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Sunday, April 3, 2022

दिव्य रश्मि न्यूज़ चैनल

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जग जननी यश वैभव दाता

Posted: 03 Apr 2022 08:36 AM PDT

जग जननी यश वैभव दाता

इस जग को तुम तार दो जीवन में मां सुख सार दो
यश वैभव कीर्ति अपार दो संकट सारे निवार दो

जग जननी यश वैभव दात्री बैरी दल विनाशिनी 
दानव दलनी शक्तिस्वरुपा दिव्य ज्योत प्रकाशिनी

रणचंडी मात भवानी मंझधार डूबी नैया तार दो 
खड्ग खप्पर वाली काली शक्ति का उपहार दो

सजा मां दरबार निराला शंख चक्र गदा कर सोहे 
सिंह सवार भवानी बैठी अनुपम छवि मन मोहे

मनोकामना पूरी कर दो धन वैभव भंडार कर दो 
भक्त खड़े तेरी शरण में सुख से आ झोली भर दो

चंड मुंड मार गिराया महिषासुर मर्दन कर डाला 
दुष्टों का संहार भवानी सिंधु जल में प्रगति ज्वाला

संकट हरणी मां जगदंबे तुम सृष्टि की करतार हो 
खुशियों के चमन खिला दो जीवन में सुख सार दो

रमाकांत सोनी सुदर्शन
नवलगढ़ जिला झुंझुनू राजस्थान
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प्रेरणा स्रोत है विरासत

Posted: 03 Apr 2022 08:33 AM PDT

प्रेरणा स्रोत है विरासत

सत्येन्द्र कुमार पाठक
विश्व धरोहर दिवस का "विश्व स्मारक और पुरातत्व स्थल दिवस" का नाम बदलकर 'विश्व धरोहर दिवस' अथवा 'विश्व विरासत दिवस' रखा गया है । विश्व धरोहर दिवस का उद्देश्य मानव विरासत को संरक्षित करना और क्षेत्र के सभी प्रासंगिक संगठनों के प्रयासों को पहचानना है। ट्यूनीशिया में 'इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ मोनुमेंट्स एंड साइट्स' द्वारा प्रथम विश्व धरोहर दिवस 18 अप्रैल 1982 ई. को मनाया गया था। विश्व प्रसिद्ध इमारतों और प्राकृतिक स्थलों की रक्षा के लिए 1968 ई. में अंतरराष्ट्रीय संगठनों द्वारा प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र के सामने 1972 ई. में स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान रखा गया प्रस्ताव पारित हुआ । विश्व के देशों ने ऐतिहासिक और प्राकृतिक धरोहरों को बचाने की शपथ लेने के बाद "यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज सेंटर" अस्तित्व में आया। विश्व के कुल 12 स्थलों को विश्व धरोहर स्थलों की सूची में प्रथम बार 18 अप्रैल 1978 ई. में शामिल करने के कारण "विश्व स्मारक और पुरातत्व स्थल दिवस" के रूप में मनाया गया था। यूनेस्को ने 1983 ई. से विश्व स्मारक और पुरातत्व स्थल दिवस को "विश्व धरोहर दिवस" के रूप में बदल दिया। 2011 ई. तक विश्व में 911 विश्व धरोहर स्थल मे 704 ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक, 180 प्राकृतिक और 27 मिश्रित स्थल हैं।
विश्व के ऐतिहासिक और प्राकृतिक धरोहरों को बचाने के लिए तथा रक्षा और लोगों तक उसकी महत्वता का संदेश देने के लिए प्रत्येक वर्ष विश्व धरोहर दिवस के रूप में मनाया जाता है। लोगों को इन धरोहरों के संरक्षण तथा महत्व से अवगत कराने तथा दुनियां के विभिन्न देशों में स्थित स्थलों की जानकारी देकर विरासत के प्रति आकर्षित किया जा सके। विश्व में मानव इतिहास से जुड़े समस्त इतिहास, संस्कृति एवं प्रकृति से जुड़े स्थलों का संरक्षण किया जाए तथा आमजन में इसके प्रति जागरूकता उत्पन्न की जाए और इसकी विशेषताएं लोगो को बताई जाए। यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थलों की प्राकृतिक धरोहर स्थल ,)सांस्कृतिक धरोहर स्थल , मिश्रित धरोहर स्थल को शामिल किया गया है ।भारत में कुल 38 स्थानों, शहर, इमारतों, गुफाओं आदि को यूनेस्को ने विश्व धरोहर में ताजमहल, आगरा का किला, अजंता और एलोरा की गुफाएं। गुजरात की रानी की वाव, पश्चिमी घाट, ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क और राजस्थान का किला। नालंदा विश्वविद्यालय, कार्बूजिए की वास्तुकला, कंचनजंघा पुष्प उद्यान और अहमदाबाद शहर। काजीरंगा अभयारण्य, केवलादेव उद्यान, महाबलीपुरम और सूर्य मंदिर कोणार्क। भीमबैठका, कुतुब मीनार, हिमालयन रेल और महाबोधि मंदिर। मानस अभयारण्य, हम्पी, गोवा के चर्च और फतेहपुर सीकरी। छत्रपति शिवाजी टर्मिनस, चंपाने पावागढ़, दिल्ली का लाल किला और जयपुर का जंतर मंतर। चोल मंदिर, खजुराहो मंदिर, पट्टादकल और एलिफेंटा की गुफाएं। सुंदरबन, सांची के बुद्ध स्मारक, हुमायूं का मकबरा और नंदा देवी का पुष्प उद्यान। जयपुर, विक्टोरियन गोथिक और आर्ट डेको है । यूनेस्को द्वारा विश्व में सर्वाधिक वर्ल्ड हेरिटेज साइट इटली में 51 , चीन में 48, स्पेन में 44, फ्रांस में 41, जर्मनी में 40, मेक्सिको में 33 , भारत में 38 ऐसे स्थलों को विश्व धरोहर में सम्मिलित हैं। भारत के विश्व विरासत स्थलों में आगरा का किला (1983, उत्तर प्रदेश) , अजंता की गुफाएं (1983, महाराष्ट्र) , एलोरा की गुफाएं (1983, महाराष्ट्र) , ताज महल (1983, उत्तर प्रदेश) ,महाबलीपुरम के स्मारक (1984, तमिलनाडु) , सूर्य मंदिर (1984, ओड़िशा) , मानस वन्यजीव अभ्यारण्य (1985, असम) , काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान (1985,असम) ,केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (1985, राजस्थान) , गोवा के चर्च (1986, गोवा) ,फतेहपुर सीकरी (1986, उत्तर प्रदेश) ,हम्पी के स्मारक (1986, कर्नाटक) , खजुराहो के मंदिर (1986, मध्य प्रदेश) , एलीफेंटा की गुफाएं (1987, महाराष्ट्र) ,महान चोल मंदिर (1987/2004, तमिलनाडु) ,पट्टाकल के स्मारक (1987, कर्नाटक) , सुंदरवन राष्ट्रीय उद्यान (1987, पश्चिम बंगाल) , नंदादेवी राष्ट्रीय उद्यान व फूलों की घाटी (1988/2005, उत्तराखंड) , सांची का स्तूप (1989, मध्य प्रदेश) , हुमायूं का मक़बरा (1993, दिल्ली) , क़ुतुब मीनार (1993, दिल्ली) ,भारत के पर्वतीय रेलवे - ,दार्जिलिंग (1999, पश्चिम बंगाल) ,नीलगिरी (2005, तमिलनाडु) ,शिमला (2008, हिमाचल प्रदेश) ,महाबोधि मंदिर (2002, बिहार) ,भीमबेटका गुफ़ाएं (2003, मध्य प्रदेश) ,चंपानेर - पावागढ़ पार्क (2004, गुजरात) , छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (2004, महाराष्ट्र) , लाल किला (2007, दिल्ली) ,जंतर-मंतर (2010, राजस्थान) , पश्चिमी घाट (2012, गुजरात,महाराष्ट्र, कर्नाटक,तमिलनाडु,केरल) , राजस्थान के पहाड़ी किले (2013, राजस्थान) , रानी की वाव (2014, गुजरात) ,ग्रेट हिमालयन राष्ट्रीय उद्यान (2014, हिमाचल प्रदेश) , नालंदा (2016, बिहार) , कंचनजंगा राष्ट्रीय उद्यान (2016, सिक्किम) , ली कार्बुसियर के स्थापत्य कार्य (2016, चंडीगढ़) , अहमदाबाद (2017, गुजरात), विक्टोरियन गोथिक और आर्ट डेको (2018, महाराष्ट्र) , जयपुर (2019, राजस्थान) है। दुनियां के विभिन्न देशों में ऐतिहासिक सांस्कृतिक महत्व के स्थल को भावी पीढ़ी के लिए बचाकर रखा जाए इन्हें धरोहर की सूची में रखा जाता हैं जिसे यूनेस्को द्वारा ऐसे ही प्राकृतिक, ऐतिहासिक, धार्मिक स्थलों को चिन्हित कर हेरिटेज साईट की लिस्ट में शामिल किया जाता हैं। हर वर्ष 18 अप्रैल के दिन विश्व विरासत दिवस दुनिया भर में मनाया जाता हैं। भारतीय विरासत संगठन का उद्देश्य है कि लोगों को धरोहरों के संरक्षण तथा महत्व से अवगत कराया जाए तथा दुनियां के विभिन्न देशों में स्थित ऐसे स्थलों की जानकारी देकर उन्हें विरासत के प्रति आकर्षित किया जा सके। हमारा भारत भी ऐतिहासिक, धार्मिक, प्राकृतिक एवं संस्कृतियों कलाकृतियों, स्मृतियों एवं स्थलों से परिपूर्ण देश हैं। विरासत के स्थल संसार के लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता रहा है। भारतीय नागरिक को देश की विरासत स्थलियों पर गर्व होना चाहिए तथा उनके संरक्षण के लिए आगे बढ़ना चाहिए। भारतीय विरासत संगठन द्वारा बिहार के विभिन्न जिलों में ऐतिहासिक स्थलों , स्मृतियों , पुरातात्विक स्थलों का सर्वेक्षण किया जा रहा है । भारतीय विरासत संगठन के अध्यक्ष साहित्यकार व इतिहासकार सत्येन्द्र कुमार पाठक द्वारा विरासत परिभ्रमण के तहत जहानाबाद जिले के मखदुमपुर प्रखंड के बराबर पर्वत समूह में स्थित गुफाएं , भित्तिचित्र , गुहा लेखन , मूर्तिकला , वास्तुकला , नेर का पत्थर युक्त मंदिर , मीरा बिगहा की मूर्तियां , धराउत का मंदिर एवं मूर्तियां , काको का सूर्यमंदिर एवं विष्णुआदित्य की मूर्ति , दक्षणी का सूर्य मूर्ति , भेलावर का मंदिर एवं मूर्तियां , हुलासगंज के दबधु की मूर्तियां , रतनी फरीदपुर प्रखंड की बुध्द मूर्तियां , जहानाबाद ठाकुरवाड़ी , मोदनगंज का चरुई के कालीमंदिर में स्थित कंकाली किमुर्तियाँ , अरवल जिले का करपी प्रखंड के करपी जगदम्बा स्थान मंदिर में अवस्थित मूर्तियां , किंजर का शिव मंदिर , पन्तित का मूर्तियां , रामपुरचाय का पंचमुखी शिव लिंग , कुर्था प्रखंड के लारी गढ़ एवं शिवलिंग , कलेर प्रखंड के मदसरवा का च्यावनेश्वर शिवमंदिर है । गया जिले का विरासतों में गया स्थित विष्णुपद मंदिर , मंगलागौरी , रामशिला , बँग्लास्थान , वागेश्वरी , मार्कण्डेय , ब्राह्मणी घाट का विरंचि नारायण , पितामहेश्वर , सूर्यकुंड , भगवान सूर्य की मूर्ति , प्रेतयोनिपर्वत प्रेतशिला , डंगेश्वरी पर्वत , ब्रह्मयोनि पर्वत , सीताकुंड , बोधगया का वोधिमन्दिर , बकरौर स्थित स्तूप , धर्मारण्य , मतंग वापी , बेलागंज प्रखंड का कौवाडोल पर्वत का ब्राह्मणधर्म का भित्तिचित्र , भूस्पर्स बुद्ध मूर्ति , बेल कालीमंदिर का विभूक्षणी माता की मूर्ति , बाणासुर का शोणितपुर गढ़ , मेन का कोटेश्वर स्थान , गुरूपा हिल , वजीरगंज का कुक्कुटापद गिरि हिल , जेठियन का स्तूप ,व्यास स्थल , कुर्किहार का ऋषि कश्यप एवं स्तूप ,कोंच प्रखंड के कोच में स्थित कोचेश्वर मंदिर , टिकारी प्रखंड के टिकरी किला , केशपा का तारा मंदिर एवं माता तारा की मूर्ति , नवादा जिले का वारशलीगंज के अपसढ़ स्थित वराह अवतार मूर्ति एवं मंदिर , दरियापुर पार्वती पर्वत , कौवकोल प्रखंड के इको हिल , बोलता पहाड़ , गोविंदपुर का ककोलत का नागवंशियों का निवास , ठंडा झरना , पकरीबरावां का मक्षेन्द्र नातन , लोमश हिल , रजौली स्थित दुर्वाशा स्थल , हिसुआ का सीतामढ़ी , नवादा के शोभ में शिवलिंग मंदिर , रूपौ का चंडी स्थान प्राचीन विरासत है । औरंगाबाद जिले का देव प्रखंड के देव सूर्यमंदिर एवं भगवान सूर्य की मूर्तियां , तलाव , गोह प्रखंड के देवकुण्ड स्थित बाबा दुग्धेश्वर नाथ एवं मंदिर , तलाव , गोह स्थित माता काली , भगवान शिव मंदिर एवं शिवलिंग , नवीनगर प्रखंड का नवीनगर में शोखा बाबा का मंदिर , सूर्यमंदिर, गजना माथा भगवती मंदिर ,रफीगंज का प्रचार हिल पर पत्थर युक्त जैन धर्म के पार्श्वनाथ , ब्रह्मा जी की मूर्ति , मदनपुर प्रखंड के उमगा हिल का सूर्यमंदिर , तलाव , दाउदनगर का दाऊद खां , शमशेर नगर का शमशेर खां का मकबरा , पवई का झुंझुनिया हिल कुटुंबा गढ़ मदार व पुनपुन नदी के संगम पर अवस्थित भृगुरारी का मंदिर एवं मूर्तियां प्राचीन है ।
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4 अप्रैल 2022, सोमवार का दैनिक पंचांग एवं राशिफल - सभी १२ राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन ? क्या है आप की राशी में विशेष ? जाने प्रशिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. प्रेम सागर पाण्डेय से |

