दिव्य रश्मि न्यूज़ चैनल |
- धर्म एवं शिक्षा जगत के लिए समर्पित पूर्व उपसचिव बिहार विधानसभा योगी राज का निधन |
- अपरिहार्य है आपदा प्रबंधन
- ज्यादा संतन से मढ़ी उजाड़
- कवि, कलाकार व यारबाज मान
- भारत से लगे नेपाल के प्रांत दो का नाम मधेस प्रदेश किया गया
- सामने आया अफगानिस्तान का तालिबानी पीएम
- चीन में घरेलू संक्रमण कोविड-19 के 55 नए मामले आए सामने
- यूक्रेन पर कभी भी हमला कर सकता है रूस: अमेरिका
- हिन्दू जनजागृति समिति द्वारा मुजफ्फरपुर और हाजीपुर में प्रशासन को ज्ञापन !
- सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करते ही सभी तरह के शुभ कार्य फिर से आरंभ हो गए हैं
- शैव , जैन एवं बौद्ध धर्म ऋषियों का स्थल सारनाथ
- 20 जनवरी 2022, गुरूवार का दैनिक पंचांग एवं राशिफल - सभी १२ राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन ? क्या है आप की राशी में विशेष ? जाने प्रशिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. प्रेम सागर पाण्डेय से |
- सूर्य नमस्कार के प्रति दुनिया का रुझान
- योगी सरकार की ही संभावना क्यों
- प्रियंका की प्रयोगवादी राजनीति
- पश्चिमी अफगानिस्तान में भूकंप से 26 की मौत
- ताइवान के डिफेंस जोन में घुसे चीन के तीन लड़ाकू विमान
- आस्ट्रेलिया में ओमिक्रोन वैरिएंट के मामले बढ़े
- तिब्बती बौद्ध धर्म के सफाए में जुटा हुआ है चीन
- Liked on YouTube: बरहज विधानसभा क्षेत्र की समस्यायों पर लोगों के बिचार जानने हमारे संवाददाता पद्मनाभ त्रिपाठी पहुचें
- मुख्य ग्रंथी पद ही संदिध मौत का कारण
- युवा ही करेगे देश का उत्थान
- जय महाराणा प्रताप
- नई पेंशन स्कीम से आच्छादित कर्मियों ने की "वन नेशन वन पेंशन" की योजना लागू करने की मांग किया
- 19 जनवरी 2022, बुधवार का दैनिक पंचांग एवं राशिफल - सभी १२ राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन ? क्या है आप की राशी में विशेष ? जाने प्रशिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. प्रेम सागर पाण्डेय से |
| धर्म एवं शिक्षा जगत के लिए समर्पित पूर्व उपसचिव बिहार विधानसभा योगी राज का निधन | Posted: 19 Jan 2022 06:30 AM PST धर्म एवं शिक्षा जगत के लिए समर्पित पूर्व उपसचिव बिहार विधानसभा योगी राज का निधन |चाँदपुर बेला पटना के निवासी समाजसेवी, पूर्व उपसचिव बिहार विधानसभा योगी राज जी का शनिवार को निधन हो गया। उनके निधन पर मुहल्लेवालों में शोक की लहर है। उनके निधन की खबर सुनकर उनके पैत्रिक गाँव जहानाबाद एवं आसपास के लोगों में शोक है। धर्म एवं शिक्षा जगत में उन्होंने काफी योगदान दिया। उन्होंने समाज के लोगों को धर्म के प्रति हमेशा जागृत किया। वे सरल स्वभाव के धनी होने के साथ साथ मृदुभाषी भी थे। वहीं भारतीय जन क्रान्ति दल के राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व प्रत्यासी पटना साहिब डॉ राकेश दत्त मिश्र ने उसके निधन पर गहरी संवेदना जताते हुए कहा कि वे मेरे अभिभावक एवं मार्गदर्शक थे। उन्होंने अपना जीवन समाजसेवा एवं धर्म में व्यतीत कर दिया, उन्हों ने कई धर्मशालाएं और प्याऊ का निर्माण करवाया था । वहीं बार्ड १७ की पार्षद मीरा गुप्ता ने उसके निधन पर शोक जताते हुए कहा कि हमारे समाज मे शिक्षा की अलख जगाने वाले समाजिक व्यक्ति के निधन होने से अपूर्ण क्षति हुई है जिसकी भरपाई नहीं की जा सकती है। उनके पुत्र विजय कुमार ने बताया कि उनका स्वर्गवास दिनांक १५ जनवरी २०२२ (शनिवार) को हो गया था परन्तु हमारा एक भाई राँची में रहता है उसके आने में देर होने की वजह से उनका अंतिम संस्कार १६ जनवरी २०२२(रविवार) को सम्पन्न हुआ , वे अपने पीछे भरा पूरा परिवार छोड़ गये है | उनका श्राद्ध कार्यक्रम एवं ब्रह्म भोज २८ जनवरी २०२२ को हमारे निवास स्थल हंस भवन , चाँद पुर बेला, पटना में सम्पन्न होगा | हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 19 Jan 2022 05:33 AM PST अपरिहार्य है आपदा प्रबंधन(डॉ दिलीप अग्निहोत्री-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा) पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव प्रक्रिया चल रही है। इस पर कोरोना की तीसरी लहर का प्रभाव है। चुनाव आयोग ने जनसभाओं व रैलियों पर लागू प्रतिबंध को आगे बढ़ाया है। परिस्थितियों को देखते हुए यह निर्णय उचित है। डिजिटल इंडिया में आमजन तक अपनी बात पहुंचाना पहले की अपेक्षा सुगम है। चुनाव आयोग का नियम सभी राजनीतिक पार्टियों पर समान रूप से लागू है। इसलिए इसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। इस समय कोरोना की तीसरी लहर से लोगों को सुरक्षित रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रतिबन्धों व दिशा निर्देशों के अनुरूप चुनाव भी संम्पन्न हो सकते है। चुनाव आयोग इस दिशा में प्रयास कर रहा है। मतदान के समय भी विशेष दिशा निर्देश आवश्यक हो सकते है। जिससे जोखिम उठाये बिना मतदान करना सुनिश्चित हो सके। चुनाव प्रक्रिया के साथ कोरोना आपदा प्रबंधन पर ध्यान देना अपरिहार्य है। उत्तर प्रदेश सरकार इसके दृष्टिगत प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर यात्रा के दौरान इसका सन्देश दिया। वह मकर संक्रांति पर गोरक्ष धाम की विशेष पूजा में सहभागी हुए। अपने प्रवास के शेष समय उन्होंने कोरोना के दृष्टिगत स्वास्थ्य सुविधाओं का जायजा लेते रहे। अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। उन्हें दिशा निर्देश दिए। योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में बीआरडी मेडिकल कॉलेज के पांच सौ बेड के कोविड अस्पताल के कण्ट्रोल रूम,ऑक्सीजन प्लाण्ट एवं माइक्रो बायोलॉजी लैब का निरीक्षण किया। उन्होंने लखनऊ में भी केजीएमयू अस्पताल में व्यवस्था का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने कोरोना प्रबन्धन एवं नियंत्रण के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी प्राप्त की। योगी अदित्यनाथ ने कहा कि पूरी दुनिया के विशेषज्ञों के अनुसार वैक्सीन कोविड से बचाव का सर्वोत्तम उपाय है। सभी लोग कोविड टीके की दोनों डोज अवश्य लगवाएं। साठ वर्ष से अधिक उम्र के गम्भीर बीमारी से ग्रसित बुजुर्गों के लिए बूस्टर डोज तय की गई है। इसकी सुविधा हर जनपद में उपलब्ध करायी गई है। प्रदेश में कोविड वैक्सीन की बाइस करोड़ से अधिक डोज लगाई जा चुकी हैं। प्रदेश के सभी पचहत्तर जनपदों में कोविड टेस्ट और इलाज की व्यवस्था है। वर्तमान में प्रदेश की प्रतिदिन चार लाख कोविड टेस्ट करने की क्षमता है। लेवल वन, लेवल टू और लेवल थ्री के