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Tuesday, February 1, 2022

Bhopal Samachar | No 1 hindi news portal of central india (madhya pradesh)

Bhopal Samachar | No 1 hindi news portal of central india (madhya pradesh)


INDORE NEWS- सरकारी एवं एमपी बोर्ड के प्राइवेट स्कूल शिक्षकों पर धारा 144 लागू

Posted: 01 Feb 2022 01:45 PM PST

इंदौर
। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी श्री मनीष सिंह ने शासकीय एवं निजी स्कूलों में 15 से 17 वर्ष आयु श्रेणी के बच्चों के टीकाकरण के संबंध में धारा 144 दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 तथा द एपेडेमिक डिसिज एक्ट 1897 और नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट 2005 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किये है। इस आदेश का उल्लंघन करने वालों के विरूद्ध भारतीय दण्ड विधान की धारा-188 के तहत दण्डनीय कार्रवाई की जायेगी।

इंदौर जिले में 15-17 वर्ष आयु श्रेणी के बच्चों का कोविड टीकाकरण का अभियान वर्तमान में प्रचलित है। यह कार्य मुख्यतौर पर दो श्रेणी में हो रहा है। जिले के समस्त शासकीय एवं निजी स्कूल के प्राचार्य एवं संचालकगण शिक्षा विभाग के पर्यवेक्षण में यह कार्य कर रहे है। शासकीय विभाग के अधिकारी इसमें आवश्यक सहयोग प्रदान कर रहे है।

इस आयु वर्ग के विभिन्न स्कूल से ड्रॉपआउट हुए बच्चों के टीकाकरण का स्थानीय निकाय द्वारा सम्पूर्ण जिले में अपने अधिकारियों एवं एन.जी.ओ. के माध्यम से किया जा रहा है। इसके तहत समग्र पोर्टल से जानकारी प्राप्त कर नगर निगम इन्दौर, सभी 08 मुख्य नगर पालिक अधिकारी एवं 04 सी.ई.ओ. जनपद कार्य कर रहे है।

यह देखने में आया है कि विभिन्न स्कूलों में प्राचार्य तथा निजी स्कूल संचालकों द्वारा 15 से 17 वर्ष आयु के बच्चों के टीकाकरण करने में लापरवाही की जा रही है। शिक्षा विभाग के जिला शिक्षा अधिकारी, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, संकुल प्राचार्य का यह दायित्व है कि सभी निजी एवं शासकीय स्कूलों के प्राचार्य / शिक्षकों के माध्यम से इस आयु वर्ग के बच्चों एवं उनके माता-पिता को जागरूक करते हुए टीकाकरण करवायें। कई स्थानों पर बच्चों से स्कूल के संचालकों / प्राचार्यो द्वारा संपर्क नहीं किया गया है, जिससे कि बच्चों के टीकाकरण कार्य में सहयोग देने के बाद भी शिक्षा विभाग के अधिकारियों तथा निजी स्कूल के संचालकों के लापरवाही के चलते इस आयु वर्ग के बच्चों के टीकाकरण का कार्य प्रभावित हो रहा है।उक्त परिस्थितियों के चलते अब स्कूल खुल गए है, इसके मद्देनजर टीकाकरण से वंचित रह गए छात्रों के साथ-साथ अन्य छात्रों के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ने की आशंका निर्मित हो गई है।

कलेक्टर श्री मनीष सिंह ने शिक्षा विभाग के समस्त अधिकारियों / कर्मचारियों के साथ-साथ निजी सी.बी.एस.सी. / एम. पी. बोर्ड स्कूल संचालकों एवं प्राचार्यो, समस्त मदरसा संचालकों को निर्देशित किया है कि प्रत्येक शासकीय एवं निजी स्कूल प्राचार्य 15 से 17 वर्ष आयु के श्रेणी के बच्चों की सूची अपने पास तैयार रखें, जो उस स्कूल में पंजीकृत है। इस सूची में वर्णित ऐसे समस्त छात्रों का कोविड टीकाकरण प्रमाण पत्र प्राचार्य अपने पास रखें, ताकि निरीक्षण के समय दिखाया जा सके।

निर्देश दिये गये है कि समस्त शासकीय / निजी स्कूल प्राचार्य के पास जानकारी भी होनी चाहिए, कि छात्रों को प्रथम डोज किस दिनांक को लगा था तथा द्वितीय डोज लगाए जाने की तिथि 28 दिवस उपरांत किस दिनांक को रहेगी। जिन छात्रों द्वारा (15 से 17 आयु वर्ष) प्रथम डोज वैक्सीनेशन का प्रमाण पत्र जमा नहीं किया गया है उनकी सूची भी प्राचार्य के पास होनी चाहिए तथा प्राचार्य की जिम्मेदारी होगी कि ऐसे छात्रों का जागरूक कर टीकाकरण करवा ले।

समस्त एस.डी.एम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार तथा जिला शिक्षा अधिकारी, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी एवं डी.पी.सी. / बी.आर. सी. नगर निगम इन्दौर के अधिकारी, समस्त 08 मुख्य नगर पालिक अधिकारी, समस्त 04 सीईओ जनपद अपने-अपने क्षेत्रों में शासकीय एवं निजी स्कूल का निरीक्षण करेंगे। शासकीय स्कूल में लापरवाही पाए जाने पर वहां के प्राचार्य के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही प्रस्तावित की जायेगी। सी.बी.एस.सी./ एम.पी. बोर्ड के निजी स्कूलों के संचालकों एवं प्राचार्य की निरीक्षण के दौरान लापरवाही पाए जाने पर धारा 144 दण्ड प्रक्रिया संहिता में आवश्यक वैधानिक कार्यवाही सम्पूर्ण जिले में क्षेत्रीय मजिस्ट्रेट सुनिश्चित करेंगे। सभी अधिकारी बस्ती क्षेत्रों में स्थित एम. पी. बोर्ड के स्कूलों एवं मदरसों का विशेष तौर पर निरीक्षण करेंगे ताकि वहां पर कोई लापरवाही की जा रही है, तो वैधानिक कार्यवाही की जा सके। इंदौर की महत्वपूर्ण खबरों के लिए कृपया indore news पर क्लिक करें.

