दिव्य रश्मि न्यूज़ चैनल - 🌐

Breaking

Home Top Ad

Post Top Ad

Saturday, March 19, 2022

दिव्य रश्मि न्यूज़ चैनल

दिव्य रश्मि न्यूज़ चैनल


दरख़्त का दर्द

Posted: 19 Mar 2022 07:52 AM PDT

दरख़्त का दर्द

मैंने पूछा पेड़ प्यारे तुम हमें शीतल छाया देते हो 
प्राणवायु जीवनदायिनी जीवन रक्षा कर लेते हो 

बोला पेड़ पीढ़ियों से हम परोपकार करते आए 
दर्द सहा जाने कितना किंतु बोल नहीं हम पाए 

अंधाधुंध कटाई कर दी नर को लालच ने मारा है 
आओ पेड़ लगाओ मिलकर कितना प्यारा नारा है 

हरे पेड़ को काट काट कितना प्रदूषण फैला देते 
जीवनदाता को भी पीड़ा आखिर क्यों पहुंचा देते 

हम बहारों के संवाहक बन घने मेघों को लाते हैं 
उमड़ घुमड़कर काले बादल वर्षा जल बरसाते हैं 

फल फूल हरियाली से सुंदर सी धरा लहराती है 
उर उमंगे ले हिलोरे चमन कलियां महकाती है 

वृक्ष लताओं से ही वादियां सुंदर सी प्यारी लगती 
धानी चुनरिया ओढ़कर जब धरा मोहक सजती 

निज स्वार्थ के वशीभूत मत पेड़ों को काटो प्यारे 
पेड़ लगाकर प्रकृति का सुख सबको बांटो प्यारे

रमाकांत सोनी सुदर्शन
नवलगढ़ जिला झुंझुनू राजस्थान
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag

आई होली मस्तानी

Posted: 19 Mar 2022 07:39 AM PDT

आई होली मस्तानी

सबके दिल को जीता, सबके मन को भा गया। 
यू.पी. में लो फिर से, अब योगी राज आ गया। 
खुशियां ले चेहरे पर, छाया रंग होली का सारा। 
मधुर तराने गीत गूंजे, बोले तुन तुन तारा रा रा। 
जोगीरा सा रा रा रा,जोगीरा सा रा रा रा

मोदी मन की बात करे, फागुन का मस्त महीना। 
खुशहाली हो मेरे देश में, देश की खातिर जीना। 
प्रीत रंग में दुनिया देखूं, सद्भावों की बहती धारा। 
बजे चैन की बंशी हरदम, झूमे तुन तारा रा रा रा।
जोगीरा सा रा रा रा,जोगीरा सा रा रा रा

दिल्ली दिल है भारत का, मुस्कान मुंबई छाई। 
पंजाब प्रेम सरिता बहती, गले मिलते भाई भाई। 
राजस्थान राष्ट्र गौरव, असम आंख का तारा। 
मेघालय अरुणाचल केरल, बहती गंगा धारा। 
जोगीरा सा रा रा रा,जोगीरा सा रा रा रा रा।

रंगों की छटा मनभावन, चंग धमाल धुन प्यारी। 
भांति भांति के स्वांग रचाकर, नाच रहे नर नारी।
फाग उत्सव त्योहार रंगीला, बहती प्रेम की धारा।
 बंसी की तान पर झूमे, गाए तुन तुन तारा रा रा। 
जोगीरा सा रा रा रा रा,जोगीरा सा रा रा रा रा।

रमाकांत सोनी नवलगढ़
जिला झुंझुनू राजस्थान
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag

बेटे का फर्ज

Posted: 19 Mar 2022 07:38 AM PDT

बेटे का फर्ज

मां-बाप तीर्थ समान श्रद्धा से सेवा पूरी कीजिए 
पाल पोसकर योग्य बनाया दुख ना कभी दीजिए 

बुढ़ापे की लाठी बन बेटे का फर्ज निभा लेना 
आशीषों से झोली भर पुण्य जरा कमा लेना

श्रवणकुमार सुकुमार पुत्र लेकर अंधे मां-बाप 
चारों धाम तीर्थ कराया सह सर्दी बरखा ताप 

मर्यादा पुरुषोत्तम राम जब चले गए वनवास 
दशरथ आज्ञा पालन कर जनमन हुये खास 

जन्मदाता भाग्य विधाता जो धरती के भगवान 
पुत्र रत्न पाकर हो हर्षित जीवन का देते ज्ञान 

तिरछे नैन कटू वाणी से हृदय छलनी ना कर देना 
स्वर्ग बसा उन चरणों में सुख से झोली भर लेना 

बेटों का यह फर्ज नहीं जो वृद्धाश्रम तक पहुंचाये 
जिसने तुमको योग्य बनाया उनको आंख दिखाये

सारे तीर्थों का पुण्य मिले उनके आशीष में जीवन 
महक जाए घर की फुलवारी खिले सुहाना उपवन 

उनकी हर इच्छा पूरी कर बेटे का धर्म निभा लेना 
संस्कारों का पोषण कर नव पीढ़ी को सीखा देना 

भारत मां के अमर सपूत प्राण न्योछावर कर जाते 
सरहद पर रणवीर खड़े जो माटी का फर्ज निभाते

रमाकांत सोनी नवलगढ़
जिला झुंझुनू राजस्थान
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag

20 मार्च 2022, रविवार का दैनिक पंचांग एवं राशिफल - सभी १२ राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन ? क्या है आप की राशी में विशेष ? जाने प्रशिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. प्रेम सागर पाण्डेय से |

Posted: 19 Mar 2022 07:28 AM PDT

20 मार्च 2022, रविवार का दैनिक पंचांग एवं राशिफल - सभी १२ राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन ? क्या है आप की राशी में विशेष ? जाने प्रशिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. प्रेम सागर पाण्डेय से |

20 मार्च 2022, रविवार का दैनिक पंचांग

🔅 तिथि द्वितीया 11:06 AM
🔅 नक्षत्र चित्रा 11:50 PM
🔅 करण :

                गर 10:09 AM

                वणिज 10:09 AM

🔅 पक्ष कृष्ण

🔅 योग घ्रुव 06:32 PM

🔅 वार रविवार

☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ

🔅 सूर्योदय 06:01 AM

🔅 चन्द्रोदय 08:07 PM

🔅 चन्द्र राशि कन्या

🔅 सूर्यास्त 05:59 PM

🔅 चन्द्रास्त 07:12 AM

🔅 ऋतु वसंत

☀ हिन्दू मास एवं वर्ष

🔅 शक सम्वत 1943 प्लव

🔅 कलि सम्वत 5123

🔅 दिन काल 12:06 PM

🔅 विक्रम सम्वत 2078

🔅 मास अमांत फाल्गुन

🔅 मास पूर्णिमांत चैत्र

☀ शुभ और अशुभ समय

☀ शुभ समय

🔅 अभिजित 11:33:13 - 12:21:37

☀ अशुभ समय

🔅 दुष्टमुहूर्त 04:23 PM - 05:12 PM

🔅 कंटक 09:56 AM - 10:44 AM

🔅 यमघण्ट 01:10 PM - 01:58 PM

🔅 राहु काल 04:29 PM - 06:00 PM

🔅 कुलिक 04:23 PM - 05:12 PM

🔅 कालवेला या अर्द्धयाम 11:33 AM - 12:21 PM

🔅 यमगण्ड 11:57 AM - 01:28 PM

🔅 गुलिक काल 02:58 PM - 04:29 PM

☀ दिशा शूल

🔅 दिशा शूल पश्चिम

☀ चन्द्रबल और ताराबल

☀ ताराबल

🔅 भरणी, रोहिणी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, आश्लेषा, पूर्वा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, विशाखा, ज्येष्ठा, पूर्वाषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, रेवती

