प्राइमरी का मास्टर ● इन |
- संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में आज से होंगे परीक्षा के लिए आवेदन
- प्रयागराज बीएसए का BEO और ARP को फरमान : बच्चों संग करेंगे भोजन वाट्सएप पर देंगे तस्वीर, प्रतिदिन दिन दो स्कूलों में बच्चों को होगा पढ़ाना
- यूपी के प्राइमरी स्कूलों के बच्चों को नई किताबें मिलने का रास्ता साफ, जुलाई से शुरू होगा वितरण
- पहले मूल्यांकन या प्रायोगिक परीक्षा के लिए शासन पर नजर, परीक्षा संपन्न कराने के बाद यूपी बोर्ड ने पूरी की दोनों की तैयारी
- मदरसा शिक्षकों की भर्ती में अब में नहीं चलेगा भाई-भतीजावाद, सरकार टीईटी की तर्ज पर एमटीईटी करने जा रही है लागू
- UPTET : ओएमआर शीट भरने में मामूली चूक से रोका गया यूपीटीईटी का परिणाम, गोला भरने की गलती से छह हजार युवा हुए बाहर
- बढ़ती महंगाई के दौर में दो साल से MDM की कन्वर्जन कॉस्ट न बढ़ने से गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध करा पाना बनी बड़ी चुनौती
- केंद्रीय विद्यालयों के दाखिले में अब नहीं चलेगा कोई कोटा, सांसदों की सिफारिश पर भी लगी रोक
- यूपी बोर्ड : परीक्षा ड्यूटी में अनुपस्थित और लापरवाही करने वालों पर शासन सख्त
- एडेड जूनियर भर्ती के विवादों का होगा निपटारा, खुलेगी भर्ती की राह
| संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में आज से होंगे परीक्षा के लिए आवेदन Posted: 14 Apr 2022 06:25 PM PDT संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में आज से होंगे परीक्षा के लिए आवेदन वाराणसी। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में प्रथमा, पूर्वमध्यमा, उत्तरमध्यमा, शास्त्री, आचार्य कक्षाओं में वार्षिक परीक्षाओं के लिए शुक्रवार से आवेदन प्रक्रिया शुरू होगी। छात्र एक हजार रुपये विलंब शुल्क के साथ सात जून तक परीक्षा आवेदन भर सकेंगे। परीक्षा आवेदन ऑनलाइन भरने की शुरूआत 17 अप्रैल से होगी और अंतिम तिथि 14 मई निर्धारित की गई है। परीक्षा नियंत्रक अर्चना जौहरी ने बताया कि छात्र 15 अप्रैल से चालान भर सकते हैं और 16 से शुल्क जमा कर सकते हैं। चालान भरने की अंतिम तिथि 12 मई और शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि 13 मई है। महाविद्यालयों द्वारा भरे हुए परीक्षा आवेदन पत्र भेजने की अंतिम तिथि 15 मई है। इसके बाद छात्र दो सौ रुपये विलंब शुल्क के साथ 25 मई तक चालान भर सकते हैं एक हजार रुपये विलंब शुल्क के साथ सात जून तक छात्र भर सकेंगे परीक्षा फार्म और 26 मई तक दो सौ रुपये विलंब शुल्क के साथ शुल्क जमा कर सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन भी दो सौ रुपये विलंब शुल्क के साथ 27 मई तक जमा कर सकते हैं। इसके बाद पांच सौ रुपये विलंब शुल्क के साथ 31 मई तक चालान भर सकते हैं। पांच सौ रुपये विलंब शुल्क के साथ एक जून तक शुल्क और पांच सौ रुपये विलंब शुल्क के साथ दो जून तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। इसके बाद एक हजार रुपये विलंब शुल्क के साथ पांच जून तक चालान, छह जून तक शुल्क और सात जून तक परीक्षा फार्म भर सकेंगे। |
