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Friday, January 21, 2022

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रात को ट्रेन में सफर करने के नियमों में हुआ बदलाव, जानिए क्या क्या बदल और क्यों

Posted: 21 Jan 2022 01:57 AM PST

 



नई द‍िल्‍ली : भारतीय रेलवे की तरफ से ट्रेन में यात्रा करने के न‍ियमों में समय-समय पर बदलाव क‍िया जाता रहता है. जरूरी है क‍ि आपको रेलवे की तरफ से बदले जाने वाले न‍ियमों के बारे में पूरी जानकारी हो. इस बार रेलवे ने रात में यात्र‍ियों को नींद में होने वाली परेशानी को ध्‍यान में रखते हुए कुछ न‍ियम बनाए हैं. इसके बाद रात में यात्रियों की नींद डिस्‍टर्ब नहीं होगी.

तत्‍काल प्रभाव से लागू क‍िए गए नए न‍ियम

वेबसाइट india.com में प्रकाश‍ित खबर के अनुसार नए न‍ियमों को तत्‍काल प्रभाव से लागू कर द‍िया गया है. नए न‍ियमों के मुताब‍िक अब आपके आसपास कोई भी सहयात्री (Train Passenger) मोबाइल पर तेज आवाज में बात नहीं कर सकेगा और न ही तेज आवाज में गानें सुन सकेगा. यात्रियों की तरफ से शिकायत मि‍लने पर रेलवे ऐसे लोगों के ख‍िलाफ कार्रवाई करेगा. यह फैसला यात्रियों की सुविधा को ध्‍यान में रखते हुए लिया गया है.

ट्रेन स्‍टॉफ की जवाबदेही होगी

नए न‍ियमों के तहत यह भी प्रावधान है यद‍ि ट्रेन में यात्री से म‍िलने वाली श‍िकायत का समाधान नहीं हुआ तो ट्रेन स्‍टॉफ की जवाबदेही तय की जा सकेगी. रेलवे म‍िन‍िस्‍ट्री (Ministry of Railways) की तरफ से सभी जोन को आदेश जारी कर इन न‍ियमों को तत्‍काल प्रभाव से लागू करने का आदेश द‍िया गया है.

यात्र‍ियों से म‍िलती थीं ये श‍िकायतें

रेलवे मंत्रालय के अनुसार अक्सर यात्री साथ वाली सीट पर मौजूद पैसेंजर के मोबाइल पर तेज आवाज में बातें करने या म्‍यूजिक सुनने की श‍िकायत करते थे. इसके अलावा ऐसी भी श‍िकायतें मिलती थीं क‍ि कोई ग्रुप रात में जोर-जोर से बातें कर रहा है. ऐसे भी मामले संज्ञान में आए जब रेलवे का स्‍कॉर्ट या मेंटीनेंस स्‍टॉफ गश्‍त के दौरान तेज-तेज बातें करता है. इस सबसे जिससे यात्रयों की नींद खराब होती है. रात में लाइट जलाने को लेकर भी अक्‍सर विवाद होता था.

अब ये हैं रात 10 बजे की गाइडलाइन

- कोई भी यात्री मोबाइल पर तेज आवाज में बात नहीं करेगा या तेज म्‍यूजिक नहीं सुनेगा.
- रात में नाइट लाइट को छोड़कर सभी लाइट बंद करनी हैं, ताक‍ि सहयात्री की नींद खराब न हो.
- ग्रुप में चलने वाले यात्री ट्रेन में देर रात तक बातें नहीं कर पाएंगे. सह यात्री द्वारा शिकायत करने पर कार्रवाई हो सकती है.
- रात में चेकिंग स्‍टॉफ, आरपीएफ, इलेक्ट्रीशियन, कैटरिंग स्‍टॉफ और मेंटीनेंस स्‍टॉफ शांतिपूर्ण ढंग से काम करेंगे.
- 60 साल से ऊपर के बुजुर्गों, दिव्‍यांगजन और अकेली महिलाओं को रेल स्‍टॉफ जरूरत पड़ने पर तत्‍काल मदद करेगा.

