| रिलाइन्स जिओ ने बढ़ाए 6G की तरफ कदम, 5G से 100 गुना तेज होगी स्पीड; जानिए खास बातें Posted: 20 Jan 2022 11:45 PM PST
जहां जियो ने अभी तक भारत में 5जी सेवाएं शुरू नहीं की हैं, वहीं जियो की सब्सिडियरी Estonia ने पहले ही 6जी पर काम करना शुरू कर दिया है. जियो एस्टोनिया ने घोषणा की है कि वह अगली पीढ़ी के 6जी नेटवर्क का पता लगाने के लिए University of Oulu के साथ काम करेगी जो भविष्य के वायरलेस एंड-टू-एंड सॉल्यूशन्स को यूजर रिक्वायर्मेंट की एक वाइड रेंज के लिए सक्षम करेगा. बता दें, 6G में 5G से 100 गुना ज्यादा स्पीड होगी.
5G से 100 गुना तेज होगा 6Gकंपनी ने आगे बढ़ने की अपनी योजनाओं का खुलासा नहीं किया है, लेकिन यह उल्लेख किया है कि "इस साझेदारी से एरियल और स्पेस कम्युनिकेशन, होलोग्राफिक बीमफॉर्मिंग, साइबर सिक्योरिटी, माइक्रो-इलेक्ट्रॉनिक और फोटोनिक्स में 3D कनेक्टेड इंटेलिजेंस को इंडस्ट्री और एकेडमी दोनों में बढ़ावा मिलेगा.'' 6जी नेटवर्क 5जी की तुलना में 100 गुना तेज स्पीड की पेशकश करेगा, जिसका अर्थ है सीमलेस डेटा ट्रांसमिशन के लिए डाउनलिंक स्पीड 1,000 जीबीपीएस जितनी अधिक होगी.इन सेक्टर्स पर रहेगा फोकसJio 6G का असर मैन्युफैक्चरिंग, डिफेंस और इंडस्ट्रियल मशीनरी पर भी पड़ेगा. यह नेटवर्क 5जी के साथ मौजूद होगा और बड़ी रेंज के कंज्यूमर्स और इंटरप्राइजेज को कवर करेगा. तकनीक की बात करें तो, 5G से 6G काफी बेहतर होगा इसका उद्देश्य तेज गति और बेहतर कनेक्टिविटी के साथ-साथ टेराहर्ट्ज फ्रिक्वेंसीज के माध्यम से सेल-फ्री MIMO, इंटेलिजेंट सर्फेस और हायर कैपेसिटी लाना होगाकई देशों में चल रहा है रिसर्चजियो प्लेटफॉर्म्स के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट आयुष भटनागर ने कहा, 'ओलू विश्वविद्यालय के साथ 6जी रिसर्च और केपेसिटीज में शुरुआती निवेश, 5जी में जियो लैब की क्षमताओं को पूरक कर सकता है और 6जी को जीवन में ला सकता है.' साबित करने के लिए पर्याप्त डेटा नहीं है, लेकिन यह माना जाता है कि 6G की गति 5G से 100 गुना तेज होगी. सैमसंग ने इस अगली पीढ़ी के नेटवर्क के लिए 1,000 जीबीपीएस तक की गति की कल्पना की है जिसका रिसर्च और डेवेलपमेंट चीन और जर्मनी जैसे देशों में शुरू हो चुका है.2025 तक लॉन्च हो सकता है 6Gजबकि 6G लॉन्च कम से कम 2025 तक होने की उम्मीद नहीं है, भारत 2023 या 2024 के अंत तक स्वदेशी रूप से विकसित और 6G तकनीक को तैनात करने के लिए आश्वस्त है. मिनिस्टर ऑफ कम्यूनिकेशन अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि "6G विकास पहले ही शुरू हो चुका है." |
| हिंसा करना, मारपीट ही नहीं है - डॉ. माध्वी बोरसे Posted: 20 Jan 2022 11:34 PM PST  बहुत से घर में हम देखते हैं, जहां किसी का बहुत ज्यादा अपमान होता है, खास तौर पर एक औरत का, जब आप उसे बार-बार यह कहते हैं, तुम्हें कुछ नहीं आता, तुम्हें आता ही क्या है, तुम कुछ नहीं कर सकती, जब बहुत सारे अपशब्द को उपयोग में लाते हैं, उसके स्वाभिमान को ठेस पहुंचाते हैं, पराए लोगो से संबंध बनाते हैं! मानसिक दर्द, अपमान, धोखा कभी भुलाया नहीं जा सकता, चाहे इंसान कितना ही आगे बढ़ जाए! याद रखिए, कभी-कभी आप जाने अनजाने में, अपने अभिमान में, अपने शौक को जीने मैं इतने मग्न हो जाते कि किसी को जिंदगी भर की पीड़ा दे जाते हैं और इसके बाद में दो-चार आंसू बहा देने से या माफी मांगने से वह पीड़ा कम नहीं होती और कुछ लोग तो अभिमान में इतने चूर होते हैं कि जब उनकी मृत्यु नजदीक होती है तब ही उन्हें समझ में आता है, की हमसे कोई गलती यह गुनाह भी हुआ!
