प्राइमरी का मास्टर ● इन |
- फतेहपुर : ऑपरेशन कायाकल्प भी नहीं सुधार सकी विद्यालयों की सेहत, ब्लॉक की निगरानी में ग्राम पंचायत स्तर से विद्यालयों को दुरुस्त कराने की जिम्मेदारी
- शिक्षिका के ट्रांसफर में हीलाहवाली पर तीन शिक्षाधिकारी कोर्ट में तलब
- महोबा : ARP के अवशेष पदों पर चयन हेतु विज्ञप्ति जारी, देखें
- 75 फीसद अभिभावक बच्चों को नहीं भेजना चाहते विद्यालय
- नई पेंशन स्कीम से शिक्षक परेशान, रिटायरमेंट के बाद नहीं मिल रही पेंशन
- शिक्षामित्रों की मांगों से जुड़ी दिनेश शर्मा कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग को लेकर सौंपा ज्ञापन
- फतेहपुर : डायट प्रवक्ताओं द्वारा शिक्षण गुणवत्ता सुधार, पर्यवेक्षण तथा शैक्षिक अनुसमर्थन प्रदान करने व प्रोजेक्ट कार्य करने के अनुक्रम में 10-10 विद्यालयों की चयनित सूची जारी
- हाथरस : म्यूच्यूअल ट्रांसफर आवेदकों को दावा/आपत्ति हेतु प्रत्यावेदन प्रस्तुत करने के सम्बन्ध में
- हाथरस : राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की 150वीं जयंती पर फोटोग्राफी कांटेस्ट में प्रतिभाग करने के सम्बन्ध में
- हाथरस : वर्ष 2019-20 के लेखों/अभिलेखों का सीए ऑडिट कराये जाने के सम्बन्ध में, ब्लॉकवार ऑडिट कार्यक्रम देखें
| Posted: 03 Oct 2020 06:50 PM PDT फतेहपुर : ऑपरेशन कायाकल्प भी नहीं सुधार सकी विद्यालयों की सेहत, ब्लॉक की निगरानी में ग्राम पंचायत स्तर से विद्यालयों को दुरुस्त कराने की जिम्मेदारी। अव्यवस्था ▪️जिले के कई ब्लॉकों के विभिन्न स्कूलों में फैली अव्यवस्था दे रही गवाही ▪️ब्लॉक की निगरानी में ग्राम पंचायत स्तर से विद्यालयों को दुरुस्त कराने की जिम्मेदारी फतेहपुर : ग्राम पंचायत स्तर पर स्थित सरकारी स्कूलों की अव्यवस्थाओं को दूर करने के लिए शासन द्वारा ऑपरेशन कायाकल्प चलाया जा रहा है। कई माह बीत जाने के बाद भीअव्यवस्थाओं से घिरे ऐसे विद्यालयों की सेहत में कोई सुधार होता नहीं दिख रहा है। ऑपरेशन कायाकल्प महज कागजों तक की सीमित नजर आ रहा है। जबकि कायाकल्प के लिए शासन द्वारा धनराशि की भी व्यवस्था की जा ऑपरेशन चुकी है। बेसिक शिक्षा के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों की दशा सुधारने के लिए शासन ने ऑपरेशन कायाकल्प शुरू किया था। जिसमें बेसिक शिक्षा और बीडीओ कार्यालय को संयुक्त रूप से इसकी जिम्मेदारी दी गई है। ग्राम निधि से काम कराए जाने थे, लेकिन कायाकल्प के नाम पर महज औपचारिकता कर धनराशि खर्च कर लिया गया और स्कूलों की दशा में कोई सुधार नजर नहीं आ रहा है। ऑपरेशन कायाकल्प अभियान को ग्राम पंचायत के हाथों में दिए जाने के बाद बेसिक शिक्षा विभाग और खंड विकास कार्यालय सही तरीके से निगरानी भी नहीं कर सका और स्कूलों की दशा जस की तस बनी हुई है। सभी स्कूलों का कायाकल्प तो नहीं हो सका बल्कि ग्राम प्रधानों का कायाकल्प जरूर होता दिखाई दे रहा है। क्या बोले जिम्मेदार कम्पोजिट विद्यालय शिव कंठ का डेरा के प्रधानाध्यापक प्रेमचंद्र सोनकर ने बताया कि विद्यालय में हैंडपंप खराब है। बाउंड्री अधूरी है, फर्श टूटी है। विद्यालय पहुंचने का रास्ता नहीं है।