दिव्य रश्मि न्यूज़ चैनल |
- बसपा का प्रवक्ता टीवी चैनल पर नहीं करेगा डिबेट
- पंजाब में भगवंत मान ने पेश किया सरकार बनाने का दावा
- जन आस्था के प्रतीक है खाटू के श्री श्याम
- फल-फूल रही वादों की सियासी फसल
- सपा ने निकाला कांटे से कांटा
- यूक्रेन में फंसे शेर व बाघों को रेस्क्यू कर स्पेन पहुंचाया
- श्रीलंका में राशन के लिए लग रहीं लम्बी लाइनें
- भारत-चीन में उच्चस्तरीय सैन्य वार्ता
- नेपाल सरकार ने लगाया था चीन पर अतिक्रमण का आरोप
- 13 मार्च 2022, रविवार का दैनिक पंचांग एवं राशिफल - सभी १२ राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन ? क्या है आप की राशी में विशेष ? जाने प्रशिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. प्रेम सागर पाण्डेय से |
- प्रेम और भक्ति का द्योतक होली
- जीकेसी का होली मिलन समारोह 13 मार्च को
- होली खेलां श्याम फागणियो आयो(राजस्थानी)
- धोखा
- आकाश देखें, आसमान नहीं ... क्षितिज निहारिकाओं से भी आगे है!
- दिव्य शाकद्वीपीय ब्राह्मण समिति, गोरखपुर की नवगठित कार्यकारिणी का सम्मान समारोह सम्पन्न; सहभोज का किया गया आयोजन
| बसपा का प्रवक्ता टीवी चैनल पर नहीं करेगा डिबेट Posted: 12 Mar 2022 07:32 AM PST बसपा का प्रवक्ता टीवी चैनल पर नहीं करेगा डिबेट बसपा सुप्रीमों ने लगाया मीडिया पर जातिवादी रवैया अपनाने का आरोप लखनऊ। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने मीडिया पर जातिवादी रवैया अपनाने का आरोप लगाया है और कहा है कि अब से उनकी पार्टी के कोई भी प्रवक्ता टीवी चैनलों पर होने वाले डिबेट में शामिल नहीं होंगे। राज्य के चुनाव के नतीजे जारी होने के दूसरे दिन उन्होंने ट्वीट कर मीडिया पर कई आरोप लगाए। उन्होंने लिखा, यूपी विधानसभा आमचुनाव के दौरान मीडिया द्वारा अपने आकाओं के दिशा-निर्देशन में जो जातिवादी द्वेषपूर्ण व घृणित रवैया अपनाकर अम्बेडकरवादी बीएसपी मूवमेन्ट को नुकसान पहुंचाने का काम किया गया है, वह किसी से भी छिपा नहीं है। इस हालत में पार्टी प्रवक्ताओं को भी नई जिम्मेदारी दी जाएगी। इसलिए पार्टी के सभी प्रवक्ता श्री सुधीन्द्र भदौरिया, श्री धर्मवीर चैधरी, डा. एम एच खान, श्री फैजान खान व श्रीमती सीमा कुशवाहा अब टीवी डिबेट आदि कार्यक्रमों में शामिल नहीं होंगे। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| पंजाब में भगवंत मान ने पेश किया सरकार बनाने का दावा Posted: 12 Mar 2022 07:29 AM PST पंजाब में भगवंत मान ने पेश किया सरकार बनाने का दावा
चंडीगढ़। पंजाब में आम आदमी पार्टी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार भगवंत मान राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित से मिले। उन्होंने सरकार बनाने का दावा पेश किया। वह 16 मार्च को 12.30 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। आप विधायकों की बैठक में भगवंत मान पार्टी के विधायक दल के नेता चुने गये। पंजाब में बनने वाली सरकार में मंत्री पद के लिए हरपाल सिंह चीमा, अमन अरोड़ा, बलजिंदर कौर, सरवजीत कौर मनुके, गुरमीत सिंह मीत हेयर, बुद्ध राम, कुंवर विजय प्रताप सिंह, जीवनज्योत कौर और डॉ चरणजीत सिंह समेत आप के कई विधायकों के नाम चर्चा में हैं। भगवंत मान ने आप के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को अपने शपथ ग्रहण समारोह के लिए आमंत्रित किया है। भगवंत मान नवांशहर जिले में महान स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह के पैतृक गांव खटकड़ कलां में पंजाब के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। आप की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक 13 मार्च को मान और केजरीवाल दोनों स्वर्ण मंदिर, दुर्गियाणा मंदिर और श्री राम तीरथ मंदिर में दर्शन करेंगे। वे आप की जीत का जश्न मनाने और मतदाताओं को धन्यवाद देने के लिए अमृतसर में एक रोड शो में भी हिस्सा लेंगे। आम आदमी पार्टी ने 117 सदस्यीय विधानसभा में 92 सीटें जीती हैं। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| जन आस्था के प्रतीक है खाटू के श्री श्याम Posted: 12 Mar 2022 07:25 AM PST जन आस्था के प्रतीक है खाटू के श्री श्याम(रमेश सर्राफ धमोरा-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा) हमारे देश में बहुत से ऐसे धार्मिक स्थल हैं जो अपने चमत्कारों व वरदानों के लिए प्रसिद्ध हैं। उन्हीं मंदिरों में से एक है राजस्थान में शेखावाटी क्षेत्र के सीकर जिले का विश्व विख्यात प्रसिद्ध खाटू श्याम मंदिर। यहां फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी को श्याम बाबा का विशाल वार्षिक मेला लगता है। इसमें देश-विदेशों से करीबन 25 से 30 लाख श्रृद्धालु शामिल होते हैं। खाटू श्याम का मेला राजस्थान के बड़े मेलों में से एक है। इस मंदिर में भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक की श्याम यानी कृष्ण के रूप में पूजा की जाती है। इस मंदिर के लिए कहा जाता है कि जो भी इस मंदिर में जाता है, उन्हें श्याम बाबा का नित नया रूप देखने को मिलता है। कई लोगों को तो इस विग्रह में कई बदलाव भी नजर आते है। कभी मोटा तो कभी दुबला। कभी हंसता हुआ तो कभी ऐसा तेज भरा कि नजरें भी नहीं टिक पातीं। श्याम बाबा का धड़ से अलग शीष और धनुष पर तीन वाण की छवि वाली मूर्ति यहां स्थापित की गईं। कहते हैं कि मन्दिर की स्थापना महाभारत युद्ध की समाप्ति के बाद स्वयं भगवान कृष्ण ने अपने हाथों की थी। श्याम बाबा की कहानी महाभारत काल से आरम्भ होती है। वे पहले बर्बरीक के नाम से जाने जाते थे तथा भीम के पुत्र घटोत्कच और नाग कन्या अहिलवती के पुत्र थे। बाल्यकाल से ही वे बहुत वीर और महान योद्धा थे। उन्होने युद्ध कला अपनी मां से सीखी। भगवान शिव की घोर तपस्या करके उन्हें प्रसन्न किया और उनसे तीन अभेद्य बाण प्राप्त कर तीन बाणधारी के नाम से प्रसिद्ध हुये। अग्नि देव ने प्रसन्न होकर उन्हें धनुष प्रदान किया जो उन्हें तीनों लोकों में विजयी बनाने में समर्थ थे। कौरवों और पाण्डवों के मध्य महाभारत युद्ध का समाचार बर्बरीक को प्राप्त हुआ तो उनकी भी युद्ध में सम्मिलित होने की इच्छा जागृत हुयी। जब वे अपनी मां से आशीर्वाद प्राप्त करने पहुंचे तब मां को हारे हुये पक्ष का साथ देने का वचन दिया। महाभारत के युद्ध में भाग लेने के लिए वे अपने नीले रंग के घोडे पर सवार होकर धनुष व तीन बाणों के साथ कुरूक्षेत्र की रणभूमि की ओर अग्रसर हुये। भगवान कृष्ण ने ब्राह्मण वेश धारण कर बर्बरीक से परिचित होने के लिए उसे रोका और यह जानकर उनकी हंसी भी उड़ायी कि वह मात्र