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Wednesday, February 23, 2022

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भागलपुर में समाज सुधार अभियान में शामिल हुए मुख्यमंत्री

Posted: 23 Feb 2022 08:25 AM PST

भागलपुर में समाज सुधार अभियान में शामिल हुए मुख्यमंत्री

पटना, 22 फरवरी 2022 को मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार आज हवाई अड्डा मैदान, भागलपुर में पूर्ण नशामुक्ति, दहेज प्रथा उन्मूलन एवं बाल विवाह मुक्ति हेतु आयोजित समाज सुधार अभियान में शामिल हुए। इस अवसर पर आयोजित जनसभा में आयुक्त, भागलपुर प्रमंडल श्री प्रेम सिंह मीणा ने मुख्यमंत्री को पौधा भेंटकर उनका अभिनंदन किया। जिलाधिकारी भागलपुर श्री सुब्रत कुमार सेन ने मुख्यमंत्री को स्मृति चिन्ह भेंटकर उनका स्वागत किया। मुख्यमंत्री के आगमन पर जीविका दीदियों ने स्वागत गान प्रस्तुत किया। जीविका दीदी श्रीमती चांदनी कुमारी ने महिला सशक्तिकरण पर आधारित गीत प्रस्तुत किया। 'किलकारी' बिहार बाल भवन के बच्चों ने दहेज प्रथा, बाल विवाह एवं शराब सेवन के दुष्परिणामों पर आधारित 'दर्पण' नाटिका की प्रस्तुति भी दी।
कार्यक्रम की शुरुआत में मुख्यमंत्री ने विभिन्न स्टॉलों पर जीविका, 'किलकारी' बिहार बाल भवन भागलपुर, औद्योगिक नवप्रवर्तन योजना भागलपुर, कृषि विश्वविद्यालय सबौर द्वारा लगायी गयी प्रदर्शनियों का अवलोकन किया।
मुख्यमंत्री ने सतत जीविकोपार्जन योजना के अंतर्गत 2249 लाभार्थियों को 4.31 करोड़ रुपये के डमी चेक प्रदान किये। बैंको से जुड़ाव हेतु 5631 स्वयं सहायता समूहों को विभिन्न बैंकों द्वारा कैश क्रेडिट लिमिट के तहत 131 करोड़ रुपये की राशि का डमी चेक प्रदान किया गया। जल-जीवन-हरियाली योजना अंतर्गत नवसृजित 20 जलाशयों के रखरखाव एवं प्रबंधन हेतु जीविका समूहों को प्रमाण पत्र दिया गया। जीविका ग्रामीण बाजार के संचालन हेतु 39 लाख 56 हजार रुपये के डमी चेक जीविका समूहों को प्रदान किये गये। दीदी की रसोई के संचालन के लिए डमी चाबी जीविका दीदियों को मुख्यमंत्री ने प्रदान किया।
कार्यक्रम के दौरान जीविका दीदियों के साथ संवाद कार्यक्रम के अंतर्गत बाल विवाह और दहेज प्रथा उन्मूलन एवं नशामुक्त समाज बनाने के लिए जीविका दीदियों ने अपनी-अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की। श्रीमती एकता कुमारी शर्मा, श्रीमती समुद्री देवी, श्रीमती शमां परवीन, श्रीमती कुसुम पासवान एवं श्रीमती ललिता देवी ने अपने-अपने अनुभवों को साझा करते हुए मुख्यमंत्री द्वारा किये गए विकास कार्यों एवं चलाए जा रहे समाज सुधार अभियान की काफी सराहना की।
श्रीमती एकता कुमारी शर्मा ने अपना अनुभव साझा करते हुये कहा कि बाल विवाह उन्मूलन को लेकर वे सक्रिय हैं। स्वयं सहायता समूह की बैठक में एक जीविका दीदी आयी और बेटी की शादी के लिये ऋण की माॅग की। पूछने पर उन्होंने बताया कि उनकी बेटी की उम्र 16 साल है। समूह की दीदियों ने कम उम्र में बेटी की शादी करने से मना किया और उन्हें समझाने लगीं कि बाल विवाह के कई दुष्परिणाम होते हैं लेकिन वह नहीं मानी। तब ग्राम संगठन की दीदियों ने मिलकर उनके घर पहुॅची और परिवार के लोगों को समझाया कि कम उम्र में बेटियों की शादी करने से अनेक प्रकार के शारीरिक कष्ट उत्पन्न हो जाते हैं और बच्चे भी शारीरिक एवं मानसिक रूप से कमजोर होते हैं। काफी समझाने के बाद परिवार के लोग मान गये और चार साल बाद 20 वर्ष की उम्र में बच्ची की शादी हुयी।
सतत् जीविकोपार्जन की लाभार्थी श्रीमती समुद्री देवी ने बताया कि पहले उनका परिवार शराब के कारोबार से जुड़ा था लेकिन शराबबंदी के बाद आर्थिक तंगी से जूझने लगी। जीविका की एक दीदी ने उन्हें सतत् जीविकोपार्जन योजना के बारे में बताया और उन्हें समूह से जोड़ा। योजना के तहत आर्थिक मदद मिलने से उन्होंने किराना दुकान खोला। इसके अलावा उन्हें प्रतिमाह एक हजार रूपये सात माह तक उपलब्ध कराया गया। अब वे किराना दुकान के साथ-साथ गाय, बकरी और मुर्गीपालन भी कर रहीं हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति अब काफी बेहतर हुयी है।
शराबबंदी को लेकर श्रीमती शमां परवीन ने बताया कि शराबबंदी लागू होने के बाद भी कुछ लोग गैर कानूनी तरीके से शराब की भट्ठी लगाये थे। उसे ग्राम संगठन की महिलाओं के माध्यम से एवं पुलिस के सहयोग से ध्वस्त किया गया।
सतत् जीविकोपार्जन योजना की लाभार्थी श्रीमती कुसुम पासवान ने अपना अनुभव साझा करते हुये कहा कि उनके पति ताड़ी के व्यवसाय से जुड़े थे। पेड़ से गिरने के कारण उनकी कमर की हड्डी टूट गयी, जिसके कारण परिवार की आमदनी बंद हो गयी। बच्चों के समक्ष भूखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गयी। फिर वे जीविका समूह से जुड़कर किराना दुकान खोलीं। उसके बाद परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार आया।
श्रीमती ललिता देवी ने बताया कि वर्ष 2014 में वे जीविका समूह से जुड़ीं। 2015 में ग्राम संगठन बना। उन्होंने बताया कि समूह की बैठक में जीविका दीदी श्रीमती बबीता देवी ने 45 वर्ष के अधेड़ उम्र के व्यक्ति से अपनी कम उम्र की बेटी की शादी करने की बात कही। शादी रोकने को लेकर हम सभी जीविका दीदियों ने काफी समझाया लेकिन वह नहीं मानी। शादी रोकने के लिये हमलोगों ने सरपंच से सहयोग माॅगी। उसके बाद दीदी को समझाया गया तो वह मान गयी लेकिन उसका पति नहीं माना। जब पुलिस को फोन किया गया। पुलिस उनके घर पहुॅचकर डांट-फटकार लगायी और समझाया, तब परिवार के लोग कम उम्र में शादी नहीं करने पर राजी हुये। इससे श्रीमती बबीता देवी की बेटी काफी खुष है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कार्यक्रम में आने के लिए आप सबको धन्यवाद देता हूं और अभिनंदन करता हूं। आज 5 जीविका दीदियों ने अपनी बातों को उल्लेख किया है, यह सुनकर अच्छा लगा है। 9 जुलाई 2015 को पटना में जीविका के एक कार्यक्रम में महिलाओं ने शराबबंदी को लेकर आवाज उठाना शुरु कर दिया था। उसके बाद मैं वापस माइक पर आया और मैंने कहा कि अगर आपलोगों ने फिर से सेवा का मौका दिया तो बिहार में शराबबंदी लागू करेंगे। उसके तीन माह बाद ही बिहार में विधानसभा का चुनाव था। बिहार की जनता ने पुनः हमलोगों को काम करने का मौका दिया और हमने 20 नवंबर को शपथ ली। शपथ लेने के बाद 26 नवंबर को ही मीटिंग बुलाकर शराबबंदी को लेकर अभियान चलाने का निर्णय लिया गया। पहले 1 अप्रैल 2016 को ग्रामीण इलाके में देशी और विदेशी शराब पर हमलोगों ने रोक लगायी, जबकि शहरी इलाकों नगर निगम और नगर परिषद में अभी विदेशी शराब बंद नहीं करने का निर्णय लिया गया था। हमने सोचा कि गांव में इतना अभियान चलाया गया है और शहर में नहीं चलाया गया है तो बाद में इसको हम देखेंगे लेकिन शहरों में महिलाएं, युवक-युवतियों, कई जगहों पर पुरुषों ने भी शराब की आवंटित दुकानों के खोले जाने पर कड़ा विरोध जताया। इसके बाद 4 अप्रैल को हमने कैबिनेट की मीटिंग बुलाई और 5 अप्रैल 2016 को राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू कर दी। हमने सभी प्रमण्डलों में जाकर लोगों से बातचीत करने का निर्णय लिया। वर्ष 2016 में सबसे पहले हम यहीं आये थे। हम शराबबंदी को लेकर जगह-जगह जाकर महिलाओं का अनुभव जानते थे। उस समय हम 9 जगहों पर गये। महिलाओं ने शराबबंदी को लेकर काफी प्रसन्नता व्यक्त की थी। एक जगह पर एक महिला ने अपनी आप बीती सुनाई कि मेरे पति काम से लौटते थे दारू पीकर आते थे, मारपीट करते थे, हंगामा करते थे। परिवार में सभी को बुरा लगता था, देखने में खराब लगते थे। अब जब शराबबंदी हो गई तो बाजार से सब्जी लेकर आते हैं और घर में आते हैं तो मुस्कुराते हैं और घर के काम में भी सहयोग करते हैं। वे अब देखने में अच्छे लगते हैं। दारु पीने के पक्षधर कुछ लोग मेरे खिलाफ बोलते रहते हैं। जो खुद को ज्यादा काबिल, पढ़ा लिखा और विद्वान समझते हैं लेकिन ऐसे लोग काबिल नहीं हो सकते हैं। बिहार के विकास के लिए काफी काम किया गया है लेकिन फिर भी कुछ लोग इसकी चर्चा नहीं कर फिजूल की बातें करते रहते हैं। केरल राज्य में एक समुदाय शराबबंदी के पक्ष में था, जिन्होंने हमें वहां बुलाया था। शराबबंदी के बाद तरह-तरह के सवाल उठने लगे। कुछ लोग तरह-तरह के सवाल खड़े करने लगे कि शराबबंदी के बाद पर्यटक अब बिहार नहीं आयेंगे। हमने कहा कि पर्यटक यहां दारु पीने नहीं बल्कि बिहार की ऐतिहासिक धरोहरों को देखने और समझने आते हैं। शराबबंदी के बाद 1 करोड़ 60 लाख से ज्यादा लोगों ने शराब पीना छोड़ दिया। वर्ष 2018 के बाद अभी हाल हीं में इसका अध्ययन कराया गया तो यह आंकड़ा सामने आया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शराबबंदी के बाद बिहार की स्थिति में काफी सुधार आया है। बिहार की पहले क्या हालत थी। शाम के बाद घर से निकलने की किसी की हिम्मत नहीं होती थी। सड़कें काफी जर्जर थीं। चाहकर भी कोई कहीं जा नहीं पाता था। हमें याद है कि बाढ़ लोकसभा क्षेत्र से हम सांसद थे और केंद्र सरकार में मंत्री थे। बाढ़ लोकसभा क्षेत्र में टाल का इलाका है। जहां एक दिन में 12 किलोमीटर तक हम पैदल चला करते थे। हमलोगों ने गांव-गांव को पक्की सड़कों से जोड़ने का निर्णय लिया। महीने के तीन सोमवार को हम जनता की शिकायत सुनते हैं। केंद्र में श्रद्धेय अटल जी की सरकार ने सभी गांवों एवं शहरों में काफी सड़कें बनाई। कई बड़ी-बड़ी सड़क परियोजनाओं शुरु करने का निर्णय लिया गया। इनमें से कई सड़क परियोजनाएं अब पूरी हो चुकी हैं और बाकी बची परियोजनाओं पर काम तेजी से चल रहा है। सभी क्षेत्रों में विकास का काम तेजी से किया जा रहा है। आप सब चिंता नहीं कीजिए, एक-एक चीज का हम ध्यान रखते हैं। बिहार के सुदूर इलाकों से राजधानी पटना पहुंचने के लिए पहले हमलोगों ने 6 घंटे का लक्ष्य निर्धारित किया था, जिसे अब हासिल करने के बाद अब 5 घंटे में राजधानी पटना पहुंचने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए बड़ी संख्या में सड़कें एवं पुल-पुलियों का निर्माण कराया जा रहा है। हमलोगों ने यह भी तय कर दिया है कि अब सिर्फ सड़कंे, पुल-पुलियों या भवनों का निर्माण करना ही नहीं है बल्कि उनके मेटेनेंस का काम भी संबद्ध विभाग करेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले बिहार में शिक्षा की काफी बुरी स्थिति थी। पांचवी क्लास से आगे लड़कियां आगे नहीं पढ़ पाती थीं। अपनी बेटियों को लोग आगे पढ़ा नहीं पाते थे। 5वीं कक्षा के बाद उनको जो कपड़े चाहिए थे, वो देने की स्थिति में नहीं थे, जिसकी वजह से बहुत कम लड़के-लड़की ही आगे पढ़ पाते थे। उन्होंने कहा कि वर्ष 2007 से हमलोगों ने पोशाक योजना की शुरुआत की। इसके बाद हमलोगों ने 9वीं कक्षा में पढ़ने वाली लड़कियों के लिए साइकिल योजना की भी शुरुआत की। उस समय इस तरह की योजना पूरे देश ही नहीं बल्कि दुनिया में भी कहीं नहीं थी। घर के काम से अब साइकिल लेकर लड़कियां अपने माता पिता को लेकर बाजार जाने लगीं। जीविका दीदियों को कहेंगे कि इसे भूलियेगा मत। पहले पुरानी बातों की चर्चा होती थी लेकिन जब से सोशल मीडिया आया है, नई-ऩई बातें प्रचारित होने लगी हैं। लोग पुरानी चीजों को भूल जाते हैं। लड़कों की मांग पर उनके लिए भी साइकिल योजना शुरु कर दी गई। अब सभी स्कूली बच्चे चाहे वे लड़के हों या लड़की, साइकिल एवं पोशाक योजना का लाभ मिल रहा है। पिछले साल की मैट्रिक की परीक्षा में लड़कियों की संख्या लड़कों से 300 अधिक थी। पूरी दुनिया में आबादी लगातार बढ़ती जा रही है। बिहार में प्रजनन दर को घटाने की दिशा में भी काम किया गया है। देश भर में यह देखा गया है कि पति-पत्नी में अगर पत्नी मैट्रिक पास है तो देश का औसत प्रजनन दर 2 है और बिहार का भी 2 के करीब था। यदि पत्नी इंटर पास है तो देश का औसत प्रजनन दर
1.7 है, जबकि बिहार का 1.6 है। इसको ध्यान में रखते हुए हमलोगों ने सभी लड़कियों को इंटर तक पढ़ाने का निष्चय किया। इसको लेकर हर पंचायत में प्लस टू तक की पढ़ाई की व्यवस्था करने का निर्णय लिया गया। इसको लेकर काफी संख्या में नये स्कूलों का निर्माण कराया गया। कल ही कैबिनेट से 8 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की मंजूरी दी गयी है ताकि हर कोई पढ़े और आगे बढ़े।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले बिहार के अस्पतालों की स्थिति भी काफी दयनीय थी। वर्ष 2006 में सर्वेक्षण कराया गया तो पता चला था कि प्रखंड स्तर के अस्पतालों में प्रतिमाह मात्र 39 लोग ही इलाज कराने पहुंचते हैं। हमलोगों ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी काफी काम किया है। आज स्थिति यह है कि अब प्रखंड स्तर के अस्पतालों में प्रतिमाह 10 हजार से ज्यादा लोग अपना इलाज कराने पहुंचते हैं। नये मेडिकल कॉलेजों की स्थापना करायी गई। नये संस्थानों का निर्माण कराया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमलोगों ने सभी क्षेत्रों के विकास एवं सभी समुदायों के उत्थान के लिए प्रारंभ से ही काम किया है। शिक्षा सड़क, स्वास्थ्य, पुल-पुलिया, महिलाओं के उत्थान, अनुसूचित जाति-जनजाति, अति पिछड़े वर्ग, अल्पसंख्यक समुदाय के कल्याण के साथ-साथ हाशिए पर खड़े लोगों को आगे बढ़ाने के लिए काम किया है। लोगों की आमदनी बढ़ाने के लिए एक-एक काम किया गया लेकिन शराब में अपनी गाढ़ी कमाई का पैसा लोग खर्च कर देते थे, उस पर रोक लगाने के लिए शराबबंदी लागू की गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले बिहार में बेहतर ढंग से स्वयं सहायता समूह गठित नहीं था। हमलोगों ने 10 लाख स्वयं सहायता समूह बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया था। अब तो 10 लाख के लक्ष्य को भी पूरा कर लिया गया है। अब 1 करोड़ 28 लाख से अधिक महिलाएं इससे जुड़ गई हैं। महिलाओं में इससे कितनी जागृति आयी है। 2006 में होने वाले पंचायत चुनाव में महिलाओं के लिए हमने एक कानून बनाया, जिसमें तय किया कि 50 प्रतिशत का आरक्षण महिलाओं को दिया जाएगा और हमलोगों ने आरक्षण भी दिया। ऐसा करने वाला बिहार देश का पहला राज्य बना। अगले साल नगर निकाय चुनाव होने वाला था तो उसके लिए भी हमलोगों ने महिलाओं को 50 प्रतिशत का आरक्षण दिया। अभी हाल ही में ग्राम पंचायत के चुनाव में काफी तादाद में महिलाएं जीत कर आयी हैं। हमने पुलिस एवं सभी सरकारी सेवाओं में महिलाओं को 35 प्रतिशत आरक्षण का लाभ दिया। इसका नतीजा है कि आज इस देश के बड़े से बड़े एवं अमीर से अमीर राज्य में भी इतनी बड़ी संख्या में महिलाएं पुलिस में नहीं हंै, जितनी बिहार की पुलिस बल में हैं। हम तो गरीब राज्य हैं। हमलोगों ने अनुसूचित जाति-जनजाति और अतिपिछड़े वर्ग के लोगों को व्यापार के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए 5 लाख रूपये तक के अधिकतम अनुदान और 5 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण तय कर दिया था। उसे अब सभी वर्गों की महिलाओं के लिए भी लागू कर दिया गया है। व्यापार में रुचि रखने वाले सामान्य वर्ग के पुरुषों को 5 लाख रूपये तक का अधिकतम अनुदान और 1 प्रतिशत की ब्याज पर 5 लाख रुपये तक का ऋण मुहैया कराया जा रहा है। सभी समुदाय के उत्थान के लिए हरसंभव कोशिश की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शराबबंदी, बाल विवाह एवं दहेज प्रथा उन्मूलन के खिलाफ लोगों में काफी जागृति आ रही है। अभी कुछ समय पहले ही जहरीली शराब की घटना हुई थी जिसके बाद कुछ लोग कहने लगे कि शराबबंदी का कोई मतलब नहीं है। हमने कहा कि दारु बुरी चीज है, पीओगे तो मरोगे। 16 नवंबर 2021 को राज्य के सभी अधिकारियों के साथ-साथ हमने 7 घंटे तक समीक्षा बैठक कर समाज सुधार अभियान चलाने का निर्णय लिया। 26 नवंबर से इसकी शुरुआत की गई। इस बार कम से कम 12 जगहों पर जाना निष्चित हुआ है। इस बार अभी तक हम 6 जगहों पर जा चुके थे तभी कोरोना की तीसरी लहर आ गयी। बाकी जगहों पर भी जाकर समाज सुधार अभियान को पूरा करेंगे। लोगों से आह्वान करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज सुधार अभियान आप निरंतर चलाते रहें। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पूरी दुनिया का वर्ष 2016 में सर्वेक्षण कराया और 2018 में रिपोर्ट प्रकाशित की। उस रिपोर्ट में बताया गया है कि शराब पीने से दुनिया में एक साल में 30 लाख लोगों की मृत्यु होती है यानि दुनिया में जितनी मृत्यु हुई है उसका 5.3 प्रतिशत मौत शराब पीने से हुयी है। 20 से 39 आयु वर्ग के लोगों में 13.5 प्रतिशत मृत्यु शराब पीने के कारण होती है। शराब के सेवन से 200 प्रकार की बीमारियां होती हैं, जबकि 18 प्रतिशत लोग शराब पीने से आत्महत्या कर लेते हैं। डायबिटीज, लिवर सिरोसिस जैसी अनेक बीमारी शराब पीने से होती हैं। शराब पीने के कारण 18 प्रतिशत आपसी झगड़े होते हैं। शराब पीने के कारण दुनिया भर में 27 प्रतिशत सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के बाद भी कुछ लोग शराबबंदी को लेकर अनाप शनाप बोलते रहते हैं। शराब मनुष्य में हिंसक प्रवृति को भी बढ़ावा देता है। इससे संबंधित बुकलेट अपने घरों में रखिए और इसके बारें में लोगों को भी बताइये। इसके बाद भी कुछ लोग कहते हैं कि स्वास्थ्य ठीक रखने के लिए शराब पीने की इजाजत दी जानी चाहिए। शराब की वकालत करने वाले लोग राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की बातों को भी भूल जाते हैं। बापू ने कहा था कि शराब, आदमी से न सिर्फ उसका पैसा छीन लेता है बल्कि उसकी बुद्धि भी हर लेता है। शराब पीने वाला इंसान हैवान हो जाता है। देश में बाल विवाह और दहेज प्रथा को रोकने के लिए कानून बना हुआ है। इसके बावजूद यह कुप्रथा आज भी देखने को मिल जाती है। पहले परिवार के लोग लड़के को ज्यादा और लड़कियों को कम पढ़ाते थे। हमने लड़कियों को उच्च शिक्षा प्रदान करने को लेकर व्यवस्था सुनिश्चित की। समाज में अगर पति-पत्नी नहीं रहते तो हम सबका अस्तित्व नहीं रहता। लड़की नहीं होगी तो लड़के की शादी आप किससे करेंगे। दहेज मुक्त शादी समारोह में ही हमने जाने का निर्णय लिया है। शादी के कार्ड पर दहेज मुक्त शादी की बात लिखी जायेगी तो ही हम उस शादी समारोह में जायेंगे। सभी बहनों से हम आग्रह करते हैं कि दहेज प्रथा उन्मूलन हेतु अभियान निरंतर चलाते रहें। बाल विवाह उन्मूलन को लेकर भी लोगों को जागरुक किया जा रहा है। केंद्र सरकार ने लड़कियों की शादी की न्यूनतम उम्र 18 से बढ़ाकर 21 वर्ष करने का प्रस्ताव लाया है। कम उम्र में लड़कियों की शादी होने से वे कई प्रकार की शारीरिक बीमारियों का शिकार हो जाती हंै। उनके बच्चों की लंबाई भी कम होती है। बच्चे शारीरिक एवं मानसिक रुप से भी कमजोर होते हैं। उन्होंने कहा कि शराबबंदी, बाल विवाह एवं दहेज प्रथा उन्मूलन को लेकर निरंतर अभियान चलाते रहिए, इसे छोड़ना नहीं है। हमलोग समाज के कल्याण के लिए काम करते रहेंगे। आप लोगों की सेवा करना ही हमारा फर्ज है। आपने हमें मौका दिया है, राज्य को आगे बढ़ाने के लिए हम हर मुमकिन कोशिश में जुटे हैं ताकि देश के विकास में बिहार का महत्वपूर्ण योगदान हो। समाज सुधार अभियान को निरंतर चलाने के पक्ष में जनसभा में उपस्थित लोगों ने हाथ उठाकर संकल्प भी लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आप सबों ने संकल्प लिया है, लोगों को हमेशा जागरुक करते रहिए। विकास के साथ-साथ समाज सुधार भी जरुरी है। हमलोग आपको आश्वस्त करते हैं कि विकास का काम और तेजी से आगे बढायेंगे। आप सभी आपस में प्रेम और भाईचारा का भाव रखें। मिलकर चलेंगे तो तेजी से तरक्की होगी।
कार्यक्रम को राजस्व एवं भूमि सुधार सह भागलपुर जिले के प्रभारी मंत्री श्री रामसूरत कुमार, उद्योग मंत्री सैयद शाहनवाज हुसैन, मंत्री मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन श्री सुनील कुमार, मंत्री ग्रामीण कार्य श्री जयंत राज, मुख्य सचिव श्री आमिर सुबहानी, पुलिस महानिदेशक श्री एस0के0 सिंघल, अपर मुख्य सचिव गृह श्री चैतन्य प्रसाद, मद्य निषेध उत्पाद एवं निबंधन विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री के०के० पाठक ने भी संबोधित किया।
इस अवसर पर सांसद श्री अजय कुमार मंडल, सांसद श्री गिरिधारी यादव, विधायक श्री गोपाल मंडल, विधायक श्री ललित नारायण मंडल, विधायक श्री ललन कुमार, विधान पार्षद श्री एन0के0 यादव, विधान पार्षद श्री संजीव सिंह, विधान पार्षद श्री संजय सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री दीपक कुमार, अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य श्री प्रत्यय अमृत, मुख्यमंत्री के सचिव श्री अनुपम कुमार, आयुक्त, भागलपुर प्रमण्डल श्री प्रेम सिंह मीणा, जीविका के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी श्री बाला मुरुगन डी०, पुलिस उप महानिरीक्षक, भागलपुर पूर्वी प्रक्षेत्र श्री सुजीत कुमार, जिलाधिकारी भागलपुर श्री सुब्रत कुमार सेन, जिलाधिकारी बांका श्री सुहर्ष भगत, वरीय पुलिस अधीक्षक भागलपुर श्री बाबूराम, पुलिस अधीक्षक बांका श्री अरविंद कुमार गुप्ता, पुलिस अधीक्षक नवगछिया श्री सुशांत कुमार सरोज सहित अन्य वरीय पदाधिकारी, जीविका दीदियां एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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चाणक्य नीति अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के संदर्भ मेंं

