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- PhD : UGC का तोहफा, नौकरी के चलते नहीं कर पा रहे हैं पीएचडी तो यह खबर आपके काम की
- सीबीएसई और सीआईसीएसई बोर्ड के मुकाबले यूपी बोर्ड के विद्यार्थियों पर होता है न्यूनतम खर्च, स्कूल की फीस भी काफी कम
- यूपी बोर्ड : 12 जुलाई तक करें स्क्रूटनी के लिए ऑनलाइन आवेदन
| PhD : UGC का तोहफा, नौकरी के चलते नहीं कर पा रहे हैं पीएचडी तो यह खबर आपके काम की Posted: 19 Jun 2022 06:40 AM PDT PhD : UGC का तोहफा, नौकरी के चलते नहीं कर पा रहे हैं पीएचडी तो यह खबर आपके काम की यूजीसी की काउंसिल बैठक में यूजीसी रेगुलेशन (मिनिमम स्टैंडर्ड एंड प्रोसीजर फॉर अवार्ड ऑफ पीएचडी) 2022 के ड्राफ्ट का प्रस्ताव पास हो गया है। इसके अलावा यदि पीएचडी की नेट और जेआरएफ से भरी जाने वाली 60 फीसदी सीटें खाली रहती हैं तो 40 फीसदी सीट (विश्वविद्यालय या एनटीए की संयुक्त दाखिला प्रवेश परीक्षा से भरी जाने वाली ) में जोड़ने पर भी विचार चल रहा है। हालांकि, अभी तक इस पर कोई फैसला नहीं हुआ है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की 13 जून को आयोजित यूजीसी काउंसिल बैठक में संशोधित यूजीसी पीएचडी रेगुलेशन-2022 को मंजूरी मिल गई है। आगामी शैक्षणिक सत्र 2022-23 से विश्वविद्यालयों, सीएसआईआर, आईसीएमआर, आईसीएआर आदि में इन्हीं नियमों के तहत पीएचडी में दाखिले होंगे। विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों को अपनी पीएचडी सीटों का ब्योरा अधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड करना जरूरी होगा। इसमें पीएचडी गाइड से लेकर विषय भी दर्शाने होंगे। पीएचडी दाखिले के लिए 70 अंक लिखित और 30 अंक इंटरव्यू के रहेंगे। पीएचडी प्रोग्राम में कम से कम 12 क्रेडिट और अधिक से अधिक 16 क्रेडिट होने अनिवार्य रहेंगे। इसके अलावा रिटायरमेंट के बाद शिक्षक 70 वर्ष की आयु तक रिसर्च क्षेत्र में शिक्षक के रूप में दोबारा पैरेंट यूनिवर्सिटी में सेवाएं दे सकेंगे। इसमें अलग-अलग वर्ग निर्धारित किए गए हैं। अब थीसिस पीर रिव्यू जर्नल में छपवा और पेटेंट करवा सकेंगे नए रेगुलेशन में उम्मीदवार से लेकर विश्वविद्यालयों को आजादी दी गई है। अब पीएचडी उम्मीदवार अपनी थीसिस को पेटेंट करवा सकेंगे। इसके अलावा पीएचडी की रिसर्च फाइडिंग को क्वालिटी जर्नल यानी पीर रिव्यू जर्नल में छपवा सकते हैं। पीएचडी वाइवा ऑनलाइन और ऑफलाइन का विकल्प रोना काल में पहली बार पीएचडी वाइवा ऑनलाइन भी होगा। नए रेगुलेशन में पीएचडी वाइवा ऑनलाइन पर प्रमुखता से लागू करने को लिखा गया है। इसका मकसद छात्र और विश्वविद्यालय के समय और आर्थिक बचत करना है। इसमें पहले ऑनलाइन वाइवा देना होगा। यदि छात्र को किसी प्रकार की दिक्कत हो तो वाइवा ऑफलाइन दिया जा सकता है। छह साल में पूरी करनी होगी पीएचडी पीएचडी छह साल में पूरी करनी होगी। कोई भी संस्थान दो साल से अधिक अतिरिक्त समय नहीं देगा। वहीं, महिला उम्मीदवारों और दिव्यांगजनों (40 फीसदी से अधिक) को छह साल के अलावा दो साल अतिरिक्त समय देने का