प्राइमरी का मास्टर ● इन |
- विद्यांजलि योजना को अब उच्च शिक्षण संस्थानों में भी लागू करने की तैयारी
- प्रबंध समितियां अब नहीं कर सकेंगी मदरसा शिक्षकों का उत्पीड़न, शासन ने अब प्रशासन योजना को मदरसा बोर्ड से अनुमोदित कराना किया अनिवार्य, आदेश जारी
- CTET : केन्द्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा की निरस्त हुई परीक्षा की नई तिथि घोषित, देखें जारी नोटिस
- मऊ : कस्तूरबा विद्यालयों में रिक्त पदों को भरने हेतु विज्ञप्ति जारी।
- 69000 शिक्षक भर्ती : नहीं हुआ जिला आवंटन, 6000 अभ्यर्थी कर रहे हैं इंतजार
- यूपी बोर्ड : 8266 केंद्रों पर होगी यूपी बोर्ड 2022 की परीक्षा
- केरल के इस स्कूल में ‘सर’ और ‘मैडम’ कहने पर लगी रोक, जानिए क्या है वजह?
- नेताओं की चुनावी परीक्षा के कारण बढ़ा यूपी बोर्ड की परीक्षाओं का इंतजार, मार्च अंत अथवा अप्रैल प्रथम सप्ताह में परीक्षा शुरू होने की उम्मीद
- CBSE टर्म वन की परीक्षा के नतीजे जनवरी में, टर्म टू की परीक्षा स्थगित करने की मांग लगी उठने
- साढ़े चार साल में भी नहीं बन पाया उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, गठन की कवायद रही फेल
- निर्वाचन आयोग के दबाव के बाद बीईओ के बंपर तबादलों पर BEO संघ खफा, तबादलों को रद्द करने की मांग।
| विद्यांजलि योजना को अब उच्च शिक्षण संस्थानों में भी लागू करने की तैयारी Posted: 10 Jan 2022 06:14 PM PST विद्यांजलि योजना को अब उच्च शिक्षण संस्थानों में भी लागू करने की तैयारी उच्च शिक्षण संस्थानों में स्वैच्छिक रूप से पढ़ाने के इच्छुक पात्रों को पहले पंजीकरण करना होगा। उन्हें यह भी बताना होगा कि उनकी रुचि ऐसे किस विषय में है जो छात्रों के लिए उपयोगी होगा। पंजीकरण कराने वालों को संस्थान जरूरत के अनुरूप आमंत्रित करेंगे। नई दिल्ली। स्कूलों की जरूरतों की पूर्ति व उनसे लोगों का जुड़ाव बढ़ाने के लिए शुरू की गई विद्यांजलि योजना को अब उच्च शिक्षण संस्थानों में भी लागू करने की तैयारी है। शिक्षा मंत्रालय की इस योजना के तहत सेवानिवृत्त या सेवारत प्रोफेसर, अधिकारी, पेशेवर व पीएचडी या स्नातकोत्तर डिग्रीधारी आसपास के उच्च शिक्षण संस्थानों में स्वैच्छिक रूप से पढ़ा सकेंगे। कौशल विशेषज्ञों को भी अपना हुनर बांटने का मौका मिलेगा। उच्च शिक्षण संस्थानों में स्वैच्छिक रूप से पढ़ाने के इच्छुक पात्रों को पहले पंजीकरण करना होगा। उन्हें यह भी बताना होगा कि उनकी रुचि ऐसे किस विषय में है जो छात्रों के लिए उपयोगी होगा। पंजीकरण कराने वालों को संस्थान जरूरत के अनुरूप आमंत्रित करेंगे। इस योजना के पीछे हैं मंत्रालय के ये दो उद्देश्य विद्यांजलि योजना की वेबसाइट पर संस्थानों के बुनियादी ढांचे और पठन-पाठन की जरूरतों को भी प्रदर्शित किया जाएगा। इसके अनुरूप कोई भी व्यक्ति या संस्था उच्च शिक्षण संस्थानों की मदद कर सकेगा। योजना के पीछे मंत्रालय के दो उद्देश्य हैं। पहला, संस्थानों की जरूरत की पूर्ति हो जाएगी और दूसरा, लोगों का संस्थानों के प्रति जुड़ाव बढ़ेगा। गौरतलब है कि फिलहाल उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों की कमी