दिव्य रश्मि न्यूज़ चैनल |
- इंडिगो फ्लाइट में बैग में बम ले जाने की खबर से हड़कंप
- यूपी में प्रशासन को लेकर योगी का बड़ा ऐक्शन
- द्रौपदी मुर्मू के सामने कठिन दायित्व
- विपक्ष को मुद्दा सौंपने का निरर्थक पत्र
- हमारी आन-बान और शान है तिरंगा: मोदी
- अफ्रीकी देशों में लगाया गया पहला मलेरिया रोधी टीका
- चीन में शी जिनपिंग की नीतियों के खिलाफ विद्रोह
- लिज ट्रस ने ऋषि सुनक को पीएम की दौड़ में पीछे ठेला
- दिनेश गुणवर्धने श्रीलंका के पीएम
- जीकेसी 07 अगस्त को मनायेगा सावन महोत्सव
- श्रीमद् भागवत कथा पूर्णाहुति में भजनों से रात भर झूमें लोग
- 23 जुलाई 2022, शनिवार का दैनिक पंचांग एवं राशिफल - सभी १२ राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन ? क्या है आप की राशि में विशेष ? जाने प्रशिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. प्रेम सागर पाण्डेय से |
- "इनसे हैं हम" पुस्तक पर परिचर्चा एवं बहुभाषी काव्य गोष्ठी सम्पन्न
- आधी आवादी
- न आदर हो.न मान
| Posted: 22 Jul 2022 09:11 AM PDT अब प्रयागराज जंक्शन पर कुछ लोगों ने पढ़ी नमाजसार्वजनिक जगहों पर नमाज का मामला है कि शांत होने का नाम ही नहीं ले रहा है। पहले लखनऊ के लुलु मॉल में नमाज पढ़ कर कुछ लोगों ने पूरे प्रदेश में विवाद खड़ा कर दिया अब एक और वीडियो यूपी से ही वायरल हुआ है जिसमें कुछ लोग प्रयागराज जंक्शन पर नमाज पढ़ते नजर आ रहे हैं। मिली जानकारी के अनुसार इन लोगों ने प्रयागराज रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर एक पर बने वेटिंग रूम में नमाज पढ़ी। नमाज के दौरान किसी ने वीडियो बना ली है और अब वह सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।दरअसल, बचपन बचाओ आंदोलन संस्था ने आरपीएफ प्रयागराज को सूचना दी कि न्यू जलपाईगुड़ी से जा रही ट्रेन महानंदा एक्सप्रेस में कुछ नाबालिग बच्चे ले जाए जा रहे हैं और शक है कि उनकी ह्यूमन ट्रैफिकिंग हो रही है। सूचना मिलते ही आरपीएफ ने ट्रेन से 15 नाबालिग बच्चों समेत 6 और लोगों को ट्रेन से नीचे उतार दिया और उन्हें पूछताछ के लिए ले गई। इस दौरान उन्हें प्लेटफॉर्म नंबर एक के वेटिंग रूम में रखा गया। हालांकि शाम 7 बजे के करीब उन लोगों ने वहीं पब्लिक वेटिंग रूम में नमाज पढ़नी शुरू कर दी। हद तो तब हो गई जब मदरसे के शिक्षक अब्दुल रब और उसके साथ के लोगों को सार्वजनिक स्थल पर नमाज पढ़ते देख वहां खड़े सुरक्षाकर्मी मूक दर्शक बने रहे। जीआरपी और आरपीएफ के जवान और इंस्पेक्टर नमाज के दौरान वहीं मौजूद थे और उन्होंने उन लोगों को नहीं रोका। बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष डॉ अखिलेश मिश्रा और सदस्य अकांक्षा सोनकर ने जब इस पूरे मामले में पूछताछ की और बच्चों से जानना चाहा कि वो लोग कहां जा रहे हैं तो बच्चों के पास कोई भी सटीक जवाब नहीं था। मदरसे के शिक्षक अब्दुल रब के साथ कुल 15 नाबालिग बच्चे थे, जिन्हें सुल्तानपुर घोष के जामिया दारे अकरम मोहम्मदपुर गौंती मदरसे ले जाने की बात सामने आ रही है। हालांकि इन 15 में से 6 ऐसे भी बच्चे हैं जिन्हें मजदूरी के लिए दिल्ली ले जाया जा रहा था। इनमें ज्यादातर बच्चे बिहार के हैं, जिनकी उम्र 8 से 11 साल के करीब है। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| इंडिगो फ्लाइट में बैग में बम ले जाने की खबर से हड़कंप Posted: 22 Jul 2022 09:09 AM PDT इंडिगो फ्लाइट में बैग में बम ले जाने की खबर से हड़कंपपटना से दिल्ली जा रही इंडिगो की फ्लाइट में एक शख्स ने बम रखे जाने की खबर दी जिसके बाद हड़कंप मच गया। इसके बाद एहतियात के तौर पर सभी यात्रियों को फ्लाइट से उतारा गया है। पटना के डीएम चंद्रशेखर ने बताया कि यात्रा कर रहे एक शख्स ने खुद बताया कि बैग में बम रखकर ले जा रहा है। इंडिगो की दिल्ली जाने वाली फ्लाइट में एक व्यक्ति ने दावा किया कि उसके बैग में बम है। इसके बाद बम दस्ते और पुलिस कर्मीयों मौके पर पहुंच कर निरीक्षण किया। बम स्क्वाड ने बैग की तलाशी ली लेकिन बम नहीं मिला। युवक को हिरासत में ले लिया गया है। एहतियातन के तौर पर सभी यात्रियों को विमान से उतार कर सभी यात्रियों के सामान की जांच की गयी। पटना से दिल्ली जाने वाली इंडिगो की ये फ्लाइट रात 8.45 बजे उड़ान भरने वाली थी। जानकारी है कि अपने माता पिता के साथ जा रहे गुरप्रीत नाम के एक युवक ने पटना से दिल्ली जा रही इंडिगो की फ्लाइट में सवार होने के बाद खुद ही कहा कि उसके बैग में बम है। बम स्क्वाड ने उसके बैग की तलाशी ली लेकिन उसमें बम नहीं मिला। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले केरल के सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चे (एलडीएफ) के संयोजक ई.पी. जयराजन ने कहा था कि वह और उनका परिवार कभी भी इंडिगो कंपनी के विमानों में यात्रा नहीं करेगा। इससे पहले विमानन कंपनी इंडिगो ने जयराजन पर तीन हफ्तों के लिए उसके विमान में यात्रा करने पर प्रतिबंध लगा दिया था। वहीं बीती 17 जुलाई को इंडिगो की शारजाह-हैदराबाद उड़ान के एक इंजन में गड़बड़ी आने का पता चलने के बाद फ्लाइट को एहतियात के तौर पर कराची हवाईअड्डे पर उतारा गया। इससे पहले, 14 जुलाई को इंडिगो की दिल्ली-वडोदरा उड़ान का मार्ग एहतियात के तौर परिवर्तित करते हुए उसे जयपुर ले जाया गया था, क्योंकि विमान के इंजन में कंपन होने का पता चला था। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| यूपी में प्रशासन को लेकर योगी का बड़ा ऐक्शन Posted: 22 Jul 2022 09:10 AM PDT यूपी में प्रशासन को लेकर योगी का बड़ा ऐक्शनलखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के एक बार फिर बड़ा एक्शन लेते हुए 18 सीनियर आईपीएस अधिकारियों का तबादला कर दिया है। इस कड़ी में शुक्रवार को सीनियर आईपीएस अधिकारी सभाराज आईपीएस एससीआरबी को लखनऊ और स्वामी प्रसाद की डीआईजी विशेष जांच प्रकोष्ठ लखनऊ में तैनाती की गई है। इसके अलावा सौमित्र यादव डीआईजी 112 लखनऊ, रमेश डीआईजी इंटेलिजेंस मुख्यालय लखनऊ, बाबूराम डीआईजी सीबीसीआईडी, दयानंद मिश्रा डीआईजी फूड सेल, योगेश सिंह डीआईजी महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन लखनऊ की जिम्मेदारी मिली है। इस बार डीआईजी रैंक के 18 अधिकारी इधर से उधर हुए हैं। जबकि गीता सिंह डीआईजी अभियोजन लखनऊ, एन कुलांचे डीआईजी साइबर क्राइम लखनऊ औरर सर्वेश कुमार राणा डीआईजी खाद्य एवं रसद प्रशासन की भी लखनऊ में तैनाती की गई है। इसके साथ ही जुगल किशोर डीआईजी टेलीकॉम लखनऊ, विनोद कुमार मिश्रा डीआईजी एंटी करप्शन लखनऊ, बालेंदू भूषण सिंह डीआईजी लॉजिस्टिक्स लखनऊ, अरविंद भूषण पांडे डीआईजी टेक्निकल सर्विसेज लखनऊ बनाए गए है। राजीव मल्होत्रा डीआईजी पीटीएस उन्नाव, डॉक्टर अखिलेश निगम डीआईजी ईओडब्ल्यू लल्लन सिंह डीआईजी इंटेलिजेंस मुख्यालय लखनऊ और महेंद्र यादव डीआईजी ट्रेनिंग डायरेक्टरेट लखनऊ बनाया गया है। इससे पहले यूपी की योगी सरकार ने रविवार को कई आईएएस औरआईपीएस अधिकारियों के तबादले किए थे। दो जिलों के डीएम के साथ ही पांच आईएएस अधिकारियों का ट्रांसफर किया गया था, जबकि 10 आईपीएस अधिकारी भी इधर से उधर किए गए थे। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| द्रौपदी मुर्मू के सामने कठिन दायित्व Posted: 22 Jul 2022 09:05 AM PDT द्रौपदी मुर्मू के सामने कठिन दायित्व(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा) भारत के 15वें राष्ट्रपति का दायित्व ओडिशा के आदिवासी बाहुल्य जिले मयूरभंज में जन्मी उस बालिका को 21 जुलाई को सौंपा गया है जिसने 7 गांवों की एकमात्र लड़कियों में कालेज जाने का गौरव पाया था। भारतीय लोकतंत्र की यह निश्चित रूप से बड़ी उपलब्धि है कि एक आदिवासी महिला देश की प्रथम नागरिक बनी है। राजनीति के परिपेक्ष्य में देखें तो केन्द्र में सत्तारूढ़ भाजपा और उसके सहयोगी दलों के पास इतने सांसद और विधायक थे कि विपक्षी दलों के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा का पराजित होना तय था। इसी के साथ यह सवाल भी लोगों के दिमाग में है कि भाजपा द्रोपदी मुर्मू को राष्ट्रपति बनाकर कौन-कौन से लक्ष्य हासिल करना चाहती है। चुनाव नतीजे आने के बाद जिस तरह से भाजपा ने आदिवासी बहुल गांवों में जश्न मनाया, उससे यह बात और स्पष्ट हो गयी लेकिन द्रौपदी मुर्मू ने सार्वजनिक जीवन में जिस तरह से राजनीति से परे हटकर फैसले लिये हैं, उससे यह भी अपेक्षा की जाती है कि द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति के रूप में अपने कर्तव्य का निर्वाह बिना किसी दबाव के करेंगी। झारखंड के राज्यपाल के रूप में द्रौपदी मुर्मू ने भाजपा की ही रघुवर दास सरकार के अधिनियम में संशोधन को लौटा दिया था। इस प्रकार कई मौकों पर द्रौपदी मुर्मू की मुखरता देखने को मिली है। यह भी सच है कि आज वे राष्ट्रपति की कुर्सी पर भाजपा की मदद से ही बैठी हैं, इसलिए द्रौपदी मुर्मू को बहुत कठिन दायित्व का सामना करना पड़ेगा। राष्ट्रपति का पद बहुत ही प्रतिष्ठा वाला और एक अहम संवैधानिक पद होता है। देश के संविधान के मुताबिक, लोकतंत्र के तीन मजबूत स्तंभ होते हैं- कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका। संघ की कार्यपालिका की शक्ति राष्ट्रपति में निहित है। वे केंद्रीय मंत्रिमंडल के जरिये अपनी इस शक्ति का इस्तेमाल कर सकते हैं। राष्ट्रपति देश की नौसेना, थल सेना और वायु सेना के सर्वोच्च सेनापति होते हैं। राष्ट्रपति लोकसभा में एंग्लो इंडियन समुदाय के दो व्यक्तियों को मनोनीत कर सकते हैं। राज्यसभा में कला, साहित्य, पत्रकारिता, विज्ञान, आदि में पर्याप्त अनुभव रखने वाले 12 सदस्यों को भी वे मनोनीत कर सकते हैं। दूसरे देशों के साथ कोई संधि या समझौता किया जा रहा है तो यहां राष्ट्रपति का हस्ताक्षर जरूरी होता है। जब संसद के दोनों सदनों में सत्र नहीं चल रहा होता, उस समय संविधान के अनुच्छेद 123 के मुताबिक, राष्ट्रपति नया अध्यादेश जारी कर सकते हैं। संसद सत्र के शुरू होने के 6 हफ्ते तक इसका प्रभाव रहता है। संविधान के अनुच्छेद 72 के अनुसार, राष्ट्रपति किसी भी व्यक्ति को क्षमा कर उसे पूर्ण दंड से बचा सकते हैं या फिर उसकी सजा कम करवा सकते हैं। हालांकि एक बार यदि उन्होंने क्षमा याचिका रद्द कर दी तो फिर दुबारा याचिका दायर नहीं की जा सकती। फांसी की सजा पाने वाले कई अपराधियों की क्षमा याचिका राष्ट्रपति तक पहुंचती है। हालांकि इस पर फैसला लेना उनका अधिकार है। देश में आपातकाल की घोषणा का अधिकार सिर्फ राष्ट्रपति के पास ही होता है। इसमें 3 तरह की इमरजेंसी शामिल होती हैं। पहला, युद्ध या सशस्त्र विद्रोह के दौरान, दूसरा राज्यों के संवैधानिक तंत्र के फेल होने पर और तीसरा वित्तीय आपातकाल। सन् 1962 में भारत चीन युद्ध, 1971 में भारत पाकिस्तान युद्ध और फिर 1975 में इंटरनल एग्रेशन के दौरान देश में इमरजेंसी लगाई गई थी। संसद के दोनों सदनों, लोकसभा और राज्यसभा में कोई बिल जब पेश किया जाता है तो वहां से पास होने के बाद राष्ट्रपति की स्वीकृति जरूरी होती है। इसके बिना कोई भी विधेयक कानून नहीं बन सकता। धन विधेयक हो, किसी नए राज्य का निर्माण, सीमांकन हो या भूमि अधिग्रहण के संबंध में कोई विधेयक, राष्ट्रपति की सिफारिश के बगैर संसद में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। बेहद शांत स्वभाव की मुर्मू लोगों को उनके अधिकार