| Posted: 14 Apr 2022 06:00 PM PDT प्रयागराज बीएसए का BEO और ARP को फरमान : बच्चों संग करेंगे भोजन वाट्सएप पर देंगे तस्वीर, प्रतिदिन दिन दो स्कूलों में बच्चों को होगा पढ़ाना प्रयागराज । परिषदीय स्कूलों की दशा सुधारने के लिए हर संभव कवायद की जा रही है। इसके लिए नित नए फरमान जारी हो रहे हैं। बीएसए प्रवीण कुमार तिवारी ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों और एआरपी को निर्देशित किया है कि वह प्रतिदिन एक विद्यालय के प्रार्थना में शामिल हों। साथ ही कम से एक विद्मयालय में मध्यांह भोजन बच्चों के साथ जरूर करें। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को पत्र लिखकर निर्देशित किया है। समस्त खंड शिक्षा अधिकारी और आरएपी प्रतिदिन एक-एक विद्यालय में प्रार्थना में शामिल होंगे इसकी तस्वीर व्हाट्सएप पर उसी दिन भेजना होगा। इसके अलावा प्रतिदिन एक विद्यालय में भोजनावकाश के दौरान उपस्थित रहकर एमडीएम को चखेंगे। स्वास्थ्य, स्वच्छता, सुरक्षा आदि के संबंध में ग्राम से समन्वय स्थापित करते हुए उन्हें सहभागिता निभाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। इसके अलावा रोजाना दो विद्यालयों में उपस्थित होकर विद्यार्थियों को कक्षा में कम से कम 5 मिनट जरूर पढ़ाएंगे। प्रयागराज जनपद के बेसिक शिक्षा अधिकारी ने समस्त खंड शिक्षा अधिकारी ( BEO) व ARP को जारी किए यह निर्देश |
| यूपी के प्राइमरी स्कूलों के बच्चों को नई किताबें मिलने का रास्ता साफ, जुलाई से शुरू होगा वितरण Posted: 14 Apr 2022 05:08 PM PDT यूपी के प्राइमरी स्कूलों के बच्चों को नई किताबें मिलने का रास्ता साफ, जुलाई से शुरू होगा वितरण लखनऊ ]। बेसिक शिक्षा परिषद के 1.58 लाख विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को अब नई किताबें मिलने का रास्ता साफ हो गया है। किताबें छापने वाली कंपनी को जीएसटी देने का नियम बदलने पर कैबिनेट ने मुहर लगा दी है। इसी माह के अंत तक करीब 14 करोड़ किताबें छापने का टेंडर कराने की तैयारी है और जुलाई में बच्चों को किताबें वितरित कराने की योजना बन रही है। नया शैक्षिक सत्र वैसे तो पहली अप्रैल को ही शुरू हो चुका है लेकिन, परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले और नए प्रवेश पाने वाले छात्र-छात्राओं के लिए किताबों का इंतजाम नहीं हो सका था, अगली कक्षाओं में पहुंचने वाले बच्चों से पुरानी किताबें जमा करके जैसे-तैसे पढ़ाई कराई जा रही थी। बेसिक शिक्षा विभाग को किताबों का टेंडर दिसंबर 2021 या फिर जनवरी में ही कराना था, उस समय प्रक्रिया शुरू हुई लेकिन विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लगने से टेंडर नहीं हो सका। इसलिए नई सरकार बनने की राह देखी जा रही थी, साथ ही पुस्तकों का प्रकाशन करने वाली कंपनी को जीएसटी भुगतान में अड़चन आ रही थी। कैबिनेट बाई सर्कुलेशन में जीएसटी का प्रकरण सुलझ गया है। बेसिक शिक्षा विभाग के अनुसार 18 अप्रैल को इस संबंध में बैठक हो रही है, उसमें टेंडर कराने व अन्य कार्यक्रम पर मुहर लगेगी। इस माह के अंत तक टेंडर प्रक्रिया पूरी कराने की तैयारी है। पिछले सत्र में परिषदीय स्कूलों में 1.83 करोड़ छात्र-छात्राएं पढ़ रहे थे और उस समय 13.5 करोड़ पुस्तकें प्रकाशित हुई थी। इस बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दो करोड़ नामांकन का लक्ष्य तय किया है, ऐसे में करीब 14 करोड़ किताबों का प्रकाशन कराने की योजना बन रही है। अफसरों का कहना है कि टेंडर होने के बाद दो माह में किताबें छप जाएंगी। ऐसे में गर्मी की छुट्टी के बाद जुलाई में स्कूल खुलने पर पुस्तकों का वितरण कराएंगे। |
