प्राइमरी का मास्टर ● इन |
- निजी बीएड कॉलेजों की मान्यता पर NCTE करे विचार - दिल्ली उच्च न्यायालय
- यूपी बोर्ड : समय सीमा बीती - न फोटो अपलोड हुई और न ही दिया प्रमाणपत्र
- Russia - Ukraine War : यूक्रेन से लौटे मेडिकल छात्र देश-विदेश में पूरी कर सकेंगे MBBS की पढ़ाई? जानिए क्या सरकार दे सकती है राहत?
- विदेश से MBBS की डिग्री पाना आसान, मगर भारत में प्रैक्टिस के लिए 25 फीसदी से कम पास कर पाते हैं जरूरी FMGE एग्जाम
| निजी बीएड कॉलेजों की मान्यता पर NCTE करे विचार - दिल्ली उच्च न्यायालय Posted: 04 Mar 2022 05:29 PM PST निजी बीएड कॉलेजों की मान्यता पर NCTE करे विचार - दिल्ली उच्च न्यायालय दिल्ली उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) को निर्देश दिया है कि वह हरियाणा और राजस्थान के सौ अधिक निजी शिक्षक प्रशिक्षण एवं बीएड कॉलेजों को मान्यता देने पर विचार करे। ये संस्थान पिछले लंबे समय से मान्यता पाने का इंतजार कर रहे हैं। कोर्ट ने कहा, . देश आज भी 100% साक्षरता का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए जूझ रहा है। ऐसे में शैक्षणिक संस्थानों को बर्बाद होने के लिए नहीं छोड़ा जा सकता। जस्टिस रेखा पल्ली की अदालत ने दोनों राज्यों के इन कॉलेजों की ओर से दायर याचिका पर यह निर्देश दिया है। न्यायालय ने एनसीटीई को राज्यों के आदेश को दरकिनार कर इन कॉलेजों को मान्यता देने पर विचार करने के लिए कहा है। दोनों राज्यों के भीतर किसी भी कॉलेज को मंजूरी देने पर प्रतिबंध लगा रखा है। कोर्ट ने कहा कि इस बात को अनदेखा नहीं किया जा सकता है कि एनसीटीई की सलाह के बाद ही इन कॉलेजों ने बीएड व शिक्षक प्रशिक्षण के अन्य पाठ्यक्रम की मंजूरी के लिए आवेदन किया और संसाधनों के विकास पर करोड़ों खर्च किए। ऐसे में इन संस्थानों के संसाधनों को बर्बाद होने के लिए छोड़ देना सही नहीं होगा। कोर्टी ने कहा, अगले शैक्षणिक सत्र के लिए याचिकाकर्ता कॉलेजों को मान्यता देने से एक फायदा यह होगा कि ऐसे शिक्षण संस्थानों की उपलब्धता बढ़ेगी। क्या है मामला एनसीटीई ने 2008 में देशभर में बीएड सहित शिक्षक प्रशिक्षण के विभिन्न कॉलेजों को मान्यता देने के लिए आवेदन मंगाए थे। इसके बाद हरियाणा राजस्थान के सौ से अधिक कॉलेजों ने भी संसाधन विकसित कर मान्यता के लिए आवेदन किया था। मगर, हरियाणा और राजस्थान सरकार ने 2009 में निर्णय किया कि राज्य में किसी कॉलेज को मान्यता नहीं दी जाएगी। इसके बाद एनसीटीई ने कॉलेजों को मान्यता देने के बारे में विचार किए बगैर ही अर्जी को वापस कर दिया। |
| यूपी बोर्ड : समय सीमा बीती - न फोटो अपलोड हुई और न ही दिया प्रमाणपत्र Posted: 04 Mar 2022 05:24 PM PST यूपी बोर्ड : समय सीमा बीती - न फोटो अपलोड हुई और न ही दिया प्रमाणपत्र प्रयागराज। यूपी बोर्ड की हाईस्कूल, इंटर परीक्षा के लिए पंजीकरण कराने वाले जिन छात्र-छात्राओं की फोटो परीक्षा फॉर्म में साफ नहीं थी या लगी नहीं थी, उनमें से अधिकांश की फोटो समयसीमा बीतने के बावजूद अपलोड नहीं की जा सकी है। 10वीं-12वीं के परीक्षा फॉर्म में तकरीबन एक लाख बच्चों की फोटो संदिग्ध थी या लगी नहीं थी। इसके अलावा दिव्यांग अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र भी अपलोड नहीं थे। बोर्ड ने 28 फरवरी तक सही फोटो और दिव्यांग प्रमाणपत्र अपलोड करने के निर्देश दिए थे। यूपी बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय के अपर सचिव विनय गिल ने उन जिला विद्यालय निरीक्षकों को दो मार्च को पत्र लिखा है, जिनके जिले में ज्यादा लापरवाही सामने आई है। अकेले रायबरेली में हाईस्कूल के 192 और इंटर के 100 बच्चों की सही फोटो अपलोड नहीं हो सकी। |
