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Friday, January 21, 2022

Bhopal Samachar | No 1 hindi news portal of central india (madhya pradesh)

Bhopal Samachar | No 1 hindi news portal of central india (madhya pradesh)


JABALPUR NEWS- एक्स-रे फिल्म दान कीजिए, मरीज परेशान हो रहे हैं

Posted: 21 Jan 2022 09:46 PM PST

मध्य प्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर के सरकारी विक्टोरिया जिला अस्पताल में पिछले 7 महीने से एक्सरे फिल्म नहीं है इसके कारण अस्पताल में मरीजों का एक्स-रे तो किया जा रहा है परंतु उन्हें एक्स-रे दीया नहीं जा रहा है। सरकारी सिस्टम की निंदा बाद में कर लेंगे फिलहाल जबलपुर के दानदाताओं से अपील है कि यदि वह इस सप्ताह कुछ दान करने की योजना बना रहे हैं कृपया अस्पताल को एक्स-रे फिल्म दान करें। 

मोबाइल पर फोटो खींच कर दे देते हैं 

अस्पताल प्रबंधन संवेदनशीलता के साथ काम कर रहा है। अक्सर सरकारी अस्पतालों में एक्सरे फिल्म खत्म हो जाने पर, एक्स-रे करना बंद कर देते हैं लेकिन विक्टोरिया अस्पताल में एक्स-रे करना बंद नहीं किया गया है। केवल उसका फिल्म पर प्रिंट नहीं दिया जाता। मोबाइल पर फोटो खींच कर दे देते हैं। 

हेल्थ मिनिस्टर को भी बता चुके हैं, पूरे प्रदेश की समस्या है

सिविल सर्जन डॉ राजकुमार चौधरी के मुताबिक सात महीने से एक्सरे फिल्म की समस्या बनी हुई है। अब तक 3 से 4 बार शासन स्तर पर पत्र और रिमाइंडर भेज चुके हैं। हेल्थ मिनिस्टर को भी बता चुके हैं। पर एक्सरे फिल्म का ठेका न होने से भोपाल स्तर से ही एक्सरे फिल्म नहीं उपलब्ध कराई जा रही है। ऐसे में मोबाइल से फोटो खींच कर किसी तरह मरीजों का इलाज किया जा रहा है।

3 दिन में 4 पैकेट खर्च हो जाते हैं 

विक्टोरिया अस्पताल में 3 दिन में 4 पैकेट खर्च हो जाते हैं। बाजार में एक्सरे फिल्म के पैकेट की कीमत लगभग ₹4000 है। अस्पताल को 1 महीने के लिए 30 पैकेट की जरूरत है। लोग अपनी क्षमता के अनुसार एक पैकेट का दान भी करेंगे तब भी सहायता हो जाएगी। विधायक अपनी विधायक निधि से और सांसद अपनी सांसद निधि से भी मदद कर सकते हैं। जबलपुर की महत्वपूर्ण खबरों के लिए कृपया jabalpur news पर क्लिक करें.

सरकारी निमंत्रण को जमीन में गाड़ दो, पेड़ उग आएगा- पर्यावरण के लिए अनोखा अभियान - Hindi Samachar

Posted: 21 Jan 2022 09:26 PM PST

NEW DELHI
- भारत सरकार द्वारा पर्यावरण संरक्षण के लिए अनोखा अभियान शुरू किया गया है। दिनांक 26 जनवरी 2022 को राजधानी दिल्ली में आयोजित गणतंत्र दिवस परेड समारोह के लिए जो इनविटेशन कार्ड तैयार किए गए हैं वह बायोडिग्रेडेबल हैं। लोग उपयोग के बाद इस सरकारी निमंत्रण पत्र को जमीन में गाड़ देंगे। कुछ दिनों बाद वहां पर एक पेड़ उग आएगा।

Biodegradable invitation card- आयुष मंत्रालय का इनोवेटिव आइडिया

इस बार गणतंत्र दिवस परेड के लिए रक्षा मंत्रालय ने आयुष मंत्रालय के परामर्श पर एक अनोखा अनोखा आमंत्रण पत्र तैयार किया है। इस आमंत्रण पत्र को दिखाकर पहले आप परेड देखें और बाद में घर आकर उसे अपने गमले में लगा दें, तो उसी से एलोवेरा, आँवला या अश्वगंधा का पौधा उग जाएगा। 

