प्राइमरी का मास्टर ● इन |
- शीतकालीन अवकाश अवधि में प्रस्तावित प्रशिक्षण की तिथियों में परिवर्तन के संबंध में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने महानिदेशक स्कूली शिक्षा को लिखा पत्र।
- 69000 भर्ती में आरक्षण में अनियमितता का आरोप लगाते हुए राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग पहुंचे अभ्यर्थी, दिया ज्ञापन
- 69000 शिक्षक भर्ती : नियुक्ति के पांच माह बीते पर अब भी है वेतन का इंतजार
- राज्यपाल आनंदीबेन की खरी खरी - एक भी डिग्री फर्जी गयी तो अनियमितता की होगी सजा
- UPTET पेपर लीक में बड़ा खुलासा : दो अफसरों को पता था कहां और कैसे लीक होगा पर्चा, ज्यादा लालच में ही धांधली उजागर हुई
| Posted: 21 Dec 2021 05:49 PM PST |
| Posted: 21 Dec 2021 05:44 PM PST 69000 भर्ती में आरक्षण में अनियमितता का आरोप लगाते हुए राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग पहुंचे अभ्यर्थी, दिया ज्ञापन नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में 69 हजार शिक्षक भर्ती में आरक्षण गड़बड़ी का आरोप लगाकर छात्र लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं। मंगलवार को इस भर्ती के ओबीसी तथा एससी वर्ग के अभ्यर्थियों ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के कार्यालय पर प्रदर्शन किया। इन अभ्यर्थियों का कहना है कि राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने आरक्षण घोटाले की रिपोर्ट 29 अप्रैल 2021 को बेसिक शिक्षा विभाग को भेज चुका है, लेकिन बेसिक शिक्षा विभाग के आयोग के कार्यालय पर प्रदर्शन करते छात्र। अधिकारी इस रिपोर्ट पर अमल नहीं कर रहे तथा शिक्षा मंत्री विधानसभा में झूठ बोल रहे हैं कि उन्हें आयोग की कोई भी रिपोर्ट नहीं मिली है। मंगलवार को आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष भगवान सिंह साहनी से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा। साहनी ने अभ्यर्थियों को आश्वासन दिया कि जल्द न्याय किया जाएगा। क्या है मामला: 2019 में बेसिक शिक्षा परिषद ने 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा का आयोजन किया था। इसमें ओबीसी वर्ग की 18598 सीट थी, जिनमें से ओबीसी वर्ग को मात्र 2637 सीट ही दी गई है तथा ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत की जगह मात्र 3.86 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। इसी तरह एससी वर्ग को इस भर्ती में 21 प्रतिशत की जगह 16.6 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। |
| 69000 शिक्षक भर्ती : नियुक्ति के पांच माह बीते पर अब भी है वेतन का इंतजार Posted: 21 Dec 2021 05:21 PM PST 69000 शिक्षक भर्ती : नियुक्ति के पांच माह बीते पर अब भी है वेतन का इंतजार प्रयागराज। 69 हजार शिक्षक भर्ती की तीसरी काउंसलिंग के तहत नियुक्ति पाए शिक्षकों को अब तक वेतन का भुगतान नहीं हुआ है। शैक्षिक पत्रों का सत्यापन वेतन की राह में रोड़ा बना हुआ है। वेतन न मिलने से इन शिक्षकों के सामने आर्थिक तंगी से जूझना पड़ रहा है। शिक्षकों की मांग है कि पिछले शासनादेश के अनुक्रम में नवनियुक्त शिक्षकों से शपथ पत्र लेकर वेतन भुगतान किया जाए। सूबे में परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में 69000 शिक्षक भर्ती के तहत तृतीय चरण की काउंसलिंग में 26 जून को 6696 शिक्षकों की