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Monday, June 27, 2022

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पंड्या की कप्तानी में जीत से शुरुआत:भारत ने पहले टी-20 में आयरलैंड को 7 विकेट से हराया

Posted: 26 Jun 2022 07:06 PM PDT

पंड्या की कप्तानी में जीत से शुरुआत:भारत ने पहले टी-20 में आयरलैंड को 7 विकेट से हराया

हार्दिक पंड्या ने इंटरनेशनल क्रिकेट में अपने कप्तानी करियर की शुरुआत जीत के साथ की है। टीम इंडिया ने शनिवार को आयरलैंड के खिलाफ पहले टी-20 मैच में 7 विकेट से जीत हासिल की। पंड्या खुद गेंद और बैट दोनों के साथ चमक बिखेरने में सफल रहे। उन्होंने आयरलैंड की पारी में 1 विकेट लिया और बाद में 11 गेंदों पर 24 रन भी बनाए।

बारिश के कारण यह मैच प्रति पारी 12-12 ओवर का कर दिया गया था। आयरलैंड ने टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए 4 विकेट खोकर 108 रन बनाए। हैरी टेक्टर ने सबसे ज्यादा 64 रन बनाए। जवाब में टीम इंडिया ने 9.2 ओवर में तीन विकेट खोकर टारगेट हासिल कर लिया। दीपक हुड्डा ने नाबाद 47 रन बनाए। ईशान किशन ने 26 रनों की पारी खेली।

यादगार नहीं बन पाया उमरान मलिक का डेब्यू

इस मैच में उमरान मलिक का देश के लिए खेलने का सपना पूरा हुआ, हालांकि उनके लिए यह मुकाबला यादगार नहीं बन पाया। टी-20 इंटरनेशनल में भारत के 98वें क्रिकेटर बने उमरान को सिर्फ 1 ओवर गेंदबाजी मिली। इसमें उन्होंने 14 रन लुटा दिए।

भुवी ने पहले ही ओवर में लिया विकेट
मैच में भुवनेश्वर कुमार ने भारत को जोरदार शुरुआत दिलाई। उन्होंने पहले ही ओवर में आयरलैंड के कप्तान एंड्र्यू बालबर्नी (0) को पवेलियन चलता कर दिया। पंड्या ने अगले ओवर में खतरनाक पॉल स्टर्लिंग (4) को आउट किया। आवेश खान ने गारेथ डेलनी का विकेट लिया। इसके बाद हैरी टेक्टर ने आयरलैंड की पारी को संभाला और टीम को सम्मानजक स्कोर तक पहुंचाया।

हालांकि, भारत के लिए यह स्कोर बेहद मामूली साबित हुआ और ईशान, हुड्डा और पंड्या की पारियों के दम पर टीम ने इसे आसानी से चेज कर लिया। दूसरी टी-20 मैच 28 जून को खेला जाएगा।

दोनों टीमों की प्लेइंग 11
भारतः ईशान किशन, ऋतुराज गायकवाड, दीपक हुड्डा, सूर्यकुमार यादव, हार्दिक पंड्या (कप्तान), दिनेश कार्तिक, अक्षर पटेल, भुवनेश्वर कुमार, आवेश खान उमरान मलिक और युजवेंद्र चहल।
आयरलैंडः पॉल स्टर्लिंग, एंड्र्यू बालबर्नी (कप्तान), गारेथ डेलनी, हैरी टेक्टर, लोर्कन टकर, एंडी मैकब्रायन, जॉर्ज डॉकरेल, मार्क एडेर, क्रेग यंग, कोनोर ओल्फेट और जोशुआ लिटिल।

चार साल बाद भारत की मेजबानी कर रहा है आयरलैंड
टीम इंडिया इस समय दुनिया की सबसे ज्यादा डिमांड वाली टीम है। हर क्रिकेट बोर्ड चाहता है कि वह भारतीय टीम की मेजबानी करे और एक सीरीज से इतनी कमाई कर ले जितनी वह आम तौर पर एक से दो साल में करता है। इसका नतीजा यह निकलता है कि आयरलैंड जैसे क्रिकेट के नवजातों को भारतीय सितारों की मेजबानी का सौभाग्य कई-कई सालों बाद मिलता है। टीम इंडिया 2018 के बाद पहली बार आयरलैंड गई है।

2018 में भारत ने वहां दो T20I खेले थे और दोनों में जीत हासिल की थी। उसके बाद से दोनों टीमों के बीच दुनिया के किसी भी कोने में किसी भी फॉर्मेट का कोई भी मैच नहीं हुआ है।

हरियाणा के पानीपत की ये पहलवान बेटी इंटरनेट मीडिया पर मचा रही धमाल, राजस्‍थान पुलिस की वर्दी में फोटो शेयर कर लिखा Dreams Come True

Posted: 26 Jun 2022 06:59 PM PDT

रियाणा के पानीपत की ये पहलवान बेटी इंटरनेट मीडिया पर मचा रही धमाल

हरियाणा के पहलवान नैना इन दिनों इंटरनेट मीडिया पर चर्चा में हैं। पुलिस की वर्दी में नैना कैनवाल का अंदाज लोगों को खूब भा रहा है। उन्‍होंने इंस्‍टाग्राम में राजस्‍थान पुलिस की वर्दी में फोटो शेयर करते हुए लिखा कि उनका वर्दी पहनने का सपना पूरा हुआ।

पानीपत के गांव सुताना वासी कुश्ती पहलवान नैना कैनवाल को राजस्थान सरकार ने खेल कोटा से सब इंस्पेक्टर भर्ती किया है। नैना ने मीडिया से फोन पर हुई बातचीत में बताया कि राजस्थान के जयपुर स्थित सीआईए में अपनी ड्यूटी ज्वाइन कर ली है। आज मेरा खाखी पहनने का सपना पुरा हुआ। मैं बहुत खुश हूं।

माता-पिता दोनों सरपंच रहे

नैना ने बताया कि मम्मी, पापा व भाई का सपना था कि खेल की बदौलत बेटी को अच्छी कामयाबी मिलेगी। हरियाणा के जिला पानीपत के गांव सुताना में किसान परिवार में पिता पूर्व सरपंच रामकरण व मां पूर्व सरपंच बाला देवी परिवार में नैना का जन्म हुआ। परिवार में एक भाई निखिल कैनवाल, विलायती भाभी, एक बहन नैना कैनवाल है। दोनों भाई बहन को पहलवानी का शौक है। पिता पूर्व सरपंच रामकरण को भी पहलवानी का शौक रहा। वह भी पहलवानी किया करते थे। रामकरण सन 2005 से गांव के सरपंच बने तथा 2010 में मां बाला देवी सरपंच रही हैं।

पिता का सपना था कि नामवर पहलवान बने बेटी नैना

नैना ने बचपन में स्कूल की पढ़ाई निडानी में शुरु की और ग्रेजुएशन किया। पहलवानी की शुरुआत निडानी में हुई शुरुआती पहलवानी के कुश्ती कोच सुभाष लोहाने ने नैना को कुश्ती के गुर सिखाए।

रोहतक में ले रहीं ट्रेनिंग

नैना कैनवाल ने बताया कि उसने निडानी में लगभग 3 साल तक 2010 से 2013 तक कुश्ती की प्रैक्टिस की। फिर बाद में नैना 2014-15 में निडानी में कुश्ती कोच कृष्ण से कुश्ती के गुर सीखने लगी। 2018 में नैना रोहतक आ गई और यहां कुश्ती की प्रैक्टिस करने लगी यहां कुश्ती के कोच मंदिप कुश्ती की प्रैक्टिस करा रहे हैं। यहां चौधरी सर छोटू राम स्टेडियम रोहतक में कुश्ती के गुर सीखने लगी। ऐसा कुश्ती का सिलसिला जारी रहा।