इस पेपर को बनाते समय कागज की लुगदी में कुछ बीज भी डाल दिए गए हैं। इस बायोडिग्रेडेबल पेपर को मिट्टी में ना डालकर यदि केवल पानी में या कच्ची जमीन पर यूं ही डाल दिया जाएगा तो यह 10 दिन में स्वयं ही नष्ट हो जाएगा। निमंत्रण पत्र में ऐसा प्रयोग सरकार ने पहली बार किया है। पत्र में बाकायदा कार्ड को नष्ट करके गमले में लगाने के तरीके का निर्देश भी दिया गया है। भारत की महत्वपूर्ण खबरों के लिए कृपया Hindi samachar पर क्लिक करें

Delhi-Bhopal शताब्दी सहित कई ट्रेनें निरस्त, कई के रूट बदले - Rail Samachar

Posted: 21 Jan 2022 09:09 PM PST

Bhopal-Delhi
रेलवे ट्रैफिक बाधित हो गया है। उत्तर मध्य रेलवे के आगरा मंडल में माल गाड़ी का एक्सीडेंट हो जाने के कारण रेलवे ट्रैक बंद कर दिया गया है। इसके चलते दिल्ली से भोपाल आने वाली और भोपाल से दिल्ली जाने वाली शताब्दी एक्सप्रेस रद्द कर दी गई है। और भी कई ट्रेनों को रद्द किया गया है और उनके रूट बदल दिए गए हैं।

Cancelled Trains Today List- Delhi to Bhopal

Train number 12002/12001 नई दिल्ली-रानी कमलापति-नई दिल्ली shatabdi Express दोनों तरफ से निरस्त रहेगी।
Train number 12642 हजरत निजामुद्दीन-कन्याकुमारी (kanyakumari Express)
Train number 12808 हजरत निजामुद्दीन विशाखापत्तनम एक्सप्रेस (visakhapatnam Express) प्रारंभिक स्टेशन से निरस्त रहेगी।

Train route change due to agra accident

Train number 11058 अमृतसर-छ्त्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस एक्सप्रेस वाया गजियाबाद-अलीगढ़ जंक्शन-मितावली-एत्मादपुर-आगरा कैंट होकर चलाई जा रही है। 

Train number 12721 हैदराबाद-हजरत निजामुद्दीन एक्सप्रेस, 12919 डॉ.अम्बेडकर नगर-श्री माता वैष्णव देवी कटरा एक्सप्रेस, 12979 वास्कोडिगामा-हजरत निजामुद्दीन एक्सप्रेस, 12615 चेन्नई-नई दिल्ली एक्सप्रेस, 22691 वेंगलुरु-हजरत निजामुद्दीन एक्सप्रेस, 12085 विशाखापत्तनम-नई दिल्ली एक्सप्रेस परिवर्तित मार्ग वाया आगरा कैंट-एत्मादपुर-मितावली-गाजियाबाद होकर 

हैदराबाद-नई दिल्ली एक्सप्रेस परिवर्तित मार्ग वाया कानपुर सेंट्रल-टुंडला-गाजियाबाद होकर चल रही है।

Train number 12626 नई दिल्ली-त्रिवेंद्रम सेंट्रल एक्सप्रेस परिवर्तित मार्ग वाया गाजियाबाद-मितावली-एत्मादपुर-अगरा कैंट होकर चल रही है।

अमृतसर से प्रस्थान कर बिलासपुर जाने वाली Train number 18238 अमृतसर-बिलासपुर छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस परिवर्तित मार्ग वाया मेरठ सिटी-हापुड़-खुर्जा जंक्शन-टुंडला-प्रयागराज जंक्शन-मानिकपुर-कटनी होकर चलाई जा रही है। 

21 जनवरी को फिरोजपुर से प्रस्थान कर छ्त्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस को जाने वाली Train number 12138 पंजाब मेल परिवर्तित मार्ग वाया रेवाड़ी-अलवर-मथुरा जंक्शन होकर चल रही है। 

Train number 12618 हजरत निजामुद्दीन-एर्नाकुलम एक्सप्रेस, 12650 हजरत निजामुद्दीन-यशवंतपुर एक्सप्रेस, 22686 चंडीगढ़-यशवंतपुर एक्सप्रेस परिवर्तित मार्ग वाया गाजियाबाद-मितावली-एत्मादपुर-आगरा कैंट होकर चल रही है।
नोट : रूट बदलने के कारण ट्रेन लेट हो सकती हैं। ट्रेन की सही स्थिति NTES/139 से पता करके यात्रा का समय तय करें। भोपाल की महत्वपूर्ण खबरों के लिए कृपया bhopal news पर क्लिक करें.

