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Tuesday, May 17, 2022

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18 मई 2022, बुधवार का दैनिक पंचांग एवं राशिफल - सभी १२ राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन ? क्या है आप की राशि में विशेष ? जाने प्रशिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. प्रेम सागर पाण्डेय से |

Posted: 17 May 2022 07:49 AM PDT

18 मई 2022, बुधवार का दैनिक पंचांग एवं राशिफल - सभी १२ राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन ? क्या है आप की राशि में विशेष ? जाने प्रशिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. प्रेम सागर पाण्डेय से |

18 मई 2022, बुधवार का दैनिक पंचांग

श्री गणेशाय नम:
!! दैनिक पंचांग !!

🔅 तिथि तृतीया रात्रि 02:53

🔅 नक्षत्र ज्येष्ठा 10:50 AM

🔅 करण :

                वणिज 01:19 PM

                विष्टि 01:19 PM

🔅 पक्ष कृष्ण

🔅 योग सिद्ध 06:43 PM

🔅 वार बुधवार

☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ

🔅 सूर्योदय 05:22 AM

🔅 चन्द्रोदय 09:11 PM

🔅 चन्द्र राशि वृश्चिक

🔅 सूर्यास्त 06:38 PM

🔅 चन्द्रास्त 06:42 AM

🔅 ऋतु ग्रीष्म

☀ हिन्दू मास एवं वर्ष

🔅 शक सम्वत 1944 शुभकृत

🔅 कलि सम्वत 5124

🔅 दिन काल 01:26 PM

🔅 विक्रम सम्वत 2079

🔅 मास अमांत वैशाख

🔅 मास पूर्णिमांत ज्येष्ठ
☀ शुभ और अशुभ समय

☀ शुभ समय

🔅 अभिजित कोई नहीं

☀ अशुभ समय

🔅 दुष्टमुहूर्त 11:19 AM - 12:12 PM

🔅 कंटक 04:41 PM - 05:35 PM

🔅 यमघण्ट 07:44 AM - 08:37 AM

🔅 राहु काल 11:46 AM - 01:26 PM

🔅 कुलिक 11:19 AM - 12:12 PM

🔅 कालवेला या अर्द्धयाम 05:56 AM - 06:50 AM

🔅 यमगण्ड 06:43 AM - 08:24 AM

🔅 गुलिक काल 10:05 AM - 11:46 AM

☀ दिशा शूल

🔅 दिशा शूल उत्तर

☀ चन्द्रबल और ताराबल

☀ ताराबल

🔅 अश्विनी, भरणी, रोहिणी, आर्द्रा, पुष्य, आश्लेषा, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, ज्येष्ठा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, श्रवण, शतभिषा, उत्तराभाद्रपद, रेवती

☀ चन्द्रबल

🔅 वृषभ, मिथुन, कन्या, वृश्चिक, मकर, कुम्भ

🌹🌹पं. प्रेम सागर पाण्डेय् ,नक्षत्र ज्योतिष वास्तु अनुसंधान केन्द्र नि:शुल्क परामर्श - शनिवार दूरभाष 9122608219 / 9835654844

🌹 18 मई 2022, बुधवार का राशिफल 🌹

मेष (Aries): आपका दिन फलदायी रहेगा। परिवारजनों के साथ बैठकर आप महत्वपूर्ण चर्चा करेंगे। घर की साज-सज्जा में आपको परिवर्तन करने की इच्छा होगी। ऑफिस या व्यवसाय क्षेत्र में अधिकारियों के साथ भी महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी। सरकारी लाभ मिलने की संभावना है। ऑफिस से संबंधित कार्य के लिए यात्रा करनी पड़ेगी। कार्यभार बढ़ सकता है।

शुभ रंग = गुलाबी

शुभ अंक : 8

वृषभ (Tauras): नए कार्य की प्रेरणा मिलेगी और आप उन्हें प्रारंभ कर पाएंगे। किसी धार्मिक स्थल की मुलाकात से आपका मन भक्तिमय हो जाएगा। लंबे प्रवास का योग है। दूर स्थित स्नेहीजन या मित्रों के शुभ समाचार मिलेंगे। परेदश जाने की संभावनाएं उपस्थित होंगी। व्यापार में आर्थिक लाभ हो सकता है। स्वास्थ्य मध्यम रहेगा।

