प्राइमरी का मास्टर ● इन |
- कम प्रसार वाले समाचार पत्र में विज्ञापन अभ्यर्थियों से अन्याय, रिक्त पदों को ठीक से विज्ञापित न करना मौलिक अधिकार का हनन
- जीआइसी एलटी की स्थाई वरिष्ठता जल्द, वरिष्ठता निर्धारण न होने से अटकी है प्रोन्नति
- छात्र-छात्राओं को पढ़ाने के लिए 14 भाषाओं में शुरू होंगे चैनल, 200 नए टीवी चैनलों को शुरू करने की रूपरेखा
- यूपी के मदरसों में आधुनिक विषयों की पढ़ाई पर जोर
- डीएलएड कॉलेजों ने कदम पीछे खींचे , प्रवेश लेने से किया इनकार
- UP Board Result : यूपी बोर्ड रिजल्ट की तारीख अभी तय नहीं, सोशल मीडिया में चल रही फर्जी सूचनाा, अभी रिजल्ट तैयार नहीं
- विजय किरण आनंद की DGSE पद पर एक बार फिर वापसी
| Posted: 09 Jun 2022 06:29 PM PDT कम प्रसार वाले समाचार पत्र में विज्ञापन अभ्यर्थियों से अन्याय रिक्त पदों को ठीक से विज्ञापित न करना मौलिक अधिकार का हनन प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि रिक्त पदों पर भर्ती के लिए ठीक से विज्ञापित नहीं किया जाना संभावित उम्मीदवारों के मूल अधिकार का हनन है । यह उचित प्रक्रिया का पालन न किया जाना है । मामले में एकल पीठ के आदेश को सही करार देते हुए रवि प्रताप की ओर से दाखिल विशेष याचिका को खारिज कर दिया गया। यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति राजेश बिंदल और न्यायमूर्ति जेजे मुनीर ने दिया है। विद्यालय प्रबंधन समिति ने लिपिक भर्ती का विज्ञापन एक स्थानीय समाचार पत्र में प्रकाशित कराया था। जिसके बाद उसे चयन समिति ने लिपिक पद पर विधिवत नियुक्त किया था किंतु जिला विद्यालय निरीक्षक ने इस आधार पर वित्तीय स्वीकृति प्रदान करने से मना कर दिया था कि लिपिक भर्ती का विज्ञापन कम प्रसारण वाले समाचार पत्र में प्रकाशित कराया गया है। जिसे चुनौती देते हुए उसके द्वारा याची ने कोर्ट को बताया कि याचिका योजित की गई थी। प्रयागराजः इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि कम प्रसार वाले समाचार पत्रों में भर्ती विज्ञापन प्रकाशित कराना उस पद के उम्मीदवारों के साथ अन्याय है। इस प्रकार के विज्ञापन संविधान के अनुच्छेद 14 एवं 16 की मूल भावना के विपरीत हैं। |
| जीआइसी एलटी की स्थाई वरिष्ठता जल्द, वरिष्ठता निर्धारण न होने से अटकी है प्रोन्नति Posted: 08 Jun 2022 05:27 PM PDT जीआइसी एलटी की स्थाई वरिष्ठता जल्द, वरिष्ठता निर्धारण न होने से अटकी है प्रोन्नति प्रयागराज : राजकीय इंटर कालेज के सहायक अध्यापकों (एलटी) की स्थाई वरिष्ठता लंबे समय से अटकी हुई है। वरिष्ठता निर्धारित नहीं होने से करीब पांच हजार शिक्षकों को प्रोन्नति नहीं मिल पा रही है। राजकीय माध्यमिक शिक्षक संघ को विशेष सचिव माध्यमिक शिक्षा ने बातचीत में भरोसा दिया है कि वरिष्ठता निर्धारण का कार्य जल्द पूरा किया जाएगा। राजकीय शिक्षकों की वर्ष 1991 से दिसंबर 2000 की स्थाई वरिष्ठता वर्ष 2004 प्रकाशित हुई। इसके बाद से स्थाई वरिष्ठता निर्धारित नहीं हुई। अस्थाई वरिष्ठता निर्धारित करके आपत्ति मांगे जाने की औपचारिकता पूरी की जाती है, लेकिन स्थाई वरिष्ठता निर्धारित नहीं हो पा रही है। इस संबंध में पिछले दिनों राजकीय शिक्षक संघ के महामंत्री रामेश्वर । प्रसाद पाण्डेय ने अपर शिक्षा निदेशक राजकीय के यहां जानकारी की तो । thsti बताया गया कि पत्रावली शासन में अनुमति के लिए लंबित है। ऐसे संघ की प्रांतीय अध्यक्ष छाया शुक्ला, कार्यकारी प्रांतीय महामंत्री सत्य शंकर मिश्र ने महामंत्री के साथ मामले को विशेष सचिव माध्यमिक शिक्षा शंभू कुमार के समक्ष रखा। बताया कि स्थाई वरिष्ठता निर्धारण की फाइल डेढ़ माह से शासन में अटकी है। इस पर विशेष सचिव ने समीक्षा अधिकारी से पूछताछ की है। उन्होंने भरोसा दिया है कि जल्द ही स्थाई वरिष्ठता निर्धारित की जाएगी। प्रांतीय महामंत्री ने बताया कि इसकी प्रक्रिया निदेशालय से अपर शिक्षा निदेशक मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक, जिला विद्यालय निरीक्षक के क्रम में चलने के कारण लंबी हो जाती है। इसी कारण 22 वर्ष से स्थाई वरिष्ठता निर्धारित नहीं हो सकी है। |