चोट की वजह से कुश्‍ती से दूर रहना पड़ा

कुश्ती के दाव पेच में नैना कैनवाल एक दो बार घायल भी हुई। जिसकी वजह से कुछ समय के लिए पेहलवानी से नैना को अलग हटना पड़ा। फिर नैना तैयारी के साथ मेट पर आकर पहलवानी करने लगी और फिर कुश्ती की और बढ़ने लगी। नैना कैनवाल पहलवान ने अखाड़े की मिट्टी की दंगली कुश्तियां कम लड़ी और नेशनल इंटरनेशनल लेवल पर मेट पर अधिकांश मुकाबले में भाग लिया।
नैना कैनवाल पहलवान का नेशनल और इंटरनेशनल कुश्ती सफर
2021 सीनियर नेशनल चैंपियनशिप आगरा सिल्वर मेडल
2019 सीनियर नेशनल चैंपियनशिप जालंधर पंजाब सिल्वर मेडल
2018 सीनियर नेशनल चैंपियनशिप गोंडा उत्तर प्रदेश सिल्वर मेडल
2019 अंडर 23 नेशनल चैंपियनशिप शिरडी महाराष्ट्र गोल्डमैन
2018 अंडर 23 नेशनल चैंपियनशिप चित्तौड़गढ़ राजस्थान गोल्ड मेडल
2016 जूनियर नेशनल चैंपियनशिप गोंडा यूपी सिल्वर पदक
2015 जूनियर नेशनल चैंपियनशिप रांची झारखंड कांस्‍य पदक
2014 जूनियर नेशनल चैंपियनशिप झारखंड कांस्य पदक
2019 आल इंडिया यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप औरंगाबाद गोल्ड मेडल
2018 आल इंडिया यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप रोहतक सिल्वर मेडल
2017 आल इंडिया यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप रोहतक गोल्ड मेडल
2017 आल इंडिया यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप मैसूर कर्नाटक कांस्य पदक
2015 आल इंडिया यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप कुरुक्षेत्र हरियाणा सिल्वर मेडल

इंटरनेशनल चैंपियनशिप
2019 एशिया चैंपियनशिप मंगोलिया गोल्ड मेडल
2019 अंडर 23 वर्ल्ड चैंपियनशिप हंगरी पार्टिसिपेट
2019 अंडर 23 वर्ल्ड चैंपियनशिप हंगरी , पार्टिसिपेट
2018 अंडर 23 वर्ल्ड चैंपियनशिप रोमानिया ,पार्टिसिपेट
2016 जूनियर एशियन चैंपियनशिप मंगोलिया ,पार्टिसिपेट
2014 जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप कोर्सिका यूरोप पार्टिसिपेट


ये है प्रैक्टिस का शेड्यूल

नैना कैनवाल अपनी प्रैक्टिस नियमित रोज सुबह 4:30 बजे से उठकर 5:00 बजे के लगभग स्टेडियम प्रैक्टिस के लिए पहुंचती है। लगभग 3 घंटे सुबह इसकी प्रैक्टिस के बाद 9:00 बजे घर आती है। शाम 5:00 बजे से स्टेडियम पहुंचने पर के बाद रात 8:00 बजे तक प्रैक्टिस करती है। इस तरह नियमित 3 घंटे सुबह और 3 घंटे शाम कुश्ती की ट्रेनिंग प्रैक्टिस करती है तथा पार्ट टाइम जिम में भी प्रैक्टिस के लिए जाती रहती है। कुश्ती कोच के शेड्यूल के अनुसार रोज अलग-अलग प्रैक्टिस कराई जाती है। 300-400 दंड बैठक का सपाटा भी लगा लेती है। हफ्ते में दो दिन जोर होते हैं वह 2 दिन टेक्निक कराई जाती है।

नैना की खुराक

पहलवानी की खुराक में नैना ने बताया कि वे बदाम का शरबत फ्रूट, जूस, घी, मक्खन, दूध, दही व अंडे आदि लेती हैं। भोजन शाकाहारी, दलिया घर का ही बना हुआ लेती है। घर से स्टेडियम करीब 2 किलोमीटर दूर पर है। स्टेडियम में रोज प्रैक्टिस करने के बाद घर पर आना-जाना बना रहता है।सम्मान
नैना कैनवाल पहलवान ने बताया कि वे 6/7 बार भारत केसरी खिताब जीतने में कामयाब हुई है।
दो दंगल में उन्होंने दो स्कूटी जीत कर सम्मानित हो चुकी है।
रोहिणी दंगल में 51000 रुपए की राशि के साथ सम्मानित किया गया।
मथुरा के दंगल में 1 लाख रुपए इनाम राशि के साथ सम्मानित किया गया।
हरियाणा केसरी टाइटल पर 1.5 लाख रुपये इनाम राशि के साथ सम्मानित किया गया।

रेलवे में निकली नौकरी, बिना एग्जाम सीधे जॉइनिंग, इस आधार पर मिलेगी जॉब

Posted: 26 Jun 2022 06:56 PM PDT

रेलवे में निकली नौकरी, बिना एग्जाम सीधे जॉइनिंग, इस आधार पर मिलेगी जॉब
नौकरी की तलाश करने वालों के लिए रेलवे में अच्छा मौका है. सबसे अच्छी बात है कि इस नौकरी के लिए को लिखित परीक्षा नहीं देनी है. इस भर्ती के लिए कैंडिडेट्स रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट ner.indianrailways.gov.in पर जाकर घर बैठे आवेदन कर सकते हैं. इस भर्ती प्रक्रिया से अलग-अलग डिपार्टमेंट में जूनियर टेक्निकल एसोसिएट की भर्ती की जाएगी. इसका नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया गया है. इन पदों के लिए आवेदन करने की आखिरी तारीख 5 जुलाई 2022 है. किसी भी तरह की जानकारी के लिए नॉर्थ ईस्ट रेलवे की वेबसाइट पर चेक कर सकते हैं.

इस भर्ती प्रक्रिया से कुल 20 पद भरे जाने हैं. इसमें जूनियर टेक्निकल एसोसिएट (वर्क्स) के 15 पद, जूनियर टेक्निकल एसोसिएट (इलेक्ट्रिकल/ टीआरडी) के 2 पद और जूनियर टेक्निकल एसोसिएट (सिग्नल) के 3 पद शामिल हैं.

Eligibility Criteria
इन पदों के लिए आवेदन करने के लिए कैंडिडेट्स के पास मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से संबंधित क्षेत्र में तीन साल का डिप्लोमा या चार साल की डिग्री कोर्स होनी चाहिए. जिन कैंडिडेट्स ने GATE एग्जाम पास कर रखा है उन्हें ज्यादा वेटेज मिलेगा.
आयु सीमा की बात करें तो कैंडिडेट की आयु कम से कम 18 साल होनी चाहिए. वहीं कैंडिडेट की उम्र 33 साल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. सरकारी मापदंडों के मुकाबिक आयु सीमा में छूट दी जाएगी.


सैलरी की बात करें तो हर महीने जेड क्लास के लिए 25000 रुपये महीना, वाई क्लास के लिए 27000 रुपये महीना और एक्स क्लास के लिए 30000 रुपये महीना सैलरी मिलेगी. कैंडिडेट्स के सिलेक्शन में GATE में नंबरों का 55 पर्सेंटाइल / योग्यता, 30 नंबर एक्सपीरिएंस के और 15 नंबर पर्सनालिटी, इंटरव्यू और मेंटल टेस्ट के होंगे.

