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Sunday, January 16, 2022

प्राइमरी का मास्टर ● इन

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स्कूली पाठ्यक्रम नए ढांचे में गढ़ा जाएगा, 10 + 2 के पैटर्न से निकालकर 5 + 3 + 3 + 4 के पैटर्न पर ले जाने की तैयारी।

Posted: 16 Jan 2022 05:56 PM PST

स्कूली पाठ्यक्रम नए ढांचे में गढ़ा जाएगा, 10 + 2 के पैटर्न से निकालकर 5 + 3 + 3 + 4 के पैटर्न पर ले जाने की तैयारी।



 नई दिल्ली : नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के जरिये स्कूली शिक्षा के ढांचे में बदलाव की जो सिफारिशें की गई थीं, उन सभी पर अमल तेजी से शुरू हो गया है। इनमें जो अहम बदलाव है, वह स्कूली शिक्षा के पाठ्यक्रम को 10 प्लस टू के पैटर्न से निकालकर फाइव प्लस थ्री प्लस थ्री प्लस फोर के पैटर्न पर ले जाने का है। शिक्षा मंत्रलय ने इस काम में ज्यादा देरी न करते हुए इसे इसी साल पूरा करने का लक्ष्य तय किया है। इसे लेकर गठित टीम को तेजी से इस दिशा में काम आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।


शिक्षा मंत्रलय ने इसके साथ ही स्कूली पाठ्यक्रम को नए सिरे से गढ़ने पर भी जोर दिया है जिससे स्कूलों से रटने और रटाने का पूरा खेल खत्म हो जाए। साथ ही ऐसे पाठ्यक्रम का विकास हो, जिसमें सीखने की समग्र प्रक्रिया हो। मंत्रलय ने स्कूली शिक्षा के नए ढांचे में इन पहलुओं पर ध्यान देने की जरूरत बताई है। 


मंत्रलय ने नेशनल कैरीकुलम फ्रेमवर्क (एनसीएफ) के लिए जो विशेषज्ञ टीम बनाई है, उसके मुखिया भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व प्रमुख और देश के वरिष्ठ विज्ञानी के. कस्तूरीरंगन को बनाया है। बता दें कि यह वही कस्तूरीरंगन हैं जिनकी अगुआई में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति भी तैयार की गई है। मंत्रलय का मानना है कि यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि नीति के जरिये बदलाव के जो सपने देखें गए हैं वे पूरी तरह से ढांचे में आ सकें।


शिक्षा मंत्रलय ने इसके साथ ही स्कूली ढांचा तैयार करने में जिन मूलभूत विषयों पर ध्यान देने पर जोर दिया है, उनमें 21वीं सदी की जरूरत को ध्यान में रखते हुए सोच आधारित विषयवस्तु को प्रमुखता देने, वैज्ञानिक सोच, समस्या समाधान, सहयोग और डिजिटल शिक्षा से जुड़े विषय शामिल हैं। साथ ही स्थानीय विषयवस्तु और भाषा को प्रमुखता से शामिल करने का सुझाव दिया गया है। मंत्रलय से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, स्कूली शिक्षा के ढांचे को तैयार करने का ज्यादातर काम पूरा हो चुका है। अब गठित की गई उच्चस्तरीय कमेटी इसकी समीक्षा करेगी।


अब फाइव प्लस थ्री प्लस थ्री प्लस फोर का पैटर्न होगा लागू
ऐसा है शिक्षा का नया ढांचा


मौजूदा समय में 10 प्लस टू वाले स्कूली शिक्षा ढांचे में तीन से छह वर्ष की उम्र के बच्चे शामिल हैं क्योंकि अभी छह वर्ष की उम्र में बच्चों को सीधे कक्षा एक में प्रवेश दिया जाता है। लेकिन नए फाइव प्लस थ्री प्लस थ्री प्लस फोर के ढांचे में तीन साल की उम्र से ही बच्चों को शिक्षा से जोड़ा जाएगा। यानी अब जैसे ही बच्चा तीन साल का होगा, उसे आंगनवाड़ी या बालवाटिका में प्रवेश दिया जाएगा।

अभ्यर्थी कोरोना से भयभीत, सोशल मीडिया पर UPTET व PCS -2021 परीक्षा टालने की मांग तेज