| Posted: 07 Jun 2022 06:39 PM PDT छात्र-छात्राओं को पढ़ाने के लिए 14 भाषाओं में शुरू होंगे चैनल 200 नए टीवी चैनलों को शुरू करने की शिक्षा मंत्रालय ने तैयार की रूपरेखा नई दिल्ली: सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मुहैया कराने के •लिए प्रस्तावित दो सौ नये टेलीविजन (टीवी) चैनल को शुरू करने की रूपरेखा लगभग तैयार हो गई है। यह चैनल फिलहाल 14 प्रमुख भाषाओं में संचालित होंगे। इस दौरान प्रत्येक कक्षा के लिए एक समर्पित चैनल होगा। जो स्कूल से लेकर उच्च शिक्षा तक सभी के लिए होगा। इनमें से करीब सौ चैनलों को इसी साल से शुरू करने की योजना है। शिक्षा मंत्रालय इसे लेकर तेजी से तैयारी में जुटा है। कंटेंट तैयार करने के लिए निजी कंपनियों की भी मदद ली जा रही है। शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक फिलहाल जो रूपरेखा तैयार की गई है, उसमें बच्चों को पढ़ाने के लिए ऐसे सभी भाषाओं में चैनल शुरू किए जाएंगे, जिसमें अभी पढ़ाई हो रही है। साथ ही प्रतियोगी परीक्षाएं भी उन भाषाओं में आयोजित हो रही हैं। इसके तहत जिन 14 भाषाओं को चिन्हित किया गया उनमें हिंदी, अंग्रेजी के साथ पंजाबी, असमिया, बांग्ला, ओडिया, गुजराती, मराठी, तेलगू, तमिल, कन्नड़, मलयालम, उर्दू और संस्कृत होगी। हालांकि राज्यों की मांग के आधार पर इनमें कुछ और भाषाओं को भी शामिल किया जा सकता है। वैसे भी सरकार का फोकस सभी भारतीय भाषाओं को आगे बढ़ाने को लेकर है । इसकी सिफारिश नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी प्रमुखता से की गई है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने भी हाल ही में भाषाओं को लेकर उठे विवाद के बाद साफ किया था कि सभी भारतीय भाषाएं हमारी राष्ट्रीय भाषा है। सभी में पढ़ाई के समान अवसर मिलेंगे। छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मुहैया कराने की इस योजना पर तेजी से अमल के लिए शिक्षा मंत्रालय ने अपने संसाधनों के साथ ही शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाली निजी कंपनियों से भी मदद मांगी है। इस दौरान कुछ जोड़ा भी है। |
| यूपी के मदरसों में आधुनिक विषयों की पढ़ाई पर जोर Posted: 07 Jun 2022 06:15 PM PDT यूपी के मदरसों में आधुनिक विषयों की पढ़ाई पर जोर, लखनऊ । प्रदेश के मान्यता प्राप्त व अनुदानित मदरसों की परीक्षाओं में अब धार्मिक शिक्षा, अरबी और फारसी के पर्चों के नम्बर कम होंगे। उ.प्र.मदरसा शिक्षा परिषद ने इन तीनों विषयों के कुल 100 नम्बर तय किए हैं जबकि आधुनिक विषयों-अंग्रेजी, विज्ञान, कम्प्यूटर सांइस, गणित, हिन्दी, समाज विज्ञान आदि विषयों के पर्चे क्रमश: 100-100 नम्बर के होंगे। यह जानकारी परिषद के चेयरमैन डा. इफ्तेखार जावेद ने दी। उन्होंने बताया कि पाठ्यक्रम में विषय बदले गए हैं। परिषद का फैसला हो गया है। हिन्दी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान, कम्प्यूटर साइंस, समाज विज्ञान को अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही अब परीक्षार्थियों के लिए पूर्णांक भी तय किए गए हैं। धार्मिक शिक्षा (दीनयात) और