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Monday, January 24, 2022

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हिरण की सड़क दुर्घटना में मौत, बजरंग कार्यकर्ताओं ने कराया पोस्टमॉर्टम

Posted: 23 Jan 2022 07:59 PM PST



एमपी नाउ डेस्क



छिंदवाड़ा।
शनिवार की देर रात उमरहर-सांख मार्ग पर अज्ञात वाहन से टक्कर के चलते वन्यजीव हिरण की मौत हो गई। घटना की जानकारी पर विहिप बजरंग दल प्रखंड सह संयोजक कृष्णा पटेल ने अपने साथी ग्रामीण संयोजक मोनू राजपूत, गुरुप्रसाद प्रजापति तथा रोहित करोड़े के साथ तत्काल घटना के संबंध सूचना संबंधित बीट में पदस्थ वन रक्षक राजू सोनी और मनोज सोनी को दी। जिस पर पहुंचे वन रक्षकों ने मृत हिरण का पंजीयन कर बजरंग दल कार्यकर्ताओं की सहायता से उसका पोस्टमार्टम करवाया। 

बताया जाता है कि चांद थाना क्षेत्र अन्तरर्गत उमरहर-सांख मार्ग पर शनिवार की रात लगभग 11:30 बजे एक हिरण जंगल की ओर से सड़क मार्ग पर आ गया। जिसकी सड़क मार्ग से गुजर रहे अज्ञात वाहन से टक्कर हो गई। इस दुर्घटना में वन्य जीव की मौत हो गई। वन विभाग द्वारा इस संबंध में आवश्यक कारवाई कर वन्य जीव के शव का अंतिम संस्कार कराया गया।

डार्क वेब की रहस्यमय दुनिया

Posted: 23 Jan 2022 06:40 PM PST



एमपी नाउ डेस्क



इन्फॉर्मेशनजैसा कि हम जानते हैं इंटरनेट एक मुक्त संजाल है, जो दुनिया भर मे फैले हुए लाखो सर्वर्स को आपस मे जोड़ कर बनाया गया है, और जिसे हम वर्ल्ड वाइड वेब के रूप में जानते हैं। किसी भी वेबसाइट को ओपन करने से पहले जो www आप लिखते हैं, वह इसी का शार्टफॉर्म है। इंटरनेट सर्फ करने के लिए हमें प्रोटोकॉल की जरूरत पड़ती है, जैसे http याने हाइपर टेक्स्ट ट्रांसफर प्रोटोकॉल। इसे मोटे तौर पर नियमावली जैसी मान लीजिए, जिसका पालन आपके कम्प्यूटर को सर्वर से कनेक्ट करने के लिए और डाटा लेने-देने के लिए जरूरी है। 

इंटरनेट का आकार अत्यंत विशाल है। एक अनुमान के अनुसार करीब दो अरब वेबसाइट इस समय रजिस्टर्ड हैं, जिसमे से करीब 30 से 35 प्रतिशत एक्टिव हैं, ये वो वेबसाइट हैं जो आपके एक्सेस के लिए उपलब्ध हैं, बाकी इनएक्टिव डोमेन्स हैं यानी उनका पंजीकरण तो हुआ पर कोई साइट नही बनाई गई। इंटरनेट को हम मोटे तौर पर 3 भागों में बांट सकते हैं। क्लीयरनेट या सरफेस वेब, डीप वेब और डार्क वेब। इनके अलावा और भी धारणाएं हैं, लेकिन हम इन तीनो के बारे में ही साफ तौर पर कुछ बता सकते हैं।

सरफेस वेब - इंटरनेट का वो हिस्सा है जो हम और आप अपनी दैनिक गतिविधियों में प्रयोग करते हैं, यानी इन्हें हम सर्च कर सकते हैं और अपने ब्राउजर में ओपन कर सकते हैं। जब भी कोई वेबसाइट इंटरनेट पर अपलोड की जाती है, तो वह एक वेब सर्वर पर रख दी जाती है, और जहां से विभिन्न कम्प्यूटर उसे एक्सेस कर सकते हैं। ये वेबसाइट विभिन्न सर्च इंजन पर रजिस्टर या इंडेक्स की जाती है। जो कि गूगल सब्मिशन के द्वारा किया जा सकता है। या फिर गूगल स्वचालित बॉट्स के द्वारा स्वयं इनकी स्थिति अपडेट करता रहता है। ऐसा ही अन्य सर्च इंजन जैसे कि बिंग या याहू द्वारा भी किया जाता है। इसी कारण आप इन्हें सर्च कर पाते हैं। हर वो वेबसाइट जो आप आसानी से सर्च, ओपन या एक्सेस कर पाते हैं वो सरफेस वेब में आती है।