Posted: 03 Apr 2022 08:27 AM PDT

4 अप्रैल 2022, सोमवार का दैनिक पंचांग एवं राशिफल - सभी १२ राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन ? क्या है आप की राशी में विशेष ? जाने प्रशिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. प्रेम सागर पाण्डेय से |

4 अप्रैल 2022, सोमवार का दैनिक पंचांग


🔅 तिथि तृतीया 01:02 PM

🔅 नक्षत्र भरणी 01:47 PM

🔅 करण :

                गर 01:57 PM

                वणिज 01:57 PM

🔅 पक्ष शुक्ल

🔅 योग विश्कुम्भ 07:41 AM

🔅 वार सोमवार

☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ

🔅 सूर्योदय 05:49 AM

🔅 चन्द्रोदय 07:27 AM

🔅 चन्द्र राशि मेष

🔅 सूर्यास्त 06:11 PM

🔅 चन्द्रास्त 09:02 PM

🔅 ऋतु वसंत
☀ हिन्दू मास एवं वर्ष

🔅 शक सम्वत 1944 शुभकृत

🔅 कलि सम्वत 5123

🔅 दिन काल 12:28 PM

🔅 विक्रम सम्वत 2079

🔅 मास अमांत चैत्र

🔅 मास पूर्णिमांत चैत्र
☀ शुभ और अशुभ समय

☀ शुभ समय

🔅 अभिजित 11:27:57 - 12:17:52

☀ अशुभ समय

🔅 दुष्टमुहूर्त 12:17 PM - 01:07 PM

🔅 कंटक 08:08 AM - 08:58 AM

🔅 यमघण्ट 11:27 AM - 12:17 PM

🔅 राहु काल 07:12 AM - 08:45 AM

🔅 कुलिक 02:47 PM - 03:37 PM

🔅 कालवेला या अर्द्धयाम 09:48 AM - 10:38 AM

🔅 यमगण्ड 10:19 AM - 11:52 AM

🔅 गुलिक काल 01:26 PM - 03:00 PM

☀ दिशा शूल

🔅 दिशा शूल पूर्व

☀ चन्द्रबल और ताराबल

☀ ताराबल

🔅 अश्विनी, भरणी, कृत्तिका, रोहिणी, आर्द्रा, पुष्य, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, शतभिषा, उत्तराभाद्रपद

☀ चन्द्रबल

🔅 मेष, मिथुन, कर्क, तुला, वृश्चिक, कुम्भ

🌹विशेष ~ चन्द्रघण्टादेवी सौभाग्यगौरी दर्शन पूजन, सरहुल (बिहार झारखण्ड),मनोरथ तृतीया, अरून्धती व्रत, गणगौरी व्रत,।🌹

पं.प्रेम सागर पाण्डेय् नक्षत्र ज्योतिष वास्तु अनुसंधान केन्द्र नि:शुल्क परामर्श - रविवार

4 अप्रैल 2022, सोमवार का दैनिक राशिफल

मेष (Aries): आज आप अधिक संवेदनशील रहेंगे। किसी के द्वारा आपकी भावना को ठेस पहुंच सकती है। मां की बीमारी के विचार सतायेंगे। मकान या जमीन के दस्तावेज आज न करें। मानसिक बेचैनी को दूर करने के लिए आध्यात्मिकता, योग का सहारा लें। पानी और जलाशय से दूर रहें। अभ्यास के लिए समय मध्यम है।

शुभ रंग = केशरी

शुभ अंक : 6

वृषभ (Tauras): आज आपको जरुरत से ज्यादा भावुकता के विचार आएंगे जिससे मन द्रवित हो उठेगा। हालांकि आपकी चिंता थोड़ी कम होगी, इस कारण आपका मन खुश रहेगा। आप कल्पना शक्ति से सृजनात्मक काम कर सकेंगे। परिजनों या दोस्तों के साथ अच्छा भोजन करने का मिलेगा। आकस्मिक प्रवास करना पड़ेगा। पैसों के बारे ध्यान रखने से उसका आयोजन कर सकेंगे।

शुभ रंग = क्रीम

शुभ अंक : 7

मिथुन (Gemini): रिश्तेदार और मित्रों के साथ मुलाकात से आप आनंद का अनुभव करेंगे। आर्थिक योजना में पहले थोड़ी मुसीबतें आएंगी लेकिन आप आसानी से काम पूरा कर सकेंगे। आप के जरुरी काम भी कुछ विलंब के बाद आसानी से पूरे होंगे जिससे आपको शांति महसूस होगी। नौकरी-धंधे में अनुकूल वातावरण रहेगा।

शुभ रंग = आसमानी

शुभ अंक : 2

कर्क (Cancer): आपके मन में आज प्यार और भावना छलक उठेगी और आप उसके प्रवाह में रहेंगे। दोस्त, स्वजन एवं सम्बंधी की ओर से भेंट-उपहार मिल सकता है। आप उनके साथ अपना दिन खुशी में बिताएंगे। प्रवास और सुंदर भोजन से आप रोमांचित रहेंगे। पत्नी के संग से मन प्रसन्न रहेगा।