राष्ट्र विरोधी कंटेंट चलाने वाले यूट्यूब चैनल्स और वेबसाइट्स होंगे बंद

Posted: 21 Jan 2022 12:00 AM PST

 



केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने बुधवार को कहा कि देश विरोधी सामग्री चलाने वाली वेबसाइटों और YouTube चैनलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने बताया कि ऐसे 20 चैनलों और दो वेबसाइटों की पहचान की गई है जो राष्ट्र विरोधी चीजें चलाते हैं. ठाकुर ने कहा कि इन वेबसाइट्स और यूट्यूब चैनल्स के माध्यम से फेक न्यूज और भारत विरोधी कंटेंट फैला कर भय और भ्रम की स्थिति फैलाने का प्रयास किया जा रहा है. ऐसे यूट्यूब चैनल और वेबसाइट्स को बंद कर दिया जाएगा.

बीते दिनों भारत विरोधी दुष्प्रचार और फर्जी खबरें फैलाने के लिए 20 यूट्यूब चैनल और दो वेबसाइट को ब्लॉक कर दिया गया था. ठाकुर ने कहा कि सरकार देश के खिलाफ 'साजिश रचने' वालों के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई जारी रखेगी."मैंने उनके खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया था। ... मुझे खुशी है कि दुनिया भर के कई बड़े देशों ने इसका संज्ञान लिया। यूट्यूब भी आगे आया और उन्हें ब्लॉक करने की कार्रवाई की।

खुफिया एजेंसियों के साथ 'निकट समन्वय' के प्रयास में, I & B मंत्रालय ने पिछले साल दिसंबर में 20 YouTube चैनलों और दो वेबसाइटों को ब्लॉक करने का आदेश दिया था क्योंकि वे भारत विरोधी प्रचार और फर्जी खबरें फैला रहे थे।

मंत्री ने कहा, "और भविष्य में भी, भारत के खिलाफ साजिश रचने, झूठ फैलाने और समाज को विभाजित करने वाले ऐसे किसी भी खाते को ब्लॉक करने के लिए कार्रवाई की जाएगी।"

गौरतलब है कि पिछले साल भारत विरोधी प्रोपेगेंडा और फेक न्यूज फैलाने के आरोप में मोदी सरकार ने 20 यूट्यूब चैनलों और दो वेबसाइटों को बैन कर दिया था. भारत सरकार ने जानकारी दी थी कि ये चैनल पाकिस्तान से ऑपरेट किए जा रहे थे और भारत के सेंसिटिव मुद्दों पर फेक न्यूज फैला रहे थे. सरकार ने इमरजेंसी पावर का इस्तेमाल करते हुए आईटी एक्ट में शामिल की गईं गाइडलाइंस के आधार पर इन पर बैन लगाया गया था. सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने इसके लिए यूट्यूब को लिखित रूप में आदेश जारी किया था.

रिलाइन्स जिओ ने बढ़ाए 6G की तरफ कदम, 5G से 100 गुना तेज होगी स्पीड; जानिए खास बातें

Posted: 20 Jan 2022 11:45 PM PST

 



जहां जियो ने अभी तक भारत में 5जी सेवाएं शुरू नहीं की हैं, वहीं जियो की सब्सिडियरी Estonia ने पहले ही 6जी पर काम करना शुरू कर दिया है. जियो एस्टोनिया ने घोषणा की है कि वह अगली पीढ़ी के 6जी नेटवर्क का पता लगाने के लिए University of Oulu के साथ काम करेगी जो भविष्य के वायरलेस एंड-टू-एंड सॉल्यूशन्स को यूजर रिक्वायर्मेंट की एक वाइड रेंज के लिए सक्षम करेगा. बता दें, 6G में 5G से 100 गुना ज्यादा स्पीड होगी.

