Bhopal Samachar | No 1 hindi news portal of central india (madhya pradesh) |
- KISAN NEWS- फसल बीमा का पूरा लाभ उठाने के लिए क्या करें, यहां पढ़िए
- बिना चवन्नी खर्च किए तोंद गायब, मात्र 29 दिन का कोर्स - belly fat yoga asanas
- सारी दुनिया को इंटरनेट से जोड़ने वाले ऑप्टिकल फाइबर का आविष्कार कहां और किसने किया- GK in Hindi
- क्या भूमि स्वामी, निरीक्षण के समय दस्तावेज दिखाने से मना कर सकता है- पढ़िए MP Land Revenue Code,1959
- MP TET VARG 3 टॉपिक- अधिगम और शिक्षाशास्त्र, Learning and Pedagogy
| KISAN NEWS- फसल बीमा का पूरा लाभ उठाने के लिए क्या करें, यहां पढ़िए Posted: 19 Feb 2022 02:26 PM PST एक बार फिर किसानों की दर्द भरी आवाजें सुनाई दे रही हैं। ओलावृष्टि ने फसल बर्बाद कर दी थी और बीमा कंपनी ने मुआवजे के नाम पर बीज की कीमत भी नहीं भेजी है। नेता लोग हमेशा की तरह बयान बाजी करते रहेंगे परंतु सबसे महत्वपूर्ण बात यह पता लगाना है कि, जब फसल 100% बर्बाद हो जाती है तो मुआवजा 25% का ही क्यों मिलता है। गड़बड़ी कहां होती है। पहली गलती- किसान रिपोर्ट नहीं करते, इंतजार करते हैंफसल बीमा के मुआवजे में कटौती का सबसे बड़ा कारण होता है, फसल के बर्बाद होने के बाद किसान इसकी रिपोर्ट नहीं करते बल्कि सरकारी कर्मचारियों का इंतजार करते हैं। जबकि नियमानुसार कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के ऑनलाइन पोर्टल pmfby.gov.in पर घर बैठे प्रमाण सहित रिपोर्ट की जा सकती है। नियमानुसार यदि 72 घंटे के भीतर रिपोर्ट की जाती है तो किसान का दावा पुख्ता हो जाता है। दूसरी गलती- किसान निवेदन करते हैं, ज्ञापन नहीं देतेयदि सरकारी कर्मचारी सर्वे के लिए समय पर नहीं आता तो किसान कलेक्टर, विधायक या मंत्री के सामने निवेदन करते हैं, जिसका कोई प्रमाण नहीं होता। किसानों को चाहिए कि वह स्थानीय कलेक्टर कार्यालय में शिकायत शाखा में जाकर शिकायत दर्ज कराएं और पावती प्राप्त करें। यदि उनके पास पावती है तो यह प्रमाणित हो जाता है कि सर्वे के काम में देरी, किसान के कारण नहीं कर्मचारी के कारण हुई है। तीसरी गलती- फोन करते हैं, ई-मेल नहीं करतेभारत सरकार के कृषि एवं कल्याण मंत्रालय ने किसानों की शिकायतों और समस्याओं के लिए हेल्प डेस्क का ईमेल एड्रेस जारी किया है जो इस प्रकार है:- help.agri-insurance@gov.in लेकिन सबसे बड़ी समस्या यह है कि किसान, हेल्पलाइन के नाम पर फोन करना पसंद करते हैं। ई-मेल नहीं करते। जबकि चिट्टियां लिखना भारत की पुरानी परंपरा है। किसी भी एंड्राइड मोबाइल फोन से जिसमें व्हाट्सएप, फेसबुक और यूट्यूब चलता है, ईमेल करना बिल्कुल उतना ही आसान है जितना कि व्हाट्सएप मैसेज करना। भारत की महत्वपूर्ण खबरों के लिए कृपया india national news पर क्लिक करें. |