तीन बाण से युद्ध में सम्मिलित होने आया है। ऐसा सुनने पर बर्बरीक ने उत्तर दिया कि मात्र एक बाण शत्रु सेना को ध्वस्त करने के लिये पर्याप्त है और ऐसा करने के बाद बाण वापिस तरकस में ही आयेगा। यदि उन्होने तीनों बाणों को प्रयोग में ले लिया गया तीनों लोकों में हाहाकार मच जायेगा। इस पर कृष्ण ने उन्हें चुनौती दी की इस पीपल के पेड के सभी पत्रों को छेद कर दिखलाओ। बर्बरीक ने चुनौती स्वीकार की और अपने तुणीर से एक बाण निकाला और ईश्वर को स्मरण कर बाण पेड़ के पत्तो की ओर चलाया। तीर ने क्षण भर में पेड के सभी पत्तों को भेद दिया और कृष्ण के पैर के इर्द-गिर्द चक्कर लगाने लगा। क्योंकि एक पत्ता उन्होनें अपने पैर के नीचे छुपा लिया था। तब बर्बरीक ने कृष्ण से कहा कि आप अपने पैर को हटा लीजिये वर्ना ये आपके पैर को चोट पहुंचा देगा। कृष्ण ने बालक बर्बरीक से पूछा कि वह युद्ध में किस ओर से सम्मिलित होगा तो बर्बरीक ने अपनी मां को दिये वचन दोहराते हुये कहा कि वह युद्ध में निर्बल और हार की ओर अग्रसर पक्ष की तरफ से भाग लेगा। कृष्ण जानते थे कि युद्ध में हार तो कौरवों की ही निश्चित है। अगर बर्बरीक ने उनका साथ दिया तो परिणाम उनके पक्ष में ही होगा। ब्राह्मण बने कृष्ण ने बालक बर्बरीक से दान की अभिलाषा व्यक्त की। इस पर वीर बर्बरीक ने उन्हें वचन दिया कि अगर वो उनकी अभिलाषा पूर्ण करने में समर्थ होगा तो अवश्य करेगा। कृष्ण ने उनसे शीश का दान मांगा। बालक बर्बरीक क्षण भर के लिए चकरा गया परन्तु उसने अपने वचन की दृढ़ता जतायी। बालक बर्बरीक ने ब्राह्मण से अपने वास्तविक रूप में आने की प्रार्थना की और कृष्ण के बारे में सुन कर बालक ने उनके विराट रूप के दर्शन की अभिलाषा व्यक्त की। कृष्ण ने उन्हें अपना विराट रूप दिखाया। उन्होने बर्बरीक को समझाया कि युद्ध आरम्भ होने से पहले युद्धभूमि की पूजा के लिए एक वीर क्षत्रिय के शीश के दान की आवश्यक्ता होती है। उन्होनें बर्बरीक को युद्ध में सबसे बड़े वीर की उपाधि से अलंकृत कर उनका शीश दान में मांगा। बर्बरीक ने उनसे प्रार्थना की कि वह अंत तक युद्ध देखना चाहता है। श्री कृष्ण ने उनकी यह बात स्वीकार कर ली। फाल्गुन माह की द्वादशी को उन्होनें अपने शीश का दान दिया। उनका सिर युद्धभूमि के समीप ही एक पहाड़ी पर सुशोभित किया गया जहां से बर्बरीक सम्पूर्ण युद्ध का जायजा ले सकते थे। युद्ध की समाप्ति पर पांडवों में ही आपसी खिंचाव हुआ कि युद्ध में विजय का श्रेय किसको जाता है। इस पर कृष्ण ने उन्हें सुझाव दिया कि बर्बरीक का शीश सम्पूर्ण युद्ध का साक्षी है। उससे बेहतर निर्णायक भला कौन हो सकता है। सभी इस बात से सहमत हो गये। बर्बरीक के शीश ने उत्तर दिया कि कृष्ण ही युद्ध मे विजय प्राप्त कराने में सबसे महान पात्र हैं। उनकी शिक्षा, उनकी उपस्थिति, उनकी युद्धनीति ही निर्णायक थी। उन्हें युद्धभूमि में सिर्फ उनका सुदर्शन चक्र घूमता हुआ दिखायी दे रहा था जो कि शत्रु सेना को काट रहा था। महाकाली दुर्गा कृष्ण के आदेश पर शत्रु सेना के रक्त से भरे प्यालों का सेवन कर रही थी। कृष्ण वीर बर्बरीक के महान बलिदान से काफी प्रसन्न हुये और वरदान दिया कि कलियुग में तुम श्याम नाम से जाने जाओगे, क्योंकि कलियुग में हारे हुये का साथ देने वाला ही श्याम नाम धारण करने में समर्थ होगा। ऐसा माना जाता है कि एक बार एक गाय उस स्थान पर आकर अपने स्तनों से दुग्ध की धारा स्वतः ही बहा रही थी। बाद में खुदायी के बाद वह शीश प्रकट हुआ। एक बार खाटू के राजा को स्वप्न में मन्दिर निर्माण के लिये और वह शीश मन्दिर में सुशोभित करने के लिये प्रेरित किया गया। तदन्तर उस स्थान पर मन्दिर का निर्माण किया गया और कार्तिक माह की एकादशी को शीश मन्दिर में सुशोभित किया गया, जिसे बाबा श्याम के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। मूल मंदिर 1027 ई. में रूपसिंह चैहान और उनकी पत्नी नर्मदा कंवर द्वारा बनाया गया था। मारवाड़ के शासक ठाकुर के दीवान अभय सिंह ने ठाकुर के निर्देश पर 1720 ई0 में मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। मंदिर इस समय अपने वर्तमान आकार ले लिया और मूर्ति गर्भगृह में प्रतिष्ठापित किया गया था। मूर्ति दुर्लभ पत्थर से बनी है। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| फल-फूल रही वादों की सियासी फसल Posted: 12 Mar 2022 07:19 AM PST फल-फूल रही वादों की सियासी फसल(डॉ. दिलीप अग्निहोत्री-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा) चुनाव में वादों का राजनीतिक महत्व रहता है। इसमें भी फ्री सौगात के वादों का गहरा असर होता है। आम आदमी पार्टी के उत्थान में फ्री बिजली पानी का सर्वाधिक योगदान था। दिल्ली के बाद पंजाब में भी यह वादा खूब चला। उत्तर प्रदेश में सपा ने भी आप की तर्ज पर वादों का पिटारा खोल दिया था। इस मामले में अन्य सभी पार्टियां उससे पीछे थीं। उत्तर प्रदेश में फ्री बिजली वादे की शुरुआत आप ने ही की थी। आप सांसद संजय सिंह ने दो सौ यूनिट फ्री बिजली का दांव चुनाव की शुरुआत में चला था। उनका अंदाज अरविंद केजरीवाल जैसा था। उसी अंदाज में वह भाजपा और संघ पर आरोप लगाने लगे। उनका अभियान आगे बढ़ता, उसके पहले सपा तीन सौ यूनिट फ्री बिजली का वादा लेकर आ गयी। इसी के साथ अन्य बेहिसाब वादों की सूची थी। इसमें पुरानी पेंशन बहाली,पांच वर्ष तक करोड़ों लोगों को मुफ्त राशन और न जाने क्या-क्या। इन वादों को गेंम चेंजर तक कहा गया। दो सौ यूनिट फ्री बिजली से तो दिल्ली में सरकार बनवा दी थी। संजय सिंह वहीं तक सीमित रहे। सपा ने इसे तीन सौ यूनिट तक पहुंचा दिया। पेंशन बहाली का मुद्दा भी महत्वपूर्ण था। इन वादों ने सपा को मुकाबले के बेहतरीन स्तर पर पहुंचा दिया था। अन्य विपक्षी पार्टियां मुकाबले से बाहर थीं। ऐसे में पूरा लाभ सपा को ही मिलना था। उसे इसका लाभ भी मिला। पिछली बार के मुकाबले उसकी सीटें बढ़ी। लेकिन सत्ता में पहुंचने की उम्मीद पूरी नहीं हुई। दिल्ली और पंजाब में आप का मुकाबला कांग्रेस से था। लेकिन उत्तर प्रदेश में सपा को भाजपा से मोर्चा लेना था, जिसमें योगी सरकार के पांच वर्षों की अभूतपूर्व उपलब्धियां सामने थीं। दूसरी तरफ सपा की पिछली सरकार का रिकार्ड था जिसमें कानून व्यवस्था की दशा को लोग भूले नहीं थे। यही कारण था कि सपा ने वादों के आधार पर जो मंसूबा बनाया था,वह पूरा नहीं हुआ। योगी सरकार ने विरासत में मिली बदहाल बिजली व्यवस्था को सुधारा था। पिछली सरकारों के समय बिजली की किल्लत को लोग भूले नहीं है। दिल्ली में आम आदमी पार्टी का फ्री बिजली पानी के वादे ने जादुई असर दिखाया था। अरविंद