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Friday, July 8, 2022

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भूस्खलन के चलते जम्मू श्रीनगर हाईवे बंद

Posted: 08 Jul 2022 09:24 AM PDT

भूस्खलन के चलते जम्मू श्रीनगर हाईवे बंद

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश के बाद हुए भूस्खलन के कारण राज्य का सबसे अहम जम्मू-श्रीनगर हाईवे बंद कर दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक शुक्रवार को रामबन जिले में कई स्थानों पर भारी बारिश के बाद हुए भूस्खलन के कारण हाईवे पर वाहनों की आवाजाही बंद कर दी गई। अमरनाथ यात्रा पर जा रहे तीर्थयात्रियों के एक जत्थे सहित लगभग 100 वाहन राजमार्ग पर विभिन्न जगहों पर फंसे हुए हैं। अधिकारियों के मुताबिक यह राजमार्ग 270 किमी लंबा है। यह राजमार्ग कश्मीर को देश के बाकी हिस्सों से हर मौसम में जोड़ने वाला एकमात्र मार्ग है। रामबन जिले में छह स्थानों पर पत्थरों के गिरने, भूस्खलन और मडस्लाइड के कारण हाईवे अवरुद्ध हो गया है। पुलिस उपाधीक्षक प्रदीप सैन (मुख्यालय) रामबन, जो चंद्रकूट में अमरनाथ यात्रा के अधिकारी भी हैं, ने कहा कि रामबन सेक्टर में सुबह 3 से 4 बजे के बीच भारी बारिश हुई है। उन्होंने बताया कि राजमार्ग महर, कैफेटेरिया मोड, चंबा, अनोखीफॉल, केलामोड और पंटियाल में बंद है। राजमार्ग को साफ करने का काम शुरू हो गया है और यातायात बहाल होने में कम से कम दो से तीन घंटे का और समय लगेगा।
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अगले महीने तक वंदे भारत ट्रेन का अपग्रेडेड वर्जन

Posted: 08 Jul 2022 09:20 AM PDT

अगले महीने तक वंदे भारत ट्रेन का अपग्रेडेड वर्जन

नई दिल्ली। ट्रेन से यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए अच्छी खबर है। देश की सेमी हाई स्पीड ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस से जुड़ी खबर यात्रियों को खुश करने वाली है। वर्ष 2019 में लांच की गई दो वंदे भारत ट्रेनों ने अब तक 14 लाख किलोमीटर का सफर तय कर लिया है और अपनी गति से यात्रियों की पसंदीदा ट्रेन बन गई है। अब अगले माह अगस्त में वंदे भारत का अपग्रेडेड वर्जन लांच होने जा रहा है। इस खबर का ऐलान खुद रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने किया है।दरअसल, रेल मंत्रालय और सरकार का लक्ष्य 2023 तक 75 वंदे भारत ट्रेनें चलाने का है। इसी कड़ी में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ऐलान किया है कि वंदे भारत के लिए 2 अपग्रेडेड वर्जन लाए जाएंगे। इसमें से एक वर्जन तो अगले महीने यानी की अगस्त में आ जाएगा जबकि दूसरा अपग्रेडेड वर्जन कुछ समय बाद लांच किया जाएगा। अश्विनी वैष्णव ने बताया कि सरकार चाहती है कि 15 अगस्त 2023 तक 75 वंदे भारत ट्रेनें पटरियों पर दौड़ने लगें। ऐसी स्थिति में अगस्त माह में ट्रेन के दो अपडेटेड वर्जन के बाद हर महीने 5 से 6 वंदे भारत ट्रेन को लाया जाएगा। तेज गति वाली इस ट्रेन से यात्रियों को काफी फायदा मिलेगा। आजादी का अमृत महोत्सव यानी स्वतंत्रता के 75 साल होने के उपलक्ष्य में पीएम मोदी ने पिछले साल 2021 में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर 75 नई वंदे भारत एक्सप्रेस को शुरू करने का लक्ष्य रखा था। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गांधीनगर में इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि वंदे भारत एक्सप्रेस के दो अपग्रेडेड वर्जन आने वाले हैं। सेकेंड अपग्रेडेड वर्जन अगस्त 2022 तक पटरी पर आ जाएगा। जबकि तीसरा अपग्रेडेड वर्जन आने में अभी समय लगेगा। फिलहाल ट्रेन का सस्पेंशन मेटल का बना है। वंदे भारत-2 में एयर स्प्रिंग लगाए जाएंगे। एयर स्प्रिंग से ट्रेन का सफर बहुत अच्छा हो जाएगा। रेल मंत्री ने बताया कि वंदे भारत के अपग्रेडेड वर्जन मौजूदा ट्रेन से भी ज्यादा एडवांस होंगे। अभी पटरियों पर दौड़ रही वंदे भारत की अधिकतम रफ्तार 160 किमी प्रति घंटा है। इसके दूसरे अपग्रेडेड वर्जन की अधिकतम गति 180 किमी प्रति घंटा और तीसरा अपग्रेडेड वर्जन 220 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकेगा। ये दोनों ट्रेन जिस भी रूट पर चलेंगी, वहां का सफर काफी कम समय तय किया जा सकेगा। दरअसल, रेल मंत्रालय की मंशा आने वाले समय में इंटरसिटी, शताब्दी और जन शताब्दी ट्रेनों को रिप्लेस कर संबंधित रूट पर वंदे भारत को शुरू करने की है। रेल मंत्री ने बताया कि नई वंदे भारत कई कई लग्जरी सुविधाओं से युक्त होगी।
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ठाकरे व शिंदे गुट में सुलह के संकेत

Posted: 08 Jul 2022 09:18 AM PDT

ठाकरे व शिंदे गुट में सुलह के संकेत

मुंबई। शिवसेना के बागी गुट के नेता अब उद्धव ठाकरे के लिए नरमी भरे बयान देने लगे हैं। सबसे पहले शिंदे गुट के प्रवकता दीपक केसरकर का बयान आया, जो पूरे महाराष्ट्र की राजनीतिक संकट के दौरान शिंदे गुट के प्रवक्ता के बतौर सक्रिय रहे। दीपक केसरकर ने कहा कि उद्धव ठाकरे को अब सुलह कर लेना चाहिए और इसके लिए बीजेपी से बात कर लेना चाहिए। दीपक ने कहा कि अब चूंकि शिवसेना विधायक बीजेपी के साथ मिल ही गए हैं तो उद्धव को भी बीजेपी से बात कर लेना चाहिए। इससे सुलह की संभावना बन सकती है। हालांकि केसरकर ने उद्धव के हितैषी के रूप में अपना बयान दिया कि उद्धव को पार्टी में विद्रोह करने के लिए जिम्मेदार लोगों को थोड़ा अलग रखना चाहिए। उनका इशारा शिवसेना सांसद संजय राउत की ओर था। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, 'हम और भाजपा साथ आ गए हैं। इसलिए अब एक नया परिवार है। यदि हमें पुराने परिवार में जाना हुआ तो हम अकेले नहीं हैं। भाजपा हमारे साथ है। जब भी वह (ठाकरे) हमें बुलाते हैं तो उन्हें भाजपा से भी बात करनी होगी।' जब महाराष्ट्र में शिंदे सरकार बनी तब भी केसरकर ने फ्लोर टेस्ट जीतने पर जश्न न मनाने की बात कही थी।

दीपक केसरकर ने कहा है कि उद्धव ठाकरे मुलाकात करेंगे तो हम जरूर जाएंगे लेकिन हम सीधे उद्धवसे बात करेंगे। इस दौरान आसपास के लोगों को बाहर रहना चाहिए। कई विधायक तो संजय राउत को सुप्रीमो शरद पवार का एजेंट तक कह चुके है। शिंदे गुट के एक और विधायक सुहास कांडे ने भी उद्धव ठाकरे के बुलाने पर मातोश्री में सुलह को लेकर चर्चा के लिए जाने कि बात कही है। साथ ही उन्होंने कहा कि वह ऐसा चाहते भी है और अगर उद्धवठाकरे एकनाथ शिंदे को बुलावा भेजेंगे तो सभी बागी विधायक मातोश्री जाएंगे। इस प्रकार शिंदे गुट के बागी विधायकों के उद्धव के प्रति नरमी और सुलह वाले बयान आ रहे हैं, वहीं कुछ ऐसे ही सुलह के बोल उद्धव ठाकरे गुट से भी सामने आ रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार मुंबई में हुइ सांसदों की बैठक में एक वरिष्ठ नेता द्वारा उद्धव ठाकरे को शिंदे गुट से सुलह करने की सलाह दी गई है।बाला साहेब ने कभी सत्ता की कुर्सी पर बैठना सही नहीं समझा। हमेशा वे मातोश्री में बैठे और उनकी पार्टी का नेता सत्ता में रहा अब जबकि उद्धव ठाकरे मातोश्री में बैठे हैं और शिवसेना का सीएम यानी एकनाथ शिंदे सीएम बन गए हैं, तो क्या वही पुरानी परंपरा फिर दोहराई जा सकती है कि बाला साहेब की ही तरह उद्धव ठाकरे को सम्मान देकर शिंदे और उनके विधायक सत्ता चलाएं।
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भारतीय विरासत का सम्मान

Posted: 08 Jul 2022 09:17 AM PDT

भारतीय विरासत का सम्मान

(डॉ दिलीप अग्निहोत्री-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)
नरेन्द्र मोदी की विदेश नीति में राष्ट्रीय विरासत और स्वाभिमान का सहज समावेश झलकता है। उन्होंने दुनिया के अनेक नेताओं को प्राचीन भारत के वांग्मय से परिचित कराया। योग पूरी दुनिया में पहुँच चुका है। करीब दो सौ देशों में अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन होता है। कई देशों के नेता काशी की भव्य श्री गंगा आरती में सहभागी हो चुके हैं। मन्दिर की चैखट पर बैठ कर भी नरेन्द्र मोदी अपने समकक्ष विदेशी नेता से वार्ता कर चुके हैं। अनेक देशों से भारत से चोरी हुई ऐतिहासिक मूर्तियों को सम्मान के साथ वापस किया है। इस क्रम में जी सेवन देशों के नेताओं को मोदी द्वारा भेंट की गई वस्तुएँ अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है।पिछले कुछ समय के अन्तराल में कई अन्तरराष्ट्रीय मंचों पर भारतीय विरासत का प्रभाव दिखाई दिया। इसमें वैश्विक शांति सौहार्द के साथ ही वैचारिक और स्थानीय उद्योगों का संदर्भ भी शामिल है। इस संदर्भ में क्यूबा का एक निर्णय उल्लेखनीय है।इस समय भारत आजादी अमृत महोत्सव मना रहा है। क्यूबा ने भारत की आजादी के अमृत महोत्सव के मौके पर विशेष डाक टिकट भी जारी किया है। भारत क्यूबा रिश्तों की मजबूती के लिए विदेश कार्यालय परामर्श की प्रक्रिया शुरू की गई है।