| Posted: 04 Mar 2022 10:12 AM PST Russia - Ukraine War : यूक्रेन से लौटे मेडिकल छात्र देश-विदेश में पूरी कर सकेंगे MBBS की पढ़ाई? जानिए क्या सरकार दे सकती है राहत? Russia-Ukraine War: केंद्र सरकार ने इस संबंध में फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट लाइसेंसिंग एक्ट में बड़े बदलाव करने का फैसला किया है, ताकि यूक्रेन से लौटे बच्चों का भविष्य खराब न हो और समय भी बेकार न जाए। भारत सरकार ऑपरेशन गंगा (Operation Ganga) के तहत रूस-यूक्रेन के जंग (Russia Ukraine War) के मैदान से जान बचाकर स्वदेश लौटने वाले मेडिकल छात्रों को बड़ी राहत देने की तैयारी कर रही है। केंद्र सरकार ने इस संबंध में फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट लाइसेंसिंग एक्ट में बड़े बदलाव करने का फैसला किया है, ताकि यूक्रेन से लौटे बच्चों का भविष्य खराब न हो और समय भी बेकार न जाए। केंद्र सरकार ने इस संबंध में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) और नीति आयोग (NITI Aayog) को एफएमजीएल (Foreign Medical Graduate Licentiate) एक्ट-2021 में राहत और मदद देने की संभावनाएं तलाशने को कहा है। इसके साथ ही यह भी पता लगाना होगा कि यूक्रेन से लौटे विद्यार्थियों के लिए देश और विदेश के प्राइवेट कॉलेजों में पढ़ने की क्या व्यवस्था की जा सकती है? सूत्रों के अनुसार, इसका समाधान खोजने के लिए जल्द ही केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) और नीति आयोग के अधिकारी एक बैठक कर विकल्पों पर चर्चा करेंगे और मानवीय आधार पर राहत देने के लिए जमीनी स्तर पर संभावनाएं तलाशेंगे। क्या हैं एनएमसी के एफएमजीएल प्रावधान? नेशनल मेडिकल कमीशन के एफएमजीएल एक्ट 2021 के प्रावधानों के अनुसार पूरे पाठ्यक्रम के दौरान पूरी पढ़ाई, प्रशिक्षण और इंटर्नशिप या क्लर्कशिप आदि सभी भारत के बाहर एक ही विदेशी संस्थान, विश्वविद्यालय या कॉलेज में किए जाने चाहिए। इसके साथ ही प्रावधानों में यह भी कहा गया है कि चिकित्सा प्रशिक्षण और इंटर्नशिप का कोई भी हिस्सा भारत में या उस देश जहां से प्राथमिक चिकित्सा योग्यता यानी ग्रेजुएट स्तर की पढ़ाई पूरी की गई है, के अलावा किसी अन्य देश में नहीं किया जा सकता है। मेडिकल छात्रों को समायोजित करने का नियम नहीं आधिकारिक सूत्र ने बताया कि वर्तमान में मेडिकल छात्रों को समायोजित करने के लिए नेशनल मेडिकल कमीशन के नियमों के तहत ऐसा कोई मानदंड और नियम नहीं हैं, जो विदेश में पढ़ रहे छात्रों को अकादमिक सत्र के बीच में भारतीय मेडिकल कॉलेजों या संस्थानों में समायोजित करने की अनुमित देता हो। हालांकि, ऐसी असाधारण परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए मानवीय आधार पर इस मुद्दे की समीक्षा की जाएगी और सहानुभूतिपूर्वक राहत देने की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। समाधान तलाशने को करनी होगी माथापच्ची यूक्रेन से लौट रहे और पूर्व में चीन से लौटे छात्रों के भविष्य को लेकर अधिकारियों को माथापच्ची करनी पड़ेगी, तब कहीं जाकर समाधान की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। एनएमसी के प्रावधानों में छूट की संभावना का पता लगाने या ऐसे छात्रों को निजी मेडिकल कॉलेजों में अपना पाठ्यक्रम पूरा करने या दूसरे देशों में कॉलेजों में स्थानांतरण की छूट देना भी आसान नहीं है। अधिकारियों के अनुसार, यूक्रेन में छह साल का एमबीबीएस कोर्स और दो साल का इंटर्नशिप प्रोग्राम है और यह भारत के निजी मेडिकल कॉलेजों की तुलना में काफी किफायती है। |