केजरीवाल की चुनावी सफलता में यह सबसे बड़ा कारक बना था। इसके बाद अनेक पार्टियों ने इस आसान तरीके को अपनाया। इसके पहले ऐसे वादों ने कई राज्यों में असर दिखाया था। ऐसे वादे करने वाले दलों को सफलता तो मिली,लेकिन इनके अमल से वहां की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा था। क्योंकि इन वादों पर खर्च होने वाली धनराशि की भरपाई अन्यत्र से ही करनी होती है। गरीबों वंचितों व जरूरतमंदों की सहायता करना सरकार की जिम्मेदारी होती है। ऐसी व्यवस्था परिस्थिति काल के अनुरूप की जाती है। किंतु मात्र चुनावी लाभ के लिये ऐसा करना उचित नहीं हो सकता। पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने किसानों को बहत्तर हजार रुपये वार्षिक देने का वादा किया था। यह मोदी सरकार द्वारा दी जा रही किसान सम्मान निधि के जवाब में किया गया था जिसमें किसानों को बीज उपकरण खाद आदि के लिए छह हजार रुपये वार्षिक दिए जाते है। कांग्रेस ने इतनी धनराशि प्रतिमाह देने का वादा किया था। इसके बाद भी किसान कांग्रेस से प्रभावित नहीं हुए। उत्तर प्रदेश में इस समय कानून व्यवस्था का मुद्दा सर्वाधिक प्रभावी है। इस आधार पर पिछली व वर्तमान सरकार की तुलना भी चल रही है। फ्री बिजली आदि का मुद्दा इसके बाद आता है। इसके अलावा पिछली व वर्तमान सरकार के समय बिजली की उपलब्धता भी एक मुद्दा है। पहले बिजली की बेहिसाब कटौती से जन जीवन प्रभावित रहता था। मुख्यमंत्री व बिजली मंत्री के क्षेत्र अति विशिष्ट माने जाते थे। योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री बनने के बाद इस परम्परा को समाप्त किया। जिला तहसील व गांव तक बिजली आपूर्ति की व्यवस्था बिना भेद भाव के की गई। अघोषित बिजली की अघोषित कटौती से निजात मिली। योगी सरकार के सुशासन से यहां ईज आफ लिविंग बेहतर हुई है। एक करोड़ अड़तीस लाख घरों में निःशुल्क विद्युत कनेक्शन दिए गए हैं। आज प्रदेश के जिला मुख्यालयों पर चैबीस घण्टे,तहसील मुख्यालय करीब बाइस घण्टे, ग्रामीण क्षेत्र में सोलह से सत्रह घण्टे बिजली आपूर्ति दी जा रही है। आने वाले समय में पूरे प्रदेश में चैबीस घण्टे विद्युत आपूर्ति देने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। पिछली सरकार में उत्तर प्रदेश का विद्युत विभाग तिहत्तर हजार करोड़ रुपये घाटे में था। उस समय बिजली की उचित आपूर्ति व्यवस्था भी नहीं थी। बिजली विभाग का घाटा अवश्य बढा है,किंतु वर्तमान सरकार ने पर्याप्त आपूर्ति की व्यवस्था की है। प्रदेश के सभी गांव घर तक बिजली कनेक्शन पहुंचाया जा चुका है। पिछली सरकार के दौरान बिजली दरों में साठ प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी हुई थी। विगत पांच वर्षों में पच्चीस प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा कानून व्यवस्था का मुद्दा भी सपा के लिए भारी पड़ा। उसके वादे आकर्षक थे लेकिन उसका अतीत आमजन को आशंकित कर रहा था जबकि मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ ने कानून व्यवस्था को ठीक करने पर जोर दिया था। उनका कहना था बेहतर कानून ब्यवस्था का सर्वाधिक महत्व रहता है। क्योंकि इसके बाद ही विकास का माहौल बनता है। पिछली सरकारों ने इस तथ्य पर ध्यान नहीं दिया है। इसलिए उत्तर प्रदेश विकास में पीछे रह गया था। योगी का यह फार्मूला सार्थक रहा। प्रदेश में विकास के अनेक रिकार्ड कायम हुए। पचास कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में यूपी नंबर वन हो गया। मेडिकल कॉलेज और एयर पोर्ट, एक्सप्रेस-वे निर्माण में उत्तर प्रदेश ने सत्तर वर्षों के आंकड़ों को पीछे छोड़ दिया। चुनाव ज्यों ज्यों आगे बढ़ा कानून व्यवस्था का मुद्दा प्रभावी होता गया। सपा और उसके सहयोगी दलों के नेताओं के बयान आशंका बढ़ाने वाले थे। इसके सामने फ्री बिजली पुरानी पेंशन बहाली का मुद्दा कमजोर पड़ गया। भाजपा की सीटें कम हुई,लेकिन सरकार बनाने का जनादेश उसी को मिला। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 12 Mar 2022 07:17 AM PST सपा ने निकाला कांटे से कांटा(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा) उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के मतदान के दौरान लगाये जा रहे कयास सच साबित नहीं हो पाये। समाजवादी पार्टी के बारे में विशेष रूप से कहा जा रहा था कि अखिलेश यादाव ने इस तरह के समीकरण बनाये हैं जिससे भाजपा की दुबारा सत्ता में वापसी असंभव नहीं तो कठिन जरूर हो जाएगी। अखिलेश यादव ने अपनी बिरादरी का वोट एकजुट रखने के लिए चाचा शिवपाल से समझौता किया। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट वोटों को साधने के लिए राष्ट्रीय लोकदल के नेता जयंत चैधरी से हाथ मिलाया और पूर्वांचल में ओमप्रकाश राजभर से समझौता किया। इतना ही नहीं कांटे से कांटा निकालने का प्रयास भी किया। इसी रणनीति के तहत भाजपा की सहयोगी अपना दल के दूसरे गुट की पल्लवी पटेल को उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के विरुद्ध चुनाव में खड़ा कर दिया। पल्लवी पटेल ने भाजपा के दिग्गज नेता माने जा रहे केशव प्रसाद मौर्य को पराजित भी कर दिया। अखिलेश यादव की पार्टी मुस्लिम बहुल बेल्ट से 65 में से 40 सीटें जीतकर लायी है। उसका मत प्रतिशत भी अच्छा रहा है लेकिन सरकार बनाने भर को विधायक नहीं मिल सके। इसके बावजूद अखिलेश यादव प्रदेश में सशक्त विपक्ष बनकर उभरे हैं और उनके महत्व को सत्तारूढ़ दल आसानी से नजरंदाज नहीं कर पाएंगे। यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान कौशांबी की हॉट सीट मानी जाने वाली सिराथू विधानसभा में दिलचस्प मुकाबला देखने को मिला। इस सीट पर भाजपा को बड़ा झटका लगा है। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को हार का सामना करना पड़ा है। सपा की पल्लवी पटेल ने इस सीट पर 7337 वोट से जीत दर्ज की है। पल्लवी को 105559 वोट मिले है जबकि बीजेपी के केशव मौर्य (98727) को हार मिली है। सिराथू सीट पर यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और सपा की पल्लवी पटेल सहित कुल 18 प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे। सपा ने यहां कांटे से कांटा निकाला। पल्लवी पटेल अपना दल (कमेरावादी) की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं। कौशांबी की मंझनपुर विधानसभा के कोरीपुर में उनकी ससुराल है। पल्लवी इन दिनों अपने परिवार के साथ कानपुर में रहती हैं। समाजवादी पार्टी से अपना दल (कमेरावादी) का गठबंधन हुआ तो पल्लवी पटेल को सिराथू सीट से केशव प्रसाद मौर्य के सामने मैदान में उतारा गया। पल्लवी पटेल अपना दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वर्गीय सोनेलाल पटेल की बड़ी बेटी हैं। पिता के मरने के बाद उनकी बहन अनुप्रिया पटेल के बीच पारिवारिक विवाद हुआ तो पार्टी दो हिस्सों में बंट गई। पल्लवी पटेल ने अपनी मां के साथ मिलकर अपना दल (कमेरावादी) का गठन किया जबकि अनुप्रिया पटेल ने अपने पति के साथ मिलकर अपना दल (एस) के नाम से पार्टी बना ली। अनुप्रिया पटेल ने भाजपा से गठबंधन कर 2017 में ही पार्टी को सीट जिताने में कामयाबी हासिल की थी। इस बार के चुनाव में भी अनुप्रिया भाजपा के साथ तो पल्लवी पटेल ने सपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ा। सात चरणों में संपन्न हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 का परिणाम आ चुका है। बीजेपी ने 37 साल का रिकॉर्ड तोड़ते हुए दो तिहाई बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की है। अखिलेश यादव की अगुवाई वाली समाजवादी पार्टी ने चुनाव तो मजबूती से लड़ा, लेकिन सत्ता पर काबिज होने के लिए जरुरी जादुई आंकड़े से काफी दूर रह गई। जाहिर सी बात है हार के बाद समाजवादी पार्टी में चिंतन और मंथन भी होगा। जानकारों की माने तो समाजवादी पार्टी की हार के पीछे पांच अहम वजह रही, जिसमें प्रमुख हैं दल-बदलुओं को तरजीह, टिकट वितरण में देरी, उम्मीदवारों व संगठन के बीच समन्वय का अभाव और घोषणा पत्र में किए गए लोकलुभावन वादों को जनता तक पहुंचाने में असफलता। वहीं, अगर बीजेपी की बात करें तो मजबूत संगठन, विपक्षी दलों पर भारी पड़ा। इसके अलावा गरीबों को आवास, निःशुल्क राशन और महिला सुरक्षा माहौल पर जनता का भरोसा बीजेपी के साथ रहा। हालांकि समाजवादी पार्टी की हार में कई उपलब्धियां भी शामिल है। हार के बावजूद सपा को अब तक के सबसे ज्यादा वोट मिले। 2017 में सपा को करीब 21.82 फीसदी वोट मिले थे जबकि 2022 में सपा को करीब 32 फीसदी वोट मिले, आगे पूरा भ्रम टूट जाएगा। टिकट वितरण में लचर नीति पड़ी भारी जबकि समाजवादी पार्टी की हार के पीछे एक बड़ी वजह जो निकलकर सामने आ रही है उसमें काफी हद तक लचर रणनीति जिम्मेदार है। टिकटों की अदला-बदली ने प्रत्याशियों को ही नहीं समर्थकों को भी पशोपेश में रखा। आलम यह रहा कि नामांकन के अंतिम दिन तक असमंजस की स्थिति बनी रही। अखिलेश यादव ने इस बार अपने घोषणा पत्र में इस बार कई लोक लुभावन वादे किए थे, जिन्हें लोग गेमचेंजर मान रहे थे। लेकिन समाजवादी पार्टी अपनी घोषणाओं और वादों को जनता के बीच तक पहुंचाने में असफल रही। सपा ने अपने घोषणा पत्र में 300 यूनिट बिजली फ्री, पुरानी पेंशन बहाली, संविदा व्यवस्था समाप्त करने एक लाख से ज्यादा रिक्त पदों पर भर्ती का वादा किया था। इसका असर यह हुआ कि सपा का वोट प्रतिशत तो बढ़ा, लेकिन चुनाव परिणाम पर इसका असर नहीं हुआ। अखिलेश यादव ने चुनाव से ठीक पहले बीजेपी, बसपा और कांग्रेस के दल-बदलुओं पर भरोसा जताते हुए मुस्लिम और यादव वोटबैंक के अलावा अन्य जातियों को भी साधने की कोशिश की लेकिन चूक यह हुई कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की उपेक्षा का खामियाजा भी भुगतना पड़ा। इतना ही नहीं दूसरे दलों से आए जाति विशेष के नेता भी अपनी-अपनी जातियों के वोट ट्रांसफर नहीं करवा पाए। यही वजह रही है कि स्वामी प्रसाद मौर्य जैसे दिग्गज खुद अपनी सीट हार गए। इसी का नतीजा है कि उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी प्रचंड जीत के साथ दोबारा सरकार बनाने जा रही है। राज्य की 403 सदस्यीय विधानसभा चुनाव में बीजेपी और उसके गठबंधन सहयोगियों ने इस बार 273 सीटें अपने नाम की हैं। इसमें दिलचस्प बात यह है कि भगवा दल ने मुस्लिम बेल्ट के तौर पर शुमार पश्चिमी यूपी की 25 सीटों पर जीत हासिल की है। पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने यहां 65 में से 40 सीटें जीती थीं। ऐसे में बीजेपी की सीटें यहां घटी जरूर हैं, लेकिन फिर यहां 25 सीटों पर जीत को बेहतरीन ही माना जा रहा है। मुस्लिम बहुल इन 65 सीटों में से सपा-आरएलडी गठबंधन ने 40 पर जीत दर्ज की, जबकि बीजेपी के खाते में 25 सीटें आईं। इन नतीजों पर करीबी नजर डालने पर एक बात पता चलती है कि मुस्लिमों का एकमुश्त वोट सपा गठबंधन को मिला है, वहीं बीजेपी ने बसपा के दलित वोटबैंक में सेंध लगा दी। माना जा रहा है कि बसपा के ही वोट से बीजेपी ने मुस्लिम बेल्ट बचाई जबकि सपा को पूरा समर्थन मिला। टिकट वितरण में देरी और सीटों की अदला-बदली में भी सपा उलझती चली गई। कुछ उम्मीदवारों ने तो शीर्ष नेतृत्व के करीबी नेताओं पर पैसे लेकर टिकट बांटने का आरोप भी लगाया। इतना ही नहीं उन लोगों को टिकट थमा दिया गया जो कुछ दिन पहले ही पार्टी में शामिल हुए थे। इसका असर यह हुआ कि कुछ नेताओं ने बीजेपी, कांग्रेस और बसपा के माध्यम से सेंधमारी कर दी। अखिलेश के लिए ये सबक महत्वपूर्ण होंगे। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें 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| यूक्रेन में फंसे शेर व बाघों को रेस्क्यू कर स्पेन पहुंचाया Posted: 12 Mar 2022 07:12 AM PST यूक्रेन में फंसे शेर व बाघों को रेस्क्यू कर स्पेन पहुंचायामैड्रिड। पूर्वी यूरोप का देश यूक्रेन बीते 16 दिन से रूस के हमले झेल रहा है। इस जंग में अब तक 2 लाख से ज्यादा लोग बेघर हो गए हैं। 20 लाख लोग पलायन कर चुके हैं। युद्धग्रस्त यूक्रेन में 6 शेर और 6 बाघ भी फंस गए थे। इन्हें हाल ही में रेस्क्यू करके स्पेन और बेल्जियम के एनिमल शेल्टर पहुंचाया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 6 शेरों समेत 6 बाघों, 2 जंगली बिल्लियों और एक जंगली कुत्ते को भी पिछले हफ्ते कीव ओडिसी स्कर्टिंग बैटल फ्रंटलाइन से पड़ोसी देश पोलैंड के चिड़ियाघर में छोड़ा गया था। रेस्क्यू टीम ने कहा- '4 शेरों और जंगली कुत्ते को पूर्वी स्पेन के एलिकांटे लाया गया, जो डच पशु कल्याण चैरिटी की ओर से चलाया जाता है। वहीं, शेर 'गंभीर' परिस्थितियों में बचाए जाने के बाद कीव के पास एक शेल्टर में रह रहे थे। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| श्रीलंका में राशन के लिए लग रहीं लम्बी लाइनें Posted: 12 Mar 2022 07:09 AM PST श्रीलंका में राशन के लिए लग रहीं लम्बी लाइनेंकोलंबो। श्रीलंका का खाद्य संकट इतना गहरा गया है कि वहां लोगों के लिए सोना खरीदने से ज्यादा मुश्किल दूध खरीदना हो गया है। देश का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग खाली हो चुका है। चीन सहित कई देशों के कर्ज तले दबा श्रीलंका दिवालिया होने के कगार पर है। जनवरी में श्रीलंका का विदशी मुद्रा भंडार 70 फीसद घटकर 2.36 अरब डॉलर रह गया। विदेशी मुद्रा की कमी के कारण श्रीलंका भोजन, दवा और ईंधन सहित सभी जरूरी सामानों को विदेशों से आयात नहीं कर पा रहा है। बेकरी ओनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष जयवर्धने ने कहा कि कुछ शहरी क्षेत्रों में रसोई गैस की कमी के कारण ब्रेड की कीमतें दोगुनी होकर लगभग 150 श्रीलंकाई रुपये हो गई हैं। श्रीलंका में रसोई गैस की भारी किल्लत हो गई है जिस कारण एक हजार बेकरियों को बंद करना पड़ा है। हफ्ते की शुरुआत में एक इंडस्ट्री एसोसिएशन ने जानकारी दी कि देश में विदेशी मुद्रा भंडार की कमी के कारण गैस नहीं मिल पा रहा है इस कारण बेकरियों को बंद करना पड़ा है। देश में ईंधन की कमी के कारण कई बिजली संयंत्रों को भी बंद करना पड़ा है। लोगों को जरूरत के घंटों में बिजली की कटौती का सामना करना पड़ रहा है। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| भारत-चीन में उच्चस्तरीय सैन्य वार्ता Posted: 12 Mar 2022 07:08 AM PST भारत-चीन में उच्चस्तरीय सैन्य वार्ताश्रीनगर। दो सालों में 14 दौर की बातचीत के बाद, चीनी विदेश मंत्रालय ने हाल ही में कहा कि दोनों पक्ष सीमा मुद्दों पर एक कदम आगे बढ़ा सकते हैं और समाधान तक पहुंच सकते हैं। भारत और चीन शुक्रवार को 22 महीने लंबे गतिरोध को हल करने के लिए15वें दौर की उच्च स्तरीय सैन्य वार्ता कर रहे थे। भारतीय पक्ष ने लगभग 13 घंटे तक चली कोर कमांडर स्तर की बातचीत के दौरान लद्दाख में शेष घर्षण बिंदुओं के समाधान के लिए चीन पर दबाव बनाया। सेना के सूत्रों ने ये जानकारी दी। सूत्रों के अनुसार दोनों पक्षों को स्वीकार्य विवादों के उचित समाधान की तलाश करनी चाहिए। पैंगोंग त्सो, गलवान और गोगरा के उत्तरी और दक्षिणी तटों पर डिसएंगेजमेंट किए जाने के बाद भारत महत्वपूर्ण पैट्रोलिंग पॉइंट-15 और हॉट स्प्रिंग्स में पीपी-17 और 17ए जैसे क्षेत्रों पर सैनिकों की वापसी पर जोर दे रहा है। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| नेपाल सरकार ने लगाया था चीन पर अतिक्रमण का आरोप Posted: 12 Mar 2022 07:05 AM PST नेपाल सरकार ने लगाया था चीन पर अतिक्रमण का आरोपकाठमांडू। चीन पर नेपाली सरकार की एक रिपोर्ट में गंभीर आरोप लगाए गए हैं। दरअसल सितंबर 2021 में लीक हुई नेपाल सरकार की एक रिपोर्ट में चीन पर नेपाल के क्षेत्र में अतिक्रमण करने का आरोप लगाया है। इस रिपोर्ट को इस दावे के बाद कमीशन किया गया था कि चीन, नेपाल के सुदूर पश्चिम में हुमला जिले में अतिक्रमण कर रहा है। साथ ही रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीनी बलों ने नेपाल की सीमा पुलिस को धमकी भी दी थीएएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक चीनी सुरक्षा बलों की निगरानी गतिविधियों ने नेपाल की सीमा पर लालुंगजोंग नामक स्थान पर धार्मिक गतिविधियों को प्रतिबंधित कर दिया था। इसमें आगे कहा गया है कि चीन नेपाली किसानों के मवेशी चराई के दायरे को भी सीमित कर रहा है। चीन सीमा स्तंभ के चारों ओर एक बाड़ का निर्माण कर रहा था और सीमा के नेपाली हिस्से में एक नहर और सड़क बनाने का प्रयास कर रहा था। रिपोर्ट में सुरक्षा बढ़ाने के लिए क्षेत्र में नेपाली सुरक्षा बलों की तैनाती का भी सुझाव दिया गया है। हालांकि हैरानी इस बात पर भी जताई जा रही है कि नेपाल इस मुद्दे पर एकदम चुप है, क्योंकि रिपोर्ट सरकार द्वारा प्रकाशित नहीं की गई थी, बल्कि लीक हो गई थी। ये रिपोर्ट अब विदेश मंत्रालय के पास लंबित है। रिपोर्ट लीक होने के बाद नेपाल के संचार मंत्री ज्ञानेंद्र बहादुर कार्की ने कहा कि अपने पड़ोसियों के साथ किसी भी सीमा मुद्दे को कूटनीतिक रूप से निपटाया जाएगा। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 12 Mar 2022 06:14 AM PST
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| Posted: 12 Mar 2022 05:52 AM PST
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| जीकेसी का होली मिलन समारोह 13 मार्च को Posted: 12 Mar 2022 05:47 AM PST जीकेसी का होली मिलन समारोह 13 मार्च कोजितेन्द्र कुमार सिन्हा,पटना, 12 मार्च :: जीकेसी (ग्लोबल कायस्थ कांफ्रेंस) के ग्लोबल अध्यक्ष राजीव रंजन प्रसाद ने बताया कि दिलों को संजोने वाले, रंगों में डुबोने वाले त्यौहार, होली का इंतज़ार हर इंसान को बेसब्री से होता है। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी हमारी संस्था जीकेसी (ग्लोबल कायस्थ कॉन्फ्रेंस) पटना के बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन में 13 मार्च को अपराह्न 2 बजे से "होली मिलन समारोह" का आयोजन किया है। उन्होंने बताया कि इस होली मिलन समारोह कार्यक्रम में अनूठे रंगारंग कार्यक्रम के साथ होली मिलन समारोह को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। होली का त्योहार पुरानी कड़वाहट को भूलकर फिर से मिलने का त्यौहार है। इस दिन सिर्फ रंग ही नहीं मिलते बल्कि दिल भी मिलते हैं तभी पूरे वर्ष हम सब को होली त्यौहार का इंतजार रहता है। उन्होंने कहा कि कोरोना की वजह से हम कई त्योहार नहीं मना पाए थे, इसलिए अबकी बार होली पर काफी हर्षोल्लास के साथ मस्ती में रंगारंग कार्यक्रम होगा। उन्होंने लोगों से निवेदन किया है कि अपने संपूर्ण परिवार के साथ होली मिलन कार्यक्रम में आए और इस रंगारंग कार्यक्रम को अपनी उपस्थिति से और रंग बिरंगा बनाएं। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| होली खेलां श्याम फागणियो आयो(राजस्थानी) Posted: 12 Mar 2022 05:42 AM PST
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| Posted: 12 Mar 2022 05:40 AM PST