दिग्विजय सिंह ने शिवराज सिंह की जान बचाई थी, विवेक तन्खा ने बताया - JABALPUR NEWS

Posted: 21 Jan 2022 08:38 PM PST

मध्य प्रदेश की राजनीति
बिना चुनाव के गर्म हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के प्रतिष्ठित वकील, सांसद एवं कांग्रेस नेता विवेक तन्खा ने वर्तमान राजनीतिक घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि किस प्रकार जब दिग्विजय सिंह मुख्यमंत्री थे, उन्होंने शिवराज सिंह चौहान की जान बचाई थी। 

विवेक तन्खा ने अपनी प्रतिक्रिया में लिखा है कि मुझे वो दिन याद है जब ⁦ शिवराज सिंह चौहान⁩ जी एमपी थे, बहुत बुरा ऐक्सिडेंट हुआ था, सीएम ⁦ दिग्विजय सिंह⁩ जी को अप्रोच किया था हवाई जहाज़ और व्यवस्था के लिए। मतलब, किसी के सब दिन एक से नहीं। वक्त बदलता है। सब की जिंदिगी में एक दिन भूतपूर्व होना लिखा है। तो यह सब क्यों! क्या पद भाग्य से बड़ा है। 

दिग्विजय सिंह: मध्यप्रदेश में एक बार फिर चर्चा का केंद्र बिंदु

पूर्व मुख्यमंत्री एवं सांसद दिग्विजय सिंह मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर चर्चा का केंद्र बिंदु बन गए हैं। उनके पुराने किस्से दोहराए जा रहे हैं। कमलनाथ शासन काल के समय शासन व्यवस्था में दिग्विजय सिंह की दखलअंदाजी भी याद की जा रही है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ ऐसा क्या हुआ जो बात इतनी बढ़ गई, इस सवाल का जवाब भी चर्चा में है। मध्य प्रदेश की महत्वपूर्ण खबरों के लिए कृपया mp news पर क्लिक करें

कोहिनूर हीरा कितना पुराना है, इसके पहले स्वामी का नाम क्या है- GK in Hindi

Posted: 21 Jan 2022 08:51 PM PST

कोहिनूर हीरे के बारे में तो अपन सभी ने सुना है। एक बात जो सब जानते हैं, वह यह है कि कोहिनूर हीरा भारत की संपत्ति है जो ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय की मुकुट में लगा हुआ है। सवाल यह है कि कोहिनूर हीरा कितना पुराना है और इसे दुनिया का सबसे बहुमूल्य हीरा क्यों माना जाता है जबकि इससे अधिक वजन के हीरे मौजूद हैं। 

कोहिनूर हीरा कितना पुराना है, इसके पहले स्वामी का नाम क्या है

कोहिनूर हीरे के बारे में कोई एक स्पष्ट इतिहास नहीं है लेकिन भारत में मान्यता है कि कोहिनूर हीरा लगभग 5000 साल पुराना है। भारत के शास्त्रों में इसे स्यमंतक मणि के नाम से उल्लेखित किया गया है। जाम्वंत जी ने यह मणि भगवान श्री कृष्ण को दी थी। पुरातत्व विशेषज्ञों का मानना है कि कोहिनूर हीरा का अस्तित्व 3200 ईसा पूर्व है। यह भी कहा जाता है कि कोहिनूर हीरा गोलकुंडा की खान से निकला था जो वर्तमान में आंध्र प्रदेश में स्थित है और सन 1730 तक यह दुनिया की एकमात्र हीरे की खान थी। 

कोहिनूर हीरा इतना बहुमूल्य क्यों है 

कोहिनूर डायमंड का वजन 105 कैरेट (21.6 ग्राम) है। वर्तमान में दुनिया में इससे ज्यादा वजनदार हीरे मौजूद हैं। दुनिया के 7 सबसे वजनदार हीरो में कोहिनूर का नाम नहीं आता। इसके बावजूद कोहिनूर हीरा सबसे बहुमूल्य है क्योंकि इसके पीछे एक ऐसी मान्यता है जिस पर सारी दुनिया के शासकों ने विश्वास किया। मान्यता यह है कि कोहिनूर हीरा जिस के मुकुट में होता है वह दुनिया का सबसे बड़ा और लोकप्रिय शासक होता है। जब तक यह भारत में था तब तक भारत, विश्व का सबसे धनवान और बुद्धिमान देश माना जाता था। Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article 
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मध्य प्रदेश राज्य पशु कल्याण सलाहकार मंडल की लिस्ट एवं कार्य - MP NEWS