शुभ रंग = उजला

शुभ अंक : 4


सिंह (Leo): आज कोर्ट-कचहरी के प्रश्न में सावधानी बरतने की सलाह देते हैं। मन भावनाओं से व्यथित रहेगा। आज कोई अनैतिक काम न हो, इसका ख्याल रखें। महिलाओं के बारे में विशेष ध्यान रखें। वाणी एवं वर्तन में संपर्क रखें। विदेश से समाचार मिलेंगे। कानूनी बातों का निर्णय सोच समझकर करें।

शुभ रंग = पींक

शुभ अंक : 8

कन्या (Virgo): घर, परिवार एवं व्यापार जैसे तमाम क्षेत्र लाभ लिए आपकी प्रतिक्षा कर रहे हैं। मित्रों के साथ आनंददायक प्रवास होगा तो दांपत्य जीवन में भी आप ज्यादा निकटता बना सकेंगे। स्त्री मित्र विशेष लाभदायी रहेंगी। धन प्राप्ति के लिए भी शुभ समय है। व्यापार के पैसे लेने के लिए प्रवास होगा। अविवाहितों को जीवनसाथी की तलाश में सफलता मिलेगी।

शुभ रंग = केशरी

शुभ अंक : 9

तुला (Libra): आज नौकरी में पदोन्नति के योग हैं। आप पर अधिकारियों की कृपादृष्टि रहेगी। परिवार में उत्सव का माहौल रहेगा। मन में भावनात्मकता बढ़ेगी। मां की ओर से फायदा होगा। उत्तम विवाह सुख प्राप्त होगा। जमीन जायदाद के दस्तावेज कर सकेंगे। व्यवसाय क्षेत्र में अच्छा एवं सफल दिन है।

शुभ रंग = आसमानी

शुभ अंक : 2

वृश्चिक (Scorpio): आपका आज का दिन मिला जुला रहेगा। लेखन-साहित्य से जुड़ी प्रवृत्ति करेंगे। कार्यस्थल पर प्रतिकूल परिस्थिति रहेगी। ऊपरी अधिकारियों का रवैया नकारात्मक रहेगा। प्रतिस्पर्धियों के साथ वाद-विवाद न करें। संतान से मतभेद खड़े होंगे। प्रवास की संभावना है। धन खर्च होगा।

शुभ रंग = केशरी

शुभ अंक : 6

धनु (Sagittarius): आज खाने-पीने में खास ध्यान रखें। कार्य सफलता में विलंब होने के कारण निराशा होगी। काम समय से पूरा नहीं होगा। काम का बोझ ज्यादा रहेगा। नये काम की शुरुआत न करें। शारीरिक स्वास्थ्य बिगड़ेगा। मन बेचैन रहेगा। बोलने पर संयम रखें। खर्च ज्यादा होगा।

शुभ रंग = उजला

शुभ अंक : 4

मकर (Capricorn): आज का दिन पैसों की दृष्टि से बहुत अच्छा रहेगा। व्यापार वृद्धि के योग हैं। दलाली, ब्याज, कमिशन से मिलने वाले पैसे आपके भंडार में वृद्धि करेंगे। प्रेमियों के लिए आज प्रणय परिचय का योग है। विजातीय आकर्षण रहेगा। सुंदर भोजन, वस्त्र परिधान एवं वाहनसुख प्राप्त होगा।

शुभ रंग = क्रीम

शुभ अंक : 7

कुंभ (Aquarius): वर्तमान समय में आप को कार्यों में सफलता मिलेगी एवं यशकीर्ति प्राप्त होगी। आज आप के स्वभाव में ज्यादा भावुकता रहेगी। मायके से अच्छे समाचार मिलेंगे। घर में प्रफुल्लितता का माहौल होगा। नौकरी में भी आप को साथियों का सहयोग मिलेगा। परिवार का माहौल सुख-शांति भरा रहेगा।

शुभ रंग = आसमानी

शुभ अंक : 2

मीन (Pisces): आज का दिन विद्यार्थियों के लिए अच्छा है। उनको अभ्यास में सफलता मिलेगी एवं प्रगति के लिए नया मौका प्राप्त होगा। आप अपनी कल्पना शक्ति से साहित्य लेखन में नया काम करेंगे। प्रेमीजन एक दूसरे का सानिध्य पा सकेंगे। आप के स्वभाव में ज्यादा भावुक्ता एवं कामुकता रहेगी।

शुभ रंग = पीला

शुभ अंक : 9 
प्रेम सागर पाण्डेय् ,नक्षत्र ज्योतिष वास्तु अनुसंधान केन्द्र ,नि:शुल्क परामर्श - रविवार , दूरभाष 9122608219 / 9835654844
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मढ़ौरा नारायण पब्लिक स्कूल में मनाया गया 22 वा स्थापना

Posted: 03 Apr 2022 06:08 AM PDT

मढ़ौरा नारायण पब्लिक स्कूल में मनाया गया 22 वा स्थापना

मढ़ौरा स्थित नारायण पब्लिक स्कूल का 22 वा स्थापना दिवस धुम धाम से मना l स्थापना दिवस पर पुर्व प्रधानाध्यापक रविशंकर लाल ने कहा कि बदलते परिवेश में शिक्षा के भी माप दंड बदल गए है जिसके अनुसार छात्राओं को ढलना होगा l पत्रकार विक्रम राज ने कहा कि आज जिस प्रकार से शिक्षा के क्षेत्र में प्रतिद्वता बढ़ी है उससे माता पिता को सबक लेकर अपने बच्चों को वैज्ञानिक तरीके से पढ़ना चाहिए ताहि बच्चे बड़े होकर परिवार तथा समाज को संभाल सके l शिक्षा समाज सुधार के साथ रोजगार मुख भी होनी चाहिए l स्थापना दिवस पर जहा भाव नृत्य ने लोगो का मन मोहा वही सरस्वती वंदना ने माहौल को भक्ति म य कर दिया l छोटी बची कनिका पानी रे पानी नृत्य पर सबको झूमने के लिए मजबूर कर दिया l कार्यक्रम की संचालन सोनू सर ने किया जबकि मंच सज्जा मधु मिस बिंदु तिवारी नेहा ने संभाला l इस अवसर पर छात्र छात्राओं के माता पिता द्वारा वर्तमान में शिक्षा में सुधार विषय पर चर्चा की गई जिसमे लालबाबु गिरी डॉ राजेश कुमार डॉ कर्ण सिंह चित्रमनी कुमार शिक्षक रमेश सिंह वहाबाब आलम ने इस पर विस्तृत चर्चा किया lआगत अतिथियों का स्वागत व्यवस्थापक राकेश कुमार सिंह ने किया l
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"खिलखिलाहट" ने अहमदाबाद में लगाया हेल्थ कैम्प

Posted: 03 Apr 2022 06:03 AM PDT

"खिलखिलाहट" ने अहमदाबाद में लगाया हेल्थ कैम्प

जितेन्द्र कुमार सिन्हा

सामाजिक संस्था "खिलखिलाहट" ने अहमदाबाद स्थित मणिनगर के मनियासा गार्डन में एक हेल्थ कैम्प का आयोजन किया, जिसमे वहां सुबह सुबह टहलने आने वाले लोगों की खून में शर्करा और ब्लड प्रेशर की जांच की गई।
कार्यक्रम में संस्था के अध्यक्ष प्रदीप कुमार, सदस्य तरुण कुमार सोनी, किरण भाई मोरे सहित अन्य सदस्य उपस्थित थे।
कार्यक्रम में अध्यक्ष प्रदीप कुमार के पुत्र क्षितिज सिन्हा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पूरी कार्यक्रम तरुण सोनी के नेतृत्व में सम्पन्न हुई।
अध्यक्ष प्रदीप कुमार ने बताया कि 02 अप्रैल (शनिवार) को सुबह आने वाले लोगों में स्वास्थ्य के प्रति एक अदभुत जागृति देखी गई। इस जांच शिविर में जिन लोगों का ब्लड प्रेशर थोड़ा ज्यादा प्रतीत हुआ और जिन लोगों का ब्लड शुगर या तो बॉर्डर पर था या थोड़ा ज्यादा निकला, उन्हें खान पान में बदलाव की सलाह दी गई और यह सुझाव भी दिया गया कि हो सके तो एक बार अपने पारिवारिक डॉक्टर से सम्पर्क कर लें।
उन्होंने बताया कि लोगों का कहना था कि इस प्रकार के प्रयोजन समय समय पर करनी चाहिए। उन्होंने उन सभी लोगों को विश्वास दिलाया कि समय समय पर इस प्रकार के कार्यक्रम खिलखिलाहट संस्था द्वारा होते रहेंगे। आपलोगों से बस सहयोग की अपेक्षा है। इस संस्था का उद्देश्य ही लोगों की सेवा करना है।
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या देवी सर्व भूतेषु मातृ रूपेण संस्थिता.

Posted: 03 Apr 2022 05:54 AM PDT

या देवी सर्व भूतेषु मातृ रूपेण संस्थिता...