क्यूबा की राजधानी हवाना में हुई इस बैठक में भारत से क्यूबा को चावल आयात के लिए दस करोड़ यूरो का अल्पकालिक ऋण मंजूर करने पर सहमति बनी। दोनों देशों के बीच इस ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस ऋण की मदद से क्यूबा अपनी जरूरतों के लिए भारत से चावल आयात कर सकेगा। जी सेवन शिखर सम्मेलन में नरेन्द्र मोदी ने पर्यावरण, ऊर्जा, जलवायु, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, आतंकवाद विरोधी, लैंगिक समानता और लोकतंत्र जैसे सामयिक मुद्दों को भारतीय विचारों के अनुरूप उठाया था।नरेन्द्र मोदी ने सेनेगल के राष्ट्रपति को उत्तर प्रदेश में हाथ से निर्मित हुईं प्रसिद्ध मूंज की टोकरियां और कपास की दरी इंडोनेशिया के राष्ट्रपति को वाराणसी की लोकप्रिय काष्ठ और लाख की अद्भुत कला से निर्मित श्री राम दरबार की कलाकृति, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री को चीनी मिट्टी के अद्वितीय उत्पादों के लिए प्रसिद्ध बुलंदशहर की प्लेटिनम पेंटेड हैंड पेंटेड टी सेट जर्मनी चांसलर को मुरादाबाद की अद्भुत कलाकृति, इटली के मा। प्रधानमंत्री को आगरा निर्मित मार्बल इनले टेबल टॉप उपहार, फ्रांस राष्ट्रपति को हस्तशिल्प जरी जरदोजी से बने बॉक्स में उ.प्र. में निर्मित विभिन्न उपहार, जापान के प्रधानमंत्री को निजामाबाद की शिल्प कला से निर्मित काली मिट्टी के बर्तन अमेरिका राष्ट्रपति को देवाधिदेव महादेव की पावन नगरी काशी का प्रसिद्ध हस्तशिल्प गुलाबी मीनाकारी ब्रोच व कफलिंक सेट उपहार स्वरूप भेंट किए।सरकार वोकल फॉर लोकल अभियान एक जिला एक उत्पाद योजना के जरिए जो स्थानीय उत्पादों पर बल दे रही है, उसने भी निर्यात बढ़ाने में मदद की है। अब दुनिया के नए नए देशों में हमारे अनेक उत्पाद पहली बार निर्यात किए जा रहे हैं।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भी भारत के विचारों को समर्थन मिला। नरेन्द्र मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया था। उन्होने रूस यूक्रेन सहित अन्य सभी विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का संदेश दिया था। उनका कहना था कि संवाद से ही युद्ध की स्थिति का निवारण किया जा सकता है। मोदी के इस विचार को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के संयुक्त वक्तव्य में प्रमुखता के साथ शामिल किया गया था। नरेन्द्र मोदी ने आतंकवाद के विरोध में साझा प्रयास करने का संदेश दिया था। ब्रिक्स के संयुक्त वक्तव्य में आतंकवाद का विरोध भी स्पष्ट शब्दों में किया गया। किसी अन्य देश द्वारा आतंकवाद संरक्षण देने की भर्त्सना की गई।

पाकिस्तान के प्रति चीन की सहानुभूति जगजाहिर है। चीन ब्रिक्स का सदस्य है। पाकिस्तान पर आतंकवाद को संरक्षण देने के आरोप है। अफगानिस्तान में तो आतंकी संगठन की सत्ता है। फिर भी आतंकवाद पर भारत के विचारों को ब्रिक्स के सभी देशों ने स्वीकार किया। चीन ने इस पाकिस्तान विरोधी विचार को संयुक्त वक्तव्य में शामिल करने का विरोध नहीं किया। घोषणा पत्र में रूस और यूक्रेन के बीच बातचीत का समर्थन करते हुए यूक्रेन में मानवीय हालात पर चिंता व्यक्त की गई। प्रभावित लोगों को संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों के जरिए आवश्यक सहायता पहुंचाने पर जोर दिया गया। कहा गया कि प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों के संगठन जी ट्वेंटी की एकता को बनाए रखा जाए। इस वर्ष अगले कुछ महीनों में इंडोनेशिया में जी ट्वेंटी देशों की शिखर वार्ता आयोजित है। अगले वर्ष जी ट्वेंटी की शिखर वार्ता की मेजबानी भारत करेगा। अमेरिका सहित पश्चिमी देशों के रूस विरोध के कारण इन शिखर वार्ता के ऊपर प्रश्न चिन्ह लग गया है। ब्रिक्स घोषणा पत्र में मानवाधिकारों और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दोहरे मापदंडों का विरोध किया गया। मानवाधिकारों और लोकतंत्र के प्रति समर्थन व्यक्त किया गया। आतंकवाद और धार्मिक कट्टरता के सभी रूपों की निंदा की गई। भारत रूस चीन ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका ब्रिक्स के सदस्य हैं। इसमें नरेन्द्र मोदी वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए थे। रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा और ब्राजील के राष्ट्रपति जेयर बोल्सनारो बीजिंग बैठक में शामिल हुए थे। नरेन्द्र मोदी ने ब्रिक्स देशों के उद्योगपतियों को भारत की विकास यात्रा के बारे में बताया। कहा कि भारत में आधारभूत ढांचे के विकास के लिए महत्वपूर्ण प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने निवेशकों से आग्रह किया कि वे भारत के पंद्रह खरब डॉलर वाले राष्ट्रीय आधारभूत ढांचा विकास अभियान में निवेश के अवसर उपलब्धि हैं। नये भारत में प्रोद्योगिकी के जरिये अर्थव्यवस्था को पुन गति देने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए हर क्षेत्र में नवाचार को प्रोत्साहन मिल रहा है। तीन वर्षों में भारत में डिजिटल अर्थव्यवस्था का मूल्य दस खरब डॉलर तक पहुंचने का जिक्र किया। भारत में जिस तरह का डिजिटल रूपांतरण हो रहा है वैसा दुनिया ने कभी नहीं देखा है। भारत में नवाचार के लिए सबसे उत्तम सबसे अच्छा तंत्र और माहौल है। देश में स्टार्टअप की बढ़ती संख्या इसका प्रमाण है। भारत में सत्तर हजार से अधिक स्टार्टअप्स हैं जिनमें सौ से अधिक यूनिकॉर्न हैं। पिछले साल ऐतिहासिक वैश्विक व्यवधान के बावजूद भारत ने पचास लाख करोड़ रुपए का कुल निर्यात किया। सरकार ने बत्तीस हजार से अधिक अनावश्यक नियमों को खत्म कर व्यापार को सुगम बनाने का काम किया है।
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भारत का भरोसेमंद दोस्त चला गया

Posted: 08 Jul 2022 09:14 AM PDT

भारत का भरोसेमंद दोस्त चला गया

(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)

इस घटना से जितना दुखी जापान है, भारत के लोगों में भी उतना ही दुख है। शिंजो आबे एक ऐसे नेता थे, जिन्होंने भारत और जापान के संबंधों को बुलंदियों पर पहुंचाया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी दोस्ती के चर्चे पूरी दुनिया में थे। शिंजो आबे पीएम मोदी को अपना खास दोस्त बताते थे और पीएम मोदी भी उनकी दोस्ती को एक कदम आगे बढ़ कर गले लगाते थे। भारत के प्रति शिंजो आबे का प्यार ही था कि उन्हें हिंदुस्तान ने देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया था।

हमारे देश के दुनिया भर के मुल्कों से अच्छे संबंध हैं। पड़ोसियों से तो हम बेहतर रिश्ते रखना ही चाहते हैं लेकिन क्या करें कुछ पड़ोसी सिरदर्द बन जाते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने खाड़ी देशों से बेहतर संबंध बनाए तो इजराइल के साथ भी मधुर रिश्ते कायम किये हैं। अमेरिका के साथ दोस्ती है तो रूस के साथ भी हम उस समय व्यापारिक संबंध बनाए हुए हैं जब यूक्रेन युद्ध के चलते यूरोपीय देशों ने उस पर प्रतिबंध लगा रखे हैं। इस प्रकार वसुधैव कुटुम्बकम की भारतीय परम्परा का पालन करते हुए जापान के पूर्व पीएम शिंजो आबे ने यह एहसास करा दिया था कि अपनों में भी कुछ विशेष अपने होते हैं। दुर्भाग्य का दिन है कि एक सिरफिरे ने शिंजो आबे की उस समय गोली मार दी जब वह एक चुनावी सभा को संबोधित कर रहे थे। उसी समय उन्हंे दिल का दौरा भी पड़ा और क्रूर नियति ने भारत का भरोसेमंद दोस्त छीन लिया।

जापान के पूर्व पीएम शिंजो आबे का निधन हो गया है। यह भारत के लिए बहुत बड़ी क्षति है। आज सुबह भाषण के दौरान उन्हें गोली मारी गई थी। इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया गया था। जहां डॉक्टरों ने उनकी हालत को बेहद नाजुक बताया था। उनके शरीर के सभी अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। यह जानकारी मिलते ही कैम्पेन रद्द करके पीएम किशिदा हेलिकॉप्टर से वापस टोक्यो आए थे। हमलावर शिंजो आबे की नीतियों से नाराज था। इसलिए उनकी हत्या की थी। 41 वर्षीय हमलावर को गिरफ्तार कर लिया गया। शिंजो आबे पर नारा शहर में हमला हुआ था। यह हमला उन पर उस दौरान हुआ जब वह पश्चिमी जापान के नारा शहर में एक सभा को संबोधित कर रहे थे।हमले के फौरन बाद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुःख जताया। पीएम मोदी ने ट्वीट करते हुए लिखा, मेरे प्रिय मित्र शिंजो आबे पर हुए हमले से व्यथित हूं। हमारी दुआएं और प्रार्थनाएं उनके, उनके परिवार और जापान के लोगों के साथ हैं। पीएम मोदी को शिंजो आबे से कितना लगाव था, इसका परिचय गत वर्ष 15 जुलाई को वाराणसी दौरे के समय भी मिला। रुद्राक्ष कंवेंशन सेन्टर का उद्घाटन करते हुए मोदी ने शिंजो आबे को याद किया और बताया कि वाराणसी के विकास परियोजना भारत-जापान के सम्बन्धों को दर्शाती है।

शिंजो आबे पीएम नरेन्द्र मोदी के अच्छे दोस्तों में से एक थे। उन्होंने साल 2020 के अगस्त में जापान के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने यह फैसला अपने स्वास्थ्य कारणों की वजह से लिया था। 65 वर्षीय आबे ने पद छोड़ने की घोषणा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में की थी। उन्होंने कहा था कि उन्हें इंटेस्टिनाइल बीमारी का इलाज करने के लिए कुछ समय की जरूरत है इसलिए वह अपने पद से इस्तीफा दे रहे हैं। पिछले दो हफ्तों के दौरान शिंजो आबे को दो बार अस्पताल जाना पड़ा था। इससे अनुमान लगाए जा रहे थे कि उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं चल रहा था। शिंजो आबे 2012 में पूर्ण बहुमत के साथ चुनाव जीतने के बाद दोबारा प्रधानमंत्री बने थे। सात साल के इस कार्यकाल ने उन्हें जापान का सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री बने रहने का गौरव प्रदान किया है। आबे का कार्यकाल समाप्त होने में अभी एक साल का वक्त बचा था।

आबे सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी में अब भी प्रभावशाली नेता थे और वह उसके सबसे बड़े धड़े सेइवकाई का नेतृत्व करते थे। जापानी संसद के ऊपरी सदन के लिए मतदान रविवार को होना है। आबे भाषण दे रहे थे, जब लोगों ने गोलियों की आवाज सुनी। गोली लगने के बाद वह जमीन पर गिर पड़े और उन्होंने अपने सीने पर हाथ रखा हुआ था, उनकी कमीज पर खून लगा हुआ था। दुनिया के सबसे सुरक्षित देशों में से एक माने जाने वाले जापान में यह हमला हैरान करने वाला है। जापान में बंदूक नियंत्रण के सख्त कानून लागू हैं। आबे ने 2020 में यह कहते हुए प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था कि उनकी एक पुरानी बीमारी फिर से उभर आयी है। उन्होंने उस समय पत्रकारों से कहा था कि अपने कई लक्ष्यों को अधूरा छोड़ना उनके लिए ''परेशान करने वाली बात'' है। उन्होंने वर्षों पहले उत्तर कोरिया द्वारा अगवा किए गए जापानी नागरिकों के मुद्दे, रूस के साथ क्षेत्रीय विवाद और जापान के युद्ध त्यागने वाले संविधान के संशोधन के मुद्दों को हल करने में अपनी नाकामी की बात की थी।

