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Wednesday, March 30, 2022

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30 मार्च 2022, बुधवार का दैनिक पंचांग एवं राशिफल - सभी १२ राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन ? क्या है आप की राशी में विशेष ? जाने प्रशिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. प्रेम सागर पाण्डेय से |

Posted: 29 Mar 2022 09:38 AM PDT

30 मार्च 2022, बुधवार का दैनिक पंचांग एवं राशिफल - सभी १२ राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन ? क्या है आप की राशी में विशेष ? जाने प्रशिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. प्रेम सागर पाण्डेय से |

30 मार्च 2022, बुधवार का दैनिक पंचांग


🔅 तिथि त्रयोदशी 12:52 PM

🔅 नक्षत्र शतभिषा 10:30 AM

🔅 करण :

                वणिज 01:21 PM

                विष्टि 01:21 PM

🔅 पक्ष कृष्ण

🔅 योग शुभ 01:00 PM

🔅 वार बुधवार

☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ


🔅 सूर्योदय 05:52 AM

🔅 चन्द्रोदय +05:15 AM

🔅 चन्द्र राशि कुम्भ

🔅 सूर्यास्त 06:08 PM

🔅 चन्द्रास्त 04:19 PM

🔅 ऋतु वसंत

☀ हिन्दू मास एवं वर्ष


🔅 शक सम्वत 1943 प्लव

🔅 कलि सम्वत 5123

🔅 दिन काल 12:21 PM

🔅 विक्रम सम्वत 2078

🔅 मास अमांत फाल्गुन

🔅 मास पूर्णिमांत चैत्र

☀ शुभ और अशुभ समय

☀ शुभ समय

🔅 अभिजित कोई नहीं

☀ अशुभ समय

🔅 दुष्टमुहूर्त 11:29 AM - 12:19 PM

🔅 कंटक 04:26 PM - 05:15 PM

🔅 यमघण्ट 08:12 AM - 09:01 AM

🔅 राहु काल 11:54 AM - 01:27 PM

🔅 कुलिक 11:29 AM - 12:19 PM

🔅 कालवेला या अर्द्धयाम 06:33 AM - 07:22 AM

🔅 यमगण्ड 07:16 AM - 08:49 AM

🔅 गुलिक काल 10:21 AM - 11:54 AM

☀ दिशा शूल

🔅 दिशा शूल उत्तर

☀ चन्द्रबल और ताराबल

☀ ताराबल

🔅 अश्विनी, कृत्तिका, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, स्वाति, विशाखा, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद

☀ चन्द्रबल

🔅 मेष, वृषभ, सिंह, कन्या, धनु, कुम्भ

🌹विशेष ~ भद्रा दिन 12:52 से रात्रि 12:24 तक, मासशिवरात्रि व्रत, वारूणीपर्वयोग। 🌹

पं.प्रेम सागर पाण्डेय् नक्षत्र ज्योतिष वास्तु अनुसंधान केन्द्र नि:शुल्क परामर्श - रविवार

30 मार्च 2022, बुधवार का दैनिक राशिफल

मेष (Aries): आज संभलकर कदम उठाने की सलाह देते हैं। आसपास के स्वजनों के साथ उग्र चर्चा न हो इसका ध्यान रखें। शारीरिक और मानसिक रूप से व्यग्रता का अनुभव करेंगे। अनिद्रा के कारण स्वास्थ्य बिगड़ सकता है। बौद्धिक चर्चा से आनंद तो प्राप्त हो सकता है, लेकिन बौद्धिक चर्चा से दूर रहने की सलाह है। प्रवास भी संभव हो तो टाल दें।

शुभ रंग = केशरी

शुभ अंक : 6

वृषभ (Tauras): भावनाओं के बंधन में बंधने का अनुभव होगा। आपके कार्य संपन्न हो जाने से आनंद में वृद्धि होगी। भाई-बहनों से लाभ होगा। शारीरिक और मानसिक रूप से आप खुशी का अनुभव करेंगे। आर्थिक लाभ होने की भी संभावना है। परंतु मध्याहन के बाद की स्थिति विपरीत हो सकती है। धन का खर्च अधिक होगा और अपयश प्राप्त होने का योग है।

शुभ रंग = हरा

शुभ अंक : 3

मिथुन (Gemini): नकारात्मक मानसिक व्यवहार न रखने की सलाह देते हैं। असंतोष की भावनाओं से मन ग्रस्त रहेगा। पारिवारिक वातावरण में मेलजोल नहीं रहेगा। शारीरिक रूप से भी आप स्वस्थ नहीं रह पाएंगे। पढ़ने-लिखने में विद्यार्थियों का मन नहीं लगेगा। नए कार्य का प्रारंभ न करें। प्रतिस्पर्धियों को परास्त करेंगे। स्वजनों से भेंट करने से मन आनंदित होगा।

शुभ रंग = हरा

शुभ अंक : 3

कर्क (Cancer): आज आप भावनाओं के प्रवाह में आप न बह जाएं इसका ध्यान रखें। छोटे प्रवास या पर्यटन की संभावना है। आपका आरोग्य अच्छा रहेगा और मन भी प्रफुल्लित रहेगा। मध्याहन के बाद आपके मन में हताशा की भावना आ जाने से मन अस्वस्थ रहेगा। अनैतिक प्रवृत्तियों से मन भ्रष्ट न हो जाए इसका ध्यान रखिएगा। धन का खर्च अधिक होगा।

शुभ रंग = क्रीम

शुभ अंक : 2

सिंह (Leo): कोई भी निर्णय लेने की स्थिति में आप नहीं रहेंगे इसलिए आवश्यक निर्णय आज न लें। पारिवारिक कार्यों के पीछे धन का खर्च होगा। वाणी पर संयम रखें। गलतफहमियों को दूर कर दीजिएगा। संबंधियों के साथ मनमुटाव के प्रसंग बनेंगे। मध्याहन के बाद मित्रों और स्नेहीजनों के साथ हुई भेंट से आपका मन प्रसन्न होगा।

शुभ रंग = लाल

शुभ अंक : 1

कन्या (Virgo): आज परिस्थिति अनुकूल रहेगी। शारीरिक और मानसिक रूप से सुख शांति रहेगी। व्यवसायिक क्षेत्र में वातावरण अनुकूल रहेगा। मध्याहन के बाद मन की स्थिति द्विधापूर्ण रहेगी जिससे महत्वपूर्ण निर्णय लेने में बाधा होगी। आज वाणी पर संयम बरतने की सलाह देते हैं। कोर्ट-कचहरी के कार्यों में निर्णय लेते समय सावधानी बरतें। धन हानि के साथ मानहानि से भी बचें।

शुभ रंग = हरा

शुभ अंक : 3

तुला (Libra): पारिवारिक वातावरण आनंदप्रद रहेगा। परिवार के सदस्यों के साथ प्रेमपूर्ण वर्तन रहेगा। घर की साज-सजावट में भी परिवर्तन करेंगे। मानसिक स्वस्थता में भी वृद्धि होगी। व्यवसाय में उच्च अधिकारियों की ओर से आर्थिक लाभ होगा। आर्थिक आयोजन निष्ठापूर्वक संपन्न कर सकेंगे। स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा। मानसिक रूप से शांति का अनुभव होगा। संतान से सुख मिलेगा।

शुभ रंग = उजला

शुभ अंक : 4

वृश्चिक (Scorpio): आपके लिए भाग्यवृद्धि का दिन है। विदेश स्थित स्नेहीजन से अच्छे समाचार प्राप्त होंगे। शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। धार्मिक प्रवास होने की संभावना है। धन लाभ की भी संभावना है। व्यवसाय में पदोन्नति के योग हैं। आपका प्रत्येक कार्य सफल होने के साथ-साथ पूर्ण भी होगा। माता से संबंध अच्छे रहेंगे। मान-सम्मान प्राप्त होगा। गृहस्थ जीवन आनंदपूर्ण रहेगा।

शुभ रंग = लाल

शुभ अंक : 1

धनु (Sagittarius): प्रातःकाल के समय आपका शारीरिक स्वास्थ्य नरम-गरम रह सकता है। निषेधात्मक विचार मन को अस्वस्थ कर सकते हैं इसलिए वैचारिक स्तर पर संयम रखें। आर्थिक रूप से तंगी का अनुभव करेंगे। आकस्मिक धन प्राप्ति का योग है। व्यवसायियों को लाभ होगा। मित्रों और स्नेहीजनों के साथ आनंदपूर्वक समय बीतेगा। प्रवास का योग है।

शुभ रंग = उजला

शुभ अंक : 4

मकर (Capricorn): आज के दिन परिजनों के साथ आनंदपूर्वक प्रवास या पर्यटन का आनंद उठाएंगे। मध्याहन के बाद आपका मन व्यग्रता का अनुभव करेगा। अधिक खर्च होने से धन की तंगी रहेगी। सरकारी कार्यों में विघ्न आएंगे। अनैतिक कार्यों से सम्बंधित वृत्तियों पर अंकुश रखें।

शुभ रंग = केशरी

शुभ अंक : 8

कुंभ (Aquarius): गणेशजी के आशीर्वाद से आपका दिन सुख-शांतिपूर्वक बीतेगा। पारिवारिक जीवन में भी आनंद छाएगा। शारीरिक और मानसिक स्वस्थता प्राप्त होगी। आनंद-प्रमोद के साथ वाहन सुख प्राप्त होगा। व्यवसायिक क्षेत्र में आपको कीर्ति प्राप्त होगी। नए वस्त्र और आभूषणों के पीछे धन का व्यय होगा। छोटे से प्रवास या पर्यटन की संभावना है।

शुभ रंग = हरा

शुभ अंक : 3

मीन (Pisces): आज के दिन आकर्षण से दूर रहें। किसी भी व्यक्ति के साथ बौद्धिक चर्चा या वाद-विवाद न करें। नए कार्य का प्रारंभ न करें। मध्याहन के बाद स्थिति में सुधार दिखेगा। शारीरिक और मानसिक रूप से आप स्वस्थता का अनुभव करेंगे। व्यवसायियों को कार्यालय में सानुकूल वातावरण रहेगा। प्रतिस्पर्धियों पर विजय प्राप्त कर सकेंगे।

शुभ रंग = उजला

शुभ अंक : 4 
प्रेम सागर पाण्डेय् ,नक्षत्र ज्योतिष वास्तु अनुसंधान केन्द्र ,नि:शुल्क परामर्श - रविवार , दूरभाष 9122608219 / 9835654844
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मातोश्री को 2 करोड़ व 50 लाख की घड़ी मिली थी

Posted: 29 Mar 2022 09:31 AM PDT

मातोश्री को 2 करोड़ व 50 लाख की घड़ी मिली थी

मुंबई। आयकर विभाग ने पिछले महीने शिवसेना उपनेता और बीएमसी स्थायी समिति के अध्यक्ष यशवंत जाधव के यहां छापा मारा था। इसके बाद ये खबर सामने आई कि इस दौरान बड़ी मात्रा में कैश भी बरामद हुआ। लेकिन पिछले कुछ दिनों से इस चर्चा ने जोर पकड़ा है कि यशवंत जाधव के घर से मिली डायरी में मातोश्री को दो करोड़ रुपये और 50 लाख रुपये की घड़ी देने का भी जिक्र है। इसी के साथ चर्चा ये भी है कि यशवंत जाधव ने बताया है कि मातोश्री मतलब उनकी माता जी। लेकिन बीजेपी इसे लेकर शिवसेना को घेरने में जुटी है, क्योंकि बांद्रा में ठाकरे परिवार जिस घर में रहता है उसे मातोश्री कहते हैं। तो क्या यशवंत जाधव ने ठाकरे परिवार को 2 करोड़ रूपये और 50 लाख की घड़ी भेंट की? बहरहाल यशवंत जाधव इस पर चुप हैं लेकिन कोंकण दौरे पर गए पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे ने यशवंत जाधव की डायरी में मातोश्री के उल्लेख पर पहली बार प्रतिक्रिया दी है। आदित्य ठाकरे ने पत्रकारों के सवाल पर कहा श्हमें तय करना है कि अफवाहों पर कितना विश्वास किया जाए। आदित्य ठाकरे बोले कि अफवाह फैलाकर मानहानि, सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है, यह एक राजनीतिक साजिश है। ये गंदी राजनीति बंद होनी चाहिए। आदित्य ठाकरे ने भविष्य में बीजेपी के साथ जाने की संभावना के सवाल पर कहा कि आप ही तय करो अगर कोई बेवजह लगातार आपको परेशान करेगा तो आप क्या करोगे? गौरतलब है कि हाल ही में महाविकास आघाड़ी सरकार में उपमुख्यमंत्री और एन सी पी के बड़े नेता अजीत पवार ने बयान दिया है कि राजनीति में कोई स्थाई शत्रु या मित्र नही होता।
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पटना में जेडीयू नेता की हत्या