नियुक्ति मिली थी। जिले में 90 पदों के सापेक्ष कुल 75 शिक्षकों को 23 जुलाई को नियुक्ति पत्र दिया गया था। नियुक्ति के बाद यह सभी शिक्षक बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में उपस्थिति दर्ज करा रहे थे। तीन माह के इंतजार के बाद इन्हें विद्यालय आवंटन हुआ। विद्यालय आवंटन तो हो गया, लेकिन अब तक इन शिक्षकों को वेतन नहीं मिला है। शैक्षिक अभिलेखों का सत्यापन न होने की वजह से इन्हें वेतन नहीं मिल रहा है। इनमें से तमाम शिक्षक ऐसे हैं जो दूर के जिलों के रहने वाले हैं। यहां किराए पर कमरा लेकर रह रहे हैं। साथ ही प्रतिदिन 40-50 किलोमीटर सफर करके शिक्षण का कार्य करने विद्यालय जाते हैं। ऐसे में वेतन न मिलने से कमरे का किराया, बस का किराया तथा खाने-पीने आदि का प्रबंध करने में आर्थिक तंगी आड़े आ रही है। इन नवनियुक्त शिक्षकों का कहना है कि इसके पहले 69000 शिक्षक भर्ती के पिछले 2 चरणों की काउंसलिंग में नियुक्ति पाए शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाण पत्रों के सत्यापन न होने की स्थिति में तत्कालीन अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा ने19 मई को शासनादेश जारी करके ऐसे शिक्षकों का वेतन शपथपत्र के आधार पर जारी करने को कहा था। अब इन अभ्यर्थियों की मांग है कि उसी शासनादेश के आधार पर तृतीय चरण में नियुक्त शिक्षकों को वेतन का भुगतान किया जाए। अभ्यर्थियों का यहां तक कहना है कि कई जिलों में नवंबर महीने में वेतन भुगतान की कार्रवाई शुरू हो गई है, लेकिन प्रयागराज की ही तरह बहुत से जिलों में नवनियुक्त शिक्षकों को वेतन नहीं मिल पा रहा है। |
| राज्यपाल आनंदीबेन की खरी खरी - एक भी डिग्री फर्जी गयी तो अनियमितता की होगी सजा Posted: 21 Dec 2021 05:18 PM PST राज्यपाल आनंदीबेन की खरी खरी - एक भी डिग्री फर्जी गयी तो अनियमितता की होगी सजा पांच हजार डिग्री। सभी फर्जी। केस चला हाई कोर्ट में। क्या हम जिम्मेदार नहीं हैं। अब प्रण लीजिए एक भी डिग्री फर्जी नहीं होनी चाहिए। सालों से डिग्री नहीं दे रहे हैं। नैक से लेकर एनआईआरएफ से पीछे हट रहे हैं। समीक्षा बैठक में जो बातें सामने आयी। उसके बाद मुझे लगा कि ऐसे विश्वविद्यालय क्यों चलने चाहिए। यह बातें राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने दीक्षांत समारोह में कहीं। उन्होंने दीक्षांत भाषण से अलग हटते हुए कहा कि पारदर्शिता से काम करें, नहीं तो कार्रवाई की जाएगी। कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने कहा कि सालों से लाखों डिग्रियां लंबित थी। विश्वविद्यालयों की समीक्षा में सवाल पूछा सालों से डिग्रियां लंबित क्यों पड़ी हैं, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। इसके बाद आदेश किया कि डिग्री लेने के लिए एक पैसा नहीं लेना है। अब विश्वविद्यालय डिग्री बांट रहे हैं। एकाउंट मैटेंन नहीं करते थे। जब कहा गया तो अब मेटेंन किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले सालों में 300 फाइल देखकर थक गयी हूं। अनियमिता है नियम के विरूद्ध काम हुए हैं। शिक्षकों की पदोन्नति में करने में किसी को भी दे दो। राज्यपाल ने कहा कि मैंने तय किया है कि ऐसी अनियमित काम की फाइल मेरे पास आएगी और मैं जब पता करूंगी तो आपको सजा होगी। लास्ट में जो साइन करता है उसकी जिम्मेदारी है। क्यों फाइल नहीं देखी। यह जिम्मेदारी सिर्फ वीसी की नहीं है। सभी