है। विशेषज्ञ या कौशल से जुड़े शिक्षकों का तो घोर अभाव है। सरकार का मानना है कि यह योजना शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों और विशेषज्ञों की कमी को दूर करेगी, जिससे छात्रा लाभान्वित होंगे। फिलहाल, देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में चार करोड़ से ज्यादा छात्र अध्ययन कर रहे हैं। योजना से जुड़ चुके हैं एक लाख से ज्यादा स्कूल विद्यांजलि योजना से अबतक एक लाख से ज्यादा स्कूल जुड़ चुके हैं। ज्यादातर स्कूल दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों में मौजूद हैं और वहां बुनियादी ढांचे का भी अभाव है। स्कूलों में पढ़ाने के लिए 13 हजार से ज्यादा लोग पंजीकरण करा चुके हैं, जिनमें बड़ी संख्या में लोगों की सेवाएं ली जा रही हैं। 15 हजार से ज्यादा स्कूलों ने डिजिटल या आनलाइन पढ़ाई के लिए संसाधानों की मांग की थी। रिपोर्ट के मुताबिक, इन स्कूलों के 11 हजार से ज्यादा छात्रों को डिजिटल पठन-पाठन के संसाधन मुहैया करा दिए गए हैं। इनमें मोबाइल व प्रोजेक्टर आदि शामिल हैं। |
| Posted: 10 Jan 2022 06:08 PM PST प्रबंध समितियां अब नहीं कर सकेंगी मदरसा शिक्षकों का उत्पीड़न, शासन ने अब प्रशासन योजना को मदरसा बोर्ड से अनुमोदित कराना किया अनिवार्य, आदेश जारी ★ सेवा नियमावली में कार्रवाई के खिलाफ अपील की व्यवस्था न होने का फायदा उठाता था प्रबंधन ★ शासन ने अब प्रशासन योजना को मदरसा बोर्ड से अनुमोदित कराना किया अनिवार्य, आदेश जारी लखनऊ : मदरसा सेवा नियमावली की खामियों की आड़ में मदरसा प्रबंधन अब शिक्षकों व शिक्षणेतर कर्मचारियों का उत्पीड़न नहीं कर सकेंगे। इसके लिए शासन ने प्रशासन योजना संबंधी प्रावधानों को कड़ाई से लागू करने का आदेश दिया है। अब मदरसा प्रबंधन को कर्मचारियों के निलंबन और बर्खास्तगी से पहले मदरसा बोर्ड से प्रशासन योजना को अनुमोदित कराना अनिवार्य होगा। प्रदेश में मदरसा शिक्षा परिषद से मान्यता प्राप्त करीब 16460 मदरसे हैं। इनमें 558 मदरसे सरकार से सहायता प्राप्त हैं। से 9 से अनुदानित मदरसों में 9 हजार से ज्यादा शिक्षक हैं। लेकिन इन मदरसों के लिए बनी नियमावली 2016 ही शिक्षकों व कर्मियों के उत्पीड़न का कारण बन गई थी। इसमें दंड के खिलाफ अपील की कोई व्यवस्था न होने से प्रबंध समितियां मनमाने ढंग से निलंबन, वेतन वृद्धि रोकना अनिवार्य सेवानिवृत्ति जैसी कार्रवाई कर शोषण करती थीं। इस मुद्दे को अमर उजाला ने बीती 29 सितंबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके बाद शासन ने सेवा नियमावली में उल्लिखित प्रशासन योजना संबंधी प्रावधानों को कड़ाई से लागू कराने का शासनादेश जारी किया है। विशेष सचिव जेपी से के प्रभावी सिंह की ओर से जारी इस आदेश होने से शिक्षकों व कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई, निलंबन व बर्खास्तगी व जैसी प्रबंधन की मनमर्जी रुकेगी। |
| CTET : केन्द्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा की निरस्त हुई परीक्षा की नई तिथि घोषित, देखें जारी नोटिस Posted: 10 Jan 2022 05:28 PM PST
