प्राइमरी का मास्टर ● इन |
- जल्द बनेगा एक वर्षीय बीएड पाठ्यक्रम, नए सत्र से लागू करने की तैयारी
- CBSE Science Challenge: सीबीएसई आयोजित करेगा साइंस चैलेंज, आठवीं से दसवीं के छात्र ले सकेंगे भाग
- विधानसभा निर्वाचन हेतु प्रशिक्षण ऑनलाइन संपादित कराए जाने एवं पति-पत्नी दोनों सेवा में होने पर किसी एक की ही निर्वाचन ड्यूटी लगाए जाने के संबंध में RSM का ज्ञापन
- बेसिक शिक्षा विभाग के विद्यालयों की वार्षिक परीक्षाओं पर भी संकट के बादल
- UPTET की आंच में झुलसी जूनियर हाईस्कूल एडेड शिक्षक भर्ती
- बेसिक शिक्षा DBT : और 20 लाख बच्चों को भुगतान करने का निर्देश, 40 लाख का बैंक खाता व आधार से जुड़े होने का परीक्षण जारी
- 23 जनवरी को होने वाली UPTET परीक्षा को लेकर यूपी सरकार सतर्क, जारी हुए ये महत्वपूर्ण निर्देश, हर केंद्र पर बनेगी कोविड हेल्प डेस्क, तैयारी हेतु समीक्षा बैठक आज
- कोरोना काल में स्कूल बंद होने से छोटी कक्षाओं के छात्र अक्षर ज्ञान भी भूले
- यूपी बोर्ड : दो लाख सीसीटीवी कैमरों से बोर्ड परीक्षा की निगरानी, विधानसभा चुनाव के बाद मार्च अंत में प्रस्तावित है परीक्षा
- कंपनियां नहीं चला सकतीं आनलाइन शैक्षिक कोर्स, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने छात्रों को किया सतर्क
| जल्द बनेगा एक वर्षीय बीएड पाठ्यक्रम, नए सत्र से लागू करने की तैयारी Posted: 18 Jan 2022 07:21 PM PST जल्द बनेगा एक वर्षीय बीएड पाठ्यक्रम, नए सत्र से लागू करने की तैयारी नेशनल टीचर आफ काउंसिल एजुकेशन ने लखनऊ विश्वविद्यालय के डीन एजुकेशन की अध्यक्षता में बनाई है कमेटी लखनऊ : परास्नातक कक्षाओं में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए अच्छी खबर है। सब कुछ ठीक रहा तो नेशनल टीचर आफ काउंसिल एजुकेशन (एनसीटीई) नए सत्र से एक वर्षीय बीएड पाठ्यक्रम शुरू कर सकती है। खास बात ये है कि एनसीटीई ने नई शिक्षा नीति के अनुसार इसका पाठ्यक्रम बनाने की जिम्मेदारी लखनऊ विश्वविद्यालय की डीन एजुकेशन प्रो. तृप्ता त्रिवेदी की अध्यक्षता में गठित कमेटी को दी है। कमेटी ने पाठ्यक्रम का स्ट्रक्चर तैयार कर लिया है। फरवरी के अंत तक पाठ्यक्रम बनाकर मंजूरी के लिए भेज दिया जाएगा। वर्ष 2014 से पहले बीएड पाठ्यक्रम एक वर्ष का होता था। उसके बाद से दो वर्षीय पाठ्यक्रम लागू हो गया। अब नई शिक्षा नीति- 2020 के अनुसार फिर से एक वर्षीय पाठ्यक्रम शुरू होगा। एनसीटीई की ओर से एक वर्षीय बीएड पाठ्यक्रम बनाने के लिए छह सदस्यीय कमेटी बनाई गई है। इसमें लखनऊ विश्वविद्यालय की डीन एजुकेशन प्रो. तृप्ता त्रिवेदी को चेयरपर्सन बनाया गया है। सदस्य के रूप में तमिलनाडु टीचर एजुकेशन यूनिवर्सिटी के प्रो. एस. मनी, जम्मू यूनिवर्सिटी की प्रो. रेनू खुराना, वनस्थली विद्यापीठ के प्रो. अजय खुराना, एमएसयू बड़ौदा की प्रो. छाया गोयल और एसवीपीजी गोरखपुर विवि के प्रो. बृजेश पांडेय शामिल हैं। दो सेमेस्टर होंगे : एक वर्षीय पाठ्यक्रम दो सेमेस्टर पर आधारित होगा। प्रो. तृप्ता त्रिवेदी ने बताया कि नई शिक्षा नीति के अनुसार इसका स्ट्रक्चर तैयार हो गया है। स्कूली शिक्षा में बदलाव के आधार पर पाठ्यक्रम तैयार करने पर काम चल रहा है। इसके लिए सदस्यों के साथ आनलाइन मीटिंग में काफी चीजें स्पष्ट हो चुकी हैं। यह पाठ्यक्रम च्वाइस बेस क्रेडिट सिस्टम (सीबीसीएस) के तहत होगा। हमारी कोशिश है कि फरवरी के अंत तक पाठ्यक्रम तैयार कर भेज दिया जाए, जिससे एनसीटीई नए सत्र से इसे लागू कर सके। |
