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Sunday, March 27, 2022

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इनसे हैं हम पुस्तक में जमशेदपुर के तीन लेखक | विमोचन के मुख्य अतिथि होंगे डॉ अंगद तिवारी

Posted: 26 Mar 2022 02:51 AM PDT

इनसे हैं हम पुस्तक में  जमशेदपुर के तीन लेखक | 

विमोचन के मुख्य अतिथि होंगे डॉ अंगद तिवारी

भारतीय जन महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष धर्म चंद्र पोद्दार ने  जानकारी दी है कि महासभा द्वारा प्रकाशित इनसे हैं हम  पुस्तक का विमोचन कार्यक्रम  हिंदू नव वर्ष की पूर्व संध्या पर आगामी 1 अप्रैल 2022 ( शुक्रवार) को डॉ श्री कृष्ण सिन्हा संस्थान के वातानुकूलित सभागार में संध्या ठीक 5:00 बजे से होगा ।
यह भी बताया कि विमोचन कार्यक्रम 50 मिनट तक का ही  होगा । समापन निश्चित रूप से संध्या 5:50 बजे किया जा सकेगा ।
श्री पोद्दार ने इनसे हैं हम पुस्तक के विमोचन के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इस समारोह में मुख्य अतिथि अरका जैन महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ अंगद तिवारी जी होंगे । समारोह की अध्यक्षता डॉ श्रीकृष्ण सिन्हा संस्थान के महासचिव डॉ हरि बल्लभ सिंह आरसी जी करेंगे । स्वागताध्यक्ष भारतीय जन महासभा के संरक्षक श्री राजेंद्र कुमार अग्रवाल जी होंगे ।
श्री पोद्दार ने जानकारी दी कि 51 लेखकों की इस पुस्तक में जमशेदपुर के भी 3 लेखक हैं । जिनके नाम है - श्रीमती प्रतिभा प्रसाद , श्री विजय नारायण सिंह एवं धर्म चंद्र पोद्दार । 
बताया कि समारोह में उपस्थित सभी लेखकों का सम्मान किया जाएगा ।
आगे बताया कि यह समारोह घड़ी देखकर ठीक 5:00 बजे शुरू होगा ।
श्री पोद्दार ने इस आयोजन में सम्मिलित होने वाले सभी लोगों से अपील की है कि हिंदू नव वर्ष की पूर्व संध्या पर संध्या ठीक 4:45 बजे तक अपना स्थान अवश्य ग्रहण कर ले ।
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सनातन नववर्ष कार्यक्रम की तैयारी हेतु भारतीय जन क्रांति दल की बैठक सम्पन्न |

Posted: 26 Mar 2022 12:05 AM PDT

सनातन नववर्ष कार्यक्रम की तैयारी हेतु भारतीय जन क्रांति दल की बैठक सम्पन्न |

अहमदाबाद से हमारे संवाददाता के अनुसार भारतीय जन क्रांति दल डेमोक्रेटिक की गुजरात इकाई ने आगामी सनातन नववर्ष चैत्र प्रतिपदा एवं रामनवमी पर विशेष श्री राम रथ यात्रा के आयोजन की तैयारी हेतु अपने कार्यकर्ताओ और पदाधिकारियों की बैठक आयोजित की |
बैठक को सम्बोधित करते हुए पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सह गुजरात प्रदेशाध्यक्ष सुरेश बारोट ने कहाकि आजकल सभी हिन्दू नववर्ष का मतलब अंग्रेजो की एक जनवरी वाली तारीख को समझते है जो सर्वथा अनुचित है हमारा नववर्ष चैत्र प्रतिपदा से प्रारम्भ होता है जो सृष्टी के निर्माण का दिवस भी है अत: हम सभी हिन्दुओ को अपना नववर्ष अवश्य मानना चाहिए| हमारी पार्टी गुजरात में नववर्ष से लेकर रामनवमी तक गुजरात में कार्केयक्रम आयोजित करेगी विशेष तौर पर रामनवमी के दिन राम रथ महारैली का आयोजन किया जायेगा | राम रथ गुजरात के प्उरत्सयेक जिले में निकलने की हमारी पार्टी की इक्षा है |
बैठक में गुजरात
प्रदेशाध्यक्ष सुरेश भाई बारोट,प्रदेश महासचिव निरज शाह ,प्रदेश सचिव श्री विपिन चंद्र वाघेला , प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य जीग्नेश भाई पंचोली ,प्रदेश कार्यकारिणी श्री गुलाब भाई पटेल , मेहुल भाई ,नरेशभाई देसाई बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित थें|

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महंगाई

Posted: 25 Mar 2022 11:44 PM PDT

महंगाई

महंगाई ने पांव पसारे कमर तोड़ दी जनता की 
सुरसा सी विस्तार कर रही बढ़ रही दानवता सी 

आटा दाल आसमान छूते भुगत रहे तंगहाली को 
निर्धन का रखवाला राम जो सह रहे बदहाली को 

दो जून की रोटी को भागदौड़ भारी-भरकम होती 
स्वप्न सलोने सारे धराशाई मजबूरियां भूखी सोती 

दिन दूनी रात चौगुनी नित बढ़ती जाती महंगाई 
कैसे पाले परिवार को अब खर्चों से शामत आई 

अनाप-शनाप खर्चे बड़े आमदनी का जोर नहीं 
दिन रात मेहनत करके मिलता कोई छोर नहीं 

दूध दही सब्जी ने देखो कैसी हवा बना ली है 
जेब सारी खाली कर दे फिर भी महंगी थाली है 

आशियाना सुहाना लगता अब तो सपना कोई 
महंगाई की मार झेलते छूटे हमारा अपना कोई

रमाकांत सोनी सुदर्शन 
नवलगढ़ जिला झुंझुनू राजस्थान
प्रस्तुत रचना स्वरचित व मौलिक है।
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हरतरफ पशुता खड़ी

Posted: 25 Mar 2022 11:40 PM PDT

हरतरफ पशुता खड़ी

बाजार पसरा है। 

आदमी बिक रहा है
हैवान के आगे
बढ रही आकांक्षाएँ
किधर सेभागे
जानता है चतुर्दिक
असहज खतरा है। 

दूध पीता फरिस्ता भी
रोज है बिकता
माँ बिचारी करै भी तो
कुछ नहीं दिखता
विवशता ने फाड़ रखी
नेह अँचरा है। 

योजनाएँ सुहाने है
बड़े ऊँचे हैं
जरूरत के हाथ ओछे
और छूछे हैं
 सही अधिकारी बराबर
बना बहरा है। 

अनैतिक दुष्कर्म सस्ते
सार्वजनिक हुए
दवंगोंं की सोच भी
निर्द्वंद बणिक हुए
झूठ पर है छूट  सच पर
कड़ा पहरा है।
रामकृष्ण
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तुम राज करोगे

Posted: 25 Mar 2022 11:38 PM PDT

तुम राज करोगे

यदि तुझे लोगों के दिलों में
अपने आपको जिंदा रखना है। 
तो अपनी वाणी व्यवहार और 
भाषा पर नियंत्रण रखना पड़ेगा। 
तभी तुम लोगों की जुबान और
ह्रदय पर जगह बना पाओगें। 
और एक दिन निश्चित फिर
लोगों के दिलो पर राज करोगें।। 

जो मिल जुलकर और 
समानता को अपनाओगें। 
और अपनी उदारता से
बड़े बूढ़ो को सम्मान दोगें। 
तो तुझे ये लोग अपनी 
पलको पर बैठा के रखेंगे। 
और फिर तेरे ही ये लोग 
सदा गुण गान करेंगे।। 

बदल जायेगा तेरा जीवन
जो सेवा भाव दिखाओगें। 
और अपनी करनी से तुम
लोगों के दिलों में बस जाओगें। 
फिर तेरे छोटे बड़े कामो की
प्रशंसा चार दिशाओं में होगी। 
और तुम भी दानवीर बनकर
देश में उच्च स्थान पाओगें।। 

मधुर भाषा और स्वभाव का
सदा ही महत्व होता है। 
मिठी वाणी के शब्दो से
बड़े बड़े युध्द टल जाते है। 
और अमन सुख शांति का 
वातावरण स्वयं बन जाता है। 
और देश राज्य समाज में
समवृध्दि दिखने लगती है।। 

जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई
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“कछुवा-खरगोश” को कम से कम भारत में तो “दो शब्दों की कहानी” घोषित कर ही देना चाहिए।

Posted: 25 Mar 2022 11:33 PM PDT

"कछुवा-खरगोश" को कम से कम भारत में तो "दो शब्दों की कहानी" घोषित कर ही देना चाहिए।

 

संकलन अश्विनी कुमार तिवारी

बचपन से लोगों ने तेज भागने वाले खरगोश के रास्ते में रुक कर सो जाने, और धीमी गति से ही सही, मगर लगातार चलते रहने वाले कछुवे की दौड़ में जीत जाने की कहानी अनगिनत बार सुनी होती है। धीरे-धीरे इसके बदले हुए रूप भी सुनने-पढ़ने में आते रहते हैं। चूँकि ये कहानी कई बार सुनी हुई होती है इसलिए रामायण का सुन्दरकाण्ड पढ़ते समय आपको आसानी से याद आ जाएगी। जैसे खरगोश का तेज गति के लिए कहानी में जिक्र आता है, वैसे ही हनुमान जी के लंका की ओर रवाना होने पर वेग का वर्णन है।

किसी छोटे कस्बे के रेलवे प्लेटफार्म पर पड़े अख़बारों की जो दशा वहां से राजधानी के गुजरते ही होती है, वैसा ही कुछ हनुमान जी की छलांग लगाने पर पेड़ों का होता है! जैसे तेज गति से गुजरती ट्रेन के साथ ही कागज के टुकड़े और दूसरी हल्की-फुल्की चीज़ें उड़ चलती हैं, कुछ वैसे ही महेंद्रगिरी पर्वत से जब हनुमान छलांग लगते हैं, तो उनके वेग से भी कई पेड़ उखड़ जाते हैं। उनके साथ उड़ चले ये पेड़ तो कुछ वहीँ आस पास और कुछ समुद्र में गिर गए, मगर हनुमान आगे लंका की ओर बढ़ते रहते हैं। यहीं उन्हें पहली बार विश्राम का अवसर मिलता है। मैनाक पर्वत उनके सामने निकलकर आता है। अचानक जिसे अपनी उड़ने की शक्ति याद आ गयी हो उसे क्या करना चाहिए?

हनुमान जी के पास यहाँ रुकने सुस्ताने का पूरा मौका था लेकिन वो नम्रतापूर्वक मना करके आगे बढ़ जाते हैं। खरगोश की तरह रूककर सोने नहीं लगते। यहाँ से थोड़ा ही आगे उनकी मुलाकात सुरसा से होती है। यहाँ हनुमानजी चतुराई से काम लेते हैं पहले आकार बड़ा करके और फिर छोटा करके वो सुरसा के मुख में प्रवेश करके निकल आते हैं। इससे आगे बढ़ते ही उनकी भेंट सिंहिका नाम की राक्षसी से होती है जो परछाई को रोककर जीवों को खा जाती थी। हनुमान जी उसे मारकर आगे बढ़ते हैं। रुकने के जो तीन मौके मिलते हैं, उन तीनों पर उनकी प्रतिक्रियाएं अलग अलग हैं!

तो पहले तो ये सीखने को मिलता है कि अगर आपकी गति खरगोश जैसी तेज हो भी तो रास्ते में रुकना नहीं है। जब तक काम पूरा नहीं होता, तबतक रास्ते में कोई मैनाक जैसा सुन्दर-रमणीय पर्वत आये, या कहिये कि अच्छे प्रलोभन दिखें तो उनके लिए ठहरने के बदले आगे बढ़ा जाना चाहिए। जो बाधाएं रास्ते में आएँगी, जरूरी नहीं कि वो खूबसूरत हों, प्रलोभन हों। हो सकता है वो डराने का प्रयास करने वाले वैसे कॉमरेड हों जिन्हें हर बात में "ना हो पायेगा" सूझता है। कई दूसरे "रोचक" कार्यों में उलझाने की कोशिशें हों, डरा-धमका कर रोका जाए ऐसा हो सकता है। रुकना इनपर भी नहीं है।

तीसरा प्रयास पूरा मार देने का ही होता है। जब बहलाने-फुसलाने और डराने-धमकाने से काम नहीं बना तो सिंहिका रोकने की कोशिश करती है। इस बार हनुमान उसे मारकर आगे बढ़ते हैं। यहाँ बर्ताव पर भी ध्यान दिया जा सकता है। तीनों मोटे तौर पर एक सी हरकत कर रहे होते हैं – रोकने की कोशिश। तीनों बार हनुमान जी की प्रतिक्रियाएं अलग-अलग होती हैं। यानी आज के (कुछ असंवैधानिक कानूनों को छोड़कर) अधिकतर कानूनों में जैसा कहा जाता है, बिलकुल वैसा ही प्रेरणा क्या थी, क्यों की ये हरकत, उसके आधार पर सजा तय होती है। क्या हरकत की उसके हिसाब से कुछ नहीं किया जा रहा है।

जब मैनाक को "ना" कहा जा रहा है तो पूरी विनम्रता से कहा जा रहा है। जरूरी नहीं कि इनकार करते वक्त सम्बन्ध बिगड़ ही जाएँ। हनुमान जी "एस्सेर्टीव" होते हैं "एग्ग्रेसिव" नहीं होते। दूसरी बार में वो देखते हैं कि ये सिर्फ शक्ति-सामर्थ्य की जांच है, वहां वो दिखाते हैं कि एक दूत की तरह चतुराई,व्यवहार-कुशलता का इस्तेमाल करते हैं। "पॉवर" के बदले "टैक्ट" का प्रयोग करते हैं। तीसरी बार में वो ऐसा कुछ नहीं करते। जो सामने थी वो स्वरभानु, जिसका सर-धड़ अलग होने से राहू केतु बने थे, की माँ थी। पहले भी उससे हनुमान का सामना हो चुका था। यहाँ लड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।

कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि जब एक दूत के रूप में हनुमान जी को दर्शाने के लिए सुन्दरकाण्ड की रचना की गयी तो उसपर समय और लेखक का भी प्रभाव रहा होगा। वाल्मीकि रामायण के सुन्दरकाण्ड में हनुमान जी रौद्र रूप में हैं, तो तुलसीदास जी के में भक्ति वाले रूप में ही दिखते हैं। इन सबसे ऊपर होता है उसे पढ़ने वाला पाठक। भक्ति और आध्यात्म जैसी चीज़ें छोड़कर "मैनेजमेंट लेसन" भी ढूंढें जा सकते हैं। समुद्र के किनारे से सीप चुनकर घर लौटने से हमें कौन रोक सकता है भला? "माह लाइफ, माह चॉइस!" जब कछुवे-खरगोश की कहानी से बिना रुके चलते रहना नहीं सीखा, तो हनुमान जी से भी लक्ष्य तक पहुंचे बिना विश्राम न करना सीखने का मन नहीं हो, ऐसा हो सकता है।

बाकी सुन्दरकाण्ड पढ़ने से हम आज भी साधु नहीं हुए। हवा में उड़ने, आकार बड़ा-छोटा करने जैसी दिव्य शक्तियां भी प्राप्त नहीं हुई हैं। कल बंदरों की तरह बीज फिर से खोदकर देखेंगे, कल शायद मेरे पेड़ उग आयें!