CTET: इन तिथियों को होगी सीटीईटी की स्थगित परीक्षा, बेवसाइट पर दी गई पूरी जानकारी केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की ओर से आयोजित सीटीईटी (केन्द्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा) के 16 दिसंबर को दूसरी पाली व 17 दिसंबर को दोनों पालियों की निरस्त परीक्षा की तिथियां घोषित हो चुकी है।अब यह परीक्षाएं क्रमश: 17 व 21 जनवरी को आयोजित होगी। बोर्ड ने इसकी सूचना अपने वेबसाईट पर अपलोड कर दी है। इस बार यह परीक्षा आन-लाइन हो रही है। सर्वर डाउन होने के कारण निरस्त हुई थी परीक्षा परीक्षा 16 दिसंबर से शुरू हुई थी। पहले दिन पहली की परीक्षा सकुशल संपन्न हो गई, लेकिन दूसरी पाली की परीक्षा के दौरान सर्वर डाउन हो गया था। इस कारण 16 और 17 दिसंबर की परीक्षा निरस्त कर दी गई थी। |
| मऊ : कस्तूरबा विद्यालयों में रिक्त पदों को भरने हेतु विज्ञप्ति जारी। Posted: 10 Jan 2022 05:15 PM PST |
| 69000 शिक्षक भर्ती : नहीं हुआ जिला आवंटन, 6000 अभ्यर्थी कर रहे हैं इंतजार Posted: 10 Jan 2022 05:12 PM PST 69000 शिक्षक भर्ती : नहीं हुआ जिला आवंटन, 6000 अभ्यर्थी कर रहे हैं इंतजार ● ओबीसी वर्ग के 6000 अभ्यर्थी कर रहे हैं इंतजार ● चयन सूची 5 जनवरी को जारी कर दी गई थी 69 हजार शिक्षक भर्ती में ओबीसी वर्ग के 6000 अभ्यर्थियों की मेरिट सूची तो जारी कर दी गई लेकिन पांच दिन बीत जाने के बाद भी जिला आवंटन जारी नहीं हो पाया है। एनआईसी जिला आवंटन की सूची को अंतिम रूप नहीं दे पाया है। चयन सूची पांच जनवरी को जारी हुई थी। जिला आवंटन के बाद काउंसिलिंग होगी और इसके बाद ही नियुक्ति पत्र जारी होंगे। दरअसल, एनआईसी ऐसा फार्मूला तैयार कर रहा है ताकि किसी भी अभ्यर्थी के साथ अन्याय न होने पाए। शिक्षक भर्ती के तहत नियुक्त कई ऐसे शिक्षक हैं, जिन्हें मेरिट के चलते अपनी पसंद के जिले में नियुक्ति नहीं मिल पाई। अब देखा जा रहा है कि 6000 भर्ती में नियुक्ति होने वाले अभ्यर्थियों को मेरिट के मुताबिक ही जिला आवंटन हो और इससे पहले दो चरणों में नियुक्त हुए शिक्षकों के साथ अन्याय न हो। कई शिक्षक भर्तियों में ऐसा हो चुका है कि कई चरणों में भर्ती होने के कारण ज्यादा मेरिट वाले शिक्षकों को उनके मनमाफिक जिले नहीं मिलते। मसलन, 68500 शिक्षक भर्ती के पहले चरण 45 हजार शिक्षक चयनित हुए तो उन्हें प्रदेश में एक समान नियुक्त करने के लिए सभी जिलों की सीटों का कटऑफ 45 हजार के मुताबिक निकला लेकिन बाद में जो शिक्षक चयनित होकर आए उन्हें अपने मन के जिलों में नियुक्ति मिल गई। |
| यूपी बोर्ड : 8266 केंद्रों पर होगी यूपी बोर्ड 2022 की परीक्षा Posted: 10 Jan 2022 04:21 PM PST यूपी बोर्ड : 8266 केंद्रों पर होगी यूपी बोर्ड 2022 की परीक्षा जिला समिति की ओर से सूबे में 8266 केंद्रों पर परीक्षा के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। हालांकि परिषद अभी इन प्रस्तावित केंद्रों पर 15 जनवरी तक आपत्तियां लेगा। आपत्तियों के निस्तारण के बाद 24 जनवरी को अंतिम सूची जारी होगी। माध्यमिक शिक्षा परिषद यूपी बोर्ड 2022 की परीक्षा के लिए केंद्रों के निर्धारण की प्रक्रिया चल रही है। सोमवार