| CBSE Science Challenge: सीबीएसई आयोजित करेगा साइंस चैलेंज, आठवीं से दसवीं के छात्र ले सकेंगे भाग Posted: 18 Jan 2022 06:55 PM PST CBSE Science Challenge: सीबीएसई आयोजित करेगा साइंस चैलेंज, आठवीं से दसवीं के छात्र ले सकेंगे भाग CBSE Science Challenge: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने परीक्षाओं से पहले ही छात्र-छात्राओं की तैयारी जांचने और उन्हें विज्ञान विषय के प्रति जागरूक करने के लिए साइंस चैलेंज कंपटीशन आयोजित करने का निर्णय किया है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने कक्षा आठवीं से दसवीं के छात्रों के लिए एक विज्ञान चुनौती की घोषणा की है। बोर्ड इस चुनौती को "शिक्षार्थियों के बीच जिज्ञासा, सवाल-जवाब और उच्च स्तरीय सोच पैदा करने की पहल के रूप में" बच्चों की उम्र के ऐसे पड़ाव पर आयोजित कर रहा है, जहां उनके लिए दुनिया को समझने के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी बेहद महत्वपूर्ण फैक्टर हैं। दीक्षा प्लेटफॉर्म पर हिंदी और अंग्रेजी दोनों में उपलब्ध होगा केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने बताया कि 'सीबीएसई साइंस चैलेंज' 17 जनवरी से 28 फरवरी, 2022 तक दीक्षा प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगा। यह चुनौती हिंदी और अंग्रेजी दोनों में उपलब्ध होगी और इसे बिना किसी भागीदारी शुल्क के सभी बोर्ड के छात्रों द्वारा लिया जा सकता है। सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों को अपने छात्रों को cbse.gov.in पर पंजीकृत करना आवश्यक है। एक बार पंजीकृत होने के बाद उन्हें पंजीकरण आईडी प्राप्त होगी जिसका उपयोग छात्रों को मंच पर चुनौती का उपयोग करने में सक्षम होने के लिए करना होगा। DIKSHA एप के नवीनतम संस्करण पर भी मौजूद सीबीएसई से संबद्ध नहीं स्कूलों के छात्र सीधे प्लेटफॉर्म पर चुनौती का उपयोग कर सकते हैं। चुनौती/ पाठ्यक्रम को पूरा करने वाले सभी छात्रों को भागीदारी प्रमाण-पत्र प्रदान किया जाएगा। चुनौती के लिए आवेदन करने वाले छात्रों को DIKSHA एप्लिकेशन के नवीनतम संस्करण को डाउनलोड करने या प्रमाण-पत्र प्राप्त करने के लिए DIKSHA वेबसाइट तक पहुंचने की सलाह दी जाती है। रमन यंग साइंस इनोवेटर अवार्ड्स के लिए होंगे क्वालीफाई स्कूल यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी लेते हैं कि छात्रों के पास वेबसाइट या एप पर उनके नाम की सही वर्तनी है। स्कूल प्रत्येक कक्षा से पांच बच्चों को नामांकित कर सकते हैं, जिन्होंने सीधे विज्ञान चुनौती में भागीदारी प्रमाण-पत्र प्राप्त किया है, वे दूसरे चरण में या रमन यंग साइंस इनोवेटर अवार्ड्स के राष्ट्रीय क्वालीफायर के लिए पात्र बन जाएंगे। |
| Posted: 18 Jan 2022 06:17 PM PST |
