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Sunday, July 10, 2022

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गुरु की महिमा अंनत गुरु की महिमा अंनत

Posted: 10 Jul 2022 08:59 AM PDT

गुरु की महिमा अंनत गुरु की महिमा अंनत

इस दुनिया में ऐसा कुछ भी नहीं है जिसकी तुलना श्री गुरु से की जा सके । गुरु की तुलना यदि सागर से करें तो सागर में लवणता है; सागर में ज्वार हैं; लेकिन सद्गुरु अखंड आनंद है। सद्गुरु की तुलना यदि कल्पवृक्ष से करें तो कल्पवृक्ष वह प्रदान करता है जिसकी हम कल्पना करते हैं ; लेकिन सद्गुरु शिष्य के विचार को मिटा देते हैं और उसे एक अकल्पनीय वस्तु की प्राप्ति करवा देते हैं; यह वाणी भी गुरु का वर्णन करने में असमर्थ है।'
*गुरु की महिमा का वर्णन संतों ने इस प्रकार किया है :*

  1. पिता केवल पुत्र को जन्म देता है, जबकि गुरु उसे जन्म और मृत्यु चक्र से छुडाते हैं; इसलिए गुरु को पिता से श्रेष्ठ माना गया है। - संत तुकाराम
  1. एक बद्ध जीव दूसरे बद्ध जीव का उद्धार नहीं कर सकता । गुरु स्वयं मुक्त होते हैं, इसलिए शिष्य का उद्धार कर सकते है। - संत तुकाराम
  1. सद्गुरु के सिवाय कोई आश्रय नहीं इसलिए पहले उनके चरण पकड़ने चाहिए । वे तुरंत अपने जैसा बना देते हैं । इसके लिए उन्हें कोई समय नहीं लगता । सद्गुरु को लोहा व पारस की उपमा भी नहीं दे सकते। सद्गुरु-महिमा अनमोल है । तुकाराम महाराज जी कहते है कि ऐसे लोग अंधे होते हैं जो खरे ईश्वर को भूल जाते हैं ।
  1. भगवान कृष्ण ने भी कहा है कि गुरु की भक्ति भगवान की भक्ति से श्रेष्ठ है। मुझे अपने भक्त प्रिय हैं परंतु गुरु भक्त बहुत अधिक प्रिय हैं । - श्री एकनाथी भागवत अर्थात भगवान कृष्ण कहते हैं, 'मैं अपने भक्तों से अधिक गुरु भक्त को प्रेम करता हूं।
  1. 'मुझे जो चाहिए था वो एक ही स्थान पर, श्री तुकामाई के पास मिला । मुझे निर्गुण का साक्षात्कार, सगुण का अपार प्रेम और अखंड नाम एकत्र चाहिए था , ये सब उनके पास मिल गया । - श्री ब्रह्मचैतन्य गोंदवलेकर महाराज'
  1.  श्री शंकराचार्य जी ने कहा है, 'इस त्रिभुवन में कहीं भी सद्गुरु को सुशोभित कर सके ऐसी उपमा नहीं है । उनकी तुलना पारस से भी की जाए तो वह भी कम होगी; क्योंकि पारस लोहे को सोना बना देता है, परंतु वह उसे अपना पारसत्व नहीं दे सकता ।' समर्थ रामदास स्वामी जी ने दास बोध में भी कहा है, शिष्य को गुरुत्व प्राप्त होता है । स्वर्ण से स्वर्ण नहीं बनता, इसलिए सद्गुरु को पारस की उपमा नहीं दिया जा सकता ।
  1. यदि हम गुरु की उपमा कल्पतरु से करें तो कल्पतरु, कल्पना करने के बाद ही इच्छित वस्तु प्रदान करती है, परंतु श्री गुरु कल्पना करने से पूर्व ही इच्छा पूर्ण करते हैं । श्रीगुरु कामधेनु ही है । - श्री गुरुचरित्र


*संदर्भ* : सनातन संस्था का ग्रंथ 'गुरुकृपायोग'
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सनातन संस्कृति चेतना परिशद की बैठक में फैसला लिया गया कि 4 अगस्त को गोस्वामी तुलसीदास की जयंती पटना के बापू सभागार में आयोजित की जाएगी |

Posted: 10 Jul 2022 08:52 AM PDT

सनातन संस्कृति चेतना परिशद की बैठक में फैसला लिया गया कि 4 अगस्त को गोस्वामी तुलसीदास की जयंती पटना के बापू सभागार में आयोजित की जाएगी |

  • 16 संस्कारो से जुडे समाज के विभिन्न लोगो को सम्मानित करेगा परिशद , हिन्दुत्व के संरक्षण व समर्वधन की जिम्मेवारी ब्राम्हणों की है: मिथिलेष तिवारी
  • गोस्वामी तुलसीदास की जयन्ती पर बड़ी संख्या में जुटेगे ब्राम्हण समाज के प्रतिनिधि

