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Sunday, October 4, 2020

दिव्य रश्मि न्यूज़ चैनल

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हाथरस प्रसंग

Posted: 03 Oct 2020 09:34 PM PDT

हाथरस प्रसंग

लेखक मनोज मिश्र,बैंक अधिकारी है |
हाथरस का मामला उलझता ही जा रहा है। योगी सरकार ने अब मामला सीबीआई को सौंप दिया है। प्रश्न यह है कि सीबीआई आखिर करेगी क्या? जिन अभियुक्तों को पकड़ने के लिए अमूमन सीबीआई को लाया जाता है वे सभी अभियुक्त पकड़े गए हैं। अगर बात षड्यंत्र की है तो उसके लिए सीबीआई की कोई आवश्यकता नहीं है। जो दिन के आईने की तरह साफ है उसे किसी अन्य एजेंसी को देकर उसी की खोज करवाना समय काटने के अलावा क्या हो सकता है। इसमें कोई शक नहीं कि सीबीआई एक विश्वसनीय संस्था है पर सभी मामले में वो सफल नहीं होती है आरुषि हत्या एक ज्वलंत उदाहरण है, सुशांत सिंह राजपूत का मामला भी उसी ओर अग्रसर होता प्रतीत हो रहा है। 
घटना में एक नया मोड़ आया है। ओंकार सिंह नामक एक गांववाले ने दावा किया है कि संदीप और मनीषा यानी अभियुक्त और मृतक के बीच प्रेम संबंध थे। घटना के दिन दोनों को मृतक के भाई ने रंगे हाथ पकड़ लिया।मारपीट हुई और उसी क्रम में संदीप ने लड़की का गला दबा दिया। ज्ञातव्य है कि संदीप लड़की के भाई का भी नाम है। मृतक का घटना के बाद का पहला वीडियो बताता है कि रेप जैसी कोई वारदात नहीं हुई थी। लड़की की मां भी अपने पहले वीडियो में इस बात की पुष्टि करती है - और कुछ न हुआ नार काट दई। देश के उन हिस्से में जहां की यह वारदात है वहां आरोप लगाकर पुलिस में मुकदमे की धमकी देकर पैसे वसूलने की बात अमूमन सामान्य है। देश का अनुसूचित जाति और जनजाति संबंधी कानून ही ऐसा है जहां जिसके ऊपर मुकदमा हुआ है उसके लिए कोई राहत ही नहीं। एक बार केस दाखिल हो जाये तो जिंदगी भर व्यक्ति को कोई नौकरी नहीं मिल सकती। जीवन के 3 से 4 वर्ष जेल में गए सो अलग। वर्तमान घटना में भी इसकी झलक मिलती है। घटना के बाद के बयान में सिर्फ संदीप का नाम है बाद में लड़की की भाभी के कहने पर इसमें तीन नाम और जोड़े जाते है। प्रश्न यह है कि क्यूँ? रपए का कानून कुछ ऐसा है कि अगर ये मामला गैंगरेप का बन जाये तो मुआवजा ज्यादा ही जाता है। रेप के लिए मुआवजा 2-5 लाख और गैंगरेप के लिए 5-8 लाख का है। अतः गैंगरेप का मामला ही ज्यादा मुफीद है। यही कारण है कि लड़की की भाभी अपना पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट कराने से इनकार कर रहे है। प्रशासन ने वैसे 25 लाख के मुआवजे का एलान किया है पर लालच की कोई सीमा नहीं होती कांग्रेस ने 50 लाख का लालच दिया और केस में वे धाराएं भी जुड़ गयीं जो पहले कभी थीं ही नही। मामला अब गैंगरेप का हो गया। एक अन्य प्रश्न मृतक के दाह संस्कार का है। पत्रकारों के एक दल ने इसे सबूत नष्ट करने की चेष्टा माना और पुलिस को इसके लिए कठघरे में खड़ा किया। पर वे यह भूल गए कि दाह संस्कार मृतक के पिता ने किया था। पुनः वारदात 14 सितंबर की है औऱ मृत्यु 28 सितंबर की। इस बीच पीड़िता अलीगढ़ के हस्पताल से लेकर दिल्ली के हस्पताल तक भर्ती थी पर देखने वाला कोई न था। महज 2 किमी के फैसले पर राहुल प्रियंका अखिलेश सभी रहते हैं पर कोई देखने न गया। पर मौत होते ही सभी गिद्ध भोज में जुट गए। ऐसे में पुलिस द्वारा जल्दी जल्दी दाह संस्कार करवाना भी सही प्रतीत ही रह है। जाहिर सी बात है अगर क्रियाकर्म में देर होती तो शायद इस लाश को लेकर कांग्रेस सड़क पर उतर जाती और दंगों के हालात हो जाते। भले ही 2-4 और जाने जातीं पर कांग्रेस को प्रदेश में खाद मिल जाती। इसी संजीवनी की तलाश में कांग्रेस में प्रियंका को उतारा था क्योंकि राहुल नाकाम साबित ही रहे थे पर इन मंसूबों पर पुलिस ने पानी फेर दिया। अब जब सीबीआई जांच की बात हुई है तो पीड़ित (?) परिवार इससे इनकार कर रहा है और आरोपी परिवार इसका स्वागत कर रहा है। यह बड़ी अनोखी बात है। सीबीआई जांच से इनकार के कारण इस संदेह को भी बल मिलता है कि कहीं यह हत्या ऑनर किलिंग की तो नहीं। दबे स्वरों में यह बात भी सामने आई है कि आरोपी और मृतक में प्रेम संबंध था और पूर्व में भी आरोपी के खिलाफ SC/ST एक्ट में लड़की के भाई ने तहरीर दी थी जिस कारण से संदीप जेल में था। उसके छूटने के बाद ही यह घटना हुई है। इस बिंदु को भी नकारा नहीं जा सकता।
उत्तर प्रदेश की राजनीति योगी के आने के बाद से ही गर्म है। चाहे मुख्यमंत्री के पद पर योगी की ताजपोशी हो या उनकी खरी खरी कहने की हिम्मत, मीडिया ने कभी भी योगी को पसंद नहीं किया है। जले पर नमक CAA दंगों के खिलाफ योगी के सख्त रुख, ओरमुख शहरों के नाम में परिवर्तन, दंगाइयों के पहचान के पोस्टर लगाने का निर्णय, कोरोना की भली भांति रोकथाम, गोरखपुर में इंसेफेलाइटिस को रोकना आदि ने कर दिया। हर उस जगह जहां मीडिया योगी को फेल देखना चाहता था वहां उन्होंने वाहवाही लूटी। ताजातरीन उदाहरण रामजन्मभूमि पर आए फैसले के उपरांत भी शांति बनी रहना। लाख उकसावे के बावजूद उत्तरप्रदेश में शांति रही। प्रदेश के मुख्यमंत्री का बिना मीडिया के सहयोग के देश में मुख्यमंत्री नंबर एक पर काबिज रहना वो भी तब जब दूसरे प्रदेशों में बेस्ट सीएम कहलाने के लिए पानी की तरह पैसा बह रहा हो। कांग्रेस और सपा बसपा का लगातार क्षरण उन्हें ऐसे मुद्दे तलाशने पर विवश करता है जो मुद्दे हैं ही नहीं। जिस देश में अपराधों को दर्ज कराने में जद्दोजहद करनी पड़ती है जहां मुख्यमंत्री के खिलाफ बोलने पर सिर मुंडवाना पड़ता है जहां मुसलमानों और ईसाइयों को तोहफे देने की होड़ हो वहां एक सन्यासी अपने कार्य के द्वारा अपने को श्रेष्ठ साबित कर रहा है और गर्व से कहता भी है कि वो एक धर्मनिष्ठ हिन्दू है जिस देश का बुद्धिजीवी वर्ग इन बातों का आदि नहीं है अतः उनका विरोध स्वाभाविक है।
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बाढ़ विधानसभा से भारतीय जन क्रान्ति दल के प्रत्याशी ने किया नामांकन

Posted: 03 Oct 2020 09:28 PM PDT

बाढ़ विधानसभा से भारतीय जन क्रान्ति दल के प्रत्याशी ने किया नामांकन 


बिहार विधानसभा के नामांकन के पहले दिन भारतीय जन क्रान्ति दल के प्रत्याशी डॉ सियाराम पण्डित ने नामांकन दाखिल किया | डॉ सियाराम पण्डित  गोवासा शेखपुरा के निवासी है उन्होंने  अपने समर्थको एवं प्रस्तावको के साथ  बाढ़ में अपना नामांकन दाखिल किया | 
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अकबरनगर में एनएच पर गड्‌ढों में फंसे दो ओवरलोड ट्रक, 4 घंटे तक नाथनगर से सुल्तानगंज तक जाम में फंसे रहे हजारों वाहन

Posted: 03 Oct 2020 06:22 PM PDT

एनएच-80 पर अकबरनगर थाना क्षेत्र के इंग्लिश चिचरौन के पास शुक्रवार की रात करीब दो बजे रोड पर बने गड्‌ढों में दो ओवरलोड ट्रक फंस गए। एनएच पर 4 घंटे आवागमन पूरी तरह ठप हो गया। नाथनगर से सुल्तानगंज तक 15 किलोमीटर तक हजारों वाहन जाम में फंसे रहे।

इस कारण जहां एक ओर लोगों को काफी परेशानी हुई वहीं प्रेस की गाड़ियों फंसने से समय पर पाठकों को अखबार नहीं मिल सका। देखते देखते सड़क के दोनों किनारे वाहनों की लंबी कतार लग गई। सुबह 6 बजे ग्रामीणों के सहयोग से ट्रक को गड्ढे से निकाला गया। जिसके धीरे-धीरे आवागमन चालू हुआ।



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Two overload trucks stuck in pits on NH in Akbarnagar, thousands of vehicles stuck in traffic jam from Natnagar to Sultanganj for 4 hours


source https://www.bhaskar.com/local/bihar/bhagalpur/news/two-overload-trucks-stuck-in-pits-on-nh-in-akbarnagar-thousands-of-vehicles-stuck-in-traffic-jam-from-natnagar-to-sultanganj-for-4-hours-127778295.html

सुल्तानगंज रेफरल अस्पताल में साढ़े चार घंटे लेट पहुंचे डाॅक्टर, बिना इलाज लौटे कई मरीज

Posted: 03 Oct 2020 06:22 PM PDT

रेफरल अस्पताल में आउटडोर व इमर्जेंसी सेवा में शनिवार दोपहर करीब साढ़े बारह बजे तक एक भी डॉक्टर मौजूद नहीं थे। इससे इलाज के लिए अस्पताल आए मरीजों को काफी परेशानी हुई। उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ा। अधिकांश मरीज बिना इलाज कराए ही लौट गए।

शुक्रवार रात ड्यूटी पर तैनात डॉ. रामानंद पासवान सुबह 8 बजे अपनी ड्यूटी पूरी कर चले गए। लिहाजा सुबह 8 बजे से दिन के 12:35 तक अस्पताल डाॅक्टर विहीन रहा। जो मरीज डाॅक्टर के आने के इंतजार में बैठे रहे उनके अंदर आक्रोश व्याप्त था।

नप वार्ड 24 स्थित विष्णुटोला मोहल्ले की वृद्धा उम्दा देवी, इंदिरा देवी, शीला देवी ने बताया कि सुबह 8 बजे से डाॅक्टर के इंतजार में बैठी हूं। वहीं फतेहपुर गांव की ज्योति कुमारी, शाहाबाद की कोमल कुमारी कुत्ता के काटने से इलाज कराने बैठी रही।
अस्पताल में तैनात सुरक्षा गार्ड से जब डाक्टरों के कब तक आने की बात पूछी गई, तो गार्ड हमेशा 10 मिनट में डाक्टर के आने की बात कहकर दिलासा देते रहे। दोपहर 12:35 बजे वैकल्पिक व्यवस्था के तहत आरबीएसके के डाॅ. देवेन्द्र दास अस्पताल कर्मी की सूचना पर पहुंचे।