शुभ रंग = क्रीम

शुभ अंक : 2

मिथुन (Gemini): आज का दिन प्रतिकूल है अतः आज आप हर तरह से सावधान रहें ऐसी आपको सूचना देते हैं। आज किसी नए कार्य का प्रारंभ न करें। क्रोध के कारण कुछ अनिष्ट न हो, इसका खास ध्यान रखिएगा। रोगी कोई नया इलाज या शल्यचिकित्सा आज न करवाएं। कामवृत्तियों पर संयम रखने की कोशिश करें। अधिक खर्च होने से हाथ तंग रह सकता है।

शुभ रंग = क्रीम

शुभ अंक : 2


कर्क (Cancer): आज का संपूर्ण दिन आनंद-प्रमोद तथा मनोरंजन की प्रवृत्तियों में बीतेगा। आनंद-प्रमोद के साधन, वस्त्र इत्यादि की खरीद होगी। प्रणय संबंधों में सफलता मिल सकती है। उत्तम भोजन, वाहन-सुख के योग हैं तथा प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। व्यावसायिक क्षेत्र में भी लाभदायी दिन रहेगा। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा।

शुभ रंग = पींक

शुभ अंक : 5

सिंह (Leo): आज का दिन मिश्र फलदायी है। घर में शांति का वातावरण रहेगा। दफ्तर में सहकर्मियों से कम सहयोग मिलेगा। दैनिक कार्यों में कुछ रुकावटें आएंगी। शत्रुओं तथा प्रतिस्पर्धियों की वजह से परेशानी होगी। उच्च पदाधिकारियों के साथ विवाद टालिएगा। आप में आज उदासीनता एवं शंकाशीलता खूब रहेगी जिससे मानसिक व्याकुलता का अनुभव होगा।

शुभ रंग = लाल

शुभ अंक : 1

कन्या (Virgo): आज आप संतान को लेकर चिंतित रहेंगे। मन विचलित रह सकता है। पेट से संबंधित व्याधि की वजह से दर्द रह सकता है। विद्योपार्जन करनेवालों के अभ्यास में अवरोध आएंगे। आकस्मिक खर्च की संभावनाएं हैं। बातचीत में तार्किक एवं बौद्धिक चर्चा से दूर रहिएगा। प्रियजनों से मिलाप होगा। शेयर-सट्टे में सावधान रहें।

शुभ रंग = उजला

शुभ अंक : 4

तुला (Libra): आज के दिन आप मानसिक रूप से थकावट का अनुभव करेंगे, ऐसा प्रतीत होता है। आज आप कुछ अधिक ही भावुक रहेंगे। मन में उठ रहे विचारों के कारण कुछ परेशान रहेगें। माता तथा स्त्री के विषयों में चिंता सताएगी। प्रवास के लिए आज का दिन प्रतिकूल है। पानी से दूरी रखें। निद्रा अपूर्ण रहने से मानसिक व्यग्रता रहेगी।

शुभ रंग = आसमानी

शुभ अंक : 7


वृश्चिक (Scorpio): आज पूरे दिन आप प्रसन्न रहेंगे। किसी नए कार्य का प्रारंभ कर पाएंगे। साथियों से सुख एवं आनंद की प्राप्ति होगी। मित्रों व स्वजनों से भेंट हो सकती है। किसी भी काम में आज आपको सफलता मिलेगी। आर्थिक लाभ एवं भाग्यवृद्धि के योग हैं। भाई-बहनों से लाभ होगा। प्रतिस्पर्धियों के समक्ष विजय मिलेगी। स्नेह संबंध बनेंगे। छोटे प्रवास की संभावनाए हैं।

शुभ रंग = गुलाबी

शुभ अंक : 8

धनु (Sagittarius): आज का दिन मध्यम फलदायी होगा। निरर्थक व्यय होगा। मन में ग्लानि रहेगी। परिवारजनों के साथ गलतफहमी की वजह से मनमुटाव हो सकते हैं। कार्यों में मनवांछित सफलता नहीं मिल पाएगी। दुविधायुक्त मनोदशा के कारण निर्णय नहीं ले पाएंगे, अतः आज कोई भी महत्वपूर्ण विषय पर निर्णय न लें ऐसा सूचित करते हैं।

