दिव्य रश्मि न्यूज़ चैनल |
- ऑटो विनिर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर
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- हाईटेंशन तार की चपेट में आने से बंदर की मौत
- साहित्यकार और पत्रकार दोनों कलमकार : वेद प्रकाश तिवारी
- गंगा नदी को कंक्रीट का शहर बसाने में लगी है बिहार सरकार :- राकेश कपूर
- *‘कब रुकेगा हिन्दू वंश संहार ?’ इस विषय पर ऑनलाइन विशेष संवाद संपन्न !*
- यूक्रेन में रूस की दखलंदाजी --मनोज मिश्र
- 25 फरवरी 2021, शुक्रवार का दैनिक पंचांग एवं राशिफल - सभी १२ राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन ? क्या है आप की राशी में विशेष ? जाने प्रशिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. प्रेम सागर पाण्डेय से |
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- यूक्रेन में रह रहे बिहारवासियों को स्वदेश लाने के लिए बिहार सरकार प्रयासरत, बिहार की स्थानिक आयुक्त विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के निरंतर सम्पर्क में
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| ऑटो विनिर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर Posted: 25 Feb 2022 04:43 AM PST ऑटो विनिर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओरश्री महेंद्र नाथ पाण्डेय, केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री ऑटो उद्योग: उन्नत, नई और स्वच्छ तकनीक की ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में बीजेपी गठबंधन सरकार भारत के विनिर्माण क्षेत्र को दुनिया का सबसे अधिक मांग वाला क्षेत्र बनाने के प्रयास कर रही है। सरकार ने इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए एक समग्र और एकीकृत योजना तैयार की है जिसमें अनुपालन को कम करना, कारोबारी सुगमता को बढ़ावा देना, लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने के लिए बहु-मॉडल लॉजिस्टिक्स ढांचे का निर्माण करना और इन सबसे बढ़कर उत्पादन-सम्बद्ध प्रोत्साहन (पीएलआई) स्कीमों के माध्यम से विनिर्माण को बढ़ावा देना शामिल हैं। इन पीएलआई योजनाओं का उद्देश्य महंगे उत्पादों के लिए उद्योगों को क्षतिपूर्ति करना हैं क्योंकि उत्पादों का महंगा होना इस उद्योग के बड़े पैमाने पर विस्तार में सबसे बड़ी बाधा है। हमारा "ऑटो उद्योग" पीएलआई स्कीम के लिए चिह्नित प्रमुख क्षेत्रों में से एक है जो विनिर्माण की रीढ़ है और जिसे अक्सर "सनराइज सेक्टर" तथा "चैंपियन सेक्टर" भी कहा जाता है क्योंकि इसमें बैकवार्ड और फारवार्ड लिंकेज काफी गहरे होते हैं। ऑटोमोटिव क्षेत्र का कामकाज मूलतः भारी उद्योग मंत्रालय देखता है, इसलिए हमने इस क्षेत्र के लिए ऐसी नीतियां और योजनाएं बनाई हैं जिनसे आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिले और भारत विश्व में ऑटो निर्माण में अग्रणी बन सके। हमने इस उद्योग की मुख्य समस्याओं को समझने के लिए सभी संबंधित पक्षों के साथ व्यापक परामर्श किया और फिर ऐसी नीतियां तैयार कीं जिनसे भारत उन्नत ऑटोमोटिव प्रौद्योगिकी उत्पादों, उन्नत रसायन सेल और पर्यावरण की दृष्टि से स्वच्छ वाहनों के उत्पादन में अग्रणी बन सके। पीएलआई स्कीम के तहत ऑटो सेक्टर के लिए 25,938 करोड़ रूपए, उन्नत रसायन सेल के लिए 18,100 करोड़ रूपए और हाइब्रिड तथा इलेक्ट्रिक वाहनों का तीव्र अंगीकरण और विनिर्माण यानी फेम स्कीम के लिए 10,000 करोड़ रूपए यानी कुल मिलाकर लगभग 54,000 करोड़ रूपए निर्धारित किए गए हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य ऑटो उद्योग में लागत अधिकता पर काबू पाना और इस उद्योग को इन क्षेत्रों में अग्रणी बन सकने योग्य बनाना है। इन योजनाओं के साथ इलेक्ट्रॉनिक्स (ऑटो इलेक्ट्रॉनिक्स सहित) और सेमीकंडक्टर के लिए प्रोत्साहन स्कीमों के जुड़ जाने से ऑटो उद्योग को और अधिक फायदा होगा और भारतीय तथा विदेशी बाजारों की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए ऑटोमोटिव उत्पादों की आपूर्त- श्रृंखला मज़बूत हो सकेगी। ये योजनाएं देश को पारंपरिक जीवाश्म ईंधन-आधारित ऑटोमोबिल परिवहन प्रणाली की तुलना में पर्यावरण की दृष्टि से स्वच्छ, टिकाऊ, उन्नत और अधिक कुशल इलेक्ट्रिक वाहन को अपनाने के लिए प्रेरित करेंगी क्योंकि जहां एक तरफ इलेक्ट्रिक वाहन के खरीदारों को फेम योजना के माध्यम से प्रोत्साहन दिया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ पीएलआई स्कीम के माध्यम से ऑटो सेक्टर और उन्नत रसायन सेल के लिए आपूर्ति पक्ष को प्रोत्साहित किया जा रहा है। ऑटो पीएलआई स्कीम शुरू करने से पहले, उद्योग जगत के साथ शुरुआती परामर्श से हमें यह समझने में काफी मदद मिली कि आंतरिक अक्षमता, प्रौद्योगिकीय कमी, स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं के अभाव और बड़े पैमाने की अर्थव्यवस्था के कारण उन्नत ऑटोमोटिव प्रौद्योगिकियों के उत्पादन की लागत 15% बढ़ जाती है। इसलिए, मंत्रालय ने ऐसी योजना बनाई है जिससे पात्र कंपनियां 18 प्रतिशत तक प्रोत्साहन प्राप्त कर सकती हैं । इस नीति को लागू करने के बाद मैंने केंद्र सरकार, राज्य सरकारों के अधिकारियों, नीति आयोग और ऑटो क्षेत्र के प्रमुख उद्योगपतियों के साथ गोवा में एक सत्र का आयोजन किया था। सत्र के दौरान उद्योग से प्राप्त प्रशंसा और सराहना असाधारण रूप से उत्साहजनक थी जिससे हमें विश्वास हुआ कि हम अपने वादों को पूरा करने में कामयाब हुए हैं और ऑटो उद्योग इस नीति से बहुत लाभान्वित होगा। इस योजना के तहत रिकॉर्ड 115 आवेदन प्राप्त हुए जो इस योजना को मिली अभूतपूर्व सफलता की एक और पहचान है। ऑटो पीएलआई स्कीम के तहत दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि पर सरकार का खर्च 25,938 करोड़ रूपए आएगा। लेकिन इससे इस उद्योग में नए निवेश के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। रोज़गार के अतिरिक्त अवसर पैदा होंगे, सो अलग। इससे ऑटोमोबाइल उद्योग को उच्चतर उत्पादों की मूल्य श्रृंखला में शामिल होने की प्रेरणा मिलेगी और हम ग्लास्गो शिखर सम्मेलन में हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा की गई प्रतिबद्धताओं को प्राप्त करने की ओर बढ़ सकेंगे। हमने हाल ही में उन 20 आवेदकों की