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Monday, May 23, 2022

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Bhopal Samachar | No 1 hindi news portal of central india (madhya pradesh)


मध्यप्रदेश में अधिमान्यता कार्ड एवं पत्रकारों के लिए नियम और गाइडलाइन - MP NEWS

Posted: 23 May 2022 02:21 PM PDT

Madhya Pradesh Accreditation Card and Rules & Guidelines

इंदौर। कतिपय समाचार-पत्रों तथा मीडिया संबंधी विभिन्न संगठनों और संस्थाओं द्वारा राज्य शासन के जनसंपर्क विभाग द्वारा जारी अधिमान्य पत्रकारों के परिचय-पत्र के स्वरूप तथा उसके समान दिखने वाले परिचय-पत्र जारी किए जा रहे हैं। कई परिचय-पत्रों में राज्य शासन द्वारा अधिकृत अथवा राज्य शासन के अधिमान्य/राज्य शासन से मान्यता प्राप्त आदि शब्दों का भी उपयोग किया जा रहा है, जो पूरी तरह से नियमों के विरुद्ध है।

संभागीय जनसंपर्क कार्यालय इंदौर द्वारा स्पष्ट किया गया है कि अधिमान्य पत्रकारों के लिए जारी किए जाने वाले अधिमान्यता परिचय-पत्रों के संबंध में जारी नियमों के अनुसार राज्य शासन के जनसंपर्क विभाग द्वारा जारी अधिमान्य पत्रकारों के परिचय-पत्र का उपयोग मात्र पत्रकारिता कार्यों के लिए ही किए जाने का प्रावधान है। इसका सार्वजनिक प्रदर्शन नहीं किया जाना चाहिए। इसका उपयोग निजी एवं व्यवसायिक कार्य के लिए किया जाना प्रतिबंधित है। राज्य शासन के अधिमान्य पत्रकार द्वारा इससे मिलते-जुलते शब्दों का उपयोग, वाहन, विजिटिंग कार्ड अथवा लेटर हेड पर करना भी प्रतिबंधित है।

राज्य शासन के जनसंपर्क विभाग द्वारा जारी पत्र प्रतिनिधि अधिमान्यता नियम  के अनुसार अधिमान्यता का परिचय पत्र जनसंपर्क विभाग द्वारा विभिन्न पात्रता और प्रक्रियाओं के बाद ही जारी किया जाता है। इस नियम में राज्य शासन के अधिमान्य पत्रकारों के परिचय-पत्र के उपयोग के संबंध में भी उल्लेख है। नियम में कहा गया है कि यह परिचय-पत्र विभिन्न शर्तों के तहत प्रदान किया जाता है। पत्रकारिता के कार्य में अव्यवस्था अथवा असम्मानजनक तरीके से व्यवहार करने पर गुण-दोष के आधार पर निर्णय लेकर अधिमान्यता समाप्त की जा सकती है। असत्य , अपूर्ण तथा भ्रामक जानकारी देने पर भी अधिमान्यता निरस्त करने का अधिकार जनसंपर्क विभाग को है। प्रेस तथा रजिस्ट्रेशन ऑफ बुक्स एक्ट्स 1867  के उपबंधों का पालन भी अधिमान्य पत्रकारों को करना अनिवार्य है।  इसका उल्लंघन पाए जाने पर भी उस समाचार-पत्र से संबंधित पत्रकारों की अधिमान्यता निरस्त की जा सकती है।

प्राय: यह देखा गया है कि कतिपय समाचार-पत्र इलेक्ट्रॉनिक्स चैनल, न्यूज़ वेब पोर्टल, न्यूज वेबसाइट मीडिया संबंधी संगठन और संस्थाएँ राज्य शासन के जनसंपर्क विभाग द्वारा जारी अधिमान्य पत्रकारों के परिचय-पत्र से मिलते-जुलते परिचय-पत्र जारी कर रहे हैं। यह पूरी तरह से अवैधानिक और नियमों के विरुद्ध है। आग्रह किया जाता है कि इस तरह के परिचय पत्र जारी नहीं किए जाएं। फिर भी अगर वह ऐसा किया जाता तो अप्रिय स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है।