दो-तीन वर्षों से कोई भी कार्य नहीं किया गया है। जिसकी शिकायत प्रधान सचिव समेत उच्चाधिकारियों से की गई है। शासन की पहली प्राथमिकता पर गांव में पंचायत भवन का निर्माण हो रहा है। निर्माण के बाद बचे धन से विद्यालयों का कायाकल्प किया जाएगा। इसके लिए संबंधित सचिवों से रिपोर्ट मांगी गई है। -गोपीनाथ पाठक, बीडीओ विजयपुर विद्यालय खंडहर में तब्दील विजईपुर : क्षेत्र के गढ़ा और रायपुर भसरौल में आज भी दर्जनों ऐसे विद्यालय हैं जहां पर बाउंड्री, टाइल्स, शौचालय में समुचित व्यवस्थाएं उपलब्ध नहीं हैं। रायपुर भसरौल स्थित शिवकंठ का डेरा का कम्पोजिट विद्यालय एवं चंदवाइन डेरा के प्राथमिक विद्यालय में आज भी बदहाली छाई है। जहां पर ना तो बच्चों के पीने के लिए पानी है और न ही व्यवस्थित शौचालय। टूटे-फूटे शौचालय बाउंड्री एवं कमरों की फर्श जिसमें बड़े-बड़े गड्ढे एवं धूल जमा है। बरसों से विद्यालय में पेंटिंग नहीं हुई। टूटी पड़े जंगले लड़कियां ऑपरेशन कायाकल्प की हकीकत बयां कर रही हैं। |
| शिक्षिका के ट्रांसफर में हीलाहवाली पर तीन शिक्षाधिकारी कोर्ट में तलब Posted: 03 Oct 2020 06:33 PM PDT शिक्षिका के ट्रांसफर में हीलाहवाली पर तीन अधिकारी कोर्ट में तलब एक शिक्षिका के ट्रांसफर में हीलाहवाली करने पर माध्यमिक शिक्षा विभाग के तीन अफसरों को हाईकोर्ट ने 7 अक्तूबर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया है। डीपी गर्ल्स इंटर कॉलेज कटरा में 13 जुलाई 2018 को प्रवक्ता जीव विज्ञान का पद रिक्त हुआ था। प्रबंधतंत्र ने सीधी भर्ती के इस पद को भरने के लिए श्री आरके इंटर कॉलेज कोटला फिरोजाबाद की प्रवक्ता नीरजा सिंह को 15 जुलाई 2018 को एनओसी दे दी। नीरजा सिंह के स्थानांतरण की फाइल को डीआईओएस फिरोजाबाद ने 27 अप्रैल 2019 को मंजूरी दी जिसे संयुक्त शिक्षा निदेशक प्रयागराज ने 14 मई 2019 को डीआईओएस -2 देवी सहाय तिवारी को भेज दी। ट्रांसफर की अंतिम तिथि 30 जून 2019 होने के कारण नीरजा सिंह ने याचिका की जिस पर हाईकोर्ट ने 7 जून 2019 को अपर निदेशक माध्यमिक को निस्तारण का आदेश दिया। डीआईओएस-2 ने बिना हस्ताक्षर या संस्तुति किए फाइल 45 दिन बाद 28 जून को जेडी को भेजी और जेडी ने एक जुलाई 2019 को निदेशालय भेजा। अपर निदेशक ने नौ महीने बाद 28 मार्च को निर्णय दिया कि फाइल 30 जून के बाद मिली जिसके कारण उन्होंने विचार नहीं किया। इस निर्णय को नीरजा सिंह ने फिर चुनौती दी जिस पर हाईकोर्ट ने 28 अगस्त को अफसरों से कार्रवाई रिपोर्ट तलब कर ली। अधिकारियों की विरोधाभासी रिपोर्ट से सख्त कोर्ट ने तलब कर लिया है। इनका कहना है सिफारिश वालों का ट्रांसफर सारे नियम-कानून दरकिनार करके किए जा रहे हैं जबकि आम शिक्षक ठोकरें खा रहा है। अधिकारियों ने जानबूझकर नीरजा सिंह की ट्रांसफर फाइल एक दिन देर करके शिक्षा निदेशालय भेजी और इसी आधार पर उनका ट्रांसफर नहीं हुआ। - लालमणि द्विवेदी, प्रदेश महामंत्री माध्यमिक शिक्षक संघ ठकुराई गुट |
| महोबा : ARP के अवशेष पदों पर चयन हेतु विज्ञप्ति जारी, देखें Posted: 03 Oct 2020 06:25 PM PDT |