| Posted: 14 Apr 2022 04:58 PM PDT पहले मूल्यांकन या प्रायोगिक परीक्षा के लिए शासन पर नजर, परीक्षा संपन्न कराने के बाद यूपी बोर्ड ने पूरी की दोनों की तैयारी ◆ परीक्षा संपन्न कराने के बाद यूपी बोर्ड ने पूरी की दोनों की तैयारी ◆ परीक्षकों के विवरण विषयवार वेबसाइट पर किए गए अपडेट प्रयागराज : उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) ने वर्ष 2022 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा संपन्न कराने के बाद प्रायोगिक परीक्षा और उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन की तैयारी पूरी कर ली है। पहले प्रायोगिक परीक्षा कराने या मूल्यांकन शुरू कराने के मामले में शासन के निर्णय के आधार पर प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी। आमतौर पर यूपी बोर्ड की लिखित परीक्षा के पहले प्रायोगिक परीक्षा संपन्न कराई जाती है, लेकिन इस बार विधानसभा चुनाव आचार संहिता के कारण प्रायोगिक परीक्षा पिछड़ गई। आचार संहिता खत्म होने के बाद शासन के निर्देश पर सभापति माध्यमिक शिक्षा परिषद विनय कुमार पाण्डेय ने बोर्ड की लिखित परीक्षा की तिथियों की घोषणा कर दी थी। उन्होंने कहा था कि इस बार प्रायोगिक को लिखित परीक्षा के बाद कराया जाएगा। अब 13 अप्रैल को परीक्षाएं संपन्न हो गई। ऐसे में परीक्षा संपन्न होने के पहले ही यूपी बोर्ड ने प्रायोगिक परीक्षा और मूल्यांकन कार्य कराने को लेकर तैयारियां शुरू कर दी थीं, जो कि पूरी हो गई हैं। प्रायोगिक परीक्षा को संपन्न कराने में लगभग दस दिन का समय लग सकता है। इसी तरह यूपी बोर्ड ने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन शुरू कराने को लेकर परीक्षकों का डाटा वेबसाइट पर पहले ही फीड करा दिया। कुछ परीक्षकों के डाटा अपडेट नहीं होने के कारण यूपी बोर्ड सचिव दिब्यकांत शुक्ल ने अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा आराधना शुक्ल के निर्देश पर परिषद की वेबसाइट को 13 और 14 अप्रैल के लिए खोला। प्रधानाचार्यों को निर्देश देकर इस अवधि में शिक्षकों विवरण का कराया गया। इसमें खासतौर पर शिक्षक की नियुक्ति किस विषय के लिए की गई है, पदनाम, शैक्षिक योग्यता, स्नातक व परास्नातक विषय को अपडेट किया गया, ताकि मूल्यांकन के कार्य में विषय की विशेषज्ञता को देखते हुए ड्यूटी लगाई जा सके। आगे की प्रक्रिया शीघ्र ही शुरू की जाएगी। बोर्ड परीक्षा में कार्रवाई की जेडी से मांगी रिपोर्ट प्रयागराज : उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा संपन्न कराने के बाद परीक्षा के दौरान की गई। कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है। सचिव ने प्रदेश के सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों (जेडी) से शुक्रवार तक परिषद की ईमेल आइडी पर पूरा विवरण भेजने को कहा है। इसमें कुल दर्ज कराए मुकदमे, कक्ष निरीक्षकों पर की गई कार्रवाई, कुल पकड़े गए नकलची, कक्ष निरीक्षकों की संदिग्ध भूमिका आदि की जानकारी देनी है। |