सूची जारी की है जिन्हें ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट उद्योग के लिए पीएलआई योजना की चैम्पियन ओईएम (मूल उपकरण निर्माता) स्कीम के तहत लाभ दिया जाना है। इस योजना पर 45,016 करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान है। जिन ओईएम को चैम्पियन माना गया है, उनमें से 10 ओईएम यात्री वाहन निर्माता हैं और व्यावसायिक वाहन बना रहे हैं। इनमें चार ऐसे ओईएम भी हैं जो दुपहिए और तिपहिए वाहन बना रहे हैं जबकि 6 ओईएम ऐसे हैं जो गैर-ऑटोमोटिव निवेशक हैं। हमारा मंत्रालय अब "चैंपियन कंपोनेंट प्रोत्साहन योजना" के तहत प्रोत्साहन पाने वालों की सूची को अंतिम रूप दे रहा है। हम इसे जल्दी ही जारी करेंगे। ऑटो उद्योग इस समय अभूतपूर्व परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है और सरकार ऐसी नीतियों और योजनाओं पर काम करने के प्रति कटिबद्ध है जिनसे इस उद्योग के लिए इन परिवर्तनों को अपनाना सहज हो सके। सरकार को भरोसा है कि ऑटो उद्योग इन नीतियों का सर्वोत्तम उपयोग करेगा और हम ऑटो विनिर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, ऑटो विनिर्माण एवं तकनीक में प्रगतिशीलता और जलवायु परिवर्तन रोकने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के तीन महत्वपूर्ण लक्ष्यों को प्राप्त कर सकेंगे। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| 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| Posted: 25 Feb 2022 04:16 AM PST
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| Posted: 25 Feb 2022 03:58 AM PST
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| Posted: 25 Feb 2022 03:56 AM PST
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| हाईटेंशन तार की चपेट में आने से बंदर की मौत Posted: 25 Feb 2022 03:54 AM PST हाईटेंशन तार की चपेट में आने से बंदर की मौत
वेद प्रकाश तिवारी, ब्यूरो देवरिया। देवरिया जिले की भाटपार रानी तहसील अंतर्गत बखरी,टोला नंबर 1 गांव में घनी आबादी होने के बावजूद गांव के बीचो-बीच हाईटेंशन 11000 वोल्ट की तार गुजरती है । यह तार कई लोगों के घरों की छतों के करीब से गुजरती है। बंदरों का हुजूम जब कभी गांव में प्रवेश करता है तो लोगों की छतों पर चढ़ जाता है ।उछल कूद करने की वजह से यदि कोई बंदर तार पर चढ़ जाता है या तार को पकड़ लेता है तो करंट होने की वजह से वहीं मौत के शिकार हो जाता है । इसी तरह की घटना आज सुबह हो गई जब एक बंदर हाईटेंशन तार की चपेट में आ गया । ग्रामीणों ने उसे गड्ढा खोदकर दफनाया और मीडिया से मुखातिब होकर अपनी सारी परेशानी बताई। ग्रामीणों के द्वारा हाईटेंशन तार को केबल में बदलने या फिर वहां से हटाने की मांग वर्षो से की जा रही है । ग्रामीणों का कहना है हम लोगों ने कई बार प्रशासनिक स्तर पर आवेदन दिए, बिजली विभाग को सूचना दी परंतु इस पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। सूचना के अनुसार अब तक सैकड़ों बंदर मौत के शिकार हो चुके हैं । हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| साहित्यकार