Posted: 23 Feb 2022 08:14 AM PST

चाणक्य नीति अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के संदर्भ मेंं

संकलन अश्विनी कुमार तिवारी

चंद्रगुप्त मौर्य का शासन काल भारतीय इतिहास का स्वर्णयुग था इसके संस्थापक और निर्माता आचार्य चाणक्य थे जो अपनी कूटनीति के लिए विश्वविख्यात हंै। सिकन्दर के विश्वविजय का स्वप्र उन्होंने भंग कर दिया, भारत में उसके पांव नहीं जमने दिये सेल्यूकस को संधि करनी पड़ी, सम्राट चन्द्रगुप्त एक विशाल साम्राज्य के नायक बने जिसकी सीमाएं हजारों वर्ष बाद स्थापित मुगल और ब्रिटिश साम्राज्य से भी बड़ी थी, चन्द्रगुप्त मौर्य के पुत्र बिन्दुसार और उनके पुत्र अशोक भी लोकप्रिय सम्राट हुए। आचार्य चाणक्य की परिकल्पना में विजय की कामना लेकर आगे बढ़ते राजा को 'विजिगिशुÓ की संज्ञा दी गयी है, वह एक सशक्त शासक होता है जो अपनी सीमाओं की सुरक्षा में सक्षम तो होता ही है साथ ही साथ उनके विस्तार का प्रयास भी करता है। अपने दुश्मनों को पराजित करने के लिए साम, दाम, दण्ड और भेद का प्रयोग समय और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए करता है देश और प्रजा का हित उसके लिए सर्वोच्च होता है, उसका सुख प्रजा के सुख में न कि अपने व्यक्तिगत स्वार्थ में- प्रजा सुखे च सुखम राज्ञ:, प्रजा हिते च हितम्:।।
आचार्य चाणक्य के मत में विजिगीषु दुश्मनों और दोस्तों से घिरा होता है जिसे उन्होंने मण्डल की संज्ञा दी सीमा से लगे हुए राज्य का शासक दुश्मन होता है, उसके दुश्मन दोस्त बनाये जा सकते हैं।
मण्डल व्यवस्था इस बात को इंगित करती है कि दूसरे देश के शासकों को केवल दुश्मन या मित्र समझना भूल है, मध्यमा और उदासीन राजाओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है यह विजिगीषु की क्षमता पर निर्भर है कि उनको कैसे अपने साथ मिला पाता है, अन्य राजाओं की तरह के भी महत्वाकांक्षी हो सकते है उनसे दुश्मनी महंगी पड़ सकती है उनका साथ रहना देश के हित में हो सकता है, दुश्मन राजा चाहे सामने का हो या पीछे का उसके दुश्मनों से दोस्ती का हर सम्भव प्रयास करना चाहिए, उसके दोस्तों से सावधान रहना चाहिए और कोशिश करना चाहिए कि उनके बीच दरार पैदा हो, उनकी मित्रता टूटे और उसका लाभ उठाया जा सके, जो आज दुश्मन हैं, कल मित्र हो सकते हैं। अन्तर्राष्ट्रीय सम्बन्धों में कोई हमेशा के लिए मित्र या दुश्मन नहीं होता।
विजिगीषु जब दुश्मन पर हमला करना चाहता है तो उसे इस बात से आश्वस्त होना होगा कि दुश्मन को उसके मित्रों से मदद नहीं मिल पायेगी इसके लिए युद्ध के पहले उसे दुश्मन और उसके मित्र के बीच में तनाव की स्थिति पैदा करनी होगी। इसके लिये गुप्तचरों का जाल बिछाकर, उनकी प्रजा में और अधिकारियों में गलतफ हमी पैदा करके विद्वेष पैदा करना, उपद्रव कराना, उनकी सेना में फू ट डालना जैसे तरीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। विजय की आकांक्षा से छेड़े हुए युद्ध में लक्ष्य का महत्व है न कि साधनों का। यह समय साधनों के औचित्य पर विचार करने का नहीं होता, विजिगीषु पर जब दुश्मन के हमले की आशंका होती है तो वह अपने मित्र राजाओं को दुश्मन पर हमला करने के लिये तैयार रहने को प्रेरित कर सकता है।
बारह प्रकार के राजाओं के घेरे को राजप्रकृति का नाम दिया गया है। इसके अतिरिक्त प्रत्येक राजा के अपने घेरे होते हैं। हर घेरे में पांच तत्व की मान्यता है-अमात्य (मंत्री), जनपद(देश), दुर्ग (किला) और कोश (खजाना) प्रत्येक राजा के पांच तत्वों को मिलाकर कुल 60 तत्व होते हैं जिसे द्रव्य प्रकृति का नाम दिया गया है। बारह राजा और साठ तत्वों को मिलाकर कुल 62 तत्व बनते है जो मण्डल (राजाओं के घेरे) को पूरा करते हैं। विजिगीषु को युद्ध या शान्ति का निर्णय अपनी और दुश्मनों की ताकत का सही अंदाज लेकर करना चाहिए। शान्ति लाभदायक है यदि युद्ध से लाभ नजर नहीं आता। अपने दुश्मन से अधिक ताकतवर राजा के साथ संधि लाभप्रद होता है। इसके लिए ताकतवर राजा से अच्छे सम्बन्ध रखने के लिए हर सम्भव प्रयत्न करना चाहिए।
जब दो बड़े दुश्मन हो तो उनमें से जो अधिक ताकतवर हो उससे संधि कर लेना हितकर है। आवश्यक हो तो दोनों से संधि की जा सकती है। यह व्यवस्था स्थायी नहीं समझनी चाहिए। अवसर आने पर दोहरी नीति अपनायी जा सकती है जैसे दोनों दुश्मनों में फूट डालना, और उनमें तनाव पैदा करना, किसी तीसरे राजा से दोस्ती करना जो उन दोनों के विरूद्ध हो, मध्यम और उदासीन राजाओं का सहयोग लेना आदि हर स्थिति में निर्णय देश के हित में होना चाहिए व्यक्तिगत लाभ और सम्बन्धों को देखकर नहीं।
विजिगीषु के दुश्मन दो प्रकार के होते हैं। एक तो स्वाभाविक दुश्मन होता है जो बराबर का ताकतवर है और जिसकी सीमाएं देश से लगी हुई हैं। दूसरा काल्पनिक दुश्मन है जो इतना ताकतवर नहीं है कि युद्ध करके जीत जाये किन्तु दुश्मनी का भाव रखता है। दुश्मनों से मित्रता की कोशिश करता है। कुछ राजाओं से मित्रता विशेष कारणों से की जा सकती है जिससे अपने देश का लाभ हो या व्यापार में, सैन्य शक्ति बढ़ाने में कुछ पड़ोसी राज्य ऐसे भी हो सकते हैं जिनके सर पर दुश्मनों की तलवार लटकती रहती है, जो कमजोर है उन्हें वसल की संज्ञा दी गयी है।
राजा शक्तिशाली होना चाहिए, तभी राष्ट्र उन्नति करता है। राजा की शक्ति के तीन प्रमुख स्रोत हैं – मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक। मानसिक शक्ति उसे सही निर्णय के लिए प्रेरित करती है, शारीरिक शक्ति युद्ध में वरीयता प्रदान करती है और आध्यात्मिक शक्ति उसे ऊर्जा देती है, प्रजा हित में काम करने की प्रेरणा देती है। कमजोर और विलासी प्रवृति के राजा शक्तिशाली राजा से डरते हैं। शक्तिशाली दुश्मन राजा को कमजोर करने के लिए विषकन्याओं का उपयोग भी किया जा सकता है जो उन्हें विलासिता में डूबाकर कमजोर कर दें।
मित्रता उन राज्यों से बढ़ाई जानी चाहिये जो विश्वास योग्य हों। यदि अपने से अधिक शक्तिशाली राज्य से मित्रता की जाती है तो इसे स्थायी मानकर नहीं चलना चाहिए। स्थायित्व देश की सैन्य और आर्थिक शक्ति के विकास में सिद्ध हो सकती है। दुहरी नीति उन परिस्थितियों में अपनायी जानी चाहिए जब एक दुश्मन से युद्ध का मन हो और दूसरे को न छेडऩे या दोस्त बनाने की सोच हो। मित्र राष्ट्र ऐसी स्थिति में सहयोगी हो सकते हैं।


अन्तर्राष्ट्रीय सम्बन्धों में निरपेक्षता का भी महत्त्व है। जब शान्ति के लिये संधि या युद्ध करने का अवसर न हो तो निरपेक्ष रहना ही श्रेयस्कर होता है। मंडल में मध्यमा और उदासीन राजा निरपेक्ष रहने में ही अपनी भलाई समझते हैं।


युद्ध करने की स्थिति पैदा होने पर समय, स्थान और सैन्य शक्ति, आन्तरिक सुरक्षा आदि पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। युद्ध की तैयारी में मित्र देशों को साथ लेना, दुश्मन पर पीछे से हमला करवाना, सामने से स्वयं अपनी सेना के बल पर लोहा लेना, अभेद्य चक्रव्यूह की रचना, बहाने से हमला करने की योजना की आवश्यकता पड़ सकती है जिसके लिये पूरी तैयारी होनी चाहिए।


कूटनीति के चार प्रमुख अस्त्र हंै जिनका प्रयोग राजा को समय और परिस्थितियों को ध्यान में रखकर करना चाहिए- साम, दाम, दण्ड और भेद। जब मित्रता दिखाने (साम) की आवश्यकता हो तो आकर्षक उपहार आतिथ्य, समरसता और सम्बन्ध बढ़ाने के प्रयास करने चाहिए जिससे दूसरे पक्ष में विश्वास पैदा हो। ताकत का इस्तेमाल, दुश्मन के घर में आग लगाने की योजना, उसकी सेना और अधिकारियों में फूट डालना, उसके करीबी रिश्तेदारों और उच्च पदों पर स्थित कुछ लोगों को प्रलोभन देकर अपनी ओर खींचना कूटनीति के अंग हैं।


विजिगीषु एकक्षत्र राज्य कर सके, इसके लिये विदेश नीति ऐसी होनी चाहिए जिससे राष्ट्र का हित सबसे ऊपर हो देश शक्तिशाली हो, उसकी सीमाएं और साधन बढ़ें, दुश्मन कमजोर हों और प्रजा की भलाई (योगक्षेम) हो। ऐसी नीति के 6 प्रमुख अंग है-संधि, समन्वय(मित्रता) द्वैदीभाव (दुहरी नीति) आसन (ठहराव), यान (युद्ध की तैयारी) एवं विग्रह (कूटनीतिक युद्ध)। युद्ध भूमि में लड़ाई अन्तिम स्थिति है जिसका निर्णय अपनी और दुश्मन की शक्ति को तौलकर ही करनी चाहिए।


जब दुश्मन की और अपनी स्थिति एक जैसी हो, तो शान्ति बनाये रखने में ही भलाई है। सन्धि अनेक प्रकार की हो सकती है जो शान्ति और समृृद्धि में सहायक होती है जैसे हिरण्य संधि (देश को शान्ति मिले) कर्मसंधि (सेना और खजाना दोनो का लाभ) भूमि संधि (भूमि प्राप्ति)। हार की स्थिति में ऐसी संधियां भी हो सकती हैं जिनमें राज्य का कुछ हिस्सा देकर देश को बचाया जा सके। बड़ी धन राशि देकर देश को बचाया जाय (कपाल संधि)। उद्देश्य है मजबूरी में संधि जिसे अवसर पाते ही तोड़ दिया जाय। संधि सीधे दो देशों के बीच हो सकती है या आवश्यकता पडऩे पर किसी तीसरे देश को बिचौलिया बनाया जा सकता है। सन्धि में शपथ की व्यवस्था भी हो सकती है कौटिल्य के मत में इस व्यवस्था का सम्मान तभी तक करना चाहिए जब तक अपनी स्थिति दूसरे पक्ष की अपेक्षा कमजोर हो। गुप्त संधि भी की जा सकती है जिससे दोनों पक्षों में आपसी विश्वास हो और मिलकर महत्त्वपूर्ण कदम उठाने हों। सन्धि को एक तात्कालिक व्यवस्था के रूप में देखा जाना चाहिए न कि स्थायी व्यवस्था के रूप में। देश हित में संधि तोड़ देना भी विदेशी नीति का हिस्सा होता है।


बांटो और राज्य करो, कूटनीति का एक महत्त्वपूर्ण अस्त्र है। दुश्मन को बगैर युद्ध के जीतने का एक अच्छा साधन है। युगों से शासक इसका इस्तेमाल अपनी शक्ति बढ़ाने और दुश्मन को कमजोर करने के लिए करते आये हंै। कूटनीति युद्ध में जायज क्या है और नाजायज क्या, शासक इस पर ध्यान नहीं देते, जोर इस बात पर होता है कि अपने राष्ट्र की शक्ति कैसे बढ़े दुश्मन कैसे टूटे। इसके लिये षड्यन्त्र करना, दुश्मन को हर तरह से नुकसान पहुंचाना सब कुछ जायज है।


दुश्मन पर हमला करने का अच्छा अवसर तब होता है जब उससे भी अधिक शक्तिशाली राष्ट्र सामने से उसे ललकारता है ऐसी परिस्थिति में दुश्मन जिस चक्रव्यूह में फंस जाता है उससे निकलना उसके लिए कठिन होता है। जब हमला अन्य राष्ट्रों को साथ लेकर करते हैं तो जीतने पर जो लाभ होता है उसके बंटवारे के बारे में समझौता पहले से करना चाहिए ताकि युद्ध के बाद आपस में झगड़े की स्थिति न बने।


अन्तर्राष्ट्रीय सम्बन्धों के संदर्भ में अर्थशास्त्र में जो विशद व्याख्या की गई है, उसका लोहा राजनीति के पंडित, नेता, शासक सभी मानते हैं। चाणक्य नीति को अनीति कहने वालो की भी कमी नहीं है क्योंकि उनका सिद्धान्त व्यावहारिक है। मूल्य परक नहीं, क्या जायज है क्या नाजायज इसका फैसला राजा (आधुनिक संदर्भ में राष्ट्राध्यक्ष या प्रधानमंत्री जो सत्ता का कर्णधार होता है) को करना होता है, जिसके लिए राष्ट्र हित सर्वोपरि है। जो राजा राष्ट्रहित की जगह अपना और अपने सम्बन्धियों, सहयोगियों और सलाहकारों के हित को राष्ट्रहित के आगे कर देते हैं, वे स्वयं भी नष्ट होते हैं और राष्ट्र के पतन का भी कारण बनते हैं। चाणक्य ने राजा को अपनी इंद्रियों पर नियन्त्रण की सलाह दी और इसी में राष्ट्रहित का बीज मंत्र दिया-' राज्यस्य मूलम् इन्द्रिय जय:।✍🏻साभार भारतीय धरोहर
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होली का मौसम आ गया

Posted: 23 Feb 2022 08:11 AM PST

होली का मौसम आ गया 

होली का रंग भा गया, 
मस्ताना मौसम आ गया।
भरी सभा में फाग सुनाएं, 
फागुन रंग रंगीला छा गया।।

सारे मस्ती में झूमे गाए, 
एक दूजे को गुलाल लगाएं।
गौरी नित का काग उड़ावे, 
परदेसी कब मेरा घर आवे।।

बजे प्रेम की जहां बांसुरी, 
जीवन मीठा राग सुनावे।
रसिया झूमके नाचे गाए, 
अलबेला सा फाग सुनाएं।।

रंगीला महीना आ गया, 
मस्ताना मौसम छा गया।
ढप ढपली नगाड़े बजावे,
फागोत्सव उत्सव मनावे।।

प्रेम रंग की भर पिचकारी,
एक दूजे को रंग लगावे।
लो प्रेम दिलों में छा गया, 
होली का मौसम आ गया।।

रमाकांत सोनी नवलगढ़ जिला झुंझुनू राजस्थान
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सच को सच कहना आसान कहाँ होता है

Posted: 23 Feb 2022 08:09 AM PST

सच को सच कहना आसान कहाँ होता है,

सच अक्सर कड़वा होता सहन कहाँ होता है।
सबसे ज़्यादा डर अपनों की रुसवाई का,
ग़ैरों की रुसवाई का डर किसको होता है।

सब चाहते हैं दिन को हम भी रात बतायें,
बिन सच जाने सच्चाई से आँख चुरायें।
ग़लत सही पर वाद निरर्थक सम्बन्धों में,
अधर्मी का साथ निभाकर अपने कहलायें।

कैसे दिन को रात कहें हम समझ सके ना,
रिश्तों को कैसे बिसरायें हम समझ सके ना।
घटित हुआ जो नैनों के सम्मुख कैसे भूलूँ,
कैसे खुद को अंधा कह दें हम समझ सके ना।

अ कीर्ति वर्द्धन
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न जाने क्यों ख़ुद को नाकारा बनाते हैं

Posted: 23 Feb 2022 08:07 AM PST

न जाने क्यों ख़ुद को नाकारा बनाते हैं,

सच सामने आने पर चेहरा छिपाते हैं।
सेवानिवृत्ति के बाद घर पर ही क्यों रहें,
क्यों नहीं किसी काम में समय लगाते हैं?

घर का काम करना, क्या गुनाह हो गया?
क्यों घर के सदस्यों पर अहसान जताते हो?
ख़ामियाँ अपनी भी होंगी उनको निहारिये,
बुजुर्ग होने के अपने सच को क्यों छिपाते हो?