इस घटना से जितना दुखी जापान है, भारत के लोगों में भी उतना ही दुख है। शिंजो आबे एक ऐसे नेता थे, जिन्होंने भारत और जापान के संबंधों को बुलंदियों पर पहुंचाया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी दोस्ती के चर्चे पूरी दुनिया में थे। शिंजो आबे पीएम मोदी को अपना खास दोस्त बताते थे और पीएम मोदी भी उनकी दोस्ती को एक कदम आगे बढ़ कर गले लगाते थे। भारत के प्रति शिंजो आबे का प्यार ही था कि उन्हें हिंदुस्तान ने देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया था। यह सम्मान शिंजो आबे को साल 2021 में दिया गया था। शिंजो आबे ही वह नेता हैं जिनकी पहल के चलते आज भारत में बुलेट ट्रेन का रास्ता साफ हुआ है। आपको बता दें कि जापान ने भारत को बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए अन्य देशों के मुकाबले बेहद कम दर पर ऋण मुहैया कराया था। वहीं लोन वापसी का समय भी 25 वर्षों की जगह 50 वर्ष रखा गया है। शिंजो आबे भारत को वैश्विक समृद्धि की दिशा में एक ग्लोबल पावर के रूम में देखना चाहते थे। शिंजो आबे भारत से खास लगाव महसूस करते थे, यही वजह थी कि वह एक ऐसे जापानी प्रधानमंत्री थे जिन्होंने अपने कार्यकाल में सबसे ज्यादा बार भारत का दौरा किया था। पहली बार भारत शिंजो आबे साल 2006-07 में अपने पहले कार्यकाल के दौरान आए थे। उसके बाद साल 2012-20 के अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान शिंजो आबे ने भारत का तीन बार दौरा किया था। यह तीनों दौरे साल 2014, 2015 और सितंबर 2017 में हुए थे।
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Liked on YouTube: वर्तमान सरकार आर्थिक मोर्चे पर फिसड्डी है :- डॉ रमाकांत पाण्डेय

Posted: 08 Jul 2022 09:12 AM PDT

वर्तमान सरकार आर्थिक मोर्चे पर फिसड्डी है :- डॉ रमाकांत पाण्डेय
वाणिज्य महाविद्यालय के सेवानिवृत प्रोफेसर डॉ रमाकांत पाण्डेय जी ने कहाकि आजकी सरकार आर्थिक मोर्चे पर पूर्णत: विफल रही है | आज डॉलर की कीमत और रुपये की कीमत में जो अंतर है वो आनेवाले समय के लिए अच्छी बात नहीं है | दिव्य रश्मि ! धर्म, राष्ट्रवाद , राजनीति , समाज एवं आर्थिक जगत की खबरों का चैनल है | जनता की आवाज़ बनने के उदेश्य से हमारे सभी साथी कार्य करते है अत: हमारे इस मुहीम में आप के साथ की आवश्यकता है |हमारे खबरों को लगातार प्राप्त करने के लिए हमारे चैनल को सबस्क्राइब करना न भूले और बेल आइकॉन को अवश्य दबाए | खबर पसंद आने पर👉 हमारे "चैनल" को Subscribe, वीडियो को Like 👍 & Share↪ , जरुर करें चैनल को सब्सक्राइब करें खबर को शेयर जरूर करें Facebook : https://ift.tt/v3tT4qO Twitter https://twitter.com/DivyaRashmi8 instagram : https://ift.tt/ucgwkdL visit website : https://ift.tt/Qlye4CI
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क्या करेंगे नीतीश के राम?

Posted: 08 Jul 2022 09:11 AM PDT

क्या करेंगे नीतीश के राम?

(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)
बिहार के बड़े नेताओं में गिने जाने वाले राम चन्द्र प्रसाद सिंह (आरसीपी सिंह) मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खासमखास थे लेकिन जनता दल(यू) ने उनको राज्यसभा में नहीं भेजा। राज्यसभा की सदस्यता जाते ही उनको केन्द्रीय मंत्रिमंडल से त्याग पत्र भी देना पड़ा। नीतीश कुमार ने उनको पार्टी की कमान सौंपी थी लेकिन जब 2019 में केन्द्र में जद(यू) कोटे से मंत्री बनाने की बात आयी तो आरसीपी सिंह ने नीतीश की बात टाल दी। नीतीश कुमार दो मंत्री चाहते थे, भले ही राज्यमंत्री बनें लेकिन रामचन्द्र प्रकाश सिंह ने केन्द्रीय मंत्री का सौदा कर लिया। अब केन्द्रीय मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद आरसीपी सिंह अगला क्या कदम उठाते हैं, यह बिहार की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण होगा। आरसीपी सिंह कहते हैं कि मैं सीधा आदमी हूं और सीधी राह चलता हूं। खबर है कि वे भाजपा में जाना चाहते हैं लेकिन उधर से हरी झंडी नहीं मिली है। नीतीश कुमार ने आरसीपी सिंह के समर्थकों को भी किनारे करना शुरू कर दिया है। जद(यू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह उनकी भूमिका तय करेंगे अथवा वे स्वयं कोई राह बनाएंगे?

केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद रामचंद्र प्रसाद सिंह पटना पहुंचे। पटना एयरपोर्ट पर कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। इसके बाद आरसीपी सिंह ने पटना एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत करते हुए कई ऐसी बातें कहीं जो आने वाले समय की उनकी राजनीति कैसी होगी, इस ओर संकेत करती हैं। केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना क्या आपकी पार्टी का धोखा है? इस पर आरसीपी सिंह ने दो टूक कहा कि मुझे क्या कोई धोखा देगा मैंने अपनी ताकत और परिश्रम से अपनी अलग पहचान बनाई है। मुझे पहचान का कोई संकट नहीं है। मुझमें काफी आत्मविश्वास है और मुझे अभी बहुत कुछ करना है। अभी और पहचान बनेगी क्योंकि मुझमें काफी ऊर्जा और सकारात्मक सोच है। अलग पार्टी बनाने के सवाल पर आरसीपी सिंह ने कहा, मैं सीधा सादा आदमी हूं और मैं सीधा चलता हूं। अब तो मै जमीन पर आ गया हूं अभी मैं अपने कार्यकर्ताओं से बात करूंगा और जानकारी लूंगा कि क्या कुछ करना है लेकिन, अभी मैं अपने घर जा रहा हूं। उसके बाद पार्टी के कार्यकर्ताओं से मुलाकात करुंगा, बैठक करुंगा फिर कई मुद्दों पर उनके साथ चर्चा होगी। आरसीपी सिंह ने कहा कि पार्टी के कार्यकर्ता हमें जहां जहां बुलाएंगे, मैं वहां आऊंगा। भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने पर आरसीपी सिंह ने कहा कि यह तो पत्रकार को ही पता है। 2 दिन पहले चली खबर (बीजेपी में शामिल होने की) किस तरीके से चली है, यह सब जानते हैं। आरसीपी सिंह ने कहा कि मैं एनडीए का नेता हूं और विभाग के काम के सिलसिले में तेलंगाना गया था। जब एयरपोर्ट पर उतरा तो उन्होंने मुझे सम्मानित किया था जिसे गलत तरीके से पेश किया गया। अपने समर्थकों को जदयू से निकाले जाने पर उन्होंने कहा कि पार्टी के कार्यकर्ताओं को निकाला गया, यह ठीक नहीं है। मैं पार्टी के कार्यकर्ताओं से चर्चा करुंगा, बात करुंगा। आरसीपी सिंह के पटना आने के बाद जदयू के राष्ट्रीय संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने इशारों में चुटकी लेते हुए हमला भी बोला है। उन्होंने कहा कि जदयू के कार्यकर्ता हैं और कार्यकर्ता के रूप में काम करेंगे। वह किस रूप में काम करेंगे मैं नहीं जानता हूं, यह तो पार्टी का आलाकमान फैसला करेगा।

बहरहाल, तनावपूर्ण माहौल में ही केंद्रीय मंत्री के पद से आरसीपी सिंह ने इस्तीफा दे दिया है। मगर इसके साथ ही ये सवाल उठने लगे हैं कि अब आगे आरसीपी सिंह का सियासी भविष्य क्या होगा? क्या आरसीपी सिंह जदयू में रहकर सियासी पारी आगे बढ़ाएंगे या फिर जेडीयू को छोड़ किसी दूसरी पार्टी का दामन थामेंगे? राजनीति के जानकार बताते हैं कि आरसीपी सिंह के लिए दूसरा विकल्प अधिक मुफीद नजर आ रहा है। इस बीच जदयू के मुख्य प्रवक्ता ने जो बात कही है, इससे भी यही संकेत मिल रहा है कि आरसीपी सिंह के लिए जदयू ने स्पष्ट संदेश दे दिया है। जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार इस मामले में कहते हैं जेडीयू कार्यकर्ताओं की पार्टी है और हर कार्यकर्ता जेडीयू को आगे बढ़ाने की कवायद में दिन रात लगा हुआ है। अब आरसीपी सिंह अपनी भूमिका पार्टी में क्या तय करते हैं, यह उन्हें तय करना है। उन्हें यह तय करना है कि वो कार्यकर्ता की तरह नेता और नेतृत्व के प्रति निष्ठा को कायम रखते हुए पार्टी में अपनी भूमिका स्वयं क्या देखते हैं और पार्टी को कैसे आगे बढ़ाते हैं। राजनीति के जानकारों की नजर में नीरज कुमार के बयान से साफ है कि जेडीयू के शीर्ष नेतृत्व का आरसीपी सिंह को लेकर जो रुख है, वो साफ-साफ इशारा करता है कि आरसीपी सिंह के लिए जेडीयू में रहकर राजनीति करना आसान नहीं होगा। ऐसे में आरसीपी सिंह जेडीयू में रहकर राजनीति को आगे बढ़ाएंगे इसकी उम्मीद कम दिखती है। दूसरी ओर भाजपा के साथ आरसीपी सिंह की नजदीकी साफ दिखती है। आरसीपी सिंह का 6 जुलाई को जन्मदिन था तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से लेकर कई केंद्रीय मंत्रियों ने जन्मदिन की बधाई दी, लेकिन जद(यू) से किसी ने भी बधाई नहीं दी।

सबसे विशेष यह कि प्रधानमंत्री मोदी ने आरसीपी सिंह के काम की तारीफ की थी। हालांकि, राजनीति के जानकारों के अनुसुार, इतना कुछ होने के बाद भी भाजपा आरसीपी सिंह को अपने साथ लेने की जल्दबाजी नहीं दिखाने वाली है क्योंकि भाजपा को भी पता है कि इससे बिहार में भाजपा और जद(यू) के संबंध पर सीधा असर पड़ सकता है। जाहिर है भाजपा ऐसा फिलहाल नहीं चाहेगी, क्योंकि भाजपा और जदयू बिहार की सत्ता में साझीदार है। राजनीति के जानकार इस मामले में कुछ और भी स्थिति देखते हैं। दरअसल, आरसीपी सिंह के लिए अपनी अलग पार्टी बनाकर आगे की राजनीति करने का भी विकल्प बचता है, मगर यह इतना आसान नहीं होगा। इसके पीछे दो बड़ी वजह है। पहला तो आरसीपी सिंह को कार्यकर्ताओं और नेताओं का उतना सपोर्ट नहीं दिख रहा है। दूसरा यह भी कि वे जिस जाति से आते हैं, उसी जाति से नीतीश कुमार भी आते हैं। नीतीश कुमार के रहते इस जाति की सहानुभूति आरसीपी सिंह को कितनी मिलेगी यह देखने वाली बात होगी। आरसीपी सिंह के एक नजदीकी ने बताया कि आरसीपी सिंह केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद बिहार आकर थोड़ा इंतजार करेंगे और बिहार के सियासी नब्ज को पहचानने की कोशिश करेंगे। इसके साथ ही वे सही समय का इंतजार करेंगे ताकि सही समय पर अपनी सियासत को आगे बढ़ाया जा सके। बहरहाल आरसीपी सिंह के लिए आगे के विकल्पों के बात के साथ ही अभी भी दुविधापूर्ण स्थिति है। नीतीश ने जद(यू) की कमान वरिष्ठ नेता ललन सिंह को थमा दखी है जो आरसीपी सिंह को पसंद नहीं करते।

इटली के टूरिस्ट प्लेस पर बिकिनी पहनने पर रोक

Posted: 08 Jul 2022 09:05 AM PDT

इटली के टूरिस्ट प्लेस पर बिकिनी पहनने पर रोक

रोम। कई टूरिस्ट जगहों पर वैसे तो कोई भी कपड़े पहन कर आ जा सकते हैं। लेकिन इटली में टूरिस्ट प्लेस पर महिलाओं के बिकिनी पहनने पर रोक लगा दी गई है। अगर किसी ने ऐसा किया तो उसपर तगड़ा जुर्माना लगाया जाएगा। जानकारी के लिए बता दें जुर्माने के तौर पर उस व्यक्ति को 40 हजार से अधिक भरने पड़ सकते हैं।