Posted: 29 Mar 2022 09:26 AM PDT

पटना में जेडीयू नेता की हत्या

पटना। राजधानी पटना में जेडीयू नेता दीपक कुमार मेहता की हत्या ने पुलिसिया चैकसी पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पटना से सटे दानापुर में जेडीयू नेता की हत्या को चार की संख्या में आये अपराधियों ने अंजाम दिया। जेडीयू के नेता सह दानापुर नगर परिषद उपाध्यक्ष दीपक कुमार मेहता को उनके घर के पास ही तब तक गोलियां मारी गईं जब तक वो अचेत नहीं हो गए। यही कारण है कि दीपक को 6 गोलियां मारी गईं। हत्या की इस वारदात को अंजाम देने से पहले रेकी की गई और जब घर के ठीक बाहर दीपक मेहता आये और बालू उतरवाने लगे तो उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग की गई। घायल उपाध्यक्ष दीपक मेहता को स्थानीय लोगो ने आनन फानन में पटना राजाबाजार पारस हॉस्पिटल में इलाज के लिये लाया जहां डॉक्टरों ने उनको मृत घोषित कर दिया है। स्थानीय लोगों ने बताया कि दो की संख्या में पहले से घात लागये अपराधियों गोलियों से ताबड़तोड़ नगर उपाध्यक्ष दीपक मेहता को छलनी कर दिया। पहले शूटर्स ने सिर में गोली मारी और फिर एक के बाद एक पिस्टल की छह गोलिया सीने में उतार दी। इस घटना से आक्रोशित लोगों ने मंगलवार को भी दीघा मुख्य मार्ग को जाम कर आगजनी की है और आवागमन बाधित कर दिया है। घटनास्थल पर दानापुर एएसपी जांच पड़ताल में जुट गये हैं। हत्या किस वजह से की गई है और हत्या किसने की है, अभी तक पुलिस पता नहीं लगा पाई है। जेडीयू के नेता और दानापुर नगर परिषद के उपाध्यक्ष दीपक मेहता दानापुर विधानसभा से दो बार प्रत्याशी रह चुके थे। दीपक ने एक बार निर्दलीय और दूसरी बार उपेन्द्र कुशवाहा की पार्टी रालोसपा से दानापुर का विधानसभा चुनाव लड़ा था। वो इस बार दानापुर से अध्यक्ष पद के लिए भी चुनावी मैदान में उतरने जा रहे थे। दीपक का रियल स्टेट के कारोबार से भी जुड़ाव था, यही वजह है कि पुलिस इस मामले में राजनीतिक और उनके बिजनेस से जुड़े दुश्मनों का पता लगा रही है।
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काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी मस्जिद विवाद पर आज से नियमित सुनवाई

Posted: 29 Mar 2022 09:23 AM PDT

काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी मस्जिद विवाद पर आज से नियमित सुनवाई

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट में काशी विश्वनाथ और ज्ञानवापी मस्जिद विवाद को लेकर दाखिल याचिकाओं की मंगलवार यानी 29 मार्च से नियमित सुनवाई शुरू होगी। वाराणसीके अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद की ओर से दाखिल याचिका व अन्य याचिकाओं की सुनवाई जस्टिस प्रकाश पाडिया की एकल पीठ करेगी। विश्वेश्वर नाथ मंदिर की तरफ से वकील विजय शंकर रस्तोगी ने अतिरिक्त लिखित बहस दाखिल की। उन्होंने कहा कि याची ने सीपीसी के आदेश 7 नियम 11 डी के तहत वाद की पोषणीयता पर आपत्ति अर्जी दाखिल की थी, लेकिन उस पर बल न देकर जवाबी हलफनामा दाखिल किया है। बता दें कि हाईकोर्ट ने ज्ञानवापी मस्जिद के संपूर्ण परिसर के सर्वेक्षण पर रोक लगा रखी है। वाराणसी की एक अदालत ने 8 अप्रैल, 2021 को ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का समग्र भौतिक सर्वेक्षण कराने के लिए आदेश दिया था। कोर्ट ने दो हिंदू, दो मुस्लिम सदस्यों और एक पुरातत्व विशेषज्ञ की पांच सदस्यीय समिति गठित करने का आदेश दिया था। गौरतलब है कि मूल वाद वाराणसी में 1991 में दायर किया गया था, जिसमें प्राचीन मंदिर को बहाल करने का अनुरोध किया गया था। मौजूदा समय में उस स्थान पर ज्ञानवापी मस्जिद मौजूद है। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनकर वाद बिंदु तय किए थे और 29 मार्च से नियमित सुनवाई के आदेश दिया। अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद की दलील है कि प्लेस आफ वर्शिप एक्ट 1991 लागू है, लिहाजा याचिका की पोषणीयता नहीं। उधर इस मामले में काशी विश्वनाथ मंदिर पक्ष का कहना है कि संपत्ति लार्ड विश्वेश्वर मंदिर की है, जो सतयुग से विद्यमान है। ग्राउंड फ्लोर पर मंदिर का कब्जा है। पूजा अर्चना जारी है। स्वयं भू लार्ड विश्वेश्वर स्वयं विराजमान हैं, जो कि 15वीं सदी के मंदिर का हिस्सा है। जमीन की प्रकृति धार्मिक है। इसलिए प्लेस आफ वर्शिप एक्ट 1991 इस पर लागू नहीं होगा।
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सुशासन पर योगी की अपने से प्रतिस्पर्धा

Posted: 29 Mar 2022 09:13 AM PDT

सुशासन पर योगी की अपने से प्रतिस्पर्धा

(डॉ. दिलीप अग्निहोत्री-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)

  • नये भारत का नया उत्तर प्रदेश बनाना चाहते हैं योगी

योगी सरकार पिछले कार्यकाल के दौरान सुशासन की स्थापना में सफल रही थी। इस पर सतत अमल जारी रखने का उन्हें जनादेश भी मिला है। सुशासन का क्षेत्र व्यापक होता है। इसके अनेक पहलू होते है। पांच वर्ष में योगी सरकार ने सुशासन से संबंधित सभी मोर्चों पर शानदार प्रदर्शन किया। उपलब्धियों के आधार पर अनेक रिकार्ड कायम हुए। पिछली कई सरकारों की कुल उपलब्धियां बहुत पीछे छूट गई हैं। पहले योजनाओं के क्रियान्वयन में राष्ट्रीय स्तर पर यूपी का कोई स्थान नहीं रहता था। अब पचास योजनाओं में यूपी नम्बर वन है। विकास के कई बिंदुओं पर तो योगी सरकार का एक कार्यकाल सत्तर वर्षों पर भारी है। आमजन ने इसको मतदान के द्वारा अपनी स्वीकृति प्रदान की है। इससे सरकार का मनोबल बढ़ा है। कहा जाता है कि सकारात्मक प्रतिस्पर्धा से बेहतर परिणाम मिलते है। किंतु योगी सरकार ने एक ही कार्यकाल में पिछली सरकारों के मुकाबले बढ़त बनाई है। ऐसे में उसकी प्रतिस्पर्धा अब उन सरकारों से संभव ही नहीं है। उन्हें बहुत पीछे छोड़ कर योगी सरकार आगे निकल चुकी है। ऐसे में योगी आदित्यनाथ ने अपनी ही पिछली सरकार से प्रतिस्पर्धा का संकल्प लिया है। इसका मतलब है कि वह अपने द्वारा पांच वर्षों में कायम हुए विकास के रिकार्ड को पीछे छोड़ देंगे। उन्होंने कहा कि अब सुशासन को और सुदृढ़ करने के लिए स्वयं से हमारी प्रतिस्पर्धा प्रारम्भ होगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के विजन के अनुरूप नये भारत का नया उत्तर प्रदेश आकार ले रहा है। इस कार्य को और गति प्रदान की जाएगी।

योगी सरकार ने जन कल्याण के निर्णयों से अपनी दूसरी पारी का शुभारंभ किया। नई कैबिनेट ने निशुल्क राशन योजना को जारी रखने का निर्णय लिया। इसके अलावा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को सुशासन संबन्धी दिशा निर्देश दिए। इस प्रकार सरकार ने अपना मन्तव्य स्पष्ट कर दिया। कानून व्यवस्था की सुदृढ़ रखने के साथ ही विकास कार्यों में तेजी कायम रखी जायेगी। सरकार जन अकांक्षाओं को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी। पहली बार प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने अपनी सरकार को गरीबों के प्रति समर्पित बताया था। विगत सात वर्षों में गरीब कल्याण की अनेक योजनाओं को लागू किया गया। यह सभी योजनाएं उपलब्धियों की दृष्टि से अभूतपूर्व रही है। अस्सी करोड़ गरीबों तक किसी न किसी योजना का सीधा लाभ पहुंचा है। इसी तर्ज पर उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने भी केंद्र की कल्याणकारी योजनाओं को सर्वाधिक प्रभावी रूप में क्रियान्वयन किया। पचास योजनाओं में उत्तर प्रदेश देश में नम्बर वन बन गया। योगी सरकार ने पिछले कार्यकाल का शुभारंभ गरीब किसानों के ऋण मोचन के साथ किया था। यह ऋण मोचन की सबसे बड़ी योजना थी। दूसरे कार्यकाल की शुरुआत भी गरीब कल्याण के साथ हुई है। नव गठित योगी सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में गरीबों के प्रति समर्पण व संवेदनशीलता दिखाई गई। इसकी जानकारी स्वयं योगी आदित्यनाथ ने पत्रकारों को दी। उन्होंने प्रदेश के पन्द्रह करोड़ गरीबों को मुफ्त राशन देने की योजना को जारी रखने की घोषणा की है।

चुनाव के दौरान विपक्ष का कहना था कि सरकार मार्च में ही यह योजना बन्द कर देगी। योजना की अवधि बढा कर सरकार ने विपक्ष को भी जबाब दिया है। सत्ता पक्ष के अनुसार वह चुनाव को ध्यान में रख कर नहीं बल्कि जनकल्याण को ध्यान में रख कर निर्णय लेती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अनेक बार यह कह चुके है कि देश व समाज की सेवा ही वर्तमान सरकार का उद्देश्य है। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ भी इसी भावना से कार्य कर रहे हैं। लोकभवन में संपन्न कैबिनेट की पहली बैठक में औपचारिक निर्णय लिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में नवगठित सरकार का पहला निर्णय पन्द्रह करोड़ गरीब जनता जनार्दन को समर्पित है।

राज्य सरकार ने केंद्र सरकार के अतिरिक्त मुफ्त राशन वितरण की योजना को आगे बढ़ाया है। मुफ्त टेस्ट,ट्रीटमेंट और टीका के प्रयास से कोरोना पर काबू पाया गया। महामारी से उपजने वाली भुखमरी की समस्या के निदान में मुफ्त राशन की योजना बहुत उपयोगी रही है। अंत्योदय एवं पात्र गृहस्थी कार्ड धारक पन्द्रह करोड़ प्रदेशवासी डबल इंजन की सरकार में मुफ्त राशन की डबल डोज प्राप्त कर रहे हैं। नई सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में इसे अगले तीन माह तक बढ़ाये जाने का फैसला किया गया है। राशन वितरण की पारदर्शी व्यवस्था कायम रहेगी। अस्सी हजार उचित दर की दुकानों पर ई-पॉश मशीनें लगी हैं। इससे सही लाभार्थी तक राशन वितरण संभव हो रहा है। योजना के अंतर्गत अंत्योदय कार्ड धारकों को राज्य सरकार द्वारा पैतीस किलोग्राम खाद्यान्न दिया जाता है। जबकि पात्र गृहस्थी को प्रति यूनिट पांच किलोग्राम खाद्यान्न मिल रहा है।