Posted: 16 Jan 2022 05:44 PM PST

अभ्यर्थी कोरोना से भयभीत, सोशल मीडिया पर UPTET व पीसीएस-2021 परीक्षा टालने की मांग तेज



प्रयागराज : कोरोना संक्रमण का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। पीड़ितों में वो प्रतियोगी छात्र भी शामिल हैं, जिनकी आने वाले दिनों में परीक्षाएं हैं। सूबे में 23 जनवरी को यूपीटीईटी व 28 जनवरी से उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की पीसीएस-2021 मेंस (मुख्य परीक्षा) होनी है। परीक्षा से पहले दोनों परीक्षाओं के सैकड़ों अभ्यर्थी कोरोना संक्रमित हो गए हैं। इसी कारण कोरोना से भयभीत अभ्यर्थी दोनों परीक्षाओं को टालने की मांग कर रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ई-मेल के जरिये सामूहिक पत्र भेजे जा रहे हैं। इसके साथ ट्विटर पर अभियान छेड़ा है। 


लोक सेवा आयोग ने पीसीएस-2021 के तहत 678 पदों की भर्ती निकाली है। रिक्तियों के सापेक्ष 7688 अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा के लिए सफल हुए हैं। मुख्य परीक्षा प्रयागराज, लखनऊ व गाजियाबाद में 28 से 31 जनवरी तक दो सत्रों में आयोजित होनी है। कुछ दिनों में अभ्यर्थियों का प्रवेश पत्र जारी होना है। 


इसके पहले अभ्यर्थी कोरोना संक्रमित होने लगे हैं। डीएलएड (बीटीसी) अध्यक्ष विनोद पटेल का कहना है कि उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी) में 20 लाख से अधिक अभ्यर्थी शामिल होंगे। उक्त परीक्षा में शामिल होने वाले काफी अभ्यर्थी कोरोना से संक्रमित हैं। यही कारण है कि इंटरनेट मीडिया में चलाए जा रहे अभियान में 80 प्रतिशत अभ्यर्थी परीक्षा टालने की मांग कर रहे हैं। सरकार को सबकी मंशा व सुविधा को देखते हुए उचित कदम उठाएं।

लखनऊ विवि से बीएड प्रवेश की फीस न मिलने से प्रदेश के स्ववित्त पोषित महाविद्यालयों के सामने खड़ा हुआ आर्थिक संकट

Posted: 16 Jan 2022 05:30 PM PST

लखनऊ विवि से बीएड प्रवेश की फीस न मिलने से प्रदेश के  स्ववित्त पोषित महाविद्यालयों के सामने खड़ा हुआ आर्थिक संकट


बीएड की फीस न मिलने से प्रदेश के 2350 स्ववित्त पोषित महाविद्यालयों के सामने भारी आर्थिक संकट खड़ा गया है। हालत यह है कि इन महाविद्यालयों के लगभग 50 हजार शिक्षकों व कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल पा रहा है। इन महाविद्यालयों का प्रबंध तंत्र फीस न मिल पाने की वजह बता कर उन्हें आश्वासन देता रहता है।


संयुक्त बीएड प्रवेश परीक्षा का आयोजन इस बार भी लखनऊ विश्वविद्यालय ने कराई थी। प्रवेश परीक्षा परिणाम के आधार पर राज्य स्तरीय ऑनलाइन काउंसिलिंग के जरिए विगत अक्तूबर में प्रवेश प्रक्रिया सम्पन्न हुई थी। काउंसिलिंग में सीट आवंटित होने पर प्रवेशार्थी को एक वर्ष की 51250 रुपये फीस लखनऊ विश्वविद्यालय में ही जमा करनी पड़ती है।


 फीस जमा होने के बाद ही सीट लॉक होती है। इसके बाद प्रवेशार्थी को संबंधित महाविद्यालय में जाकर प्रवेश लेना होता है। महाविद्यालय में उसे कोई फीस नहीं देनी होती है। प्रवेश पाने वाले महाविद्यालय की फीस बाद में लखनऊ विश्वविद्यालय द्वारा उसे लौटाई जाएगी। प्रदेश के स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों की आय का जरिया केवल फीस ही होती है। इन महाविद्यालयों को सरकार से कोई वित्तीय मदद नहीं मिलती है।