दिलाने के लिए भी जानी जाती हैं। बचपन से लेकर राज्यपाल बनने तक के सफर में उन्होंने ऐसे कई फैसले लिये जो बताते हैं कि द्रौपदी मुर्मू एक रबर स्टाम्प नहीं साबित होंगी। उन्होंने शिक्षा के लिए अहम कदम उठाए, आदिवासियों के हितों की बात की और सरकार के फैसलों पर भी सवाल उठाए। द्रौपदी मुर्मू का जन्म 20 जून 1958 को ओडिशा के आदिवासी बाहुल्य जिले मयूरभंज के एक गांव में हुआ। इस जिले के 7 गांवों में मुर्मू इतिहास की ऐसी पहली लड़की रही हैं जो कॉलेज पहुंची। मुर्मू मई 2015 से लेकर जुलाई 2021 तक झारखंड की राज्यपाल रही हैं। नवंबर 2016 का दौर झारखंड में इतिहास में उथल-पुथल भरा रहा। रघुवर दास के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने दो सदियों पुराने भूमि कानूनों- छोटानागपुर काश्तकारी (सीएनटी) और संथाल परगना काश्तकारी (एसपीटी) अधिनियमों में संशोधन पारित किया था। इस संशोधन के तहत जमीन की औद्योगिक उपयोग के लिए अनुमति देना आसान हो जाता। राज्यभर में आदिवासी समुदाय ने इस संशोधन का पुरजोर विरोध किया और प्रदर्शन किया। इसे राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू के पास भेजा गया। द्रौपदी ने सरकार से सवाल किया कि इस संशोधन से आदिवासियों को कितना फायदा होगा। इस कानून पर विचार करने के बाद उन्होंने यह विधेयक सरकार को वापस कर दिया और मुहर नहीं लगाई। द्रौपदी मुर्मू भले ही आदिवासी क्षेत्र से ताल्लुक रखती हैं, लेकिन लीडरशिप और चीजों को तोलमोल कर उन पर विश्वास करने की खूबी उन्हें उनके पिता और दादा से मिली। उनके पिता और दादा दोनों ही ग्राम परिषद के मुखिया रहे हैं। इसी प्रकार 1 दिसंबर, 2018 को रांची की नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च में दीक्षांत समारोह था। द्रौपदी मुर्मू कार्यक्रम में बतौर कुलाधिपति मौजूद थीं। अपने भाषण के दौरान जब मुर्मू स्वतंत्रता आंदोलन में वकीलों की भूमिका के बारे में बात कर रही थीं, तब उन्होंने महात्मा गांधी, जवाहर लाल नेहरू और बीआर अंबेडकर की तारीफ की। उन्होंने संविधान निर्माण में इन नेताओं के योगदान की खुलकर प्रशंसा की। और भी कुछ मौकों पर द्रौपदी मुर्मू की मुखरता देखने को मिली है। वह अपनी ही पार्टी की सरकार की आलोचना करने से नहीं चूकीं। नवंबर 2018 में अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सम्मेलन में उन्होंने कहा था कि भले ही झारखंड राज्य सरकार (तब बीजेपी) और केंद्र सरकार, आदिवासियों को बैंकिंग सेवाओं और अन्य योजनाओं के लाभ देने के लिए काम कर रहे हों, लेकिन एससी और एसटी की स्थिति आज भी इस दिशा में बेहद खराब बनी हुई है। द्रौपदी मुर्मू को देश के सर्वोच्च पद पर बैठाकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जो दांव खेला है वो अहम है। द्रौपदी मुर्मू आदिवासी हैं, जमीन से जुड़ी हैं, उनका लंबा राजनीतिक अनुभव है और बिल्कुल बेदाग है।द्रौपदी ने 1997 में रायरंगपुर नगर पंचायत में पार्षद चुनाव जीतकर अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी। उन्होंने भाजपा के अनुसूचित जनजाति मोर्चा के उपाध्यक्ष के रूप में काम किया है। इसके साथ ही वह भाजपा के आदिवासी मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सदस्य भी रह चुकी हैं। आजादी के बाद पहला मौका है जब कोई आदिवासी राष्ट्रपति के पद पर पहुंचा है इसीलिए बीजपी द्रौपदी मुर्मू के राष्ट्रपति बनने का जश्न देश के 100 से ज्यादा आदिवासी बहुल जिलों और 1 लाख 30 हजार गांवों में मनाएगी यानि अब बीजेपी आदिवासियों के बीच अपनी पैठ को और मजबूत करने की कोशिश करेगी।बात सिर्फ ओडिशा की नहीं है, देश के अलग-अलग राज्यों में 495 विधानसभा सीटें ऐसी हैं जो शेड्यूल ट्राइब्स के लिए रिजर्व हैं। इसी तरह लोकसभा की 47 सीटें अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित हैं। राज्यों की बात करें तो गुजरात की 27, राजस्थान की 25, महाराष्ट्र की भी 25, मध्यप्रदेश में 47, छत्तीसगढ़ में 29, झारखंड में 28 और ओडिशा की 33 सीटों पर आदिवासी समाज के वोटर्स हार जीत का फैसला करते हैं। इस वक्त गुजरात की आदिवासी बहुल 27 में से सिर्फ 9 सीट बीजेपी के पास हैं। गुजरात में इसी साल चुनाव होने हैं इसी तरह राजस्थान में 25 में से 8, छत्तीसगढ़ में 29 में से सिर्फ 2 और मध्यप्रदेश में शेड्यूल ट्राइब्स के लिए रिजर्व 47 सीटों में से सिर्फ 16 सीट बीजेपी के पास हैं यानी पिछले चुनाव में आदिवासियों के लिए आरक्षित सीटों में बीजेपी का प्रदर्शन उसकी उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा। अब बीजेपी को उम्मीद है कि द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति बनाने से आदिवासी समुदाय के लोगों में पार्टी को लेकर सही मैसेज जाएगा और चुनावों में इसका फायदा मिलेगा। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| विपक्ष को मुद्दा सौंपने का निरर्थक पत्र Posted: 22 Jul 2022 08:55 AM PDT विपक्ष को मुद्दा सौंपने का निरर्थक पत्र(डॉ दिलीप अग्निहोत्री-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा) मंत्रिपरिषद से त्यागपत्र देना प्रत्येक सदस्य का अधिकार है। संविधान में इसकी प्रक्रिया का उल्लेख है। प्रदेश मंत्रिपरिषद के सदस्य सीधे राज्यपाल को अपना त्यागपत्र सौप सकते हैं किन्तु इस्तीफे के नाम पर विपक्ष को मुद्दा सौपना अलग विषय है। योगी सरकार के राज्यमंत्री दिनेश खटीक ने जाने अनजाने यही किया है। अब वह सामान्य रूप से अपना कार्य कर रहे हैं लेकिन उनके एक कदम से सरकार और भाजपा दोनों को अप्रिय स्थिति का सामना करना पड़ा। द्रोपदी मुर्मू के राष्ट्रपति निर्वाचित होने के समय इस प्रसंग का उठना विशेष रूप से आपत्ति जनक था।