राज्य सरकार ने खाद्यान्न के साथ-साथ एक लीटर रिफाइंड तेल,एक किलो दाल और एक किलो नमक भी देने की व्यवस्था कर दी है। जबकि अंत्योदय श्रेणी के परिवारों को एक किलो चीनी भी प्रदान की जा रही है। प्रदेश सरकार राज्य में सुशासन, सुरक्षा, विकास एवं राष्ट्रवाद को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रदेश सरकार ने लोक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ बिना भेदभाव के सभी गरीब एवं वंचित वर्ग तक पहुंचाने का कार्य किया है। विगत पांच वर्षों में प्रदेश की छवि बदलने में प्रशासनिक तंत्र ने पूर्ण मनोयोग से अपना प्रभावी योगदान दिया है। बदलते उत्तर प्रदेश ने देश को मजबूत किया है। चुनाव के पहले जारी लोक कल्याण संकल्प के सभी संकल्प बिन्दुओं को आगामी पांच वर्षों में लक्ष्यवार एवं समयबद्ध ढंग से पूरा किया जाएगा। उत्तर प्रदेश को देश का नम्बर वन राज्य और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को देश की नम्बर वन अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था को एक ट्रिलियन यूएस डॉलर बनाने के लिए दस प्राथमिक सेक्टरों को चिन्हित किया जाएगा। केंद्रीय आम बजट तथा लोक कल्याण संकल्प को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार का आगामी बजट तैयार किया जाएगा। यूपी की तर्ज पर भारत सरकार द्वारा भी महिलाओं के कल्याण एवं सशक्तीकरण के लिए मिशन शक्ति प्रारम्भ किया गया है। प्रदेश सरकार ने महिला पुलिसकर्मियों की संख्या में अभूतपूर्व बढ़ोत्तरी की है। महिला पुलिसकर्मियों को फील्ड कार्यों से जोड़ा गया है। महिला बीट अधिकारियों की तैनाती की गयी है, जो ग्राम स्तर पर समस्याओं के निस्तारण के साथ ही विभिन्न योजनाओं की जन जागरूकता का कार्य भी सम्पादित कर रही हैं। योगी ने सभी अधिकारी व कर्मचारियों को समय से कार्यालय में उपस्थित होकर जिम्मेदारी के निर्वाह का निर्देश दिया। लोगों की समस्याओं का संवेदनशील ढंग से समाधान करना चाहिए। ई ऑफिस सिस्टम सिटिजन चार्टर लागू करने के साथ ही विभागों के समस्त कार्यों का डिजिटलाइजेशन किया जायेगा।
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योगी ने समझदारी से बांटे विभाग

Posted: 29 Mar 2022 09:09 AM PDT

योगी ने समझदारी से बांटे विभाग

(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)
उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ ने अपनी सरकार के दूसरे कार्यकाल में कई चेहरे नये लाकर लोगों को चैंकाया था। इसके बाद मंत्रियों के विभाग को लेकर चर्चा हो रही थी। मुख्यमंत्री ने विभागों का बंटवारा कर दिया है। उन्हांेने 34 विभाग, जो सर्वाधिक महत्वपूर्ण और संवेदनशील होते हैं, उनको अपने पास रखा है। राज्य में फिर से दो डिप्टी सीएम बनाए गये हैं। इनमे केशव प्रसाद मौर्य पिछली बार पीडब्ल्यूडी विभाग संभाले हुए थे लेकिन इस बार उनसे यह विभाग छीन लिया गया। हालांकि उनके पास ग्राम्य विकास एवं समग्र ग्राम्य विकास समेत आधा दर्जन विभाग हैं। इसी प्रकार डा. दिनेश शर्मा की जगह डिप्टी सीएम बनाए गये ब्रजेश पाठक को चिकित्सा शिक्षा समेत, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य समेत चार विभाग मिले हैं। कांगे्रस से भाजपा आये जितिन प्रसाद को पीडब्ल्यूडी अर्थात् लोक निर्माण विभाग दिया गया है। माना जा रहा है कि योगी ने ये विभाग बहुत सोच-समझकर बांटे हैं। जितिन प्रसाद जब धौरहरा के सांसद हुआ करते थे, तब वहां की सड़कें देखने लायक थीं। इसी तरह कोरोना की दूसरी लहर के दौरान ब्रजेश पाठक ने स्वास्थ्य सुविधाओं पर सवाल उठाया था। इस बार पूरा का पूरा स्वास्थ्य महकमा उनको सौंप दिया गया है। मंत्रिमंडल में एकमात्र मुस्लिम चेहरा दानिश आजाद अंसारी को अल्पसंख्यक कल्याण और मुस्लिम वक्फ एवं हज विभाग देकर मुसलमानों को संदेश दिया कि आपकी समस्याएं आपकी बिरादरी का ही व्यक्ति सुलझाएगा। इसी के साथ योगी आदित्यनाथ ने 100 दिन का लक्ष्य भी तय कर दिया है। अर्थात् मंत्रियों को लगभग तीन महीने में ही अपना परफारमेंस भी दिखाना होगा।

योगी आदित्यनाथ सरकार के कैबिनेट मंत्री एके शर्मा को नगर विकास विभाग, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को ग्राम विकास विभाग और उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक को स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं यूपी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गृह, आवास एवं शहरी नियोजन जैसे कई महत्वपूर्ण विभाग अपने पास रखे हैं। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह को जल शक्ति एवं बाढ़ नियंत्रण मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है। कैबिनेट मंत्री बेबी रानी मौर्य महिला कल्याण और बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की जिम्मेदारी संभालेंगी। नरेंद्र मोदी के करीबी माने जाने वाले नौकरशाह से कैबिनेट मंत्री बने अरविंद कुमार शर्मा को नगर विकास, शहरी समग्र विकास, नगरीय रोजगार एवं गरीबी उन्मूलन, ऊर्जा और अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत विभाग आवंटित किया गया है। जितिन प्रसाद को लोक निर्माण विभाग सौंपा गया है। सूर्य प्रताप शाही को कृषि मंत्री बनाया गया है। लक्ष्मी नारायण चैधरी को गन्ना विकास और चीनी मंत्रालय, जयवीर सिंह को पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रालय और धर्मपाल सिंह को पशुधन और दुग्ध विकास विभाग सौंपा गया है। नंद गोपाल गुप्ता नंदी को औद्योगिक विकास, निर्यात प्रोत्साहन, एनआरआई, निवेश प्रोत्साहन मंत्रालय, भूपेंद्र सिंह चैधरी को पंचायती राज, अनिल राजभर को श्रम, सेवायोजन, समन्वय मंत्रालय, राकेश सचान के हिस्से सूक्ष्म-लघु एवं मध्यम उद्यम, खादी एवं ग्रामोद्योग, विभाग आया है। योगेंद्र उपाध्याय को उच्च शिक्षा, विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी, इलेक्ट्रानिक्स एवं सूचना प्रोद्योगिकी, आशीष पटेल को प्राविधिक शिक्षा, उपभोक्ता संरक्षण एवं बॉट माप मंत्रालय, संजय निषाद को मत्स्य मंत्रालय मिला है।

स्व्तंत्र प्रभार के राज्यमंत्री नितिन अग्रवाल को आबकारी, मद्य निषेध मंत्रालय दिया गया है। कपिल देव अग्रवाल को व्यवसायिक शिक्षा, कौशल विकास मंत्रालय, रवींद्र जायसवाल को स्टाम्प तथा न्यायालय शुल्क, संदीप सिंह को बेसिक शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। गुलाब देवी को माध्यमिक शिक्षा, गिरीश चंद्र यादव को खेल, युवा कल्याण मंत्रालय और धर्मवीर प्रजापति को कारागार, होमगार्ड्स मंत्रालय मिला है। असीम अरुण समाज कल्याण, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण विभाग, जेपीएस राठौर को सहकारिता, दयाशंकर सिंह को परिवहन मंत्रालय और नरेंद्र कश्यप को पिछड़ा वर्ग कल्याण, दिव्यांगजन सशक्तिकरण मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है। दिनेश प्रताप सिंह को उद्यान, कृषि विदेश व्यापार, कृषि निर्यात मंत्रालय, अरुण कुमार सक्सेना के हिस्से वन, पर्यावरण, जंतु उद्यान, जलवायु परिवर्तन मंत्रालय आया है। तो वहीं दयाशंकर मिश्र दयालु के हाथ आयुष मंत्रालय आया है। मयंकेश्वर सिंह को संसदीय कार्य, स्वास्थ्य मंत्रालय, दिनेश खटीक को जलशक्ति, संजीव गोंड को समाज कल्याण, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण विभाग, बलदेव सिंह ओलख को कृषि, कृषि शिक्षा एवं कृषि अनुसंधान, अजीत पाल को विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी, इलेक्ट्रानिक्स एवं सूचना प्रोद्योगिकी मंत्रालय मिला है। जसवंत सैनी संसदीय कार्य, औद्योगिक विकास मंत्री, रामकेश निषाद जल शक्ति मंत्री, और मनोहर लाल मन्नू कोरी श्रम एवं सेवायोजन मंत्री बनाए गए हैं। संजय गंगवार को गन्ना विकास एवं चीनी मिल मंत्रालय, बृजेश सिंह को लोक निर्माण, केपी मलिक को वन, पर्यावरण, जंतु उद्यान, जलवायु परिवर्तन मंत्रालय मिला है और सुरेश राही को कारागार विभाग दिया गया है। सोमेंद्र तोमर को ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा मंत्री, अनूप प्रधान मुख्यमंत्री से संबद्ध, प्रतिमा शुक्ला महिला कल्याण, बाल विकास एवं पुष्टाहार मंत्री, राकेश राठौर गुरू नगर विकास, शहरी समग्र विकास, नगरीय रोजगार एवं गरीबी उन्मूलन मंत्री बनाए गए हैं। योगी आदित्यनाथ सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले 100 दिन का एजेंडा भी तय कर लिया है। इस दौरान करीब 20 हजार खाली सरकारी पदों को भरने और राज्य के 50 हजार से अधिक बेरोजगार लोगों को स्वरोजगार के अवसर मुहैया कराना है। योगी सरकार ने लोगों से किए वादों को प्राथमिकता के साथ पूरा करने के मकसद से सभी सरकारी विभागों को अपने यहां खाली पदों की पूरी लिस्ट बनाकर उनके सामने रखने का निर्देश दिया है, जिससे कि जल्द ही इन सरकारी पदों पर बहाली निकाली जा सके। इसके साथ ही उन्होंने राज्य में अगले पांच वर्षों के दौरान करीब 5 करोड़ लोगों को रोजगार के अवसर मुहैया कराने का भी लक्ष्य रखा है। मुख्यमंत्री के मुताबिक वह खुद इस लक्ष्य को पूरा करने पर लगातार नजर रखेंगे। यहां गौर करने वाली बात यह है कि राज्य में पिछली बीजेपी सरकार के पांच वर्षों के कार्यकाल के दौरान एमएसएमई और ओडीओपी जैसी स्कीमों के जरिये प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से करीब ढाई करोड़ लोगों को रोजगार के अवसर मिले। सीएम योगी आदित्यनाथ का अगला लक्ष्य अब इस संख्या को दोगुना करने का है, जिससे कि ज्यादा से ज्यादा लोग आर्थिक रूप से मजबूत हो सकें। इसके लिए जिला एवं डिविजन के स्तर पर भी स्टार्टअप्स स्थापित करने के निर्देश दिए हैं, जिससे कि युवाओं को अधिक रोजगार मिल सके।
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‘सुशासन’ पर दबाव

Posted: 29 Mar 2022 09:07 AM PDT

'सुशासन' पर दबाव

(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)
बिहार में सुशासन कुमार अर्थात् नीतीश बाबू को आज पुराने दिन जरूर याद आ रहे होंगे जब उनकी फोटो नरेन्द्र मोदी के साथ लगाने पर उन्हांेने आसमान सिर पर उठा लिया था। अब उनकी सरकार उन्हीं नरेन्द्र मोदी के रहम-ओ-करम पर चल रही है और उनके इशारे पर काम भी करना पड़ रहा है। वीआईपी पार्टी के मुखिया रहे मुकेश सहनी को नीतीश कुमार ने अपने मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया है क्योंकि उनके सभी विधायक भाजपा में विलय कर गये। मुकेश सहनी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा से सीधा मोर्चा लिया था, उसकी सजा तो उन्हें मिलनी ही थी लेकिन इस झटके से नीतीश कुमार की कुर्सी का पाया भी हिल गया है। नीतीश ने 25 मार्च को लखनऊ में पीएम को झुककर जिस तरह से सलाम किया था, उसका भी उन्हें लाभ नहीं मिला है।

वीआईपी पार्टी के प्रमुख और विधान परिषद सदस्य मुकेश सहनी को नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया गया है। मुकेश सहनी को मंत्रिमंडल से बर्खास्त किए जाने की स्वीकृति राज्यपाल फागू चैहान ने दे दी। दरअसल बीजेपी से जारी विवाद के बाद 27 मार्च को नीतीश कुमार ने राज्यपाल को पत्र लिखकर मुकेश सहनी को बिहार मंत्रिमंडल से हटाए जाने की सिफारिश की थी। इसके अगले दिन राज्यपाल फागू चैहान ने इस मसले पर अपनी स्वीकृति दे दी। मुकेश सहनी को नीतीश कुमार ने बीजेपी के कहने पर ही मंत्रिमंडल से हटाए जाने की सिफारिश की थी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समेत बिहार विधानसभा अध्यक्ष, विधान परिषद कार्यकारी सभापति, कई सांसद, मंत्री और विधायक राज्यपाल फागू चैहान द्वारा दिए गए आमंत्रण पर नाश्ता करने राजभवन पहुंचे हैं। इसे लेकर सीएम हाउस से राजभवन तक गहमागहमी बनी हुई थी। राजनेताओं की राज्यपाल से इस मुलाकात को बिहार की सियासत के लिहाज से भी काफी अहम माना जा रहा था।