5G से 100 गुना तेज होगा 6G

कंपनी ने आगे बढ़ने की अपनी योजनाओं का खुलासा नहीं किया है, लेकिन यह उल्लेख किया है कि "इस साझेदारी से एरियल और स्पेस कम्युनिकेशन, होलोग्राफिक बीमफॉर्मिंग, साइबर सिक्योरिटी, माइक्रो-इलेक्ट्रॉनिक और फोटोनिक्स में 3D कनेक्टेड इंटेलिजेंस को इंडस्ट्री और एकेडमी दोनों में बढ़ावा मिलेगा.'' 6जी नेटवर्क 5जी की तुलना में 100 गुना तेज स्पीड की पेशकश करेगा, जिसका अर्थ है सीमलेस डेटा ट्रांसमिशन के लिए डाउनलिंक स्पीड 1,000 जीबीपीएस जितनी अधिक होगी.

इन सेक्टर्स पर रहेगा फोकस

Jio 6G का असर मैन्युफैक्चरिंग, डिफेंस और इंडस्ट्रियल मशीनरी पर भी पड़ेगा. यह नेटवर्क 5जी के साथ मौजूद होगा और बड़ी रेंज के कंज्यूमर्स और इंटरप्राइजेज को कवर करेगा. तकनीक की बात करें तो, 5G से 6G काफी बेहतर होगा इसका उद्देश्य तेज गति और बेहतर कनेक्टिविटी के साथ-साथ टेराहर्ट्ज फ्रिक्वेंसीज के माध्यम से सेल-फ्री MIMO, इंटेलिजेंट सर्फेस और हायर कैपेसिटी लाना होगा

कई देशों में चल रहा है रिसर्च

जियो प्लेटफॉर्म्स के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट आयुष भटनागर ने कहा, 'ओलू विश्वविद्यालय के साथ 6जी रिसर्च और केपेसिटीज में शुरुआती निवेश, 5जी में जियो लैब की क्षमताओं को पूरक कर सकता है और 6जी को जीवन में ला सकता है.' साबित करने के लिए पर्याप्त डेटा नहीं है, लेकिन यह माना जाता है कि 6G की गति 5G से 100 गुना तेज होगी. सैमसंग ने इस अगली पीढ़ी के नेटवर्क के लिए 1,000 जीबीपीएस तक की गति की कल्पना की है जिसका रिसर्च और डेवेलपमेंट चीन और जर्मनी जैसे देशों में शुरू हो चुका है.

2025 तक लॉन्च हो सकता है 6G

जबकि 6G लॉन्च कम से कम 2025 तक होने की उम्मीद नहीं है, भारत 2023 या 2024 के अंत तक स्वदेशी रूप से विकसित और 6G तकनीक को तैनात करने के लिए आश्वस्त है. मिनिस्टर ऑफ कम्यूनिकेशन अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि "6G विकास पहले ही शुरू हो चुका है."

हिंसा करना, मारपीट ही नहीं है - डॉ. माध्वी बोरसे

Posted: 20 Jan 2022 11:34 PM PST

 

बहुत से घर में हम देखते हैं, जहां किसी का बहुत ज्यादा अपमान होता है, खास तौर पर एक औरत का, जब आप उसे बार-बार यह कहते हैं, तुम्हें कुछ नहीं आता, तुम्हें आता ही क्या है, तुम कुछ नहीं कर सकती, जब बहुत सारे अपशब्द को उपयोग में लाते हैं, उसके स्वाभिमान को ठेस पहुंचाते हैं, पराए लोगो से संबंध बनाते हैं! मानसिक दर्द, अपमान, धोखा कभी भुलाया नहीं जा सकता, चाहे इंसान कितना ही आगे बढ़ जाए! याद रखिए, कभी-कभी आप जाने अनजाने में, अपने अभिमान में, अपने शौक को जीने मैं इतने मग्न हो जाते कि किसी को जिंदगी भर की पीड़ा दे जाते हैं और इसके बाद में दो-चार आंसू बहा देने से या माफी मांगने से वह पीड़ा कम नहीं होती और कुछ लोग तो अभिमान में इतने चूर होते हैं कि जब उनकी मृत्यु नजदीक होती है तब ही उन्हें समझ में आता है, की हमसे कोई गलती यह गुनाह भी हुआ!