शुभ रंग = पीला

शुभ अंक : 9

मकर (Capricorn): आज का दिन ईश्वर के स्मरण में बीतेगा। धार्मिक कार्य में आप व्यस्त रहेंगे। नौकरी-व्यवसाय में भी सानुकूल परिस्थिति रहेगी। आज आपका हर कार्य सरलता से पूर्ण होगा। मान-सम्मान मिलेगा। नौकरी में पदोन्नति के योग हैं। गृहस्थजीवन आनंदपूर्ण रहेगा। किसी दुर्घटना कि वजह से चोट न लगे इसका खास ध्यान रखें।

शुभ रंग = पींक

शुभ अंक : 5

कुंभ (Aquarius): धन के लेन-देन व जमीन जायदाद के सौदों में किसी की जिम्मेदारी न लेने की सूचना देते हैं। मानसिक रूप से आज एकाग्रता रहेगी। खर्च अधिक मात्रा में होगा। स्वास्थ्य के विषय में ध्यान रखें। पूंजी निवेश अनुचित स्थान पर न हो इसका ध्यान रखें। आपकी बातों से स्वजन सहमत न हों ऐसी संभावना है। क्रोध पर संयम रखें।

शुभ रंग = आसमानी

शुभ अंक : 7

मीन (Pisces): मित्रों से आज आप को लाभ होगा और उनके पीछे धन खर्च भी होगा। सामाजिक कार्यों में अधिक अभिरुचि रहेगी। बड़ों और मित्रों के साथ संपर्क या व्यवहार बन सकते हैं। किसी रमणीय स्थल के प्रवास का आयोजन हो सकता है। नए मित्र बनेंगे व ऐसे लोगों से संपर्क होगा जो कि भविष्य में आप के लिए लाभदायी साबित होंगे। घर से शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है।

शुभ रंग = पीला

शुभ अंक : 9 
प्रेम सागर पाण्डेय् ,नक्षत्र ज्योतिष वास्तु अनुसंधान केन्द्र ,नि:शुल्क परामर्श - रविवार , दूरभाष 9122608219 / 9835654844
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इसुआपुर में बाबा लाल दास के मठिया पर बुद्ध पूर्णिमा का भव्य आयोजन कल संपन्न हुआ

Posted: 17 May 2022 07:24 AM PDT

इसुआपुर में बाबा लाल दास के मठिया पर बुद्ध पूर्णिमा का भव्य आयोजन कल संपन्न हुआ

संवाददाता मुकेश कुमार की खबर |
वुद्ध पूर्णिमा की संध्या निर्वाण संघ के सौजन्य से बाबा लाल दास के मठिया पर #बुद्धपूर्णिमा का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। इस आयोजन में भाग लेने के लिए नगर के आम जनों के साथ-साथ कई गणमान्य लोगों को भी आमंत्रित किया गया था। बड़ी संख्या में लोग इस आयोजन में शामिल रहे। कार्यक्रम का प्रारंभ गीत-संगीत तथा भजन के माध्यम से हुआ जिसमें कई कलाकारों ने अपनी खूबसूरत प्रस्तुति दी। प्रसिद्ध गायक #श्रीरविशकुमारसानु ने हमेशा की तरह अपने भजनों से सुनने वालों का मन मोह लिया। तबले पर उनका साथ दे रहे थे मशहूर तबला वादक श्री मिथिलेश जी। भजनों के उपरांत #श्रीसत्येंद्रजी का अविस्मरणीय प्रवचन प्रारंभ हुआ। प्रवचन के माध्यम से उन्होंने भगवान बुद्ध के अमूल्य वचनों का मर्म अध्यात्म प्रेमियों को समझाया। अंत में महाप्रसाद ग्रहण का कार्यक्रम संपन्न हुआ। 100 से अधिक सत्संग प्रेमियों ने महाप्रसाद ग्रहण किया। कल के महाप्रसाद का प्रबंध #श्रीपप्पूकुमार_सर, डायरेक्टर डी. एन. आर. पब्लिक स्कूल की तरफ से किया गया था। निर्वाण संघ की शुभकामना है कि उनके जीवन में भगवान बुद्ध का आलोक फैले। इस कार्यक्रम को सफलता पूर्वक संपन्न करवाने में निर्वाण संघ के जिन स्वयं सेवकों का बहुत बहुत सहयोग रहा वे है श्री अमीर साह जी, श्री पप्पू कुमार सर, श्री भगवान शर्मा, श्री त्रिभुवन चतुर्वेदी जी, सोनू कुमार, डॉ. के के सिंह इत्यादि।
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जातिगत आरक्षण से मिला वर्ग संघर्ष को बढ़ावा रावेन्द्र तिवारी ।