मामला इटली के तटीय इलाके पोमपेली और नपलेस का है। यह आदेश यहां के मेयर ने पारित किया है। उनका यह मानना है कि अगर कोई सड़कों पर 'अंग प्रदर्शन' करते हुए नजर आया तो उसपर एक्शन लिया जाएगा। दरअसल, स्थानीय लोगों की शिकायत थी कि यहां इस तरह के कपड़े पहन कर ना आए।

वहां के समुद्र तट के किनारे बसे लोगों का कहना था कि यह लोग कम कपड़े पहनकर 'अशोभनीय व्यवहार' करते हैं। जिसके चलते फिर यहां के लोग असहज महसूस करते हैं। इसी को देखते हुए यहां के मेयर ने चेतावनी दी कि अगर कोई 'कम कपड़ों' में 'अशोभनीय व्यवहार' करते पाया जाएगा तो उसपर 425 पाउंड (40 हजार रुपये से अधिक) का जुर्माना लिया जाएगा। मेयर ने कहा कि स्थानीय लोगों को डर है कि सैलानियों की हरकत तटीय शहर की 'प्रतिष्ठा' और 'जीवन की गुणवत्ता' को बर्बाद कर रही है। ऐसे में नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए पुलिस अधिकारी सड़कों और कोस्टल एरिया में गश्त करेंगे। जो लोग शर्टलेस या स्विमवियर में पाए जाएंगे उनपर फाइन लगाया जाएगा।
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हज के दौरान स्वास्थ्य, सुरक्षा उपायों की घोषणा

Posted: 08 Jul 2022 09:01 AM PDT

हज के दौरान स्वास्थ्य, सुरक्षा उपायों की घोषणा

रियाद। सऊदी अरब ने हज के दौरान में हजयात्रियों की सुरक्षा के लिए धार्मिक स्थलों पर व्यापक स्वास्थ्य और सुरक्षा उपायों की घोषणा की है। सऊदी प्रेस एजेंसी ने स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता मोहम्मद अल-अब्दाल ने हवाले से अपनी रिपोर्ट में कहा कि हज यात्रा के दौरान स्वास्थ्य और आपातकालीन केंद्र, मोबाइल स्वास्थ्य इकाइयां और आभासी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की तैयारियां की गयी है। इस बीच सऊदी गृह मंत्रालय के प्रवक्ता तलाल अल-शल्हौब ने कहा कि अवैध हजयात्रियों के प्रवेश को रोकने के लिए सभी धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा घेरा स्थापित किया जा रहा है। वर्ष 2020 में कोविड-19 के प्रकोप के बाद यह पहला मौका है, जब सऊदी अरब ने विदेशी हजयात्रियों को हज करने की अनुमति दी है जबकि पिछले दो साल तक केवल घरेलू हजयात्रियों को छूट दी गयी थी।
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जापान के पूर्व पीएम शिंजो आबे की गोली मारकर हत्या

Posted: 08 Jul 2022 08:59 AM PDT

जापान के पूर्व पीएम शिंजो आबे की गोली मारकर हत्या

टोक्यो। जापान के पूर्व प्रधानमंत्री आबे शिंजो पर शुक्रवार को जानलेवा हमला किया गया। उन्हें अस्पताल ले जाया गया। लेकिन डाक्टरों के अथक प्रयास के बाद भी उन्हंे बचाया नहीं जा सका।
जानलेवा हमले की घटना के सिलसिले में पुलिस ने एक संदिग्ध को गिरफ्तार किया है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक गिरफ्तार संदिग्ध की पहचान 41 वर्षीय यामागामी तेत्सुया के रूप में की गयी है। पुलिस ने उस जगह से एक बंदूक बरामद की है, जहां श्री आबे को गोली मारी गयी। यह बंदूक तेत्सुया का ही बताया गया है। जापान के पब्लिक ब्रॉडकास्टर एनएचके की रिपोर्ट के मुताबिक घटना स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 11.30 हुई। श्री आबे पर हमला उस समय हुआ जब वह लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार के चुनाव अभियान के दौरान नारा शहर में एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। शिंजो आबे भारत के बहुत अच्छे दोस्त थे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मंत्री ने उनके निधन पर शोक जताया है। गोली मारे जाने की खबर मिलते ही पीएम मोदी ने ट्वीट किया था- मेरे प्रिय मित्र शिंजो आबे पर हुए हमले से बहुत व्यथित हूं। मेरी भावनाएं जापान के लोगों के करीब हैं।
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इजरायल एयरलाइंस तुर्की के लिए उड़ानें फिर से शुरू करेगी

Posted: 08 Jul 2022 08:53 AM PDT

इजरायल एयरलाइंस तुर्की के लिए उड़ानें फिर से शुरू करेगी


जेरूसलम। इजरायल एयरलाइंस 15 साल के बाद तुर्की के लिए उड़ानें फिर से शुरू करने के लिए तैयार हैं।

इजरायल के परिवहन और विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक दोनों देशों के बीच हस्ताक्षरित विमानन समझौते के तहत बाद तुर्की में विभिन्न गंतव्यों के लिए उड़ानों को फिर से शुरू करने की अनुमति दी गयी है।

इजराइली एयरलाइंस ने 15 साल पहले सुरक्षा प्रतिबंधों और बेतहाशा खर्च के मद्देनजर तुर्की के लिए उड़ानें रोक दी थी। वर्तमान में केवल तुर्की की प्रमुख कंपनियां तुर्की एयरलाइंस और पेगासस एयरलाइंस दोनों देशों के बीच मार्गों पर उड़ान भरती हैं।

बयान में कहा गया है कि नया समझौता दोनों देशों के बीच विमानन संबंधों को बढ़ावा देने तथा आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। इसी सप्ताह इजरायल की अर्थव्यवस्था मंत्री ओर्ना बारबिवे ने तुर्की में इजरायल के आर्थिक और व्यापार मिशन कार्यालय को फिर से खोलने की घोषणा की थी।
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फोन कॉल

Posted: 08 Jul 2022 08:34 AM PDT

फोन कॉल

जब बीवी मायके के लिए हुई रवाना,
पति की खुशी का ना रहा ठिकाना,
दोस्तों को फोन करके किया इनवाइट
आओ घर पर हमें महफिल है जमाना।

आ गए सभी दोस्त एक इशारे पर,
हाथ में शराब कोई नमकीन लेकर,
सोचा शराब की जमाएंगे महफिल
पूरी रात चलेगा पीना और पिलाना।

तभी फोन कॉल ने खत्म कर डाला,
हसीन अरमानों पर पानी फेर डाला,
आ रही हूं कल वापस पत्नी जब बोली
पति की मती को कंफ्यूज कर डाला ।

नशा उतर गया सभी का फौरन  सारा,
हर कोई हो गया वहाँ से नौ दो ग्यारह,
अच्छी खासी जमी महफिल उजड़ गई,
पति मन ही मन सोचता रह गया बेचारा !
सुमित मानधना 'गौरव', सूरत
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इग्नोर

Posted: 08 Jul 2022 07:35 AM PDT

इग्नोर

        ---:भारतका एक ब्राह्मण.
           संजय कुमार मिश्र'अणु'
-----------------------------------------
वो बात है
प्योर एण्ड स्योर
जो कर रही हो तु-
मुझे इग्नोर-टू-इग्नोर
कोई बात नहीं डार्लिग
नहीं कहूंगा कभी तुमसे
ह्वाट योर
और ये भी नहीं कहुंगा
प्लीज गीभ मी
वन चांस मोर
मैं जानता और मानता हूँ
मन की इच्छा....दिल का चोर
तुम मेरे बिना अधुरी हो
और मैं तेरे बिना
फिर तुम हीं कहो?कैसे जीना
बस डोर-टू-डोर
मैं पूर्ण हूँ
यदि तुम हो गई.सम
तो वादा करता हूं
तुम मुझे कर दो परिपूर्ण
तो मैं कर दूंगा तुम्हें संपूर्ण
पुरी संतुष्टि के साथ
एकदम हृस्टपुष्ट
उधर से लेकर इस ओर
------------------------------------
वलिदाद, अरवल(विहार)८०४४०२.
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9 जुलाई 2022, शनिवार का दैनिक पंचांग एवं राशिफल - सभी १२ राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन ? क्या है आप की राशि में विशेष ? जाने प्रशिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. प्रेम सागर पाण्डेय से |

Posted: 08 Jul 2022 07:12 AM PDT

9 जुलाई 2022, शनिवार का दैनिक पंचांग एवं राशिफल - सभी १२ राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन ? क्या है आप की राशि में विशेष ? जाने प्रशिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. प्रेम सागर पाण्डेय से |

9 जुलाई 2022, शनिवार का दैनिक पंचांग

श्री गणेशाय नम:

!! दैनिक पंचांग !!

🔅 तिथि दशमी 11:25 AM

🔅 नक्षत्र स्वाति 07:12 AM

🔅 करण :

                तैतिल 05:39 AM

                गर 05:39 AM

🔅 पक्ष शुक्ल

🔅 योग :

                सिद्ध 06:48 AM

                साघ्य 06:48 AM

🔅 वार शनिवार
☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ

🔅 सूर्योदय 05:15 AM

🔅 चन्द्रोदय 02:05 PM

🔅 चन्द्र राशि तुला

🔅 सूर्यास्त 06:45 PM

🔅 चन्द्रास्त +01:19 AM

🔅 ऋतु वर्षा

☀ हिन्दू मास एवं वर्ष

🔅 शक सम्वत 1944 शुभकृत

🔅 कलि सम्वत 5124

🔅 दिन काल 01:39 PM

🔅 विक्रम सम्वत 2079

🔅 मास अमांत आषाढ

🔅 मास पूर्णिमांत आषाढ
☀ शुभ और अशुभ समय

☀ शुभ समय

🔅 अभिजित 11:27:14 - 12:21:51

☀ अशुभ समय

🔅 दुष्टमुहूर्त 05:04 AM - 05:59 AM

🔅 कंटक 11:27 AM - 12:21 PM

🔅 यमघण्ट 03:05 PM - 04:00 PM

🔅 राहु काल 08:29 AM - 10:12 AM

🔅 कुलिक 05:59 AM - 06:54 AM

🔅 कालवेला या अर्द्धयाम 01:16 PM - 02:11 PM

🔅 यमगण्ड 01:36 PM - 03:19 PM

🔅 गुलिक काल 05:04 AM - 06:47 AM

☀ दिशा शूल

🔅 दिशा शूल पूर्व

☀ चन्द्रबल और ताराबल

☀ ताराबल

🔅 अश्विनी, कृत्तिका, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, स्वाति, विशाखा, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद

☀ चन्द्रबल

🔅 मेष, वृषभ, सिंह, तुला, धनु, मकर

🌹विशेष ~ गिरिजा पूजा, आशा दशमी, उल्टारथ पुर्नयात्रा (पुरी उड़ीसा)। 🌹

पं.प्रेम सागर पाण्डेय्,नक्षत्र ज्योतिष वास्तु अनुसंधान केन्द्र नि:शुल्क परामर्श - शनिवार दूरभाष 9122608219 / 9835654844

🌹 9 जुलाई 2022, शनिवार का राशिफल 🌹

मेष (Aries): आज आप दुखी रहेंगे। शारीरिक रूप से व्यग्रता का अनुभव होगा। धन का निवेश करनेवाले संभलकर चलें। लेकिन लाभ कम ही होगा। आवश्यक दस्तावेजों का ध्यान रखें। मध्याहन के बाद कार्य का प्रारंभ करने में सरलता रहेगी। पारिवारिक वातावरण में सुधार होगा। धार्मिक कार्यों का प्रसंग बनेंगे। अधिक खर्च पर अंकुश रखना होगा। मित्रों के साथ बाहर जा सकते हैं।