इसके बाद मरीजों का इलाज शुरू हुआ। उन्होंने बताया कि मुझे 11:05 में अस्पताल के एक डाटा ऑपरेटर ने सूचना दी कि जिन डाॅक्टर की ड्यूटी सुबह 8 बजे से अस्पताल में थी, वे अस्पताल नहीं आ पाएंगे। इसलिए मरीजों को देखने मुझे अस्पताल बुलाया गया और मैं पहुंचकर मरीजों को देख रहा हूं। अस्पताल प्रभारी डाॅ. उषा कुमारी ने बताया कि जिस डाॅक्टर की ड्यूटी थी, वे विभागीय आदेश पर ट्रेनिंग में चले गए थे। वैकल्पिक व्यवस्था कर आरबीएसके के डाॅक्टर को अस्पताल बुलाया गया।



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Doctors arrive at Sultanganj Referral Hospital late for four and a half hours, many patients returned without treatment


source https://www.bhaskar.com/local/bihar/bhagalpur/sultanganj/news/doctors-arrive-at-sultanganj-referral-hospital-late-for-four-and-a-half-hours-many-patients-returned-without-treatment-127778306.html

जमीन पर कब्जा कर निर्माण का आरोप

Posted: 03 Oct 2020 06:22 PM PDT

महुआगढ़ा निवासी तरन्नुम खातून ने उपायुक्त व एसपी को आवेदन देकर अपने निजी जमीन पर गांव के ही अकबर मियां वगैरह द्वारा रातों रात कब्जा कर मकान निर्माण कर लेने का आरोप लगाया है। आवेदन में खातून ने कहा है कि 29 सितंबर की रात में जब वे रात में बाहर निकला तो देखा की उपरोक्त लोग हरवे हथियार के साथ उनके जमीन पर जबरन मकान निर्माण कर रहा है।

जब वे और उनके पति दोनों जाकर काम को बंद कराने गया तो वे सभी लोग हरवे हथियार के साथ जान मारने की नियत से हम लोगों पर हमला करने के प्रयास किया, तभी किसी तरह भागकर खरियोडीह पुलिस पिकेट प्रभारी को गुहार लगाई परंतु कोई कार्यवाही नहीं हुआ। बाद में 30 सितंबर को जयनगर थाना तथा अंचलाधिकारी को भी लिखित आवेदन देकर जबरन उनके जमीन पर निर्माण कार्य रोक लगाने की मांग की परंतु अभी तक कोई करवाई नहीं की गई। उन्होंने जमीन को कब्जा मुक्त कराने की गुहार लगाई।



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source https://www.bhaskar.com/local/bihar/muzaffarpur/jainagar/news/charge-of-construction-by-capturing-land-127779050.html

मुजफ्फरपुर के सदातपुर-मझाैली और पूर्णिया के गुलाबबाग में एनएच-57 पर बनेगा फ्लाईओवर

Posted: 03 Oct 2020 06:22 PM PDT

बिहार में एनएच पर चिह्नित 94 जानलेवा स्थानाें पर दुर्घटना राेकने के लिए एनएचएआई की पहल तेज हाे गई है। इन स्थानाें पर दुर्घटना राेकने के लिए तात्कालिक व स्थाई निदान हेतु विभिन्न प्रस्तावाें काे हरी झंडी दी गई है।

शनिवार काे पटना में हुई विशेष बैठक में एनएच-57 पर मुजफ्फरपुर के सदातपुर तथा मझाैली एवं पूर्णिया के गुलाबबाग तथा मुजफ्फरपुर-बराैनी एनएच-28 पर समस्तीपुर के ताजपुर, मुसरीघरारी एवं दलसिंहसराय के पास शीघ्र फ्लाईओवर का निर्माण हाेगा। ताजपुर, मुसरीघरारी तथा दलसिंहसराय में फ्लाईओवर निर्माण का टेंडर भी हाे चुका है।

वहीं, औरंगाबाद से लेकर झारखंड सीमा तक प्रस्तावित सिक्स लेन के टेंडर में इसके निदान का प्रावधान किया जाएगा। एनएचएआई बिहार जाेन के क्षेत्रीय अधिकारी चंदन वत्स ने बताया है कि राष्ट्रीय राजमार्ग एवं परिवहन मंत्रालय की ओर से जारी 94 ब्लैक स्पाॅट का निराकरण जून 2021 तक कर लिया जाएगा। 94 ब्लैक स्पाॅट में सर्वाधिक 21-21 स्थान मुजफ्फरपुर व औरंगाबाद में ही चिह्नित किए गए हैं।

इन जिलाें में विभिन्न एनएच पर हैं 94 ब्लैक स्पाॅट

  • माेतिहारी- एनएव-28 पर 1 स्थानाें पर
  • मुजफ्फरपुर- एनएच-77, एनएच-57, एनएच-28 पर 21 स्थानाें पर। माेतीपुर में 4, कांटी में 3, पानापुर में 1, बाेचहां में 1, सदर थाना- में 5 तथा अहियापुर में 6 स्थानाें पर ब्लैक स्पाॅट है।
  • वैशाली- एनएच-22 तथा एनएच-19 पर 6 स्थानाें पर
  • दरभंगा- एनएच-57 पर 1 स्थानाें पर
  • समस्तीपुर- एनएच-28 पर 3 स्थानाें पर
  • पूर्णिया- एनएच-31 पर 2 स्थानाें पर
  • कटिहार- एनएच- 31 पर 7 स्थानाें पर
  • भागलपुर- एनएच-80 पर 2 स्थानाें पर
  • नवगछिया- एनएच-31 पर 4 स्थानाें पर
  • पटना - एनएच-30 तथा एनएच-83 पर 6 स्थानाें पर
  • गया- एनएच- 83 तथा एनएच-2 पर 10 स्थानाें पर
  • औरंगाबाद- एनएच-2 तथा एनएच-139 पर 21 स्थानाें पर
  • गाेपालगंज- एनएच-28 पर 3 स्थानाें पर


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Flyover to be built on NH-57 at Sadatpur-Mazhali of Muzaffarpur and Gulabbagh of Purnia


source https://www.bhaskar.com/local/bihar/muzaffarpur/news/flyover-to-be-built-on-nh-57-at-sadatpur-mazhali-of-muzaffarpur-and-gulabbagh-of-purnia-127778340.html

रिटायर्ड नाैसैनिक के इकलाैते पुत्र की हत्या कर शव को सकरा में फेंका, बैरिया में बवाल, मृतक बीसीए का था छात्र

Posted: 03 Oct 2020 06:22 PM PDT

बैरिया आयाची ग्राम निवासी रिटायर्ड नाैसैनिक अखिलेश सिंह के पुत्र सूरज कुमार उर्फ सन्नी काे उसके दाेस्त घर से बुला कर ले गए और हत्या कर दी। शव सकरा में समस्तीपुर राेड किनारे भुट्टा चाैक के पास फेंका हुआ मिला। हत्याराें ने सन्नी के हाथ व गले काे रस्सी से कस दिया था और मुंह में कपड़ा ठूंस दिया था। पांव में जंजीर बांध दिया था। शरीर पर जगह-जगह चाकू के जख्म मिले।

शनिवार की सुबह में परिजनाें ने सन्नी के अपहरण की एफआईआर अहियापुर थाने में दर्ज कराई थी। शव की पहचान हाेने के बाद आक्राेशित लाेगाें ने बैरिया में राेड जाम कर शनिवार की देर रात तक बवाल किया। परिजनाें व माेहल्ले के लाेग हत्याराें की गिरफ्तारी के बाद ही सड़क से हटने की जिद पर अड़े रहे। अखिलेश सिंह सेना से रिटायर हाेने के बाद बराैनी ऑयल रिफायनरी में काम करते हैं।

सन्नी दाे बहनाें पर इकलाैता भाई था। शनिवार की शाम अखिलेश अहियापुर थाने में लापता पुत्र के बारे में कार्रवाई की जानकारी लेने पहुंचे। जहां जानकारी दी गई कि सकरा में शव मिला है। लाेग भागकर एसकेएमसीएच पहुंचे ताे देखा सन्नी की लाश है। अखिलेश ने बताया कि शुक्रवार की दाेपहर अक्षय नामक सन्नी का एक पुराना दाेस्त घर पर आया था।

10 मिनट में लाैटने की बात कह कर वह सन्नी को ले गया। शाम तक जब सन्नी नहीं लाैटा और उसका माेबाइल भी बंद मिला। सन्नी पटना में रह कर बीसीए की पढ़ाई कर रहा था। लाॅकडाउन में काेचिंग बंद हाे जाने पर वह घर लाैट आया था।
घर से बुलाकर ले जाने वाला दाेस्त एक पूर्व मुखिया का है पुत्र

अखिलेश सिंह के एक पड़ाेसी ने बताया कि सन्नी काे घर से बुलाकर ले जाने वाले दाेस्त का चेहरा सीसीटीवी में कैद हाे चुका था। फुटेज लेकर सन्नी के अन्य दाेस्ताें से उसकी पहचान कराई ताे वह एक पूर्व मुखिया का पुत्र निकला। जांच में मामला सामने आ जाएगा।

सन्नी काे उसका दाेस्त ही घर से बुलाकर ले गया था। जिस अंदाज में हत्या की गई है उससे लगता है कि हत्याराें काे काफी रंजिश रही हाेगी। फुटेज से पहचान की जा रही है। रामनरेश पासवान, नगर डीएसपी



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बैरिया राेड में शनिवार की रात बवाल कर रहे लोगों को समझाते सिटी एसपी और नगर डीएसपी।


source https://www.bhaskar.com/local/bihar/muzaffarpur/news/after-killing-the-only-son-of-a-retired-civilian-the-body-was-thrown-into-sakra-a-ruckus-in-the-baria-the-deceased-was-a-student-of-bca-127778379.html

राजद-कांग्रेस व माले जब अलग लड़ीं तो सिमट गईं इनकी सीटें; 2010 में 243 सीटें पर लड़ी कांग्रेस, जीती सिर्फ चार पर

Posted: 03 Oct 2020 06:22 PM PDT

महागठबंधन के घटक दलों में रुठने-मनाने का लंबा सिलसिला चला। वजह एक रही है, सीट शेयरिंग में सभी एक-दूसरे से ज्यादा से ज्यादा हिस्सेदारी चाहते थे। अब सबने सीटों की संख्या बांट ली है। अलग-अलग लड़ने से सबको घाटा होगा। गठबंधन से हम और रालोसपा पहले ही अलग हो चुके हैं। अब वीआईपी ने भी अलग राह पकड़ ली है।

इनके जाने से गठबंधन पर होने वाले सीधे असर को आंकना इसलिए थोड़ा पेचीदा है कि इन दलों की वोट हैसियत अभी ठीक से किसी भी चुनाव में सीधे सामने नहीं आई है। तीनों पार्टियों के नेता जातीय आधार को ही ताकत मानते हैं, लेकिन कभी अकेले लड़े नहीं। गठबंधन में जब भी लड़े वोट शेयर 2-3% से कम ही रहा।