सेवानिवृत्ति से आज़ादी कार्यालय के काम से,
परिवार को कब मिलेगी इस पर भी विचारिये?
बॉस थे कार्यालय में आप सच को पहचानिए,
मगर बॉस के गुलाम थे हक़ीक़त को मानिए।

रुतबा तुम्हारा कम तो कार्यालय में हुआ है,
ग़ुस्सा बाहर का कभी घर पर न निकालिए।
अधिकार बहुत आपके, कर्तव्य भी बहुत हैं,
स्वेच्छा से दायित्वों के प्रति समर्पण जताइए।

अच्छा रहे हम यदि सदैव व्यस्त बनें रहें,
परिवार की ख़ुशियों में कर्तव्य करते रहें।
बच्चों को देकर आज़ादी निर्णय लेने की,
ज़रूरत पड़े उनका मार्ग प्रशस्त करते रहें।

अ कीर्ति वर्द्धन
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विष्णु धाम महोत्सव में कई गणमान्य होंगे सम्मानित , 25 व 26 फरवरी को होगा आयोजन|

Posted: 23 Feb 2022 08:04 AM PST

विष्णु धाम महोत्सव में कई गणमान्य होंगे सम्मानित , 25 व 26 फरवरी को होगा आयोजन|

औरंगाबाद, 23 फरवरी।औरंगाबाद सदर प्रखंड स्थित अनुग्रह नारायण रोड स्टेशन के समीप अवस्थित गायत्री माता मंदिर के प्रांगण में विष्णु धाम महोत्सव आयोजन समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई,जिसकी अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष अजीत कुमार सिंह ने की।25 एवं 26 फरवरी को होनेवाले विष्णुधाम महोत्सव के सभी कार्यक्रमों की रूपरेखा तय करने वास्ते समीक्षा बैठक की गई।कार्यक्रमों की समीक्षा करने के क्रम में 25 फरवरी को विष्णु धाम के प्रांगण में अवस्थित भगवान विष्णु एवं सभी देवी देवताओं का षोडशोपचार विधि से पूजन अर्चन किया जायेगा जबकि जम्होर दुर्गा मैदान से विष्णु धाम तक शोभायात्रा निकाली जायेगी।
महोत्सव स्थल पर मुख्य अतिथि सुशील कुमार सिंह माननीय सांसद औरंगाबाद एवं महाबली सिंह माननीय सांसद काराकाट एवं विशिष्ट अतिथि पंचदेव धाम चपरा के संस्थापक अशोक कुमार सिंह द्वारा कार्यक्रम का उद्घाटन किया जायेगा। संध्या समय में दानिका सांस्कृतिक संस्थान द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित की जायेगी।
26 फरवरी को विष्णु धाम की ऐतिहासिक महिमा एवं पुनपुन तीर्थ की गरिमा विषय पर विचार गोष्ठी, जिले के सभी महोत्सव के आयोजकों का सम्मान समारोह, पोषक क्षेत्र के विशिष्ट उपलब्धि प्राप्त करने वाले व्यक्तियों एवं पत्रकारों का सम्मान समारोह,
संध्या में सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं कवि सम्मेलन करने का निर्णय लिया गया। बैठक में सभी कार्यक्रमों के प्रभारी नियुक्त किए गये।शोभा यात्रा की जिम्मेवारी गायत्री परिवार को दी गई। सहयोगी के रुप में संजय गुप्ता, सुजीत सिंह एवं नवनीत कुमार की सहभागिता होगी। स्वागत गान की जिम्मेवारी माया दुबे एवं अनिता देवी को एवं झांकी निकालने की जिम्मेवारी सुमित मूर्ति कलाकार को दी गई। सांस्कृतिक कार्यक्रम में स्थानीय कलाकारों से संपर्क करने की जिम्मेवारी सुमित कुमार को दी गई। सम्मान समारोह की जिम्मेवारी अजीत सिंह एवं सिद्धेश्वर विद्यार्थी को दी गई। विचार गोष्ठी की जिम्मेवारी सुरेश विद्यार्थी दी गई। कवि सम्मेलन की जिम्मेवारी अनिल कुमार सिंह एवं कमलेश सिंह को दी गई। सचिव सुरेश विद्यार्थी ने कहा कि गया तीर्थ के पिंडदान की प्रथम वेदी पुनपुन बटाने संगम के तट पर अवस्थित विष्णु धाम महान धार्मिक स्थल है ।इस स्थल की चर्चा पुराणों में भी वर्णित है ।मगध के चार प्रमुख तीर्थों में से एक है। इस स्थल के राष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित एवं प्रसारित करने की आवश्यकता है।आज के महत्वपूर्ण बैठक में महोत्सव पुरुष सिद्धेश्वर विद्यार्थी, स्वागताध्यक्ष प्रदीप कुमार सिंह, पंचायत समिति सदस्य एवं व्यवस्थापक अनिल अग्रवाल, सुजीत सिंह, पवन सिंह, नवनीत कुमार, सुरेश विद्यार्थी, दीपक वर्मा ,समाजसेवी बिंदेश्वरी मेहता, अशोक प्रसाद, सुमित कुमार, सहित अन्य उपस्थित थे।
-----0----- अरविन्द अकेला
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किसान कल्याण का ध्येय– प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि भारतीय कृषि का स्वर्णिम अध्याय लिख रही है पीएम-किसान स्कीम

Posted: 23 Feb 2022 07:46 AM PST

24 फरवरी 2022 को पीएम-किसान की तीसरी वर्षगांठ पर माननीय मंत्री जी का आलेख

किसान कल्याण का ध्येय– प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि भारतीय कृषि का स्वर्णिम अध्याय लिख रही है पीएम-किसान स्कीम

देश में किसान कल्याण का ध्येय रखते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रारंभ की गई प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना आज कृषि क्षेत्र के विकास की अहम धुरी बन चुकी है। भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि का प्रमुख योगदान रहा है। हमारे देश की वित्तीय और सामाजिक बनावट में कृषि क्षेत्र का महत्व अलग ही प्रदर्शित होता है। देश की खाद्य सुरक्षा अनाज उत्पादन पर निर्भर करती है। इस दिशा में उपयोगी, विस्तारित और व्यावहारिक कृषि क्षेत्र त्वरित गति से विकसित होना चाहिए, इस संकल्पना को मोदी जी की सरकार ने साकार किया है।

अपने किसानों को जलवायु की चुनौती से बचाने के लिए, हमारा फोकस बैक टू बेसिक्स और भविष्य की ओर ले जाने का मिश्रण है। केंद्र सरकार का फोकस देश के 80 फीसदी से ज्यादा छोटे किसानों पर है, जिन्हें सरकार की किसान हितैषी नीतियों की सबसे ज्यादा जरूरत है। यहीं वजह है कि पिछले सात साल से ज्यादा के मोदी सरकार के दो कार्यकाल में इन्हीं छोटे किसानों को केंद्र में रखकर नीतियां बनाकर योजनाओं और कार्यक्रमों को बेहतर ढंग से क्रियान्वित किया गया है। हाल ही में संसद में प्रस्तुत केंद्रीय बजट 2022-23 ने भी कृषि क्षेत्र को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए जैविक खेती व डिजिटल कृषि प्रथाओं को अपनाने सहित कृषि क्षेत्र पर पर ध्यान केंद्रित किया है।

इस योजना के सकारात्मक परिणाम के साथ, भारत सरकार को इसे क्रॉस-कंट्री वेंचर के रूप में निष्पादित करने की आवश्यकता थी और भारत के वर्ष 2019 के अंतरिम केंद्रीय बजट के दौरान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा अनूठी पहल की गई। देशभर में सभी भूमिधारक किसान परिवारों को राजस्व समर्थन देकर किसानों की सहायता का विस्तार करने के लिए, उन्हें कृषि, बागवानी और संबंधित क्षेत्र के साथ-साथ घरेलू आवश्यकताओं से जुड़ी लागतों के खर्च से निपटने के लिए सशक्त बनाने हेतु यह आवश्यक था।

किसान परिवारों के लिए पूरक आय सहायता की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री ने 24 फरवरी 2019 को किसानों के कल्याण के लिए महत्वाकांक्षी योजना- प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना का गोरखपुर (उत्तर प्रदेश) में एक करोड़ से अधिक किसानों को, प्रत्येक लाभार्थी को दो-दो हजार रूपये की पहली किस्त हस्तांतरित करके शुभारंभ किया था। इसके सफल कार्यान्वयन के लिए इसे विश्व बैंक सहित विभिन्न संगठनों से अपार समर्थन मिला है।

पहले साल, 2018-2019 के लिए, इस योजना के तहत 20,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। अब तक 11.30 करोड़ से अधिक लाभार्थी किसान परिवारों को राज्य/संघ राज्य क्षेत्र सरकारों से 100% त्रुटि मुक्त, सत्यापित और वैध डेटा प्राप्त करने के बाद योजना का लाभ देते हुए कुल 1.82 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की गई है। COVID अवधि के दौरान पीएम-किसान योजना के तहत किसानों को 1.29 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि दी गई है।

पीएम-किसान योजना को इसके आकार, तौर-तरीकों और तंत्र में निरंतर सुधार/परिवर्तन के साथ लागू किया गया है। लाभार्थियों को वित्तीय लाभ के सुचारू और त्वरित हस्तांतरण को सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर कई प्रक्रियात्मक परिवर्तन लागू किए गए हैं। स्थिति के अनुसार, योजना के संचालन दिशा-निर्देशों को भी समय-समय पर संशोधित किया जाता है, जिसमें सभी प्रमुख राज्यों ने अपने किसानों के कल्याण के लिए इस नेक काम में योगदान दिया था।कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार का लक्ष्य देश के प्रत्येक पात्र किसान परिवार को पीएम-किसान के तहत पंजीकृत कर शत-प्रतिशत संतृप्ति प्राप्त करना है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को लाभार्थियों के पंजीकरण व भौतिक सत्यापन के लिए मंत्रालय द्वारा किए विश्लेषण के आधार पर संतृप्ति अभियान चलाने को कहा गया है।

योजना के तहत नामांकन के लिए किसान को राज्य सरकार द्वारा नामित स्थानीय पटवारी/राजस्व अधिकारी/नोडल अधिकारी (पीएम-किसान) से संपर्क करना होता है। इसके अलावा फार्मर्स कॉर्नर के वेब पोर्टल पर विशेष सुविधा दी गई है, जिससे किसान पंजीकरण करा सकते हैं। इससे किसान आधार कार्ड के अनुसार पीएम-किसान डाटाबेस में नाम संपादित कर सकते हैं व भुगतान की स्थिति जान सकते हैं। लाभार्थियों का ग्रामवार विवरण फार्मर्स कॉर्नर पर उपलब्ध है। सामान्य सेवा केंद्र (सीएससी) को मामूली शुल्क पर किसानों को योजना के लिए पंजीकृत करने हेतु अधिकृत किया गया है। PM-KISAN APP भी है, जिसे अब तक 60 लाख से अधिक ने डाउनलोड किया है| इससे किसान नामांकन करा सकते है व आधार डिटेल सही कर सकते है| इसमें हेल्प डेस्क सुविधा भी प्रदान की गई है, जिससे किसान समस्या दर्ज करा सकते है| ये सुविधाएं CSC VLEs के जरिये भी उपलब्ध हैं| अब तक लगभग 1 करोड़ किसानों का नामांकन, 10.83 लाख की समस्याओं का निदान व 1.34 करोड़ किसानों के आधार डिटेल में सुधार इसके माध्यम से हो चुका है। PM-KISAN 24x7 हेल्प लाइन 155261 में संपर्क कर किसान क़िस्त हस्तांतरण की जानकारी ले सकते हैं।

PM-KISAN सिस्टम को थर्ड पार्टी इंटिग्रेशन द्वारा UIDAI, इनकम टैक्स एंड पेंशनर डाटाबेस से जोड़ा गया है| इससे अपात्र व्यक्तियों की पहचान करके, लाभार्थियों की सूची से हटाया जाता है| इससे सही एवं कुशल सेवा वितरण में सहायता प्राप्त होती है| PM-KISAN लाभार्थियों ने कृषि विज्ञान केंद्र के माध्यम से आधुनिक तकनीकों को 36 प्रतिशत अधिक अपनाया, जिसका अर्थ है कि PM-KISAN की उपस्थिति KVK पर आवर्धन प्रभाव डालती है। यह पुष्टि करता है कि KVK के माध्यम से आधुनिक तकनीकों को अपनाने को प्रोत्साहित करने में PM-KISAN की महत्वपूर्ण भूमिका है, जो बदले में किसानों को कृषि क्षेत्र में उत्पादक निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करने का मार्ग प्रदान करती है।

कोविड महामारी के दौरान जहां एक ओर देश-दुनिया के बाकी सारे काम ठप पड़ गए थे, वहीं दूसरी तरफ हमारे किसान भाइयों-बहनों के अथक परिश्रम व सरकार की किसान हितैषी नीतियों के कारण भारत के सकल घरेलू उत्पादन में कृषि क्षेत्र ने सकारात्मक प्रदर्शन किया। इस दौरान पीएम-किसान के तहत नकद हस्तांतरण प्राप्त करके किसानों को बीज, उर्वरक आदि आदान के लिए सहायता हुई ।

कई राज्यों के लाभार्थियों से सीधे बातचीत में यह जाहिर हुआ है कि पीएम किसान ने स्कीम किस तरह से किसान परिवारों को काफी लाभान्वित किया है। किसान, भारत सरकार की इस प्रतिष्ठित योजना को खुले दिल से सराह रहे हैं। तीन किस्तों में दिया जाने वाला भारत सरकार का यह लाभ न केवल किसानों और उनके परिवार को आर्थिक रूप से मदद करता है बल्कि उन्हें अपने खेतों में सकारात्मक तरीके से काम करने की प्रेरणा भी देता है। पीएम किसान से समय पर मिलने वाले लाभ से न केवल उन्हें समय पर खेती करने में मदद मिलती है बल्कि समय पर उपज बाजार में बेचकर उचित दाम प्राप्त करने में मदद मिलती है। साथ ही, उधारदाताओं से उच्च ब्याज दरों पर ऋण लेने से बचने में मदद मिलती है।

पीएम-किसान का महत्व यह है कि पहली बार मूल्य नीति (इनपुट या आउटपुट) का उपयोग किए बिना किसानों को सीधे आय हस्तांतरित करने का प्रयास किया गया है। यह छोटे और सीमांत किसानों को सहायता प्रदान करता है, जो बड़े पैमाने पर निर्वाह खेती में शामिल हैं और कृषि इनपुट या प्रौद्योगिकी में निवेश करने के लिए संघर्ष करते हैं। यह व्यापक ग्रामीण विकास एजेंडा के लिए एक महत्वपूर्ण पूरक के रूप में काम कर सकता है, जिसमें कृषि पर ध्यान केंद्रित करने वाली गरीब-समर्थक विकास रणनीति शामिल है।

राज्यों में नकद हस्तांतरण के वितरण से पता चला है कि आपातकालीन राहत पैकेज भारतीय समाज के कमजोर वर्गों तक पहुंच चुके हैं। कुल मिलाकर, करोड़ों किसान परिवार प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण से लाभान्वित हुए, जिसमें पूरी पारदर्शिता है। इतना बड़ा ये लाभ कम अवधि में समाज के कमजोर वर्गों के एक बड़े हिस्से को राहत प्रदान करता हैं। यह कोई मामूली बात नहीं, बल्कि इस ऐतिहासिक योजना के माध्यम से भारतीय कृषि और किसानों की प्रगति का एक स्वर्णिम अध्याय लिखा जा रहा है। लेखक- नरेंद्र सिंह तोमर, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री, भारत सरकार
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जमुई में समाज सुधार अभियान में शामिल हुए मुख्यमंत्री

