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- Small Business Ideas- सेल्समैन नहीं सेठ बनना है तो यह मशीन खरीदिए
- भारत के दक्षिण में भी है कैलाश पर्वत, जिसके रहस्य अनसुलझे हैं- Amazing facts in Hindi
- चेक बाउंस के मामले को क्या धारा 420 ipc के तहत भी दर्ज करवा सकते हैं, जानिए- IPC
- Vividh Bharati Live Radio App यहां से Download करें, अपने मोबाइल पर छाया गीत सुनें
- सरकार ने कर्मचारी का वेतन बढ़ा दिया, 12 साल से बीमा नहीं बढ़ाया- MP karmchari news
| Small Business Ideas- सेल्समैन नहीं सेठ बनना है तो यह मशीन खरीदिए Posted: 17 Jul 2022 02:34 PM PDT कुछ होम बेस्ड स्मॉल स्केल बिजनेस इस प्रकार के होती हैं जिसमें प्रोडक्शन के बावजूद आपको एक सेल्समैन का रोल प्ले करना पड़ता है, इसके कारण कुछ लोग अपने कदम पीछे खींच लेते हैं। अपन आज एक ऐसी स्मॉल इंडस्ट्री के बारे में डिसकस करेंगे। जिसके प्रोडक्ट में मात्र 20 पैसे का प्रॉफिट मार्जिन है, लेकिन यह छोटा सा प्रॉफिट आपको अपने इलाके का सेठ बना देगा। यह बताने की जरूरत नहीं कि बाजार में पेपर कप की डिमांड कितनी ज्यादा है। यह पता करने की जरूरत है क्या आपके शहर में पेपर कप की खपत कितनी है। भारत के ज्यादातर शहरों में पेपर कप का प्रोडक्शन नहीं होता। बड़े शहरों से थोक में खरीद कर लाए जाते हैं। क्योंकि पेपर कप बनाने वाली मशीन लगभग 1000000 रुपए की आती है। अब आप अपने छोटे से शहर में पेपर कप बनाने का काम शुरू कर सकते हैं क्योंकि Semi automatic Paper cup making machine मात्र ₹200000 की भी आती है। 1 घंटे में 3500 पेपर कप बनाती है। किसी भी छोटे शहर की डिमांड पूरी करने के लिए एक मशीन काफी है। एक पेपर कप पर मात्र 20 पैसे का प्रॉफिट मिलता है लेकिन लोग दिन भर में ₹10000 कमा लेते हैं। क्योंकि इसकी खपत बहुत ज्यादा है। |
| भारत के दक्षिण में भी है कैलाश पर्वत, जिसके रहस्य अनसुलझे हैं- Amazing facts in Hindi Posted: 17 Jul 2022 02:09 PM PDT सभी जानते कि भारत के उत्तर में हिमालय पर कैलाश पर्वत स्थित है। जिस के रहस्य आज तक कोई नहीं जान पाया, लेकिन हम आपको बता रहे हैं कि भारत के दक्षिण में भी एक कैलाश पर्वत है और इसके रहस्य भी आज तक अनसुलझे हैं। पहाड़ ऊपर से नीचे की तरफ काटा गया हैमहाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में स्थित है वह कैलाश पर्वत जिसे 757-783 ई में भगवान शिव की आज्ञा से राष्ट्रकूट वंश के नरेश कृष्ण (प्रथम) द्वारा तराशकर एक मंदिर बनवाया गया। सारी दुनिया इसे एलोरा का कैलाश मंदिर के नाम से जानती है। पहाड़ों पर नक्काशी और निर्माण तो पूरी दुनिया में मिलते हैं परंतु यह एकमात्र ऐसा निर्माण है जिसमें पहाड़ ऊपर से नीचे की तरफ काटा गया है। यानी सबसे पहले मंदिर का शिखर बनाया गया और अंत में उसका प्लेटफार्म। यह मंदिर स्वर्ग में बनाया गया और धरती के गर्भ में स्थापित किया गयापुरातत्व विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस मंदिर को बनाने के लिए लगभग 200000 टन वजन के पत्थर को हटाया गया। मंदिर का वजन 40000 टन है। इस मंदिर की ऊंचाई 90 फीट है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह का मंदिर बनाने में लगभग 150 साल का समय लगेगा