Posted: 21 Jan 2022 01:07 PM PST

भोपाल
। राज्य शासन द्वारा पशुपालन एवं डेयरी मंत्री श्री प्रेमसिंह पटेल की अध्यक्षता में राज्य पशु कल्याण सलाहकार मंडल का गठन किया गया है। केन्द्र शासन के दिशा-निर्देनुसार गठित मंडल में अध्यक्ष कार्य परिषद मध्यप्रदेश गौ-पालन एवं पशुधन संवर्धन बोर्ड उपाध्यक्ष और अपर मुख्य सचिव पशुपालन सदस्य होगें। अन्य सदस्यों में विधायक, अशासकीय प्रतिनिधि और पशु कल्याण से जुड़ी संस्थाएँ शामिल की गई है। समिति पशुओं के प्रति क्रूरता एवं बरताव के निवारण, पशुओं के परिवहन में उपयोग पशुओं के लिए शेड, पानी, चिकित्सा सहायता आदि के संबंध में राज्य सरकार को समय-समय पर सुझाव देगी।

विधायकों में श्रीमती सुमित्रा देवी कास्डेकर और श्री राम दांगोरे, गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव और वन, शिक्षा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास और नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव, पीसीसीएफ (वाइल्ड लाइफ), संचालक पशुपालन एवं डेयरी विभाग, प्रबंध संचालक पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम और भारतीय वन जीव कल्याण बोर्ड के प्रतिनिधि को सदस्य नामांकित किया गया है।

अशासकीय सदस्यों में श्री कैलाश ललवानी गोपाल गौशाला नलखेड़ा जिला आगर-मालवा, श्री वैदपाल झा केदारधाम गौशाला एवं जैव कृषि अनुसंधान केन्द्र केदारपुर जिला ग्वालियर, श्री प्रमोद नेमा भोपाल, श्री जितेन्द्र नरोलिया इंदौर और श्री शंकर लाल पाटीदार कामधेनु सेवा संस्थान इमलिया जिला रायसेन शामिल हैं।

पशु कल्याण से जुड़ी संस्थाओं में गौ सेवा आश्रम देवरी जिला मुरैना, एनिमल क्योर एण्ड केयर ग्वालियर, श्री गौस्वामी रामानंद गौशाला गुना, श्री कृष्ण गौशाला सेवा आश्रम कुसमानियाँ जिला देवास, एनिमल एण्ड एनवायरमेंट केयर ऑर्गनाइजेशन भोपाल, कामधेनु गौशाला भोपाल, श्री कृष्ण गौशाला एवं गौ-संवर्धन समिति सिरोंज, त्रिवेणी गौशाला बैतूल, श्री दयोदय पशुधन संरक्षण समिति हरदा और जन-जागरण एजूकेशनल एण्ड हेल्थ वेलफेयर सोसायटी मकरोनिया जिला सागर भी बोर्ड के सदस्य होगें।

मंडल के कार्य
पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण अधिनियम 1960 के उपबंधों का पर्यवेक्षण एवं प्रशासन को सलाह देना।
पशुओं के प्रति क्रूरता या बर्ताव के संबंध में शासन को सलाह देना।
पशुओं के परिवहन में उपयोग होने वाले यानों की संरचना में सुधार हेतु शासन, प्रशासन या यान स्वामी को सुझाव देना।
पशुओं के लिए शेड, पानी, चिकित्सा सहायता हेतु निर्णय लेना।
पशुवध गृहों की संरचना, रख-रखाव के संबंध में शासन और स्थानीय प्रधिकरणों को अवश्यक सुझाव देना।
अवारा पशुओं को पकड़ते समय उन्हें यातना और दर्द से निजात दिलाने के लिए आवश्यक कदम उठाना।
असहाय, वृद्ध पशुओं और वन्य-प्राणियों की सुरक्षा करने वाली संस्थाओं को पिंजरा, बल्लियाँ, आश्रय स्थल के निर्माण आदि के लिए आवश्यक अनुदान उपलब्ध कराना।
पशु क्रूरता निवारण के क्षेत्र में कार्यरत संस्थाओं को अवश्यक सहयोग देना।
पशुओं को समान्यत: दी जाने वाली अनावश्यक यातनाओं के विरूध लोगों को जागरूक करना और पशुओं के स्वास्थ्य संरक्षण के संबंध में राज्य शासन को सुझाव देना शामिल है।