| बेसिक शिक्षा विभाग के विद्यालयों की वार्षिक परीक्षाओं पर भी संकट के बादल Posted: 18 Jan 2022 06:11 PM PST बेसिक शिक्षा विभाग के विद्यालयों की वार्षिक परीक्षाओं पर भी संकट के बादल कोरोना काल में बेसिक शिक्षा विभाग के कक्षा एक से आठवीं तक के सरकारी स्कूलों में छमाही की परीक्षा प्रभावित होने के बाद अब वार्षिक परीक्षाओं पर भी संकट के बादल मंडरा गए हैं। फिलहाल विद्यालय 23 जनवरी तक बंद हैं। अप्रैल से नया सत्र शुरू होना है। पिछले दो वर्षों से सरकारी स्कूलों के बच्चे प्रमोट किए जा रहे हैं। वार्षिक कैलेंडर के मुताबिक नवंबर के अंतिम माह तक छमाही परीक्षाएं कराई जाती है। जो बच्चा तीन साल पहले पांचवीं कक्षा में था वो बिना ठीक से पढ़े और परीक्षा दिए नौवीं कक्षा में प्रवेश के लिए तैयार खड़ा होगा। अभी शासन की ओर से बच्चों को विद्यालय न बुलाए जाने के आदेश हैं। परीक्षाएं कराने संबंधी निर्देश आएंगे तो उसका पालन किया जाएगा। |
| UPTET की आंच में झुलसी जूनियर हाईस्कूल एडेड शिक्षक भर्ती Posted: 17 Jan 2022 07:32 PM PST UPTET की आंच में झुलसी जूनियर हाईस्कूल एडेड शिक्षक भर्ती प्रयागराज : अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) जूनियर हाईस्कूल के लिए शिक्षक भर्ती प्रक्रिया उत्तर प्रदेश परीक्षा नियामक प्राधिकारी (पीएनपी) ने शुरू तो कराई, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण ढंग से वह अटक गई। पीएनपी ने इसकी परीक्षा कराने के बाद 15 नवंबर-2021 को परिणाम घोषित किया। इसके 13 दिन बाद उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी) प्रस्तावित थी, जिसे कराने की तैयारी में जूनियर हाईस्कूल शिक्षक भर्ती के सफल अभ्यर्थियों की सूची कहीं पीछे रह गई और यूपीटीईटी पर्चा लीक होने के कारण नहीं हो सकी। यूपीटीईटी का प्रश्नपत्र परीक्षा के दिन इंटरनेट मीडिया पर वायरल हो गया था। पुष्टि होने के बाद परीक्षा रद कर दी गई। इसे विपक्षियों ने मुद्दा बनाया, जिससे सरकार पर भी प्रश्न उठे। परीक्षा रद होने की जांच एसटीएफ ने शुरू की। पीएनपी के तत्कालीन सचिव भी जांच के घेरे में आए। पूछताछ किए जाने और उन पर कार्रवाई किए जाने की प्रक्रिया के बीच जूनियर हाईस्कूल शिक्षक भर्ती के परिणाम की कोई पूछ परख नहीं हुई। शासन ने अनिल भूषण चतुर्वेदी को नया सचिव बनाकर भेजा। उसके बाद यूपीटीईटी 23 जनवरी को नए सिरे से कराए जाने की तिथि घोषित हो गई। ऐसे में नए सचिव परीक्षा कराने के लिए केंद्रों का नए सिरे से निर्धारण, प्रश्नपत्र तैयार कराने, उसके प्रकाशन के लिए एजेंसी चयन आदि कार्यों में व्यस्त हो गए, क्योंकि यह परीक्षा अब चुनौतीपूर्ण हो गई है। यूपीटीईटी की आंच में जूनियर हाईस्कूल शिक्षक भर्ती अटक गई। सरकार चुनावी मोड में आ गई, जिससे शिक्षक भर्ती परिणाम घोषित करने के बावजूद प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी। अब भी कोई बोलने को तैयार नहीं है और परेशान अभ्यर्थी मांग कर रहे हैं कि भर्ती प्रक्रिया जल्द पूरी की जाए। |