स्वयं के साथ वक्त बिताए और जानिए ऐसे कौन-कौन से कर्म है जो हम किसी के साथ कर रहे हैं और हमें खुद के लिए मंजूर नहीं! जो हमें स्वयं के लिए मंजूर नहीं उसे आज से ही त्याग दीजिए, भूलिए मत पृथ्वी गोल है, कर्म अच्छे हो या बुरे दोबारा लौट के जरूर आते हैं!

आपको आज नहीं तो कल, इस बात का जरूर एहसास होता है, कि आपने किसी के साथ कितना गलत किया!

खुदा की मर्जी, जो जिसके लायक है उसे वही मिलेगा, इसे सोच कर अपने गलत कर्मों से बचने की कोशिश ना करें!

अगर जाने अनजाने में हमने किसी के साथ बुरा कर भी दीया, तो उनसे माफी मांगने के साथ-साथ, उनके साथ बहुत ज्यादा अच्छा करने की कोशिश कीजिए, कि शायद वो आपकी गलती को भूल जाएं, शायद उनके कुछ जख्म भर जाए!

आपको लगता है कि हमारी की गई गलती, किसी को दिया हुआ दर्द माफ हो सकता है, पर सोचिए अगर वह इंसान दुनिया के दिलों को जीत लेता है और सभी का पसंदीदा बन जाता है, कल को हर जगह या युगो युगो तक उसकी चर्चा होती है, तो भूलेगा नहीं की युगो युगो तक जिसने गलत कार्य किया है, उसका दिल दुखाया है, उसे तकलीफ पहुंचाई है, ऐसे अत्याचारी को कोई भी माफ नहीं करेगा, सभी के मुख से उसके लिए अच्छा नहीं निकलेगा, तो सोचिए उसकी आत्मा को शांति कब मिलेगी!

हम में से कोई यह नहीं चाहता है, पर चाहने और प्रयत्न करने में बहुत फर्क है, कोई भी इंसान कमजोर नहीं, कोई भी व्यक्ति डरपोक नहीं, बस बात इतनी सी है, की कुछ लोग छोटी-छोटी बातों को बड़ी नहीं बनाना चाहते और इसी कारण उनके लिए बड़ी बड़ी बातें छोटी हो जाती है, अगर एक औरत यह नहीं चाहती की उसके मां-बाप को या बच्चों को तकलीफ हो तो वह आपकी हर बात को नजरअंदाज करती रहती है, इसका मतलब यह नहीं कि आप कुछ भी बोलते रहें, आप उसके साथ कुछ भी करते रहे, खुदा सब देख रहा है और वह कर्मों का हिसाब शत प्रतिशत रखता है, दिखावा करना बंद करें, अगरबत्ती लगाने या उसके गुणगान गाने से पहले कुछ गुणों को अपने अंदर भी लाएं!

किसी का हौसला तोड़ना, किसी के स्वाभिमान को चोट पहुंचाना, किसी को आगे बढ़ने से रोकना, रोज रोज ताने मारना, बेइज्जत करना, किसी को मानसिक पीड़ा देना, घुट घुट के जीने पर मजबूर कर देना, अपने पति या पत्नी के होते हुए किसी गैर के साथ संबंध बनाना, किसी की आत्मा और मन पर चोट पहुंचाना, किसी के चरित्र पर उंगली उठाना, किसी के आत्मविश्वास को तोड़कर चकनाचूर कर देना, किसी के अस्तित्व पर वार करना, किसी को नीचा दिखाना यह सब भी हिंसा है!

हिंसा करने वाला हो या सहने वाला हो दोनों के अंदर ही एक कसक सी रह जाती है, दोनों ही दर्द में होते हैं!