आज 27 जून को पड़ेगी मासिक शिवरात्रि, इन उपायों से पा सकते हैं आर्थिक और वैवाहिक जीवन के कष्टों से मुक्ति

Posted: 26 Jun 2022 06:53 PM PDT

आज 27 जून को पड़ेगी मासिक शिवरात्रि, इन उपायों से पा सकते हैं आर्थिक और वैवाहिक जीवन के कष्टों से मुक्ति

हिंदू पंचांग के अनुसार हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है जो शिव भक्तों के लिए बहुत खास होता है। मान्यता है कि मासिक शिवरात्रि के दिन विधि-विधान से पूजा-पाठ और व्रत करने वाले मनुष्य को जीवन के सभी दुखों और पापों से मुक्ति मिल जाती है। साथ ही भोलेनाथ की कृपा से जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है। इस साल 2022 में 27 जून को मासिक शिवरात्रि पड़ रही है। वहीं 27 जून को सोमवार होने से मासिक शिवरात्रि का महत्व और भी बढ़ गया है। 

तो आइए जानते हैं किन उपायों द्वारा शिव जी को प्रसन्न करके आर्थिक और वैवाहिक जीवन के कष्टों से मुक्ति मिल सकती है...

मासिक शिवरात्रि 2022: 27 जून को पड़ेगी मासिक शिवरात्रि, इन उपायों से पा सकते हैं आर्थिक और वैवाहिक जीवन के कष्टों से मुक्ति

धन लाभ के लिए उपाय
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार एक मुट्ठी साबुत चावल में काले तिल मिलाकर मासिक शिवरात्रि के दिन भगवान शिव को अर्पित करने से धन लाभ के योग बनते हैं। साथ ही जीवन में आर्थिक समस्याओं से मुक्ति मिलती है।

वैवाहिक जीवन में सुख के लिए
मासिक शिवरात्रि पर भगवान शिव के मंदिर में भोलेनाथ का जलाभिषेक करें। इसके बाद ॐ श्रीं वर प्रदाय श्री नमः मंत्र की 5 माला का जाप करने के बाद 5 श्रीफल यानी नारियल भगवान शिव को अर्पित कर दें। इससे विवाह में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।

भय से मुक्त होने का उपाय
यदि आपका मन अक्सर अशांत रहता है और मन में किसी ना किसी प्रकार का डर बना रहता है तो मासिक शिवरात्रि के दिन शिव चालीसा के पाठ को बहुत फलदायी माना गया है। शास्त्रों के अनुसार मान्यता है कि शिव चालीसा के पाठ से आत्मशक्ति बढ़ती है और मन शांत होता है।

2 जुलाई को बुध करेंगे मिथुन राशि में गोचर, इस हरे रंग के रत्न को धारण करने से चमक सकती है आपकी किस्मत

Posted: 26 Jun 2022 06:50 PM PDT

2 जुलाई को बुध करेंगे मिथुन राशि में गोचर, इस हरे रंग के रत्न को धारण करने से चमक सकती है आपकी किस्मत

शास्त्र के अनुसार हर माह ग्रहों की चाल बदलती रहती है जिसका प्रभाव सभी 12 राशियों के लोगों पर होता है। साथ ही ग्रहों से संबंधित कई रत्न भी बताए गए हैं जिन्हें धारण करने से जीवन में शुभ फलों में वृद्धि होती है। इस वर्ष 2 जुलाई 2022 को बुध देव मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। ऐसे में ज्योतिष शास्त्र के अनुसार किसी भी अशुभ प्रभाव से बचने के लिए मिथुन राशि के लोग हरे रंग का पन्ना रत्न धारण कर सकते हैं। तो आइए जानते हैं पन्ना रत्न धारण करने के लाभ और धारण विधि...

ज्योतिष: 2 जुलाई को बुध करेंगे मिथुन राशि में गोचर, इस हरे रंग के रत्न को धारण करने से चमक सकती है आपकी किस्मत

पन्ना रत्न धारण करने के लाभ

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पन्ना रत्न व्यापारियों के लिए पन्ना रत्न धारण करना बहुत लाभकारी माना गया है। इससे व्यापार में आ रही समस्याओं से छुटकारा मिलता है और आमदनी की नए स्रोत मिलने लगते हैं।

कर्ज में डूबे हुए और आर्थिक तंगी से जूझ रहे लोगों के लिए पन्ना रत्न चमत्कारी लाभ दिखा सकता है। ऐसे में ज्योतिषीय सलाह से पन्ना रत्न धारण करने से धन प्राप्ति के योग बनते हैं।

ज्योतिष अनुसार पन्ना रत्न धारण करने से वाणी में मधुरता आती है और व्यक्ति की बौद्धिक क्षमता का विकास होता है। इसके अलावा राजकीय और शासकीय कार्यों में यह बहुत लाभकारी माना जाता है।

कैसे करें पन्ना रत्न धारण
ज्योतिष के जानकारों के मुताबिक पन्ना रत्न बुधवार के दिन धारण करना चाहिए। यदि आप पन्ना रत्न को रेवती, अश्लेषा या ज्येष्ठा नक्षत्र में धारण करते हैं तो उसे बहुत फलदायी माना जाता है। इस रत्न को आप चांदी, सोना या प्लैटिनम की अंगूठी में जड़वाकर हाथ की कनिष्ठा यानी छोटी उंगली में धारण कर सकते हैं। साथ ही ध्यान रखें कि बुधवार के दिन धारण करने से पहले सुबह स्नान के बाद दूध से अंगूठी को स्वच्छ कर लें।

मंगल इन राशियों की जिंदगी में मचा सकते हैं भारी उथल-पुथल, बचने के लिए करें ये उपाय

Posted: 26 Jun 2022 06:49 PM PDT

मंगल इन राशियों की जिंदगी में मचा सकते हैं भारी उथल-पुथल, बचने के लिए करें ये उपाय

27 जून को मंगल का राशि परिवर्तन होने जा रहा है। इस दिन मंगल मेष राशि में प्रवेश करेंगे। मंगल के मेष राशि में गोचर से कुछ राशि वालों की जिंदगी में भारी उथल-पुथल मचने के आसार रहेंगे। तो ऐसे में इन राशियों के लोगों को बेहद ही सतर्क रहने की जरूरत पड़ेगी। तो जानिए किन उपायों को करके आप मंगल के बुरे प्रभाव से बच सकते हैं।

मंगल इन राशियों की जिंदगी में मचा सकते हैं भारी उथल-पुथल, बचने के लिए करें ये उपाय

वृषभ राशि: आपके खर्चों में तेजी से वृद्धि होगी। कानूनी मामलों से दूरी बनाकर रखें। सेहत को लेकर सतर्क रहना होगा। भाई-बहनों के साथ मतभेद हो सकते हैं। हर प्रकार के लेन-देन में सावधानी बरतनी होगी। कार्यस्थल पर कोई आपके काम को बिगाड़ने की कोशिश कर सकता है। उपाय: अपनी मां की सेवा करें और उनका आशीर्वाद लेकर ही कोई भी नया कार्य शुरू करें।

मेष राशि: इस गोचर का आपकी मां की सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए मां की सेहत का खास ख्याल रखने की सलाह दी जाती है। करियर और प्रेम जीवन के लिहाज से समय अनुकूल है।
उपाय: गणेश जी की आराधना करें और उन्हें लड्डू का भोग लगाएं।