माना जा रहा है कि उतर प्रदेश के साथ अन्य राज्यों में चुनाव के बाद नीतीश कुमार को इस बात का अंदाजा है कि भले अगले लोकसभा चुनावों तक उनकी कुर्सी को कोई खतरा नहीं लेकिन अब भाजपा के साथ एक दबंग सहयोगी के बजाय एक निर्बल-दुर्बल पार्ट्नर के रूप में रहना, उनकी राजनीतिक मजबूरी है क्योंकि उनके पास संख्या बल नहीं है। हालाँकि उनके समर्थक मानते है कि वर्तमान भाजपा के साथ संबंध पहले की तरह मधुर भले न हों लेकिन सरकार चलाने में कोई दिक्कत नहीं। हां, इस बात को स्वीकार करने में उन्हें कोई परेशानी नहीं कि भाजपा जैसे जमीनी स्तर पर अपने पैर फैला रही है। ऐसे में भविष्य में अगर राष्ट्रीय जनता दल के साथ बिना नीतीश भी सीधा मुकघबला हो तो अब उनकी स्थिति अच्छी रहेगी। नीतीश को मालूम है कि आज भाजपा से मुकाबला वो नहीं कर सकते क्योंकि उनके पास साधन और संसाधन है और इन सभी मामलों को उन्होंने कभी शासन करने के अपने तरीकांे में बहुत महत्व नहीं दिया। इसलिए आज का बिहार की राजनीति की सच्चाई है कि नीतीश कुमार को उपचुनाव में भी जाने के लिए अपने उम्मीदवार को एनडीए का प्रत्याशी घोषित करना पड़ता है और भाजपा और राष्ट्रीय जनता दल अपने बलबूते मैदान में उम्मीदवार उतारती है। नीतीश की राजनीति को उनके शराबबंदी के फैसले ने भी उतना नुकसान पहुंचाया है, जितना उनके विरोधियों ने सोलह वर्षों में उनकी सरकार की विफलताओं को उजागर करके पहुंचाया। शराबबंदी के कारण एक समानांतर आर्थिक व्यवस्था कायम हुई है, जिसके कारण पुलिस का रोब और खौफ कम हुआ, वहीं दलित, अति पिछड़े समाज के लोग बहुसंख्यक जेल जाने वालों को सूची में रहे जो नीतीश के कट्टर समर्थक थे और जेल और बेल के चक्कर में नीतीश से उनकी दूरी बढ़ी, जबकि समांतर व्यवस्था पर उन्हीं जातियों का वर्चस्व है जो समाज में दबंग हैं।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राजनीतिक चर्चा के केंद्र में हैं। मुकेश सहनी की बर्खास्तगी हो या लखनऊ में नीतीश का झुककर सलाम करना। एक तस्वीर और कुछ सेकेंड का एक वीडियो, जो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शपथ ग्रहण समारोह में उनका प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अभिवादन करने की शैली से संबंधित है ।बहस इस बात को लेकर छिड़ी है कि आखिर नीतीश का ऐसे झुकना क्या बिहार के वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में उनकी राजनीतिक मजबूरी है या उन्होंने अपने हालात से समझौता कर राजनीतिक रूप से आत्मसमर्पण कर दिया है। नीतीश कुमार की लखनऊ में ये मुद्रा बिहार की राजनीति में बहस का विषय बनी है। आने वाले समय में वो इसलिए भी किसी न किसी चर्चा का केंद्र रहेगी क्योंकि ये वही नीतीश कुमार है, जिन्होंने 2009 के लोकसभा चुनाव में लुधियाना में एनडीए की एक रैली में उस समय के गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और अब प्रधानमंत्री, ने जब नीतीश के साथ हाथ उठाकर फोटो खिंचवाया था तो नीतीश आगबबूला हो गए थे, उस रैली में भी नीतीश बहुत नानुकुर करके गए थे और बीजेपी ने ही उन्हें चार्टर प्लेन उपलब्ध कराया था। लेकिन नीतीश मोदी के साथ इस तस्वीर को लेकर बहुत असहज थे। उनका गुस्सा उस समय सातवें आसमान पर चला गया था, जब 2010 जून में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में भाग लेने के लिए नरेंद्र मोदी आ रहे थे, तब उसी तस्वीर को विज्ञापन के रूप में गुजरात के कुछ संगठनों ने पटना के अखबारों में छपवाया था और नीतीश ने न केवल उस संगठन के खिलाफ एफआईआर कर जांच के लिए पुलिस टीम सूरत भेजी थी बल्कि रात का भोज भी रद्द कर दिया था। लेकिन उन्हीं नीतीश कुमार का इस तरह से अब

नरेंद्र मोदी के सामने झुकना, उनके समर्थकों के अनुसार उनकी वर्तमान राजनीतिक हैसियत का परिणाम है। उस दिन मंच पर भाजपा के सभी मुख्यमंत्री थे, लेकिन नीतीश का स्टाइल सबसे अलग था।

बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान तो आमतौर पर शांत रहने वाले नीतीश अपना आपा खो बैठे और विधानसभा अध्यक्ष को सदन के अंदर खरी खोटी सुना दी और जब अपने वाणी के कारण भाजपा सदस्यों के नाराजगी का अंदाजा हुआ तो छुट्टी के दिन उस पुलिस अधिकारी का तबादला कर दिया जिससे विधान सभा अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा और भाजपा के सदस्य शांत हो जाएं। इससे पूर्व भी नीतीश विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव के खिलाफ भी ऊंची आवाज में बोल चुके हैं, जो अमूमन उनका स्टाइल नहीं है। इसके अलावा भाजपा के सदस्य सरकार की सदन में और बाहर जमकर बेलगाम अफसरशाही और भ्रष्टाचार को लेकर आवाज उठाते हैं, जिससे आखिरकार नीतीश कुमार का इकबाल कम होता है। नीतीश कुमार कितने अलग- थलग पड़ते जा रहे हैं कि जिस गृह विभाग के मुखिया हैं उनके मातहत पुलिस महानिदेशक उनके बार बार कहने के बाबजूद आम आदमी तो छोड़ दीजिए किसी मीडिया वाले का फोन न तो उठाते हैं न कभी कॉल बैक करते हैं और ये नीतीश कुमार के 16 वर्षों से अधिक के शासन में पहली बार हो रहा है। नीतीश जो लुधियाना में उस समय भाजपा के सामने विधान सभा में संख्या बल में अधिक थे तो उनकी बात सुनी जाती थी। हालांकि भोज रद्द करने के बाद भाजपा के नेता और कार्यकर्ताओं के बीच काफी रोष था। हालांकि उस साल हुए विधानसभा चुनाव में उसका कोई असर नहीं दिखा। लेकिन आज अगर नीतीश संख्या बल में नंबर तीन की पार्टी हैं तो उसमें वर्तमान भाजपा का एक बहुत अहम योगदान इसलिए है, क्योंकि चिराग पासवान का अलग लड़ना और वो भी जनता दल यूनाइटेड के उम्मीदवारों के खिलाफ ही अपना कैंडिडट देना और वो भी अधिकांश पूर्व भाजपा विधायक को टिकट देना, ये दोस्त बनकर पीठ में खंजर घांेपने के समान था लेकिन नीतीश ने सार्वजनिक रूप से मुख्यमंत्री की कुर्सी मिलने के कारण ये बात कभी नहीं कही। अब मुकेश सहनी को अपने मंत्रिमंडल से उन्हंे मजबूरन बर्खास्त करना पड़ा, तो उनकी मजबूरी समझी जा सकती है।
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यूक्रेन ने भी मारे हैं सात रूसी जनरल!

Posted: 29 Mar 2022 09:06 AM PDT

यूक्रेन ने भी मारे हैं सात रूसी जनरल!

पेरिस। रूसी सेना यूक्रेन में भयंकर तबाही मचा रही है। वहीं रूस के हमले के बीच यूक्रेन ने भी दावा किया है कि युद्ध में रूस के भी सैकड़ों सैनिक और कई रूसी जनरल मारे गए हैं। यूक्रेन के अनुसार युद्ध शुरू होने के बाद से सात रूसी जनरल मारे गए हैं। इनकी मौत से रूसी सेना को बड़ी क्षति का अनुमान लगाया जा रहा है। हालांकि, यूक्रेन के दावों की पुष्टि नहीं हो पाई है। वहीं रूस के आधिकारिक सूत्रों ने अब तक केवल एक जनरल और एक अन्य वरिष्ठ नौसैनिक कमांडर की ही मौत की पुष्टि की है। शुक्रवार को यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय के अनुसार जान गंवाने वाले सातवें रूसी जनरल लेफ्टिनेंट जनरल याकोव रेजंत्सेव थे, जो दक्षिणी शहर खेरसॉन के बाहर चोरनोबाइवका में लड़ाई में मारे गए थे। वहीं इस मामले में न्यूयॉर्क स्थित रिसर्च थैंक्स टैंक सौफन सेंटर के शोध निदेशक कॉलिन क्लार्क ने कहा कि चाहे वह पांच या 15 जनरल हों, यह तथ्य कि वे किसी भी जनरल को खो रहे हैं, यह दर्शाता है कि रूसी कमांड-एंड-कंट्रोल बेहद कमजोर है।

टेलीग्राम पर एक पोस्ट में यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की के सलाहकार मायखाइलो पोडोलियाक ने रूसी जनरलों के मौत की बात कही। उन्होंने कहा कि यह सेना की पूरी तैयारी का संकेत है। यह सब, निस्संदेह, रूसी सेना का मनोबल गिराता है। जनरलों में से 28 फरवरी को रूस की 41 वीं संयुक्त शस्त्र सेना के डिप्टी कमांडर मेजर जनरल आंद्रेई सुखोवत्स्की की कार्रवाई में मौत की पुष्टि आधिकारिक रूसी स्रोतों द्वारा की गई है। हालांकि, इन सबके बीच रूस नुकसान के बारे में सीमित जानकारी ही दे रहा है। इस बीच मारियुपोल शहर के मेयर के प्रवक्ता ने कहा कि रूसी बलों द्वारा घेराबंदी के बाद से इस इलाके में लगभग 5,000 लोग मारे गए हैं। प्रवक्ता ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि मारियुपोल में लगभग 90 फीसदी इमारतें क्षतिग्रस्त हो गई हैं। वहीं लगभग 40 फीसदी इमारतें नष्ट हो गई हैं। अब ये शहर खंडहर में तब्दील हो गया है।
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ब्रिटेन में भारतीय स्वाद वाली मिठाई पुरस्कृत

Posted: 29 Mar 2022 09:04 AM PDT

ब्रिटेन में भारतीय स्वाद वाली मिठाई पुरस्कृत

लंदन। भारतीय मूल की उद्यमी और उत्तरी इंग्लैंड में मिठाई की दुकान चलाने वाली 30 वर्षीय हरप्रीत कौर ने ब्रिटेन के लोकप्रिय टेलीविजन शो 'द अप्रेंटिस'में जीत हासिल की है। उन्होंने 16 प्रतिभागियों को पछाड़ कर 2.5 लाख पौंड का निवेश हासिल किया है। बीबीसी पर प्रसारित और कारोबारी लॉर्ड एलन सुगर द्वारा संचालित शो के 16वें संस्करण में भारतीय मूल के एक अन्य प्रतिभागी अक्षय ठकरार सहित ब्रिटेन के विभिन्न हिस्सों से आए उद्यमियों को उन्होंने टक्कर दी और यह जीत दर्ज की। अंत में कौर कारोबार नेता को संतुष्ट करने में सफल रही कि वह उनके डेजर्ट पार्लर 'ओ सो यम' का विस्तार करने के विचार का समर्थन करें। सप्ताहांत में पूर्व में रिकॉर्ड किए गए एपिसोड में उन्हें विजेता घोषित किया गया। कौर ने कहा, ''बहुत खुश हैं। मेरे पास यह बताने के लिए शब्द नहीं है कि मैंने बीबीसी अप्रेंटिस जीत ली है, लेकिन मैं ओ सो यम के नए अध्याय को लेकर बहुत उत्साहित हूं। सभी को धन्यवाद जिन्होंने मेरा समर्थन किया।''
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बेगम बुशरा इमरान के लिए कर रहीं टोटका

