प्राइमरी का मास्टर ● इन |
- माध्यमिक शिक्षा परिषद के अधीन सभी सेवाओं में 6 माह के लिए हड़ताल निषिद्ध किए जाने सम्बन्धी अधिसूचना जारी
- केंद्रीय विद्यालयों में सांसदों का एडमिशन कोटा हो सकता है खत्म, जानिए क्यों?
- ऑनलाइन ड्यूटी का प्रयोग पड़ रहा भारी, आज से बेसिक शिक्षा में परीक्षाएं और बेसिक शिक्षकों की लगा दी यूपी बोर्ड परीक्षा में ड्यूटी 🤦🏻
- सोशल मीडिया व्हाट्सएप आदि पर यूपी बोर्ड परीक्षा का पेपर साझा करना अपराध, माध्यमिक शिक्षा विभाग ने जारी की सार्वजनिक चेतावनी
- केंद्रीय विश्वविद्यालयों के दाखिले में बारहवीं के अंकों को इसी सत्र से नहीं मिलेगा वेटेज, अनिवार्य होगा कामन एंट्रेंस टेस्ट, मेरिट के आधार पर ही मिलेगा दाखिला
- यूपी बोर्ड : 1.16 लाख शिक्षक कराएंगे 10वीं-12वीं की परीक्षा
- यूपी के मदरसों में पढ़ने वालों की तादाद और घटी, देखें आंकड़े
- उच्च शिक्षा : छात्रों को नहीं मिल रही पूरी फीस प्रतिपूर्ति
| Posted: 22 Mar 2022 06:39 AM PDT |
| केंद्रीय विद्यालयों में सांसदों का एडमिशन कोटा हो सकता है खत्म, जानिए क्यों? Posted: 21 Mar 2022 07:15 PM PDT केंद्रीय विद्यालयों में सांसदों का एडमिशन कोटा हो सकता है खत्म, जानिए क्यों? केंद्रीय विद्यालयों में 10 छात्रों को प्रवेश के लिए मिला सांसदों का कोटा खत्म हो सकता है। लोकसभा में सोमवार को सभी दलों के सांसदों ने कोटा बढ़ाने या फिर स्थायी रूप से खत्म करने की मांग की। स्पीकर ओम बिरला के हस्तक्षेप के बाद शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि वह जल्द ही सभी दलों के नेताओं से बातचीत कर अंतिम निर्णय लेंगे। प्रश्नकाल में कांग्रेस के मनीष तिवारी ने कहा कि प्रवेश कोटा सांसदों के लिए जी का जंजाल बन गया है। एक सांसद लगभग 40 लाख लोगों का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि प्रतिवर्ष वह दस बच्चों का ही प्रवेश दिला सकता है। ऐसे में या तो कोटा को बढ़ाकर कम से कम 50 किया जाए या इसे हमेशा के लिए खत्म कर दिया जाए। तिवारी की मांग का सभी दलों के सांसदों ने समर्थन किया। इस दौरान स्पीकर के पूछने पर सभी दलों के सांसदों ने कोटा समाप्ति पर हामी भरी। इस पर स्पीकर ने कहा कि शिक्षामंत्री सभी दलों के नेताओं से बातचीत कर निर्णय लेंगे। प्रधान भी कोटा खत्म करने के पक्ष में शिक्षामंत्री प्रधान ने कहा कि केंद्रीय विद्यालयों में प्रवेश के लिए कोटा सिस्टम को सुधारने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। पहले सांसदों के पास कोटा नहीं था। बाद में दो से पांच और अब दस है। हालांकि इस मामले में सांसदों को तय करना है कि वह कोटा चाहते हैं या नहीं। उन्होंने कहा कि वह जल्द ही सभी दलों के नेताओं की इस विषय पर राय लेकर उचित फैसला करेंगे। |