| Posted: 17 Jan 2022 07:21 PM PST बेसिक शिक्षा DBT : और 20 लाख बच्चों को भुगतान करने का निर्देश, 40 लाख का बैंक खाता व आधार से जुड़े होने का परीक्षण जारी लखनऊ : इन दिनों कड़ाके की ठंड पड़ रही है। सरकार ने बेसिक शिक्षा परिषद व सहायता प्राप्त प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को ठंड से बचाने के लिए स्वेटर दिलाने के इंतजाम भी किए हैं लेकिन, अफसरों की कार्यशैली से सभी बच्चों को उसका लाभ अब तक नहीं मिल सका है। करीब 20 लाख बच्चों के अभिभावकों को जल्द धन मिलने जा रहा है, जबकि 40 लाख छात्र-छात्रओं को धन भेजने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है। सरकार ने पहली बार प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को मुफ्त दी जाने वाली सामग्री खरीदने का जिम्मा अभिभावकों को सौंपा, हर छात्र को 1100 रुपये उनके बैंक खाते में भेजने का निर्देश दिया। नवंबर में एक करोड़ 20 लाख छात्र-छात्रओं के अभिभावकों के खाते में धन भेजा जा चुका है। इसके बाद 60 लाख छात्र-छात्रओं के अभिभावकों को धन भेजना था, करीब 20 लाख को भुगतान करने का निर्देश हो गया है, 40 लाख अभिभावकों का बैंक खाता व उसका आधार से जुड़े होने का परीक्षण चल रहा है। |
| Posted: 17 Jan 2022 07:03 PM PST 23 जनवरी को होने वाली UPTET परीक्षा को लेकर यूपी सरकार सतर्क, जारी हुए ये महत्वपूर्ण निर्देश UPTET: यूपीटीईटी के लिए हर केंद्र पर बनेगी कोविड हेल्प डेस्क, तैयारी हेतु समीक्षा बैठक आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी) के लिए दागी व संदिग्ध छवि वाले संस्थानों को केंद्र कतई न बनाएं। इनकी पहले ही जांच कर ली जाए। परीक्षा केंद्र निर्धारण में संस्थान के पिछले रिकॉर्ड को जरूर देखें। टीईटी परीक्षा का पेपर लीक होने के बाद योगी सरकार यह परीक्षा आगामी 23 जनवरी को कराने जा रही है। इस बार सरकार काफी सतर्क है। इसलिए मुख्यमंत्री ने सोमवार को टीम-9 के अधिकारियों के साथ बैठक में इस पर खास तौर पर निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि टीईटी के सुव्यवस्थित आयोजन के संबंध में पुख्ता तैयारियां कर ली जाएं। कोविड प्रोटोकॉल का अनुपालन हो। हर केंद्र पर मास्क, सैनिटाइजर, इंफ्रारेड थरमामीटर की उपलब्धता होनी चाहिए। सीएम ने कहा कि परीक्षा की शुचिता के दृष्टिगत अपर मुख्य सचिव गृह और एडीजी कानून-व्यवस्था, प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा के साथ जिलाधिकारियों, बेसिक शिक्षा अधिकारियों व परीक्षा आयोजन से जुड़े अन्य अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संवाद कर व्यवस्थाओं की पड़ताल करें। कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए 23 जनवरी को होने जा रही उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपी-टीईटी) के प्रत्येक केंद्र पर कोविड हेल्प डेस्क बनाई जाएगी। अपर मुख्य सचिव अवनीश कुमार अवस्थी ने टीईटी के आयोजन के संबंध में सोमवार को सभी कमिश्नर, पुलिस आयुक्त, डीएम और एसएसपी को निर्देश जारी किए। केंद्रों पर पर्याप्त संख्या में थर्मल स्कैनर और ऑक्सीमीटर की व्यवस्था रखी जाएगी और प्रत्येक परीक्षा कक्ष में हैंड सेनेटाइजर रखे जाएंगे। कुछ अतिरिक्त सर्जिकल मास्क भी रखें जाएंगे, ताकि अभ्यर्थियों को उपलब्ध कराया जा सके। अभ्यर्थियों को उचित दूरी पर बैठाया जाएगा। केंद्र पर एक मेडिकल टीम भी तैनात रहेगी जिससे किसी प्रकार की चिकित्सकीय आवश्यकता को पूरा किया जा सके। केंद्र व्यवस्थापक, दो कक्ष निरीक्षकों और पर्यवेक्षक के सामने परीक्षा शुरू होने से पहले प्रश्नपत्र खुलवाएंगे और परीक्षा होने के बाद ओएमआर उत्तरपत्रक बंद करवाएंगे। गौरतलब है कि 23 को 2532 केंद्रों पर पहली पाली और 1733 केंद्रों पर दूसरी पाली की परीक्षा होगी। समीक्षा बैठक आज 23 जनवरी को होने वाली यूपीटीईटी 2021 की तैयारियों को लेकर प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा दीपक कुमार मंगलवार दोपहर 12 बजे से ऑनलाइन समीक्षा बैठक करेंगे। सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी अनिल भूषण चतुर्वेदी ने प्रदेश के सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों और बेसिक शिक्षा अधिकारियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं। |
| कोरोना काल में स्कूल बंद होने से छोटी कक्षाओं के छात्र अक्षर ज्ञान भी भूले Posted: 17 Jan 2022 06:45 PM PST कोरोना काल में स्कूल बंद होने से छोटी कक्षाओं के छात्र अक्षर ज्ञान भी भूले कोरोना काल में स्कूलों के बंद होने से छात्रों की सीखने और पढ़ने की क्षमता प्रभावित हो रही है। इस कारण छोटी कक्षाओं में पढ़ने वाले छात्र अक्षर भी भूलने लगे हैं। ऐसे छात्रों की शिक्षा को फिर से पटरी पर लाने की तैयारी है। तस्वीरों, कहानियों और दूसरी गतिविधियों के जरिए छात्रों को अक्षर पढ़ने, लिखने और बोलने को लेकर सक्षम बनाया जाएगा। एससीईआरटी का परिपत्र जारी: राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद् (एससीईआरटी) दिल्ली की ओर से हाल ही में परिपत्र जारी किया गया है। जिसे लेकर दिल्ली के सरकारी स्कूल से लेकर निगम स्कूलों में 14 हफ्तों के लिए नर्सरी से आठवीं के छात्रों के लिए विशेष अभियान चलेगा। इस अभियान को सभी स्कूलों में लागू करने को लेकर दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। साथ ही दिल्ली के अलग-अलग जिलों को लेकर नौ नोडल अधिकारियों की एक समिति भी गठित की गई है। छात्रों को कार्य पुस्तिका मिलेगी: छात्रों को सप्ताह में छह कार्य पुस्तिका उपलब्ध कराई जाएंगी। अंग्रेजी, हिंदी और अंक गणित की दो-दो लघु कथाएं, गीत, कविताएं और संख्यात्मक गतिविधियां दी जाएंगी। इसके अलावा चित्र देखकर समझने और कहानी बनाने से जुड़ी गतिविधियां भी अभियान का हिस्सा होंगी। कई माध्यमों का प्रयोग: एससीईआरटी के अनुसार इन कार्य पुस्तिका के माध्यम से छात्रों को बोलने, सुनने, पढ़ने, लिखने और संख्यात्मक गतिविधियों को करने के लिए उन्मुख बनाना जाएगा, ताकि स्कूल बंद होने के वर्तमान चरण के दौरान उनकी मूलभूत सीखने की क्षमता में सीखने की हानि कम से कम हो। रिपोर्ट में क्या वर्ष 2021 की रिपोर्ट के अनुसार, कोविड के चलते सभी कक्षा के छात्रों में सीखने की क्षमता कम हुई है। दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने पिछले वर्ष अक्तूबर में रिपोर्ट के हवाले से भी यह जानकारी दी थी। वर्ष 2019-20 की तुलना में 2020-2021 में 17 फीसदी से अधिक छात्र अक्षर नहीं पढ़ सके। यह केवल प्राथमिक कक्षा के छात्रों की बात नहीं है, बल्कि बड़ी कक्षा में भी ऐसा देखने को मिला है। 