Posted: 29 Mar 2022 09:02 AM PDT

बेगम बुशरा इमरान के लिए कर रहीं टोटका

इस्लामाबाद। पाकिस्तान की सियासत के लिए यह हफ्ता बेहद अहम है। प्रधानमंत्री इमरान खान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर बहस 31 मार्च को होगी। इसके बाद वोटिंग होगी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, विपक्ष के पास 210 से ज्यादा सांसदों का समर्थन है। बहुमत का आंकड़ा 172 है। ऐसे में इमरान खान की टेंशन जायज है और अपनी पत्नी बुशरा बीबी की मदद ले रहे हैं। विपक्ष के नेता शहबाज शरीफ की मानें तो इमरान खान की तीसरी पत्नी बुशरा बीबी संकट टालने के लिए काला जादू कर रही हैं। घर में जिंदा मुर्गे जलाए जा रहे हैं। पाकिस्तान में यह भी चर्चा है कि बुशरा के पास दो जिन्न हैं, जिनके दम पर वह सरकार बचा सकती है। इमरान खान की तीसरी बीवी बुशरा पिछली बार 2019 में तब चर्चा में आईं थी, जब एक टीवी चैनल ने दावा कर दिया था कि उनका अक्स आइने में नहीं दिखता। साथ ही यह भी कहा था कि वे जिन्नों को गोश्त खिलाती हैं। बाद में पाकिस्तानी मीडिया ने इसे फेक न्यूज बताया। बावजूद इसके बुशरा बीवी की रहस्यमयी जिंदगी को लेकर कयास लगते रहते हैं। दरअसल, 372 सदस्यों वाली पाक नेशनल असेंबली में सत्तारूढ़ पीटीआई के 155 सदस्य हैं। बहुमत के लिए इमरान खान को 172 सांसदों का समर्थन चाहिए। उनके कई विधायक बागी हो चुके हैं। गठबंधन के तीन प्रमुख दल भी बिदक गए हैं। ऐसे में अविश्वास प्रस्ताव खारिज होने की संभावना कम है। अगर यह प्रस्ताव पारित हो गया तो करीब चार साल पुरानी सरकार का पतन हो जाएगा।
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इजराइल के पीएम का भारत दौरा टला

Posted: 29 Mar 2022 09:00 AM PDT

इजराइल के पीएम का भारत दौरा टला

यरूशलम। दुनिया के कई देशों में एक बार फिर से कोरोना मामलों में इजाफा देखने को मिल रहा है। इस बीच इजराइलके प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट कोरोना वायरससे संक्रमित पाए गए। इसके बाद उनका भारत दौरा फिलहाल के लिए टाल दिया गया है। नफ्ताली बेनेट 3 से 5 अप्रैल तक नई दिल्ली के दौरे पर आने वाले थे। इजराइल के दूतावास ने ये जानकारी दी। पीएम मोदी और बेनेट पिछली साल अक्टूबर में ग्लासगो में संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन के मौके पर मिले थे, जहां पीएम मोदी ने प्रधानमंत्री बेनेट को देश की आधिकारिक यात्रा करने के लिए आमंत्रित किया। हालांकि, बेनेट को आखिरी वक्त में अपना भारत दौरा टालना पड़ा। वह फिलहाल आइसोलेशन में रहकर कामकाज कर रहे हैं। इजराइल में कोरोना के मामलों में गिरावट के बावजूद सरकार ने कोविड प्रतिबंधों को हटाने से इनकार कर दिया है। स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ एक परामर्श बैठक के बाद प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट और स्वास्थ्य मंत्री नित्जन होरोविट्ज ने फैसला किया था कि मास्क मैंडेट को नहीं हटाया जाएगा, लेकिन अप्रैल में फिर से उपाय की समीक्षा की जाएगी।
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मुख्यमंत्री राहत कोष में विभिन्न बोर्ड/निगम द्वारा दी गई 117.5 करोड़ रूपये की सहायता राशी

Posted: 29 Mar 2022 08:52 AM PDT

मुख्यमंत्री राहत कोष में विभिन्न बोर्ड/निगम द्वारा दी गई 117.5 करोड़ रूपये की सहायता राशी 

  • बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर काॅरपोरेषन लिमिटेड ने 25 करोड़ रूपये, बिहार राज्य भवन निर्माण निगम लिमिटेड ने 12 करोड़ रूपये, बिहार राज्य इलेक्ट्राॅनिक विकास निगम ने 11 करोड़ रूपये मुख्यमंत्री राहत कोष में अंषदान दिया।
  • मुख्यमंत्री ने इस सामाजिक पहल की सराहना की। 

पटना, 29 मार्च 2022 को बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर काॅरपोरेषन लिमिटेड ने 25 करोड़ रूपये, बिहार राज्य भवन निर्माण निगम लिमिटेड ने 12 करोड़ रूपये, बिहार राज्य इलेक्ट्राॅनिक विकास निगम ने 11 करोड़ रूपये, बिहार राज्य पथ विकास निगम ने 10 करोड़ रूपये, बिहार राज्य औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकार ने 10 करोड़ रूपये, बिहार स्टेट पावर ट्रांसमिषन कम्पनी लिमिटेड ने 10 करोड़ रूपये, बिहार राज्य पुल निर्माण निगम ने 10 करोड़ रूपये, बिहार राज्य शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम ने 09 करोड़ रूपये, बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत संरचना विकास निगम ने 05 करोड़ रूपये, बिहार राज्य आवास बोर्ड ने 05 करोड़ रूपये, बिहार राज्य सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ ने 04 करोड़ रूपये, बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम ने 04 करोड़ रूपये, बिहार राज्य सहकारी बैंक लिमिटेड ने 02 करोड़ रूपये एवं बिहार ग्रामीण सड़क विकास एजेंसी ने 50 लाख रूपये का चेक मुख्यमंत्री राहत कोष में 1 अणे मार्ग स्थित लोक संवाद में मुख्यमंत्री श्री नीतीष कुमार को सौंपा। 
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने इस सामाजिक पहल की सराहना की और मुख्यमंत्री राहत कोष में अंषदान करने के लिये सभी को धन्यवाद दिया एवं उन्हें अपनी शुभकामनायें दीं। 
इस अवसर पर षिक्षा मंत्री श्री विजय कुमार चैधरी, स्वास्थ्य मंत्री श्री मंगल पाण्डेय, उद्योग मंत्री श्री शाहनवाज हुसैन, भवन निर्माण मंत्री श्री अषोक चैधरी, पथ निर्माण मंत्री श्री नितिन नवीन, श्रम संसाधन मंत्री श्री जीवेष कुमार, ग्रामीण कार्य मंत्री श्री जयंत राज, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री दीपक कुमार, मुख्यमंत्री के अतिरिक्त परामर्षी श्री मनीष कुमार वर्मा, अपर मुख्य सचिव षिक्षा श्री संजय कुमार, अपर मुख्य सचिव गृह श्री चैतन्य प्रसाद, अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य श्री प्रत्यय अमृत, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डाॅ0 एस0 सिद्धार्थ, प्रधान सचिव नगर विकास एवं आवास श्री आनंद किषोर, प्रधान सचिव समाज कल्याण श्री संदीप पौंड्रिक, प्रधान सचिव सूचना प्रावैधिकी श्री संतोष मल्ल, प्रधान सचिव ऊर्जा श्री संजीव हंस, सचिव ग्रामीण कार्य श्री पंकज पाल, मुख्यमंत्री के सचिव श्री अनुपम कुमार, सचिव सहकारिता श्रीमती बंदना प्रेयसी, बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेषक श्री विनय कुमार, काॅम्फेड की प्रबंध निदेषक श्री षिखा श्रीवास्तव, बिहार राज्य सहकारी बैंक लिमिटेड के चेयरमैन श्री रमेष चन्द्र चैबे सहित विभिन्न बोर्ड/निगमों के प्रबंध निदेषक उपस्थित थे। 

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प्रसिद्ध चिकित्सक पद्मश्री डॉ. गोपाल प्रसाद सिन्हा को सप्रेम भेंट की श्रीमद्भगवद्गीता

Posted: 29 Mar 2022 08:45 AM PDT

प्रसिद्ध चिकित्सक पद्मश्री डॉ. गोपाल प्रसाद सिन्हा को सप्रेम भेंट की श्रीमद्भगवद्गीता

पटना, 29 मार्च, 2022। भारत के प्रसिद्ध चिकित्सक एवं जाने-माने समाजसेवी पद्मश्री डॉ. गोपाल प्रसाद सिन्हा को 'श्रीमद्भगवद्गीता आपके द्वार अभियान' के संस्थापक, बिहार भाजपा के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य, पूर्व प्रदेश प्रवक्ता तथा पटना उच्च न्यायालय के अधिवक्ता संजीव कुमार मिश्र ने उनके राजधानी स्थित श्रीकृष्णापुरी आवास पर पहुंच कर गोरखपुर गीता प्रेस द्वारा प्रकाशित श्रीमद्भगवद्गीता सप्रेम भेंट कर आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन प्राप्त किया।
इस दौरान जाने-माने चिकित्सक डॉ गोपाल प्रसाद सिन्हा को अभियान के संस्थापक संजीव कुमार मिश्र ने पिछले पंद्रह महीनों से बिहार समेत संपूर्ण भारत में नि:शुल्क लोगों को श्रीमद्भगवद्गीता सप्रेम भेंट करने के बारे में विस्तार से बताया। श्री मिश्र ने बताया कि अब तक 15 महीनों के अंदर करीब 40 हजार श्रीमद्भगवद्गीता घर-घर पहुंचाया जा चुका है।
उन्होंने कहा कि विश्व के प्रकांड विद्वान धर्मचक्रवर्ती जगदगुरु पद्मविभूषण स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज इस 'श्रीमद्भगवद्गीता आपके द्वार अभियान' प्रधान संरक्षक एवं मुख्य मागदर्शक हैं। स्वामी जी की प्रेरणा से लोगों के बीच नि:शुल्क श्रीमद्भगवद्गीता घर-घर पहुंचाने का अलौकिक एवं अद्वितीय कार्य किया जा रहा है। डॉ गोपाल प्रसाद सिन्हा अभियान के कार्यों के बारे में जानकारी प्राप्त कर काफी प्रसन्नचित होते हुए कहा कि अभियान के द्वार भेंट की गई श्रीमद्भगवद्गीता को आज ही पढ़ूंगा। उन्होंने अभियान की ऐतिहासिक सफलता की कामना की।
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‘दि कश्मीर फाइल्स’ चलचित्र से संबंधित विशेष संवाद में अभिनेताओं ने प्रस्तुत की स्पष्ट भूमिका !

Posted: 29 Mar 2022 08:42 AM PDT

'दि कश्मीर फाइल्स' चलचित्र से संबंधित विशेष संवाद में अभिनेताओं ने प्रस्तुत की स्पष्ट भूमिका !
'दि कश्मीर फाइल्स' चलचित्र को मिलनेवाले प्रतिसाद से दिखाई दिया है कि 'समाज को सत्य देखना अच्छा लगता है ।' - भाषा सुंबली, 'दि कश्मीर फाइल्स' चलचित्र की अभिनेत्री

'दि कश्मीर फाइल्स' चलचित्र ने भारत में बडी क्रांति उत्पन्न की है । 32 वर्ष जो सत्य जनता से छिपाकर रखा गया था, वह लोगों के सामने आने से बडी जागृति हुई है । इस चलचित्र के पश्‍चात प्रदर्शित अनेक चलचित्रों से लोगों ने मुंह मोड लिया है । इससे लोगों ने स्पष्ट किया है कि, वे क्या देखना चाहते हैं, उन्हें क्या अच्छा लगता है । 'सब चलता है' ऐसा नहीं है, अपितु 'केवल सच चलता है !' (केवल सत्य देखना अच्छा लगता है) यह 'दि कश्मीर फाइल्स' चलचित्र को मिलनेवाले अभूतपूर्व प्रतिसाद से दिखाई दिया है, ऐसा स्पष्ट प्रतिपादन 'दि कश्मीर फाइल्स' चलचित्र में 'शारदा पंडित' नामक पीडित हिन्दू महिला की भूमिका साकारनेवाली प्रसिद्ध अभिनेत्री भाषा सुंबली ने किया । वे हिन्दू जनजागृति समिति आयोजित 'दि कश्मीर फाइल्स'को हिन्दू समाज की साथ : क्या है अभिनेताओं के मन में विचार ?' इस 'ऑनलाइन' विशेष संवाद में बोल रही थीं ।
अभिनेत्री भाषा सुंबली ने आगे कहा कि, यह चलचित्र 'कश्मीर में जो हुआ, वह भारत में अन्य स्थानों पर न हो', इसकी भी जागृति कर रहा है; परंतु जिन लोगों को यह सत्य नहीं चाहिए, जिन लोगों ने कश्मीरी हिन्दुओं का नरसंहार किया है, जिन्हें यह नरसंहार छिपाना है, वही लोग इस चलचित्र का विरोध कर रहे हैं । इस चलचित्र के कारण देशभर में जागृति होने से यह विषय समाप्त हो गया है, ऐसा नहीं है, अपितु इससे केंद्र सरकार को सक्रिय होकर कश्मीरी हिन्दुओं को न्याय दिलवाने के लिए कार्यवाही करनी चाहिए ।