पौने दो लाख से अधिक बेड्स उपलब्ध हैं। आज प्रदेश में साढ़े पांच सौ से अधिक ऑक्सीजन प्लाण्ट मौजूद हैं। जिनके माध्यम से प्रदेश को ऑक्सीजन आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को प्राप्त करने में सफलता प्राप्त हुई है। एण्टीजेन टेस्ट की किट सभी जनपदों में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध करायी गई हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि विगत पौने दो वर्षों से देश और दुनिया कोरोना महामारी का सामना कर रही है। जनसंख्या की दृष्टि से देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में कोरोना प्रबन्धन एवं नियंत्रण सफलतापूर्वक किया गया है। प्रशासन, हेल्थ वर्कर्स तथा कोरोना वॉरियर्स ने इस सदी की सबसे बड़ी महामारी को नियंत्रित करने में बेहतरीन टीम वर्क का परिचय दिया है। लोगों के जीवन एवं जीविका को बचाया गया है। कोरोना की फस्र्ट वेव तथा सेकेण्ड वेव के अनुभव का लाभ लेकर प्रदेश में थर्ड वेव के प्रसार को रोकने में सफलता प्राप्त हुई है। नया वैरिएण्ट ओमिक्रॉन के रूप में सामने आया है। यह वैरिएण्ट बहुत घातक नहीं है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि इस वैरिएण्ट से घबराने की आवश्यकता नहीं है। कोरोना वायरस अब कमजोर हो रहा है। लेकिन अभी भी सभी को सावधानी और सतर्कता बरतनी होगी। सावधानी एवं सतर्कता से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सभी लोग कोविड प्रोटोकॉल का अनिवार्य रूप से पालन करें। प्रदेश में जितने भी कोविड पॉजिटिव मामले आए हैं,उनमें निन्यानबे प्रतिशत मामलों का उपचार घर पर किया जा रहा है। कोरोना पॉजिटिव लोगों को मेडिसिन किट उपलब्ध करायी जा रही हैं। प्रदेश में बहत्तर हजार निगरानी समितियां डोर-टू-डोर सर्वे कर प्रत्येक संक्रमित व्यक्ति को मेडिसिन किट उपलब्ध करा रही हैं। रैपिड रिस्पॉन्स टीम कोविड टेस्ट कार्य को सम्पन्न कर रही हैं। सभी जनपदों में इण्टीग्रेटेड कमाण्ड एण्ड कण्ट्रोल सेण्टर आईसीसीसी सक्रिय हैं। इसके माध्यम से कोविड मरीजों के स्वास्थ्य की नियमित मॉनीटरिंग की जा रही है। कुछ दिन पहले ही योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ के एसजीपीजीआई लखनऊ में छह सौ करोड़ रुपये से अधिक की सात परियोजनाओं का लोकार्पण किया था। लोकार्पित परियोजनाओं में इमरजेंसी मेडिसिन विभाग एण्ड किडनी ट्रांसप्लाण्ट सेण्टर, एडवान्स्ड ब्रॉन्कोस्कोपी लैब,सौ रूम रिसर्च स्टुडेण्ट हॉस्टल, टाइप थ्री के अस्सी नर्स आवास, रोबोटिक एण्ड मिनिमली इनवेजिव सर्जरी के लिए तीन मॉड्यूलर ऑपरेशन थियेटर,तैतीस केवी विद्युत उपकेन्द्र तथा मरीजों के तीमारदारों की आवासीय व्यवस्था के लिए बावन कक्षों के अतिथि गृह सम्मिलित हैं। प्रदेश सरकार द्वारा एसजीपीजीआई, लखनऊ में एडवांस्ड पीडियाट्रिक सेण्टर की स्थापना की घोषणा की गई थी। जिसकी लागत लगभग पांच करोड़ रुपये होगी। सरकार इस परियोजना को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाएगी। पांच वर्ष पहले तक प्रदेश में मात्र बारह मेडिकल कॉलेज थे। वर्तमान प्रदेश सरकार द्वारा राज्य में हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने का प्रयास किया गया है। आज उसी का परिणाम है कि पचहत्तर जनपदों में से इकसठ जनपदों में मेडिकल संस्थान या मेडिकल कॉलेज के रूप में बन चुके हैं। मेडिकल कॉलेज बनाने का कार्य युद्ध स्तर पर किया जा रहा है। प्रदेश के सीएचसी, पीएचसी, जिला चिकित्सालय व मेडिकल कॉलेज के निर्माण तथा एम्स जैसे दो संस्थान प्रदेश में फंक्शनल हैं। प्रदेश सरकार ने बेहतरीन कोविड प्रबन्धन करके प्रथम एवं द्वितीय लहर को नियंत्रित करने में सफलता प्राप्त की। कोरोना के दृष्टिगत एसजीपीजीआई के प्रो हेमन्त की अध्यक्षता में उत्तर प्रदेश कोविड प्रबन्धन एक्स्पर्ट ग्रुप तैयार किया गया था। इस ग्रुप ने न केवल संस्थान के लिए बल्कि राज्य के अन्दर मेडिकल टेलीकंसल्टेशन के माध्यम से प्रत्येक मेडिकल संस्थान को इन सुविधाओं के साथ जोड़ने का कार्य किया और इन्हें गाइडेंस प्रदान किया। कोरोना की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद इमरजेंसी मेडिसिन विभाग एण्ड किडनी ट्रांसप्लाण्ट सेण्टर का निर्माण तीन वर्ष की रिकॉर्ड अवधि में पूरा हुआ। उन्होंने कहा कि एक सर्वे के मुताबिक प्रदेश में पचास हजार से अधिक मरीजों को डायलिसिस और किडनी ट्रांसप्लाण्ट की जरूरत है, जिसे इस केन्द्र के माध्यम से सरलतापूर्वक पूरा किया जा सकेगा।प्रदेश में लम्बित परियोजनाओं को वर्तमान प्रदेश सरकार ने पूरा करने का कार्य किया है। मेडिकल क्षेत्र को बढ़ावा देने का कार्य किया है। वर्ष 2016-17 में चिकित्सा के लिए मात्र 1,914 करोड़ रुपये का बजट प्राविधान था। वर्ष 2021-22 में 8,128 करोड़ रुपये का किया गया। यूजी, पीजी व सुपर स्पेशियलिटी सीटों को बढ़ाने का कार्य भी किया गया है। (हिफी) हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें 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| Posted: 19 Jan 2022 05:29 AM PST ज्यादा संतन से मढ़ी उजाड़(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा) यह कहावत तो सभी ने सुनी होगी कि मढ़ी में ज्यादा संतों के आने से समस्या पैदा होती है चुनाव के समय राजनीतिक दलों के साथ भी यही हो रहा है। एक सियासी मढ़ी में चंद्रशेखर आजाद रावण को जगह नहीं मिल पायी है, इसलिए अप्रत्यक्छ रूप में वो भी राम की ही मदद करने में भलाई समझ रहे हैं। बात उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की है। इन चुनावों में राम के सहारे राजनीति के शिखर तक पहुंचने वाली भाजपा के मुकाबले में समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने अपने नाराज चाचा शिवपाल यादव समेत छोटे छोटे दलों के तमाम नेताओं को अपने साथ जोड़ लिया है। दलितों के नये उभरे नेता चन्द्र शेखर आजाद रावण अखिलेश यादव से मिलने के लिए लखनऊ में पड़े रहे लेकिन सपा प्रमुख ने उनसे बात ही नहीं की। यह जानकारी स्वयं रावण ने दी थी और निराशापूर्ण शब्दों में कहा था कि लगता है अखिलेश को मेरी जरूरत नहीं है। हालांकि इसके बाद समाजवादी पार्टी की तरफ से भी बयान आया था किस अखिलेश चंद्रशेखर आजाद से भी मिलेंगे लेकिन समाजवादी पार्टी के सामने भी समस्या है। सपा अपने को भिजपा के सबसे सशक्त विकल्प के रूप में प्रस्तुत कर रही है, इसलिए पचास फीसदी अर्थात लगभग 202 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारेगी। इसलिए रावण की पार्टी के साथ सीटों का तालमेल, लगता है लटक