INDOER NEWS- प्लॉट के विक्रय और एग्रीमेंट पर कलेक्टर की गाइडलाइन जारी

Posted: 01 Feb 2022 01:41 PM PST

इन्दौर जिले में कॉलोनाईजर, बिल्डर, ब्रोकर आदि का विनियमन तथा रियल एस्टेट क्षेत्र में अप्राधिकृत दस्तावेजों जैसे- डायरी आदि पर किए जा रहे विक्रय, सौदो से क्रेताओं के हितों पर पड़ने वाले विपरीत प्रभाव के संबंध में कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी श्री मनीष सिंह द्वारा रियल स्टेट (रेग्युलेशन एंड डेव्लपमेंट) अधिनियम 2016" तथा "मप्र रियल एस्टेट (रेग्युलेशन एवं डेव्लपमेंट) नियम 2017 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किये गये हैं।

जारी आदेश में कहा गया है कि इन्दौर शहर एवं जिले के अन्य क्षेत्रों में स्वयं के उपयोग के मकान की इच्छा रखने वाले नागरिकों के द्वारा बडी संख्या में भूखण्ड (भूमि / मकान) का क्रय एवं विक्रय विगत समय से किया जा रहा है। यह क्रय / विक्रय इन आमजनों द्वारा कॉलोनाईजर / डेव्लपर्स/ बिल्डर्स से ब्रोकर्स आदि के माध्यम से किया जाता है।

इस क्षेत्र में सभी कॉलोनाईजर, डेव्लपर्स आदि नियम प्रक्रिया के तहत कार्य करें, इस हेतु आमजन के हितों के संरक्षण हेतु "रियल स्टेट (रेग्युलेशन एंड डेव्लपमेंट) अधिनियम 2016" तथा "म.प्र. रियल एस्टेट (रेग्युलेशन एवं डेव्लपमेंट) नियम 2017" प्रभावशील है। इन अधिनियम / नियम में जहां एक ओर कॉलोनाईजर, प्रमोटर एवं बिल्डर्स के लिए विभिन्न अनुमति लेने के प्रावधान वर्णित है वहीं दूसरी ओर विभिन्न ब्रोकर्स / एजेंट आदि के लिए भी पंजीयन एवं उनके दायित्वों के बारे में प्रावधान उल्लेखित है।

किसी भी रियल एस्टेट एजेंट अर्थात ब्रोकर आदि के लिए यह बंधनकारी है कि वह रियल एस्टेट रेगूलेटरी अथॉरिटी में अपना पंजीयन कराने के उपरांत ही उन्हें अधिनियम में दी गई जिम्मेदारी के दायरों के तहत् ही कार्य करें। कॉलोनाईजर, प्रमोटर रियल एस्टेट एजेंट आदि के लिए यह सभी नियम प्रक्रिया बनाए जाने का तात्पर्य यह भी है कि वे अधिनियम एवं नियम के अधिनस्थ सभी अनुमतियां प्राप्त करें, सभी प्रकार के दस्तावेजों का संधारण करें तथा केवल रेरा से अनुमति प्राप्त नवीन प्रोजेक्ट्स में ही सव्यवहार करें। विगत माह की जांच में यह देखने में आया कि कॉलोनाईजर प्रमोटर रियल एस्टेट एजेंट ब्रोकर्स आदि उनके दायित्वों के निर्धारण हेतु बनाए गए रेरा संबंधी प्रावधानों का उल्लंघन कर रहे हैं तथा उल्लंघन करने से आमजन के हित विपरीत रूप से प्रभावित हो रहे है।

म.प्र. रियल एस्टेट रेगूलेशन एवं डेवलपमेंट एक्ट 2016 एवं इसके तहत् बनाए गए नियमों में उल्लेखित प्रावधानों के तहत निम्नानुसार निर्देश जारी किये गये हैं, जिसका पालन किया जाना सभी कॉलोनाईजर, प्रमोटर के साथ-साथ सभी रियल एस्टेट एजेंट, ब्रोकर्स आदि पर बंधनकारी होगा ।

सभी कॉलोनाईजर, प्रमोटर आदि से यह अपेक्षा की गई है कि वे ऐसे रियल एस्टेट एजेंट, ब्रोकर्स को अपने प्रोजेक्ट में संव्यवहार के लिए शामिल करेंगे, जो रेरा में पंजीकृत है तथा जिसका पंजीयन उस दिनांक को प्रभावशील है। रेरा में अपंजीकृत ब्रोकर्स, रियल एस्टेट एजेंट आदि को कॉलोनाईजर, प्रमोटर स्वयं के प्रोजेक्ट्स में भूखण्ड, प्रकोष्ठ भवन आदि के बिक्री एवं खरीदी हेतु संलग्न नहीं कर सकेंगे। नागरिकों से भी यह अपेक्षा की गई है कि वे ब्रोकर्स आदि का रेरा पंजीयन, उनसे संव्यवहार करने के पूर्व आवश्यक देख लेवें।

