प्राइमरी का मास्टर ● इन |
- ऑनलाइन क्लास के दौर में अभिभावकों से एनुअल चार्ज वसूल रहे निजी स्कूल संचालक
- शिक्षक सीखेंगे डिजिटल तकनीक, सीबीएसई आईबीएम के सहयोग से करेगा प्रशिक्षित
- उच्च शिक्षा के ज्यादातर कोर्स होंगे ऑनलाइन, यूजीसी ने योजना पर शुरू किया काम, मानक तय
- छह माह बाद 69000 भर्ती शिक्षकों को वेतन भुगतान की जगी उम्मीद
- खाली नहीं रहेगी बच्चों के MDM की थाली
| ऑनलाइन क्लास के दौर में अभिभावकों से एनुअल चार्ज वसूल रहे निजी स्कूल संचालक Posted: 24 Apr 2021 08:55 PM PDT ऑनलाइन क्लास के दौर में अभिभावकों से एनुअल चार्ज वसूल रहे निजी स्कूल संचालक अभिभावकों ने कहा, स्कूल ट्यूशन फीस की जगह एनुअल चार्ज जोड़कर वसूल रहे कंपोजिट फीस प्रयागराज : कोरोना संकट के बीच खुले स्कूलों की मनमानी जारी है। स्कूल वाले ऑफलाइन क्लास के - दौर में भी अभिभावकों से एनुअल - चार्ज वसूल रहे हैं। इसमें कंप्यूटर क्लास स्मार्ट क्लास, लाइब्रेरी, स्पोट्र्स, लैब सहित डेवलपमेंट चार्ज सहित कई दूसरे चार्ज को जोड़कर वसूला जा रहा है। शहर के अधिकतर स्कूलों ने फीस का ब्रेकअप खत्म करके सीधे वार्षिक एवं तिमाही फीस तय कर दी है। स्कूल वालों की इस मनमानी के खिलाफ अभिभावकों में जिला विद्यालय निरीक्षक तक अपनी बात | पहुंचाई है लेकिन उनके यहां से भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। निजी स्कूलों की ओर से मनमाना फीस वसूली के खिलाफ जब अभिभावकों ने आवाज उठाई तो स्कूलों ने ट्यूशन फीस सहित पूरी फीस को एक में मिलाकर कंपोजिट फीस के नाम वसूलना शुरू कर दिया। बीते शैक्षिक सत्र में अभिभावकों की ओर से जब ऑनलाइन क्लास के दौर में ट्यूशन फीस के अतिरिक्त दूसरे शुल्क वसूलने का विरोध शुरू हुआ तो इससे बचाव के लिए अधिकतर स्कूलों ने एनुअल चार्ज को 'कंपोजिट फीस में शामिल कर दिया मनमाने तरीके से फीस बढ़ाने के साथ ही अभिभावकों पर एनुअल चार्ज भी थोप दिए गए हैं। एनुअल चार्ज को कंपोजिट फीस में शामिल करते हुए एक महीने की बजाय तीन महीने की फीस वसूली जा रही है। इस बारे में जब जिला विद्यालय निरीक्षक से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि अब दो दिन के कोरोना कर्फ्यू के बाद तीन महीने की जगह एक महीने की फीस वसूले जाने के बारे में आदेश जारी किया जाएगा। अभिभावकों ने उठाई आवाज, कोरोना संक्रमण काल में बंद हों ऑनलाइन कक्षाएं प्रयागराज पूरे देश में कोरोना संक्रमण की मार के बीच स्कूलों की ओर से ऑनलाइन क्लास शुरू कर दिए गए हैं। अभिभावकों को ऑनलाइन क्लास से बच्चों को जोड़ने के साथ तीन महीने की फीस जमा करने का दबाव बनाया जा रहा है। अभिभावकों ने जिलाधिकारी से ऑनलाइन क्लास पर रोक लगाने के साथ ही फीस की वसूली पर रोक लगाने की मांग की है। |
| शिक्षक सीखेंगे डिजिटल तकनीक, सीबीएसई आईबीएम के सहयोग से करेगा प्रशिक्षित Posted: 24 Apr 2021 06:49 PM PDT Teachers CBSE IBM digital शिक्षक सीखेंगे डिजिटल तकनीक, सीबीएसई आईबीएम के सहयोग से करेगा प्रशिक्षित देशभर से 200 कंप्यूटर साइंस शिक्षक, आईटी शिक्षक व एआई पढ़ाने वाले किए जाएंगे प्रशिक्षित केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने डिजिटल तकनीक के महत्व को समझते हुए शिक्षकों को ट्रेंड करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। सीबीएसई आईबीएम के सहयोग से देशभर के 200 कंप्यूटर साइंस, आईटी व एआई(आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस) पढ़ाने वाले शिक्षकों को प्रशिक्षित करने जा रहा है। द ग्लोबल टीचर्स अकादमी फॉर डिजिटल टेक्नॉलाजी सीबीएसई की एक पहल है। इसका उदेश्य एआई शिक्षकों व मेंटर का एक ऐसा समूह बनाना है जो कि स्कूलों में एआई शिक्षा को बढ़ा सकते हैं। बोर्ड का मानना है कि यह शिक्षक स्कूली छात्रों के बीच 21वीं सदी की तकनीकों का प्रसार करेंगे। इसके लिए शिक्षकों को 26 अप्रैल से 25 मई तक ऑनलाइन प्रशिक्षित किया जाएगा। यह ट्रेंड शिक्षक सीबीएसई व आईबीएम के सहयोग से अगले छ: माह में दस हजार शिक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे। यह शिक्षक छात्रों को उनकेएआई प्रोजेक्ट्स में भी मदद करेंगे। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में लाइव सेशन, हैंड्स ऑन सेशन आयोजित किए जाएंगे। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में शिक्षकों को वैश्विक स्तर की काफी तकनीकों को सीखने व समझने का मौका मिलेगा। जिनका इस्तेमाल वह शिक्षण में भी कर सकेंगे। कार्यक्रम को पूरा करने वाले शिक्षकों को आईबीएम प्रोफेशनल बैज प्रदान किया जाएगा। इस प्रोग्राम में हिस्सा लेने के लिए बोर्ड ने किसी प्रकार की फीस नहीं रखी है। आप यह खबर प्राइमरी का मास्टर डॉट इन पर पढ़ रहे हैं। हिस्सा लेने के लिए बोर्ड ने एक लिंक उपलब्ध कराया है, जिसके माध्यम से शिक्षक 25 अप्रैल से पहले पंजीकृत हो सकते हैं। |
| उच्च शिक्षा के ज्यादातर कोर्स होंगे ऑनलाइन, यूजीसी ने योजना पर शुरू किया काम, मानक तय Posted: 24 Apr 2021 06:46 PM PDT उच्च शिक्षा के ज्यादातर कोर्स होंगे ऑनलाइन, यूजीसी ने योजना पर शुरू किया काम, मानक तय कोरोना संकट को देख उच्च शिक्षण संस्थान अपने कोर्सों को आनलाइन या फिर दूरस्थ शिक्षा के माध्यमों से संचालित करेंगे। कोरोना संकट को लंबा खिंचता देख उच्च शिक्षण संस्थान अपने ज्यादा से ज्यादा कोर्सों को आनलाइन या फिर दूरस्थ शिक्षा के माध्यमों से संचालित करेंगे। यूजीसी ने फिलहाल इस योजना पर तेजी से काम शुरू कर दिया है। नई दिल्ली । कोरोना संकट को लंबा खिंचता देख उच्च शिक्षण संस्थानों ने भी नई रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। इसके तहत अब वह अपने ज्यादा से ज्यादा कोर्सों को आनलाइन या फिर दूरस्थ शिक्षा के माध्यमों से संचालित करेगे। हालांकि यह सुविधा सिर्फ उन्हीं उच्च शिक्षण संस्थानों को हासिल होगी, जो गुणवत्ता के एक तय मानक को पूरा करेंगे। माना जा रहा है कि इस सुविधा को विस्तार मिलने से दाखिले से वंचित रहने के बाद भी छात्र अपनी पसंद के विषयों और पाठ्यक्रमों में पढ़ाई कर सकेंगे। योजना पर तेजी से काम विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआइसीटीई) ने फिलहाल इस योजना पर तेजी से काम शुरू कर दिया है। इस बीच एआइसीटीई ने बड़ी संख्या में अपने कोर्सों को ऑनलाइन और दूरस्थ शिक्षा के जरिए पढ़ाने की भी मंजूरी दी है। इनमें आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआइ), कंप्यूटर एप्लीकेशन, डाटा साइंस, लॉजिस्टिक्स, ट्रेवल एंड टूरिज्म के साथ प्रबंधन और उससे जुड़े कोर्स शामिल हैं। एआइसीटीई ने छूट दी खास बात है कि अब तक तकनीकी कोर्सों को ऑनलाइन या दूरस्थ माध्यमों से पढ़ाने की अनुमति कुछ ही संस्थानों को मिली थी लेकिन इस पहल के बाद एआइसीटीई ने गुणवत्ता के तय मानकों को हासिल करने वाले सभी संस्थानों को ऐसे कोर्सों को ऑनलाइन या दूरस्थ माध्यमों से संचालित करने की छूट दे दी है। इसके लिए अब उन्हें अनुमति भी लेनी होगी। यूजीसी ने भी तेज की पहल वहीं यूजीसी ने भी इसे लेकर अपनी पहल तेज की है। साथ ही सभी विश्वविद्यालयों और कालेजों से गुणवत्ता के मानकों के आधार पर ऑनलाइन और दूरस्थ माध्यमों से कोर्सों को शुरू करने की अनुमति दी है। इस बीच संस्थानों के लिए गुणवत्ता के जो मानक तय किए गए है, वह राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) और एनबीए (नेशनल बोर्ड आफ एक्रेडेशन) की रैकिंग पर आधारित है। कोरोना संकट के बीच पहल उच्च शिक्षण संस्थानों के ज्यादा से ज्यादा कोर्सों को ऑनलाइन करने की यह पहल उस समय शुरू हुई है, जब कोरोना के चलते संस्थानों में दाखिले से लेकर पढ़ाई, परीक्षा आदि का पूरा तंत्र लड़खड़ाया हुआ है। आप यह खबर प्राइमरी का मास्टर डॉट इन पर पढ़ रहे हैं। ऐसे में कोई भी छात्र अपनी मनचाही पढ़ाई से वंचित न रहे, इसके तहत उसे ऑनलाइन या दूरस्थ शिक्षा जैसे विकल्प भी मुहैया कराए जा रहे हैं। कोरोना संकट को देखते हुए वैसे भी सरकार का पूरा जोर ऑनलाइन पढ़ाई को लेकर है। |