इसके ठीक उलट राजद, कांग्रेस, भाकपा, माकपा और माले का वोट सार्वजनिक है। ये पार्टियां अकेले भी और गठबंधन में भी। ये जब-जब अकेले लड़ीं तो इनका वोट शेयर भले थोड़ा बहुत बढ़ा लेकिन सीटें सिमट गईं। 2010 चुनाव के नतीजे सामने हैं। तब 243 सीटों पर कांग्रेस के प्रत्याशी थे, लेकिन पार्टी 4 सीट बहादुरगंज, किशनगंज, कसबा और कहलगांव ही जीत पाई।

कांग्रेस 17 विधानसभा क्षेत्रों में दूसरे स्थान पर थी लेकिन एनडीए उम्मीदवारों के मुकाबले गैप काफी बड़ा था। 2000 में 23 और 2005 में 5 सीट ही कांग्रेस को हासिल हुईं थीं। लेकिन 2015 के चुनाव में कांग्रेस के स्ट्राइक रेट में गजब का उछाल आया। पार्टी 40 सीटें लड़ी और 27 जीत गई। तब वह राजद-जदयू के साथ थी। पार्टियों को पता है कि एनडीए की ताकत के सामने अकेले जोरआजमाइश मायने नहीं रखती। साथ आना, साथ लड़ना मजबूरी है।
2010 में कांग्रेस 17 सीटों पर दूसरे स्थान पर रही
रामनगर, नरकटियागंज, रीगा, निर्मली, अमौर, बायसी, धमदाहा, पूर्णिया, कोढ़ा, आलमनगर, सिमरी बख्तियारपुर, मटिहानी, भागलपुर, शेखपुरा,बरबीघा, पटना साहिब और वजीरगंज
जब-जब तीनों साथ रहे, एक दूसरे को अपना वोट कराया ट्रांसफर

भाकपा-माले 1990 (तब आईपीएफ) के बाद लगातार अकेले लड़ती रही और 3-6 सीटें जीतती रही। 2010 का चुनाव अपवाद था जब पार्टी खाता भी नहीं खोल सकी। महागठबंधन के घटक दलों के लिए 2020 की चुनावी पिच 2010 जैसी है क्योंकि एनडीए का आज का स्वरूप थोड़ा-बहुत ऊंच-नीच के साथ 2010 जैसा ही है।

महागठबंधन के घटक की तीनों प्रमुख पार्टियां राजद, भाकपा-माले और कांग्रेस...2010 की ही तरह अलग-अलग लड़तीं तो खामियाजा तीनों को भुगतना पड़ता। जब-जब तीनों साथ रहीं और एक-दूसरे को अपना वोट ट्रांसफर करा ले गईं तो एनडीए को कड़ी टक्कर देने की स्थिति में रहीं। गठजोड़ से ही इनकी ताकत बढ़ेगी क्योंकि 2010 के बाद हुए चुनावों में कुछ भी ऐसा संकेत नहीं है जिससे साबित हो कि इन दलों का समर्थन आधार बढ़ रहा है।



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When the RJD-Congress and Male fought separately, their seats were reduced; Congress contested 243 seats in 2010, won only four


source https://www.bhaskar.com/local/bihar/patna/news/when-the-rjd-congress-and-male-fought-separately-their-seats-were-reduced-congress-contested-243-seats-in-2010-won-only-four-127779022.html

कांग्रेस-राजद पर एक साथ बरसी भाजपा, दलित विरोधी व किसानों का निवाला छीनने वाला कहा

Posted: 03 Oct 2020 06:22 PM PDT

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल ने कहा है कि किसानों के मुंह का निवाला छीनने वाली कांग्रेस आज किसानों की हितैषी होने का स्वांग रच रही है। राज्य का हर आम व खास जानता है कि किसानों का हित कांग्रेस के लिए कभी प्राथमिकता नहीं रहा। आज जब सरकार किसानों के हित में कृषि सुधार कानून लेकर आई है, तो कांग्रेस की छाती फट रही है। राष्ट्र के विकास की रीढ़ किसान-मजदूरों को कांग्रेस ने अपने कार्यकाल में कभी मजबूत होने नहीं दिया।

कांग्रेस ने बाबू जगजीवन राम को नहीं बनने दिया पीएम

उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने कांग्रेस पर दलित विरोधी होने का आरोप लगाते हुए कहा कि उसने हमेशा दलितों के मार्ग में बाधाएं उत्पन्न की, आगे बढ़ने से रोका। कांग्रेस ने कभी बाबू जगजीवन राम को प्रधानमंत्री नहीं बनने दिया, उनकी पुत्री मीरा कुमार को राजनीतिक अज्ञातवास में भेज दिया और बाद में बिहार प्रदेश के अध्यक्ष पद से दलित समाज के अशोक चौधरी को अपमानित कर हटा दिया। राहुल को बापू की समाधि पर जाकर प्रायश्चित उपवास करना चाहिए।

'लालटेन' को चुनाव के बाद म्यूजियम में रख देगी जनता

स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि चुनाव के बाद जनता लालटेन को म्यूजियम में रख देगी। लालटेन थामने वाले नेपथ्य में चले जाएंगे। राजद का भविष्य अंधकार में है। चुनाव के पूर्व ही 'लालटेन' का तेल खत्म होने लगा है। रणक्षेत्र में उतरने से पहले ही महागठबंधन के महारथी मैदान छोड़ भाग रहे हैं। यही नहीं, उपेक्षित नेता महागठबंधन के डीएनए में ही गड़बड़ी बता रहे हैं। स्थिति यह है कि चुनाव से पहले ही महागठबंधन बिखर गया है।



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उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने कांग्रेस पर दलित विरोधी होने का आरोप लगाते हुए कहा कि उसने हमेशा दलितों के मार्ग में बाधाएं उत्पन्न की, आगे बढ़ने से रोका।


source https://www.bhaskar.com/local/bihar/patna/news/bjp-anti-dalit-and-farmers-snatched-together-on-congress-rjd-said-127779021.html

चुनाव आए-गए पर मुद्दों का मोर्चा बदला नहीं, अधिग्रहण से मुक्ति की 40 साल पुरानी मांग नहीं हो सकी है पूरी

Posted: 03 Oct 2020 06:22 PM PDT

(ब्रज किशोर दूबे) राज्य में सबसे अधिक मतदाता वाले दीघा विधानसभा क्षेत्र में चुनावी सरगर्मी अभी मद्धिम है। 2008 के परिसीमन के बाद 2010 के चुनाव में एनडीए से जदयू के टिकट पर पूनम देवी विधायक बनी थी। लेकिन, 2015 में जदयू के अलग होने के बाद भाजपा के टिकट से डॉ. संजीव चौरसिया विधायक बने।

जदयू से मैदान में खड़े होने की तैयारी में जुटे नेताओं का मानना है कि परिसीमन के बाद जदयू को टिकट मिला था। इस बार भी सीट पर जदयू का ही दावा बनता है। लेकिन, भाजपा नेताओं का कहना है कि सीटिंग विधायक भाजपा के होने के कारण दीघा सीट भाजपा के पास ही रहनी चाहिए।

डॉ. चौरसिया ने क्षेत्र में प्रचार शुरू कर दिया है। वे टिकट मिलने को लेकर आश्वस्त हैं। कहते हैं पांच सालों तक लोगों की सेवा की है। सेवा, संघर्ष और क्षेत्र की जनता के प्रति समर्पण ही हमारी पूंजी है। सीट जदयू के खाते में गई तो दावेदार प्रो. रणवीर नंदन, प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद सहित कई अन्य हैं। उधर, महागठबंधन में कांग्रेस और भाकपा-माले की भी अपनी-अपनी दावेदारी है।
जलजमाव-जाम से इलाके के लोगों को अब तक नहीं मिली निजात
चुनाव आए-गए लेकिन दीघा की जनता की पुरानी मांग जस की तस रह गई। पूरा क्षेत्र मूलभूत समस्याओं से जूझ रहा है। पुराने दीघा इलाके से लेकर नई कॉलोनियों में शामिल आशियाना नगर, पाटलिपुत्र, राजीव नगर, चितकोहरा, गर्दनीबाग, अनीसाबाद, मैनपुरा, नेहरू नगर, राजाबाजार, जगदेव पथ, पटेल नगर आदि जलजमाव से परेशान हैं।

मुख्य सड़कों को छोड़ कर गलियों की सड़कें दुरुस्त नहीं है। इलाके में बच्चों के खेलने और बुजुर्गों के टहलने के लिए मैदान, सार्वजनिक शौचालय, सरकारी स्कूल, सरकारी अस्पताल, बस-ऑटो स्टैंड आबादी के हिसाब से नहीं है। जाम आम है। 40 साल पुराने अधिग्रहण से मुक्ति की मांग जस की तस है। दीघा विधानसभा क्षेत्र के कुल 4,54,340 वोटरों में करीब 50 हजार से अधिक वोटर दीघा के 1024.52 एकड़ जमीन पर घर बनाकर रहने वाले हैं। लिहाजा मुद्दों का मोर्चा बदला नहीं है।
वोट का गणित
दीघा विधानसभा क्षेत्र में सवर्ण मतदाताओं की संख्या आधा से अधिक है। यानी, ब्राह्मण, राजपूत, भूमिहार, कायस्थ मतदाता करीब 2 लाख हैं लेकिन यादव, कोयरी, कुर्मी, पासवान, वैश्य, मुसलमान की संख्या जीत-हार में अहम रोल निभाती रही है। महादलित वोटरों की संख्या करीब 25 हजार है।
यहां जाम की समस्या
पटना की पॉश कॉलोनी में शुमार पाटलिपुत्र कॉलोनी के निवासी सेवानिवृत आईएएस वीएस दूबे बताते हैं कि परिसीमन के बाद दीघा विधानसभा क्षेत्र नगर निगम में शामिल हो गया। लेकिन, कच्ची-नाली और टूटी सड़कों में बदलाव नहीं आया। कॉमर्शियल गतिविधि से जाम की समस्या रहती है।

सीट का इतिहास

2008 में परिसीमन के बाद दीघा विधानसभा क्षेत्र अस्तित्व में आया था। 2010 में पहला चुनाव हुआ था। इसमें एनडीए उम्मीदवार पूनम देवी जदयू के टिकट से विधायक बनी थी। 2015 के विधानसभा चुनाव में जदयू के महागठबंधन में शामिल होने के बाद जदयू के टिकट पर राजीव रंजन प्रसाद ने चुनाव लड़े थे। लेकिन एनडीए समर्थित भाजपा के टिकट से चुनाव लड़ने वाले डॉ. संजीव चौरसिया ने राजीव रंजन प्रसाद को हराया था।

इस सीट पर दूसरे चरण में होना है मतदान
दीघा विधानसभा क्षेत्र में चुनाव 3 नवंबर को होना है। इसकी अधिसूचना 9 अक्टूबर को जारी होगी। इसी दिन से नामांकन शुरू हो जाएगा। नामांकन करने की अंतिम तारीख 16 अक्टूबर है। 19 अक्टूबर तक नाम वापस लिया जाएगा। 3 नवम्बर को मतदान होगा। 10 नम्बर को मतगणना होगी।



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2010 में जदयू, 2015 में भाजपा की जीत।


source https://www.bhaskar.com/local/bihar/patna/news/elections-have-come-and-gone-but-issues-have-not-changed-40-year-old-demand-for-freedom-from-acquisition-has-not-been-fulfilled-127778974.html

1985 के बाद दूसरी बार 2015 में चुने गए 10 फीसदी मुस्लिम विधायक, सर्वाधिक राजद से

Posted: 03 Oct 2020 06:22 PM PDT

पिछले चुनाव में 23 मुसलमान विधायक जीते। 2000 के बाद पहली बार इतनी बड़ी संख्या में मुस्लिम विधायक चुने गए। साल 2000 के चुनाव में 29 मुसलमान विधायक बने थे। 2015 में चुने गए मुस्लिम विधायकों की संख्या 1952 के चुनाव के बराबर है। लेकिन तब बिहार एक था।