भाजपा हाईकमान की पहल पर पहले राम नाथ कोविद राष्ट्रपति बने थे। उनका स्थान वनवासी समुदाय की द्रोपदी मुर्मू लेंगी। डॉ आंबेडकर पंच तीर्थ को भाजपा सरकार ने ही भव्य रूप में प्रतिष्ठित किया। मोदी और योगी सरकार ने दलितों का जीवन स्तर उठाने में अभूतपूर्व कार्य किया है। दिनेश खटीक के एक पत्र पर उस भाजपा पर विपक्ष टिप्पणी कर रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ईमानदारी और सुशासन के प्रति निष्ठा निर्विवाद है। उनकी पिछली सरकार ने इस दृष्टि से मिसाल कायम की थी जबकि इसके पहले प्रदेश सरकारों पर अनेक आरोप लगा करते थे जिसके चलते सत्ता में उनकी वापसी नहीं हो सकी थी। योगी आदित्यनाथ को दुबारा जनादेश मिला है। उनकी सरकार ने सौ दिन में पिछली बार के मुकाबले अधिक तेजी से कार्य किया है। अल्प अवधि में विकास यात्रा अभूतपूर्व ढंग से आगे बढ़ी है। इस आधार पर अगले पांच वर्ष का आकलन किया गया। यह सही है कि कुछ विभागों में ट्रांसफर को लेकर आरोप लगे हैं। योगी आदित्यनाथ ने इस पर अपनी कार्य शैली के अनुरूप सख्ती दिखाई है। पूर्ववर्ती और योगी सरकार के बीच फर्क साफ दिखाई दे रहा है। योगी कार्रवाई कर रहे हैं। उनको किसी भी दशा में अनियमितता बर्दाश्त नहीं हैं। किसी भी सरकार के लिए यह नाजुक मौका होता है। खासतौर पर ईमानदारी के लिए विख्यात योगी आदित्यनाथ के लिए। सम्बन्धित मंत्रियों को भी अपनी जिम्मेदारी व जवाबदेही समझनी चाहिए। यह अजीब लगता हैं कि विवाद और दोषियों के विरुद्ध किसी मंत्री को यह लगे कि उसकी सुनवाई नहीं हो रही है। भाजपा परिवार आधारित पार्टी नहीं है। इसमें आंतरिक प्रजातंत्र है। मंत्रियों को अपनी बात उचित फोरम पर रखने का अधिकार है लेकिन चार महीने की खामोशी के बाद अपने को लाचार दिखाना अजीब लगता है। मुख्यमन्त्री सरकार का मुखिया होता है। इसलिए नाजुक समय में सम्बन्धित मंत्रियों को मुख्यमंत्री के संपर्क में रहना चाहिए था। पत्र वायरल करना या प्रदेश की राजधानी छोड़ कर अन्यत्र चले जाना समस्या का समाधान नहीं है। जाहिर है कि योगी सरकार के मंत्री दिनेश खटीक का पत्र चर्चा में है। करीब चार महीने की खामोशी के बाद उन्हें अपनी उपेक्षा का अनुभव हुआ। शायद वह अवसर की तलाश में थे। उनके विभाग में ट्रांसफर पर अनियमितता के आरोप लगे तभी उन्होंने अपना इस्तीफा और पत्र केंद्रीय गृह मंत्री को भेज दिया। यह निर्णय चैकाने वाला था। वह मुख्यमंत्री को प्रकरण की जानकारी दे सकते थे। अपनी व्यथा से उनको अवगत करा सकते थे। इसका समाधान निकल सकता था। राज्यपाल को अपना इस्तीफा दे सकते थे। एक ही बार में उनकी इच्छा पूरी हो जाती। लेकिन इन सहज विकल्पों को छोड़ कर उन्होने प्रचार को महत्त्व दिया। उनके इस्तीफे को स्वीकार करना केंद्रीय गृह मंत्री का कार्य नहीं है। दिनेश खटीक को यह भी बताना चाहिए कि उन्होंने इस्तीफे के लिए यही समय क्यों चुना। ट्रांसफर में गड़बड़ी की बात सामने आने के बाद ही उन्होने पत्र क्यों लिखा। क्या यह प्रसंग नहीं उठता तो क्या वह अपनी स्थिति से संतुष्ट बने रहते। इसके पहले कभी नहीं लगा कि वह अपनी अवहेलना से व्यथित है। कुछ दिन पहले सरकार ने सौ दिन की उपलब्धि का रिपोर्ट कार्ड जारी किया था। प्रदेश में व्यापक स्तर पर कार्यक्रम हुए थे। दिनेश खटीक उसमें सहभागी थे। कहीं भी उनकी नाराजगी दिखाई नहीं दी।जब इतना रुके थे तो कुछ दिन और धैर्य रख लेते। यह द्रोपदी मुर्मू के राष्ट्रपति निर्वाचित होने का समय था। भाजपा हाईकमान की पहल पर देश में पहली बार सर्वोच्च पद पर वनवासी समुदाय की सदस्य प्रतिष्ठित होने जा रही थी। देश में उत्साह का माहौल था। विपक्षी पार्टियों में निराशा थी। इसी समय दिनेश खटीक ने विपक्ष को मुद्दा सौप दिया।वैसे भी राजनीति में व्यक्तिगत मसलों को उससे सम्बन्धित समाज से जोड़ दिया जाता है। इस प्रकरण में भी यही हुआ। नाराज केवल दिनेश खटीक थे। विपक्ष ने भाजपा पर हमला बोल दिया।कहा कि भाजपा में दलितों की उपेक्षा हो रही है। उधर वनवासी महिला के राष्ट्रपति निर्वाचित होने का उत्साह था, इधर दिनेश खटीक का पत्र चर्चा में आ गया। गनीमत यह कि इस प्रकरण को विशेष महत्त्व नहीं मिला क्योंकि जो पार्टियां भाजपा पर आरोप लगा रहीं थीं, वह खुद जवाबदेह थीं। दलितों वंचितों के हित में सर्वाधिक कार्य वर्तमान केंद्र और प्रदेश सरकार ने किए है। अन्य पार्टियों की सरकारें इस मामले में बहुत पीछे छूट गई है। इतना ही नहीं उनकी सरकारों में भी राज्यमंत्री इससे बेहतर स्थिति में नहीं होते थे। ऐसे में एक दिनेश खटीक के पत्र से सच्चाई बदल नहीं सकती। इसी प्रकार का आचरण स्वामी प्रसाद मौर्य ने किया था पहले वे कहते थे सपा बसपा सरकार ने दलितों वंचितों के लिए जितना कार्य किया उससे अधिक योगी सरकार ने पांच वर्ष में करके दिखा दिया। तब वह सपा बसपा को नागनाथ सांपनाथ से विभूषित करते थे। चुनाव के पहले दम घुटने लगा तो निशाना बदल दिया। सपा अच्छी लगने लगी, उसकी जगह भाजपा नागनाथ हो गई। स्वामी प्रसाद ने अपने को खुद ही नेवला घोषित किया था। लेकिन क्षेत्र बदलने के बाद वह विधानसभा नहीं पहुँच सके थे। कभी वह अखिलेश यादव को सर्वाधिक विफल मुख्यमन्त्री कहते थे, आज उनके साथ हैं। ऐसे लोग अगले चुनाव तक कहाँ होंगे,यह कोई नहीं जानता। संविधान निर्माताओं ने भारत में संसदीय शासन व्यवस्था स्थापित की है। इसमें मंत्रिपरिषद सामूहिक उत्तरदायित्व की भावना से कार्य करती है। इसके अनुरूप मंत्री बनने के लिए पद के साथ गोपनीयता की शपथ लेनी पड़ती है। यदि विधानमंडल किसी एक मंत्री के विरुद्ध निंदा प्रस्ताव पारित कर दे तो पूरी मंत्री परिषद को त्यागपत्र देना होता है। यह संसदीय प्रणाली के सामूहिक उत्तर