सनातन संस्कृति चेेतना परिशद के कार्यकारी अध्यक्ष एवं जाने-माने चिकित्सक डा0 मनोज कुमार की अध्यक्षता में एक राज्य स्तरीय बैठक बिहार इन्डस्ट्रीज एसोसिएषन (बी.आई.ए) सभागार में संपन्न हुई। इस बैठक में गोपालगंज, बक्सर, रोहतास, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, भोेजपुर, सारण समेत बिहार के सभी जिलों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक को संबोधित करते हुए भाजपा के प्रदेष उपाध्यक्ष, पूर्व विधायक तथा सनातन संस्कृति चेतना परिशद के संरक्षक मिथिलेष तिवारी ने कहा कि आगामी 04 अगस्त 2022 को पटना के बापू सभागार में संत गोस्वामी तुलसीदास जी की जयंती धूम-धाम से मनायी जायेगी। श्री तिवारी ने कहा कि भारत के अराध्य भगवान श्री राम का जीवन दर्शन रामचरित्र मानस में ही पढ़ने को मिलता है, जिसे गोस्वामी तुलसी दास जी ने लिखा और अपना नाम हिन्दी साहित्य के क्षेत्र में महान बनाया। इनके बताये हुए मार्ग को अपना कर हम अपने सनातन संस्कृति को मजबूत कर सकते है। इसी को लेकर गोस्वामी तुलसी दास जी की जयंती के अवसर पर एक विषाल कार्यक्रम आयोजित किया जायेगा। इनके द्वारा बनाये और लिखे गए महाकाव्य से भारत सहित दुनिया के सभी सनातनी पंथी ना सिर्फ प्रेरणा पाते हैं बल्कि जीवन जीने की राह पाते हैं। भारत की संस्कृति के अधिष्ठान के रूप में ख्यातिलब्ध और मूर्धन्य मानव के जीवन पर हम सभी मिलकर उनका जीवनउत्सव मनाएंगे।
हिंदुत्व ही भारत के जीवनशैली का आधार है इसलिए इसकी रक्षा और संरक्षण सहित उसका भविष्योन्मुखी संवर्धन करना अनिवार्य है इसलिए हमारे कुछ विषय हैं जिसको जनता के समक्ष पेश करना आवश्यक है। हम सभी चाहते हैं कि जिस प्रकार पटना में हज भवन का निर्माण हुआ है उसी प्रकार पटना तथा गया में तीर्थ भवन की स्थापना हो ताकि हिन्दू तीर्थ यात्रियों की भी सुविधाएं खड़ी की जा सकें। ब्राह्मण समाज हिंदुत्व का आधार स्तंभ है और 16 संस्कारों पर आधारित जीवनदर्शन को विकसित किया है। बिहार में भी यह संस्कृति फले.फुले इसलिए ब्राह्मण हित की बात अनिवार्य है। हम 4 अगस्त के कार्यक्रम में हिंदुओं के समरसता के आधार स्तंभ ब्राह्मण हित की बात भी आपके सामने रखेंगे। इसलिए आप सभी स्वजनों से आग्रह है कि आप सभी इस कार्यक्रम से भारी संख्या में पटना पहुँचे और समाज का हिंदुत्व की पद्यति पर उल्लेखनीय भविष्य के निर्माण पर काम करें। श्री तिवारी ने कहा कि सनातन धर्म के 16 संस्कारों में महती भूमि का निभाने वाले वैसे समाज के सभी लोगो को मंच से सम्मानित किया जायेगा। उन्होने कहा कि परिशद के इस कार्यक्रम में देष के संत समाज के प्रमुख लोग, बडे़-बड़े, राजनेता के साथ हिन्दुत्व के रक्षक एवं ब्राम्हण समाज के प्रतिनिधि भाग लेगे।
सनातन संस्कृति चेतना परिशद के उपाध्यक्ष एवं पटना उच्च न्यायालय के अधिवक्ता संजीव कुमार मिश्र ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि गोस्वामी तुलसीदास जी के गाॅव राजापुर, चित्रकुट, उत्तर प्रदेष से तुलसी घाट का गंगा जल सभी प्रतिनिधियों को 04 अगस्त को जयंती के अवसर पर स्वह प्रेम भेट किया जायेगा। इसके साथ ही परिशद के सचिव एवं जाने माने समाज सेवी विन्ध्याचल पाठक द्वारा कार्यक्रम के दिन सभी प्रतिनिधियों के बीच श्रीमदभागवत गीता एवं हनुमान चालीसा का सह-सम्मान निःषुल्क वितरन कराया जायेगा।
बैठक को परिशद के उपाध्यक्ष संजय पाण्डेय, सत्येन्द्र राय, संजीव कुमार मिश्र सचिव विन्ध्याचल पाठक, संयुक्त सचिव राकेष ओझा, डा राजनाथ झा, प्रवक्ता मनीश तिवारी, मयंक भूशण पाठक, षषि भूशण पाठक, आषुतोश कुमार पाण्डेय, श्रीमती अर्चना ठाकुर, श्रीमती ममता पाण्डेय, दिलिप मिश्रा षषिकान्त ओझा, धुरंधर तिवारी, रवि कान्त पाण्डेय, मनीश कुमार दूबे, नीरज पाठक, भारतेन्दु मिश्रा, धर्मेन्द्र तिवारी, निधि प्रिया, मनीश पाठक, संजीव चैबे सहित कई लोगो ने संबोधित किया।हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag

प्रकृति

Posted: 10 Jul 2022 08:46 AM PDT

प्रकृति

        ---:भारतका एक ब्राह्मण.
          संजय कुमार मिश्र'अणु'
----------------------------------------
प्रकृति
नहीं रही है
कभी किसीकी
एक सी
बल्कि वो
बदलती रहती है
सबको अपने साथ
कभी प्रेम से
भरकर मोद
उठाकर गोद
तो कभी कर दो-दो हाथ
जो करती रहती है
हमेशा निर्माण और ध्वंस
क्षण-क्षण,कण-कण,अंस
देकर समय का वास्ता
सृजित कर रास्ता
न किसीसे वैर न तो वह
पालती है प्रीति
बस बनती है निर्दयी
बचाने को रीति
दिखाने को कृति
रहती है सजग सचेष्ट
प्रकृति........  प्रकृति
--------------------------------
वलिदाद,अरवल(विहार)८०४४०२.
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सेवा और पगार

Posted: 10 Jul 2022 08:29 AM PDT

सेवा और पगार

जय प्रकाश कुँवर
प्राचीन काल में हमारे महात्माओं और साधु-संतों आदि के कथनानुसार सेवा को धर्म माना जाता था। तब मनुष्य समाज में औरों के लिए निस्वार्थ सेवा प्रदान करता था। लेकिन जैसे-जैसे उसकी सामाजिक एवं पारिवारिक आर्थिक आवश्यकताएं और आकांक्षाएं बढ़ती गई उसे तरह-तरह के संसाधनों की आवश्यकता जीवन यापन के लिए पड़ने लगी। अब निस्वार्थ सेवा भाव से उसका काम चलना मुश्किल हो गया। अब अपनी सेवा के बदले में उसे कुछ लेने की आवश्यकता पड़ने लगी। यहीं से मनुष्य को काम के बदले कुछ आर्थिक लाभ पाने की जरूरत पढ़नी शुरू हो गई।
फिर मनुष्य ऐसे सेवा अथवा काम करने के लिए निकल पड़ा जिससे उसके और उसके परिवार की भरण पोषण की आवश्यकता पूरी हो सके। अब उसे सेवा नहीं बल्कि नौकरी करने की जरूरत पड़ गई। उस जमाने में एक नौकरी करता था और परिवार के नौ लोग उस पर आधारित खाने वाले होते थे। तब उसे नौकरी कहा जाने लगा।
धीरे धीरे यह समस्या और गंभीर होती गई और समाज में तरह-तरह के बदलाव होने शुरू हुए। परिवार भी टुट कर छोटे होते चले गए । अब परिवार में एक कमाने वाला और चार खाने वाले होते थे । तब उसे नौकरी न कह कर चाकरी कहा जाने लगा।
बात यहां भी नहीं रुकी और समाज में और भी परिवर्तन हुए । और एक समय ऐसा भी आया की अब परिवार संयुक्त न हो कर एकल परिवार बन गया । अब उस एक की कमाई उसकी एकल परिवार की आवश्यकताओं लिए ही पूरी नहीं पढ़ पाती थी । अतः उस सेवा के बदले पाने वाले रकम को तनख्वाह कहा जाने लगा। धीरे धीरे बात अब यहां तक पहुंच गई है कि एकल परिवार तो दुर, अब खुद की कमाई उसके खुद लिए ही काफी नहीं रह गई है अतः अब उसका नाम तनख्वाह भी नहीं रह करके केवल वेतन रह गया है। आज तथाकथित परिवार का हरेक व्यक्ति चाहे वह पुरुष हो अथवा स्त्री खुद कमा रहा है। और अब वह सेवा के बदले पाया जाने वाला रकम खुद कमाने वाले व्यक्ति के तन के लिए पर्याप्त नहीं है। आज के इस आर्थिक युग और असीमित आवश्यकताओं के युग में हम और कहां जाकर रुकने वाले हैं यह केवल मात्र ईश्वर ही बता सकते हैं की और आगे चलकर वेतन का नाम और रूप क्या होने वाला है।
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पटना में सेवा परिवार की प्रथम विचार बैठक संपन्न

