प्राइमरी का मास्टर ● इन |
- आखिरकार 69000 प्राथमिक शिक्षक भर्ती के पदों को लेकर फंसा चयन
- आचार संहिता में फंसा परिषदीय छात्रों का अनाज, प्राधिकार पत्र पर सीएम की फोटो लगी होने के चलते उहापोह
- क्या इस बार भी प्रमोट किए जाएंगे परिषदीय स्कूलों के छात्र?
- पहल : देश भर के सरकारी स्कूलों में भी अब ‘प्ले स्कूल’ जैसी पढ़ाई
| आखिरकार 69000 प्राथमिक शिक्षक भर्ती के पदों को लेकर फंसा चयन Posted: 30 Jan 2022 06:32 PM PST आखिरकार 69000 प्राथमिक शिक्षक भर्ती के पदों को लेकर फंसा चयन लखनऊ : आखिरकार प्राथमिक विद्यालयों की 69000 शिक्षक भर्ती के 6800 अभ्यर्थियों का चयन फंस गया है। बेसिक शिक्षा विभाग लंबे समय से प्रतियोगियों की ये मांग खारिज कर रहा था कि 69000 भर्ती की लिखित परीक्षा में सफल होने वालों को 68500 शिक्षक भर्ती के रिक्त पदों पर नियुक्ति दी जाए। प्रकरण तूल पकड़ने पर विभाग ने उसी दिशा में कदम बढ़ाया, जिसे वह नियमानुसार गलत ठहरा रहा था। अब कोर्ट ने भी स्पष्ट कर दिया है कि तय पदों से अधिक पर भर्ती नहीं कर सकते, ऐसे में पांच जनवरी को जारी अनंतिम चयन सूची के अभ्यर्थियों की नियुक्ति लटक गई है। असल में, 69000 शिक्षक भर्ती की लिखित परीक्षा में उत्तीर्ण होने वाले अभ्यर्थियों की संख्या एक लाख, 46 हजार रही है। उनमें से करीब 68 हजार से अधिक को नियुक्ति मिल चुकी है। इससे अधिक अभ्यर्थी नौकरी पाने के लिए छह माह से मांग कर रहे थे कि उन्हें 68 हजार, 500 शिक्षक भर्ती के रिक्त पदों पर नियुक्ति दी जाए। उनका तर्क था कि शीर्ष कोर्ट ने शिक्षामित्रों का समायोजन रद करने के बाद 1.37 लाख पदों पर चयन का आदेश दिया था। दोनों भर्तियों के पद शिक्षामित्रों से ही खाली हुए हैं। विभाग ने पहले इसे ये कहकर दरकिनार किया कि दोनों की अर्हता, उत्तीर्ण प्रतिशत, दावेदारों की संख्या आदि में अंतर है इसलिए यह करना संभव नहीं है। दिसंबर माह में मामला तूल पकड़ने पर विभाग ने चयन में विसंगति होना स्वीकार किया और पांच जनवरी को 6800 आरक्षित अभ्यर्थियों की अनंतिम चयन सूची जारी कर दी। तैयारी थी कि अब 68 हजार, 500 भर्ती के रिक्त पदों पर नव चयनित 6,800 को तैनाती दी जाए साथ ही शेष रिक्त पदों पर नया विज्ञापन निकाला जाएगा। ज्ञात हो कि बेसिक शिक्षा मंत्री डा. सतीश द्विवेदी ने कहा था कि जिनका चयन विसंगति की वजह से नहीं हो सका उन अभ्यर्थियों को नियुक्ति देंगे और 17000 पदों पर नई भर्ती निकालेंगे। |
| आचार संहिता में फंसा परिषदीय छात्रों का अनाज, प्राधिकार पत्र पर सीएम की फोटो लगी होने के चलते उहापोह Posted: 30 Jan 2022 06:13 PM PST आचार संहिता में फंसा परिषदीय छात्रों का अनाज, प्राधिकार पत्र पर सीएम की फोटो लगी होने के चलते उहापोह ✍️ यह भी देखें 🔵 प्राथमिक में 9.4 किलो राशन एवं 636₹ 🔵 उच्च प्राथमिक में 13.05 किलो राशन एवं 901₹ हमीरपुर : चुनाव आचार संहिता के चलते परिषदीय स्कूलों के छात्रों का अनाज गोदाम में डंप है। प्राधिकार पत्र पर सीएम की फोटो लगी होने के चलते विभाग इन्हें बंटवाने से घबरा रहा है। 94 दिनों का अनाज डंप होने से बच्चों को एमडीएम मिलने में परेशानी हो सकती है। परिषदीय, अनुदानित स्कूलों में कक्षा एक से आठ तक पढ़ने वाले छात्रों को एमडीएम दिया जाता है। शैक्षिक सत्र 2021-22 में कोरोना संक्रमण फैलने के चलते 24 मार्च से 31 अगस्त 2021 तक सभी परिषदीय विद्यालय बंद कर दिए गए थे। इससे छात्र छात्राओं को दोपहर का भोजन नहीं मिल सका। 23 सितंबर को सरकार के विशेष सचिव आरबी सिंह ने विद्यालय बंद रहने की अवधि का 94 दिन का खाद्यान्न वितरित करने का आदेश दिया था। जिसमें प्राइमरी स्तर के प्रति छात्र को नौ किलो 400 ग्राम व जूनियर स्तर के प्रति छात्र को 13 किलो 500 ग्राम अनाज दिया जाना है। दिसंबर के अंत में प्राधिकार पत्र छपने का बजट मिला था, लेकिन प्राधिकार पत्र का प्रारूप पहले वाला होने के कारण उसमें मुख्यमंत्री की फोटो लगी है। इधर आचार संहिता लागू है। जिसके चलते किस प्रकार प्राधिकार पत्रों का वितरण कराया जाए। इस संबंध में उच्चाधिकारियों से विचार-विमर्श कर निर्णय लिया जाएगा। - राकेश कुमार श्रीवास्तव, बीएसए |