गया। इस उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले ही अखिलेश यादव और चंद्रशेखर आजाद रावण के बीच बात बिगड़ गई है और अब समाजवादी पार्टी और आजाद समाज पार्टी के बीच गठबंधन नहीं होगा। गत 18 जनवरी को खुद भीम आर्मी के चीफ चंद्रशेखर आजाद ने ऐलान किया कि समाजवादी पार्टी से उनका गठबंधन नहीं हुआ है और उनकी आजाद समाज पार्टी अकेले ही चुनाव लड़ेगी। इस प्रकार चंद्रशेखर आजाद अब अखिलेश यादव के वोट काट सकते हैं, इससे फायदा भाजपा को होगा। हालाँकि, चंद्रशेखर आजाद ने यह भी कहा है कि उनकी पार्टी समाजवादी पार्टी के खिलाफ चुनाव लड़ेगी, मगर ओपी राजभर, शिवपाल सिंह, स्वामी प्रसाद मौर्य और जयंत चैधरी के खिलाफ पार्टी चुनाव नहीं लड़ेगी। चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि आजाद समाज पार्टी उत्तर प्रदेश की सभी विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी, मगर ओपी राजभर, शिवपाल सिंह, स्वामी प्रसाद मौर्य और जयंत चैधरी के खिलाफ पार्टी चुनाव नहीं लड़ेगी। उन्होंने 33 सीटों पर उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर कहा कि अखिलेश यादव ने धोखा किया है। जनता तय करे एसी में बैठकर ट्वीट करने वाले नेता चाहिए या सड़क पर लड़ाई लड़ने वाले नेता। उन्होंने कहा कि एक मजबूत विकल्प के लिए चुनाव लड़ेगी आजाद समाज पार्टी। खुद के चुनाव लड़ने के सवाल पर चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि पार्टी तय करेगी तो चुनाव लड़ेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ चुनाव लड़ने की तैयारी है, बाकी पार्टी तय करेगी कि वह कहां से चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव के लिए तैयारी पूरी है। आजाद समाज पार्टी का एक-एक कार्यकर्ता चुनावी रण में जाने के लिए तैयार है। इस प्रकार अस्थिरतावादी राजनीति करने का संकेत देने वाले रावण भाजपा को कुछ न कुछ लाभ तो दे ही सकते हैं। चंद्रशेखर आजाद ने कहा है कि उनकी पार्टी 33 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारेगी और आगे और सीटों पर विचार किया जा सकता है। इतनी सीटें तो अखिलेश यादव दे नहीं सकते थे। चंद्रशेखर ने बताया कि हमारी लिस्ट में 30 फीसदी दलित, 42 फीसदी ओबीसी, 5 फीसदी एसटी कैंडिडेट और बाकी पर अन्य अल्पसंख्यक लोगों को मौका दिया जाएगा। चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि उनकी पार्टी ओपी राजभर, स्वामी प्रसाद मौर्य और जयंत चैधरी के खिलाफ प्रत्याशी नहीं उतारेगी। दरअसल, चंद्रशेखर ने जिन सीटों पर उम्मीदवारों का ऐलान किया है, उनमें सिराथू, नोएडा, मेरठ कैंट, एत्मादपुर, गंगोह, हस्तिनापुर शामिल हैं। इसके अलावा चंद्रशेखर ने गोरखपुर सीट से भी प्रत्याशी उतारने का फैसला किया है जहां योगी आदित्यनाथ मैदान में हैं। उधर, भाजपा से मुख्य मुकाबला करने उतर रहे और यूपी की सत्ता में आने का सपना देख रहे सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने ओमप्रकाश राजभर की पार्टी सुभासपा और चाचा शिवपाल सिंह यादव की पार्टी प्रसपा से गठबंधन कर भले ही बड़ा दांव चला है, लेकिन उनका यह दांव टिकट बंटवारे में अब उनपर ही भारी पड़ता दिखाई दे रहा है। सूत्रों की मानें तो आजमगढ़ में एक सीट प्रसपा और दो सीटों की मांग सुभासपा कर रही है, जबकि इन तीनों सीटों पर सपा के पहले से कई दावेदार हैं। अगर सपा दोनों दलों के नेताओं को टिकट नहीं देती है तो गठबंधन में खींचतान बढ़ेगी और अगर सीटें गठबंधन के खाते में जाती हैं तो सपा को अपने ही नेताओं से भीतरघात का खतरा भी बढ़ जायेगा। पूर्वांचल में आजमगढ़ जिला समाजवादी पार्टी का गढ़ है। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में सपा ने यहां 10 में से नौ सीटें जीती थीं, जबकि एक सीट बसपा के खाते में गई थी। वर्ष 2017 में बीजेपी की लहर होने के बाद भी सपा पांच सीटें जीतने में सफल हुई थी, जबकि बसपा के खाते में चार सीटें गयी थीं। बीजेपी एक सीट जीतने में सफल हुई थी। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव की घोषणा हो चुकी है। सातवें चरण में आजमगढ़ में चुनाव होना है। बीजेपी निषाद पार्टी से गठबंधन कर मैदान में उतर रही है। अतरौलिया सीट निषाद पार्टी के खाते में बीजेपी ने दे दी है। यहां से बाहुबली अखंड प्रताप सिंह की पत्नी व पूर्व ब्लाक प्रमुख वंदना सिंह का टिकट निषाद पार्टी से लगभग तय माना जा रहा है। ऐसे में अतरौलिया सीट भी सपा की फंसती हुई दिखाई दे रही है। कारण यह है कि इस सीट पर बाहुबली अखंड प्रताप सिंह का सवर्ण मतदाताओं में अच्छा खासा प्रभाव है। यहां करीब 35 हजार निषाद मतदाता हैं, जो पिछले चुनाव में बीजेपी के साथ खड़े हुए थे। अगर यह समीकरण सही बैठा तो वंदना सिंह से मुकाबला करना सपा के लिए मुश्किल होगा। चर्चा है कि सगड़ी सीट अपना दल के खाते में जा सकती है। समाजवादी पार्टी की बात करें तो प्रसपा और सुभासपा से गठबंधन होने के बाद लालगंज और मेंहनगर सुरक्षित विधानसभा सीट पर राजभरों की संख्या 50 हजार से अधिक है। इसलिए ओमप्रकाश राजभर यह दोनों सीटें सपा से अपने खाते में मांग रहे हैं। वर्ष 2017 में बीजेपी ने सुभासपा को मेंहनगर सीट दी थी जबकि मेंहनगर सीट से सपा के वर्तमान विधायक कल्पनाथ पासवान है, वहीं इसी सीट पर बसपा छोड़ सपा में शामिल हुई विद्या चैधरी, पूर्व विधायक बृजलाल सोनकर समेत कई नेता दावेदारी कर रहे है। सुभासपा लालगंज सीट भी सपा से मांग रही है। लालगंज सुरक्षित सीट पर पिछले चुनाव में बसपा को जीत मिली थी। यहां से बसपा के आजाद अरिमर्दन विधायक है। यहां से वर्ष 2017 में सपा से पूर्व विधायक बेचई सरोज उम्मीदवार थे। यहां सवर्णो के साथ राजभर समुदाय की भी संख्या ठीक-ठाक हैं। दोनों सीटों पर टिकट के लिए सुभासपा के मांगने से सपा के दावेदारों में बेचैनी बढ़ गयी है। इसी तरह मुबारकपुर सीट शिवपाल यादव अपने करीबी नेता पूर्व विधायक व पार्टी के महासचिव रामदर्शन यादव के लिए चाहते हैं लेकिन यहां से सपा की तरफ से अखिलेश यादव, चंद्र देव राम यादव करैली और शाहआलम सहित कई दावेदार हैं। इस प्रकार विपक्ष जितना मजबूत दिख रहा है, उतना वास्तव में नहीं है। यह समस्या सत्तारूढ भाजपा के सामने भी है, जहां दूसरे दलों से आने वाले नेताओं को समायोजित करने में समस्या आ रही है लेकिन सपा की राजनीतिक मढ़ी में ऐसे संतों की भरमार हो गयी है। (हिफी)हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 19 Jan 2022 05:27 AM PST कवि, कलाकार व यारबाज मान(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा) आम