दिव्य रश्मि न्यूज़ चैनल |
- फूलों की कली
- आयुष्मान भारत फाउंडेशन ने किया निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन
- रक्तदान
- बंगाल के आगजनी प्रभावित इलाकों में अर्धसैनिकों को बुलाया जाना चाहिए: सुवेंदु अधिकारी
- अमरनाथ यात्रा से पहले जम्मू में रचा जा रहा दंगे कराने का षड्यंत्र
- हरियाणा में आम आदमी पार्टी की नई सियासी तैयारी
- बाहुबली विधायक अनंत सिंह को एके-47 और ग्रेनेड मामले में कोर्ट ने दोषी ठहराया
- भारत की छवि बिगाड़ने की साजिश विफल
- महाराष्ट्र में हीरो बने आशीष
- पाकिस्तानी पत्रकार असद खराल भारत के खिलाफ चला रहे प्रोपेगेंडा
- रूस व यूक्रेन के बीच जंग जारी
- अमेरिका के स्वास्थ्य सचिव को हुआ कोरोना, एक महीने में दूसरी बार हुए संक्रमित
- ताइवान की जंग में गेम चेंजर साबित होगा चीन का ड्रोन मदरशिप
- क्यों करता ये...
- दंगाइयों का ढो रहे हैं भार किस लिए ?
- ग्रहों का घर के वास्तु पर कितना असर, किस हिस्से में कौन सी चीज रखना शुभ
- आतंकवाद ने अपनी बाहें फैलायी हैं
- प्रथम ‘हिन्दू राष्ट्र संसद’ में आदर्श मंदिर प्रबंधन पाठ्यक्रम सिखाने की सूचना !
- 15 जून 2022, बुधवार का दैनिक पंचांग एवं राशिफल - सभी १२ राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन ? क्या है आप की राशि में विशेष ? जाने प्रशिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. प्रेम सागर पाण्डेय से |
- अरब की हिंदू देवियां
- विहिप की मार्गदर्शक बैठक में कई अहम फैसले
- थाने में कांग्रेस नेताओं से मिलने पहुंची प्रियंका
- रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता
- फिर चला गहलोत का जादू
- हिंसाग्रस्त असहमति
| Posted: 14 Jun 2022 07:51 AM PDT
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| आयुष्मान भारत फाउंडेशन ने किया निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन Posted: 14 Jun 2022 07:48 AM PDT आयुष्मान भारत फाउंडेशन ने किया निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजनजितेन्द्र कुमार सिन्हा, आयुष्मान भारत फाउंडेशन ने सीतामढ़ी में रक्तदान दिवस के अवसर पर निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर और रक्तदान का आयोजन मंगलवार को आयोजित किया। इसकी जानकारी आयुष्मान भारत फाउंडेशन के चिकित्सा सचिव डॉ आर के गुप्ता ने दी। उन्होंने बताया कि चिकित्सकों में Dermatologist and Bariatric Physician आर के गुप्ता, Dental surgeon डॉ पी सी झा, Physician डॉ फहद अली खान और Eye Specialist डॉ अजय क़ुमार उपस्थित थे और लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं दी l डॉ गुप्ता मुख्य अतिथि के रूप में लोगों को सम्बोधित करते हुए कहा कि सभी लोगों को समय- समय पर रक्तदान करते रहना चाहिए। रक्तदान करने से किसी तरह का कोई बीमारी नहीं होता है बल्कि शरीर में ताजा रक्त बनता है। ऐसे भी चिकित्सक वैसे लोगों का ही रक्त लेते हैं जो रक्तदान करने के लिए पूर्णतः स्वस्थ्य रहते हैं। उन्होंने बताया कि शिविर में लगभग २०० से अधिक लोगों के स्वास्थ्य की जांच किया गया और आवश्यकता अनुसार निःशुल्क दवा वितरित दी गई l हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 14 Jun 2022 07:41 AM PDT
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| बंगाल के आगजनी प्रभावित इलाकों में अर्धसैनिकों को बुलाया जाना चाहिए: सुवेंदु अधिकारी Posted: 14 Jun 2022 07:38 AM PDT बंगाल के आगजनी प्रभावित इलाकों में अर्धसैनिकों को बुलाया जाना चाहिए: सुवेंदु अधिकारी कोलकाता। नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी के विरोध के नाम पर लूट और आगजनी की घटनाओं को रोकने में ममता बनर्जी सरकार निष्क्रिय है। उन्होंने कहा कि हिंसा को रोकने में राज्य पुलिस की मदद के लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को बुलाया जाना चाहिए। सुवेंदु अधिकारी ने छह निलंबित विधायकों के साथ विधानसभा कक्ष के प्रवेश द्वार पर धरना दिया। उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि राज्य के हालात को देखते हुए मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, गृह सचिव और शीर्ष नौकरशाहों की उच्च स्तरीय आपात बैठक बुलाई जानी चाहिए। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि हम शांतिप्रिय लोग हैं। उपद्रवी तत्वों से सख्ती से निपटना चाहिए। नौकरशाही को सक्रिय रूप से कार्य करना चाहिए और किसी राजनीतिक पार्टी या उसके नेताओं के इशारे पर काम नहीं करना चाहिए, बल्कि निष्पक्ष होकर अपना काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि तीन जिलों के समस्याग्रस्त इलाकों में शांति स्थापित करने के लिए पुलिस के साथ अर्धसैनिक बलों के जवानों की तैनाती की जानी चाहिए। जब अधिकारी से पूछा गया कि क्या स्थिति पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक होगी, तो उन्होंने कहा कि यह (तृणमूल कांग्रेस) सरकार विपक्ष को समायोजित करने में भरोसा नहीं करती। इसने विरोध के स्वर को दबाने के लिए अलोकतांत्रिक तरीके से नेता प्रतिपक्ष सहित हमारे सात विधायकों को निलंबित कर दिया है। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| अमरनाथ यात्रा से पहले जम्मू में रचा जा रहा दंगे कराने का षड्यंत्र Posted: 14 Jun 2022 07:36 AM PDT अमरनाथ यात्रा से पहले जम्मू में रचा जा रहा दंगे कराने का षड्यंत्रजम्मू। कश्मीर में आतंक की कमर टूटते देख पाकिस्तान अब जम्मू संभाग में आतंक का बड़ा 'खेल खेलने' की तैयारियों में है। दरअसल अमरनाथ यात्रा से पूर्व जम्मू संभाग में धर्म के नाम पर नफरत का जहर घोलने का षड्यंत्र रचा गया है ताकि यदि हिंसक भड़के तो यात्रा संचालन में बाधा आए। वहीं पांच दिन पहले नफरतभरी बयानबाजी करेन पर भद्रवाह और किश्तवाड़ में कर्फ्यू जारी है। दोनों जगहों पर सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की अफवाहें तेजी से फैलाई जा रही हैं। जम्मू पुलिस ने कुछ दिनों में कई संदिग्ध लोगों को पकड़ा था। इनमें से कुछ के मोबाइल फोन की जांच करने पर पता चला कि इंटरनेट मीडिया पर पाकिस्तानी हैंडलर की तरफ से उन्हें जम्मू में धर्म के नाम पर दंगे करवाने के फरमान जारी किए थे। इस काम के एवज में मोटी रकम देने का लालच भी किया। इसके साथ ही, पाकिस्तान में बैठे आतंकी संगठनों के आकाओं की तरफ से ओवरग्राउंड वर्कर्स (ओजीडब्ल्यू) को निर्देश दिया है कि वे हिंसा भड़काने में मदद करें। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| हरियाणा में आम आदमी पार्टी की नई सियासी तैयारी Posted: 14 Jun 2022 07:35 AM PDT हरियाणा में आम आदमी पार्टी की नई सियासी तैयारीचंडीगढ़। आम आदमी पार्टी (आप) हरियाणा में नई सियासी पारी की तैयारी में है और इसके लिए वह स्घ्थानीय निकाय चुनाव को रास्ता व आधार बनाना चाहती है। इसी कारण हरियाणा के शहरी निकाय चुनाव में जीत के लिए आम आदमी पार्टी जोर आजमाइश में लगी हुई है। कांग्रेस स्घ्थानीय निकाय चुनाव पार्टी सिंबल पर चुनाव नहीं लड़ रही है, जबकि भाजपा व जजपा शहरी निकाय चुनाव मिलकर लड़ रहे हैं। भाजपा, जजपा और कांग्रेस जहां राज्यसभा चुनाव की गतिविधियों में व्यस्त थे, वहीं आम आदमी पार्टी चुनाव प्रचार करने में जुटी हुई है। भाजपा-जजपा और इनेलो से पहले ही आप ने निकाय चुनावों के लिए स्टार प्रचारकों की सूची जारी कर दी है। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| बाहुबली विधायक अनंत सिंह को एके-47 और ग्रेनेड मामले में कोर्ट ने दोषी ठहराया Posted: 14 Jun 2022 07:31 AM PDT बाहुबली विधायक अनंत सिंह को एके-47 और ग्रेनेड मामले में कोर्ट ने दोषी ठहरायापटना। राष्ट्रीय जनता दल के बाहुबली विधायक अनंत सिंह बुरी तरह फंस गए हैं। पटना स्थित विशेष एमपी-एमएलए न्यायालय ने विधायक के पैतृक घर से प्रतिबंधित हथियार एके-47 और ग्रेनेड की बरामदगी के मामले में उन्हें दोषी माना है। इस मामले में कोर्ट ने विधायक के एक करीबी सुनील राम को भी दोषी माना है। कोर्ट ने विधायक की ओर से दिए गए सभी तर्कों को खारिज कर दिया है। अनंत सिंह पटना जिले के मोकामा विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से राष्घ्ट्रीय जनता दल के विधायक हैं। वह फिलहाल जेल में हैं। उनके खिलाफ आपराधिक मामलों की लंबी फेहरिश्त है। आखिरी बार अनंत सिंह को उनके घर से प्रतघ्बिंधित अत्याधुनिक हथियार एके-47 और ग्रेनेड की बरामदगी के मामले में गिरफ्तार किया गया था। आज इस मामले में न्यायालय ने उन्हें दोषी ठहरा दिया है। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| भारत की छवि बिगाड़ने की साजिश विफल Posted: 14 Jun 2022 07:29 AM PDT भारत की छवि बिगाड़ने की साजिश विफल(डॉ. दिलीप अग्निहोत्री-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)