कन्या राशि: स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हो सकती हैं। करियर में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं। कार्यक्षेत्र में सफलता पाने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी। जो जातक बिजनेस से जुड़े हैं उन्हें सावधान रहना होगा। खान-पान का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है।
उपाय: मां कात्यायनी की आराधना करें और उनके मंत्रों का जाप करें।

धनु राशि: इस अवधि में आपको अपने खर्चों पर नियंत्रण करना होगा। धन संचय करने की आवश्यकता है। जीवनसाथी के साथ संबंध बिगड़ सकते हैं। प्रेम संबंधों में खटास आ सकती है। खानपान का उचित ध्यान रखें।
उपाय: पानी में कच्चा दूध डालकर स्नान करने से आप पर इस गोचर का शुभ प्रभाव पड़ेगा।

वेरीकोज़ वेन अर्थात पैरों की पिण्ड़लियों के पीछे नसो का गुच्छा बन जाना, आसान घरेलू उपाय

Posted: 26 Jun 2022 06:45 PM PDT

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वेरीकोज़ वेन: सामान्य रूप से देखें तो वैरिकोज वेन्स पैरों की नसों में सूजन को कहते हैं लेकिन असल में ये एक खतरनाक बीमारी है। वैरिकोज वेन्स को वैरिकोसेस और वैरिकोसिटिज भी कहते हैं। इस रोग में पैरों की नसें फैली हुई, बढ़ी हुई और फूली हुई नजर आती हैं। कई बार तो इन नसों में इतनी सूजन आ जाती है कि ये पैरों से बाहर उभर आती हैं। वैरिकोज वेन्स में अमूमन नसों में बहने वाले ब्लड का रंग बदला दिखाई देता है।
इस दौरान ये गहरी नीली, बैंगनी और लाल रंग की नजर आ सकती हैं। वैरिकोज वेन्स में पैरों में खूब दर्द होता है। युवावस्था के समय या इसके बाद लगभग 25 प्रतिशत लोगों को ये समस्या आमतौर पर होती है। वैरिकोज वेन्स की समस्या पुरुषों से ज्यादा महिलाओं को प्रभावित करती है।

जब हाथ की नसे ( शिराएं ) फूल जाती हैं तो इसमें दर्द उत्पन्न होता है। यह शिराओं में अवरोध होने से होता है। इसको शिरो, ब्रह्म, सुषुम्ना नाड़ी, चक्रवात वाहिनी, स्नायु वात बस्ती और वात कुंडलिका आदि नामों से जाना जाता है। वेरीकोज़ वेन अर्थात पैरों की पिण्ड़लियों के पीछे नसो का गुच्छा बन जाना जो देखने में तो बहुत खराब लगता ही है साथ ही साथ रोगी को पैरों में खिंचाव और दर्द की भी अनूभूति देता है। बहुत से मित्र हमसे इस समस्या के स्थायी हल के लिये पूछते हैं । All Ayurvedic के माध्यम से, इस पोस्ट में, हम आप सभी के लाभार्थ एक बहुत ही कारगर उपाय बता रहे हैं जो बहुत से लोगो ने प्रयोग किया है और लाभ बताया है।

हाँलाकि यह रोग कोई विशेष समस्या तो नही पैदा करता है किंतु कई बार कुछ अन्य छोटी-मोटी समस्याओं का कारण बन सकता है। ऑपरेशन द्वारा इसका समाधान किया जा सकता है किंतु जो मित्र ऑपरेशन नही करवाना चाहते उनके लिये प्रस्तुत है नीचे चमत्कारी घरेलू प्रयोग।

➡ कैसे होता है वैरिकोज वेन्स :वैरिकोज वेन्स तब होता है जब नसें ठीक से काम नहीं कर पाती हैं। पैरों से ब्लड को नीचे से ऊपर हार्ट तक ले जाने के लिए पैरों की नसों में वाल्‍व होते हैं, इन्हीं की सहायता से ब्लड ग्रेविटेशन के बावजूद हार्ट तक पहुंच पाता है। लेकिन अगर ये वाल्व खराब हो जाए या पैरों में कोई समस्या आ जाए, तो ब्लड ठीक से ऊपर चढ़ नहीं पाता और पैरों में ही जमने लगता है।
 
ब्लड के जमने की वजह से पैरों की नसें कमजोर हो जाती हैं और फैलने लगती हैं। कभी-कभी नसें अपनी जगह से हट जाती हैं और मुड़ने लगती हैं। इसी समस्या को वैरिकोज वेन्स कहते हैं।

➡ क्यों दिखती हैं नसें नीली :दरअसल हमारे ब्लड में हीमोग्लोबिन नाम का तत्व पाया जाता है, जिसके कारण इसका रंग लाल दिखता है। हीमोग्लोबिन की विशेषता ये है कि ये कार्बन डाइऑक्साइड और ऑक्सीजन दोनों ही इसके साथ अच्छे से घुल-मिल जाते हैं। अगर हमारे टिशूज में कार्बन डाइऑक्साइड आ जाए, तो ये हीमोग्लोबिन के साथ रिएक्शन करके कार्बोक्सी हीमोग्लोबिन बना लेता है।
 
कार्बोक्सी हीमोग्लोबिन वाले खून को ही हम खराब खून या अशुद्ध खून कहते हैं। इस अशुद्ध खून का रंग नीला या बैंगनी हो जाता है। हमारी नसों के ऊपर की स्किन बेहद पतली होती है इसी लिए नसें ऊपर से दिखाई देती हैं। अगर इन्हीं नसों में ये अशुद्ध खून भर जाता है, तो हमें बाहर से नसें गहरे नीले रंग की दिखने लगती हैं।

➡ वेरिकोज वेन के होने के मुख्य कारण :शारीरिक श्रम की कमी
अचानक से शरीर में होने वाले हार्मोन परिवर्तन
उम्र का बढ़ना
आनुवांशिक

➡ वैरिकोज वेन्स के लक्षण :वैरिकोज वेन्स सबसे ज्यादा पैरों को प्रभावित करते हैं। नसों का त्वचा से बाहर उभर आना नसों में सूजन आना नसों में तेज दर्द होना नसों का रंग नीला या बैंगनी हो जाना नसों का रंग अचानक से बदलने लगना नसों का फैलने लगना नसों में छाले जैसा उभार आ जाना नसें में दबाव महसूस होना या ज्यादा ब्लड फ्लो होने लगना कई बार रक्त के दबाव के कारण नसें फट भी जाती हैं और खून निकलने लगता है। किन कारणों से होता है वैरिकोज वेन्स इस रोग की सबसे बड़ी वजह जीवनशैली और अनहेल्दी खान-पान है।
 
कई बार प्रेगनेंसी की वजह से भी वैरिकोज वेन्स हो जाता है। ऐसी स्थिति में तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए और उनसे राय लेनी चाहिए क्योंकि इससे आपके बच्चे को भी खतरा हो सकता है। वैरिकोज वेन्स का खतरा पुरुषों से ज्यादा महिलाओं को होता है क्योंकि इसकी एक वजह मासिक धर्म भी है।
 
इसके अलावा ज्यादा देर तक खड़े रहने से, बढ़ती उम्र के कारण, और कई बार अनुवांशिक कारणों से भी वैरिकोज वेन्स हो सकता है। मोटापा भी इस रोग की एक बड़ी वजह है।

➡ आवश्यक सामग्री :

1/2 कप एलोवेरा का गूदा
1/2 कप कटी हुयी गाजर
10 ml सेब का सिरका

➡ बनाने विधी :मिक्सी में उपरोक्त तीनों सामानों को एकसाथ ड़ालकर अच्छे से पीसकर पेस्ट तैयार कर लें।