थोड़े दिन पहले जब रामायण (रामानंद सागर वाला) टीवी पर प्रसारित हो रहा था तो इन्टरनेट पर अक्सर एक वीडियो नजर आता था। इसमें अरविन्द त्रिवेदी नजर आते थे, जो टीवी देखते हुए भावुक हो रहे होते थे। अब काफी वृद्ध हो चुके अरविन्द त्रिवेदी ने कभी इस सीरियल में रावण का किरदार निभाया था। उनके साथ जुड़ी कहानियों में से एक हनुमान गढ़ी की कहानी है। कहते हैं कि जब वो वहां दर्शन के लिए गए तो पुजारियों-महंतों ने उन्हें अन्दर ही नहीं घुसने दिया!

कारण ये था कि तबतक वो रावण का किरदार निभाकर परसिद्ध हो चुके थे। रावण के किरदार में उन्होंने राम और हनुमान के लिए "वनवासी" जैसे शब्द भी इस्तेमाल किये थे। उनकी राम में श्रद्धा है या नहीं, इसपर महंतों को संदेह था। राम को बुरा-भला कहने वाले को अन्दर कैसे आने देते? इस वजह से उन्हें मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया गया! इससे फिर ये सोचना पड़ता है कि जिसकी "ला इलाहा..." (कलमा), जिसका मतलब मोटे तौर पर ये होता है कि उनके अल्लाह के अलावा कोई ईश्वर नहीं, में आस्था हो, उसे भला राम में क्या आस्था होगी?

खैर, हमने जब ये किस्सा सुना तो हमने सोचा राम को वनवासी कहना भी चाहिए या नहीं? रामायण को शब्द के तौर पर देखें तो ये राम और अयन से बनता है। अयन शब्द एक अर्थ तो घर होता है, दूसरा अर्थ चलना होता है। अगर राम के जीवन के आधार पर देखें तो एक बड़ा हिस्सा उन्होंने वनों में चलते हुए ही बिता दिया था। आज जिसे वसिष्ठ आश्रम माना जाता है, वो जगह गुवाहाटी (असम) के बाहरी हिस्से में है। अभी भी शहर से वहां पहुँचने के लिए काफी चढ़ाई पार करनी पड़ती है। उस काल की अयोध्या से वहां तक चलकर जाने में काफी समय लगा होगा।

राम सिर्फ गुरुकुल जाने-आने के लिए ही लम्बे समय तक वनों में नहीं चले होंगे। ऋषि विश्वामित्र थोड़े ही समय बाद उन्हें अपने साथ ले जाते हैं। ऋषि विश्वामित्र के यज्ञों में मारीच और सुबाहु आदि राक्षस विघ्न डालते रहते थे। तो विश्वामित्र अपने यज्ञ की रक्षा के लिए दशरथ के पास आये और कहा अपने पुत्रों को मेरे यज्ञ की रक्षा के लिए भेजो। दशरथ घबराये कि इन बच्चों से यज्ञ की रक्षा भला क्या हो पायेगी ? लेकिन वशिष्ठ ने दशरथ को समझाया बुझाया और फिर विश्वामित्र राम लक्ष्मण को लेकर रवाना हुए। रास्ते में एक रात के लिए वो लोग सरयू नदी के किनारे रुके थे। जहाँ वो रुके थे, आज की तारीख में वो इलाका आज़मगढ़ होता है।

यहाँ रुकने पर विश्वामित्र ने राम-लक्ष्मण को सिखाया था कि युद्ध कई बार लम्बा खींचता है। कई दिन तक लगातार लड़ने के लिए "पॉवर" यानि बल भी चाहिए, और साथ में "स्टैमिना" यानि अतिबल भी चाहिए। सरयू के किनारे ही विश्वामित्र ने राम-लक्ष्मण को बल-अतिबल मन्त्रों की भी दीक्षा दी और ये विद्या सिखाई थी। कई किस्म के चक्र, वज्र और शक्ति जैसे आयुध, खुद पर उनके प्रभाव को रोकने के लिए उपसंहार अस्त्र, और मंत्रसिद्ध अस्त्रों के प्रयोग भी यहीं पर सिखाया गया था। आगे क्या हुआ था इससे आप लोग टीवी देख देख के वाकिफ़ हो चुके हैं।

सीता स्वयंवर से लौटकर भी राम का चलना रुका नहीं था। थोड़े ही समय बाद वो वनवास पर निकलते हैं और चौदह वर्षों तक वनों में ही चलते रहते हैं। हो सकता है कि लम्बे समय तक राम के चलने को "अयन" शब्द से दर्शाया गया हो। राम को बड़े नगरों में रहने वाले किसी राजा की तरह देखने की आम लोगों की आदत भी नहीं होती। जनमानस के राम कहीं दूर महल-दरबार के नहीं बल्कि आस पास के ही किसी परिचित के से होते हैं। राम के चलते रहने में देखने लायक ये भी है कि शुरुआत में जहाँ वो ऋषि विश्वामित्र के साथ चल रहे होते हैं, वहीँ आगे वो चलते चलते अगस्त्यमुनि के पास भी पहुँच जाते हैं।

दो परस्पर विरोधियों (विश्वामित्र और अगस्त्य) के पास एक दूसरे से स्पर्धा तो थी, लेकिन राम के नाम पर वो दोनों एक हैं। तड़का से लड़ने के लिए जहाँ विश्वामित्र बल-अतिबल सिखा रहे होते हैं, वहीँ अगस्त्य भी अस्त्र-शस्त्र प्रदान करते हैं। इसलिए ये भी कहा जा सकता है कि कुछ मुद्दों पर अलग-अलग राय भी हो तो भी एक हुआ जा सकता है। यहाँ ये भी ध्यान देने लायक है कि प्राचीन कथाओं से ना सीखने पर इतिहास खुदको दोहराने लगता है। जो पृथ्वीराज चौहान ने नहीं सीखा था, बिलकुल वही गलती मुगलों ने ईस्ट इंडिया कंपनी को जगह देकर भी की थी।

बाकी रामायण के अयन का एक अर्थ चलते रहने से ये भी याद आया कि हिन्दुओं की संस्कृति विश्व में सबसे लम्बे काल से लगातार चल रही संस्कृति है। नक़्शे में किनारे की तरफ से थोड़ा-थोड़ा करके जैसे ये कटती जा रही है, उसे देखकर ये कहना कठिन है कि कितने काल तक चलेगी, मगर वो तो फिर एक अलग बात है।

वाल्मीकि रामायण और तुलसीकृत रामचरितमानस की एक साथ बात करें तो दोनों में कवि श्री राम की कथा ही कह रहे होते हैं। जैसे ही इन्होंने राम की कथा को आम जन तक पहुँचाने का प्रयास किया, वैसे ही इनका खुद का नाम भी अमर हो गया! अब अगर चाहें भी तो रामायण कहते ही वाल्मीकि या रामचरितमानस कहते ही तुलसीदास याद न आएं ये असंभव है। ये एक बार नहीं कई बार हुआ है। अच्छे ढंग से लिखने के बदले, अपनी मर्जी से तोड़ने-मरोड़ने, उसमें कहीं महाभारत तो कहीं दूसरी अनसुनी कहानियां घुसेड़ने वाले आज कल के लेखक भी इसके नाम पर अच्छी खासी प्रसिद्धि (और मुद्रा) बटोर ले जाते हैं।

जहाँ नतीजे ऐसे साफ़, उदाहरणों में दिखें वहां अगर कोई पूछे कि आज के समय में इसे पढ़ने, लिखने या सुन लेने का क्या फायदा? उसे मुस्कुराकर टाल देना चाहिए। आकार की दृष्टी से देखें तो दोनों ग्रंथों में बहुत अंतर है। जहाँ वाल्मीकि की रामायण बहुत वृहत है, तुलसीदास की रामचरितमानस उससे बहुत छोटी होती है। समय काल के हिसाब से दोनों में हजारों साल का अंतर है। तुलसी के काल तक वाल्मीकि के लेखन के आधार पर अनेकों रचनाएँ लिखी जा चुकी थीं। उनकी भाषा भी संस्कृत नहीं इसलिए उनके किये को अर्थ का अनुवाद और फिर उसमें कुछ प्रसंगों का बदलाव माना जा सकता है।

वो वाल्मीकि की रचना पर ही आधारित है, ऐसा मान लिया जाता, तुलसीदास को ये अलग से लिखने की जरूरत नहीं थी। संभवतः तुलसीदास की नैतिकता के मापदंड आजकल के हिन्दी लेखकों जैसे नहीं थे इसलिए वो शुरुआत में ही स्पष्ट लिख देते हैं कि उन्होंने आधार किसे माना है। एक भाषा से दूसरी भाषा में करते समय मूल लेखक का नाम गायब नहीं करते। जिस व्यक्तित्व तो इन दोनों कवियों ने अपनी रचना के केंद्र में रखा, उन्हें देखें तो एक बात स्पष्ट है कि राम पूर्व के काल में मत्स्य न्याय चल जाता था। जिसके पास लाठी है, भैंस भी उसी की होगी वाला जंगल का कानून था।

अगर किसी को आपकी पूजा पद्दतियों, आपके यज्ञ करने पर आपत्ति है तो वो मारीच की तरह उसमें हड्डियाँ फेंककर जा सकता था। अगर किसी को आपके रहने के क्षेत्र अपने क्षेत्र से ज्यादा हरे-भरे, पशु-पक्षियों से भरे, रमणीय लगते हैं तो वो ताड़का की तरह जबरन घुसपैठ करके वहां बस सकता था। अगर किसी को अपनी पत्नी के अलावा दूसरों के घरों की स्त्रियाँ पसंद आ जाएँ तो वो रावण या बाली की तरह उन्हें उठा कर ले जा सकता था। श्री राम धर्म को व्यक्ति से पहले रखते हैं, स्वयं से भी आगे। यही वजह है कि जब "रावन रथी विरथ रघुवीरा" देखकर विभीषण अधीर होने लगते हैं तो तुलसीदास राम के रथ के रूप में धर्म के लक्षणों की पुनःस्थापना कर देते हैं।

तुलसीदास भक्ति काल के कवि हैं तो उनका ग्रन्थ जहाँ भक्ति से सराबोर है, वहीँ वाल्मीकि के रामावतार मर्यादापुरुषोत्तम हैं, उनके गुणों की अपेक्षा आम आदमी से की जा सकती है। दोनों की बात इसलिए क्योंकि न पढ़ने से कई समस्याएँ हैं। उदाहरण के तौर पर वाल्मीकि रामायण या किसी "लक्ष्मण-रेखा" की बात नहीं करता। तो कई बार मर्यादा लांघने के लिए जो लक्ष्मण-रेखा पार करना कहा जाता है, उसका सन्दर्भ रामचरितमानस का लंका कांड (रावण-मंदोदरी संवाद) होगा। कई बार लोग हनुमान चालीसा को रामचरितमानस का ही कोई हिस्सा "मान" लेते हैं। वो भी रामचरितमानस में नहीं आता।

कथा का एक क्रम में होना रामायण कहलाने के लिए आवश्यक है इसलिए कम्ब रामायण होती है लेकिन तुलसीकृत रामायण नहीं कह सकते। उनकी रामकथा का नाम रामचरितमानस ही रहेगा। काण्डों के नाम में जहाँ राम-रावण युद्ध होता है उसे वाल्मीकि युद्ध काण्ड कहते हैं और तुलसीदास लंका कांड। वाल्मीकि के सुन्दरकाण्ड में वीभत्स, रौद्र जैसे रस आयेंगे लेकिन तुलसीदास की भक्ति इसे एक दो बार भी उभरने नहीं देती। यानी सीधे तौर पर कहा जाए तो भावना बेन नाजुक होने पर वाल्मीकि रामायण पढ़ने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। ऐसे में रामचरितमानस ठीक रहेगा।

बाकी चर्चा इसलिए क्योंकि दोनों ग्रन्थ हमारे हैं, इसलिए उनपर बात भी हमें ही करनी होगी। अंडमान के आदिवासियों की तरह आत्मा-चोर गिद्धों को तीर नहीं मारेंगे तो कब नोच भागे इसका कोई ठिकाना नहीं!
✍🏻आनन्द कुमार जी की पोस्टों से संग्रहित
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बिहार का प्रथम गौरव गान