(हृदयनारायण दीक्षित-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)

माँ प्रथमा है। परमात्मा भी माता के गर्भ से अवतार लेते हैं। हम सब मां का विस्तार हैं। निस्संदेह हम अस्तित्व का भाग हैं। अस्तित्व हमारा जनन संभव करता है। वह जननी है। अस्तित्व को मां देखना गहन आस्तिक भाव में ही संभव है। स्वयं को मां से जोड़ने का अनुष्ठान ही देवी उपासना है। हम प्रकृति पुत्र हैं। प्रकृति मां है। वही मूल है, वही आधार है। इसमें रहना, कर्म करना, कर्मफल पाना और अंततः इसी में समा जाना जीवनसत्य है। कुछ विद्वान प्राचीन भारत में देवी उपासना नहीं देखते लेकिन ऋग्वेद माता की गहन अनुभूति से भरापूरा है। ऋषि आनंद उल्लास और आश्वस्ति के हरेक प्रतीक में मां देखते हैं। इन ऋषियों के लिए माता पृथ्वी धारक है। पर्वतों को धारण करती है, मेघों को प्रेरित करती है। वर्षा के जल से अपने अंतस् ओज से वनस्पतियां धारण करती है। (5.84.1-3) ऋग्वेद में रात्रि भी एक देवी हैं "वे अविनाशी - अमत्र्या हैं, वे आकाश पुत्री हैं, पहले अंतरिक्ष को और बाद में निचले-ऊचे क्षेत्रों को आच्छादित करती है। उनके आगमन पर हम सब गौ, अश्वादि और पशु पक्षी भी विश्राम करते हैं।" (10.127) मां प्रकृति की आदि अनादि अनुभूति है। हमारा इस संसार में प्रथम परिचय मां से ही होता है।

मां हमारे संभवन का माध्यम है। दुनिया की तमाम आस्थाओं में ईश अवतरण हैं। आदरणीय देवदूत हैं। मां न होती तो हम न होते। भारत ने प्रकृति की दिव्य अन्तस् चेतना को माता कहा। भारत के प्रति अपनी गाढ़ी प्रीति के चलते हम सबने भारत को भी भारत माता जाना। प्रकृृति का हरेक अणु परमाणु मां का ही विस्तार है। इसलिए यहां सभी तत्वों, रूपों में मां की अनुभूति है - या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता। प्रकृति माता है। सदा से है। सदा रहती है। प्रलय जैसी चरम प्राकृतिक आपदा में भी सब कुछ नष्ट नहीं होता। भारतीय दर्शन की सांख्य शाखा के अनुसार तब प्रकृति के तीनों गुण सत्व, रज और तम साम्यावस्था में होते हैं। लेकिन गुणों की साम्यावस्था हमेशा नहीं रहती। साम्यावस्था भंग होती है, सृजन लहक उठता है। प्रकृति का अन्तस् जगत् का छन्दस् बनता है। यह अन्तस् अजन्मा है। दिव्य है सो देवता है। भारतीय अनुभूति में देवी है। माता है।

मां सृष्टि बीज है। सृष्टि का विकास जल से हुआ। यूनानी दार्शनिक थेल्स भी ऐसा ही मानते थे। अधिकांश विश्वदर्शन मंे जल सृष्टि का आदि तत्व है। ऋग्वेद में जल को भी मां देखा गया और प्रणाम किया गया है। ऋग्वेद में वे 'जल माताएं'-आपः मातरम् हैं। जल को बहुवचन रूप में याद किया गया है। जल माताएं देवियां हैं। मां ही जन्म देती है। मां नहीं तो सृष्टि विकास नहीं। ऋग्वैदिक अनुभूति में संसार के प्रत्येक तत्व को जन्म देने वाली यही आपः माताएं हैं: विश्वस्य स्थातुर्जगतो जनित्रीः (6.50.7) ऋग्वेद के बहुत बड़े देवता है अग्नि। ये भी बिना माता के नहीं जन्में। इन्हें भी आपः जल माताओं ने जन्म दिया है: तमापो अग्निं जनयन्त मातरः (10.91.6) ऋग्वेद में वाणी की देवी वाग्देवी (10.125) हैं। ऋग्वेद के वाक्सूक्त (10.125) में कहती हैं - "मैं रूद्रगणों वसुगणों के साथ भ्रमण करती हूँ। मित्र, वरूण, इन्द्र, अग्नि और अश्विनी कुमारों को धारण करती हूँ। मेरा स्वरूप विभिन्न रूपों में विद्यमान है। प्राणियों की श्रवण, मनन, दर्शन क्षमता का कारण मैं ही हूँ। मैं समस्त लोकों की सर्जक हूँ आदि। वे 'राष्ट्री संगमनी वसूनां - राष्ट्रवासियों और उनके सम्पूर्ण वैभव को संगठित करने वाली शक्ति - राष्ट्री है'। (10.125.3) हमारे पूर्वज ने राष्ट्र के लिए भी राष्ट्री देवी की अनुभूति दी। दुर्गा सप्तशती में यही देवी शक्ति है, लज्जा है। क्षुधा है। निद्रा भी है। माता और देवी है।

माता रूप देवी की उपासना वैदिक काल से भी प्राचीन है। ऋग्वेद में पृथ्वी माता हैं ही। इडा, सरस्वती और मही भी माता हैं, ये तीन देवियां कही गयी हैं - इडा, सरस्वती, मही तिस्रो देवीर्मयो भुव।" (1.13.9)एक मंत्र (3.4.8) में 'भारती को भारतीभिः' कहकर बुलाया गया है - आ भारती भारतीभिः। मां हरेक क्षण स्तुत्य है। दुख और विषाद में मां आश्वस्तिदायी है। प्रसन्नता और आह्लाद में भी मां की ही उपस्थिति होती है। देवी का आह्वान हरेक समय ऊर्जादायी है। इसलिए 'भारती' को नेह-न्योता है। जान पड़ता है कि भारतीभिः भरतजनों की इष्टदेवी हैं। ऋग्वेद में ऊषा भी देवी हैं। एक सूक्त (1.124) में "ये ऊषा देवी नियम पालन करती हैं। नियमित रूप से आती हैं।" (वही मन्त्र 2) ऊषा देवी हैं, इसीलिए उनकी स्तुतियाँ है, "वे सबको प्रकाश आनंद देती हैं। अपने पराए का भेद नहीं करतीं, छोटे से दूर नहीं होती, बड़े का त्याग नहीं करती।" (वही, 6) समद्रष्टा हैं। सबको समान दृष्टि से देखती है। ऋग्वेद में जागरण की महत्ता है इसलिए "सम्पूर्ण प्राणियों में सर्वप्रथम ऊषा ही जागती हंै।" (1.123.2) प्रार्थना है कि "हमारी बुद्धि सत्कर्मो की ओर प्रेरित करे।" (वही, 6) ऊषा सतत् प्रवाह है। आती हैं, जाती हैं फिर फिर आती हैं। जैसी आज आई हैं, वैसे ही आगे भी आएंगी। ऊषा देवी नमस्कारों के योग्य हैं।

मन चंचल है। यह कर्म के लिए जरूरी एकाग्रता में बाधक है। ऋग्वेद में मन की शासक देवी का नाम 'मनीषा' है। मनीषा और प्रज्ञा पर्यायवाची हैं। ऋषि उनका आवाहन करते हैं "प्र शुकैतु देवी मनीषा"। (7.34.1) प्रत्यक्ष देखे, सुने और अनुभव में आए दिव्य तत्वों के प्रति विश्वास बढ़ता है, विश्वास श्रद्धा बनता है। ऋग्वेद में श्रद्धा भी एक देवी हैं, "श्रद्धा प्रातर्हवामहे, श्रद्धा मध्यंदिन परि, श्रद्धां सूर्यस्य निम्रुचि श्रद्धे श्रद्धापयेह नः" - हम प्रातः काल श्रद्धा का आवाहन करते हैं, मध्यान्ह मेें श्रद्धा का आवाहन करते हैं, सूर्यास्त काल में श्रद्धा की ही उपासना करते हैं। हे श्रद्धा हम सबको श्रद्धा से परिपूर्ण करें। (10.151.5) यहां श्रद्धा से ही श्रद्धा की याचना में गहन भावबोध है। श्रद्धा प्रकृति की विभूतियों में शिखर है - श्रद्धां भगस्तय मूर्धनि। (10.151.1) देवी उपासना प्रकृति की विराट शक्ति की ही उपासना है। अस्तित्व का अणु परमाणु दिव्य है, देवी है और माता है। दुर्गा, महाकाली, महासरस्वती, महालक्ष्मी या सिद्धिदात्री आदि कोई नाम भी दीजिए। देवी दिव्यता हैं। माँ हैं। भारत स्वाभाविक ही देवी उपासक है। सभी रूप प्रकृति के ही रूप हैं। हमारा रूप प्रकृति का ही रूप है। हमारे गुण प्राकृतिक हैं। हम अपनी सुविधा के लिए उन्हें अनेक नाम देते हैं। दुर्गा, काली, सरस्वती, शाकम्भरी, महामेधा, कल्याणी, वैष्णवी, पार्वती आदि आदि। नाम स्मरण बोध में सहायक हैं। असली बात है - मां। या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता, नमस्तस्ये, नमस्तस्ये, नमस्तस्ये नमो नमः। अंधविश्वास या आस्था का कोई प्रश्न नहीं। विज्ञान प्रकृति में पदार्थ और ऊर्जा देख चुका है। पदार्थ और ऊर्जा भी अब दो नहीं रहे। समूची प्रकृति एक अखण्ड इकाई है। इस अखण्ड इकाई का नाम क्या रखें? कठिनाई बड़ी है। नाम रखते ही रूप का ध्यान आता है। रूप की सीमा है। अखण्ड प्रकृति अनंत है। असीम और अव्याख्येय। इसे मां कहने में ही परिपूर्ण ममत्व प्रीति खिलती है। मां सुख, आनंद, रिद्धि, सिद्धि, प्रसिद्धि का मूल है।
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चुनाव में साम्प्रदायिक कीचड़