➡ प्रयोग विधी :वेरीकोज वेन वाले हिस्से पर इस पेस्ट को फैलाकर, सूती कपड़े से बहुत ही हल्की पट्टी बाँध दें । अब एक सीधी जगह पर पीठ के बल लेट जायें और पैरों को शरीर के तल से लगभग एक-सवा फुट ऊपर उठाकर किसी सहारे से टिका लें। इस अवस्था में लगभग तीस मिनट तक लेटे रहें। यह प्रयोग रोज तीन बार करना है।

➡ ध्यान रखें :यह बहुत धीरे ठीक होने वाला रोग है अत: सयंम के साथ इस प्रयोग का पालन करें लगभग चार से छः सप्ताहों में प्रयोगकर्ताओं नें लाभ होने की बात कही है। यदि All Ayurvedic के माध्यम से दी गयी यह पोस्ट आपको अच्छी और लाभकारी लगी हो तो कृपया शेयर जरूर करें ।

➡ वेरिकोज वेन के लिए अन्य घरेलू उपाय :मेथी : 5 से 10 ग्राम मेथी के बीज सुबह-शाम गुड़ के साथ मिलाकर सेवन करने से लाभ मिलता है और हाथ की नड़ी (शिरा) अपने जगह पर ठीक रहती है। रोगी की शिराओं को फूलने से रोकने के लिए मेथी को पीसकर उसका लेप शिराओं पर लगाकर उसको कपड़े से बांध दें।
गोरवा (एकसिरा) : गोरवा (एकसिरा) का फल कमर में बांधने से शिरास्फिति में लाभ मिलता है। इसका प्रयोग रोजाना करने से शिरा का फूलना बन्द हो जाता है।

लाजवन्ती : लाजवन्ती को पीसकर बांधने से शिरास्फीति के रोग में लाभ मिलता है।
कटकरंज : कटकरंज के बीजों का चूर्ण एरण्ड के पत्ते पर डालकर शिरास्फिति पर बांधने से शिरा के रोगी का रोग दूर हो जाता है।

शीघ्रपतन, धातु क्षीणता व धातु स्राव के 6 रामबाण घरेलु उपाय, यकीन ना हो तो आजमाकर देख लीजिये

Posted: 26 Jun 2022 06:42 PM PDT

शीघ्रपतन, धातु क्षीणता व धातु स्राव के 6 रामबाण घरेलु उपाय, यकीन ना हो तो आजमाकर देख लीजिये

शीघ्र गिर जाने को शीघ्रपतन कहते हैं। सेक्स के मामले में यह शब्द वीर्य के स्खलन के लिए, प्रयोग किया जाता है। पुरुष की इच्छा के विरुद्ध उसका वीर्य अचानक स्खलित हो जाए, स्त्री सहवास करते हुए संभोग शुरू करते ही वीर्यपात हो जाए और पुरुष रोकना चाहकर भी वीर्यपात होना रोक न सके, अधबीच में अचानक ही स्त्री को संतुष्टि व तृप्ति प्राप्त होने से पहले ही पुरुष का वीर्य स्खलित हो जाना या निकल जाना, इसे शीघ्रपतन होना कहते हैं। इस व्याधि का संबंध स्त्री से नहीं होता, पुरुष से ही होता है और यह व्याधि सिर्फ पुरुष को ही होती है।

शीघ्र पतन की सबसे खराब स्थिति यह होती है कि सम्भोग क्रिया शुरू होते ही या होने से पहले ही वीर्यपात हो जाता है। सम्भोग की समयावधि कितनी होनी चाहिए यानी कितनी देर तक वीर्यपात नहीं होना चाहिए, इसका कोई निश्चित मापदण्ड नहीं है। यह प्रत्येक व्यक्ति की मानसिक एवं शारीरिक स्थिति पर निर्भर होता है।

वीर्यपात की अवधि स्तम्भनशक्ति पर निर्भर होती है और स्तम्भन शक्ति वीर्य के गाढ़ेपन और यौनांग की शक्ति पर निर्भर होती है। स्तम्भन शक्ति का अभाव होना शीघ्रपतन है, शीघ्रपतन होने का मुख्य कारण होता है हस्तमैथुन करना।

बार-बार कामाग्नि की आंच (उष्णता) के प्रभाव से वीर्य पतला पड़ जाता है सो जल्दी निकल पड़ता है। ऐसी स्थिति में कामोत्तेजना का दबाव यौनांग सहन नहीं कर पाता और उत्तेजित होते ही वीर्यपात कर देता है। यह तो हुआ शारीरिक कारण, अब दूसरा कारण मानसिक होता है जो हस्तमैथुन करने से निर्मित होता है।

हस्तमैथुन करने वाला जल्दी से जल्दी वीर्यपात करके कामोत्तेजना को शान्त कर हलका होना चाहता है और यह शान्ति पा कर ही वह हलकेपन तथा क्षणिक आनन्द का अनुभव करता है। इसके अलावा अनियमित सम्भोग, अप्राकृतिक तरीके से वीर्यनाश व अनियमित खान-पान आदि। शीघ्रपतन की बीमारी को नपुंसकता की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता, क्योंकि यह बीमारी पुरुषों की मानसिक हालत पर भी निर्भर रहती है।

कई युवकों और पुरुषों को मूत्र के पहले या बाद में तथा शौच के लिए जोर लगाने पर धातु स्राव होता है या चिकने पानी जैसा पदार्थ किलता है, जिसमें चाशनी के तार की तरह लंबे तार बनते हैं। यह मूत्र प्रसेक पाश्वकीय ग्रंथि से निकलने वाला लसीला द्रव होता है, जो कामुक चिंतन करने पर बूंद-बूंद करके मूत्र मार्ग और स्त्री के योनि मार्ग से निकलता है, ताकि इन अंगों को चिकना कर सके। इसका एक ही इलाज है कि कामुकता और कामुक चिंतन कतई न करें।

एक बात और पेशाब करते समय, पेशाब के साथ, पहले या बीच में चूने जैसा सफेद पदार्थ निकलता दिखाई देता है, वह वीर्य नहीं होता, बल्कि फास्फेट नामक एक तत्व होता है, जो अपच के कारण मूत्र मार्ग से निकलता है, पाचन क्रिया ठीक हो जाने व कब्ज खत्म हो जाने पर यह दिखाई नहीं देता है।

धातु क्षीणता आज के अधिकांश युवकों की ज्वलंत समस्या है। कामुक विचार, कामुक चिंतन, कामुक हाव-भाव और कामुक क्रीड़ा करने के अलावा खट्टे, चटपटे, तेज मिर्च-मसाले वाले पदार्थों का अति सेवन करने से शरीर में कामाग्नि बनी रहती है, जिससे शुक्र धातु पतली होकर क्षीण होने लगती है।
आज का तड़क-भड़क वाला फैशनेबल वातावरण, अधनंगे अश्लील दृश्य और कामुक भाव से भरे टीवी सीरियल आदि इस समस्या में घी डालने का काम कर रहे हैं। आज वह युवक भाग्यवान है और काबिले तारीफ है, जो धातु क्षीणता का रोगी नहीं है। ऐसा युवक वही हो सकता है जो वातावरण से प्रभावित न होकर शुद्ध और हितकारी आचार-विचार का पालन करता हो।