Posted: 25 Mar 2022 11:27 PM PDT

बिहार का प्रथम गौरव गान

संकलन ज्योतिन्द्र मिश्र

 भारत जननी के ह्रदय हार, हे !प्यारे गौरव मय बिहार

अगणित निधियों से भरा हुआ, तू तेजपूर्ण प्यारा प्रदेश

है जाग रही तव विमल कीर्त्ति, तेरी गुण गाथाएं आशेष

तू शोभित नंदन वन समान, तेरी सुखमय छवि है अनंत

प्रतिपल तरु पल्लव द्रुम दल पर, छाया रहता मनहर वसन्त

तू है सुषमा का शुभ्र सार

हे ! प्यारे गौरवमय बिहार ।।१।।

परिधान हरित से सजी हुई,सुन्दरता का मृदु हास यहॉं

धन- धान्य पूर्ण सुभगा सुखदा,कमला का मधुर निवास यहॉं

प्रिय प्रकृति बाला है झूम रही,निज यौवन मद में मतवाली

लहरा लहरा कर लुटा रही, लतिकाएँ सौरभ की डाली

तेरी अनुपम शोभा अपार

हे ! प्यारे गौरवमय बिहार ।।२।।

है दिखा रही अभिराम अमित, निज छटा श्याम तन गिरिमाला

जिसके पट से चमकाती है, प्राची कंचन रवि का प्याला

तेरे उर पर जयमाल सदृश , गंगा की धारा बलखाती

कल कल निनादिनी वेणु बजा ,रागिनी तेरे यश को गाती

तू ही भारत का नव श्रृंगार

हे! प्यारे गौरव मय बिहार ।।३।।

तू दृढ़ पर्वत की भांति वीर, कितने क्षति वैभव देख चुका

तू दे रत्नाकर के समान , भारत को रत्न अनेक चुका

हे! दिवानाथ सम तेज पुंज , तव सुयश रश्मियाँ छ्हराती

राकेश ज्योत्स्ना के समान ,नित कीर्त्ति कलाएँ लहराती

गूंजी जग में तेरी पुकार

हे! प्यारे गौरवमय बिहार ।।४।।

ऋषि कौशिक का कटु कष्ट यहॉं, सुखधाम राम ने दूर किया

मारीच ताड़का का गुमान ,निज धनुष बाण से चूर किया

फिर यही दिव्य निज पद रज से ,गौतम की प्रिय नारी तारी

जो शिला रूपिणी रहती थी , वर्षातप। सह संकट भारी

तू बना अवनि पर स्वर्ग द्वार

हे! प्यारे गौरवमय बिहार ।।५।।

तू ही प्यारी जन्म भूमि , प्रिय पतिपद प्राणा सीता की

तूने देखी हैं क्रीड़ाएं , मंजुल -जग-जननि। पुनीता की

श्रीराम जानकी का मनहर , तू ने देखा है मंजु - मिलन

तू ने देखा शिव चाप भंग,फिर परशुराम का गर्व गहन

देखें ऋषि नृप सब सत्य सार

हे!प्यारे गौरवमय बिहार ।।६।।

मिथिला पति देखे नृप विदेह, सीता को देखा स्वयंवरा

उन कर कोमल स्मृतियों से ,चित्रित मिथिला की वसुंधरा

ललचाते जिस पर थे सुरेश ,तू ने अलभ्य वह लाभ लिए

जिनकी सुधि से ही भावुक मन, प्रफुलित होते वह भाव लिए

तू तुलसी मानस का आधार

हे! प्यारे गौरवमय बिहार ।।७।।

मुंगेर यही कह रहा मौन , नृप कर्ण यहीं थे बलशाली

निज प्रजा प्राण सुषमा निधान, दुर्घष सत्य के प्रतिपाली

दिनराज पुत्र दानी महान थे , युद्ध कला निधि कहलाए

सुरराज इंद्र ने हो याचक , जिनके सम्मुख कर फैलाये

थे धीर वीर अतिशय उदार

हे! प्यारे गौरवमय बिहार ।।८।।

नवरत्न शिरोमणि कालिदास ,कवि कंज यहॉं उत्पन्न हुए

जिनकी रचना से भारत में , शुचि सरस् काव्य संपन्न हुए

थी कपिलवस्तु की धन्य भूमि , जहां शांत बुद्ध अवतार हुआ

वैराग्य त्याग करुणा सप्रेम का , मंजू रूप साकार हुआ

सिखलाया जग को ज्ञान सार

हे! प्यारे गौरवमय बिहार ।।९।।

तू ने अशोक युग में पाया, साम्राज्य सुखद उन्नति प्रधान

उत्पन्न किये नीतिज्ञ विज्ञ , चाणक्य चतुर द्विजवर समान

पाटलिपुत्र के कण कण में ,इतिहास समुज्ज्वल दीप्ति मान

हो चुके यहीं पर चन्द्र गुप्त ,दिग्विजयी कल कौशल निधान

तू सौख्य सार हे गुणागार

हे ! प्यारे गौरवमय बिहार ।।१०।।

विद्यापति से कवि भूषण में, काव्यामृत तू ने पान किया

गुण मंडित मण्डन भारति का , तू ने अनन्त आह्वान किया

दिनकर समान प्रतिभाशाली कवि, प्रभा आज भी जगा रहे

फुलवारी नव रचनाओं के ,सुरभित सुमनों की लगा रहे

कवियों के तू हृदयोद्गार

हे प्यारे गौरवमय बिहार ।।११।।

है बुद्ध गया सम पुण्य तीर्थ , वर वैद्यनाथ सुखधाम यहॉं

प्राचीन युगों की कहते हैं ,जो स्वर्ण कथा अभिराम यहॉं

वह विद्यालय नालंदा का ,अभिमान देश का आज हुआ

थी ख्यात प्राप्त जिसकी जग में ,इस भव्य भूमि का ताज हुआ

तू हरता जन मन के विकार

हे ! प्यारे गौरवमय बिहार ।।१२।।

कल और कारखाने अनेक , तेरे प्रतिपालित चमक रहे

अभ्रक जगव्यापी सार खनिज तव वक्षस्थल में दमक रहे

कंचन पूरित कनक मटिया ,जहां बहती सरिता बरणारी

जगती तल की विधि ने दी है, अनमोल रत्न निधियां सारी

तू नव मणियों का रत्न हार

हे! प्यारे गौरव मय बिहार ।।१३।।

सोया था जब भारत अचेत , निज शान और अभिमान लुटा

तब तेरी ही झंकारों से , था देश प्रेम का गान उठा

चंपारण में ही सर्व प्रथम , गांधी ने स्वत्व विचार किया

स्वाधीन भाव की ज्योति जगा ,खादी का विपुल प्रचार किया

कर दिया दूर फिर देश भार

हे! प्यारे गौरवमय बिहार ।।१४।।

जग वंदनीय आलोक पूर्ण , तू भारत माँ का प्राण बना

सहृदय लिए तू दीन हीन , पद दलित कृषक दल त्राण बना

तू निश्चित उन्नत पथ पर दृढ़ ,चलता है अमिट प्रभाव भरे

तू है भारत का अंत स्थल , जिसमें अनेक सद्भाव भरे

सहता चाहे कितना प्रहार

हे ! प्यारे गौरवमय बिहार ।।१५।।

तेरा असीम वैभव विलोक ,दुर्दैव दुष्ट ने हो अधीर

भूकम्प भयानक से क्षण में ,डाला था तेरा हृदय चीर

कितनी अमूल्य निधियाँ छीनी , कितनों का ऊष्ण रक्त पीया

नत करने को तव भव्य भाल ,कितना ही प्रबल प्रयत्न किया

थी त्राहि त्राहि सबकी पुकार

हे! प्यारे गौरवमय बिहार ।।१६।।

पर वीर सैनिक के समान , तू कमर बांध उठ खड़ा हुआ

सब विपदाओं के जाल तोड़ ,स्वतंत्र युद्ध में खड़ा हुआ

तू धन्य धन्य सद्गुणागार ,भारत भू पर तू अग्रगण्य

सच्चे स्वदेश सेवी तेरे ,सेवा व्रतधारी पुत्रधन्य

तू वीर भूमि भावुक उदार

हे , प्यारे गौरव मय बिहार ।।१७।।

राजेन्द्र वीर की जय ध्वनि से ,आज विश्व सब गूँज रहा

कर आगे जिसका राष्ट्र चरण , स्वातंत्र्य देवि के पूज रहा

नर , वीर , खनिज और रत्न खान ,जगती का तू कल्याण करे

तेरे लालों की दिव्य दीप्ति , जन मन पंकज में प्राण भरे

तुझको प्रणाम है कोटि वार

हे! प्यारे गौरवमय बिहार।।१८।।

© किशोरी देवी चतुर्वेदी

सौजन्य --ब्रज वल्लभ चतुर्वेदी

प्रस्तुति - ज्योतीन्द्र मिश्र
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निरहुआ का गाना हुआ सार्थक

Posted: 25 Mar 2022 08:47 AM PDT

निरहुआ का गाना हुआ सार्थक

(डॉ. दिलीप अग्निहोत्री-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)
विगत पांच वर्षों में उत्तर प्रदेश ने अनेक रिकार्ड बनाये है। विकास की पचास योजनाओं में यूपी नम्बर वन बना। चार दशक में पहली बार किसी मुख्यमंत्री को दुबारा जनादेश हासिल हुआ। इस क्रम में एक रोचक कीर्तिमान भी बना। इसके पहले किसी पार्टी के चुनावी गीत के एक एक शब्द इस अंदाज में चरितार्थ नहीं हुए थे। निरहुआ की आवाज में इस गाने ने धूम मचा दी थी-
चाहे जितना जोर लगा लो

चाहे जितना शोर मचा लो

जीतेगी बीजेपी ही

आएंगे फिर योगी ही

अहिएँ फिर से योगी जी... और योगी जी आ गये।

इस गाने ने भी कैंपेन सॉन्ग के इतिहास में जगह बना ली है। राजनीतिक दलों द्वारा चुनावी गीत जारी करने का चलन रहा है लेकिन सफलता किसी एक को मिलती है। अन्य पार्टियों के लिए ऐसे गीत अंततःनिराश करने वाले होते है। अक्सर गीत के बोल निशाने पर नहीं लगते। चुनावी गीत का मंसूबा निष्प्रभावी ही रहता है। इस बार भाजपा का चुनावी गीत खुशियां लेकर आया है। कांग्रेस,आम आदमी पार्टी ने भी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए अपना थीम सॉन्ग जारी कर दिया था। इसके माध्यम से सरकार पर निशाना लगाया गया था। अनेक लोक लुभावने वादे किए गए लेकिन आमजन पर उनका असर नहीं हुआ। वस्तुतः सच्चाई के निकट रहने वाले शब्द ही आमजन मानस को प्रभावित करते है। निरहुआ के गीत में सच्चाई थी। पांच वर्षों के कार्य इस सच्चाई को प्रमाणित करने वाले थे। शायद यही कारण था कि गाते समय निरहुआ में भी जबरदस्त उत्साह झलक रहा था। ऐसा ही आत्मविश्वास मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ में था। वह उत्तर प्रदेश का सर्वाधिक भ्रमण करने वाले मुख्यमंत्री रहे है। उनका दावा था कि पिछले तीन मुख्यमंत्रियों के मुकाबले उन्होंने प्रदेश में सर्वाधिक बार दौरा किया है। प्रत्येक यात्रा में वह संबंधित क्षेत्र के लिए कोई न कोई विकास योजना की सौगात लेकर जाते थे। इसके साथ ही पहले से चल रहे विकास कार्यों का जायजा भी लेते थे। योगी को जमीनी स्थिति की सर्वाधिक जानकारी थी। यही उनके आत्मविश्वास का आधार था। चुनावी प्रक्रिया के प्रारंभिक चरण में योगी एक चैनल द्वारा आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए थे। वहां उनसे छत्तीस वर्ष की एक परम्परा पर प्रश्न किया गया। पूंछा गया कि इस अवधि में कोई मुख्यमंत्री दुबारा सत्ता में नहीं आया। योगी ने एक लाइन का जवाब दिया था। उनका कहना था कि-

मैं आऊंगा न

यह उस विश्वास की अभिव्यक्ति थी,जिसे उन्होंने पांच वर्ष की मेहनत से अर्जित किया था। पांच में दो वर्ष वैश्विक महामारी कोरोना से प्रभावित रहे। इसके बाद भी योगी ने यूपी के विकास को प्रभावित नहीं होने दिया। पिछली कई सरकारों की कुल उपलब्धियों की इन पांच वर्षों में पीछे छोड़ दिया गया। कानून व्यवस्था को मजबूत किया गया। विकास के अनुकूल माहौल बनाया गया। इससे विकास यात्रा तेजी से आगे बढ़ने लगी। पांच वर्ष की इन उपलब्धियों के आधार पर ही नरेंद्र मोदी ने योगी आदित्यनाथ को कर्मयोगी बताया था।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी सार्वजनिक जीवन में कर्म योग पर अमल करते हैं। वर्तमान समय में उन्होंने ईमानदारी व मेहनत से जन व राष्ट्रसेवा की मिसाल कायम की है। उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री व देश के प्रधानमंत्री के रूप में पूर्ण क्षमता कुशलता से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाह किया है। इक्कीस वर्ष की इस अवधि में उन्होंने एक भी अवकाश नहीं लिया। नरेन्द्र मोदी को कर्म योग की जीवन शैली पसन्द है। यही कारण है कि वह अक्सर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की सराहना करते रहे हैं। योगी आदित्यनाथ गोरक्ष पीठ के श्रीमहंत हैं लेकिन समाज जीवन में वह भी कर्मयोगी हैं। बिना किसी अवकाश के लगातार पूरी ईमानदारी से कार्य करना उनकी भी विशेषता है। कोरोना पॉजिटिव होने के बाद भी उन्होंने विश्राम नहीं किया। अपने आवास से लगातार वर्चुअल माध्यम से सक्रिय रहे। अधिकारियों के साथ बैठक करते रहे,उनको निर्देश देते रहे,पूरे प्रदेश से आपदा प्रबंधन के फीडबैक प्राप्त करते रहे। कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव आने के कुछ घण्टे बाद ही वह वह जनपदों की व्यवस्था का भौतिक जायजा लेने निकल गए। यह क्रम कई दिनों तक जारी रहा। साठ से अधिक जनपदों में उन्होने व्यवस्था का परीक्षण किया। सभी जनपदों में ऑक्सीजन प्लांट लगवाने और संभावित तीसरी लहर की तैयारियों पर उनका विशेष जोर था। इसके पहले कोरोना की पहली लहर के दौरान उनका कर्म योग परिलक्षित हुआ था। उस समय वह लगातार आपदा प्रबंधन में व्यस्त थे। योगी के इस प्रबंधन मॉडल की दुनिया में सराहना हो रही थी। अनेक विकसित देशों ने भी योगी मॉडल की प्रशंसा की थी। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी योगी मॉडल की सराहना की थी। इसी दौरान योगी आदित्यनाथ के पूर्व आश्रम पिता का निधन हुआ। योगी आदित्यनाथ यह समाचार सुन कर भावुक हुए थे। फिर भी प्रदेश के हित को उन्होंने वरीयता दी। वह पुनः कोरोना आपदा प्रबंधन के कार्यों में व्यस्त हो गए। उन्होंने अपने मन की व्यथा को दबाए रखा। यही तो कर्मयोग है। इसी कार्यशैली से वह पूर्वी उत्तर प्रदेश में चार दशकों की जापानी बुखार समस्या का समाधान करते हैं। चालीस वर्षों से कहर बनी इस बीमारी पर मात्र पांच वर्षों में पंचानबे प्रतिशत तक नियंत्रण स्थापित किया गया। इसी कार्यशैली से पचास योजनाओं में उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर पहुंच गया।