चलो रहते हैं सब से प्रेम से, करते हैं पूरा विश्वास,

ना तोड़े अपनों का भरोसा, इतना हो हम मै सहास,

क्यों करें स्वयं को और किसी को उदास,

बस इतनी सी ही हे इस माध्वी की दरखास्त!!
डॉ. माध्वी बोरसे 
रावतभाटा (राजस्थान)

 



नगर पालिका की उदासीनता के चलते नारकीय जीवन जीने को मजबूर अग्निहोत्री परिवार

Posted: 20 Jan 2022 11:16 PM PST


 
वैसे तो शहर की सफाई एवं स्वच्छता की जबावदेही नगरपालिका की होती है और इस नगरपालिका के अधिकारी व कर्मचारी मध्यमवर्गीय परिवारों के टैक्स से ही वेतन पाते है परंतु जब ईमानदारी के साथ टैक्स देने के बावजूद भी एक मध्यमवर्गीय परिवार को स्वच्छ परिवेश प्राप्त न हो और उसकी शिकायत पर नगर पालिका ध्यान न दे तो इसे नगरपालिका की उदासीनता, नगरपालिका के अधिकारियों कर्मचारियों की हठधर्मिता न कहा जाए तो क्या कहा जाए |

एक ऐसा ही प्रकरण सामने आया है जिसमें शहर के प्रियदर्शनी कालोनी निवासी एवं अपने जमाने के विख्यात रंगमंचकर्मी व प्रतिष्ठित कलाकार 68 वर्षीय ब्रजेश अग्निहोत्री इन दिनों अपनी समस्या को लेकर दर दर भटकने को मजबूर है और तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हे उनकी समस्या का कोई निराकरण दिखाई नहीं दे रहा है |

दरअसल ब्रजेश अग्निहोत्री के प्रियदर्शनी कालोनी स्थित उनके निवास के आगे आस पड़ोस के लोगों के घरों से निकला हुआ गंदा पानी भारी मात्रा में जमा हो रहा है, जिससे कोरोना के इस भयावह वातावरण में डेंगू सहित तमाम गंभीर बीमारियों के खतरे का डर अग्निहोत्री परिवार के छोटे छोटे मासूम बच्चों सहित अन्य परिजनों को सता रहा है | जब इसकी जानकारी अग्निहोत्री परिवार नें नगरपालिका के जिम्मेदार लोगों को दी तो उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ते हुए स्वयं ब्रजेश अग्निहोत्री से पूछा कि आप ही बताएं की इस समस्या का क्या समाधान है ? इसके बाद ब्रजेश अग्निहोत्री ने जब इस समस्या को सी एम हेल्पलाइन पर दर्ज कराया तो उन्हें वहाँ से बताया गया कि इस समस्या का निराकरण केंद्र सरकार की एजेंसी के माध्यम से किया जाएगा | तब उन्होंने सीएम हेल्प लाइन के द्वारा भेजी गई केंद्र सरकार की लिंक पर भी अपनी समस्या को दर्ज करा दिया है परंतु आज भी समस्या जस की तस बनी हुई है |


कितनी हैरत की बात है कि जिस छोटी की समस्या को नगर पालिका के कर्मचारी अधिकारी यदि चाहें तो कुछ मिनटों में समाप्त कर सकते है उस छोटी सी समस्या को लेकर विगत 1 माह से एक 68 वर्षीय बुजुर्ग परेशान हो रहा है परंतु जिम्मेदारों की उदासीनता एवं हठधर्मिता के चलते वह सपरिवार नारकीय जीवन जीने को मजबूर हो रहा है |

पता नहीं अग्निहोत्री परिवार की इस समस्या का कोई निराकरण होगा अथवा नहीं परंतु एक वैध, सभ्रांत कॉलोनी में निवास करने वाले शहर के अपने जमाने के प्रसिद्ध रंगमंच कर्मी, प्रख्यात कलाकार, सेवानिवृत शासकीय कर्मचारी एवं शहर की समस्याओं को लेकर आंदोलनों में अपनी जबावदेही का निर्वाहन करने वाले 68 वर्षीय ब्रजेश अग्निहोत्री की यह दुखदायी व्यथा बहुत कुछ सोचने और समझाने को पर्याप्त है |

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