| Posted: 21 Mar 2022 07:03 PM PDT ऑनलाइन ड्यूटी का प्रयोग पड़ रहा भारी, आज से बेसिक शिक्षा में परीक्षाएं और बेसिक शिक्षकों की लगा दी यूपी बोर्ड परीक्षा में ड्यूटी 🤦🏻 माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से पहली बार लगाई गई ऑनलाइन ड्यूटी ने अधिकारियों को परेशान कर दिया है। ऑनलाइन ड्यूटी में बेसिक के अधिकतर स्कूलों के पूरे स्टाफ को लगा दिया है। वहीं 22 मार्च से बेसिक की परीक्षाएं प्रस्तावित हैं। ऐसे में बिना शिक्षकों के ये परीक्षाएं कैसे होंगी। इसको लेकर शिक्षकों से लेकर अधिकारी तक परेशान हैं। यूपी बोर्ड की परीक्षाओं को कराने के लिए हर साल माध्यमिक के साथ-साथ बेसिक के शिक्षकों की ड्यूटी लगाई जाती थी। बोर्ड ने से पहली बार ऑनलाइन माध्यम से शिक्षकों की ड्यूटी लगाई है। ऐसे में सॉफ्टवेयर ने बेसिक के अधिकतर स्कूलों के शिक्षकों की ड्यूटी लगा दी है। इसकी वजह से कई जगहों पर सभी शिक्षकों की ड्यूटी लगने की वजह से विद्यालय उन दिनों बंद रहेंगे। वहीं 22 मार्च से बेसिक की परीक्षाएं भी प्रस्तावित है। ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि बेसिक के शिक्षक 22 से 31 मार्च तक अपनी परीक्षाएं कराएं या फिर 24 मार्च से शुरू हो रही बोर्ड की परीक्षाएं कराने जाएं। |
| Posted: 21 Mar 2022 06:52 PM PDT सोशल मीडिया व्हाट्सएप आदि पर यूपी बोर्ड परीक्षा का पेपर साझा करना अपराध, माध्यमिक शिक्षा विभाग ने जारी की सार्वजनिक चेतावनी सार्वजनिक सूचना सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि माध्यमिक शिक्षा परिषद् उ०प्र० प्रयागराज द्वारा दिनांक 24.03.2022 से हाईस्कूल एवं इण्टरमीडिएट की बोर्ड परीक्षायें प्रारम्भ हो रही हैं। बोर्ड की परीक्षा में किसी विषय की परीक्षा समाप्त होने से पूर्व यदि उस विषय का कोई प्रश्न पत्र या उसका हल WhatsApp/सोशल मीडिया या अन्य किसी माध्यम से संचारित करने का प्रयास किया जाता है तो ऐसा कृत्य उ०प्र० सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम-1998 की धारा - 4 / 10 के अन्तर्गत दण्डनीय, संज्ञेय एवं गैर जमानती अपराध है। किसी के मोबाइल / अन्य उपकरण पर / द्वारा ऐसा कृत्य पाये जाने पर कठोरतम कार्यवाही की जायेगी। परन्तु यदि कोई इस प्रकार के कृत्य की सूचना जनहित में अपर मुख्य सचिव, माध्यमिक शिक्षा, जिला मजिस्ट्रेट, पुलिस कमिश्नर / वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक / पुलिस अधीक्षक, सभापति / सचिव, माध्यमिक शिक्षा परिषद अथवा जिला विद्यालय निरीक्षक को देता है तो वह इस धारा से आच्छादित नहीं होगा । अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा विभाग उ0प्र0 शासन माध्यमिक शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश द्वारा जारी |
| Posted: 21 Mar 2022 06:24 PM PDT केंद्रीय विश्वविद्यालयों के दाखिले में बारहवीं के अंकों को इसी सत्र से नहीं मिलेगा वेटेज, अनिवार्य होगा कामन एंट्रेंस टेस्ट, मेरिट के आधार पर ही मिलेगा दाखिला। 45 केंद्रीय विश्वविद्यालय हैं देश में, सभी में लागू होगी नई व्यवस्था सुधार ◆ यूजीसी चेयरमैन ने स्पष्ट सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों के लिए दिए दिशा-निर्देश ◆ अंडर ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट दोनों के लिए होगा कामन एंट्रेंस टेस्ट ◆ केंद्रीय विवि के साथ राज्य और निजी विश्वविद्यालयों भी दाखिले में स्कोर का कर सकेंगे उपयोग कामन एंट्रेंस टेस्ट की जिम्मेदारी एनटीए को सौंपी गई। नई दिल्ली : सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों में दाखिला इस बार यानी नए शैक्षणिक सत्र 2022-23 से कामन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट नई व्यवस्था ( सीयूईटी) के जरिये ही होगा। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने सोमवार को इसे लेकर पूरी स्थिति स्पष्ट की है। साथ ही कहा है कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों के दखिले में बारहवीं के अंकों को अब कोई वेटेज नहीं मिलेगा, बल्कि इनमें दाखिला सीयूईटी की मेरिट के आधार पर ही मिलेगा। इस टेस्ट के आयोजन का जिम्मा नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) को सौंपा गया है। यूजीसी चेयरमैन मामिडाला जगदीश कुमार सोमवार को सीयूईटी को लेकर बताया कि सीयूईटी का आयोजन केंद्रीय विश्वविद्यालयों के अंडर ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट दोनों ही कोसों में दाखिले के लिए आयोजित होगी। सीयूईटी का आयोजन संभवतः जुलाई के पहले हफ्ते में होगा। इसकी अधिसूचना भी मंगलवार को जारी हो जाएगी। एक सवाल के जवाब में उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों को अब सीयूईटी के आधार पर ही छात्रों को दखिला देना होगा। यह सभी 45 केंद्रीय विश्वविद्यालयों के लिए अनिवार्य होगा। साथ ही राज्य और निजी विश्वविद्यालय भी चाहें तो वे भी सीयूईटी के स्कोर के आधार पर छात्रों को दाखिल दे सकते हैं। इसका डाटा सभी विश्वविद्यालयों को उपलब्ध करा दिया जाएगा। यूजीसी चेयरमैन ने साफ किया इस नई व्यवस्था के अनिवार्य होते ही केंद्रीय विश्वविद्यालयों में अब बारहवीं के अंकों के आधार पर कोई वेटेज नहीं मिलेगा। उनका कहना था कि इससे पीछे अलग-अलग बोडौँ में मूल्यांकन का अलग-अलग पैटर्न है। ऐसे में सिर्फ परीक्षा के आधार पर तैयार होने वाली मेरिट लिस्ट से ही अब दाखिला मिलेगा। यूजीसी चेयरमैन ने बताया कि यह परीक्षा कम्प्यूटराइज परीक्षा होगी। साथ ही तेरह भाषाओं में आयोजित होगी। इस वैरान सामान्य आरक्षण और संस्थानों की ओर से स्थानीय या फिर किसी अल्पसंख्यक वर्ग के लिए पहले से निर्धारित आरक्षण में बदलाव नहीं होगा। वह सारी व्यवस्था पूर्व की तरह लागू रहेगी। यह जरूर होगा कि सभी को दाखिला सीयूईटी के जरिए ही दिया जाएगा, यानी आरक्षित वर्ग में भी जो प्रतिभाशाली होंगे उन्हें पहले दाखिले का मौका मिलेगा। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि अगले हफ्ते तक इसकी तारीखों सहित पूरी प्रक्रिया भी एनटीए की ओर से घोषित कर दी जाएगी। इस पूरी व्यवस्था से छात्रों को दाखिले के काफी मौके भी मिलेंगे। साथ ही उन्हें बेकार में भटकना नहीं पड़ेगा। विद्यांजलि योजना से जुड़कर कोई भी बदल सकता है शिक्षण संस्थानों की तस्वीर अपने आसपास के उच्च शिक्षण संस्थानों की खराब हालात को लेकर अब सिर्फ कोसने से काम नहीं चलेगा बल्कि उन्हें बेहतर बनाने के लिए आपके सहयोग की भी जरूरत होगी। शिक्षा मंत्रालय ने उच्च शिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए विद्यांजलि स्कीम को नए रूप में सामने लाया है, जिसमें कोई भी स्वैच्छिक रूप से उच्च शिक्षण संस्थानों को बेहतर बनाने में सहयोग दे सकेगा। इनमें कोई व्यक्ति, उद्योग या संस्थान | सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर के स्तर पर ही नहीं बल्कि पढ़ाने या क्षेत्र विशेष में प्रशिक्षण देने आदि से भी जुड़ सकता है। |