| Posted: 04 Mar 2022 10:00 AM PST विदेश से MBBS की डिग्री पाना आसान, मगर भारत में प्रैक्टिस के लिए 25 फीसदी से कम पास कर पाते हैं जरूरी FMGE एग्जाम Medical Education in India: विदेशी यूनिवर्सिटी से डिग्री लेकर लौटे छात्रों को भारत में मेडिकल प्रैक्टिस करने के लिए FMGE की परीक्षा पास करना अनिवार्य है. यह परीक्षा साल में 2 बार आयोजित की जाती है मगर इसमें सफलता की दर बेहद कम है. 🔴 साल में 2 बार होती है FMGE परीक्षा 🔴 भारत में प्रैक्टिस के लिए है जरूरी Medical Education in India: भारत में डॉक्टर बनने की इच्छा रखने वाले युवाओं की राह बेहद मुश्किल है. NEET परीक्षा में कड़ी प्रतिस्पर्धा और प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की बेहिसाब फीस के चलते छात्र विदेश से MBBS की डिग्री पाना पसंद करते हैं. मगर यहां भी मुश्किल खत्म नहीं होती. विदेशी यूनिवर्सिटी से डिग्री लेकर लौटे छात्रों को भारत में मेडिकल प्रैक्टिस करने के लिए FMGE की परीक्षा पास करना अनिवार्य है. यह परीक्षा साल में 2 बार आयोजित की जाती है मगर इसमें सफलता की दर बेहद कम है. क्या है FMGE एग्जाम? FMG यानी फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट के लिए NBE एक परीक्षा आयोजित करता है. यह एक स्क्रीनिंग टेस्ट है जिसमें 50 प्रतिशत नंबर लाना जरूरी होता है. अलग-अलग देशों की यूनिवर्सिटी के मेडिकल कोर्सज़ के डिफरेंस के कारण यह परीक्षा आयोजित की जाती है. इसे क्वालिफाई करने के बाद ही उम्मीदवारों को भारत में प्रैक्टिस की अनुमति मिलती है. 25 फीसदी से कम कर पाते हैं पास आधिकारिक वेबसाइट पर मौजूद बीते वर्षों के एग्जाम रिजल्ट पर नज़र डालें तो पता चलता है कि इस एग्जाम में छात्रों के पास होने का प्रतिशत बेहद कम है. कुछ आंकड़ें यहां देखें. सीमित होते हैं मौके बता दें कि परीक्षा पास करने के लिए छात्रों के पास मौके सीमित होते हैं. MBBS कोर्स में एडमिशन लेने के बाद कुल 10 सालों के भीतर परीक्षा पास करनी जरूरी होती है. यूक्रेन या रूस में MBBS कोर्स की औसतन अवधि 6 साल की है. इसके बाद छात्रों को 12 महीने की इंटरर्नशिप अपने कॉलेज से पूरी करनी होती है और 12 महीने की इंटर्नशिप भारत लौटने के बाद करनी होती है. इसे मिलाकर 8 साल का समय पूरा हो जाता है. छात्रों को अपने कोर्स के अनुसार 10 साल की अवधि में एग्जाम पास करना जरूरी होता है. हालांकि, परीक्षा साल में 2 बार आयोजित होती है जिसके चलते पर्याप्त मौके मिल जाते हैं. मौजूदा हालातों में यूक्रेन से लौटे भारतीय छात्रों के लिए NBE के नियमों के चलते काफी समस्याएं आ सकती हैं. छात्रों को अभी अपना कोर्स पूरा होने को लेकर भी स्पष्टीकरण नहीं है. स्वास्थ्य मंत्रालय जल्द ही छात्रों की राहत के लिए नियमों में बदलाव कर सकता है. हालांकि, तब तक जारी संघर्ष के बीच हजारों भारतीय छात्रों की मेडिकल की पढ़ाई अधर में लटकी रहेगी. |
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