इस समय अभिनेता तथा लेखक श्री. योगेश सोमण ने कहा कि, कश्मीर के विषय पर इससे पूर्व 'हैदर', 'मिशन कश्मीर', 'रोजा' आदि अनेक चलचित्र प्रदर्शित हुए; परंतु इन चलचित्रों में कश्मीरी हिन्दुओं पर हुए अत्याचार दिखाने के स्थान पर एक पक्ष दिखाया गया । आतंकवादियों के प्रति सहानुभूति उत्पन्न करने से लेकर भारतीय सेना कश्मीर में कैसे अत्याचार कर रही है, यह दिखाया गया । इसलिए ये चलचित्र लोगों के मन में स्थान नहीं बना पाए । इसके विपरीत सत्य और वास्तविक जानकारी दिखाने के कारण 'दि कश्मीर फाइल्स' चलचित्र लोगों के मन में स्थान बना पाया है । यदि 'उरी', 'दि कश्मीर फाइल्स' आदि चलचित्र मोदी सरकार के प्रचार के लिए बनाए गए हैं, ऐसे आरोप लग रहे हों, तो इससे पूर्व के चलचित्र क्या कांग्रेस और तत्कालीन राज्यकर्ताओं के प्रचार के लिए बनाए गए थे ? 'हैदर' चलचित्र के प्रभाव से उसका एक कलाकार चलचित्र के पश्‍चात आतंकवादी कार्यवाहियों में सम्मिलित हो गया । विशिष्ट विचारधारा लोगों पर लादने का काम पहले हुआ हो, तो अब दूसरा पक्ष लोगों के सामने आना चाहिए । इस चलचित्र के कारण वाम विचारधारावाले, आधुनिकतावादी, उदारता मतवादी लोग चिंतित हो गए हैं; क्योंकि उनके द्वारा प्रस्तुत असत्य इतिहास पर प्रश्‍नचिन्ह उत्पन्न हो गया है । लोग उनकी पुस्तकों पर अनेक प्रश्‍न पूछ रहे हैं, ऐसा भी श्री. सोमण ने कहा ।
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*भारत की IPv6 प्रगति तथा लाभ*

Posted: 29 Mar 2022 12:43 AM PDT

*भारत की IPv6 प्रगति तथा लाभ*

-ए के तिवारी/सचिन राठौर,
भारत एक व्यापक स्वदेशी प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र को सक्षम करता हुआ डिजिटल विकास पथ की दिशा में प्रगति कर रहा है, जिसमें मजबूत डिजिटल बुनियादी ढांचे और सस्ती कीमत पर गुणवत्ता सेवा उपलब्धता जैसे प्रमुख स्तंभ हैं। विभिन्न पहलों जैसे सरलीकरण और सुधारों के माध्यम से, देश के सबसे दूर के हिस्से में डिजिटल पहुंच का विस्तार किया गया है। इस विकास यात्रा में, किसी देश के सामाजिक-आर्थिक विकास को सक्षम करने के लिए इंटरनेट को दुनिया भर में मान्यता मिली है। इसने डिजिटल तरीके से सशक्त समाज और बौद्धिक अर्थव्यवस्था को सक्षम बनाने में भी सक्रिय और महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों के अभूतपूर्व विकास तथा आधुनिकीकरण के लिए एक उत्प्रेरक के रूप में कार्य करता है और विभिन्न नागरिक केंद्रित सेवाओं के कुशल वितरण के लिए एक प्रभावी माध्यम के रूप में कार्य करता है। इसने देश के नागरिकों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाकर और ट्रिलियन-डॉलर की डिजिटल अर्थव्यवस्था के भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करके सभी के जीवन को समृद्ध बनाया है।

विश्व बैंक के एक अध्ययन से पता चलता है कि ब्रॉडबैंड की पहुंच में प्रत्येक 10% की वृद्धि विकासशील देशों में देश की जीडीपी वृद्धि को 1.38% बढ़ा देती है। भारत सरकार ने देश भर में अपने नागरिकों के लिए सस्ती, न्यायसंगत और समावेशी ब्रॉडबैंड पहुंच सुनिश्चित करने के लिए शानदार प्रयास किए हैं। 5जी, मशीन टू मशीन कम्युनिकेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग आदि जैसी नई उभरती प्रौद्योगिकियों के व्यापक प्रसार और ब्रॉडबैंड और इंटरनेट सेवाओं के प्रवेश के साथ भारत सरकार द्वारा डिजिटल पहल पर जोर देने के कारण बड़ी संख्या में इंटरनेट प्रोटोकॉल की आवश्यकता है ( IP) एड्रेस, वर्तमान में उपलब्ध IPv4 (IP संस्करण 4) पतों के पूल से परे हैं। जैसे-जैसे दूरसंचार नेटवर्क तेजी से विकसित हो रहे हैं और प्रति दिन बहुत से नवीन अनुप्रयोगों की शुरूआत के कारण प्रकृति में अधिक गतिशील होते जा रहे हैं, अधिक से अधिक आईपी एड्रेस की आवश्यकता कई गुना बढ़ गई है।

इंटरनेट प्रोटोकॉल (आईपी) संस्करण 4 लगभग चार दशक पहले इंटरनेट की शुरुआत के आसपास के समय में विकसित किया गया था। हालाँकि IPv4 मजबूत, आसानी से लागू करने योग्य और इंटरऑपरेबल सिद्ध हुआ है, प्रारंभिक डिज़ाइन ने इंटरनेट, नेटवर्क समर्थित उपकरणों और IPv4 एड्रेस पूल की इम्पेंडिंग एक्सहॉशन की घातीय वृद्धि का अनुमान नहीं लगाया था।

भारत में IPv6 ट्रांजीशन और डिप्लॉयमेंट के प्रसार के प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए, दूरसंचार विभाग ने जुलाई 2010 में राष्ट्रीय IPv6 परिनियोजन रोडमैप जारी किया, जिसने देश में IPv6 पारिस्थितिकी तंत्र को विकसित करने में मदद की है। केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, सार्वजनिक उपक्रमों और अन्य सरकारी संगठनों, दूरसंचार सेवा प्रदाताओं, इंटरनेट सेवा प्रदाताओं, उपकरण निर्माताओं, क्लाउड कंप्यूटिंग/डेटा सेंटर प्रदाताओं, शैक्षणिक संस्थानों, सामग्री और एप्लिकेशन प्रदाताओं आदि सहित विभिन्न हितधारकों के व्यापक संवेदीकरण का कार्य किया गया, जिसके परिणामस्वरूप उनमें से कई IPv6 तैयार हो रहे हैं। लाभ को समेकित करने और पहले रोडमैप की उपलब्धियों से आगे बढ़ने के लिए, राष्ट्रीय आईपीवी 6 परिनियोजन रोडमैप (संस्करण- II) का दूसरा संस्करण मार्च 2013 में डीओटी द्वारा जारी किया गया था। विभिन्न क्षेत्रों में डीओटी के केंद्रित प्रयासों ने समय पर अपनाने का नेतृत्व किया है। IPv6 और विभिन्न क्षेत्रों में नवीन अनुप्रयोग के लिए क्षमता प्रदान करता है। इसके अलावा, IPv6 समाधानों की तैनाती में तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए, DoT ने विभिन्न उद्योग वर्टिकल के लिए IPv6 आधारित समाधान/वास्तुकला/केस स्टडी प्रथाओं पर एक संग्रह भी प्रकाशित किया था।

IPv6, जिसे नब्बे के दशक के मध्य में इंटरनेट इंजीनियरिंग टास्क फोर्स (IETF) द्वारा विकसित किया गया था, इंटरनेट प्रोटोकॉल (IP) की अगली पीढ़ी (संस्करण 6) है। IPv6 IPv4 में उपयोग किए गए 32 बिट्स के बजाय एड्रेसिंग के लिए 128 बिट्स का उपयोग करके बढ़ी हुई एड्रेसिंग क्षमता प्रदान करता है, जिसके परिणामस्वरूप IP पतों का एक बहुत बड़ा पूल (IPv4 से 10 ^ 28 गुना बड़ा) की उपलब्धता होती है, जो कि निकट भविष्य के लिए पर्याप्त लगता है। बड़ी संख्या में एड्रेस की उपलब्धता के अलावा, IPv6 कई अन्य लाभ भी प्रदान करता है जैसे कि यह IPSec प्रोटोकॉल के अंतर्निहित सुरक्षा ढांचे के कारण बढ़ी हुई सुरक्षा प्रदान करता है। यह एंड-टू-एंड सुरक्षा, प्रमाणीकरण का समर्थन करता है जिससे अनुप्रयोगों में अंत से अंत तक सुरक्षा सरल हो जाती है। यह सेवा की बेहतर गुणवत्ता (क्यूओएस) के साथ एक सरलीकृत हैडर प्रारूप भी प्रदान करता है जो तेजी से रूटिंग और स्विचिंग में मदद करता है। IPv6 में परिभाषित एक ट्रैफिक क्लास और फ्लो लेबल फ़ील्ड भी है, जो कई अनुप्रयोगों जैसे वीओआईपी, इंटरेक्टिव गेमिंग, ई-कॉमर्स, वीडियो आदि के लिए स्ट्रीमिंग में सुधार करता है।

अन्य IPv6 लाभों में ऑटो कॉन्फ़िगरेशन शामिल है जो एक प्लग एंड प्ले सुविधा है जो नेटवर्क कॉन्फ़िगरेशन को सरल बनाती है, खासकर जब उपकरणों की संख्या बहुत बड़ी हो। यह स्मार्ट शहरों और एम2एम/आईओटी नेटवर्क के कार्यान्वयन में फायदेमंद होगा जहां यह अनुमान है कि बड़ी संख्या में स्मार्ट सेंसर/उपकरण तैनात किए जाएंगे। साथ ही, यह नेटवर्क को संकट की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया देने में मदद करेगा और तदर्थ नेटवर्क पुनर्गठन की सुविधा प्रदान करेगा। IPv6 को बहुत सी नई विशेषताओं के साथ डिजाइन किया गया है जिससे ऐसे नवीन अनुप्रयोगों को विकसित करना संभव है जो वर्तमान IPv4 प्रोटोकॉल में आसानी से संभव नहीं हैं जैसे सेंट्रलाइज्ड बिल्डिंग मैनेजमेंट सिस्टम, रूरल इमरजेंसी हेल्थ केयर, टेली-एजुकेशन / डिस्टेंस एजुकेशन, स्मार्ट ग्रिड, इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम आदि। IPv6 M2M / IoT इंफ्रास्ट्रक्चर को सपोर्ट करने के अलावा वेबसाइटों की स्केलेबिलिटी और स्पीड को भी बढ़ावा देगा। स्मार्ट मीटरिंग, स्मार्ट ग्रिड, स्मार्ट बिल्डिंग, स्मार्ट सिटी आदि क्षेत्रों में आईपीवी6 आधारित नवोन्मेषी अनुप्रयोगों को अपनाने से आम नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार होता रहेगा।

प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की स्थिति लेने की दृष्टि के साथ, भारत ने विश्व औसत 28.18% की तुलना में लगभग 77% IPv6 क्षमता हासिल की है, और संयुक्त राज्य अमेरिका (47.58%), जापान (32.38%) जैसे विकसित देशों से आगे है। ) यूनाइटेड किंगडम (32.61%) और चीन (19.58%)। वैश्विक स्तर पर भारत इस प्रयास में पिछले 2 वर्षों से अग्रणी स्थिति बनाए हुए है। 2014 से अब तक, भारत द्वारा IPv6 अपनाने में उत्कृष्ट प्रगति हासिल की गई है, जो इस तथ्य से स्पष्ट है कि APNIC (एशिया पैसिफिक नेटवर्क इंफॉर्मेशन सेंटर) की रिपोर्ट के अनुसार, जो इंटरनेट नंबर संसाधनों (आईपी पते और एएस नंबर) का वितरण और प्रबंधन करता है। एशिया प्रशांत क्षेत्र में, IPv6 उपयोगकर्ताओं का प्रतिशत (यानी, IPv6/कुल अनुपात) जनवरी 2015 में 3.22% से बढ़कर जनवरी 2020 में 67.9% CAGR पर 24.33% हो गया है। साथ ही, आईपीवी6 उपयोगकर्ताओं के लिए भारत की सीएजीआर वृद्धि 413.70% रही है जो कि संयुक्त राज्य अमेरिका (सीएजीआर-33.90%) और जापान (सीएजीआर-31.20%) जैसे विकसित देशों की तुलना में अभूतपूर्व है। साथ ही, उपयोगकर्ताओं की कुल संख्या (IPv6 + IPv4) 12% CAGR से बढ़ी है। इस प्रकार, यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि दुनिया भर में IPv6 उपयोगकर्ताओं की संख्या IPv4 उपयोगकर्ताओं की संख्या की तुलना में बहुत तेज़ी से बढ़ रही है और IPv6 संक्रमण के लिए भारत के निरंतर प्रयासों के कारण, भारत विश्व स्तर पर अग्रणी है।