को माध्यमिक शिक्षा परिषद ने जिला समिति की ओर से प्रस्तावित केंद्रों की सूची वेबसाइट पर अपलोड कर दी है। जिला समिति की ओर से सूबे में 8266 केंद्रों पर परीक्षा के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। हालांकि परिषद अभी इन प्रस्तावित केंद्रों पर 15 जनवरी तक आपत्तियां लेगा। आपत्तियों के निस्तारण के बाद 24 जनवरी को अंतिम सूची जारी होगी। जनपदीय समिति की ओर से प्रस्तावित केंद्रों की सूची परिषद ने सोमवार को वेबसाइट पर अपलोड कर दी है। अब इन प्रस्तावित 8266 केंद्रों को लेकर छात्र, अभिभावक, प्रधानाचार्य और प्रबंधक को कोई आपत्ति हैं तो वह जिला विद्यालय निरीक्षक से प्रतिहस्ताक्षरित कराकर परिषद की ईमेल आईडी पर 15 जनवरी तक भेज सकते हैं। इन आपत्तियों का निस्तारण परिषद की केंद्र निर्धारण समिति करेगी। आपत्तियों के निस्तारण के बाद माध्यमिक शिक्षा परिषद केंद्रों की सूची को अंतिम रूप से 24 जनवरी ऑनलाइन कर देगा। |
| केरल के इस स्कूल में ‘सर’ और ‘मैडम’ कहने पर लगी रोक, जानिए क्या है वजह? Posted: 10 Jan 2022 04:38 AM PST केरल के इस स्कूल में 'सर' और 'मैडम' कहने पर लगी रोक, जानिए क्या है वजह? नई पहल : इस स्कूल में शिक्षक को सर या मैडम नहीं बुलाएंगे छात्र, समानता को बढ़ावा देने के लिए उठाया कदम स्कूल के कर्मचारियों ने बताया कि उन्होंने इस पहल की प्रेरणा पलक्कड़ जिले के सामाजिक कार्यकर्ता बोबन मट्टुमंथा से ली है। उन्होंने सरकारी अधिकारियों को सर कहने के विरोध में अभियान चलाया था। केरल के पलक्कड़ जिले में एक स्कूल ने समानता को बढ़ावा देने के लिए नई पहल की है। यहां अब शिक्षकों (महिला/पुरुष) को सर या मैडम के बजाय केवल शिक्षक या टीचर से संबोधित किया जाएगा। ओलास्सेरी गांव के सरकार द्वारा वित्त पोषित स्कूल ने अपने छात्रों के लिए यह आदेश जारी किया है। ऐसा करने वाला यह अपने आप में पहला स्कूल है। स्कूल में छात्रों की कुल संख्या 300 है। यहां 9 महिला और 8 पुरुष शिक्षक हैं। इससे पहले राज्य में कई स्कूलों ने समान यूनिफॉर्म को भी लागू किया था। सामाजिक कार्यकर्ता से ली प्रेरणा स्कूल के कर्मचारियों ने बताया कि उन्होंने इस पहल की प्रेरणा पलक्कड़ जिले के सामाजिक कार्यकर्ता बोबन मट्टुमंथा से ली है। उन्होंने सरकारी अधिकारियों को सर कहने के विरोध में अभियान चलाया था। उन्होने स्कूलों मे भी इस बदलाव की बात कही है। उनका मानना है कि शिक्षक को उनके पद से जाना चाहिए, न कि उनके जेंडर से। छात्र इस कदम से समानता को लेकर जागरूक होंगे। कर्मचारियों ने बताया कि इससे पहले पास के ही एक गांव की पंचायत में ऐसा नियम लागू किया गया था। वहां भी सर या मैडम के बजाय अधिकारियों को उनके पद के नाम से संबोधित करने के आदेश जारी किए गए थे। इस पहल ने स्कूल को भी समानता बढ़ाने के लिए ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित किया। छात्रों के परिजनों ने भी स्कूल के इस फैसले का स्वागत किया है। 1 दिसंबर से फैसला हुआ था लागू स्कूल ने 1 दिसंबर 2021 से ही अपने छात्रों को यह निर्देश जारी कर दिए थे कि सभी महिला और पुरुष शिक्षकों को केवल शिक्षक (टीचर) से संबोधित किया जाए। कुछ कोशिशों के बाद छात्रों मे बदलाव आया और अब सभी छात्र केवल शिक्षक शब्द का ही प्रयोग करते हैं। |