सभी कॉलोनाईजर प्रमोटर आदि उनके रियल एस्टेट प्रोजेक्ट का रेरा में पंजीयन हो जाने के उपरांत ही भूखण्डों की बुकिंग / आवंटन कर सकेंगे। अप्राधिकृत दस्तावेजों जैसे डायरी आदि पर बुकिंग/आवंटन न केवल अवैधानिक है अपितु नागरिकों के हितों के विपरीत भी है। अप्राधिकृत दस्तावेजों जैसे- डायरी आदि की बुकिंग की शिकायत पर उसकी जांच की जाएगी तथा प्रथम दृष्टयां शिकायत सही पाए जाने पर उस संबंधित कॉलोनाईजर बिल्डर आदि के विरुद्ध कार्यवाही करते हुए उन्हें विभिन्न विभागों से रियल एस्टेट अनुमतियां स्थगित करते हुए विस्तृत जांच प्रारंभ की जाएगी। ऐसी किसी भी कार्यवाही के पूर्व संबंधित कॉलोनाईजर, बिल्डर को सुनवाई का अवसर दिया जाएगा।

इसका तात्पर्य यह है कि जिन कालोनी/ बिल्डिंग में कॉलोनाईजर / बिल्डर स्वयं ही सार्वजनिक क्षेत्रों का प्रबंधन कर रहे है तथा वहां के आवंटिती प्रबंधन स्वयं करना चाहते हैं तब ऐसी परिस्थिति में यह कार्य, कॉलोनाईजर, रहवासी संघ को हस्तांतरित करेंगे। ऐसी कॉलोनी जहां गृह निर्माण सहकारी समितियां हैं वहां पर भी सार्वजनिक क्षेत्रों में मूल भूत सुविधाओं जैसे पानी, बिजली, सिवेज, सड़क संधारण, बगीचों का संधारण आदि कार्य गृह निर्माण संस्था के अध्यक्ष/उपाध्यक्ष के पास न रहते हुए वहां के रहवासी संघ के पास रहना चाहिए ताकि वहां के आवंटितिओं पर वास्तविक व्यय ही मेंटेनेंस शुल्क के रूप में आए। अगर कोई गृह निर्माण सहकारी समिति इन नियमों का उल्लंघन करती है तो उनके विरूद्ध वैधानिक कार्यवाही की जाएगी।

सभी आवंटितियों के लिए बाध्यकारी होगा कि वे जब भूखण्ड अथवा प्रकोष्ठ आदि क्रय करने के लिए अनुबंध करते हैं तब वे अनुबंध अनुसार कॉलोनाईजर बिल्डर प्रमोटर को निर्धारित समय पर किश्तों की राशि अदा करें तथा विलंब होने पर अनुबंध अनुसार ब्याज की राशि उन पर देय होगी। भूखण्ड/भवन/ प्रकोष्ठ आवंटितियों के लिए यह भी बाध्यकारी होगा कि वे रहवासी संघ जिस भी नियमों के स्वरूप में गठित हो रहा है, उसमें भाग लेंगे तथा सदस्य बनेंगे।

इन्दौर जिले में यह भी देखने में आया है कि कुछ कॉलोनाईजर द्वारा जिस साईज के भूखण्ड के सौदे आवंटितियों से किये हैं, उसमें कुछ समय व्यतीत हो जाने के उपरांत कम साईज के भूखण्डों पर रजिस्ट्री कराने का दबाव आवंटितियों पर डाला जाता है। यह प्रयास किया जाता है कि आवंटिती इसे स्वीकार कर लें। यह पूर्ण रूप से अवैधानिक एवं अनुचित है। इसलिए आवश्यक है कि नागरिक कोई भी भूखण्ड / प्रकोष्ठ खरीदने करने के पूर्व वैधानिक अनुमतियां जैसे- खसरा- बही, डायवर्जन आदेश, नगर तथा ग्राम निवेश विकास स्थल अभिन्यास अनुमोदन, विकास अनुमति / भवन अनुज्ञा, रेरा पंजीयन आदि स्वयं देख लेवें तथा मांगे जाने पर यह अनुमतियां विक्रय करने के पूर्व दिखाने के लिए कॉलोनाईजर / बिल्डर बाध्य रहेंगे।

कॉलोनाईजर, डेवल्पर, बिल्डर को विकास अनुमतियां, भवन अनुज्ञा देने के पूर्व लाईसेंस दिया जाता है। कोई भी कॉलोनाईजर, बिल्डर आदि द्वारा किसी भी प्रचलित अधिनियम / नियम, प्रावधानों का उल्लघंन करने पर उसका कॉलोनाईजर लाईसेंस स्थगित किया जा सकता है तथा यह स्थगित हो जाने से विकास अनुमति / भवन अनुमति भी स्थगित होने की श्रेणी में आ जाती है। अतः इस क्षेत्र में कार्य करने वाले सभी व्यक्तियों को सभी विभागों के नियम अधिनियम के साथ-साथ रेरा के एक्ट एवं नियम में उल्लेखित प्रावधानों को पालन सावधानीपूर्वक करना होगा, ताकि वह किसी भी असुविधा से बच सके। नागरिकों को झूठे वादे कर भूखण्ड / भवन विकय करना, अनुचित रीति एवं अवैधानिकता की श्रेणी में आयेगा।