झारखंड बनने के बाद सबसे ज्यादा मुस्लिम विधायक 16वीं विधानसभा में पहुंचे। 1952 से अब तक केवल दूसरी बार हुआ है जब विधानसभा में करीब 10 फीसदी विधायक मुस्लिम थे। 1985 में 325 में 34 मुस्लिम विधायक थे, जबकि 2015 में 243 में से 24 विधायक बने।

24 में से 11 मुसलमान विधायक राजद से

24 में से 11 मुसलमान विधायक लालू प्रसाद की पार्टी आरजेडी के हैं। बाकी 11 महागठबंधन में शामिल अन्य दलों के थे। भाजपा के 53 जीतने वालों में 1 भी मुस्लिम नहीं था।



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{अन्य में भाकपा (माले) के महबूब आलम (बलरामपुर) से जीते हैं। इस पार्टी ने कुल तीन सीटें जीती थीं। राज्य में मुसलमानों की आबादी 16.87% (पूर्णिया, कटिहार, अररिया और किशनगंज में 30% से अधिक मुस्लिम आबादी)


source https://www.bhaskar.com/local/bihar/patna/news/for-the-second-time-since-1985-10-percent-of-muslim-mlas-elected-in-2015-most-from-rjd-127778973.html

सुना है गठबंधनों में सीटों की कमी चल रही है, इस बार तो लगता है कि नेताजी को बैठने के लिए भी सीट जीतनी पड़ेगी

Posted: 03 Oct 2020 06:22 PM PDT

बिहार में चुनाव की तारीखों का ऐलान तो हो गया, लेकिन जिन्हें चुनाव लड़ना है, वो पार्टियां अभी तक ये तय नहीं कर पाई हैं कि वो कितनी सीटों पर लड़ेंगी और कहां से लड़ेंगी? बीता पूरा हफ्ता सभी पार्टियों ने इसी माथापच्ची में गुजारा। वहीं दलित वोटबैंक को साधने के लिए हर पार्टी अपनी-अपनी ओर से कुछ न कुछ कर रही हैं। कोई दलित वोटरों पर पकड़ रखने वाली पार्टियों से गठबंधन कर रहा है, तो कोई दलित नेता को कार्यकारी अध्यक्ष और उपाध्यक्ष बना रहा है। बिहार चुनाव की पिछले हफ्ते की सियासत को हमारे कार्टूनिस्ट मंसूर ने कुछ ऐसे देखा...



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Bihar Vidhan Sabha Election 2020 Cartoons | Tejaswi Yadav Mahagathbandhan Seat Sharing, Upendra Kushwaha BSP Alliance, Pappu Yadav Alliance


source https://www.bhaskar.com/bihar-election/news/bihar-vidhan-sabha-election-2020-cartoons-tejaswi-yadav-mahagathbandhan-seat-sharing-upendra-kushwaha-bsp-alliance-pappu-yadav-127778942.html

ठेकेदार बोला- किसी भी पार्टी के नेता की रैली के लिए 100 से 150 बाइक वाले ला सकता हूं, 10 किमी के 300 और 20 किमी के 500 रुपए लगेंगे

Posted: 03 Oct 2020 06:22 PM PDT

मेरी उम्र उस समय कुछ 17 साल रही होगी। मेरा एक दोस्त था, जिसे उसके 18वें जन्मदिन पर पिताजी ने बाइक गिफ्ट दी। एक दिन वो मेरे घर आया और मुझसे कहने लगा चलो घूमकर आते हैं। थोड़ी देर में हम एक पेट्रोल पंप पर पहुंचे। वहां बहुत लंबी लाइन लगी थी।

मैंने एक चीज नोट की कि लोग पेट्रोल तो भरवा रहे थे, लेकिन पैसे कोई नहीं दे रहा था। मेरे दोस्त ने भी अपनी गाड़ी में पेट्रोल भरवाया और पैसे नहीं दिए। मैंने जब उससे पूछा तो उसने कहा कि नेताजी की रैली में जा रहे हैं। सब इंतजाम उनकी तरफ से है।

हो सकता है कि ऐसा कभी न कभी आपके साथ भी हुआ है। लेकिन, बिहार में चुनाव की तारीखें आने के बाद अब किराए से बाइक वालों की भीड़ जुटाने का बिजनेस शुरू हो गया है। इसके लिए बाकायदा ठेकेदार हैं, जो नेताओं के लिए भीड़ इकट्ठी करती है और उसके बदले में इन्हें पैसा मिलता है। हालांकि, कोरोना की वजह से इस बार बड़ी-बड़ी रैलियों और भीड़ इकट्ठा करने पर रोक जरूर है, उसके बावजूद इसे चलाने वाले सक्रिय हो गए हैं।

भास्कर ने जब किराए की भीड़ की पड़ताल के लिए ठेकेदारों का स्टिंग ऑपरेशन किया तो चौंकाने वाली बातें सामने आई। पता चला कि महज 300 रुपए में बाइकर्स मिल जाते हैं, जो नेताजी के लिए भीड़ बढ़ाने का काम करते हैं। ये भीड़ नेताओं की जयकार भी करती है और उनकी पार्टी का झंडा भी उठाती है। थोड़ी देर बाद यही भीड़ किसी दूसरी पार्टी के नेता के जयकार करने लगती है।

ऐसे हुआ किराए की भीड़ लाने वाले ठेकेदारों का खुलासा

सबसे पहले नेताओं के लिए किराए की भीड़ जमा कराने वाले ठेकेदारों की पहचान की, उनसे बात की और खुद राजनीतिक पार्टी के लिए इलेक्शन मैनेजमेंट का काम करने की बात कहकर भरोसा बनाया। भरोसा होते ही ठेकेदार ने एक-एक करके वो सारी बातें बता दीं, जो नेताओं के साथ होती थी।

बातचीत में पता चला कि ये किराए की भीड़ एक तरह से टैरिफ पर काम करती है। ठेकेदार पहले नेताओं से किलोमीटर के हिसाब से डील करते हैं। ये भीड़ नेताओं के साथ टैरिफ वाले समय तक जिंदाबाद करती है।

नीचें पढ़े भास्कर रिपोर्टर और ठेकेदार के बीच बातचीत...

रिपोर्टर - हैलो, नमस्ते भैया...मैं...बोल रहा हूं।

ठेकेदार - बोलो।

रिपोर्टर - बात हुई थी आपसे...बोरिंग रोड पर मुलाकात हुई थी।

ठेकेदार – हां...हां...बताओ।

रिपोर्टर - भैया मैं रहने वाला तो बाहर का हूं, यहां इवेंट मैनेजमेंट का काम कर रहा हूं।

ठेकेदार - हां बोलो क्या?

रिपोर्टर - कुछ पार्टियों की डिमांड आई थी रैली के लिए बाइक के साथ लड़कों की, आपकी मदद मिल जाएगी क्या?

ठेकेदार - ऐसा है न…तुम एक आध घंटे में हमको कॉल करोगे।

रिपोर्टर - भैया अभी....नेताजी को बताना था।

ठेकेदार - हां हो, ओह

रिपोर्टर - अच्छा ये बता दीजिए कितना लगेगा?

ठेकेदार - पर बाइक 300 रुपया देना होगा।

रिपोर्टर - तेल देना होगा अलग से?

ठेकेदार - नहीं…तेल के साथ, कहां से कहां जाना है अगर लॉन्ग डिस्टेंस हुआ तो पर बाइक 500...कम दूरी हुई तो 300 देना होगा।

रिपोर्टर - कितने किलो मीटर का 500 और कितने किलो मीटर का 300 देना होगा।

ठेकेदार - 10 किलोमीटर जाना है तो 300...अगर 15 से 20 किलोमीटर जाना हो तो 500 देना होगा।

रिपोर्टर - कितना मैक्सिमम हो सकता है, कितना लोग मिल सकते हैं?

ठेकेदार - 100 बाइक का हो जाएगा।

रिपोर्टर - कागज पत्र तो होगा उन सभी का, हालांकि कागज पत्र कौन चेक करेगा।

ठेकेदार - रैली में कागज पत्र कौन चेक करता है, पहले पूछ लो बात करके कंफर्म कर लो।

रिपोर्टर - भैया वो तो ज्यादा बता रहे थे, उन्हें ढाई से तीन सौ तक चाहिए था।

ठेकेदार - पहले पूछो तो सही पैसा देंगे या नहीं देंगे।

रिपोर्टर - पैसा तो देंगे, पैसा तो एडवांस देने की बात हुई है।

ठेकेदार - हां तो पैसा एडवांस दिला दो, फिर हम करेंगे आगे। नहीं दिए तो नहीं हो पाएगा।

रिपोर्टर - भैया ढाई तीन सौ की व्यवस्था हो जाएगी न।

ठेकेदार - ढाई तीन सौ नहीं कह सकते बाबू, हम डेढ़ सौ मिनिमम...झूठ नहीं बोलेंगे डेढ़ सौ तक का कर देंगे।

रिपोर्टर - इधर कोई ऑर्डर मिला है क्या?

ठेकेदार - नहीं अभी तो ऑर्डर कोई नहीं मिला है, पहले पूछ लेना रैली निकल रहा है, आचार संहिता लागू हो गई है।

रिपोर्टर - वो दूसरे तरह की रैली निकाल रहा है।

ठेकेदार - हां पहले पूछ लेना, फिर बताना।

रिपोर्टर - ठीक है भैया, व्यवस्था हो जाएगी न ।

ठेकेदार - हां हां हो जाएगी।

भीड़ को नारे लगाने होते हैं, एक गाइड भी होता है

किराए की भीड़ के कई काम होते हैं। सबसे पहला काम तो यही होता है कि इन्हें नेताजी की गाड़ी के पीछे अपनी बाइक दौड़ानी होती है। नेताजी के नारे लगाने होते हैं। नारे क्या लगेंगे, ये नेताजी और ठेकेदार तय करते हैं। भीड़ को गाइड करने वाला भी होता है, जो ये ध्यान रखता है कि बाइकर्स झंडे सही से उठा रहे हैं या नहीं।

ज्यादातर बाइकर्स वो होते हैं, जो बिगड़ैल और आपराधिक प्रवृत्ति के होते हैं

भीड़ बढ़ाने का काम करने वाले इन बाइकर्स में ज्यादातर वो लड़के होते हैं, जो बिगड़ैल और आपराधिक प्रवृत्ति वाले होते हैं। लूट, चोरी जैसी वारदातों में बाइकर्स का नाम आने के बाद करीब तीन साल पहले पटना के उस समय के एसएसपी मनु महाराज ने इन गैंग्स की पड़ताल की। पटना में ही करीब 50 से ज्यादा गैंग के 150 से ज्यादा लड़कों के नाम सामने आए थे, जो लूट, चोरी समेत कई वारदातों में शामिल थे। कार्रवाई हुई थी, लेकिन गैंग पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ।

समय बदला है, पहले भीड़ आती थी, अब बुलाई जाती है

एक्सपर्ट सुनील सिन्हा बताते हैं कि पहले नेताओं को सुनने के लिए भीड़ अपने साधन से या ट्रैक्टर-ट्रॉली से या बसों से पहुंच जाती थी। लेकिन, अब ट्रेंड बदल रहा है। अब भीड़ जुटाने के लिए नेताओं को मशक्कत करनी पड़ती है।

वहीं, बिहार की राजनीति में लंबे अरसे से नजर रखने वाले धनवंत सिंह राठौर कहते हैं कि पहले नेताओं के पास मुद्दे होते थे, लोग उनकी बात सुनने के लिए खुद आते थे। लेकिन, अब भीड़ में शामिल किसी व्यक्ति से पूछ लिया जाए कि वो किसकी रैली या जुलूस में आया है, तो शायद वो इसका जवाब भी न दे पाए।