दायित्व का तकाजा है। मंत्रिमंडल के निर्णय सामूहिक उत्तरदायित्व के अनुरूप ही सार्वजनिक किए जाते हैं। यह संविधान की व्यवस्था व भावना है। उनका एक अधिकार अवश्य सुरक्षित रहता है। वह किसी भी समय अपने मंत्री पद से त्याग पत्र दे सकते हैं। यदि मंत्री को लगता है कि सरकार गरीब, वंचित, दलित, पिछड़ा, किसान विरोधी है,या उसके विचारों को महत्व नहीं मिल रहा है, तो वह मंत्री परिषद से अपने को अलग कर सकता है। लेकिन नैतिक रूप में इसके लिए आरोप तर्क संगत होने चाहिए। अन्यथा खुद की छवि पर ही प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें 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| हमारी आन-बान और शान है तिरंगा: मोदी Posted: 22 Jul 2022 08:51 AM PDT हमारी आन-बान और शान है तिरंगा: मोदी(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)
आप और हम आज जिस तिरंगे पर गर्व करते हैं, जो हमारे देश की आन,बान,शान है वह आज ही के दिन यानि 22 जुलाई को भारत का राष्ट्रीय ध्वज बना था। दरअसल 22 जुलाई 1947 को ही भारत ने तिरंगे को अपना राष्ट्रीय झंडा माना था। इसी के बारे में जानकारी देते हुए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ट्वीट करते हुए लिखा, 22 जुलाई का हमारे इतिहास में अहम योगदान है, आज ही के दिन 1947 में हमें हमारा झंडा मिला था। मैं हमारे तिरंगे से जुड़े कुछ रोचक तथ्य शेयर कर रहा हूं। इसमें तिरंगे से जुड़ी कमेटी और पंडित नेहरू द्वारा फहराए गए पहले तिरंगे के साथ-साथ इतिहास की कुछ दिलचस्प यादें हैं। 22 जुलाई ही वह खास दिन है जब संविधान सभा ने देश के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद के नेतृत्व वाली कमिटी की सिफारिश पर तिरंगे को देश के राष्ट्रीय ध्वज के तौर पर अपनाया था। हमारे राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को पिंगली वेंकैया ने डिजाइन किया था। पिंगली वेंकैया को महात्मा गांधी ने तिरंगे को डिजाइन करने की जिम्मेदारी सौंपी थी। पिंगली वेंकैया की गांधी जी से मुलाकात दक्षिण अफ्रीका में हुई थी। इस दौरान वेंकैया ने अपने अलग राष्ट्रध्वज होने की बात कही जो गांधीजी को अच्छी लगी। वहीं बापू ने उन्हें राष्ट्रध्वज डिजाइन करने का काम सौंपा दिया जिसके चलते वह भारत वापस लौट आए और इस पर काम शुरू कर दिया। पिंगली वेंकैया ने लगभग 5 सालों के अध्ययन के बाद तिरंगे का डिजाइन तैयार किया। इसमें उनका सहयोग एस.बी.बोमान और उमर सोमानी ने दिया और उन्होंने मिलकर नैशनल फ्लैग मिशन का गठन किया।झंडा डिजाइन करते वक्त पिंगली वेंकैया ने गांधी जी से सलाह मांगी। उन्होंने ध्वज के बीच में अशोक चक्र रखने की सलाह दी जो पूरे राष्ट्र की एकता का प्रतीक है। पिंगली वेंकैया ने पहले हरे और लाल रंग के इस्तेमाल से झंडा तैयार किया था, मगर गांधीजी को इसमें संपूर्ण राष्ट्र की एकता की झलक नहीं दिखाई दी और फिर झंडे में रंग को लेकर काफी विचार-विमर्श होने शुरू हो गए। आखिरी में साल 1931 में कराची कांग्रेस कमिटी की बैठक में उन्होंने ऐसा ध्वज पेश किया जिसमें बीच में अशोक चक्र के साथ केसरिया, सफेद और हरे रंग का इस्तेमाल किया गया था। तिरंगे से पहले देश को पांच और झंडे मिले थे। भारत का पहला राष्ट्रीय ध्वज 7 अगस्त 1906 को सामने आया था। इसे तत्कालीन कलकत्ता के पारसी बगान चैक में फहराया गया था। दरअसल यह भी एक तिरंगा था, लेकिन इसमें हरे, पीले और लाल रंग की पंट्टियां थीं। हरे रंग की पट्टी में आठ कमल के फूल, लाल रंग की पट्टी में चांद और सूरज और बीच में पीले रंग की पट्टी में वंदे मातरम् लिखा हुआ है। भारतीय इतिहास में देश का दूसरा राष्ट्रीय ध्वज की चर्चा 1907 में होती है। इसे मैडम भीखाजी कामा द्वारा पेरिस में फहराया गया था। यह ध्वज काफी कुछ 1906 के झंडे जैसा ही था, लेकिन इसमें सबसे ऊपर की पट्टी का रंग केसरिया था और कमल के बजाए सात तारे सप्तऋषि प्रतीक थे। नीचे की पट्टी का रंग गहरा हरा था जिसमें सूरज और चांद अंकित किए गए थे।देश में तीसरे झंडे की तस्वीर 1917 में सामने आती है। इसे होम रूल आंदोलन के दौरान फहराया गया था। इस झंडे में पांच लाल और चार हरी क्षैतिज पट्टियां थीं जिसके अंदर सप्तऋषि के सात सितारे थे। बांयी ओर ऊपरी किनारे पर यूनियन जैक भी मौजूद था। एक कोने में सफेद अर्धचंद्र और सितारा भी था। देश का चैथा झंडा साल 1921 में सामने आया। विजयवाड़ा में हुए भारतीय कांग्रेस कमेटी के सत्र में एक झंडे का इस्तेमाल किया गया जिसे चैधा राष्ट्रीय ध्वज कहा गया। तीन रंगों की पट्टियों में गांधीजी के चरखें के प्रतीक को दर्शाया गया था। इस झंडे में तीन रंग- सफेग रंग के अलावा लाल और हरा रंग जो दो प्रमुख समुदायों अर्थात हिन्दू और मुस्लिम का प्रतिनिधित्व करता है। 1947 में अपनाए गए हमारे राष्ट्रीय ध्वज का स्वरूप काफी कुछ 1931 में अपनाए गए राष्ट्रीय ध्वज जैसा ही है। इस झंडे में तीन रंग- केसरिया, सफेद और हरे रंग की पट्टियां थीं। सफेद पट्टी के बीचों-बीच गांधी जी के चरखा का प्रतीक बनाया गया था। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| अफ्रीकी देशों में लगाया गया पहला मलेरिया रोधी टीका Posted: 22 Jul 2022 08:50 AM PDT अफ्रीकी देशों में लगाया गया पहला मलेरिया रोधी टीकाब्लांटायर। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने तीन अफ्रीकी देशों में दुनिया का पहला अधिकृत मलेरिया रोधी टीका लगाने की घोषणा की है। लेकिन इस टीके के मूल्य को लेकर इसके सबसे बड़े समर्थक बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन ने चिंता जताते हुए इस टीकाकरण कार्यक्रम को वित्तीय समर्थन नहीं देने का फैसला लिया है। डब्ल्यूएचओ ने इस टीके को मलेरिया के खिलाफ लड़ाई में एक 'ऐतिहासिक' सफलता करार दिया है, लेकिन बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन ने इस सप्ताह एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि वह अब इस टीके को वित्तीय समर्थन नहीं देगा। कुछ वैज्ञानिकों ने कहा कि वे फाउंडेशन के इस निर्णय से निराश हैं। उन्होंने आगाह किया कि इससे लाखों अफ्रीकी बच्चों की मलेरिया के कारण मौत हो सकती है। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| चीन में शी जिनपिंग की नीतियों के खिलाफ विद्रोह Posted: 22 Jul 2022 08:46 AM PDT चीन में शी जिनपिंग की नीतियों के खिलाफ विद्रोहबीजिंग। चीन के 31 में से 24 प्रांतों के लोग चीन के राष्ट्रपति शी जिपिंग की नीतियों से परेशान होकर विद्रोह पर उतर आए हैं। इन प्रांतों में 235 हाउसिंग प्रोजेक्ट के 1.3 करोड़ लोग होम लोन की किस्त जमा नहीं करा रहे हैं। इन लोगों का कहना है कि बिल्डर प्रॉपर्टी पर समय से कब्जा नहीं दे रहा है तो फिर हम होम लोन की किस्तें क्यों जमा कराएं। देखा जाए तो ऐसा पहली बार हो रहा है जब राष्ट्रपति शी जिनपिंग को पहली बार मिडिल क्लास के लोगों के विद्रोह का सामना करना पड़ा रहा है। दरअसल, कोरोना काल के दौरान चीन में लॉकडाउन और सख्त कोविड नीतियों के चलते प्रॉपर्टी सेक्टर को काफी नुकसान उठाना पड़ा। ऐसे में समय पर प्रोजेक्ट पूरे नहीं पा रहे हैं। रिसर्च इंस्टीट्यूट कैपिटल इकोनोमिक्स के जूलियन इवांस का कहना है कि प्रॉपर्टी सेक्टर की मंदी जल्द ही चीन के अन्य सेक्टर पर भी असर डालेगी।मिडिल क्लास का यह विद्रोह उनके लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकती है। क्योंकि नवंबर महीने में कम्युनिस्ट पार्टी के अधिवेशन में में जिनपिंग तीसरी बार राष्ट्रपति पद के लिए दावेदारी करेंगे। चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के लगभग 10 करोड़ सदस्य प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से इस चुनाव में वोटिंग करेंगे। चीन में लंबे समय तक चले लॉकडाउन और जीरो कोविड पॉलिसी के चलते चीन दुनिया से एक तरह अलग-थलग पड़ गया। जानकारों के मुताबिक देश में गुस्सा और कम्युनिस्ट पार्टी के प्रति लॉयल्टी में कमी आई। बताया जाता है कि जिनपिंग बाहरी और आंतरिक समस्याओं का सामना कर रहे हैं। चीन में करीब 70 फीसदी लोगों ने प्रॉपर्टी में इन्वेस्टमेंट किया है। यह इन्वेस्टमेंट अमेरिका की तुलना में कहीं ज्यादा है। इसलिए यह विरोध भारी पड़ सकता है। वैसे भी जिनपिंग तीसरे कार्यकाल की तैयारी कर रहे हैं। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| लिज ट्रस ने ऋषि सुनक को पीएम की दौड़ में पीछे ठेला Posted: 22 Jul 2022 08:44 AM PDT लिज ट्रस ने ऋषि सुनक को पीएम की दौड़ में पीछे ठेलालंदन। ब्रिटेन में इन दिनों एक नाम की खूब चर्चा है। ये नाम है ऋषि सुनक। भारतीय मूल के ऋषि सुनक को ब्रिटिश प्रधानमंत्री पद के लिए सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा था। अब तक की हुई वोटिंग में सुनक को खुद को साबित भी किया लेकिन अब लगता है कि सुनक का ये सपना शायद ही पूरा हो। एक नए सर्वे में विदेश सचिव लिज ट्रस ने ब्रिटेन के अगले प्रधानमंत्री बनने की दौड़ में ऋषि सुनक पर 28 वोटों की बढ़त बना ली है। एक प्रमुख ब्रिटिश अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट-आधारितम मार्केट रिसर्च और डेटा एनालिसिस फर्म सर्वे के मुताबिक, गुरुवार को कंजर्वेटिव पार्टी के सदस्यों ने बोरिस जॉनसन के उत्तराधिकारी चुनने के लिए ऋषि सुनक और लिज ट्रस के लिए अंतिम चरण की वोटिंग में हिस्सा लिया। अब दोनों के लिए सिंतबर की शुरुआत तक वोटिंग होगी। स्काई न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, इस हफ्ते की शुरुआत में आंकड़े बताते हैं कि 46 वर्षीय ट्रस 42 वर्षीय पूर्व चांसलर ऋषि सुनक को आमने-सामने की लड़ाई में 19 अंकों से हरा देंगी। अब टोरी सदस्यों के एक नए सर्वेक्षण से पता चलता है कि ट्रस ने अपनी मजबूत बढ़त बरकरार रखी है। ब्रिटेन में 730 कंजर्वेटिव पार्टी के सदस्यों के सर्वेक्षण के अनुसार, 62 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वो ट्रस को वोट देंगे जबकि 38 प्रतिशत लोगों ने ऋषि सुनक के साथ जाने का फैसला किया। कुछ लोगों ने दोनों में से किसी को वोट नहीं देने की बात भी कही। ट्रस के पास दो दिन पहले 20 अंकों की बढ़त से 24 प्रतिशत अंक की बढ़त है। पीएम की कुर्सी तक पहुंचने के लिए अब सुनक को अनुमानित तौर पर कंजर्वेटिव पार्टी के एक लाख 60 हजार मतदाताओं को अपने पक्ष में पोस्टल बैलेट डालने के लिए तैयार करना होगा। ट्रस और सुनक के बीच इस सोमवार को बीबीसी पर लाइव डिबेट होगी। इस डिबेट पर सबकी निगाहें टिकी होंगी। इसके बाद पोस्टल बैलेट पर वोटिंग होगी। 5 सितंबर को दुनिया के सामने यूके के नए प्रधानमंत्री का नाम सामने आएगा। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| दिनेश गुणवर्धने श्रीलंका के पीएम Posted: 22 Jul 2022 08:42 AM PDT दिनेश गुणवर्धने श्रीलंका के पीएमऽभारत से रहा है गहरा नाता कोलंबो। श्रीलंका में राष्ट्रपति के बाद नए प्रधानमंत्री के नाम का ऐलान भी हो चुका है। 