Posted: 23 Feb 2022 07:38 AM PST

जमुई में समाज सुधार अभियान में शामिल हुए मुख्यमंत्री

पटना, 23 फरवरी 2022 को मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार राज्य में पूर्ण नशामुक्ति, दहेज प्रथा उन्मूलन एवं बाल विवाह से मुक्ति हेतु जमुई के श्रीकृष्ण सिंह मेमोरियल स्टेडियम में आयोजित समाज सुधार अभियान में शामिल हुए। इस अवसर पर आयोजित जनसभा को लेकर बने मंच पर आयुक्त मुंगेर प्रमंडल श्री प्रेम सिंह मीणा ने मुख्यमंत्री को पौधा भेंटकर उनका अभिनंदन किया। जिलाधिकारी जमुई श्री अवनीश कुमार सिंह ने स्मृति चिन्ह भेंटकर मुख्यमंत्री का स्वागत किया। जमुई, शेखपुरा एवं लखीसराय के जदयू जिलाध्यक्षों ने फूलों की बड़ी माला पहनाकर मुख्यमंत्री का अभिनंदन किया। सिमुलतला आवासीय विद्यालय की छात्राओं ने मुख्यमंत्री के आगमन पर स्वागत गान प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन द्वारा प्रकाशित 'समाज सुधार अभियान-जमुई एक परिचय' पुस्तिका का विमोचन किया। लोकगायिका सुश्री मैथिली ठाकुर ने दहेज प्रथा उन्मूलन एवं समाज सुधार अभियान पर आधारित गीत की प्रस्तुति भी दी। इस मौके पर जीविका दीदियों ने 'बढ़ते कदम' गीत का गायन किया।
जनसभा में शामिल होने से पहले मुख्यमंत्री ने गुब्बारा उड़ाकर शराबबंदी, बाल विवाह एवं दहेज प्रथा मुक्त समाज बनाने का संदेश दिया। जीविका (जमुई, शेखपुरा, मुंगेर एवं लखीसराय) द्वारा विभिन्न स्टॉलों पर सतत् जीविकोपार्जन योजना, जीविका प्रोत्साहित जलवायु के अनुकूल खेती, गैर कृषि एवं सूक्ष्म उद्यम आधारित गतिविधियां, दीदी की रसोई, नीरा, समाज सुधार अभियान के पक्ष में किये गए हस्ताक्षरों का संग्रह आदि से संबंधित लगायी गयी प्रदर्शनियों का मुख्यमंत्री ने अवलोकन किया।
मुख्यमंत्री ने सतत् जीविकोपार्जन योजना के अंतर्गत 2,558 हितग्राहियों को 6.73 करोड़ रुपये का डमी चेक, बैंको के माध्यम से 2,886 स्वयं सहायता समूहों को कैश क्रेडिट लिमिट के तहत 49.465 करोड़ रुपये का डमी चेक, जल-जीवन-हरियाली अभियान के माध्यम से 12 नवसृजित जलाशयों के प्रबंधन हेतु 13.45 करोड़ रुपये की राशि का चेक लाभुकों को प्रदान किया। सतत् जीविकोपार्जन योजना की मदद से शराबबंदी के पश्चात् शराब का व्यवसाय छोड़ दूध का कारोबार करने वाले 50 लाभुकों को 33 लाख 50 हजार रुपये की राशि का चेक प्रदान किया गया। अंतरजातीय विवाह करने वाले श्री राहुल कुमार मांझी और श्रीमती बबीता पासवान को मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की तरफ से दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि के तहत एक लाख रुपये का चेक प्रदान किया। मुख्यमंत्री ने लोकगायिका सुश्री मैथिली ठाकुर को अंगवस्त्र, पाग एवं स्मृति चिन्ह भेंटकर उन्हें सम्मानित किया।
जीविका दीदियों के साथ संवाद कार्यक्रम के अंतर्गत जीविका समूह की दीदियों ने शराबबंदी, बाल विवाह एवं दहेज प्रथा मुक्त समाज बनाने के प्रति अपनी-अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की। मुख्यमंत्री द्वारा विकास कार्यों के साथ-साथ चलाए जा रहे समाज सुधार अभियान की तारीफ करते हुए श्रीमती बेबी कुमारी, श्रीमती पूनम देवी, श्रीमती गुंजन देवी, श्रीमती रानी देवी, श्रीमती शैला देवी, श्रीमती सुक्रिया देवी, श्रीमती सुनैना कुमारी, श्रीमती सोनी खातून, श्रीमती परवीन खातून एवं दहेज मुक्त आदर्श विवाह करने वाले श्री राहुल कुमार मांझी और श्रीमती बबीता पासवान ने अपनी आप बीती सुनायी तथा अपने कई अनुभवों को भी साझा किया। मुख्यमंत्री ने आदर्श विवाह करने वाले श्री राहुल कुमार मांझी और श्रीमती बबीता पासवान के साथ फोटो सेशन कराया ताकि दहेज जैसी कुप्रथा के खिलाफ लोगों को प्रेरित किया जा सके।
श्रीमती बेबी कुमारी ने बताया कि मेरे माता-पिता कम उम्र में ही मेरी शादी करना चाहते थे, जबकि मैं पढ़ लिखकर कुछ करना चाहती थी। हमने अपने माता-पिता को मेरी शादी करने से मना किया लेकिन वे अपनी जिद पर अड़े रहे। वह समय मेरे लिए बहुत ही चुनौतीपूर्ण था क्योंकि मेरे पापा ने कहा था कि अगर तुम शादी से इनकार करोगी तो मैं खुद को नुकसान पहुंचा लूंगा। उस समय मैं दसवीं कक्षा में पढ़ती थी। मैंने माता-पिता के सामने यह शर्त रखी कि यदि मैं मैट्रिक पास कर जाऊँ तो मेरी शादी की बजाय मुझे आगे पढ़ने की अनुमति दें। उन्होंने मेरे शर्त को मान लिया और मैं मैट्रिक की परीक्षा में सेकेंड डिवीजन से पास हो गई। मैंने अपने माता पिता को यह आष्वस्त किया कि सामाजिक परंपरा और दायरे में रहकर पढ़ाई करुंगी और आपके मान पर धब्बा नहीं लगने दूंगी। इसके बाद मैंने अपनी सहेलियों और आस-पड़ोस की लड़कियों को भी बाल विवाह के दुष्परिणामों के प्रति जागरुक करना शुरू किया ताकि सभी लड़कियां उच्च शिक्षा हासिल कर सशक्त बन सके।
श्रीमती पूनम देवी ने बताया कि घर के बगल में कुछ लोग शराब बनाया करते थे, जहां शराबियों का जुटान होने से हमलोगों को काफी परेशानी होती थी। आये दिन झगड़ा भी हुआ करता था। मेरे पति भी शराब पीकर घर में झगड़ा करते थे। वर्ष 2016 में शराबबंदी की घोषणा से हमें काफी खुशी हुई। शराबबंदी के बाद भी चोरी छिपे कुछ लोग मेरे पड़ोस में शराब बनाकर बेचा करते थे। ग्राम संगठन की महिलाओं और प्रशासन की सहायता से उस पर रोक लगाई गयी। शराबबंदी के बाद अब घर की स्थिति में काफी सुधार हुआ है। बच्चों की पढ़ाई एवं भोजन पर पैसे खर्च हो रहे हंै। होली के समय एक शराबी, शराब पीकर ड्रामा कर रहा था। हम सब महिलाओं ने उसे पेड़ से बांधकर पुलिस को फोन किया और इसकी सूचना टॉल फ्री नंबर 15545 पर भी दी।
सतत् जीवकोपार्जन योजना की लाभार्थी श्रीमती गुंजन देवी ने बताया कि मेरा परिवार शराब के रोजगार से जुड़ा हुआ था। शराबबंदी के निर्णय से मुझे काफी खुशी हुई लेकिन परिवार की आमदनी बंद होने से मुझे दुख भी हुआ था। बीमार पति के इलाज के लिए मेरे पास पैसे नहीं थे। ग्राम संगठन की महिलाओं ने मुझसे संपर्क कर अपने साथ जोड़ा। ग्राम संगठन से मुझे आर्थिक मदद उपलब्ध हुई जिससे मैंने अपना व्यवसाय शुरु किया। साग सब्जी की खेती भी करने लगी। हमने अपने बच्चों का बीमा भी करवाया। मैं अपने बच्चों को पुलिस सेवा में भेजना चाहती हूं ताकि वे समाज की सेवा कर सके। अब मुझे किसी के आगे हाथ नहीं फैलाना पड़ता है। शराब के अवैध कारोबार की जानकारी मिलने पर हम महिलाएं बिजली के खंभे पर लिखे टॉल फ्री नंबर 15545 पर सूचना देने का काम करते हैं।
श्रीमती रानी देवी ने बताया कि मेरे पति बीमार रहते थे। हमलोग दारु बनाकर घर का खर्च चलाते थे। शराबबंदी के बाद जब पैसे की तंगी हुई तो दूसरे के घरों में काम करके अपने परिवार का गुजारा किया करती थी। इसी बीच ग्राम संगठन की दीदी ने हमें सतत् जीवकोपार्जन योजना के तहत आर्थिक मदद दिलाई। जिससे हमने किराना दुकान खोला। किराना दुकान में प्रतिदिन 1000 से 1200 तक बिक्री हो जाती है। इसके अलावा बकरी पालन भी करते हैं। दुकान में श्रृंगार का सामान भी रखते हैं। मेरे बच्चे स्कूल में भी पढ़ने जाने लगे हैं। कई दीदियां जो पहले दारु के व्यवसाय से जुड़ी हुई थीं, अब दूध बेचने लगी हैं।
सतत् जीवकोपार्जन योजना की लाभार्थी श्रीमती शैला देवी ने बताया कि उनके पति दोनों हाथ से विकलांग हैं जबकि मैं स्वयं पैर से विकलांग हूं। गोतिया के घरों में झाड़ू पोछा का काम करके खाने का खर्चा निकालती थी लेकिन काम छूटने के बाद भुखमरी की समस्या उत्पन्न हो गई। जीविका समूह की एक दीदी ने हमें समूह से जुड़ने की सलाह दी। उसके बाद समूह से जो आर्थिक मदद मिली उससे हमने सिलाई मशीन और बकरी खरीदी। दुकान भी खोला, जिससे हमारी स्थिति में काफी सुधार हुआ है। जीविका से मुझे जीने का सहारा मिला है।
श्रीमती सुक्रिया देवी ने बताया कि परिवार के लोग पहले दारु ताड़ी का काम करते थे लेकिन शराबबंदी के बाद काफी परेशानी हो रही थी। पति का निधन भी हो गया। जीविका दीदी ने हमें जीविका समूह से जोड़ने की बात कही और सतत् जीवकोपार्जन योजना के जरीये हमें आर्थिक मदद दी गई, जिससे हमने किराना दुकान खोला। बकरी पालन भी कर रही हूं। हमारे बच्चे स्कूल में भी पढ़ रहे हैं। बैंक में 60 हजार रुपये भी जमा कर चुकी हूं। मेरी तरह हजारों दीदियां जीविका समूह से जुड़कर खुश हैं।
श्रीमती सुनैना कुमारी ने बताया कि मेरी 14 साल की उम्र में शादी हो चुकी थी क्योंकि मेरे पिता गरीब थे। शादी के बाद मेरे दो बच्चे हुए। शादी के चार साल बाद ही 18 वर्ष की उम्र में मैं विधवा हो गई। ससुराल वालों ने मुझे घर से निकाल दिया। मैं अपने माता-पिता के घर पर रहने लगी। मेरे पिता मजदूरी करते थे इसलिए आर्थिक तंगी के कारण काफी परेशानी होती थी। मुझे जीविका समूह के बारे में जानकारी हुई और मैं उससे जुड़ गयी। जीविका समूह से ऋण लेकर मैंने सिलाई मशीन खरीदी। सतत् जीवकोपार्जन योजना और ग्राम संगठन से भी मुझे आर्थिक मदद मिली, जिससे बकरियां खरीदी। अब बच्चे अच्छे स्कूल में पढ़ने लगे हैं। मैं अपने माता-पिता को भी आर्थिक मदद करती हूं। बैंक खाते में भी पैसे जमा करती हूं। मैं चाहती हूं कि कोई भी महिला कम उम्र में अपनी बेटी की शादी नहीं करे। बेटी को पढायें और सही उम्र में शादी करें।
श्रीमती सोनी खातून ने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति काफी दयनीय होने से एक दिन मजबूर होकर मैं अपने बच्चे को स्टेशन पर जाकर छोड़ आयी लेकिन मन नहीं माना तो फिर बच्चे को जाकर वापस लाई। जीविका दीदी को जब इसके बारे में पता चला तो उन्होंने जीविका समूह से हमें जुड़ने की बात कही। मैंने कहा कि मैं पढ़ी लिखी नहीं हूं तो रोजगार कैसे करुंगी। तब जीविका दीदी ने हमें समझाया कि समूह की तरफ से आर्थिक मदद दी जायेगी। मुझे आर्थिक मदद मिली उससे हमने किराना दुकान खोली। मेरा राशन कार्ड भी बन गया। धीरे-धीरे मेरी स्थिति बेहतर हो रही है। बच्चे स्कूल भी जा रहे हैं।
श्रीमती परवीन खातून ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण वह दूसरे के घरों में दाई का काम करती थी। पति जब बीमार हुए तो चंदा इकट्ठा करके इलाज कराया। अब जीविका समूह से जुड़ने के बाद सब्जी बेचने का काम कर रही हूॅ। अपना घर भी बना लिया है। गाय भी खरीदी है और अब अपने बच्चों को ठीक ढंग से पढ़ा भी रही हूॅ। गाय पालन होने से परिवार के लोगों को दूध भी मिलने लगा है। पहले बैंक का मुॅह तक नहीं देखा था लेकिन जीविका समूह से जुड़ने के बाद मैं स्वयं बैंक में पैसा जमा करने लगी हूं। आज हमारे पास आधार एवं राशन कार्ड भी है।
अंतरजातीय विवाह करने वाली श्रीमती बबीता पासवान ने बताया कि घर वालों की मर्जी के खिलाफ हमने शादी की है। मुख्यमंत्री के दहेज मुक्त अभियान को सफल बनाने के लिए लोगों को जागरुक भी कर रही हूं। श्रीमती बबीता देवी के पति श्री राहुल कुमार मांझी ने बताया कि दहेज मुक्त एवं अंतरजातीय विवाह करने से मेरे माता पिता नाराज थे लेकिन पत्नी की कार्यकुशलता देखकर परिवार के लोग काफी खुश हुए और उनकी नाराजगी भी दूर हो गई। मुख्यमंत्री के दहेज प्रथा उन्मूलन को सफल बनाने के लिए हम दोनों पति-पत्नी लोगों को प्रेरित कर रहे हैं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के इस कार्यक्रम में शामिल होकर मुझे बेहद खुशी हो रही है। विधायिका सुश्री श्रेयसी सिंह को मैं विशेष तौर पर बधाई देता हूं कि इन्होंने दो-दो मेडल जीते हंै। यहां पर जीविका समूह से जुडी 9 दीदियों ने अपने अनुभव साझा किये। आदर्श और अंतरजातीय शादी करने वाली श्रीमती बबीता देवी एवं श्री राहुल कुमार मांझी ने भी आप बीती सुनाई है। इन लोगों ने अंतरजातीय विवाह किया है, मुझे यह जानकार बड़ी खुशी हुई है। लड़की पासवान जाति से है जबकि लड़का मांझी समाज से है। हमने बुलाकर उन्हें बधाई भी दी है। समाज सुधार का यह जो अभियान चल रहा है, यह अंतरजातीय विवाह उसी का एक हिस्सा है। यह एक तरह से आदर्श विवाह है। राज्य सरकार की तरफ से अंतरजातीय विवाह करने वालों को एक लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। हमने कहा है कि यह प्रोत्साहन राशि आज ही यहीं दे दी जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिसंबर 2021 से ही हमने समाज सुधार अभियान की शुरुआत की थी। इसको लगातार आगे बढ़ाने वाले थे लेकिन इसी साल जनवरी माह में कोरोना का तीसरा दौर आ गया। हमें भी ओमिक्रॉन हो गया। हम पूरी तरह आइसोलेट रहे। देश दुनिया की तुलना में बिहार में इसका कम प्रभाव रहा। कोरोना के बढ़ते प्रक्रोप को देखते हुए 6 जनवरी के बाद इस कार्यक्रम को स्थगित कर दिया गया। कोरोना पीड़ित लोगों के इलाज का पुख्ता प्रबंध किया गया। लोगों को सचेत एवं जागरुक करने के लिए गाइडलाइन भी जारी किये गये। अब कोरोना संक्रमण का प्रभाव काफी तेजी से नीचे जा रहा है। यह देखकर मुझे खुशी हो रही है। अब जमुई जिले में कोरोना संक्रमित सिर्फ एक व्यक्ति है। लखीसराय जिले में 3, शेखपुरा में 6 और मुंगेर में सिर्फ 4 व्यक्ति ही कोरोना से संक्रमित हैं। आप सब सचेत और सजग रहिए तभी यह धीरे-धीरे पूरी तरह से खत्म होगा। दुनिया के कई देशों में वर्ष 2019 में कोरोना संक्रमण के मामले सामने आये थे जिसे कोविड-19 नाम दिया गया। हमको पूरा भरोसा है कि यह अब खत्म हो जायेगा। हम प्रतिदिन पूरे बिहार और बिहार के बाहर की स्थिति की जानकारी भी लेते रहते हैं। बिहार पहला राज्य है जहां कोरोना संक्रमण से मृतक के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की सहायता राशि देने की शुरुआत की गई। कोरोना काल में बिहार के बाहर जो लोग फंसे थे, उनको बिहार लाने का प्रबंध किया गया। इसके लिए केंद्र सरकार द्वारा ट्रेनें भी चलाई गयीं। राज्य सरकार की तरफ से विभिन्न राज्यों में बिहार के फंसे लोगों के भोजन का इंतजाम भी किया गया। कोरोना संक्रमण चीन से शुरु हुआ था, अब इससे निजात मिलेगी। कोरोना संक्रमण से विकसित देश भी काफी प्रभावित हुए। विकसित देशों की तुलना में भारत पर इसका प्रभाव कम रहा। आबादी में बिहार देश में तीसरे स्थान पर है, जबकि कोरोना के मामले में यह 25वें स्थान पर रहा। हम चाहते हैं कि समाज सुधार का यह अभियान निरंतर चलता रहे। वर्ष 2016 में शराबबंदी लागू करने के बाद हम सभी प्रमण्डलों में 9 जगहों पर गये थे। शराबबंदी से लोगों को काफी फायदा हुआ है। शराब की बिक्री से सरकार को काफी राजस्व मिलता था लेकिन हमने उसकी परवाह नहीं की। जननायक कर्पूरी ठाकुर जी ने भी शराबबंदी लागू की थी लेकिन उसे दो साल बाद ही खत्म कर दिया गया, जिसेे देखते हुए मेरे मन में आशंका रहती थी कि हम शराबबंदी लागू कर पायेंगे या नहीं। 9 जुलाई 2015 को पटना में जीविका के एक कार्यक्रम में महिलाओं ने शराबबंदी को लेकर आवाज उठाना शुरु कर दिया था। उसके बाद मैं वापस माइक पर आया और कहा कि अगर आपलोगों ने फिर से सेवा का मौका दिया तो बिहार में शराबबंदी लागू करेंगे। बिहार की जनता ने पुनः हमलोगों को काम करने का मौका दिया और हमने 20 नवंबर को शपथ ली। शपथ लेने के बाद 26 नवंबर को ही मीटिंग बुलाकर शराबबंदी को लेकर अभियान चलाने का निर्णय लिया। वर्ष 2011 से ही 26 नवंबर को हमलोग मद्य निषेध दिवस के रुप में मनाते हैं। शराब पीना बुरी चीज है। इसे लोगों के बीच प्रचारित एवं प्रसारित करवाते थे। 26 नवंबर 2015 को मद्य निषेध दिवस कार्यक्रम में शराबबंदी के पक्ष में बड़े पैमाने पर अभियान चलाने का निर्णय लिया गया। 30 मार्च 2016 को कानून बनाया गया और 1 अप्रैल 2016 से बिहार में शराबबंदी लागू की गई। पहले 1 अप्रैल 2016 को ग्रामीण इलाके में देशी और विदेशी शराब पर हमलोगों ने रोक लगायी, जबकि शहरी इलाकों, नगर निगम और नगर परिषद में तब विदेशी शराब बंद नहीं करने का निर्णय लिया गया था। हमने सोचा गांव में इतना अभियान चलाए हैं और शहर में नहीं चलाए हैं तो बाद में इसको हम देखेंगे लेकिन शहरों में महिलाएं, युवक-युवतियों, कई जगहों पर पुरुषों ने भी शराब की आवंटित दुकानों के खोले जाने पर कड़ा विरोध जताया। इसके बाद हमने कैबिनेट की मीटिंग बुलाई और 5 अप्रैल 2016 को राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू कर दी। उसके बाद शराबबंदी को लेकर व्यापक पैमाने पर अभियान चलाया गया। एक जगह पर एक महिला ने अपनी आप बीती सुनाते हुए कहा कि मेरे पति काम से लौटते थे तो दारू पीकर आते थे, मारपीट करते थे, हंगामा करते थे। परिवार में सभी को बुरा लगता था, देखने में खराब लगते थे। अब जब शराबबंदी हो गई तो बाजार से सब्जी लेकर आते हैं और घर में आते हैं तो मुस्कुराते हैं और घर के काम में भी सहयोग करते हैं। वे अब देखने में अच्छे लगते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि चंद लोग गड़बड़ मानसिकता के होते हैं। यह प्रकृति की ही देन है कि सभी लोग सही नहीं हो सकते हैं। 10 प्रतिशत से कम लोग गड़बड़ी करने वाले होते हैं। चंद बड़े बड़े लिखने वाले लोग हैं वे खुद को काबिल समझते हैं और शराबबंदी को लेकर अनाप शनाप लिखते रहते हैं। ऐसे लोग मेरी आलोचना करते हैं और मुझसे नाराज रहते हैं। यहां आप सबों के बीच जो बुकलेट वितरित किया गया है, उसमें बापू की कही बातों और विष्व स्वास्थ्य संगठन के द्वारा शराब सेवन के दुष्परिणामों पर जारी रिपोर्ट का उल्लेख किया गया है। इसे अपने घरों में सुरक्षित रखियेगा, खुद भी पढ़ियेगा और लोगों को भी पढाइयेगा। बापू ने कहा था कि शराब आदमी से न सिर्फ उसका पैसा छीन लेता है बल्कि उसकी बुद्धि भी हर लेता है। शराब पीने वाला इंसान हैवान हो जाता है। बापू ने कहा था कि यदि एक घंटा के लिए हम तानाशाह बन जायें तो शराब को बंद करा देंगे। संविधान में भी सभी राज्यों को यह अधिकार दिया गया है कि अगर वो चाहे तो अपने-अपने राज्यों में शराबबंदी लागू कर सकता है। वर्ष 2018 में हमने सर्वे कराया था जिसमें यह पता चला कि करीब 1 करोड़ 64 लाख लोगों ने अब शराब पीना छोड़ दिया है। इस बार फिर से इसको लेकर सर्वे किया जा रहा है। शराब पीने के पक्षधर लोग कहते हैं कि नहीं पीयेंगे तो तबीयत खराब हो जायेगी। यह बिल्कुल गलत बात है। दारु पीने से तबीयत ठीक नहीं बल्कि खराब होती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज सुधार का अभियान आप निरंतर चलाते रहें। विष्व स्वास्थ्य संगठन ने पूरी दुनिया का वर्ष 2016 में सर्वेक्षण कराया और 2018 में ही रिपोर्ट को प्रकाशित किया। उस रिपोर्ट में बताया गया है कि शराब पीने से दुनिया में एक साल में 30 लाख लोगों की मृत्यु होती है यानि दुनिया में जितनी मृत्यु हुई है उसका 5.3 प्रतिशत मौत शराब पीने से हुयी है। 20 से 39 आयु वर्ग के लोगों में 13.5 प्रतिशत मृत्यु शराब पीने के कारण होती है। शराब के सेवन से 200 प्रकार की बीमारियां होती हैं, जबकि 18 प्रतिशत लोग शराब पीने की वजह से आत्महत्या कर लेते हैं। डायबिटीज, लिवर सिरोसिस जैसी अनेक बीमारी शराब पीने से होती है। शराब पीने के कारण 18 प्रतिशत आपसी झगड़े होते हैं। शराब पीने के कारण दुनिया भर में 27 प्रतिशत सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। दुनिया भर में कोरोना संक्रमण जैसी गंभीर बीमारी से भी उतनी मौतें नहीं हुई है जितनी एक साल में दारु पीने से होती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जहरीली शराब की घटना जब सामने आयी तब कुछ लोग शराबबंदी को असफल बताने लगे। इस पर तरह-तरह के सवाल उठाने लगे। तब हमने कहा कि शराब पीना बुरी चीज है, पीओगे तो मरोगे। कुछ लोग जहरीली शराब पिला देगा तो मर जाओगे। दूसरे कई राज्यों में शराबबंदी नहीं है, वहां भी जहरीली शराब पीने से यहां से अधिक मौतें हुआ करती हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दहेज प्रथा और बाल विवाह के खिलाफ भी हमने वर्ष 2017 में अभियान की शुरुआत की थी। शराबबंदी के बाद बिहार में सड़क दुर्घटनाओं में काफी कमी आयी है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की कही गयी बातों और विष्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट पर अमल कीजिए और दूसरे को भी बताइये। एक एक आदमी को सचेत करना है। हमलोग विकास के साथ-साथ समाज सुधार का भी काम कर रहे हैं। 24 नवंबर 2005 को हमने पहली बार मुख्यमंत्री के रुप में शपथ ग्रहण किया था। उस समय बिहार की क्या हालत थी। शाम होने के बाद लोग अपने घरों से निकलने की हिम्मत नहीं कर पाते थे। अब सभी लोग आनंद से रहते हैं। सड़कों की हालत काफी दयनीय थी। हमलोग गांवों को पक्की सड़कों से जोड़ने और उसे ठीक रखने की दिशा में काम कर रहे हैं। वर्ष 2005 के पहले गरीब गुरबों, समाज के कमजोर तबकों एवं महिलाओं के बारे में किसी को कोई चिंता नहीं थी। पांचवी क्लास के बाद परिवार की गरीबी एवं पोशाक के अभाव में लड़कियां आगे की पढ़ाई नहीं कर पाती थीं। उस समय गरीबी के कारण 12.5 प्रतिशत बच्चे स्कूलों से बाहर थे। हमलोगों ने अनेक स्कूलों का निर्माण कराया। 9वीं क्लास मंे पढ़ने वाली लड़कियों के लिए साइकिल योजना की शुरुआत की। इस पर कुछ लोगों ने तंज कसना शुरु किया कि साइकिल से स्कूल जाती लड़कियों को लोग रास्ते में तंग करेंगे। हमने कहा कि कोई तंग नहीं करेगा। इससे लड़कियां काफी खुश हैं, इसे भूलियेगा मत। बिहार की साइकिल योजना को तीन देशों के लोग देखने आये थे। वर्ष 2009-10 एवं 2011 में रिपोर्ट भी प्रकाशित कराया था। बाद में लड़कों की मांग पर उनको भी साइकिल योजना का लाभ दिया गया। एक साल पहले मैट्रिक की परीक्षा में लड़कियों की संख्या लड़कों से 300 अधिक थी। वर्ष 1994-95 में ग्राम पंचायत और नगर निकायों में महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण देने के लिए केंद्र सरकार ने कानून बना दिया लेकिन यह बिहार में लागू नहीं हुआ। बिहार पहला राज्य है जिसने ग्राम पंचायत और नगर निकाय के चुनाव में महिलाओं को 50 प्रतिशत का आरक्षण दिया। इस बार आरक्षण के साथ चुनाव का यह चैथा टर्म है। इसी साल नगर निकाय का भी चुनाव होना है। वर्ष 2006 में हमने स्वयं सहायता समूह के द्वारा किये जा रहे कार्यों को देखा। जिसका हमने जीविका नाम दिया। भ्रम में मत रहियेगा। 10 लाख स्वयं सहायता समूह बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। वल्र्ड बैंक से कर्ज लेकर इस काम आगे बढ़ाया गया। अब 10 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूह का गठन हो चुका है। आज 1 करोड़ 28 लाख परिवारों की महिलाएं स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं। इससे महिलाओं की स्थिति काफी बेहतर हुई है। वर्ष 2013 में पुलिस बल में महिलाओं को 35 प्रतिशत आरक्षण देने का ऐलान किया गया। वर्ष 2016 से सभी सरकारी सेवाओं में महिलाओं के लिए 35 प्रतिशत आरक्षण दिया गया। बिहार पुलिस में महिलाओं की संख्या 25 हजार 128 है। पुलिस सेवा में महिलाओं की इतनी बड़ी संख्या देश के किसी दूसरे राज्य में नहीं है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमलोगों ने हाशिये पर खड़े लोगों के उत्थान के लिए विशेष पहल की। सभी धर्म समुदाय के विकास के लिए हमलोगों ने काम किया। सात निश्चय योजना के तहत हर घर नल का जल, हर घर शौचालय निर्माण, हर घर पक्की गली-नाली का निर्माण आदि कराया गया। अब इन सबके मेंटेनेंस का कार्य भी किया जायेगा। पूरे बिहार में अभी कितने सड़कों की और जरुरत है, इसको लेकर सर्वेक्षण करा रहे हैं। न्याय के साथ विकास एवं लोगों की सेवा करना ही हमारा धर्म है। लड़कियों की कम उम्र में शादी से कई प्रकार की परेशानियां होती हैं इसलिए गांव-गांव तक समाज सुधार अभियान को निरंतर चलाइये। केंद्र सरकार ने भी बेटियों की शादी की न्यूनतम उम्र 18 से बढ़ाकर 21 करने हेतु कानून बनाने की शुरुआत की है। बाल विवाह एवं दहेज प्रथा के खिलाफ पहले से ही कानून बने हुये हंै बावजूद इसके आज भी यह कुप्रथा समाज में व्याप्त है। दहेज के कारण हत्या, आत्महत्या, प्रताड़ना आदि की घटनाएं आये दिन घटित हुआ करती हैं। हमने यह तय किया है कि शादी के निमंत्रण कार्ड में दहेज मुक्त शादी की बात लिखी होगी, उसी शादी समारोह में शामिल होंगे। इसके प्रति आपकी भी प्रतिबद्धता होनी चाहिए, तभी यह कुप्रथा खत्म होगी। समाज सुधार अभियान के इस कार्यक्रम को हम और चार जगहों पर करेंगे लेकिन आप इसे निरंतर जारी रखियेगा। अंतरजातीय शादी को भी बढ़ावा दीजिए। बिहार में जब हम जीविका समूह बनाये तो उस समय केंद्र सरकार के लोग इसे आकर देखा और देश भर में इसका नाम आजीविका समूह कर दिया। आप अपना काम अच्छे ढंग से कीजिए। सतत् जीवकोपार्जन योजना के तहत मदद दी जा रही है। नीरा स्वास्थ्यवर्द्धक एवं स्वादिष्ट पेय पदार्थ है। सूर्याेदय से पहले जो ताड़ी निकलती है उसी से नीरा बनता है। नीरा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए इससे जुड़े लोगों को राज्य सरकार की तरफ से 1 लाख रुपये तक की सहायता देने का निर्णय लिया गया है। समाज सुधार अभियान को निरंतर चलाने के लिए आप सभी ने हाथ उठाकर संकल्प लिया है। इसके लिए मैं आप सभी को धन्यवाद देता हूं। आप सभी के सहयोग से समाज विकसित होगा, बिहार आगे बढ़ेगा और देश की सेवा में अपना महत्वपूर्ण योगदान देगा। आपस में प्रेम और भाईचारे का भाव रखते हुए समाज को एकजुट रखें, मिल-जुलकर आगे बढ़ें।
कार्यक्रम को उप मुख्यमंत्री सह मुंगेर जिले के प्रभारी मंत्री श्री तारकिशोर प्रसाद, शिक्षा मंत्री सह शेखपुरा जिले के प्रभारी मंत्री श्री विजय कुमार चैधरी, भवन निर्माण मंत्री सह जमुई जिले के प्रभारी मंत्री श्री अशोक चैधरी, मंत्री मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन श्री सुनील कुमार, परिवहन मंत्री सह लखीसराय जिले की प्रभारी मंत्री श्रीमती शीला कुमारी, मंत्री विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी श्री सुमित कुमार सिंह, मुख्य सचिव श्री आमिर सुबहानी, पुलिस महानिदेशक श्री एस0के0 सिंघल, अपर मुख्य सचिव गृह श्री चैतन्य प्रसाद, मद्य निषेध उत्पाद एवं निबंधन विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री के०के० पाठक ने भी संबोधित किया।
इस अवसर पर विधायक श्री दामोदर रावत, विधायक सुश्री श्रेयसी सिंह, विधायक श्री सुदर्शन कुमार, विधायक श्री प्रफुल्ल कुमार मांझी, विधायक श्री राजीव कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री दीपक कुमार, शिक्षा सचिव श्री असंगबा चुबा आओ, आयुक्त भागलपुर श्री प्रेम सिंह मीणा, जीविका के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी श्री बाला मुरुगन डी०, मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी श्री गोपाल सिंह, पुलिस उप महानिरीक्षक, मुंगेर श्री संजय कुमार, जिलाधिकारी जमुई श्री अवनीश कुमार सिंह, शेखपुरा जिलाधिकारी श्रीमती इनायत खान, लखीसराय जिलाधिकारी श्री संजय कुमार सिंह, मुंगेर जिलाधिकारी श्री नवीन कुमार, पुलिस अधीक्षक जमुई श्री शौर्य सुमन, पुलिस अधीक्षक शेखपुरा श्री कार्तिकेय के0 शर्मा, पुलिस अधीक्षक लखीसराय श्री सुशील कुमार, पुलिस अधीक्षक मुंगेर श्री जगुनाथ जलारेड्डी सहित अन्य वरीय पदाधिकारी, जीविका दीदियां एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
कार्यक्रम के पष्चात् राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी से संबंधित पत्रकारों के प्रष्न का जवाब देते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी कोई बात नहीं है। मुझे आष्चर्य है कि ऐसी बात कैसे उठी। हमारे मन में ऐसी कोई आकांक्षा नहीं है। इन सबसे मेरा कोई लेना देना नहीं है। कहीं कोई बात नहीं हुई है। न हमको ऐसी बातों में रूचि है और न ही मेरा समर्थन है। हम अपना काम कर रहे हैं। समाज सुधार, विकास, समाज में प्रेम, भाईचारे का भाव हो, सब मिलकर चलें, हमारी दिलचस्पी इसी में है। हम शुरु से काम कर रहे है।