| Posted: 14 Apr 2022 04:43 PM PDT मदरसा शिक्षकों की भर्ती में अब में नहीं चलेगा भाई-भतीजावाद, सरकार टीईटी की तर्ज पर एमटीईटी करने जा रही है लागू ◆ एमटीईटी पास करने वाले ही बन सकेंगे मदरसों में शिक्षक ◆ मदरसों में गुणवत्ता शिक्षा के लिए सरकार का एक और कदम लखनऊ : मदरसा शिक्षकों की भर्ती में अब भाई-भतीजावाद नहीं चलेगा। मदरसों में सुधार की दिशा में उठाए जा रहे कदमों के तहत योगी सरकार ने अब मदरसा शिक्षकों की भर्ती की इस व्यवस्था पर लगाम लगाने जा रही है। सरकार ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की तर्ज पर मदरसा शिक्षक पात्रता परीक्षा (एमटीईटी) लागू करने का निर्णय लिया है। एमटीईटी पास करने वाले अभ्यर्थी ही मदरसों में शिक्षक बन सकेंगे। यह परीक्षा उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद कराएगा। दरअसल, प्रदेश सरकार से अनुदानित मदरसों में शिक्षकों के पद भरने का अधिकार वहां की प्रबंध समिति के पास होता है। मदरसा प्रबंधक शिक्षकों की भर्ती में अपनी मनमानी करते हैं। ज्यादातर प्रबंधक मदरसों में अपने रिश्तेदारों को ही तैनात कर लेते हैं। ऐसे में कई बार मदरसों में योग्य शिक्षक नहीं आ पाते हैं।इसका असर मदरसों की शिक्षा पर पड़ता है। इसलिए सरकार मदरसा शिक्षकों की भर्ती के नियमों में बड़ा बदलाव करने जा रही है। इसके लिए उत्तर प्रदेश अरबी फारसी मदरसा मान्यता, प्रशासन एवं सेवा विनियमावली 2016 में जरूरी संशोधन किया जाएगा। मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष डा. इफ्तिखार अहमद जावेद ने बताया कि मदरसों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए एमटीईटी का नियम लागू किया जा रहा है। इसके लागू होने के बाद उत्तर पाते हैं। इसका असर मदरसों की प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद एमटीईटी कराएगा। इसमें जो भी अभ्यर्थी उत्तीर्ण होंगे वह मदरसा शिक्षक बनने के योग्य होंगे। यानी मदरसों में अब जितने भी शिक्षकों के पद रिक्त हैं या भविष्य में रिक्त होंगे उनमें एमटीईटी पास करने वाले अभ्यर्थी ही शिक्षक बन सकेंगे। इसका विस्तृत प्रस्ताव शासन को भेजा जा रहा है। शिक्षकों के खाली हैं 482 पद मदरसा बोर्ड के रजिस्ट्रार एसएन पाण्डेय ने बताया कि प्रदेश सरकार 558 मदरसों को अनुदान देती है। वर्तमान में प्रधानाचार्य के 49 व शिक्षकों के 482 पद रिक्त हैं। इन सभी पदों पर भर्ती एमटीईटी पास करने वाले अभ्यर्थियों की होगी। एमटीईटी लागू होने के बाद मदरसों में योग्य शिक्षक मिल सकेंगे। |
| Posted: 14 Apr 2022 04:39 PM PDT UPTET : ओएमआर शीट भरने में मामूली चूक से रोका गया यूपीटीईटी का परिणाम, गोला भरने की गलती से छह हजार युवा हुए बाहर प्रयागराज : आठ अप्रैल को घोषित उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपी-टीईटी) 2021 के परिणाम ने हजारों युवाओं को निराश कर दिया। टीईटी के दौरान भाषा, रोल नंबर, बुकलेट सीरीज आदि का गोला सही नहीं भरने या एक से अधिक गोला भरने के कारण उनकी ओएमआर शीट का मूल्यांकन नहीं हुआ और पास होते हुए भी तकरीबन छह हजार प्रतियोगी छात्र बाहर हो गए। हालत यह है कि परिणाम घोषित होने के बाद से प्रतिदिन सैकड़ों छात्र सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय एलनगंज में पहुंचकर अपनी ओएमआर का मूल्यांकन करने की गुहार लगा रहे हैं। कई अभ्यर्थी तो अफसरों को अपना नंबर बताकर रो पड़ते हैं। लेकिन उन्हें टका सा जवाब मिलता है कि यदि