Posted: 03 Apr 2022 05:52 AM PDT

चुनाव में साम्प्रदायिक कीचड़

(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)
इस बार अर्थात 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में साम्प्रदायिक कीचड़ ज्यादा था। कीचड़ में कमल खिलना स्वाभाविक है और अनुभव बताता है कि कीचड़ में साइकिल चलाना मुश्किल होता है। इसलिए समाजवादी पार्टी (सपा) की साइकिल चली लेकिन भाजपा के कमल से बहुत पीछे रह गयी। यह कीचड़ चुनावी प्रतियोगिता को भी प्रदूषित कर गया है। इसीलिए अब चुनाव नतीजे घोषित होने के बाद यह आकलन किया जा रहा है कि किस सम्प्रदाय ने किस राजनीतिक दल को कितने वोट दिये हैं। इस बार यूपी में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ने साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण का प्रयास किया।आलम ये रहा कि उसको एक फीसदी से भी कम वोट मिला। यही नहीं, उन्होंने 100 से ज्यादा प्रत्याशी उतारे थे, लेकिन सिर्फ एक ही अपनी जमानत बचाने में सफल हो सका। इस दौरान एआईएमआईएम की आजमगढ़ की मुबारकपुर सीट पर ही 'लाज' बच सकी। मुबारकपुर सीट से शाह आलम (गुड्डू जमाली) ने 36419 वोट हासिल किए और वह चैथे नंबर पर रहे। इस सीट से समाजवादी पार्टी के अखिलेश ने परचम लहराया,तो बसपा दूसरे और बीजेपी को तीसरे स्थान से संतोष करना पड़ा। वैसे आजमगढ़ की सभी 10 सीटों पर सपा ने कब्जा किया है। ये नतीजे एक विशेष सम्प्रदाय के मतों के ध्रुवीकरण माने जा रहे हैं। शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली यूपी के आजमगढ़ के जमालपुर गांव के रहने वाले हैं । इनके पिता अधिवक्ता हैं। गुड्डू जमाली की प्रारंभिक शिक्षा आजमगढ़ से तो जामिया

मिलिया विश्वविद्यालय से बीकॉम और एमबीए किया है। वह 2012 में बसपा के टिकट पर मुबारकपुर से विधायक चुने गए थे। इसके बाद 2017 में फिर बसपा के टिकट पर चुनाव जीतकर लखनऊ पहुंचे, लेकिन उन्होंने 25 नवंबर 2021 को बसपा से त्यागपत्र दे दिया था। इसके बाद शाह आलम के सपा में जाने की चर्चा थी, लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिला तो ओवैसी का दामन थाम लिया।

यूपी विधानसभा चुनाव के रिजल्ट के बाद सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव अचानक लखनऊ कार्यालय पहुंच गए। इस दौरान अखिलेश यादव ने नेताजी के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। वहीं, नेताजी ने कहा कि अखिलेश बहुत अच्छा लड़े तुम, बहुत-बहुत बधाई। बता दें कि इस बार सपा गठबंधन को यूपी चुनाव में 125 सीटों पर जीत मिली है। वहीं, नेताजी ने करहल, इटावा और जौनपुर की मल्हनी सीट पर सपा के लिए प्रचार किया था। उत्तर प्रदेश की सियासत में एक समय था, जब मुस्लिम-यादव सत्ता की दशा-दिशा तय किया करते थे तो पश्चिम यूपी में जाट-मुस्लिम कॉम्बिनेशन निर्णायक माने जाते थे। यूपी में मुस्लिम-यादव यानी एमवाई समीकरण के दम पर सपा कई बार सूबे की सत्ता पर काबिज हुई, तो जाट-मुस्लिम फैक्टर के सहारे चैधरी चरण सिंह से लेकर चैधरी अजित सिंह किंगमेकर बनते रहे हैं लेकिन बीजेपी के सियासी उभार के बाद सूबे की सियासी फिजा ऐसी बदल गई है कि न विपक्ष का कोई सियासी प्रयोग सफल हो रहा है न ही कोई कास्ट फैक्टर। फिर भी साम्प्रदायिकता बढ़ाने का प्रयास तो किया ही गया।

राष्ट्रीय लोकदल के मुखिया जयंत चैधरी को लगा कि इस बार वेस्ट यूपी का जाट समुदाय उनके भाग्य का सितारा चमकाते हुए उन्हें उस मुकाम तक जरूर पहुंचा देगा, जहां जाने की उनकी ख्वाहिश है क्योंकि अखिलेश यादव की सरकार के दौरान 2013 में मुजफ्फरनगर दंगे के चलते बिखरे जाट-मुस्लिम 2021 के किसान आंदोलन के चलते फिर से एकजुट हो गये थे। पश्चिमी यूपी में जाट-मुस्लिम फैक्टर को देखते हुए सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने जयंत चैधरी की पार्टी आरएलडी के साथ गठबंधन किया। जयंत चैधरी के साथ-साथ किसान नेता और जाट समुदाय से आने वाले राकेश टिकैत ने जाट बेल्ट में घूम-घूमकर बीजेपी और योगी-मोदी सरकार के खिलाफ माहौल बनाने में किसी तरह की कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। इसके बावजूद अखिलेश और जयंत चैधरी बीजेपी के विजय रथ को रोक नहीं सके। शामली, मुजफ्फरनगर और मेरठ छोड़कर पश्चिमी यूपी के किसी भी जाट बहुल इलाके में सपा-रालोद गठबंधन अपना असर नहीं दिखा सका। बागपत, बिजनौर, गाजियाबाद, बुलंदशहर, अलीगढ़, हापुड़, मथुरा, आगरा और हाथरस जैसे जिले की जाट बहुल सीटों पर बीजेपी ने एकतरफा जीत दर्ज की है। सपा के साथ गठबंधन करने के बाद भी जयंत चैधरी की आरएलडी महज आठ सीटों पर चुनाव जीत सकी है, जबकि उसने 31 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे। जाट बेल्ट में बीजेपी गुर्जर, कश्यप, सैनी, ठाकुर, वाल्मिकी, शर्मा, त्यागी जैसी जातियों के समीकरण बिठाने में कामयाब रही। ये तमाम जातियों की गोलबंदी बीजेपी के जाट बेल्ट में जीत का आधार बनी। इस तरह से बीजेपी ने पश्चिम यूपी में जाट बेल्ट में जाट-मुस्लिम समीकरण को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया।

अब इसे सुखद परिवर्तन कहें अथवा साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण । उत्तर प्रदेश में तो यह साफ साफ दिखने लगा है । साम्प्रदायिकता का कीचड़ अब काला नहीं बल्कि लाल हो गया है क्योंकि उसमें मानव रक्त मिलने लगा हैं । उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में भाजपा कार्यकर्ता बाबर की उसके पट्टीदारों ने पीट पीट कर हत्या जिस कारण की उसकी जडे़ं नफरत की नागफनी उगाएंगी। उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में बीजेपी कार्यकर्ता बाबर की उसके पट्टीदारों द्वारा बेरहमी से पीटकर हत्या कर दी गई थी, परिजनों की मानें तो बाबर को कई बार धमकी मिल चुकी थी, जिसकी वजह से उसने थाने में शिकायत पत्र भी दिया था। इसको पुलिस ने नजरअंदाज कर दिया था, जिसके बाद बाबर की हत्या कर दी गई। मामला जब मीडिया में आया तो पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। इसके बाद एसपी सचिंद्र पटेल ने थाना प्रभारी सहित दो अन्य उप निरीक्षकों को भी लाइन हाजिर कर दिया। पुलिस ने बाबर की हत्या के मामले में नामजद चार आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया। रामकोला थाना क्षेत्र के कटघरही गांव के निवासी बाबर एक बीजेपी कार्यकर्ता था। हाल ही में सम्पन्न हुए विधानसभा चुनाव मंे बीजेपी के जीतने के बाद अपने गांव में मिठाई बांटकर खुशी जाहिर की थी। बाबर की खुशी उनके पटीदारों को इतनी चुभी कि बाबर की बेरहमी से पीट कर हत्या कर दी। धीरे-धीरे मामले ने तूल पकड़ लिया। मुख्यमंत्री ने संज्ञान लेते हुए बाबर के परिजनों को दो लाख मुआवजा दिलाने का ऐलान किया। साथ ही बाबर की हत्या के आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने को अधिकारियों को निर्देश भी दिए।
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सीबीआई के गौरव की याद

Posted: 03 Apr 2022 05:50 AM PDT

सीबीआई के गौरव की याद

(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)

हमारे देश के संविधान निर्माताओं ने कुछ स्वयत्तशासी संस्थाओं को भी लोकतंत्र की रक्षा के रूप मंे बनाया था। ये संस्थाएं भी पूरी तरह से तो स्वतंत्र नहीं हैं क्योंकि लोकतंत्र में पूर्ण स्वतंत्रता भी एक तरह की तानाशाही होती है। इसीलिए सत्तापक्ष और विपक्ष मंे संतुलन की बात कही जाती है। लोकतंत्र के समान अधिकार वाले तीन स्तम्भ भी इसीलिए बनाये गये हैं। अफसोस यह कि संविधान निर्माताओं की भावना के साथ विधायिका ने खिलवाड़ किया। इसका नतीजा यह रहा कि स्वायत्तशासी संस्थाएं सत्तापक्ष की मुखापेक्षी हो गयीं। केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) का उल्लेख इस संदर्भ मंे अक्सर किया जाता है। देश की सबसे बड़ी अदालत अर्थात् सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को पिंजरक मंे बंद सुग्गा (तोता) बताया था। चुनाव आयोग को लेकर भी दबे स्वर मंे ही सही, लेकिन इसी प्रकार की प्रतिक्रिया जनता करती है लेकिन ऐसा भी नहीं कि इनका कभी गौरव नहीं रहा है। चुनाव आयोग मंे आज भी मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन को याद किया जाता है। राजनीति के महारथी भी चुनाव आयोग से थर-थर कांपते थे। इसी तरह सीबीआई मंे भी डीपी कोहली जैसे अधिकारियों को आज भी याद किया जाता है। डीपी कोहली सीबीआई के संस्थापक निदेशक थे। देश के प्रधान न्यायाधीश एनवी रमण ने डीपी कोहली के बनाये आदर्श पर चलने की सलाह सीबीआई को दी है।