स्वयं के साथ वक्त बिताए और जानिए ऐसे कौन-कौन से कर्म है जो हम किसी के साथ कर रहे हैं और हमें खुद के लिए मंजूर नहीं! जो हमें स्वयं के लिए मंजूर नहीं उसे आज से ही त्याग दीजिए, भूलिए मत पृथ्वी गोल है, कर्म अच्छे हो या बुरे दोबारा लौट के जरूर आते हैं!
आपको आज नहीं तो कल, इस बात का जरूर एहसास होता है, कि आपने किसी के साथ कितना गलत किया!
खुदा की मर्जी, जो जिसके लायक है उसे वही मिलेगा, इसे सोच कर अपने गलत कर्मों से बचने की कोशिश ना करें!
अगर जाने अनजाने में हमने किसी के साथ बुरा कर भी दीया, तो उनसे माफी मांगने के साथ-साथ, उनके साथ बहुत ज्यादा अच्छा करने की कोशिश कीजिए, कि शायद वो आपकी गलती को भूल जाएं, शायद उनके कुछ जख्म भर जाए!
आपको लगता है कि हमारी की गई गलती, किसी को दिया हुआ दर्द माफ हो सकता है, पर सोचिए अगर वह इंसान दुनिया के दिलों को जीत लेता है और सभी का पसंदीदा बन जाता है, कल को हर जगह या युगो युगो तक उसकी चर्चा होती है, तो भूलेगा नहीं की युगो युगो तक जिसने गलत कार्य किया है, उसका दिल दुखाया है, उसे तकलीफ पहुंचाई है, ऐसे अत्याचारी को कोई भी माफ नहीं करेगा, सभी के मुख से उसके लिए अच्छा नहीं निकलेगा, तो सोचिए उसकी आत्मा को शांति कब मिलेगी!
हम में से कोई यह नहीं चाहता है, पर चाहने और प्रयत्न करने में बहुत फर्क है, कोई भी इंसान कमजोर नहीं, कोई भी व्यक्ति डरपोक नहीं, बस बात इतनी सी है, की कुछ लोग छोटी-छोटी बातों को बड़ी नहीं बनाना चाहते और इसी कारण उनके लिए बड़ी बड़ी बातें छोटी हो जाती है, अगर एक औरत यह नहीं चाहती की उसके मां-बाप को या बच्चों को तकलीफ हो तो वह आपकी हर बात को नजरअंदाज करती रहती है, इसका मतलब यह नहीं कि आप कुछ भी बोलते रहें, आप उसके साथ कुछ भी करते रहे, खुदा सब देख रहा है और वह कर्मों का हिसाब शत प्रतिशत रखता है, दिखावा करना बंद करें, अगरबत्ती लगाने या उसके गुणगान गाने से पहले कुछ गुणों को अपने अंदर भी लाएं!
किसी का हौसला तोड़ना, किसी के स्वाभिमान को चोट पहुंचाना, किसी को आगे बढ़ने से रोकना, रोज रोज ताने मारना, बेइज्जत करना, किसी को मानसिक पीड़ा देना, घुट घुट के जीने पर मजबूर कर देना, अपने पति या पत्नी के होते हुए किसी गैर के साथ संबंध बनाना, किसी की आत्मा और मन पर चोट पहुंचाना, किसी के चरित्र पर उंगली उठाना, किसी के आत्मविश्वास को तोड़कर चकनाचूर कर देना, किसी के अस्तित्व पर वार करना, किसी को नीचा दिखाना यह सब भी हिंसा है!
हिंसा करने वाला हो या सहने वाला हो दोनों के अंदर ही एक कसक सी रह जाती है, दोनों ही दर्द में होते हैं!