प्रावधान किया गया है। दो संस्थान मिलकर भी करवा सकेंगे पीएचडी अब नए नियमों में दो कॉलेज मिलकर अब डिग्री प्रोग्राम की पढ़ाई करवा सकते हैं। इसके लिए दोनों संस्थानों को समझौता करना होगा। इसमें कमेटी तय करेगी कि रिसर्च एरिया और सुपरवाइजर (गाइड) और को-सुपरवाइजर(दो गाइड) मिलकर कैसे पीएचडी करवाएंगे। इसमें कोई भी सुपरवाइजर तय नियमों के तहत ही पीएचडी स्कॉलर्स रख सकेगा। प्रोफेसर, एसोसिएट और सहायक प्रोफेसर करवाएंगे पीएचडी नए रेगुलेशन के तहत कोई भी फुल टाइम नियमित, एसोसिएट और सहायक प्रोफेसर पीएचडी करवा सकेंगे। प्रोफेसर और एसोसिएट को पीएचडी करवाने के लिए कम से कम पांच रिसर्च प्रकाशित होनी जरूरी होंगी। जबकि सहायक प्रोफेसर के लिए पांच साल तक टीचिंग, रिसर्च अनुभव के साथ तीन रिसर्च प्रकाशित होनी जरूरी रहेंगी। नए नियम में प्रोफेसर आठ से अधिक, एसोसिएट प्रोफेसर कम से कम छह और अस्सिटेंट प्रोफेसर कम से कम चार पीएचडी स्कॉलर्स रख सकता है। इसके अलावा विदेशी पीएचडी स्कॉलर्स मिलने पर दो स्कॉलर्स सुपर न्यूमेरी सीट के तहत रखे जा सकते हैं। पीएचडी प्रोग्राम में अब ऐसे होंगे दाखिले, यह होगा क्राइटीरिया विश्वविद्यालयों में वर्तमान में जारी व्यवस्था यानी तीन साल स्नातक और दो साल का पीजी करने वाले छात्र भी पीएचडी में दाखिला ले सकते हैं। उन्हें पीएचडी में दाखिले के लिए विश्वविद्यालयों या एनटीए की संयुक्त दाखिला प्रवेश परीक्षा में भाग लेने के लिए पीजी प्रोग्राम में 50 या 55 फीसदी अंक (विश्वविद्यालय के क्राइटीरिया के आधार पर)होने अनिवार्य हैं। चार वर्षीय स्नातक और एक साल का पीजी प्रोग्राम की पढ़ाई करने वाले छात्र भी पीएचडी में दाखिले ले सकते हैं। इन्हें भी पीएचडी दाखिले के लिए विश्वविद्यालयों या एनटीए की संयुक्त दाखिला प्रवेश परीक्षा में भाग लेने के लिए पीजी प्रोग्राम में 50 या 55 फीसदी अंक(विश्वविद्यालय के क्राइटीरिया के आधार पर) होने अनिवार्य है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत चार वर्षीय डिग्री प्रोग्राम के तहत रिसर्च या ऑनर्स प्रोग्राम के छात्र सीधे पीएचडी में दाखिले ले सकेंगे। लेकिन पीएचडी के लिए विश्वविद्यालयों की संयुक्त दाखिला प्रवेश परीक्षा में शामिल होने के लिए सीजीपीए 7.5 से अधिक होना चाहिए है। विश्वविद्यालयों की कुल सीटों में से 60 फीसदी सीट नेट या जेआरएफ क्वालीफाई छात्रों के लिए आरक्षित रहेंगी। विश्वविद्यालय सिर्फ अपनी 40 फीसदी सीटों पर अपनी या एनटीए द्वारा आयोजित होने वाली संयुक्त दाखिला प्रवेश परीक्षा की मेरिट से दाखिला दे सकते हैं। यदि कुछ 60 फीसदी सीटों के लिए योग्य उम्मीदवार नहीं मिलते हैं तो फिर विश्वविद्यालय खाली सीटों को 40 फीसदी ओपन सीटों से जोड़ सकेंगे। यानी वे इन खाली सीटों पर विश्वविद्यालय या एनटीए की संयुक्त दाखिला प्रवेश परीक्षा की मेरिट से सीट आवंटन कर सकेंगे। इस पर अभी विशेषज्ञ कमेटी में मंथन चल रहा है। इस पर अभी कोई प्रस्ताव तैयार नही हुआ है और न ही अभी कोई फैसला हुआ है। |