आदमी पार्टी (आप) ने पंजाब चुनाव के लिए अपने मुख्यमंत्री उम्मीदवार का ऐलान कर दिया है। सांसद भगवंत मान आप के सीएम कैंडिडेट होंगे। भगवंत मान जाने माने कमेडियन हैं। वे अच्छे कवि भी हैं और यारबाजी तो उनकी बेमिसाल है। द्वापर के कृष्ण सुदामा की याद आ जाती है। अपने गांव के सभी दोस्तों को हवाई जहाज की सैर करवा चुके हैं। पार्टी के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल ने स्वयं ही उनके नाम का ऐलान किया। पंजाब में 117 सदस्यीय विधानसभा के लिए 20 फरवरी को चुनाव होंगे। भगवंत मान को 2017 में पार्टी का पंजाब प्रमुख बनाया गया था। पिछले लंबे समय से सीएम कैंडिडेट के दावेदार के तौर पर उनके नाम की अटकलें लगाई जा रही थीं और 18 जनवरी को उनके नाम पर आखिरकार मुहर लग गई। भगवंत मान के नाम के ऐलान के बाद अरविंद केजरीवाल ने कहा, 'मैं सरदार भगवंत मान को पंजाब में आप का मुख्यमंत्री चेहरा घोषित किए जाने पर बधाई देता हूं। पूरा पंजाब आप को एक उम्मीद के तौर पर देख रहा है। ये एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है और मुझे यकीन है कि भगवंत हर पंजाबी के चेहरे पर मुस्कान लाएंगे।' मान ने राज्य में बेरोजगारी खत्म करने समेत कई वादे किये हैं जो पार्टी के घोषणापत्र में भी शामिल हैं। सीएम का उम्मीदवार बनाए जाने के बाद भगवंत मान ने कहा कि वो पंजाब को नशा मुक्त करेंगे। साथ ही उन्होंने बेरोजगारी खत्म करने का भी वादा किया। उन्होंने कहा, 'मैं जब जनसभाओं में जाता हूं तो लोग मुझसे मिलकर अपना दर्द बताते हुए रो पड़ते हैं कि हमारे बच्चे गलत संगत में पड़ गए, चित्ताओं (चिताओं ) की लपट ऊंची होती जा रही है, हमें बचा लो।' भगवंत मान ने कहा, 'मैं हमेशा से कहता आया हूं कि मेरी ड्यूटी चाहे दीवारों पर पोस्टर लगाने की लगा दो, बस मेरा पंजाब ठीक कर दो. आज पंजाब के लाखों लोगों ने मुझ पर विश्वास जताया है. जिस पंजाब में लोग धरने दे रहे, बेरोजगारी से तंग आकर नहरों में छलांग लगा रहे हैं, युवा विदेशों की तरफ भाग रहा है. आप सभी उसी पंजाब की धरती पर लोगों को भंगड़े, गिद्दे डालते देखेंगे। भगवंत मान को लोग बतौर कॉमेडियन और एक राजनेता के रूप में जानते हैं। वे पंजाब में संगरूर लोकसभा सीट से लगातार दूसरी बार आम आदमी पार्टी के सांसद हैं और पार्टी की पंजाब इकाई के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। भगवंत मान का जन्म 17 अक्टूबर 1973 को पंजाब के संगरूर जिले शीमा मंडी के करीब सतोज गांव में हुआ था। उनके पिता महिंदर सिंह एक सरकारी अध्यापक थे और मां हरपाल कौर गृहिणी हैं। स्नातक की पढ़ाई पूरी कर भगवंत मान कॉमेडी के क्षेत्र में आ गए। संगरुर के सुनाम शहीद उधम सिंह कॉलेज में पढ़ते हुए उन्होंने कॉमेडी और कविता में कई प्रतियोगिताएं जीतीं। इसके साथ ही वे प्रोफेशनल कॉमेडियन बन गए। बारहवीं करने के बाद उन्होंने बीकॉम में दाखिला लिया लेकिन कॉमेडी के प्रोफेशन में व्यस्त होने के कारण पढ़ाई बीच में छोड़ दी और 1992 से 2013 तक कॉमेडी की 25 एल्बम रिकॉर्ड करवाई। उन्होंने पांच गानों की टेप भी रिलीज की हैं। भगवंत मान ने 1994 से 2015 तक 13 हिंदी फिल्मों और विज्ञापनों में अपनी कला का प्रदर्शन किया है। 'जुगनू', 'झंडा सिंह', 'बीबो बुआ', 'पप्पू पास' जैसे कॉमेडी पात्र भगवंत मान की ही देन हैं। जगतार जग्गी और राणा रणबीर के साथ कॉमेडी कर चुके भगवंत मान ने 'जुगनू मस्त मस्त' जैसे कॉमेडी टीवी शो और 'नो लाइफ विद वाइफ' जैसे स्टेज शो किए हैं। उनकी पहली कॉमेडी और गानों की पैरोडी की टेप 1992 में 'गोबी दी ए कच्चिए व्यापारने' आई थी। वे कॉमेडी की दुनिया में छा गए। भाषण देने का शौक भगवंत मान को बचपन से था। उस वक्त उन्हें ये भी नहीं पता था कि वे कॉमेडी कलाकार बनेंगे या राजनेता। मनजीत सिद्धू बताते हैं कि 'भगवंत मान खेतों में पानी देते समय और लकड़ी काटते समय 'कस्सी' के डंडे को ही माइक बना लेते थे और भाषण देते रहते थे। कॉमेडी टेप के जरिए राजनीति और समाज के मुद्दों के ऊपर व्यंग्य करना उनकी कला का प्रमुख सरोकार रहा है। इसी बीच मनप्रीत बादल से मुलाकात हुई और भगवंत मान को उन्होंने सक्रिय राजनीति में आने के लिए प्रेरित किया। भगवंत मान ने 2009-2010 में अखबारों के लिए नियमित कॉलम लिखना शुरू किया। इस दौरान उन्होंने फाजिल्का इलाके में बच्चियों को अजीबो-गरीब बीमारी लगने की रिपोर्ट पढ़ी। भगवंत मान अगले दिन ही नानक और आसपास के दोनों गांव में पहुंच गए। वहां पीने के पानी की समस्या थी, जिससे लोगों की हालत खराब हुई थी। कुछ अप्रवासी दोस्तों की मदद से भगवंत मान ने इस क्षेत्र में पानी का एक ट्यूबवेल लगाकर अपने स्तर पर कोशिश की। इस प्रकार की जनसेवा की बदौलत ही सन् 2014 में भगवंत मान ने मोदी लहर के बावजूद आम आदमी पार्टी में शामिल होने के बाद लोकसभा का चुनाव जीता। भगवंत मान पार्टी के स्टार प्रचारक रहे हैं। अब 2022 के विधानसभा चुनाव में वे पार्टी के अकेले ऐसे नेता हैं जिनकी पूरे पंजाब में प्रचार करने की अपील है। उन्हें आम आदमी पार्टी की सबसे बड़ी शक्ति और सबसे बड़ी कमजोरी के रूप में भी देखा जाता रहा है। आम आदमी पार्टी की पंजाब इकाई के मीडिया सलाहकार और पूर्व पत्रकार मंजीत सिंह सिद्धू भगवंत मान के सहपाठी रहे हैं। उनके अनुसार भगवंत मान के व्यक्तित्व का सबसे बड़ा सकारात्मक पहलू ये है कि उनमें अपना पक्ष रखने की एनर्जी है। वे जितने जोश के साथ हजारों लोगों को संबोधित करते हैं उतने ही जोश और गंभीरता के साथ दो-चार लोगों से भी बात करते हैं। मंजीत सिद्धू के मुताबिक ज्यादातर लोग भगवंत को एक कॉमेडियन और नेता के तौर पर ही जानते हैं लेकिन बहुत कम लोग ही यह जानते होंगे कि मान बहुत गहरे कवि भी हैं। हालाँकि वो कहते हैं कि उन्होंने अभी तक अपनी कविताओं की एक भी पुस्तक प्रकाशित नहीं करवाई है। भगवंत मान को खेलों में भी दिलचस्पी है। उन्हें एनबीए, क्रिकेट, हॉकी और फुटबॉल मैच देखना पसंद है। वे दुनिया भर के खिलाड़ियों को फॉलो करते हैं । साथ ही उनके बारे में अच्छी जानकारी रखते हैं। वे कभी-कभी रात में अलार्म लगाकर सोते हैं और रात को 2-3 बजे उठकर मैच देखते हैं। भगवंत मान ने अपने गांव के लगभग सभी सहपाठियों और मित्रों को हवाई जहाज में यात्रा करवाई है। मंजीत सिद्धू बताते हैं कि वे जब भी पंजाब के बाहर शो करने जाते हैं तो अपने किसी न किसी दोस्त को अपने साथ घुमाने ले जाते हैं। मोबाइल नंबर मौखिक रूप से याद रखना उनका एक खास गुण है। कहते हैं कि अखबार और रेडियो के साथ उनका खास लगाव है। वो सुबह उठकर अखबारों के जिलों