Posted: 10 Jul 2022 07:58 AM PDT

पटना में सेवा परिवार की प्रथम विचार बैठक संपन्न

व्यक्ति को प्रकृति व संस्कृति से जोड़ना हीं सेवा परिवार का लक्ष्य -: प्रदीप भैया जी महाराज
पटना,10 जुलाई।व्यक्ति को प्रकृति व संस्कृति से जोड़ना हीं सेवा परिवार का लक्ष्य है। उपरोक्त बातें सेवा परिवार के मार्गदर्शक व सुंदरकांड के मशहूर कथावाचक पूज्य प्रदीप भैया जी महाराज ने गाँधी मैदान के अनुग्रह नारायण सिन्हा शोध संस्थान में आयोजित सेवा परिवार की प्रथम विचार बैठक कही।
प्रदीप भैया ने कहा कि "आधुनिक काल की व्याधियों की बजह से व्यक्ति का मन पूर्णत: विचलित हो चुका है और अब मनुष्य शान्ति की तलाश में है। उन्होने सेवा परिवार के भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि झारखंड के देवधर में बन रहा "मंगलधाम "बिहार-झारखंड की एकमात्र आध्यात्मिक केन्द्र होगी जो व्यवस्था से निर्विकार तो होगी ही साथ ही साथ वह एक ऐसा स्थल होगा जहाँ मनुष्य मानसिक शान्ति प्राप्त करने में सक्षम होगा। आज सेवा परिवार 256 सान्थाली बच्चों को निशुल्क शिक्षा तो उपलब्ध करवा हीं रही है साथ में एक व्यक्ति के रूप में संस्कृति व प्रकृति से जुड़ने का बोध भी विकसित करने के लक्ष्यों पर भी कार्य कर रही है"।प्रदीप भैया ने कहा कि" मंगलधाम इन लक्ष्यों के विस्तार का केन्द्र बिन्दु बनेगा और सेवा परिवार से जुड़े स्व प्रेरित स्वजन इसका माध्यम बनेंगे"।बैठक में सेवा परिवार से बिहार के प्रान्तीय प्रतिनिधि के अलावे सभी 38 जिलों से प्रतिनिधि उपस्थित थे। बैठक में सेवा परिवार के राष्ट्रीय संयोजक जीवन जी,बिहार के प्रान्तीय संयोजक रंगनाथ जी,प्रेम रंजन,प्रभात भारद्वाज,मनीष पाण्डेय,शिशु रंजन ,नमन,कौशलेंद्र,संतोष पाठक,चौथी वाणी के प्रधान संपादक रूपेश कुमार सिंह,कुमोद कुमार,विकास कुमार,चंदन कुमार एवं युवा कवि अरविंद अकेला सहित सैकड़ों स्वंयसेवी मौजूद थे। विचार बैठक के पूर्व प्रदीप भैयाजी महाराज,जीवन जी एवं रंगनाथ जी ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया।।
सेवा परिवार ने बैठक में अपने पिछ्ले कार्यों सहित भविष्य की योजनाओं पर भी विस्तार से चर्चा किया।
------0----- अरविन्द अकेला
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गुरु तथा अन्यों में अंतर

Posted: 10 Jul 2022 04:12 AM PDT

गुरु तथा अन्यों में अंतर

गुरु केवल देहधारी शरीर न होते हुए वे एक गुरुतत्त्व से जुडे होते है । इस कारण किसी भी खरे गुरु द्वारा हमें देखने से ही हमारी साधना के संदर्भ में उन्हें पता चल जाता है । यदि हमारी साधना उचित ढंग से जारी हो, तो खरे संत कुछ बोलते नहीं है । और यदि हमे अनुभूति हो कि अपने गुरु ही संतों के मुख से बोल रहे हैं, तो उस संत द्वारा बताई साधना अवश्य करनी चाहिए । शिक्षक,प्रवचनकार, भगत, संत तथा गुरु में भी अंतर होते हैं, यह अंतर हम निम्न प्रकार से समझ कर लेते हैं।

शिक्षक और गुरु : शिक्षक मर्यादित समय और केवल शब्दों के माध्यम से सिखाते हैं लेकिन गुरु 24 घंटे, शब्द और शब्दों से परे ऐसे दोनों माध्यमों से शिष्य का हमेशा मार्गदर्शन करते रहते हैं । गुरु किसी भी संकट से शिष्य को तारते हैं लेकिन शिक्षक का विद्यार्थी के व्यक्तिगत जीवन से संबंध नहीं रहता है । थोडे में कहा जाए तो गुरु शिक्षक के संपूर्ण जीवन को ही बदल देते हैं । शिक्षक का और विद्यार्थी का संबंध कुछ ही घंटे और किसी विषय को सिखाने तक मर्यादित रहता है ।

प्रवचनकार एवं गुरु : ' कीर्तनकार और प्रवचनकार तात्विक जानकारी बताते हैं, पर सच्चे गुरु प्रायोगिक स्तर पर कृति करवा कर शिष्य की प्रगति करवाते हैं।'

भगत एवं गुरु : भगत सांसारिक अड़चनें दूर करते हैं ,तो गुरु का सांसारिक अड़चनों से संबंध नहीं होता .उनका संबंध केवल शिष्य की आध्यात्मिक उन्नति से होता है ।

संत एवं गुरु : संत सकाम और निष्काम की प्राप्ति के लिए थोड़ा बहुत मार्गदर्शन करते हैं । कुछ संत लोगों की व्यावहारिक कठिनाइयां दूर करने के लिए बुरी शक्तियों के कष्टों से होने वाले दुख को दूर करते हैं। ऐसे संतों का कार्य यही होता है । जब कोई संत साधक को शिष्य के रूप में स्वीकार करते हैं, तो वे उसके लिए गुरु बन जाते है। गुरु केवल निष्काम प्राप्ति के लिए पूर्ण रूप से मार्गदर्शन करते हैं । जब कोई संत गुरु होकर कार्य करते हैं तो उनके पास आने वालों की 'सकाम अडचनो को दूर करने के लिए मार्गदर्शन मिले यह इच्छा धीरे-धीरे कम हो जाती है और अंत में समाप्त हो जाती है, परंतु जब वह किसी को शिष्य स्वीकार करते हैं तब उसका सभी प्रकार से बहुत ध्यान रखते हैं ।प्रत्येक गुरु संत होते हैं परंतु प्रत्येक संत गुरु नहीं होते, फिर भी, संत के अधिकांश लक्षण गुरु को लागू होते हैं।