| Posted: 09 Jan 2022 06:33 PM PST नेताओं की चुनावी परीक्षा के कारण बढ़ा यूपी बोर्ड की परीक्षाओं का इंतजार, मार्च अंत अथवा अप्रैल प्रथम सप्ताह में परीक्षा शुरू होने की उम्मीद प्रयागराज : सूबे में विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होते ही राजनीति दलों की सक्रियता बढ़ गई है। चुनाव के चलते उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) की 10वीं व 12वीं की परीक्षा का इंतजार बढ़ गया है। चुनाव का परिणाम 10 मार्च को आएगा। इसके बाद यूपी बोर्ड की परीक्षा का काम जोर पड़ेगा। इधर, यूपी बोर्ड ने परीक्षा केंद्रों की अनंतिम सूची जारी कर दिया है। यूपी बोर्ड की वेबसाइट पर रविवार को 40 जिलों की सूची अपलोड कर दी गई है। सोमवार को बचे 35 जिलों की सूची अपलोड होगी। आपत्तियों का निस्तारण करके केंद्रों की नई सूची फरवरी के अंत तक जारी की जा सकती है। इसके अलावा अन्य प्रक्रिया पूरी करके मार्च के अंत अथवा अप्रैल के प्रथम सप्ताह में परीक्षा शुरू होने की उम्मीद है। यूपी बोर्ड फरवरी महीने में परीक्षा शुरू करवाकर मार्च के मध्य तक उसे पूरा कर लेता है, लेकिन जिस वर्ष लोकसभा अथवा विधानसभा चुनाव होता है, उसके चलते परीक्षा कार्यक्रम में व्यापक बदलाव करना पड़ता है। शिक्षकों के चुनाव ड्यूटी में लगना व परीक्षार्थियों की संख्या अधिक होना है। यूपी बोर्ड परीक्षा में हर बार 50 लाख से अधिक परीक्षार्थी शामिल होते हैं। वर्ष 2022 के लिए 51,74,583 का पंजीकरण हुआ है। |
| CBSE टर्म वन की परीक्षा के नतीजे जनवरी में, टर्म टू की परीक्षा स्थगित करने की मांग लगी उठने Posted: 09 Jan 2022 06:22 PM PST CBSE टर्म वन की परीक्षा के नतीजे जनवरी में, टर्म टू की परीक्षा स्थगित करने की मांग लगी उठने नई दिल्ली, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा कक्षा 10 और कक्षा 12 की वर्ष 2021-22 की बोर्ड परीक्षाओं के अंतर्गत नवंबर-दिसंबर 2021 के दौरान विभिन्न तारीखों पर आयोजित की गयी पहले चरण यानि टर्म 1 परीक्षाओं के नतीजों पर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। बोर्ड के अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार सीबीएसई टर्म 1 रिजल्ट 2021-22 की घोषणा जनवरी 2022 के आखिरी सप्ताह के दौरान की जा सकती है। सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक ने जानकारी साझा करते हुए कहा, "जहां तक टर्म 1 की परीक्षा में छात्रों के प्रदर्शन की बात है उसे जनवरी के आखिरी सप्ताह तक छात्रों का बताया जाएगा।" बता दें कि सीबीएसई द्वारा टर्म 1 परीक्षाओं के लिए डेटशीट जारी होने के साथ ही कहा गया था कि परीक्षाओं के आयोजन के बाद जल्द ही नतीजों की घोषणा कर दी जाएगी। हालांकि, बोर्ड द्वारा परीक्षा कार्यक्रम के बीच में ही मूल्यांकन नीति में बदलाव के चलते 7 विषयों (मेजर और माइनर) के मूल्यांकन स्कूल के बाहर से कराए जाने कारण नतीजों की घोषणा में देरी हुई है। टर्म 2 परीक्षाओं को स्थगित करने की