☀ चन्द्रबल

🔅 मेष, कर्क, कन्या, वृश्चिक, धनु, मीन

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

पं.प्रेम सागर पाण्डेय् नक्षत्र ज्योतिष वास्तु अनुसंधान केन्द्र नि:शुल्क परामर्श - रविवार

20 मार्च 2022, रविवार का दैनिक राशिफल

मेष (Aries): आज के दिन आप थकान, आलस्य और व्यग्रता का अनुभव करेंगे। बात-बात में आपको क्रोध आएगा। ध्यान रखें कि इसकी वजह से आपके काम को किसी तरह से नुकसान न पहुंचे। किसी धार्मिक या मांगलिक कार्य में जाना हो सकता है।

शुभ रंग = लाल

शुभ अंक : 8

वृषभ (Taurus): आज आप शारीरिक तथा मानसिक रूप से अस्वस्थता का अनुभव करेंगे। किसी नए कार्य का प्रारंभ न करने की सलाह भी देते हैं। खान-पान में विशेष ध्यान रखिएगा। स्वास्थ्य बिगड़ने की पूरी संभावना है। संभव हो तो प्रवास टालिएगा।

शुभ रंग = पीला

शुभ अंक : 9

मिथुन (Gemini): आज के दिन आप मनोरंजन तथा आनंद-प्रमोद में व्यस्त रहेंगे। मित्रों तथा परिवारजनों के साथ आनंदित वातावरण में दिन बिता पाएंगे। सामाजिक रुप से सम्मान औऱ प्रसिद्धि भी प्राप्त कर सकेंगे।

शुभ रंग = हरा

शुभ अंक : 6

कर्क (Cancer): माता-पिता के आशीर्वाद से आज का दिन आपके लिए आनंददायक सफलता प्रदान करनेवाला होगा। परिवारजनों के साथ समय सुखपूर्वक बितेगा। आवश्यक कार्य में खर्च होगा। फिर भी आर्थिक लाभ के लिए अच्छा दिन है।

शुभ रंग = पीला

शुभ अंक : 9

सिंह (Leo): आज के दिन आपका शारीरिक तथा मानसिक स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। सृजनात्मकता पूरी तरह से खिलने से सृजनात्मक कार्य सुंदर ढंग से संपन्न होगा। संतानों की ओर से शुभ समाचार मिलेंगे। मित्रों के साथ भेंट आनंददायी होगी।

शुभ रंग = गुलाबी

शुभ अंक : 5

कन्या (Virgo): आज के दिन समय अनुकूल नहीं है। कई बातों को लेकर आप को चिंता रहेगी, जिससे आप शारीरिक तथा मानसिक रुप से अस्वस्थता का अनुभव करेंगे। परिवार के सदस्यो के साथ अनबन रहेगी।

शुभ रंग = केशरी

शुभ अंक : 1

तुला (Libra): आज के दिन भाग्यवृद्धि होनेवाली है। भाई-बहनों के साथ सम्बंध अच्छे रहेंगे। किसी धार्मिक प्रवास का आयोजन हो सकता है। नए कार्य के प्रारंभ के लिए शुभ दिन है। शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य अच्छा रहेगा।

शुभ रंग = आसमानी

शुभ अंक : 7

वृश्चिक (Scorpio): आज का दिन आपके लिए मध्यम फलदायी है। अनावश्यक खर्च पर अंकुश रखिएगा। वाणी पर संयम रखने से परिवार में सुख-शांति बना पाएंगे। विचारों पर नकारात्मकता छाई रहेगी, जिसे दूर कीजिएगा। धार्मिक हेतु से खर्च हो सकता है।

शुभ रंग = लाल

शुभ अंक : 8

धनु (Sagittarius): आज के दिन निर्धारित किए हुए कार्य पूर्ण होंगे। लक्ष्मीजी की कृपा रहेगी। शारीरिक तथा मानसिक स्वस्थता आपको प्रसन्न रखेगी। किसी यात्रा स्थल पर प्रवास होने की संभावना है। स्वजनों के मिलने से मन आनंदित रहेगा।

शुभ रंग = पींक

शुभ अंक : 1

मकर (Capricorn): आज मन अस्वस्थ रहेगा। धार्मिक, सामाजिक कार्यों में धन का खर्च होगा। स्वजनों और मित्रों के साथ अनबन होगी। धनहानि और मानहानि का योग है। आज आपका आध्यात्मिकता की ओर रुझान अधिक रहेगा।

शुभ रंग = भूरा

शुभ अंक : 6

कुंभ (Aquarius): इस समय मिलनेवाले लाभों से आपका आनंद दोगुना हो जाएगा। नए कार्य के आयोजन के लिए कार्य का प्रारंभ शुभ सिद्ध होगा। व्यापारियों को व्यापार में विशेष लाभ होगा। सामाजिक क्षेत्र में कीर्ति मिलेगी।

शुभ रंग = हरा

शुभ अंक : 6

मीन (Pisces): आपका आज का दिन शुभ फलदायी है। नौकरी या व्यापार में आपको सफलता मिलेगी तथा ऊपरी अधिकारी आप पर प्रसन्न रहेंगे। इस बात से आपकी प्रसन्नता में भी वृद्धि होगी। घर के किसी बड़े सदस्य या पिता की ओर से लाभ होगा।

शुभ रंग = पीला

शुभ अंक : 9 
प्रेम सागर पाण्डेय् ,नक्षत्र ज्योतिष वास्तु अनुसंधान केन्द्र ,नि:शुल्क परामर्श - रविवार , दूरभाष 9122608219 / 9835654844
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag

नेर की सांस्कृतिक विरासत

Posted: 19 Mar 2022 06:48 AM PDT

नेर की सांस्कृतिक विरासत

सत्येन्द्र कुमार पाठक 
सभ्यता और संस्कृति से क्षेत्र की विरासत से पहचान होती है । मागधीय कि प्राचीन संस्कृति का इतिहास में नेर की गौरवशाली रही थी । मगध क्षेत्र नवपाषाणकाल 9000 ई .पू. में विकसित था । नेर की नाव पाषाणिक संस्कृति के अंतर्गत पषणयुक्त शिव मंदिर एवं परिसर है । नेर गढ़ में छिपी अनेक पुरातत्विक विरासत है । बिहार का जहानाबाद जिले के मखदुमपुर प्रखंडान्तर्गत मकरपुर पंचायत स्थित नेर के पूर्व रोजा तलाव , पश्चिम भैरव आहर एवं नेर के मध्य में भगवानशिव का पषणयुक्त मंदिर है । जहानाबाद से 22 कि. मि. दक्षिण मखदुमपुर से 4 कि. मि. , गया पटना रोड एन एच तथा पटना गया रेलखंड नेर हॉल्ट है । 2011 कि जनगणना के अनुसार 860 हेक्टयर में फैले नेर की आवादी 3380 में साक्षरों की संख्या 1951 है । नेर से 3 कि. मि. पर धरनई , 4 कि मि. पर छेरियारी , और डकरा तथा जगपुरा 5 कि. मि . एवं मकरपुर पंचायत में 14 ग्राम एवं टोले है । सूर्य वंशीय इक्ष्वाकु कुल के कुक्षी के पौत्र विकुक्षि के पुत्र बाण द्वारा बाणावर नगर की स्थापना की थी । साहित्यकार व इतिहासकार सत्येन्द्र कुमार पाठक ने कहा कि विकुक्षि पुत्र बाण द्वारा बराबर पर्वत समूह की ऊंची चोटी सूर्यान्क गिरी पर सिद्धेश्वरनाथ उपासना स्थल की नींव डाला गया था । बाण का पुत्र अनरण्य की पत्नी अजा के पौत्र पृथु का पुत्र दशरथ द्वारा अनरण्य नगर की स्थापना की थी । अनरण्य नगर में अनरेश्वर शिव लिंग की स्थापना एवं मंदिर का निर्माण किया था । अंधक वंशीय हृदक कुल के नरान्त द्वारा अनरण्य नगर का नामकरण नरान्त नगर एवं ब्रह्मपुराण के अनुसार मनुवर तीर्थ के रूप में विख्यात हुआ । महाभारतकाल तथा द्वापरयुग में राजा बलि के औरस पुत्र बाणासुर की पुत्री उषा का प्रिय स्थल मनुतीर्थ थी । नेर को अनरण्य नगर , नरान्त नगर , मनुवरतीर्थ , राजा किश द्वारा अपने पिता के नाम पर मनुवर स्थल को नेर नामकरण किया था । अकबर कसल में खानदेश राजा फारूकी द्वारा अकबर शासन काल में नेर को राजधानी बनाई वही बिहार का सूबेदार दाऊद खां द्वारा नेर का पुत्र अब्नेर ने नेर का विकास किया । अब्नेर द्वारा नेर से पूरब रोजा तलाव का निर्माण किया था । बौद्ध ग्रन्थ अंगुत्तरनिकाय एवं जैन ग्रंथ के भगवती सूत्र में मगध की सभ्यता का उल्लेख किया गया है ।गुप्त वंशीय राजाओं द्वारा 319 ई. से समाज और संस्कृति का प्रकाश लाया गया है । शूद्रक का मृच्छकटिक में नगर जीवन के विषय में रोचक सामग्री है । गुप्त काल में नेर शिवमंदिर की वास्तुकला का आविर्भाव है । नेर शिवमंदिर एवं परिसर पाषाण खम्भों से युक्त वर्गाकार सपाट छत ,उथले स्तम्भों पर पंचायतन शैली में निर्मित है । पषणयुक्त मंदिर के गर्भगृह में शिवलिंग स्थापित एवं भगवान शिव माता पार्वती का विहार मूर्ति तथा पषणयुक्त मंदिर परिसर में त्रिदेव की मूर्ति , अन्य मूर्तियां है । नेर से पश्चिम वैट वृक्ष की छया में चतुर्मुख पशुपति नाथ जिसे भैरवनाथ की मूर्ति है । भैरवनाथ के समीप भैरव आहार एवं भूमि संपर्पित है । नेर गढ़ का अतिक्रमण करने के बाद अवशेष 4 ए. है । नेर की विरासत नेर गढ़ के गर्भ में छिपी हुई है । जहानाबाद जिले का मखदुमपुर अंचल / प्रखंड के मकरपुर पंचायतान्तर्गत नेर राजस्व थाना नंबर 249 , खाता संख्या 352 प्लॉट संख्या 1445 रकवा ओ. 04 डि . में निर्मित नेर शिव मंदिर का दरवाजा दक्षिणमुख पाषाण युक्त है ।शिवपुराण वायवीय संहिता अध्याय 3 के अनुसार नेर शिव मंदिर में वराह कल्प के 7 वें मन्वंतर में ईशान रूप में शिवलिंग स्थापित तथा पश्चिम में वट वृक्ष की छाया में सम्पूर्ण आत्माओं के अधिष्ठात्री पशुपतिनाथ स्थानीय लोग भैरवनाथ कहते है । विद्येश्वर संहिता अध्याय 5, 8 के अनुसार नेर का 12 अंगुलिय शिवलिंग निष्कल निराकार रूप में है । नेर का मकर व एकत्व , सायुज्य मोक्ष शिवलिंग अगहन शुक्ल पक्ष पूर्णिमा तिथि , या प्रत्येक मास की त्रयोदशी को उपासना करने से भुक्ति सुर मुक्ति होती हसि । वीर शैव सम्प्रदाय का लिंगायत की उपासना स्थल 12 वीं शताब्दी में प्रसिद्धि थी । शिवलिंग उच्च पाषाण काल 40000 से 10000 तथा मध्य पाषाण काल 10000 से 4000 ई. पू . में शिवलिंग मकार शिव के रूप में स्थापित है । 4 थी शताब्दी का शासक गुप्त वंशीय समुद्रगुप्त शैववाद का केंद्र स्थल नेर था । 1335 -1565 ई. तक चोल शासन ने नेर शिव मंदिर की दीवारें की नक्काशियों ,ज्यामितीय पैटर्नों से अलंकृत , गोपुरम के अग्रभाग को एकाश्म पाषाण स्तम्भ पर यली उत्कीर्ण कराया था । नेर शिवमंदिर के मसन्दप को दिव्य मंडप कहा गया था ।
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag

यही तालिबानी वे कबाइली थे जिन्होंने अक्टूबर 1947 में कश्मीर को, वहाँ की संपत्ति को, हिंदू और सिखों की महिलाओं और बच्चियों की इज्जत को लूटा था;

Posted: 19 Mar 2022 06:44 AM PDT

यही तालिबानी वे कबाइली थे जिन्होंने अक्टूबर 1947 में कश्मीर को, वहाँ की संपत्ति को, हिंदू और सिखों की महिलाओं और बच्चियों की इज्जत को लूटा था:-लेखक - अतुल मालवीय