शिक्षक, कर्मचारियों की है। नियुक्ति में पारदर्शिता की व्यवस्था की है, जो होनहार हैं उनको नौकरी मिलेगी। नैक से डर, एनआईआरएफ को आवेदन तक नहीं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि विश्वविद्यालय से कॉलेज हजार संबंधित हैं, लेकिन एनआईआरएफ रैंकिंग नहीं है। क्यों? क्या विश्वविद्यालय की कोई जिम्मेदारी नहीं है। नैक में जाने से हिचकिचाहट होती है। क्योंकि काम नहीं कर रहे हैं। हौसला होना चाहिए कि मेरे विश्वविद्यालय की ए डबल प्लस क्यों ना आए। इतने बड़े भवन हैं आपके पास। क्या नहीं है आप बताएं। आज भी पांच भवनों का लोकार्पण किया है। क्या बिल्डिंग से रैंकिंग होगा या क्वालिटी से होगा। क्वालिटी से लिए आपके प्रयास क्या हैं। 30 साल से कर रहे हैं काम, विश्वविद्यालय से नहीं शिक्षकों को लगाव कुलाधिपति ने कहा कि कई-कई शिक्षक ऐसे है। जिनका जन्म ही विश्वविद्यालय में हुआ। यानि कि उन्होंने अपनी पहली सर्विस ही विश्वविद्यालय से शुरू की। उसके बाद से 30-30 साल हो गए हैं, लेकिन मुझे नहीं लगता है कि आपका विश्वविद्यालय के साथ कुछ लगाव हुआ हो और जब तक लगाव नहीं होगा। तब तक विश्वविद्यालय में कोई बदलाव नहीं आएगा। सिर्फ लेक्चर लेना और घर चले जाना आपका काम नहीं है। ऑनलाइन पढ़ाना सीखें। पढ़ाई में आईटी का प्रयोग करें। |
| Posted: 21 Dec 2021 05:07 PM PST UPTET पेपर लीक में बड़ा खुलासा : दो अफसरों को पता था कहां और कैसे लीक होगा पर्चा, ज्यादा लालच में ही धांधली उजागर हुई एसटीएफ की पड़ताल में यह भी सामने आया कि 300 अभ्यर्थियों तक ही पर्चा सॉल्वर के माध्यम से पहुंचाने की बात तय की गई थी। पर, गिरोह के कुछ सदस्यों ने ज्यादा लालच में रणनीति से अलग कई और लोगों तक पर्चे के सवाल व्हाट्सएप करा दिये। बस, इसी लालच में गिरोह के सदस्यों के बारे में सब कुछ सामने आ गया और पर्चा लीक होने की बात ऊपर तक पहुंच गयी। परीक्षा से चंद घंटे पहले ही एसटीएफ ने छापेमारी शुरू कर दी थी। लखनऊ : टीईटी का पर्चा लीक कराने के लिये छपाई से लेकर परीक्षा केन्द्र तक पहुंचने की सारी जानकारी बेहद गोपनीय रखी गई थी पर पूरी प्रक्रिया में शामिल दो अफसरों को यह पता था कि इस परीक्षा का पर्चा लीक होना है। यह पर्चा कहां से और कैसे लीक कराया जाएगा, इस बारे में भी सब कुछ तय हो चुका था। तीन जिलों के पांच परीक्षा केन्द्र भी चिह्नित कर लिए गए थे। पर, 28 नवम्बर को परीक्षा से तीन दिन पहले ही गिरोह ने रणनीति बदल ली। इसके बाद पर्चा केन्द्रों तक पहुंचने से पहले ही लीक हो गया। अब तक की पड़ताल के बाद तैयार पहली रिपोर्ट में एसटीएफ ने ऐसे ही तथ्य लिखे हैं। रिपोर्ट शासन को सौंपी जाएगी। एसटीएफ को पता चला कि परीक्षा के लिये कई सेट में पर्चे तैयार किये गये थे। लखनऊ। टीईटी का पर्चा लीक कराने के मामले में पकड़े गये लोगों के जब बयान हुये तो सामने आया कि इसमें परीक्षा नियामक प्राधिकरण सचिव संजय उपाध्याय के अलावा कई और की मिलीभगत है। संजय ने ही गाजियाबाद के राय अनूप प्रसाद को पर्चा छपाई का ठेका दे दिया। एसटीएफ अधिकारी के मुताबिक राय अनूप प्रसाद ने अलग-अलग जगह पर्चे छपवाए। शादी के कार्ड छापने वाले प्रिंटिंग प्रेस में भी पर्चा छपवाया गया।एसटीएफ की रिपोर्ट में पांच और लोग रडार पर हैं। इनमें दो की भूमिका अहम है। इन दो के खिलाफ सुबूत मिलने पर बड़ा खुलासा होगा। |
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