इसके अलावा, एनआईसी (राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र) जो अधिकांश सरकारी वेबसाइटों और अनुप्रयोगों को होस्ट करता है, एनआईसीएनईटी का मुख्य बुनियादी ढांचा अब पूरी तरह से आईपीवी 6 का अनुपालन कर रहा है और विभिन्न मंत्रालयों और राज्य केंद्रों में इसका बुनियादी ढांचा भी आईपीवी 6 तैयार हो गया है। साथ ही, कई संगठन अब IPv6 पर नई IP आधारित सेवाओं (जैसे क्लाउड कंप्यूटिंग, डेटा सेंटर आदि) का प्रावधान कर रहे हैं। मानक विकास संगठन (एसडीओ) जैसे कि इंटरनेट इंजीनियरिंग टास्क फोर्स (आईईटीएफ), ईटीएसआई और 3 जीपीपी अपने प्रोटोकॉल के माध्यम से, विभिन्न देशों द्वारा जबरदस्त प्रगति हासिल करने के लिए मानक भी लगातार योगदान दे रहे हैं जो इस तथ्य से स्पष्ट है कि आईईटीएफ को अब आईपीवी 4 संगतता की आवश्यकता नहीं है। नए या विस्तारित प्रोटोकॉल। साथ ही, 3GPP 5G स्टैंडअलोन (SA) में IPv6 को अनिवार्य बनाने पर विचार कर रहा है।

भारत सरकार और सभी हितधारकों के सम्मिलित प्रयासों के परिणामस्वरूप, भारत में अधिकांश सेवा प्रदाता IPv6 ट्रैफ़िक को संभालने और IPv6 सेवाओं की पेशकश करने के लिए तैयार हो गए हैं। बड़ी संख्या में क्लाउड सेवा प्रदाताओं और उपकरण निर्माताओं ने विभिन्न नवीन अनुप्रयोगों के लिए IPv6 को सफलतापूर्वक तैनात और उपयोग किया है। बड़ी संख्या में कंपनियों ने भी IPv6-ओनली सेवा वितरण में परिवर्तन किया है। राष्ट्रीय डिजिटल संचार नीति (NDCP-2018) में सभी शेष संचार प्रणालियों, उपकरणों, नेटवर्क और उपकरणों के लिए IPv6 में परिवर्तन की भी परिकल्पना की गई है।

लाभ को मजबूत करने और हासिल किए गए मील के पत्थर के आगे और निर्माण करने की आवश्यकता है। इसे आगे बढ़ाने के लिए, सेवा प्रदाताओं, सामग्री और एप्लिकेशन प्रदाताओं, क्लाउड सेवा प्रदाताओं और उपकरण निर्माताओं को अपने मौजूदा सिस्टम और ग्राहक आधार उपकरणों के दोहरे-स्टैक और देशी IPv6 के साथ चरण-वार प्रतिस्थापन / उन्नयन की लागत का प्रावधान करना चाहिए। उनका वार्षिक कैपेक्स। सभी नए ग्राहक कनेक्शन IPv6 पर प्रदान किए जाने चाहिए और विभिन्न प्रकार के उपकरणों की सभी नई खरीद में IPv6 तत्परता का अनिवार्य अनुपालन खंड होना चाहिए।

डिजिटल कनेक्टिविटी के व्यापक होने और सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए इंटरनेट एक प्रमुख संसाधन के रूप में, यह समय की आवश्यकता है कि सभी हितधारक अर्थात सरकार, सेवा प्रदाता, शिक्षा, अनुसंधान एवं विकास संस्थान, उपकरण निर्माता, क्लाउड कंप्यूटिंग और डेटा केंद्र, सामग्री और एप्लिकेशन प्रदाता आदि को एक साथ आना चाहिए और IPv6 ट्रांजिशन पूरा करने के लिए समन्वित प्रयास करना चाहिए। स्वास्थ्य, शिक्षा, बैंकिंग, बीमा, परिवहन, दूरसंचार, रेलवे, स्मार्ट सिटी आदि जैसे विभिन्न क्षेत्रों में इसका उपयोग अद्यतन तकनीकी समाधानों के कार्यान्वयन को बढ़ावा देगा। समय के साथ, हितधारकों द्वारा IPv4 के उपयोग योग्य जीवन काल को बढ़ाने के लिए कई तकनीकी तरीकों को अपनाया गया है, लेकिन इसके परिणामस्वरूप नेटवर्क के बुनियादी ढांचे और बढ़ी हुई लागत में जटिलता बढ़ गई है। इंटरनेट प्रौद्योगिकी और सेवाओं में भविष्य के विकास और नवाचार को सुनिश्चित करने के लिए सभी हितधारकों द्वारा आईपीवी 6 में पूर्ण परिवर्तन को अपनाया जाना उचित समय है। IPv6 के लिए समय पर संक्रमण भारत को डिजिटल इंडिया पारिस्थितिकी तंत्र को गति प्रदान करने के अलावा उभरती डिजिटल प्रौद्योगिकियों के नेतृत्व में बिग टेक क्रांति की जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार करेगा।

***नोट- यह लेख श्री ए के तिवारी, सदस्य (प्रौद्योगिकी), डिजिटल संचार आयोग एवं श्री सचिन राठौर, एडीजी (एनटी-आई),डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशन के द्वारा साझा रूप में लिखा गया है।
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कहाँ लिखा है?

Posted: 28 Mar 2022 10:11 PM PDT

कहाँ लिखा है?