Posted: 17 May 2022 07:12 AM PDT

जातिगत आरक्षण से मिला वर्ग संघर्ष को बढ़ावा रावेन्द्र तिवारी ।

भारतीय राष्ट्रवादी समानता पार्टी के मध्यप्रदेश अध्यक्ष पं,रावेन्द्र तिवारी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर वर्तमान आरक्षण नीति का विरोध करते हुए कहा कि उक्त नीति से वर्ग संघर्ष को बढ़ावा मिला है और यदि इसमें यदि किसी को लाभ मिला है तो सिर्फ सियासत दानों को मिला है ।
श्री तिवारी ने कहा कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय का स्पष्ट मत है कि आरक्षण कोई मौलिक अधिकार नहीं है किन्तु दुर्भाग्य से बात बात में न्यायालय के निर्णय के संमान की दुहाई देने वाले लोगों ने आरक्षण नीति पर न्यायालय के मत का कभी संमान नहीं किया मध्यप्रदेश में पिछड़ा वर्ग आरक्षण की चर्चा इन दिनों जोरों पर है किन्तु इस आरक्षण के लिए कौन पात्र हैं इसका मुल्याकंन किए वगैर जाति के आधार पर आरक्षण देना उन जरूरत मंद के अधिकारों पर कुठाराघात है जो वास्तव में पिछड़े हुए हैं ।
पं,रावेन्द्र तिवारी ने कहा कि भारतीय राष्ट्रवादी समानता पार्टी आरक्षण तथा एससी एसटी एक्ट जैसे वर्ग संघर्ष को बढ़ावा देने वाले कानूनों का विरोध करती है और हम पार्टी की विचारधारा को आरक्षित तथा अनारक्षित दोनों वर्गों के वीच लेकर जाएँगे कि वर्तमान आरक्षण नीति से कुछ चंद लोगों को छोड़ कर किसी समाज का हित नहीं हो रहा सिर्फ यही चंद लोग पीढ़ी दर पीढ़ी आप के नाम पर आरक्षण की मलाई खाते जा रहे हैं श्री तिवारी ने कहा कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री चौथमल भगेरिया राष्ट्रीय संगठन मंत्री उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष पं,श्री त्रिभुवन शर्मा जी के मार्गदर्शन में पार्टी देश भर में आरक्षण तथा एससी एसटी एक्ट नीति का विरोध दर्ज करा रही है और जहाँ जहाँ पार्टी मजबूत हो रही है वहाँ अपना प्रत्याशी भी उतारेगी ताकि एक देश एक कानून की लड़ाई सड़क से संसद तक लड़ी जा सके और मुझे पूरा विश्वास है कि 21वीं सदी की युवा पीढ़ी उक्त कानूनों के दुष्प्रभाव को समझते हुए हमें पूरा स्नेह आशीर्वाद देगी ।
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सिंध और बलूचिस्तान को पुन: भारत में मिलाकर अखण्ड हिन्दू राष्ट्र की स्थापना हो :- धर्म चन्द्र पोद्दार

Posted: 17 May 2022 06:55 AM PDT

सिंध और बलूचिस्तान को पुन: भारत में मिलाकर अखण्ड हिन्दू राष्ट्र की स्थापना हो :- धर्म चन्द्र पोद्दार 

प्रधानमंत्री को लिखा गया पत्र मंगलवार को भारतीय जन महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष धर्म चंद्र पोद्दार ने जिला - पूर्वी सिंहभूम (झारखंड) के उपायुक्त कार्यालय में सौंपा ।
पत्र में अंतरराष्ट्रीय मामले को उठाया गया है और मांग की गयी है कि : -- 

  • जो लोग 1947 के समय भारत में रह गए , उनके हिस्से की भूमि तो पाकिस्तान में चली गई ; अब पाकिस्तान उन रह गए लोगो के अनुपात की भूमि ' सिंध ' के रूप में भारत को लौटाए।
  • 27 मार्च सन 1948 को पाकिस्तान ने सैन्य बल के द्वारा जबरन बलूचिस्तान पर कब्जा  कर लिया  था , अब उसे आजाद करवाये।

पत्र में कहा गया है कि पाकिस्तान पर अपनी कुछ बातें मनवाने का उचित समय आ गया है । पत्र में कहा गया है कि इन मांगों पर विचार कर अविलंब कार्रवाई करवाने की कृपा की जाए ।
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पितराही लोटा