पहले उत्तर प्रदेश पिछड़ा और बीमारू माना जाता था। अब विकास के कीर्तिमान कायम हो रहे हैं। उत्तर प्रदेश में जरूरतमन्दों को खाद्यान्न वितरण,आवास शौचालय,निःशुल्क गैस कनेक्शन व विद्युत कनेक्शन,आयुष्मान भारत,प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि आदि योजनाओं का लाभ मिल रहा है। इससे उन सभी का जीवन अब अधिक सुविधापूर्ण हो गया है। उत्तर प्रदेश में हाई-वे, एक्सप्रेस वे,डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर,डिफेंस कॉरिडोर के कार्य तेज गति से आगे बढ़ रहे हैं। खेती से जुड़े कार्यों को भी पूरी सतर्कता से जारी रखा गया। बीज, खाद,उपज बेचने के उचित प्रबन्ध किये जाने से किसानों ने रिकॉर्ड उत्पादन किया। योगी सरकार ने विगत पांच वर्षों में किसानों से उनकी उपज के खरीद के हर साल नये रिकॉर्ड बनाये। उत्तर प्रदेश में हर घर नल पहुंचाने का कार्य भी तेज गति से आगे बढ़ रहा है। कोरोना के कारण बनी परिस्थितियों में रेहड़ी,ठेला लगाने वालों की आजीविका पटरी पर लाने के लिए स्वनिधि योजना के अंतर्गत बैंकों से जोड़ा गया। प्रदेश में सार्थक बदलाव की शुरुआत हुई है। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि जनता के हिस्से का एक एक पैसा जनता के खाते में पहुंचे। उत्तर प्रदेश निवेश का केन्द्र बन रहा है। बड़ी कम्पनियां उत्तर प्रदेश में आने के लिए लालायित हो रही हैं। इन्फ्रास्ट्रक्चर के मेगा प्रोजेक्ट बन रहे हैं। इण्डस्ट्रियल कॉरिडोर निर्मित हो रहे हैं। अन्न वितरण योजना से उत्तर प्रदेश के पन्द्रह करोड़ लोग योजना से सीधे लाभान्वित हो रहे हैं। योजना के तहत अन्त्योदय एवं पात्र गृहस्थी कार्डधारकों के साथ ही अन्य जरूरतमन्दों को भी सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकानों से राशन उपलब्ध कराने में मदद मिली है। योजना के तहत प्रदेश में खाद्यान्न के साथ ही एक वॉटर प्रूफ बैग भी दिया जा रहा है। नयी अयोध्या बनाने की संकल्पना को मूर्त रूप देने की कार्यवाही तेजी से आगे बढ़ रही है। इन परियोजनाओं के पूर्ण हो जाने पर वैश्विक जगत को एक नयी अयोध्या देखने को मिलेगी।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश पहले केंद्रीय योजनाओं में रुकावट पैदा करता था। अब उत्तर प्रदेश केंद्र की योजनाओं को लागू करने में अग्रणी राज्यों में हैं। अपराधियों पर कार्रवाई,गरीबों को घर, अनाज मिलना संभव हुआ। वंशवाद की राजनीति से ऊपर उठकर सबका साथ सबका विकास के आधार पर सरकार कार्य करती रहेगी। यही कारण है कि सरकार को।पुनः जनादेश मिला है।
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स्वयं से प्रतिस्पद्र्धा की सरकार

Posted: 25 Mar 2022 08:44 AM PDT

स्वयं से प्रतिस्पद्र्धा की सरकार

(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)

  • योगी ने कहा सरकार के पहले कार्यकाल में थी कुशासन से सुशासन की प्रतिस्पद्र्धा
  • अब करनी होगी स्वयं से प्रतिस्पद्र्धा
  • बिना रुके बिना, बिना झुके और बिना थके जनता की सेवा का संकल्प


उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों के बीच रिकार्ड बनाते हुए योगी आदित्यनाथ ने लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इस अवसर पर उन्हांेने एक महत्वपूर्ण बात कही। योगी ने अपने इस दूसरे कार्यकाल को लेकर कहा कि अब सरकार को स्वयं से प्रतिस्पद्र्धा करनी है। अब तक दूसरे दलों की सरकार से प्रतिस्पद्र्धा थी। योगी ने कहा कि सरकार के पहले कार्यकाल में कुशासन से सुशासन स्थापित करने के लिए प्रतिस्पद्र्धा थी। भाजपा सरकार ने वो कार्य सम्पन्न कर लिया है। अब सुशासन को और भी सुदृढ़ करने करने के लिए क्या करना चाहिए, इसकी प्रतिस्पद्र्धा है। योगी ने कहा कि अब स्वयं से प्रतिस्पद्र्धा करने का दौर शुरू होगा। इसके लिए हम सभी को तैयार रहना होगा। एक दिन पहले ही योगी आदित्यनाथ ने विधायकों को संबोधित करते हुए कहा था कि वो बिना रुके, बिना झुके और बिना थके पांच वर्ष तक समर्पित भाव से प्रदेश की जनता की सेवा करेंगे। योगी आदित्यनाथ को लखनऊ के अटल बिहारी बाजपेई इकाना स्टेडियम में लगभग 2 लाख जनता के बीच राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलायी। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा, भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री पार्टी के सांसद, विधायक और पदाधिकारी भी मौजूद थे। इस प्रकार योगी आदित्यनाथ ने स्वयं से प्रतिस्पद्र्धा का यह संदेश सिर्फ उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रखा है। बल्कि पूरे देश तक पहुंचाया है।

स्वयं से प्रतिस्पद्र्धा एक अमोघ मंत्र भी है जो कभी निष्फल नहीं जाता। इसे ही भारतीय दर्शन में आत्मचिंतन भी कहा गया है। अपने बारे में सोचने, निष्कर्ष निकालने का साहस बहुत कम लोग ही कर पाते हैं। संत कबीर ने कहा-

बुरा जो देखन मैं चला

बुरा न मिलिया कोय

जो मन खोजा आपना

तो मुझसे बुरा न कोय।।

यह चिंतन ही स्वयं से प्रतिस्द्र्धा है। योगी आदित्यनाथ ने दूसरी बार सरकार बनाते समय अपनी सरकार का यही लक्ष्य बनाया कि हमने कुशासन से सुशासन की तरफ कदम बढ़ाया है। हमें रास्ता मिल गया लेकिन अभी मंजिल नहीं मिली है। भारतीय दर्शन का चरैवेत-चरैवेत अर्थात् चलते रहो-चलते रहो का सिद्धांत शाश्वत है। हम ठहर गये तो मंजिल हमसे और दूर होती चली जाएगी। विधायक दल की बैठक में नेता चुने जाने के बाद भाजपा विधायकों को संबोधित करते हुए योगी आदित्यनाथ ने यही बात तो कही थी। उन्हांेने कहा कि वे बिना रुके, बिना झुके और बिना थके पांच वर्ष तक समर्पित भाव से जनता की सेवा करेंगे।

योगी आदित्यनाथ की बात को हो सकता है, कुछ भाजपाई न समझ पाए हों लेकिन बीते पांच साल के दौरान इतना तो उन्हांेने भी जान लिया होगा कि योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली कैसी है। योगी को मुख्यमंत्री किन हालात में बनाया गया था, यह किसी से छिपा नहीं है और योगी को बीच में हटाने के लिए भी जो राजमहली षड़यंत्र हुए, उनको भी योगी अच्छी तरह समझते हैं। इस बार की सरकार योगी आदित्यनाथ के दम पर बनी है और मुख्यमंत्री की कुर्सी पर भी वे अपने दम पर ही बैठ रहे हैं। इसलिए उनके ध्येय डगमगाएंगे नहीं बल्कि सुदृढ़ता से पूर किये जाएंगे। पिछली सरकार में भाजपा के संकल्प पत्र पर योगी आदित्यनाथ की सरकार ने अमल किया। प्रदेश में गंुडाराज-माफियराज को समाप्त करने के लिए पूरे पांच साल तक बुलडोजर चला है। अभी चुनाव के समय योगी ने कहा था कि माफियाओं की अवैध सम्पत्ति पर चलने वाले बुलडोजर मरम्मत होने को गये हैं। मरम्मत कराने की जरूरत तभी होती है, जब कोई मशीनरी पूरी क्षमता से काम करती है। प्रदेश की जनता ने देखा है कि योगी के बुलडोजर कहां-कहां चल रहे थे लेकिन यह भी सच है कि अभी प्रदेश से पूरी तरह माफियाओं का सफाया नहीं हो पाया है। प्रदेश की सरकार ने इसीलिए बुलडोजरों की मरम्मत करा ली है ताकि कांटों की तरह चुभ रहे माफिया जमींदोज किये जा सकें। इसमें कोई संदेह नहीं कि यह ऐसी प्रजाति है जो पूरी तरह नष्ट की ही नहीं जा सकती। सतयुग से लेकर द्वापर तक यह प्रजाति रही है लेकिन जैसे उन युगों में महाशक्तियां अवतरित हुईं, ठीक वैसी ही योगी आदित्यनाथ को भी भूमिका मिली है। पूर्व की सरकार में संकल्प पत्र के वादे पूरे किये गये। साथ ही विकास के नये कार्यक्रम भी बने हैं। इनका कार्यान्वयन निर्धारित समयावधि में और गुणवत्ता के साथ किया जाना है। योगी ने एक्सप्रेस वे बनवाए हैं लेकिन जो गड्ढे बंद कराये गये थे, वे और गहरे-चैड़े हो गये हैं। चुनाव के दौरान नौकरशाही का वह चेहरा भी सामने आ गया था जो पिछले लगभग चार दशक में बना है। यह चेहरा है सरकार का मुंह देखकर काम करने का। इसीलिए कुछ अफसरों को लगा था कि इस बार प्रदेश में सरकार बदल सकती है, इसीलिए उन्हांेने पार्कों की चहरा दीवारी का रंग बदल दिया था। इस तरह की नौकरशाही को कड़ा पाठ पढ़ाना योगी सरकार का ध्येय होना चाहिए। जनता को रामराज देने का योगी ने वादा किया था, उस पर ही वह अमल कर रहे हैं। इसीलिए मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से पहले ही योगीे आदित्यनाथ ने कहा कि हम बिना रुके, बिना झुके और बिना थके प्रदेश की जनता की सेवा करेंगे। संस्कृत में एक श्लोक है, जिसका तात्पर्य यह कि कुछ लोग विघ्न-बाधाओं के डर से कार्य शुरू ही नहीं करते। कुछ लोग कार्य तो शुरू कर देते हैं लेकिन बाधाएं आने पर कार्य को छोड़ देते हैं और कुछ लोग ऐसे होते हैं जो काम शुरू करते हैं और चाहे जितनी विघ्न-बाधाएं आती रहें लेकिन कार्य को समाप्त करके ही दम लेते हैं। योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में लगातार दूसरी बार सरकार बनाते समय न रुकनेे, न झुकने और न थकने की जो दृढ़ इच्छा शक्ति दिखाई है, वो भी उसी प्रकार की है। वे अपने लक्ष्य को तय कर चुके हैं। नये भारत का नया उत्तर प्रदेश इसी दृढ़ इच्छा शक्ति से ही बन सकता है। वे जानते हैं कि सरकार भी एक टीम वर्क है। इसीलिए पार्टी के सभी विधायकों से उन्हांेने बिना रुके, बिना झुके और बिना थके जनता की सेवा करने का आह्वान किया है।
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राज्य सभा में भी मान का ‘मान’

Posted: 25 Mar 2022 08:41 AM PDT

राज्य सभा में भी मान का 'मान'

(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)

  • पंजाब से आम आदमी पार्टी के पांचों उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित
  • मुख्यमंत्री एक्शन मोड में
  • पटियाला में 80 करोड़ के घोटाले की दुबारा खोली फाइल


पंजाब के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री भगवंत मान ने विधानसभा चुनाव की जीत का रथ राज्यसभा के द्वार तक पहुंचा दिया है। राज्यसभा चुनाव में भी आम आदमी पार्टी ने अपने पांचों उम्मीदवारों को निर्विरोध विजय दिलाने का रास्ता बना दिया है। पंजाब में राज्यसभा के लिए 24 मार्च को दिन में तीन बजे तक नामांकन वापस लेने का समय था। किसी अन्य दल के नेता ने नामांकन किया नहीं था। इस प्रकार आपके पांचों उम्मीदवार राघव चड्ढा, क्रिकेटर हरभजन सिंह, संदीप पाठक, संजीव अरोड़ा और अशोक मित्तल निर्विरोध राज्यसभा के सदस्य हो गये हैं। हालांकि इन चुनावों के नतीजे की आधिकारिक घोषणा 31 मार्च को होगी। राज्यसभा में अब आम आदमी पार्टी के सांसदों की संख्या बढ़कर 8 हो गयी है। तीन राज्यसभा सदस्य दिल्ली से हैं। उधर, भगवंत मान ने आम आदमी पार्टी के मुख्य एजेन्डे अर्थात् भ्रष्टाचार के विरुद्ध मुहिम को तेजी से शुरू कर दिया है। बड़े-बड़े घोटालों की फाइलें फिर से खोली जा रही हैं।