| 75 फीसद अभिभावक बच्चों को नहीं भेजना चाहते विद्यालय Posted: 03 Oct 2020 05:53 PM PDT 75 फीसद अभिभावक बच्चों को नहीं भेजना चाहते विद्यालय गोरखपुर : कोरोना के बीच 15 अक्टूबर से स्कूल खोले जाने के निर्देश के बाद भले ही स्कूल प्रबंधन ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है, लेकिन अभिभावक अभी भी अपने बच्चों को स्कूल भेजने के पक्ष में नहीं है। माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से कक्षा नौ से 12 तक की कक्षाएं संचालित कराने के लिए कराए गए सर्वे में महज 25 फीसद अभिभावक ही अपने बच्चों को भेजने के पक्ष में हैं। इन अभिभावकों ने लिखित अनुमति भी विद्यालय के प्रधानाचार्यो को दे दी है। सर्वे में 75 फीसद अभिभावक कोरोना के कारण अपने बच्चों को स्कूल भेजने से साफ मना कर दिया है। प्रदेश सरकार ने इसके पहले 21 सितंबर से स्कूल खोलने का निर्देश जारी किया था, जिसे बाद में सरकार ने वापस ले लिया। इसी दौरान निदेशक माध्यमिक शिक्षा के निर्देश पर डीआइओएस ने जनपद के माध्यमिक विद्यालयों में स्कूल खोले जाने को लेकर सर्वे शुरू कराया। लगभग दस दिनों तक चले सर्वे में जिले के सभी 485 माध्यमिक स्कूलों में कक्षा 9 से 12 तक पढ़ने वाले दो लाख 45 हजार 384 बच्चों के अभिभावकों से लिखित और मौखिक राय ली गई। इनमें से 61 हजार 524 अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए प्रधानाचार्यों को लिखित रूप में अनुमति दे दी, जबकि अन्य ने स्कूल भेजने से साफतौर से इन्कार कर दिया है। इस दौरान विभाग ने जनपद में कोरोना को लेकर एक लाख 45 हजार 286 (69.20 फीसद) अभिभावकों को जागरूक भी किया। 436 स्कूलों ने पूरी की तैयारी कोरोना के मद्देनजर स्कूल खोलने को लेकर जिले के 436 माध्यमिक विद्यालयों ने स्वच्छता बनाए रखने व संक्रमण से सतत बचाव की तैयारी पूर्ण कर ली है। स्कूलों में सैनिटाइजेशन व अन्य कार्य किए जा चुके हैं। फिजिकल डिस्टेंसिंग के बीच एक कक्षा में बीस छात्रों को बैठाने की व्यवस्था की गई है। '>>माध्यमिक विद्यालयों के सर्वे में सामने आई अभिभावकों की राय '>>सिर्फ 25 फीसद अभिभावकों ने ही बच्चों को स्कूल भेजने की दी लिखित अनुमति कोरोना संक्रमण के कारण अभी छोटे बच्चों के स्कूल बंद हैं, लेकिन वहां साफ-सफाई और दीवारों पर बच्चों को आकर्षित करने वाले संदेश व चित्र बनाए जाने की कवायद जारी है। शनिवार को अहलदादपुर स्थित प्राइमरी स्कूल की दीवार पर कार्टून उकेरता कलाकार ' पंकज श्रीवास्तव सर्वे के लिए ब्लाकवार सक्रिय प्रधानाचार्यों को नोडल अधिकारी बनाया गया था। उन्हीं के नेतृत्व में सर्वे कराया गया। इस दौरान कुछ शिक्षकों ने बच्चों के घर-घर जाकर अभिभावकों से संपर्क किया तो कुछ ने दूरभाष के जरिये अनुमति ली। सर्वे में एकत्र सूचना के आधार पर रिपोर्ट तैयार कर निदेशक माध्यमिक शिक्षा को भेज दिया गया है। ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह, भदौरिया, डीआइओएस |
| नई पेंशन स्कीम से शिक्षक परेशान, रिटायरमेंट के बाद नहीं मिल रही पेंशन Posted: 03 Oct 2020 05:51 PM PDT नई पेंशन स्कीम से शिक्षक परेशान, रिटायरमेंट के बाद नहीं मिल रही पेंशन नई पेंशन स्कीम (एनपीएस) शुरू तो हो गई लेकिन माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षक इसके लाभ से अभी तक वंचित हैं। रिटायरमेंट के बाद न तो इन्हें नई पेंशन मिली और न ही किसी तरह का कोई अन्य भुगतान। शिक्षकों के खातों से काटी गई लाखों की धनराशि भी रिटायरमेंट के बाद उन्हें लौटाई नहीं गई। वर्ष एक अप्रैल 2005 में एनपीएस लागू हुई लेकिन माध्यमिक में शिक्षकों के वेतन से कटौती 2016 में शुरू हो सकी। 