Posted: 17 May 2022 06:29 AM PDT

पितराही लोटा

          ---:भारतका एक ब्राह्मण.
            संजय कुमार मिश्र'अणु'
----------------------------------------
      कमर में धोती।कपार पर लम्हर नगफणी टीका।गला में ,बांह पर आऊ दहिना हाथ में गोमुखी माला।उपरे से धोती ओढले ई हथ घमंडी बाबा।इनकर चर्चा बडी आम हे।रहन-सहन एकदम पवित्तर।जने भी जयतन कोई के कोई समान न लेतन।न अपन समान कोई के छुवे देतन।ओढना बिछवना सब साथे संगे-संगे एगो बडी वजनदार पितराही लोटा।
              ई लोटवा में उनकर परान बसल हे।कभी कोई  जे उनकर समान छु देल तो उ सबके फिच-फांच देतन।लोटा जब छुवा जा हे तब कह मत।सबसे पहिले लोटवा में आग डालके खुब तपावल जा हे।एकर बाद आधा पहर तक खुब गाय के गोबर आऊ गोरकी मट्टी से मला हे।तब जाके ओकरा पर गंगा छिडकल जा हे तब कहीं पवितर होव हे बाबा के जलपान करे लाईक।बाबा कभी चापाकल के पानी न पीय हलन।उनका खातिर बस कुआं के पानी ठीक हल।बाकी सब बेकार।
           एक दिन के घटना हे की घमंडी बाबा के बड लडिका परमेस्सर के शादी हल।शादी में बरात गांव में पहुंचल।साम के समय हल।डोल-डाल जाय के बेरा।घमंडी बाबा रोज साम के डोल-डाल जाय के पहिले भांग के  गोला मार हलन।सराती वलन से कहलन की हमरा तनी कुआं देखा दs पानी के जरूरी हे।दुखन उनका ले के देवीथान गेल आऊ कुआं देल।बाबा अपन पितराही लोटा के गर्दन धोती से बन्हलन आऊ कुआं में डुबवलन।पानी निकाल के पहिले भांग मारलन।फिर जे जलपान करेला जे मिलल रहे उहईं बईठ के लगलन सफाचट करे।जलपान कर के चललन अब फिर पानी निकाले।ई लs अबकी बार तो धोतिया खिचा  गेल लोटवा उहईं डूबकी ले लेल।भांग के नशा बढ रहल हल।लगलन हल्ला करे।अरे...... तनी दउड रे!लोटवा डूब गेल।हमर लोटवा डूब गेल।
           बराती सराती के लोग दउडलन।हाल पता चलल।सराती वलन कहलन..... घबराईं मत हम घरे से पितराही लोटा मंगवा दे ही।तब ले ओकरा से काम चलाईं।सबेरे देखल जायेत।पर बाबा न मनलन।
        रात के समय हल।ई कुआं में कोई उतरे ला तईयार न हल।कुआं गहरा हल आऊ बडा भी।सबकोई समझा के थक गेल।लेकिन घमंडी बाबा अपन घमंड में चुर।घोषणा कर देलन..... जबतक हमर पितराही लोटा न मिलत हम डोल-डाल न जायेब।अब ऐकर का हिसाब हे।बात उनकर समधी के पता चलल।खुब समझयलन लेकिन सब बेकार।थक हार के बडी हिम्मत कर के एगो आदमी कुआं में उतरल आऊ बाबा के लोटा भेटायेल।तब बाबा गेलन डोल-डाल गेलन।
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वलिदाद,अरवल(बिहार)
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खोलकर सलवार