14-18 वर्ष की उम्र वाले 80 छात्रों का सीखने का स्तर कम हुआ है। सामाजिक, शारीरिक और मानसिक प्रभाव भी पड़ा लैसेंट में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार स्कूलों के बंद होने का छात्रों पर सामाजिक, शारीरिक और मानसिक प्रभाव भी पड़ता है। यूनिसेफ की एक रिपोर्ट में भी एक तिहाई अभिभावकों ने बच्चों के सामाजिक और भावनात्मक स्वास्थ्य प्रभावित होने के बारे में सूचना दी है। |
| Posted: 18 Jan 2022 04:14 PM PST यूपी बोर्ड : दो लाख सीसीटीवी कैमरों से बोर्ड परीक्षा की निगरानी, विधानसभा चुनाव के बाद मार्च अंत में प्रस्तावित है परीक्षा ● 2022 की 10वीं-12वीं परीक्षा के लिए प्रस्तावित 8266 केंद्र ● नकल विहीन परीक्षा कराने के लिए अभी से तैयारी प्रयागराज : विधानसभा चुनाव के बाद मार्च अंत में प्रस्तावित यूपी बोर्ड की हाईस्कूल-इंटरमीडिएट परीक्षा 2022 में नकल पर रोक लगाने के लिए दो लाख से अधिक सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जाएगी। बोर्ड की ओर से 8266 केंद्रों पर परीक्षा प्रस्तावित है। वैसे तो केंद्रों की अंतिम सूची 10 फरवरी को जारी होगी लेकिन बोर्ड ने नकल विहीन परीक्षा कराने के लिए अभी से तैयारी शुरू कर दी है। परीक्षा केंद्रों में उपलब्ध आवश्यक संसाधनों का ब्योरा जुटाया जा रहा है। 95 हजार से अधिक कमरों और परिसर में दो लाख से अधिक सीसीटीवी कैमरे स्थापित हैं। आवश्यकता पड़ने पर कैमरों की संख्या और बढ़ाई जा सकती है। इसके अलावा परीक्षा कक्षा में चल रही गतिविधि की निगरानी के लिए कैमरों में वायस रिकॉर्डर भी लगवाए गए हैं ताकि बोल-बोल कर नकल न होने पाए। सीसीटीवी कैमरों की मदद से परीक्षा कक्ष की गतिविधियों की वेबकास्टिंग भी कराएंगे ताकि जिला स्तर पर जिला विद्यालय निरीक्षक और लखनऊ शिक्षा निदेशालय में बने कंट्रोल रूम में बैठे अधिकारी भी नजर रख सकें। परीक्षार्थियों को उत्तर पुस्तिका के प्रत्येक पन्ने पर अपनी राइटिंग में कॉपी का क्रमांक और अपना अनुक्रमांक लिखना होगा। 2022 की बोर्ड परीक्षा के लिए 10वीं में 27,83,742 और 12वीं में 23,91,841 कुल 51,74,583 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। UPMSP UP Board 10th, 12th Exam 2022 : दो लाख सीसीटीवी कैमरों से होगी बोर्ड परीक्षा की निगरानी UPMSP UP Board 10th, 12th Exam 2022 : विधानसभा चुनाव के बाद मार्च अंत में प्रस्तावित यूपी बोर्ड की हाईस्कूल-इंटरमीडिएट परीक्षा 2022 में नकल पर रोक लगाने के लिए दो लाख से अधिक सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जाएगी। बोर्ड की ओर से 8266 केंद्रों पर परीक्षा प्रस्तावित है। वैसे तो केंद्रों की अंतिम सूची 10 फरवरी को जारी होगी लेकिन बोर्ड ने नकल विहीन परीक्षा कराने के लिए अभी से तैयारी शुरू कर दी है। परीक्षा केंद्रों में उपलब्ध आवश्यक संसाधनों का ब्योरा जुटाया जा रहा है। 