आम आदमी पार्टी ने सत्ता संभालते ही भ्रष्टाचार के मामलों की फाइलों को खोलकर इनकी जांच दोबारा से शुरू कर दी है। इसी कड़ी में सरकार के निर्देशों पर पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने पटियाला के शंभू ब्लॉक में एक हजार एकड़ जमीन के अधिग्रहण में 80 करोड़ रुपये के ग्रामीण विकास घोटाले की जांच शुरू की है।

कथित तौर पर पंजाब के पटियाला जिले के शंभू ब्लॉक में पांच ग्राम पंचायतों को जमीन अधिग्रहण के लिए दिए गए 260 करोड़ मुआवजे में से 80 करोड़ रुपए की राशि के गबन करने के आरोप लगे थे। पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है। आरोप है कि 260 करोड़ रुपये के मुआवजे में से कथित तौर पर 80 करोड़ की धनराशि के गबन के इस मामले में पैसे को खर्च करने के लिए न तो तकनीकी मंजूरी ली गई और न ही सक्षम प्राधिकारी से कोई अनुमति ली गई थी। एक शिकायत पर कार्रवाई करते हुए सतर्कता ब्यूरो (वीबी) ने संबंधित अधिकारियों, व्हिसल ब्लोअर के बयान दर्ज करने शुरू कर दिए हैं और उन पांच गांवों के बैंक स्टेटमेंट को अपने कब्जे में ले लिया है जहां से धन की हेराफेरी की गई थी। गांवों में तख्तपुरा, सेहरा, सेहरी, आकरी, पाबरा शामिल हैं। एसएसपी वीबी मनदीप सिंह सिद्धू ने कहा कि विजिलेंस ब्यूरो ने जांच शुरू कर दी है और प्राथमिकी दर्ज करने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को अपनी रिपोर्ट सौंपेगा, क्योंकि प्रथम दृष्टया में सरकारी अधिकारियों, सरपंचों और अन्य निर्वाचित प्रतिनिधियों की मिलीभगत है।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने भ्रष्टाचार के मामलों से निपटने के लिए जहां व्हाट्सएप नंबर जारी करने का ऐलान किया है वहीं ड्रग्स के मामलों से निपटने के लिए भी कार्रवाई शुरू कर दी है। सरकार ने शिअद नेता और पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ ड्रग मामले की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) के पुनर्गठन का आदेश दिया है। इस मामले में अब अपराध शाखा के पुलिस महानिरीक्षक, गुरशरण सिंह संधू, जो अपने व्यावसायिकता और स्वच्छ सेवा रिकॉर्ड के लिए जाने जाते हैं, एआईजी डॉ राहुल एस की अध्यक्षता वाली चार सदस्यीय टीम के कामकाज की निगरानी करेंगे। टीम के अन्य सदस्यों में एआईजी रंजीत सिंह, डीएसपी रघबीर सिंह और अमनप्रीत सिंह शामिल हैं।

पंजाब में नई सरकार के गठन के बाद से मुख्यमंत्री भगवंत मान एक्शन मूड में नजर में आ रहे हैं। भगवंत मान लगातार एक के बाद एक बड़े फैसले ले रहे हैं। गत 20 मार्च को उन्होंने मजीठिया ड्रग्स मामले के लिए एक नई एसआईटी के गठन का आदेश दिए और अब यही एसआईटी करोड़ों रुपये के ड्रग्स मामले की जांच करेगी। नई एसआईटी का गठन पंजाब पुलिस के आईजीपी गुरशरण सिंह संधु के नेतृत्व में किया गया है।

हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनाव में अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली आम आदमी पार्टी की भारी जीत के बाद मान को पंजाब के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद मान की तरफ से जारी पुलिस विभाग के लिए मजीठिया मामले में जांच का यह पहला आदेश है। चार सदस्यीय टीम में एआईजी एस राहुल, एआईजी रंजीत सिंह ढिल्लों, डीएसपी रघुबीर सिंह और पीपीएस अमरप्रीत सिंह हैं। नई एसआईटी से पहले एआईजी बलराज सिंह की अध्यक्षता में एसआईटी इस मामले की जांच कर रही थी। बता दें कि पिछले साल 20 दिसंबर 2021 को एनडीपीएस एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत पंजाब के पूर्व मंत्री और शिरोमणि अकाली दल नेता बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ आरोपों की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया था। ड्रग्स मामले में आरोपी बिक्रम सिंह मजीठिया इस समय पटियाला जेल में बंद हैं। वह पंजाब विधानसभा चुनाव में अमृतसर सीट से चुनाव लड़ रहे थे लेकिन वह चुनाव हार गए। मजीठिया को आप की जीवनज्योत कौर (50), एक सामाजिक कार्यकर्ता, ने हराया। मजीठिया ने 24 फरवरी को न्यायालय में आत्मसमर्पण किया था। पंजाब में सत्ता हासिल करने के बाद अब आम आदमी पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर भी खुद को स्थापित करना चाहती है लेकिन चुनावी राजनीति में सियासी समीकरण के साथ-साथ सामाजिक समीकरण को भी साधना जरूरी है। देश में दलित मतदाताओं को ध्यान में रखते हुए आम आदमी पार्टी ने पंजाब से एक बड़ा संदेश देने की कोशिश की है। पंजाब में 32 फीसदी दलित वोट पर नजर रखते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान के मंत्रिमंडल में अनुसूचित जाति के 4 नेताओं को रखा गया है।

कैबिनट में शामिल हरपाल सिंह चीमा, उन 4 दलित मंत्रियों में से एक हैं, जो पिछली विधानसभा में विपक्ष के नेता थे। भगवंत मान मंत्रिमंडल के 10 मंत्रियों ने 19 मार्च को शपथ ली थी। हालांकि रिपोर्ट है कि जल्द ही कैबिनेट में खाली 7 पदों को भी भरा जाएगा। बहरहाल, विचार-विमर्श के दौरान आम आदमी पार्टी ने इस समुदाय के 4 नेताओं को शामिल करके दलितों को उचित प्रतिनिधित्व देने का फैसला किया। पार्टी नेताओं ने कहा कि कांग्रेस द्वारा मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में एक दलित चेहरे को चुनने के बावजूद समुदाय ने बड़े पैमाने पर आम आदमी पार्टी को वोट दिया।
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सोने की लंका में आ गयी कंगाली स्कूली किताबों की छपायी के लिए नहीं मिला कागज

Posted: 25 Mar 2022 08:22 AM PDT

सोने की लंका में आ गयी कंगाली स्कूली किताबों की छपायी के लिए नहीं मिला कागज

कोलंबो। श्रीलंका में हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं। करीब 2.2 करोड़ आबादी वाले श्रीलंका की इकोनॉमी पहले से मुश्किल में थी। चीन के कर्जजाल में फंसकर यहां अब हालात बेकाबू हो गए हैं। दूध, ब्रेड, चीनी, चावल जैसी रोजमर्रा की चीजों के दाम आसमान में पहुंच गए हैं। आबादी के बड़े हिस्से के लिए इन्हें खरीदना मुश्किल हो गया है। आलम ये है कि स्कूल की किताबें छपवाने के लिए इस देश के पास कागज तक नहीं है। आइए जानते हैं आखिर सोने की लंका कहे जाने वाले श्रीलंका की यह हालत कैसे हो गई? श्रीलंका के शैक्षिक प्रकाशन विभाग के आयुक्त जनरल पी.एन. इलपेरुमा ने कहा है कि कागज और अन्य संबंधित सामान की कमी के कारण स्कूली किताबों की छपाई में देरी हो रही है। डेली मिरर की रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी गई है। उन्होंने डेली मिरर को बताया कि देश में मौजूदा ईंधन संकट के कारण स्कूलों को छपी हुई किताबों के वितरण में भी देरी हो रही है। फ्यूल के लिए पंप पर लंबी लाइन लग रही हैं। सरकार के खिलाफ लोगों के उग्र विरोध की खबरें आ रही हैं। सिचुएशन कंट्रोल में करने के लिए सरकार ने गैस स्टेशनों पर मिलिट्री तैनात कर दी है। एक दर्जन से ज्यादा शरणार्थियों के तमिलनाडु पहुंचने की खबर है। श्रीलंका अपनी जरूरत ज्यादातर चीजें आयात करता है। इसमें दवा से लेकर ऑयल तक शामिल हैं। उसके कुल आयात में पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की हिस्सेदारी पिछले साल दिसंबर में 20 फीसदी थी। पिछले कुछ समय से श्रीलंका की सरकार जरूरी चीजों का आयात करने में नाकाम रही है। इससे वहां जरूरी चीजों की किल्लत हो गई है।
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जयशंकर ने चीनी समकक्ष से की अहम चर्चा

Posted: 25 Mar 2022 08:18 AM PDT

जयशंकर ने चीनी समकक्ष से की अहम चर्चा

(हिफी डेस्क-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)

  • अजीत डोभाल ने चीनी विदेश मंत्री से कहा जब तक वास्तविक नियंत्रण सीमा से चीनी सेना नहीं हटेगी तब तक कोई बात नहीं

नई दिल्ली। पूर्वी लद्दाख में पिछले करीब 2 साल से जारी गतिरोध के कारण व्याप्त तनाव के बीच चीन के विदेश मंत्री वांग यी भारत दौरे पर आए हैं। चीनी विदेश मंत्री ने शुक्रवार को भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल से मुलाकात की। इसके साथ ही उन्होंने विदेश मंत्री एस जयशंकर से भी मुलाकात कर चीन और भारत के मुद्दों पर अहम चर्चा की है। एस जयशंकर ने यह साफतौर पर कहा कि उनकी चीन के विदेश मंत्री के साथ क्वाड को लेकर कोई बात
नहीं हुई है।
चीनी विदेश मंत्री से मुलाकात के बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, 'चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ मेरी बातचीत अभी-अभी समाप्त हुई है। ये मुलाकात करीब 3 घंटे तक चली और खुले और स्पष्ट तरीके से एक व्यापक मूल एजेंडा पर बात हुई। हमने अपने द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की जो अप्रैल 2020 में चीनी कार्रवाई के बाद से बाधित हुए हैं।' एस जयशंकर ने कहा कि 1993-96 के समझौतों के उल्लंघन के मद्देनजर बड़ी संख्या में सैनिकों की उपस्थिति को देखते हुए चीन के साथ हमारे वर्तमान संबंध सामान्य नहीं हैं। चीनी विदेश मंत्री से वार्ता के बाद एस जयशंकर ने कहा कि इस दौरान हमें मौका मिला कि हम अफगानिस्तान और यूक्रेन समेत अन्य अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर अपने विचारों का आदान प्रदान करें। उन्होंने कहा, 'अगर मौजूदा स्थिति की बात करें तो अभी काम चल रहा है।
जयशंकर ने कहा, 'जब तक एलएसी पर बड़ी सैन्य तैनाती है, तब तक सीमा पर स्थिति सामान्य नहीं होगी। अभी भी कुछ जगहों पर विवाद है। चीनी विदेश मंत्री वांग यी आज से भारत दौरे पर हैं। इस दौरान भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने चीन के विदेश मंत्री को साफ लहजे में कह दिया है कि जब तक वास्तविक नियंत्रण रेखा से चीनी सेना नहीं हटाई जाएगी, तब तक दोनों देशों के बीच कोई बात नहीं हो सकती। डेढ़ घंटे तक चली इस बातचीत के दौरान भारत ने कहा है बॉर्डर क्षेत्र के बचे हुए इलाके में जल्द और पूरी तरह से सेना को हटाए जाने की जरूरत है, ताकि द्विपक्षीय संबंध स्वाभाविक रास्ते पर आ सकें। वार्ता के दौरान भारत ने शांति की बहाली के लिए राजनयिक, सैन्य स्तर पर सकारात्मक बातचीत जारी रखने की जरूरत पर जोर दिया है। अजीत डोभाल ने वांग यी से कहा है कि सुनिश्चित किया जाए कि कार्रवाई समान और परस्पर सुरक्षा की भावना का उल्लंघन नहीं करती है। एक ही दिशा में काम करें और बकाया मुद्दों को जल्द से जल्द सुलझाएं। इस बीच चीन के विदेश मंत्री ने अजीत डोभाल से बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए चीन का दौरा करने का न्योता दिया है। इसपर डोभाल ने सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह तत्काल मुद्दों को सफलतापूर्वक हल करने के बाद चीन की यात्रा कर सकते हैं। डोभाल ने यह भी कहा कि मौजूदा हालात किसी के भी हित में नहीं हैं और शांति से ही दोनों का एक दूसरे के प्रति विश्वास जागेगा। अजीत डोभाल और वांग यी ने पूर्वी लद्दाख में तनाव को कम करने को लेकर जुलाई 2020 में फोन पर लंबी बातचीत की थी। भारत और चीन पूर्वी लद्दाख में गतिरोध का हल निकालने के लिए उच्च स्तरीय सैन्य वार्ता भी कर रहे हैं। दोनों पक्षों ने बातचीत के बाद कुछ स्थानों से अपने सैनिक वापस भी बुलाए हैं।
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26 मार्च 2022, शनिवार का दैनिक पंचांग एवं राशिफल - सभी १२ राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन ? क्या है आप की राशी में विशेष ? जाने प्रशिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. प्रेम सागर पाण्डेय से |

Posted: 25 Mar 2022 08:04 AM PDT

26 मार्च 2022, शनिवार का दैनिक पंचांग एवं राशिफल - सभी १२ राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन ? क्या है आप की राशी में विशेष ? जाने प्रशिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. प्रेम सागर पाण्डेय से |

26 मार्च 2022, शनिवार का दैनिक पंचांग


🔅 तिथि नवमी 08:13 PM

🔅 नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा 03:08 PM

🔅 करण :