MP TET VARG 3- प्रगतिशील शिक्षा की अवधारणा पार्ट- 2

Posted: 21 Jan 2022 12:43 PM PST

Concept Of Progressive Education part -2

प्रगतिशील शिक्षा में शिक्षण विधि को अधिक व्यवहारिक (Practical) करने पर जोर दिया जाता है। प्रगतिशील शिक्षा के सिद्धांतों के अनुसार आजकल शिक्षा को अनिवार्य और सार्वभौमिक बनाने पर जोर दिया जाता है। शिक्षा का लक्ष्य व्यक्तित्व का विकास है और प्रत्येक व्यक्ति को उसके व्यक्तित्व का विकास करने के लिए शिक्षा प्राप्त करने का अवसर दिया जाना चाहिए। 

प्रगतिशील शिक्षा के उद्देश्यों की पूर्ति करने के लिए ही प्राथमिक शिक्षा का सार्वभौमीकरण (Globalisation of Primary Education), सर्व शिक्षा अभियान (SSA), मध्यान्ह भोजन योजना (Midday Meal Scheme), शिक्षा का अधिकार अधिनियम (Right To Education) जैसे महत्वपूर्ण कार्य किये गए। 

प्राथमिक शिक्षा का सार्वभौमीकरण (Globalisation of Primary Education) 

सार्वभौमीकरण का अर्थ होता है "सबके लिए उपलब्ध कराना" प्राथमिक शिक्षा के सार्वभौमीकरण के अंतर्गत देश के सभी बच्चों के लिए कक्षा पहली से आठवीं तक "निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा" "Free and Compulsory Education" का प्रावधान करने का उद्देश्य रखा गया है। इसमें इस बात पर जोर दिया गया कि दिया गया कि इस अनिवार्य शिक्षा के लिए स्कूल बच्चों के घर के पास हो तथा 14 वर्ष तक के बच्चे किसी भी हालत में स्कूल ना छोड़े।

इसके लिए ऑपरेशन ब्लैक बोर्ड, मध्यान भोजन स्कीम, पोषाहार सहायता केंद्र, जिला प्राथमिक शिक्षा कार्यक्रम, सर्व शिक्षा अभियान, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, प्राथमिक शिक्षा कोष  आदि प्राथमिक शिक्षा के सार्वभौमीकरण से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण कार्यक्रम हैं। 

सर्व शिक्षा अभियान (Sarva Shiksha Adhiyaan) 

प्राथमिक शिक्षा के सार्वभौमीकरण से संबंधित यह एक प्रमुख कार्यक्रम है। इसे "सभी के लिए शिक्षा" "Education For All" अभियान के नाम से भी जाना जाता है। इस अभियान के अंतर्गत "सब पढ़े सब बढ़े " का नारा दिया गया है। सर्व शिक्षा अभियान भारत सरकार द्वारा  सन् 2000- 01 में प्रारंभ किया गया था। 

सर्व शिक्षा अभियान के द्वारा उन बस्तियों में भी नए स्कूल बनाने का प्रयास किया  गया जहां बुनियादी स्कूलों की सुविधा उपलब्ध नहीं थी। इसके अंतर्गत अतिरिक्त कक्षा, पीने का पानी, शौचालय का रखरखाव, स्कूल सुधार तथा अनुदान के माध्यम से वर्तमान स्कूलों के बुनियादी ढांचे में सुधार करना है। इस अभियान में कंप्यूटर शिक्षा पर भी बल दिया गया इसके अंतर्गत डिजिटल अंतर को समाप्त करने का प्रयास किया गया। बच्चों की उपस्थिति को सुनिश्चित करने के लिए इसी के अंतर्गत मध्यान भोजन जैसी योजना भी शुरू की गई। 

मध्यान्ह भोजन योजना (Mid Day Meal Scheme) -

इस योजना की शुरुआत सर्वप्रथम भारत के तमिलनाडु से प्रारंभ हुई। इसका उद्देश्य सर्व शिक्षा अभियान को सफल बनाना अभियान को सफल बनाना था। प्राथमिक कक्षा में नामांकन वृद्धि  हो तथा स्कूल छोड़ने की प्रवृत्ति में कमी हो। इसी को ध्यान में रखकर यह स्कीम शुरू की गई।

इस योजना के अंतर्गत पहली से पांचवी कक्षा तक देश के राजकीय अनुदान प्राप्त प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने वाले सभी बच्चे जो कि 80% उपस्थिति हों, उन्हें प्रतिमाह 3 किलोग्राम गेहूं व चावल दिए जाने की व्यवस्था की गई थी किंतु इस योजना के अंतर्गत छात्रों को दिए जाने वाले खाद्यान्न का पूर्ण लाभ छात्र को ना प्राप्त होकर उसके परिवार को मिल जाता था।