Posted: 17 May 2022 06:26 AM PDT

खोलकर सलवार

        --:भारतका एक ब्राह्मण.
           संजय कुमार मिश्र'अणु'
----------------------------------------
जिनकी बहन,बेटियां और परिवार
देखकर आतताइयों को
लिए धर्मांधता की क्रुर तलवार
और बिना किये प्रतिकार
कर ली सब स्वीकार
अस्मिता लूटा खोलकर सलवार
आज उसीके नाजायज औलाद
सीखा रहा है भाईचारा और प्यार
उसीके साथ-साथ
कुछ अपने हीं भ्रष्ट लोग गद्दार
हमें सीखा रहे है धर्म
 है इस्लाम अमनचैन का देनदार
जबकि बताता है इतिहास
मेरी बातों पर गर नहीं है विश्वास
तो जाकर उनसे पुछ लो
जिसे बोटी-बोटी कर चुनवाया दीवार
लूटकर मेरे मठ और मंदिर
जला दिये गये विश्वविद्यालय
फिर भी तुम्हें विश्वास नहीं है
तो जाकर देख लो काशी,मथुरा एक बार
जिन लोगों ने मुझे काटा,बांटा और मारा,
नहीं चाहिए ऐसी भाईचारा
जो आज भी है हें लूटने कुटने को तैयार
ये तेरा मजहब,दीन और ईमान
आधी जमीन को बना दिया कब्रिस्तान
और आधी पर मस्जिद बना दे रहा अजान
लूटने को चप्पा-चप्पा घर-द्वार
----------------------------------------
वलिदाद,अरवल(बिहार)
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यज्ञोपवीत का शरीरशास्त्रीय आधार