| बिना चवन्नी खर्च किए तोंद गायब, मात्र 29 दिन का कोर्स - belly fat yoga asanas Posted: 19 Feb 2022 02:00 PM PST मोटापा एक समस्या है और मोटा पेट दूसरी समस्या। उम्र के साथ पेट सभी का बाहर निकल आता है लेकिन कुछ लोगों का पेट, तोंद बन जाता है। तोंद घटाने के लिए लोग काफी पैसा खर्च करते हैं और जिम में जाकर मेहनत भी करते हैं परंतु परमानेंट रिजल्ट नहीं मिलते। यहां एक ऐसे योगासन के बारे में बताया जा रहा है जिसके रिजल्ट इतने अच्छे हैं कि सारी दुनिया में करोड़ों लोग इसे कर रहे हैं। यह मात्र 29 दिन में आपकी तोंद को कम कर देता है, और अगले 29 दिन में लगभग गायब कर देता है। प्लांक आसन से पहले की तैयारीजब आप डिसीजन बना लें कि आपको प्लांक आसन करना है, तब आसन से पहले आपको कुछ तैयारी करनी होगी। चाय, कॉफी, रोटी, मटन, चिकन, फास्ट फूड, जंक फूड, नूडल्स, सॉफ्ट ड्रिंक, सोडा, सेव, मैदे, बेसन, दूध आदि से बने हुए खाद्य पदार्थ का त्याग करना होगा। केवल ज्यूस, फल, सब्जी, ड्राय फ्रूट और स्मूदी आपकी डाइट में शामिल हो सकते हैं। यह पूरे 29 दिनों तक चलेगा। आपको प्रतिदिन 1 मिनट से शुरू करना है और अधिकतम 5 मिनट तक इस पोजीशन में रहना है। प्लांक आसन क्या है, कैसे किया जाता हैकुंभकासन और चतुरंग दंडासन की मुद्राओं को मिलाकर एक नया आसन बनाया गया है जिसे प्लांक (plank) कहा जाता है। प्लांक को हिन्दी में काष्ठफलक कहा जाता है। यह दुनिया भर में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है क्योंकि इसके कारण लोगों को वह रिजल्ट मिल रहे हैं जिसके लिए वह काफी पैसा और पसीना बहा चुके हैं। मजेदार बात यह है कि भारतीय नागरिकों के लिए यह बिल्कुल भी नया नहीं है क्योंकि यह सूर्य नमस्कार की 5वीं स्टेप है। प्लांक आसन की विधिसबसे पहले शवासन में सोते हुए मकरासन में लेट जाएं। अब अपनी कोहनी और हाथ के पंजे को भूमि कर रखें। फिर छाती, पेट, कम और पुष्ठिका को उपर उठाते हुए पैर के पंजे सीधे कर दें। इस स्थिति में आपके शरीर का बल या वजन पूर्णत: हाथ के पंजे, कोहनी और पैर के पंजों पर आ जाएगा। अप गर्दन सहित रीढ़ की हड्डी को सीधा करें। इस स्थिति में रीढ़ सीधी रेखा में होना चाहिए। बिल्कुल एक लकड़ी का तख्ते या पल्ले जैसी। प्लांक आसन का तरीका सरल हिंदी मेंचटाई पर पेट के बल लेट जाएं। अब अपनी हथेलियों को अपने चेहरे के आगे रखें और पैरों को इस तरह मोड़ें कि पंजे जमीन को धकेल रहे हों। अब हाथ को आगे की तरफ पुश करें और अपनी पुष्टिका को हवा में उठाएं। आपके पैर जमीन से यथासंभव सटे होने चाहिए और गर्दन ढीली होनी चाहिए। इसे अधोमुख स्वानासन के नाम से भी जाना जाता है। यहां तक पहुंचने के बाद सांस अंदर लें और अपने धड़ को इस तरह नीचे ले जाएं कि आपकी बांहों का बल जमीन पर लग रहा हो ताकि आपकी छाती और कंधे, सीधा उन पर टिके हों। इस मुद्रा में तब तक रहें, जब तक कि सहज हो। आसन से बाहर आने के लिए सांस छोड़ें और आराम से शरीर को फर्श पर लेटने दें।
|