गोला गलत भरा या नहीं भरा है तो किसी भी सूरत में ओएमआर का मूल्यांकन नहीं हो सकता। महज एक चूक ने इन युवाओं का कॅरियर बिगाड़ दिया और शिक्षक बनने के उनके सपने फिलहाल टूटे हुए नजर आ रहे हैं। यदि आने वाले दिनों में सरकार परिषदीय स्कूलों के लिए शिक्षक भर्ती निकालती है तो ये अभ्यर्थी आवेदन नहीं कर पाएंगे। पूर्व की परीक्षाओं में ऐसी गलती करने वाले कुछ अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक याचिकाएं की मगर कोई राहत नहीं मिली। |
| Posted: 14 Apr 2022 11:08 AM PDT बढ़ती महंगाई के दौर में दो साल से MDM की कन्वर्जन कॉस्ट न बढ़ने से गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध करा पाना बनी बड़ी चुनौती बढ़ती महंगाई के चलते हर सामान के दाम बढ़ गए हैं। खाद्य तेल, दाल, सब्जी, गैस सिलेंडर की रोफिलिंग आदि पर महंगाई का असर हुआ, लेकिन बेसिक स्कूलों में चलाए जा रहे मध्याहन भोजन योजना के कन्वर्जन कॉस्ट में दो सालों से वृद्धि नहीं हुई है। कन्वर्जन कॉस्ट अभी भी अप्रैल 2020 के रेट पर चल रही है। ऐसे में गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध करा पाना चुनौती बन गया है। माध्यहन भोजन योजना का संचालन के तहत बच्चों को निशुल्क भोजन की व्यवस्था है। इन स्कूलों में प्राथमिक स्तर पर 4.97 रुपये प्रति छात्र और उच्च प्राथमिक स्तर पर 7.45 रुपये प्रति छात्र की दर से कन्वर्जन कॉस्ट मिल रही है। वह कन्वर्जन फॉस्ट वर्ष 2020 में लागू हुई थी। तब से लगभग दो वर्ष का वक्त बीत चुका है, लेकिन कन्वर्जन कास्ट के रेट में एक पैसे की बढ़ोतरी नहीं हुई है। वर्तमान में खाद्य तेज, दाल, सब्जी, हरी सब्जी, फल व दूध आदि पर महंगाई की मार पड़ी है। गैस सिलेंडर रीफिलिंग के दाम लगोग दोगुने हो गए हैं। ऐसे में भोजन की गुणवत्ता क्या होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। वर्ष 2020 में अरहर की दाल 80 रुपये के आसपास थी जो अब 130 रुपये से अधिक प्रति किलो हो गई है। सरसों का तेल दोगुने दाम पर मिल रहा है। 2020 में इसका रेट 100 रुपये के आसपास था जो अब लगभग 200 रुपये के आसपास है। कन्वर्जन कॉस्ट का रेट नहीं बढ़ने से प्रधानाध्यापकों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। विभागीय अधिकारी व प्रशासन के अधिकारी विद्यालय में निरीक्षण के समय पहले एमडीएम की गुणवत्ता ही चेक करते हैं। गुणवत्ता खराब मिलने पर संबंधित प्रधानाध के खिलाफ कार्रवाई होती है। शिक्षकों ने कन्वर्जन कॉस्ट के दामों में बढ़ोतरी की मांग की है। पहले हर वर्ष कन्वर्जन कॉस्ट बढ़ती रही है, लेकिन इस बार दो वर्ष बीत जाने के बाद भी कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। |
| केंद्रीय विद्यालयों के दाखिले में अब नहीं चलेगा कोई कोटा, सांसदों की सिफारिश पर भी लगी रोक Posted: 14 Apr 2022 10:54 AM PDT केंद्रीय विद्यालयों के दाखिले में अब नहीं चलेगा कोई कोटा, सांसदों की सिफारिश पर भी लगी रोक केंद्रीय विद्यालय संगठन के मुताबिक सांसदों के केंद्रीय विद्यालयों में दाखिले से जुड़े कोटे को खत्म करने को लेकर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। इसे सिर्फ रोका गया है। इसके साथ ही दूसरी श्रेणियों के भी विशेष कोटे की भी समीक्षा की जा रही है। नई दिल्ली : केंद्रीय विद्यालयों के