डॉ. आशुतोष बताते हैं, बिहार में ऐसे कई बड़े नेता हुए हैं, जिन्हें सुनने के लिए गांधी मैदान भर जाता था, लेकिन अब ऐसा ट्रेंड आया है कि नेताओं को अपनी दमदारी दिखाने के लिए किराए की भीड़ लानी पड़ती है। वो कहते हैं पहले भीड़ आती थी, अब बुलानी पड़ती है।



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Bihar Election 2020; Dainik Bhaskar Sting Update | Political Party Pay Money to Fake Crowd For Bihar Vidhan Sabha Chunav Rally


source https://www.bhaskar.com/bihar-election/news/bihar-election-2020-dainik-bhaskar-sting-political-party-pay-money-to-fake-crowd-for-bihar-vidhan-sabha-chunav-rally-127778941.html

सिर्फ 37 मिनट में सहनी-तेजस्वी की यारी डीएनए में गड़बड़ी तक पहुंच गई, शाम 4.55 से शुरू हुआ वीआईपी भाईचारा 5.32 पर ही खत्म हुआ

Posted: 03 Oct 2020 06:22 PM PDT

(इंद्रभूषण) एक कहावत है राजनीति में कोई भाई चारा नहीं होता है। शनिवार को महागठबंधन की प्रेस कांफ्रेंस में यह कहावत चरितार्थ भी दिखी..। मौका था महागठबंधन की सीटों के एलान का। मंच पर सभी घटक मौजूद थे और एक दूसरे की शान में कसीदे भी पढ़ रहे थे।

कोई किसी को भाई बता रहा था तो कोई साथी...। तेजस्वी ने भी वीआईपी के मुखिया मुकेश सहनी को 'बड़ा भाई' बताया तो लगा सबकुछ ठीक है। चंद मिनट बाद ही माइक मुकेश सहनी के पास पहुंचा। पूरे समय धैर्यवान दिख रहे सहनी अचानक फूट पड़े और कहा मेरी पीठ में खंजर घोंप गया है...फिर क्या था जैसे राजनीतिक भूचाल सा आ गया।

तेजस्वी के साथ होटल तक आए सहनी और तेजप्रताप के बगल में बैठे

4.55 बजे: प्रेस कांफ्रेंस के पहले बड़े तामझाम के साथ बदलाव का संकल्प लेते हुए वीआईपी नेता मुकेश सहनी राजद नेता तेजस्वी के ठीक पीछे सबसे बड़े होटल के आलीशान मंच पर चढ़े।
5.07 बजे: हाथ में हाथ मिला फोटो सेशन कराया तो एक तरफ तेजप्रताप तो दूसरी तरफ राजद नेता शिवानंद तिवारी का हाथ मुकेश जोर पकड़ रहे।
5.10 बजे: सांसद मनोज झा ने कार्यक्रम की शुरुआत की और कांग्रेस नेता अविनाश पांडेय को संबोधित करने को कहा तो उन्होंने बड़े अदब से मुकेश सहनी को संबोधित किया और महागठबंधन का मजबूत पार्टनर बताया। अविनाश ने जब कहा कि वैचारिक मतभिन्नता और आंतरिक मतभेद के बावजूद हम सब दलों ने साथ आने का निर्णय किया तो मुकेश मुस्कराते नजर आ रहे थे।
5.17: जब तेजस्वी ने बोलना शुरु किया तो मुकेश सहनी की तरफ देख उन्हें 'बड़ा भाई' संबोधित किया। उन्होंने सभी सहयोगी दलों ने लोगों से अपील की कि हमलोगों को एक मौका दीजिये।
5.26: सीटों का एलान करते हुए तेजस्वी ने कहा कि राजद की 144 सीटों में से वीआईपी और झामुमो को एकॉमॉडेट करने की बात चला रही है। इस पर मुकेश सहनी की भौंहे तनने लगी।
5.31: मुकेश सहनी ने कहा...मैं सन ऑफ मल्लाह अति पिछड़े का बेटा, अभी जो हमारे साथ हो रहा है, कहीं न कहीं पीठ में खंजर घोंपने का काम है।
5.32 बजे: उन्होंने महागठबंधन छोड़ने का एलान कर दिया।

तेजप्रताप को 25 मिनट में ही होटल तक ले आए तेजस्वी

बड़े भाई तेजप्रताप यादव को 25 मिनट में तेजस्वी अपनी गाड़ी मे बिठा फिर से 10 सर्कुलर रोड ले आये। दरअसल दोपहर 3 बजे के आसपास तेजप्रताप के स्ट्रैंड रोड स्थित आवास में एंबुलेंस पहुंचा तो उनके समर्थकों ने ये मैसेज दिया कि तबीयत खराब हो गई है। आनन फानन में सूचना राजद महासचिव के फोन पर 10 सर्कुलर रोड में पहुंचायी गई। सूचना तेजस्वी यादव को दी गई तो वे मां राबड़ी देवी को लेकर तेजप्रताप यादव के आवास पहुंचे।

श्याम रजक समेत छह विधायक बेटिकट हुए

माले के हिस्से में चली गई सीटों के कारण राजद के 4 और कांग्रेस के एक विधायक का टिकट उस क्षेत्र से कट गया है। इसमेंं राजद की आरा, काराकाट, अरवल, औराई और कांग्रेस की भोरे (सु) सीट शामिल है। भोरे (सु) सीट से कांग्रेस विधायक अनिल कुमार बेटिकट हो गये हैं। वहीं राजद के 4 विधायकों में आरा से मो. नवाज आलम, काराकाट से संजय कुमार सिंह, अरवल से रविन्द्र सिंह और औराई से सुरेन्द्र कुमार बेटिकट हो गये है।

वैसे पालीगंज सीट से भी पिछली बार राजद से बच्चा यादव जीते थे पर वे पिछले महीने ही जदयू में शामिल हो गये हैं। श्याम रजक क्या करेगे? उनकी सीटिंग सीट फुलवारीशरीफ माले के हिस्से में जाने के बाद राजद का हर नेता यही सवाल कर रहा है। राजद के रणनीतिकारों पर भरोसा करें तो महागठबंधन की सरकार बनी तो उन्हें राज्यपाल कोटे से विधान परिषद में भेजा जाएगा। और सरकार नही बनी तो उन्हें फिर से एमएलसी बनाने तक संगठन में महत्वपूर्ण पद से नवाजा जाएगा।

हालांकि इस संबंध में श्याम रजक से सीधे सवाल किया गया तो वो कहने लगे। हम मंत्री पद पर लात मार कर विचारधारा के इश्यू पर राजद में आये हैं। बड़ा काम करने के लिये कभी-कभी बड़ा त्याग भी करना पड़ता है। पिछले 20 दिनों से दिल्ली में इलाज करा रहे थे। 3 दिन पहले ही पटना आये हैं।

अभी इस मुद्दे पर राजद नेतृत्व से कोई बात नहीं है। जब राजद में आ गये तो पार्टी का जो निर्णय होगा उस पर चलेंगे। भाकपा माले को महागठबंधन में 19 सीट मिली है। रविवार को राज्य कमेटी की बैठक में प्रत्याशियों के नाम फाइनल कर घोषणा होगी। बैठक में महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य भी रहेंगे।

भाकपा में हरलाखी सीट से राम नरेश होंगे उम्मीदवार

भाकपा के प्रभारी राज्य सचिव राम नरेश पांडेय खुद हरलाखी से प्रत्याशी होंगे। इसके पहले भी यहां से वे विधायक रह चुके हैं। महागठबंधन में भाकपा को 3 जिलों में 6 सीट मिली है। पार्टी सचिव मंडल की रविवार को बैठक में सभी 6 सीटों के प्रत्याशी के नाम की घोषणा होगी। भाकपा को मधुबनी में 2, बेगूसराय में 3 और पूर्णिया में एक सीट मिली है।

बछबाड़ा से पूर्व विधायक अवधेश कुमार फिर प्रत्याशी होंगे। झंझारपुर से राम नारायण यादव, बखरी से सूर्यकांत पासवान और तेघड़ा से राम रतन सिंह प्रत्याशी होंगे। इधर भाकपा के कई राज्य नेताओं ने मात्र 6 सीट मिलने को अपमान बताया। नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि इस बंटवारे से राज्य भर के पार्टी नेता और कार्यकर्ता काफी नाराज हैं। वामदलों में भाकपा सबसे बड़ी पार्टी है।

विभूतिपुर में अजय, मटिहानी से राजेंद्र सिंह माकपा प्रत्याशी

माकपा को 4 सीटें मिली हैं। विभूतिपुर माकपा की पारंपरिक सीट रही है। हालांकि पिछले दो विधानसभा चुनावाें में पार्टी एक भी सीट नहीं जीत सकी थी। विभूतिपुर से अजय कुमार उम्मीदवार होंगे। मटिहानी से राजेंद्र सिंह, मांझी से सत्यदेव यादव और पीपरा से राजमंगल सिंह माकपा प्रत्याशी होंगे। इधर, माकपा के जिला से लेकर राज्यस्तर के नेताओं में काफी कम सीट मिलने से नाराजगी है।

तेजस्वी ने अति पिछड़ा समाज को बेइज्जत किया: संजय सिंह

जदयू ने मुकेश सहनी के मसले को बड़ा मुद्दा बनाते हुए राजद को घेरा। पार्टी के नेताओं ने कहा कि तेजस्वी यादव ने अति पिछड़ा समाज को खुलेआम बेइज्जत किया। प्रदेश जदयू के मुख्य प्रवक्ता संजय सिंह ने कहा कि तेजस्वी यादव ने वस्तुत: अतिपिछड़ों का अपमान किया। लालू-राबड़ी के 15 साल के शासनकाल में अतिपिछड़ों के लिए कुछ नहीं किया गया। और आज पूरी तरह स्पष्ट हो गया कि लालू परिवार अतिपिछड़ों से नफरत करता है।

मुकेश सहनी से पहले तेजस्वी, महादलित जीतनराम मांझी को नकार चुके हैं। वहीं, जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि ठगी से आजिज मुकेश सहनी का विद्रोह, मुख्यमंत्री पद का सपना देखने वाले तेजस्वी यादव के लिए बहुत बड़ा झटका है। महागठबंधन लगातार बिखराव की स्थिति में है और मुकेश सहनी के साथ आज जो हुआ, वह तो तेजस्वी की विद्रूप राजनीति की खुली गवाही है।

मांझी बोले-पिछड़ों का अपमान कर रहे

महागठबंधन के प्रेस कांफ्रेंस पर हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने तंज कसा है। कहा कि मल्लाह जाति को अपमानित करने के लिए तेजस्वी ने प्रेस कांफ्रेंस बुलाई थी। लालू दलितों को अपमानित करते थे और तेजस्वी पिछड़ों को अपमानित कर रहे हैं। गौरतलब है कि मांझी हाल तक महागठबंधन का हिस्सा थे और बाद में उन्होंने यह कहते हुए किनारा कर लिया था कि वहां उनकी बात नहीं सुनी जा रही।



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सहनी ने हाथ में माइक आने का इंतजार किया, जैसे ही कहा धोखा हुआ... हंगामे में घिरे तेजस्वी-तेज


source https://www.bhaskar.com/local/bihar/patna/news/in-just-37-minutes-sahni-tejashwis-yari-reached-a-mess-in-dna-vip-brotherhood-started-from-455-pm-and-ended-at-532-only-127778934.html