गुरु कृपा होने के लिए गुरु पर पूर्ण श्रद्धा होना आवश्यक है। यदि किसी में लगन व श्रद्धा हो, तो उसे गुरु की कृपा अपने आप मिलती है । गुरु को उसके लिए कुछ करना नहीं पडता । केवल संपूर्ण श्रद्धा होना आवश्यक है । गुरु ही उसे उसके लिए पात्र बनाते हैं ।

संदर्भ : सनातन संस्था का ग्रंथ 'गुरुकृपायोग'
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गुरुकृपा प्राप्त होने के लिए महत्वपूर्ण चरण - सत्सेवा

Posted: 10 Jul 2022 04:09 AM PDT

गुरुकृपा प्राप्त होने के लिए महत्वपूर्ण चरण - सत्सेवा


गुरु प्राप्ति और गुरुकृपा होने के लिए क्या करें ? गुरु प्राप्ति के लिए तीव्र मुमुक्षुत्व या तीव्र लालसा, तडप इन गुणों में से एक के कारण गुरु प्राप्ति जल्दी होती है और गुरुकृपा निरंतर रहती है। जिस प्रकार युवा अवस्था में कोई युवक दिन-रात किसी लड़की का प्यार पाने के लिए प्रयास करता है, 'मैं क्या करूं जिससे वह खुश हो जायेगी , यही विचार कर प्रयास करता है, वैसे ही गुरु मुझे अपना कहे, उनकी कृपा प्राप्त हो, इस के लिए दिन-रात इसी बात का चिंतन कर प्रयास करना आवश्यक होता है । कलियुग में, गुरु प्राप्ति और गुरुकृपा पिछले तीन युगों की तरह कठिन नहीं हैं। यहाँ ध्यान देने योग्य सूत्र यह है कि गुरु की कृपा के बिना गुरु प्राप्ति नहीं होती है। गुरु को पहले से ही पता होता है कि भविष्य में उनका शिष्य कौन होगा।

सर्वश्रेष्ठ सत्सेवा : अध्यात्म प्रसार

गुरु कार्य के लिए आप जो कुछ भी कर सकते हैं उसे करने का यह सबसे आसान और सबसे महत्वपूर्ण तरीका है। इस सूत्र को निम्नलिखित उदाहरण से देखा जा सकता है: मान लीजिए किसी एक कार्यक्रम की पूर्णता के लिए कोई सफाई कर रहा है, कोई भोजन बना रहा है, कोई बर्तन धो रहा है और कोई आयोजन की तैयारी के लिए सजावट रहा है। हम सफाई कर रहे हैं। अगर कोई दूसरा व्यक्ति साथ आता है और रसोइए के साथ काम करना शुरू कर देता है, तो आप उसके बारे में कुछ भी महसूस नहीं करते हैं। लेकिन अगर वह सफाई में आपकी मदद करने लगे, तो वह अपना लगता है । वैसे ही गुरु का है। गुरुओं और संतों का एकमात्र कार्य सभी को साधना करने के लिए प्रेरित करना और धर्म और साधना के बारे में मिठास पैदा करके समाज में अध्यात्म का प्रसार करना है। अगर हम वही काम अपनी पूरी क्षमता से करें, तो गुरु सोचेंगे, 'यह मेरा है'। ऐसा सोचना ही गुरु कृपा की शुरुआत है।

एक बार एक गुरु ने अपने दो शिष्यों को कुछ गेहूं दिया और कहा, "जब तक मैं वापस नहीं आ जाता तब तक इस गेहूं की देखभाल करना।" एक वर्ष बाद, जब वह वापस आए, तो गुरु पहले शिष्य के पास गए और पूछा, "क्या तुमने गेहूं ठीक से रखा है ?" तो वह गेहूँ का एक डिब्बा ले आया और कहा, "जो गेहूँ आपने दिया था वह वैसा ही है।" तब गुरु दूसरे शिष्य के पास गए और उससे गेहूं के बारे में पूछा। तब वह शिष्य उनको पास के एक खेत में ले गया। उनको हर जगह गेहूं के दानों से ढकी फसल दिखाई दी । यह देखकर गुरुदेव बहुत प्रसन्न हुए। उसी तरह हमें अपने गुरु द्वारा दिए गए नाम, ज्ञान को दूसरों को देकर बढ़ाना चाहिए।

संदर्भ : सनातन संस्था का ग्रंथ 'गुरुकृपायोग'
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11 जुलाई 2022, सोमवार का दैनिक पंचांग एवं राशिफल - सभी १२ राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन ? क्या है आप की राशि में विशेष ? जाने प्रशिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. प्रेम सागर पाण्डेय से |

Posted: 10 Jul 2022 03:58 AM PDT

11 जुलाई 2022, सोमवार का दैनिक पंचांग एवं राशिफल - सभी १२ राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन ? क्या है आप की राशि में विशेष ? जाने प्रशिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. प्रेम सागर पाण्डेय से |

11 जुलाई 2022, सोमवार का दैनिक पंचांग

श्री गणेशाय नम:

!! दैनिक पंचांग !!