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पुस्तक समीक्षा : कोहरे में यात्रा

Posted: 23 Feb 2022 07:19 AM PST

पुस्तक समीक्षा : कोहरे में यात्रा

संस्मरण के बहाने समय की पड़ताल-- वेद प्रकाश तिवारी

राधेश्याम तिवारी हिंदी के एक महत्वपूर्ण कवि हैं। इनकी अनेक पुस्तकें आई हैं। ये अनेक विधाओं में लिखते रहे हैं ।मूलतः इनकी पहचान एक कवि के रूप में है पर इनकी नई पुस्तक कोहरे में यात्रा को देखते हुए ये गद्यकार के रूप में भी आकर्षित करते हैं।
यहाँ नामवर सिंह का कथन बड़ा सटीक प्रतीत होता है कि -- "अब अच्छा गद्य कवि ही लिख रहे हैं " ।
कोहरे में यात्रा इनके संस्मरण की पुस्तक है । इनकी पुस्तक को पढ़कर ऐसा लगता है कि यह संस्मरण किसी आग्रह या दुराग्रह से नहीं बल्कि तटस्थ और निसंग भाव से लिखे गये है।
इनके संस्मरणों की भाषा की जो भंगिमा है वह निश्चित रूप से आकर्षित करती है। साहित्यकार अपने जीवन और कालखंड को सहज भाव से अपनी कलम की धार देता है और उस सदी के पीढ़ी का मार्गदर्शन करता है साथ ही आने वाली पीढ़ी को भी प्रभावित करता है।
कोहरे में यात्रा पुस्तक में राधेश्याम तिवारी ने अपनी स्मृति पटल पर अंकित अत्यधिक मर्म स्पर्शी घटनाओं का जिक्र किया है। हालांकि कवि के कथनानुसार इस पुस्तक में संग्रहित अधिकांश संस्मरण हंस, ज्ञानोदय समकालीन भारतीय साहित्य, नई धारा, अलाव, बहुवचन, उत्तर प्रदेश आदि पत्र पत्रिकाओं में छपे हैं ,परंतु कवि राधेश्याम तिवारी ने इन रचनाकारों के करीब रहकर इन्हें महसूस किया और इस संस्मरण में ऐसी भी बातों का जिक्र किया है जिसे लोग किताब की भाषा नहीं बनाते हैं । इस पुस्तक में शामिल रचनाकार इस पीढ़ी को उपभोक्तावादी सोच से ऊपर उठाकर सीधे धरातल से जोड़ने की कोशिश करते है ।
कवि राधेश्याम तिवारी जब कवि त्रिलोचन से पहली बार मिलते हैं तो देखते हैं कि उनका बिस्तर जमीन पर है ।सिरहाने कुछ किताबें ,पेन ,पेपर और पास में एक लोटा पानी से भरा हुआ रखा हुआ है। यह सहजता साधु पुरुष की पहचान होती है । कवि से बातचीत के दौरान त्रिलोचन युवा कवियों के बारे में कहते हैं कि मौसम और खेती के ज्ञान के बिना गांव पर कोई कविता कैसे लिख सकता है अर्थात जो जिस अनुभव से गुजरता है वो उसे बखूबी जान पाता है। त्रिलोचन जब संसार से विदा होते हैं तो नामवर सिंह उन्हें कंधा देते हैं । डॉक्टर विश्वनाथ तिवारी आंखों में आंसू भरे कहते हैं - अनाम कवियों का सबसे बड़ा मसीहा चला गया । कवि राधेश्याम तिवारी ने इन क्षणों का मार्मिक चित्रण किया है । वे अपनी भाषा में यह संकेत देते हैं कि रचनाकार कभी मरता नहीं वो अपनी रचनाओं के सहारे निकल पड़ता है अनंत यात्रा पर ।
कवि विष्णु प्रभाकर से मिलकर बहुत प्रभावित होता है । वह विष्णु प्रभाकर जी के इस कथन का जिक्र करता है कि हमारी भाषा सिर्फ हमारे चरित्र का ही नहीं बल्कि राष्ट्र के चरित्र को भी उजागर करती है। यह कथन एक पाठ है उन लोगों के लिए जो अमर्यादित जीवन जीते हैं।
यही बात दूसरे अर्थों में नामवर सिंह भी कहते हैं ।
कवि राधेश्याम तिवारी ने नामवर सिंह की इस बात को रेखांकित किया है कि एक प्रश्न के जवाब में नामवर सिंह कहते हैं --
" मैं भगवदगीता और राम चरित मानस को बचाने की पहल करता हूँ " ।
उनका यह कथन मनुष्यता को बचाने की जोरदार कोशिश है ।
कवि राधेश्याम तिवारी कुँवर नारायण की स्मृति को याद करते हुए उनकी इस पीड़ा को लिखते हैं कि कुँवर जी कवि शिवनारायण से एक संदर्भ में अपनी बात कहते हैं कि "नालंदा मेरी स्मृति में है मैं इसे खंडित होते नहीं देख सकता वहाँ जाने पर नालंदा नहीं मिला तो बहुत दुख होगा "कवि कुंवर नारायण का यह कथन साबित करता है कि जो स्मृतियां आगे बढ़ने का साहस देती हैं यदि वो खंडित होने लगें, प्रेरणा के स्त्रोत खत्म होने लगें तो उसे सहन करना कठिन हो जाता है । एक संघर्षशील आदमी के लिए ऐसे स्थान धरोहर की तरह होते हैं जिसकी सुरक्षा हर हाल में होनी चाहिए।
कवि राजेंद्र यादव को याद करते हुए उनके हँसोड, मजाकिया अंदाज से उनके जिंदादिली का परिचय कराता है तथा उनके गुस्से के पीछे के प्रेम को भी दर्शाता है । वो अपने मित्रों की आलोचना करते और सुनते हुए भी उन्हीं के बीच जीना चाहते हैं, यह एक रचनाकार ही कर सकता है जब कि ऐसा देखने को कम मिलता है।

कवि जब केदार नाथ सिंह से दिल्ली उनके आवास पर मिलता है तो उसे ऐसा लगता है जैसे वह अपने घर आया है। केदार नाथ सिंह की माँ का भोजपुरी में उनका परिचय पूछना और केदार नाथ जी का भोजपुरी में संवाद करना यह साबित करता है कि एक रचनाकार अपनी भाषा और संस्कृति को कभी नहीं छोड़ता । उसकी मातृ भाषा उसके व्यक्तित्व विकास में अपना अहम योगदान देती है।


कोई भी कवि जब गहरे चिंतन में डूबता है तो ज्ञान के साथ अध्यात्मिक शक्तियों भी उसके करीब आने लगती हैं।
कैलाश वाजपेयी एक ऐसे ही रचनाकार हैं । कवि राधेश्याम तिवारी उनसे मिलने और उनकी रचनाओं को पढ़ने के बाद
ऐसा ही महसूस करते हैं । कैलाश जी की रचनाएँ अत्यंत सारगर्भित है । उनकी ये पंक्ति-- " शरीर सहयोग नहीं करता/वर्ना कोई क्यों मरता
बहुत कुछ बयां करती हैं ।


कवि को महीप सिंह एक अच्छे लेखक और एक अच्छे आदमी दोनों लगे। रचनाकार होना और एक अच्छा आदमी होना दोनों अलग है ये बात जरा अप्रासंगिक है पर कवि यह अनुभव करता है कि महीप सिंह की रचनाएँ मनुष्यता बचाने की भरपूर कोशिश कर रही हैं इसलिए जाहिर कि वे एक अच्छे आदमी हैं।


हरिपाल त्यागी भी इनसे मिलते- जुलते रचनाकार हैं वो भी प्रेम के पक्ष में खड़े हैं इसलिए अटल जी व बच्चन जी के व्यंग का भी वे बडी शालीनता के साथ जवाब देते हैं। रचनाकार कितना शालीन हो सकता है यह कोई हरिपाल त्यागी जी से सीखे । मैंने उन्हें हमेशा मुस्कुराते हुए देखा है। कवि राधेश्याम जी के साथ दो बार हरिपाल त्यागी जी से मुझे भी मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। वे एक बहतरीन चित्रकार और रचनाकार दोनों थे।


कवि बाबा नागार्जुन से मिलकर एक बुजुर्ग रचनाकार में एक जिंदादिल इंसान को देखता है । कवि उनसे युवा कवियों की चुनौतियों के संबंध में एक मुलाकात के दौरान चर्चा करता है तो एक प्रश्न के जवाब में नागार्जुन कहते हैं--
नामचीन रचनाकार यदि नये रचनाकारों को इस्तेमाल करें तो उनकी गतिविधियों को जान कर भी उनसे मिलो और उन्हें अपनी रचनाओं के लिए कच्चे माल की तरह इस्तेमाल करो। बाबा नागार्जुन का यह कथन साहित्यकारों को कई अर्थों में शिक्षित करता है।


कुबेर जी में ऐसी ही कुछ बातें दिखाई देती हैं।
किसी बड़े पद पर बैठा हुआ आदमी जब मजे हुए साहित्यकार से अपनी साहेबगिरी दिखाता है तो साहित्यकार उसे मर्यादित भाषा में जवाब देता है । कुबेर जी को यह आभास होता है कि शराब का नशा वास्तविक आदमी को प्रगट कर देता है जो उसकी पोल खोल देता है। वे कवि राधेश्याम तिवारी का सम्मान करते हैं पर कवि उन्हें अपनी भाषा में शराब छोडने की नसीहत बातों- बातों में देता रहता है और उन्हें साहित्य की ताकत का आभास भी कराता है। तभी तो कुबेर दत्त साहित्य का साथ
नहीं छोड़ते हैं।


यदि दिल जीतना हो तो कोई महेश दर्पण जी से सीखे।
एक मजे हुए साहित्यकार और वरिष्ठ पत्रकार होने के साथ एक अच्छे आदमी हैं महेश दर्पण। आप जब भी अपरिचित के बीच भी होते हैं तो आदमी आपकी शालीनता का कायल हो जाता है। तभी तो आपका कोई दुश्मन नहीं है।
एक रचनाकार की छवि ऐसी ही होनी चाहिए।
कवि राधेश्याम तिवारी जी के साथ मैं भी इनसे मिला हूं।

कवि , रचनाकार राधाकृष्ण की पीड़ा को बड़े ही मार्मिक ढंग से रेखांकित करता है। उनकी रचनाओं को जैसे किसी बॉक्स में बन्द कर दिया गया और उन्हें जो मंच मिलना चाहिए वो खराब सिस्टम की वजह से नहीं मिला। इस संदर्भ में नामवर सिंह का यह कथन साहित्यकारों के लिए एक सीख है कि
"आज हिंदी में जो कुछ भी लिखा जा रहा है वह दिल्ली के बाहर ही लिखा जा है "।
यह सच है कि वरिष्ठ रचनाकारों को राधाकृष्ण जैसे रचनाकार को मंच देना चाहिए था क्यों कि उनकी रचनाएँ समय के साथ खड़ी थी।
कवि राधेश्याम तिवारी दिल्ली से बेतिया की यात्रा पर निकलते हैं तो ट्रेन के साथ उनकी मानसिक यात्रा भी शुरू हो जाती है और घना कोहरा भी ट्रेन की गति के साथ -साथ चलता है। ये कोहरा दिन में कुछ पल के लिए छँट जाता है। पर कवि के अंतर्मन में गंतव्य तक पहुँचने और दिल्ली वापसी तक ये कोहरा अनेक सवालों, संवेदना से जुड़े विचारों और मित्रों से मिलने की उत्कंठा को समेटे रखता है।
यह सच है कि कोहरे में यात्रा ,जीवन मूल्यों को आत्मसात करने वाले मनुष्य की जीवन के विसंगतियों के साथ जूझते हुए चलने की यात्रा है। जिसमें वह उन चीजों को बचा लेना चाहता है जो जुड़ें हैं समय के साथ।
कुंभ में यात्रा शीर्षक संस्मरण में कवि ,उज्जैन की यात्रा पर निकलता है। जहाँ उसकी उत्कंठा इस बात से है कि उसे कालीदास की नगरी में जाना है जिनका कहना था--
संसार के सारे रत्न उज्जैन में हैं । कालीदास स्वयं विक्रमादित्य के दरबार के रत्न थे । कवि, कालिदास की रचनाओं से बहुत प्रभावित है साथ ही महाकाल की नगरी जिसकी चर्चा पुराणों मे है ,उस उज्जैन में कविता पाठ किसी सौभाग्य से कम नहीं है ।
पर कवि वहाँ यात्रा के दौरान युवा ड्राईवर की पीड़ा को शामिल करते हुए यह बताने की कोशिश करता है कि शराब उज्जैन जैसे अध्यात्मिक शहर में भी अपनी जड़ें जमाये हुए है ।
कवि बादलों को देखकर कालीदास की रचनाओं को याद करता है और यह सोचता है कि कालीदास ने मेघों को दूत क्यों बनाया ? शायद इसलिए कि मेघों की रचना भी पंच महाभूतों से हुई है जिससे यह शरीर बना है।
उसका यह सोचना साबित करता है कि साहित्य और अध्यात्म जब अपनी पराकाष्ठा पर पहुँचते हैं तो एक दूसरे में समाहित हो जाते हैं।
कवि ने उज्जैन का इतिहास इस संस्मरण में संक्षेप में लिखा है जो एक बेहतर जानकारी का परिचायक है।


कवि जब साहित्यिक यात्रा पर राँची जाता है तो वहाँ अपने मित्र लेखक, लेखिकाओं की शरीरिक और मानसिक तकलीफ से रूबरू होता है पर उस तकलीफ से ज्यादा तकलीफ राधाकृष्ण की रचनाओं को लेकर है जिसे साहित्य जगत भुला दिया। कवि शाम के वक़्त ट्रेन से गुजरते हुए विशाल पहाडों को अंधेरों की गिरफ्त में आता देख यह महसूस करता है कि पहाड़ अंधेरे से बड़ा नहीं हो सकता पर पहाडों पर कहीं -कहीं रौशनी देखकर कवि,राधाकृष्ण को याद करता है। सोचता है, राधाकृष्ण भी इस अंधेर युग में अपनी रोशनी बिखेरने का काम करते है। कवि सबको इस जिम्मेदारी का एहसास कराता है कि इस रौशनी को बचाकर रखना हम सबकी जिम्मेदारी है क्योंकि साहित्य का पतन राष्ट्र के पतन का द्योतक है ।
कवि राधेश्याम तिवारी द्वारा लिखित यह पुस्तक निश्चित ही समकालीन रचनाकारों और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक वरदान साबित होगी।
जिस प्रकार श्री कृष्ण ने जीवन के गूढ़ रहस्यों को अर्जुन के समक्ष उजागर किया और अर्जुन के हर सवालों का जवाब इस प्रकार दिया जो मानव धर्म और मर्यादा से बंधे हैं, उसी प्रकार इस संस्मरण में साहित्यकारों का धर्म, उसका आचरण , साहित्य की मर्यादा और रचनाकारों के सामने आने वाली कठिनाइयाँ जैसी अनेक चीजों का सार संकलन इस संस्मरण में मौजूद है जिसे कवि राधेश्याम तिवारी ने बड़ी बारीकियों से लिखा है जो मौलिक और निष्पक्ष है।

मैं इस पुस्तक के लेखक राधेश्याम तिवारी को हृदय की अनंत गहराइयों से धन्यवाद देता हूँ और आशा करता हूँ कि जिस प्रकार इन्होंने इस संस्मरण के माध्यम से साहित्य को भरपूर प्राण वायु देने का काम किया है ,यह एक बड़ा कार्य है । इनकी साहित्य साधना सफल हो , इन्हें ढेरों शुभकामनाएं। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag

दहेज पीड़ित महिला को न्याय दिलाने पहुंची मानव अधिकार रक्षक टीम

Posted: 23 Feb 2022 07:15 AM PST

दहेज पीड़ित महिला को न्याय दिलाने पहुंची मानव अधिकार रक्षक टीम

संवाददाता जितेन्द्र कुमार सिन्हा की खास खबर |
दहेज उत्पीड़न के मामले में पीड़ित महिला अमुक के कांड संख्या 02/22 को लेकर मानव अधिकार रक्षक टीम 23 फरवरी (बुधवार) को भोजपुर (आरा) पहुंची।
सूत्रों के अनुसार अमुक महिला ने बहुत समझौते के बाद भी लगातार पति द्वारा प्रताड़ित होने पर मजबूरन महिला थाना में दिसम्बर महीने में पति के द्वारा दहेज प्रताड़ना का आवेदन दिया था, जिसमें महिला थाना ने 05 जनवरी को महिला का केस दर्ज किया और उसके बाद केस को सुपरविजन के लिए सदर एसडीपीओ को भेज दिए गया।
पिछले वर्ष मानव अधिकार रक्षक टीम की संस्थापिका रीता सिन्हा एवम महिला मंडल टीम के द्वारा दोनों पक्षों को महिला थाना के समक्ष बैठकर समझौता भी करवाया गया था, लेकिन कोई कारवाई नहीं की गई, जिसके कारण कल दिनांक 22 फरवरी को संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष अरविंद कुमार एवं संस्थापिका रीता सिन्हा ने भोजपुर के एएसपी से फोन पर बात की और उन्हें बताया कि इस मामले में उन्हें स्वतंत्र गवाह चाहिए, एएसपी ने कहा कि अगर मामले की जांच हुई है तो आपकी टीम भी स्वतंत्र गवाह बना सकते है। संस्था की संस्थापिका रीता सिन्हा ने एएसपी को आश्वाशन दिया की मैं स्वयं वहा आकर पुरी मामले को आपके समक्ष रखूंगी।
बुधवार को मानव अधिकार रक्षक टीम में संस्थापिका रीता सिन्हा, राष्ट्रीय अध्यक्ष अरविंद कुमार, बिहार प्रदेश अध्यक्ष चेतन थिरानी, कानूनी सलाहकार ओम प्रकाश, बख्तियारपुर प्रखंड प्रवक्ता सूरज, एक्टिव मेंबर आरती कुमारी थी।
मानव अधिकार रक्षक टीम के उपर्युक्त दल ने भोजपुर (आरा) पहुंच कर पुलिस अधीक्षक से मिलकर पूरे मामले को उनके सामने रखी। SP को आवेदन दी और एएसपी से मिलकर स्वतंत्र गवाह को प्रस्तुत किया। एएसपी ने गवाह के ब्यान सुना और मानव अधिकार रक्षक टीम को आश्वासन दिया कि 2 दिनों में लड़के की गिरफ्तारी की वारंट जारी कर दी जायेगी।
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महिलाएँ अपने कौशल, आत्मविश्वास और शिष्टता के आधार पर किसी भी चुनौती को संभालने में सक्षम : डा. नम्रता आनंद