सवाल: वीआईपी के महागठबंधन से बाहर होने का कितना असर? चुनावी जमीन पर सहनी की पकड़ की मुकम्मल परीक्षा अभी होनी है बाकी

Posted: 03 Oct 2020 06:22 PM PDT

विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) प्रमुख मुकेश सहनी का सीट बंटवारे के मौके पर महागठबंधन से अलग होना वोटों के गणित को कुछ न कुछ तो प्रभावित करेगा ही। सटीक आकलन इसलिए नहीं किया जा सकता क्योंकि चुनावी जमीन पर सहनी की पकड़ की मुकम्मल परीक्षा अभी होनी बाकी है।

सहनी राज्य के राजनीतिक क्षितिज पर 2014 के लोकसभा चुनाव में उभरे। बाद में पार्टी बनाई। 2019 का लोकसभा चुनाव महागठबंधन के तहत उनकी पार्टी लड़ी। सहनी खुद खगड़िया लोकसभा क्षेत्र से लड़े और हार गए। सिमरी-बख्तियारपुर उप चुनाव को छोड़कर उनकी पार्टी कभी अकेले चुनाव नहीं लड़ी।

इस उपचुनाव में वीआईपी के दिनेश निषाद तीसरे स्थान पर थे जिन्हें 25,225 वोट मिले और तीसरे स्थान पर रहे। लोकसभा चुनाव में मुकेश सहनी खगड़िया संसदीय सीट के हसनपुर, सिमरी-बख्तियारपुर, अलौली, खगड़िया, बेलदौर और परबत्ता में सभी जगह 40 हजार से अधिक वोटों से पिछड़ गए थे। उनकी पार्टी मुजफ्फरपुर और मधुबनी में भी कुछ खास नहीं कर पाई। सिमरी-बख्तियारपुर में मुकेश सहनी को लोकसभा में जितने वोट मिले थे, उसका आधा वोट ही उनके प्रत्याशी को उप चुनाव में मिले।
लोकसभा चुनाव में वीआईपी जिन सीटों पर लड़ी वहां मुकेश सहनी की जाति के ठीक-ठाक वोट हैं। लेकिन उनकी जमात ने मुजफ्फरपुर में वीआईपी से अधिक तवज्जो अजय निषाद को दी। मधुबनी में भी कोई खास करामात उनकी पार्टी नहीं कर सकी।
लोकसभा चुनाव में वीआईपी को 1.65% वोट मिले। यह 18 विधानसभा क्षेत्रों का ही हिसाब है। लेकिन वोट के मामले में अति-पिछड़ी गिनी जाने वाले और कई जातियों-उपजातियों में विभक्त निषाद समुदाय में कई क्षेत्रों में असरदार हैसियत रहता है। खासकर उत्तर बिहार में मुजफ्फरपुर से लेकर भागलपुर तक जहां नदियों का जाल है।
पिछड़ी जातियों का बड़ा समूह ही बनता है निर्णायक
बिहार में पिछड़ी जातियों की आबादी 51.3% है। इसमें 19.3% पिछड़ी जातियों को निकाल दें तो बची हुई अति पिछड़ी जाति की 32% आबादी में धानुक, कहार, कानू, कुम्हार, नाई, ततमा जैसी जातियों की संख्या करीब 16% है और बची 16% में वैसी जातियां है जिनकी संख्या 1% या उससे कम है। ये जातियां ही मिलकर बड़ा वोट समूह रचती हैं, इन्हें ही कभी 'चुनावी जिन्न' कहा जाता है। इनकी ही चाल नतीजों को मोड़ती, तोड़ती और गढ़ती रहती है।



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Question: How much effect does VIP have on being out of the Grand Alliance? Sahani's hold on electoral ground is yet to be completed


source https://www.bhaskar.com/local/bihar/patna/news/question-how-much-effect-does-vip-have-on-being-out-of-the-grand-alliance-sahanis-hold-on-electoral-ground-is-yet-to-be-completed-127778932.html

नामांकन के 9 घंटे बाद भाजपा ने नवल किशोर यादव को बनाया अपना उम्मीदवार

Posted: 03 Oct 2020 06:22 PM PDT

बिहार विधानसभा चुनाव में सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा में प्रदेश भाजपा ऐसी उलझी की है कि उसे उम्मीदवारों की उम्मीदवारी घोषित करने में ही परेशानी हो रही है। आलम यह है कि बिहार विधान परिषद की शिक्षक कोटे की सीट से पार्टी की तरफ से चुनाव लड़ रहे नवल किशोर यादव की उम्मीदवारी का ऐलान भाजपा ने उनके नामांकन के लगभग 9 घंटे बाद किया।

3 अक्टूबर की सुबह करीबी 11:00 बजे नवल किशोर यादव ने फूल माला पहनकर पूरे जोश में भाजपा के प्रत्याशी के तौर पर अपना पर्चा दाखिल किया। जाहिर है नवल किशोर यादव ने पार्टी के सिंबल पर यहां अपना पर्चा दाखिल किया। लेकिन बिहार भाजपा के ट्विटर पर रात करीब 8:30 बजे भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय जयसवाल की तरफ से उन्हें पटना शिक्षक सीट पर उनके भाजपा के प्रत्याशी होने की औपचारिक सूचना दी गई। उनके साथ ही कोसी स्नातक से एनके यादव ,दरभंगा शिक्षक से सुरेश राय, तिरुहूत शिक्षक से नरेंद्र सिंह सारण शिक्षक से चंद्रिका सिंह को भाजपा ने अपना उम्मीदवार बनाया है।

विधानसभा चुनाव के लिए सीटों को तय करने में उलझी है भाजपा

भाजपा में आमतौर पर इस तरह का कन्फ्यूजन दिखाई नहीं देता लेकिन हाल के दिनों में जिस तरह से चीजें सामने आ रही हैं यह कहा जा सकता है कि बिहार विधानसभा चुनाव के लिए सहयोगी पार्टियों के साथ सीटों का अब तक तालमेल नहीं हो पाना और मनपसंद सीटों पर चल रही खींचतान भाजपा पर असर कर रही है।

लिहाजा पार्टी की तरफ से इस तरह की चीजें लगातार सामने आ रही है इससे पहले भी अनौपचारिक रूप से देवेंद्र फडणवीस को बिहार चुनाव का प्रभारी बना चुकी भाजपा ने, उनके काम का शुरू करने के लगभग डेढ़ महीने बाद उनके बिहार का चुनाव प्रभारी बनाए जाने की औपचारिक चिट्ठी जारी की थी।



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नवल किशोर यादव ने पार्टी के सिंबल पर अपना पर्चा दाखिल किया।


source https://www.bhaskar.com/local/bihar/patna/news/9-hours-after-nomination-bjp-made-naval-kishore-yadav-its-candidate-127777290.html

कोविड अस्पतालों और आइसोलेशन सेंटरों में 2499 बेड, 250 कोरोना मरीज ही भर्ती

Posted: 03 Oct 2020 05:22 PM PDT

(अजय कुमार सिंह) कोविड अस्पतालों में कोरोना मरीजों की संख्या लगातार कम हो रही है। वही संक्रमित भर्ती हो रहे हैं, जिन्हें आईसीयू या वेंटिलेटर की जरूरत है। साथ ही कोरोना के अलावा किसी और बीमारी से पीड़ित हैं। चिकित्सकों की मानें तो पॉजिटिविटी रेट भी कमी आई है। जिन अस्पतालों को कोविड डेडिकेटेड बनाया गया है, वहां भी भर्ती मरीजों की संख्या बहुत कम हो गई है।

पटना एम्स और एनएमसीएच को कोविड डेडिकेटेड अस्पताल बनाया गया है। एनएमसीएच में कोरोना मरीजों के लिए 447 बेड की व्यवस्था की गई है। यहां शनिवार को 14 मरीज ही भर्ती थे। कोविड अस्पताल होने की वजह से यहां अन्य सभी चिकित्सकीय सुविधाएं बंद हैं। अस्पताल प्रशासन की मानें तो ओपीडी में यहां प्रतिदिन करीब 2000 मरीज आते थे।

पटना एम्स को भी डेडिकेटेड कोविड अस्पताल बनाया गया है। यहां 600 बेड की व्यवस्था की गई है। यहां अभी 173 मरीज भर्ती हैं। कोरोना संक्रमित मरीज सबसे अधिक यहीं भर्ती हैं। वहीं पीएमसीएच कोविड अस्पताल में 100 बेड की सुविधा है और यहां भर्ती मरीजों की संख्या 32 है। आइसोलेशन सेंटरों में भी कमोबेश यही स्थिति है। डीआईओ डॉ. एसपी विनायक भी कहते हैं कि आइसोलेशन सेंटर में भर्ती मरीजों की संख्या काफी कम हो गई है।



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आइसोलेशन सेंटरों में भर्ती मरीज और बेडों की संख्या।


source https://www.bhaskar.com/local/bihar/patna/news/2499-beds-250-corona-patients-admitted-in-kovid-hospitals-and-isolation-centers-127778793.html

पटना में 78 एमएम बारिश, दक्षिणी बिहार के जिलाें और गंगा से सटे जिलाें में कल तक कहीं हल्की ताे कहीं हाेगी अच्छी बरसात

Posted: 03 Oct 2020 05:22 PM PDT

बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव और इसके ओडिशा से हाेते उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ने से बिहार के माैसम के मिजाज में बदलाव हुआ है। इसी बदलाव की वजह से शनिवार काे पटना समेत बिहार के कई जिलाें में बारिश हुई। बदले माैसम का यह असर 5 अक्टूबर तक रहेगा। दक्षिणी बिहार के जिलाें और गंगा से सटे जिलाें में इसका खासा असर रहेगा।

पटना मानसून विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक एसके पटेल ने कहा कि 5 जून तक ठनका गिरने, बादल गरजने और कहीं हल्की ताे कहीं अच्छी बारिश हाेने की संभावना है। हालांकि माैसम विभाग ने 5 अक्टूबर तक के लिए काेई चेतवानी जारी नहीं की है। पटना में शनिवार काे किसी माेहल्ले में तेज ताे कहीं हल्की बारिश हुई। मानसून के लाैटने के पहले ऐसा हाेता है।

दरअसल इस सीजन में कनेक्टिव क्लाउड जहां जमा हाे जाते हैं वहीं बरस जाते हैं। इसी वजह से पटना एयरपाेर्ट, बेली राेड और आसपास के माेहल्लाें में तेज बारिश हुई। माैसम विज्ञान कार्यालय के अनुसार, पटना में शनिवार काे 78 एममए बारिश हुई।



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78 mm rain in Patna, districts of southern Bihar and districts adjoining Ganges will get light rain till tomorrow


source https://www.bhaskar.com/local/bihar/patna/news/78-mm-rain-in-patna-districts-of-southern-bihar-and-districts-adjoining-ganges-will-get-light-rain-till-tomorrow-127778792.html

बिहार में एटीएम फ्रॉड के मामले 95 फीसदी बढ़े, देश के 19 महानगरों में पटना इन फ्रॉड में सबसे आगे

Posted: 03 Oct 2020 05:22 PM PDT

(शशि सागर) दिल्ली, जयपुर, हैदराबाद, इंदौर जैसे 19 महानगरों की सूची में एटीएम फ्रॉड के मामले में पटना पहले नंबर पर है। इन महानगरों में साल 2019 में हुए एटीएम फ्रॉड की घटनाओं को देखें तो सबसे अधिक घटना पटना में हुई। पटना में साल 2019 में पटना में एटीएम फ्रॉड की कुल 202 घटनाएं हुईं, जिनमें 202 लोग प्रभावित हुए।