चलो रहते हैं सब से प्रेम से, करते हैं पूरा विश्वास,
ना तोड़े अपनों का भरोसा, इतना हो हम मै सहास,
क्यों करें स्वयं को और किसी को उदास,
बस इतनी सी ही हे इस माध्वी की दरखास्त!!
 | डॉ. माध्वी बोरसे रावतभाटा (राजस्थान) |
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| नगर पालिका की उदासीनता के चलते नारकीय जीवन जीने को मजबूर अग्निहोत्री परिवार Posted: 20 Jan 2022 11:16 PM PST वैसे तो शहर की सफाई एवं स्वच्छता की जबावदेही नगरपालिका की होती है और इस नगरपालिका के अधिकारी व कर्मचारी मध्यमवर्गीय परिवारों के टैक्स से ही वेतन पाते है परंतु जब ईमानदारी के साथ टैक्स देने के बावजूद भी एक मध्यमवर्गीय परिवार को स्वच्छ परिवेश प्राप्त न हो और उसकी शिकायत पर नगर पालिका ध्यान न दे तो इसे नगरपालिका की उदासीनता, नगरपालिका के अधिकारियों कर्मचारियों की हठधर्मिता न कहा जाए तो क्या कहा जाए |
एक ऐसा ही प्रकरण सामने आया है जिसमें शहर के प्रियदर्शनी कालोनी निवासी एवं अपने जमाने के विख्यात रंगमंचकर्मी व प्रतिष्ठित कलाकार 68 वर्षीय ब्रजेश अग्निहोत्री इन दिनों अपनी समस्या को लेकर दर दर भटकने को मजबूर है और तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हे उनकी समस्या का कोई निराकरण दिखाई नहीं दे रहा है |
दरअसल ब्रजेश अग्निहोत्री के प्रियदर्शनी कालोनी स्थित उनके निवास के आगे आस पड़ोस के लोगों के घरों से निकला हुआ गंदा पानी भारी मात्रा में जमा हो रहा है, जिससे कोरोना के इस भयावह वातावरण में डेंगू सहित तमाम गंभीर बीमारियों के खतरे का डर अग्निहोत्री परिवार के छोटे छोटे मासूम बच्चों सहित अन्य परिजनों को सता रहा है | जब इसकी जानकारी अग्निहोत्री परिवार नें नगरपालिका के जिम्मेदार लोगों को दी तो उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ते हुए स्वयं ब्रजेश अग्निहोत्री से पूछा कि आप ही बताएं की इस समस्या का क्या समाधान है ? इसके बाद ब्रजेश अग्निहोत्री ने जब इस समस्या को सी एम हेल्पलाइन पर दर्ज कराया तो उन्हें वहाँ से बताया गया कि इस समस्या का निराकरण केंद्र सरकार की एजेंसी के माध्यम से किया जाएगा | तब उन्होंने सीएम हेल्प लाइन के द्वारा भेजी गई केंद्र सरकार की लिंक पर भी अपनी समस्या को दर्ज करा दिया है परंतु आज भी समस्या जस की तस बनी हुई है | कितनी हैरत की बात है कि जिस छोटी की समस्या को नगर पालिका के कर्मचारी अधिकारी यदि चाहें तो कुछ मिनटों में समाप्त कर सकते है उस छोटी सी समस्या को लेकर विगत 1 माह से एक 68 वर्षीय बुजुर्ग परेशान हो रहा है परंतु जिम्मेदारों की उदासीनता एवं हठधर्मिता के चलते वह सपरिवार नारकीय जीवन जीने को मजबूर हो रहा है |
पता नहीं अग्निहोत्री परिवार की इस समस्या का कोई निराकरण होगा अथवा नहीं परंतु एक वैध, सभ्रांत कॉलोनी में निवास करने वाले शहर के अपने जमाने के प्रसिद्ध रंगमंच कर्मी, प्रख्यात कलाकार, सेवानिवृत शासकीय कर्मचारी एवं शहर की समस्याओं को लेकर आंदोलनों में अपनी जबावदेही का निर्वाहन करने वाले 68 वर्षीय ब्रजेश अग्निहोत्री की यह दुखदायी व्यथा बहुत कुछ सोचने और समझाने को पर्याप्त है | |
| "सनातन की स्थापना का युद्ध" - नया नहीं है हमारे महायोद्धा के विरुद्ध कॉंग्रेस का षड्यंत्र - संजय तिवारी Posted: 06 Jan 2022 03:48 AM PST