                तैतिल 09:04 AM

                गर 09:04 AM

🔅 पक्ष कृष्ण

🔅 योग परिघ 10:57 PM

🔅 वार शनिवार

☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ

🔅 सूर्योदय 05:56 AM

🔅 चन्द्रोदय +02:26 AM

🔅 चन्द्र राशि धनु

🔅 सूर्यास्त 06:04 PM

🔅 चन्द्रास्त 12:03 PM

🔅 ऋतु वसंत

☀ हिन्दू मास एवं वर्ष

🔅 शक सम्वत 1943 प्लव

🔅 कलि सम्वत 5123

🔅 दिन काल 12:15 PM

🔅 विक्रम सम्वत 2078

🔅 मास अमांत फाल्गुन

🔅 मास पूर्णिमांत चैत्र

☀ शुभ और अशुभ समय

☀ शुभ समय

🔅 अभिजित 11:31:06 - 12:20:07

☀ अशुभ समय

🔅 दुष्टमुहूर्त 05:47 AM - 06:36 AM

🔅 कंटक 11:31 AM - 12:20 PM

🔅 यमघण्ट 02:47 PM - 03:36 PM

🔅 राहु काल 08:51 AM - 10:23 AM

🔅 कुलिक 06:36 AM - 07:26 AM

🔅 कालवेला या अर्द्धयाम 01:09 PM - 01:58 PM

🔅 यमगण्ड 01:27 PM - 02:59 PM

🔅 गुलिक काल 05:47 AM - 07:19 AM

☀ दिशा शूल

🔅 दिशा शूल पूर्व

☀ चन्द्रबल और ताराबल

☀ ताराबल

🔅 अश्विनी, भरणी, कृत्तिका, रोहिणी, आर्द्रा, पुष्य, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, शतभिषा, उत्तराभाद्रपद

☀ चन्द्रबल

🔅 मिथुन, कर्क, तुला, धनु, कुम्भ, मीन

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पं.प्रेम सागर पाण्डेय् नक्षत्र ज्योतिष वास्तु अनुसंधान केन्द्र नि:शुल्क परामर्श - रविवार

26 मार्च 2022, शनिवार का दैनिक राशिफल

मेष (Aries): आज आपका दिन अनुकूलता से परिपूर्ण रहेगा। सभी कार्यों में सफलता मिलने से मन में प्रसन्नता होगी। आर्थिक क्षेत्र में दिन लाभदायक साबित होगा। मित्रों और सगे-सम्बंधियों के साथ मिलने से घरेलू वातावरण उल्लास से भरा रहेगा। उत्तम वस्त्र और भोजन मिलेगा। मित्र वर्ग और शुभेच्छकों की तरफ से भेंट-उपहार मिल सकता है।

शुभ रंग = पींक

शुभ अंक : 8

वृषभ (Tauras): आज के दिन आपको सावधानीपूर्वक चलने की सलाह देते हैं। मन में अनेक प्रकार की चिंता रहेंगी। स्वास्थ्य भी नरम-गरम रहेगा। परिजनों के साथ मनमुटाव के अवसर खड़े होने से मन में ग्लानि होगी। आपके कार्य अधूरे रहेंगे। खर्च की मात्रा बढ़ेगी। उचित पारिश्रमिक न मिलने से निराशा होगी। अविचारी कदम या निर्णय से गलतफहमी न हो इसका ध्यान रखें।

शुभ रंग = श्याम

शुभ अंक : 3

मिथुन (Gemini): आपका दिन विविध लाभों की प्राप्ति करानेवाला साबित होगा। परिवार में पुत्र और पत्नी से लाभ के समाचार मिलेंगे। मित्रों के साथ मुलाकात आपको आनंदित करेगी। व्यापारी वर्ग की आय में वृद्धि होगी। नौकरी में उच्च पदाधिकारियों की कृपादृष्टि रहेगी। विवाहोत्सुक व्यक्तियों को जीवनसाथी मिलने का योग है। आनंददायक प्रवास होगा। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा।

शुभ रंग = नीला

शुभ अंक : 6

कर्क (Cancer): नौकरी या व्यवसाय करनेवालों के लिए आज का दिन लाभदायक बताते हैं। उच्च पदाधिकारियों की कृपादृष्टि रहने से पदोन्नति की संभावना है। अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण मामलों पर खुले मन से चर्चा करेंगे। माता के साथ संबंध अच्छे रहेंगे। धन मान-सम्मान के हकदार बनेंगे। गृह-सुशोभन में रुचि लेंगे। वाहन सुख मिलेगा। सांसारिक सुख में वृद्धि होगी।

शुभ रंग = आसमानी

शुभ अंक : 7

सिंह (Leo): आज का दिन मध्यम फलदायक होगा। आप धार्मिक और मांगलिक कार्यों में उपस्थित रहेंगे। आपका व्यवहार न्यायप्रिय रहेगा। धार्मिक प्रवास का आयोजन होगा। पेट दर्द से परेशान रहेंगे। विदेश में रहनेवाले स्वजनों का समाचार मिलेगा। उच्च पदाधिकारियों के साथ सावधानीपूर्वक बर्ताव करें। नौकरी धंधे में तकलीफ आएगी। संतान की चिंता रहेगी।

शुभ रंग = पीला

शुभ अंक : 9

कन्या (Virgo): आज के दिन नए कार्य शुरू न करने की आपको सलाह देते हैं। बाहर का खाना सेहत खराब कर सकता है। गुस्से की मात्रा अधिक होगी। वाणी पर संयम रखें। पारिवारिक सदस्यों के साथ मनमुटाव हो सकता है। पानी से बचें। हित शत्रुओं से संभलकर रहें। गूढ़ रहस्यमय मामले में अधिक रुचि रहेगी।

शुभ रंग = नीला

शुभ अंक : 6

तुला (Libra): आपका आज का दिन सफलता और आमोद-प्रमोद से भरा होगा, जिससे पूरे दिन प्रसन्नता का अनुभव होगा। सार्वजनिक जीवन में सफलता और सिद्धि मिलेगी। मौज-मस्ती के पीछे खर्च होगा। शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य बना रहेगा। उत्तम भोजन और वैवाहिक सुख की प्राप्ति होगी। प्रणय प्रसंगों के लिए दिन शुभ होगा।

शुभ रंग = श्याम

शुभ अंक : 3

वृश्चिक (Scorpio): आज के दिन कुछ आकस्मिक घटनाएं होंगी। पूर्व निर्धारित मुलाकातें रद्द होने से हताशा और क्रोध आ सकता है। हाथ में आए अवसर निकलते हुए प्रतीत होंगे। पारिवारिक सदस्यों के साथ मतभेद होंगे। ननिहाल पक्ष से कोई समाचार मिलने से मन बेचैन होगा। विरोधी प्रतिस्पर्धियों से संभलने की सलाह देते हैं। आय की अपेक्षा व्यय की मात्रा अधिक रहेगी।

शुभ रंग = पींक

शुभ अंक : 8

धनु (Sagittarius): आपका आज का दिन मिश्र फलदायी बताते हैं। आज आपको पेट सम्बंधी समस्याएं होंगी। संतान का स्वास्थ्य और उनकी पढ़ाई चिंता का विषय बनेगा। सफलता न मिलने से क्रोध आएगा जिसपर काबू रखें। प्रिय व्यक्ति के साथ रोमांचक क्षणों का आनंद उठा सकेंगे। साहित्य और लेखन के क्षेत्र में रुचि रहेगी। बौद्धिक चर्चा से दूर रहना हितकर है।

शुभ रंग = गुलाबी

शुभ अंक : 5

मकर (Capricorn): गणेशजी बताते हैं कि आपका आज का दिन प्रतिकुलताओं से भरा रहेगा, जिससे मन में खिन्नता का अनुभव होगा। शरीर में स्फूर्ति और ताजगी का अभाव रहेगा। सार्वजनिक जीवन में मानहानि होने की संभावना रहेगी। छाती में दर्द रहने की संभावना है। स्त्रियों के साथ काम लेने में अपने को संभालने की सलाह देते हैं।

शुभ रंग = श्याम

शुभ अंक : 6

कुंभ (Aquarius): आज आप तन-मन से प्रसन्नता का अनुभव करेंगे। मन पर छाए चिंता के बादल दूर होने से उत्साह बढ़ेगा। भाई-बंधुओं के साथ लकर नए आयोजन को हाथ में लेंगे। उनके साथ आनंदपूर्वक समय व्यतीत होगा। लघु प्रयास होंगे। मित्रों तथा स्वजनों के साथ की गई मुलाकात मन को प्रसन्न करेगी। कार्यक्षेत्र में प्रणालियों द्वारा प्रभावकारी परिणाम प्राप्त कर सकेंगे।

शुभ रंग = नीला

शुभ अंक : 3

मीन (Pisces): आज वाणी पर संयम रखें। क्रोध के कारण किसी के साथ मनमुटाव होने की संभावना है। शारीरिक कष्ट का अनुभव होगा। विशेष रूप से आंख का ध्यान रखें। पारिवारिक सदस्य और प्रेमीजनों द्वारा घर में विरोध का वातावरण बनेगा। गलत खर्च होगा। नकारात्मक विचार आपके मन पर हावी न हों, इसका ध्यान रखें। खान-पान पर संयम रखें। सोच-समझकर चलें।

शुभ रंग = गुलाबी

शुभ अंक : 5 
प्रेम सागर पाण्डेय् ,नक्षत्र ज्योतिष वास्तु अनुसंधान केन्द्र ,नि:शुल्क परामर्श - रविवार , दूरभाष 9122608219 / 9835654844
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जिला परिषद के पूर्व अध्यक्ष ज्योति सोनी ने जीविका दीदी का हौसला बढ़ाई

Posted: 25 Mar 2022 07:36 AM PDT

जिला परिषद के पूर्व अध्यक्ष ज्योति सोनी ने जीविका दीदी का हौसला बढ़ाई 

जितेन्द्र कुमार सिन्हा,
 जीविका बिहटा के अंतर्गत SVEP, BRC ने उद्यमी मिलन समारोह का आयोजन 25 मार्च (शुक्रवार) को किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बिहटा के प्रमुख मानती देवी, पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष ज्योति सोनी, कौडिया पंचायत के मुखिया नीतू देवी थी। कार्यक्रम में जीविका के राज्य स्तरीय पदाधिकारी प्रोजेक्ट मैनेजर समीर कुमार, जिला परियोजना प्रबंधक कृष्णंदन कुमार, IIM कोलकाता के समीरन मिश्रा, NRETP SVEP राज्य स्तरीय नोडल नियति धुर्वे MG, Non Form और माइक्रो एंटरप्राइजेज अश्रुता सिंह विशिष्ट अतिथि थे।

सूत्रों ने बताया कि जिविका के राज्य स्तरीय प्रोजेक्ट मैनेजर समीर कुमार ने बताया की बिहटा प्रखंड में SVEP के द्वारा 1768 लघु उद्योग शुरू की गई हैं,
जिसमें 3 करोड़ 44 लाख 77 हजार रुपए का ऋण दिया गया हैं, जिसका संचालन CRPEP के द्वारा किया जा रहा हैं।
उक्त अवसर पर जिला परिषद के पूर्व अध्यक्ष ज्योति सोनी ने  जीविका दीदी का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि आत्मनिर्भर भारत का सपना जो लोग देख रहें हैं उसे हमारी जीविका बखुबी निभा रहीं हैं। समुह के सहयोग से आज वो महिलाएं जो घर में कैद रहती थी वो बाहर निकल कर जीविका समूह के मदद से उद्यमिता में आत्मनिर्भर बन रहीं। जीविका दीदी घर को संभालने के साथ- 
साथ अपने व्यवसाय को ही नहीं संभाल रहीं है बल्कि उसे आगे भी बढा रहीं हैं। 

उन्होंने कहा कि कोरोना काल के समय में भी जीविका दीदी ने मास्क बना कर अच्छा व्यवसाय किया था। समूह ने जो बिहटा प्रखंड को लक्ष्य दिया था उसे बखुबी ससमय पुरा की है, इसके लिए वे बधाई के पात्र हैं।

कार्यक्रम में NRO कुडुंबश्री से मोनिका होरो, रारिश, अविनाश, अभिषेक अभिप्षा एवम संचालिका मेंटर SVEP गीता किशोर और SVEP BPM अंकेश कुमार, BPM निर्मला सिंह एवम जीविका बिहटा के CLF,VO और समूह की दीदियां एवं उद्यमी उपस्थित उपस्थित थे।
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नई दिल्ली स्थित गांधी स्‍मृति संस्‍थान में महादेवी वर्मा सम्‍मान से होंगे 27 लोग सम्मानित

Posted: 25 Mar 2022 07:33 AM PDT

नई दिल्ली स्थित गांधी स्‍मृति संस्‍थान में महादेवी वर्मा सम्‍मान से होंगे 27 लोग सम्मानित 

जितेन्द्र कुमार सिन्हा, 
जीकेसी ग्‍लोबल अध्‍यक्ष राजीव रंजन प्रसाद ने बताया कि नई दिल्ली स्थित गांधी स्‍मृति संस्‍थान में 27 लोग  को महादेवी वर्मा सम्‍मान से सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने कार्यक्रम की विस्‍तृत जानकारी देते हुए बताया कि जीकेसी (ग्‍लोबल कायस्‍थ कांफ्रेंस) कल (26 मार्च, 2022) महादेवी वर्मा स्मृति सम्मान समारोह का आयोजन प्रख्‍यात लेखिका एवं उपन्‍यासकार स्व. महादेवी वर्मा की जयंती के अवसर पर सत्याग्रह मंडप, गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति, राजघाट, नई दिल्‍ली परिसर में अपराह्न 1 बजे से किया गया है। 
उन्होंने बताया कि विगत वर्ष की तरह ही इस वर्ष भी महादेवी वर्मा स्मृति सम्मान समारोह में समाज के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा से साख खड़ी करने वाले कायस्थ समाज के गुणीजनों और जानेमाने लोगों को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया जाएगा। 
ग्लोबल अध्यक्ष ने यह भी बताया कि यह सम्‍मान फिल्‍म जगत, पत्रकारिता, आर्ट एंड कल्‍चर और एके‍डमिक क्षेत्र के लिए दिया जाएगा। इसके लिए इस क्षेत्र के लोगों का नामांकन आमंत्रित किया गया था, जिसमें से 27 लोगों का चयन जूरी ने किया है।  
उन्होंने बताया कि ग्‍लोबल कायस्‍थ कांफ्रेंस देश एवं विदेश में रहने वाले कायस्‍थ समाज का एक संगठन है, जो समाज के हित में पिछले एक वर्ष से कार्यरत है। जीकेसी कायस्‍थ समाज के शैक्षणिक, आर्थिक, सांस्‍कृतिक विकास के साथ-साथ उनके उत्‍थान के लिए प्रयासरत है। इसके तहत  प्रख्यात लेखिका एवं उपन्यासकार स्व. महादेवी वर्मा की जयन्ती के अवसर पर महादेवी वर्मा स्मृति सम्मान से  इस वर्ष भी सम्मानित किया जा रहा है।
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सम्प्रेषण का सशक्त माध्यम है विज्ञापन