तक के संस्करण देखते हैं। इनके बारे में वे कहते हैं इनसे राज्य के हर कोने के बारे में ग्राउंड की जानकारी मिलती है। रेडियो के ऊपर मैचों की कमेंट्री सुनना उनकी बचपन की आदत है और इसे उन्होंने आज तक नहीं छोड़ा है। इस प्रकार अरविंद केजरीवाल ने राज्य को यारबाज, कलाकार और स्टार प्रचारक चेहरा मुख्यमंत्री के रूप में दिया है। उधर, कांग्रेस जिस दलित चेहरे को ट्रम्पकार्ड मान रही है, प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू उसी को नाकारा साबित करने में लगे हैं। पंजाब में चुनावी माहौल के दौरान सीएम चरणजीत सिंह चन्नी के कथित रिश्तेदार भूपेंद्र सिंह हनी पर अवैध खनन को लेकर इन्फोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ईडी) की रेड कांग्रेस को संकट में डाल सकती है। रेत के अवैध खनन को लेकर पंजाब के कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू अपनी ही सरकार को कठघरे में खड़ा करते रहे हैं। यही नहीं, आम आदमी पार्टी रेत खनन के मामले में चन्नी सरकार को घेरती रही है। हालांकि सीएम चन्नी ने मामले में अपनी सफाई देते हुए कहा कि उनके परिवार का इस मामले से कोई लेना देना नहीं है। इस तरह मान अब चरणजीत सिंह चन्नी पर भारी पड़ सकते हैं। (हिफी) हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| भारत से लगे नेपाल के प्रांत दो का नाम मधेस प्रदेश किया गया Posted: 19 Jan 2022 05:24 AM PST भारत से लगे नेपाल के प्रांत दो का नाम मधेस प्रदेश किया गयाकाठमांडू। नेपाल के भारत के साथ लगे दक्षिणपूर्वी प्रांत दो का नाम मधेस प्रदेश कर दिया गया है और जनकपुर इसकी राजधानी घोषित की गई है। इस तरह 2015 में प्रांत बनाए जाने के बाद क्षेत्र के आधिकारिक नाम को लेकर लंबे समय से जारी बहस का हल निकल गया है। प्रांत में अधिकतर आबादी भारतीय मूल की है और सर्वाधिक लोग यहां मैथिली बोलने वाले हैं। प्रांतीय विधानसभा ने सोमवार को दोनों फैसलों के लिए दो-तिहाई के बहुमत से मतदान किया। 99 सदस्यों में से 78 ने जनकपुर को राजधानी बनाने के लिए और 80 ने प्रांत का नाम मधेस करने के लिए मतदान किया। मधेस क्षेत्रफल में नेपाल का सबसे छोटा राज्य और आबादी की दृष्टि से दूसरा सबसे बड़ा प्रांत है। दक्षिण में इसकी सीमा भारत (बिहार) से लगती है। इसमें आठ जिले आते हैं। आम बोलचाल की भाषा में मधेसी का अर्थ मैदानी इलाके के लोगों से है। हिंदू धर्म शास्त्रों में मधेस का संबंध भगवान शिव से बताया गया है। सितंबर 2015 में नेपाल का नया संविधान प्रभाव में आने के बाद यह क्षेत्र प्रांत बना था। नेपाल के संविधान में और अधिकार व प्रतिनिधित्व देने की मांग को लेकर मधेसियों द्वारा सितंबर, 2015 से फरवरी, 2016 के बीच किए गए विरोध प्रदर्शनों में 50 लोगों की मौत हो गई थी। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| सामने आया अफगानिस्तान का तालिबानी पीएम Posted: 19 Jan 2022 05:22 AM PST सामने आया अफगानिस्तान का तालिबानी पीएमकाबुल। अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता स्थापित होने के बाद से पहली बार कार्यवाहक प्रधानमंत्री मुल्ला हसन अखुंद सामने आया है। अखुंद ने बुधवार को मीडिया से बात करते हुए दुनिया भर के देशों से अपील की है कि उन्हें अफगानिस्तान में तालिबान के प्रशासन को मान्यता देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी देशों को आगे बढ़कर तालिबान प्रशासन को मान्यता देनी चाहिए क्योंकि वह सभी जरूरी शर्तें पूरी करता है। खासतौर पर उन्होंने इस्लामिक देशों से अपील की है कि वे आगे आएं और तालिबान सरकार को मान्यता प्रदान करें। अखुंद ने मीडिया से बात करते हुए कहा, मैं सभी सरकारों से खासतौर पर इस्लामिक देशों से कहना चाहता हूं कि उन्हें तालिबान प्रशासन को मान्यता देना शुरू करना चाहिए। वह पहली बार इस तरह से मीडिया के सामने आए थे। अपनी नियुक्ति के बाद से वह अब तक इस तरह से नहीं दिखे थे। सितंबर में तालिबान ने मुल्ला हसन अखुंद को देश का प्रधानमंत्री नियुक्त किया था। हालांकि तब से अब तक चीन, रूस, अमेरिका, फ्रांस, भारत और जर्मनी समेत किसी भी देश ने तालिबान के प्रशासन को मान्यता नहीं दी है। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| चीन में घरेलू संक्रमण कोविड-19 के 55 नए मामले आए सामने Posted: 19 Jan 2022 05:20 AM PST चीन में घरेलू संक्रमण कोविड-19 के 55 नए मामले आए सामनेबीजिंग। चीन ने देश में कोविड वैरिएंट ओमिक्रोन के मामलों की रोकथाम के बीच कोरोना के घरेलू संक्रमण के 55 नए कोविड-29 मामलों की पुष्टि की है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग ने बताया कि नए स्थानीय मामलों में से हेनान में 33, तियानजिन में 14, ग्वांगडोंग में सात और बीजिंग में एक संक्रमण के मामलों की सूचना मिली है। मुख्य भूमि चीन पर कोरोना के विदेशी संक्रमण के कुल 32 नए मामले सामने आए हैं। आयोग ने कहा कि पिछले 24 घंटों में देश में कोरोना से कोई मौत नहीं हुई है, लेकिन पांच नए संदिग्ध संक्रमण के मामले सामने आए हैं। यह सभी संक्रमित व्यक्ति विदेश की यात्रा करके टीन लौटे थे। इसी बीच बीजिंग ने ै।त्ै-ब्वट-2 ओमिक्रोन वैरिएंट का पहला मामला सामने आने की सूचना भी दी थी। बता दें कि अगले महीने फरवरी में बीजिंग शीतकालीन ओलंपिक की मेजबानी करने के लिए तैयार है। इसके चलते शहर में कोरोना के लिए सख्त प्रतिबंध लागू किए गए हैं। ताइपे टाइम्स ने बताया कि चीन की राजधानी बीजिंग में अब यात्रियों को आने के लिए 72 घंटों के भीतर एक कोविड टेस्ट करवाना होगा। लागू इस नियम का मार्च के अंत तक देश के लोगों को पालन करना होगा। एक सरकारी समाचार पत्र बीजिंग डेली ने सोशल मीडिया पर कहा कि इस नियम से देश में कोरोना के इस वैरिएंट ओमिक्रोन के मामलों का पता लगाने में मदद मिलेगी। विश्व स्तर पर ओमिक्रोम के कई मामले सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश में ओमिक्रोन को रोकने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। कोरोना के तेजी से फालने वाले वैरिएंट के प्रति सावधानी बरतने के लिए देश में कड़े नियम भी लागू किए गए हैं। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| यूक्रेन पर कभी भी हमला कर सकता है रूस: अमेरिका Posted: 19 Jan 2022 05:16 AM PST यूक्रेन पर कभी भी हमला कर सकता है रूस: अमेरिकावाशिंगटन। यूक्रेन पर बढ़ते तनाव को लेकर अमेरिका ने चेतावनी देते हुए कहा है कि रूस किसी भी वक्त यूक्रेन पर हमला कर सकता है। अमेरिका ने इसे बहुत खतरनाक बताया है। हालांकि अमेरिका ने कूटनीति के दरवाजे खुले रखे हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी जे ब्लिंकन रूसी विदेश मंत्री सर्गेई वी लावरोव से बातचीत की है और दोनों नेता इसी हफ्ते जेनेवा में मिलने को सहमत हुए हैं। वाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी जेन साकी ने यूक्रेन बॉर्डर पर एक लाख से अधिक रूसी सैनिकों को भेजने के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को दोषी बताया है। उन्होंने कहा है कि हमारा मानना घ्घ्है कि यह बेहद खतरनाक स्थिति है। अब हम ऐसी स्थिति में हैं जहां रूस किसी भी वक्त यूक्रेन पर हमला कर सकता है। यह बहुत गंभीर है। अमेरिका के रुख को दोहराते हुए उन्होंने कहा है कि अगर रूस ने कूटनीतिक रास्ते पर नहीं चलने का फैसला किया तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक ब्लिंकन पहले यूक्रेन का दौरा करेंगे। इसके बाद उन्हें जर्मनी जाना है जहां यूरोपीय देशों से रूस के रवैए पर चर्चा करेंगे। 22 जनवरी को वाग लावरोव से जिनेवा में मिलेंगे। एक सीनियर अमेरिकी अधिकारी ने बताया है कि अमेरिका संघर्ष नहीं चाहता है। हम शांति चाहते हैं। पुतिन चाहे को इस संकट का समाधान कर सकते हैं क्योंकि हम नहीं चाहते हैं कि अमेरिका और रूस के बीच शत्रुता बढ़े।हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| हिन्दू जनजागृति समिति द्वारा मुजफ्फरपुर और हाजीपुर में प्रशासन को ज्ञापन ! Posted: 19 Jan 2022 04:47 AM PST राष्ट्रध्वज का अपमान रोकने के लिए कृति समिति स्थापित करे तथा तिरंगे के रंग के मास्क के विक्रय पर प्रशासन तत्परता से रोक लगाए ! - राष्ट्रप्रेमियों की मांग राष्ट्रध्वज का यह अनादर रोकने के लिए हिन्दू जनजागृति समिति द्वारा मुंबई उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (१०३/२०११) प्रविष्ट की गई थी । इस संबंध में सुनवाई करते हुए न्यायालय ने प्लास्टिक के राष्ट्रध्वज द्वारा होनेवाला अपमान रोकने का आदेश सरकार को दिया था । उसके अनुसार केंद्रीय और राज्य गृह विभाग तथा शिक्षा विभाग ने संबंधित परिपत्रक भी निकाला है । महाराष्ट्र सरकार ने भी राज्य में 'प्लास्टिक बंदी' का निर्णय लिया है । उसके अनुसार भी 'प्लास्टिक के राष्ट्रध्वजों का विक्रय करना' अवैधानिक है । इस समय निम्नांकित मांगे की गईं - 1. न्यायालय के आदेशानुसार सरकार राष्ट्रध्वज का अपमान रोकने के लिए उद़्बोधन करनेवाली कृति समिति स्थापित करे । इस समिति में हिन्दू जनजागृति समिति जागृति करने के लिए आपकी सहायता करेगी । 2. प्लास्टिक के राष्ट्रध्वज का उत्पादन और बिक्री हो रही हो, तो संबंधित उत्पादकों पर तत्काल कार्यवाही की जाए । 3. विद्यालयों में 'राष्ट्रध्वज का सम्मान करें', यह उपक्रम कार्यान्वित करने तथा इस विषय पर जागृति करने के लिए समिति द्वारा बनाई गई ध्वनिचित्र चक्रिकाएं विविध केबलवाहिनियों, चलचित्रगृहों में दिखाने की अनुमति दी जाए । हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करते ही सभी तरह के शुभ कार्य फिर से आरंभ हो गए हैं Posted: 19 Jan 2022 04:40 AM PST (ज्योतिषाचार्य पं. नरेन्द्र कृष्ण शास्त्री】 ============================ ✍🏻वैदिक ज्योतिषशास्त्र के अनुसार जब सूर्य धनु राशि में प्रवेश करते हैं तब एक माह के लिए खरमास शुरू हो जाता है, खरमास लगने पर किसी भी तरह का शुभ कार्य करना वर्जित हो जाता है, सूर्यदेव जैसे ही धनु राशि की अपनी यात्रा समाप्त कर मकर राशि में प्रवेश करते हैं वैसे खरमास का समय खत्म हो जाता है और सभी तरह के शुभ कार्य दोबारा से आरंभ हो जाते हैं ज्योतिषाचार्य पं. नरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने बताया कि बीते 14 जनवरी को मकर संक्रांति पर सूर्य का राशि परिवर्तन मकर राशि में होने से खरमास खत्म हो गया है। खरमास खत्म, शुरू होंगे मांगलिक कार्य ज्योतिषाचार्य पं. नरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने बताया कि शास्त्रों में खरमास के समय को कुछ कार्यो के लिए अच्छा नहीं माना जाता, खरमास में सूर्य की शक्ति कमजोर होने से शुभ कार्य एक महीने के लिए थम जाते हैं, अब जैसे ही सूर्य धनु राशि से निकलकर शनि की राशि मकर में प्रवेश कर चुके वैसे ही सभी तरह के शुभ कार्य दोबारा से आरंभ हो गए है, अब सगाई, विवाह, मुंडन संस्कार, गृह प्रवेश, नई दुकान या प्रतिष्ठान खोलना आदि जैसे मांगलिक कार्य शुभ रहेंगे अब सभी मांगलिक कार्य शुरू हो गए हैं ज्योतिषाचार्य पं. नरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने बताया कि आगे आने वाले कुछ महीनों में कब-कब है मांगलिक कार्य करने के शुभ मुहूर्त.... विवाह के लिए शुभ तिथियां जनवरी 2022- खरमास खत्म होते ही विवाह का शुभ मुहूर्त 15, 20, 22 जनवरी को है, फिर इसके बाद अगला शुभ मुहूर्त 23, 24, 25, और 27 जनवरी को है जिसमें विवाह कार्य संपन्न किया जा सकता है। फरवरी 2022- फरवरी के महीने में विवाह का पहला शुभ मुहूर्त 04 फरवरी को है, फिर इसके बाद 05, 06, 07, 08,10, 11, 16, 17, 18, 19, 20 और 21 फरवरी को विवाह के लिए शुभ मुहूर्त है। मार्च 2022- मार्च के महीने में विवाह के लिए कोई भी शुभ मुहूर्त नहीं है। गृह प्रवेश मुहूर्त की शुभ तिथियां जनवरी 27 में है फरवरी- 5, 10, 11, 19 और 21 फरवरी में शुभ है। "ज्योतिष शास्त्र, वास्तुशास्त्र, वैदिक अनुष्ठान व समस्त धार्मिक कार्यो के लिए संपर्क करें:-हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| शैव , जैन एवं बौद्ध धर्म ऋषियों का स्थल सारनाथ Posted: 19 Jan 2022 04:25 AM PST शैव , जैन एवं बौद्ध धर्म ऋषियों का स्थल सारनाथसत्येन्द्र कुमार पाठक ज्ञान प्राप्ति के पश्चात भगवान बुद्ध ने अपना प्रथम उपदेश वारणशी से 10 कि. मि . पूर्वोत्तर स्थित सारनाथ में दिया था । बौद्ध धर्म का पवित्र सारनाथ को धर्म चक्र प्रवर्तन" एवं बौद्ध मत के प्रचार-प्रसार का आरंभ स्थल था। बौद्ध धर्म के चार प्रमुख तीर्थों में सारनाथ , लुम्बिनी, बोधगया और कुशीनगर है । सारनाथ को जैन धर्म एवं हिन्दू धर्म में भी महत्व प्राप्त है। जैन ग्रन्थों में सारनाथ को प्राचीन नाम 'सिंहपुर में ' जैन धर्म के ग्यारहवें तीर्थंकर श्रेयांसनाथ का जन्म हुआ था । सारंगनाथ महादेव मन्दिर है । सारनाथ में अशोक का चतुर्मुख सिंहस्तम्भ, भगवान बुद्ध का मन्दिर, धामेख स्तूप, चौखन्डी स्तूप, राजकीय संग्राहलय, जैन मन्दिर, चीनी मन्दिर, मूलंगधकुटी और नवीन विहार , सारंगनाथ शिव मंदिर दर्शनीय हैं। भारत का राष्ट्रीय चिह्न यहीं के अशोक स्तंभ के मुकुट