शुक्र धातु का आचार-विचार से सीधा संबंध रहता है, इसलिए आचार-विचार शुद्ध नहीं होगा तो धातु क्षीण होगी ही। धातु क्षीणता से स्मरण शक्ति में कमी होती है, नपुंसकता आती है, आत्मविश्वास में कमी होती है, बुद्धि मंद और शरीर में निर्बलता आती है। विवाहित पुरुष, पत्नी सहवास में असफल रहता है। कामुक आचार-विचार का सर्वथा त्यागकर निम्नलिखित चिकित्सा करने पर दो-तीन माह में धातु क्षीणता दूर हो सकती है। धातु को पुष्ट और बलवान बनाने वाले उत्तम आयुर्वेदिक योगों का परिचय यहां प्रस्तुत है।

TREATMENT :
(1) आंवला, गिलोय सत्व, असली बंसलोचन, गोखरू, छोटी इलायची सब 20-20 ग्राम लेकर बारीक पीसकर चूर्ण कर लें। यह चूर्ण 1-1 चम्मच सुबह-शाम मीठे दूध के साथ लें।

(2) सकाकुल मिश्री 80 ग्राम, बहमन (सफेद), बहमन लाल, सालम पंजा, सफेद मुसली, काली मुसली और गोखरू सब 40-40 ग्राम। छोटी इलायची के दाने, गिलोय सत्व, दालचीनी और गावजुवां के फूल सब 20-20 ग्राम, इन सबको कूट-पीसकर महीन चूर्ण करके तीन बार छान लें, ताकि सभी एक जान हो जाएं फिर शीशी में भर लें। यह चूर्ण आधा-आधा चम्मच कुनकुने मीठे दूध के साथ सुबह व रात को सोते समय लें।

(3) जिनकी पाचन शक्ति बहुत अच्छी हो वे धुली हुई उड़द की दाल और पुराने चावल की खिचड़ी बनाकर इसमें शुद्ध घी डालकर प्रतिदिन शाम को भोजन की जगह कम से कम 40 दिन तक खाएं। इसका प्रत्येक कौर तब तक चबाते रहें, जब तक यह खुद ही हलक में उतरकर पेट में चली न जाए, इसे निगलना न पड़े। इसके साथ घूंट-घूंटकर मीठा दूध पीते रहें या खाने के बाद पी लें। इसकी मात्रा शुरू में अपनी पाचन शक्ति से थोड़ी कम रखें, फिर प्रतिदिन थोड़ी-थोड़ी मात्रा बढ़ाते जाएं। इसे चबाकर बारीक करना इसलिए जारूरी है, ताकि हमारे मुंह की लार पर्याप्त मात्रा में इसमें मिल सके, जो पाचन में बहुत सहायक होती है।

(4) शकर के एक बताशे में गूलर के पत्ते का दूध 8-10 बूंद टपकाकर खाएं। सुबह सूर्योदय के समय या पहले पत्ता तोड़ें तो दूध अच्छी मात्रा में निकलेगा। बताशा खाकर ऊपर से मीठा दूध पिएं। उपरोक्त चारों नुस्खे एक से बढ़कर एक हैं। कोई भी एक या दो नुस्खे तीन माह तक निरंतर प्रयोग करें।

(5) कौंच के शुद्ध किए हुए बीज, काकोली, असगन्ध, शतावर, क्षीर काकोली और तालमखाना सब 50-50 ग्राम और 200 ग्राम मिश्री। सब को कूट-पीसकर महीन चूर्ण करके मिला लें और 1-1 चम्मच सुबह खाली पेट और रात को सोते समय एक गिलास मीठे कुनकुने गर्म दूध के साथ तीन माह तक सेवन करें। शुक्र धातु को पुष्ट और गाढ़ा करने वाला यह अद्भुत नुस्खा बहुत ही गुणकारी है।

(6) अश्वगन्धा, शतावर और गोखरू तीनों 100-100 ग्राम लाकर खूब कूट-पीसकर महीन चूर्ण कर मिला लें और शीशी में भरकर रख लें। इस चूर्ण को 5-5 ग्राम मात्रा में सुबह-शाम शहद में मिलाकर चाट लें। शहद इतना लें कि चूर्ण भलीभांति मिल जाए। इसके ऊपर एक गिलास मीठा और बिल्कुल ठंडा किया हुआ दूध पी लें। यह प्रयोग सुबह खाली पेट और रात को सोते समय यानी भोजन के दो घंटे बाद करें। खटाई का सेवन न करें।

इसकी 21 पतियां 21 दिन लेने से थाइराइड की प्रॉब्लम जड़ से ख़त्म हो जाएगी

Posted: 26 Jun 2022 06:39 PM PDT

थाइराइड

इस आधुनिक युग में थायराइड की समस्या आजकल एक गंभीर समस्या बनी हुई है। थाइराइड गर्दन के सामने और स्वर तंत्र के दोनों तरफ होती है। ये तितली के आकार की होती है।

थायराइड गले में पायी जाने वाली एक ग्रंथि है। गले में पायी जाने वाली इस थायराइड ग्रंथि से थायरोक्सिन हॉर्मोन निकलता है।

जब इस ग्रंथि से निकलने वाले थायरोक्सिन हॉर्मोन का बैलेंस बिगड़ जाता है, जब शरीर में अनेक प्रकार की बीमारियां होने लगती है।

जब ग्रंथि से निकलने वाले थायरोक्सिन हॉर्मोन की मात्रा कम हो जाती है, तब शरीर में मेटाबोलिज़्म तेज होने लगते है, जिससे हमारी बॉडी की एनर्जी जल्दी ख़त्म हो जाती है।

इसके विपरीत इसकी मात्रा बढ़ने के कारण, मेटाबोलिज़्म कम हो जाते है, जिसके कारण शरीर सुस्त और थका हुआ हो जाता है। थायराइड ग्रंथि के कारण शरीर के अनेक हिस्से प्रभावित होते है।

थायराइड किसी भी उम्र के लोगो में हो सकता है। बच्चो में थायराइड की समस्या होने पर उनकी लंबाई कम हो जाती है, और शरीर फैलने लगता है।

महिलाओं पर इसका प्रभाव कभी कभी सामने से नजर आता है कुल मिलाकर यही कहना होगा कि आमतौर ओर थाइरोइड की बीमारी जान तो नहीं लेता पर हां ये परेशान बहुत ज्यादा कर देता है साथ हमारी लुक को भी भद्दा कर देता। तो अब थाइरोइड की समस्या से भागने या इसे झेलने की जरूरत नहीं बस आप हमारे बताए गए इस इलाज को अपनाएं और जल्द से जल्द थाइराइड नाम की बला से राहत पाएं।

महिलाओं के साथ-साथ पुरूषों में भी आजकल थायराइड की दिक्कत बढ़ती जा रही है। थायराइड में वजन अचानक से बढ़ जाता है या कभी अचानक से कम हो जाता है। इस रोग में काफी दिक्कत होती है।

आयुर्वेद में थायराइड को बढ़ने से रोकने के बेहद सफल प्रयोग बताएं गए हैं। जिनमे से ज्यादातर उपचार की वस्तुएं हमारे गाँव में ही मिल जाती हैं तो आइए जानते हैं All Ayurvedic के माध्यम से थाइराइड से छुटकारा पाने के लिए सबसे कारगर घरेलू उपचार। आइए जानते है सबसे पहले थाइराइड के प्रकार, लक्षण, कारण और परहेज।
कितने तरह के होते हैं थाइराइड | THYROID

थायराइड से जुड़ी आम समस्याओं की बात करे तो इसमें थायराइड के पांच प्रकार के विकार होते हैं। इसमें हाइपोथायराइडिज्म, हाइपरथायराइडिज्म, आयोडीन की कमी के कारण होने वाले विकार जैसे गॉयटर/गलगंड, हाशिमोटो थायराइडिटिस और थायराइड कैंसर शामिल हैं।