Posted: 23 Feb 2022 07:11 AM PST

महिलाएँ अपने कौशल, आत्मविश्वास और शिष्टता के आधार पर किसी भी चुनौती को संभालने में सक्षम : डा. नम्रता आनंद

संवाददाता जितेन्द्र कुमार सिन्हा की खास खबर |
पटना के कमला नेहरू नगर में सामाजिक संगठन दीदीजी फाउंडेशन ने महिलाओं को आर्थिक एवं सामाजिक रूप से सशक्त करने के लिये मंगलवार को कार्यक्रम की शुरूआत की। दीदीजी फाउंडेशन की संस्थापिका एवं राष्ट्रीय-राजकीय सम्मान से अलंकृत डा.नम्रता आनंद ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुये कहा कि महिलाएँ आज अपने कौशल, आत्मविश्वास और शिष्टता के आधार पर दुनिया की किसी भी चुनौती को संभालने में सक्षम हैं। वे आगे आ रहीं हैं और अपने परिवारों, अन्य महिलाओं और समाज के लिए शांति और सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन के अग्रदूत के रूप में स्थापित कर रही हैं।
डा. नम्रता आनंद ने महिलाओं को जीवन में शिक्षा के महत्व को रेखांकित करते हुये बताया कि शिक्षा जीवन में प्रगति करने का एक शक्तिशाली उपकरण है। महिलाओं के उत्थान एवं सशक्तिकरण के लिए शिक्षा से बेहतर तरीका क्या हो सकता है ? शिक्षा के आधार पर महिला में दक्षता, कौशल, ज्ञान एवं क्षमताओं का विकास होता है। शिक्षित महिला न केवल स्वयं लाभान्वित होती है, बल्कि उससे भावी पीढ़ी भी लाभान्वित होती है।शिक्षा किसी भी प्रकार के कौशल की प्राप्ति एवं विवेकपूर्ण दृष्टिकोण के विकास के लिए पूर्णतया आवश्यक है। महिला की शिक्षा से उसका शोषण रोकने में सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा कि सामाजिक असमानता, पारिवारिक हिंसा, अत्याचार और आर्थिक अनिर्भरता इन सभी से महिलाओं को छूटकारा पाना है तो जरूरत महिला सशक्तिकरण की है। हमारे आदि –ग्रंथों में नारी के महत्त्व को मानते हुए यहाँ तक बताया गया है कि "यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:" अर्थात जहाँ नारी की पूजा होती है, वहाँ देवता निवास करते है।महिला सशक्तिकरण का अर्थ महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक स्थिति में सुधार लाना है, जिससे उन्हें रोजगार, शिक्षा, आर्थिक तरक्की के बराबरी के मौके मिल सके, जिससे वह सामाजिक स्वतंत्रता और तरक्की प्राप्त कर सके।
उल्लेखनीय है कि करीब दो दशक से महिला सशक्तीकरण की दिशा में काम कर रही है। डा. नम्रता आनंद महिलाओं को समाज में उचित एवं सम्मानजनक स्थिति पर पहुँचाने के लिए अपनी संस्था के माध्यम से महिला सशक्तिकरण पर आधारित कई कार्यक्रम का आयोजन कर चुकी है।
डा. नम्रता आनंद ने बताया कि आज देश में नारी शक्ति को सभी दृष्टि से सशक्त बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसका परिणाम भी देखने को मिल रहा है। आज देश की महिलाएँ जागरूक हो चुकी हैं। आज की महिला ने उस सोच को बदल दिया है कि वह घर और परिवार की ही जिम्मदारी को बेहतर निभा सकती है। आज की महिला पुरुषों के साथ कंधे से कन्धा मिला कर बड़े से बड़े कार्य क्षेत्र में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहीं हैं। फिर चाहे काम मजदूरी का हो या अंतरिक्ष में जाने का। महिलाएँ अपनी योग्यता हर क्षेत्र में साबित कर रही हैं।महिला सशक्तिकरण महिलाओं को वह मजबूती प्रदान करता है, जो उन्हें उनके हक के लिए लड़ने में मदद करता है। हम सभी को महिलाओं का सम्मान करना चाहिए, उन्हें आगे बढ़ने का मौका देना चाहिए। "नारी जब अपने ऊपर थोपी हुई बेड़ियों एवं कड़ियों को तोड़ने लगेगी, तो विश्व की कोई शक्ति उसे नहीं रोक पाएगी।" वर्तमान में नारी ने रुढ़िवादी बेड़ियों को तोड़ना शुरू कर दिया है। यह एक सुखद संकेत है। लोगों की सोच बदल रही है, फिर भी इस दिशा में और भी प्रयास करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, कि दीदी जी फाउंडेशन प्रौढ़ शिक्षा केंद्र की स्थापना करेगा और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए उन्हें निशुल्क सिलाई केंद्र खोलकर सिलाई सिखाएगा तथा उन्हें रोजगार के लिए प्रेरित करेगा
उक्त अवसर पर डा. नम्रता आनंद की अगुवाई में दीदीजी फांउडेशन के सदस्यों ने 200 महिलाओं के बीच मास्क और साबुन का वितरण कर उन्हें कोरोना महामारी के बारे में जागरूक किया। मौके पर समाजसेवी सुमित गोस्वामी, गोलु कुमार समेत कई अन्य लोग भी मौजूद थे।
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24 फ़रवरी 2022, गुरूवार का दैनिक पंचांग एवं राशिफल - सभी १२ राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन ? क्या है आप की राशी में विशेष ? जाने प्रशिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. प्रेम सागर पाण्डेय से |

Posted: 23 Feb 2022 07:02 AM PST

24 फ़रवरी 2022, गुरूवार का दैनिक पंचांग एवं राशिफल - सभी १२ राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन ? क्या है आप की राशी में विशेष ? जाने प्रशिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. प्रेम सागर पाण्डेय से |

24 फ़रवरी 2022, गुरूवार का दैनिक पंचांग

🔅 तिथि अष्टमी 01:16 PM

🔅 नक्षत्र अनुराधा 11:59 AM

🔅 करण :

                कौलव 03:06 PM
                तैतिल 03:06 PM

🔅 पक्ष कृष्ण

🔅 योग हर्शण +02:57 AM

🔅 वार गुरूवार

☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ

🔅 सूर्योदय 06:19 AM

🔅 चन्द्रोदय +01:29 AM

🔅 चन्द्र राशि वृश्चिक

🔅 सूर्यास्त 05:41 PM

🔅 चन्द्रास्त 11:16 AM

🔅 ऋतु वसंत

☀ हिन्दू मास एवं वर्ष

🔅 शक सम्वत 1943 प्लव

🔅 कलि सम्वत 5123

🔅 दिन काल 11:30 AM

🔅 विक्रम सम्वत 2078

🔅 मास अमांत माघ

🔅 मास पूर्णिमांत फाल्गुन

☀ शुभ और अशुभ समय

☀ शुभ समय

🔅 अभिजित 11:40:02 - 12:26:04

☀ अशुभ समय

🔅 दुष्टमुहूर्त 10:07 AM - 10:54 AM

🔅 कंटक 02:44 PM - 03:30 PM

🔅 यमघण्ट 07:03 AM - 07:49 AM

🔅 राहु काल 01:29 PM - 02:55 PM

🔅 कुलिक 10:07 AM - 10:54 AM

🔅 कालवेला या अर्द्धयाम 04:16 PM - 05:02 PM

🔅 यमगण्ड 06:17 AM - 07:44 AM

🔅 गुलिक काल 09:10 AM - 10:36 AM

☀ दिशा शूल

🔅 दिशा शूल दक्षिण

☀ चन्द्रबल और ताराबल

☀ ताराबल

🔅 अश्विनी, कृत्तिका, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, मूल, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद, रेवती

☀ चन्द्रबल

🔅 वृषभ, मिथुन, कन्या, वृश्चिक, मकर, कुम्भ

🌹विशेष ~ जानकी नवमी (मध्यान्हे जानकी जन्मोत्सव)। 🌹

पं.प्रेम सागर पाण्डेय् नक्षत्र ज्योतिष वास्तु अनुसंधान केन्द्र नि:शुल्क परामर्श - रविवार

24 फ़रवरी 2022, गुरूवार का दैनिक राशिफल

मेष (Aries): आज शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। साहित्य कला के क्षेत्र में भी आप अपनी सृजनात्मकता प्रस्तुत करेंगे। विद्यार्थी विद्याभ्यास में अच्छा प्रदर्शन करेंगे। घर में शांतिपूर्ण वातावरण रहेगा। दैनिक कार्यों में कुछ अवरोध आएगा। व्यवसायिक क्षेत्र में उच्च अधिकारीण के साथ वाद-विवाद न हो, इसका ध्यान रखें। अधिक परिश्रम करने पर भी फल प्राप्ति कम होगी।

शुभ रंग = पीला

शुभ अंक : 9

वृषभ (Tauras): आज आपको वाणी और वर्तन पर संयम बरतने की आवश्यकता है। जलाशय से दूर रहें। जमीन और संपत्ति के पत्रों पर मुहर लगाते समय ध्यान रखें। मध्याहन के बाद परिस्थिति में सुधार होगा। शारीरिक और मानसिक रूप से आप स्वस्थ रहेंगे। मन में उठती कल्पना की लहेरें एक अनोखे विश्व के निर्माण का अनुभव कराएगी।

शुभ रंग = हरा

शुभ अंक : 6

मिथुन (Gemini): कार्यसफलता मिलने से आपका मन आज प्रसन्न रहेगा। प्रतिस्पर्धी पराजित होंगे। मध्याहन के बाद घर में विसंवादिता का वातावरण रहेगा। परिजनों के साथ तूतू-मैंमैं हो सकती है जिससे मन में ग्लानि बढ़ेगी। माता का स्वास्थ्य बिगड़ेगा। नकारात्मक विचार आपको हताशा में न धकेल दे इसका ध्यान रखें। मध्याहन से पूर्व भाग्यवृद्धि के संकेत हैं।

शुभ रंग = क्रीम

शुभ अंक : 2

कर्क (Cancer): लंबे समय की योजनाओं के आयोजन के विषय में सोचते-सोचते आप द्विधापूर्ण स्थिति में फंस जाएंगे। परिजनों के साथ वातावरण तनावपूर्ण रहेगा। निर्धारित कार्यों में विचारों की अपेक्षा कम सफलता मिलेगी। मध्याहन के बाद समय अच्छा रहेगा। शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य बना रहेगा। भाई-बहनों से लाभ होगा। किसी के साथ भावना भरे संबंधों में बंधेंगे। मन की चिंता दूर होगी।

शुभ रंग = पीला

शुभ अंक : 9

सिंह (Leo): आप आज आत्मविश्वास से भरे रहेंगे। प्रत्येक कार्य दृढ़ निर्णयशक्ति से करेंगे। फिर भी क्रोध की भावना अधिक रह सकती है, इसलिए मन शांत रखिएगा। सरकारी कार्यों में लाभ होगा। परिजनों का सहयोग अच्छा मिलेगा। आय की अपेक्षा व्यय अधिक होगा।

शुभ रंग = पींक

शुभ अंक : 1

कन्या (Virgo): आपका मन कुछ अधिक भावनाशील रहेगा। भावनाओं के प्रवाह में बहकर आप कोई अविचारी कार्य न कर बैठें इसका ध्यान रखें। चर्चा और विवाद से दूर रहें। फिर भी किसी के साथ उग्रतापूर्ण व्यवहार हो सकता है। मध्याहन के बाद आपके अंदर आत्मविश्वास बढ़ता हुआ नजर आएगा। समाज में आपकी मान-प्रतिष्ठा बढ़ेगी। फिर भी क्रोध पर संयम रखिएगा।

शुभ रंग = हरा

शुभ अंक : 6

तुला (Libra): प्रवास-पर्यटन पर जाने और मित्रों से लाभ मिलने का दिन है। व्यापार के क्षेत्र में आपको लाभ होगा। संतान के साथ संबंध मधुर रहेंगे। परंतु मध्याहन के बाद मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य बिगड़ेगा। अधिक संवेदनशील न रहने के लिए कहते हैं। उग्र चर्चा-विवाद से बचकर चलें। भ्रांति होने से दूर रहें। कानूनी विषयो में निर्णय बहुत सोच-समझकर करें।

शुभ रंग = क्रीम

शुभ अंक : 2

वृश्चिक (Scorpio): दृढ़ मनोबल और आत्मविश्वास से आप प्रत्येक कार्य आज सरलतापूर्वक करेंगे। व्यवसाय के क्षेत्र में भी आपकी बुद्धि-प्रतिभा की प्रशंसा होगी। उच्च अधिकारी प्रसन्न रहेंगे जिससे पदोन्नति की संभावना है। पिता के साथ संबंध मधुर रहेंगे और उन से लाभ भी होगा। मध्याहन के बाद मन कुछ विचारों में फंसा रहेगा। व्यापार में आर्थिक लाभ होने के योग है। मित्रों से लाभ होगा।

शुभ रंग = लाल

शुभ अंक : 8

धनु (Sagittarius): आपके स्वभाव में उग्रता रहेगी और स्वास्थ्य कुछ कमजोर रहेगा। धार्मिक यात्रा या प्रवास की संभावना है। व्यवसायिक क्षेत्र में विघ्न या विवाद होने की संभावना है। मध्याहन के बाद कार्यालय के वातावरण में सुधार होगा। कार्य में सफलता प्राप्त होगी। कार्यक्षेत्र में आपका वर्चस्व बढ़ेगा। पिता की ओर से लाभ होगा, साथ ही आरोग्य में सुधार होगा।

शुभ रंग = पीला

शुभ अंक : 9

मकर (Capricorn): आज बीमारी के पीछे खर्च अधिक होगा ऐसा गणेशजी कहते हैं। आकस्मिक धन का खर्च भी हो सकता है। पारिवारिक सदस्यों के साथ उग्र बहस न हो जाए इसका ध्यान रखें। बाहर के खान-पान की व्यवस्था को आज संभवतः टाल दें। चरित्र पर कोई उंगली उठाए ऐसा कोइ कार्य न करें। निरर्थक वाद-विवाद या चर्चा से दूर रहें।

शुभ रंग = फीरोजा

शुभ अंक : 7

कुंभ (Aquarius): आज व्यापारी वर्ग और भागीदारों के साथ संभलकर कार्य करें। वैवाहिक जीवन में मनदुख के प्रसंग बनेंगे। विद्यार्थियों का प्रदर्शन अच्छा रहेगा ऐसा सूचित करते हैं। घर का वातावरण शांत रहेगा। दैनिक कार्य में कुछ विघ्न आ सकते हैं। व्यवसायिक स्थल पर ऊपरी अधिकारियों के साथ वाद-विवाद टालें। मेहनत करने पर भी मनवांछित फल नहीं मिलेगा।

शुभ रंग = उजला

शुभ अंक : 4

मीन (Pisces): आपका दिन मध्यम फलदायी रहेगा। परिवार के सदस्यों के साथ आज मेलजोल बने रहेंगे। दैनिक कार्य में विलंब होंगे। सहकर्मियों का सहयोग कम मिलेगा। जीवनसाथी के साथ मनमुटाव के प्रसंग बनेंगे। जीवनसाथी के स्वास्थ्य की चिंता बनी रहेगी। सामाजिक क्षेत्र में यश प्राप्त नहीं होगा।

शुभ रंग = पीला

शुभ अंक : 9 
प्रेम सागर पाण्डेय् ,नक्षत्र ज्योतिष वास्तु अनुसंधान केन्द्र ,नि:शुल्क परामर्श - रविवार , दूरभाष 9122608219 / 9835654844
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रचनाकार का दिल

Posted: 22 Feb 2022 07:17 AM PST

रचनाकार का दिल

अरविन्द अकेला
दिलदार नगर में आनंद प्रकाश और अखिलेश आनंद नाम के दो साहित्यिक व्यक्तित्व रहते थे। दोनों कविता,कहानी,गीत,गजल लिखा करते थे।आनन्द प्रकाश अखिलेश आनंद से उम्र में सोलह साल छोटे थे।
आनंद प्रकाश ने अखिलेश आनंद को आज से तीस साल पहले दिलदार नगर में आयोजित एक अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में कार्यक्रम शुरू होने के पहले काव्य पाठ करते देखा जिसकी नोटिस नहीं तो आयोजक और नहीं श्रोतागण ले रहे थे।यह बात वहाँ पर उपस्थित आनन्द प्रकाश को अच्छी नहीं लगी। उसी समय आनंद प्रकाश ने निश्चय किया कि मैं स्थानीय कवियों व शायरों के सहयोग से एक साहित्यिक मंच तैयार करूँगा जिसमें सभी को मौका दूंगा, सभी का अखवार में नाम प्रकाशित करवाऊंगा।
सबसे पहले आनंद प्रकाश एक लब्ध प्रतिष्ठित अखवार का जिला संवाददाता बने फिर उसके बाद एक साहित्यिक मंच"साहित्य परिषद" का गठन कर जिले के दर्जनों कवियों व साहित्यकारों को एक सशक्त मंच प्रदान किया।अखवार में नाम निकालकर उन्हें अपने प्रदेश से लेकर जिले में स्थापित किया।
संस्था के गठन के छह साल बाद आनंद प्रकाश रोजी -रोजगार के लिए दिलदार नगर से बाहर चले गये।
अखिलेश प्रकाश ने आनन्द प्रकाश के बाहर जाने के बाद एक नयी साहित्यिक संस्था का गठन किया। कुछ साल बाद अखिलेश आनंद को एक स्मारिका का संपादन करने का सुअवसर मिला। समारिका में अखिलेश आनंद ने जिले के साहित्यिक बिकास में समस्त बड़े से छोटे कवियों के योगदान व नाम की चर्चा की परन्तु आनंद प्रकाश के नाम की चर्चा कहीं नहीं की जिस कारण आनंद प्रकाश को काफी दुख हुआ जिसे अखिलेश आनंद ने इसे मनमुटाव माना।आनंद प्रकाश ने अखिलेश आनंद को कई बार कवि गोष्ठी,कवि सम्मेलन में बुलाने का प्रयास किया,परन्तु सब बेकार साबित हुआ।
अचानक बीमार आनंद प्रकाश को अखिलेश आनंद के मृत्यु की सूचना मिली,जिसने आनंद प्रकाश के कवि मन को झकझोर रख दिया।
आनन-फानन में आनंद प्रकाश ने ऑनलाइन शोक सभा व अखिल भारतीय कवि सम्मेलन आयोजित कर अखिलेश आनंद के प्रति अपनी निष्ठा और सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित की।
अखिलेश आनंद व उसके साहित्यिक मित्रों का आनंद प्रकाश के प्रति उच्च सोच विचार नहीं रहता था।
अखिलेश आनंद की मृत्यु के बाद अखिलेश आनंद के साहित्यिक मित्रों का आनंद प्रकाश के प्रति सद्विचार की अनुभूति महसुस हुयी क्योंकि आनन्द प्रकाश ने अखिलेश आनंद की मृत्यु के बाद अपनी नैसर्गिक उदारता का परिचय दिया।
अखिलेश आनंद के सबसे बड़े शुभचिन्तक साहित्यकार सुरेन्द्र गांगुली ने कहा कि कवियों,शायरों,गीतकारों व रचनाकारों के बीच आपसी मतभेद हो सकता है लेकिन आपसी मनमुटाव ठीक नहीं है ।अखिलेश आनंद की मृत्यु के बाद आनंद प्रकाश ने मानवता व उदारता का परिचय देकर अखिलेश आनंद के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि निवेदित की है, ऐसा कार्य कोई बड़े दिलवाला आनंद प्रकाश जैसा रचनाकार हीं कर सकता है।
साहित्यकर सुरेन्द्र गांगुली के मुख से सुविचार सुनकर आनंद प्रकाश को सुखद अनुभूति का अहसास हुआ ।आनन्द प्रकाश ने मन हीं मन कहा कि पुरी दुनियाँ हीं हमें लाख भला बुरा कहे परन्तु हमें किसी के बारे में बुरा नहीं सोचना चाहिए और नहीं किसी से मनमुटाव करनी चाहिए।
अरविन्द अकेला,पटना।
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उम्र

Posted: 22 Feb 2022 07:01 AM PST

उम्र 

जो हंसते मुस्काते रहते मोती प्यार के लुटाते रहते 

उनकी उम्र जवां रहती है सबको गले लगाते रहते

बचपन जवानी बुढ़ापा जिंदगी के है पड़ाव हमारे 
खट्टे मीठे आते सदा जीवन में उतार-चढ़ाव प्यारे 

उम्र झलकती चेहरे से ढलती उम्र जाती पहचानी 
चिंता से बेकार हो जाती हंसती खिलती जवानी 

चंचल मन में लेती हिलोरे उमंगे उर उठती भारी 
उम्र की मोहताज नहीं कुंठाये मिट जाती सारी 

दया क्षमा प्रेम दिलों में बड़प्पन भी उनको मिलता 
खड़ा खजूर खूब बड़ा जग में छाया नहीं दे सकता 

उम्र नहीं है मापदंड जीवन के अनुभव सच्चे 
आंधी तूफानों को सह ढह जाते घरोंदे कच्चे 

ज्यों ज्यों उम्र बढ़ती जाए समझदारी भा जाती है 
ठोकरें खाकर दुनिया में अकल भारी आ जाती है

रमाकांत सोनी नवलगढ़
जिला झुंझुनू राजस्थान
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विधान

Posted: 22 Feb 2022 06:59 AM PST

विधान 

विधि का विधान है या नियति का खेल कोई 

डोर हाथों में उसके करतार करता सब होई 

दुनिया का दस्तूर यही है जगत का विधान प्यारे 
बुराई का अंत बुरा भलाई दमकाती भाग्य सितारे 

न्याय का विधान हमारा प्यारा है संविधान हमारा 
जनता को हर अधिकार दिलों में हिंदुस्तान हमारा

जीवनचर्या सदाचरण से सुंदर सा विधान बुन लो 
व्योम छूये कीर्ति पताका कर्म कोई महान चुन लो 

धरती सूरज चांद तारे सब नियम से विचरण करते 
सिंधु से मोती निकले वीर हौसलों की उड़ान भरते 

सुख का सागर ले हिलोरे संयम शील विधान जहां 
प्रेम की गंगा बहती है गुणों को मिले सम्मान जहां 

विधानसभा आमसभा जन हितकारी संवाद मिले 
हर बालक को शिक्षा पूरी जन-जन के चेहरे खिले

रमाकांत सोनी नवलगढ़
जिला झुंझुनू राजस्थान
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चंदनी धूप जब बुलाती है

Posted: 22 Feb 2022 06:56 AM PST

चंदनी धूप जब बुलाती है

डॉ रामकृष्ण मिश्र 
चंदनी धूप जब बुलाती है
याद मीठी-सी गुनगुनाती है!!