Posted: 25 Mar 2022 03:27 AM PDT

सम्प्रेषण का सशक्त माध्यम है विज्ञापन

सत्येन्द्र कुमार पाठक 
मानव सभ्यता के उदय और संप्रेषण की आवश्यकता के लिए विज्ञापन का अस्तित्व है । मानव सभ्यता के प्रारंभिक चरण में मानवीय को अनुशासित, नियंत्रित करने तथा जनमत को स्वपक्ष में प्रभावित करने के लिए जो प्रयास किए जाने में विज्ञापन की पृष्ठभूमि  है। विश्व का प्रथम विज्ञापन भारत में डेढ हजार वर्ष पूर्व विज्ञापन भारतीय बुनकर व्यापारी संघ द्वारा  प्राचीन गुप्तकालीन मध्यप्रदेश का  दशपुर में स्थित एक सूर्य-मंदिर की दीवारों में लगवाया गया था।  प्राचीनकाल में शासक प्रजा को जिन नियमों से अनुशासित करना चाहते थे । नियमों को प्रजा की जानकारी के लिए सार्वजनिक स्थानों पर भिति ,  पटूट आदि पर खुदवा दिया जाता था। धार्मिक सूचनाओं, राजाज्ञाओं और सरकारी आदेशों को शिलालेखों पर विज्ञापन के रूप में उत्कीर्ण कराने की प्रथा भारतीय सम्राट अशोक के समय में विद्यमान  थी। सम्राट अशोक ने शिलालेखों पर अनेक सूचनाएँ उत्कीर्ण कराई। प्राचीन भारतीय समाज में विज्ञापन का लक्ष्य धार्मिक विचारों का प्रचार करना था। सम्राट अशोक के स्तंभों और भिक्ति संदेशों, गुफा चित्रों आदि को 'आउटडोर' विज्ञापन का पूर्वज कह सकते हैं। 'इंडोर विजुअल' संप्रेषण कला के पूर्वज के रूप में अजंता, साँची और अमरावती की कलाओं एवं बिहार का जहानाबाद जिले के बराबर पर्वत समुहमे स्थित गुफाओं , भित्ति चित्रों को अध्ययन  है।"
 तीन हजार वर्ष पूर्व मिस्त्र में विज्ञापनों का उपयोग श्रीमंतों के घरों से भागे हुए दासों को पकडने वालों के लिए  पुरस्कार देने की घोषणा के लिए किया जाता था। श्रीपत्र या भोजपत्र पर लिखे जाते थे। ढाई ह्जार वर्ष पूर्व मकान किराए पर दिए जाने के विज्ञापन का उल्लेख भी मिलता है-"आगामी १ जुलाई से आरियोपोलियन हवेली में  दुकानें भाडे पर दी जाएँगी। दुकानों में ऊपर रहने के कमरे हैं।   विज्ञापनों के प्रारंभिक स्वरुप की चर्चा में इजिप्ट में थीब्ज के उत्खनन  के दौरान प्राप्त पांडुलिपि के अवशेष तीन ह्जार वर्ष पूर्व  उदूधृत  है।  शैवाल से तैयार किए गए कागज पर विज्ञापन के रूप में शीम  भगोडे दास को लौटानेवाले को एक सोने का सिक्का इनाम में दिए जाने की घोषणा की गई है। छपाई के आविष्कार से पहले प्राचीनकाल में विज्ञापनों के लिए अन्य रास्ते तलाश करते थे। ग्रीस, रोम और चीन में विज्ञापन के लिए चित्रलिपि का प्रयोग किया जाता था। उत्पादक अपनी वस्तुओं पर  चिह्र, चित्र ,  अंकित कर देते थे, ताकि उनके उत्पाद को पहचानने में ग्राहकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। ग्रीस और रोम के व्यापारी अपनी दुकानों के प्रवेश-द्वार पर माल के चिह्र इस रूप में चित्रित करते थे । डिक सटफेन के अनुसार-"बुनकरों का चक्र बुनकर को इंगित करता था।  मानवीय सभ्यता के विकास के साथ-साथ विज्ञापन के स्वरुप में भी बदलाव आता चला गया है। व्यापारिक चिह्रों को लकडी, धातु अथवा पत्थर पर चित्रित कर सूचना-पटूट का निर्माण किया गया। विज्ञापन के प्रारंभिक चरण में विक्रेता ऊँची आवाज में बडे रोचक और नाटकीय अंदाज में अपने माल की खूबियों को वर्णित करता था। यानी गलियों और सडकों पर फेरीवाले आवाज लगाते हुए अपनी वस्तुओं का विज्ञापित करते थे। बाद में चना बेचनेवालों के ये बोल बहुत चर्चित भी हुए-'बाबू मैं लाया मजेदार चना जोर गरम, मेरा चना बना है आला' अनोखे स्वरों दवारा अपने माल को विज्ञापित कर खरीदारों को आकर्षित करने की यह कला आज भी बनी हुई है। गाँवों, कस्बों और शहरों की गलियों में ठेले और साइकिल पर अपना सामान बेचनेवाले छोटे-छोटे विक्रेता इसी कला का सहारा लेते हैं। पंद्रहवीं शताब्दी में मुद्रण कला के आविष्कार के साथ हुआ। नए विचारों के प्रवाह को जन-जन तक पहुँचाने के लिए मुद्रण कला का सहारा लिया गया। गुटनबर्ग ने ४२ पंक्तियों की विश्व की पहली मुद्रित पुस्तक 'बाइबिल' का प्रकाशन किया। मुद्रण कला के आविष्कार और विस्तार के साथ ही यातायात व संचार के विभिन्न साधन भी उपलब्ध हुए। सन १४७३ ई. में इंग्लैंड में विलियम कैक्टसन ने सर्वप्रथम अंग्रेजी भाषा में पहला विज्ञापन एक परचे के रूप में प्रकाशित किया। साहित्यकार व इतिहासकार सत्येन्द्र कुमार पाठक ने कहा कि  इतिहासकार फेंक प्रेस्वी के अनुसार-'मक्यूरियम ब्रिटानिक्स' पुस्तक में एक विज्ञापित घोषणा के रूप में विज्ञापन का पहला रूप सामने आया। हेनरी सैंपसन के अनुसार-सन १६५० में सर्वप्रथम विज्ञापन का स्वरुप  पुस्तक में देखने को मिला, जिसमें चोरी किए गए बारह घोडों को लौटाने पर पुरस्कार की घोषणा विज्ञप्ति के रूप में छपी थी। विज्ञापन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि इंग्लैंड के समाचार-पत्रों में विज्ञापन के रूप में प्रकाशित घोषणाओं में दिखाई देती है। उसके बाद चाय, काँफी, चाँकलेट, किताब आदि के विज्ञापनों के साथ-साथ खोई-पाई वस्तुओं के विज्ञापन प्रकाशन की प्रथा चल पडी। अमेरिका में विज्ञापन का विकास का रूप -सन १८७० में अमेरिका में पहला विज्ञापन प्रकाशित हुआ था । अमेरिका में सन १८४१ में पहली विज्ञापन एजेंसी वाल्नी पाँल्मर स्थापित थी। अमेरिका का पहला विज्ञापन ८ मई, १७०४ में 'बोस्टन न्यूज लैटर' में प्रकाशित हुआ। धीरे-धीरे सचित्र विज्ञापन की प्रथा भी शुरु हो गई। विज्ञापन में आधुनिक तकनीक का प्रयोग किया जाने लगा। औदयोगिक क्रांति के फलस्वरुप विज्ञापन की दुनिया में तेजी से बदलाव आने लगा। आज उच्च प्रौदयोगिकी के युग में विज्ञापन संसार को वैविध्यपूर्ण बना दिया है। समाचार पत्रों के मालिकों के लिए राजस्व का माध्यम विज्ञापन है । भारत में  25 मार्च 1788 को  कलकत्ता गजट में भारतीय भाषा में प्रथम  विज्ञापन बांग्ला भाषा में प्रकाशित हुआ था।विज्ञापन की दुनिया में तेजी से बदलाव आने लगा। आज उच्च प्रौदयोगिकी के युग में विज्ञापन संसार को वैविध्यपूर्ण बना दिया है। विज्ञापन उदयोग एक आकर्षक उदयोग बन चुका है।
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रॉयल एनफील्ड ने भारत में 120वीं एनिवर्सरी लिमिटेड एडिशन 650 ट्विन्स की डिलीवरी शुरू की

Posted: 25 Mar 2022 03:10 AM PDT

रॉयल एनफील्ड ने भारत में 120वीं एनिवर्सरी लिमिटेड एडिशन 650 ट्विन्स की डिलीवरी शुरू की

पटना, 25 मार्च, 2022: रॉयल एनफील्ड ने भारत में ग्राहकों के लिए 120वीं एनिवर्सरी लिमिटेड एडिशन 650 ट्विन मोटरसाइकिल, विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए इंटरसेप्टर 650 और कॉन्टिनेंटल जीटी 650 की डिलीवरी शुरू की। EICMA 2021 में अनावरित, इन मोटरसाइकिलों को रॉयल एनफील्ड की 120 वर्षों- 1901 से मेड लाइक ए गन की समृद्ध विरासत के रूप में कॉन्सेप्चुअलाइज़ और डिज़ाइन किया गया है। भारत, यूरोप, अमेरिका और दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए 120 यूनिट्स के साथ चार क्षेत्रों में कुल 480 यूनिट्स को प्रोड्यूस और डिस्ट्रीब्यूट किया गया, जिसमें 60 कॉन्टिनेंटल जीटी 650 और 60 इंटरसेप्टर आईएनटी 650 शामिल हैं। रॉयल एनफील्ड ने विगत वर्ष दिसंबर माह में भारत में ऑनलाइन फ्लैश सेल के जरिए इन लिमिटेड एडिशन मोटरसाइकिलों की 120 यूनिट्स की बिक्री की।
रॉयल एनफील्ड के गौरवशाली अतीत और आधुनिक इतिहास दोनों में इंटरसेप्टर और कॉन्टिनेंटल जीटी के महत्व और प्रासंगिकता ने उन्हें एनिवर्सरी एडिशन के लिए एक स्पष्ट विकल्प बना दिया। विगत वर्षों में, 650 ट्विन मोटरसाइकिलों ने वैश्विक बाजारों में रॉयल एनफील्ड के विकास को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
कंपनी की टीमों द्वारा यूके और भारत में डिज़ाइन और दस्तकारी किए गए ये लिमिटेड एडिशन ट्विन मोटरसाइकिलें उन एलिमेंट्स को दर्शाती हैं, जो रॉयल एनफील्ड और इसकी विरासत के लिए अद्वितीय हैं। ये दोनों मोटरसाइकिलें एक अद्वितीय ब्लैक-क्रोम कलर स्कीम के साथ आती हैं, जो इंजन, साइलेंसर, अन्य एलिमेंट्स के साथ ब्लैक कलर स्कीम्स और ब्लैक-आउट कंपोनेंट्स द्वारा पूरक हैं। मोटरसाइकिलें फ्यूल टैंक पर विशेष रूप से हाथ से तैयार की गई, डाई-कास्ट बैज को सुशोभित करती हैं और इसके साथ ही रॉयल एनफील्ड हाथ से पेंट की गई पिनस्ट्रिप भी शामिल करती हैं। मोटरसाइकिलें जेन्युइन मोटरसाइकिल एक्सेसरीज, जैसे- फ्लाईस्क्रीन, इंजन गार्ड, हील गार्ड, टूरिंग और बार एंड मिरर, और ब्लैक कलर में समग्र डिज़ाइन के पूरक के रूप में सुसज्जित हैं।
विगत वर्ष 6 दिसंबर को लाइव हुई ऑनलाइन फ्लैश सेल को देशभर के उत्साही लोगों से बहुत उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली, जिसमें बिक्री से पहले 17000+ पंजीकरण हुए। सबसे बड़े मेट्रो शहरों से लेकर छोटे शहरों तक, मोटरसाइकिल प्रेमियों और रॉयल एनफील्ड के प्रशंसकों ने ऑनलाइन बिक्री के लिए खुद को नामांकित किया, जिसमें इन बेहद खास मोटरसाइकिलों की 120 यूनिट्स महज़ 120 सेकंड के भीतर बेची गईं।
इस हफ्ते की शुरुआत में, कंपनी ने इन लिमिटेड एडिशन एनिवर्सरी मोटरसाइकिलों की देशभर के ग्राहकों के लिए एक साथ डिलीवरी शुरू की। कई मोटरसाइकिल उत्साही लोगों के बीच, रॉयल एनफील्ड द्वारा ये लिमिटेड एडिशन मोटरसाइकिलें कुछ प्रसिद्ध हस्तियों को भी डिस्ट्रीब्यूट की गईं।
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मुनिश्री क्षमासागरजी को विनयांजली