| सारी दुनिया को इंटरनेट से जोड़ने वाले ऑप्टिकल फाइबर का आविष्कार कहां और किसने किया- GK in Hindi Posted: 19 Feb 2022 01:08 PM PST यदि भोपाल समाचार डॉट कॉम के नियमित पाठक हैं तो यह जरूर जानते होंगे कि समुद्र की गहराइयों में ऑप्टिकल फाइबर केबल के कारण ही सारी दुनिया में इंटरनेट उपलब्ध हो पाता है लेकिन आज का सवाल यह है कि ऑप्टिकल फाइबर का आविष्कार कहां और किसने किया। आइए ऑप्टिकल फाइबर के पिता से मिलते हैं:- ऑप्टिकल फाइबर के अविष्कारक का नाम एवं भारत से संबंधआपको जानकर प्राउड फील होगा की ऑप्टिकल फाइबर का आविष्कार नरिंदर सिंह कपानी ने किया था। श्री कपानी अमेरिका में फिजिक्स के साइंटिस्ट हैं लेकिन इनका जन्म 31 अक्टूबर 1926 को भारत के पंजाब राज्य के मोगा में हुआ था। नरिंदर सिंह कपानी, भारतीय मूल के अमेरिकी वैज्ञानिक हैं। जिन्हें ऑप्टिकल फाइबर का पिता कहा जाता है। ऑप्टिकल फाइबर क्या हैऑप्टिकल फाइबर केबल, एक ऐसा चमत्कारी वायर है जिसने दुनिया में दशकों तक सबसे सफल रहे तांबे के तारों को रिप्लेस कर दिया है। ऑप्टिकल फाइबर को 1970 के दशक में विकसित किया गया। इसमें बहुत सारे पतले तार होते हैं। ऑप्टिकल फाइबर केबल को कुछ इस तरह से डिजाइन किया गया है कि ऑप्टिकल फाइबर के माध्यम से डाटा ट्रांसफर प्रकाश की गति के साथ होता है। तभी तो आप इंटरनेट के माध्यम से लाइव वीडियो देख पाते हैं। Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article :- यदि आपके पास भी हैं कोई मजेदार एवं आमजनों के लिए उपयोगी जानकारी तो कृपया हमें ईमेल करें। editorbhopalsamachar@gmail.com (general knowledge in hindi, gk questions, gk questions in hindi, gk in hindi, general knowledge questions with answers, gk questions for kids, ) |
| क्या भूमि स्वामी, निरीक्षण के समय दस्तावेज दिखाने से मना कर सकता है- पढ़िए MP Land Revenue Code,1959 Posted: 19 Feb 2022 12:20 PM PST प्रत्येक व्यक्ति की अपनी भूमि की सीमा निर्धारित की गई है एवं वह उतनी ही भूमि का उपयोग कर सकता है जितनी उसे आधिकारिक तौर पर प्राप्त होती है। सभी भूमि स्वामी के अपनी-अपनी भूमि के नक्शे, योजना चित्र एवं दस्तावेज तैयार किये जाते हैं। जब कोई राजस्व अधिकारी, राजस्व निरीक्षक, पटवारी या नगर सर्वेक्षक या पुनः निरीक्षण करता है तब भू धारक का कर्तव्य हैं कि वह उपर्युक्त अधिकारी को संबंधित जानकारी उपलब्ध कराए एवं निरीक्षण में सहयोग प्रदान करे। मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 120 की परिभाषा:-कोई भी भूमि स्वामी जो ग्रामीण या नगर क्षेत्र में किसी भी प्रकार की भूमि का मालिकाना हक रखता है उससे यह अपेक्षा की जाती है कि किसी पुनः निरीक्षण के समय भूमि से संबंधित सभी अधिकार प्राप्त दस्तावेज, नक्शा, योजना चित्र आदि को निरीक्षण करने वाले राजस्व अधिकारी, निरीक्षक, पटवारी या नगर सर्वेक्षक को बताए एवं उपर्युक्त अधिकारियों का निरीक्षण में सहयोग प्रदान करे। नोट:- अगर कोई भू स्वामी नक्शा नहीं बताता है, भूमि संबंधित दस्तावेज नहीं देता है एवं योजना