इसमें कोई दो राय नहीं कि मुस्लिम देशों में भारत की छवि बिगाड़ने का षड्यंत्र बेनकाब हो रहा है। सच्चाई सामने आ रही है। भारत की वर्तमान सरकार सबका साथ सबका विकास और सबका विश्वास की भावना से कार्य कर रही है। भारत में अल्पसंख्यक वर्ग को सर्वाधिक अधिकार प्राप्त है। दुनिया का कोई भी देश इस विषय पर भारत की बराबरी नहीं कर सकता लेकिन कुछ तत्व ऐसे हैं जो भाजपा की संवैधानिक सरकार को बर्दाश्त करने में असमर्थ है। ये लोग सरकार को बदनाम करने के लिए सभी तरह के तरीके अपनाते है। इनकी हरकते से अंततः भारत की छवि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है लेकिन कुछ दिनों में ही असलियत सामने आ जाती है। नरेंद्र मोदी के प्रधानमन्त्री बनने के फौरन बाद असहिष्णुता का आरोप लगाते हुए अभियान शुरू किया गया था। वामपंथ से प्रेरित लोगों ने अपने को सम्मान के लायक नहीं समझा था।वह सम्मान वापस कर रहे थे। नागरिकता संशोधन कानून और कृषि कानून पर फिर झूट का सहारा लेकर अभियान चलाया गया।इसको दुनिया में सुनियोजित तरीके से प्रसारित किया गया। ताजा प्रकरण में भी दुष्प्रचार किया गया। आल्ट न्यूज के शरारती फैक्ट चेकर ने नूपुर शर्मा के प्रसंग से कटे अधूरे बयान को विश्व भर में प्रचारित कर किया लेकिन इनका दांव अब उल्टा पड़ने लगा है। अनेक मुस्लिम देश भारतीय प्रदर्शनकारियों को अपनी सीमा से खदेड़ रहे है। इसी दौरान ईरान के विदेश मंत्री भारत पहुँचे। ईरान ने उक्त प्रकरण पर दिया गया अपना बयान वापस ले लिया ।यह साजिश करने वाले लोगों के लिए तमाचा है। उनकी हरकत से दुनिया में अप्रिय चर्चा शुरू हो सकती थी। इससे इस्लामी देशों में ही शरारती भारतीय तत्वों के प्रति नाराजगी बढ़ रही है। जाहिर है कि पूरी साजिश दुनिया के सामने आ रही है। नूपुर के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे भारतीय कामगारों से नाराज कुवैत सरकार ने इन प्रदर्शनकारी एशियाइयों को गिरफ्तार करके वापस उनके देशों में भेजने का निर्णय लिया है। ईरान के विदेश मंत्री हुसैन अमीर अब्दुल्लाहियन भारत पहुंचे। उन्होंने सच्चाई को करीब से देखा। नमाज के बाद हुए हिंसक प्रदर्शन को देखा। इस्लामी देशों में यह नजारा नहीं रहता है। भारत के मुसलमानों को पूरा अधिकार प्राप्त है। ईरान के विदेश मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की। मोदी ने भारत और ईरान के बीच लंबे समय से चली आ रही सभ्यता और सांस्कृतिक संबंधों को गर्मजोशी से याद किया। इससे पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री के साथ द्विपक्षीय संबंधों पर व्यापक चर्चा की। व्यापार, संपर्क, स्वास्थ्य और लोगों से लोगों के बीच संबंधों सहित हमारे द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा की गयी। दोनों नेताओं ने इस दौरान संयुक्त व्यापक कार्य योजना अफगानिस्तान और यूक्रेन सहित वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान प्रदान किया। साथ ही उनकी मौजूदगी में नागरिक और वाणिज्यिक मामलों में पारस्परिक कानूनी सहायता पर एक समझौते पर हस्ताक्षर हुए। नरेंद्र मोदी ने भारत और ईरान के सम्बन्धों को शुरू से महत्व दिया।वह जानते है कि अंतरराष्ट्रीय संबंधो का मसला बहुत पेचीदा होता है। कई बार परस्पर शत्रु देशों के साथ भी रिश्ते सुधारने की चुनौती रहती है। राष्ट्रीय हितों के लिए यह चुनौती भी स्वीकार करनी होती है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दिशा में मिसाल कायम की है। पिछले कार्यकाल में वह मध्यपूर्व यात्रा पर गए थे। इसके बाद ईरान के तत्कालीन राष्ट्रपति भारत की यात्रा पर आए। कुछ और पीछे लौटें तो नरेंद्र मोदी इस्राइल गए थे। उसके बाद इस्राइली प्रधानमंत्री भारत आये थे। दोनों देश एक दूसरे के साथ सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए थे। इतना ही नहीं इस्राइल ने चीन और पाकिस्तान के विरुद्ध भारत का साथ देने का वादा किया था। ईरान और इस्राइल एक दूसरे को फूटी आंख देखना नहीं चाहते, फिर भी नरेंद्र मोदी की कूटनीतिक कुशलता के चलते इस्राइल, फलस्तीन, ईरान और अन्य अरब देश भारत से बेहतर रिश्ते के हिमायती हुए है। नरेंद्र मोदी को फलस्तीन ने अपना सर्वोच्च सम्मान दिया था। गाजापट्टी की यात्रा के दौरान इस्राइल ने उनकी सुरक्षा में सहयोग दिया। जिस समय ईरानी राष्ट्रपति भारत मे थे, उस समय भी इस्राइल और ईरान के तनाव था। कई सुन्नी मुल्क ईरान से नाराज रहते है लेकिन भारत के इन सबसे संबन्ध सुधर रहे है। ईरान और भारत के बीच पाकिस्तान का भी समीकरण है। भौगोलिक रूप से ईरान और पाकिस्तान की जमीन मिली हुई है लेकिन चाबहार परियोजना में पाकिस्तान को शामिल नहीं किया गया था क्योंकि पाकिस्तान के जुड़ने से आतंकवादियों की आमद भी हो जाती। इससे इस परियोजना को बहुत नुकसान होता। तब इस पर कार्य पूरा करना भी मुश्किल हो जाता। भारत-ईरान में आतंकवाद के खिलाफ साझा रणनीति बनाने और युद्ध प्रभावित अफगानिस्तान में सामरिक हितों के अनुरूप कार्य करने पर भी सहमति बनी है। इसके अलावा दोहरे कराधान से बचाव, राजकोषीय चोरी पर रोकथाम, एक दशक पुरानी प्रत्यर्पण सन्धि की पुष्टि, राजनयिक पासपोर्टधारकों को वीजा छूट आदि पर परस्पर सहयोग है। दोनों देश विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने को उत्सुक है। ईरान अपने विशाल तेल और गैस संसाधनों को भारत के साथ साझा भी करना चाहता है। चाबहार बन्दरगाह ईरान, अफगानिस्तान ही नहीं मध्य एशिया और योरोप तक भारत के साथ व्यापार में वृद्धि करने वाला है। ईरान की तरफ से जारी बयान में यह दावा किया गया है कि ईरान की तरफ पैगंबर मोहम्मद साहब को लेकर नकारात्मक माहौल बनाने का मुद्दा उठाने पर भारत की तरफ से आश्वासन मिला है कि भारत सरकार पैगंबर साहब का पूरा सम्मान करती है। जिन लोगों ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की है, उनके खिलाफ ऐसी कार्रवाई की जाएगी जो दूसरों के लिए सीख हो। ईरान ने यह भी बताया है कि विदेश मंत्री ने भारत की धार्मिक सद्भाव की परंपरा की तारीफ की है लेकिन यह भी कहा कि जो लोग इसके खिलाफ काम कर रहे हैं उन पर कार्रवाई की जा रही है। ईरान के विदेशी मंत्री अमीर अब्दुल्लाहियन ने भी कहा कि भारत और ईरान ने एक बैंकिंग तंत्र स्थापित करने की जरूरत पर चर्चा की है। उन्होंने साथ ही कहा कि दोनों देशों ने रुपये या वस्तु विनिमय प्रणाली के जरिये व्यापार लेनदेन को निपटाने की संभावनाओं को लेकर भी एक 'सर्वेक्षण' किया है।अब्दुल्लाहियन ने कहा भारत और ईरान ने चाबहार बंदरगाह में जल्द निवेश तेज करने पर भी सहमति व्यक्त की है। इस बंदरगाह को भारत की मदद से तैयार किया जा रहा है।उन्होंने 'वर्ल्ड ट्रेड सेंटर' की तरफ से यहां आयोजित एक कार्यक्रम में कहा, ''हमने, कल भारतीय उच्चाधिकारियों तथा विदेश मंत्री के साथ एक बैंकिंग तंत्र स्थापित करने की आवश्यकता पर चर्चा की।'' उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने रुपये या अन्य वस्तु विनिमय समेत स्थानीय मुद्रा में व्यापार की संभावना को लेकर एक 'सर्वेक्षण' किया है। अब्दुल्लाहियन भारत की तीन दिन की यात्रा पर थे। उन्होंने देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में उद्योग के प्रतिनिधियों को भी संबोधित किया। उन्होंने ने कहा कि भारत के साथ आर्थिक और व्यापारिक पहलुओं पर विस्तृत और दूरदर्शी विचार-विमर्श हुआ और दोनों देशों के बीच व्यापार सदियों पुराना है। हमारे खबरों को शेयर करना न 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| Posted: 14 Jun 2022 07:26 AM PDT महाराष्ट्र में हीरो बने आशीष(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा) महाराष्ट्र में जब भाजपा देवेन्द्र फडणवीस को तहखाने से निकालकर लायी थी, तब पार्टी के दिग्गज हैरान रह गये थे। फडणवीस ने पूरे पांच साल तक सरकार चलायी और उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि राज्य में भाजपा की भूमिका पहले शिवसेना के छोटे भाई के रूप में हुआ करती थी लेकिन देवेन्द्र फडणवीस ने भाजपा को बड़ा भाई साबित कर दिया। इस बार के विधानसभा चुनाव में इसीलिए शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे ने भाजपा से किनारा करके कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर सरकार बनायी क्योंकि उन्हें आभास हो