इन्हीं कबाइलियों के छद्मरूप में पाकिस्तानी सेना ने कश्मीर के उस हिस्से पर कब्जा कर लिया था जिसे हम "POK" कहते हैं
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच खैबर पख्तूनवा का वह बॉर्डर जिसे हम इतिहास में "खैबर दर्रे" के नाम से जानते हैं और जो आज तालिबानी ताकतों का केंद्र बना हुआ है, के निवासी हैं 90 साल के "मुहम्मद हसन कुरैशी"| वे बूढ़े जरूर हैं लेकिन उनकी याददाश्त सलामत है| उन्हें लगता है जैसे कल की ही घटना हो जब आज से 74 वर्ष पहले अक्टूबर 1947 में पूरे एरिया में सुगबुगाहट थी कि कश्मीरी सिखों का "मुज़फ्फराबाद" पर हमला होने वाला है| ध्यान रहे महाराजा रणजीत सिंह के समय में महान सेनापति "हरिसिंह नलवा" ने पूरे कश्मीर को "खालसा साम्राज्य" का हिस्सा बना दिया था| लेकिन कुछ ही दिनों बाद सुनने में आया कि कबाइली हमला करने वाले हैं| जम्मू कश्मीर के तत्कालीन महाराजा हरिसिंह की ढुलमुल नीति के कारण अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई थी|
मुहम्मद हसन कुरैशी बताते हैं कि 21 अक्टूबर 1947 की शाम उन्होंने और उनके अनेक दोस्तों ने पहाड़ी के ऊपर से देखा कि अफगानिस्तान स्थित पश्चिमी घाटी की तरफ से सैकड़ों खुले ट्रकों पर चढ़कर कबाइली पठान बतरासी पहाड़ी से पास के ही कस्बे "गढ़ी हबीबुल्लाह" की तरफ बढ़ रहे हैं| हम गाँव वाले चिंता के मारे पूरी रात सो नहीं पाए| सुबह होते होते तो ये कबाइली जिनकी संख्या दो हज़ार से कम न थी, हाथों में पुरानी स्टाइल की लंबी बंदूकें (मस्कट), गंडासे, तलवारें, कुल्हाड़ियाँ और भाले लिए हुए गाँव में आंधी तूफ़ान की तरह घुसने लगे| गढ़ी हबीबुल्लाह से महाराजा के सैनिक पलायन कर चुके थे, कबाइलियों ने आसानी से इस पर कब्जा कर लिया|
उसी दिन बिना देर किये कबाइली अब निकट ही स्थित प्रमुख शहर "मुज़फ्फराबाद" की ओर बढ़े, जहाँ हिंदुओं और सिखों की अच्छी खासी आबादी थी| हमने उन्हें पहाड़ी की ओर से जाने वाला शॉर्टकट बता दिया| महाराजा हरिसिंह के अधिकांश सैनिक तो भाग गए थे, लेकिन उनमें से लगभग पांच सौ मुस्लिम सैनिकों कबाइलियों के साथ हो लिए| कश्मीर घाटी में खैबर और अन्य इलाकों से कबाइलियों का आना जारी था और 22 अक्टूबर को इनकी संख्या बीस हज़ार हो गयी| शाम होते होते मुज़फ्फराबाद का पतन हो गया| विभिन्न फ्रंटियर कबीले - वज़ीर, महसूद, तुरी, युसूफजई के नेतृत्व में आसान लेकिन ज्यादा दूरी वाले लोहार गली की तरफ से दूसरे दिन सुबह पहुंचे|
हज़ारों कबाइलियों ने मुज़फ्फराबाद को लूटना शुरू कर दिया, वे दुकानों को लूटते जाते थे, कीमती सामानों को ट्रकों में रख लेते और फिर दुकानों, बाज़ारों में आग लगा देते| जो भी अरबी में "कलमा" नहीं पढ़ पाता वे उसका क़त्ल कर देते| हिंदू और सिख औरतों, बच्चियों को वे घसीटते हुए ले जाते और बांधकर नीचे से बोरियों की तरह फेंककर ट्रकों में डाल देते| कबाइली सरदार हर औरत या बच्ची की बरादमगी पर चिल्लाते हुए प्रसन्नता व्यक्त करते और आपस में बंटवारा करने लगते| सैकड़ों महिलाओं ने अपनी इज्ज़त बचाने के लिए नदी में कूदकर जान देना पसंद किया| मुज़फ्फराबाद की सड़कें, गलियाँ लाशों से, जले हुए सामान, दुकानों और मकानों के मलबों से पटी पड़ी थीं, नदी में जहाँ देखो वहाँ लाशें ही तैरती नज़र आती थीं|
तीन दिनों तक मुज़फ्फराबाद लूटने के बाद अब कबाइलियों का अगला निशाना पूर्व दिशा में 170 किलोमीटर दूर "श्रीनगर" था| अफगानिस्तान, पाकिस्तान के कबाइली ही नहीं बल्कि अब उनके वेश में पाकिस्तानी सेना भी इस अभियान में शामिल हो चुकी थी| अब पचास हज़ार से भी अधिक हो चुके ये लुटेरे तीन तरफ से "जम्मू कश्मीर" की राजधानी और सबसे महत्वपूर्ण शहर "श्रीनगर" को घेरने और लूटने के नापाक इरादे से "झेलम नदी" पार कर आगे बढ़े| रास्ते में "उरी", "कुपवाड़ा" और "बारामूला" पर कबाइलियों ने कब्जा कर लिया| यहाँ भी लूटपाट और वहशीपन का वही मंज़र दोहराया गया|
रास्ते में हिंदू, सिख या तो डर के मारे भागने पर मजबूर हुए या क़त्ल कर दिए गए| मुस्लिम महिलायें इन कबाइलियों की मदद करने के इरादे से इनके लिए खाना पकाकर लातीं लेकिन ये उन पर भी यकीन नहीं करते, इन्हें संदेह होता कि कहीं खाने में ज़हर न मिला हो| इसके विपरीत ये उनकी भेड़ बकरियों, मुर्गे मुर्गियों को लूटकर उन्हें जंगल में आग पर पकाकर खाना पसंद करते| अब ये श्रीनगर की बाहरी सीमा पर पहुँच चुके थे| जंगलों में इन्होंने श्रीनगर पर कब्जा करने, उसके बाजारों से कीमती सामान लूटने और हिंदू तथा सिख महिलाओं को अपना गुलाम बनाने की कल्पना करके ही जश्न मनाना शुरू कर दिया|
ऐसा ही भयावह नज़ारा था मीरपुर में जहाँ कबाइलियों ने 400 हिंदुओं और सिख औरतों का अपहरण कर लिया और बाद में इन्हें रावलपिंडी के वेश्या बाजार में बेच दिया गया।
इन कबाइलियों और उनके छद्मरूप में पाकिस्तानी सैनिकों को इस बात की भनक भी नहीं थी कि जम्मू भाग चुके महाराजा हरिसिंह ने 26 अक्टूबर को "जम्मू कश्मीर" के भारत में विलय के समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए थे और सरदार पटेल ने कमान स्वयं अपने हाथ में लेते हुए "डकोटा" विमानों से क्षतिग्रस्त हो चुके श्रीनगर हवाईअड्डे पर असंभव दिखने वाले मिशन के तहत भारतीय फ़ौज को कश्मीर बचाने के लिए भेज दिया| एक एक विमान ने मात्र एक दिन में अनेक बार श्रीनगर हवाईअड्डे पर लैंडिंग की| कुल 45 डकोटा विमानों को इस कार्य में लगाया गया| भारतीय सैनिक सिर्फ चाय पीकर ही बिना समय गँवाए कबाइलियों पर टूट पड़े| अगले दिन सड़क मार्ग से भी भारतीय थलसेना के रणबांकुरे श्रीनगर पहुँच गए|
श्रीनगर की बाहरी सीमा पर स्थित जंगल में आग जलाकर बकरे और भेड़ें भून रहे कबाइलियों पर एक जगह तो भारतीय वायुसेना ने ऐसी बमबारी की कि सैकड़ों लोगों के चीथड़े उड़ गए और जंगल में कई किलोमीटर तक उनकी लाशों के टुकड़े चारों तरफ छितरा गए| कबाइली भारतीय सेना का अधिक समय तक सामना न कर सके और पीठ दिखाकर भागने को मजबूर हुए| नवंबर 1947 तक कबाइली और पाकिस्तानी सेना "बारामूला, कुपवाड़ा और उरी" खाली कर पीछे हट गए|
पाकिस्तानी रिटायर्ड मेजर आगा हुमायूं अमीन ने अपनी पुस्तक "The 1947-48 Kashmir War: The War of Lost Opportunities" में स्पष्ट लिखा है कि इस कबाइली अटैक के आर्किटेक्ट थे "पाकिस्तानी मेजर जनरल अकबर खान" जिन्होंने साबित कर दिखाया कि किस तरह से हमेशा हिंसा और मारकाट में लगे रहने वाले कबाइलियों का युद्ध में पाकिस्तान की तरफ से बेहतर उपयोग किया जा सकता है| इसके बाद 1965 में पाकिस्तानी तानाशाह जनरल अयूब खान ने और बाद में जनरल परवेज़ मुशर्रफ ने कारगिल युद्ध के माध्यम से बार बार कश्मीर पर कब्जा करने का प्रयास किया लेकिन भारतीय सेना के पराक्रम के सामने उन्हें मुँह की खानी पड़ी|
इस बात के स्पष्ट प्रमाण हैं कि ये कबाइली जिन्हें भारत जीते या पाकिस्तान, इस बात से कोई लेना देना नहीं थी, खैबर पार कर अपने वतन अफगानिस्तान लौटे और बड़े शान से अपने अपने कबीलों में लूटी हुई दौलत के साथ साथ सिख और हिंदुओं की महिलाओं, बच्चियों का भी प्रदर्शन करते थे| जिसके पास जितनी औरतें, उसका रुतबा उतना ही बढ़ जाता| क्या ये सुनकर आपका खून नहीं खौल जायेगा कि इन कबाइलियों ने न सिर्फ इन औरतों के साथ अमानवीय व्यवहार और बलात्कार किये बल्कि जब उनका इनसे जी भर जाता तो ये भरे बाज़ार सरेराम उनकी नीलामी भी कर देते|वही हिंसक हमलावर कबाइली आज के तालिबान हैं|
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag

कहाँ गयी वो होली की परम्परा

Posted: 19 Mar 2022 06:36 AM PDT

कहाँ गयी वो होली की परम्परा

कहाँ गयी वो होली की परम्परा जिसमें लोक संगीत की धुन बजती थी,
लोक गायकों के मुख से राम कृष्ण सीता राधा से रत गीत निकलती थी;

होलिका दहन की राख उड़ाने गांव में वृद्ध जवान बच्चों की टोलियाँ निकलती थी,
राख उड़ा कर जब होली की टोली घर घर गाते गीत सुबह तक हर घर टहलती थी,

होली गीत गाने से पहले भंग घुले शर्बत पी पी कर जब सब होते थे मतवाले,
अपनों से मस्तक पर रंग अबीर लगवाकर वे तो  बन जाते थे किस्मत वाले;

मित्र बंधु सखा भाई परिजन मिल खाते थे मीठे व्यंजन पुआ पूड़ी रसगुल्ले,
सफेद वस्त्र पहनकर हाथों में पिचकारी ले होते थे मित्र बंधुओं के हल्ले गुल्ले,

धूम धमाल चक्कर चौकड़ी हमजोली की ठिठोली तब मर्यादा के कारक थे,
बड़े बुजुर्गों के एक एक संदेश वचन तब हम सब के लिए हितों के संचारक थे;

तब न किसी को ठेस पहुँचती थी न तो कोई भी होता था छोटा या बड़ा,
सब के माथे पर तिलक होते अबीर के, लोग मिलजुल कर खाते दहीबड़ा,

अब उस होली की यादें हैं बस, अब वो भंग रंग नहीं कभी बिखरते हैं,
होली में अब लोग पी रहे शराब पुरानी होली का नशा पीने से भी नहीं चढते हैं,

अब होली दृढ हो गयी है नर्तकियों की नाच, फूहड़ गीतों और डीजे पर,
नयी पीढ़ियाँ मस्त हैं होली में घर चौबारे पर न टिक पाने वाली नश्वर चीजों पर, 

अफसोस न संजो सका बाबा पुरखों के वे होली गीतों के सुर तान मधुर,
अब की होली में न रहा रंग, न रही ठिठोली न पुरखों के सुर ताल मधुर,

फिर भी होली तो होली है परम्परा है युगों का, रंग गुलाल तो बिकते हैं,
पारम्परिक गीत न सुन पायें, मीठे व्यंजन हो स्वाद हीन पर क्या परम्पराएं भी मिटते हैं?