Posted: 17 May 2022 06:18 AM PDT

यज्ञोपवीत का शरीरशास्त्रीय आधार

लेखक कमलेश पुण्यार्क ' गुरूजी'
आयुर्वेद का बहुचर्चित ग्रन्थ— ' प्रत्यक्षशारीरम् ' एवं ' शरीरक्रिया विज्ञानम् ' शारीरिक संरचना और क्रियाविधि को विस्तृत रूप से व्याख्यायित करता है। तदनुसार मानव मात्र की संरचना एक समान है। आधुनिक विज्ञान की भी यही मान्यता है। ऐसे में ये जिज्ञासा स्वाभाविक है कि जब मानवमात्र की संरचना एक समान है, तो फिर यज्ञोपवीत की आवश्यकता सिर्फ द्विजों के लिए ही क्यों?
इसे समझने के लिए सनातन धर्मशास्त्र और कर्मशास्त्र का विहगावलोकन आवश्यक प्रतीत हो रहा है। श्रीमद्भगवद्गीता ४-१३ में श्रीकृष्ण के वचन हैं— चातुर्वर्ण्यं मया सृष्टं गुणकर्मविभागशः । (चारों वर्णों की रचना मैंने गुण और कर्म के आधार पर की है)। स्पष्ट है कि शारीरिक और बौद्धिक क्षमता में सूक्ष्मातिसूक्ष्म अन्तर अवश्य है चारों वर्णों में, भले ही शरीरशास्त्र और शरीरक्रियाविज्ञान की दृष्टि से समानता प्रतीत हो।
प्रत्यक्षतः हम पाते हैं कि सुनार और लुहार की हथौड़ी एक समान कदापि नहीं हो सकती, भले ही दोनों में उपयोग किया गया लौहधातु एक जातीय है। एक तत्त्वीय है। इसी प्रकार ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र की शारीरिक संरचना तात्त्विक रूप से एक समान भले ही हो, किन्तु कहीं न कहीं सूक्ष्म अन्तर अवश्य है, जिसे हम सामान्य रूप से समझ नहीं पाते। हाँ, इतनी बात अवश्य है कि कर्मानुसार इसमें गुणात्मक परिवर्तन किया जा सकता है। उत्तरोत्तर प्रखर कर्मों से शूद्र ब्राह्मण बन सकता है और कर्मच्युति से ब्राह्मण शूद्रवत स्थिति में पहुँच सकता है।
हाथ की पाँच छोटी-बड़ी अँगुलियों की भाँति, सामाजिक व्यवस्था के सुचारु रूप से संचालन हेतु वर्णाश्रमधर्म की सनातनी व्यवस्था थी। उन दिनों ऊँच-नीच जैसी विचारधारा नहीं थी। क्षैतिज रूप से यानी समान धरातल पर सभी वर्ण अपने-अपने विहित कर्मों में रत और सन्तुष्ट थे। परस्पर एक दूसरे के सहयोग और कल्याण की भावना से सामाजिक कार्य सम्पन्न होते थे। बौद्धिक क्षमताबहुल ब्राह्मण यज्ञ-तपादि बल से सामाजिक उत्थान में संलग्न थे, तो क्षत्रियों पर शारीरिक शौर्यबल से सबके संरक्षण का दायित्व था। वैश्य कृषि-गोरक्ष-वाणिज्यादि कार्यों से सबका भरण-पोषण करते थे, तो शूद्र पर सबकी सेवा का दायित्व था। वर्णाश्रमधर्म का सम्यक् पालन हो रहा था। सुख, शान्ति, सौहार्द्र का वातावरण था। ब्राह्मणों के तपोयज्ञ से सिर्फ ब्राह्मणों का ही कल्याण नहीं था, प्रत्युत पूरे समाज का कल्याण निहित था। शूद्रों को यम, नियम, संयमादि से पूरी छूट दी गयी थी। कंपकपाती शीतलहरी में ब्रह्ममुहूर्त में स्नान कर, सहस्र गायत्री जपने से जो लाभ ब्राह्मण को मिलता था, उतना किसी शूद्र को मन्दिर की सफाई कर देने मात्र से ही मिल जाता था।
किन्तु युगानुसार कालान्तर में किंचित् विसंगतियाँ उत्पन्न हुई। बड़े-छोटे, ऊँच-नीच आदि भेद-भाव पनपने लगे। वर्णाश्रम व्यवस्था चरमाराने लगी। अज्ञानवश शूद्रों को ऐसा लगने लगा कि यज्ञोपवीत कोई ऐसी चीज है, जिसपर द्विजों ने एकाधिपत्य जमा रखा है। वेद और वेदमाता गायत्री से उन्हें वंचित रखकर उनके साथ अन्याय किया जा रहा है। परिणामतः कई ऐसी संस्थाएं जन्म लेने लगीं, जो इन बातों को तोड़मरोड़ कर, व्याख्यायित करने लगी और समाज में नये ढंग से अपना वर्चश्व स्थापित करने लगी। तो दूसरी ओर द्विजों में ऐसी भावना जगने लगी मानों उनपर ये नियम-संयम बोझ स्वरूप लादे गए हैं। शूद्रों की तरह खान-पान, रहन-सहन की छूट उन्हें नहीं मिल रही है। कुल मिलाकर देखा जाए तो अज्ञान और असन्तोष चारों वर्णों में व्याप्त हो गया। जिसका दुष्परिणाम सामने है। कोई भी वर्ण अपने विहित कर्मों से सन्तुष्ट नहीं है। अस्तु।