दाखिले में अब कोई कोटा नहीं चलेगा। केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) ने फिलहाल सांसदों सहित केंद्रीय विद्यालयों में दाखिले से जुड़ी सभी 17 श्रेणियों के विशेष कोटे पर रोक लगा दी है। यह रोक अभी अस्थायी रूप से लगाई गई है, लेकिन माना जा रहा है कि अब इसका बहाल होना मुश्किल है। इससे पहले शिक्षा मंत्री ने भी पिछले साल केंद्रीय विद्यालयों में दाखिले के अपने कोटे पर खत्म कर दिया था। इससे पहले तक शिक्षा मंत्री अपने कोटे से हजारों छात्रों को केंद्रीय विद्यालयों में दाखिला दिलवाते थे। यह दाखिला केंद्रीय विद्यालयों में निर्धारित सीटों के अतिरिक्त होता था। केंद्रीय विद्यालय संगठन के मुताबिक सांसदों के केंद्रीय विद्यालयों में दाखिले से जुड़े कोटे को खत्म करने को लेकर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। इसे सिर्फ रोका गया है। इसके साथ ही दूसरी श्रेणियों के भी विशेष कोटे की भी समीक्षा की जा रही है। इनमें कलेक्टर, केंद्रीय विद्यालय कर्मियों और पहले बच्चे के बालिका होने आदि से जुड़ा कोटा शामिल है। केंद्रीय विद्यालयों में इस बार दाखिले की प्रक्रिया में है कुछ देरी संगठन के मुताबिक समीक्षा के बाद इन्हें केंद्रीय विद्यालय संगठन से जुड़े बोर्ड आफ गर्वनेंस (BOG) की बैठक में रखा जाएगा। जिसके अध्यक्ष शिक्षा मंत्री होते हैं। इसमें किस कोटे को जारी रखना और किस को खत्म करना इस पर अंतिम निर्णय होगा। वैसे देखा जाए तो केंद्रीय विद्यालयों में इस बार दाखिले का प्रक्रिया में कुछ देरी है। इसकी एक वजह कोरोना संक्रमण है, जबकि दूसरा कारण केंद्रीय विद्यालयों में दाखिले की उम्र सीमा को पहली कक्षा में छह वर्ष किए जाने के फैसले को लेकर पैदा हुआ विवाद था। जिसे कोर्ट में भी चुनौती दी गई, लेकिन कोर्ट ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति की सिफारिशों के अनुरूप करार देते हुए इसमें दखल देने से अब इन्कार कर दिया है। अभी तक एक सांसद दस बच्चों का करा सकते थे दाखिला मौजूदा समय में प्रत्येक सांसद किन्हीं भी दस बच्चों का किसी भी कक्षा में अपने विशेष कोटे से दाखिला दिला सकते थे। इनमें लोकसभा सदस्य को अपने लोकसभा क्षेत्र के बच्चों को जबकि राज्यसभा सदस्य जिस प्रदेश से चुनकर आते हैं उस प्रदेश के किन्हीं भी दस बच्चों को प्रदेश के किसी भी जिले के केंद्रीय विद्यालय में दाखिला दिला सकते हैं। गौरतलब है कि केंद्रीय विद्यालयों में दाखिले के विशेष कोटे को खत्म करने की मांग संसद में भी उठी थी। कई सांसदों का कहना था कि कभी कभी यह उनके हारने का भी कारण बन जाता है। क्योंकि अभी उनके पास दस सीटों का ही कोटा है, लेकिन उनके पास दाखिले के लिए बड़ी संख्या में आवेदन आते हैं। जिनका काम नहीं हो पाता वे लोग नाराज हो जाते हैं। |
| यूपी बोर्ड : परीक्षा ड्यूटी में अनुपस्थित और लापरवाही करने वालों पर शासन सख्त Posted: 14 Apr 2022 08:50 AM PDT यूपी बोर्ड : परीक्षा ड्यूटी में अनुपस्थित और लापरवाही करने वालों पर शासन सख्त, बोर्ड सचिव ने मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों को पत्र लिखकर मांगी जानकारी सचिव यूपी बोर्ड दिव्यकांत शुक्ल ने मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों को पत्र लिखकर तीन बिंदुओं पर जानकारी मांगी है। इसमें