उक्त सभी निर्देश वर्तमान में कुछ प्रचलित अधिनियम / नियम पर आधारित है तथा इस आदेश के माध्यम से रियल एस्टेट में व्यापार करने वाले व्यक्तियों से यह अपेक्षा की गई है कि उनके कृत्यों से इन्दौर जिले की आम जनता के हितों पर विपरीत प्रभाव न पड़े। इन्दौर जिले के नागरिकों से इस आदेश के माध्यम से यह अपील की गई है कि वे इस आदेश को ध्यान से पढ़े तथा और विस्तृत जानकारी के लिए इस आदेश में उल्लेखित अधिनियमों / नियमों को भी संबंधित विभागों की वेबसाईट पर जाकर देख लेवें। शासन के द्वारा बनाए गए अधिनियमों / नियमों के माध्यम से रियल एस्टेट में व्यापार करने वाले सभी व्यक्तियों का विनियमन होता है तथा नागरिकों को भी अपने अधिकारों को समझ कर अपनी जमा पूंजी की राशि से अथवा वित्तीय संस्था से लोन लेकर बिना किसी के दबाव में आए स्वच्छ एवं अविवादित अचल संपत्ति खरीदने का अधिकार प्राप्त है। यह निर्देश तत्काल प्रभाव से लागू होंगे। इन निर्देशों का उल्लघन अगर कोई करता है तो इसकी लिखित शिकायत, नागरिकों द्वारा मय दस्तावेज के संबंधित क्षेत्रीय अपर कलेक्टर / ए.डी.एम. को दिया जा सकेगा। इंदौर की महत्वपूर्ण खबरों के लिए कृपया indore news पर क्लिक करें.

कर्मचारियों की ESS प्रोफाइल अपडेट करने की लास्ट डेट- JABALPUR karmchari news

Posted: 01 Feb 2022 01:36 PM PST

जबलपुर
। कलेक्टर कर्मवीर शर्मा ने जिले के सभी आहरण संवितरण अधिकारियों को निदेर्शित किया है कि वे अपने कार्यालय के सभी शासकीय कर्मियों का ESS प्रोफाइल IFMIS सॉफ्टवेयर में 28 फरवरी तक अनिवार्यत: अपडेट करना सुनिश्चित करें। 

समय-सीमा में शासकीय सेवकों की ईएसएस प्रोफाइल अपेडट नहीं कराने पर संबंधित आहरण संवितरण अधिकारी के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जायेगी। साथ ही प्रत्येक सोमवार को होने वाली टी.एल. बैठक में भी इसकी प्रगति की विभागवार समीक्षा की जायेगी। 

वरिष्ठ कोषालय अधिकारी अजय सामदेकर ने बताया कि आईएफएमआईएस सॉफ्टवेयर के अंतर्गत एचआरएमआईएस होम की ईएसएस सर्विस पर डैशबोर्ड में समस्त आहरण संवितरण अधिकारियों की टेस्ट मोड आई.डी. में शासकीय कर्मियों की ई.एस.एस. प्रोफाइल डेटा उपलब्ध कराया गया है। उन्होंने इस कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आग्रह किया है। 

जरूरी सूचना 
जबलपुर, 01 फरवरी, 2022 संयुक्त संचालक कोष एवं लेखा का कार्यालय अब कलेक्ट्रेट परिसर स्थित वित्त भवन में स्थानान्तरित हो गया है। पहले यह कार्यालय साउथ सिविल लाईन स्थित म.प्र. सड़क परिवहन निगम परिसर से संचालित हो रहा था। मध्यप्रदेश कर्मचारियों से संबंधित महत्वपूर्ण खबरों के लिए कृपया MP karmchari news पर क्लिक करें.

MP KISAN NEWS- समर्थन मूल्य पर गेंहू बेचने रजिस्ट्रेशन कैसे करें

Posted: 01 Feb 2022 01:30 PM PST

भोपाल
। प्रदेश में समर्थन मूल्य पर गेंहू खरीदी के लिए पांच फरवरी से रजिस्ट्रेशन शुरू हो जाएंगे। पांच मार्च तक किसान रजिस्ट्रेशन करा सकते है। इस बार किसानों को नई सुविधाएं दी गई है। किसान किस सेंटर पर अपनी उपज बेचना चाहते है, किस तारीख को उपज लेकर आएंगे, यह तय करने की सुविधा किसानो को दी गई है। रजिस्ट्रेशन के समय वे इन दोनो विकल्पों का इस्तेमाल कर सकते है।

कियोस्क, लोक सेवा केन्द्र, कॉमन सर्विस सेन्टर, निजी व्यक्तियों द्वारा संचालित सायबर कैफे पर रजिस्ट्रेशन की शुल्क भी शासन ने तय कर दी है। पचास रूपए फीस इसके लिए तय की गई है। गौरतलब हो कि पिछले वर्ष का रजिस्ट्रेशन मान्य नहीं होगा किसानो को नया रजिस्ट्रेशन कराना होगा। नए सिरे से पंजीयन प्रक्रिया होगी। किसानो को पंजीयन कराते समय जमीन की किताब, आधार कार्ड, बैंक एकाउंट की पासबुक, बैंक एकाउंट से आधार कार्ड लिंक होना चाहिए। यह अति महत्वपूर्ण है। अगर खाते से आधार कार्ड लिंक नही है, तो भुगतान अटक सकता है, जिन किसानो के खाते और आधार लिंक ना हो, वह यह काम करा लें।