अगहनी भोर-सा खुला आँगन
मोतियों-से धुला-धुला-सा मन
देहरी पर बिछी -बिछी आँखें
कोर भर नींद-सीजुम्हाती है!!

चूड़ियों की खनक-सी आहट में
लाज की अधखिली मिलावट में
किशलयी  रंग ओठ पर थापे
कोई तो है,, किसे लजाती है!!

चाँदनी में नहा रही काया
रूप की धूप -सी पसरी छाया
शांति के गीत में सितार बजा
राग बासंत बन लुभाती है!!
रामकृष्ण
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23 फरवरी 2022, बुधवार का दैनिक पंचांग एवं राशिफल - सभी १२ राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन ? क्या है आप की राशी में विशेष ? जाने प्रशिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. प्रेम सागर पाण्डेय से |

Posted: 22 Feb 2022 06:29 AM PST

23 फरवरी 2022, बुधवार का दैनिक पंचांग एवं राशिफल - सभी १२ राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन ? क्या है आप की राशी में विशेष ? जाने प्रशिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. प्रेम सागर पाण्डेय से |

23 फरवरी 2022, बुधवार का दैनिक पंचांग

🔅 तिथि सप्तमी 03:30 PM

🔅 नक्षत्र विशाखा 01:29PM

🔅 करण :

                बव 04:59 PM

                बालव 04:59 PM

🔅 पक्ष कृष्ण

🔅 योग :

            घ्रुव 08:24 AM

            व्याघात 08:24 AM

🔅 वार बुधवार

☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ

🔅 सूर्योदय 06:20 AM

🔅 चन्द्रोदय +00:22 AM

🔅 चन्द्र राशि तुला

🔅 सूर्यास्त 05:40 PM

🔅 चन्द्रास्त 10:28 AM

🔅 ऋतु वसंत

☀ हिन्दू मास एवं वर्ष

🔅 शक सम्वत 1943 प्लव

🔅 कलि सम्वत 5123

🔅 दिन काल 11:28 AM

🔅 विक्रम सम्वत 2078

🔅 मास अमांत माघ

🔅 मास पूर्णिमांत फाल्गुन

☀ शुभ और अशुभ समय

☀ शुभ समय

🔅 अभिजित कोई नहीं

☀ अशुभ समय

🔅 दुष्टमुहूर्त 11:40 AM - 12:26 PM

🔅 कंटक 04:15 PM - 05:01 PM

🔅 यमघण्ट 08:36 AM - 09:22 AM

🔅 राहु काल 12:03 PM - 01:29 PM

🔅 कुलिक 11:40 AM - 12:26 PM

🔅 कालवेला या अर्द्धयाम 07:04 AM - 07:50 AM

🔅 यमगण्ड 07:44 AM - 09:10 AM

🔅 गुलिक काल 10:37 AM - 12:03 PM

☀ दिशा शूल

🔅 दिशा शूल उत्तर

☀ चन्द्रबल और ताराबल

☀ ताराबल

🔅 भरणी, रोहिणी, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, पूर्वा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, पूर्वाषाढ़ा, श्रवण, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद, रेवती

☀ चन्द्रबल

🔅 मेष, वृषभ, सिंह, तुला, धनु, मकर

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पं.प्रेम सागर पाण्डेय् नक्षत्र ज्योतिष वास्तु अनुसंधान केन्द्र नि:शुल्क परामर्श - रविवार

23 फरवरी 2022, बुधवार का दैनिक राशिफल

मेष (Aries): लक्ष्मीजी की कृपा आज आप पर बरसेगी। सामाजिक रूप से यश और कीर्ति में वृद्धि होने की संभावना है। व्यापार में लाभ होगा। विवाहोत्सुकों के विवाह का आयोजन सफलतापूर्वक होगा। स्वास्थ्य बिगड़ सकता है। पूंजी निवेश करने से पहले सोच लें। परिवारजनों के साथ विरोध रहेगा, इसलिए मौन रहना ही उचित होगा। वाहन चलाते समय सावधान रहें।

शुभ रंग = पींक

शुभ अंक : 8

वृषभ (Tauras): आज का दिन शुभ फलदायी है। विशेषकर व्यवसाय करनेवालों के लिए आज का दिन बहुत लाभदायी रहेगा। व्यवसाय में पदोन्नती का भी योग है। कार्यालय में उच्च अधिकारी का सहकार प्राप्त होगा। पारिवारिक जीवन में भी सुख और संतोष प्राप्त होगा। मित्रों से मुलाकात आनंद प्रदान करेगी।

शुभ रंग = हरा

शुभ अंक : 6

मिथुन (Gemini): प्रतिकूलता लेकर आएगा आज का दिन। मानसिक रूप से व्यग्रता और शारीरिक रुप से शिथिलता का अनुभव होगा। कार्य करने का उत्साह नहीं रहेगा। व्यवसायिक स्थल पर भी उच्चाधिकारी और सहकर्मियों का व्यवहार नकारात्मक रहेगा। धन खर्च हो सकता है। संतान की चिंता से मन व्यग्र रहेगा। प्रतिस्पर्धियों से सावधानी बरतें।

शुभ रंग = हरा

शुभ अंक : 3

कर्क (Cancer): आज दिनभर शारीरिक और मानसिक रुप से अस्वस्थता बनी रहेगी इसलिए नकारात्मकता से दूर रहें। क्रोध पर संयम रखें। खर्च अधिक रहेगा। परिवारजनों के बीच में घर्षण न हो इसका ध्यान रखें। नये कार्यों का प्रारंभ आज न करें। नए परिचय भी कुछ खास लाभदायी सिद्ध नहीं हो पाएंगे। सरकार-विरोधी प्रवृत्तियों से दूर रहना ही लाभदायी होगा।

शुभ रंग = आसमानी

शुभ अंक : 7

सिंह (Leo): पति-पत्नी के बीच में अनबन होने से दांपत्यजीवन में कलेश हो सकता है। आप दोनों में से किसी का स्वास्थ्य न बिगड़े इसका भी ध्यान रखें। सांसारिक और अन्य प्रश्नो के कारण भी आप का मन आज उदासीन रहेगा। सामाजिक क्षेत्र में अपयश प्राप्त न हो इसका ध्यान रखें। भागीदारों के साथ भी व्यवहार में मतभेद का निर्माण हो सकता है। कोर्ट-कचहरी से दूर रहें।

शुभ रंग = पींक

शुभ अंक : 8

कन्या (Virgo): व्यवसायिक क्षेत्र में आज यश प्राप्त होने की संभावनाएं अधिक हैं। सहकर्मचारियों का सहयोग प्राप्त होगा। पारिवारिक वातावरण में सुख का अनुभव होगा। शारीरिक और मानसिक रूप से भी आप स्वस्थ रहेंगे। आर्थिक लाभ होगा। रोगी व्यक्ति के स्वास्थ्य में सुधार होगा। प्रतिस्पर्धियों पर विजय प्राप्त होगी।

शुभ रंग = हरा

शुभ अंक : 3

तुला (Libra): वैचारिक रूप से विशालता और वाणी की मधुरता अन्य लोगों को प्रभावित करेगी जिससे संबंधों में मेल-जोल बना रहेगा। चर्चा-विचारणा में भी आप प्रभाव जमा सकेंगे। परिश्रम की तुलना में परिणाम संतोषजनक नहीं प्राप्त होगा। कार्य में संभलकर आगे बढ़ना होगा। अजीर्ण की पीड़ा होने से खान-पान में ध्यान रखें। साहित्य लेखन की प्रवृत्ति में अभिरुचि बढे़गी।

शुभ रंग = क्रीम

शुभ अंक : 2

वृश्चिक (Scorpio): स्नेहीजनों के साथ संबंधों में सावधानी बरतनी होगी। शारीरिक और मानसिकरुप से अस्वस्थता के कारण व्यग्रता बनी रहेगी। माता का स्वास्थ्य बिगड़ सकता है। धन और कीर्ति की हानि होगी। पारिवारिक वातावरण कलेशपूर्ण रहेगा। मन में प्रसन्नता का अभाव रहने से अनिद्रा भी आपको आज सिखाएगा।

शुभ रंग = गुलाबी

शुभ अंक : 5

धनु (Sagittarius): प्रतिस्पर्धी आज परास्त होंगे। शारीरिक और मानसिकरुप से स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा। नए कार्य का शुभारंभ करने के लिए समय अनुकूल है। स्नेहीजनों के साथ समय आनंद सहित बिताएंगे। आध्यात्मिकता का भी आनंद आप के जीवन में बना रहेगा। मित्रों और स्नेहीजनों के साथ भेंट होने से हर्ष होगा।

शुभ रंग = केशरी

शुभ अंक : 6

मकर (Capricorn): आज का दिन मिश्र फलदायी है। परिवारजनों के साथ गलतफहमी या मनमुटाव के प्रसंग बनने से मन में ग्लानि छाई रहेगी। निरर्थक खर्च होगा। आरोग्य के विषय में ध्यान रखें। विद्यर्थियों को आज अभ्यास में रुचि नहीं होगी। शेयर में पूंजी-निवेश करने का आयोजन आप कर सकेंगे। गृहणियों को आज असंतोष रहेगा। आध्यात्मिकता से शांति मिलेगी।

शुभ रंग = हरा

शुभ अंक : 3

कुंभ (Aquarius): आर्थिक दृष्टिकोण से आज का दिन लाभदायी है। परिवार का वातावरण आनंद से भरा रहेगा। मित्रों और परिवारजनों के साथ आनंदपूर्वक समय बीतेगा। प्रवास और पर्यटन का आनंद भी आज आप उठा सकेंगे। आध्यात्मिकता का आश्रय लेकर वैचारिक नकारात्मकता को दूर करने की सलाह देते हैं।

शुभ रंग = आसमानी

शुभ अंक : 7

मीन (Pisces): कोर्ट-कचहरी या स्थावर संपत्ति की झंझट में आज न पड़ने की सलाह है। आज सभी कार्यो में मन की एकाग्रता से फायदा होगा। स्वास्थ्य संभालिएगा। स्वजनों के वियोग का प्रसंग उपस्थित होगा। परिवारजनों के साथ मतभेद रहेगा। मिल रहे लाभ पाने में हानि न हो जाए इसका ध्यान भी रखिएगा। लेन-देन में सोच-विचार कर निर्णय लीजिएगा।

शुभ रंग = पींक

शुभ अंक : 8 
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दुराचार व हत्या के दोषी गुरमीत राम रहीम को जेड प्लस सुरक्षा

Posted: 22 Feb 2022 06:23 AM PST

दुराचार व हत्या के दोषी गुरमीत राम रहीम को जेड प्लस सुरक्षा

  • खालिस्तान समर्थक कार्यकर्ताओं से बताया गया था खतरा
  • निर्दलीय प्रत्याशी ने कहा राजनीतिक लाभ के लिए दी गयी सुरक्षा

चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को जेड-प्लस श्रेणी की सुरक्षा दी है। एडीजीपी (सीआईडी) की रिपोर्ट के आधार पर बताया गया कि जेल से रिहा होने के बाद गुरमीत राम रहीम को खालिस्तान समर्थक कार्यकर्ताओं से जान का खतरा है। इस बारे में 6 फरवरी को पत्र जारी कर हाईकोर्ट को भी सूचित किया गया था। इसके बाद ही हरियाणा सरकार ने डेरा प्रमुख को वीआईपी सुरक्षा देने का आदेश दिया है।

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में पेश रिकॉर्ड से यह बात सामने आई थी कि डेरा प्रमुख को खालिस्तान समर्थक तत्वों से खतरा है। इसके चलते प्रदेश सरकार ने जेल से फरलो पर रिहाई के बाद राम रहीम को जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा दी है। रिकॉर्ड की जांच से पता चला है कि डेरा प्रमुख को रिहा करने की प्रक्रिया महाधिवक्ता (एजी) की कानूनी राय लेने के बाद शुरू की गई थी। 25 जनवरी को दी राय में महाधिवक्ता (एजी) ने कहा था कि डेरा प्रमुख को हरियाणा गुड कंडक्ट प्रिजनर्स अधिनियम के तहत 'हार्ड कोर क्रिमिनल' की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। एजी के अनुसार, डेरा प्रमुख को इन हत्याओं के लिए अपने सह-अभियुक्तों के साथ आपराधिक साजिश रचने के लिए ही दोषी ठहराया गया है, वास्तविक हत्याओं के लिए नहीं। बता दें कि राम रहीम को फरलो के मामले में हरियाणा सरकार ने 21 फरवरी को हाईकोर्ट में पूरा रिकॉर्ड सौंप दिया। सरकार ने स्पष्ट किया कि फरलो का निर्णय तय प्रक्रिया के तहत लिया गया है। इधर, पंजाब के समाना से निर्दलीय उम्मीदवार परमजीत सिंह सोहाली ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए हरियाणा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। याची ने कहा है कि पंजाब में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राम रहीम को राजनीतिक लाभ लेने के लिए फरलो दी गई है। राम रहीम का पंजाब की कई सीटों पर गहरा प्रभाव है और ऐसे में उसकी फरलो से पंजाब में शांति भंग हो सकती है। याची ने कहा कि राम रहीम की फरलो से चुनाव की निष्पक्षता भी प्रभावित होगी। राम रहीम को जब सजा सुनाई गई थी तब भी पंचकूला में भारी हिंसा हुई थी। ऐसे में हरियाणा सरकार का यह निर्णय पूरी तरह से गलत है। दुष्कर्म व हत्या जैसे संगीन मामले में दोषी होने के चलते हरियाणा गुड कंडक्ट प्रिजनर्स अधिनियम के तहत उसे फरलो का अधिकार नहीं है।
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राजस्थान सिविल सेवा प्रारम्भिक नतीजा रद्द

Posted: 22 Feb 2022 06:20 AM PST

राजस्थान सिविल सेवा प्रारम्भिक नतीजा रद्द

12 विवादित सवालों पर उठायी गयी थी आपत्ति 25 व 26 फरवरी को होनी थी मुख्य परीक्षा

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्थान सिविल सेवा प्रांरभिक परीक्षा- 2021 का परिणाम रद्द कर दिया है। हाई कोर्ट ने परीक्षा परिणाम को रद्द करते हुए संशोधित परिणाम जारी करने के निर्देश दिए हैं।

जस्टिस महेंद्र गोयल की अदालत ने अंकित कुमार और अन्य की याचिकाओं पर दिए ये आदेश दिए हैं। यह मामला 12 विवादित सवालों से जुड़ा हुआ था। याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी अधिवक्ता रामप्रताप सैनी, रघुनंदन शर्मा और शोवित झाझड़िया ने की। आगामी 25 व 26 फरवरी को मुख्य परीक्षा होनी थी। हाईकोर्ट के इस फैसले से मुख्य परीक्षा की तैयारी कर रहे अभयर्थियों को निराशा हुई है क्योंकि अब मुख्य परीक्षा होने में ही संदेह जताया जा रहा है।
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आजमगढ़ जहरीली शराब कांड का आरोपी सपा नेता का रिश्तेदार, गिरफ्तार

Posted: 22 Feb 2022 06:18 AM PST

आजमगढ़ जहरीली शराब कांड का आरोपी सपा नेता का रिश्तेदार, गिरफ्तार

  • सरकारी ठेके से बेच रहा था जहरीली शराब
  • शराब पीने से पांच की मौत, 41 की बिगड़ी तबियत

आजमगढ़। यूपी के आजमगढ़ जहरीली शराब कांड मामले में पूर्व सांसद और समाजवादी पार्टी के नेता रमाकांत यादव के रिश्तेदार रंगेश यादव को पुलिस ने उन्हीं के घर से गिरफ्तार किया है। रमाकांत यादव के रिलेटिव रंगेश यादव के ठेके से अपमिश्रित शराब बरामद हुई थी। सरकारी ठेके की आड़ में रंगेश जहरीली शराब का कारोबार करता था। इस मामले में पुलिस ने अब तक दो अलग-अलग स्थानों से 7 अभियुक्तों को नामजद किया है। पुलिस ने रमाकांत के रिलेटिव रंगेश यादव समेत सात के खिलाफ हत्या और संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।
रमाकांत यादव पर आरोप है कि उन्होंने जहरीली शराब कांड के आरोपी रंगेश यादव को अपने घर में ही पनाह दिया था। हालांकि रमाकांत यादव का कहना है कि चुनाव के समय में उनके खिलाफ साजिश की जा रही है। रमाकांत यादव फूलपुर पवई विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी हैं। पुलिस का कहना है कि इस मामले में रमाकांत यादव की संलिप्तता की भी जांच की जा रही है। इस बीच पुलिस ने छापेमारी कर अब तक 4 लोगों को गिरफ्तार किया है। डीएम अमृत त्रिपाठी का कहना है कि सभी आरोपियों की प्रॉपर्टी को जब्त करते हुए एनएसए के तहत कार्रवाई होगी। गौरतलब है कि जिले की अहरौला थाना क्षेत्र के माहौल कस्बे में 20 फरवरी शाम को सरकारी ठेके से शराब पीने वाले पांच लोगों की मौत हो गई। शराब पीने की वजह से 41 अन्य लोगों की तबीयत बिगड़ गई, जिन्हें जिला अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। 6 लोगों की हालत गंभीर बनी हुई है और वे डाइलियस पर हैं। पूरे मामले में जिलाधिकारी ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही है। साथ ही आबकारी विभाग के तीन अधिकारीयों की निलंबन की संस्तुति चुनाव आयोग से कर दी गई है। डीएम त्रिपाठी ने बताया कि जिनकी मौत हुई है उनके नाम झब्बू, रामकरण, रामप्रीत यादव, संतोष और शमीम बताये गये।
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भाजपा श्रेष्ठता तो मैं मानवता की भावना के साथ आता: राहुल

Posted: 22 Feb 2022 06:15 AM PST

भाजपा श्रेष्ठता तो मैं मानवता की भावना के साथ आता: राहुल

  • मणिपुर में पीएम मोदी पर किया कटाक्ष
  • कहा, वे थाली बजाकर कर रहे थे कोरोना पर नियंत्रण

इम्फाल। विधानसभा चुनाव का प्रचार करते हुए कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने संसद में अपने भाषण को लेकर बीजेपी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रतिक्रिया पर अपना पक्ष रखा है। मणिपुर में विधानसभा चुनाव के लिए इम्फाल में कांग्रेस के पक्ष में प्रचार करते हुए उन्होंने कहा, श्हमारे देश को दो तरह से परिभाषित किया जा सकता है। एक है-राज्यों का संघ, जहां हर राज्य के बराबरी के अधिकार हैं। हर राज्य बराबर है। भारत को लेकर इस विजन पर हम विश्वास करते हैं। उन्होंने कहा कि बीजेपी की विचारधारा से हमारी लड़ाई है। उनकी एक विचारधारा, एक विचार, एक भाषा, एक संस्कृति है और उन्हें लगता है कि यह श्रेष्ठ है। जब बीजेपी और पीएम मोदी मणिपुर में आते हैं तो इसी तरह की समझ और ऐसी ही श्रेष्ठता की भावना के साथ आते है। दूसरी ओर, जब मै यहां आता हूं तो श्रेष्ठता की भावना के साथ नहीं आता बल्कि मानवता के भाव के साथ आता हूं। बता दें मणिपुर में विधानसभा चुनाव के लिए 27 फरवरी और तीन मार्च को वोट डाले जाएंगे। राजधानी इम्फाल में राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी सत्ता में आई तो लघु और मध्यम श्रेणी क्षेत्र के उद्योगों को पुनर्जीवित करेगी। हम खाद्य प्रसंस्करण और पर्यटन को बढ़ावा देंगे। उन्होंने कहा, आपने देखा कि कोविड के दौरान पीएम ने क्या किया? कोविड के लिए उनका समाधान था-थाली बजाओ। आप हंस रहे हैं लेकिन वे हमारे पीएम हैं। लेकिन हमारे पीएम के पास ये आइडिया हैं। जब श्थाली बजाओश् फेल हो गया तो वे नया आइडिया लेकर आए-मोबाइल फोन की लाइट जलाओ। वे ऑक्सीजन सिलेंडर, वेंटीलेटर नहीं दे सके।
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पूर्वांचल और अवध में अब चुनावी समर

Posted: 22 Feb 2022 06:12 AM PST

पूर्वांचल और अवध में अब चुनावी समर

  • अनुपिंया पटेल, संजय निषाद और ओम प्रकाश राजभर की होगी परीक्षा
  • स्वामी प्रसाद मौर्य व दारा सिंह के व्यक्तिगत प्रभाव का भी होगा खुलासा