चित्र की रिपोर्ट नहीं देता है वह मध्यप्रदेश भू राजस्व संहिता की धारा 120 का उल्लंघन करेगा। भू धारक (स्वामी) को भूमि दस्तावेजों की प्रतिलिपि लेने का अधिकार:-कोई भी भूमि स्वामी या आवेदनकर्ता को मध्यप्रदेश भू राजस्व संहिता की धारा 256 के अनुसार निरीक्षण के बाद कभी भी नक्शे, भू-दस्तावेज,योजना चित्र आदि की समस्त प्रतिलिपियाँ जो भी फीस या भुगतान शर्त के बाद उपलब्ध करवाई जाएगी। (Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article) :- लेखक बी.आर. अहिरवार (पत्रकार एवं लॉ छात्र होशंगाबाद) 9827737665 इसी प्रकार की कानूनी जानकारियां पढ़िए, यदि आपके पास भी हैं कोई मजेदार एवं आमजनों के लिए उपयोगी जानकारी तो कृपया हमें ईमेल करें। editorbhopalsamachar@gmail.com |
| MP TET VARG 3 टॉपिक- अधिगम और शिक्षाशास्त्र, Learning and Pedagogy Posted: 19 Feb 2022 07:53 PM PST एमपी टेट वर्ग 3 में "अधिगम और शिक्षण शास्त्र "से संबंधित 10 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं इस टॉपिक में टॉपिक में 10 सब टॉपिक्स हैं, जिनसे संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। इसके अंतर्गत "बच्चे कैसे सोचते और सीखते हैं, बच्चे शाला प्रदर्शन में सफलता प्राप्त करने में क्यों और कैसे असफल होते हैं। शिक्षण और अधिगम की मूलभूत प्रक्रियाएं, बच्चों के अधिगम की रणनीतियां, अधिगम एवं सामाजिक प्रक्रिया बच्चों के रूप में अधिगम का सामाजिक संदर्भ, समस्या समाधान कर्ता और वैज्ञानिक अन्वेषक के रूप में बच्चा, बच्चों में अधिगम की वैकल्पिक धारणाएं, बच्चों की त्रुटियों को अधिगम प्रक्रिया में सार्थक कड़ी के रूप में समझना, अधिगम को प्रभावित करने वाले कारक: अवधान और रुचि, संज्ञान और संवेग, अभिप्रेरणा और अधिगम, अधिगम में योगदान देने वाले कारक- व्यक्तिगत और पर्यावरणीय ,निर्देशन एवं अभिक्षमता और उसका मापन ,स्मृति और विस्मृति" हैं। अधिगम और शिक्षण शास्त्र / Learning and Pedagogyअधिगम का सामान्य अर्थ है- सीखना (Learning) जबकि शिक्षाशास्त्र, में शिक्षण कार्य की प्रक्रिया का अध्ययन किया जाता है की ,बच्चों को कैसे सिखाया जाए। अधिगम या सीखना एक एक स्वाभाविक प्रक्रिया है जो बच्चे अपने आप ही करते हैं। अधिगम- शिक्षण प्रक्रिया के चार मुख्य घटक- शिक्षार्थी ,शिक्षक, पाठ्य सामग्री और पाठ्य विधि होते हैं। पाठ्य सामग्री और पाठ्य विधि, शिक्षक और शिक्षार्थी के बीच मध्यस्थ का काम करते हैं। जिससे शिक्षार्थी एवं शिक्षक दोनों ही प्रभावित होते हैं और एक दूसरे को प्रभावित भी करते हैं। बच्चे कैसे सोचते और सीखते हैं, बच्चे शाला प्रदर्शन में सफलता प्राप्त करने में कैसे और क्यों असफल हो जाते हैं?