किसान का पंजीयन उसी स्थिति में होगा, जब भू-अभिलेख में दर्ज खाते, खसरा, आधार कार्ड का मिलान हो, तभी किसान पंजीयन हो सकेगा। उपार्जन पंजीयन एवं फसल बेचने हेतु उपार्जन केन्द्र, तिथि एवं टाइम स्लॉट चयन करने की समयावधि भी जारी की गई है जिसके अनुसार पंजीयन कार्य पांच फरवरी से पांच मार्च तक उपार्जन केन्द्रो पर प्रातः सात बजे से रात्रि नौ बजे तक, ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत, तहसील कार्यालय में स्थापित सुविधा केन्द्रों पर कार्य दिवसों, कार्यालयीन समय पर किया जा सकेगा। फसल बेचने हेतु उपार्जन केन्द्र तिथि एवं समय स्लॉट का चयन हेतु अवधि सात मार्च से बीस मार्च तक नियत की गई है। उपार्जन अवधि की संभावित तिथि 25 मार्च से 15 मई तक नियत की गई है। मध्य प्रदेश की महत्वपूर्ण खबरों के लिए कृपया mp news पर क्लिक करें.

अतिथि शिक्षक के खिलाफ FIR, छात्राओं को आपत्तिजनक वीडियो भेजने का आरोप - MP NEWS

Posted: 01 Feb 2022 01:22 PM PST

मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले के पाड़ली हायर सेकेडंरी स्कूल में अतिथि शिक्षक प्रमोद गोठी के खिलाफ बेरछा थाने में दो छात्राओं द्वारा FIR दर्ज करवाई गई है। आरोप है कि अतिथि शिक्षक ने ऑनलाइन क्लास के लिए रजिस्टर किए गए मोबाइल नंबरों पर आपत्तिजनक वीडियो भेजे। 

बेरछा थाना पुलिस ने बताया कि जिले के पाड़ली हायर सेकेडंरी स्कूल में अतिथि शिक्षक प्रमोद गोठी पदस्थ हैं। जो विद्याथियों को गणित विषय पढ़ाते हैं। कोरोना की तीसरी लहर के चलते स्कूलों में ऑनलाइन क्लास चल रही है। जिसमें हर कक्षा का एक ग्रुप बनाकर शिक्षक ऑनलाइन पढ़ा रहे हैं।

अतिथि शिक्षक प्रमोद ने इसी बात का दुरूपयोग किया और ग्रुप में से कक्षा 11वीं की और 12वीं की छात्राओं का प्रायवेट नंबर निकालकर उन्हें आपत्तिजनक वीडियो और मैसेज भेजने शुरू कर दिए। दोनों छात्राओं ने शिक्षक की करतूत परिजनों को बताई। परिजनों ने शिक्षक के खिलाफ मामला दर्ज करवाया।

बेरछा थाना प्रभारी रवि भंडारी ने बताया दो नाबालिग छात्राओं को अतिथि शिक्षक द्वारा आपत्तिजनक मैसेज और वीडियो मोबाइल पर भेजने की शिकायत मिली। पुलिस ने आरोपी शिक्षक के खिलाफ पॉक्सो एक्ट और एट्रोसिटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। आरोपी शिक्षक अभी फरार है। मध्य प्रदेश की महत्वपूर्ण खबरों के लिए कृपया mp news पर क्लिक करें.

एक मछली को FISH तो बहुत सारी मछलियों को इंग्लिश में क्या कहेंगे- GK in Hindi

Posted: 01 Feb 2022 12:51 PM PST

Singular and plural (एकवचन और बहुवचन संज्ञाएं) तो सभी ने पढ़े हैं। यदि कोई संख्या में एक है तो एक वचन और एक से अधिक है तो बहुवचन, लेकिन इंग्लिश ग्रामर के इस फार्मूले में भी कई मजेदार ट्विस्ट हैं। ऐसा ही एक लहराता हुआ ट्विस्ट है FISH. यदि अपन इस प्रश्न (एक मछली को FISH तो बहुत सारी मछलियों को इंग्लिश में क्या कहेंगे) का उत्तर तलाश करेंगे तो निश्चित रूप से बड़ा मजा आएगा। 

यदि अपन हिंदी में चर्चा करें तो, वचन का शब्दिक अर्थ 'संख्यावचन' होता है। 'संख्यावचन' को ही वचन कहते हैं। वचन का एक अर्थ 'कहना' भी होता है। संज्ञा के जिस रूप से किसी व्यक्ति, वस्तु के एक से अधिक होने का या एक होने का पता चले उसे वचन कहते हैं। अथार्त संज्ञा के जिस रूप से संख्या का बोध हो उसे वचन कहते हैं। इस दंत के अनुसार मछली (एकवचन) और मछलियां (बहुवचन) है। 

अपन सभी जानते हैं कि मछली (एकवचन) को इंग्लिश में FISH कहते हैं लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि एक से अधिक मछलियों (बहुवचन) को हमेशा FISHES नहीं कहते। इसके साथ शर्तें लागू हैं। 

FISH का PLURAL सरल हिंदी में समझिए

FISH- एक मछली। 
FISH- एक प्रजाति की कई मछलियां। 
FISHES- अलग-अलग प्रजातियों की एक से अधिक मछलियां।
सिद्धांत:- the plural of fish is fish. When referring to more than one spices, you can use fishes as plural. 
यानी FISH का बहुवचन FISH ही होता है, लेकिन यदि आप एक से अधिक प्रजाति की मछलियों के बारे में बात करेंगे तो बहुवचन के रूप में FISHES शब्द का उपयोग करेंगे। Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article 
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MP TET VARG 3 TOPIC- बहु बुद्धि सिद्धांत और बहुआयामी बुद्धि