प्रस्तुत प्रसंग में विवेच्य विषय यज्ञोपवीत है। अतः यौगिक (शरीरशास्त्रीय) आधार पर इसका विचार करते हैं। द्विजों की सूक्ष्म शारीरिक संरचना अष्टांगयोग के अनुकूल है। मानव शरीर का सर्वोच्च शिखर कपालखण्ड है। जाबालदर्शनोपनिषद, घेरण्डसंहिता, पातञ्जलयोगदर्शन आदि ग्रन्थों में कहा गया है कि मानव शरीर में कुल ७२००० प्राणवाहिनी नाडियाँ हैं, जो शरीर के विभिन्न भागों से होकर गुजरती हैं, जिनमें चौदह नाड़ियाँ मुख्य हैं। इन चौदह में दो हैं—पूषा और यशस्विनी, जो क्रमशः मेरुदण्ड से निकलकर दक्षिण एवं वाम कर्ण तक गमन करतीं है। मेरुदण्ड से होकर गुजरने वाली तीन सर्व प्रमुख नाडियाँ हैं—इडा, पिंगला और सुषुम्णा। यूँ तो सभी नाडियों का यथास्थान महत्व है, किन्तु शरीर के ऊर्जाप्रवाह को संतुलित रखने में इन पाँचों की विलक्षण भूमिका है। इनमें तीन मुख्य और दो सहयोगी हैं। यज्ञोपवीत का सम्बन्ध इन्हीं पाँचों से है। विदित है कि महाशक्ति जागरण, संतुलन और ऊर्ध्वगमन में नाड़ीगुच्छों का महत् योगदान है।
ध्यातव्य है कि यज्ञोपवीत की सामान्य अवस्थिति वायें कंधे पर पंचमनाड़ीगुच्छ (विशुद्धि) के समीप रहती है, जो नीचे की ओर लटकते हुए क्रमशः चतुर्थ और तृतीय पर अनुगमन करती है। ये तृतीय ही सूर्यलोक-अग्नितत्त्व है। सूर्य का सम्बन्ध गायत्री से है, जो वेद (ज्ञान) की अधिष्ठात्री भी हैं।
ऊर्जाप्रवाह के ऊर्ध्वगमन संतुलन और असामयिक पातन पर नियन्त्रण हेतु यज्ञोपवीत (ब्रह्मसूत्र) की उपयोगिता है। ब्रह्मतेज पूरित सूत्र को मूत्र-पुरीष परित्याग (लघुशंका-दीर्घशंका) के समय दोनों कर्णमूलों से संश्लिष्ट रखना आवश्यक होता है। लघुशंका के समय अनियन्त्रित शुक्र(वीर्य) का स्खलन न हो जाए, इसके लिए पूषानाड़ी पर बन्धन डालना आवश्यक है। एवं दीर्घशंका (मलत्याग) के समय ये दायित्व और अधिक बढ़ जाता है, क्योंकि नीचे (प्रथम नाड़ीगुच्छ) भी उस समय बन्धनमुक्त हो जाता है। ऐसे में वामकर्ण स्थित यशस्विनीनाड़ी पर भी बन्धन लगाना आवश्यक हो जाता है। इतना ही नहीं इन दोनों नाड़ियों के बीच शरीर का विशुद्धिनाड़ीगुच्छ (गर्दन वाला भाग) भी सन्तुलन की अपेक्षा रखता है। आयुर्विज्ञान जिसे अवटुकाग्रन्थि (थॉयरॉयडग्लैन्ड) कहता है, शौचकर्म में उस विशुद्धिखण्ड का भी महत् योगदान है।
ध्यान देने की बात है कि मलत्याग के समय यज्ञोपवीत का पहले दक्षिणकर्ण पर तीन बार फेरा लगाते हैं, फिर गर्दन के सामने से गुजारते हुए वामकर्ण पर दो फेरे लगाते हैं। इस प्रकार पूषा, यशस्विनी और विशुद्धिनाड़ीगुच्छ का सम्यक् बन्धन और सन्तुलन स्थापित हो जाता है।
यहाँ एक और बात ध्यान रखने योग्य है कि ब्राह्मण का सिर सिर्फ शौचादि के समय ही ढका होना चाहिए, जबकि नीचे का प्रथम और द्वितीय नाड़ीगुच्छ का भाग खुला हुआ हो। अन्य समय में कदापि नहीं। अज्ञानवश लोग पूजा-पाठ के समय में सिर ढक लेते हैं और शौच के समय खुला छोड़ देते हैं— ये दोनों स्थितियाँ असंगत और योगविज्ञान के प्रतिकूल हैं।
चक्रसाधन की प्रारम्भिक प्रक्रिया है नाड़ीशोधन। जो कि न्यूनतम तीन महीनों और अधिकतम तीन वर्षों का अभ्यास है। सम्यक् नाड़ीशोधन से अन्तःकाय की शुद्धि हो जाती है। ऐसे में वायें कन्धे से नाभिमण्डल पर्यन्त तीन प्रमुख चक्रों को समाहित किए यज्ञोपवीत अपनी उपस्थिति-अनुपस्थिति, शुचिता-अशुचिता का सहज ही बोध करा देता है। इसे प्रयोगात्मक रूप से समझा जा सकता है, अनुभव किया जा सकता है।
आयुर्विज्ञान की दृष्टि से उच्चरक्तचाप, हृदयरोग, मधुमेह, पौरुषग्रन्थिशोथ, अवटुकाग्रन्थिशोथ इत्यादि विभिन्न बीमारियों के सन्तुलन में भी यज्ञोपवीत का विशेष योगदान है।
सनातनी परम्परा से अवगत लोग भलीभाँति अवगत हैं कि गैर द्विज भी मल-मूत्र परित्याग के समय गमछे से दोनों कान सहित सिर को बाँध लेते थे। गमछे से कानों को बाँध लेना भी काफी हद तक शरीर को सन्तुलित कर देता है। मल-मूत्र-परित्याग की शारीरिक मुद्रा भी कम महत्त्वपूर्ण नहीं है। आधुनिक समय में एक ओर यज्ञोपवीत की अनिवार्यता पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है, तो दूसरी ओर अंग्रेजी पहरावे और चलन में खड़े होकर मूत्र त्याग करना, कुर्सीनुमा आसन पर बैठ कर मल त्याग करना अनेकानेक व्याधियों को निमन्त्रण दे रहा है। हमे चाहिए कि भारतीय सनातनी परम्परा की वैज्ञानिकता को परखें, समझें और सम्यक् अनुपालन करें। अस्तु।
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