अरबी व फारसी को सौ नम्बर में बांटा गया है। वजह पूछे जाने पर चेयरमैन ने कहा कि मकसद यह है कि देश तेजी से बदल रहा है तो मदरसों की शिक्षा व्यवस्था में भी उसी के अनुरूप बदलाव करने पड़ेंगे। मदरसों में धार्मिक शिक्षा बेशक पठन-पाठन का अनिवार्य अंग है। मगर सिर्फ धार्मिक शिक्षा ग्रहण कर के मौलवी और इमाम बनने से भविष्य नहीं संवरेगा। जरूरत इस बात की है कि इन मदरसों से पढ़कर निकलने वाले अब समाज की मुख्यधारा में शामिल होते हुए प्रतियोगी परीक्षाओं के अलावा अन्य व्यवसायिक पाठ्यक्रमों की शिक्षा भी ग्रहण कर सकें। |
| डीएलएड कॉलेजों ने कदम पीछे खींचे , प्रवेश लेने से किया इनकार Posted: 07 Jun 2022 06:05 PM PDT डीएलएड कॉलेजों ने कदम पीछे खींचे , प्रवेश लेने से किया इनकार लखनऊ : इस वर्ष एक दर्जन डीएलएड (पुराना नाम बीटीसी) कॉलेजों ने प्रवेश लेने से इनकार कर दिया है। कॉलेजों ने परीक्षा नियामक प्राधिकारी को पत्र लिख कर कहा है कि उन्हें विद्यार्थी आवंटित न किए जाएं। प्रदेश में डीएलएड के 3100 निजी कॉलेज हैं। पिछले तीन-चार वर्षों से यूपी में डीएलएड की सीटें खाली रह जा रही हैं। प्रदेश में डीएलएड की 2.50 लाख सीटें हैं लेकिन पिछले वर्ष भी 50 फीसदी सीटें खाली रह गई थीं। अब डीएलएड कॉलेज विद्यार्थियों के लिए तरस रहे हैं। वर्ष 2009 में आरटीई कानून लागू होने के बाद कक्षा एक से पांच तक में केवल बीटीसी वालों को ही मान्यता दी गई थी। 2011 में जब यह कानून लागू हुआ तो प्रदेश में केवल 10,600 सीटें ही बीटीसी की थी और निजी कॉलेजों की संख्या 65 से 70 थी। धीरे-धीरे निजी कॉलेजों ने भी डीएलएड प्को जोड़ा और बीते 10 सालों में 3100 कॉलेज खुल चुके हैं। |
| Posted: 07 Jun 2022 03:15 PM PDT UP Board Result : यूपी बोर्ड रिजल्ट की तारीख अभी तय नहीं, सोशल मीडिया में चल रही फर्जी सूचनाा, अभी रिजल्ट तैयार नहीं अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा आराधना शुक्ला ने बताया कि रिजल्ट अभी तैयार किया जा रहा है। सोशल मीडिया में जो परिणाम घोषणा की तारीख चल रही है, वह अधिकारिक नहीं है। अभी कोई तारीख तय नहीं की गई है। रिजल्ट तैयार होते ही तारीख की घोषणा की जाएगी। यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षा के परिणाम की घोषणा की तारीख अभी तक नहीं हो सकी है। शिक्षा विभाग के अधिकारी यह नहीं बता पा रहे हैं कि रिजल्ट किस दिन घोषित होगा। उनका कहना है कि रिजल्ट तैयार होते ही तारीख की घोषणा की जाएगी। इस संबंध में अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा आराधना शुक्ला ने बताया कि रिजल्ट अभी तैयार किया जा रहा है। सोशल मीडिया में जो परिणाम घोषणा की तारीख चल रही है, वह अधिकारिक नहीं है। अभी कोई तारीख तय नहीं की गई है। रिजल्ट तैयार होते ही तारीख की घोषणा की जाएगी। |
| विजय किरण आनंद की DGSE पद पर एक बार फिर वापसी Posted: 07 Jun 2022 06:10 PM PDT श्री विजय किरण आनंद को मिला महनिदेशक स्कूल शिक्षा का प्रभार। विजय किरण आनंद की DGSE पद पर एक बार फिर वापसी लखनऊ। राज्य सरकार ने मंगलवार को बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 21 आईएएस अफसरों को बदल दिया। गोरखपुर के जिलाधिकारी विजय किरन आनंद को एक बार फिर बेसिक शिक्षा विभाग का विशेष सचिव एवं स्कूल शिक्षा महानिदेशक के पद पर तैनाती दी गई है। उनके पास कुंभ मेला अधिकारी प्रयागराज का अतिरिक्त प्रभार भी रहेगा। बेसिक शिक्षा विभाग की सचिव अनामिका सिंह को महिला कल्याण एवं बाल विकास विभाग में सचिव नियुक्त किया गया है। |
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