थायराइड ग्रंथि से दो हॉर्मोन बनते हैं- टी 3 (ट्राई आयडो थायरॉक्सिन) और टी 4 (थायरॉक्सिन)। यह हार्मोन शरीर के तापमान, मेटाबोलिज्म और हार्ट रेट को नियंत्रित करते हैं. थायराइड ग्रंथि पर पीयूष/ पिट्यूटरी ग्लैंड का नियंत्रण होता है जो दिमाग में मौजूद होती है। इससे थायराइड स्टिमुलेटिंग हार्मोन (टीएसएच) निकलता है. जब शरीर में इन हार्मोन का संतुलन गड़बड़ होता है तो व्यक्ति थायराइड का शिकार हो जाता है।

हाइपोथायराइडिज्म स्थिति में थायराइड हार्मोन का स्रवा कम होता है, जिससे शरीर का मेटाबोलिज्म बिगड़ (धीमा हो) जाता है। इसके विपरीत हाइपरथायराइडिज्म तब होता है जब थायराइड हार्मोन की मात्रा शरीर में ज्यादा बनती है, जिससे मेटाबॉलिज्म तेज हो जाता है।

थाइराइड के लक्षण | THYROID'S SYMPTOMS

प्रतिरोधक क्षमता कमजोर : शरीर में प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने पर बिना दवाइयों के छोटे-छोटे रोगों से निजात पाना मुश्किल हो जाता है। थाइराइड में प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होनी शुरू हो जाती है।

थकावट महसूस होना : आराम करने के बाद भी थकावट महसूस होना थाइराइड का लक्षण हो सकता है। इसमें शरीर की एनर्जी कम होने लगती है और काम करने में आलस आता है।

बालों का झड़ना : थाइराइड होने पर बाल झड़ने लगते हैं कई बार को भौहों के बाल भी बहुत हल्के हो जाते हैं।

कब्ज की परेशानी : इसमें खाना आसानी से पचाने में भी परेशानी होती है। जिससे पेट से संबंधित परेशानियां भी आनी शुरू हो जाती हैं, कब्ज इस रोग में होने वाली आम दिक्कतों में से एक है। लगातार कब्ज हो रही है तो थाइराइड का चेकअप जरूर करवाएं।

त्वचा का रूखापन : थाइराइड होने पर त्वचा में रूखापन आना शुरू हो जाता है। इस परेशानी में स्किन के ऊपरी हिस्से के सैल्स डैमेज होने लगते हैं।

हाथ-पैर ठंडे रहना : इस समस्या में हाथ पैर ठंड़े रहने लगते हैं। शरीर का तापमान सामान्य होने पर भी हाथ-पैरों में ठंड़क महसूस होती है।

वजन बढ़ना या घटना : किसी भी बीमारी से पहले शरीर संकेत देने शुरू कर देता है। इसमें वजन एकदम से घटना या बढ़ाना शुरू हो जाता है।

थायराइड होने के कारण | THYROID'S CAUSES

स्ट्रेस में रहना : थायराइड बढ़ने का सबसे पहला कारण आपका बहुत ज्यादा स्ट्रेस लेना ही है। इसके अलावा इससे याद्दाश्त कमजोर होने का खतरा भी बन रहता है। इसलिए अगर आपको थायराइड की समस्या है तो ज्यादा स्ट्रेस न लें।

स्मोकिंग करना : सिर्फ थायराइड ही नहीं, स्मोकिंग तो वैसे भी सेहत के लिए हानिकारक होती है। इसलिए आज ही अपनी इस गलत आदत को बदल लें। कहीं ऐसा न हो आपकी यह आदत थायराइड बढ़ने और बीमारियों का कारण बन जाए।

सोया का सेवन : थायराइड की समस्या में सोया बीन्स या अन्य सोया चीजों का सेवन आपको लिए हानिकारक होता है। थायराइड ग्लेंड को बढ़ाने वाली इन चीजों से आपकी कंडीशन और भी खराब हो सकती है।

डॉक्टरी सलाह पर ध्यान ना देना : इस समस्या में अपनी डाइट से लेकर नियमित दिनचर्या का खास ख्याल रखना पड़ता है। बहुत से लोग इस प्रॉब्लम को छोटा समझकर डॉक्टर की सलाह पर भी ध्यान नहीं देते। मगर आपकी यह गलती आप पर भारी पड़ सकती है। इसलिए डॉक्टर की सलाह पर पूरी तरह अमल करें।

कार्बोहाइड्रेट्स का सेवन न करना : बहुत से लोग वजन बढ़ने के डर से कार्बोहाइड्रेट्स युक्त चीजों का सेवन बंद कर देते हैं लेकिन यह थायराइड ग्लेंड के लिए सही नहीं है। थायराइड को कंट्रोल (Thyroid Control) में रखने के लिए हैल्दी लाइट लेना बहुत जरूरी है। इसलिए आपनी डाइट में कार्बोहाइड्रेट्स युक्त चीजों को शामिल करें।

ग्लूटेन वाले आहारों का सेवन : अगर आप ग्लूटेन वाले आहारों का सेवन ज्यादा करते हैं तो आपको हाशीमोटोज रोग हो सकता है, जोकि थायराइड से ही जुड़ा रोग है। इसलिए ग्लूटेन वाले आहार जैसे गेंहूं का आटा, पास्ता, ब्रेड्स, बिस्किट्स, सीजनिंग्स और कई तरह के मसाले, बाजरा, चिकन, नूडल्स, बर्गर, पिज्जा, सोया सॉस आदि से दूर रहें।

शुगर कंट्रोल न करना : शरीर में शुगर की मात्रा को कंट्रोल में न रखने से इंसुलिन बिगड़ जाता है, जोकि थायराइड की समस्या को बढ़ा देता है। इसलिए अपनी शुगर को कंट्रोल में रखें।

ज्यादा डाइट और सप्लीमेंट लेना : कैल्शियम आयरन प्रोटीन और सोया सप्लीमेंट ज्यादा मात्रा में लेने से भी बॉडी में थायराइड हार्मोन का बैलेंस बिगड़ सकता है। इसलिए अपनी डाइट को थायराइड के हिसाब से मेंटेन करें।

ज्यादा नमक और सी फूड खाना : ज्यादा नमक और सी फूड लेने से बॉडी में आयोडीन की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे इससे हाइपोथायरायडिज्म हो सकता है। इसलिए नमक और सी फूड का कम से कम सेवन करें।

फालतू दवाएं लेना : कुछ दवाएं ऐसी होती है जो थायराइड ग्लेंड को नुकसान पहुंचाती है। इसलिए बेहतर होगा कि कोई भी फालतू दवाई लेने से पहले आप अपने डॉक्टर से सलाह लें।
थायराइड की सबसे कारगर औषधि निर्गुण्डी | THYROID'S HOME REMEDY

निर्गुण्डी के पत्तों का रस 14 से 28 मिलीलीटर दिन में 3 बार सेवन करें या निर्गुण्डी के 21 पत्ते लेकर उसका रस निकाल कर उस रस को 3 बराबर भागो में बांट कर दिन में 3 बार ले यह प्रयोग 21 दिन करने से थाइराइड से निजात मिलती है। निर्गुण्डी की जड़ों को पीसकर इसका रस नाक में डालना चाहिए इससे भी फायदा मिलता है। यह थाइराइड से बने गले मे घेंघा या गोइटर बनने पर भी काम करता है।
लाल प्याज होता है थाइराइड में गुणकारी | ONION IN THYROID