मुख्य न्यायाधीश एनवी रमण ने यूं ही नहीं कहा कि देश में इस वक्त एक स्वतंत्र संस्था स्थापित करने की आवश्यकता है, जिसके नीचे केंद्रीय जांच एजेंसियां काम कर सकें। उनके मुताबिक सीबीआई और अन्य एजेंसियों जैसे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) को एक छत के नीचे लाना चाहिए। उन्होंने कहा इससे इन एजेंसियों पर ये आरोप नहीं लगेंगे कि इनका इस्तेमाल राजनीतिक उत्पीड़न के तौर पर किया जा रहा है। प्रधान न्यायाधीश सीबीआई के 19वें डीपी कोहली स्मृति व्याख्यान में 'लोकतंत्र: जांच एजेंसियों की भूमिका और जिम्मेदारियां' विषय पर बोल रहे थे। मुख्य न्यायाधीश एनवी रमण ने कहा, 'सीबीआई, गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ), प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) जैसी विभिन्न एजेंसियों को एक छत के नीचे लाने के लिए छतरी संस्था के गठन की तत्काल आवश्यकता है। एक कानून बनाया जाना चाहिए जो स्पष्ट रूप से इसकी शक्तियों, कार्यों और कर्तव्यों को परिभाषित करे। उन्होंने कहा, 'संस्था के प्रमुख को विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ प्रतिनियुक्तियों द्वारा सहायता प्रदान की जा सकती है। यह छतरी संस्था कार्यवाही के दोहराव को समाप्त करेगी।' प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) एनवी रमण ने कहा कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की विश्वसनीयता समय बीतने के साथ सार्वजनिक जांच के घेरे में आ गई है क्योंकि इसकी कार्रवाई और निष्क्रियता ने कुछ मामलों में सवाल खड़े किए हैं। न्यायमूर्ति रमण ने कहा कि पुलिस और जांच एजेंसियों के पास वास्तविक वैधता हो सकती है, लेकिन फिर भी संस्थाओं के रूप में उन्हें अभी भी सामाजिक वैधता हासिल करनी है। उन्होंने कहा, 'पुलिस को निष्पक्ष होकर काम करना चाहिए और अपराध की रोकथाम पर ध्यान देना चाहिए। उन्हें समाज में कानून व्यवस्था कायम रखने के लिए जनता के सहयोग से भी काम करना चाहिए। ' न्यायमूर्ति रमण ने कहा कि एक संस्था के रूप में सीबीआई के पास कई उपलब्धियां हैं और इस प्रक्रिया में उसके कई कर्मियों ने अपने स्वास्थ्य और जीवन को खतरे में डाल लिया है। प्रधान न्यायाधीश ने कहा, 'कुछ ने तो सर्वोच्च बलिदान भी दिया है। इन सबके बावजूद यह विडंबना ही है कि लोग निराशा के समय पुलिस के पास जाने से कतराते हैं। भ्रष्टाचार, पुलिस ज्यादती, निष्पक्षता की कमी और राजनीतिक वर्ग के साथ घनिष्ठता के आरोपों से पुलिस की संस्था की छवि खेदजनक रूप से धूमिल हुई है।' न्यायमूर्ति रमण ने सीबीआई के संस्थापक निदेशक डी पी कोहली को श्रद्धांजलि दी और कहा कि वह एक अनुकरणीय अधिकारी थे। उन्होंने कहा, 'कोहली अपने साहस, दृढ़ विश्वास और उल्लेखनीय दक्षता के लिए प्रसिद्ध थे। उनकी दृष्टि ने सीबीआई को भारत की प्रमुख जांच एजेंसी में बदल दिया। उनकी निर्विवाद सत्यनिष्ठा के किस्से दूर-दूर तक सुनाए गए।'

ध्यान रहे कि केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की उत्पत्ति भारत सरकार द्वारा सन् 1941 में स्थापित विशेष पुलिस प्रतिष्ठान से हुई है। उस समय विशेष पुलिस प्रतिष्ठान का कार्य द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भारतीय युद्ध और आपूर्ति विभाग में लेन-देन में घूसखोरी और भ्रष्टाचार के मामलों की जांच करना था। विशेष पुलिस प्रतिष्ठान का अधीक्षण युद्ध विभाग के जिम्मे था। युद्ध समाप्ति के बाद भी, केन्द्र सरकार के कर्मचारियों द्वारा घूसखोरी और भ्रष्टाचार के मामलों की जांच करने हेतु एक केन्द्रीय सरकारी एजेंसी की जरूरत महसूस की गई। इसीलिए सन् 1946 में दिल्ली विशेष पुलिस प्रतिष्ठान अधिनियम लागू किया गया। इस अधिनियम के द्वारा विशेष पुलिस प्रतिष्ठान का अधीक्षण गृह विभाग को हस्तांतरित हो गया और इसके कामकाज को विस्तार करके भारत सरकार के सभी विभागों को कवर कर लिया गया। विशेष पुलिस प्रतिष्ठान का क्षेत्राधिकार सभी संघ राज्य क्षेत्रों तक विस्तृत कर दिया गया और सम्बन्धित राज्य सरकार की सहमति से राज्यों तक भी इसका विस्तार किया जा सकता था। दिल्ली विशेष पुलिस प्रतिष्ठान को इसका लोकप्रिय नाम 'केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो' गृह मंत्रालय संकल्प दिनांक 1 अप्रैल, 1963 द्वारा मिला था। आरम्भ में केन्द्र सरकार द्वारा सूचित अपराध केवल केन्द्रीय सरकार के कर्मचारियों द्वारा भ्रष्टाचार से ही सम्बन्धित था। धीरे-धीरे, बड़ी संख्या में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की स्थापना के साथ ही इन उपक्रमों के कर्मचारियों को भी केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो के क्षेत्र के अधीन लाया गया। इसी प्रकार, सन् 1969 में बैंकों के राष्ट्रीयकरण के बाद सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और उनके कर्मचारी भी केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो के क्षेत्र के अधीन आ गए। सीबीआई एक निदेशक, पुलिस महानिदेशक या पुलिस (राज्य) के आयुक्त के रैंक के एक आईपीएस अधिकारी के नेतृत्व में है। निदेशक सीवीसी अधिनियम 2003 के द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के आधार पर चुना जाता है और 2 साल की अवधि है।

सीबीआई की वार्षिक रिपोर्ट कर्मचारी के अनुसार आमतौर पर अनुसचिवीय कर्मचारी, पूर्व संवर्ग पदों है जो तकनीकी प्रकृति, कार्यकारी स्टाफ और ईडीपी स्टाफ के आम तौर पर कर रहे हैं के बीच विभाजित है। हिन्दी भाषा स्टाफ आधिकारिक भाषाओं में से विभाग के अंतर्गत आता है। केन्द्रीय अनुसंधान ब्यूरो प्रायः विवादों और आरोपों से घिरी रहती है। इस पर केन्द्रीय सरकार के एजेंट के रूप में पक्षपातपूर्ण काम करने का आरोप लगता है। सीआरपीसी की धारा 197 (जो न केवल सीबीआई को भी, लेकिन पुलिस के लिए लागू होता है) से पहले सरकारी मंजूरी अभियोजन पक्ष के लिए अनिवार्य बनाता है। पूर्व सीबीआई निदेशकों के समूह ने सुझाव दिया है कि इस जरूरत में संशोधन करने के लिए और शक्ति लोकपाल को दी जानी चाहिए। यूपी सरकार के समय कोल आवंटन घोटाले मंे सरकार को रिपोर्ट दिखाने पर सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को अधिकार देने को कहा था।
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वुहान से भी खराब हो सकती है शंघाई की स्थिति, बढ़ते कोरोना के मामलों ने बढ़ाई चिंता

Posted: 03 Apr 2022 05:46 AM PDT

वुहान से भी खराब हो सकती है शंघाई की स्थिति, बढ़ते कोरोना के मामलों ने बढ़ाई चिंता

बीजिंग। चीन के आर्थिक केंद्र कहे जाने वाले शंघाई में कोरोना के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इसकी वजह से शहर में पाबंदियां भी बढ़ गई हैं। शहर में पहले से ही डबल स्टेज लाकडाउन जारी है। ऐसे में अब लोगों का भी संयम जवाब देने लगा है। इसकी एक बड़ी वजह शंघाई में कोविड जीरो पालिसी का लागू होना भी है। एएनआई ने चीन की मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से बताया है कि वहां पर अब लोगों ने इस लाकडाउन का विरोध भी करना शुरू कर दिया है। चीन में बीते दिन रिकार्ड संख्या में कोरोना के नए मामले सामने आए हैं। गौरतलब है कि पूरी दुनिया में शंघाई की पहचान एक ग्लोबल फाइनेंशियल हब की है। ग्लोबल टाइम्स की खबर के मुताबिक जानकारों को मानना है कि शंघाई में बड़ी संख्या में कोरोना के मामलों का सामने आना खतरे को संकेत है। जारकारों के मुताबिक यहां का हाल चीन के वुहान से भी अधिक खतरनाक हो सकता है। हालांकि, इन जारकारों का ये भी कहना है कि मामलों की गंभीरता यहां पर वुहान की तरह इस बार नहीं होगी।
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ब्राजील में भारी बारिश से 10 से अधिक लोगों की मौत

Posted: 03 Apr 2022 05:44 AM PDT

ब्राजील में भारी बारिश से 10 से अधिक लोगों की मौत 

ब्रासीलिया। ब्राजील के रियो डि जनेरियो में भारी बारिश के कारण अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन से 10 से अधिक लोगों की मौत हो गई। स्थानीय मीडिया ने रविवार को अपनी रिपोर्ट में यह जानकारी दी। सूत्रों ने बताया कि हाल ही में लगभग 14 लोगों की मौत हुई है, जबकि करीब पांच लोग लापता हैं। मृतकों में आठ बच्चे शामिल हैं। ब्राजील राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो ने ट्वीट किया कि रियो डि जनेरियो में संघीय सरकार की मदद से सैन्य विमानों द्वारा बचाव अभियान जारी है। श्री बोल्सोनारो ने ट्वीट किया कि नागरिक सुरक्षा और सुरक्षा के राष्ट्रीय सचिव, कर्नल अलेक्जेंड्रे लुकास बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की यात्रा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस सप्ताह राज्य में भारी बारिश के कारण अचानक आई बाढ़ से हालात बेकाबू हो गए। इससे पहले ब्राजील के पेट्रोपोलिस शहर में फरवरी में भारी बारिश और भूस्खलन से 200 से अधिक लोगों की मौत हुई थी।
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इमरान ने किया संसद भंग करने का ऐलान, जनता करेगी पाकिस्तान की किस्मत का फैसला