🔅 तिथि द्वादशी प्रातः 07:22 तदुपरांत त्रयोदशी रात्रिशेष 05:02

🔅 नक्षत्र ज्येष्ठा रात्रिशेष 03:20

🔅 करण :

                बालव 11:14 AM

                कौलव 11:14 AM

🔅 पक्ष शुक्ल

🔅 योग शुक्ल 09:01 PM

🔅 वार सोमवार

☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ

🔅 सूर्योदय 05:15 AM

🔅 चन्द्रोदय 04:22 PM

🔅 चन्द्र राशि वृश्चिक

🔅 सूर्यास्त 06:45 PM

🔅 चन्द्रास्त +03:03 AM

🔅 ऋतु वर्षा
☀ हिन्दू मास एवं वर्ष

🔅 शक सम्वत 1944 शुभकृत

🔅 कलि सम्वत 5124

🔅 दिन काल 01:38 PM

🔅 विक्रम सम्वत 2079

🔅 मास अमांत आषाढ

🔅 मास पूर्णिमांत आषाढ

☀ शुभ और अशुभ समय

☀ शुभ समय

🔅 अभिजित 11:27:33 - 12:22:06

☀ अशुभ समय

🔅 दुष्टमुहूर्त 12:22 PM - 01:16 PM

🔅 कंटक 07:49 AM - 08:43 AM

🔅 यमघण्ट 11:27 AM - 12:22 PM

🔅 राहु काल 06:48 AM - 08:30 AM

🔅 कुलिक 03:05 PM - 04:00 PM

🔅 कालवेला या अर्द्धयाम 09:38 AM - 10:33 AM

🔅 यमगण्ड 10:12 AM - 11:54 AM

🔅 गुलिक काल 01:37 PM - 03:19 PM

☀ दिशा शूल

🔅 दिशा शूल पूर्व

☀ चन्द्रबल और ताराबल

☀ ताराबल

🔅 अश्विनी, कृत्तिका, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, मूल, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद, रेवती

☀ चन्द्रबल

🔅 वृषभ, मिथुन, कन्या, वृश्चिक, मकर, कुम्भ

🌹विशेष ~ सोम प्रदोष व्रत, शाक् त्याग व्रतारम्भ, वामन पूजा, वासुदेव द्वादशी। 🌹

पं.प्रेम सागर पाण्डेय्,नक्षत्र ज्योतिष वास्तु अनुसंधान केन्द्र नि:शुल्क परामर्श - शनिवार दूरभाष 9122608219 / 9835654844

🌹 11 जुलाई 2022, सोमवार का राशिफल 🌹

मेष (Aries): स्फूर्ति और ताजगी से भरी सुबह से दिन का आरंभ होगा। घर में मित्रों और सगे- सम्बंधियों के आवागमन से खुशहाली का माहौल रहेगा। उनकी तरफ से मिली हुई आकस्मिक भेंट आपको खुश कर देगी। आज आर्थिक लाभ मिलने की भी संभावना है। प्रवास की तैयारी रखें। नये कार्य शुरू कर सकते हैं। उत्तम भोजन करने का लाभ मिलेगा।

शुभ रंग = उजला

शुभ अंक : 4

वृषभ (Tauras): आज किसी भी प्रकार के अविचारी कदम या निर्णय लेने से पहले संभालना आवश्यक है। किसी के साथ गलतफहमी होने की संभावना देखते हैं। खराब तबीयत आपके मन को भी उदास बनाएगी। परिवार में स्नेहियों का विरोध मतभेद पैदा कर सकता है। परिश्रम का उचित मुआवजा न प्राप्त करने के कारण निराशा महसूस करेंगे। आज का दिन खर्चीला साबित होगा।

शुभ रंग = फीरोजा

शुभ अंक : 3

मिथुन (Gemini): सामाजिक, आर्थिक तथा पारिवारिक क्षेत्र में लाभ होने का संकेत हैं। समाज में मान- प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। मित्रों की तरफ से लाभ भी होगा और उनके पीछे पैसे भी खर्च करेंगे। सुंदर जगह पर पर्यटन का आयोजन पूरे दिन को हर्षोल्लासपूर्ण बना देगा। जीवनसाथी की खोज में होंगे तो आज उसके लिए अनुकूल दिन है। दांपत्यजीवन में मधुरता का अनुभव करेंगे।

शुभ रंग = पींक

शुभ अंक : 8

कर्क (Cancer): नौकरी व्यवसाय के क्षेत्र में उच्च पदाधिकारियों के प्रोत्साहन से आपका उत्साह दोगुना होगा। वेतन वृद्धि या पदोन्नति का समाचार मिले तो कोई आश्चर्य नहीं है। माता तथा परिवार के अन्य सदस्यों के साथ अधिक निकटता रहेगी। मान प्रतिष्ठा में वृद्धि होने से खुश रहेंगे। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। सरकारी कार्यों में अनुकूलता रहेगी।

शुभ रंग = गुलाबी

शुभ अंक : 5

सिंह (Leo): आलस, थकान और ऊबन आपके कार्य करने की गति कम कर देंगे। पेट सम्बंधी शिकायत अस्वस्थता का अनुभव करा सकती हैं। उच्च पदाधिकारियों से आज दूर रहने में ही भलाई है। क्रोध को वश में रखना आवश्यक है। धार्मिक कार्यों या यात्रा- प्रवास से भक्तिभाव प्रकट होंगे और मन की अशांति दूर होगी।