लखनऊ। यूपी विधानसभा चुनाव का रण अब अवध और पूर्वांचल की माटी पर लड़ा जा रहा है। चैथे, पांचवें, छठे और सातवें चरण में पूर्वांचल और अवध में मतदान होना है। इन सभी चरणों में बीजेपी और समाजवादी पार्टी के सहयोगियों की असली परीक्षा होनी है। दरअसल, इस चरण में पिछड़े वर्ग के कई नेताओं की जिम्मेदारी है कि वे बीजेपी और सपा को वैतरणी पार करवाएं। इनमें से कई नेता ऐसे हैं जो पिछले चुनाव में बीजेपी के साथ थे, लेकिन इस बार वे साइकिल पर सवार हैं। इसलिए माना जा रहा है कि इस बार पूर्वांचल और अवध में अपना दल एस की अनुप्रिया पटेल, निषाद पार्टी के संजय निषाद, सुभासपा के ओमप्रकाश राजभर, स्वामी प्रसाद मौर्य, दारा सिंह चैहान जैसे पिछड़े वर्ग के चेहरों की असली परीक्षा होगी।
बसपा से अपनी राजनीति शुरू करने वाले राजभर ने 2002 में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी का गठन किया। इसके बाद उन्होंने कई चुनाव लड़े, लेकिन खाता खुला 2017 में जब उन्होंने बीजेपी से गठबंधन किया। अब राजभर ने बीजेपी को हराने के लिए सपा के साथ गठबंधन किया है। ओमप्रकाश राजभर पिछड़ी जातियों जैसे बिंद, कुम्हार, प्रजापति, कुशवाहा और कोइरी की राजनीति करते हैं। सपा ने उन्हें 18 सीटें दी हैं। ओमप्रकाश राजभर और उनके बेटे अरविंद राजभर भी मैदान में हैं। बेटे अरविंद राजभर वाराणसी की शिवपुर सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। उनका मुकाबला योगी सरकार में मंत्री अनिल राजभर से है। राजभर खुद जहूराबाद से चुनाव लड़ रहे हैं, जहां उन्हें त्रिकोणीय टक्कर मिल रही है।
अपना दल एस की राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल पूर्वांचल में कुर्मी वोट बैंक का सर्वमान्य चेहरा हैं। पूर्वांचल की राजनीति में कुर्मी वोटर्स की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। अपना दल ने 2017 के चुनाव में बीजेपी के साथ मिलकर 11 सीटों पर चुनाव लड़ा था। उसके 9 प्रत्याशी विजयी रहे थे। इस बार अपना दल को बीजेपी ने 17 सीटें दी हैं। निषाद पार्टी के अध्यक्ष डॉ। संजय निषाद इस बार बीजेपी गठबंधन के साथ मैदान में हैं। निषाद जाति का नेतृत्व करने वाले संजय निषाद का दावा है कि यूपी की 403 सीटों में से 160 पर निषादों का प्रभाव है।
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बाहुबली अतीक के भगोड़े बेटे पर 25 हजार का इनाम

Posted: 22 Feb 2022 06:09 AM PST

बाहुबली अतीक के भगोड़े बेटे पर 25 हजार का इनाम

  • रिश्तेदार ने ही दर्ज कराया है रंगदारी मांगने का मुकदमा
  • रंगदारी व अन्य मामलों में अतीक भी बंद हैं जेल में

प्रयागराज। गुजरात के साबरमती जेल में बंद बाहुबली पूर्व सांसद अतीक अहमद के छोटे बेटे अली पर पुलिस ने 25 हजार का इनाम घोषित किया है। ध्यान रहे कि 21 दिसंबर को प्रयागराज के करेली थाने में दर्ज मुकदमे में अतीक अहमद का छोटा बेटा अली फरार चल रहा है। अली के खिलाफ पांच करोड़ की रंगदारी मांगने और जमीन कब्जाने का मुकदमा दर्ज हुआ था। पुलिस ने नामजद 6 अन्य लोगों के खिलाफ भी 25 हजार का इनाम घोषित किया है। अतीक के रिश्तेदार असद, करीबी आरिफ उर्फ कछौली, संजय सिंह, फुल्लू, अमन और इमरान उर्फ गुड्डू पर भी पुलिस ने इनाम घोषित किया है। यह भी गौरतलब है कि अतीक अहमद भी रंगदारी मांगने समेत कई गंभीर आरोपों में साबरमती जेल में बंद हैं। इसके अलावा अतीक का बड़ा बेटा मोहम्मद उमर भी फरार चल रहा है। इस बीच छोटे बेटे अली के खिलाफ उनके ही रिश्तेदार जीशान ने करेली थाने में लिखित शिकायत करते हुए गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था। इसी मामले में अली व उनके अन्य साथियों के ऊपर इनाम घोषित किया गया है। दर्ज मुकदमा में आरोप है कि प्रयागराज के करेली में जीशान उर्फ जानू की 5 बीघा जमीन पर अतीक अहमद के बेटे अली और उसके सहयोगी ने कब्जा कर लिया है। दोनों ने जीशान को मारने की धमकी देकर फोन पर अतीक अहमद से बात करवाई। अतीक अहमद ने फोन पर जमीन को अपनी पत्नी शाहिस्ता के नाम करने को कहा। जमीन नहीं देने पर जीशान से 5 करोड़ रुपए की रंगदारी भी मांगी गई।
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देश के विकास की फिक्र

Posted: 22 Feb 2022 06:07 AM PST

देश के विकास की फिक्र

(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)
पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में जब घटिया स्तर के आरोप लगाए जा रहे थे, तभी एक मुख्यमंत्री को इस बात की फिक्र हुई कि 75 साल की आजादी के बाद भी देश का समुचित विकास क्यों नहीं हो पाया? फिक्र तो अच्छी है लेकिन ईमानदार नहीं लगती। तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चन्द्रशेखर राव राजनीति का तीसरा मोर्चा बनाना चाहते हैं। इस प्रकार का मोर्चा बनाने की कवायद कम से कम तीन दशक से तो चल ही रही है। राज्य स्तर पर ऐसे मोर्चे सफल भी रहे। बिहार में धुर विरोधी नीतीश कुमार और लालू यादव ने मिलकर महागठबंधन बनाया था और मोदी की लहर के बावजूद बिहार में सरकार बनायी। झारखण्ड में भी हेमंत सोरेन ने कांग्रेस और राजद को लेकर मोर्चा बनाकर भाजपा से सरकार छीन ली। उत्तर पदेश में भी समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का मोर्चा बना था। इस मोर्चे ने उपचुनाव में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की सीटों पर भाजपा प्रत्याशियों को पराजित कर दिया था। इसका एक मतलब यही निकलता है कि सत्ता पाने के लिए मोर्चे सफल हो जाते हैं लेकन न तो ये स्थायी रहते हैं और न देश व प्रदेश का विकास कर पाते हैं। राष्ट्रीय स्तर पर जनता पार्टी और जनता दल की भी यही कहानी है। तेलंगाना के सीएम केसी आर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और राष्ट्रवादी कांगे्रस पार्टी (एनसीपी) के नेता शरद पवार से मिलकर संभवतः सत्ता के लिए ही मोर्चा बनाना चाहते हैं। इसीलिए कांग्रेस और कुछ अन्य पार्टियों को यह बैठक अच्छी नहीं लगती है लेकिन तेलंगाना के सीएम अगर नए संकल्प, नई आशा और नए एजेन्डा को लेकर साथ-साथ चलने को तैयार हैं तो यह देश के लिए एक अच्छी बात होगी।

तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की ओर से तीसरे मोर्चे को लेकर उद्धव ठाकरे और शरद पवार के साथ हुई मुलाकात के बाद कांग्रेस की ओर से एक बयान आया है। कांग्रेस ने कहा है कि बीजेपी के खिलाफ कोई भी राजनैतिक मोर्चा, कांग्रेस के बिना सफल नहीं हो सकता। शिवसेना और एनसीपी भी अब कांग्रेस के साथ लड़ाई लड़ने की बात कर रही है। गत दिनों मुंबई पहुंचे तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और शरद पवार से मुलाकात के बाद कांग्रेस की टिप्पणी आई है। बता दें कि के चंद्रशेखर राव लगातार गैर बीजेपी और गैर कांग्रेसी सरकारों को एक साथ लाने की कोशिश कर रहे हैं। तेलगांना के सीएम ने कहा, 75 साल की आजादी के बाद संभावित रूप का विकास देश में नहीं हुआ है। हमें इसके कारण ढूंढना चाहिए। नए संकल्प, नयी आशा और नए एजेंडे को लेकर आगे चलने का वक्त आ चुका है। तेलंगाना के सीएम की उद्धव और शरद पवार से भेंट को लेकर महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले ने कहा, अगर केंद्र सरकार को हराना है तो कांग्रेस के सिवाय यह हो नहीं सकता। देश के मौजूदा हालात को बदलने के लिए कांग्रेस समेत दूसरे पार्टियों को साथ आना पड़ेगा और तब ही यह संभव हो पाएगा।

महाराष्ट्र के महाविकास आघाडी सरकार में शामिल कांग्रेस की पहले से ही अपनी सहयोगी पार्टियों के साथ कई मुद्दों पर तकरार है। कांग्रेस का आरोप है कि महाराष्ट्र सरकार में कांग्रेसी नेताओं के प्रोजेक्ट को सही निधि नहीं दी जाती है। पार्टी ने इस मुद्दे पर सीएम उद्धव ठाकरे से भी शिकायत की है। एनसीपी और कांग्रेस एक दूसरे के पार्षदों को अपनी पार्टी में शामिल करने में लगी हुई हैं। गोवा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और एनसीपी ने अलग-अलग चुनाव लड़ा। उधर बृहन्नमुंबई म्युनिसिपल कार्पोरेशन (बीएमसी) चुनाव में एनसीपी और शिवसेना साथ में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं जबकि कांग्रेस अलग से चुनाव लड़ने की योजना बना रही है।

वैसे, केसीआर के साथ मुलाकात के बाद अब एनसीपी और शिवसेना का कहना है कि उनकी इस लड़ाई में कांग्रेस भी शामिल है। शिवसेना सांसद संजय राउत बोले, हमने कभी नहीं कहा कि कांग्रेस के बिना कोई फ्रंट बनेगा। जब यह बात पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने कही थी तब शिवसेना पहली पार्टी थी जिसने कहा कि कांग्रेस को भी साथ लेना होगा। एनसीपी नेता और महाराष्ट्र सरकार में कैबिनेट मंत्री नबाब मलिक भी बोले, पवार साहब (शरद पवार) ने पहले ही कहा है कि गैर बीजेपी दलों का एक व्यापक मोर्चा बने, इसमें कांग्रेस भी साथ हो और 2024 से पहले लोगों के सामने एक विकल्प रखा जाए। हमें लगता है कि इसी दिशा में यह शुरुआत हई है। इस बीच बीजेपी नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का कहना है कि ऐसी बैठकों का बीजेपी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। फडणवीस ने कहा, पिछले लोकसभा चुनाव के समय भी कई दल एक साथ आए थे और एक फ्रंट बनाया था लेकिन उसका कोई असर नहीं हुआ। इससे पहले यूपी में भी यह प्रयोग किया गया। सच बात यह है कि तेलंगाना में पिछले लोकसभा में बीजेपी की 4 सीटें आई थीं। इस बार नम्बर एक पर बीजेपी रहेगी।

बहरहाल तेलंगाना के मुख्यमंत्री केचंद्रशेखर रावके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सिलसिलेवार तंज भरे हमले कर रहे हैं। इस बैठक को 2024 के आम चुनावों में बीजेपी से मुकाबला करने के लिए एक गैर-कांग्रेसी मोर्चा बनाने के प्रयासों के तौर पर ही देखा जा रहा है। इसी के तहत तेलंगाना के सीएम क्षेत्रीय दलों के नेताओं के साथ बैठक कर रहे हैं। तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव और महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे ने इशारों-इशारों में केंद्र की बीजेपी सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा कि आज निचले स्तर की राजनीति हो रही है और वो मिलकर बड़े बदलाव के लिए काम करेंगे और इस मुहिम में दूसरे नेताओं को भी जोड़ेंगे। केसीआर ने कहा कि उद्धव जी से मिलकर बहुत अच्छा लगा, कई मुद्दों पर चर्चा हुई, सहमति बनी। देश में विकास की गति बढाने, कुछ ढांचागत और नीतिगत बदलाव पर कई चर्चा हुई। देश में कई अन्य लोग हैं जो हमारी तरह सोचते हैं। उनसे भी बातचीत हो रही है। कुछ दिनों में हैदराबाद या कहीं और बैठेंगे और चर्चा करेंगे। हम दोनों भाई लगते हैं, 1000 किलोमीटर का हमारा बॉर्डर है। कलेश्वरं प्रोजेक्ट में उद्धव ठाकरे ने सहयोग किया, बहुत फायदा हुआ। देश की राजनीति पर चर्चा हुई है। आज देश के जो हालात हैं, उसमें बदलाव आना चाहिए। देश में एक बड़ी परिवर्तन की जरूरत है। देश सचमुच परिवर्तन चाहता है। भ्रष्ट व्यवस्था से निजात पाना चाहता है लेकिन ऐसा कोई मसीहा दिखाई नहीं पड़ता। कुर्सी बदलती है लेकिन व्यवस्था नहीं बदलती।
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स्वास्तिक बनाम अशोक चक्र

Posted: 22 Feb 2022 06:04 AM PST

स्वास्तिक बनाम अशोक चक्र

(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)
भारत की राजनीति में जबर्दस्त द्वन्द्व चल रहा है। इसका नतीजा क्या होगा, कहा नहीं जा सकता। ये मामले आम जनता में बहस का मुद्दा भी नहीं बन पाएंगे। अभी कुछ दिन पहले ही गणतंत्र दिवस (26 जनवरी 2022) पर जब राष्ट्र ध्वज को ससम्मान उतारा जाता है अर्थात बीटिंग द रिट्रीट कार्यक्रम में जो धुन पहले बजायी जाती थी उसको बदल दिया गया। पहले जो धुन बजती थी, वो राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पसंदीदा थी, उसकी जगह राष्ट्रकवि प्रदीप जी के कालजयी गीत-ऐ मेरे वतन के लोगों, जरा आंख में भर लो पानी... की धुन बजायी गयी। जाहिर है कि आम जनता से इसका कोई लेना-देना नहीं है। बौद्धिक वर्ग में भी इस पर कोई खास बहस नहीं हुई। अभी फरवरी 2022 में ही उत्तर प्रदेश के लखनऊ में केजीएमयू के नवागंतुक एमबीबीएस छात्रों को दिलायी जाने वाली शपथ बदल दी गयी। पहले हिंपोक्रेट्स शपथ दिलायी जाती थी, इस बार चरक संहिता की शपथ दिलायी गयी। इसमें कत्र्तव्य पालन की प्रतिबद्धता ज्यादा बतायी जा रही हैं। एक नया मामला बिहार से सामने आया है। वहां नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने स्मृति चिह्न स्तम्भ को लेकर सवाल खड़ा किया है। इस पर अशोक चक्र की जगह स्वास्तिक चिह्न लगाया गया है। तेजस्वी यादव कहते हैं कि इससे देश की धर्मनिपेक्ष छवि ध्वस्त हुई है जबकि बिहार विधानसभाध्यक्ष विजय सिन्हा कहते हैं कि स्वास्तिक चिह्न सनातन काल से चला आ रहा है। यह बिहार के राजकीय चिह्न में भी शामिल है। ध्यान रहे कि बिहार विधानसभा के सौ साल पूरे होने पर विधानसभा के मेन गेट पर शताब्दी स्मृति स्तम्भ बनाया गया है।

धार्मिक मान्यताओं और चिन्हों को लेकर देश में सियासत गर्म है। कुछ दिन पहले कर्नाटक में मुस्लिम लड़कियों के हिजाब पहन कर स्कूल आने पर उठे सवाल के बाद देश भर में हिजाब पर बहस छिड़ गई है। मगर अब बिहार में स्वास्तिक चिन्ह को लेकर बवाल खड़ा हो गया है। बिहार विधानसभा के 100 साल पूरे होने पर विधानसभा के मेन गेट पर बनाए जाने वाले शताब्दी स्मृति स्तंभ पर स्वास्तिक चिन्ह होने पर नेता विपक्ष तेजस्वी यादव ने सवाल उठाया है। तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पर स्मृति चिह्न स्तंभ के मॉडल को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ तस्वीर डालते हुए कहा कि आजादी के बाद पहला ऐसा स्तंभ होगा जिसमें अशोक चक्र नहीं लगा होगा। उन्होंने कहा कि नीतीश सरकार ने देश की धर्मनिरपेक्ष छवि को ध्वस्त करते हुए अशोक चक्र की जगह स्वास्तिक चिह्न लगाया है। नेता विपक्ष के उठाए सवाल पर जवाब देते हुए बिहार विधानसभा के अध्यक्ष विजय सिन्हा ने तेजस्वी यादव की समझ पर सवाल खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव में समझ की कमी है, अगर जानकारी नहीं तो पहले जानकारी लेनी चाहिए थी। स्वास्तिक का चिह्न कोई नया नहीं है, बल्कि यह बिहार के राजकीय चिह्न में भी शामिल है। यही नहीं, तेजस्वी यादव के लेटर पैड और तमाम विधायकों के लेटर पैड पर भी स्वास्तिक का चिह्न शामिल होता है। तेजस्वी के धर्मनिरपेक्षता पर उठाए गए सवाल पर विजय सिन्हा ने कहा कि धर्मनिरपेक्षता का मतलब अपने धर्म को भूल जाना नहीं होता। धर्मनिरपेक्षता का मतलब सभी धर्मों को मानेंगे पर अपने धर्म और उसके प्रतीक चिह्नों को भी अगली पीढ़ी के लिए बचा कर रखना जरूरी होता है। ऐसी बातें राष्ट्र गौरव को कमजोर करती हैं। स्वास्तिक चिह्न पर तेजस्वी यादव के उठाए सवालों का जवाब देते हुए जेडीयू ने पूछा क्या तेजस्वी नास्तिक हैं। पार्टी के प्रवक्ता अभिषेक ने कहा कि बिहार का मुख्यमंत्री बनने के लिए तेजस्वी यादव ने दिन-रात पूजा की, लेकिन अब स्वास्तिक चिह्न पर सवाल खड़े कर रहे हैं। विधानसभा का सदस्य होने के बावजूद लगता है कि उन्होंने सदन का मुआयना नहीं किया है, क्योंकि सदन में भी स्वास्तिक चिह्न लगा हुआ है। वहीं, स्वास्तिक चिह्न पर तेजस्वी यादव के उठाए गए सवाल का कांग्रेस ने समर्थन किया है। कांग्रेस के प्रवक्ता राजेश राठौर ने तेजस्वी की बात का समर्थन करते हुए कहा कि अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बीजेपी और आरएसएस के पदचिन्हों पर चलने लगे हैं, यही कारण है कि अशोक चक्र की जगह स्वास्तिक को बढ़ावा दे रहे हैं।

भारत का प्रतीक अशोक चक्र जिसे कर्तव्य का पहिया भी कहा जाता है। इसमें कुल 24 तीलियाँ है जो मनुष्य के 24 गुणों को दर्शातीं हैं। साथ ही इन्हें मनुष्य के लिए बनाये गए 24 धर्म मार्ग भी कहा जाता है। 22 जुलाई 1947 के दिन संविधान सभा ने तिरंगे को, देश के झंडे के रूप में स्वीकार किया था और हमारे रष्ट्र ध्वज के निर्माताओं ने जब इसका अंतिम रूप फाइनल किया तो झंडे के बीच में चरखे को हटाकर इस अशोक चक्र को स्थापित किया था । अशोक चक्र में दी गयी 24 तीलियाँ देश और समाज के चहुमुखी विकास के प्रति देशवासियों को उनके अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में बतातीं हैं। पहली तीली-संयमित जीवन जीने की प्रेरणा देती है तो दूसरी तीली-आरोग्य, तीसरी तीली-शांति, चैथी तीली-त्याग, पांचवीं तीली- शील, छठवीं तीली-सेवा, सातवीं तीली-क्षमा, आठवीं तीली-प्रेम, नौवीं तीली-मैत्री, दसवीं तीली-बन्धुत्व, ग्यारहवीं तीली-संगठन, बारहवीं तीली-कल्याण, तेरहवीं तीली-समृद्धि, चैदहवीं तीली-उद्योग, पंद्रहवीं तीली-सुरक्षा, सौलहवीं तीली-नियम, सत्रहवीं तीली-समता, अठारहवी तीली-अर्थ, उन्नीसवीं तीली-नीति, बीसवीं तीली-न्याय, इक्कीसवीं तीली-सहकार्य, बाईसवीं तीली-कर्तव्य, तेईसवी तीली-अधिकार और चैबीसवीं तीली- बुद्धिमत्ता अर्थात् देश की समृद्धि के लिए स्वयं का बौद्धिक विकास करने की सीख देती है। उपरोक्त सभी 24 तीलियाँ सम्मिलित रूप से देश और समाज के चहुमुखी विकास की बात करती हैं एवं उनके अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में स्पष्ट सन्देश देती हैं। इसी प्रकार स्वास्तिक को अत्यंत प्राचीन समय से बहुत ही मंगल प्रतीक माना जाता है। हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य से पहले स्वास्तिक का चिन्ह अवश्य बनाया जाता है। स्वास्तिक शब्द सु़अस़क शब्दों से मिलकर बना है। 'सु' का अर्थ अच्छा या शुभ, अस का अर्थ सत्ता या अस्तित्व और 'क' का अर्थ कर्ता या करने वाले से है। इस तरह से स्वास्तिक शब्द का अर्थ मंगल करने वाला माना गया है। स्वास्तिक को भगवान गणेश का प्रतीक भी माना जाता है। गणेश जी शुभता के देवता है और प्रथम पूजनीय हैं इसलिए भी हर कार्य से पहले स्वास्तिक का चिन्ह बनाना बहुत ही शुभ रहता है। खासतौर पर मां लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा में स्वास्तिक का चिह्न अवश्य बनाया जाता है। ऋग्वेद में स्वास्तिक को सूर्य माना गया है और उसकी चारों भुजाओं को चार दिशाओं की उपमा दी गई है। इसके अलावा स्वास्तिक के मध्य भाग को विष्णु की कमल नाभि और रेखाओं को ब्रह्माजी के चार मुख, चार हाथ और चार वेदों के रूप में भी निरूपित किया जाता है। अन्य ग्रंथो में स्वास्तिक को चार युग, चार आश्रम (धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष) का प्रतीक भी माना गया है। यह मांगलिक विलक्षण चिह्न अनादि काल से ही संपूर्ण सृष्टि में व्याप्त रहा है। इसलिए स्वास्तिक और अशोक चक्र पर विवाद नहीं करना चाहिए। हां, इसके पीछे राजनीतिक भावना भी नहीं होनी चाहिए। (हिफी)
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