| यूपी बोर्ड : 1.16 लाख शिक्षक कराएंगे 10वीं-12वीं की परीक्षा Posted: 21 Mar 2022 06:01 PM PDT यूपी बोर्ड : 1.16 लाख शिक्षक कराएंगे 10वीं-12वीं की परीक्षा प्रयागराज : 24 मार्च से शुरू हो रही यूपी बोर्ड की परीक्षा में 1.16 लाख शिक्षकों और केंद्र व्यवस्थापकों की ड्यूटी लगाई गई है। बोर्ड ने पहली बार अपने स्तर से केंद्र व्यवस्थापकों, अतिरिक्त केंद्र व्यवस्थापकों और कक्ष निरीक्षकों की ऑनलाइन ड्यूटी लगाई है। इसका मकसद परीक्षा को शुचितापूर्वक और नकलविहीन संपन्न कराना है। सूत्रों के अनुसार 8373 परीक्षा केंद्रों पर लगभग एक लाख कक्ष निरीक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है। 250 या इससे कम परीक्षार्थियों पर एक, 251 से 500 तक दो, 501 से 750 तक तीन और 750 से अधिक परीक्षार्थी होने पर चार कक्ष निरीक्षकों को लगाया गया है। प्रत्येक केंद्र के लिए एक केंद्र व्यवस्थापक व एक अतिरिक्त केंद्र व्यवस्थापक के हिसाब से 16746 प्रधानाचार्यों व वरिष्ठ शिक्षकों को जिम्मेदारी दी गई है। सभी 75 जिलों में पर्यवेक्षकों की हुई तैनाती: नकलविहीन बोर्ड परीक्षा संपन्न कराने के लिए सभी 75 जिलों में शिक्षा विभाग के एक-एक अफसर को पर्यवेक्षक बनाया गया है। शिक्षा निदेशालय में उप शिक्षा निदेशक (सेवा-1) डॉ. नीरज कुमार पांडेय को प्रयागराज, उप शिक्षा निदेशक (अर्थ) राजेन्द्र प्रताप को फतेहपुर, सर्व शिक्षा अभियान कार्यालय लखनऊ में वरिष्ठ विशेषज्ञ राजेन्द्र प्रसाद को प्रतापगढ़ और प्राचार्य आंग्ल भाषा शिक्षण संस्थान डॉ. स्कंद शुक्ल को कौशाम्बी का पर्यवेक्षक नामित किया गया है। कंट्रोल रूम में बड़ी टीवी स्क्रीन लगेगी: बोर्ड परीक्षा की ऑनलाइन निगरानी के लिए जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में स्थापित कंट्रोल रूम में जल्द बड़ी स्क्रीन लगाई जाएगी। डीएम संजय कुमार खत्री ने 16 मार्च को निरीक्षण के दौरान बड़ी स्क्रीन लगाने के निर्देश दिए थे ताकि एकसाथ 50 स्कूलों को देखा जा सके। वर्तमान में जो स्क्रीन लगी है उसमें 20-20 स्कूलों को ही देखा जा सकता है। जानकारी के मुताबिक बड़ी टीवी स्क्रीन मंगा ली गई है। आठ जोनल, 24 सेक्टर मजिस्ट्रेट लगाए बोर्ड परीक्षा के लिए जिले को आठ जोन और 24 सेक्टर में बांटा गया है। इनमें आठ जोनल और 24 सेक्टर मजिस्ट्रेट की तैनाती की गई है। इसके अलावा प्रत्येक केंद्र पर एक-एक स्टैटिक मजिस्ट्रेट को भी तैनात किया जाएगा। जिले की परीक्षा तैयारियों के संबंध में बैठक आज प्रयागराज के 321 केंद्रों पर 10वीं-12वीं की बोर्ड परीक्षा की तैयारियों को लेकर सेंट एंथोनी गर्ल्स इंटर कॉलेज में मंगलवार को बैठक होगी। सुबह 11 से 12 बजे तक सभी जोनल, सेक्टर और स्टैटिक मजिस्ट्रेट, 12.30 से 1.30 बजे तक अतिरिक्त केंद्र व्यवस्थापक और 2 से 3 बजे तक केंद्र व्यवस्थापकों की बैठक होगी। |