----रचना सर्वाधिकार सुरक्षित
@ओम प्रकाश शर्मा, अम्बा, औरंगाबाद।
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag

खेलेंगे आज होली

Posted: 19 Mar 2022 06:25 AM PDT

खेलेंगे आज होली

बहुत दिनों के बाद मिले हैं,
अपनी यह हमजोली,
नहीं छोड़ेंगे आज किसी को,
खेलेंगे आज होली।
     बहुत दिनों के बाद...।

मन मेरा बासंती हो रहा,
मौसम ने गजब रस घोली,
बच सको तो बच लो भईया,
आयी हुडदंग की टोली।
      बहुत दिनों के बाद...।

आज बनेंगे हम कृष्ण-कन्हैया,
सुन लो  बहना,भाभी,भैया
आज भींगेगा शर्ट-पैंट किसी का,
चाहे भीगे चुनर-चोली।
     बहुत दिनों के बाद...।

प्रेम सद्भाव का यह है पर्व,
बोले सदा मीठी बोली,
प्रेम के रंग में रंग जायें सभी,
करें कुछ हॅसी ठिठोली।
      बहुत दिनों के बाद...।
          -----0----
       अरविन्द अकेला,पटना।
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag

भागलपुर की सांस्कृतिक विरासत

Posted: 19 Mar 2022 12:15 AM PDT

भागलपुर की सांस्कृतिक विरासत 

सत्येन्द्र कुमार पाठक 
पुरणों , स्मृतियों महाकाव्य रामायण में अयोध्या का राजा दशरथ की पत्नी कौशल्या की पुत्री एवं भगवान  श्री राम की बहन शांता का उल्लेख किया गया है । अयोध्या नरेश दशरथ की तीन पत्नियों कौशल्या, सुमित्रा और कैकेयी में से कौशल्या नंदनी शांता अत्यंत सुन्दर और सुशील , वेद, कला तथा शिल्प में पारंगत थीं।  राजा दशरथ को अपनी  पुत्री शांता पर बहुत गर्व था। रामायण  अनुसार रानी कौशल्या की बहन रानी वर्षिणी संतानहीन होने के कारण  दुखी रखती थी। अंगदेश का राजा रोमपद  की पत्नी वर्षिणी  रोमपद  अयोध्या आएं। राजा दशरथ और रानी कौशल्या से वर्षिणी और रोमपद का दुःख देखा न गया और उन्होंने निर्णय लिया कि वह शांता को उन्हें गोद दे देंगे। दशरथ के इस फैसले से रोमपद और वर्षिणी की काफी प्रसन्नता हुई थी ।अंगदेश का राजा रोमपद द्वारा शांता अंगदेश की राजकुमारी घोषित की गई थी । हिमाचल के कुल्लू से 50 कि. मि. पर  शृंग ऋषि एवं भगवान राम की बड़ी बहन शांता की पूजा होती है।  ब8हर का भागलपुर का श्रृंगेश्वर स्थान पर श्रृंगी ऋषि एवं शांता मंदिर , नवादा जिले का श्रृंगी पर्वत पर श्रृंगी ऋषि एवं शांता की उपासना स्थल है । पूर्वी भारतीय उपमहाद्वीप और सोलह महाजनपदों मे मगध के पूर्व  अंग आधुनिक भागलपुर है । अंग  की राजधानी चंपा नदी के तट पर राजा अंग द्वारा  चंपा और मालिनी नगर की स्थापना की गई थी । अंग को 6 ठी शताब्दी ई. पूर् . में मगध द्वारा कब्जा कर लिया गया था। उत्तर वैदिक काल 1100 ई. पु. से 500  ई. पु. तक अंग की राजधानी भागलपुर के समीप  चम्पापुरी और अंगराज ब्रह्मदत्त के समय मुंगेर के समीप मालिनी थी । लौह तथा काश्य युग  में अंग विकसित था । जैन  व्याख्यप्रज्ञप्ति एवं बौद्ध ग्रंथों का  अंगुत्तर निकाय के अनुसार "सोलह महान राष्ट्रों" में अंग का उल्लेख किया गया है । महाभारत  1 .104.53-54 और पौराणिक साहित्य के अनुसार, अंग प्रदेश  के संस्थापक राजकुमार अंग और बाली के पुत्र अंगद  के नाम पर रखा गया था ।  ऋषि दिर्घटामास प्रताप से राजा अंग की पत्नी रानी सुदेशना  के अंग पुत्रों का आशीर्वाद देने का अनुरोध किया। कहा जाता है कि ऋषि ने अपनी पत्नी, रानी सुदेसना द्वारा अंग , वंगा , कलिंग , सुम्हा और पुंड्रा जन्म दिया गया ।  महाभारत के अनुसार अंग महाजनपद के राजा कर्ण और भानुमति ने मगध साम्राज्य का राजा जरासंध द्वारा प्राप्त  बंजर भूमि को समृद्ध शहर निर्माण कर मालिनी नगर सपर्पित किया गया था ।  रामायण 1.23.14 के अनुसार   कामदेव को शिव ने जलाकर मार डालने के कारण कामदेव का  शरीर के अंग  बिखरे होने के कारण अंग स्थल कहा गया था । अथर्ववेद (वी.22.14) के अनुसार कीकट ,  मगध , गांधार , अंग, कलिंग , वंगा, पुंड्रा ,  पूर्वी बिहार , पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश का क्षेत्र , विदर्भ और विंध्य जनपदों शामिल थे ।हैं । महागोविंदा सुत्तंत के अनुसार  अंग राजा धतरथ को संदर्भित करता है। जैन ग्रंथों में अंग के शासक के रूप में धधिवाहन  , पुराण और हरिवंश राज्य के संस्थापक अंग के पुत्र और तत्काल उत्तराधिकारी के रूप में उनका प्रतिनिधित्व करते हैं । महाभारत आदि पर्व के अनुसार, दुर्योधन ने कर्ण को अंग का राजा नामित किया था। अंग का राज्य दुर्योधन द्वारा कर्ण को उपहार में दिया गया था। कर्ण को अंग साम्राज्य प्राप्त होने के बाद बंजर भूमि पर  भानुमति और कर्ण ने भूमि पर रहने वाले दैत्यों से लड़ाई की। भानुमति ने कर्ण को अपने कंधों पर उठा लिया और अपने वज्रस्त्र से दानव-भूमि को नष्ट कर उसे कृषि योग्य भूमि में बदल दिया। जल्द ही कर्ण ने पूरी पृथ्वी पर विजय प्राप्त कर लिया था । वत्स और अंग के दायरे के बीच, मगध रहते थे । अंग और उसके पूर्वी पड़ोसियों के बीच एक महान संघर्ष चला। विधुर पंडित जातक ने राजगृह (मगधन राजधानी) को अंग के शहर के रूप में वर्णित किया है और महाभारत में अंग के राजा द्वारा विष्णुपद ( गया में ) पर्वत पर किए गए बलिदान का  उल्लेख है।  6 वीं शताब्दी ई.  पू .  में, मगध के राजकुमार बिंबिसार ने अंग राजा ब्रह्मदत्त को मार डाला था और चंपा पर कब्जा कर लिया था। बिंबिसार ने चंपा पर मगध का  मुख्यालय बनाया था । 