Posted: 01 Feb 2022 12:25 PM PST

Theory Of Multiple Intelligence or MI Theory And Multidimensional Intelligence

हावर्ड गार्डनर ने इस सिद्धांत में यह स्पष्ट किया कि बुद्धि का स्वरूप एकाकी (Single) ना होकर  बहुकारकीय (Multiplefactors) होता है। इन्होंने अपनी बुक "फ्रेम्स ऑफ माइंड" में बुद्धि के प्रकारों का वर्णन किया है। गार्डनर ने बताया कि एक चीज को कई तरीकों से सिखाया और समझाया जा सकता है। इसलिए टीचिंग में भी कई तरीके की मेथड्स अपनाना चाहिए, क्योंकि हर एक की बच्चे की बुद्धि अलग तरीके की होती है और उनके सोचने और और सीखने के तरीके भी अलग-अलग होते हैं। 

गार्डनर ने बुद्धि के 8 प्रकारों का वर्णन किया और बाद में उन्होंने बुद्धि के अन्य प्रकारों को भी वर्णन किया परंतु मुख्य रूप से बुद्धि के 8 प्रकार ही माने गए गए प्रकार ही माने गए हैं-
बुद्धि को बुद्धि के इन 8 8 प्रकारों को याद रखने का एक छोटा सी ट्रिक है- "LLB ISI MN"
1. Linguistic intelligence(भाषाई बुद्धि) 
2.Logico-mathemetical intelligence( तार्किक- गणितीय बुद्धि) 
3.Bodily - Kinesthetic intelligence( शारीरिक- गतिक बुद्धि) 
4. Interpersonal intelligence( अंतरवैयक्तिक बुद्धि) 
5. Spatial intelligence(स्थानिक  बुद्धि) 
6. Intrapersonal intelligence( अंतःवैयक्तिक बुद्धि) 
7. Musical intelligence( संगीतीय बुद्धि) 
8.Naturalistic Intelligence ( प्राकृतिक बुद्धि) 

तो जैसा कि इन सभी बुद्धियों के नाम से ही स्पष्ट है कि जिस प्रकार की बुद्धि जिस व्यक्ति में पाई जाती है, वह व्यक्ति उसी काम को करने में सबसे ज्यादा योग्य होता है। 
परंतु इनकी थ्योरी की कुछ आलोचनाएं भी हैं जैसे-
1. यह बुद्धि सामान्य रूप से भी किसी भी व्यक्ति में पाई जा सकती हैं, जो कि जनरल इंटेलिजेंस ही हैं। 
2.इस सिद्धांत में रिसर्च और प्रमाण की कमी है।
3.इसके लिए कोई टेस्ट भी नहीं है। 
4.इसे मापा भी नहीं किया जा सकता। 
5. इसमें अनुभव जन्य साक्ष्यों की कमी है। 

बहुआयामी बुद्धि (Multi-Dimensional Intelligence) 

बहुआयामी बुद्धि का अर्थ होता है कि एक व्यक्ति या बच्चे में  विभिन्न प्रकार के कौशलों का विकास हो सकता है। 
यानी कि एक व्यक्ति में सामाजिक  समझ,राजनैतिक समझ,समस्या समाधान से संबंधित समझ, नेतृत्व के गुण आदि कई प्रकार की बुद्धि एक साथ पाई जा सकती है।
बहुआयामी बुद्धि होने के कारण ही कुछ लोग कई प्रकार के कौशलों में एक साथ निपुण होते हैं, जिसे आम बोलचाल की भाषा में मल्टीटास्किंग या मल्टीटैलेंटेट भी कहा जाता है।
मध्य प्रदेश प्राथमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा के इंपोर्टेंट नोट्स के लिए कृपया mp tet varg 3 notes in hindi पर क्लिक करें.

एक देश एक टैक्स, तो फिर एक पद एक जैसा वेतनमान क्यों नहीं: कर्मचारी संघ- MP karmchari news

Posted: 01 Feb 2022 12:18 PM PST

जबलपुर
। मध्य प्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ ने जारी विज्ञप्ति में बताया कि कि वित्तीय वर्ष 2021-22 में आयकर छूट सीमा 2.5 लाख रूपये थी जिसे केन्द्रीय / राज्य कर्मचारी बढाकर 10 लाख की मांग कर रहे थे किन्तु वित्त मंत्री द्वारा कर्मचारियों की अनदेखी कर इसमें कोई राहत नहीं दी गई है।

इसी प्रकार बजट में पुरानी पेंशन योजना दिनांक 31.12.2004 में स्थिति में पुनः लागू करने के संबंध में कोई प्रावधान नहीं किया गया है। वहीं राज्य के कर्मचारी केन्द्र सरकार से यह अपेक्षा कर रहे थे की वित्त मंत्री एक राष्ट्र एक कर (जी.एस.टी) के समान समान वेतन एवं भत्तों का प्रावधान कर देश में सभी कर्मचारियों को एक समान मकान भाडा भत्ता, चिक्तिसा सुविधा, एवं अन्य भत्ते प्राप्त हो सकें संबंध में कोई भी प्रावधान करेंगी किन्तु ऐसा कुछ न हो सका। प्रथम दृष्टया यह आम बजट 2022-23 से देश एवं प्रदेश के कर्मचारियों के लिए निराशा लेकर आया है। 