वर्तमान में यह भी देखने में आ रहा है कि अधिमान्यता प्राप्त कुछ पत्रकारों द्वारा अधिमान्यता कार्ड का दुरुपयोग किया जा रहा है। अधिमान्यता संबंधी उल्लेख अपने विज़िटिंग कार्ड, लेटरपेड आदि में किया जा रहा है। कुछ प्रकरणों में अपने वाहनों पर भी यह अंकित कराया गया है, जो उचित नहीं है। विज्ञापन के लिए मान्य समाचार पत्रों के कुछ स्वामी/प्रकाशक/संपादकों द्वारा मध्यप्रदेश शासन के अधिमान्यता कार्ड से मिलते-जुलते कार्ड अपने संवाददाताओं को बनाकर दिए जा रहे हैं, जो विधि विरुद्ध है और मध्यप्रदेश के राजपत्र दिनांक 1 जून 2007 को प्रकाशित अधिमान्यता संबंधी नियमों में उल्लेखित प्रावधानों का उल्लंघन है।

संभागीय जनसंपर्क कार्यालय, इंदौर द्वारा स्पष्ट किया गया है कि जो  व्यक्ति ऐसा कर रहे हैं, वे तत्काल इसे बंद करें। मध्यप्रदेश शासन के मिलते-जुलते अधिमान्यता कार्ड जारी करने वाले सभी कार्ड वापस लेते हुए इसकी सूचना जनसंपर्क को प्रेषित करें। यदि किसी पत्रकार के पास अधिमान्यता कार्ड से मिलता-जुलता कार्ड पाया जाता है तो वैधानिक कार्रवाई की जाना सुनिश्चित है।

अधिमान्यता प्राप्त पत्रकार का अन्य जिले में स्थानांतरण होने अथवा संस्थान बदलने पर अधिमान्यता रद्द हो जायेगी।  जिन शर्तों के पूर्ण होने पर मीडियाकर्मी को अधिमान्यता प्रदान की गयी है यदि वे समाप्त होती है/प्रभावित होती है, उस स्थिति में अधिमान्यता निरस्त की जा सकेगी। यदि यह पाया जाता है कि अधिमान्यता के लिये आवेदक या उसके नियोक्ता संस्थान ने असत्य/अपूर्ण/भ्रामक जानकारी दी है, उस स्थिति में संबंधित की अधिमान्यता निरस्त की जा सकेगी। साथ ही संबंधित प्रतिनिधि/संवाददाता की अधिकतम दो वर्ष के लिये अधिमान्यता के लिये अनर्हता की जायेगी। पत्रकार के किसी भी कारण से अधिमान्य नहीं रहने पर अथवा सेवानिवृत्त होने पर अधिमान्यता कार्ड वापिस जमा किया जाना अनिवार्य है। जिन अधिमान्यता प्राप्त पत्रकारों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज होता है तो उनकी अधिमान्यता समाप्त की जा सकेगी। साथ ही जिन मानदण्डों के आधार पर अधिमान्यता दी गयी है, उनके नहीं रहने पर अधिमान्यता रद्द की जा सकेगी।

मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग के कंट्रोल रूम का नंबर - mp election news

Posted: 23 May 2022 01:19 PM PDT

जिलों से निर्वाचन कार्य से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियों के आदान-प्रदान के लिये राज्य निर्वाचन आयोग में नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है। नियंत्रण कक्ष का प्रभारी उप सचिव श्री राजकुमार खत्री को बनाया गया है। 

Control room number of Madhya Pradesh State Election Commission

नियंत्रण कक्ष सहायक श्री सुरेन्द्र सिंह रघुवंशी को बनाया गया है। इनका मोबाइल नंबर- 8839181327 है। नियंत्रण कक्ष का टेलीफोन नंबर- 0755-2551076 है। सचिव राज्य निर्वाचन आयोग श्री राकेश सिंह ने सभी कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देशित किया है कि आयोग की वेबसाइट में निर्वाचन से संबंधित सभी जानकारियाँ अद्यतन करें। 