उठने लगी है मांग दूसरी तरफ, देश भर में कोरोना वायरस (कोविड-1) के नए वैरिएंट ओमिक्रोन के देश भर के विभिन्न हिस्सों में तेजी से बढ़ते मामलों और उनकी रोकथाम के लिए कई हिस्सों में लगाए जा रहे साप्ताहित कर्फ्यू के मद्देनजर स्टूडेंट्स और पैरेंट्स द्वारा टर्म 2 परीक्षाओं को स्थगित किए जाने की मांग की जाने लगी है। इन स्टूडेंट्स द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से टर्म 2 परीक्षाओं के स्थगित करने या रद्द करने या ऑनलाइन मोड में आयोजन किए जाने की गुहार सीबीएसई बोर्ड, शिक्षा मंत्रालय, शिक्षा मंत्री, आदि से लगाई जा रही है। बता दें कि इग्नू के दिसंबर 2021 टर्म-ईंड-एग्जाम, किशोर वैज्ञानिक प्रोत्साहन योजना (केवीपीवाई) 2021 की परीक्षा, गेट 2022 परीक्षा का एडमिट कार्ड जारी होने का कार्यक्रम, आदि पहले ही स्थगित किया जा चुका है। |
| साढ़े चार साल में भी नहीं बन पाया उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, गठन की कवायद रही फेल Posted: 09 Jan 2022 06:18 PM PST साढ़े चार साल में भी नहीं बन पाया उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, गठन की कवायद रही फेल प्रयागराज : विधानसभा चुनाव की घोषणा तो हो गई लेकिन प्रदेश में परिषदीय स्कूलों से लेकर अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों तक में शिक्षकों की भर्ती के लिए उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग साढ़े चार साल की तमाम कोशिशों के बावजूद अस्तित्व में नहीं आ सका। इसी के साथ युवाओं को समय से नौकरी मिलने का सपना भी अधूरा रह गया। मार्च 2017 में सरकार बनने के बाद ही शिक्षकों की भर्तियों के लिए एक आयोग के गठन की कवायद शुरू हो गई थी। इसके लिए उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग और माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड का विलय करने का निर्णय लिया गया था। इन आयोगों के विलय के लिए पहली बैठक 19 जुलाई 2017 को लखनऊ में हुई थी। इसके बाद चयन बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष हीरालाल गुप्ता और उच्चतर के अध्यक्ष प्रभात मित्तल ने इस्तीफा दे दिया था। सदस्यों से भी इस्तीफे ले लिए गए थे। लेकिन उसके बाद नये आयोग के गठन की प्रक्रिया धीमी पड़ गई। दोनों आयोगों की भर्तियां ठप होने पर छात्रों ने दबाव बनाना शुरू कर दिया। इसके बाद सरकार ने चार फरवरी 2018 को प्रो. ईश्वर शरण विश्वकर्मा को उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग का अध्यक्ष और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी वीरेश कुमार को 8 अप्रैल 2018 को चयन बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त किया। सरकार के विश्वासपात्र लोगों को ही इन आयोगों का सदस्य बनाया गया। उसके बाद भर्ती प्रक्रिया पूर्व की तरह शुरू हो गई। फिर 10 जनवरी 2020 को उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग की सचिव वंदना त्रिपाठी, चयन बोर्ड की सचिव कीर्ति गौतम, उच्च शिक्षा के संयुक्त निदेशक राजीव पांडेय, माध्यमिक शिक्षा के संयुक्त निदेशक भगवती सिंह और बेसिक शिक्षा के