| Posted: 18 Jun 2022 07:17 PM PDT सीबीएसई और सीआईसीएसई बोर्ड के मुकाबले यूपी बोर्ड के विद्यार्थियों पर होता है न्यूनतम खर्च, स्कूल की फीस भी काफी कम एक लाख बनाम 13 हजार लेकिन सपने वही, लक्ष्य वही लखनऊ : फीस 300 से 700, स्कूल तक पहुंचने का साधन अमूमन साइकिल या सरकारी बस... कोचिंग के नाम पर गणित या विज्ञान का ट्यूशन..। यूपी बोर्ड के विद्यार्थियों पर अभिभावक अमूमन 10 हजार रुपये तक ही खर्च करते हैं जबकि सीबीएसई या सीआईसीएसई बोर्ड के स्कूलों में 50 हजार से लेकर से दो लाख रुपये तक खर्च होता है। लेकिन दोनों ही बोर्ड के विद्यार्थियों का लक्ष्य ज्यादातर डॉक्टर, इंजीनियर और आईएएस अफसर बनना होता है। इंटरमीडिएट की टॉपरों की सूची में नंबर चार पर आने वाली प्रयागराज की आंचल यादव ने विज्ञान वर्ग से 94 फीसदी अंक हासिल किए हैं और उनकी पढ़ाई पर मात्र 3600 रुपये खर्च हुए हैं। वह साइकिल से स्कूल जाती हैं, ट्यूशन पढ़ती नहीं है और उनकी फीस 300 रुपये महीना है। वहीं नंबर तीन पर 95 फीसदी लेकर टॉप करने वाले योगेश प्रताप पैदल स्कूल जाते हैं और उनके अभिभावकों ने सिर्फ स्कूल की फीस दी है। अमूमन यूपी बोर्ड के स्कूलों में फीस ज्यादा नहीं होती। ज्यादातर स्कूलों में 300 से 600 रुपये महीना फीस ली जाती है। वहीं कोचिंग के नाम पर 10 फीसदी विद्यार्थी ही प्राइवेट ट्यूशन लेते हैं और इसमें भी पांच से सात हजार रुपये प्रतिवर्ष खर्चा आता है। यदि बात स्कूल तक जाने की करें तो ज्यादातर पैदल या साइकिल से और स्कूल दूर होने पर सरकारी बस या टैम्पो की मदद ली जाती है। यूपी बोर्ड के बहुत अच्छे स्कूलों में फीस दो हजार रुपये प्रतिमाह तक है लेकिन ऐसे स्कूल प्रदेश में उंगलियों पर गिने जा सकते हैं। सीबीएसई या सीआईसीएसई बोर्ड के स्कूलों की करें तो यहां दसवीं व बारहवीं की फीस फीस तीन हजार से लेकर 15 हजार रुपये महीना तक होती है। ये फीस स्कूलों की सुविधाओं के मुताबिक घटती-बढ़ती है। अमूमन इस बोर्ड के बच्चे कोचिंग भी जाते हैं। इनकी कोचिंग में प्रति विषय न्यूनतम 10 हजार रुपये प्रति विषय से लेकर 20 हजार रुपये तक और परिवहन पर सालाना खर्च 15 से 20 हजार रुपये खर्च किए जाते हैं। इसके अलावा कम्यूटर, प्रोजेक्ट समेत इंटरनेट आदि पर आने वाला खर्चा अलग से होता है। विभिन्न बोर्डों में आने वाला खर्च मद- यूपी बोर्ड सीआईसीएसई/सीबीएसई फीस 6000 36000 परिवहन 2000 20000 ट्यूशन 5000 35000 (तीन विषय) अन्य संसाधन ---- 10,000 13000 रुपये 101000 रुपये (ये खर्चा सालाना औसत के आधार पर है। इससे ज्यादा या कम खर्च भी होता है।) |
| यूपी बोर्ड : 12 जुलाई तक करें स्क्रूटनी के लिए ऑनलाइन आवेदन Posted: 18 Jun 2022 05:16 PM PDT यूपी बोर्ड : 12 जुलाई तक करें स्क्रूटनी के लिए ऑनलाइन आवेदन यूपी बोर्ड : हाईस्कूल के 2.79 लाख परीक्षार्थी एक विषय में फेल, खबर पढ़ें सबसे नीचे प्रयागराज : यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा के अपने परिणाम से असंतुष्ट छात्र-छात्राएं स्क्रूटनी (सन्निरीक्षा) के लिए 12 जुलाई तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। सचिव