रात को सोने से पहले मध्यम आकार के लाल प्याज को लेकर दो हिस्सों में काट लें। इन कटे हुए हिस्सों को गर्दन में थाइराइड ग्लैंड के आसपास रगड़ें। इसे रात भर ऐसे ही रहने दें। रोजाना लगातार इसका इस्तेमाल करने से आराम मिलेगा। प्याज खाने का स्वाद बढ़ाने के साथ-साथ सेहत के लिए भी बहुत लाभकारी है। इसमें एंटी बैक्टिरियल,एंटी फंगल के अलावा और भी बहुत से जरूरी तत्व होते हैं।
थाइराइड में क्या खाएं और क्या नही खाना फायदेमंद है

1. हाइपोथाइराइड | Hypothyroid : इसमें थायराइड ग्लैंड सक्रिय नहीं होता, जिससे शरीर में जरूरत के मुताबिक T3, T4 हार्मोन नहीं पहुंच पाता। इसकी वजह से शरीर का वजन अचानक बढ़ जाता है। सुस्ती महसूस होने लगती है। शरीर में रोगों से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है। अनियमित पीरियड, कब्ज की शिकायत, चेहरे और आंखों पर सूजन आ जाता है। यह बीमारी 30 से 60 साल की महिलाओं में अधिक होती है।

क्या खाएं? : आयोडिन नमक, आयोडिन से भरपूर चीजें, सी फूड, फिश, चिकेन, अंडा, टोंड दूध और उससे बनी चीजें जैसे दही, पनीर, टमाटर, मशरुम, केला, संतरे आदि, फिजिशियन की सलाह पर विटामिन, मिनिरल्स, आयरन सप्लीमेंट्स।

क्या नहीं खाएं? : सोयाबीन और सोया प्रोडक्ट रेड मीट, पैकेज्ड फूड, ज्यादा क्रीम वाले प्रोडक्ट जैसे केक, पेस्ट्री, स्वीट पोटैटो, नाशपाती, स्ट्रॉबेरी, मूंगफली, बाजरा आदि, फूलगोभी, पत्ता गोभी, ब्रोकली, शलगम आदि।

2. हाइपरथाइराइड | Hyperthyroid : इसमें थायराइड ग्लैंड बहुत ज्यादा सक्रिय हो जाता है। T3, T4 हार्मोन जरुरत से अधिक मात्रा में निकलकर ब्लड में घुलने लगता है। इस हालत में शरीर का वजह एकाएक कम हो जाता है। मांशपेशियां कमजोर हो जाती है। भूख ज्यादा लगती है, ठीक से नींद नहीं आती, स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाता है। पीडियड्स में अनियमितता, अधिक ब्लीडिंग की समस्या, गर्भपात का भी खतरा बना रहता है।

क्या खाएं? : हरी सब्जियां, साबूत अनाज, ब्राउन ब्रेड, ओलिव ऑयल, लेमन, हर्बल और ग्रीन टी, अखरोट, जामुन, स्ट्रॉबेरी, गाजर, हरी मिर्च, शहद।

क्या नहीं खाएं? : मैदा से बने प्रोडक्ट जैसे पास्ता, मैगी, व्हाइट ब्रेड, सॉफ्ट ड्रिंक, अल्कोहल, कैफीन, रेड मीट, ज्यादा मीठी चीजें जैसे मिठाई, चॉकलेट।

SBI ऐप से कैसे ट्रांसफर करें पैसे? यहां जानें स्टेप बाय स्टेप डिटेल

Posted: 26 Jun 2022 06:33 PM PDT

SBI ऐप से कैसे ट्रांसफर करें पैसे? यहां जानें स्टेप बाय स्टेप डिटेल

अगर आप स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के खाताधारक हैं तो आपको SBI YONO और SBI YONO LITE ऐप्लिकेशन्स के बारे में जरूर जानना चाहिए। अगर आपको एसबीआई बैंक संबंधित कोई भी काम करना है तो आपको एसबीआई के इन ऑनलाइन बैकिंग ऐप का इस्तेमाल करना होगा। आप बैंक जाए बिना भी किसी को पैसे भेज सकते हैं या किसी से पैसे मंगवा भी सकते हैं। योनो एक डिजिटल बैंकिंग प्लेटफॉर्म है, जो स्टेट बैंक ऑफ इंडिया द्वारा दी जाने वाले कई फाइनेंसियल सर्विस को ऑनलाइन मीडियम से प्रॉवाइड करता है। 

इन ऐप्स के जरिए आप पैसों की ट्रांजैक्शन करने के अलावा फ्लाइट और ट्रेन टिकट बुकिंग भी कर सकते हैं। आप इस ऐप के जरिए ऑनलाइन शॉपिंग, मेडिकल बिल का भुगतान जैसे भी कई अन्य सुविधाओं का फायदा उठा सकते हैं। यह स्मार्टफोन ऐप हैं। ये एंड्रॉयड और आईओएस दोनों डिवाइस के लिए उपलब्ध हैं। एसबीआई योनो ऐप के जरिए किसी को पैसे भेजने के लिए अकाउंट में बेनिफिशयरी यानी लाभार्थियों को अकाउंट में एड करना जरूरी होता है। आइए हम आपको स्टेप बाय स्टेप बताते हैं कि आप कैसे अपने योनो एसबीआई ऐप में लाभार्थियों को एड कर पाएंगे।
How to add beneficiaries to SBI YONO App

स्टेप 1: सबसे पहले आपको अपने मोबाइल डिवाइस में SBI YONO App को डाउनलोड करना है। 

स्टेप 2: ऐप में लॉगिन करें और 'Yono Pay' पर टैप करें

स्टेप 3: 'Profile Management' को सिलेक्ट करें।

स्टेप 4: अब 'Add/Manage Beneficiary' के ऑप्शन पर क्लिक करें।

स्टेप 5: अब आपको अपने एसबीआई इंटरनेट बैंकिंग प्रोफाइल का पासवर्ड डालकर सब्मिट बटन पर क्लिक करना होगा।

स्टेप 6: अब आपको उस प्रॉसेस को चुनना होगा, जिसके जरिए आप लाभार्थी को पैसे भेजना चाहते हैं।

स्टेप 7: अब 'Account Number' को चुने और फिर Next को सिलेक्ट करें।

स्टेप 8: अब अगर आप किसी लाभार्थी का एसबीआई अकाउंट ऐड करना चाहते हैं तो आपको SBI Account को चुनना होगा और उसके बाद उनका अकाउंट डिटेल्स एड करके Next के बटन पर क्लिक करना होगा।

स्टेप 9: अगर आप किसी ऐसे लाभार्थी का अकाउंट एड करना चाहते हैं, जिनका अकाउंट एसबीआई के अलावा किसी अन्य बैंक का है तो आपको Bank Account पर क्लिक करना होगा।

स्टेप 10: उसके बाद अकाउंट डिटेल्स सब्मिट करके आपको Next के ऑप्शन पर क्लिक करना होगा।

स्टेप 11: अब वहां पर एड ए बेनिफिशियरी को एक रुपये भेजने का ऑप्शन होगा। आपको अपना रिमार्क सेट करके Pay के ऑप्शन पर क्लिक करना होगा।

स्टेप 12: उसके बाद आपके स्क्रीन पर कंफर्म करने का एक नोटिफिकेशन आएगा। आपको उसे चेक करके Confirm करना होगा।

स्टेप 13: उसके बाद आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी आएगा, जिसे टाइप करके Next के ऑप्शन पर क्लिक करना होगा।

स्टेप 14: अब आखिरकार, अगले 24 घंटों के अंदर वह लाभार्थी (beneficiary)आपके अकाउंट में जुड़ जाएगा। उसके बाद आप जब चाहे उसे पैसे भेज सकते हैं।

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