लेकिन यह मंदिर मात्र 18 वर्ष में बना। इसीलिए कुछ लोग मानते हैं कि यह मंदिर स्वर्ग में बनाया गया और धरती के गर्भ में स्थापित किया गया। भारत में अंग्रेजी शासन काल से इस मंदिर पर लगातार रिसर्च चल रही है लेकिन आज तक दुनिया का कोई भी विशेषज्ञ और वैज्ञानिक यह नहीं बता पाया कि मंदिर को किस प्रकार से बनाया गया होगा। अंग्रेजी शासन काल के दस्तावेजों में पता चलता है कि उनके विशेषज्ञों को मंदिर के तल में स्थित गुफाओं के अंदर रेडियोएक्टिविटी का सामना करना पड़ा था। इसके कारण शोध कार्य बंद कर दिया क्या। भारत के उत्तर में हिमालय में स्थित कैलाश पर्वत के मामले में भी कुछ ऐसा ही है। जब भी कोई शोध कार्य करता है उसे कुछ प्राकृतिक घटनाओं का सामना करना पड़ता है और फिर वह अपनी रिसर्च बंद कर देता है। आज तक कोई समझ नहीं पाया कि हिमालय पर यह अलग प्रकार का एक पर्वत कब और कैसे स्थापित हो गया। ठीक इसी प्रकार कोई समझ नहीं पाया कि एलोरा में जमीन के 90 फुट नीचे इतना भव्य मंदिर कैसे और कब स्थापित हो गया। आज तक कोई हिमालय पर स्थित कैलाश पर्वत के ऊपर नहीं पहुंच पाया है और एलोरा में स्थित कैलाश मंदिर के नीचे नहीं पहुंच पाया है। |
| चेक बाउंस के मामले को क्या धारा 420 ipc के तहत भी दर्ज करवा सकते हैं, जानिए- IPC Posted: 17 Jul 2022 01:17 PM PDT परक्राम्य लिखत अधिनियम,1881 की धारा 138 के अनुसार अगर कोई व्यक्ति ऐसे बैंक खाते का चेक देता है, जिसमें भुगतान के लिए पर्याप्त राशि नहीं है और इसके कारण धनादेश अनादरित हो जाता है। तब ऐसे खाता धारक को दो वर्ष का कारावास या चेक की राशि के दुगना जुर्माना या दोनों से दण्डित किया जा सकता है लेकिन क्या परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के अलावा कम रकम या शून्य राशि वाला चेक देने वाले व्यक्ति पर भारतीय दण्ड संहिता,1860 की धारा 420 (छल) का आपराधिक मामला भी बन सकता है। क्या ऐसे व्यक्ति को आईपीसी की धारा 420 के तहत दंडित किया जा सकता है। पढ़िए केरल हाई कोर्ट का एक महत्वपूर्ण जजमेंट:- चेक बाउंस महत्वपूर्ण जजमेंट- वीवीएलएन चेरी बनाम एनए मार्टिनउक्त मामले में केरल उच्च न्यायालय ने यह अभिनिर्धारित किया कि किसी बैंक का चेक बाउंस होने मात्र के आधार पर भारतीय दण्ड संहिता,1860 की धारा 420 (छल) का अपराध नहीं होता जब तक यह साबित न कर दिया जाए कि चेक जारी करने वाले व्यक्ति को यह ज्ञात था कि उसके खाते में चेक पर अंकित मूल्य की धनराशि उपलब्ध नहीं है। साधारण शब्दों में कहें तो चेक देने वाले व्यक्ति ने जानबूझकर कर ऐसे बैंक खाते का चेक दिया है जिस खाते में वह राशि नहीं रखता है एवं परिवादी को यह साबित करना है कि उसका खाता पहले से ही शून्य रहा है तब ही भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 420 लागू होगी अन्यथा परक्राम्य लिखत अधिनियम,1881 की धारा 138 लागू रहेगी। Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article) :- लेखक बी.आर. अहिरवार (पत्रकार एवं लॉ छात्र होशंगाबाद) 9827737665 इसी प्रकार की कानूनी जानकारियां पढ़िए, यदि आपके पास भी हैं कोई मजेदार एवं आमजनों के लिए उपयोगी जानकारी तो कृपया हमें ईमेल करें। editorbhopalsamachar@gmail.com |