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| आकाश देखें, आसमान नहीं ... क्षितिज निहारिकाओं से भी आगे है! Posted: 12 Mar 2022 05:35 AM PST आकाश देखें, आसमान नहीं ... क्षितिज निहारिकाओं से भी आगे है!संकलन अश्विनी कुमार तिवारीमैंने लिखा है आकाश देखें, आसमान नहीं। इन शब्दों का अंतर बहुत महत्त्वपूर्ण है। आकाश हमारी जातीय परम्परा का शब्द है जिसमें प्र'काश' निविष्ट है। आसमान विदेशी स्रोत का शब्द है जिसकी सङ्गति अश्म से बैठती है - पत्थर, जड़, औंधे कटोरे सा ऊपर धरा। दृष्टि का अंतर है। सीमाओं के होते हुये भी यह आत्मविश्वास से भरा भारत है जिसका ढेर सारा श्रेय उस 'पंतप्रधान' को जाता है जो अप्रतिहत ऊर्जा, कर्मठता, समर्पण एवं निश्चय का स्वामी है, जो गहराती रात में भी वैज्ञानिकों के साथ उनका उत्साह बढ़ाता वहाँ उपस्थित था। यह वह भारत है जो दुर्घटनाओं पर वक्षताड़न करता रुकता नहीं है, उपाय कर आगे बढ़ लेता है। आश्चर्य नहीं कि जनसामान्य भी कल रात जगा हुआ था। ऐसे अवसर एक कर देते हैं। पुरी के शंकराचार्य की प्रक्षेपण पूर्व 'आशीर्वाद यात्रा' हो या प्रक्षेपित होते चंद्रयान को उत्सुकता के साथ निहारते धर्मगुरु; पुरी के प्रवक्ताओं की कथित वैदिक गणितीय बातों के होते हुये भी, धर्म व आध्यात्म से जुड़े गुरुओं का इस अभियान से जुड़ाव ध्यातव्य है। सामान्य घरनी से ले कर धर्मपीठ तक चंद्रयान अभियान ने समस्त भारत को जोड़ दिया। तब जब कि विघटनकारी शक्तियों का वैचारिक विषतंत्र अपने उच्च पर है, राष्ट्र को एक सूत्र में जोड़ता ऐसा कोई भी अभियान अभिनंदन योग्य है। लखनऊ से ले कर बंगलोर तक, पूरब से ले कर पश्चिम तक, समस्त भारतभू से आते वैज्ञानिक इस अभियान में लगे। त्वरित उद्गार एवं सामाजिक सञ्चार तंत्र के इस युग में यह वह समय भी है जब गोद में पल रही भारतद्वेषी एवं भारतद्रोही शक्तियाँ नग्न भी होंगी, कोई सूक्ष्मता से कलुष परोसेगा तो कोई स्थूल भौंड़े ढंग से, नंगे वे सब होंगे। ऐसे अवसरों का भरपूर उपयोग तो होना ही चाहिये, इन्हें भविष्य हेतु चिह्नित भी कर लिया जाना चाहिये। एक प्रश्न उठता है कि इसरो को चंद्रयान प्रेषित करने हेतु इतने लम्बे समय एवं जटिल प्रक्रिया की आवश्यकता क्यों पड़ी? बहुत सरल ढंग से कहें तो इस कारण कि हमारे पास अभी भी उतनी शक्तिशाली प्रणोदयुक्ति नहीं है जो सीधे चंद्रमा पर उतार दे। वर्षों पहले क्रायोजेनिक इञ्जन का परीक्षण हुआ था किंतु आगामी वर्षों में जो उपलब्धि मिल जानी चाहिये थी, नहीं मिली। वास्तविकता यह है कि हार्डवेयर के क्षेत्र में हम अभी पीछे हैं। उस पर काम किया जाना चाहिये। आशा है कि इस घटना के पश्चात शक्तिशाली प्रणोद युक्ति के विकास पर ठोस काम किया जायेगा। सीमित हार्डवेयर के होते हुये इस अभियान में जो प्रक्रिया अपनाई गई, उसके द्वारा चंद्र के इतना निकट पहुँचा देना अपने आप में महती उपलब्धि है तथा प्रतिद्वन्द्वी महाशक्तियाँ मन ही मन ईर्ष्या कर रही होंगी। इस प्रक्रिया में गुरुत्वाकर्षण एवं प्रणोद का सम्मिलित उपयोग किया जाता है। यान को पहले धरती की परिक्रमा करते हुये संवेग प्राप्त कराया जाता है। मोटा मोटी प्रक्रिया को कुछ कुछ वनवासी गोफन से समझा जा सकता है, जिसमें वे अपने यंत्र में पत्थर रख कर घुमाते घुमाते उसे संवेग देते हैं तथा उपयुक्त समय पर, पर्याप्त गति प्राप्त कर लेने पर छोड़ देते हैं। निश्चित संवेग की वह मात्रा हो जाने पर जब कि यान पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण से मुक्त हो कर चंद्र की कक्षा तक पहुँचने योग्य हो जाता है, उसे धक्का दे पृथ्वी के आकर्षण से मुक्त कर दिया जाता है तथा वह आगे चंद्र के गुरुत्व के आकर्षण में उसके 'उपग्रह' समान हो जाता है। परिक्रमा करते यान से प्रेक्षकयन्त्र युक्त घटक चन्द्र धरातल पर उतारा जाता है। यह प्रक्रिया भी चरणबद्ध होती है। पूरी प्रक्रिया बहुत ही जटिल, सूक्ष्म एवं परिशुद्ध गणना एवं कार्रवाई की माँग करती है। कोण में या समय में सेकेण्ड की विचलन या विलम्ब भी यान को सदा सदा के लिये अंतरिक्ष में व्यर्थ यायावर बना सकते हैं। असफलता में भी ऐसा बहुत कुछ है जो भासमान है। हम सक्षम हैं, सीमित हार्डवेयर के होते हुये भी हमने पूर्णत: देसी तकनीक से वह कर दिखाया है जो हार्डवेयर सक्षम देश कर पाते हैं, असफलतायें तो लगी ही रहती हैं। अमेरिका का अपोलो १३ न भूलें जब कि उससे पूर्व के सफल अभियान अनुभव होते हुये भी एक चूक ने असफलता के साथ साथ यात्रियों के प्राण भी संकट में डाल दिये थे तथा उन्हें जीवित लौटा लाने की प्रक्रिया में बहुत कुछ सीखने को मिला। न भूलें वह घटना जब कि विण्डोज के नये संस्करण के लोकार्पण को मञ्च पर चढ़े बिल गेट्स को कुछ ही मिनटों में असफलता के कारण उतरना पड़ा था। माइक्रोसॉफ्ट रुका नहीं, आगे बढ़ गया। इस अभियान को धन का नाश बताते हुये रोटी एवं निर्धनता को रोते जन को जानना चाहिये कि ऐसे अभियानों की ऐसी सैकड़ो पार्श्व उपलब्धियाँ होती हैं जो जन सामान्य के कल्याण में काम आती हैं। ये भविष्य में एक निवेश की भाँति भी होते हैं। असफलता नहीं उपलब्धियाँ देखें। अंधकार नहीं, उस प्रकाश पर केंद्रित रहें जो भेद दर्शा रहा है। जड़ नहीं चैतन्यबुद्धि बनें। आसमान नहीं, आकाश देखें! उड़ाने आगे भी होंगी। हमारा क्षितिज निहारिकाओं के पार तक पसरा है और हमारी गुलेलें, हमारे गोफन भी समर्थ हैं! ___________ शब्द : (1) - परश्व - परसो (2),(3),(4) - अभ्र कहते हैं बादल को, निरभ्र अर्थात जब बादल न हों, आकाश में नक्षत्र दिख रहे हों। भ को भासमान, प्रकाशित से समझें, चमकते नक्षत्र पिण्ड आदि। नभ अर्थात भ नहीं, जब बादल हों तथा नक्षत्र आदि न दिख रहे हों। जिस पथ पर सूर्य वर्ष भर चलता दिखाई देता है उसे क्रान्तिवृत, भचक्र नाम दिये गये हैं तथा उसका कोणीय विभाजन २७ भागों में किया गया है जिससे कि धरती से देखने पर ज्ञात होता है कि कौन से भाग 'नक्षत्र' में सौर मण्डल के सदस्य ग्रह, उपग्रहादि हैं। नक्षत्र का एक अर्थ न क्षरति जिसका क्षरण न होता हो, है अर्थात जो बने रहते हों। चंद्रमा धरती की परिक्रमा २७+ भू-दिनों में करता है। आकाशीय कैलेण्डर के सबसे चलबिद्धर पिण्ड चंद्र की दैनिक गति के प्रेक्षण हेतु ही २७ विभाग किये गये थे जिन्हें आलंकारिक रूप में कहा गया कि उसकी २७ पत्नियाँ हैं जिनके साथ वह एक एक रात बिताता है। नक्षत्र पहचानें - युगादि अवसर चैत्र चन्द्र सङ्ग Nakshatra Moon Chaitra Yugadi चंद्रमा हम पृथ्वीवासियों के सबसे निकट का पिण्ड है, आकर्षक भी है, घटता बढ़ता कलायें (Moon Phases) जो दिखाता है! सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक का समय एक दिन कहलाता है जिसे आजकल 24 घण्टों में बाँटा गया है। प्राचीन भारत में इसे 30 मुहूर्तों में बाँटा गया था अर्थात 1 मुहूर्त = 24x60/30 = 48 मिनट। देखा गया कि रात के आकाश में चंद्रमा एक निश्चित स्थान पर पुन: लौटने में 27 से 28 दिन का समय लगाता है। निश्चित स्थान को उन तारों के माध्यम से जाना गया जो अपेक्षतया स्थिर प्रतीत होते हैं। इसका अर्थ यह हुआ कि चन्द्रमा पृथ्वी का एक चक्कर इस अवधि में पूरी करता है (लगभग 27 दिन 9⅔ मुहूर्त)। प्रेक्षण की सुविधा के लिये रात का जो अर्द्धगोलीय आकाश सिर के ऊपर दिखता है, उस पर चंद्रमा के दिन प्रतिदिन के आभासी पथ के 27 भाग कर लिये गये तथा उन्हें नाम दिया गया नक्षत्र। नक्षत्र नाम का उत्स है न: क्षरति अर्थात जिसका क्षरण न हो, जो बना रहे क्योंकि उसके ऐसे स्थिर पृष्ठभूमि के सापेक्ष ही गति का अध्ययन किया जा सकता