72 साल के दिनेश गुणवर्धने नए प्रधानमंत्री बनाए गए हैं। संसद में सदन के नेता ने शुक्रवार को पीएम पद की शपथ ली। गुणवर्धने पिछली गोटबाया-महिंदा सरकार में विदेश मामलों और शिक्षा मंत्री थे। उनके परिवार का भारत से गहरा नाता रहा है। गुणवर्धने के पिता फिलिप गुणवर्धने ने भारत की स्वतंत्रता के लिए लड़ाई लड़ी थी। संयुक्त राज्य अमेरिका और नीदरलैंड में शिक्षित दिनेश गुणवर्धने एक ट्रेड यूनियन नेता और अपने पिता फिलिप गुनावर्धने की तरह एक भयंकर सेनानी रह चुके हैं। फिलिप गुनावर्धने को श्रीलंका में समाजवाद के जनक के रूप में जाना जाता है। फिलिप गुनावर्धने का भारत के प्रति प्रेम और साम्राज्यवादी कब्जे के खिलाफ स्वतंत्रता की दिशा में प्रयास 1920 के दशक की शुरुआत में संयुक्त राज्य अमेरिका से शुरू हुआ था। इस काम में उनकी पत्नी मे भी बखूबी साथ दिया। फिलिप गुणवर्धने विस्कॉन्सिन विश्वविद्यालय में जयप्रकाश नारायण और वीके कृष्ण मेनन के सहपाठी रह चुके थे। उन्होंने अमेरिकी राजनीतिक हलकों में साम्राज्यवाद से स्वतंत्रता की वकालत की। बाद में लंदन में भारत की साम्राज्यवाद विरोधी लीग का नेतृत्व भी किया। बहुत कम लोग जानते हैं कि उनके परिवार का भारत से घनिष्ठ संबंध रहा है। पूरे गुणवर्धने परिवार का भारत समर्थक झुकाव है। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान श्रीलंका (तब एक ब्रिटिश उपनिवेश, सीलोन) से भागने के बाद प्रधानमंत्री के पिता फिलिप और मां कुसुमा ने भारत में शरण ली थी। वे उन भूमिगत कार्यकर्ताओं में शामिल हो गए थे, जो आजादी के लिए लड़ रहे थे और कुछ समय के लिए गिरफ्तारी से बच गए थे। 1943 में उन दोनों को ब्रिटिश खुफिया विभाग ने पकड़ लिया था। कुछ समय के लिए उन्हें बॉम्बे की आर्थर रोड जेल में रखा था। एक साल बाद फिलिप और उनकी पत्नी को श्रीलंका डिपोर्ट कर दिया गया और आजादी के बाद ही रिहा किया गया। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| जीकेसी 07 अगस्त को मनायेगा सावन महोत्सव Posted: 22 Jul 2022 08:23 AM PDT जीकेसी 07 अगस्त को मनायेगा सावन महोत्सवपटना से दिव्य रश्मि संवाददाता जितेन्द्र कुमार सिन्हा की खबर जीकेसी (ग्लोबल कायस्थ कॉन्फ्रेंस) की पटना जिला शाखा ने यह निर्णय लिया है कि आगामी 07 अगस्त को सावन महोत्सव मनाया जायेगा। उक्त जानकारी पटना जिला महासचिव धनंजय प्रसाद ने दी। उन्होंने बताया कि जीकेसी पटना जिला का बैठक पटना के मौर्यलोक कॉम्प्लेक्स स्थित वसंत बिहार रेस्टुरेंट में पटना जिला अध्यक्ष सुशील श्रीवास्तव की अध्यक्षता में गुरुवार को सम्पन्न हुआ। बैठक में पटना जिला के महिला सदस्यों ने भगवान महादेव के पावन त्योहार श्रावणी माह के अवसर पर "सावन महोत्सव" का आयोजन किया जायेगा। धनंजय प्रसाद ने बताया कि बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि रॉयल गार्डन नागेश्वर कॉलोनी स्थित केन्द्रीय कार्यालय पटना में "सावन महोत्सव" मनाया जायेगा। उन्होंने बताया कि महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष नन्दा कुमारी ने बैठक में आस्वस्थ की है कि "सावन महोत्सव" में पटना जिला की सभी महिला सदस्य उपस्थित रहेंगे। नंदा कुमारी ने यह भी कहा कि कार्यक्रम पूर्णतः महिलाओ के लिए होगा । कार्यक्रम को सफल एवं प्रभावशाली बनाने के लिए इसकी तैयारी में प्रबंध न्यासी रागिनी रंजन, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभारी बिहार दीपक कुमार अभिषेक के मार्गदर्शन और देखरेख में किया जायेगा। उन्होंने बताया कि बैठक में पटना जिला युवा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष पियूष श्रीवास्तव, पटना जिला महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष रश्मि सिन्हा, प्रदेश उपाध्यक्ष वंदना सिन्हा, सदस्य रचना सिन्हा, आराधना कुमारी सहित अन्य सदस्यगण उपस्थित थे। बैठक में पटना जिला महासचिव धनंजय प्रसाद ने बताया कि इस कार्यक्रम का आयोजन महिला सदस्यों के लिए किया जा रहा है, जिससे परिवार की महिलाए अपने दैनिक कार्यों से निकल कर सावन महोत्सव का आनंद ले सके। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| श्रीमद् भागवत कथा पूर्णाहुति में भजनों से रात भर झूमें लोग Posted: 22 Jul 2022 08:13 AM PDT श्रीमद् भागवत कथा पूर्णाहुति में भजनों से रात भर झूमें लोगबरहज मइल देवरिया से दिव्य रश्मि संवाददाता मण्डलेश्वर त्रिपाठी की खबर श्रीमद् भागवत कथा पूर्णाहुति में मईल थाना क्षेत्र के सोनबरसा गांव में रात भर प्रसिद्ध भजन गायक राजा तिवारी की टीम द्वारा रात भर भजनों के आनंद से सारोबार रहे इसमें प्रमुख रूप से जिधर तुम छुपे हो उधर देखना है कन्हैया तुम्हें एक बार देखना है।मो से नैना लड़ा गई रे । देखकर रामजी को जनक नंदिनी बागों में खड़ी की खड़ी रह गई। अगर नाथ देखोगे अवगुण हमारे तो हम कैसे भाव से लगेंगे किनारे। करते हो तुम कन्हैया मेरा नाम हो रहा है आदि भजन प्रमुख रूप से सुनाया गया जिसमें नाल पर सुनील राजभर ऑटो पैड पर अमूल्य पांडे तथा बैंजो पर प्रमोद त्रिपाठी सोनबरसा निवासी ने सहयोग प्रदान किया इसमें प्रमुख रूप से मुख्य यजमान हरिद्वार तिवारी सच्चिदानंद तिवारी लाल साहब तिवारी मदन लाल खुराना श्रीनिवास तिवारी श्री राम सिंह अनूप लाल श्रीवास्तव श्रीप्रकाश यादव विश्राम यादव रामाशीष यादव ग्राम प्रधान गोहरिया बबलू तिवारी ऋषि बाबा पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य दिनेश्वर तिवारी श्री कृष्ण यादव धर्मेंद्र तिवारी रवि शंकर यादव अमित दुबे आशुतोष तिवारी भोला तिवारी मनीष यादव नागेश तिवारी शांति भूषण यादव मदन यादव आदि लोग मौजूद रहे हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 22 Jul 2022 08:04 AM PDT