दिब्यकांत शुक्ल ने बताया कि लिखित एवं प्रयोगात्मक खंड के लिए 500 रुपये प्रति प्रश्नपत्र की दर से निर्धारित है। स्क्रूटनी से संबंधित आवश्यक निर्देश बोर्ड की वेबसाइट upmsp.edu.in पर उपलब्ध है। इच्छुक अभ्यर्थी आवेदित विषयों के लिए निर्धारित शुल्क चालान के माध्यम से राजकीय कोषागार में जमा करेंगे। उसके बाद स्क्रूटनी के ऑनलाइन फॉर्म के प्रिंटआउट के साथ चालान पत्र संलग्न कर रजिस्टर्ड डाक से बोर्ड के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को 12 जुलाई तक भेजेंगे। क्षेत्रीय कार्यालय में बुधवार से खुलेगी ग्रीवांस सेल प्रयागराज : यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा में शामिल छात्र-छात्राओं की परिणाम संबंधित किसी भी समस्या या शिकायत के समाधान के लिए बुधवार से सभी पांचों क्षेत्रीय कार्यालयों प्रयागराज, मेरठ, बरेली, वाराणसी और गोरखपुर में ग्रीवांस सेल खोली जाएगी। छात्र-छात्राओं के अंकपत्र सह प्रमाणपत्र में नाम, माता-पिता के नाम, जन्मतिथि या किसी अन्य विवरण में त्रुटि हो तो सेल में प्रत्यावेदन देकर संशोधन करा सकते हैं। सचिव दिब्यकांत शुक्ल ने बताया कि बुधवार से ग्रीवांस सेल सक्रिय हो जाएगी। दो दिन के लिए यूपी बोर्ड में अवकाश प्रयागराज : 2022 की बोर्ड परीक्षा घोषित करने के बाद यूपी बोर्ड मुख्यालय और क्षेत्रीय कार्यालयों में सोमवार और मंगलवार को दो दिन अवकाश रहेगा। रविवार को अवकाश है इसलिए अधिकारियों और कर्मचारियों को तीन दिन की छुट्टी मिल जाएगी। यूपी बोर्ड : हाईस्कूल के 2.79 लाख परीक्षार्थी एक विषय में फेल यूपी बोर्ड की हाईस्कूल परीक्षा के लिए 27,81,645 परीक्षार्थी पंजीकृत थे। इनमें से 25,20,634 छात्र-छात्राएं परीक्षा में शामिल हुए थे। 22,22,745 परीक्षार्थियों को सफलता मिली। परीक्षा में शामिल हुए 25,20,634 परीक्षार्थियों में से 2,79,102 (12.56 प्रतिशत) परीक्षार्थी एक विषय में फेल हो गए। यूपी बोर्ड के नियम के अनुसार हाईस्कूल के छह में से पांच विषय में पास होने पर छात्र को पास मान लिया जाता है। ऐसे में एक विषय में फेल छात्र चाहें तो अपनी मार्कशीट सुधारने के लिए अंक सुधार या इम्प्रूवमेंट परीक्षा दे सकते हैं। जबकि 762 परीक्षार्थी दो विषय में फेल हैं और कम से कम एक विषय में पास होने के लिए कंपार्टमेंट परीक्षा में शामिल होना होगा। 2,74,762 (12.36 प्रतिशत) छात्र-छात्राएं तीन या अधिक विषय में फेल हैं और इन्हें बोर्ड ने क्रेडिट सिस्टम के लिए अर्ह माना है। यानि ऐसे छात्र चाहें तो जिस विषय में पास हैं उनके अलावा अन्य विषयों में अगले तीन वर्षों तक परीक्षा दे सकते हैं। यदि कुल पांच विषयों में हो जाते हैं तो उन्हें हाईस्कूल पास की मार्कशीट दे दी जाएगी। 2020 की तुलना में इस साल एक विषय में फेल होने वाले छात्रों की संख्या में कमी आई है। 2020 में 3,27,663 (14.19 प्रतिशत) छात्र एक विषय में जबकि 711 दो विषय में फेल थे। 4,21,170 (18.23 प्रतिशत) परीक्षार्थी तीन या अधिक विषय में फेल थे। |
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