शुभ रंग = लाल

शुभ अंक = 8

वृषभ (Tauras): व्यावहारिक कार्यों को निपटाने के लिए आज का दिन शुभ है। बुजुर्गों और मित्रों के साथ मिलना होगा। नए मित्र भी बनेंगे। संतान की प्रगति से मन पुलकित होगा। पर्यटन या प्रवास का योग है। स्वजनों के पीछे धन खर्च होगा। उनके साथ मतभेद भी रहेंगे। स्वभाव में उदासीनता रहेगी। कोर्ट-कचहरी से संभलकर चलें। आध्यात्मिक प्रवृत्तियों में फिर भी सक्रिय रहेंगे।

शुभ रंग = क्रीम

शुभ अंक : 7

मिथुन (Gemini): व्यापारी वर्ग के लिए आज का दिन शुभ है। सफलता मिलने के साथ ही उगाही का धन भी प्राप्त होगा। पिता और बुजुर्गों से लाभ होगा। लक्ष्मीजी की कृपादृष्टि रहेगी। अधिकारियों की शुभ दृष्टि व्यवसाय में सफलता और लाभ दिलवाएगी। मित्रों से लाभ होगा। मध्याहन के बाद किसी रमणीय स्थल पर जाने का आयोजन बनेगा। धन लाभ का योग है।

शुभ रंग = नीला

शुभ अंक : 3

कर्क (Cancer): दिन के प्रारंभ में मानसिक तनाव और अशांति रहेगी। शारीरिक रूप से आलस्य और शिथिलता रहेगी। पेट संबंधी बीमारी होगी। भाग्य साथ नहीं दे रहा है ऐसा अनुभव होगा। संतान के विषय में भी चिंता अधिक रहेगी, परंतु मध्याहन के बाद मन में प्रसन्नता और शरीर में स्फूर्ति का अनुभव होगा। उगाही का धन प्राप्त होगा। मान-प्रतिष्ठा और उच्च पद प्राप्त होगा।

शुभ रंग = पीला

शुभ अंक : 9

सिंह (Leo): मध्यम फलदायी रहेगा आज का दिन। आचार-विचार पर संयम बरतने और अनैतिक कार्यों से दूर रहने की सलाह देते हैं। शारीरिक और मानसिक श्रम अधिक रहेगा। अस्वस्थता हो सकती है। आकस्मिक धन लाभ होगा लेकिन निरर्थक खर्च करना पड़ेगा। प्रतिस्पर्धियों के साथ वाद-विवाद टालें। नकारात्मकता को भी अपने से दूर रखने का प्रयास करें।

शुभ रंग = गुलाबी

शुभ अंक : 1

कन्या (Virgo): सामाजिक दृष्टि से आपको यश-कीर्ति और मान-सम्मान प्राप्त होगा। व्यवसायिक क्षेत्र में आपके भागीदारों के लिए समय अनुकूल है। मनोरंजन के क्षेत्र में आपका दिन आनंदपूर्ण बीतेगा। व्यापारियों को उगाही का धन मिलने की संभावना है। मध्याहन के बाद स्वास्थ्य नरम-गरम हो सकता है। आकस्मिक लाभ होने की संभावना है। आध्यात्मिक चिंतन मन को शांति देगा।

शुभ रंग = श्याम

शुभ अंक : 6

तुला (Libra): किसी भी कार्य को आप दृढ़ मनोबल और आत्मविश्वास के साथ करेंगे। मन को शांत रखें। घर में वातावरण शांतिप्रद रहेगा। वाणी पर संयम रखें। कलाकारों के लिए आज का दिन शुभ है। कला को प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा। मनोरंजन के वातावरण में आज आप बहुत आनंदित रहेंगे और इसमें आप के मित्र और संबंधी सहयोग देंगे। ख्याति प्राप्त होगी।

शुभ रंग = क्रीम

शुभ अंक : 7

वृश्चिक (Scorpio): आज आपको साहित्यिक प्रवृत्ति करना रुचिकर लगेगा। विद्यार्थियों के लिए भी समय अनुकूल है। शेयर-सट्टे में लाभ होगा। मनोबल दृढ़ और आत्मविश्वास भरपूर होगा। स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा। प्रतिस्पर्धियों के समक्ष विजय प्राप्त होगी। फिर भी प्रत्येक कार्य को शांति से करिएगा। व्यवसाय में सहकर्मियों का सहयोग मिलेगा।

शुभ रंग = लाल

शुभ अंक : 8

धनु (Sagittarius): आज सावधानी बरतें। माता के स्वास्थ्य में हो रहा परिवर्तन और परिवार का अनिच्छनीय वातावरण आपके स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डालेगा। धन और कीर्ति की हानि होगी। लेकिन मध्याहन के बाद आप प्रसन्नता का अनुभव करेंगे। स्वभाव में प्रेम भाव में वृद्धि होगी। विद्यार्थियों के लिए आज का दिन शुभ है।

शुभ रंग = केशरी

शुभ अंक : 2

मकर (Capricorn): जीवनसाथी के साथ व्यवहार अधिक मधुरतापूर्ण होगा। मित्रों के साथ पर्यटन पर जाने का आयोजन बना पाएंगे। भाईयों और स्नेहीजनों के साथ सम्बंध अच्छे रहेंगे। मान-सम्मान में वृद्धि होगी। प्रतिस्पर्धियों पर विजय प्राप्त होगी। मध्याहन के बाद आकस्मिक दुर्घटनाओं के कारण अस्वस्थ महूसस करेंगे। मकान और स्थावर संपत्ति के दस्तावेजों का ध्यान रखें।

शुभ रंग = पीला

शुभ अंक : 9

कुंभ (Aquarius): अपने खर्च पर आपको संयम रखना होगा। साथ-साथ क्रोध और जिह्वा पर भी संयम रखें जिससे किसी के साथ वाद-विवाद में उग्रता न हो जाए और साथ-साथ नकारात्मक विचार भी मन से दूर हो जाए। मध्याहन के बाद आपके विचारों में स्थिरता दिखाइ देगी। परिवार में सुख-शांतिपूर्ण वातावरण बना रहेगा। कार्य-सफलता मिलेगी।

शुभ रंग : नीला

शुभ अंक : 3

मीन (Pisces): आज आपके घर में धार्मिक कार्य होंगे। परिवार में आनंदमय वातावरण रहेगा। कार्य सफलता मिलेगी। शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखें। नए कार्य के लिए शुभ दिन है। मध्याहन के बाद आपके स्वभाव में क्रोध अधिक रहेगा। परिवारजनों के साथ अधिक वाद-विवाद न करें। खान-पान में भी ध्यान रखें। नकारात्मक विचारों से दूर रहें।

शुभ रंग = पीला

शुभ अंक : 9 
प्रेम सागर पाण्डेय् ,नक्षत्र ज्योतिष वास्तु अनुसंधान केन्द्र ,नि:शुल्क परामर्श - रविवार , दूरभाष 9122608219 / 9835654844
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दूरियाँ

Posted: 08 Jul 2022 07:01 AM PDT

दूरियाँ


तुम्हारे जाने के बाद......(एक सच्ची घटना पर आधारित )

मैं खोयी थी
अपने इन्द्रधनुषी सपनों में
अचानक
बादलों की एक गडगडाहट ऩे
मुझे तुमसे मिला दिया।
लेकिन मैं कभी मन से
तुम्हारी न बन सकी।
तुम्हारा नियंत्रण मेरी देह पर था,
परन्तु मन आज भी
उन्ही इन्द्रधनुषी सपनों मे
रंगा हुआ था।
धीरे धीरे
हमारे बीच दूरियाँ बढ़ने लगी,
बात बेबात तकरारे बढ़ने लगी,
आँगन मे गुलाब के साथ
कैक्टस भी फलने फूलने लगा।
और एक दिन
जब तुम चले गए
मुझे छोड़कर तन्हा
कहीं दूसरे शहर मे,
उस दिन मैं बहुत खुश थी
चलो रोज की चिक-चिक से
छुटकारा तो मिला।
मगर
रात भर मैं सो ना सकी,
सोचती रही
पता नहीं तुम कहाँ होंगे,
किस हाल मे होंगे ?
मैंने देखा
कि तुम अपना कोट भी तो
नहीं ले गए थे
सर्दी मे कैसे होंगे ?
यही सोचते सोचते
तुम्हारे कोट को
हाथ मे लेकर बैठी रही।
सच कहूँ
मैं पूरी रात सो ना सकी।
मुझे याद आया
उस दिन आलू-टमाटर कि सब्जी मे
नमक ज्यादा गिर गया था
तुमने कहा था
'नमक ज्यादा हो गया है'
मैं चिल्लाई थी
"तुमको बाज़ार का खाना अच्छा लगता है,
मेरे हाथ का कहाँ ?"
फिर तुम चुपचाप खाना खाकर
चले गए थे।
तुम्हारे जाने के बाद
जब खाया था मैंने खाना
तो पता चला था
सचमुच नमक बहुत ज्यादा था
फिर कभी आपने शिकायत नहीं की
चाय फीकी या सब्जी मे नमक की।
मुझे याद आ रहा है
तुम्हारा दफ्तर से आते ही
कंप्यूटर लेकर बैठ जाना,
और अपने काम मे लग जाना।
मैं सोचा करती
इस आदमी को मुझसे कोई मतलब नहीं,
बस रात को अपनी इच्छा पूर्ति के लिए
मेरी जरुरत !
तुम्हारे जाने के बाद
मुझे लगा
कि तुम ही मेरी
धड़कन बन चुके थे।
मैंने कंप्यूटर के की बोर्ड पर
अहसास किया
तुम्हारी अँगुलियों का।
मुझे याद आया
तुम सुनाते थे
अपनी कविता
सबसे पहले मुझे
और मैं चली जाती थी
बीच मे ही
कुछ काम करने
सुनना बीच मे छोड़ कर।
फिर तुमने बंद कर दिया था
धीरे-धीरे कविता सुनाना,
और
अधिक समय देने लगे थे
अपने कंप्यूटर पर भी।
आज मुझे याद आया
शादी के बाद
मेरा पहला जन्म दिन
लाये थे खरीदकर
मेरे लिए एक साडी
गुलाबी रंग की
और मैंने कहा था
"यह क्या रंग उठा लाये,
महरून होता तो अच्छा लगता"
तुमने कुछ नहीं कहा,
बस चुप रहे थे लेकिन
उसके बाद
किसी भी जन्म दिन पर नहीं लाये
कोई उपहार,
मेरे लिए
और कहा था
"अपने लिए एक साडी खरीद लेना ,
अगले महीने तुम्हारा जन्म दिन है"
मैंने नहीं समझा था
इस बात का मतलब
और तुम्हारी पीड़ा,
और लाती रही हर बार नई साडी ,
अपने जन्म दिन पर।
मगर आज लगता है
कहीं कुछ गलत था
मेरे उस व्यवहार मे।
मुझे यह भी याद आ रहा है
आज तुम्हारे जाने के बाद
कि तुम लाये थे एक अंगूठी
और छुपा दी थी
तकिये के नीचे,
शादी कि सालगिरह पर।
मैंने कहा था
"अच्छी है"
मगर साथ ही कहा था
"मुझे इस बार हीरे के टोप्स चाहिए"
और तुम चले गए थे
चुपचाप बाहर
बिना कुछ कहे।
शायद
मैं समझती थी
अपना अधिक अधिकार
और नहीं समझ पायी थी
तुम्हारा वह अनकहा प्यार
जो देना चाहते थे
तुम मुझे
हर बार,बारबार,बारम्बार।
एक बार
तुम्हारे मित्र की पत्नी ऩे की थी
शिकायत
अपने पति की,
हम दोनों के सामने
"ये तो किसी अवसर पर
कोई उपहार देते ही नहीं"
तब मुझे लगा था
कि तुम बहुत अच्छे हो
मगर
कह ना सकी तुम्हारे सामने
वह सब जो मन मे था
ना जाने क्यों ?
शादी से पूर्व
मैं अक्सर देखा करती थी
सुनहरे सपने
किसी राजकुमार के।
तुम कभी भी नहीं बन सके थे
मेरे सपनों के राजकुमार।
और मेरे ख्वाब
टूटते गए थे।
आज तुम्हारी जुदाई ऩे
मुझे अहसास दिलाया
कि तुम
मेरे सपनों के राजकुमार ना सही
मगर
मेरी आवश्यकता बन चुके थे।