शुभ रंग = उजला

शुभ अंक : 4

कन्या (Virgo): मन और संयम को आज के दिन का मंत्र बनाने की सलाह देते हैं, क्योंकि स्वभाव की उग्रता किसी के साथ मनमुटाव कराएगी ऐसी संभावना है। हितशत्रु विघ्न उपस्थित करेंगे। इसलिए सचेत रहें। नए कार्य की शुरुआत स्थगित रखें। जलाशय से दूर रहना हितकर है। अत्यधिक खर्च होगा। गूढ़ विद्याओं और रहस्यमय बातों में रुचि जागेगी।

शुभ रंग = आसमानी

शुभ अंक : 7

तुला (Libra): दैनिक कार्यों के बोझ से हल्का होने के लिए आज आप पार्टी, सिनेमा, नाटक या पर्यटन का आयोजन कर सकते हैं। विपरीत लिंगीय व्यक्तियों या प्रियतमा के साथ निकटता आपको आनंदित करेगी। नए वस्त्रालंकार खरीदने या परिधान बनाने का अवसर आएगा। सार्वजनिक मान- सम्मान के अधिकारी बनेंगे। जीवनसाथी के सानिध्य का जी भरकर आनंद उठाएंगे।

शुभ रंग = हरा

शुभ अंक : 6

वृश्चिक (Scorpio): गणेशजी कहते हैं कि पारिवारिक शांति का माहौल आपके तन-मन को स्वस्थ रखेगा। निर्धारित काम में सफलता मिलेगी। नौकरी में साथी कर्मचारियों का सहयोग मिलेगा। प्रतिस्पर्धियों और शत्रुओं की चाल निष्फल जाएगी। ननिहाल पक्ष की ओर से लाभ होगा। आर्थिक लाभ होगा। बीमार व्यक्तियों के स्वास्थ्य में सुधार होता हुआ प्रतीत होगा।

शुभ रंग = पींक

शुभ अंक : 8

धनु (Sagittarius): संतानों के स्वास्थ्य और पढ़ाई के बारे में चिंता से मन व्यग्र रहेगा। पेट सम्बंधी बीमारियाँ परेशान करेंगी। कार्य की असफलता आपके अंदर हताशा लाएगी। गुस्से को वश में रखने की सलाह है। साहित्य, लेखन तथा कला के प्रति गहरी रुचि रखेंगे। प्रियजन के साथ की मुलाकात रोमांचक बनी रहेगी। वाद-विवाद तथा चर्चा में न उतरें।

शुभ रंग = पीला

शुभ अंक : 9

मकर (Capricorn): ताजगी एवं स्फूर्ति के अभाव से अस्वस्थता अनुभव होगी। मन में चिंता की भावना रहेगी। परिवार के सदस्यों के साथ अनबन या तकरार होने से मन में खिन्नता उत्पन्न होगी। समय से भोजन और शांत निद्रा से वंचित रहना पड़ेगा। स्त्री वर्ग से कोई नुकसान होगा अथवा उनके साथ किसी कारण से तकरार होगा। धन खर्च और अपयश से संभलने की सलाह देते हैं।

शुभ रंग = क्रीम

शुभ अंक : 2

कुंभ (Aquarius): आज आपका मन चिंता मुक्त होने से राहत महसूस करेगा और आपके उत्साह में भी वृद्धि होगी। बुजुर्गों और मित्रों की तरफ से लाभ की अपेक्षा रख सकते हैं। स्नेहमिलन या प्रवास के माध्यम से मित्रों एवं स्वजनों के साथ आनंदपूर्वक समय व्यतीत करने का मौका मिलेगा। प्रिय व्यक्तियों का साथ मिलेगा और दांपत्यजीवन में अधिक घनिष्ठता का अनुभव होगा। आर्थिक लाभ और सामाजिक मान प्रतिष्ठा के अधिकारी बनेंगे।

शुभ रंग = पीला

शुभ अंक : 9

मीन (Pisces): आर्थिक आयोजन करने के लिए आज शुभ दिन है। निर्धारित कार्य पूरे होंगे। आय बढ़ेगी। परिवार में सुख- शांति का वातावरण बना रहेगा। सुरुचिपूर्ण भोजन प्राप्त होगा। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा तथा मन की स्वस्थता आप बनाए रख सकेंगे। कोरोना संक्रमित लोगों से दूरी बनाकर रहें और स्वास्थ्य पर ध्यान दें।

शुभ रंग = उजला

शुभ अंक : 4 
प्रेम सागर पाण्डेय् ,नक्षत्र ज्योतिष वास्तु अनुसंधान केन्द्र ,नि:शुल्क परामर्श - रविवार , दूरभाष 9122608219 / 9835654844
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कोविड 19 : सिक्किम में कोरोनावायरस के मामलों में भारी उछाल, 59 नए और 1 की मौत दर्ज की गई

Posted: 10 Jul 2022 03:45 AM PDT

कोविड 19 : सिक्किम में कोरोनावायरस के मामलों में भारी उछाल, 59 नए और 1 की मौत दर्ज की गई