95 हजार से अधिक कमरों और परिसर में दो लाख से अधिक सीसीटीवी कैमरे स्थापित हैं। आवश्यकता पड़ने पर कैमरों की संख्या और बढ़ाई जा सकती है। इसके अलावा परीक्षा कक्षा में चल रही गतिविधि की निगरानी के लिए कैमरों में वायस रिकॉर्डर भी लगवाए गए हैं ताकि बोल-बोल कर नकल न होने पाए। सीसीटीवी कैमरों की मदद से परीक्षा कक्ष की गतिविधियों की वेबकास्टिंग भी कराएंगे ताकि जिला स्तर पर जिला विद्यालय निरीक्षक और लखनऊ शिक्षा निदेशालय में बने कंट्रोल रूम में बैठे अधिकारी भी नजर रख सकें। परीक्षार्थियों को उत्तर पुस्तिका के प्रत्येक पन्ने पर अपनी राइटिंग में कॉपी का क्रमांक और अपना अनुक्रमांक लिखना होगा। 2022 की बोर्ड परीक्षा के लिए 10वीं में 27,83,742 और 12वीं में 23,91,841 कुल 51,74,583 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। |
| कंपनियां नहीं चला सकतीं आनलाइन शैक्षिक कोर्स, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने छात्रों को किया सतर्क Posted: 18 Jan 2022 06:22 PM PST कंपनियां नहीं चला सकतीं आनलाइन शैक्षिक कोर्स, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने छात्रों को किया सतर्क नई दिल्ली : कोरोना काल में जब स्कूल-कालेज बंद पड़े हैं और छात्रों के पास पढ़ाई का एक मात्र जरिया आनलाइन ही बचा है। ऐसे में आनलाइन शिक्षा के नाम पर फर्जीवाड़े भी बढ़े हैं। फिलहाल विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने छात्रों को इसे लेकर सतर्क किया और सलाह दी है कि बगैर मान्यता और संबद्धता को जांचे किसी भी आनलाइन प्रोग्राम या कोर्स में दाखिला न लें। खासकर आनलाइन पढ़ाई करा रही शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी निजी कंपनियों को लेकर बिल्कुल सतर्क रहें, क्योंकि इन्हें ऐसे कोर्स चलाने की अनुमति नहीं है। उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए निर्धारित किए गए आनलाइन कोर्स के नियमों का हवाला देते हुए यूजीसी ने साफ किया है कि इन कोर्स को चलाने की अनुमति फिलहाल उन्हीं विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों को है जो यूजीसी के मानकों को पूरा करते है। इन कोर्स को किसी दूसरे संस्थानों या निजी कंपनियों को संचालित करने की अनुमति बिल्कुल भी नहीं है। ऐसे में शिक्षा से जुड़ी निजी क्षेत्र की जो भी आनलाइन कंपनियां छात्रों को इस तरह के कोर्स या प्रोग्राम में दाखिला देने का आफर दे रही हैं, वे बिल्कुल गलत है। ऐसी कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही इनकी गतिविधियों पर नजर भी रखी जा रही है। यूजीसी के मुताबिक आनलाइन पढ़ाई कराने वाली निजी क्षेत्र से जुड़ी इन कंपनियां की ओर से आनलाइन और दूरस्थ माध्यमों से संचालित होने वाले प्रोग्राम या कोर्स में यह कहते हुए दाखिला देने का प्रस्ताव किया जा रहा है कि वह विश्वविद्यालयों से संबद्ध हैं। इन कोर्स को चलाने की संबद्धता किसी भी उच्च शिक्षण संस्थान की ओर से दी ही नहीं जा सकती। यूजीसी : ऑनलाइन पाठ्यक्रमों की फ्रेंचाइजी नहीं दी जा सकती विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने निर्देश दिया है कि उच्च शिक्षण संस्थान फ्रेंचाइजी व्यवस्था के तहत ऑनलाइन या ओपन डिस्टेंस लर्निंग कार्यक्रम संचालित न करें। ऐसा करने पर संबंधित संस्थान और पाठ्यक्रम का दावा करने वाली फ्रेंचाइजी दोनों पर कार्रवाई की जाएगी। यूजीसी के अनुसार मान्यता सूची में शामिल संस्थान ही अनुमति वाले पाठ्यक्रम चला सकते हैं। आयोग को पता चला है कि एडटेक कंपनियां ओपन डिस्टेंस लर्निंग और ऑनलाइन पाठ्यक्रम में दाखिले के लिए विज्ञापन दे रही हैं। इनमें उच्च शिक्षण संस्थानों की फ्रेंचाइजी या समझौते का हवाला दिया गया है। छात्रों को आगाह किया यूजीसी ने छात्रों को भी आगाह किया है कि वे विज्ञापनों के झांसे में न आएं। किसी भी पाठ्यक्रम में दाखिले से पहले यूजीसी की वेबसाइट पर उसकी मान्यता व पात्रता की जांच जरूर करें। कंपनियां नहीं चला सकतीं आनलाइन शैक्षिक कोर्स, यूजीसी ने कहा- बगैर मान्यता और संवद्धता को जांचे आनलाइन प्रोग्राम या कोर्स में न लें दाखिला नई समस्या ★ यूजीसी ने कहा- बगैर मान्यता और संवद्धता को जांचे आनलाइन प्रोग्राम या कोर्स में न लें दाखिला ★ शिक्षा से जुड़ी निजी आनलाइन कंपनियां विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर चला रही है कोर्स नई दिल्ली : कोरोना काल में जब स्कूल-कालेज बंद पड़े हैं और छात्रों के पास पढ़ाई का एक मात्र जरिया आनलाइन ही बचा है। ऐसे में आनलाइन शिक्षा के नाम पर फर्जीवाड़े भी बढ़े हैं। फिलहाल विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने छात्रों को इसे लेकर सतर्क किया और सलाह दी है कि बगैर मान्यता और संबद्धता को जांचे किसी भी आनलाइन प्रोग्राम या कोर्स में दाखिला न लें। खासकर आनलाइन पढ़ाई करा रही शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी निजी कंपनियों को लेकर बिल्कुल सतर्क रहें, क्योंकि इन्हें ऐसे कोर्स चलाने की अनुमति नहीं है। उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए निर्धारित किए गए आनलाइन कोर्स के नियमों का हवाला देते हुए यूजीसी ने साफ किया है कि इन कोर्स को चलाने की अनुमति फिलहाल उन्हीं विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों को है जो यूजीसी के मानकों को पूरा करते है। इन कोर्स को किसी दूसरे संस्थानों या निजी कंपनियों को संचालित करने की अनुमति बिल्कुल भी नहीं है। ऐसे में शिक्षा से जुड़ी निजी क्षेत्र की जो भी आनलाइन कंपनियां छात्रों को इस तरह के कोर्स या प्रोग्राम में दाखिला देने का आफर दे रही हैं, वे बिल्कुल गलत है। ऐसी कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही इनकी गतिविधियों पर नजर भी रखी जा रही है। यूजीसी के मुताबिक आनलाइन पढ़ाई कराने वाली निजी क्षेत्र से जुड़ी इन कंपनियां की ओर से आनलाइन और दूरस्थ माध्यमों से संचालित होने वाले प्रोग्राम या कोर्स में यह कहते हुए दाखिला देने का प्रस्ताव किया जा रहा है कि वह विश्वविद्यालयों से संबद्ध हैं। इन कोर्स को चलाने की संबद्धता किसी भी उच्च शिक्षण संस्थान की ओर से दी ही नहीं जा सकती। |
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