है। उन स्थिर खण्डों को चमकते तारा या तारकसमूहों के नाम दे दिये गये यथा कृत्तिका खण्ड में सर्वदा कृत्तिका तारा समूह दिखाई देगा। जब चंद्र उस खण्ड में पहुँचेगा तो कहेंगे कि चंद्रमा कृत्तिका नक्षत्र पर है। प्रतीकात्मक रूप में इसे ही कहा गया कि चंद्रमा की 27 पत्नियाँ हैं जिनमें से प्रत्येक के यहाँ वह क्रम से एक एक रात रहता है। चंद्रमा का संक्षिप्त नाम मा है, चंदा मा मा से समझें। मा के सापेक्ष, सहित जो अवधि थी वह मास कहलाई – महीना, 27.3 दिनों की अवधि। चूँकि यह स्थिर नक्षत्रों के सापेक्ष थी अत: नाक्षत्र मास कही जाती है। सापेक्षता देखें तो सूर्य भी सम्मिलित हो जाते हैं। जहाँ चंद्र पृथ्वी की परिक्रमा कर रहा है, वहीं पृथ्वी चंद्र को साथ लिये सूर्य की परिक्रमा कर रही है। सूर्य के प्रकाश से ही चंद्रमा प्रकाशित होता है। इन दो गतियों के कारण ही चंद्रमा की कलायें, घट बढ़ दिखती है। कला नाम को कल अर्थात लघु भाग से समझें। कल कल बहती नदी हो या कलाओं के साथ चंद्रमा, मानों लघु भागों को मिला कर ही उनका प्रवाह, गति या रूप बनता है। यदि आप पूर्णिमा के दिन की साँझ देखें तो बहुत ही मनोहारी दृश्य दिखता है। पश्चिम में सूर्य लाल हुये डूब रहे होते हैं तो उनके विपरीत पूरब में पूर्ण चंद्र उग रहे होते हैं। यदि हम पूर्ण वृत्त को 360 अंश में बाँटें तो कहेंगे कि दृश्य आकाशीय अर्द्धवृत्त के व्यास के दो विपरीत बिंदुओं पर स्थित सूर्य एवं चंद्र 180 अंश की दूरी पर होते हैं। इसका विपरीत तब होगा जब चंद्रमा गति करते करते सूर्य के साथ जा पहुँचेगा अर्थात जब दोनों एक साथ होंगे, एक ही बिंदु पर। आमने सामने होने पर चंद्र सूर्य के प्रकाश से पूरा चमकता है एवं साथ होने पर विराट सूर्य के प्रभा वलय में छिपा रहता है, नहीं दिखता जिसे कहते हैं अ-मा, मा नहीं, चंद्रमा नहीं, अमावस्या। इन दो विपरीत बिंदुओं तक पहुँचने में चंद्रमा को लगभग 15 दिन लगते हैं अर्थात पुन: पूर्णिमा तक पहुँचने में लगभग 30 दिन लगने चाहिये जोकि वस्तुत: 29 दिन 16 मुहूर्त का होता है। पूर्णिमा से अमा एवं पुन: अमा से पूर्णिमा तक की अवधियाँ दो पक्ष कहलाती हैं – कृष्ण पक्ष क्योंकि इसमें चन्द्र पूर्ण से शून्य तक घटता जाता है एवं शुक्ल पक्ष क्योंकि उसमें चन्द्र शून्य से बढ़ता हुआ पुन: पूर्ण अवस्था को प्राप्त कर लेता है। चूँकि इस मास में सूर्य एवं पृथ्वी दोनों के सापेक्ष चंद्र की गति है अत: यह संयुत मास कहलाता है। इसे सामान्यत: चंद्र मास भी कहते हैं। चंद्र मासों के नाम पूर्णिमा के दिन उसकी नक्षत्र स्थिति से रखे गये हैं यथा जिस मास में पूर्णिमा का चंद्र कृत्तिका पर होता वह कार्त्तिक, जिसमें मघा पर होगा वह माघ इत्यादि। प्रश्न यह है कि नाक्षत्र मास एवं संयुत मास की अवधियों में अंतर क्यों है? ऐसा इस कारण है कि धरती भी तो सूर्य की परिक्रमा करती आगे बढ़ रही होती है! इस कारण सूर्य निर्भर समान कला या समान कोणीय स्थिति तक पहुँचने के लिये चंद्रमा को अतिरिक्त चलना पड़ता है, यह अवधि लगभग 2 दिन 7 मुहूर्त होती है जिससे चंद्रकला प्रेक्षण आधारित संयुत मास 29 दिन 16 मुहूर्त का होता है जिसे गणना सुविधा के लिये 30 दिन का मान लिया गया। दिन को भी 30 भागों में बाँट कर 48 मिनट की इकाई 'मुहूर्त' अपनाने के पीछे भी यही कारण है। संयुत मास का प्रत्येक भाग तिथि कहलाया। पूर्णिमा, अमावस्या एवं दोनों पक्षों के चौदह चौदह दिन प्रतिपदा, द्वितीया, तृतीया आदि मिला कर कुल तीस तिथियाँ होती हैं। शून्य से 180 एवं पुन: लौट कर वहीं आने में 360 अंश हो जाते हैं अर्थात एक तिथि वह हुई जिसमें 360/30 = 12 अंश का कोणीय अंतर पूरा कर लिया जाता है। स्पष्ट है कि यह वर्गीकरण सूर्योदय सूर्यास्त से कोई सम्बंध नहीं रखता। परिपथ वैभिन्न्य, सरलीकरण एवं गति वैविध्य को मिला कर प्रभाव यह होता है कि किसी तिथि की अवधि निश्चित न हो एक परास में होती है, ऐसा भी होता है कि तिथि का क्षय हो जाता है या तिथि बढ़ भी जाती है क्योंकि दिन को सूर्योदय से आरम्भ मानने पर ऐसा हो सकता है कि सूर्योदय के पूर्व 12 अंश की यात्रा आरम्भ हो एवं अगले सूर्योदय से पहले ही पूरी हो जाय; यह भी कि सूर्योदय के पश्चात हो एवं अगले सूर्योदय से आगे तक चलती रहे। 360 अंश में ही 27.3 दिन भी होने हैं तथा 29.5 भी। यदि यात्रा को प्रेक्षण से समझना चाहें तो इस चैत्र मास पूर्णिमा के दिन से प्रतिदिन चंद्रोदय का समय देखते जायें। आप पायेंगे कि प्रतिदिन चंद्र प्राची (पूरब) में बिलम्ब से उग रहा है। यह अंतराल आरम्भ में 4/3 मुहूर्त से होता हुआ एकादशी तक 1 मुहूर्त तक क्रमश: बढ़ेगा। अगले दिन सूर्योदय के पश्चात भी चंद्र दिखता रहेगा। चंद्रोदय से अस्त तक का समय घटता रहेगा। कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी/चतुर्दशी तक चंद्र दिखने के पश्चात अमावस्या के दिन दिखेगा ही नहीं! आप ने देखा होगा कि सूर्य उत्तर या दक्षिण की ओर झुके हुये उगता है। इन दो झुकावों के अंतिम बिंदुओं के बीच वर्ष भर सूर्य दोलन करता सा लगता है। वे दो बिंदु अयनांत कहलाते हैं। अयन अर्थात गति, अंत अर्थात उनसे आगे झुकाव नहीं बढ़ना। ऐसे में वर्ष में दो बिंदु ऐसे आते हैं जब झुकाव शून्य हो जाता है तथा सूर्य ठीक पूरब में उगते हैं। ये दो बिंदु विषुव कहलाते हैं। सूर्य की दक्षिणी चरम झुकाव से उत्तर की गति उत्तरायण कहलाती है तो उत्तरी चरम झुकाव से दक्षिण की गति दक्षिणायन। मार्च में जो विषुव 20/21 को पड़ता है वह वसंत विषुव कहलाता है। इसे महाविषुव भी कहते हैं। इस बिंदु के निकट ही वर्ष का आरम्भ बिंदु पड़ता है, युगादि, नववर्ष। वसंत की मधु सम ऋतु होने के कारण ही इसे यह सम्मान प्राप्त हुआ। मार्च में ऋतु अच्छी होने के कारण आकाशीय प्रेक्षण में भी सुभीता रहता है। इस वर्ष तीन ग्रह – गुरु, मंगल एवं शनि को चंद्र के साथ आकाश में प्रात:काल 5 बजे उठ कर देखा जा सकता है। शनि का सूर्य परिक्रमा काल 29.46 वर्ष, गुरु का 11.86 वर्ष एवं मंगल का 1.88 वर्ष होता है। इसका अर्थ यह हुआ कि: शनि एक नक्षत्र पर 29.46x365.25/27 = 399 दिन, गुरु 11.86x365.25/27 = 160 दिन एवं मंगल 1.88x365.25/27 = 25 दिन रहते हैं। इतनी लम्बी अवधि के कारण इस मास प्रेक्षण हेतु इन्हें भी नक्षत्रों की भाँति स्थिर ही माना जा सकता है। प्रात:काल पाँच से सवा पाँच बजे की चंद्रमा की इनके सापेक्ष स्थितियाँ इस चित्र में दर्शायी गयी हैं। पूरब में देखिये तो प्रतिदिन। चंद्रमा की इन स्थितियों को मिला कर जो रेखा बनती है वही क्रान्तिवृत्त है जिस पर दिन में सूर्य चलता हुआ प्रतीत होता है। साथ में आप विविध नक्षत्रों विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, मूल, पूर्वाषाढ़, उत्तराषाढ़, धनिष्ठा, श्रावण, अभिजित एवं विविध तारासमूहों हंस, गरुड़, धनु, ऐरावत (वृश्चिक) को भी देख सकते हैं। नववर्ष, नवरात्र आरम्भ। इस दिन से चन्द्र कहाँ दिखेगा? जैसा कि पहले बताया है, ध्यान रखें कि अब चंद्र को बढ़ना है। ऊपर के चित्र से स्पष्ट है कि एक निश्चित समय पर चंद्र प्रतिदिन क्षितिज के निकट चलता चला जा रहा है। अमावस्या के दिन सूर्य चंद्र दोनों साथ होंगे, साथ साथ उगेंगे तथा अस्त होंगे। स्पष्ट है कि चंद्र सूर्य के साथ होने के कारण कभी नहीं दिखेगा। पूर्णिमा के दिन उलट स्थिति होती है, सूर्य से ठीक उलट 180 अंश का अंतर होने के कारण चंद्र रात भर दिखता है। इन दो सीमाओं की तुलना करें तो पायेंगे कि चंद्र तब ही दिखेगा जब सूर्य अस्त रहे तथा चंद्र क्षितिज के ऊपर। साथ ही कला भी ऐसी होनी चाहिये कि प्रकाशित भाग दृश्यमान हो। प्रतिपदा को ऐसा नहीं हो पाता। दूज का चाँद मुहावरा है सुंदरता के लिये तथा दिखने में कठिनाई के लिये भी। चंद्र प्रेक्षण उसी तिथि से हो सकता है। अब किञ्चित गणित। सरल ही है। चंद्रमा पृथ्वी की परिक्रमा पश्चिम से पूरब दिशा में करता है जिसमें समय लगता है 27.3 दिन जबकि पृथ्वी भी उसी दिशा में अपनी धुरी पर घूम रही है जिसमें समय लगता है मात्र 1 दिन अर्थात पृथ्वी की यह गति चंद्र की परिक्रमण गति की तुलना में बहुत अधिक है। इस कारण चंद्र भी सदा अन्य पिण्डों की भाँति ही पूरब में उगता एवं पश्चिम में अस्त होता है। 360 अंश को 30मुहूर्तx48 या 24घण्टेx60 से भाग दें तो पायेंगे कि धरती एक अंश 4 मिनट में घूम जाती है। चंद्रमा परिक्रमा पथ पर एक दिन में 13.2 अंश (360/27.3) आगे बढ़ चुका होता है। इस बढ़े हुये अंश को पूरा करने के लिये धरती को 13.2x4 मिनट अर्थात लगभग 53 मिनट लगते हैं। इसका अर्थ यह हुआ कि चंद्रोदय प्रतिदिन पिछले दिन से 53 मिनट पश्चात होगा, ऐसा ही अस्त के साथ भी स्वत: हो जायेगा। जब पूरी परिक्रमा कर लेगा तो 27.3x53 ~ 1440 मिनट अर्थात 24 घण्टे का चक्र पूरा कर पुन: अपने वास्तविक उदय समय को पा लेगा, चक्र चलता रहेगा। इसी तथ्य का उपयोग चंद्र दर्शन में कर सकते हैं। अमावस्या के पश्चात प्रतिपदा को चंद्र का उदय सूर्य के उदय से 53 मिनट पश्चात होगा। द्वितीया को 106 मिनट पश्चात। चूँकि सूर्य पहले से ही आकाश में चमक रहा होगा, अन्य आकाशीय पिण्डों की भाँति ही चंद्र भी नहीं दिखेगा। ऐसा प्रतिदिन होगा। तो क्या करें? स्पष्ट है कि हमें अस्त के समय देखना होगा। तब क्या होगा? सूर्य से 106 मिनट पश्चात चंद्र का अस्त होगा अर्थात सूर्य प्रकाश के अभाव में रात में अन्य पिण्डों की भाँति ही चंद्र भी दिखेगा। इसका अर्थ यह हुआ कि लगभग सात सवा सात बजे साँझ को पश्चिमी आकाश में आँखें गड़ाये रहें तो चन्द्र का निरीक्षण कर पायेंगे। शुक्ल पक्ष में पश्चिमी आकाश में चंद्र प्रेक्षण में हमारा सहयोगी होगा परम तेजस्वी शुक्र, साँझ का 'तारा', हालाँकि यह ग्रह है किंतु नाम रूढ़ हो गया है। क्षितिज के पास इस 'तारे' के निकट ही बुध ग्रह होगा तथा इन दोनों से किञ्चित ऊपर आँख गड़ा कर देखने पर आकाश स्वच्छ हो तो दूज का चाँद दिख जायेगा। षष्ठी को चन्द्रदेव अपनी प्रिय पत्नी रोहिणी के साथ होंगे तथा उससे आगे क्रमश: पूरब दक्षिण की ओर बढ़ते जायेंगे। चैत्र के इस पश्चिमी आकाश में आप को एक साथ नक्षत्र मण्डल की अंतिम रेवती के साथ अश्विनी से आरम्भ कर आर्द्रा तक के नक्षत्र दिखेंगे। रुद्र तथा स्रोतस्विनी होंगे ही। पूर्णिमा आते आते चन्द्र पुन: पूरब में होगा, उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र पर। आठ बजे के आसपास उस समय साथ में दिखेंगे – मघा, पूर्वा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति एवं उत्तर में सप्तर्षि भी। पूर्णिमा से आगे वैशाख महीने में प्रेक्षण पुन: वैसे ही पूरब दिशा में करते रह सकते हैं जैसे इस लेख के आरम्भ में किया था। ______ चलते चलते : आप चंद्र देख कर बता सकते हैं कि शुक्ल पक्ष का है या कृष्ण पक्ष का। चंद्र वृत्त की परिधि का अंश सर्वदा सूर्य की ओर रहता है जबकि घटता बढ़ता अंश उससे विपरीत। यदि वह पश्चिम दिशा में है तो हुआ शुक्ल पक्ष, यदि पूरब दिशा में है तो हुआ कृष्ण पक्ष। ✍🏻सनातन कालयात्री श्री गिरिजेश राव जी के लेखों से संग्रहित हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 12 Mar 2022 05:26 AM PST दिव्य शाकद्वीपीय ब्राह्मण समिति, गोरखपुर की नवगठित कार्यकारिणी का सम्मान समारोह सम्पन्न; सहभोज का किया गया आयोजनदिव्य शाकद्वीपीय ब्राह्मण समिति, गोरखपुर के विशिष्ट संरक्षक इं० श्री प्रेम नाथ मिश्र जी द्वारा उनके पूरे परिवार के ओर से समिति की नवगठित कार्यकारिणी के स्वागत में मोगलहा, निकट मेडिकल कॉलेज स्थित उनके निज आवास पर आयोजित एक सहभोज कार्यक्रम में समिति के पदाधिकारियों, संरक्षकगण व अन्य सक्रिय सदस्यगण को सम्मानित किया गया। श्री मिश्र जी के परिवार के सदस्यों में सरोजिनी मिश्रा, प्रदीप मिश्र, नीलम मिश्रा, डा० विनीत मिश्र, डा० पल्लवी मिश्रा, डा० संजीत मिश्र, डा० प्रियंका मिश्रा, चूड़ामणि मिश्र, श्रीकांत मिश्र ने समस्त विशिष्ट अतिथिगण को अंगवस्त्र के साथ धार्मिक पुस्तकों की प्रतियां आदि भेंट कर उनका अभिनंदन किया। सम्मानित किए जाने वाले समिति के पदाधिकारियों में अध्यक्ष शरद चंद्र पांडेय, उपाध्यक्ष आशुतोष मिश्र, महामंत्री अमरनाथ मिश्र, संगठन मंत्री अनन्त मिश्र, संयुक्त मंत्री इं० रजनीश मिश्र, कोषाध्यक्ष आशुतोष मिश्र, सांस्कृतिक एवं प्रचार प्रसार मंत्री डा० आलोक मिश्र के साथ ही कार्यकारिणी के अन्य सक्रिय सदस्यों में अशोक पांडेय, रमेंद्र कांत चंद्र मिश्र, राकेश पाठक, कृष्ण कुमार मिश्र, डॉ० आशुतोष मिश्र, सौरभ मिश्र आदि सम्मिलित हुए। समिति के संरक्षकगण में इं० अरविंद पाठक, डॉ० अशोक पांडेय, अशोक मिश्र, जी०के० पांडेय, दिग्बिजय मित्र, प्रो० प्रमोद मिश्र, रामाधार पांडेय, शारदेन्दु शेखर पांडेय, सत्या चरण पांडेय, अमर नाथ मिश्र, जसवंत मिश्र, संजय पांडेय आदि को भी विशेष रूप से सम्मानित किया गया। अन्य सदस्यगण में डा० अजय पाण्डेय, विजय पाठक, कौशलेंद्र पाठक, मार्कण्डेय पाण्डेय, अभिषेक मिश्र, शैलेश पांडेय 'मंटू', चंद्र भान मिश्र, मयंक मिश्र, लक्ष्मी कांत मिश्र, अशोक मिश्र, डॉ० श्रीधर पाण्डेय, श्रीधर मिश्र, दुर्गेश मिश्र, अनादि मिश्र, ध्रुव चंद्र पांडेय, आदित्य पाण्डेय, शिव शंकर मिश्र आदि की उपस्थिति गरिमामयी रही। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
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