"कहाँ लिखा है?" कॉमरेड फटाक से पूछते हैं। आपको भी पूछना चाहिए कि कहाँ लिखा है। इससे फायदा ये होगा कि "पर धर्मो भयावह" तो फ़ौरन भगवद्गीता (3.35) से निकल आएगा। इसकी तुलना में "सर्भ गर्म वड़ा पाव" या "सर्व धर्म समभाव" जैसे अजीबोगरीब संवाद कहीं से नहीं निकलेंगे। यकीन न हो तो कोशिश करके देख लीजिये!
क्रिस्टोफ़र कोलंबस का मानना था कि दुनियां गोल है | लेकिन वो ज़माना बाइबिल का था और सभी धार्मिक विद्वान मानते थे कि धरती चपटी है | इसलिए अगर समंदर के रास्ते कोलंबस अपना जहाज लेकर भारत ढूँढने निकलता तो वो किनारे पर जाकर नीचे टपक जाता ! जाहिर है जिस राजा को ऐसे बुद्धिजीवी सलाह दे रहे हों, वो ऐसे सफ़र के लिए जहाज और इजाज़त कैसे देते ?
कोलंबस अड़ियल आदमी था | उसने चर्च को सोने का लालच दिया, गुलामों का लोभ दिखाया मगर वो मानने के लिए राज़ी ही नहीं होते थे ! हर बार उनकी बात आकर 'लॉजिकल रीजनिंग' पर अटक जाती | हर बार कोलंबस से कहा जाता, कहाँ लिखा है दिखाओ ! कैसे मान लें तुम्हारी बात की धरती चपटी नहीं है ? हर बार कोलंबस निराश लौटता |
आखिर कोलंबस ने तर्क पर लट्ठ जड़ देने का मन बनाया | वो तथाकथित 'बुद्धिजीवियों' को उठाकर समुन्दर के किनारे ले गया | उसने बताया कि अगर धरती चपटी होती तो दूर समुद्र से आता जहाज एक बार में ही पूरा दिखना शुरू हो जाता | ये पहले झंडा नजर आता है, फिर पाल और मस्तूल दिखते हैं, उसके बाद जहाज का मुख्य हिस्सा धीरे धीरे नजर आना शुरू होता है | इसको देखकर क्या आपको ऐसा नहीं लगता कि जहाज किसी नीची जगह से ऊपर की तरफ आ रहा है ?
अगर चपटी होती धरती तो ये गहराई-ऊंचाई का फर्क कैसे है ? हर जगह, फ़्रांस से इंग्लैंड से ग्रीस से ऐसा ही कैसे होता है कि वो जगह ऊँची हो जाती है और बाकी जगह नीची ? इस साधारण से तर्क के लिए कोई वैज्ञानिक शोध का खर्च नहीं आया था | कोई बहुत पढ़ा लिखा होने की भी जरुरत नहीं थी | जरुरत थी तो बस ये मानने की कि सब कुछ कोई तथाकथित बुद्धिजीवी ही नहीं जानता | कोलंबस को जहाज भी मिला था | वो गलत जगह यानि अमेरिका जा पहुंचा था | वहां जब उसे प्रयाप्त सोना नहीं मिला तो वो चर्च का खर्चा चुकाने के लिए कई गुलाम पकड़ के ले गया था |
कई बार लोग ये सोचकर नहीं लड़ते हैं कि हमारे विरोधियों के पास तो काफ़ी ज्यादा शोध (Research) से इकठ्ठा की हुई जानकारी है | लेकिन किसी भी तथाकथित बुद्धिजीवी के झूठ को आप अपनी सामान्य बुद्धि से समझ सकते हैं | आखिर उसे झूठ साबित करने के लिए कितने तर्क चाहिए ? यू ट्यूब पर मौजूद विडियो में उतनी जानकारी मिल जाएगी आपको | इन्टरनेट पर मुफ्त के लेख मौजूद होते हैं, उनसे पढ़कर आप खुद ही लिख सकते हैं | किसी और का मूंह कब तक देखेंगे ? कितना इंतजार करना है ?
अभी हाल का अमेरिका के कई स्कूलों में आजादी से पूर्व के भारत को "India" के बदले जब दक्षिण-एशिया नाम देने की मूर्खतापूर्ण वामपंथी कोशिश हुई तो ऐसे ही एक मामूली से तर्क से उन्हें रोका गया था | मामूली सा सवाल था, अगर इंडिया 1947 से पहले था ही नहीं तो कोलंबस कहाँ का रास्ता ढूँढने निकला था ?
आपके खुद सवाल ना करने का एक नतीजा ये भी है कि आपके सवालों के अभाव में आपके विरोधियों को कई विचारकों को गायब कर देने का मौका मिल जाता है | लोहिया ने 'राम, कृष्ण और शिव' जैसे कई अच्छे लेख लिखे हैं लेकिन आपके समर्थन के अभाव में ऐसी किताबें गायब हो गई | जिन्होंने अपने पी राजन जैसे कार्यकर्ताओं की लाश बेच खाई, वो लोग आज भगत सिंह जैसे क्रांतिकारियों के वामपंथी होने की घोषणा कर रहे हैं |
कल तक जो 'अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता' की बातें कर रहे थे वो आज विरोध का स्वर उठाने वाले उत्कर्ष सिंह को कुचलने भी आ गए हैं | दीमक की तरह ख़ामोशी से, आपकी चुप्पी, आपकी ही नींव को खोखला करती जा रही है | चेहरे पर दो चार पानी के छींटे मारिये, थोड़ा होश में आइये हुज़ूर |
वैसे तो भारतीय लोगों को रामायण के बारे में इतना पता होता है कि शबरी कह देना भर काफी है पूरी कहानी सुना देने के लिए | मगर विकट समस्या ये है कि हम तो पहले ही जानते हैं के मुगालते में पड़े आम हिन्दुओं ने ना तो रामायण या रामचरितमानस जैसी किताबें घर में खरीद कर लाने की जहमत उठाई ना पन्ने पलटा कर देखने की |
पढ़े लिखे और अनपढ़ के बीच का फर्क मोटे तौर पर यहीं ख़त्म हो जाता है | अ से अनार और आ से आम पढ़ना सीखने के बाद चुंकि शौक से कोई किताब पढ़ने का आँखों, उँगलियों और दिमाग को कष्ट दिया ही नहीं है इसलिए जिसे पढ़ना नहीं आता था और जिसे आता था उन दोनों में ज्यादा अंतर नहीं है | क्योंकि पढ़ा तो दोनों ने ही नहीं है ना ?
मोटे तौर पर ये कहानी कुछ यूँ है कि शबरी कोई आदिवासी, शायद भील भक्त थी | बरसों से गुरु के पास सीखा और तप करती हुई अकेले वन में रहती थी | प्रभु कभी आयेंगे उसे भी दर्शन देंगे इस आशा में वृद्ध हो चली | ऐसे में एक रोज उसके आश्रम में श्री राम पधारे | अब जंगल में रहने वाली वृद्धा के पास स्वागत के लिए क्या उपलब्ध होता ?
तो वो वहीँ जो कंद-मूल उसके पास थे उन्ही से स्वागत करने बैठी | थाली में बेर परोसे और खुद चख चख कर श्री राम को देती जाती | अब लक्ष्मण भौचक्के हुए ! ये क्या ! जूठे बेर दिए जा रही है, और रामचंद्र भी हैं, कि खाए जा रहे हैं | तो उन्होंने प्रभु को टोका | श्री राम ने कहा, जाने दो लक्ष्मण, वो अपने हिसाब से जांच जांच कर देती है | कहीं कोई खट्टा बेर ना जाए, मैं उसका प्रेम ग्रहण कर रहा हूँ !
अब वापस सोशल मीडिया पर आइये | जब कभी भगत सिंह की शहादत का दिन, तो कभी कोई दूसरी उल जुलूल खबर उठा कर शेयर करते हैं, पोस्ट करते हैं, तब इस कहानी को फिर से याद करने की जरूरत होती है | पढ़ी होती तो शायद याद भी रहती | खुद जांचा कि कहीं कुछ "खट्टा" तो नहीं परोस दिया है ? नेट से सोशल मीडिया पर आई चीज़ को गूगल पर सर्च कर लेना कोई मुश्किल नहीं होगा |
अगर रामायण पढ़ डाली होती तो दो फायदे होते | एक तो सीधा फायदा ये कि शबरी की तरह खुद जांच कर देना सीख जाते | दूसरा ये कि ये किताबें काव्य में लिखी हैं, इनमें अलंकार होता है | एक ही वाक्य के कई मतलब बनाना भी देख देख कर सीख पाते | तो अगर झूठ भी बोलते तो वो ऐसे घुमा पाते कि विरोधियों के लिए काटना मुश्किल होता | या आप एक ख़ास किताब पर मिलने वाला जवाब दे पाते कि, "आप सही मतलब नहीं समझ पाए" बाकी रामायण जैसे ग्रन्थ ना उतने महंगे होते हैं कि आप जुटा ना पायें, ना रोज़ दो चार पन्ने पढ़कर उन्हें ख़त्म करना नामुमकिन है | हाँ, आलस्य-प्रमाद के मारे नहीं हो पा रहा तो श्री श्री रामधीर सिंह जी कह ही गए हैं, जाने दीजिये, आपसे ना हो पायेगा !
हम महाभारत पढ़ लेने की सलाह क्यों देते हैं? क्योंकि महाभारत पढ़ लेने पर आप "व्याध गीता" भी पढ़ लेंगे। उसे पढ़ते ही आपकी समझ में आ जायेगा कि धर्म व्याध पेशे से व्याध था और मांस बेचता था, फिर भी कश्यप नाम के ब्राह्मण उससे धर्म की शिक्षा ले रहे होते हैं। तो व्यक्ति का पेशा नहीं, उससे क्या सीखा जा सकता है, केवल ये देखना चाहिए।
कंगना जब आपके पक्ष में बोले तो उसका भरपूर प्रयोग करें, जब नहीं बोल रही हो तो उसे वैसे ही अनदेखा कीजिये जैसे पंथियों (विदेशियों की फेंकी हुई बोटियों पर पलने वाले वामपंथी टुकड़ाखोरों) ने गृह प्रवेश की पूजा करते दिखने पर स्वरा भास्कार को किया था। इतनी साधारण सी बात समझने के लिए कौन सा रॉकेट साइंस पढ़ना है?
विदेशियों की नक़ल किये बिना काम कैसे चलता? तो जैसे फिरंगी रानी के दौर में उपनिवेशवादी साहेब लोगों के घरों में हुआ करता था, वैसा ही एक ड्रेसिंग टेबल भारतीय घरों में भी आने लगा। अब यहाँ एक समस्या थी। नक़ल के लिए अकल की जरूरत होती है। फिरंगी मेम के बच्चे संभालने के लिए तो आया होती थी, लेकिन अधिकांश भारतीय घरों में धाय माँ नहीं, केवल माँ होती थी। लिहाजा दो-तीन वर्ष के बच्चों की पहुँच में जैसे ही माता श्री लिपस्टिक-स्नो पाउडर आने लगता, वो मौका पाते ही उसे पोतकर तैयार हो जाते!
जबतक माता श्री को अंदाजा होता कि घर में कोई आवाज नहीं आ रही, बच्चों के होने पर भी इतना सन्नाटा कैसे है, तबतक उस दो फुट की ऊंचाई वाले दराज से तमाम ताम-झाम बाहर बिखर चुके होते। बालिका (या बालक भी) पाउडर से पूरा मुंह पोते, लिपस्टिक-काजल से रंग रोगन किये, भोली सी शक्ल बनाए मौका ए वारदात पर मौजूद होती। अब ऐसी भली सी शक्ल पर पिटाई तो छोड़िये डांटना भी मुश्किल है। यद्यपि माता श्री का धो देने का पूरा इरादा होता लेकिन हंसकर बच्चे-बच्ची का सिर्फ मुंह धुला कर वापस गोद में ले आया जाता।
अब जब शंकराचार्य का लिखा देवी अपराधक्षमापन स्त्रोत देखेंगे तो आपको वही चेहरे पर पाउडर, लिपस्टिक-काजल पोते कोई भोला भाला सा बच्चा नजर आएगा। ये बालक स्वीकारता है कि उसे ना मन्त्र की जानकारी है, ना यंत्रों की, किसी ज्ञान-विज्ञान या सुख की अपेक्षा से भी वो ये नहीं कर रहा। वो हनुमान जैसे कोई सरल से भक्त हैं, जिन्हें पता चला कि श्री राम की आयु बढ़ाने के लिए माता सीता सिन्दूर लगा रही हैं, तो वो पूरे शरीर में ही सिन्दूर पोत आये हैं। तभी ऐसे सुन्दर स्त्रोत की रचना के बाद भी वो कहते हैं - "नाराधितासि विधिना विविधोपचारैः किं रुक्षचिन्तनपरैर्न कृतं वचोभिः ।"
जो पहले से ही शंकराचार्य घोषित हैं, उनके संस्कृत के ज्ञान और उच्चारण में दोष ढूंढना भी करीब-करीब असंभव ही होता। ऊपर से वो कहते हैं "मया पञ्चाशीतेरधिकमपनीते तु वयसि", मतलब आयु पचासी की है तो अभ्यास भी करीब अस्सी वर्षों का होगा। इसपर जब वो आश्वस्त नहीं हैं कि उनकी विधियाँ और पाठ शुद्ध ही रहा होगा, तो आम आदमी कौन सा तीस मार खान है कि सारा अनुष्ठान सही ही कर रहा होगा? ऐसे में भी आप मान लेते हैं कि आपसे गलत पाठ हो जाएगा तो कोई बड़ा दोष पड़ जायेगा! नहीं पड़ सकता। माता के पास नहीं पड़ता।
अब सवाल ये है कि जब ये साधारण सी बात पता थी कि माता के पास दोष नहीं पड़ेगा तो उल्टा क्यों माने बैठे थे? इसका जवाब ब्रूस लिप्टन नाम के एक वैज्ञानिक की किताब "द बायोलॉजी ऑफ़ बिलीफ" में आया था। उसमें सोलोमन द्वीप के कुछ आदिवासीयों का जिक्र है। ये लोग किसी हरे भरे पेड़ को काटते नहीं। जब इन्हें लकड़ी की जरूरत होती थी तो ये लोग एक पेड़ चुनते और रोज जाकर उस पेड़ के पास खड़े होकर उसे कोसना, उसकी बुराई करना, खामियां निकालना, गालियाँ देना शुरू कर देते। आश्चर्यजनक रूप से पेड़ कुछ ही दिनों में सूख जाता।
आपके धर्म के साथ भी यही हुआ है। स्कूल-कॉलेज की किताबों में, फिर फिल्मों, नाटक, गीत-संगीत के जरिये, कला-साहित्य में, अख़बारों-पत्रिकाओं और टीवी-इन्टरनेट के माध्यम से दशकों तक आपकी धार्मिक व्यवस्था के हर अंग को कोसा गया है। सोचिये कि सेक्युलर होने का मतलब धर्म को शासन से अलग रखना कैसे सिखाया गया? अधिकारिक अनुवादों में तो संविधान के "सेक्युलर" का हिंदी अनुवाद "पंथनिरपेक्ष" है, धर्मनिरपेक्ष तो लिखा ही नहीं! धार्मिक व्यवस्था देश की सामाजिक व्यवस्था से अलग होती है, फिर आपके ही धार्मिक त्योहारों पर आपको सामाजिक बुराइयों के लिए कैसे कोसा जाता है?
पेड़ से फल, छाया, या शुद्ध वातावरण जैसे जो फायदे उन्हें मिल रहे थे, उससे आगे बढ़कर वो पेड़ को सुखा डालना चाहते हैं, ताकि लकड़ी काटी जाए और जो जगह पेड़ ने घेर रखी है, वहां कुछ और बना लिया जाए। जितनी बार वो बुराई करें, उतनी बार आपको खुद तारीफ करके मनोबल को बढ़ाना होगा, ताकि धर्म का वृक्ष हरा-भरा रहे। पूरा पाठ नहीं कर पाते तो एक अध्याय पढ़िए, रात्रि सूक्त पढ़िए, अर्गला स्त्रोत पढ़िए, देवी अपराधक्षमापन पढ़िए, और ये मानकर पढ़िए कि वृक्ष को हरा-भरा बनाए रखने के लिए आप खाद-पानी दे रहे हैं।
बाकी ये याद रखिये कि आपकी अगली पीढ़ी तक धर्म को पहुँचाने का जिम्मा आपका है। आपके बच्चों को सिखाने कोई पड़ोसी आये, इसका इंतजार तो आप नहीं करते होंगे ना?
✍🏻आनन्द कुमार जी की पोस्टों से संग्रहित
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मुख्यमंत्री ने बिहार संग्रहालय का भ्रमण कर निरीक्षण किया, अधिकारियों को दिये आवष्यक निर्देश

Posted: 28 Mar 2022 10:01 PM PDT

मुख्यमंत्री ने बिहार संग्रहालय का भ्रमण कर निरीक्षण किया, अधिकारियों को दिये आवष्यक निर्देश 

संस्कृति और विरासत बिहार की पूॅजी रही है। नई पीढ़ी को बिहार के गौरवषाली इतिहास को जानने और समझने के बाद काफी प्रसन्नता होगी- मुख्यमंत्री
पटना, 28 मार्च 2022:- मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने आज बिहार संग्रहालय का भ्रमण कर निरीक्षण किया और अधिकारियों को आवष्यक निर्देष दिये। निरीक्षण के दौरान वहाॅ के प्रदर्षों का अवलोकन कर मुख्यमंत्री ने विस्तृत जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने अध्ययन केन्द्र, दीर्घा, बाल दीर्घा, वन्य जीव, विभिन्न राजवंषों के इतिहास सहित सिक्के, मूर्ति, अन्य अवषेषों का बारिकी से अवलोकन कर विस्तृत जानकारी ली।
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री के परामर्शी सह बिहार संग्रहालय के महानिदेषक श्री अंजनी कुमार सिंह ने मुख्यमंत्री को बिहार संग्रहालय के विभिन्न दीर्घाओं के प्रदर्षों के संबंध में विस्तृत जानकारी दी तथा बताया कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से भी यहाॅ के प्रदर्षों के संबंध में भी लोग अवगत हो सकते हैं, इसकी भी व्यवस्था की गयी है।
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि संस्कृति और विरासत बिहार की पूॅजी रही है। प्रदर्षों को ठीक ढ़ंग से सुरक्षित रखने की पूरी व्यवस्था की जाय। बिहार के समृद्ध इतिहास को नई पीढ़ी को जानकारी देने के लिये अंतर्राष्ट्रीय स्तर का बिहार संग्रहालय बनाया गया है। पुरातात्विक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण अवषेषों को यहाॅ सुरक्षित रखा गया है ताकि बिहार के गौरवषाली इतिहास के बारे में एक-एक चीज की जानकारी लोगों को मिल सके।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देष देते हुये कहा कि सभी प्रदर्षों के बारे में हिन्दी और अंगे्रजी में विस्तृत रूप से लिखवायें ताकि लोगों को एक-एक चीज की जानकारी सहज ढ़ंग से मिल सके। जो भी अवषेष यहाॅ रखे गये हैं, वो कहाॅ से मिले हैं, उनका काल खण्ड क्या है, उनसे संबंधित ऐतिहासिक तथ्य क्या हैं, इन सब चीजों के बारे में ठीक ढ़ंग से बड़े अक्षरों में लिखवायें ताकि नई पीढ़ी उसे देखने के साथ-साथ पूरी तरह समझ सके और उन्हें अपने पौराणिक इतिहास के बारे में आइडिया मिल सके। नई पीढ़ी को बिहार के गौरवषाली इतिहास को जानने और समझने के बाद उन्हें काफी प्रसन्नता होगी।
निरीक्षण के दौरान षिक्षा मंत्री श्री विजय कुमार चैधरी, मुख्यमंत्री के परामर्शी सह बिहार संग्रहालय के महानिदेषक श्री अंजनी कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री दीपक कुमार, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डाॅ0 एस0 सिद्धार्थ, मुख्यमंत्री के अतिरिक्त परामर्षी श्री मनीष कुमार वर्मा, मुख्यमंत्री के सचिव श्री अनुपम कुमार, कला-संस्कृति एवं युवा विभाग की सचिव श्रीमती बंदना प्रेयसी, मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी श्री गोपाल सिंह सहित अन्य वरीय अधिकारी मौजूद थे।

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