मात्र 75 वषों के भीतर दो प्रधानमंत्रियों के बलिदान के बाद भी वही रवैया आतंकी षड्यंत्रों में शामिल कॉंग्रेस खुद का आकलन क्यों नहीं कर रही
भारत अपनी आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। इसी उल्लास में पंजाब को 48 हजार की विकास योजनाओं की सौगात देने के लिए भारत के प्रधानमंत्री कल भटिंडा की यात्रा पर थे। इस यात्रा में पंजाब की कोंग्रेसी सरकार की साजिश दुनिया ने देखी। यह वही पंजाब है जहां से खालिस्तान जैसे मुद्दे को राजनीति में भिंडरावाला जैसा आतंकी देकर इसी कॉंग्रेस ने श्रीमती इंदिरागांधी जैसी सशक्त प्रधानमंत्री की बलि दे दी। भिंडरवाला के माध्यम से ऐसा ही खेल तब भी खेला गया था। दक्षिण भारत मे इसी तरह का खेल खेल कर कॉंग्रेस ने राजीव गांधी जैसे उदीयमान नक्षत्र को खोया। आज के पंजाब में फिर कॉंग्रेस वैसा ही भयावह खेल खेल रही है। अपनी स्वाधीनता के मात्र 75 वर्षों में दो दो प्रधानमंत्री खो चुके देश की राजनीति आखिर कब अपना मूल्यांकन करेगी। भिंडरवाला और प्रभाकरण के इतिहास से दुनिया परिचित है।दुर्भाग्य यह है कि भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री के विरुद्ध षड्यंत्र की क्रियाविधि से कॉंग्रेस बाज नहीं आ रही। उसको अभी तक यह आभास ही नहीं हो सका है किजिस नरेंद्र मोदी को वह खून का सौदागर कहती रही है वह नरेंद्र मोदी केवल भारत ही नहीं बल्कि विश्व के प्रत्येक सनातन संस्कृति वाले व्यक्ति के दिल मे सनातन की स्थापना के युद्ध मे एक महायोद्धा बन कर स्थापित हो चुके हैं। नरेंद्र मोदी जिस रूप में नए सनातन भारत का निर्माण कर रहे हैं, उनके साथ सभी दैवीय शक्तियां खड़ी हैं।कल भटिंडा में जो हुआ यदि भारत के ही किसी कोंग्रेसी प्रधानमंत्री के साथ हुआ होता तो अब तक पंजाब की सरकार बर्खास्त होकर वहां रात से ही राष्ट्रपति शासन स्थापित हो चुका होता। नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार ने अभी तक ऐसा कुछ नही किया है। जबकि कथित किसान आंदोलन के समय से ही अनेक ऐसे प्रमाण मौजूद हैं। ऐसे अनेक वीडियो हैं जिनमे पंजाबी पगड़ी में कथित किसान यह कहता दिख रहा है कि हमने इंदिरा को खत्म कर दिया और इसे भी करेंगे। यह अलग बात है कि शाहीन बाग से लेकर कथित किसान आंदोलन और लालकिले पर खालिस्तानी झण्डे की घटनाओं तक में जो कारवाई होनी चाहिए थी वैसी होती नहीं दिखी।दरअसल कॉंग्रेस ने देश को 1946 में पहुँचादिया है। अंग्रेजो की उत्तराधिकारी के रूप में फूट डालो, राज करो। विभाजन और राजनीति। खास तौर पर संगठित हिन्दू समाज को पहले सिख, जैन, बौद्ध आदि में तोड़ा और अब उससे भी नीचे की हरकतें। जब चुनाव आते हैं, इनकी ये हरकतें हर बार से नीचे की होने लगती हैं। अभी बीते साल बंगाल में सबने देखा है। महाराष्ट्र में इनके राज में सन्तो को जिंदा जला कर मार डालने की घटना को बहुत दिन नहीं बीते हैं। पहले बंगाल अब पंजाब। इन्हें अभी आभास भी नहीं है कि जो कल हुआ वह मोदी जैसे महायोद्धा के लिए अब नई शक्ति के साथ लड़ने की ऊर्जा देने वाला है। पहले किसान आंदोलन के नाम पर आतंक और पंजाब के हालात ऐसे कि देश के प्रधानमंत्री को अपनी जनसभा के स्थान तक न पहुचने दिया जाय? सुरक्षा सूत्रों का कहना है कि पंजाब में प्रदर्शनकारी पीएम के सुरक्षा घेरे के इतने पास आ गए थे कि SPG को गोली चलाने की इजाजत मांगनी पड़ी। मोदी जी को जब बिगड़ते हालात का अंदाजा हुआ तो उन्होंने एसपीजी को रोंका और वापस लौटने के आदेश दिए।