संयुक्त निदेशक गणेश कुमार के हस्ताक्षर से उत्तर प्रदेश उच्च शिक्षा सेवा चयन आयोग नियमावली 2019 अधिसूचित की गई। लेकिन उसके बाद से फिर प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। इन संस्थाओं में भर्ती का मिलता अधिकार -परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में सहायक अध्यापक -सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूल और संबद्ध प्राइमरी में सहायक अध्यापक व प्रधानाध्यापक -सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय व संबद्ध प्राइमरी में सहायक अध्यापक व प्रधानाध्यापक -सहायता प्राप्त इंटर कॉलेजों में प्रवक्ता व प्रधानाचार्य -अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर और प्राचार्य -अशासकीय सहायता प्राप्त हाईस्कूल, इंटर कॉलेज व महाविद्यालयों में लिखित परीक्षा के आधार पर शिक्षणेत्तर कर्मचारियों का चयन |
| निर्वाचन आयोग के दबाव के बाद बीईओ के बंपर तबादलों पर BEO संघ खफा, तबादलों को रद्द करने की मांग। Posted: 09 Jan 2022 06:07 PM PST निर्वाचन आयोग के दबाव के बाद बीईओ के बंपर तबादलों पर BEO संघ खफा, तबादलों को रद्द करने की मांग। लखनऊ। खण्ड शिक्षा अधिकारी संघ ने आरोप लगाया है कि आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करते हुए शिक्षा निदेशालय ने नौ जनवरी को 446 खण्ड शिक्षा अधिकारियों का तबादला कर दिया। संघ के महासचिव वीरेन्द्र कनौजिया ने कहा है कि स्थानान्तरण की प्रक्रिया में भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों का उल्लंघन किया गया। निर्वाचन आयोग ने कहा था कि ऐसे अधिकारी जिनका चुनाव में तीन वर्ष से अधिक ठहराव या चुनाव को सीधे प्रभावित करते है, उनका स्थानान्तरण 31 दिसम्बर तक किया जाए, लेकिन इसका पालन नहीं किया गया। संघ ंने इस तबादले को रद्द करने की मांग की है। निर्वाचन आयोग ने 31 अक्तूबर को ही आदेश जारी किए थे कि किसी भी जिले में तीन वर्षों से अधिक समय से कार्यरत अधिकारियों का दूसरे जिले में तबादला कर दिया जाए, BEO संघ का कहना है कि बेसिक शिक्षा विभाग इस आदेश की अनदेखी करते हुए चुनाव आचार संहिता जारी होने का इंतजार करता रहा। विधानसभा चुनाव की घोषणा होते ही बेसिक शिक्षा विभाग में तैनात 400 से अधिक खंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ) के समेत शिक्षा विभाग में बड़ी संख्या में कार्यरत क्लर्कों के तबादले कर दिए गए हैं। हालांकि तबादले के तबादले के आदेश पर सात जनवरी की तारीख अंकित है, लेकिन ट्रांसफर होने वाले अधिकारियों को शनिवार देर रात तक इसकी जानकारी नहीं थी। निर्वाचन आयोग ने 31 अक्तूबर को ही आदेश जारी किए थे कि किसी भी जिले में तीन वर्षों से अधिक समय से कार्यरत अधिकारियों का दूसरे जिले में तबादला कर दिया जाए, लेकिन बेसिक शिक्षा विभाग इस आदेश की अनदेखी करते हुए चुनाव आचार संहिता जारी होने का इंतजार करता रहा। अपर निदेशक बेसिक शिक्षा ललिता प्रदीप की ओर से तबादले का आदेश जारी किए जाने के बाद अफसरों में इस बात को लेकर उहापोह की स्थिति है। |
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