अंग सबसे पूर्वी, वृज्जी के दक्षिण में और मगध के पूर्व में है । महाभारत के सभापर्व (II.44.9) एवं कथा-सरित-सागर के अनुसार अंग का  शहर विटंकापुर समुद्र के तट पर स्थित था।अंग उत्तर में कौशिकी नदी से घिरा था । अंगा की राजधानी चंपा को  मालिनी  6ठी शताब्दी ईसा पूर्व के सबसे महान शहरों में  था।चीनी भिक्षु फैक्सियन ने 4थी शताब्दी में   बौद्ध मंदिरों काचंपा को  चीनी में चानपो , पिनयिन : झांबी ; वेड-गाइल्स : चैनपो , तथा अंग को यांग्जिया , रोमापदा जाना जाता था। अंग के संस्थापक और राजा वली के पुत्र अंगद था । अंग देश का राजा बृहद्रथ: , कर्ण , वृषकेतु - पुत्र , ताम्रलिप्ता , त्रेतायुग में अयोध्या का राजा दशरथ का मित्र लोमपाद , चित्ररथ , वृहद्रथ:वसुहोमा , धतरथ ,धादिवाहन  , ब्रह्मदत्त - अंग के अंतिम राजा था । ब्रह्म पुराण  के अनुसार  स्वायम्भुव मन्वन्तर में स्वायम्भुव मनु एवं शतरूपा  के अंश से वीर ,प्रियव्रत और उत्तानपाद का जन्म हुआ था । प्रजापति अत्रि ने राजा उत्तानपाद को दतकपुत्र बनाया और उत्तानपाद का विवाह सूनृता से सम्पन्न किया था । चाक्षुष मन्वंतर इन चाक्षुष मनु की पत्नी वैराज प्रजापति की पुत्री नडवला का द्वितीय पुत्र पुरुकी पत्नी आग्रेयी का जेष्ठ पुत्र अंग द्वारा अंग प्रदेश की स्थापना की गई थी । अत्रि कुल में उत्पन्न एवं पुरु की पत्नी आग्रेयी के पुत्र अंग की पत्नी एवं मृत्यु कन्या सुनीता के गर्भ से वें का जन्म हुआ था । अंग देश का राजा वेन द्वारा अधर्म का साथ और धर्म का विरोध करने से जनता , प्रकृति , पृथिवी पर अत्याचार बढ़ाने लगे थे । अंग देश के ऋषियों द्वारा वेन के शरीर से मंथन कर पृथु  , मागध एवं सूत , निषद की उत्पत्ति कर अंग देश का विकास किया था । अंग देश का राजा भगवान विष्णु के अवतार के रूप में पृथु द्वारा धर्म एवं वेद , प्रकृति , पृथिवी का चतुर्दिक विकास किया गया । मागध द्वारा मगध और सूत द्वारा ओडिशा देश की स्थापना की गयी  थी । अंग देश का संस्थापक  एवं विकास का रूप राजा पृथु द्वारा किया गया था । 
बिहार राज्य  का  गंगा के तट पर बसा  3100 वर्गमील  में फैले भागलपुर की 2011 जनगणना के अनुसार 3037776 आवादी वाला बंगाल अभिलेखाकार के अनुसार भागलपुर जिले की स्थापना 04 मई 1773 ई. है। 1525 गाँवों को 16 प्रखंडों एवं 03 अनुमंडलों का क्षेत्र को पुराणों और महाभारत में  क्षेत्र को अंग प्रदेश कहा  गया है। भागलपुर के निकट स्थित चम्पानगर महान पराक्रमी शूरवीर कर्ण की राजधानी थी । भागलपुर सिल्क एवं तसर सिल्क का उत्पादन केंद्र है । पुराणों के अनुसार अंग राज भगदंत द्वारा भगदंतपुर नगर की स्थापना की थी । भगदंतपुर का आधुनिक  भागलपुर के नाम से विख्यात है । भागलपुर क्षेत्र में प्रमुख भाषा अंगिका और हिंदी है । भागलपुर नगर के  मुहल्लों में  1576 ई को  बादशाह अकबर के  मुलाज़िम मोजाहिद के नाम मोजाहिदपुर ,  बंगाल के सुल्तान सिकंदर ने सिकंदरपुर , अकबर काल मे कर्मचारी तातार खान ने ततारपुर ,  शाहजहाँ काल के काज़ी  काजवली ने कजवालीपुर ,   अकबर के शासन काल मे फकीर शाह कबीर ने कविरपुर के नाम पर पड़ा ,उनकी कब्र भी इसी मुहल्ले मे है । नरगा – इसका पुराना नाम नौगजा था यानी एक बड़ी कब्र । वख्त्यार खिलजी काल मे  युद्ध के शहीदो को  कब्र मे दफ़्नाके गए स्थल को नरगा , शाह मदार का मज़ार के कारण मदरोजा , अकबर के कार्यकाल मे युद्ध में  शाह मंसूर की कटी उँगलियाँ   कटी और मृत्यु होने के बाद दफनाए गए स्थल मंसूरगंज ,   अकबर के समय के आदम बेग और खंजर बेग को आदमपुर , खंजरपुर स्थल समर्पित है ।ये दोनों मुहल्ले रखे गए थे । मशाकचक – अकबर के काल के सूफी संत  मशाक बेग का  मज़ार होने से  मशाकचक पड़ा ।  जहांगीर काल में  बंगाल के गवर्नर इब्राहिम हुसैन के परिवार की जागीर होने से हुसैनगंज ,मुगलपुरा  मुहल्ले बस गए ।  सुल्तानपुर के 12 परिवार एक साथ आकर रहने से बरहपुरा , फ़तेहपुर – 1576 ई मे शाहँशाह अकबर और दाऊद खान के बीच हुई लड़ाई मे अकबर की सेना को फ़तह मिलने से  फ़तेहपुर ,  सराय – मुगल काल मे सरकारी कर्मचारिओ और आम रिआयासी स्थल  को   सराय ,  औरंगजेव के भाई शाह सूजा ने सूजा  गंज  में शाह सुजा की लड़की का मज़ार होने से  उर्दू बाज़ार , मुगल सेनाओं के स्थल को रकाबगंज ,  सूफीसंत दमडिया ने अपने महरूम पिता मखदूम सैयद हुसैन के नाम पर हुसैनपुर बसाया था । अकबर काल के ख्वाजा सैयद मोईनउद्दीन बलखी के नाम पर मोइनूद्दीनचक व मुंदीचक कहलाने लगा । जमालउल्लाह खलीफा स्थल को  खलीफा बाग,  शाह शुजा के काल मे सैयद मुर्तजा शाह आनंद वार्शा ने मुहल्ला असानंदपुर की स्थापना की थी ।
मंदार पहाड़ी -   भागलपुर से 48 किलोमीटर की दूरी पर अवस्थित  बांका जिले का 800 फीट ऊँचाई युक्त  मंदार पर्वत   है। इसकी ऊंचाई 800 फीट है। मंदार पहाड़ी के चारों ओर  शेषनाग के चिन्‍ह एवं पर्वत की चोटी पर भगवान विष्णु का पद चिह्न है । पहाड़ी पर देवी देवताओं का मंदिर , जैन के 12 वें तिर्थंकर का  निर्वाण को स्थल प्राप्‍त किया था। लेकिन मंदार पर्वत की चोटी पर  झील व पहाड़ी के पापहरनी तलाब है । विक्रमशिला विश्वविद्यालय - भागलपुर से 38 किलोमीटर दूरी पर अन्तीचक में  पाल वंश के शासक धर्मपाल द्वारा  770-810 ई . में विक्रमशिला विश्वविद्यालय का निर्माण  करवाया गया था। कोसी और गंगा नदी से घीरा अंतीचक में तांत्रिक केंद्र में तंत्र और मंत्र का शिक्षा केन्द्र  में मां काली और भगवान शिव का मंदिर भी स्थित है।  कहलगांव - कहलगांव भागलपुर से 32 किलोमीटर की दूरी पर कहलगांव में  जाह्नु ऋषि के तप में गंगा की तीव्र धारा से व्‍यवधान पड़ा था। इससे क्रो‍धित होकर ऋषि ने गंगा को पी लिया। बाद में राजा भागीरथ के प्रार्थना के उपरांत उन्‍होंने गंगा को अपनी जांघ से निकाला। तत्पश्चात गंगा का नाम जाह्नवी कहलाया था । ऋषि जह्नु के कारण  गंगा की धाराएं दक्षिण से उत्‍तर की ओर गमन करने लगी है । सुल्तानगंज में गंगा के मध्य में अजगैवी पर्वत श्रृंखला पर  अजगैवी नाथ मंदिर  , ऋषि जह्नु का स्थल , उत्तरवाहिनी गंगा , कहलगांव स्थित गंगा में  में डॉल्‍फीन है। यहाँ एन. टी. पी. सी. भी है। कुप्‍पा घाट, विषहरी स्‍थान, भागलपुर संग्रहालय, मनसा देवी का मंदिर, जैन मन्दिर, चम्पा, विसेशर स्थान, 25किलोमीटर दूर सुल्‍तानगंज आदि 
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag

Liked on YouTube: बरहज विधायक श्री दीपक मिश्र शाका जी का विधायक बनने के बाद पत्रकारों से वार्ता

Posted: 19 Mar 2022 12:12 AM PDT

बरहज विधायक श्री दीपक मिश्र शाका जी का विधायक बनने के बाद पत्रकारों से वार्ता
बरहज से हमारे संवाददाता पद्मनाभ त्रिपाठी ने आज बरहज विधायक श्री दीपक मिश्र शाका जी का विधायक बनने के बाद अपने पैतृक निवास बकुची मिश्र पर पत्रकारों से हुई वार्ता में सम्मिलित हो बरहज की जनता से सम्बन्धित प्रश्न पूछे| दिव्य रश्मि ! धर्म, राष्ट्रवाद , राजनीति , समाज एवं आर्थिक जगत की खबरों का चैनल है | जनता की आवाज़ बनने के उदेश्य से हमारे सभी साथी कार्य करते है अत: हमारे इस मुहीम में आप के साथ की आवश्यकता है |हमारे खबरों को लगातार प्राप्त करने के लिए हमारे चैनल को सबस्क्राइब करना न भूले और बेल आइकॉन को अवश्य दबाए | खबर पसंद आने पर👉 हमारे "चैनल" को Subscribe, वीडियो को Like 👍 & Share↪ , जरुर करें चैनल को सब्सक्राइब करें खबर को शेयर जरूर करें Facebook : https://ift.tt/SUiGoYQ Twitter https://twitter.com/DivyaRashmi8 instagram : https://ift.tt/yfBq26Q visit website : https://ift.tt/Yikrl2m
via YouTube https://www.youtube.com/watch?v=Pj-1Skrxs5U

जो लोग अपने धर्म का अभिमान नहीं करते

Posted: 18 Mar 2022 11:44 PM PDT

जो लोग अपने धर्म का अभिमान नहीं करते,

जो लोग अपनी संस्कृति का मान नहीं करते,
राष्ट्र की खातिर क्या सिर कटायेंगे कमीने,
जो लोग अपने माँ-बाप का सम्मान नहीं करते।

धर्म का मतलब अनुशासन है, बात समझ लें,
संस्कार मतलब नियम है, बात समझ लें,
सभ्यता, संस्कृति पुरखों की विरासत है,
सभ्य आचरण हमको करना, बात समझ लें।

क्या होती है धर्मनिरपेक्षता, कोई बता दे,
किस शब्दावली में लिखा अर्थ, कोई दिखा दे,
जाते हैं जो चर्च और मस्जिद में प्रतिदिन,
धर्मनिरपेक्षता की बातें, कोई उन्हें बता दे।

कहते हैं सब हिन्दू, धर्मनिरपेक्ष हो जाओ,
अपनी संस्कृति से सब, निस्तेज हो जाओ,
हिन्दू करता मान सभी धर्मों का फिर भी,
हमसे ही कहते हैं सब, खामोश हो जाओ।

लुटती अस्मत बहन बेटियों की भारी है,
धर्मान्तरण का खेल अभी भी जारी है
नहीं किया गर ध्यान इस खेल पर तुमने,
भारत को ईसाई राष्ट्र की तैयारी है।

इस्लामवाद के पक्षधर भी आगे आये हैं,
इस्लामी बने मुल्क, अभियान चलाये हैं,
वंश वृद्धि, आतंकवाद इसी की एक कड़ी है,
हिंदुत्व पर हमला, इसे मिटाने आये हैं।

जागो राष्ट्र प्रहरी और युवाओं जागो तुम,
धर्मनिरपेक्ष पशु होते हैं, यह जानो तुम,
धर्म का मतलब हिंदुत्व में मानवता है,
संस्कृति का सार, यहाँ पहचानो तुम।

डॉ अ कीर्तिवर्धन
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag

फटे कपड़े पहनकर

Posted: 18 Mar 2022 11:43 PM PDT

फटे कपड़े पहनकर

फटे कपड़े पहनकर, फैशन में जो घूमते हैं,
देख लो औकात अपनी, भिखारी भी थूकते हैं।
भारतीय संस्कृति में दरिद्रता जिसे बताया गया,
आजकल के कुछ युवा, पहनकर उसे झूमते हैं।

अ कीर्ति वर्द्धन
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag

हमने अपना काम किया है,

Posted: 18 Mar 2022 11:41 PM PDT


हमने अपना काम किया है,

ख़ुशियों का पैग़ाम दिया है।
नहीं अपेक्षा प्रतिउत्तर रखते,
सबका ही सम्मान किया है।

कुछ दिल से हमको चाहते हैं,
कुछ के दिल को हम भाते हैं।
उनकी यादों में हम कहीं ठहरे,
इसीलिए सन्देशे भी आते हैं।

हमने भी तो सन्देशे भेजे थे,
कुछ अपनों ग़ैरों को भेजे थे।
कुछ ने पढ़ा किसी ने देखा,
हमने जो अपनों को भेजे थे।

शुभ की इच्छा काम हमारा,
आभार जताना काम हमारा।
कौन कहाँ क्या सोच रहा है,
उलझन से बचना काम हमारा।

अ कीर्ति वर्द्धन
हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag

Post Bottom Ad

Pages