अब यकीनन सोचने और निर्णय लेने का समय है कि सनातनता रहेगी या विधर्मी आतंकवाद। कैसे न माना जाय कि पंजाब की वर्तमान सरकार चीन और पाकिस्तान के निर्देश से संचालित हो रही है। कैसे न मान लिया जाय कि आज पृथ्वी पर वर्तमान में सनातन के सबसे बड़े योद्धा को मारने की ही साजिश थी?भारत के लिए और खासकर सनातन भारत के लिए आज की यह साजिश अक्षम्य है। पंजाब में ऐसी भारत विरोधी सरकार को एक मिनट भी बने रहने नही देना चाहिए। यह इस तथ्य का भी प्रमाण है कि चुनाव के नाम पर कांग्रेस और अन्य कई दल निश्चित रूप से किसी भारतीय शत्रु देश से सहयोग ले रहे हैं। पंजाब के हालात तो बंगाल और कश्मीर से भी बहुत बदतर है , यह प्रमाणित हो गया।वास्तविकता यह है कि वर्तमान में कॉंग्रेस के आलाकमान वाला जो परिवार है उसका इतिहास ही यही है। याद होगा सभी को। बात बहुत पुरानी नही है हकूमत राय बढेरा कराची में रहता था भारत विभाजन के बाद अपने परिवार के साथ मुरादाबाद आ गया । लड़का राजेन्द्र बढेरा ने शादी एक विदेशी कैथोलिक से की । जिससे दो लड़के और एक लड़की का जन्म हुआ । राजेन्द्र की पत्नी ने लड़को का नाम राबर्ट और स्टिफन रखा । प्रियंका का प्यार राबर्ट से सेन्ट स्टिफेन्स में शुरू ही हुआ था कि जयपुर अजमेर रोड पर राबर्ट की बहन की रोड एक्सीडेन्ट में मौत हो गयी । संदिग्ध मौत थी लेकिन रोड एक्सीडेन्ट के कारण बात आयी-गयी हो गयी । कुछ दिन बाद स्टिफन ने फांसी लगा ली । ये मौत भी संदिग्ध थी फिर इस मौत को भी भुला दिया गया । फिर कुछ दिन बाद राजेन्द्र बढेरा का शव दिल्ली के पहाड़गंज ईलाके के एक होटल में बेल्ट से पंखे में झूलता हुआ मिला । ये भी संदिग्ध था लेकिन इसको भी आत्महत्या का केस बनाकर मामला खत्म कर दिया गया । फिर इसके बाद वह शुभ दिन आया जब राबर्ट की शादी प्रियंका से तय हो गयी । विवाह का सारा जिम्मा पाकिस्तान की खुफिया एजेन्सी में कार्यरत महिला अधिकारी को दिया गया जो प्रियंका और राबर्ट की कामन फ्रेंड थी । यह रक्त रंजित इतिहास संजय गांधी की मौत से शुरू होकर राजेन्द्र बढेरा पर रूका । सब ठीक चल रहा था कि एक दिन अचानक सत्ता का केन्द्र नरेन्द्र मोदी बन गये । परिवार और पार्टी इस बात को अब तक पचा नही पायी है ।मोदी जी की कल की यात्रा पंजाब में थी। सड़क मार्ग से प्रधानमंत्री को कुछ दूर जाना था लेकिन इसी बीच आन्दोलनकारी के रूप में कुछ लोंगो ने प्रधानमंत्री को रास्ते में ही घेर लिया , हो सकता है ISI के एजेन्ट ही आन्दोलनकारी के रूप में रहे हो । पंजाब के सहारे पहले भी देश को खालिस्तान आन्दोलन की भेंट चढाने की कोशिश की गयी । सिख्खों को उकसा कर किसान आन्दोलन के जरिये पूरे एक साल तक गतिरोध पैदा किया गया । अभी हाल ही में बेअदबी पर हत्यायें और कोर्ट परिसर में बम विस्फोट और आज की ताजा तरीन घटना प्रधानमंत्री की सुरक्षा में सेंध । प्रधानमंत्री को यहाँ तक कहना पड़ गया कि "अधिकारी पंजाब के कांग्रेसी मुख्यमंत्री को बता दें कि किसी तरह जान बचाकर मैं वापस दिल्ली आया हूँ " । अब घृणा हो रही है ऐसे विपक्ष से। जब देश की सीमा पर चीन से तनाव होता है तो उसका नेता चीनी दूतावास में विमर्श करने जाता है। जब संसद चलती है तो उसका या तो पता नही रहता या विदेश में होता है। देश के लिए विदेशी मंचों पर जहर उगलने का तो जैसे ठेका ही है। |