गया था कि अब भाजपा महाराष्ट्र में पूरी तरह से अपना दखल कायम कर लेगी। भाजपा सरकार नहीं बना पायी लेकिन हाईकमान ने देवेन्द्र फडणवीस को प्राथमिकता पर ही रखा। याद कीजिए जब उद्धव ठाकरे सरकार बनाने जा रहे थे तभी एनसीपी के नेता अजित पवार को डिप्टी सीएम बनाकर फडणवीस ने अपनी तिकड़म की राजनीति का नमूना दिखाया था। उस समय शरद पवार जैसे चतुर और अनुभवी नेता ने ही देवेन्द्र फडणवीस का खेल सफल नहीं होने दिया था। अब राज्य से राज्यसभा के चुनाव में फडणवीस ने एक ऐसा मोहरा चला जिसके सामने महाविकास अधाड़ी गठबंधन फेल हो गया। इस मोहरे को आशीष कुलकर्णी के नाम से जाना गया। आशीष कुलकर्णी कभी शिवसेना के संस्थापक बाला साहब ठाकरे के बहुत नजदीक हुआ करते थे लेकिन जब उद्धव ठाकरे ने पार्टी की बागडोर संभाली तो कुलकर्णी को उन्होंने किनारे कर दिया था। इस प्रकार आशीष कुलकर्णी ने दो दशक पहले शिवसेना छोड़ दी थी लेकिन उन्हें अचानक सभी लोग जानने लगे हैं। आशीष कुलकर्णी की ही रणनीति के चलते भाजपा समर्थित धनंजय महादिक राज्यसभा में पहुंच गये हैं। महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की राज्यसभा की तीसरी सीट पर जीत ने सत्तारूढ़ महा विकास अघाड़ी (एमवीए) गठबंधन को चैंका दिया है। भाजपा की इस जीत के सूत्रधार देवेंद्र फडणवीस की कोर टीम के सदस्य आशीष कुलकर्णी हैं। वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी की महाराष्ट्र इकाई के उपाध्यक्ष आशीष कुलकर्णी ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत शिवसेना से की थी। वह 2003 में कांग्रेस में शामिल हुए। यहां कई साल रहने के बाद कुछ समय पहले भाजपा में शामिल हुए। शिवसेना में उन्होंने सुभाष देसाई के अधीन काम किया, जो आजकल महाराष्ट्र सरकार में उद्योग मंत्री के पद पर आसीन हैं। उन्हें शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे का विश्वसनीय सहयोगी माना जाता था। भाजपा के धनंजय महादिक ने शिवसेना के संजय पवार को राज्यसभा की छठी सीट के लिए हुए मतदान में मात दी। इस मामले में भाजपा के एक नेता का कहना था कि चुनाव के लिए हमारी रणनीति बहुत आसान थी। हमने केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री अनिल बोंडे को सबसे ज्यादा 48 वोट दिए। उस नेता ने आगे कहा, हमारे सभी विधायकों ने दूसरी वरीयता महादिक को दी, जो तीसरे उम्मीदवार थे। यह सब आशीष कुलकर्णी की योजना के मुताबिक हुआ, जिसे भाजपा पर्यवेक्षक अश्विनी वैष्णव और नेता प्रतिपक्ष देवेंद्र फडणवीस ने अंतिम रूप दिया था। गोयल और बोंडे को 48-48 वोट मिले थे, जो 4800 अंकों में तब्दील हो गए। दूसरी वरीयता के वोट महादिक को हस्तांतरित कर दिए गए। कुल मिलाकर भाजपा को 106 विधायकों के वोट मिले। इसके अलावा 8 निर्दलीय और 9 अन्य विधायकों के वोट भी इसमें जुड़े, जिसकी वजह से धनंजय महादिक के कुल 4156 अंक हो गए। भाजपा नेता का कहना है कि, आशीष कुलकर्णी की इस रणनीति को देवेंद्र फडणवीस ने और तराश दिया। भाजपा के वरिष्ठों का कहना है कि फडणवीस और वैष्णव के अलावा इस योजना के बारे में किसी को पता नहीं था। फडणवीस ने ही निर्दलीय विधायकों और दूसरे छोटे दलों को अपने साथ मिलाने का काम किया। आशीष कुलकर्णी ने करीब 2 दशक पहले शिवसेना को तब छोड़ने का फैसला किया, जब उद्धव ठाकरे ने पार्टी की बागडोर संभालते ही, उन्हें किनारे कर दिया गया था। उनके नारायण राणे के साथ भी करीबी संबंध थे, जिन्होंने खुद भी उद्धव के साथ काम करने में मुश्किल आती देख कांग्रेस की ओर रुख कर लिया था। आशीष कुलकर्णी को कांग्रेस ने 2009 के लोकसभा चुनाव में 6 संसदीय सीटें जिताने की जिम्मेदारी सौंपी थी। उन्होंने 6 सीटों पर पार्टी को जीत दिलाई। उसके बाद उन्हें विधानसभा चुनाव की जिम्मेदारी सौंपी गई। आशीष ने अपनी रणनीति के दम पर एक बार फिर कांग्रेस को जीत दिलाई। उनके कौशल को देखते हुए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उन्हें अपने तत्कालीन राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल के साथ काम करने के लिए दिल्ली बुला लिया था। आशीष कुलकर्णी ने 2017 में कांग्रेस छोड़ दी थी। कुछ वक्त तक वह राजनीति से दूर रहे, फिर उन्होंने भाजपा में शामिल होने का निर्णय लिया। महाराष्ट्र राज्यसभा चुनाव का परिणाम इस बार धड़कने बढ़ाने वाला रहा। इस चुनाव में बीजेपी और शिवसेना के 25 सालों के गठबंधन के बाद हो रहे पहले मुकाबले में बीजेपी ने बाजी मार ली है। बीजेपी ने महाराष्ट्र में सत्ताधारी महाविकास अघाड़ी को तगड़ा झटका देते हुए राज्यसभा की तीन सीटों पर कब्जा जमा लिया। वहीं राज्य की छह सीटों में महाविकास अघाड़ी को तीन पर संतोष करना पड़ा। दरअसल छठी सीट पर बीजेपी की शिवसेना के साथ सीधी लड़ाई थी, मगर बीजेपी के धनंजय महादिक ने संजय पवार को पटखनी दे दी।राज्यसभा चुनाव में शिवसेना के संजय पवार बनाम बीजेपी के धनंजय महादिक के नतीजों में बीजेपी के पक्ष में 10 ऐसे वोट पड़े जिनकी उसे भी उम्मीद नहीं थी। इस प्रकार 11 जून को आए राज्यसभा चुनाव के नतीजों में महादिक को जीत के लिए 41 वोट चाहिए थे और महादिक ने यह आंकड़ा छू लिया। महादिक के अलावा बीजेपी से पीयूष गोयल और अनिल बोंदे राज्यसभा पहुंचे हैं। वहीं कांग्रेस के इमरान प्रतापगढ़ी, एनसीपी के प्रफुल्ल पटेल और शिवसेना के संजय राउत भी चुनाव जीते। दरअसल शिवसेना और बीजेपी 25 साल तक गठबंधन में साथ रहे थे। मौजूदा समय में सत्ता में न रहने के बाद बीजेपी का राज्यसभा चुनाव में एक सीट पर बढ़त बनाना मायने रखता है। इस जीत के बाद बीजेपी को उद्धव सरकार पर निशाना साधने का मौका मिल गया है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री ने जीत के बाद जो बात कही उससे साफ जाहिर भी हो जाता है। केंद्रीय मंत्री और महाराष्ट्र से बीजेपी के राज्यसभा उम्मीदवार पीयूष गोयल ने जीत के बाद कहा कि जिस कुशलता के साथ पूरी पार्टी एकजुट होकर लगी थी, उन्होंने दिखा दिया कि भाजपा को ही प्रदेश में लोगों ने चुना था। फिर एक बार जनता को मौका मिलेगा और जनता भाजपा के साथ खड़ी है। दरअसल राज्यसभा चुनाव के लिए 10 जून को जब मतदान से शुरू हो गया था, तब मतदान से पहले बीजेपी नेता देवेंद्र फडणवीस, एनसीपी नेता व गृहमंत्री दिलीप वलसे पाटील और खाद्य और आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल सबसे पहले पहुंचने वाले नेताओं में से थे। मतदान के दौरान नेताओं के बयानबाजी के तीर चलाए। महा विकास आघाडी (एमवीए) के मंत्रियों और विधायकों ने जहां अपनी जीत का दावा किया था, वहीं बीजेपी ने कहा चमत्कार होगा। बीजेपी के नेताओं में गजब का विश्वास दिखाई दिया था। नतीजे घोषित हुए तो सचमुच चमत्कार हो गया। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| पाकिस्तानी पत्रकार असद खराल भारत के खिलाफ चला रहे प्रोपेगेंडा Posted: 14 Jun 2022 07:23 AM PDT पाकिस्तानी पत्रकार असद खराल भारत के खिलाफ चला रहे प्रोपेगेंडाइस्लामाबाद। पाकिस्तान के एक पत्रकार असद खराल भारत के खिलाफ फर्जी प्रचार और भ्रामक खबरें फैला रहे हैं। डिजिटल फोरेंसिक रिसर्च एंड एनालिसिस सेंटर द्वारा एक तथ्य जांच में यह पता चला कि खराल अपने एजेंडे को पूरा करने और भारत को बदनाम करने के लिए डिजिटल माध्यम ट्विटर का उपयोग कर रहे हैं। खराल ने हिंदू आतंकवादियों को जिम्मेदार ठहराते हुए माब लिंचिंग का एक कथित वीडियो साझा किया। इसके अलावा उन्होंने अपनी पोस्ट को कैप्शन दिया, भारत में चरमपंथी हिंदू आतंकवादियों का एक और अमानवीय कृत्य। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और तथाकथित मानवाधिकार कार्यकर्ताओं द्वारा इन अत्याचारों का पर चुप्पी साध ली गई है। उनके ट्वीट को तीन हजार से ज्यादा बार ट्विीट किया गया। इसी तरह, एक अन्य सोशल मीडिया अकाउंट, जिसने अपना स्थान कुवैत दिखाया है, इसी तरह के दावे के साथ एक वीडियो साझा किया। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 14 Jun 2022 07:22 AM PDT रूस व यूक्रेन के बीच जंग जारीलंदन। रूस समर्थित अलगवावादी ने दावा किया कि यूक्रेन के दोनेत्सक इलाके में यूक्रेनी सेना की ओर से किए गए हमले में पांच की मौत हो गई और 22 जख्मी हैं। रूसी न्यूज एजेंसी ने बाद में रिपोर्ट किया कि यूक्रेन की ओर से एक हवाई हमला दोनेत्सक स्थित मैटरनिटी अस्पताल पर हुआ जिसके बाद वहां आग लग गई। इससे वहां अफरातफरी मच गई। मरीजों को बेसमेंट में भेजा जाने लगा। रायटर्स के अनुसार इन रिपोर्टों पर की व की ओर से किसी तरह की प्रतिक्रिया नहीं आई है। रूस के तास न्यूज एजेंसी ने बताया कि अलगाववादी अधिकारियों ने बताया कि पांच लोगों की मौत हो गई। दोनेत्सक के अलगावादी नेता डेनिस पुशिलिन ने रूसी सेना से गुजारिश की है कि वो यूक्रेन के हमले का जवाब दे। यूक्रेन शुरू से ही दोनेत्सक और लुहांस्क पर किसी तरह के हमले से इंकार किया है। बता दें कि यहां साल 2014 से ही अलगाववादियों ने कब्जा कर रखा है। वहीं रूस ने भी इस बात से इंकार किया है कि वह किसी ऐसे इलाकों पर निशाना नहीं लगाता है जहां जनता रहती है। उल्लेखनीय है कि 24 फरवरी से यूक्रेन में शुरू रूसी हमले के दौरान हजारों मौतें हुईं हैं और यूक्रेन के कई शहर बर्बाद हो गए हैं। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| अमेरिका के स्वास्थ्य सचिव को हुआ कोरोना, एक महीने में दूसरी बार हुए संक्रमित Posted: 14 Jun 2022 07:20 AM PDT अमेरिका के स्वास्थ्य सचिव को हुआ कोरोना, एक महीने में दूसरी बार हुए संक्रमितवाशिंगटन। अमेरिकी स्वास्थ्य और मानव सेवा सचिव, जेवियर बेसेरा कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए। वह एक महीने में दूसरी बार कोविड पाजिटिव पाए गए हैं। एचएचएस की प्रवक्ता सारा लोवेनहाइम के अनुसार, बेसेरा ने कैलिफोर्निया के सैक्रामेंटो एंटीजन परीक्षण किया, जिसका रिजल्ट पाजिटिव आया। लोवेनहाइम ने एक बयान में कहा, बेसेरा फुल वैक्सीनेटेड हैं। वे हल्के लक्षणों का अनुभव कर रहे हैं। वे आइसोलेशन में काम करते हुए एचएचएस सचिव के रूप में अपने कर्तव्यों का पालन करना जारी रखेंगे। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| ताइवान की जंग में गेम चेंजर साबित होगा चीन का ड्रोन मदरशिप Posted: 14 Jun 2022 07:17 AM PDT ताइवान की जंग में गेम चेंजर साबित होगा चीन का ड्रोन मदरशिपबीजिंग। चीन ने कुछ दिनों पहले एक ड्रोन मदरशिप लॉन्च किया है। चीन ने आधिकारिक तौर पर इसे सिर्फ एक रिसर्च करने वाला जहाज बताया है, लेकिन कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ये आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित एक जहाज है जो दुश्मन पर अपने आप हमला कर सकता है। इस पर कोई भी व्यक्ति सवार नहीं होगा। चीन के ड्रोन मदरशिप के सामने आने के बाद ये माना जा रहा है कि चीन प्रशांत महासागर में अपनी ताकत बढ़ाना चाहता है। चीन ने पिछले महीने झू हाई यून ड्रोन मदरशिप की लॉन्चिंग दिखाई। ये ड्रोन मदरशिप हवाई ड्रोन और पानी के ड्रोन को एआई के जरिए लॉन्च कर सकता है। जानकारी के मुताबिक 89 मीटर लंबा ड्रोन इस साल के अंत तक शुरू हो जाएगा। इसकी रफ्तार 18 नॉट लगभग 34 किमी प्रति घंटे होगी। चीन इस मदरशिप के जरिए अपनी सर्विलांस की क्षमता बढ़ाना चाहता है और विशाल प्रशांत महासागर पर अपना प्रभाव स्थापित करना चाहता है। जहाज को बनाने वाली प्रयोगशाला के निदेशक चेन डैक ने कहा कि जहास समुद्री विज्ञान को समझने में एक बेहतर उपकरण साबित होगा। ये समुद्री आपदा रोकथाम, समुद्र का सटीक मानचित्रण, समुद्री पर्यावरण निगरानी और समुद्री खोज और बचाव में महत्वपूर्ण होगा। दुनिया भर की सेनाएं ड्रोन को युद्ध में इस्तेमाल करना चाहती हैं, ताकि सैनिकों की जान खतरे में न आए। अमेरिकी सेना के लेफ्टिनेंट कर्नल पॉल लुशेंको ने चीन के ड्रोन मदरशिप पर कहा कि ये शायद ये दुनिया भर की नौसेना में सबसे पहले बनाया गया है। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 14 Jun 2022 07:06 AM PDT
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| दंगाइयों का ढो रहे हैं भार किस लिए ? Posted: 14 Jun 2022 06:27 AM PDT
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| ग्रहों का घर के वास्तु पर कितना असर, किस हिस्से में कौन सी चीज रखना शुभ Posted: 14 Jun 2022 06:21 AM PDT 【ज्योतिषाचार्य पं. नरेन्द्र कृष्ण शास्त्री】 =========================== {वास्तुशास्त्र में दिशाओं का महत्व} ✍🏻किसी भी वास्तु में नौ ग्रहों का आधिपत्य होता है एवं वास्तु में इनका स्थान निश्चित कोण पर होता है, इसी प्रकार प्रत्येक दिशा के देवता भी अलग-अलग होते हैं। घर में इनके संतुलित होने पर सुख-समृद्धि रहती है वहीं इनके स्वभाव के विपरीत निर्माण करने पर वास्तु दोष उत्पन्न हो जाता है जिससे अनेकों प्रकार की परेशानियों का जीवन में सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में आइए जानते हैं ज्योतिषाचार्य पं. नरेन्द्र कृष्ण शास्त्री से सभी नौ ग्रहों का घर के वास्तु पर कैसा असर होता है। सूर्य ग्रह:- पूर्व दिशा के स्वामी सूर्य ग्रह एवं देवता इंद्र है। सूर्य स्वास्थ्य, ऐश्वर्य और तेजस्व प्रदान करने वाला ग्रह है यदि घर की पूर्व दिशा दोषमुक्त रहे तो उस भवन का स्वामी और उसमें रहने वाले सदस्य महत्वकांक्षी, सत्वगुणों से युक्त और उनके चेहरे पर तेज होता है। ऐसे में भवन स्वामी को खूब मान-सम्मान मिलता है। इसलिए वास्तु में पूर्व दिशा को खुला छोड़ने की सलाह दी जाती है ताकि अंनत गुणधर्म वाली सूर्य की रश्मियां भवन में प्रवेश कर सकें। कभी भी इस दिशा को भारी व बंद नहीं करें। शुक्र ग्रह:- आचार्य पं. नरेन्द्र कृष्ण शास्त्री के अनुसार शुक्र आग्नेय कोण के अधिपति ग्रह एवं इस दिशा के देवता अग्निदेव हैं। शुक्र ग्रह ऐश्वर्य के स्वामी हैं। जिस भवन में दक्षिण-पूर्व या आग्नेय कोण शुभगुणों से युक्त और दोष रहित होता है ऐसे वास्तु की आंतरिक ऊर्जा स्वस्थ्य और शुक्र के गुणधर्म वाली होती है। इस दिशा में रसोई, बिजली के सामान एवं विद्युत केंद्र होना वास्तु के अनुसार शुभ माने गए हैं। मंगल ग्रह:- दक्षिण दिशा मंगल ग्रह के अधीन होती है एवं इस दिशा के देवता यम हैं। मंगल ग्रह समस्त प्रकार का साहस एवं धन लाभ प्रदान करने वाला होता है। मंगल ग्रह निडर, साहसी और दिलेर होता है और यह युद्ध, लड़ाई, क्रोध का अधिपति भी है। दक्षिणदिशा विधि, न्याय, मुकदमेबाजी, आराम, जीवन और मृत्यु से संबंधित है। इसलिए इस दिशा में शयन कक्ष तथा भण्डार गृह रखना चाहिए। राहु ग्रह:- दक्षिण पश्चिम दिशा या नैऋत्य कोण का स्वामी राहु ग्रह है एवं इस दिशा की देवी आसुरी शक्ति वाली हैं। इस दिशा में तमस तत्व सर्वाधिक होता है इसलिए वास्तु में इस दिशा को सबसे अधिक भारी रखना शुभ होता है। घर में भूलकर भी इस दिशा को हल्की एवं खुली नहीं रखें। इस दिशा में बैडरूम, ऑफिस, बाथरूम या स्टोर रूम बनाना लाभदायक रहता है। शनि ग्रह:- ज्योतिषाचार्य पं. नरेन्द्र कृष्ण शास्त्री के अनुसार पश्चिम दिशा लाभ एवं प्रसन्नता की दिशा है। इस दिशा के ग्रह शनि एवं देवता वरुण देव है। शनि ग्रह भाग्य, कर्म, यश तथा पौरुष संबंधी कार्यों का कारक होता है। इस दिशा को हमेशा स्वस्थ्य रखना चाहिए। इस दिशा में ड्राइंगरूम, बेडरूम, पुस्तकालय होना शुभ होता है। चन्द्रमा ग्रह:- वायव्य दिशा का स्वामी चन्द्रमा है। यह शांत चित्त एवं भाग्य का अधिपति ग्रह है। यह मन, चित्तवृत्ति, शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य, संपत्ति व माता का कारक है। वहीं वास्तु में वायव्य कोण वायुदेव का स्थान है। वायुदेव हमें शक्ति, प्राण, स्वास्थ्य प्रदान करते है। सामाजिक जीवन एवं व्यापार पर इसका विशेष प्रभाव होता है। इस दिशा में भोजनकक्ष, अतिथि गृह, विवाह योग्य कन्याओं का कमरा एवं बिना टॉयलेट के बाथरूम होना शुभ होता है। बुध ग्रह:- यह ग्रह उत्तर दिशा के स्वामी एवं इस दिशा के देवता कुबेरदेव होते हैं। बुध वाक्चातुर्य एवं विद्धता का प्रतिनिधि ग्रह है। जिस घर में उत्तर दिशा शुभ होती है वहां के लोग अत्यंत बुद्धिमान, विद्वान, लेखन एवं कविता में रूचि रखने वाले होते हैं। बुध सम्पन्नता और करियर का प्रतिनिधि ग्रह है इसलिए इस दिशा में अध्ययन कक्ष, तिजोरी और पुस्तकालय शुभ माने गए हैं। गुरु ग्रह:- ज्योतिषाचार्य पं. नरेन्द्र कृष्ण शास्त्री के अनुसार यह उत्तर-पूर्व या ईशान कोण के स्वामी ग्रह है एवं विष्णुदेव इस दिशा के देवता हैं, गुरु, ईश्वरीय तेज एवं आध्यात्मिक वृत्ति का प्रदाता ग्रह है। बौद्धिक विकास एवं बौद्धिक शांति के लिए तथा ईश्वर की कृपा पाने के लिए यह दिशा स्वस्थ्य रखनी चाहिए। इस दिशा में पूजा स्थल एवं योग कक्ष बनाना अत्यंत शुभकारी है। "ज्योतिष शास्त्र, वास्तुशास्त्र, वैदिक अनुष्ठान व समस्त धार्मिक कार्यो के लिए संपर्क करें:-✍🏻ज्योतिषाचार्य:- पं. नरेन्द्र कृष्ण शास्त्री, संपर्क सूत्र:- 9993652408, हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| आतंकवाद ने अपनी बाहें फैलायी हैं Posted: 14 Jun 2022 06:14 AM PDT