वहीं दिल्ली में एटीएम फ्रॉड की 138, जयपुर में 75 और मुंबई में 28 घटनाएं हुईं। हालांकि, ठगी की घटना जयपुर में सबसे अधिक दर्ज की गई। साल 2019 में जयपुर में ठगी के 2190 मामले दर्ज हुए। वहीं दिल्ली में 1048, मुंबई में 535 और पुणे में 226 मामले दर्ज हुए। पटना में ठगी के 202 मामले आए। इन मामलों में पटना 7वें स्थान पर है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो ने साल 2019 का आंकड़ा जारी किया है, जिसमें यह जानकारी दर्ज है।
राजधानी के साथ-साथ पूरे बिहार में एटीएम फ्रॉड की घटनाएं बढ़ी हैं। साल 2019 के आंकड़ों की तुलना अगर 2018 के आंकड़ों से करें तो पता चलता है कि बिहार में एटीएम फ्रॉड की घटनाओं में 95.25 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। बिहार में साल 2018 में एटीएम फ्रॉड की 338 घटनाएं हुई थीं। वहीं 2019 में यह बढ़कर 660 हो गई। 2018 में बैंक फ्रॉड की 23 घटनाएं हुईं, लेकिन 2019 में यह बढ़कर 62 हाे गई। राज्य में 2018 में ठगी के 715 मामले दर्ज किए गए, जबकि 2019 में 1243 मामले दर्ज हुए।
राजधानी में चोरी की घटनाओं में 14 प्रतिशत का इजाफा: पटना में चोरी की घटनाओं में भी इजाफा हुआ है। साल 2018 के आंकड़ों की तुलना हाल में जारी हुए 2019 के आंकड़ों से करने पर पता चलता है कि पटना में चोरी की घटनाओं में 14.51 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। साल 2019 में पटना में चोरी की 5088 घटनाएं हुईं।

वहीं 2018 में 4443 घटनाएं दर्ज की गई थीं। पटना में वाहन चोरी की घटनाओं में भी 11 फीसदी का इजाफा हुआ है। साल 2019 में 3703 वाहन चोरी हुए थे, जबकि 2018 में 3336 वाहन चोरी की घटनाएं दर्ज की गई थीं। इधर, साल 2019 में बिहार में चोरी 34971 घटनाएं हुई हैं। वहीं पूरे राज्य से 22012 वाहन चोरी हुए।

सुबह में चेक क्लीयरेंस, शाम में निकल गए 6.35 लाख

साइबर क्राइम का एक अनोखा मामला सामने आया है। दिन के 10 बजे खाते में रुपया क्रेडिट हुआ और शाम होते-होते निकल गया। मामला एक कंस्ट्रक्शन कंपनी के डायरेक्टर विशाल सिंह से जुड़ा है। विशाल ने बताया का उनका बैंक अकाउंट नॉट्रेडम के पास सेंट्रल बैंक में है। तीन दिन पहले उन्होंने उसमें 6.35 लाख का चेक डाला था। दिन में लगभग 11 बजे चेक के कैश होने का मैसेज आया। लेकिन शाम के वक्त 6.35 लाख रुपए की निकासी का मैसेज भी आ गया। जानकारी होते ही मैंने बैंक मैनेजर से संपर्क किया। मुझे सोमवार को बुलाया गया है।

रिटायर्ड शिक्षक के खाते से 72 हजार की निकासी

बेउर के रहने वाले रिटायर्ड शिक्षक रामनरेश पांडेय के खाते से साइबर अपराधियों ने 72 हजार रुपए की निकासी कर ली। वह फिलहाल बनारस में हैं। उन्होंने बताया कि किसी से अपने एटीएम और खाते की जानकारी साझा नहीं की है। किसी को पिन भी नहीं बताया या किसी ने कोई अन्य जानकारी भी नहीं मांगी है। शनिवार की सुबह उठा तो देखा कि मोबाइल पर पैसे की निकासी का मैसेज आया हुआ है। उन्होंने कहा कि शातिरों ने तीन बार में 72 हजार रुपए निकाल लिए।

अनपढ़ महिला के खाते से 60 हजार रुपए निकाले

पोठही स्थित एक साइबर केंद्र के संचालक द्वारा एक महिला के खाते से 60 हजार रुपए निकालने का मामला सामने आया है। केवड़ा निवासी सोना देवी ने केंद्र के संचालक मुन्ना कुमार के खिलाफ पुनपुन थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है। महिला का पुनपुन बाजार स्थित पीएनबी में खाता है।

वह बीते महीनों में साइबर केंद्र में रकम निकासी के लिए गई थी। दो महीने बाद जब वह बैंक गई तो पदाधिकारियों ने बताया कि जुलाई और अगस्त में उसके खाते से अंगूठे के निशान के जरिए 6 बार में 60 हजार रुपए की निकासी की गई है।

बैंकिंग फ्रॉड से बचने के कुछ उपाय

  • नेटबैंकिंग पासवर्ड याद रखें। न तो किसी को बताएं न ही लिखकर रखें।
  • मोबाइल नंबर बदलने पर बैंक को जानकारी तुरंत दें। मोबाइल बैंकिंग द्वारा ट्रांजेक्शन पर नजर रखें।
  • फर्जी ईमेल से सावधान रहें। इसके लिंक पर क्लिक करने पर खाते से रकम उड़ाई जा सकती है।
  • बैंक कभी ई-मेल या फोन से सीवीवी या ओटीपी नहीं मांगता। अगर ऐसी जानकारी कोई मांग रहा है तो अलर्ट हो जाएं। उसे गोपनीय जानकारी नहीं बताएं।
  • अगर कोई अवैध ट्रांजेक्शन होता है, तो तत्काल बैंक को सूचना दें।
  • शॉपिंग करते वक्त अपना कार्ड नंबर और एक्सपायरी उस साइट पर सेव नहीं करें। चेकबुक को हमेशा सुरक्षित जगह रखना चाहिए।

अवैध निकासी हो तो ऐसा करें
एटीएम कार्ड या ऑनलाइन बैंकिंग में फ्रॉड के मामले में तीन दिन के भीतर बैंक को शिकायत कर दी तो आपका पैसा वापस मिल जाएगा। एटीएम कार्ड से किसी फ्रॉड या गलत लेन-देन पर आपको 3 से 7 दिन का नियम जरूर याद रखना चाहिए। आरबीआई के सर्कुलर में कहा गया है कि बैंक अकाउंट से कोई फ्रॉड होता है और वह समय पर बैंक को इसकी सूचना देता है तो उसका नुकसान नहीं होगा।



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ATM fraud cases in 95 percent increase in Bihar, Patna in fraud among 19 metros of the country


source https://www.bhaskar.com/local/bihar/patna/news/atm-fraud-cases-in-95-percent-increase-in-bihar-patna-in-fraud-among-19-metros-of-the-country-127778791.html

बिहार में 81 दिन बाद मिले 1000 से कम नए पॉजिटिव, सरकारी रिकॉर्ड में 3 अक्टूबर को 983 नए संक्रमित दर्ज, कुल 1.86 लाख मे से 1.73 लाख स्वस्थ

Posted: 03 Oct 2020 05:22 PM PDT

बिहार के लिए राहत की बात है। एक तरह जहां रिकवरी दर 93.09% हो गई, वहीं रोज मिलने वाले संक्रमितों की संख्या भी 1000 से कम हो गई है। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, शनिवार को राज्य में 81 दिन बाद एक हजार से कम 983 पॉजिटिव मिले। इससे पहले 11 जुलाई को एक हजार से कम 709 संक्रमित मिले थे। हालांकि दूसरे दिनों की तुलना में कम सैंपल की जांच हुई।

15 अगस्त के बाद प्रतिदिन औसतन एक लाख से अधिक जांच होती रही है। जबकि, शनिवार को महज 86996 जांच हुई। राज्य में अब संक्रमितों की संख्या 186690 हो गई। शनिवार को राजद के बाेधगया से विधायक कुमार सरबजीत काेराेना संक्रमित हाे गए हैं।

पटना जिले में 236 कोरोना मरीज मिले

पटना जिले में शनिवार को 236 कोरोना मरीज मिले हैं। जिले में संक्रमितों की संख्या बढ़कर 28255 हो गई है। इनमें 25985 ठीक हो चुके हैं। अभी 2165 एक्टिव केस हैं। पीएमसीएच में 604 सैंपल की जांच में 10 की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इनमें तीन यहां भर्ती मरीज हैं। स्वस्थ होने पर चार मरीजों को छुट्टी दी गई।

वहीं तीन मरीजों किशनगंज के रामचरण यादव, मुजफ्फरपुर के लक्ष्मण पांडेय और छपरा के मुख्तार की मौत हो गई। आईजीआईएमएस में 2619 सैंपल की जांच में 74 की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इनमें दो यहां भर्ती मरीज हैं। एम्स में शनिवार काे 17 नए काेराेना संक्रमिताें काे एडमिट किया गया। इनमें 8 पटना के हैं।

इनमें गर्दनीबाग के दाे, राजीवनगर, बुद्धाकाॅलाेनी, शास्त्रीनगर, बुद्धमार्ग, सिपारा व रामकृष्णानगर के एक-एक मरीज हैं। वहीं 8 मरीजाें काे छुट्टी दी गई, जबकि तीन गाेपालगंज के ध्रुव प्रसाद यादव, नालंदा के लक्ष्मण कुमार और मसाैढ़ी के शंभूनाथ प्रसाद की मौत हो गई। एनएमसीएच में जहानाबाद के काेराेना मरीज राम एकबाल शर्मा की माैत हो गई। दो मरीजाें को छुट्टी दी गई। एनएमसीएच के नोडल चिकित्सा पदाधिकारी र दो जूनियर डाॅक्टर भी कोरोना संक्रमित हाे गए हैं।



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In Bihar, less than 1000 new positives were found after 81 days, government records recorded 983 new infections on October 3, 1.73 lakhs out of a total of 1.86 lakhs


source https://www.bhaskar.com/local/bihar/patna/news/in-bihar-less-than-1000-new-positives-were-found-after-81-days-government-records-recorded-983-new-infections-on-october-3-173-lakhs-out-of-a-total-of-186-lakhs-127778743.html

विधान परिषद चुनाव के लिए भाजपा के पांच उम्मीदवार घोषित, 7 मई को आठ विधानपार्षदों के रिटायर होने के बाद से रिक्त हैं ये पद

Posted: 03 Oct 2020 05:22 PM PDT

भाजपा ने विधानपरिषद चुनाव के लिए शिक्षक व स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के पांचों उम्मीदवार घोषित कर दिए। केन्द्रीय चुनाव समिति ने शनिवार को इनके नाम पर मुहर लगा दी।

राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. संजय मयूख ने बताया कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से डॉ. एन.के. यादव, पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से डॉ. नवल किशोर यादव, दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से सुरेश राय, तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से नरेन्द्र सिंह और सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से चन्द्रमा सिंह उम्मीदवार होंगे।

7 मई को आठ विधानपार्षदों के रिटायर होने के बाद से ये पद रिक्त हैं। कोरोना संकट के कारण समय पर चुनाव नहीं हो सके थे।



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Five BJP candidates declared for Legislative Council elections, these posts are vacant after the retirement of eight MLAs on 7 May


source https://www.bhaskar.com/local/bihar/patna/news/five-bjp-candidates-declared-for-legislative-council-elections-these-posts-are-vacant-after-the-retirement-of-eight-mlas-on-7-may-127778742.html

रामविलास पासवान की तबियत बिगड़ी तो अस्पताल भागे बेटे चिराग, संसदीय बोर्ड की निर्णायक फैसले वाली मीटिंग फिलहाल टली