इसलिए 1 सितंबर 2004 से प्राथमिक विद्यालय में पके पकाए भोजन उपलब्ध कराने की योजना आरंभ कर दी गई। इस योजना के अंतर्गत विद्यालयों में मध्य अवकाश में छात्र -छात्राओं को सप्ताह में 4 दिन चावल से बने पदार्थ तथा 2 दिन गेहूं से बने भोज्य पदार्थ दिए जाने की व्यवस्था की गई। प्रत्येक छात्र -छात्रा को प्रतिदिन 100 ग्राम खाद्यान्न से निर्मित सामग्री दिए जाने का प्रावधान था, जिसे पकाने के लिए परिवर्तन लागत की व्यवस्था भी की गई। 

इसके बाद पौष्टिकता सुनिश्चित करने के लिए यह तय किया गया कि भोजन कम से कम 450 कैलोरी और 12 ग्राम प्रोटीन वाला हो। भोजन पकाने का कार्य ग्राम पंचायतों की देखरेख में किया जाता है और यह भोजन वर्ष में कम से कम 200 दिनों तक उपलब्ध कराया जाएगा। मध्य प्रदेश प्राथमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा के इंपोर्टेंट नोट्स के लिए कृपया mp tet varg 3 notes in hindi पर क्लिक करें.

मुझे तो बुलाकर सरकारी नौकरी का आश्वासन दिया था, 4 साल हो गए: रूपराम पेठारी- MP NEWS

Posted: 21 Jan 2022 12:09 PM PST

भोपाल
। श्री रूपराम पेठारी ने अपनी आपबीती ईमेल करके बताया कि समाधान आनलाइन कार्यक्रम के तहत मुझे सपरिवार बुलाकर सरकारी नौकरी का आश्वास दिया था। 4 साल हो गए, अब तक नौकरी नहीं मिली है। 

मध्य प्रदेश भोज विश्वविद्यालय ने 6 साल तक मार्कशीट में संशोधन नहीं किया

दरअसल देवास जिले के पीपलकोटा गांव के निवासी रूपराम पिता शिवलाल पेठारी ने बताया कि उन्होंने भोज विश्वविद्यालय भोपाल से मास्टर ऑफ सोशल वर्क की डिग्री हासिल की है। वर्ष 2012 में इसी डिग्री पाठ्यक्रम के प्रथम वर्ष की अंकसूची में उन्हे एक पेपर में उपस्थित रहने के बावजूद विश्वविद्यालय ने अनुपस्थित बताकर फेल कर दिया था। इसी अंकसूची में संशोधन के लिए रूपराम ने वर्ष 2012 से 2018 तक विश्वविद्यालय प्रबंधन से लगाकर सीएम हाउस, राज्यपाल कार्यालय, मानवाधिकार आयोग, प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रपति कार्यालय, उच्च शिक्षा मंत्री इत्यादि तमाम सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाए, लेकिन न्याय नहीं मिला। 

मुख्यमंत्री ने मिलने बुलाया, तब जाकर मार्कशीट में संशोधन हुआ

अंततः लाखों कोशिशों के बाद रूपराम का प्रकरण सीएम के समाधान कार्यक्रम में पहुंच गया। रुपराम ने बताया कि सीएम के समक्ष में अपनी समस्या रखने के लिए परिवार सहित देवास जिला कलेक्टर के माध्यम से उन्हे मंत्रालय वल्लभ भवन भोपाल में बुलवाया गया। अपने परिवार के साथ पहुंचे रूपराम से जब सीएम ने अपनी परेशानी बताने को कहा तो उसने सीएम को अपनी 6 साल से दर-दर भटकने की कहानी बताकर अंकसूची में जल्दी संशोधन कराने का निवेदन किया। 

रूपराम ने बताया कि उन्होंने सीएम से मांग की थी कि उसके मामले में 6 साल बाद अब वास्तविक न्याय किया जाना चाहिए और उसके चौपट हुए करियर के लिए सरकार को संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण वाला उसके हित में उदारवादी निर्णय लेना चाहिए और उसकी सारी योग्यताओं और 10 वर्ष एनजीओ के कार्यानुभवों के आधार पर उसको आवेदन किए गए डीपीएम के पद पर राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की संविदा भर्ती में सीधे नियुक्ति दी जानी चाहिए। 