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| "इनसे हैं हम" पुस्तक पर परिचर्चा एवं बहुभाषी काव्य गोष्ठी सम्पन्न Posted: 22 Jul 2022 08:42 AM PDT "इनसे हैं हम" पुस्तक पर परिचर्चा एवं बहुभाषी काव्य गोष्ठी सम्पन्नअंतरराष्ट्रीय शहर समता विचार मंच, कामरूप शाखा,असम के तत्वावधान में 21/07/22 को अपराह्न 3 बजे से गुवाहाटी प्रेस क्लब के कॉन्फ्रेंस हॉल में बहुचर्चित पुस्तक "इनसे हैं हम" पर परिचर्चा एवं बहुभाषी काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरूआत कुमुद शर्मा"काशवी" द्वारा सभी का अभिवादन करते हुए स्वागत उद्बोधन एंव अतिथियों का परिचय देते हुए आसन ग्रहण कराने से हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता का कार्यभार मंच की अध्यक्षा अवनीत कौर "दीपाली" ने सँभाला। प्रातः खबर के प्रधान संपादक श्री चंद्रप्रकाश शर्मा जी "मुख्य अतिथि", प्रागज्योतिष कॉलेज की अवकाश प्राप्त प्रोफेसर एवं लेखिका, साहित्यकारा डॉ.सुचित्रा काकोती "अतिविशिष्ट अतिथि", आयुर्वेदाचार्य, साहित्यकार ,समाजसेवी श्री शंकरलाल पारीक जी "विशिष्ट अतिथि",और जानी मानी साहित्यकारा एवं अनुवादक हरकीरत हीर जी की "विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थिति ने सभा को गौरवांवित कर दिया।आमंत्रित अतिथियों का स्वागत फुलाम गामोसा से किया गया।।तत्पश्चात अध्यक्षा अवनीत कौर दीपाली ने माँ सरस्वती के आगे दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। रीतामणि भुयाँ ने अपने सुमधुर कंठ से सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। सुश्री दीपाली ने मंच के उद्देश्यों की व्याख्या करते हुए कहा कि यह महिलाओं का मंच है और इस मंच की खास विशेषता यह है कि इसकी हर महीने "शहर समता" नामक मासिक पत्रिका निकलती है जिसमें महिला साहित्यकारों द्वारा रचित रचनाओं को शामिल किया जाता है। "इनसे हैं हम" पुस्तक पर परिचर्चा करते हुए लेखकीय तौर पर इससे जुडी़ अवनीत कौर दीपाली, कुमुद शर्मा काशवी, मालविका रायमेधि दास "मेधा" ने पुस्तक पर प्रकाश डालते हुए इससे जुडे़ अपने मंतव्य साझा किए। आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर भारतीय जन महासभा के अध्यक्ष श्री धर्मचंद्र पौद्दार जी और संरक्षक/प्रेरणास्रोत श्री आर के अग्रवाल जी के कुशल नेतृत्व एंव डॉ.अवधेश कुमार "अवध" जी द्वारा संपादित पुस्तक "इनसे हैं हम" भारत के उन गौरवशाली महापुरुषों को भावभीनी श्रद्धांजलि है जिन्हें या तो इतिहास के पन्नों में समुचित स्थान नहीं मिला या उनके बलिदानों को बिसरा दिया गया। "इनसे हैं हम" पुस्तक विस्मृत इतिहास को उजागर कर नवयुग में नवचेतना का आगाज है जिसमें पूरे भारतवर्ष से सम्मिलित इक्यावन प्रबद्ध लेखकों द्वारा इक्यावन महापुरुषों के गौरवशाली इतिहास का प्रेरणादायक वर्णन है। "इनसे हैं हम" पुस्तक पर अपने महत्वपूर्ण विचार रखते हुए श्री शंकरलाल पारीक जी ने भी हमारे गौरवशाली महापुरुषों से जुडी बहुत सी महत्वपूर्ण बातों से हमें अवगत कराया। चंद्रप्रकाश शर्मा जी के विचारों को सुनकर ऐसा लगा जैसे वे महिलाओं का बहुत सम्मान करते हैं। उन्होंने कहा कि हर वो महिला चाहे माँ, बेटी, पत्नी, बहन कोई भी हो हमारे लिए पूजनीय है, वो चाहे कम पढी़ लिखी हो पर हमारे मनोभावों को समझने में अग्रणी है। "प्रातः खबर" के प्रांगण में ही पुस्तकालय खुलने की जानकारी भी उन्होंने साझा की। डॉ. सुचित्रा काकोती ने अपने वक्तव्य में कहा कि स्त्री- पुरुष एक दूसरे के पूरक हैं, वे दोनों समानांतर हैं अतः दोनों में से कोई एक भी पीछे रह जाएगा तो समाज आगे नहीं बढ़ पाएगा। कुमुद शर्मा "काशवी" ने स्वरचित पंक्तियों द्वारा काव्यगोष्ठी का शानदार संचालन किया। सभी ने विभिन्न भावों से भरपूर प्रभावी काव्य पाठ किया। काव्य गोष्ठी में अंजना जैन, पुष्पा सोनी, आभा कुमारी चौधरी, कांता अग्रवाल, मंजुलता शर्मा, सविता जोशी, कल्पना कश्यप, अंजलि मुखिया, धरित्री देवी, रीमा दास, सौमित्रम, हेमलता गौलछा, रायमेधि दास "मेधा", रीतामणी भूयाँ, जूरी बैश्य, पुष्पा खेमका, मीनाक्षी देवी, प्रतिभा शर्मा, प्रज्ञा, माया शर्मा, गीता दत्ता सहरिया, कुमुद शर्मा "काशवी",अवनीत कौर "दीपाली" ने स्वरचित कविता पाठ कर गोष्ठी को सर्वोत्तम सफलता प्रदान की।साहित्यकारा हरकीरत हीर जी ने अपनी बहुचर्चित कविता "बदमाश औरत" सुना कर सभी को भाव विभोर कर दिया। मंच की उपाध्यक्षा गीता दत्ता सहरिया ने सभी का आभार प्रकट कर धन्यवाद ज्ञापन किया। असम संगीत के साथ सभा समाप्ति की घोषणा की गई। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 22 Jul 2022 07:49 AM PDT
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| Posted: 22 Jul 2022 07:46 AM PDT ---:भारतका एक.ब्राह्मण. संजय कुमार मिश्र 'अणु' ---------------------------------------- जहाँ आपका न आदर हो न मान उस जगह से जितनी जल्दी हो कर लें प्रस्थान और नहीं तो रहकर सहते रहे उपेक्षा अपमान यहाँ पर बहुत ऐसे हैं लोग जो आपको अपनी सामने बुला देते रहेगें बस औरों पर ध्यान लुटाकर मधुर मुस्कान ऐसे जैसे आपको है नहीं कुछ भान ऐसे लोगों से खुदको बचाईये हो सके तो ऐसे लोगों को उसकी औकात बताईये जो बना फिर रहा है महान कुछेक की आदत बन गई है अपने और अपनों का खुशामद और औरों को तो बससुनाते रहो अपनी बात जद-बद ऐसे स्वघोषित समाज के अगुवा बता रहा खुदको सजग पहरुआ लोग मुझे पहचाने कहा भी माने इसीलिए है ये तामझाम कबायद नहीं रहना ऐसे लोगों के साथ जो आमाद हो करवाने को दो-दो हाथ पाल मन में विद्वेष और मद बुन लिया है कुछ तानाबाना और उपर डाले हुए है लबादा कभी पुछता भी नहीं है कुछ हाल-चाल इरादा झुठे अभिमान से बढाकर कद जब खुलेगा पोल कहेंगे लोग........ हल्लाबोल पिटकर भद पर भद तुम चाहे जैसे भी हो उसी तरह से रहो दिल का दर्द मन की पीडा उससे कभी मत कहो चाहे इधर-उधर अकेला रहे नहीं चाहिए उसकी नदी हम खुश हैं पाकर नद बाकी सबकुछ कर दो रदहमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
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