सिक्किम से हमारे संवाददाता दीपक की खास खबर 
भौगोलिक रूप से नेपाल, चीन, भूटान और बांग्लादेश देशों के बीच में स्थित, हिमालयी राज्य सिक्किम में शनिवार को कोविड 19 में रिकॉर्ड वृद्धि देखी गई, जहां पिछले आंकड़ों की तुलना में 59 नए मामले दर्ज किए गए, जिनमें 01 की मौत हुई, 08 बरामद हुए।
शनिवार को परीक्षण के लिए लिए गए 247 नमूनों में से 59 मामलों की पुष्टि हुई, इसमें पूर्व से 37, पश्चिम से 06, दक्षिण से 12 और उत्तर जिले से 4 शामिल हैं। शनिवार को नया आंकड़ा 145 है, जबकि राज्य में अब तक मृत्यु का कुल आंकड़ा 457 है, जिसमें 23.8% सकारात्मकता दर पीआर है। सिक्किम राज्य में 38 हजार और 36 रिकवरी के साथ 39 हजार 401 मामले देखे गए।
यहां यह याद किया जा सकता है कि राज्य सरकार ने बढ़ते मामलों की गंभीर स्थिति को देखते हुए शुक्रवार को सार्वजनिक नोटिस जारी किया है, राज्य सरकार राज्य में झुंड के संचरण को रोकने के लिए पहले क्या करें और क्या न करें की सूची लेकर आई है। इस बीच सिक्किम पुलिस ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लोगों को शिक्षित करने के लिए जन जागरूकता अभियान भी चलाया।
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सप्लीमेंट्री' मिली 'जय' यहां 'टाप'को

Posted: 10 Jul 2022 03:24 AM PDT

सप्लीमेंट्री' मिली 'जय' यहां 'टाप'को

उम्र भर वो  छिपाते रहे  पाप को
दोष देते   रहे हैं  हमें  आप को 

हाल उनका बुरे से बुरा जब हुआ
जान पाए तब बुजुर्गों के श्राप को 

चार बच्चे भी मिलकर नहीं दे सके
दाल-रोटी  यहां बूढे मां-बाप को 

हाय कैसा समय आ गया अब यहाॅ
दे रहे  हैं   बढ़ावा  वे  संताप को 

एक भी  पेड़-पौधा  लगाया नहीं 
झेलते हैं  तभी  सूर्य के  ताप  को 

धर्म की आड़ में  कितने पाखण्ड हैं
आज-कल  दे रहे  मात हैं  पाप को 

'टाप' होते  परीक्षा में  करके नकल
'सप्लीमेंट्री' मिली 'जय' यहाॅ 'टाप' को
                     *
~जयराम जय
'पर्णिका'बी-11/1,कृष्ण विहार,आवास विकास,
कल्याणपुर,कानपुर-208017(उ०प्र०)
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कुदरत का करिश्मा

Posted: 10 Jul 2022 03:21 AM PDT

कुदरत का करिश्मा

ऊपर नीचे के मिलन से
बारिस बहुत हो रही है। 
बदलो का पर्वतो से 
टकराना हो रहा है। 
जिसके कारण खुलकर 
वर्षा हो रहा है। 
स्वर सरगम मिल रहे है
इससे भी बारिस हो रही है।। 

इन्द्रदेव भी गीत मल्हार के
सुनकर खुश हो रहे है। 
और अपनी खुशी का इजहार
बरस के प्रगट कर रहे है। 
पेड़ पौधे भी पानी गिरने से
खुश होकर हरेभरे हो गये है। 
और ऊपर वाले की मेहरबानी
से नीचे वाली आंन्दित् हो उठे।। 

कुदरत का करिश्मा तो देखो
प्रकृति के सौंदर्य को भी देखो। 
दो के मिलन से ही ये होता है
एक अकेला क्या कर सकता। 
इसलिए विधाता ने जोड़े बनाये है
जिसमें दो का होना जरूरी है। 
जिससे वो संसार के चक्र को 
और आगे घूमा पायेगा।। 

जय जिनेंद्र 
संजय जैन "बीना" मुंबई
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फनकार मारे फुफकार

Posted: 10 Jul 2022 03:19 AM PDT

फनकार मारे फुफकार 

कुचल डालो उन सर्पों को बेड़िया बनते पांव में 
प्रीत छोड़ो उन लोगों से छिड़कते नमक घाव पे

विषधर के दंत तोड़ो रास्ता रोके दीवार बनकर 
तूफां से भीड़ जाना हिमालय सा अडिग तनकर

जहरीले नाग जो बैठे राहों में फन को फैलाए 
खुद को कर लो बुलंद जहर वो उगल ना पाए 

कदम फूंक-फूंक रखो तूफां का पग पग डेरा है 
काम हिम्मत ही आएगी भले मौसम सुनहरा है 

जाने दो हवाओं को खिलाओ तुम फिजाओं को 
बहारों का स्वागत कर लो बहा दो मधुर भावों को 

पांव की बन जाए जंजीर कभी वो रिश्ते मत पालो 
उगले नफरतें जो हरदम उन्हें भी घास मत डालो

किसी को देखकर मन में झरना प्रेम का बहता हो
हमसफर जग में वही जो सफर में साथ रहता हो

रमाकांत सोनी सुदर्शन 
नवलगढ़ जिला झुंझुनू राजस्थान
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