डॉ अ कीर्तिवर्धन
मुजफ्फरनगर
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वक्त सदा उस शख्स का गुलाम होता है

Posted: 08 Jul 2022 06:59 AM PDT

वक्त सदा उस शख्स का गुलाम होता है,

नेकी की राह चलना, जिसका काम होता है।
लिखता है पत्थर दिलों पर दास्तां प्यार की,
इतिहास के पन्नों पर, उसका नाम होता है।
आज भी बसते हैं राम और सिया घर घर में,
जिन घरों में मर्यादा का सम्मान होता है।
बच्चें चलें दो कदम, अनैतिकता की राह,
यकीं मानिए, सारा घर ही बदनाम होता है।
देता है जो दाना परिंदों को और भूखे को रोटी,
उस आदमी में इंसानियत का भान होता है।
देश हित सीमा पर खडा, जान हथेली लेकर,
सैनिक घर-गाँव, देश, माँ-बाप की शान होता है।
लूट रहे मुल्क को जो रहनुमा, सत्ता में बैठकर,
सफेदपोश लुटेरों से, मुल्क बदनाम होता है।

अ कीर्तिवर्धन
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तब आज़ादी पायी थी

Posted: 08 Jul 2022 06:56 AM PDT

तब आज़ादी पायी थी 

भारत में फहराया तिरंगा, विश्व में शान बढ़ाई थी,
जय हिन्द का उद्घोष हुआ, तब आज़ादी पायी थी।
जन जन निकला सड़कों पर, जाने कितने जेलों में,
ललनाओं ने श्रंज्ञार गंवाया, दस्तक पड़ी सुनाई थी। 
माताओं ने लाल गँवाये, बहनों ने भाइयों को खोया,
राखी वाले हाथ थके, भाई की सूनी पडी कलाई थी।
भगत सिंह सुखदेव राजगुरू, वाहे गुरू उद्घोष किया,
पूरब पश्चिम उत्तर दक्षिण, उसकी धमक सुनाई थी।
सुभाष बोस बंगाल छोड़कर, विश्व फलक पर हुंकारे,
नाना, लक्ष्मी जाने कितनों ने, अपनी जान गँवायी थी।
गाँधी नेहरू का भी योगदान, था भारत की आज़ादी में,
गुमनाम हज़ारों लाखों, जिसने आज़ादी दिलवाई थी।
एक लक्ष्य एक ही सपना, सारा भारत देख रहा था,
तमिल तेलगू मलयालम, कन्नड़ ने अलख जगाई थी।
कुछ अंग्रेजों के दलाल बने, निज सुविधा के जाल बुने,
कुछ शहीद हुए भारत माता पर, मौत से आशनाई थी।
लहर चली जो दक्षिण से, उत्तर में प्रचंड तुफान बनी,
पूरब से छँटा अंधेरा,  पश्चिम में चमक बढ़ाई थी।
न भाषा की दीवारें थी, न जाति धर्म का बन्धन कोई,
भाषा बोली सब साथ चल रही, हिन्दी की अगुवाई थी।
नही प्रान्त की बाधाएँ थी, न शहर गाँव में भेद कोई,
भाषाएँ सब एक हुयी जब, तब आज़ादी पायी थी।

अ कीर्ति वर्द्धन
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न जाने क्यूँ

Posted: 08 Jul 2022 06:51 AM PDT

न जाने क्यूँ

बने रहना चाहते हैं
हम
निरपेक्ष?
कभी
सशक्त पंख होने
और 
उडने की क्षमता के बावजूद|
कर लेते हैं
आँख बन्द
सामने
बिल्ली को देखकर।
और बिल्ली
वह तो बैठी ही है
शिकार की तलाश मे
घात लगाये
चरम पंथी बन।
देखा है
कभी कभी
सीही को( कांटेदार छोटा सा जानवर)
शेर का
मुकाबला करते?
शायद नही,
यह 
नजरिये की नही
अपितु
हौसले की बात है।
आप
कह सकते है
सीही को
अति वादी
या 
चरमपंथी
मगर
नही है साहस
कहने का
शेर को
वाम पंथी
जो
निज स्वार्थ मे
कभी कभी
केवल
वर्चस्व के लिये
करता है हमला
बनाना चाहता है 
शिकार
अनेक अबोध
नरम पंथी
शाकाहारी
विचार रखने वाले
निरपेक्ष 
छोटे छोटे जानवरो को।
जो
नही मिटा पाते
उसकी भूख
मगर
भय वश
मान लेते हैं
उसे
जंगल का राजा।
कभी देखा है
जंगल मे
हाथी को
वह नही डरता
शेर से
मगर
नही मानता
कोई 
उसे राजा
जंगल का।
जानते है क्यों?
वह
अतिवादी नही है
नही मारता
राह मे आने वाले
किसी भी
छोटे बडे जानवर को।
बस खत्म कर दें
चर्चा
वाम पंथ या दक्षिण पंथ की
यहीं?
नही 
एक बार
शाकाहारी 
जंगली भैंसे का भी
अवलोकन करो
और समझो
अन्तर
पंथ का
अति वाद और
साम्यवाद का|
धर्मनिरपेक्ष और निरपेक्ष का,
धर्म के समर्थक
और
अधर्मी का।
भैंसा
शाकाहारी,
जिसे मान लिया गया
फकत
शिकार
शेर के लिये
निरपेक्ष रहने के कारण।
कर लेता है
कभी कभी
मुकाबला
शेर का
पटक देता है
उसे
अपने बलशाली
सीँगो पर उठाकर
जब कभी
शेर
करता है शिकार
उसके मासूम बच्चे का।
बस
यही तो है
असहिष्णुता
जो फैलायी जाती है
शेर
तथा 
उसके समर्थक 
हिंसक पशुओं द्वारा
धर्मनिरपेक्षता पर
बताया जाता है
हमला
वाम पंथियो द्वारा।
तब
शेरो का पूरा झुण्ड
घेरता है
उन भैंसो को
और 
बनाता है शिकार
किसी एक भैंसे को।
और बाकी भैंसे
हा हा हा -----+
देखते हैं
सामने खडे होकर
बनते हुये
शिकार
अपने ही साथी का।
और लौट जाते है
कुछ देर बाद
मानकर
नियती को
सर्वोपरि।

अ कीर्ति वर्द्धन
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इक्कीसवीं सदी में भी देश जातिवाद से लड़ रहा है पंडित रावेन्द्र तिवारी ।

Posted: 08 Jul 2022 06:49 AM PDT

इक्कीसवीं सदी में भी देश जातिवाद से लड़ रहा है पंडित रावेन्द्र तिवारी ।

वरिष्ठ साहित्यकार सामाजिक कार्यकर्ता दर्जनों संगठनों में परोक्ष अपरोक्ष रूप से सक्रिय भूमिका निभाने वाले समानता परिषद एन जी के संस्थापक  अध्यक्ष एंव अंतर्राष्ट्रीय लेखक शिव खेड़ा के संरक्षण व अध्यक्षता में बनी भारतीय राष्ट्रवादी समानता पार्टी के मध्यप्रदेश अध्यक्ष पंडित रावेन्द्र तिवारी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि  आज जहाँ एक तरफ देश की सरकार घोषण करती है कि इक्कीसवीं सदी भारत की है तो वही भारत में  इसी सदी में जातिवाद हावी है आरक्षण के नाम पर इक्कीसवीं सदी में ही भारत में कई आन्दोलन हुए हैं जिनमें मराठा आरक्षण जाट गुर्जर आन्दोलन शामिल है 

आज जहाँ सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास की बात भारत सरकार करती है वहाँ जातिगत आधार पर व्यवस्था को बढ़ावा देना समझ से परे है ।

पं; रावेन्द्र तिवारी ने कहा कि देश में विभिन्न जातियाँ निवास करती हैं और हर जाति धर्म में सभी की न ही सामाजिक  और न ही  आर्थिक रूप से स्थिति बराबर की है ऐसे में सरकार यदि जातिगत आधार पर आरक्षण की व्यवस्था अथवा किसी अन्य तरह की योजना को लागू करती है तो वह निश्चित रूप से वर्ग संघर्ष को बढ़ावा देने के शिवा किसी भी स्थिति में देश के लिए हितकरी साबित नहीं हो सकती है ।
 सवर्णो के  उपेक्षा से हिंन्दुत्व कमजोर पड़ रहा है  इस बात से भी  इन्कार नहीं किया जा सकता है जातिगत आरक्षण के दंश ने हिन्दुओं मे द्वेष की खाई ऐसे पैदा कर दिया है कि अशीक्षित से ज्यादा शिक्षित व्यक्ति जातिवाद से ग्रसित हो गया है जिसका उदाहरण वर्ष 2016 में तब देखने को मिला जब मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने पदोन्नति में आरक्षण के केस पर अपना  निर्णय दिया इस निर्णय के बाद कई आन्दोलन हुए  और स्थिति यहाँ तक  आ गई कि जो कर्मचारी  एक साथ बैठकर खाना पीना खाते थे वह शिक्षित व्यक्ति भी जातिवाद से जहर से अफने को नहीं बचा सके और अपने ही विभाग के सहकर्मी से दूरी बना लिए ।

पं,रावेन्द्र तिवारी ने देश के मीडिया के माध्यम से भारत सरकार से माँग करते हुए कहा कि  आज डिजिटल युग में देश के प्रत्येक नागरिक को बराबर का समान अधिकार मिलना चाहिए  और अन्य  आयोगो की तरह ही सवर्ण  आयोग का गठन किया जाना चाहिए यदि सरकार  ऐसा नहीं करती है तो दिनों दिन सरकार के साथ साथ समस्त राजनीतिक दलों के लिए सवर्णो का विद्रोह बढ़ना तय है  
इक्कीसवीं सदी में  आरक्षण  एससी एसटी एक्ट जैसे नीति का स्वीकार नहीं किया जा सकता है इसके लिए चाहे जितने आन्दोलन करने पड़े करेंगे पर किसी कीमत पर उक्त नीति का समर्थन नहीं करेंगे ।

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वीर सावरकर जी की आज ऐतिहासिक छलांग इतिहास-स्मृति है।