साथ ही राज्य स्तरीय नियंत्रण कक्ष द्वारा चाही गई जानकारियाँ समय-सीमा में उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। सभी कलेक्टर एवं चुनाव से संबंधित प्रमुख अधिकारी उपरोक्त दोनों नंबरों को अपने मोबाइल में सेव कर लें ताकि यदि कंट्रोल रूम से फोन आए तो पता चल जाए।

MP karmchari news- पेंशन कार्यालयों में आपत्तियां लगाकर प्रताड़ित किया जाता है

Posted: 23 May 2022 01:11 PM PDT

जबलपुर
। मध्य प्रदेश के कई पेंशन कार्यालयों में रिटायर कर्मचारी और मृत कर्मचारी की फाइल पर अनसुलझी पहेली के जैसी आपत्ति लगा कर प्रताड़ित किया जाता है। आपत्ति में स्पष्ट कुछ नहीं लिखा जाता बल्कि हरे रंग के पेन से लिखा जाता है, नियमानुसार सुधार करें। 

हितग्राही के लिए यह जानना सबसे मुश्किल होता है कि पूरी फाइल में किस जगह पर नियम का उल्लंघन हो गया और वह नियम कौन सा था। सरकारी दस्तावेजों में हरे रंग के पेन का उपयोग करना प्रतिबंधित कर दिया गया है फिर भी एक साजिश के तहत इस तरह की टिप्पणी के लिए हरे रंग का प्रयोग किया जाता है। यह इसलिए किया जाता है ताकि यदि कोई सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी तो दस्तावेज पर लिखा गया नोट फोटो कॉपी में दिखाई ना दे।

मध्य प्रदेश अधिकारी कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के संरक्षक योगेन्द्र दुबे, जिला अध्यक्ष अटल उपाध्याय ने बताया है कि  25 ,20,10 या 5 वर्ष पहले सरकारी आदेश के अनुसार 1 से 7 वें वेतन मान या क्रमोन्नति, समयमान का निर्धारण विभागों द्वारा सेवा पुस्तिकाओं में किया गया है लेकिन रिटायर या कर्मचारी के निधन होने के पश्चात सेवा पुस्तकों में आपत्ति लगाकर प्रकरण कार्यालयों में वापिस किये जा रहे है। कुछ अंकित राशियों को ओव्हर राइटिंग, धुंधली प्रविष्टि, आदेश चस्पा ना होना, पूर्व की रिकवरी की टेबिल चस्पा ना होना, नियुक्ति आदेश अधूरा होना एवं कार्यालय के अधिकारी की शील साफ दिखाई ना देने की आपत्ति लगा कर केस लटकाये जा रहे है। 

कार्यालय, चाय की दुकान में घूमते दलालों से मिलने के पश्चात ही केसों का निराकरण होता है। दलालों से मिलकर अफसर कर्मचारियों और उनकी विधवा पत्नी, अनाथ बच्चों के खून को चूस रहे है। आपत्ति के नाम पर लाखों रुपये की वसूली का फर्जी रिकवरी चार्ट बनाकर दिखाया जाता है, फिर घूसखोरी के लिए वसूली की जाती है पैसा मिलने के पश्चात वसूली नहीं कि जाती। 

कार्यालयों के अफसरों को इसकी पूरी जानकारी है अनेकों बार कर्मचारी संगठनों द्वारा अवैध आपत्ति के नाम पर की जाने वाली अवैध वसूली की जानकारी देकर रोक लगाने की माँग की है, कुछ समय अनैतिक कार्यों में रोक लगने के पश्चात फिर अवैध कार्य प्रारंभ हो जाते है। संभाग और जिले के पेंसनर कार्यालय में तत्काल इस अवैध कार्यों पर रोक लगाने कार्यवाही होना चाहिए। 