परीक्षा के दौरान कितनी एफआईआर दर्ज हुई एवं इसमें सम्मिलित व्यक्तियों की सूचना मांगी है। यूपी बोर्ड परीक्षा 2022 खत्म हो चुकी है। अब शासन ने परीक्षा के दौरान ड्यूटी से अनुपस्थित और लापरवाही बरतने वालों पर शिकंजा कसेगा। शासन ने सचिव माध्यिमक शिक्षा परिषद से अब तक दर्ज एफआईआर समेत अन्य रिपोर्ट तलब की है। इस पर सचिव ने सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों को पत्र लिखकर इस संबंध में जानकारी मांगा है। सचिव यूपी बोर्ड दिव्यकांत शुक्ल ने मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों को पत्र लिखकर तीन बिंदुओं पर जानकारी मांगी है। इसमें परीक्षा के दौरान कितनी एफआईआर दर्ज हुई एवं इसमें सम्मिलित व्यक्तियों की सूचना मांगी है। साथ परीक्षा ड्यूटी में लगाए कक्ष निरीक्षकों एवं अन्य के बारे में सूचना मांगी है, जो अनुपस्थित रहे। साथ ही इनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है। इस बाबत रिपोर्ट देना है। इसके अलावा अनुपस्थित/ दोषी अधिकारी जिनके द्वारा शासकीय कार्म में लापरवाही की गई। इसकी सूचना एवं उनके विरुद्ध प्रस्तावित कार्रवाई के बारे में निश्चित प्रोफार्मा पर 15 अप्रैल तक जानकारी देना है। सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों को सभी जिलों से 15 अप्रैल तक रिपोर्ट लेकर निश्चित प्रोफार्मा पर परिषद के ईमेल करना है। |
| एडेड जूनियर भर्ती के विवादों का होगा निपटारा, खुलेगी भर्ती की राह Posted: 13 Apr 2022 05:04 PM PDT एडेड जूनियर भर्ती के विवादों का होगा निपटारा, खुलेगी भर्ती की राह प्रयागराज : प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों में शिक्षक भर्ती परीक्षा 2021 के परिणामों को लेकर हुए विवादों का जल्द निपटारा होगा। तकरीबन 600 से 700 अभ्यर्थियों ने प्रत्यावेदन देकर परीक्षा में कम अंक मिलने के आरोप लगाए हैं। 40 से 50 अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं की हैं। टीईटी पेपर लीक के बाद गिरफ्तार परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय के पूर्व सचिव संजय उपाध्याय के पास कोठार की चाबी थी। लेकिन कोठार नहीं खुलने के कारण प्रत्यावेदनों का निस्तारण नहीं हो पा रहा था। हाईकोर्ट से भी बार-बार समय लेना पड़ रहा था। अब कोठार से मूल ओएमआर शीट निकालने के लिए शासन ने चार सदस्यीय कमेटी गठित कर दी है। विशेष सचिव अवधेश कुमार तिवारी की ओर से 12 अप्रैल को जारी आदेश में डीएम प्रयागराज से नामित उपजिलाधिकारी स्तर का अधिकारी, एसएसपी से नामित उपाधीक्षक स्तर का अधिकारी, शिक्षा निदेशक से नामित उप निदेशक स्तर का अधिकारी और रजिस्ट्रार विभागीय परीक्षा को सदस्य बनाया गया है। कोठार से मूल ओएमआर निकालते समय वीडियो रिकॉर्डिंग कराई जाएगी। सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी आंतरिक समिति गठित करते हुए प्रत्यावेदनों का परीक्षण कराएंगे और यदि कोई विसंगति मिलती है तो उसकी रिपोर्ट शासन को भेजेगी। विवाद हल होने के बाद खुलेगी भर्ती की राह: एडेड जूनियर भर्ती की मूल ओएमआर मिलने के बाद परिणाम को लेकर जो प्रत्यावेदन मिले हैं या फिर हाईकोर्ट में याचिकाएं हुई हैं, उनका निस्तारण हो सकेगा। उसके बाद भर्ती की राह खुलेगी। |
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