Posted: 03 Apr 2022 05:42 AM PDT

इमरान ने किया संसद भंग करने का ऐलान, जनता करेगी पाकिस्तान की किस्मत का फैसला 

इस्लामाबाद। पाकिस्तान में अविश्वास प्रस्ताव के खारिज किए जाने के बाद राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने संसद भंग कर दिया। इस पर प्रधानमंत्री इमरान खान ने देश को बधाई दी और कहा कि डिप्टी स्पीकर ने विदेशी साजिश और सरकार बदलने के प्रयासों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, नए चुनावों के लिए देश को तैयारी करनी चाहिए। इमरान ने अविश्वास प्रस्ताव को विदेशी एजेंडा बताया और कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति अल्वी से संसद भंग करने और नए चुनाव कराने की सिफारिश की थी। प्रधानमंत्री इमरान खान ने विपक्ष पर निशाना साधा और कहा कि विपक्षी नेताओं ने अचकनें सिलवा ली थीं और सरकार बनाने के लिए तैयार थे लेकिन अब उनके मंसूबे धरे के धरे रह गए। बता दें कि संसद में इमरान खान सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया गया था और इसपर वोटिंग होनी थी लेकिन डिप्टी स्पीकर कासिम खान सूरी ने प्रस्ताव को ही खारिज कर दिया।
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रूस ने यूक्रेन के ओडेसा पर दागी कई मिसाइल

Posted: 03 Apr 2022 05:40 AM PDT

रूस ने यूक्रेन के ओडेसा पर दागी कई मिसाइल

ओडेसा। रूस-यूक्रेन के बीच 39वें दिन भी जंग जारी है। जंग के 39वें दिन रूस ने यूक्रेन के ओडेसा पर जबरदस्त एयरस्ट्राइक की। इस हवाई हमले में यूक्रेन के ओडेसा को भारी नुकसान हुआ है। ओडेसा क्षेत्रीय सैन्य प्रशासन के आपरेशनल स्टाफ के प्रवक्ता सेरही ब्रैचुक ने कहा आज ओडेसा पर कई मिसाइलें लांच की गई। जिसमें महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है। उनके मुताबिक, वर्तमान में स्थिति नियंत्रण में है और संबंधित सेवाएं काम कर रही हैं।
दरअसल, ओडेसा सिटी काउंसिल ने अपने आधिकारिक टेलीग्राम अकाउंट पर जानकारी देते हुए बताया कि ओडेसा पर सुबह के वक्त हवाई हमला किया गया था। कुछ मिसाइलों को हमारी वायु रक्षा प्रणाली द्वारा मार गिराया गया। लेकिन कुछ जगहों पर हुए हमले में आग लग गई। सीएनएन ने एक प्रत्यक्षदर्शी के हवाले से बताया कि ओडेसा में सूर्योदय से पहले ईंधन डिपो में विस्फोटों की एक आवाज सुनी गई। सीएनएन के अनुसार, पिछले दो दिनों से क्षेत्र के चारों ओर आसमान में ड्रोन भी देखे गए थे। फिलहाल अब तक किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
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दिव्य शाकद्वीपीय ब्राह्मण समिति का होली मिलन समारोह एवं वैवाहिक परिचय सम्मेलन सम्पन्न

Posted: 03 Apr 2022 05:19 AM PDT

दिव्य शाकद्वीपीय ब्राह्मण समिति का होली मिलन समारोह एवं वैवाहिक परिचय सम्मेलन सम्पन्न

दिव्य शाकद्वीपीय ब्राह्मण समिति गोरखपुर के संगठन मंत्री अनन्त मिश्र से प्राप्त जानकारी के अनुसार दिव्य शाकद्वीपीय ब्राह्मण समिति, गोरखपुरउत्तर प्रदेश द्वारा 'होली मिलन समारोह एवं वैवाहिक परिचय सम्मलेन' का आयोजन गोरखपुर शहर के सिविल लाइन्स स्थित गोकुल अतिथि भवन में किया गया। समारोह में फूलों की होली संग संगीतमय सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सिवान, बिहार से आयोजन में सम्मिलित होने आए अवधेश पाण्डेय ने काव्य पाठ के बाद उनकी रचित पुस्तक 'सागरिका' का विमोचन मंचासीन अतिथियों द्वारा किया गया। ओम प्रकाश पाण्डेय की की कविता और पुरुषोत्तम पाण्डेय ने अपने हास्य व्यंग्य 'सबसे बड़ा रुपैया, से श्रोताओं को आनंदित किया। आलोक मिश्र, घनानंद पाण्डेय, आशुतोष मिश्र, अनन्त मिश्र, किरन मिश्र, रेखा मिश्रा आदि ने होली गीत प्रस्तुत किए तो वहीं नन्हें मुन्ने बच्चों में आयुषी, अदिति, स्मृति, अद्रिका, पल्लवी, वैष्णवी, रिद्धिमा, अक्षिता, प्राख्या, कृष्णा आदि ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से दर्शकों को आनंदित किया। आयोजन में डॉ० गोविन्द पाण्डेय, इं० कौशल किशोर पाण्डेय, इं० अरविन्द पाठक, अशोक मिश्र, हेम नारायण पाठक, रामाधार पाण्डेय, सत्या चरण पाण्डेय, अनन्त मिश्र, रजनीश मिश्र, सौरभ मिश्र, आशुतोष मिश्र, अशोक मिश्र, सत्या चरण पाण्डेय, रामाधार पाण्डेय आदि विशिष्ट सदस्यगण व सुदूर जिलों के आगंतुक भी सम्मिलित हुए। आयोजन की अध्यक्षता पं० शरद चन्द्र पाण्डेय एवं संचालन महामंत्री अमरनाथ मिश्र और यशस्वी पाठक ने किया।
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मंच – माइक – मर्यादा