संघ के योगेन्द्र दुबे , अर्वेन्द्र राजपूत अवधेश तिवारी अटल उपाध्याय , आलोक अग्निहोत्री , मिर्जा मंसूर बेग , आशुतोष तिवारी , दुर्गेश पाण्डे , डॉ ० संदीप नेमा , गोविन्द विल्थरे , रजनीश तिवारी , डी . डी . गुप्ता , पवन श्रीवास्तव संतकुमार छीपा एम . एल . शर्मा , रमाकांत पटेल , एच . पी . गौतम , नरेन्द्र शुक्ला , किशोर ठाकुर आदि ने केन्द्र की सरकार से मांग की है कि कि वित्तीय वर्ष 2022-23 में कर्मचारी के साथ छलाबा बन्द करते हुए आयकर की छूट सीमा 10 लाख की जावे तथा पुरानी पेंशन योजना पुनः लागू की जाये । मध्यप्रदेश कर्मचारियों से संबंधित महत्वपूर्ण खबरों के लिए कृपया MP karmchari news पर क्लिक करें.

ऑडियो रिकॉर्ड, मौखिक साक्ष्य है या दस्तावेजी साक्ष्य जानिए- law of evidence

Posted: 01 Feb 2022 12:12 PM PST

पिछले लेख में हमने आपको बताया था कि साक्ष्य दो प्रकार के होते हैं एक मौखिक एवं दूसरा दस्तावेजी साक्ष्य। अब सबाल यह है कि कोई टेप रिकॉर्ड या वीडियो रिकॉर्डिंग  न्यायालय में किस प्रकार के साक्ष्य के रूप में ग्राह्य किया जाएगा  जानते हैं इसका जबाब आज हम।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 के अध्याय 05 में परिभाषित नियम के अनुसार:-

टेप रिकॉर्डिंग किये हुए सभी प्रकार के कथन मौखिक साक्ष्य भी है एवं दस्तावेजी भी। यदि कथन चोरी से रिकॉर्ड किया गया हो तो वह केवल मौखिक साक्ष्य होगा, यदि कथन किसी कथनकर्ता के अशाय एवं उसकी जानकारी में किया गया हो तो यह साक्ष्य मौखिक एवं दस्तावेजी दोनो प्रकार से साबित किया जा सकता है। 
लेकिन अगर कोई टेप रिकॉर्ड चोरी से बनाया गया है तब साक्षी की प्रत्यक्ष उपस्थित के बाद भी मान्य होगा।

विशेष नोट:- पत्नी का टेप रिकार्ड अगर पति द्वारा किया जाता है किसी वाद में  बचने के लिए वह साक्ष्य के रूप में नहीं लिया जाएगा। क्योंकि यह स्त्री की निजता एवं गोपनीयता के अधिकार का उल्लंघन होगा। न ही पत्नी को आवाज के परीक्षण के लिए उसे विवश किया जाएगा.【फैमिली कोर्ट एक्ट,1984 की धारा 14 भी यही उपबन्ध करती है】। :- लेखक बी. आर. अहिरवार (पत्रकार एवं लॉ छात्र होशंगाबाद) 9827737665 | (Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article) इसी प्रकार की कानूनी जानकारियां पढ़िए, यदि आपके पास भी हैं कोई मजेदार एवं आमजनों के लिए उपयोगी जानकारी तो कृपया हमें ईमेल करें। editorbhopalsamachar@gmail.com

नवभारत साक्षरता कार्यक्रम क्या है, अक्षर साथी बनने क्या योग्यता चाहिए, यहां पढ़िए MP NEWS

Posted: 01 Feb 2022 12:04 PM PST

भारत सरकार शिक्षा मंत्रालय द्वारा निरक्षरों को साक्षर करने हेतु मार्च 2022 तक पढ़ना-लिखना अभियान संचालित करने की स्वीकृति प्रदान की गई है। मध्यप्रदेश में इसके पश्चात् यह कार्यक्रम "नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के नाम से अप्रैल 2022 से 2027 तक संचालित होगा। स्कूल शिक्षा (स्वतंत्र प्रभार) और सामान्य प्रशासन राज्य मंत्री श्री इंदर सिंह परमार ने दूरदराज के अक्षर साथियों से इस अभियान से जुड़ने और पंजीयन कराने की अपील की। उन्होंने कहा कि सभी लोगों को एक साक्षर समाज के निर्माण में सरकार के अभियान में जुड़कर नए आत्म-निर्भर भारत के निर्माण में सहयोग देना चाहिए।

संचालक राज्य शिक्षा केंद्र श्री धनराजू एस ने बताया कि प्रौढ़ शिक्षा एप के माध्यम से जहाँ निरक्षरों का चिन्हांकन, सत्यापन और बुनियादी साक्षरता कक्षाओं का संचालन हो सकेगा वहीं अक्षर साथियों (पठन-पाठन कराने वाले स्वयंसेवक) को पठन-पाठन सामग्री मार्गदर्शिका उपलब्ध हो सकेगी। इसके अतिरिक्त निरक्षरों के मूल्यांकन परीक्षा प्रबंधन आदि कार्य भी हो सकेंगे। यह एप 'पढ़ना-लिखना अभियान' के अंतर्गत एनआईसी के सहयोग से विकसित किया गया है। 

राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय के सहयोग से बुनियादी साक्षरता मूल्यांकन परीक्षा आयोजित कर सफल नवसाक्षरों को प्रमाण-पत्र प्रदान किये जाएँगे। इसके साथ ही अक्षर साथियों को समय-समय पर उत्तम योगदान के लिए पुरस्कार और प्रशस्ति-पत्र प्रदान किये जाएँगे। इस अवसर पर राज्य मंत्री श्री परमार को श्री धनराजू ने ड्रॉपआउट बच्चों के शाला प्रवेश की सफलता की कहानियों पर आधारित "शाला का द्वार" पुस्तक भेंट की।

