाने तक सीमित हैं। अंडर ग्रेजुएट छात्राओं के लिए नियम न बनाना अनुच्छेद 14 और 15(3) का उल्लंघन है।


यह है मामला

याची सौम्या तिवारी ने कानपुर के कृष्णा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉ‌लाजी कानपुर में वर्ष 2013-14 के सत्र में बीटेक इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्यूनिकेशन पाठ्यक्रम में दाखिला लिया। उसने सभी सेमेस्टर सफलतापूर्वक पास किए लेकिन तीसरे सेमेस्टर के इंजीनियनिरिंग मैथमैटिक्स के द्वितीय प्रश्नपत्र व ‌द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षा में गर्भवती होने व बच्चे को जन्म देने के बाद की रिकवरी के कारण शामिल नहीं हो सकी। इससे उसका कोर्स पूरा नहीं हुआ। उसने विश्वविद्यालय से अतिरिक्त अवसर देने की मांग की जिसे नामंजूर कर दिया गया।

यूपी में SC-ST छात्रवृत्ति में 60% अंकों की बाध्यता खत्म, एक लाख से अधिक विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ

Posted: 17 Dec 2021 04:48 PM PST

यूपी में SC-ST छात्रवृत्ति में 60% अंकों की बाध्यता खत्म, एक लाख से अधिक विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ



वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार अधिक से अधिक छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति प्रदान करने की कोशिश में जुटी है। इसके लिए लगातार नियमों को लचीला भी बना रही है। इसी के तहत अब सरकार ने अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति (एससी-एसटी) की दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना में 60 प्रतिशत अंकों की बाध्यता खत्म कर दी है।


यह नियम निजी शिक्षण संस्थानों के ऐसे प्रोफेशनल पाठ्यक्रम जिनमें दाखिला इंटरमीडिएट की मेरिट लिस्ट से होता है, उन पर लागू किया है। यानी अब इंटर में 60 प्रतिशत से कम अंक पाने वाले छात्र-छात्राएं भी छात्रवृत्ति का लाभ पा सकेंगे। इस योजना का लाभ करीब एक लाख से अधिक छात्रों को मिलने की उम्मीद है।


दरअसल, अभी तक अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना के तहत निजी शिक्षण संस्थानों में संचालित प्रोफेशनल पाठ्यक्रमों में केवल उन छात्र-छात्राओं को ही छात्रवृत्ति मिलती थी जिनके इंटरमीडिएट में 60 प्रतिशत से अधिक अंक होते थे। अब सरकार ने इस नियम को हटा दिया है।


निदेशक समाज कल्याण राकेश कुमार ने सभी जिला समाज कल्याण अधिकारियों को सरकार के नए दिशा-निर्देश शुक्रवार को भेज दिए। उन्होंने कहा कि 60 प्रतिशत से कम अंक पाने वाले छात्र-छात्राएं भी अब छात्रवृत्ति पा सकेंगे। आनलाइन आवेदन 10 जनवरी तक किए जा सकते हैं।

देश के 15 हजार से ज्यादा सरकारी स्कूलों को आदर्श स्कूल के रूप में किया जाएगा विकसित, जानिए क्‍या क्या होंगी सुविधाएं?

Posted: 16 Dec 2021 05:55 PM PST

देश के 15 हजार से ज्यादा सरकारी स्कूलों को आदर्श स्कूल के रूप में किया जाएगा विकसित, जानिए क्‍या क्या होंगी सुविधाएं?


हर ब्लाक में बनेंगे कम से कम दो आदर्श स्कूल

सरकारी स्कूलों की योजना पर नए साल से शुरू हो जाएगा काम

एक माध्यमिक और एक उच्च माध्यमिक स्कूल को भी आदर्श स्कूल बनाया जाएगा


 नई दिल्ली : यदि कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ तो सरकारी स्कूलों को आदर्श स्कूलों के रूप में तैयार करने की योजना पर नए साल से काम शुरू हो जाएगा। इसके तहत प्रत्येक ब्लाक में कम-से-कम दो सरकारी स्कूलों को आदर्श स्कूल के रूप में उन्नत किया जाएगा। इनमें एक प्री-प्राइमरी और एक प्राथमिक स्कूल शामिल होगा। इसके साथ ही प्रत्येक जिले के एक माध्यमिक और एक उच्च माध्यमिक स्कूल को भी आदर्श स्कूल के रूप में तैयार किया जाएगा।