Posted: 03 Apr 2022 05:14 AM PDT

मंच – माइक – मर्यादा

कमलेश पुण्यार्क
जानकार लोग कहते हैं कि माइक और मंच का बिलकुल चोली-दामन वाला सम्बन्ध है। माइक के साथ मंच न हो या मंच के साथ माइक न हो तो दोनों अधूरे लगते हैं, ठीक वैसे ही जैसे सृष्टि में पुरुष बिन स्त्री और स्त्री बिन पुरुष। आदमी की कद-काठी के अनुसार माइक की भी कद होती है। भले ही आदमी को ठिगना-लम्बा न किया जा सके, किन्तु माइक के साथ ये सहूलियत है। एक बात और ध्यान देने योग्य है कि माइक और मंच के लिंगानुशासन पर विचार करना फिज़ूल है, क्योंकि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने कई वर्ष पहले ही पाश्चात्य विचारधारा का पोषण-पल्लवन करने के ख्याल से समलैंगिक सम्बन्धों पर मुहर लगा दी है। नतीजा ये है कि मंच और माइक का आपसी सम्बन्ध जब जुड़ता है, तो सारी मर्यादायें तार-तार होने लगती हैं, क्योंकि इन दोनों को किसी तरह की मर्यादा में रहना कतई गवारा नहीं है। दोनों में कौन किस पर हावी है—कहना मुश्किल है। बोलनेवाले की बस चले तो माइक के भीतर घुस बैठे। घोर कोरोना काल में भी सोशल डिसटेसिंग वाला नियम यहाँ बिलकुल अमान्य है। दरअसल हर वक्ता फिजिक्स वाली साउण्ड थ्योरी तो पढ़ा नहीं होता। उसकी समझ यही होती है कि माइक को मुंह में टॉफी की तरह धर कर बोलेंगे तो मधुर आवाज निकलेगी। और इससे भी अहम बात ये है कि प्रॉपर रिक्वायर्मेन्ट के अनुसार साउण्ड सेटिंग के विषय में तो कोई सोचना ही फ़िज़ूल समझता है। 50x20 के हॉल में भी 114 डेसीबल का डीजे बजा दिया जाता है, भले ही कमजोर दिल वालों की मौत का पैगाम क्यों न आ जाए। रही सही कसर को एल.ई.डी. लेजर लाइटें पूरा कर देती हैं। वैसे भी हमारे यहाँ नियम-कायदे सिर्फ कानून की किताबों में ही शोभा पाने के लिए बने हैं या कहें 'अदालती भैंसों' के पागुर के लिए ही ज्यादा उपयोग होता है कानून का। साउण्ड पॉल्यूशन भी मानसिक हिंसा के दायरे में आता है—हमारे यहाँ किसी को समझ नहीं। अवसर सामाजिक हो, धार्मिक हो या कि राजनैतिक कानफोड़ू-दिलतोडू आवाज के बिना तसल्ली ही नहीं होती। देवी-देवता भी बिना डी.जे. के प्रसन्न ही नहीं होते। मंच पर हाथों में माइक लेकर, जितने जोर से चीखा-चिल्लाया जाए—उतना ही प्रभावशाली वक्ता माना जाता है।
खैर, माइक और मंच की बात निकल पड़ी है, तो सोढ़नदास के बावत भी कुछ कहना ही पड़ेगा। हालाँकि सोढ़नदासजी से तो वाकिफ़ ही होंगे आपलोग, क्योंकि समय-असमय कुछ न कुछ कहने-सुनाने के लिए अकसर तत्पर रहते हैं। मंच और माइक की परवाह किए वगैर, सोढ़नदासजी कहने-सुनाने से बाज नहीं आते। धर-पकड़कर कहने-सुनाने की पुरानी लत है उन्हें, जबकि खुद किसी की सुनने में उतनी दिलचश्पी नहीं।
यदि ढूढ़ने निकलें तो पायेंगे कि ऐसे बहुत लोग हैं हमारे समाज में— सुनने वाला उत्सुक हो न हो, सुनाने वाला बेचैन रहता है। सदा मौके की तलाश में रहता है।
पुराने समय में मरकट-मुखधारी एक नारद शीलनिधि-राजकुमारी के स्वयंवर में उछल-कूद कर अपना चेहरा दिखाने को तत्पर दिखे थे। आज अनगिनत नारद इस कवायद में पिले हुए हैं। स्वयंवर की रूपरेखा में आज के नये जमाने में बिलकुल बदलाव आ गया है। स्वयं वरित या अभिभावक चयनित वर-बधु परस्पर गले में माला डालते हैं, अँगूठियों का आदान-प्रदान करते हैं। इसके लिए टेन्ट-हाउसी भारी-भरकम सिंहासन की व्यवस्था होती है। फोटोशूट और वीडियोग्राफी के वगैर तो आजकल बेडरुम से लेकर लैट्रिन-बाथरूम तक की कार्रवाई अधूरी लगती है, फिर जयमाला-स्टेज का क्या कहना ! लड़का-लड़की द्वारा जयमाला की रस्म अदायगी के बाद, खाली पड़े सिंहासन पर कई लोग धक्का-मुक्की करते अक्सर देखे जाते हैं। बारी-बारी से बैठ-बैठकर सेल्फीमोड में फोटो शेयर करते हैं, क्योंकि इन बेचारों के पास तो 'प्रीपेड कैमरामैन' होता नहीं। कुँआरे तो कुँआरे हैं ही, उन्हें जयमाला-स्टेज का सपना देखना स्वाभाविक है, किन्तु बहुत बार ऐसा भी होता है कि पुराने विवाहित भी इस क्षण का लुफ़्त लेने से बाज नहीं आते—गर्लफ्रैन्ड-ब्वॉयफ्रैन्ड्स के साथ।
सामाजिक चलन की देखादेखी, इधर कुछ दिनों से सोढ़न दासजी भी आजमाने की कोशिश कर रहे हैं, इस चलनसार विधा को। बेचारे को कोई मंच देता नहीं, माइक मिलता नहीं। हालाँकि अनुभवियों का मानना है कि इन्हें मंच-माइक न मिलने के अनेक कारण हैं, जिनमें आत्मश्लाधा और हाईलेबल एडेसिव यानी अपनी प्रशंसा और चिपकू नेचर — सबसे बड़ी बजह है। और आप जानते ही होंगे कि नेचर और सिंगनेचर बदलना बड़ा कठिन काम है। ऐसे में किसी सम्मेलन में आमन्त्रण-निमन्त्रण के मामले में बिलकुल निरपेक्ष होकर, मौका पाते ही देर-सबेर जा उपस्थित होते हैं सोढ़नदासजी। वहाँ पहुँचकर, किसी कोने में खाली पड़ी कुर्सी डटा लेते हैं। बीच-बीच में उचक-उचक कर दायें-बायें ताकते हैं कि उन्हें किसी ने अबतक देखा क्यों नहीं और यदि देखा तो नोटिस क्यों नहीं किया—हाय-हेलो, राम-सलाम करके।
घंटे दो घंटे में सम्मेलन की गतिविधियाँ जब ढलान पर होती हैं—मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि, विशिष्टाविशिष्ट अतिथि, सामान्य अतिथि, असामान्य अतिथि, अधिअक्ष, वक्रअक्ष — सबके सब जब जम्हाइयाँ लेने लगते हैं, या लघुशंका-दीर्घशंका-सुदीर्घशंका आदि के समाधान हेतु मंच छोड़ कर बाहर निकल पड़ते हैं और देर तक मंचासीन नहीं होते, तो मौके का लाभ उठाकर मंचस्थ कुर्सियों का लुफ़्त लेने लपक कर पहुँच जाते हैं सोढ़नदासजी। भले ही बाकी समय उनके होठों तले बुद्धिबर्धकचूर्ण दबा रहता हो, किन्तु ऐसे संगीन समय में मुंह में मगहीपान की गिलौरी जरूर होती है और रंगीन बत्तीसी को कोशिश कर करके झलकाने में नहीं चूकते। इतना ही नहीं, कोई इनका हाल-चाल पूछे न पूछे, ये बगल वाले का हालचाल पूछने में क्षण भर भी विलम्ब नहीं करते। बबुआ के छठिहार से दादा के ब्रह्म-ज्योनार तक का समाचार एक्सपर्ट ग्राउण्ड रिपोर्टर वाले अन्दाज में करते हैं। और इतना सब करते-कराते किसी ना किसी बैरा-बट्लर, सेवक-शागिर्द की निगाह पड़ ही जाती है, जो अदब-कायदे से सलामी दागता है और देर से आने पर खेद प्रकट करते हुए, बचे-खुचे नास्ते का बासी डब्बा मुहैया करा देता है। मंचस्थ लोगों से लम्बी बातचीत के दौरान, ऐंकर की कनखिया निगाहों के रास्ते आरजू पहुँच जाती है—दो मिनट हमें भी....।
और फिर क्या कहना, ऐंकर की कृपा से सोढ़नदासजी की मुँहमांगी मुराद पूरी हो जाती है— ' हसुआ के विआह में खुरपी के गीत ' वाले अन्दाज में शेरोशायरी, चुराई गयी या कहें उड़ाई गयी कविताएँ—सबकुछ बाँच जाते हैं बेचारे सोढ़नदासजी। इतनी कोशिश के बावजूद यदि तालियाँ नहीं बजती तो बजवाने का आग्रह भी दुहराते जाते हैं—हर दो मिनट पर। बहुत छानबीन करने पर पता चला— दरअसल किसी नजदीकी सलाहकार ने सुझा दिया है इन्हें कि जीतने-हारने की परवाह किए वगैर आगामी चुनाव में अवश्य श़रीक होना है, वोटकटवा गिरोह का अच्छा खासा अनुदान लाभ होगा। अतः उसके लिए पहले से थोड़ा-बहुत प्रैक्टिश होना जरुरी है।
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चामुण्डा बरस पड़ी

Posted: 03 Apr 2022 12:15 AM PDT

चामुण्डा बरस पड़ी 

बहुत बड़ा कवि नहीं हूं मामूली कलमकार हूं 
अंगारों की सड़क पर बहती ठंडी बयार हूं

 कविता करते-करते श्रीमती ने मुझे रोका
अनजाने में बिफरकर बार बार मुझे टोका 

कविता में बाधा देख कर मुझे गुस्सा आ गया 
मैं श्रीमती को एक जोरदार तमाचा लगा गया 

वो बोली क्यों मारा मैं बोला पतिदेव हूं तुम्हारा 
जिंदगी के सुहाने इस सफर में हमसफ़र प्यारा

यूं समझो जानेमन तुमसे बहुत प्यार करता हूं 
इसलिए एक आघ बार हाथ साफ करता हूं

अच्छा अच्छा पतिदेव तेरी लीला भी न्यारी है 
तुमने करतब दिखा दिए अब देखो मेरी बारी है 

लात घुसों से कूद पड़ी होकर दुर्गा सी विकराल 
चामुंडा सी बरस पड़ी नैन दिखाएं लाल लाल 

बनी कालका केश बिखरे नभ घटाएं  घिर आई
अगणित भीड़ इकट्ठी हुई शक्तिरूप दिखलाई 

पतिदेव ने क्षमा याचना विनती कर कर वो हारा
शक्ति स्वरूपा नारी है पतिदेव रहा बस बेचारा

रमाकांत सोनी सुदर्शन
नवलगढ़ जिला झुंझुनू राजस्थान स्वरूपा नारी है पतिदेव रहा बस बेचारा

रमाकांत सोनी सुदर्शन
नवलगढ़ जिला झुंझुनू राजस्थान
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मातारानी के दर्शन करके..

Posted: 03 Apr 2022 12:12 AM PDT

मातारानी के दर्शन करके..

करे जो पूजा और भक्ति
चैत्र नवरात्रि के दिनों में।
और करते है साधना
माता की उपासना करके।
तो मिलता है सूकून
उन्हें अपने जीवन में।
और हो जाती इच्छाएं 
उसकी इन दिनों में पूरी।।

माता के नौ रूपों को
जो नौ दिन पूजते हैं।
उन्हें हर रूप का दर्शन 
अपनी साधना में दिखता है।
और माता रानी उसकी 
हर मुराद पूरी कर देती है।
क्योंकि वो माँ है इसलिए 
अपने बच्चों पर दया करती है।।

यदि कोई ईर्ष्या भाव रखकर 
माता के दरवार में आता है।
तो उसे फल वही पर मिल जाता है।
चाहे वो राजा हो या रंक उसपे
मातारानी की नज़रे समान होती हैं।
इसलिए पूरी श्रध्दाभाव से उनकी 
पूजा करके पाये सदा शुभफल।।

चैत्र नवरात्रि और विक्रम संवत 2079 एवंम हिंदू 
नव वर्ष के शुभ अवसर पर मातारानी  के चरणों 
में मेरी यह रचना समर्पित है।।
जय माता दी
 
जय जिनेंद्र 
संजय जैन "बीना" मुम्बई
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अब नयी रौशनी के लिए

Posted: 03 Apr 2022 12:09 AM PDT

अब  नयी रौशनी के लिए

कोई  सूरज नुमा चाहिए। 

चक्रवाती हवाएँ कभी
मूल की आस्था तोड़ दे
धैर्य की कीमती शाख भी
एक झटके कहीं मोड़ दे
इसलिए  दृढ़ परिघ केलिए
आत्मबल खुशनुमा चाहिए। 

पूछता है यहाँ कौन अब
इस धरा की अपेक्षाएँ क्या
सब फलक व्यक्तिगत हो रहे
स्वार्थजीवी हुए बेहया
इसलिए उच्ताता पर चढ़े
कोई शीतल हवा चाहिए। 

सूचनाओं में बिखरे हुए
हैं अपरिचित कई खुशखबर
हो सके तो सहेजें चुनें
बन सके कोई तो हमसफर
मुट्ठियों में न अँट पाएगी
चाँदनी भी सवा चाहिए।
रामकृष्ण
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