और पत्रकार दोनों कलमकार : वेद प्रकाश तिवारी Posted: 25 Feb 2022 03:51 AM PST साहित्यकार और पत्रकार दोनों कलमकार : वेद प्रकाश तिवारीदेवरिया जिले के भाटपार रानी तहसील अंतर्गत बेलपार पंडित गांव में भोजपुरी के पुरोधा महाकवि स्वर्गीय कुबेर नाथ मिश्र विचित्र जी की पुण्यतिथि पर आयोजित हुए कार्यक्रम साहित्यकारों और पत्रकारों को सम्मानित किया गया । इस कार्यक्रम का आयोजन उनके प्रपौत्र अमित मिश्रा जी के द्वारा किया गया था । इस अवसर पर भोजपुरिया अमन पत्रिका के संपादक डॉ जनार्दन सिंह, अमर उजाला के प्रभारी भाटपार रानी, डॉक्टर मोती लाल यादव जी आज के प्रभारी भाटपार रानी , कोमल पटेल जी, पत्रकार एकता समन्वय समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष, विश्वामित्र जी, प्रेस यूनियन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विपुल तिवारी, चिकित्सक रचनाकार पत्रकार वेद प्रकाश तिवारी, पत्रकार एकता समन्वय समिति के तहसील अध्यक्ष पवन कुमार गुप्ता, पत्रकार एकता समन्वय समिति के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष आशीष कुमार, बतौर अतिथि उपस्थित थे ।सभी अतिथियों ने स्वर्गीय विचित्र जी को अपने श्रद्धासुमन अर्पित किया। अपने उद्बोधन में चिकित्सक, पत्रकार, रचनाकार वेद प्रकाश तिवारी ने पत्रकारों और साहित्यकारों की भूमिका प्रकाश डालते हुए राष्ट्र के निर्माण में उनके योगदान को दोहराया साथ ही क्षोभ व्यक्त करते हुए यह भी कहा कि साहित्यकार की रचनाएं बाजार का हिस्सा नहीं हो सकती । रचनाएं जिन लोगों के लिए लिखी जाती हैं उसे उन तक पहुंचनी चाहिए । परंतु कुछ लोग अपनी रचनाओं को बाजार की वस्तु बनाकर उसे पुरस्कार तक सीमित कर देते हैं । इस साहित्य की गरिमा भंग होती है । उन्होंने कुछ पत्रकारों पर भी सवाल उठाए और कहा कि कुछ लोगों की वजह से आज पत्रकारिता कलंकित हो रही है । जो पत्रकार चाटुकारिता करते हैं और खबरों को नया रंग देने की कोशिश करते हैं वे पत्रकार नहीं हो सकते । पत्रकार और साहित्यकार का एक ही धर्म है कि जो लोग हाशिए पर खड़े हैं उन्हें मुख्यधारा में कैसे शामिल किया जाए । पत्रकार गरीब, मजलूम,पिछड़े लोगों को उनकी समस्याओं को जनता के प्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंचाता है साथ ही साहित्यकार उनके अनुभव को उनकी पीड़ाओं को कलम की धार देता है । अगर यह दोनों चूक गए तो राष्ट्र निर्माण नहीं हो पाएगा । इस कार्यक्रम में धनराज मिश्र, रामजी मिश्रा, अमरेंद्र मिश्र, ग्राम प्रधान संजय भारती, कवि के पुत्रगण राम मनोहर मिश्र ,कृष्ण मनोहर मिश्र व राकेश मिश्र ,अभिलाष मिश्र,राष्ट्रभक्त सच्चिदानन्द, उत्कर्ष नमो, अभिषेक चौबे, अजित मिश्र,नीरज द्विवेदी,अंकित मिश्रा,सूरज गुप्ता,कौशल तिवारी,मिथिलेश कुमार ,मृत्युंजय मिश्र, संजीव मिश्र, अनुराग पांडेय, रवि गुप्ता समेत तमाम साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे। संचालन कवि रत्नेश रतन ने किया। कवि विचित्र जी के पौत्र व कार्यक्रम संयोजक अमित कुमार मिश्र ने आगत सज्जनों व पत्रकारों के प्रति आभार ज्ञापित किया। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| गंगा नदी को कंक्रीट का शहर बसाने में लगी है बिहार सरकार :- राकेश कपूर Posted: 24 Feb 2022 07:38 AM PST गंगा नदी को कंक्रीट का शहर बसाने में लगी है बिहार सरकार :- राकेश कपूरकेंद्रीय सरकार एक ओर नमामि गंगा योजना के अन्तर्गत हजारों करोड़ रुपए राशि खर्च कर गंगा को निर्मल बनाने के लिए कृतसंकल्प है तो दूसरी ओर बिहार सरकार शहर के बाढ़ क्षेत्रों में भरे गाद व अतिक्रमणकारियों द्वारा वालू व मिट्टी भर कर पक्के निर्माण कर गंगा में कंक्रीट का जगली नया शहर बसाया जा रहा है।वहीं तख्त श्री हरमिंदर जी गुरूद्वारा प्रबंधक कमिटी अपनी विस्तार वादी नीतियों के तहत सरकारी सहयोग अलग से इन बाढ़ क्षेत्रों में हीं जमीन आबंटन लेने का निरंतर प्रयासरत है और सफल भी है। पटना जिला सुधार समिति के महासचिव राकेश कपूर ने व्यान जारी कर कहा है कि पटना शहर वासी को गंगा से दूर करने का यह सरकारी प्रयास गलत है ।राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण भी मूक दर्शक बना बैठा है और पर्यावरण कंटक गंगा व शहर को प्रदूषित करने पर पिले बैठे हैं। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| *‘कब रुकेगा हिन्दू वंश संहार ?’ इस विषय पर ऑनलाइन विशेष संवाद संपन्न !* Posted: 24 Feb 2022 07:10 AM PST 'कब रुकेगा हिन्दू वंश संहार ?' इस विषय पर ऑनलाइन विशेष संवाद संपन्न !*हिन्दुओं की हत्या रोकने हेतु अब हिन्दू समाज संगठनशक्ति दिखाए !*- श्री. प्रमोद मुतालिक, संस्थापक अध्यक्ष, श्रीराम सेना जब पूरे देश में सर्वत्र हिजाब के विषय में चर्चा चल रही है, ऐसे में बजरंग दल के कार्यकर्ता तथा राष्ट्रभक्त श्री. हर्ष नामक युवक की 'हिन्दू' होने के कारण हत्या की गई । श्री. हर्ष की हत्या के पीछे 'सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया' (SDPI) तथा 'पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया' (PFI) इन कट्टर इस्लामी संगठनों का हाथ है । इस प्रकरण में छह मुसलमानों को गिरफ्तार किया गया है । श्री. हर्ष के ही समान अनेक हिन्दुओं की इस प्रकार हत्या हो रही है । इन हिन्दुओं की हत्या रोकने के लिए हिन्दू समाज को अब संगठनशक्ति दिखानी होगी, ऐसा आवाहन *श्रीराम सेना के संस्थापक अध्यक्ष श्री. प्रमोद मुतालिक* ने किया । वे हिन्दू जनजागृति समिति आयोजित '*कब रुकेगा हिन्दू वंशसंहार* ?' इस 'ऑनलाइन' विशेष संवाद में बोल रहे थे । * तमिलनाडु के 'हिन्दू मक्कल कत्छी' के अध्यक्ष श्री. अर्जुन संपत* ने कहा, तमिलनाडु सहित पूरे देश में पिछले कुछ वर्षों में अनेक हिन्दू कार्यकर्ताओं को हमने खो दिया है । हिंदुओं की हत्याओं के पीछे कार्यरत जिहादी इस्लामी संगठनों पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए । भारत में 'समान नागरिक कानून' लागू करना आवश्यक है । इस संवाद में सहभागी हुए *पश्चिम बंगाल के 'भारतीय साधक समाज' के संस्थापक श्री. अनिर्बान नियोगी *ने कहा, हिंदुओं की हत्या होने पर हिन्दू बडी संख्या में एकत्रित नहीं होते । दिन-प्रतिदिन हिन्दुओं की हत्या देश के सभी राज्यों में हो रही है । इस अन्याय का प्रतिकार करने के लिए हिन्दुओं को आगे आना होगा । * कर्नाटक के उच्च न्यायालय के अधिवक्ता कृष्णमूर्ति पी.