की द्विविमीय अनुकृति है। मुहम्मद गोरी ने सारनाथ के पूजा स्थलों को नष्ट कर दिया था। सन १९०५ में पुरातत्व विभाग ने सारनाथ के गढ़ का उत्खनन के क्रमा में बौद्ध धर्म के अनुयायों और इतिहास के विद्वानों का ध्यान गया है । पुरातनकाल में सारनाथ घना वन और मृग-विहार ऋषि स्थल होने के कारण ऋषिपत्तन ,मृगदाय कहा जाता था । सिंहों की मूर्ति वाला भारत का राजचिह्न सारनाथ के अशोक के स्तंभ के शीर्ष से लिया गया है। धमेक स्तूप' सारनाथ की प्राचीनता है। मृगदाय में सारंगनाथ महादेव की मूर्ति की स्थापना हुई और स्थान का नाम सारनाथ पड़ गया। प्राचीन नाम ऋषिपतन (इसिपतन या मृगदाव) (हिरनों का जंगल) था। ऋषिपतन से तात्पर्य 'ऋषि का पतन' है । निग्रोथमृग एवं जातक के अनुसार मृगों के विचरण करने वाले स्थान के आधार पर मृगदाव पड़ा, । निग्रोधमृग तथा जातक जातक के अनुसार वोधिसत्व ने पूर्वजन्म में, जब वे मृगदाव में मृगों के राजा थे, अपने प्राणों की बलि देकर एक गर्भवती हरिणी की जान बचाने के कारण वन को सारंग (मृग)-नाथ या सार-नाथ कहने लगे। दयाराम साहनी के अनुसार शिव को पौराणिक साहित्य में सारंगनाथ कहा गया है और महादेव शिव की नगरी काशी की समीपता के कारण शिवोपासना की स्थली बन गया। बुद्ध के प्रथम उपदेश 533 ई.पू. को सारनाथ में प्रथम उपदेश गया गया था । सारनाथ की समृद्धि और बौद्ध धर्म का विकास सर्वप्रथम अशोक के शासनकाल में धर्मराजिका स्तूप, धमेख स्तूप एवं सिंह स्तंभ का निर्माण करवाया। ई.पू. दूसरी शती में शुंग राज्य की स्थापना हुई थी । प्रथम शताब्दी ई. के उत्तर भारत के कुषाण राज्य की स्थापना के साथ ही एक बार पुन: बौद्ध धर्म की उन्नति हुई। कनिष्क के राज्यकाल के तीसरे वर्ष में भिक्षु बल ने बोधिसत्व प्रतिमा की स्थापना की। कनिष्क ने अपने शासन-काल में न केवल सारनाथ में वरन् भारत के विभिन्न भागों में बहुत-से विहारों एवं स्तूपों का निर्माण करवाया। बौद्ध धर्म के प्रचार के पूर्व सारनाथ शिवोपासना तथा शैव धर्म का केंद्र था। हर्ष के शासन-काल में ह्वेन त्सांग भारत भ्रमण के तहत सारनाथ को अत्यंत खुशहाल बताया था। महमूद गजनवी (1017 ई.) के वाराणसी आक्रमण के समय सारनाथ को अत्यधिक क्षति पहुँची। पुन: 1026 ई. में सम्राट महीपाल के शासन काल में स्थिरपाल और बसन्तपाल सम्राट की प्रेरणा से काशी के देवालयों के उद्धार के साथ-साथ धर्मराजिका स्तूप एवं धर्मचक्र का भी उद्धार किया। गाहड़वाल वेश के शासन-काल में गोविंदचंद्र की रानी कुमार देवी ने सारनाथ में विहार बनवाया था। उत्खनन से प्राप्त अभिलेख के अनुसार सारनाथ समृद्धशाली था । सारनाथ की ऐतिहासिक जानकारी पुरातत्त्वविदों को हुई जब काशीनरेश चेत सिंह के दीवान जगत सिंह ने धर्मराजिका स्तूप को अज्ञानवश खुदवा डाला। सारनाथ के भूगर्भ में समाहित प्राचीन विरासत का उत्खनन कर्नल कैकेंजी ने 1815 ई. में करवायाथा । कैकेंजी के उत्खनन के 20 वर्ष पश्चात् 1835-36 में कनिंघम ने सारनाथ का विस्तृत उत्खनन करवाया। उत्खनन में धमेख स्तूप, चौखंडी स्तूप एवं मध्यकालीन विहारों को खोद निकाला। कनिंघम का धमेख स्तूप से 3 फुट नीचे 600 ई. का एक अभिलिखित शिलापट्ट (28 ¾ इंच X 13 इंच X 43 इंच आकार मिला था । 1851-52 ई. में मेजर किटोई ने उत्खनन करवाया जिसमें धमेख स्तूप के आसपास अनेक स्तूपों एवं दो विहारों के अवशेष मिले थे । किटोई के उपरांत एडवर्ड थामस तथा प्रो॰ फिट्ज एडवर्ड हार्न ने खोज कार्य जारी रखा। किटो द्वारा उत्खनित वस्तुएँ भारतीय संग्रहालय कलकत्ता में हैं। वैज्ञानिक उत्खनन एच.बी. ओरटल ने उत्खनन 200 वर्ग फुट क्षेत्र में किया गया। सारनाथ मंदिर तथा अशोक स्तंभ के अतिरिक्त मूर्तियाँ एवं शिलालेख मिले हैं। प्रमुख मूर्तियों में बोधिसत्व की विशाल अभिलिखित मूर्ति, आसनस्थ बुद्ध की मूर्ति, अवलोकितेश्वर, बोधिसत्व, मंजुश्री, नीलकंठ की मूर्तियाँ तथा तारा, वसुंधरा आदि की प्रतिमाएँ हैं। पुरातत्त्व विभाग के डायरेक्टर जनरल जान मार्शल ने स्टेनकोनो और दयाराम साहनी के साथ 1907 में सारनाथ के उत्तर-दक्षिण क्षेत्रों में उत्खनन किया। उत्खनन से उत्तर क्षेत्र में तीन कुषाणकालीन मठों का पता चला। दक्षिण क्षेत्र से विशेषकर धर्मराजिका स्तूप के आसपास तथा धमेख स्तूप के उत्तर से उन्हें अनेक छोटे-छोटे स्तूपों एवं मंदिरों के अवशेष मिले। कुमारदेवी के अभिलेखों से युक्त कुछ मूर्तियाँ विशेष महत्त्व की हैं। 1914 से 1915 ई. में एच. हारग्रीव्स ने मुख्य मंदिर के पूर्व और पश्चिम में खुदाई करवाई। उत्खनन में मौर्यकाल से लेकर मध्यकाल तक की अनेक वस्तुएँ मिली है । दयाराम साहनी के निर्देशन में धमेख स्तूप से मुख्य मंदिर तक के संपूर्ण क्षेत्र का उत्खनन किया गया। उत्खनन से दयाराम साहनी को एक 1 फुट 9 ½ इंच लंबी, 2 फुट 7 इंच चौड़ी तथा 3 फुट गहरी एक नाली के अवशेष मिले। धमेख स्तूप से आधा मील दक्षिण स्तूप स्थित है । गौतम बुद्ध ने अपने पाँच शिष्यों को सबसे प्रथम उपदेश सुनाया था जिसके स्मारकस्वरूप स्तूप का निर्माण हुआ। ह्वेनसाँग ने स्तूप की स्थिति सारनाथ से 0.8 कि॰मी॰ दक्षिण-पश्चिम में बताई है, 91.44 मी. ऊँचा था। स्तूप के ऊपर एक अष्टपार्श्वीय बुर्जी बनी हुई है। इसके उत्तरी दरवाजे पर पड़े हुए पत्थर पर फ़ारसी में एक लेख उल्लिखित है । टोडरमल के पुत्र गोवर्द्धन सन् 1589 ई. (996 हिजरी) में इसे बनवाया था। बादशाह हुमायूँ ने स्तूप स्थान पर एक रात व्यतीत की थी । एलेक्जेंडर कनिंघम ने 1836 ई. में स्तूप में रखे समाधि चिन्हों की खोज में इसके केंद्रीय भाग में खुदाई की, इस खुदाई सन् 1905 ई. में श्री ओरटेल ने इसकी पुनः खुदाई की। उत्खनन में इन्हें कुछ मूर्तियाँ, स्तूप की अठकोनी चौकी और चार गज ऊँचे चबूतरे मिले। चबूतरे में प्रयुक्त ऊपर की ईंटें 12 इंच X10 इंच X2 ¾ इंच और 14 ¾ X10 इंच X2 ¾ इंच आकार की थीं जबकि नीचे प्रयुक्त ईंटें 14 ½ इंच X 9 इंच X2 ½ इंच आकार की थीं । गुप्तकाल में 'त्रिमेधि स्तूप' कहते थे। 1794 ई. में जगत सिंह के आदमियों ने काशी का प्रसिद्ध मुहल्ला जगतगंज बनाने के लिए इसकी ईंटों को खोद डाला था। खुदाई के समय 8.23 मी. की गहराई पर एक प्रस्तर पात्र के भीतर संगरमरमर की मंजूषा में कुछ हड्डिया: एवं सुवर्णपात्र, मोती के दाने एवं रत्न मिले थे, जिसे उन्होंने विशेष महत्त्व का न मानकर गंगा में प्रवाहित कर दिया। यहाँ से प्राप्त महीपाल के समय के 1026 ई. स्तूप का जीर्णोद्धार किया गया था । 