रुपराम ने दावा किया है कि मुलाकात के समय सीएम ने माना था कि इस मामले में उनका का भविष्य, उच्च शिक्षा और करियर लम्बे समय तक बाधित रहा है। साथ ही सरकारी नौकरी के अवसरों की भारी क्षति हुई है। इसलिए उसके बर्बाद हुए करियर को संवारने की जिम्मेदारी भी सरकार की है। इसलिए सीएम ने कहा कि रूपराम के लिए सरकार संवेदनशील और उदारवादी दृष्टिकोण अपनाकर केवल उसके लिए भर्ती नियमों में शिथिलता करके सारी योग्यताओं और अनुभवों के अनुरूप रूपराम को सीधे शासकीय नियुक्ति देगी। 

उक्त आश्वासन के साथ ही जल्द संशोधित अंकसूची देने ओर दोषी अधिकारियों पर कठोर कार्यवाही के निर्देश भी दिये गये थे। रूपराम को 6 साल बाद संशोधित अंकसूची तो दे दी गई थी, परंतु शासकीय नियुक्ति सीएम के आश्वासन के 4 साल बाद भी आज दिनांक तक नहीं दी गई है। मध्य प्रदेश की महत्वपूर्ण खबरों के लिए कृपया mp news पर क्लिक करें

रिटायर्ड कर्मचारी से ब्याज वसूली अनुचित: हाईकोर्ट- MP karmchari news

Posted: 21 Jan 2022 11:55 AM PST

जबलपुर
। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने रिटायर्ड कर्मचारी की ग्रेच्‍युटी से ब्याज की वसूली को अनुचित मानते हुए विभाग को आदेश किया है कि वसूला गया ब्याज, पेंशनर को वापस लौटाया जाए। 

उदयपुरा जिला रायसेन निवासी पूर्व सहायक उपनिरीक्षक चंद्रशेखर बिरथरिया दिनांक 30/11/20 को म.प्र. पुलिस विभाग से पुलिस थाना गाडरवारा जिला नरसिंहपुर से सेवानिवृत्‍त हुए थे। जिन्‍हे सन् 1986 मे आरक्षक के रूप मे जिला रायसेन मे पदस्‍थापना मिली थी। विभागीय त्रुटि के कारण इनको अधिक वेतन भुगतान कर दिया गया था जिसकी वसूली इनकी सेवानिवृत्ति उपरांत इनकी ग्रेच्‍युटी राशि मे से की गई। 

जिसके फलस्‍वरूप इनसे विभाग द्वारा 659754 रूपये की वसूली की गई थी। जिसमे 231706 रूपये मूलधन एवं 428048 रूपये ब्‍याज स्‍वरूप वसूल किया गया था। जिसके उपरांत इन्‍होने माननीय उच्‍च न्‍यायालय जबलपुर मे शरण ली थी। जिसमें इनकी याचिका क्रमांक डब्‍ल्‍यूपी 1220/2022 पर सुनवाई करते हुए दिनांक 18/1/22 को माननीय न्‍यायाधीश विवेक अग्रवाल जी द्वारा सेवानिवृत्ति उपरांत वसूली गई ब्‍याज राशि को अनुचित माना गया।

अपने आदेश मे उन्‍होने याचिका कर्ता को ब्‍याज राशि का भुगतान करने का आदेश विभाग को दिया है याचिका कर्ता का पक्ष अधिवक्‍ता शक्ति कुमार सोनी जी द्वारा रखा गया। मध्यप्रदेश कर्मचारियों से संबंधित महत्वपूर्ण खबरों के लिए कृपया MP karmchari news पर क्लिक करें.

कमलनाथ और शिवराज की चुपके-चुपके मुलाकात वायरल - MP NEWS

Posted: 21 Jan 2022 08:51 PM PST

मध्य प्रदेश में चुनाव नहीं है लेकिन राजनीतिकरण सुर्ख होने लगा है। एक तरफ कांग्रेस के नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को मुख्यमंत्री से मिलने के लिए धरना देना पड़ रहा है और दूसरी तरफ कमलनाथ और शिवराज सिंह चौहान का चुपके-चुपके मुलाकात वाला वीडियो वायरल हो गया है। 

कितनी चतुराई से मिले दो दोस्त: बात भी बन जाए और बातें भी ना बनें

मध्य प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद कमलनाथ अक्सर बिना वजह सीएम शिवराज सिंह चौहान से मिलने चले जाते थे। इसे लेकर जब सवाल उठने लगे तो दोनों की ऑफिशियल मुलाकात बंद हो गई। मिलने का नया तरीका निकाला गया। कमलनाथ छिंदवाड़ा से हवाई यात्रा करके भोपाल पहुंचे। और शिवराज सिंह चौहान भोपाल से देवास जाने के लिए स्टेट हैंगर पर पहुंचे। 