| क्या इस बार भी प्रमोट किए जाएंगे परिषदीय स्कूलों के छात्र? Posted: 30 Jan 2022 05:58 PM PST क्या इस बार भी प्रमोट किए जाएंगे परिषदीय स्कूलों के छात्र? कोरोना संक्रमण के कारण एक बार फिर से कक्षा एक से आठवीं तक के बच्चों की वार्षिक परीक्षा पर संकट दिख रहा है। स्कूल अभी छह फरवरी तक बंद हैं। वहीं, दूसरी ओर दस फरवरी से विधानसभा का चुनाव शुरू हो रहा है। ऐसे में कक्षा एक से आठवीं तक की परीक्षा कब होगी, इसे लेकर संशय बरकरार है। पिछले दो वर्षों से कक्षा एक से आठ तक के छात्र-छात्राओं को प्रमोट किया जा रहा है। परिषदीय विद्यालय में नवंबर के अंतिम सप्ताह में छमाही परीक्षा कराई जाती है। लेकिन, कोरोना के केस बढ़ने के कारण परीक्षा नहीं हो सकी है। विधानसभा चुनाव के नतीजे 10 मार्च को आएंगे। उसके बाद वार्षिक परीक्षा का समय होगा। लेकिन, अभी परीक्षा के संबंध में कोई आदेश न मिलने के कारण असमंजस का माहौल बना हुआ है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या पिछले दो सालों की तरह इस बार भी अगली कक्षा में प्रमोट कर दिया जाएगा। जिसको लेकर अभिभावकों की भी चिंता बढ़ी हुई है। |
| पहल : देश भर के सरकारी स्कूलों में भी अब ‘प्ले स्कूल’ जैसी पढ़ाई Posted: 30 Jan 2022 05:55 PM PST पहल : देश भर के सरकारी स्कूलों में भी अब 'प्ले स्कूल' जैसी पढ़ाई नई दिल्ली: बच्चों की शुरूआती शिक्षा के लिए 'प्ले स्कूल' की संकल्पना अब शहरों से गांव तक पहुंचने जा रहीं है। नई शिक्षा नीति 2020 के तहत सरकार शैक्षणिक सत्र 2022-23 से 'विद्या प्रवेश कार्यक्रम' देश के सभी स्कूलों में शुरू हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले वर्ष शिक्षा से जुड़े सुधार कार्यक्रम के तहत इसकी संकल्पलना रखी थी। शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक ' विद्या प्रवेश कार्यक्रम' के तहत पहली कक्षा में प्रवेश से पहले बच्चों को तीन महीने का एक खास कोर्स करवाया जाएगा। इसमें उन्हें खेलते हुए पहली कक्षा से पहले जरूरी अक्षर और संख्या ज्ञान दिया जाएगा। इसका मकसद है, 'शिक्षा की शुरुआत से ही नींव को मजबूत करना। ताकि समाज में सभी समान रूप से आगे बढ़ सकें।' सभी राज्यों को कार्यक्रम भेजा विद्या प्रवेश कार्यक्रम का प्रारूप सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को भेज दिया गया है, ताकि इसे समय से अपनाया जा सके। यह शैक्षणिक सत्र 2022-23 से देश के सभी स्कूलों में शुरू हो रहा है। राज्य इसे अपनी जरूरत के हिसाब से लागू करेंगे। एनसीईआरटी ने तैयार किया प्रारूप नई शिक्षा नीति के सुझावों पर राष्ट्रीय शिक्षा अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) द्वारा बच्चों के लिए तीन माह का स्कूल तैयारी प्रारूप 'विद्या प्रवेश' तैयार किया है। इस पाठ्यक्रम में बच्चों के लिए अक्षर, रंग, आकार और संख्या सीखने के लिए रोचक गतिविधियां हैं। यह कार्यक्रम बाल वाटिका के सीखने के परिणामों पर आधारित होगा। इसमें स्वास्थ्य कल्याण, भाषा साक्षरता, गणितीय सोच और पर्यावरण जागरूकता से संबंधित मूलभूत दक्षताओं को विकसित करने के लिए बच्चों तक समान गुणवत्ता पहुंच सुनिश्चित करना है। 'विद्या प्रवेश कार्यक्रम' के प्रारूप के अनुसार, इसमें तीन महीनों का खेल आधारित कार्यक्रम रखा गया है जो प्रतिदिन चार घंटे का होगा। यह विकासात्मक गतिविधियों एवं स्थानीय खेल सामग्रियों के उपयोग के साथ अनुभव आधारित शिक्षा को बढ़ावा देता है। |
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