प्रदेश के 2350 स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों में बीएड पाठ्यक्रम संचालित है। इन महाविद्यालयों में लगभग 2.14 लाख बीएड के छात्रों को प्रवेश मिला है। इस तरह बीएड की फीस के रूप में लगभग 1100 करोड़ रुपये अभी लखनऊ विश्वविद्यालय के पास ही पड़े हैं। अभी महाविद्यालय अपने स्तर से लखनऊ विश्वविद्यालय से फीस जल्द वापस पाने के लिए दबाव बना रहे हैं। जल्द ही उनका संगठन भी मांगपत्र के साथ मैदान में आने वाला है।


 उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित महाविद्यालय एसोसिएशन के अध्यक्ष विनय त्रिवेदी कहते हैं कि वह लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति से मिलकर मांग करेंगे कि बीएड की फीस जल्द वापस लौटाई जाए क्योंकि महाविद्यालय अपने सामान्य खर्चे भी नहीं जुटा पा रहे हैं।

कर्मचारियों और शिक्षकों ने पुरानी पेंशन के लिए सोशल मीडिया को बनाया हथियार, चुनावी घोषणा पत्र में शामिल करने की मांग को लेकर अटेवा का ट्विटर अभियान

Posted: 16 Jan 2022 05:03 PM PST

कर्मचारियों और शिक्षकों ने पुरानी पेंशन के लिए सोशल मीडिया को बनाया हथियार, चुनावी घोषणा पत्र में शामिल करने की मांग को लेकर अटेवा का  ट्विटर अभियान



शिक्षक कर्मचारी अपनी आवाज को सोशल मीडिया के माध्यम से राजनीतिक दलों तक पहुंचाना चाहते हैं। इसके लिए सोशल मीडिया एक बड़ा प्लेटफार्म ट्विटर अभियान चलाया गया। शिक्षक कर्मचारी पुरानी पेंशन बहाली के लिए अटेवा के बैनर तले विभिन्न सोशल प्लेटफार्म के जरिए अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं।


अटेवा पेंशन बचाओ मंच उप्र के प्रदेश मीडिया प्रभारी डा. राजेश कुमार ने बताया कि अटेवा के प्रदेश अध्यक्ष व एमएनओपीएस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार बंधु के आह्वान पर 16 जनवरी को दोपहर दो बजे लेकर शाम पांच बजे तक कर्मचारियों, शिक्षकों, अधिकारियों की पुरानी पेंशन बहाल करने के लिए सोशल मीडिया में ट्विटर पर वोट फॉर ओपीएस अभियान चलाया। इस अभियान में देश व उत्तर प्रदेश के शिक्षक कर्मचारियो ने भाग लिया। जिससे यह हैश टैग लगातार ट्रेंड में बना रहा। ट्विटर अभियान के माध्यम से प्रधानमंत्री, वित्तमंत्री व राज्यों के मुख्यमंत्रियो से पुरानी पेंशन बहाल करने की मांग की गयी। चुनाव को ध्यान में रखते हुए विभिन्न दलों के प्रमुख नेतागणों से पुरानी पेंशन बहाली के मुद्दे को घोषणा पत्र में रखने व प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाने की भी अपील ट्विटर अभियान के माध्यम से की गई।



चुनावी घोषणा पत्र में शामिल करने की मांग

एनएमओपीएस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार बंधु ने बताया कि पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की घोषणा हो गई है। उत्तर प्रदेश सहित देश के लाखों-लाख पेंशन विहीन शिक्षक कर्मचारियों ने ट्विटर अभियान के माध्यम से अपनी एकता का प्रदर्शन किया है। पुरानी पेंशन बहाली के मुद्दे पर सभी कर्मचारी एकजुट है। इनको नजरअंदाज करना सभी दलों को भारी पड़ेगा। इसलिए अटेवा और एनएमओपीएस यह मांग करता है कि शिक्षक, कर्मचारियों के इस मुद्दे को अपने घोषणा पत्र में रखकर इसे प्रमुख मुद्दा बनाएं और सरकार बनने पर इसे लागू करें।

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