Posted: 03 Oct 2020 05:22 PM PDT

लोजपा संसदीय बोर्ड की दिल्ली में होने वाली महत्वपूर्ण बैठक फिलहाल टल गई है। इसकी वजह केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की तबियत का बिगड़ना बताया जा रहा है। उनके बेटे व पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान पिता को देखने अस्पताल के लिए रवाना हुए हैं। लोजपा संसदीय बोर्ड की इस बैठक में यह फैसला होना था कि पार्टी एनडीए में रहे या अपनी राह अलग कर ले। माना जा रहा था कि लोजपा की राहें एनडीए से जुदा होने का औपचारिक ऐलान इस मीटिंग के बाद कर दिया जाना था।

रामविलास पासवान बीते माह से ही दिल्ली के एस्कॉर्ट्स अस्पताल में भर्ती हैं। उन्हें सांस लेने में हुई तकलीफ के बाद अस्पताल लाया गया था जहां आईसीयू में भर्ती कराया गया। पासवान की बीमारी को लेकर बेटे चिराग ने पार्टी कार्यकर्ताओं को एक बेहद भावपूर्ण चिट्ठी भी लिखी थी। इसमें उन्होंने कहा था कि आज जब उन्हें मेरी जरूरत है तो मुझे उनके साथ रहना चाहिए नहीं तो मैं अपने आपको माफ नहीं कर पाऊंगा।

चिराग पासवान ने 20 सितंबर को पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए लिखी इस चिट्ठी में कहा कि कोरोना काल में लोगों को राशन मिलने में दिक्कत न आए इस वजह से पापा (राम विलास पासवान) अपने रूटीन हेल्थ चेकअप को टालते रहे, जिसके चलते वह थोड़ा अस्वस्थ हो गए। पिछले तीन हफ्तों से दिल्ली में उनका इलाज चल रहा है। मैं अस्पताल में पापा को रोज बीमारी से लड़ते हुए देख रहा हूं। पापा ने मुझे कई बार पटना जाने का सुझाव भी दिया। लेकिन बेटा होने के नाते उन्हें छोड़कर जाना मेरे लिए संभव नहीं है। आज जब उन्हें मेरी जरूरत है तो मुझे उनके साथ रहना चाहिए, नहीं तो मैं अपने आप को कभी माफ नहीं कर पाऊंगा।



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लोजपा संसदीय बोर्ड की इस बैठक में यह फैसला होना था कि पार्टी एनडीए में रहे या अपनी राह अलग कर ले।


source https://www.bhaskar.com/local/bihar/news/ram-vilas-paswans-health-deteriorated-son-chirag-ran-to-hospital-adjournment-meeting-of-parliamentary-board-postponed-127776666.html

हथियारों के शौकीन हैं 63 विधायक, 45 पर केस भी सिटिंग-गेटिंग का फाॅर्मूला चला तो फिर होंगे मैदान में

Posted: 03 Oct 2020 05:22 PM PDT

(गिरिजेश कुमार) हथियार आम तौर पर आत्मरक्षार्थ इस्तेमाल किए जाते हैं। लेकिन बात अगर नेताओं की हो तो यहां हथियार रखना शौक है। दबंगई की मुहर है। पब्लिक को भी पसंद है, तभी तो 25% से अधिक वैसे लोग विधायक बने जिनके पास असलहे थे। यह परिदृश्य किसी एक दल में नहीं, सभी में है।

सिंबल आवंटन में सिटिंग-गेटिंग का फार्मूला चला तो हथियारों के शौकीन 63 विधायक फिर मैदान में होंगे। नेताओं के हथियार रखने की वजह चाहे जो हो, लेकिन उनमें राइफल, पिस्टल और रिवॉल्वर के प्रति गजब का आकर्षण है। 4 विधायकों की पत्नी भी राइफल और रिवॉल्वर की शौकीन हैं।

वहीं, गोविंदपुर विधायक पूर्णिमा यादव के पति भी हथियार रखते हैं। दूसरी ओर, जिन 63 लोगों ने हथियार रखा है, उनमें 45 पर आपराधिक मामले भी हैं। सिर्फ 18 ऐसे हैं जिन पर कोई केस नहीं है। सबसे अधिक 28 मामले डुमरांव से जदयू विधायक ददन यादव पर है।

15 मामले मटिहानी से जदयू विधायक नरेंद्र कुमार सिंह उर्फ बोगो सिंह पर है। तीसरे नंबर पर 9 मामलाें के साथ बिहारशरीफ से भाजपा विधायक डॉ. सुनील सिंह है। बिहपुर से विधायक राजद की वर्षा रानी के पास भी पिस्टल है।

इन विधायकों के जीवनसाथी के पास भी हथियार

  • अशोक कुमार सिंह, रफीगंज, जदयू - राइफल, गन, रिवॉल्वर
  • ददन यादव, डुमरांव, जदयू - राइफल, रिवॉल्वर
  • केदारनाथ सिंह, बनियापुर, राजद - राइफल
  • प्रह्लाद यादव, सूर्यगढ़ा, राजद - राइफल बोर
  • पूर्णिमा यादव, गोविंदपुर, कांग्रेस - रिवॉल्वर, राइफल गन।


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63 MLAs are fond of weapons, if the case of sitting-gating also goes on 45, then they will be in the field


source https://www.bhaskar.com/local/bihar/patna/news/63-mlas-are-fond-of-weapons-if-the-case-of-sitting-gating-also-goes-on-45-then-they-will-be-in-the-field-127778661.html

महागठबंधन का मजबूर जोड़- लालू के बेटे तेजस्वी गठबंधन के सीएम उम्मीदवार होंगे, सभी दलों की सहमति

Posted: 03 Oct 2020 05:22 PM PDT

राजद नेता तेजस्वी यादव महागठबंधन के सीएम उम्मीदवार होंगे। कांग्रेस छानबीन कमेटी के चेयरमैन अविनाश पांडेय ने कांग्रेस की 70 सीट लेते हुए यह ऐलान किया कि राजद बड़ा भाई है इसलिये गठबंधन का नेतृत्व तेजस्वी करेंगे। बिहार में महागठबंधन युवा नेतृत्व और युवा चेहरा के साथ चुनाव में उतरेगा।

इसके बाद 'संकल्प बदलाव का' स्लोगन के साथ महागठबंधन की सीटों के एलान के लिये शनिवार को प्रेस कांफ्रेंस में तेजस्वी ने कहा कौन चेहरा होगा, यह पूछने वालों को जवाब मिल चुका है। राजद 144, कांग्रेस 70, माले 19, सीपीआई 6 और सीपीएम 4 सीटों पर लड़ेंगी।

राजद की 144 सीटों में से वीआईपी और झामुमो को एकॉमॉडेट करने की बात चल रही है। इसके बाद महागठबंधन का नेता बनाने के लिए तेजस्वी ने सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी, सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी और सीपीआई महासचिव डी. राजा का धन्यवाद किया। इससे पहले महागठबंधन ने एक मिनट का मौन रखकर हाथरस की बेटी को श्रद्धांजलि दी।

हम जल्द ही कॉमन मिनिमम प्रोग्राम जनता के बीच लाएंगे : तेजस्वी

तेजस्वी ने कहा िक वाल्मीकिनगर लोकसभा उपचुनाव कांग्रेस लड़ेगी। शीघ्र ही हम कॉमन मिनिमम प्रोग्राम जनता में रखेंगे। सरकार बनने के बाद 10 लाख स्थायी सरकारी नौकरी देने का वादा किया है। हम नौकरी के लिए आवेदन शुल्क भी माफ करेंगे। जनता एक मौका दे। हम ठेठ बिहारी हैं और हमारा डीएनए भी शुद्ध है। हर वादा पूरा करेंगे। सभी जाति धर्म के लोगों को लेकर चलेंगे। जमे पानी में जैसे काई जम जाता है वही हाल इस 15 साल की सरकार का है। महागठबंधन बहती धारा की तरह शुद्ध जल देगा। वो कहते होंगे कि पूरा बिहार परिवार है।
दूसरी ओर, कांग्रेस छानबीन कमेटी के चेयरमैन अविनाश पांडेय ने कहा विपक्ष को रोकने के लिए वैचारिक मतभिन्नता और आंतरिक मतभेद के बावजूद हमने साथ आए हैं। बिहार में युवाओं की 23 वर्ष औसत आयु है। वर्ष 2015 की सरकार में तेजस्वी ने डिप्टी सीएम के रूप में अच्छा काम किया था। फिर जनमत का अपहरण कर लिया गया। इस मौके पर राजद से तेजप्रताप यादव, मनोज झा, शिवानंद तिवारी, आलोक मेहता, भोला यादव, कांग्रेस से सदानंद सिंह, माले से रामेश्वर प्रसाद और प्रवेश कुमार, सीपीआई से रामनरेश पांडेय और रामबाबू, सीपीएम से अवधेश कुमार और अरुण मिश्रा, वीआईपी से मुकेश सहनी मौजूद थे।



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शनिवार को मंच पर महागठबंधन के सभी दल के नेताओं ने पहले हाथ उठाकर एकता दिखाई। चंद मिनट बाद ही सीटों का ऐलान होते ही वीआईपी के मुकेश सहनी ने धोखा देने और पीठ में छुरा घोंपने का आरोप लगाया। अचानक इस घटनाक्रम से हर कोई अवाक रह गया।


source https://www.bhaskar.com/local/bihar/patna/news/grand-alliance-forced-lalus-son-tejashwi-will-be-cm-candidate-of-alliance-consent-of-all-parties-127778660.html

जदयू व भाजपा में सीटों पर सहमति, ऐलान आज सं‌भव; एनडीए में करीब 4.30 घंटे तक हुआ सीट टू सीट डिस्कशन

Posted: 03 Oct 2020 05:22 PM PDT

एनडीए में सीट शेयरिंग का हिसाब लगभग तय हो गया। सीटें जदयू और भाजपा में बंटेंगी। संभव है कि जदयू 124 और भाजपा 119 सीटों पर चुनाव लड़ें। आखिरी वक्त में एकाध सीट घट-बढ़ भी सकती है। दोनों की तरफ से रविवार को सीटों का ऐलान किया जा सकता है। जदयू अपने कोटे से 'हम' को सीटें देगी, तो लोजपा का जिम्मा भाजपा का है। यानी, वह 119 सीटों में से लोजपा को सीटें देगी।

दोनों पार्टियों के बीच सीटों को लेकर साढ़े चार घंटे बात हुई। सीट टू सीट डिस्कशन हुआ। कई-कई फार्मूले आए। पिछले लोकसभा चुनाव में सीटों के हिसाब तक का हवाला आया। दावा-प्रतिदावा, कबूलने-नकारने का खासा दौर चला। अंतत: दोनों पार्टियां, सबकुछ ठीक-ठाक कर लेने यानी पूर्ण तालमेल को लेकर आश्वस्त हुईं। कुछ मसले थे मगर आखिरकार इसे सलटा लेने की बात कही गई। भाव यही रहा कि उम्मीदवारी जीत के लिए हो।
इधर कुछ यूं बदला घटनाक्रम...

हम: जदयू के कोटे से मिली सीटों पर चुनाव की तैयारी

वीआईपी: महागठबंधन से रूठे, एनडीए से संपर्क साधा

लोजपा: भाजपा के जिम्मे, उसी के कोटे से सीटें भी मिलेंगी



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Announcement on seats in JDU and BJP, announcement today possible Seat to seat discussion held in NDA for about 4.30 hours


source https://www.bhaskar.com/local/bihar/patna/news/announcement-on-seats-in-jdu-and-bjp-announcement-today-possible-seat-to-seat-discussion-held-in-nda-for-about-430-hours-127778659.html

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