2005-2016 के बीच की धनराशि शासनादेश के बावजूद अब तक काटी नहीं गई है जबकि सरकार अपना अंशदान एकमुश्त देने को तैयार है। रिटायरमेंट के बाद अपने पैसे को तरसे ऑल टीचर्स इंप्लाइज वेलफेयर एसोसिएशन (अटेवा) के मंडल अध्यक्ष अखिलेश यादव का कहना है कि वर्ष वर्ष 2019 में कई शिक्षक रिटायर हो चुके हैं पर उन्हें अब तक एक भी पैसा नहीं मिला है। नई पेंशन का तो दूर-दूर तक पता नहीं। इन शिक्षकों की तो धनराशि काटी गई लेकिन सरकारी अंशदान नहीं दिया गया है। मृतक आश्रित भी भटक रहे अटेवा के मंडल अध्यक्ष के अनुसार बीएनएसडी इंटर कॉलेज के रामरूप और बीपीएमजी मंधना के सुरेंद्र सिंह की मृत्यु 2017 में हुई थी। इसी तरह आर्यनगर इंटर कॉलेज के मुकेश, तालीमुल इस्लाम के इरशाद हुसैन और सिद्दीक फैज-ए-आम के मोहम्मद इकराम की मृत्यु हो चुकी है लेकिन सभी के मृतक आश्रित अब तक परेशान हैं। पेंशन खातों में पड़ा सूखा बीपीएमजी मंधना, सरस्वती बालिका विजय नगर समेत अनेक विद्यालयों के शिक्षकों के पेंशन खातों में न तो शिक्षकों की और न ही सरकारी अंशदान दिख रहा है। अटेवा अध्यक्ष के अनुसार हर साल की तरह इस बार भी वे दो अक्तूबर को पुरानी पेंशन बहाली के लिए आंदोलन करेंगे। |
| Posted: 03 Oct 2020 05:48 PM PDT शिक्षामित्रों की मांगों से जुड़ी दिनेश शर्मा कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग को लेकर सौंपा ज्ञापन। बहराइच। शिक्षामित्र प्रदेश सरकार की उपेक्षा के शिकार है। दिनेश शर्मा कॉमेडी की रिपोर्ट को डेढ़ वर्ष बीतने के बाद भी अब तक जारी नहीं किया गया है। सरकार की इस उपेक्षा से त्रस्त शिक्षामित्रों ने शुक्रवार को प्रदर्शन करते हुए मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन नगर मजिस्ट्रेट को सौंपा। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के प्रांतीय प्रवक्ता शिव श्याम मिश्र के निर्देश पर संगठन के जिला मीडिया प्रभारी दुर्गेश चन्द श्रीवास्तव व जिला प्रवक्ता अनवारूल रहमान खान के नेतृत्व में शुक्रवार को जिले के शिक्षा मित्र कलेक्ट्रेट परिसर में एकत्रित हुए प्रदर्शन के दौरान जिला मीडिया प्रभारी दुर्गेश चन्द श्रीवास्तव ने कहा कि प्रदेश के प्राथमिक विद्यालय में विगत 19 वर्षों से सेवा देते आ रहे हैं शिक्षामित्रों की स्थिति माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय आने के बाद बहुत ही दयनीय हो गई है। इतने अल्प मानदेय में परिवार का भरण पोषण करना मुश्किल हो रहा है। भविष्य की चिंता को लेकर मन बहुत ही व्यथित एवं सशंकित रहता है। इसी सदमे से प्रदेश भर में अब तक लगभग 3000 से अधिक शिक्षामित्रों की असामयिक अवसाद के कारण मौत हो चुकी हैं। यह सिलसिला अभी भी जारी है। जिला प्रवक्ता अनवारुल रहमान खान ने सरकार से शिक्षामित्रों को नवजीवन प्रदान करने की मांग की। उन्होंने कहा कि 25 जुलाई 2018 को माननीय उप मुख्यमंत्री डा0 दिनेश शर्मा जी की अध्यक्षता में शीर्ष स्तर पर गठित हाई पावर कमेटी की रिपोर्ट से अवगत कराते हुए लागू किया जाए। |
| Posted: 03 Oct 2020 10:09 AM PDT |
| हाथरस : म्यूच्यूअल ट्रांसफर आवेदकों को दावा/आपत्ति हेतु प्रत्यावेदन प्रस्तुत करने के सम्बन्ध में Posted: 03 Oct 2020 06:59 AM PDT |
| Posted: 03 Oct 2020 06:58 AM PDT |
| Posted: 03 Oct 2020 06:57 AM PDT |
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