| छह माह बाद 69000 भर्ती शिक्षकों को वेतन भुगतान की जगी उम्मीद Posted: 24 Apr 2021 06:20 PM PDT छह माह बाद 69000 भर्ती शिक्षकों को वेतन भुगतान की जगी उम्मीदप्रयागराज : बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक स्कूलों में 69000 भर्ती में नियुक्ति पाने वाले शिक्षकों को अब वेतन भुगतान की उम्मीद जगी है। दूसरे जिलों में तैनाती पाने वाले शिक्षक छह माह से वेतन की राह देख रहे थे, कई आर्थिक तंगी से परेशान थे। अंतर जिला तबादले पर मनचाहे जिलों में तैनाती पाने वाले शिक्षकों को भी भुगतान नहीं मिल रहा है। विभागीय मंत्री की सख्ती से बेसिक शिक्षा अधिकारियों ने ऑनलाइन सत्यापन शुरू किया है। अगले माह वेतन मिलने की उम्मीद है। प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में 69000 शिक्षकों की तैनाती जिलों के पिछड़े क्षेत्रों में की गई है। अक्टूबर 2020 में की अधिकांश जिलों में नवनियुक्त शिक्षकों को स्कूल आवंटित हुए थे। शिक्षकों का वेतन भुगतान अभिलेखों के सत्यापन के बाद होने के निर्देश हैं। ऐसे में कोरोना महामारी उन्हें भुगतान नहीं मिल सका है। इससे नवनियुक्त शिक्षक बहुत परेशान थे, वजह कई जिलों में बेसिक शिक्षा अधिकारी कोरोना से संक्रमित हो गए तो शिक्षकों का सभी शैक्षिक संस्थानों सत्यापन होने के बाद भी वेतन आदेश जारी नहीं हुआ। शिक्षक यह मांग कर रहे थे कि शासन जिलाधिकारी के हस्ताक्षर से वेतन भुगतान कराए व जिनका पूर्ण सत्यापन नहीं हुआ हैं उनके दो सत्यापन के आधार पर वेतन जारी किया जाए। इसी तरह से अंतर जिला स्थानांतरण के तहत अपने गृह या पड़ोसी जिले में आए अध्यापकों का भी वेतन भुगतान तीन महीने से इंतजार है। सभी शिक्षकों के आवश्यक प्रपत्र लेखा कार्यालयों में भी पहुंच चुके हैं लेकिन वे ब्लाकों को उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। उत्तर प्रदेश दूरस्थ बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने कहा कि इससे वेतन बनाने में असुविधा हो रही है। इसका विभागीय मंत्री डा. सतीश द्विवेदी ने संज्ञान लेकर भुगतान जल्द कराने के आदेश दिए हैं। वहीं, परिषद सचिव ने ऑनलाइन सत्यापन कराने के निर्देश दिए हैं। |
| खाली नहीं रहेगी बच्चों के MDM की थाली Posted: 24 Apr 2021 06:12 PM PDT खाली नहीं रहेगी बच्चों के MDM की थाली
प्रदेश सरकार की ओर से परिषदीय विद्यालयों के साथ ही माध्यमिक विद्यालयों में भी आठवीं तक के बच्चों को मिड-डे मील उपलब्ध कराया जाता है। केंद्र सरकार की मिड डे मील योजना का लाभ देश भर के लगभग 12 करोड़ बच्चों को मिलेगा। इस बीच बढ़ते संक्रमण से नए शैक्षिक सत्र में प्रदेश सरकार ने 15 मई तक स्कूलों को बंद करने का आदेश दिया है। ऐसे में बच्चों को घर बैठे पढ़ाने की योजना पर काम शुरू है। इस बार भी बच्चों को ऑनलाइन, टेलीविजन, रेडियो से पढ़ाने की तैयारी है। मिड-डे मील कोआर्डिनेटर राजीव त्रिपाठी कहते हैं, बीते वर्ष भी सरकार की योजना के अनुरूप बच्चों को मिड डे मील योजना का लाभ पहुंचाया गया था। |
| You are subscribed to email updates from प्राइमरी का मास्टर ● इन | Primary Ka Master | District News | Basic Shiksha | Shikshamitra. To stop receiving these emails, you may unsubscribe now. | Email delivery powered by Google |
| Google, 1600 Amphitheatre Parkway, Mountain View, CA 94043, United States | |