डीप वेब - इंटरनेट का कुल आकार का मात्र 5-7% ही इंडेक्स किया जा सका है, यानी कि गूगल जो कि एक विशाल कम्पनी है और एक सर्च पर आपको लाखो रिजल्ट्स देती है, उसके पास भी मात्र 5-7 प्रतिशत इंटरनेट की ही लिस्टिंग है। इसके बाद जो इंटरनेट आता है वो डीप वेब है। यानी कि ऐसा हिस्सा जिसे आप सर्च नही कर सकते। लेक़िन डायरेक्ट लिंक से एक्सेस कर सकते हैं। जिसके लिए आपको स्पेशल परमीशन की आवश्यकता होती है। आमतौर पर डीप वेब में सरकारी, सैन्य, बैंकिंग और कॉरपोरेट डेटा होता है जो आम जनता के लिए उपलब्ध नही होता। केवल उन संस्थानों के लोग ही इसे एक्सेस कर सकते हैं। सर्च इंजिन कम्पनी विभिन्न कानूनों के तहत इन्हें अपने रिजल्ट में नही दिखाती।

डार्क वेब - अब आते हैं इंटरनेट के विवादित हिस्से यानी को डार्क वेब पर। ये वो हिस्सा है जहां तमाम तरह की आपराधिक और गैरकानूनी गतिविधियां संचालित की जाती हैं। जैसा कि हम जानते हैं कि इंटरनेट विभिन्न सर्वर्स से मिल कर बना है, और जिस जगह पर ये सर्वर हैं उस देश का कानून उस पर लागू होता है। दुनिया के कई स्थान ऐसे हैं, जहां उतनी सख्ती नही की जाती है। इन सर्वर पर एक्सेस किसी भी देश से की जा सकती है। ऐसे कई नेटवर्क है जो डार्कनेट कहलाते हैं,  डार्कवेब इन्ही की कई परतों से बना है। ये हिस्सा किसी भी किस्म के रेगुलेशन से मुक्त है। कुल इंटरनेट का 4 से 5 प्रतिशत है ये हिस्सा।

हालांकि आप अपने साधारण कम्प्यूटर या क्रोम मोज़िला जैसे आम ब्राऊजर से डार्क वेब की वेबसाइट को एक्सेस नही कर सकते। इसके लिए आपको TOR ब्राऊजर और प्रॉक्सी सर्वर की जरूरत पड़ेगी, साथ ही VPN भी लेना पड़ेगा। साधारण विंडोस बेस्ड कम्प्यूटर भी इसके लिए असुरक्षित होते हैं, काली लिनक्स आदि ओएस इस काम मे उपयुक्त होते हैं। डार्क वेब पर किसी भी देश की करंसी मान्य नही होती, बल्कि क्रिप्टो करंसी जैसे बिटकॉइन चलती हैं। डार्क वेब पर अलग डोमेन और एक्सटेंशन होते हैं, जो कि हमारे सामान्य .com या .in से भिन्न होत्ते हैं जैसे .onion। सिल्क रोड नामक वेबसाइट जो डार्क वेब पर मशहूर थी वहां आप ई-बे  की तरह दुनिया का कोई भी प्रतिबंधित सामान खरीद सकते थे। ये वेबसाइट अब एजेंसीज द्वारा बंद कर दी गई हैं, लेकिन ऐसी अनेक वेबसाइट समय समय पर आती रहती हैं, जैसे हाल तक torrez नाम की साइट सक्रिय थी।

ये जानकारी सिर्फ मनोरंजन के लिए आपसे शेयर की गई है। याद रखिये डार्क वेब एक खतरनाक जगह है, जहां हथियार ड्रग्स और अन्य प्रतिबंधित चीजों की तस्करी की जाती है। साथ ही अपराध एवम हिंसा का बोलबाला है। यहां कई हैकर्स सक्रिय होते हैं जो, आपकी प्रायवेसी और संपत्ति के लिए खतरा हो सकते हैं। वो आपको ट्रेस कर सकते हैं, एवं सरकारी एजेंसियां भी आपको पकड़ सकती हैं, क्योंकि उनके स्पाइवेयर भी सक्रिय होते हैं। यदि आप प्रशिक्षित नही हैं, तो किसी जुगाड़ से उस ओर जाने की गलती न करें, आप कानूनी झमेलों में फंस सकते हैं, हालांकि डार्क नेट सर्फ करने भर से कानून का उल्लंघन नहीं होता, लेकिन वहां कोई भी गतिविधि करते ही आप अपराध कि सीमा में आ जाते हैं।

तो ये थी इंटरनेट के बारे में कुछ रोचक जानकारी। इन सबके अलावा मारियानास वेब के बारे में भी सुनने को मिलता है। ये एक ऐसा हिस्सा है जहां कोई जा ही नही सकता, सिवाय विश्व के चुनिन्दा शीर्षस्थ लोगों के। इस जगह पर मानवजाती के समस्त ज्ञान को संग्रहित किया गया है, जैसे कि वेटिकन आर्काइव की सारी जानकारी, एलियन सम्पर्क, परमाणु रहस्य और सेनाओं तथा सरकारों के सीक्रेट डेटा। लेकिन इसके होने के कोई सबूत नही है, इसलिए इसे कपोल कल्पना ही माना जाता है, और ये रहस्य रोमांच कहानियों का हिस्सा ज्यादा लगता है। फिलहाल के लिये इतना ही, अगर आपने यहाँ तक पढ़ लिया है, इसका मतलब आप भी तकनीकी रहस्यों के शौकीन हैं, तो मिलाइए हाथ।
अभिषेक चोरे
सीनियर आईटी कंसल्टेंट टीच प्रोजेक्टर




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