| Vividh Bharati Live Radio App यहां से Download करें, अपने मोबाइल पर छाया गीत सुनें Posted: 17 Jul 2022 12:48 PM PDT विविध भारती के बारे में तो सभी जानते हैं। एक वक्त ऐसा भी था जब रेडियो यानी विविध भारती हुआ करता था। आज भी विविध भारती के दीवाने कम नहीं है। हिमालय की ड्यूटी पर तैनात फौजी भाई से लेकर दक्षिण के समुद्र में मछुआरे तक सभी विविध भारती सुनते हैं। जमाना बदल गया है। पहले लोग रेडियो साथ में लेकर चला करते थे। वक्त के साथ रेडियो बदला और पोर्टेबल हो गया लेकिन फिर भी लोग उसे साथ में लेकर नहीं चलते क्योंकि स्मार्टफोन में हजारों गाने डाउनलोड किए जा सकते हैं। लोग करते भी हैं। सैकड़ों मोबाइल एप्लीकेशन है जो फ्री में गाने सुनाती है। लोग उन्हें भी इंस्टॉल कर लेते हैं। परंतु विविध भारती का अपना आनंद है। लोग उसे हमेशा मिस करते थे। इसलिए विविध भारती ने अपनी मोबाइल एप्लीकेशन लॉन्च कर दी है। इसमें रिकॉर्ड किए गए गाने नहीं सुनाई जाते बल्कि विविध भारती का लाइव रेडियो चलता है। एक बार फिर छाया गीत का जमाना लौट कर आ रहा है। विविध भारती रेडियो का मोबाइल ऐप प्ले स्टोर से इंस्टॉल किया जा सकता है। यह बिल्कुल फ्री है। सुविधा के लिए हम डायरेक्ट लिंक उपलब्ध करा रहे हैं। यहां क्लिक करके आप Vividh Bharati Live Radio Mobile App Download कर सकते हैं। |
| सरकार ने कर्मचारी का वेतन बढ़ा दिया, 12 साल से बीमा नहीं बढ़ाया- MP karmchari news Posted: 17 Jul 2022 12:24 PM PDT जबलपुर। मध्यप्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ ने जारी विज्ञप्ति में बताया कि शासकीय कर्मचारियों का समूह बीमा करवाया जाता है। 12 साल पहले ढाई लाख रुपए का बीमा किया गया था जिसका प्रीमियम चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ₹100, तृतीय श्रेणी कर्मचारी ₹200, द्वितीय श्रेणी अधिकारी 400 एवं प्रथम श्रेणी अधिकारियों का ₹600 है। इतने सालों में सब कुछ बदल गया लेकिन बीमा आज भी ढाई लाख रुपए का ही होता है। पिछले 12 वर्षों में कर्मचारियों को मिलने वाला वेतन लभगभ दो गुना हो गया है किन्तु बीमा राशि में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। राज्य कर्मचारियो/अधिकारियों को 2016 से सातवें वेतनमान दिया जा रहा है किन्तु समूह बीमा राशि पांचवें वेतनमान से काटी जा रही है। ऐसी स्थिति में यदि सेवा के दौरान कर्मचारी की मृत्यु हो जाती है तो उसके आश्रित परिवार को मात्र 2.5 लाख बीमा राशि ही मिल पाती है जो मंहगाई को देखते हुए बहुत कम है। संघ के मुकेश सिंह, मंसूर बेग, आलोक अग्निहोत्री, मनीष चौबे, योगेन्द्र मिश्रा, नितिन अग्रवाल, श्यामनारायण तिवारी, शुभसंदेश सिंगौर, प्रमोद वर्मा, प्रणव साहू, गगन चौबे, राकेश दुबे, गणेश उपाध्याय, प्रशांत शुक्ला, सोनल दुबे, देवदत्त शुक्ला, मनीष लोहिया, राकेश पाण्डे, मनीष शुक्ला, सुदेश पाण्डे, विनय नामदेव, पवन ताम्रकार, संजय साहू, विष्णु पाण्डे, मनोज सेन, संतोष तिवारी, महेश कोरी, वेदप्रकाश गुप्ता, बृजेश गोस्वामी, आदि ने मुख्य सचिव म.प्र.शासन से मांग की है कि तृतीय श्रेणी कर्मचारियों की समूह बीमा योजना अंतर्गत काटी जानी वाली राशि सातवें वेतनमान के अनुरूप रू 500 प्रतिमाह की जावे। |
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