Posted: 07 Jul 2022 10:08 PM PDT

वीर सावरकर जी की आज ऐतिहासिक छलांग इतिहास-स्मृति है।

कमलेश सिंह 
अंग्रेजों के विरुद्ध लड़े गये भारत के स्वाधीनता संग्राम में वीर विनायक दामोदर सावरकर का अद्वितीय योगदान है। उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर देश ही नहीं, तो विदेश में भी क्रांतिकारियों को तैयार किया। इससे अंग्रेजों की नाक में दम हो गया। अतः ब्रिटिश शासन ने उन्हें लंदन में गिरफ्तार कर मोरिया नामक पानी के जहाज से मुंबई भेजा, जिससे उन पर भारत में मुकदमा चलाकर दंड दिया जा सके।
पर सावरकर बहुत जीवट के व्यक्ति थे। उन्होंने ब्रिटेन में ही अंतरराष्ट्रीय कानूनों का अध्ययन किया था। 8 जुलाई, 1910 को जब वह जहाज फ्रांस के मार्सेलिस बंदरगाह के पास लंगर डाले खड़ा था, तो उन्होंने एक साहसिक निर्णय लेकर जहाज के सुरक्षाकर्मी से शौच जाने की अनुमति मांगी।
अनुमति पाकर वे शौचालय में घुस गये तथा अपने कपड़ों से दरवाजे के शीशे को ढककर दरवाजा अंदर से अच्छी तरह बंद कर लिया। शौचालय से एक रोशनदान खुले समुद्र की ओर खुलता था। सावरकर ने रोशनदान और अपने शरीर के आकार का सटीक अनुमान किया और समुद्र में छलांग लगा दी।
बहुत देर होने पर सुरक्षाकर्मी ने दरवाजा पीटा और कुछ उत्तर न आने पर दरवाजा तोड़ दिया; पर तब तक तो पंछी उड़ चुका था। सुरक्षाकर्मी ने समुद्र की ओर देखा, तो पाया कि सावरकर तैरते हुए फ्रांस के तट की ओर बढ़ रहे हैं। उसने शोर मचाकर अपने साथियों को बुलाया और गोलियां चलानी शुरू कर दीं।
कुछ सैनिक एक छोटी नौका लेकर उनका पीछा करने लगे; पर सावरकर उनकी चिन्ता न करते हुए तेजी से तैरते हुए उस बंदरगाह पर पहुंच गये। उन्होंने स्वयं को फ्रांसीसी पुलिस के हवाले कर वहां राजनीतिक शरण मांगी। अंतरराष्ट्रीय कानून का जानकार होने के कारण उन्हें मालूम था कि उन्होंने फ्रांस में कोई अपराध नहीं किया है, इसलिए फ्रांस की पुलिस उन्हें गिरफ्तार तो कर सकती है; पर किसी अन्य देश की पुलिस को नहीं सौंप सकती। इसलिए उन्होंने यह साहसी पग उठाया था। उन्होंने फ्रांस के तट पर पहुंच कर स्वयं को स्वतंत्र घोषित कर दिया। तब तक ब्रिटिश पुलिसकर्मी भी वहां पहुंच गये और उन्होंने अपना बंदी वापस मांगा।
सावरकर ने अंतरराष्ट्रीय कानून की जानकारी फ्रांसीसी पुलिस को दी। बिना अनुमति किसी दूसरे देश के नागरिकों का फ्रांस की धरती पर उतरना भी अपराध था; पर दुर्भाग्य से फ्रांस की पुलिस दबाव में आ गयी। ब्रिटिश पुलिस वालों ने उन्हें कुछ घूस भी खिला दी। अतः उन्होंने सावरकर को ब्रिटिश पुलिस को सौंप दिया। उन्हें कठोर पहरे में वापस जहाज पर ले जाकर हथकड़ी और बेड़ियों में कस दिया गया। मुंबई पहुंचकर उन पर मुकदमा चलाया गया, जिसमें उन्हें 50 वर्ष कालेपानी की सजा दी गयी।
अपने प्रयास में असफल होने पर भी वीर सावरकर की इस छलांग का ऐतिहासिक महत्व है। इससे भारत की गुलामी वैश्विक चर्चा का विषय बन गयी। फ्रांस की इस कार्यवाही की उनकी संसद के साथ ही विश्व भर में निंदा हुई और फ्रांस के राष्ट्रपति को त्यागपत्र देना पड़ा। हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में भी इसकी चर्चा हुई और ब्रिटिश कार्यवाही की निंदा की गयी; पर सावरकर तो तब तक मुंबई पहुंच चुके थे, इसलिए अब कुछ नहीं हो सकता था।स्वाधीन भारत में सावरकर के प्रेमियों ने फ्रांस शासन से इस ऐतिहासिक घटना की स्मृति में बंदरगाह के पास एक स्मारक बनाने का आग्रह किया। फ्रांस का शासन तथा मार्सेलिस के महापौर इसके लिए तैयार हैं; पर उनका कहना है कि इसके लिए प्रस्ताव भारत सरकार की ओर से आना चाहिए। ॐ
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Liked on YouTube: आद्रा नक्षत्र में हर साल धूमधाम से मनाया जाता है नाग बाबा की पूजा

Posted: 07 Jul 2022 09:12 AM PDT

आद्रा नक्षत्र में हर साल धूमधाम से मनाया जाता है नाग बाबा की पूजा
झारखंड गोड्डा ग्राम कनवाड़ा में आज दिनांक 7 जुलाई 2022 को नाग बाबा का पूजा बड़े ही धूमधाम से मनाया गया आद्रा नक्षत्र में हर साल पूजा मनाया जाता है इस पूजा का शुरुआत 22 जून से 7 जुलाई को विधिवत समापन किया गया । आसपास एवं दूर-दराज के से लगभग हजारों भक्त इस मेले में शामिल होते हैं ऐसा मानना है कि जो किसी व्यक्ति को सर्पदंश हुआ हो यहां स्थान पर आकर बाबा का नीर पीने से वह व्यक्ति ठीक हो जाता है और किसी प्रकार का चर्म रोग भी हो तो लगभग पांच रविवार को आकर नाग बाबा का पूजा करने से चर्म रोग भी ठीक हो जाता है यहां पर भक्तों द्वारा दलिया का विशेष महत्व है और चढ़ाया जाता है रिपोर्ट विकास कुमार सिंह झारखंड गोड्डा दिव्य रश्मि ! धर्म, राष्ट्रवाद , राजनीति , समाज एवं आर्थिक जगत की खबरों का चैनल है | जनता की आवाज़ बनने के उदेश्य से हमारे सभी साथी कार्य करते है अत: हमारे इस मुहीम में आप के साथ की आवश्यकता है |हमारे खबरों को लगातार प्राप्त करने के लिए हमारे चैनल को सबस्क्राइब करना न भूले और बेल आइकॉन को अवश्य दबाए | खबर पसंद आने पर👉 हमारे "चैनल" को Subscribe, वीडियो को Like 👍 & Share↪ , जरुर करें चैनल को सब्सक्राइब करें खबर को शेयर जरूर करें Facebook : https://ift.tt/PW0oaLD Twitter https://twitter.com/DivyaRashmi8 instagram : https://ift.tt/ks9vMrQ visit website : https://ift.tt/WFpaTg6
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सिर्फ़ सर्दियों में नहीं, गर्मियों में भी वायु प्रदूषण एक बड़ी समस्या

Posted: 07 Jul 2022 08:43 AM PDT

सिर्फ़ सर्दियों में नहीं, गर्मियों में भी वायु प्रदूषण एक बड़ी समस्या

जहां आमतौर पर यह माना जाता है कि वायु प्रदूषण सर्दियों के दौरान होने वाली समस्या है, वहीं 10 शहरों के गर्मियों के दौरान जुटाये गए सरकारी डाटा पर नज़र डालें तो पता चलता है कि गर्मियों के महीनों में पीएम2.5 और पीएम10 के प्रति माह स्तर इन ज्यादातर महीनों में क्रमशः 40 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर की सुरक्षित सीमाओं से अधिक रहे हैं।
फिलहाल प्रदूषण को लेकर जो भी नीतिगत निर्णय और कार्य किये जा रहे हैं, वे सभी सर्दियों के कुछ महीनों को ध्यान में रखकर ही हो रहे हैं। हालांकि सच्चाई यह है कि हम साल के ज्यादातर महीनों में वायु प्रदूषण के उच्च स्तरों की जद में होते हैं जिनका मानव स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। इसलिए यह ज़रूरी है कि वायु प्रदूषण से निपटान के लिए नीतीयां सिर्फ सर्दियों को नहीं बल्कि गर्मियों के महीनों को भी ध्यान में रख कर बनाई जाएँ।
इस परिस्थिति का विज्ञान समझाते हुए स्काईमेट वेदर में मौसम विज्ञान और जलवायु परिवर्तन विभाग में वाइस प्रेसिडेंट, महेश पलावत, का मानना है कि, "इस साल, मार्च और अप्रैल के दौरान प्री-मानसून बारिश लगभग शून्य थी और मार्च के दूसरे सप्ताह में ही हीटवेव की स्थिति भी शुरू हो गई थी। ऐसे लगातार शुष्क मौसम के दौरान, वायु प्रदूषण बढ़ जाता है क्योंकि बारिश प्रदूषकों को नहीं धोती है और धूल के कण जो पीएम 10 का गठन करते हैं, निचले वातावरण में बने रहते हैं। बलूचिस्तान, मध्य पाकिस्तान और थार रेगिस्तान से पश्चिमी हवाएं भी लंबे समय तक भारत-गंगा के मैदानों और मध्य भारत के कुछ हिस्सों और दक्षिण प्रायद्वीप यानी तेलंगाना, विदर्भ, मराठवाड़ा आदि में बहती रहीं। इसका मतलब है कि गर्मियों के महीनों में प्रदूषण खराब श्रेणी में रहा। आमतौर पर, जून के दूसरे पखवाड़े तक, देश के कई हिस्सों में प्री-मानसून बारिश होती है, जो हवा को साफ करती है, लेकिन इस साल ऐसा नहीं हुआ। इस साल, मध्य पूर्व में धूल भरी आंधी चली और हवाओं ने धूल को मुंबई, मध्य महाराष्ट्र और देश के मध्य भागों जैसे शहरों तक पहुँचाया। जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसी घटनाएं बढ़ती रहेंगी और इसलिए वायु प्रदूषण के स्तर को भी प्रभावित करती हैं।"
मौजूदा अध्ययन के लिए देश के 10 नॉन अटेनमेंट शहरों आगरा, बेंगलुरु, चंडीगढ़, चेन्नई, दिल्ली, कोलकाता, जोधपुर, मुंबई, लखनऊ, और पटना को चुना गया और इनमें मार्च, अप्रैल, मई तथा जून के महीनों के दौरान पीएम2.5, पीएम10 और एनओ2 के औसत स्तरों की निगरानी की गई। हालांकि भारतीय मौसम विभाग जून को मानसून का महीना मानता है मगर देश के विभिन्न हिस्सों में यह महीना ज्यादातर सूखा ही रहा। इसी वजह से इस महीने को भी इस विश्लेषण का हिस्सा बनाया गया है। सीपीसीबी ने पीएम 2.5, पीएम10 और एनओ2 के लिए जो सालाना औसत अनुमन्य सीमा तय की हैं, वे क्रमशः 40 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर, 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और 40 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है।
वहीं, विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमाओं की बात करें तो यह क्रमशः 5 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर, 15 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और 10 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है।


इस साल गर्मियों में कैसा रहा शहरों का हाल?
डाटा के मुताबिक चेन्नई को छोड़कर बाकी सभी शहरों का पीएम 2.5 स्तर मार्च 2022 में अनुमन्य सीमा से अधिक रहा जबकि पीएम10 स्तर की बात करें तो यह सभी शहरों में सुरक्षित सीमा से ज्यादा ही रहा। अप्रैल में सिर्फ कोलकाता में इन स्तरों में सुधार हुआ और कोलकाता तथा चेन्नई ने ही पीएम2.5 की सुरक्षित सीमा को पार नहीं किया। सिर्फ चेन्नई ही ऐसा एकमात्र शहर रहा जहां अप्रैल माह के दौरान पीएम10 के स्तर सुरक्षित सीमाओं के अंदर ही रहे। मई के महीने में भी यही रुख बना रहा और सिर्फ चेन्नई, बेंगलुरु तथा कोलकाता में ही पीएम2.5 के स्तर सुरक्षित सीमाओं के अंदर रहे। वहीं, कोई भी शहर पीएम10 स्तरों के मामले में सुरक्षित मानकों को पूरा नहीं कर सकता। इस साल जून में देश के कुछ हिस्सों में बारिश हुई जिससे आगरा, बेंगलुरु, चेन्नई, कोलकाता और मुंबई शहरों में पीएम2.5 के स्तरों में सुधार हुआ और वह सीपीसीबी द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमाओं के अंदर रहे। जून के महीने में बेंगलुरु चेन्नई और मुंबई में पीएम10 के स्तर 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर की सीमा के अंदर ही रहे।


2021 बनाम 2022
इस साल पूरा देश मार्च के महीने से ही जबरदस्त तपिश की जद में रहा और इस दौरान हर जगह तापमान ने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए। मार्च का महीना पिछले 121 वर्षों के दौरान दर्ज किया गया सबसे गर्म मार्च रहा और इस दौरान पूरे देश का औसत अधिकतम तापमान 33.1 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया जो अब तक का सर्वाधिक है जो सामान्य से 1.86 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा। बाद के महीनों में भी कमोबेश यही हाल बना रहा।
अत्यधिक गर्मी की वजह से बिजली का संकट भी पैदा हुआ, नतीजतन और ज्यादा मात्रा में कोयला जलाया गया जो कि प्रदूषण का एक प्राथमिक स्रोत है। हीटवेव के दौरान अत्यधिक तपिश और ठहरी हुई हवा के कारण न सिर्फ ओजोन प्रदूषण बढ़ा बल्कि पार्टिकुलेट प्रदूषण में भी वृद्धि हुई। स्थानीय स्तर पर लंबे समय तक सूखी गर्मी पड़ने के कारण हवा में तैरने वाले धूल के कणों की मात्रा में भी वृद्धि हुई। मानसूनपूर्व बारिश लगभग न के बराबर होने के कारण गर्मी की दुश्वारियां और भी ज्यादा बढ़ गईं। खास तौर पर उत्तर पश्चिमी मैदानी इलाकों में, जिन्हें वायु प्रदूषण के लिहाज से हॉटस्पॉट माना जाता है।
वर्ष 2021 से तुलना करें तो इस अध्ययन में लिए गए महीनों के दौरान ज्यादातर शहर जाहिर तौर पर पीएम2.5 और पीएम 10 के ऊंचे स्तरों से जूझते रहे। मिसाल के तौर पर सिर्फ मार्च के महीने में पीएम10 के स्तरों को छोड़ दें तो दिल्ली में पीएम2.5 और पीएम10 के स्तर 2021 के मुकाबले 2022 के इन 4 महीनों में अधिक रहे। यही हाल पटना का भी रहा। इन दोनों शहरों में पीएम 2.5 और पीएम10 के स्तर सीपीसीबी के मानकों से 5 गुने से ज्यादा ऊंचे रहे।