सिर्फ एक सवाल: कमलनाथ की जेब में क्या था

यहां दोनों नेताओं के बीच एकांत में लगभग 20 मिनट तक बातचीत हुई। 33 सेकंड वीडियो वायरल हुआ है। दोनों नेताओं की बॉडी लैंग्वेज बता रही है कि यह कोई औपचारिक मुलाकात नहीं है। शायद दोनों ने तय किया था, आप वहां से आना मैं यहां से निकलूंगा और स्टेट हैंगर पर दोनों मिल जाएंगे। कमलनाथ अपनी जेब में हाथ डाले हुए हैं और कुछ निकालने वाले हैं। वायरल वीडियो में इससे ज्यादा दिखाया नहीं गया। 
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सवाल पर भड़क उठे कमलनाथ 

यह मुलाकात निश्चित रूप से गोपनीय थी। यदि गोपनीयता भंग होती है तो इसे लेकर जवाब भी तैयार था। वीडियो वायरल हुआ और सवाल उठा। पत्रकारों ने जब कमलनाथ से सवाल किया तो सबसे पहले कमलनाथ ने वही बोला जो सोचकर आए थे, लेकिन जब सवाल दोबारा पूछा गया तो अपना नियंत्रण खो बैठे। भड़क उठे और चले गए।

SC-ST के सदस्यों को सार्वजनिक बैठक वाले स्थान पर जाने से रोकना कितना गंभीर अपराध, जानिए- SC-ST Act, 1989

Posted: 21 Jan 2022 12:26 PM PST

लोक समागम वह स्थान होता है जहाँ पर सभी वर्ग के लोग अर्थात सार्वजनिक बैठक होती है या सार्वजनिक स्थान या रास्ता जहाँ से सभी व्यक्ति को जाने का अधिक प्राप्त होता है। अगर कोई व्यक्ति किसी रूढ़िप्रथा के अनुसार विशेष वर्ग के व्यक्ति को इस्तेमाल करने से रोकेगा वह कितना गंभीर अपराध होगा जानिए।

अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा  3(1)(म) की परिभाषा:-

कोई व्यक्ति या वर्ग जो अनुसूचित जाति एवं जनजाति का सदस्य नहीं है वह- " उक्त वर्ग के व्यक्ति को सार्वजनिक बैठक वाले स्थान पर बैठने से मना करेगा या सार्वजनिक स्थान वाले रास्ते से किसी रूढ़ि प्रथा अर्थात छुआ-छूत, किसी वर्ग के निकलने से कोई रास्ता अपवित्र हो जाए ऐसी प्रथा से स्थान, रास्ते, बैठक आदि में जाने से रोकेगा या ऐसे स्थान को प्रयोग नहीं करने देगा या उपयोग करने पर बाधा पहुचाएगा वह उपर्युक्त धारा के अंतर्गत दोषी होगा।

अनुसूचित जाति एवं जनजाति अधिनियम, 1989 की धारा 3(1)(म) के अंतर्गत दण्ड़ का प्रावधान:- 

इस धारा के अपराध संज्ञेय एवं अजमानतीय  होते हैं। इनकी सुनवाई का अधिकार क्षेत्र जिला विशेष न्यायालय करता है। सजा - इस धारा के अपराध के लिए अधिकतम पाँच वर्ष की सजा एवं जुर्माना से दण्डित किया जा सकता है।

पीड़ित व्यक्ति को शासन द्वारा राहत सहायता राशि:-

अनुसूचित जाति और जनजाति(अत्याचार निवारण) नियम,1995 नियम 12(4) के अनुसार इस अपराध के अंतर्गत पीड़ित व्यक्ति को राज्य सरकार या संघ राज्यक्षेत्र प्रशासन द्वारा चार लाख पच्चीस हजार रुपए आर्थिक सहायता(संदाय) दी जाती है एवं गुजरने के अधिकार के लिए प्रत्यावर्तन का खर्च दिया जायेगा। यह राशि जिला कलेक्टर  या जिला संयोजक अनुसूचित जाति एवं जनजाति कार्यालय द्वारा स्वीकृत होगी है।  :- लेखक बी. आर. अहिरवार (पत्रकार एवं लॉ छात्र होशंगाबाद) 9827737665 | (Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article) इसी प्रकार की कानूनी जानकारियां पढ़िए, यदि आपके पास भी हैं कोई मजेदार एवं आमजनों के लिए उपयोगी जानकारी तो कृपया हमें ईमेल करें। editorbhopalsamachar@gmail.com

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