जनवादी पत्रकार संघ |
| अनलॉक का चौथा चरण@ राकेश अचल जी वरिष्ठ पत्रकार ग्वालियर Posted: 30 Aug 2020 11:12 PM PDT *********************** कोरोना यानि कोविड 19 से निबटने के लिए लगाए गए देश व्यापी लाकड़ौन को खोलने का चौथा चरण 1 सितंबर से शुरू हो रहा है. ये तब हो रहा है जब देश में कोरोना से संलर्मन की रफ़्तार फूल स्पीड में है. देश में अब तक 3,619,169 लोग कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं और कोई 64,617 लोगों की मौत हो चुकी है .मजे की बात ये है की बिना किसी वैक्सीन के देश में कोरोना से संक्रमित 2,772,928 लोगों को बचाया भी जा चुका है. केंद्र सरकार नेअनलॉक 4.0 से जुड़े दिशानिर्देशों को जारी कर दिया. इसके मुताबिक, कोरोना संकट काल में करीब 5 माह बाद 3 बड़ी रियायतें दी जा रही हैं.पहली बड़ी रियायत यह कि 7 सितंबर से देश भर में मेट्रो सेवाएं शुरू करने की अनुमति दे दी गई है.इसके बारे में गाइडलाइंस अलग से जारी होंगी. दूसरा यह कि सामाजिक, शैक्षणिक, खेल, मनोरंजन , सांस्कृतिक धार्मिक राजनैतिक कार्यक्रम भी अब शुरू हो सकेंगे लेकिन 100 लोगों की लिमिट के साथ. तीसरी बात यह कि स्कूल-कॉलेज बंद रहेंगे, लेकिन 9वीं से 12वीं के बच्चे शिक्षक से गाइडेंस लेने के लिए अपनी इच्छा से स्कूल जा सकेंगे. 21 सितंबर से भीड़भाड़ वाले कार्यक्रम (सामाजिक, शैक्षणिक, खेल, मनोरंजन, सांस्कृतिक, धार्मिक, राजनैतिक)को अनुमति लेकिन एक छत के नीचे अधिकतम 100 लोग मौजूद रह सकेंगे. सभी को अनिवार्य रूप से फेस मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग, थर्मल स्कैनिंग, सैनिटाइजर और कोविड-19 रोकथाम के नियमों का पालन करना होगा. 21 सितंबर से ओपन एयर थिएटर को अनुमति दी गयी है 21 सितंबर से ऑनलाइन कोचिंग और टेली काउंसलिंग जैसे कामों के लिए 50% टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ स्कूलों में बुलाया जा सकेगा। राज्य सरकारें इसकी इजाजत दे सकती हैं।21 सितंबर से 9वीं से 12वीं के बच्चे टीचर्स से गाइडेंस लेने के लिए अपनी इच्छा से स्कूल जा सकेंगे. इसके लिए उन्हें अपने गार्जियन से लिखित में मंजूरी लेनी होगी. (कंटेनमेंट जोन के बाहर),21 सितंबर से टेक्निकल और प्रफेशनल प्रोग्राम्स (जिनमें लैब या प्रैक्टिकल की जरूरत है) वाले पोस्ट ग्रेजुएशन के स्टूडेंट्स और पीएचडी के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा संस्थान खोले जा सकेंगे. अनलॉक 4 में अभी रेगुलर पैसेंजर ट्रेन सेवाएं बंद रहेंगी. अभी सिर्फ चुनिंदा ट्रेनें चल रही हैं.अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर पाबंदी जारी रहेगी. अभी सिर्फ वंदे भारत मिशन के तहत उड़ानें चल रही हैं.मल्टीप्लेक्सेस बंद रहेंगे.सिनेमा हॉल, स्वीमिंग पूल, एंटरनेटमेंट पार्क, क्लोज्ड थिएटर बंद ही रहेंगे. केंद्र सरकार की गाइड लाइनों में दी गयी छोट का क्या आधार है ये जनता नहीं जानती लेकिन जानना जरूर चाहती है .