| यूपी के मदरसों में पढ़ने वालों की तादाद और घटी, देखें आंकड़े Posted: 21 Mar 2022 05:57 PM PDT यूपी के मदरसों में पढ़ने वालों की तादाद और घटी, देखें आंकड़े मुंशी मौलवी पाठ्यक्रम परीक्षा वर्ष रजिस्टर्ड परीक्षार्थियों की संख्या परीक्षा में शामिल हुए छात्र-छात्राओं की संख्या 2016 422627 317046 2017 371052 299053 2018 270755 208280 2019 206337 165778 2020 182259 141052 2021 123046 122132 2022 लगभग 92000 ———— लखनऊ : उत्तर प्रदेश में मुस्लिम बच्चे अब मुंशी-मौलवी नहीं बनना चाहते। राज्य के मदरसों में पढ़ने के प्रति नई पीढ़ी की दिलचस्पी लगातार कम होती जा रही है। इसका सुबूत हैं मदरसा शिक्षा परिषद के आंकड़े। इन आंकड़ों के अनुसार मुंशी मौलवी यानी सेकेण्ड्री और सीनियर सेकेण्ड्री पाठ्यक्रम में 3.30 लाख बच्चे कम हो गए हैं। लगातार तीन वर्षों से भी यह संख्या घटती जा रही है। बीते तीन वर्षों में ही 1.14 लाख छात्र कम हो गए हैं। मदरसों में इन कोर्सों में पंजीकृत छात्रों की संख्या वर्ष 2016 में 4 लाख 22 हजार 627 थी, जो इस साल यानी 2022 में घटकर महज 92000 रह गई है। इसकी वजह मदरसों की पढ़ाई पूरी करने के बाद छात्र-छात्राओं को मिलने वाले प्रमाण पत्र की कोई अहमियत न होना है। आज तक उ.प्र.मदरसा शिक्षा परिषद किसी भाषा विश्वविद्यालय से अपनी सम्बद्धता या अपने पाठ्यक्रमों की मान्यता हासिल नहीं कर सकी है। परिषद के चेयरमैन डा.इफ्तेखार जावेद खुद कुबूल करते हैं कि प्रदेश के मदरसों से पढ़कर निकलने वाले छात्र-छात्राओं को उनके प्रमाण पत्रों के आधार पर रोजगार नहीं मिलता। रमजान के बाद होंगी परीक्षाएं: परिषद के रजिस्ट्रार एस.एन.पाण्डेय ने बताया कि इस बार वार्षिक परीक्षाएं तीन अप्रैल से शुरू हो रहे रमजान के कारण मई के महीने में करवाई जाएंगी। |
| उच्च शिक्षा : छात्रों को नहीं मिल रही पूरी फीस प्रतिपूर्ति Posted: 21 Mar 2022 05:51 PM PDT उच्च शिक्षा : छात्रों को नहीं मिल रही पूरी फीस प्रतिपूर्ति लखनऊ : प्रदेश में स्व वित्त पोषित निजी कालेज विभिन्न पाठ्यक्रमों की फीस मनमाने ढंग से तय करते हैं मगर अनुसूचित जाति-जनजाति, सामान्य वर्ग, ओबीसी आदि के गरीब व जरूरतमंद छात्र-छात्राओं को सरकारी छात्रवृत्ति व फीस भरपाई की राशि उतनी नहीं मिलती, जिससे वह अपनी पूरी वार्षिक फीस अदा कर सकें। अफसर इसे निजी शिक्षण संस्थानों की मनमानी करार देते हैं। विभाग के सहायक निदेशक और छात्रवृत्ति प्रभारी सिद्धार्थ मिश्र बताते हैं-जिस विश्वविद्यालय से यह निजी कालेज सम्बद्ध होते हैं उस विश्वविद्यालय द्वारा बीबीए, बीसीए, एमपीएड, बीपीएड, एमएड, एलएलबी पाठ्यक्रमों की मनमाने ढंग से तय फीस मान्य नहीं होती। न ही प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा विभाग की ओर से ही इस तय फीस का अनुमोदन ही होता है। आगरा के आंबेडकर विवि से सम्बद्ध निजी कालेजों में बीबीए, बीसीए की फीस 40 हजार रुपये अधिक है। मगर विभाग से बीबीए की फीस भरपाई की राशि 2992 रुपये और बीसीए पाठ्यक्रम की फीस भरपाई 14075 रुपये ही आई। |
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