मध्य प्रदेश अधिकारी कर्मचारी संयुक्त मोर्चा संरक्षक योगेन्द्र दुबे, जिलाध्यक्ष अटल उपाध्याय ,नरेश शुक्ला,प्रसांत सोंधिया, संतोष मिश्रा,विश्वदीप पटेरिया, संजय गुजराल, मुकेश चतुर्वेदी, देव दोनेरिया,योगेश चौधरी, अजय दुबे,  रवि दहायत, एस. के. वांदिल,योगेन्द्र मिश्रा ,नरेंद्र सेन,धीरेंद्र सिंह ,के जी पाठक,नरेंद्र दुबे,रवि बांगड़,अर्जुन सोमवंसी ,संदीप नेमा,राकेश उपाध्याय,ने तत्काल पेंसन कार्यालयों में लंबित सेवा पुस्तिकाओं का निराकरण  कर अवैध कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग  की है। मोर्चा द्वारा चेतावनी दी गई है कि अवैध कार्यो में तत्काल रोक नहीं लगाई गई तो कार्यालय प्रमुख का पुतला कार्यालय के सामने जलाया जावेगा।

बिना हेलमेट वाले चालान पर क्या लिखा होना चाहिए, ध्यान से पढ़िए- MV Act,1988

Posted: 23 May 2022 12:59 PM PDT

यह तो सभी जानते हैं कि टू व्हीलर पर हेलमेट पहनना अनिवार्य है और बिना हेलमेट के पकड़े जाने पर चालान बनता है। कई लोग गलती करने पर विधिवत चालन बनवाते हैं और फाइन भरते हैं। पुलिस कर्मचारी फाइन जमा करने के बाद उसकी रसीद देता है। क्या कभी आपने पढ़ा है उस पर क्या लिखा होता है और जो लिखा होता है क्या वह सही होता है। 

मोटर यान अधिनियम, 1988 की धारा 194 (घ) की परिभाषा:-

अगर कोई व्यक्ति अधिनियम की धारा 129 का उल्लंघन करता है अर्थात बिना हेलमेट पहने टू व्हीलर (बाइक, स्कूटर, मोपेड या अन्य) चलाता है या पीछे बैठकर सवारी करता है तब ऐसे व्यक्ति पर एक हजार रुपए जुर्माना एवं तीन माह की अवधि तक लाइसेंस जब्त या रद्द किया जा सकता है। पगड़ी धारण करने वाले सिख समुदाय के व्यक्तियों को इस नियम से छूट प्राप्त है। 

यानी कि हेलमेट के लिए थाना पुलिस या ट्रैफिक पुलिस द्वारा जो चालन बनाया जाता है वह मोटर व्हीकल एक्ट 1988 की धारा 129 के तहत बनाया जाना चाहिए। नागरिकों को दी जाने वाली रसीद पर एक्ट एवं उसकी धारा का उल्लेख स्पष्ट रूप से होना चाहिए। कृपया ध्यान दीजिए, यदि उस कागज पर केवल हेलमेट लिखा है तो काफी संभावना है कि वह फर्जी हो।

MP chunav news- जिला पंचायत अध्यक्ष पद के आरक्षण कार्यक्रम की घोषणा

Posted: 23 May 2022 12:31 PM PDT

भोपाल
। पंचायत राज संचालनालय मध्यप्रदेश द्वारा त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के तहत जिला पंचायत अध्यक्ष पद के आरक्षण कार्यक्रम की घोषणा कर दी गई है। सभी जिलों के कलेक्टरों को निर्देशित किया गया है कि वह इसके बारे में सभी संबंधित लोगों को सूचित करें। 

मध्य प्रदेश के सभी कलेक्टर एवं सभी सीईओ जिला पंचायत के नाम पंचायत राज संचालनालय, मध्यप्रदेश, भोपाल से जारी पत्र क्रमांक - पंचा. राज / 2022/719 दिनांक 23/05.2022 में लिखा है कि, मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 32 एवं मध्यप्रदेश पंचायत (उप सरपंच, अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष) निर्वाचन नियम 1995 के अनुसार अध्यक्ष जिला पंचायत के पदों के आरक्षण की कार्यवाही दिनांक 31 मई 2022 (दिन मंगलवार) नियत की गई है।