गर्मियों के दौरान प्रदूषणकारी तत्वों में हिस्सेदारी
इस विश्लेषण के दायरे में लिए गए 10 शहरों में जहां पीएम2.5 के स्तर सुरक्षित सीमाओं से ज्यादा रहे, वहीं पीएम10 के स्तर भी उल्लेखनीय रूप से ऊंचे रहे और यह एक प्रमुख प्रदूषणकारी तत्व है। आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि 10 में से 8 शहरों में पीएम10 के स्तर इन 4 महीनों के दौरान कभी भी सुरक्षित सीमा के अंदर नहीं रहे। जून 2022 में बेंगलुरु का पीएम10 संकेंद्रण 58.49 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रिकॉर्ड किया गया और पहले से ही 200 मिलीमीटर वर्षा होने के बावजूद यह सुरक्षित स्तरों को विरले ही हासिल कर पाया। चेन्नई में भी पीएम10 का संकेंद्रण इस साल अप्रैल और जून के माह में ही सुरक्षित सीमाओं के अंदर रहा।
सर्वे के दायरे में लिए गए इन 10 शहरों में से पटना और दिल्ली में मार्च तथा अप्रैल के महीनों में नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (एनओ2) के स्तर वार्षिक सुरक्षित सीमाओं को पार कर गए। वहीं, चंडीगढ़ में अप्रैल से जून तक यही हाल रहा, जबकि आगरा, चेन्नई, जोधपुर और कोलकाता जैसे अनेक शहरों में पिछले वर्ष के मुकाबले इस साल एनओ2 के स्तरों में वृद्धि देखी गई। एनओ2 एक गैस है जिसका अधिक संघनन होने से वायु मार्गों में इन्फ्लेमेशन हो सकता है।

दिन-ब-दिन लंबे वक्त तक संपर्क में रहना
आंकड़ों से जाहिर होता है कि अनेक शहर लगातार अत्यधिक प्रदूषित दिनों के लगातार चलते सिलसिले की चपेट में हैं। अप्रैल 2022 में दिल्ली में कोई भी दिन ऐसा नहीं गुजरा जब पीएम 2.5 के स्तर सीपीसीबी द्वारा निर्धारित 24 घंटे की सुरक्षित सीमा यानी 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर के अंदर रहे हों। इसी तरह मुंबई जैसे तटीय शहरों में सिर्फ नौ दिन ही ऐसे गुजरे जब पीएम 2.5 का संकेंद्रण स्तर सुरक्षित सीमाओं के अंदर रहा। आप यहां इन सभी शहरों का महीने दर महीने हीटमैप देख सकते हैं। इतने लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने से मानव स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है।
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गुरू का खरा स्वरूप

Posted: 07 Jul 2022 08:31 AM PDT

गुरू का खरा स्वरूप

शिष्य का विश्वास :'गुरु विश्वास पर निर्भर है । अपने विश्वास पर ही गुरु की महत्ता आधारित है', इसमें गुरु शब्द बाह्य गुरु के संदर्भ में प्रयोग किया गया है । गुरु पर विश्वास होगा, तो ही गुरु 'गुरु' का कार्य कर सकते हैं । 'गुरु भी तुम्हारे विश्वास पर है । तुम्हारे विश्वास में ही गुरु है,' इसमें गुरु अंतर्यामी गुरु के रूप में हैं ।

गुरु तत्त्व एक ही है : बाह्य स्वरुप में गुरु अलग अलग दिखते हैं, फिर भी अंदर से सभी गुरु एक ही होते हैं जिस प्रकार गाय के किसी भी थन से एक समान ही शुद्ध और निर्मल दूध प्राप्त होता है, उसी प्रकार प्रत्येक गुरु में गुरु तत्त्व एक ही होने के कारण आनंद की लहरी एक समान ही होती है। समुद्र की लहरें जिस प्रकार किनारे आती हैं उसी प्रकार ईश्वर अथवा ब्रह्म की लहरियां अर्थात गुरु समाज की ओर आते हैं। सभी लहरों के पानी का स्वाद जैसे एक ही होता है उसी प्रकार सर्व गुरु के तत्त्व एक अर्थात ब्रह्म ही होता है। पानी की टंकी में लगा नल छोटा हो अथवा बड़ा सभी में से एक सामान जल आता है। बिजली के बल्ब कितने ही प्रकार व आकार के हों तब भी उसमे से प्रकाश ही बाहर आता है, ऐसे ही गुरु बाह्यतः अलग अलग दिखाई देते हैं, तब भी उनके अंदर जो गुरु तत्त्व अर्थात जो ईश्वरीय तत्व है वह एक ही है, गुरु अर्थात स्थूल देह नहीं, गुरु को सूक्ष्म देह (अर्थात मन) व कारण देह (अर्थात बुद्धि) नहीं होने के कारण वे विश्वमन और विश्वबुद्धि से एकरूप हुए होते हैं। अर्थात सभी गुरु का मन और बुद्धि यह विश्वमन और विश्वबुद्धि होने के कारण एक ही होते हैं।

गुरु सर्वज्ञ होते हैं : श्री ब्रह्मचैतन्य गोंदवलेकर महाराज जी कहते हैं – 'तुम स्वयं को जितना जानते हो, उससे कहीं अधिक मैं तुम्हें जानता हूं । जगत का नियम यह है कि जिसे जिसका जितना सान्निध्य मिलता है, उतना ही अधिक उससे परिचय होता है । तुम्हें देह का सबसे अधिक सान्निध्य प्राप्त है । यह देह इसी जन्म तक सीमित है । तुम उतना ही जान सकते हो । तुम्हें जब से जीव दशा प्राप्त हुई, तबसे जो-जो देह तुमने धारण किए हैं, रामकृपा से वे सब मुझे ज्ञात होते हैं । इससे समझ आएगा कि मैं तुम्हें जानता हूं ।'

गुरु की सर्वज्ञता के सन्दर्भ में हुई प्रतीति – 'एक भक्त प.पू (परम पूज्य) भक्तराज महाराज जी को (बाबा को) पत्र भेजते थे । प.पू. बाबा से मिलने पर बाबा उन्हें पत्र में लिखे प्रश्‍नों के उत्तर देते थे । इसलिए उन्हें (भक्त को) ऐसा लगता था कि बाबा पत्र पढते हैं । एक बार प.पू. भक्तराज महाराज जी के इंदौर स्थित आश्रम को समेटते समय मुझे वे सर्व पत्र मिले । उन्हें खोला भी नहीं गया था । गुरु को सूक्ष्म से सर्व ज्ञात होता है, यह मैंने उस समय अनुभव किया ।' – डॉ. आठवले

इस प्रसंग से गुरु की सर्वज्ञता ध्यान में आती है।

संदर्भ : सनातन संस्था का ग्रंथ 'गुरुकृपायोग'
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‘वंदे मातरम्’ के सम्मान के लिए देश में कानून बनाया जाए !- अधिवक्ता उमेश शर्मा

Posted: 07 Jul 2022 08:29 AM PDT

'वंदे मातरम्' के सम्मान के लिए देश में कानून बनाया जाए !- अधिवक्ता उमेश शर्मा

वर्ष 1909 में मुस्लिम लीग ने प्रथम 'वंदे मातरम्' का विरोध किया और 'वंदे मातरम्' का विरोध करनेवाले 1947 में भारत का विभाजन कर दूसरे देश अर्थात पाकिस्तान चले गए । 'वंदे मातरम्' भारत की सांस्कृतिक धरोहर है । जिसे देश के प्रत्येक नागरिक को मान्य करना चाहिए । अन्यथा हमें देश का नागरिक कहलवाने का कोई अधिकार नहीं है । 'वंदे मातरम्' गीत में भारतमाता का सम्मान है तथा इसका विरोध करनेवालों को भारतमाता का सम्मान नहीं करना है । 'वंदे मातरम्' का विरोध राष्ट्रविरोध है । 'वंदे मातरम्' के सम्मान के लिए देश में कानून बनाना चाहिए, ऐसी मांग 'सर्वाेच्च न्यायालय' के अधिवक्ता उमेश शर्मा ने की । हिन्दू जनजागृति समिति आयोजित '...आखिर 'वंदे मातरम्' का विरोध कब तक ?' इस विषय पर ऑनलाइन विशेष संवाद में वे बोल रहे थे ।

इस समय बिहार के 'भारतीय जनक्रांति दल' के महासचिव अधिवक्ता राकेश दत्त मिश्रा ने कहा, 'वंदे मातरम्' ऐसा गीत है, जिसके कारण अपने देश के प्रति सम्मान की भावना उत्पन्न होती है । जिन्हें देश के प्रति आस्था नहीं है, वे ही इसका विरोध कर सकते हैं । जो राष्ट्र गीत और राष्ट्र का सन्मान नहीं करते, उनकी नागरिकता तत्काल निरस्त कर उन पर कार्यवाही करने का कानून इस देश में लागू करना चाहिए । उसी प्रकार 'वंदे मातरम्' का विरोध करनेवाले विधायक, सांसद अथवा उनका जो भी राजनीतिक पद हो, वह भी निरस्त करने चाहिए ।' इस समय सनातन संस्था के धर्मप्रचारक श्री. अभय वर्तक ने कहा कि, 'वंदे मातरम्' पर उस समय अंग्रेजों ने प्रतिबंध लगाया था, तब भी 'वंदे मातरम्' कहते हुए देश के अनेक क्रांतिकारियों ने देश के लिए बलिदान दिया, फांसी पर चढे । 'वंदे मातरम्' का विरोध करनेवाले अंग्रेजों की भाषा बोल रहे हैं । 'वंदे मातरम्' को संविधान में राष्ट्रगीत का दर्जा देकर उसका ऐसा स्थान निर्माण करना चाहिए कि, उसका विरोध करने का किसी का साहस नहीं होगा ।
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मन का अंधियारा दूर करो

Posted: 07 Jul 2022 08:23 AM PDT

मन का अंधियारा दूर करो

दीप जला प्रेम प्यार के दिल की बातें भरपूर करो 
सद्भावों के फूल खिला मन का अंधियारा दूर करो

ज्ञान ज्योत जब जलाई उजियारा आया चहूंओर 
बीत गई अंधियारी रातें नवजीवन कि आई भोर 
संस्कार पावन दे सबको राष्ट्र निर्माण जरूर करो 
छोड़ो बीती बातें सारी मन का अंधियारा दूर करो

भागमभाग भरे जीवन में दो पल का भी चैन नहीं 
दिनभर की भागदौड़ है राहत मिले दिन रैन नहीं 
थोड़ा वक्त घरवालों को मुश्किलें चकनाचूर करो 
आनंद भरे मेघ बरसेंगे मन का अंधियारा दूर करो

रिश्ते नाते मतलब के स्वार्थ भरी ये दुनिया सारी 
सद्भावों के फूल खिला दो महके आंगन फुलवारी 
प्यार के मोती लुटाकर खुद को तुम मशहूर करो 
सारा जग रोशनी पाये मन का अंधियारा दूर करो

रमाकांत सोनी सुदर्शन 
नवलगढ़ जिला झुंझुनू राजस्थान
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