* ने कहा, निरंतर जागृत हिन्दुओं की हत्या कर हमारे देश में हिन्दुआें में भय का वातावरण निर्माण किया जा रहा है । तथाकथित मानवाधिकार कार्यकर्ता हिन्दुओं की हत्याआें पर मौन रहते हैं । 'सेकुलरिज्म' के नाम पर हिन्दुओं पर अत्याचार किए जा रहे हैं । 'हिन्दू राष्ट्र' शब्द सदा के लिए समाप्त करने के प्रयास किए जा रहे हैं; परंतु हिन्दू यह सहन नहीं करेंगे । * हिन्दू जनजागृति समिति के कर्नाटक राज्य समन्वयक श्री गुरुप्रसाद गौडा* ने इस समय कहा, कर्नाटक सहित पूरे भारत में धर्मांध शक्तियों का प्रभाव बढ रहा है । हाल ही में कर्नाटक में धर्मांधों ने बजरंग दल के कार्यकर्ता श्री. हर्ष की हत्या की । श्री. हर्ष की हत्या के दोषियों पर कठोर कार्यवाही होनी चाहिए । पिछले कुछ वर्षों में बडी संख्या में हिन्दुओं की हत्या की गई; परंतु जिस संख्या में हिन्दुओं को इसके विरोध में आवाज उठानी चाहिए, वह आवाज नहीं उठाई गई । हिन्दुओं को अब इस विरोध में आवाज उठाकर जागृति करना आवश्यक है । हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| यूक्रेन में रूस की दखलंदाजी --मनोज मिश्र Posted: 24 Feb 2022 07:07 AM PST आखिरकार रूसी सेना ने यूक्रेन पर धावा बोल ही दिया। महीनों की धमकी प्रति धमकी और सुलहनामे के बयानों को परे करते हुए रूस की हवाई सेना ने यूक्रेन के बमवर्षक विमानों हवाई पट्टी और महत्वपूर्ण पुलों और इमारतों पर हवाई हमले किये हैं। जबाब में यूक्रेन ने भी रूसी विमानों और आक्रामक हेलीकाप्टर को मार गिराने का दावा किया है। इस हमले ने विश्व के बाजारों में मंदी की लहर उतार दी है कच्चे तेल की कीमत सन 2014 के बाद पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल पार कर गयी है। पूरे विश्व में तृतीय विश्वयुद्ध की आशंका फैल गयी है। रूस के इस आक्रमण के पीछे आखिर क्या कारण हैं। ज्ञात हो कि यूक्रेन सन 1945 से ही UNO का सदस्य है परन्तु तब इसका नाम यूक्रेन सोवियत सोशलिस्ट रिपब्लिक हुआ करता था। यह रुस्सियन फेडरेशन के मेंबर था तथा USSR का एक हिस्सा। गोर्बाचेव के समय रूस के विघटन पर 24 अगस्त 1991 को यूक्रेन एक स्वतंत्र देश बन गया। यूक्रेन के स्वतंत्र होने के बाद से ही नाटो देश उसे अपने साथ मिलाने के लिए हर प्रकार का प्रयास कर रहे हैं। सन 2008 में नाटो देसजों की बैठक में निर्णय हुआ कि यूक्रेन को नाटो देशों में शामिल कर लिया जाय। तब तक बात हल्की फुल्की जोर आजमाइश की थी। रूस इस कदम का हमेशा से विरोधी रहा है। अगर गौर से देखें तो यूक्रेन की स्थिति भी पाकिस्तान सरीखी ही है। जिस रूसी फेडव्रतिओं का वह हमेशा से हिस्सा रहा वहीं पर वह नाटो के लिए दरवाजे खोलना चाहता है। यूक्रेन की कुल आबादी 4 करोड 15 लाख और क्षेत्रफल 6.03 लाख किलोमीटर है। यूक्रेन में विश्व का 2सरा सबसे बाद यूरेनियम का भंडार है। इसके अलावा वहां कोयला, लौह अयस्क, प्राकृतिक गैस, मैगनीज, कच्चा तेल, टाइटेनियम, निकल, लकड़ी और मरकरी के भंडार भरे हुए हैं। यूक्रेन को रेयर मेटल