पहले चरण में देश के 15 हजार से ज्यादा सरकारी स्कूलों को आदर्श स्कूल के रूप में तैयार किया जाएगा। प्री-प्राइमरी आदर्श स्कूलों में खेल आधारित शिक्षा दी जाएगी। यहां बच्चों को खिलौनों के जरिये पढ़ाया जाएगा। निजी क्षेत्रों से जुड़े संस्थानों की मदद ली जाएगी। शिक्षा मंत्रलय के मुताबिक, आदर्श स्कूलों का स्वरूप दूसरे स्कूलों के लिए अनुकरणीय होगा। इसमें पूरी तरह से नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के दर्शन होंगे। 


ये अपने आप-पास के स्कूलों को परामर्श भी देंगे। योजना के तहत वर्ष 2024 तक पहले चरण में 15 हजार आदर्श स्कूलों को विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इन स्कूलों का चयन राज्यों की मदद से किया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक, आदर्श स्कूलों से जुड़ी इस योजना पर करीब पांच हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे। गौरतलब है कि सरकार ने सरकारी स्कूलों को आदर्श स्कूलों के रूप में तैयार करने का एलान बजट में किया था।


आदर्श स्कूल सभी तरह की सुविधाओं से लैस होंगे। इनमें छात्रों को पढ़ाई और भविष्य के सपने को बुनने का अनुकूल माहौल मिलेगा। स्मार्ट क्लासरूम, पुस्तकालय, कंप्यूटर लैब, कौशल लैब, खेल का मैदान आदि सुविधाएं मौजूद होंगी। छात्र-शिक्षक का अनुपात भी बेहतर होगा। प्रत्येक 30 छात्रों पर एक शिक्षक होगा। प्रत्येक स्कूल में अनिवार्य रूप से विज्ञान, गणित, कला, संगीत,भाषा, खेल और व्यावसायिक शिक्षा आदि के शिक्षक या फिर परामर्शदाता होंगे। स्थानीय कलाकारों को भी इन स्कूलों से जोड़ा जाएगा।

फतेहपुर : भुगतान आदेश के बावजूद नहीं पहुंचे एरियर के बिल

Posted: 16 Dec 2021 05:55 PM PST

फतेहपुर : भुगतान आदेश के बावजूद नहीं पहुंचे एरियर के बिल

फतेहपुर : वर्तमान बीएसए के चार्ज लेने के बाद से ही विभिन्न शिक्षक भर्तियों के अन्तर्गत सेवा में आए बेसिक शिक्षकों के वेतन बकाए को लेकर एक के बाद एक भुगतान आदेश हो रहे हैं लेकिन कई माह बीतने के बाद भी बिल न बनने से धनराशि का भुगतान नहीं हो सका है। वेतन भुगतान आदेश का धरातल पर अमल न होता देख नाराज बीएसए ने सभी बीईओ को एक सप्ताह में वेतन बकाए का बिल लेखा में जमा करने का फरमान सुनाया है।


बीएसए संजय कुमार कुशवाहा ने सभी खंड शिक्षाधिकारियों से कहा है कि संघ ने उन्हें अवगत कराया है कि 15000, 16448, 12460, 68500 तथा 69000 सहायक शिक्षक भर्तियों से सम्बन्धित शिक्षकों के वेतन बकाए के भुगतान सम्बन्धित आदेश जारी होने के बावजूद ससमय एरियर बिल वित्त एवं लेखाधिकारी कार्यालय को नहीं दिए जा रहे हैं। इस स्थिति पर असंतोष जताते हुए उन्होंने कहा कि अवशेष वेतन भुगतान आदेश जारी होने के सात दिवस के भीतर बिल बनाकर लेखाधिकारी कार्यालय को मुहैया करा दिया जाए।

कुछ का भुगतान कुछ को इंतजार

सूत्र बताते हैं कि चढ़ावा मिलने के बाद अनेक शिक्षकों के अवशेष वेतन भुगतान बिल बनाकर लेखा कार्यालय भेजे गए हैं। सूत्र यह भी बताते हैं कि एक ही अवशेष वेतन भुगतान आदेश में शामिल कुछ शिक्षकों को भुगतान कर दिया गया तो कुछ को अभी बिल बनने का ही इंतजार है।

अब भी कई को आदेश का इंतजार

बीएसए संजय कुशवाहा ने वैसे तो प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए सत्यापन में तेजी लाते हुए नियमित अंतराल पर अवशेष वेतन भुगतान जारी कर किए हैं लेकिन अब भी बड़ी संख्या में शिक्षकों को कई साल बाद भी अपने वेतन बकाए का इंतजार है।

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