साक्षरता की स्थिति को ध्यान में रखते हुए प्रदेश के अलीराजपुर, बड़वानी एवं झाबुआ जिलों में सघन अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान में युवाओं को प्रेरित करने के उद्देश्य से विभिन्न सरकारी, गैर सरकारी संगठनों, संस्थाओं और इच्छुक व्यक्तियों (जैसे- स्थानीय शिक्षक, सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी, स्थानीय शिक्षित व्यक्ति, एनसीसी, एनएसएस, स्काऊट गाइड और शिक्षा महाविद्यालयों के प्रशिक्षणार्थी आदि) का सहयोग लिया जाएगा। मध्य प्रदेश की महत्वपूर्ण खबरों के लिए कृपया mp news पर क्लिक करें.

MP में OBC को 27 नहीं 10% आरक्षण मिला है, मैं बताता हूं कैसे- MY Opinion by Dr. Pravesh Singh Bhadoria

Posted: 01 Feb 2022 12:00 PM PST

मध्यप्रदेश में आखिरकार ओबीसी को बहुप्रतीक्षित 27% आरक्षण की घोषणा हो ही गयी। किंतु यह आरक्षण सिर्फ सीधी भर्ती सरकारी नौकरियों तक ही सीमित रहेगा। हालांकि आरक्षण समर्थक आरक्षण का दायरा बढ़ाकर प्राइवेट तक में करने की वकालत करते रहे हैं। 

आजादी के बाद जब संविधान लिखा जा रहा था तब बाबा साहेब की दूरदर्शिता ही थी कि उन्होंने ऐसे तबकों को लाभ देने के बारे में सोचा जिसे उच्च वर्ण के लोग अपने गांवों तक में रहने नहीं देते थे। उन्होंने इसके लिए सर्वमान्य आधार "सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन" को चुना जो संविधान में आज भी निहित है। किंतु तब उन्होंने सोचा भी नहीं होगा कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी उच्च वर्ण के लोग एक विशेष तबके को अपने पास बैठान में हिचकेंगे। 

इसका सबसे बड़ा कारण यह हो सकता है कि बाबा साहेब के बाद आरक्षण के लाभार्थी तबके के बारे में ना ही किसी नेता ने सोचा और ना ही लाभ पाकर उच्च वर्ग अर्थात अधिकारी बने व्यक्तियों ने उनकी स्थिति पर विचार किया। अन्यथा विधायिका और न्यायपालिका में भी आज नियम से आरक्षण लागू हो चुका होता। इसके साथ ही प्राइवेट कंपनियां जिसको जनता के टैक्स से लाभ मिलता है, में भी कानून बनाने वालों ने आरक्षण लागू करवा दिया होता। 

आज भी मंत्रियों के निकट स्टॉफ में कितने ही ओबीसी, एससी, एसटी के लोग हैं, इसकी भी समीक्षा आवश्यक है। अतः जब तक उपरोक्त वर्णित वर्ण को सभी स्थानों पर आरक्षण नहीं मिल जाता तब तक वे शैक्षणिक रुप से भले ही सुधर जायें किंतु सामाजिक रुप से सदैव पिछड़े ही रहेंगे। मध्य प्रदेश की महत्वपूर्ण खबरों के लिए कृपया mp news पर क्लिक करें.

शिक्षक ने रिटायरमेंट के 40 लाख रुपए बच्चों की पढ़ाई को दान कर दिए- MP NEWS

Posted: 01 Feb 2022 11:44 AM PST

यह मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी ब्रेकिंग न्यूज़ है। एक शिक्षक ने अपनी सैलरी में से थोड़े-थोड़े करके जमा किए गए प्रोविडेंट फंड के पैसे और सरकार से मिले दूसरे सभी प्रकार के लाभ, कुल 40 लाख रुपए उन बच्चों की पढ़ाई के लिए दान कर दिए जिस संकुल में उन्होंने जीवन भर पढ़ाया है।

वर्तमान समय में जबकि सक्षम होने के बावजूद लोग टैक्स सब्सिडी नहीं छोड़ते,  सरकार- बच्चों को स्कॉलरशिप देने से पहले शर्तें निर्धारित करती हैं, इस शिक्षक ने बिना किसी शर्त के अपनी जिंदगी भर की जमा पूंजी दान कर दी, निश्चित रूप से यह एक महान काम है। इनका नाम है श्री विजय कुमार चंद्रसोरिया जो पन्ना जिले की प्राथमिक शाला खंदिया, संकुल केंद्र रक्सेहा जिला पन्ना में सहायक शिक्षक के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। ईश्वर ऐसे उदाहरण बहुत कम बनाता है। पिता की संपत्ति पर गिद्ध की तरह नजर रखने वाले परिवारों के जमाने में श्री विजय कुमार का परिवार भी उन्हीं की तरह अनूठा निकला। 

इस फैसले में उनकी धर्म पत्नी और बच्चों ने उनका पूरा साथ दिया। 31 जनवरी 2022 को रिटायरमेंट के दिन रिटायरमेंट की मिलने वाली लगभग 40 लाख की राशि गांव के गरीब परिवारों के बच्चों की शिक्षा के लिए दान कर दी है। ✔ भोपाल समाचार डॉट कॉम- पत्रकारिता करते हैं हम ताकि, प्रगति करता रहे अपना मध्य प्रदेश।
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