मध्य प्रदेश जिला पंचायत अध्यक्ष पद का आरक्षण कहां होगा

यह कार्यवाही जल एवं भूमि प्रबंध संस्थान (वाल्मी संस्थान) भोपाल के ऑडिटोरियम में दोपहर 12:00 बजे से प्रारंभ होगी। आलोक कुमार सिंह, संचालक, पंचायत राज संचालनालय मध्यप्रदेश ने सभी कलेक्टरों को निर्देशित किया है कि वह अपने-अपने जिलों में सूचना का प्रचार प्रसार करें ताकि आरक्षण की कार्रवाई में इच्छुक जनप्रतिनिधि, व्यक्ति उपस्थित हो सके।

MPW और ANM के पदनाम परिवर्तन और जोखिम भत्ते की मांग- MP karmchari news

Posted: 23 May 2022 12:17 PM PDT

जबलपुर
। मध्य प्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ ने जारी विज्ञप्ति में बताया कि डॉ संजय मिश्रा क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवायें जबलपुर संभाग से भेंट कर संभाग के कोरोना योद्वओं की समस्याओं से अवगत कराते हुए बताया कि संभाग के MPW और ANM का पदनाम परिवर्तन की मांग शासन स्तर पर वर्षों से लंबित है। 

इसका शीघ्र निराकरण कराकर इनका पदनाम ग्राम स्वास्थ्य संयोजक किया जाये और फील्ड में गंभीर बीमारियों से ग्रसित लोगों के बीच में स्वय एवं परिवार की जान को जोखिम में डालकर कार्य करना पड़ता है , अतः इन्हें शासन से जोखिम भत्ता शीघ्र प्रदान किया जाये। पैरामेडीकल स्वास्थ्य कर्मचारियों को TA का भुगतान ऑफलाइन किया जाये। 

पैरामेडीकल स्वास्थ्य कर्मचारियों की वेतनविसंगति शीघ्र दूर की जाये। वेतन माह की प्रथम तारीख को कराना सुनिश्चित किया जाये। समयमान वेतनमान एवं जीपीएफ का भुगतान की समयसीमा तय की जाये, जिससे कर्मचारियों को शासन और कार्यालय से होने वाली परेशानियों का सामना न करना पड़े। 

संघ के योगेन्द्र दुबे , अर्वेन्द्र सिंह राजपूत , अवधेश तिवारी अटल उपाध्याय , अमित तिवारी , आशुतोष तिवारी आलोक अग्निहोत्री , ब्रजेश मिश्रा , विजय पाण्डे , सतीश देशमुख शैलेन्द्र दुबे , पंकज जायसवाल टोनी एम्ब्रोस मुकेश मिश्रा , वीरेन्द्र चंदेल , एस पी बाथरे , चूरामन गूजर , संदीप नामदेव , परशुराम तिवारी , नवीन हिवालय , होरीलाल नाथ , रामाराव डोंगरे , निशांक तिवारी , अनिल ठाकुर , रामकृष्ण तिवारी , अमित गौतम , रितुराज गुप्ता , संदीप चौबे , गणेश शुक्ला , तुषरेन्द्र सेंगर , नीरज कौरव , आदि ने डॉ संजय मिश्रा को अपनी समस्याओं से अवगत कराया एवं उनके द्वारा उक्त मांगों के निराकरण के प्रयास का आश्वासन दिया गया। 

डॉ संजय मिश्रा क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवायें जबलपुर संभाग के जन्मदिवस के अवसर पर संघ के द्वारा उनको पुष्पगुच्छ भेंट कर शुभकामनाएं दी गई एवं उनके द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं की सतत् बेहतर बनाने हेतु किये जा रहे प्रयास का सराहना की गई। 

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