1907-08 ई. में मार्शल के निर्देशन में खुदाई से स्तूप के क्रमिक परिनिर्माणों के इतिहास का पता चला। इस स्तूव्यास 13.48 मी. (44 फुट 3 इंच) था। इसमें प्रयुक्त कीलाकार ईंटों की माप 19 ½ इंच X 14 ½ इंच X 2 ½ इंच और 16 ½ इंच X 12 ½ इंच X 3 ½ इंच थी। सर्वप्रथम परिवर्द्धन कुषाण-काल या आरंभिक गुप्त-काल में हुआ। इस समय स्तूप में प्रयुक्त ईंटों की माप 17 इंच X10 ½ इंच X 2 ¾ ईच थी। दूसरा परिवर्द्धन हूणों के आक्रमण के पश्चात् पाँचवी या छठी शताब्दी में हुआ। इस समय इसके चारों ओर 16 फुट (4.6 मीटर) चौड़ा एक प्रदक्षिणा पथ जोड़ा गया। तीसरी बार स्तूप का परिवर्द्धन हर्ष के शासन-काल (7वीं सदी) में हुआ। उस समय स्तूप के गिरने के डर से प्रदक्षिणा पथ को ईंटों से भर दिया गया और स्तूप तक पहुँचने के लिए सीढ़ियाँ लगा दी गईं। चौथा परिवर्द्धन बंगाल नरेश महीपाल ने महमूद ग़ज़नवी के आक्रमण के दस वर्ष वाद कराया। अंतिम पुनरुद्धार लगभग 1114 ई. से 1154 ई. के मध्य हुआ। इसके पश्चात् मुसलमानों के आक्रमण ने सारनाथ को नष्ट कर दिया था । उत्खनन से इस स्तूप से दो मूर्तियाँ मिलीं। ये मूर्तियाँ सारनाथ से प्राप्त मूर्तियों में मुख्य हैं। पहली मूर्ति कनिष्क के राज्य संवत्सर 3 (81 ई.) में स्थापित विशाल बोधिसत्व प्रतिमा और दूसरी धर्मचक्रप्रवर्तन मुद्रा में भगवान बुद्ध की मूर्ति। ये मूर्तियाँ सारनाथ की सर्वश्रेष्ठ कलाकृतियाँ हैं। यह विहार धर्मराजिका स्तूप से उत्तर की ओर स्थित है। पूर्वाभिमुख इस विहार की कुर्सी चौकोर है जिसकी एक भुजा 18.29 मी. है। सातवीं शताब्दी में भारत-भ्रमण पर आए चीनी यात्री ह्वेन त्सांग ने इसका वर्णन 200 फुट ऊँचे मूलगंध कुटी विहार के नाम से किया है। इस मंदिर पर बने हुए नक़्क़ाशीदार गोले और नतोदर ढलाई, छोटे-छोटे स्तंभों तथा सुदंर कलापूर्ण कटावों आदि से यह निश्चित हो जाता है कि इसका निर्माण गुप्तकाल में हुआ था। परंतु इसके चारों ओर मिट्टी और चूने की बनी हुई पक्की फर्शों तथा दीवारो के बाहरी भाग में प्रयुक्त अस्त-व्यस्त नक़्क़ाशीदार पत्थरों के आधार पर कुछ विद्धानों ने इसे 8वीं शताब्दी का माना है। भगवान बुद्ध की एक सोने की चमकीली आदमक़द मूर्ति स्थापित थी। मंदिर में प्रवेश के लिए तीनों दिशाओं में एक-एक द्वार और पूर्व दिशा में मुख्य प्रवेश द्वार (सिंह द्वार) था। कालांतर में जब मंदिर की छत कमज़ोर होने लगी तो उसकी सुरक्षा के लिए भीतरी दक्षिणापथ को दीवारें उठाकर बन्द कर दिया गया। अत: आने जाने का रास्ता केवल पूर्व के मुख्य द्वार से ही रह गया। तीनों दरवाजों के बंद हो जाने से ये कोठरियों जैसी हो गई, जिसे बाद में छोटे मंदिरों का रूप दे दिया गया। 1904 ई. में श्री ओरटल को खुदाई कराते समय दक्षिण वाली कोठरी में एकाश्मक पत्थर से निर्मित 9 ½ X 9 ½ फुट की मौर्यकालीन वेदिका मिली। इस वेदिका पर उस समय की चमकदार पालिश है। यह वेदिका प्रारम्भ में धर्मराजिका स्तूप के ऊपर हार्निका के चारों ओर लगी थीं। इस वेदिका पर कुषाणकालीन ब्राह्मी लिपि में दो लेख अंकित हैं- 'आचाया(र्य्या)नाँ सर्वास्तिवादि नां परिग्रहेतावाम्' और 'आचार्यानां सर्वास्तिवादिनां परिग्राहे'। इन दोनों लेखों से यह ज्ञात होता है कि तीसरी शताब्दी ई. में यह वेदिका सर्वास्तिवादी संप्रदाय के आचार्यों को भेंट की गई थी। मुख्य मंदिर से पश्चिम की ओर एक अशोककालीन प्रस्तर-स्तंभ है जिसकी ऊँचाई प्रारंभ में 17.55 मी. (55 फुट) थी। वर्तमान समय में इसकी ऊँचाई केवल 2.03 मीटर (7 फुट 9 इंच) है। स्तंभ का ऊपरी सिरा अब सारनाथ संग्रहालय में है। नींव में खुदाई करते समय यह पता चला कि इसकी स्थापना 8 फुट X16 फुट X18 इंच आकार के बड़े पत्थर के चबूतरे पर हुई थी। इस स्तंभ पर तीन लेख उल्लिखित हैं। पहला लेख अशोक कालीन ब्राह्मी लिपि में है जिसमें सम्राट ने आदेश दिया है कि जो भिछु या भिक्षुणी संघ में फूट डालेंगे और संघ की निंदा करेंगे: उन्हें सफ़ेद कपड़े पहनाकर संघ के बाहर निकाल दिया जाएगा। दूसरा लेख कुषाण-काल का है। तीसरा लेख गुप्त काल का है, जिसमें सम्मितिय शाखा के आचार्यों का उल्लेख किया गया है। यह स्तूप एक ठोस गोलाकार बुर्ज का व्यास 28.35 मीटर (93 फुट) और ऊँचाई 39.01 मीटर (143 फुट) 11.20 मीटर तक इसका घेरा सुंदर अलंकृत शिलापट्टों से आच्छादित है। इसका यह आच्छादन कला की दृष्टि से अत्यंत सुंदर एवं आकर्षक है। अलंकरणों में मुख्य रूप से स्वस्तिक, नन्द्यावर्त सदृश विविध आकृतियाँ और फूल-पत्ती के कटाव की बेलें हैं। इस प्रकार के वल्लरी प्रधान अलंकरण बनाने में गुप्तकाल के शिल्पी पारंगत थे। स्तूप की नींव अशोक के समय में पड़ी एवं विस्तार कुषाण-काल में हुआ, लेकिन गुप्तकाल में यह पूर्णत: तैयार हुआ। यह साक्ष्य पत्थरों की सजावट और उन पर गुप्त लिपि में में वर्णित है। कनिंघम ने सर्वप्रथम धमाक स्तूप के मध्य खुदाई कराकर 0.91 मीटर (3 फुट) नीचे एक शिलापट्ट प्राप्त किया था। इस शिलापट्ट पर सातवीं शताब्दी की लिपि में 'ये धर्महेतु प्रभवा' मंच अंकित था। स्तूप में प्रयुक्त ईंटें 14 ½ इंच X 8 ½ इंच X 2 ¼ इंच आकार की हैं| धमेख शब्द की उत्पत्ति के बारे में विद्वानों का मत है कि यह संस्कृत के 'धर्मेज्ञा' शब्द से निकला है। किंतु 11 वीं शताब्दी की एक मुद्रा पर 'धमाक जयतु' शब्द मिलता है। जिससे उसकी उत्पत्ति का ऊपर लिखे शब्द से संबंधित होना संदेहास्पद लगता है। इस मुद्रा में इस स्तूप को धमाक कहा गया है। बुद्ध ने सर्वप्रथम यहाँ 'धर्मचक्र' प्रारंभ किया था। अत: ऐसा संभव है कि इस कारण ही इसका नाम धमेख पड़ा हो। सारनाथ के क्षेत्र की खुदाई से गुप्तकालीन अनेक कलाकृतियां तथा बुद्ध प्रतिमाएं प्राप्त हुई हैं । सारनाथ में एक प्राचीन शिव मंदिर तथा एक जैन मंदिर भी स्थित हैं। जैन मंदिर 1824 ई. में बना था; इसमें श्रियांशदेव की प्रतिमा है। तीर्थंकर सारनाथ से लगभग दो मील दूर स्थित सिंह ग्राम में तीर्थंकर भाव को प्राप्त हुए थे। प्रमुख काशीराज प्रकटादित्य का शिलालेख है। इसमें बालादित्य नरेश का उल्लेख है जो फ़्लीट के मत में वही बालादित्य है मिहिरकुल हूण के साथ वीरतापूर्वक लडे थे । 7वीं शती के पूर्व है। 1905 ई. में जब पुरातत्त्व विभाग ने खुदाई आरंभ से सारनाथ का जीर्णोद्धार हुआ। 'मूलगंध कुटी विहार' मंदिर बन गया है । साहित्यकार व इतिहासकार सत्येन्द्र कुमार पाठक के साथ दिव्य रश्मि के संपादक डॉ. राकेश दत्त मिश्र द्वारा 13 जनवरी 2022 को सारनाथ परिभ्रमण के तहत सारनाथ में स्थित शैव धर्म , बौद्ध धर्म एवं जैन धर्म की सांस्कृतिक विरासत एवं पुरातन काल की पुरातात्विक धरोहरों को अवलोकन किया गया है । सारनाथ का प्राचीन नाम सारंग , ऋषिपत्तन कहा गया है । हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 19 Jan 2022 04:17 AM PST |