बच्चे अपनी रूचि और जिज्ञासा के आधार पर सोचते हैं और सीखते हैं। बच्चे जन्म के तुरंत बाद ही सीखना शुरू कर देते हैं, बच्चे अपनी स्वाभाविक प्रवृत्ति के अनुसार वस्तुओं को देखकर, छूकर, उनके बारे में अनुभव प्राप्त करते हैं जो की एक सहज और स्वाभाविक प्रक्रिया है। बच्चे अपनी रूचि और जिज्ञासा के आधार पर सोचते हैं और सीखते हैं। इसी कारण जिस बच्चे की जिस चीज या विषय में ज्यादा रूचि होती है वह उसे बहुत जल्दी सीख जाता है, जबकि जिसमें उसकी रूचि नहीं होती उसे सीखने में उसे अधिक समय लग जाता है। इसीलिए पाठ्यक्रम और पाठ्यचर्या बच्चों की रुचि के अनुसार होना आवश्यक है। बच्चे शाला प्रदर्शन में सफलता प्राप्त करने में कैसे और क्यों असफल हो जाते हैं?स्कूल का कार्यक्रम साधारणतया बच्चों की क्षमता और योग्यता के अनुसार निर्धारित किया जाता है, इस उम्र में बच्चों की वास्तविक आयु के साथ-साथ उनकी मानसिक आयु भी बढ़ती है। बड़े होने के साथ-साथ उनकी कार्यकुशलता तथा बुद्धि में भी वृद्धि होती है, स्कूल के कार्यक्रमों की जटिलता में भी वृद्धि होती है, जो कार्य दूसरी कक्षा के बच्चों के लिए कठिन होते हैं, वही कार्य पांचवी कक्षा के बच्चे बड़ी आसानी से कर लेते हैं परंतु बुद्धि में वृद्धि के साथ-साथ रुचियों में भी परिवर्तन होता है, छोटे बच्चे अपने आसपास के परिवेश में रुचि रखते हैं जबकि बड़े होने पर उनकी जिज्ञासा बढ़ती जाती है। अब बच्चे को अपने आसपास के परिवेश के अलावा देश और विदेश के संबंध जानने की भी जिज्ञासा होने लगती है। ऐसे में यदि शिक्षक अध्ययन को रुचिकर और रोमांचक बनाए रखें तो बच्चे भी सामान्य ढंग से सीख सकते हैं। कई बार माता-पिता को मोहवश अपने बच्चों को सर्वोत्तम मान लेते हैं और उनकी गलतियों को देखते ही नहीं है और उनसे ऊंची- ऊंची आशाएं बांध लेते हैं, इसके कारण बच्चे पढ़ाई में पिछड़ने लगते हैं। कई बार बच्चे शारीरिक दोष के कारण भी पिछड़ जाते हैं। जबकि कभी-कभी तीव्र बुद्धि के बालक भी पढ़ाई में पिछड़ जाते हैं। उनकी जिज्ञासा को तृप्त करने की बजाय उसे कुचल दिया जाता है, विद्यालय में मिलने वाली सफलता प्रायः घरेलू वातावरण पर भी निर्भर करती है, जिस प्रकार सहानुभूति स्फूर्तिवान बनाती है, उसी प्रकार खिन्नता उत्साहहीन बनाती है। इस प्रकार कहा जा सकता है कि विद्याअध्ययन के लिए सिर्फ मानसिक तीव्रता ही पर्याप्त नहीं होती, बल्कि बच्चे की रूचि, सहानुभूति, स्कूल का वातावरण, शिक्षक तथा माता-पिता का व्यवहार, सभी कुछ प्रभावित करता है। इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए एवं यदि बच्चे को केंद्र में रखकर शिक्षा प्रदान की जाए तो असफलता की संभावना कम होगी। मध्य प्रदेश प्राथमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा के इंपोर्टेंट नोट्स के लिए कृपया mp tet varg 3 notes in hindi पर क्लिक करें. |
| You are subscribed to email updates from Bhopal Samachar | No 1 hindi news portal of central india (madhya pradesh). To stop receiving these emails, you may unsubscribe now. | Email delivery powered by Google |
| Google, 1600 Amphitheatre Parkway, Mountain View, CA 94043, United States | |