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| प्रथम ‘हिन्दू राष्ट्र संसद’ में आदर्श मंदिर प्रबंधन पाठ्यक्रम सिखाने की सूचना ! Posted: 14 Jun 2022 05:39 AM PDT प्रथम 'हिन्दू राष्ट्र संसद' में आदर्श मंदिर प्रबंधन पाठ्यक्रम सिखाने की सूचना ! प्राचीन काल में अंगकोर वाट, हम्पी, आदि स्थानों पर भव्य मंदिर निर्माण करनेवाले राजा-महाराजाओं ने उनका उत्तम प्रबंधन किया था । इन मंदिरों के माध्यम से गोशाला, अन्नछत्र, धर्मशाला, शिक्षाकेंद्र चलाकर समाज को मूल्यवान सहायता की जाती थी । इसके कारण ही हिन्दू समाज मंदिरों से जुडा होता था; परंतु अब मंदिरों का इतना व्यापारीकरण हो गया है, कि वे (शॉपिंग) 'मॉल' बनने लगे हैं तथा तीर्थक्षेत्रों को विकास के नामपर पर्यटनस्थल बनाया जा रहा है । यह रोकना आवश्यक है । इसलिए मंदिरों के न्यासियों तथा पुरोहितों को मंदिरों का आदर्श प्रबंधन करना चाहिए । यह साध्य करने के लिए 'मंदिरों का आदर्श प्रबंधन' (दि टेंपल मैनेजमेंट) पाठ्यक्रम प्रारंभ करने की महत्त्वपूर्ण सूचना प्रथम हिन्दू राष्ट्र संसद में दी गई । दशम अखिल भारतीय हिन्दू राष्ट्र अधिवेशन के द्वितीय दिन 'मंदिरों का सुप्रबंधन' इस विषय पर हिन्दू राष्ट्र संसद में विविध मंदिरों के न्यासी, भक्त, अधिवक्ता और हिन्दुत्वनिष्ठों ने अभ्यासपूर्ण विचार व्यक्त किए । इस संसद में सभापति के रूप में ओडिशा के श्री. अनिल धीर, उपसभापति के रूप में हिन्दू जनजागृति समिति के धर्मप्रचारक पू. नीलेश सिंगबाळ तथा सचिव के रूप में हिन्दू जनजागृति समिति के श्री. आनंद जाखोटिया ने कामकाज देखा । अढाई घंटे चली इस प्रदीर्घ चर्चा के पश्चात प्रथम हिन्दू राष्ट्र संसद में 'हिन्दुओं के मंदिर सरकार के नियंत्रण से मुक्त कर भक्तों के नियंत्रण में दिए जाएं', 'मंदिर के कामकाज के लिए केवल हिन्दुओं की ही नियुक्ति की जाए, 'मंदिर परिसर में मद्य, मांस प्रतिबंधित हो तथा अन्य धर्मियों का प्रसार प्रतिबंधित हो, आदि प्रस्ताव पारित किए गए । 'जयतु जयतु हिन्दुराष्ट्रम की घोषणाओं के साथ उपस्थित धर्मनिष्ठों ने इसका अनुमोदन किया । प्रारंभ में विषय प्रस्तुत करते हुए उपसभापति पू. सिंगबाळ ने कहा, ''आज सरकारीकृत प्रत्येक मंदिर की देवनिधि का दुरुपयोग होता हुआ दिखाई दे रहा है । उसका उचित विनियोग होने के लिए मंदिरों का सुप्रबंधन होना महत्त्वपूर्ण है ।'' अमरावती के 'रामप्रिया फाउंडेशन' की अध्यक्षा रामप्रियाश्री (माई) अवघड ने कहा, ''भारत देश का इतिहास युवकों तक पहुंचाना आवश्यक है । उसके लिए बच्चों तथा युवकों को मंदिरों से जोडने की आवश्यकता है ।'' सनातन संस्था के धर्मप्रचारक सद्गुरु नंदकुमार जाधव ने मत प्रस्तुत किया कि, गोवा में मंदिरों ने जिस प्रकार आदर्श वस्त्रसंहिता लागू की है, उसी प्रकार देशभर के मंदिरों में भी वह लागू करना आवश्यक है । इस समय अमलनेर (जलगांव) के मंगलग्रह सेवा संस्था के जनसंपर्क अधिकारी श्री. शरद कुलकर्णी, चांदूरबाजार (अमरावती) के 'गजानन महाराज सेवा समिति' के ह.भ.प. मदन तिरमारे, नांदेड के 'श्री संत पाचलेगावकर मुक्तेश्वर मंदिर के अध्यक्ष श्री. सुधाकर टाक ने बताया कि, वे मंदिरों का प्रबंधन किस प्रकार करते हैं । इस अधिवेशन का सीधा प्रसारण यू-ट्यूब चैनल HinduJagruti द्वारा भी किया जा रहा है । हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 14 Jun 2022 05:24 AM PDT 15 जून 2022, बुधवार का दैनिक पंचांग एवं राशिफल - सभी १२ राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन ? क्या है आप की राशि में विशेष ? जाने प्रशिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. प्रेम सागर पाण्डेय से | |
| Posted: 14 Jun 2022 05:10 AM PDT अरब की हिंदू देवियांसपना सिंह अल लात, अल उज्जा और मनात, इस्लाम से पहले की तीन हिन्दू देवियां हैं, त्रिदेवियाँ , बीच में माँ दुर्गा और दाएं बाएं लक्ष्मी और सरस्वती! इस्लाम पूर्व के अरब के पारम्परिक धर्म में एक देवी का नाम था।अल लात वह मक्का की तीन मुख्य देवियों में से एक थी। इस्लाम-पूर्व के अरब अल-लात को ईश्वर की तीन बेटियों में से एक मानते थे अन्य दो मनात और अल-उज़्ज़ा थीं आधुनिक मक्का प्रान्त की सरवात पहाड़ियों के प्रसिद्ध ताइफ़ शहर के एक मंदिर में अल-लात की एक बड़ी मूर्ती थी जहाँ श्रद्धालु जन बड़ी संख्या में आया करते थे। ६३० ईसवी में मुहम्मद ने अपने एक सिपहसालार अबू सुफ़यान बिन हर्ब को मंदिर और मूर्ती दोनों नष्ट करने का आदेश दिया। उस समय ताइफ़ के नागरिक अल-लात से जुड़े हुए थे लेकिन उनके शहर पर मुस्लिम फ़ौजों के लगातार हमले जारी थे। हज़रत मुहम्मद ने ताइफ़ के साथ बातचीत करने के लिए राज़ी होने के लिए यह मांग रखी कि मंदिर और मूर्ती तोड़ी जाएँ। इस्लाम अनुयायियों द्वारा जिनको "शैतान की आयतें" कहा जाता है उनमें वर्णित त्रिदेवियों में से प्रमुख थी सिंह पर सवार युद्धरत युद्ध की देवी । इस्लामपूर्व अरबों द्वारा पूजित अल लात का'बा में शिवलिंग के अलावा कुल ३६० मूर्तियाँ थीं जिनमें तीन देवियाँ अल्लाह के बाद सर्वप्रमुख थीं । अल−लात का मुख्य केन्द्र मक्का के पास "अल टा−इफ" नाम का नगर है जो मुहम्मद से पहले ही मक्का के बाद सबसे प्रमुख तीर्थ था, "टा−इफ" का अर्थ ही है "तीर्थयात्री" । मुहम्मद ने वहाँ अल−लात की मूर्ति को नष्ट कराया,और मक्का में भी पैगम्बर मुहम्मद ने स्वयं इन मूर्तियों को तुड़वाया था हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| विहिप की मार्गदर्शक बैठक में कई अहम फैसले Posted: 13 Jun 2022 08:14 AM PDT विहिप की मार्गदर्शक बैठक में कई अहम फैसलेहरिद्वार। उत्तराखंड के हरिद्वार में आयोजित विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मार्ग दर्शक मंडल की दो दिनी सम्मेलन में बच्चों को संस्कारवान बनाने के साथ ही धर्मांतरण के खिलाफ ठोस कानून बनाने, ज्ञानवापी की तरह मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाए गए स्थलों को भी वापस लेने का संकल्प दोहराया गया। हरिद्वार के निष्काम सेवा सदन में आयोजित विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की दो दिनी मीटिंग में देशभर से 178 साधु संतों और 34 साध्वी धर्माचार्यों ने भाग लिया। दो दिन तक चले मंथन के बाद चार बिंदुओं पर एक राय बनाई गई। बैठक के दौरान समाज में पारिवारिक आत्मीयता, बच्चों को संस्कारित कर देश के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। देश में धर्मांतरण पर तत्काल रोक लगाने के लिए कठोर कानून बनाने की वकालत की गई। देश में व्यापक विचार विमर्श के बाद समान नागरिक कानून को लागू किया जाए। देश के सभी मठ मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से बाहर किया जाए। सम्मेलन में धर्मांतरण को लेकर देशभर से आए साधु संतों ने अपनी चिंता जताई। कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय षडयंत्र के तहत धर्मांतरण को बढ़ावा दिया जा रहा है। ज्ञानवापी का मुददा भी मीटिंग में छाया रहा। कहा गया कि विदेशी फंडिग के जरिए ज्ञानवापी केस में रोड़े अटकाने के प्रयास हो रहे हैं। संतों ने कहा कि धर्मातरण रोकने को कठोर कानून बनाने के साथ ही मंदिर तोड़कर बनाई गई मस्जिदों को भी वापस लिया जाना चाहिए। ज्ञानवापी केस में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे अखिल भारतीय संत समाज के राष्ट्रीय महामंत्री जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि चार जुलाई से ज्ञानवापी मामले में सुनवाई शुरू होने जा रही है। उन्होंने कहा कि कुछ तत्व इसमें रोड़ा डालने चाहते हैं। देवबंद में हुई जमायते उलेमा हिंद की मीटिंग में एक तरह से कोर्ट को ही खुली चुनौती दे दी गई। उन्होंने साधु संतों से अपील की कि उन्हें इस मामले में पूरी एकजुटता के साथ आगे आना चाहिए। काशी से विहिप के सम्मेलन में भाग लेने हरिद्वार आए जितेंद्रानंद सरस्वती ने पिछले दिनों हुई धर्म संसद को एक अंतर्राष्ट्रीय षडयंत्र करार देते हुए कहा कि धर्म संसद करने वाले लोगों के एकाउंट की जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि संत समाज का चोला ओढ़कर कुछ असामाजिक तत्व संत समाज की छवि खराब कर रहे हैं। यही नहीं एक षडयंत्र के तहत अनाप शनाप बोलकर कोर्ट के जरिए साधु संतों के हाथ पैरों में बेड़ियां डालने की कोशिशें हो रही हैं। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| थाने में कांग्रेस नेताओं से मिलने पहुंची प्रियंका Posted: 13 Jun 2022 08:12 AM PDT थाने में कांग्रेस नेताओं से मिलने पहुंची प्रियंकानई दिल्ली। नेशनल हेराल्ड केस से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में आज कांग्रेस नेता राहुल गांधी प्रवर्तन निदेशालय के समक्ष पेश हुए हैं। ईडी दफ्तर में उनसे पूछताछ चल रही है। इससे पहले राहुल पेशी के लिए कांग्रेस मुख्यालय से ईडी दफ्तर के लिए पैदल ही निकले। उनके साथ प्रियंका गांधी भी थीं। साथ में कांग्रेस के कई बड़े नेता, सांसद, पदाधिकारी और सैकड़ों कार्यकर्ता चल रहे थे। दिल्ली पुलिस ने कानून व्यवस्था का हवाला देकर राहुल और प्रियंका को पैदल ईडी दफ्तर जाने से रोक दिया। इसके बाद पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष गाड़ी से प्रवर्तन निदेशालय के हेडक्वार्टर पहुंचे। इस बीच सेंट्रल दिल्ली में विरोध प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। अधीर रंजन चैधरी, केसी वेणुगोपाल, हरीश रावत को तुगलक रोड थाने ले जाया गया। दीपेंद्र हुड्डा, अशोक गहलोत को फतेहपुर थाने ले जाया गया। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारी पूछताछ कर रहे हैं। नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग केस में तलब हुए राहुल से एसोसिएटेड जर्नल्स लमिटेड के अधिग्रहण को लेकर सवाल किए जा रहे हैं। ईडी ने इस मामले में कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को भी 23 जून को तलब किया है। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता Posted: 13 Jun 2022 08:08 AM PDT रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता(डॉ. दिलीप अग्निहोत्री-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा) चंद इस्लामिक मुल्क एक विवादित बयान पर ही उलझे रहे, इस दौरान भारत की कई देशों के साथ रणनीतिक और रक्षा साझेदारी आगे बढ़ी है। उल्लेखनीय यह कि इसमें ईरान, अमेरिका और इजराइल भी शामिल है। ईरान के विदेश मंत्री, इस्राइल के रक्षा मंत्री और अमेरिका के एक सैन्य कमांडर भारत की यात्रा पर आए थे। इसके बाद भारत के रक्षामंत्री वियतनाम यात्रा पर गए थे। इसके साथ ही रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत अभियान भी आगे बढ़ाया गया। भारत ने एक सौ साठ किलोमीटर रेंज की स्वदेशी एस्ट्रा एमके टू मिसाइल का परीक्षण करने का निर्णय लिया। मिसाइल का पहला लाइव लॉन्च भारतीय वायु सेना के फाइटर जेट सुखोई-30 एमकेआई से किया जाएगा। हवा से हवा में मार करने वाली रूसी और फ्रांसीसी मिसाइलों पर दशकों की भारतीय निर्भरता को समाप्त करने के लिहाज से यह परीक्षण काफी अहम माना जा रहा है। एमके-2 का परीक्षण भारत को हवा से हवा में युद्ध की श्रेष्ठता को वापस लाएगा, क्योंकि डीआरडीओ ने मिसाइल की रेंज बढ़ाने के लिए एक दोहरी-पल्स रॉकेट मोटर विकसित की है। रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायु सेना और भारतीय नौसेना के लिए एस्ट्रा एमके-1 बियॉन्ड विजुअल रेंज एयर टू एयर मिसाइल सिस्टम और सम्बंधित उपकरण खरीदने के लिए भारत डायनेमिक्स लिमिटेड के साथ उनतीस करोड़ रुपये के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं। इसी तरह भारतीय नौसेना भी अपने मिग 29 के लड़ाकू विमानों में मिसाइल को एकीकृत करेगी। अभी तक इस श्रेणी की मिसाइल को स्वदेशी रूप से बनाने की तकनीक उपलब्ध नहीं थी लेकिन अब डीआरडीओ ने वायु सेना के समन्वय से तकनीक विकसित की है। यह भारतीय सशस्त्र बलों को मिलने वाली पहली स्वदेशी मिसाइल है, क्योंकि भारत अब तक हवा से हवा में मार करने वाली रूसी और फ्रेंच मिसाइलों पर निर्भर रहा है। ब्रह्मोस मिसाइल का निर्माण डिफेंस कॉरिडोर के लखनऊ नोड में शुरू होने वाला है। ब्रह्मोस एयरोस्पेस ने लखनऊ इकाई से एक वर्ष में करीब सौ मिसाइलों को वितरित करने की योजना बनाई है। अनुसंधान एवं विकास संगठन लखनऊ में ब्रह्मोस विनिर्माण केंद्र स्थापित कर रहा ब्रह्मोस एयरोस्पेस दुनिया की सबसे अच्छी सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल प्रणाली का निर्माण करेगा। इसे ब्रह्मोस-एनजी के रूप में नामित किया गया है। इसकी खासियत है कि इसे पनडुब्बी, जहाज, विमान या जमीन से लॉन्च किया जा सकता है। विनिर्माण केंद्र एक आधुनिक, अत्याधुनिक सुविधा होगी। इसी क्रम में इजरायल के रक्षा मंत्री बेंजामिन गैंट्ज भारत पहुँचे थे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ उनकी वार्ता हुई। इसमें रक्षा सहयोग, वैश्विक और क्षेत्रीय परिदृश्य से संबंधित प्रमुख मुद्दों पर चर्चा हुई। द्विपक्षीय रणनीतिक और रक्षा सहयोग मजबूत करने पर दोनों देशों के बीच व्यापक सहमति बनी है। राजनाथ सिंह ने बताया कि हम इजरायल के साथ अपनी सामरिक साझेदारी को बहुत महत्व देते हैं। दोनों देशों ने एक विजन स्टेटमेंट अपनाया है।जो भविष्य में रक्षा सहयोग का मार्ग प्रशस्त करेगा। द्विपक्षीय रणनीतिक और रक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर दोनों देशों के बीच व्यापक सहमति है। इजरायल रक्षा मंत्री की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से भी मुलाकात हुई। इजरायली मंत्री गैंट्ज के साथ चीफ ऑफ स्टाफ मायन इजरायली, अंतरराष्ट्रीय रक्षा सहयोग निदेशालय के प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल यायर कुलासो, नीति और पीओएल-एमआईएल ब्यूरो के निदेशक डॉर शालोम और सैन्य सचिव बीजी याकी डॉल्फ भारत दौरे पर आये थे। यात्रा के दौरान दोनों पक्ष इजरायल और भारत के बीच तीस साल के राजनयिक और रक्षा संबंधों को चिह्नित करते हुए एक समझौते पर हस्ताक्षर हुए। दोनों देश राजनयिक संबंधों की स्थापना के तीस साल पूरे होने का जश्न मना रहे हैं। इस बीच भारत और इस्राइल ने रक्षा संबंध बढ़ाए हैं। भारतीय जहाजों की नियमित सद्भावना यात्राओं के हिस्से के रूप में पश्चिमी बेड़े के तीन भारतीय नौसैनिक जहाजों ने पाँच वर्ष पहले आइफा में बंदरगाह का दौरा किया था। इसके बाद नौसेना प्रशिक्षण जहाज आईएनएस तरंगिनी ने भी हाइफा का दौरा किया था। बहुपक्षीय वायु सेना अभ्यास 'ब्लू फ्लैग' गत वर्ष इजरायल में आयोजित किया गया जिसमें भारत ने भी भाग लिया था। भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन और इजरायल के रक्षा अनुसंधान एवं विकास निदेशालय ने द्विपक्षीय नवाचार समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। पिछले साल भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने अक्टूबर में, तत्कालीन भारतीय सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने नवंबर में और वायु सेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया ने अगस्त में इजरायल का दौरा किया था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी इजरायल का दौरा किया था, जिसमें संबंधों को रणनीतिक साझेदारी में अपग्रेड किया गया था। इसके बाद इजरायल के तत्कालीन प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भारत यात्रा पर आये थे। इसके बाद ईरान के विदेश मंत्री हुसैन अमीर-अब्दुल्लाहियन ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की। मोदी ने भारत और ईरान के बीच लंबे समय से चली आ रही सभ्यता और सांस्कृतिक संबंधों को गर्मजोशी से याद किया। इससे पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री के साथ द्विपक्षीय संबंधों पर व्यापक चर्चा की। व्यापार, संपर्क, स्वास्थ्य और लोगों से लोगों के बीच संबंधों सहित हमारे द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा की गयी। दोनों नेताओं ने इस दौरान संयुक्त व्यापक कार्य योजना अफगानिस्तान और यूक्रेन सहित वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान प्रदान किया। साथ ही उनकी मौजूदगी में नागरिक और वाणिज्यिक मामलों में पारस्परिक कानूनी सहायता पर एक समझौते पर हस्ताक्षर हुए। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हांग हा शिपयार्ड में भारत की ओर से वियतनाम को बारह हाई-स्पीड गार्ड बोट सौंपी। रक्षा मंत्री ने कहा कि यह समारोह भारत सरकार द्वारा सौ मिलियन अमेरिकी डॉलर की रक्षा लाइन ऑफ क्रेडिट के तहत बारह स्पीड गार्ड बोट बनाने की परियोजना के सफल समापन का प्रतीक है। यह समारोह भारत और वियतनाम के बीच कई और सहकारी रक्षा परियोजनाओं का अग्रदूत होगा। शुरुआती पांच नावों का निर्माण भारत में एलएंडटी शिपयार्ड में किया गया था और शेष सात वियतनाम के हांग हा शिपयार्ड में बनाई गई हैं। यह परियोजना मेक इन इंडिया- मेक फॉर द वर्ल्ड मिशन का उदाहरण है। राजनाथ सिंह ने हनोई में वियतनाम के राष्ट्रपति गुयेन जुआन फुक से मुलाकात की। हनोई में वियतनाम के राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय का दौरा किया। उन्होंने अपने वियतनामी समकक्ष जनरल फान वान जियांग के साथ द्विपक्षीय चर्चा की। भारत-वियतनाम रक्षा साझेदारी पर संयुक्त 'विजन स्टेटमेंट' पर हस्ताक्षर किए गए। रक्षा मंत्री हनोई में एक ऐसे पगोडा में पहुंचे जहां पर भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने साठ साल पहले वियतनाम के प्रेसिडेंट हो ची मिन्ह के साथ एक बोधि वृक्ष लगाया था। उसी वृक्ष के नीचे खड़े हो कर उन्होंने बौद्ध भिक्षुकों से बातचीत की। वियतनाम के साथ हमारी साझा बौद्ध विरासत हमारे आधुनिक संबंधों की एक मजबूत कड़ी है। रणनीतिक साझेदारी के क्रम में अमेरिकी आर्मी पैसिफिक के कमांडिंग जनरल चार्ल्स ए फ्लिन भारत यात्रा पर आए। उन्हांेने भारतीय वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वीआर चैधरी से नई दिल्ली में मुलाकात की। दोनों के बीच आपसी हित के मुद्दों और द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की गई। अमेरिकी जनरल ने पूर्वी लद्दाख के पास चीनी सेना की गतिविधियों को आंख खोलने वाली और कुछ बुनियादी ढांचों को खतरनाक बताया है। उन्होंने भारत के खिलाफ हिमालयी सीमा पर चीनी गतिविधियों को अस्थिर करने वाला बुरा बर्ताव बताया। पश्चिमी थिएटर कमांड में तैयार किया जा रहा बुनियादी ढांचा खतरनाक है। चीन का विस्तारवादी रास्ता क्षेत्र में शांति के लिए मददगार नहीं है। चीन के भ्रष्ट व्यवहारों का विरोध करने लिए हमें एक साथ तेजी से काम करना चाहिए। भारत और अमेरिका इसी साल अक्टूबर में हिमालय पर करीब के हजार फीट की ऊंचाई पर प्रशिक्षण मिशन आयोजित करने के लिए तैयार हैं। यह अभ्यास उच्च-ऊंचाई वाले युद्ध के क्षेत्र में अत्यंत उच्च-स्तरीय संयुक्त संचालन के लिए होते हैं। जाहिर है कि भारत की रक्षा तैयारी और अनेक देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी प्रभावी रूप में आगे बढ़ रहीं है। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 13 Jun 2022 08:06 AM PDT फिर चला गहलोत का जादू(रमेश सर्राफ धमोरा-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा) राजस्थान में संपन्न हुए राज्यसभा के चुनाव में एक बार फिर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की जादूगरी देखने को मिली है। गहलोत ने भाजपा के मंसूबों पर पानी फेरते हुए आसानी से कांग्रेस पार्टी के तीनों प्रत्याशियों रणदीप सुरजेवाला, मुकुल वासनिक व प्रमोद तिवारी को जितवाकर कांग्रेस आलाकमान की नजरों में अपनी राजनीति का लोहा मनवाया है। इस बार के राज्यसभा चुनाव में गहलोत ने कांग्रेस के 108 विधायकों के साथ ही निर्दलीय व अन्य दलों के सभी विधायकों को एकजुट कर यह दिखा दिया है कि राजस्थान की राजनीति में उनके सामने भाजपा की कोई बिसात नहीं है। राजस्थान में राज्यसभा के लिए चार सीटों के चुनाव हुए हैं। यह चारों सीट पूर्व में भाजपा के पास थीं। मगर संख्या बल के हिसाब से इस बार कांग्रेस के तीन व भाजपा का एक प्रत्याशी चुनाव जीत सकता था लेकिन भाजपा ने हरियाणा से राज्यसभा सदस्य व मीडिया घराने के मालिक सुभाष चंद्रा को अपने समर्थन से निर्दलीय प्रत्याशी बनाकर मैदान में उतार दिया था। इस कारण प्रदेश में चुनाव की नौबत आई। 2016 में सुभाष चंद्रा ने हरियाणा में जिस तरह जोड़-तोड़ कर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीता था। ऐसे में उनको बहम था कि राजस्थान में भी वो अपनी पुरानी कलाकारी दोहराएंगे। मगर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सामने सुभाष चंद्रा व उनके भाजपा समर्थकों की एक भी नहीं चली। वह मात्र 30 वोट ही प्राप्त कर सकें। सुभाष चंद्रा द्वारा भाजपा के समर्थन से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन करते ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सतर्क हो गए थे। उन्होंने अपने समर्थक विधायकों को एकजुट करना शुरू कर दिया। मुख्यमंत्री गहलोत ने कांग्रेस समर्थित अन्य सभी विधायकों को उदयपुर के एक रिसोर्ट में ले जाकर रखा ताकि सुभाष चंद्रा उनके समर्थक विधायकों में सेंध नहीं लगा सके। भाजपा से कांग्रेस में आए छ विधायकों, भारतीय ट्राइबल पार्टी के दो विधायकों व कुछ निर्दलीय विधायकों को सरकार से शिकायतें थीं। उन सभी विधायकों की शिकायतों को भी मुख्यमंत्री गहलोत ने समय रहते सुनकर उनका निराकरण करवाया। साथ ही गहलोत ने भविष्य में उनकी और सभी बातों का निराकरण करवाने का भरोसा दिलवाया। उसके बाद सभी विधायक कांग्रेस के कैंप में उदयपुर पहुंच गए। इतना ही नहीं मुख्यमंत्री गहलोत स्वयं भी उदयपुर पहुंचकर विधायकों से लगातार सलाह मशविरा करते रहे व चुनावी रणनीति बनाते रहे। चुनावी नतीजों में कांग्रेस के रणदीप सुरजेवाला 43 वोट, मुकुल वासनिक 42 वोट व प्रमोद तिवारी 41 वोट लेकर विजेता रहे। भाजपा के घनश्याम तिवारी को 43 वोट मिले और वह भी चुनाव जीत गए। निर्दलीय सुभाष चंद्रा को मात्र 30 वोट ही मिल सके और वह चुनाव हार गए। इतना ही नहीं गहलोत ने भाजपा खेमे में सेंध लगाते हुए धौलपुर से भाजपा की विधायक शीलारानी कुशवाहा का वोट भी कांग्रेस प्रत्याशी प्रमोद तिवारी को दिलवाकर क्रास वोटिंग करवा दी। इससे भाजपा खेमे में हड़कंप मचा हुआ है। भाजपा ने शीला रानी कुशवाहा को पार्टी से निलंबित भी कर दिया है। हालांकि कांग्रेस का एक वोट भी गलती से निरस्त हो गया था। इस बार राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस आलाकमान ने तीनों ही प्रत्याशी राजस्थान से बाहर के भेज दिए थे जिसका कुछ विधायकों ने विरोध भी किया था। मगर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सभी विधायकों को समझा कर विरोध को शांत करवाया। मुख्यमंत्री गहलोत ने कांग्रेस के उम्मीदवारों के पक्ष में 200 में से 126 वोट डलवाने में सफल रहे। जिनमें कांग्रेस के 108 वोट, निर्दलीय 13 वोट, माकपा के दो वोट, भारतीय ट्राइबल पार्टी के दो वोट, राष्ट्रीय लोक दल का एक वोट व एक भाजपा विधायक सीमारानी कुशवाहा का वोट पाने में सफल रहे। यदि कांग्रेस का एक वोट निरस्त नहीं होता तो कांग्रेसी प्रत्याशियों के पक्ष में 127 वोट पड़ते। राज्यसभा चुनाव में राजस्थान एकमात्र ऐसा प्रदेश है जहां से कांग्रेस के सबसे ज्यादा तीन सदस्य राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं। राजस्थान से निर्वाचित हुए तीनों ही सदस्य मुकुल वासनिक, रणदीप सुरजेवाला, प्रमोद तिवारी कांग्रेस में केंद्र की राजनीति करते हैं। मुकुल वासनिक कांग्रेस के महासचिव होने के साथ ही सोनिया गांधी के विश्वस्त लोगों में है। वह केंद्रीय चुनाव कमेटी के सचिव भी है। रणदीप सुरजेवाला कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव व मीडिया सेल के अध्यक्ष होने के साथ ही राहुल गांधी व संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल के विश्वासपात्र हैं। प्रमोद तिवारी उत्तर प्रदेश में पार्टी के बड़े ब्राह्मण चेहरा हैं। वह कई बार विधायक, मंत्री व पूर्व में राज्यसभा सदस्य भी रहे हैं। वह प्रियंका गांधी के निकट के लोगों में शामिल है। इस तरह से देखे तो राजस्थान से चुनाव जीतने वाले तीनों ही नेता कांग्रेस आलाकमान का हिस्सा है। इनकी जीत में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का बड़ा रोल है। ऐसे में कांग्रेस की राजनीति में यह तीनों ही नेता जरूरत पड़ने पर गहलोत के पैरोकार के रूप में काम करेंगे। इसका राजनीतिक रूप से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को लाभ मिलेगा। राज्यसभा चुनाव में तीन सीटें जितवाकर गहलोत ने कांग्रेस की राजनीति में अपना कद काफी बड़ा कर लिया है। ऐसे में उन्हें अगले दो साल तक शासन करने में किसी भी तरह की समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा। राज्यसभा चुनाव के माध्यम से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कांग्रेस के बागी नेता सचिन पायलट को भी किनारे कर देंगे। अब तक सचिन पायलट कुछ केंद्रीय नेताओं के समर्थन से ही गहलोत हटाओ अभियान चला रहे थे। मगर अब गहलोत ने बाजी पूरी तरह से पलट दी है। राजस्थान से कांग्रेस के 6 राज्य सभा सदस्य हैं जिनमें एक पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह है। कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल को भी गहलोत पिछली बार राज्यसभा में पहुंचा चुके हैं। वेणुगोपाल कांग्रेस की राजनीति में राहुल गांधी के नंबर वन सलाहकार हैं। केसी वेणुगोपाल के समर्थन से ही गहलोत ने सचिन पायलट की बगावत को फेल किया था। अब राज्यसभा चुनाव में अपनी जादूगरी दिखाकर गहलोत ने पार्टी में अपनी पकड़ और मजबूत कर ली है। कुछ दिनों पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने एक बयान दिया था कि राज्यसभा चुनाव के बाद वह अपने मंत्रिमंडल में एक बार फिर फेरबदल करेंगे। ऐसे में लगता है कि इस बार के फेरबदल में वह अपने कट्टर विरोधी सचिन पायलट गुट के मंत्रियों को भी मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखाकर अपने समर्थक कुछ और विधायकों को मंत्री बना सकते हैं। बहरहाल अभी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का जादू कांग्रेस आलाकमान के सिर चढ़कर बोल रहा है। कांग्रेस पार्टी लगातार भाजपा से चुनाव हारती जा रही है। ऐसे में राजस्थान के चुनावी नतीजों से कांग्रेस के गिरते ग्राफ को रोकने में मदद मिलेगी। राजस्थान की जीत के बाद मुख्यमंत्री गहलोत का मनोबल काफी बढ़ा है। चुनावी नतीजे आते ही उन्होंने घोषणा कर दी कि 2023 के विधानसभा चुनाव में भी वो भाजपा विरोधी दलों को एकजुट कर चुनाव लड़ेंगे और भाजपा को करारी शिकस्त देकर प्रदेश में फिर से कांग्रेस की सरकार बनायंेगे। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से 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| Posted: 13 Jun 2022 08:04 AM PDT हिंसाग्रस्त असहमति(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा) लोकतंत्र एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें सभी को अपनी-अपनी बात कहने का अधिकार होता है। कोई किसी बात से सहमत है तो दूसरा उससे असहमत भी हो सकता है। यह वैचारिक द्वन्द्व हमारे देश में लम्बे समय से चला आ रहा है। कुछ लोग थे जो ईश्वर में विश्वास रखते थे और उसको प्रसन्न करने के लिए व्रत-पूजा भी करते थे। उनको आस्तिक कहा जाता था। इसके विपरीत कुछ लोग ईश्वर में विश्वास नहीं रखते थे, उनको नास्तिक कहा जाता था। आस्तिकों में भी जो विष्णु के उपासक थे, वे वैष्णव कहलाए और जिन्होंने भगवान शंकर को अपना आराध्य माना, उन्हंे शैव कहा गया। शैव ओर वैष्णव एक-दूसरे से मतभेद तो रखते थे लेकिन मूलरूप से दोनों आस्तिक थे। आज जब हमारा देश दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, तब असहमति हिंसाग्रस्त हो गयी है। असहमति और विरोध संविधान के दायरे में ही होना चाहिए। देश में 2014 में जब से नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनी है, तब से असहमति लगातार बढ़ती जा रही है। पिछले एक साल के दौरान तो असहमति ने पत्थरों और आगजनी का ही रास्ता नहीं अपनाया बल्कि दिल्ली की जहां गीरपुरी और यूपी के कानपुर में गोली और खंजर भी चलाए गये। इस हिंसाग्रस्त असहमति को समाप्त करना जरूरी है। केन्द्र सरकार ने भी इसके लिए सख्त कदम उठाए हैं और राज्य सरकारें, विशेष रूप से उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार का बुलडोजर अपने फुल फार्म में आ गया है। हमने माना कि भाजपा की विचारधारा से कुछ लोग असहमत हैं लेकिन उनका विरोध संविधान के दायरे में होना चाहिए। हिन्दू धर्म को अपना आदर्श मानने वाली भाजपा ने अपने धर्म के तीज-त्योहार को प्रोत्साहन दिया है। इसमें कोई बुराई भी नहीं है। उत्तर प्रदेश में ही भगवान राम और भगवान कृष्ण ने जन्म लिया। उनके जन्म स्थल पर कुछ खुशियां क्रमशः त्रेतायुग और द्वापर युग से चली आ रही हैं। त्रेतायुग में भगवान राम ने अयोध्या में राजा दशरथ के घर जन्म लिया। पौराणिक आख्यानों के अनुसार राजा दशरथ को चैथेपन अर्थात् लगभग 75 वर्ष के बाद चार बेटे मिले थे। बेटे के जन्म पर खुशी मनाना आज भी सामान्य बात है। कल्पना कीजिए कि राजा दशरथ को लगभग बुढ़ापे में चार बेटे मिले तो कितनी खुशी बनायी गयी होगी। समय की धुंध में बहुत कुछ धंुधला भी पड़ गया। राजा दशरथ के बेटे राम ने लंका के राजा रावण का विजय दशमी को वध किया था और कार्तिक कृष्ण पक्ष अमावस्या को 14 वर्ष का वनवास बिताकर अयोध्या लौटे थे। इस दिन अयोध्या के लोगों ने घर-घर दीप जलाकर दीपोत्सव मनाया। इस प्रकार भगवान राम के जन्म का दिन चैत्र शुक्ल पक्ष की नवमी और रावण वध का दिन अर्थात विजय दशमी और अयोध्या वापसी पर दीपावली का त्योहार विदेशी आक्रांताओं के अत्याचार के बावजूद जीवित रहे हैं। अब उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार में अयोध्या में ये सभी त्योहार भव्य स्तर पर मनाए जाते हैं। इसी तरह मथुरा में भगवान कृष्ण का जन्मदिन भाद्र कृष्ण पक्ष अष्टमी को मनाया जाता है। इसको भी योगी आदित्यनाथ की सरकार ने भव्य रूप दिया है। इससे असहमत होने का कोई कारण नहीं दिखता है क्योंकि योगी आदित्यनाथ की सरकार ने दूसरे धर्म-सम्प्रदाय के त्योहारों पर किसी प्रकार की बंदिश नहीं लगायी। पिछले दो साल में अन्तरराष्ट्रीय महामारी कोरोना के चलते सोशल डिस्टेन्स बनाने की जरूरत महसूस की गयी थी। इसलिए तीज-त्योहारों पर भी इसका प्रभाव पड़ा था। एक धर्म के नहीं बल्कि सभी धर्मों के त्योहार कोरोना गाइड लाइन के तहत ही मनाए गये। इसके बावजूद रामनवमी के अवसर पर देश के अलग-अलग हिस्सों में हिंसा क्यों भड़की? हाल ही में हनुमान जयंती के अवसर पर दिल्ली के जहांगीर पुरी में एक सम्प्रदाय विशेष के लोग नंगी तलवारें लेकर निकल आए। उन्होंने हिन्दू धर्म के लोगों की दुकानों को चुन-चुन कर जलाया। अभी 3 जून को जब देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कानपुर के एक गांव में डा. भीमराव आम्बेडकर की प्रतिमा का लोकार्पण कर रहे थे, तब कानपुर शहर की नयी सड़क पर फिर उसी समुदाय के लोग हाथों में नंगी तलवार लेकर निकल आए और स्थानीय लोगों के अनुसार धमकी दी कि तुम लोग यहां से भाग जाओ, वरना काट डालेंगे। संवाद और सहमति के मार्ग में हिंसा का स्थान ही नहीं है। इसलिए आज जो लोग अपनी असहमति जताने के लिए हिंसा का सहारा ले रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होना ही चाहिए। इसके साथ ही उनके कुछ समझदार लोगों के साथ संवाद का सिलसिला भी कायम रखना होगा। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में गत 10 जून को हिंसा भड़की थी। खेद की बात यह है कि जुमे का दिन मुसलमानों के लिए बहुत पवित्र होता है और उस दिन सभी लोग नमाज जरूर अदा करते हैं। ऐसे पवित्र दिन मुसलमानों का पत्थर फेंककर हिंसा करना बहुत ही निंदनीय है। ईश निंदा का मामला भी शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन से सुलझाया जा सकता था क्योंकि भाजपा के जिन दो नेताओं पर इसका आरोप लगा था, उन्हांेने माफी मांग ली थी। इस्लाम में कुर्बानी और जकात जैसी परम्पराएं सिर्फ दिखावे के लिए नहीं है, उनको अपनाना भी पड़ता है। जमात-उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना सुहैब कासमी ने बिल्कुल सही कहा है कि गत 10 जून को देश भर में जुमे की नमाज के बाद जिस तरह मुसलमान उत्तेजित होकर सड़कों पर निकले थे, उसके लिए एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदउद्दीन ओवैसी और जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी जैसे नेता भी जिम्मेदार हैं। कासमी कहते हैं कि इन नेताओं ने इस तरह के भड़काऊ भाषण दिये जिससे युवा गुमराह होकर सड़कों पर पत्थरबाजी करने लगे। जमात उलमा-ए-हिन्द के अध्यक्ष मौलाना सुहैब कासिम कहते हैं कि भाजपा की प्रवक्ता नूपुर शर्मा ने तो 15 दिन पहले टिप्पणी की थी, उस समय तो कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई थी। इसके बाद जब ओवैसी और मदनी जैसे कथित रहनुमाओं ने तकरीरें दीं और कहा 'मुसलमान अब चुप रहने वाला नहीं है, वो इसका जवाब देगा...। इसी के बाद पूरे देश में एक जैसे पोस्टर लगने लगे। इससे साफ है कि एक सुनियोजित साजिश के तहत प्रदर्शन और पत्थरबाजी हुई है। इसलिए योगी आदित्यनाथ ने प्रदर्शन में पत्थरबाजी कर रहे लोगों को चिह्नित कर उनके खिलाफ कार्रवाई की है। असहमति की इस हिंसा में जमीयत उलमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना हकीमुद्दीन कासमी जैसे लोग अब भी पलीता लगाने से बाज नहीं आ रहे हैं। हकीमुद्दीन कासमी कहते हैं कि अन्याय का विरोध करना मुसलमानों का लोकतांत्रिक अधिकार है। वे यह भी कहते हैं कि एकतरफा गिरफ्तारी, गोलाबारी और बुलडोजरों के इस्तेमाल के जरिए मुसलमानों को एक अधिकार से वंचित किया जाना लोकतांत्रिक सरकार के लिए शर्म की बात है। हकीमुद्दीन कासमी जी इसका जवाब भी दें कि विरोध प्रदर्शन में पुलिस और आम नागरिकों पर पत्थर फेंकना, सिर फोड़ना, आग लगाना, वाहन जलाना भी क्या किसी का लोकतांत्रिक अधिकार हो सकता है? आरएसएस से सम्बद्ध मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने तो यहां तक कह दिया कि हिंसा में शामिल सभी लोगों को इस्लाम से ही खारिज किया जाना चाहिए। इस्लाम हिंसा नहीं बल्कि मोहब्बत सिखता है। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
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