देश में जब लाकडाउन लागू किया गया था तब कोरोना ने अपने कदम रखे ही थे लेकिन लाकडाउन के बाद इसका प्रसार लगातार बढ़ा ही.ैलाओ की प्रक्रिया के बाद भी इसमें बढ़ोतरी हुई और अब तो ये रफ्तार लगातार बढ़ रही है ऐसे में अनलॉक से क्या लाभ होगा भगवान ही जानता है क्योंकि केंद्रीय वित्त मंत्री पहले ही कोरोना को 'एक्ट आफ गॉड 'कह चुकी हैं . ये सही है की घर में बैठे-बैठे कोरोना से नहीं लड़ा जा सकता ,लेकिन ये भी सच है की बिना किसी इंतजाम के घर के बाहर जाकर इससे बचा नहीं जा सकता. अब दो ही बातें हैं की या तो सरकार ने जनता को रामभरोसे छोड़ दिया है या फिर देश में कोरोना से निबटने के इतने इंतजाम कर लिए हैं की जैसे-जैसे कोरोना सुरसा की देह की तरह बढ़ेगा वैसे-वैसे सरकार हनुमान की तरह अपने प्रबंधों को दो गुना बढ़ाती जाएगी ,लेकिन एक दिन उसे सुरसा के मुंह में जाकर बैठना ही पड़ेगा क्योंकि अभी कोरोना वैक्सीन खिन भी सीन में नहीं है. रूस की वैक्सीन का भी कोई आता-पता नहीं है. देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भी मान लिया है की देश की जनता कोरोना के साथ रहने की आदी हो गयी है और शायद इसीलिए वे अपने मन की बात में कोरोना या नियत या जेईईईटी परीक्षाओं का जिक्र करने के बजाय खिलौनों पर बात करने लगे हैं .प्रधान जी के मन में हमेशा अच्छी -अच्छी बातें ही आतीं हैं.वे जब पहली बार सत्तारूढ़ हुए थे ,तब भी उन्होंने देश से अच्छे दिनों की बात कही थी ,और ये अच्छी बात थी.उन्होंने कोशिश की लेकिन अच्छे दिन नहीं आये तो ये आपकी बदकिस्मती है .अब अनलॉक-4 में भी जो होगा सो देखा जाएगा .मै तो चाहता हूँ की अब मैट्रो ही नहीं जनता रेलें और हवाई जहाज भी खोल दिए जाएँ ,क्योंकि जो होगा सो देखा जाएगा .कम से कम घर में अघोषित नजरबंदी से तो मुक्ति मिले . लाकडाउन से देश की अर्थव्यवस्था बेपटरी हो गयी,करोड़ों लोगों की नौकरियां चली गयी,सरकार का खजाना खाली हो गया,प्रधानमंत्री जी के लिए नया विमान मुश्किल से खरीदा जा सका .बिग बाजार को बंद होने से बचने के लिए बेचारे अम्बानी को अपनी हथेली लगना पड़ी ,वित्त मंत्री सीतारमण को कहना पड़ा की सारी दुर्दशा के लिए अकेली सरकार जिम्मेदार नहीं है,ये तो 'एक्ट आफ गॉड ' है .अब जब गॉड ही एक्ट कर रहा है तो सरकार को लम्बी तानकर सोना चाहिए .सरकार भी तो आखिर बीते छह महीने में तक गयी है ! सरकार को कुछ दिन मोरोन को दाना चुगाना चाहिए,इससे उसे मानसिक शांति मिलेगी . आप इन तमाम बातों में न व्यंग्य खोजिये और न आलोचना,ये हकीकत है और पूरे सद्भाव के साथ के साथ लिखी गयी बातें भी गंभीरता से ली जाना चाहिए .हमें पूरा यकीन है की जैसे -जैसे ताले खुलेंगे,जनता का दिल भी खुलेगा और जनता के मन से कोरोना का भूत निकल कर सड़क किनारे खड़े पीपल के पेड़ों पर उलटा लटक जाएगा .इसलिए आइये अनलॉक-4 का स्वागत कीजिये,गाइड लाइनों का मुस्तैदी से पालन कीजिये . @ राकेश achal |
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