क्षेत्र भी कहा जाता है। इसी कारण से भी इस देश पर अमेरिका समेत सभी पश्चिमी देशों की नज़र हैं। यही वह कारण भी है कि रूस इस क्षेत्र को अपने प्रभाव से निकलने नहीं देना चाहता है और इसके लिए वह किसी भी हद तक जाने को तैयार है। यूक्रेन के निवासी यूँ तो शांत और सहिष्णु हैं पर जब राष्ट्रवाद की बात आती है तो उन्होंने भी अपने सबक पूर्वर्ती USSR से ही सीखें हैं। यूक्रेन अपने पूर्वी हिस्से में जिसे डोनबास क्षेत्र भी कहा जाता है हो रहे स्वतंत्रता आंदोलनों से परेशान है। इस आंदोलन को रूस का सीधा समर्थन प्राप्त है। ये अलगाववादी मुख्यतया दोनेत्स्क और लुहानतस्क में अपनी हुकूमत चलाते हैं इसी क्षेत्र को डोनबास कहा जाता है। रूस का आक्रमण इसी क्षेत्र की सुरक्षा के नाम पर किया गया है। पर मुख्य कारण यूक्रेन के नाटो में शामिल होने की चर्चा है। रूस नहीं चाहता कि उसकी सीमा पर नाटो का अड्डा बन जाये। वैसे भी नाटो संधि के आर्टिकल 5 के अनुसार किसी भी नाटो देश पर हमला सभो देशों पर सामूहिक हमला माना जायेगा और सभी मिलकर शत्रु का सामना करेंगे। इसीलिए रूस का कहना है कि यूक्रेन के यह कदम उसकी सीमाओं के लिए खतरा है। वैसे रूस जो संयुक्त राष्ट्र का सदस्य है, जनता है कि यूएन चार्टर के आर्टिकल 51 पार्ट 7 में आक्रमणकारी देशों पर प्रतिबंध लगाने का भी प्रावधान है अतः रूस की चिंता को समझा जा सकता है। इसके पहले रूस ने अपने रुख को लचीला करते हुए 3 मांगे रखीं थीं- 1. क्रीमिया के ऊपर रूस की प्रभुसत्ता को यूक्रेन माने। 2. नाटो में शामिल होने से यूक्रेन मना करे। 3. यूक्रेन अपनी सैन्य शक्ति कम करे। जाहिर सी बात है जिनमे से कोई भी मांग यूक्रेन मानने को तैयार नहीं होगा। रूस जानता है की अमेरिका जरूर अपनी टांग इस फटे में अड़ायेगा, यही समय है जब अमेरिका को विश्व पटल पर एक मजबूत नहीं मजबूर राष्ट्र के रूप में दिखाया जा सकता है। अपने अथाह कच्चे तेल मिनरल और नाभिकीय हथियारों के दम पर रूस इस समय किसी की परवाह नहीं करने वाला। अमेरिका ने भी एक तरह से इस मामले में अभी तकक खाना पूर्ति ही की है। उसका कहना है कि यूक्रेन की सीमा पर रूसी सेना का जमावड़ा यूक्रेन की सीमा का उल्लंघन माना जायेगा। ब्रिटेन और जर्मनी ने भी बातों से अपना काम चला लिया है। पर इस तनाव ने विकासशील देशों की नींद उड़ा दी है। कच्चे तेल की कीमतें विदेशी निवेशकों का अपना निवेश निकाल कर सुरक्षित जगहों पर लगाना। पूरी दुनिया के अव्यवस्थित होने का खतरा है। भारत को भी स्थिति सम्हालने में दिक्कतें आ सकती हैं । मजे की बात यह है कि इमरान खान पुतिन सरकार के मेहमान के तौर पर अभी रूस में हैं पर पुतिन ने पिछले चार दिनों से मिलने का समय ही नहीं दिया है। इस बीच यूक्रेन के भारत में राजदूत ने मोदीजी से गुहार लगाई है और विश्वास जताया हैं कि इस संकट में मोदी जैसा वैश्विक नेता ही इस संकट का हल निकाल सकता है। आने वाले दिनों में मोदी सरकार की असली परीक्षा होगी। -मनोज मिश्र हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 24 Feb 2022 07:04 AM PST
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