Posted: 25 Mar 2022 02:30 AM PDT

मुनिश्री क्षमासागरजी को विनयांजली

सुन सुनता हूँ मैं मुनिश्री 
क्षमासागर जी की कहानी। 
जिसमें न कोई राजा और 
न थी कोई रानी। 
जन्म लिया आशादेवी और 
जीवन कुमार सिंघाई के घर में। 
सन् था वो 1957 का
नाम रखा गया बालक का वीरेंद्र कुमार।
बचपन से पढ़ने लिखने और  
जैनधर्म में बहुत रुची वो रखते थे। 
भूगर्व विज्ञान में लेकर उच्च शिक्षा 
फिर कदम रखे जैनधर्म के पथ पर। 
प्रथम बार जब दर्शन किये 
गुरुवर विद्यासागर के। 
आकर्षित वो होने लगे 
उनकी त्याग तपस्या से। 
मन ही मन वो सोचने लगे
मुझे भी इस पथ पर चलना है। 
अपने आत्म कल्याण के लिए
उन जैसा ही मुझे बनना है। 
छोड़ छाड़ अपने घर द्वार को
वो जा पहुँचे नैनागिर में। 
लेकर क्षुल्लक दीक्षा वो
बन गये तब क्षमा सागर। 
सन् था वो 1980 का और
तब से संग आचार्यश्री के हो लिए। 
कठिन त्याग तपस्या और साधना के
बल पर सब कुछ उन्होंने पा लिया। 
फिर गुरुवर ने उन्हें 
मुनि पद प्रदान किया। 
और भेज दिया फिर  
उन्हें बुंदेलखंड में। 
जैनधर्म की प्रभावना और 
नव युवक को जैन धर्म बतलाने को। 
फिर जो कुछ उन्होंने किया 
जैन धर्म के लिए। 
उसे नहीं जरूरत अब हमें
किसी को बताने की। 
तर्क वितर्क करने वालो को
कैसे वो समझाते थे। 
फिर वो चरणों में गिरकर
क्षमासागर जी के भक्त हो जाते थे। 
कितना कुछ उन्होंने लिखा 
अपनी कलम और ज्ञान से। 
उन्हें पढ़कर ऐसा लगता है
जैसे स्वयं मुनिश्री जी बोल रहे। 
इसलिए तो उन्हें बुंदेलखंड का
गौरव सभी लोगों कहते थे। 
और उनके ज्ञान की चर्चा 
सबसे ज्यादा युवा ही करते थे। 
पर नीति को तो कुछ और करना था
और हम सब से उन्हें दूर ले जाना था। 
इसलिए उन्होंने सन् 2015 मार्च को
सागर में समाधि को धारण कर लिया। 
और खुद का आत्मकल्याण करके
सबका कल्याण कर गये।। 
ऐसे त्यागी तपस्वी और ज्ञानी 
मुनिवर श्रीक्षमासागर जी के 
चरणो में वंदन बराम्बर करता हूँ। 
और उन्हें मैं विनयांजली आज पुन:अर्पित करता हूँ ।।

जय जिनेंद्र 
संजय जैन "बीना" मुंबई
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न्यू इंडिया: प्रौद्योगिकी दशक के रूप में अगले 10 वर्ष-राजीव चंद्रशेखर

Posted: 25 Mar 2022 02:25 AM PDT

न्यू इंडिया: प्रौद्योगिकी दशक के रूप में अगले 10 वर्ष-राजीव चंद्रशेखर

(इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी, कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री,भारत सरकार)
मानवता के इतिहास की सबसे विकराल महामारी की त्रासदी से दुनिया धीरे-धीरे बाहर निकल रही है। इस वैश्विक महामारी ने दुनिया भर में जीवन, आजीविका और अर्थव्यवस्थाओं को व्यापक रूप से बाधित किया है। भारत को भी, जहां दुनिया की आबादी का लगभग 1/6 हिस्सा निवास करता है, पिछले 24 महीनों में गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा है।
ऐसा कहा जाता है कि मानव के व्यक्तित्व का आकलन तब नहीं किया जा सकता, जब वह आराम में हो और सुविधा के साथ जीवन यापन कर रहा हो, बल्कि आकलन का पैमाना यह होना चाहिए कि वह चुनौती और विवाद का सामना किस प्रकार करता है। पीएम नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने महामारी के दौरान अपने उल्लेखनीय कोविड प्रबंधन और सुदृढ़ नैदानिक व्यवस्था के लिए वैश्विक सम्मान प्राप्त किया। हमारे प्रधानमंत्री ने इसका नेतृत्व किया, अग्रिम पंक्ति के योद्धाओं के साथ मजबूती से खड़े रहे, मेड इन इंडिया वैक्सीन विकसित करने के प्रयासों के लिए वैज्ञानिकों को प्रोत्साहित किया और इस देश को एक नया दृष्टिकोण, एक नया आर्थिक विचार दिया-आत्मनिर्भर भारत या आत्मनिर्भरता। चीन द्वारा सीमाओं पर पैदा किये जा रहे खतरों और युद्ध जैसी स्थिति का भी दृढ़ संकल्प और विश्वास के साथ जवाब दिया गया। यह अमृतकाल- स्वतंत्रता दिवस के शताब्दी समारोह की ओर देश की अगले 25 वर्षों के दौरान यात्रा- के लिए आधार तैयार करता है।

महामारी पूर्व के वर्षों में, सरकार के सुधार कार्यों और नीतियों की पृष्ठभूमि में इस सहनशीलता को कोई छोटा उपाय नहीं माना जा सकता। डिजिटल इंडिया, वित्तीय क्षेत्र की बाधाओं को समाप्त करने जैसे कार्यक्रम भारत की सहनशील व्यवस्था को सुनिश्चित करने में बड़े कारक सिद्ध हुए। महामारी के दौरान घोषित सुधारों और अच्छी तरह से तैयार किए गए प्रोत्साहन पैकेजों के परिणामस्वरूप, भारतीय अर्थव्यवस्था अब दुनिया में सबसे तेज गति से वापसी करने वाली अर्थव्यवस्था बन गयी है। देश अब तक का सबसे अधिक एफडीआई आकर्षित कर रहा है और वस्तुओं के निर्यात व व्यापार में नए रिकॉर्ड स्थापित कर रहा है। भारत 60,000 से अधिक पंजीकृत स्टार्टअप के साथ दुनिया के सबसे जीवंत और सबसे तेजी से बढ़ते स्टार्टअप इकोसिस्टम में से एक है और इनमें 88 यूनिकॉर्न कंपनियां भी शामिल हैं। सिर्फ 2021 में, भारत में 42 कंपनियों को यूनिकॉर्न का दर्जा मिला और यह रुझान 2022 में भी जारी है। भारत की वापसी की क्षमता (बाउंस बैक)– जिस नाम से दुनिया अब इसे बुलाती है, मुख्य रूप से नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा प्रौद्योगिकी क्षेत्र में किए गए शुरुआती निवेश के कारण संभव हुई है।

प्रधानमंत्री ने तीन स्पष्ट उद्देश्यों के साथ 2015 में डिजिटल इंडिया कार्यक्रम का शुभारम्भ किया था:

o नागरिकों के जीवन में बदलाव लाना

o आर्थिक अवसरों का विस्तार करना और

o विशिष्ट प्रौद्योगिकियों में रणनीतिक क्षमता सृजित करना।

भारत न केवल अनुसंधान एवं विकास, तकनीकी विकास और नवाचार जैसे पारंपरिक क्षेत्रों में, बल्कि नागरिकों के जीवन को सशक्त बनाने और बदलाव लाने के लिए भी प्रौद्योगिकी का उपयोग करने में दुनिया के प्रमुख देशों में से एक बन गया है।

दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल आइडेंटिटी कार्यक्रम, आधार (132 करोड़ नामांकन); दुनिया का सबसे बड़ा प्रौद्योगिकी संचालित कोविड टीकाकरण कार्यक्रम (180 करोड़ से अधिक खुराक दी गई); दुनिया का सबसे बड़ा प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) कार्यक्रम; डिजिटल भुगतान में विश्व का अग्रणी देश (वित्तीय वर्ष 22 में 76 लाख करोड़ रुपये) और फिनटेक प्रौद्योगिकी- हम स्पष्ट रूप से कह सकते हैं कि पहले दो उद्देश्यों को काफी हद तक पूरा कर लिया गया है।

यह स्पष्ट है कि सरकार कोविड के बाद, उपभोक्ताओं के दैनिक जीवन तथा अर्थव्यवस्था के डिजिटलीकरण की गति को और तेज करने पर ध्यान देगी। प्रौद्योगिकी, नवोन्मेष और आपूर्ति श्रृंखला में महत्वपूर्ण बदलाव हो रहे हैं और भारत के 1 ट्रिलियन डॉलर की डिजिटल अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को हासिल करने के लिए ये महत्वपूर्ण अवसर का प्रतिनिधित्व करते हैं।

इस अवसर का लाभ उठाने और डिजिटल इंडिया कार्यक्रम को और बढ़ावा देने के लिए, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय ने 6 स्पष्ट लक्ष्यों के साथ 1000 दिनों की एक विस्तृत दृष्टि योजना तैयार की है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आने वाले वर्षों को भारत का प्रौद्योगिकी दशक कहा है, जो सर्वथा उचित है। सरकार और शासन में प्रौद्योगिकी के उपयोग को नयी दिशा देने का यह सही समय है। सार्वजनिक सेवा वितरण को और बेहतर बनाने के लिए सरकार जल्द ही शासन में डिजिटलीकरण का अगला दौर शुरू करने जा रही है। प्लेटफ़ॉर्म स्तर की पहलों से बहुत प्रभाव पड़ा है, लेकिन इसके साथ ही "डिजिटल सरकार" पर आधारित दृष्टिकोण को अपनाने का समय आ गया है, जो सरकार की कार्यकुशलता में वृद्धि करेगा, कागज और फाइलों के उपयोग को कम करेगा, शासन को अधिक उत्तरदायी बनाएगा एवं सरकार के साथ नागरिकों के अनुभव में सुधार करेगा।

एक महत्वपूर्ण लक्ष्य है- सभी भारतीयों को खुले, सुरक्षित, भरोसेमंद और जवाबदेह इंटरनेट से जोड़ना। भारत में 82 करोड़ इंटरनेट उपयोगकर्ता तथा 60 करोड़ स्मार्टफोन उपयोगकर्ता हैं, जो इसे दुनिया का सबसे बड़ा आपस-में-जुड़ा लोकतंत्र बनाते हैं। हम डिजिटल अवसंरचना (जैसे क्लाउड, डेटा सेंटर आदि), ब्रॉडबैंड की गति, उपलब्धता और पहुंच का विस्तार जारी रखना चाहते हैं, जो 6,50,000 गांवों के लिए आत्मनिर्भर बनने का मार्ग प्रशस्त करेंगे।

हमारी डिजिटल अर्थव्यवस्था का विस्तार, बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों और हमारे स्टार्टअप नवाचार इकोसिस्टम द्वारा संचालित किया जा रहा है; जो एक तरफ इंटरनेट और उपभोक्ता से जुड़ी प्रौद्योगिकी तथा दूसरी तरफ डेटा, ब्लॉक चेन, एआई, इलेक्ट्रॉनिक्स डिजाइन, सेमीकंडक्टर, सुपर कंप्यूटिंग जैसे विभिन्न नए क्षेत्रों पर आधारित अवसरों पर ध्यान केन्द्रित कर रहे हैं। पीएम मोदी के नेतृत्व में, भारत दुनिया में मोबाइल फोन का दूसरा सबसे बड़ा निर्माता बन गया है। भारत ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर निर्माण में बड़े लक्ष्य निर्धारित किये हैं, क्योंकि कोविड के बाद की विश्व व्यवस्था को इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में नई विश्वसनीय मूल्य श्रृंखलाओं की जरूरत है। सरकार ने अपनी इलेक्ट्रॉनिक्स महत्वाकांक्षाओं को व्यापक और गहन रणनीति के साथ फिर से तैयार किया है, जिसकी मदद से इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण आज के 75 बिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2025/26 तक 300 बिलियन डॉलर का हो जाएगा। इसके अलावा, पीएम मोदी ने भारत में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के निर्माण के लिए 76,000 करोड़ रुपये के पैकेज को मंजूरी दी है। भारत के लिए अपार संभावनाएं हैं, जिनका हम दृढ़ता से अनुसरण कर रहे हैं और राज्य सरकारें भी इसे आगे बढ़ाने के लिए साझेदारी में कार्य कर रही हैं।

आने वाले दशक में, देशों के बीच प्रतिस्पर्धा का लाभ प्रौद्योगिकी कौशल और गति पर निर्भर करेगा, जिसके साथ कोई देश भविष्य की प्रौद्योगिकियों को विकसित करता है और इनका उपयोग करता है। भारत जिन रणनीतिक प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में अग्रणी रहना चाहता है उनमें ब्लॉकचैन, एआई, साइबर सुरक्षा, वेब3.0 (ब्लॉकचैन), सेमीकंडक्टर, अगली पीढ़ी की इलेक्ट्रॉनिक्स प्रणाली, सुपरकंप्यूटिंग, क्वांटम कंप्यूटिंग आदि शामिल हैं।हम दिलचस्प समय में रह रहे हैं- हमारे आसपास की दुनिया कोविड के बाद और हाल के रूस-यूक्रेन संघर्ष के बाद तकनीकी परिवर्तनों के दौर से गुजर रही है। भारत कोविड के बाद एक अधिक आत्मविश्वास वाले देश के रूप में उभर रहा है और इसकी नई महत्वाकांक्षाओं को करोड़ों युवा भारतीयों की ऊर्जा और जुनून से गति मिल रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आत्मनिर्भर भारत और भारत के प्रौद्योगिकी दशक का विजन, भारतीय युवाओं के लिए अवसरों के उज्ज्वल भविष्य को रेखांकित कर रहा है। इन अवसरों और कौशल विकास पर उनके प्रोत्साहन का मतलब है कि हम आश्वस्त हो सकते हैं कि प्रत्येक युवा भारतीय के पास; अपना, अपने समुदाय एवं भारत के लिए एक उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करने के पर्याप्त अवसर मौजूद हैं। यह समय है- भारत के लिए एक वैश्विक प्रौद्योगिकी और व्यापार शक्ति के रूप में उभरने का– न्यू इंडिया, जो दुनिया को वैश्विक मानकों के अनुरूप डिजिटल उत्पाद और सेवाएं प्रदान करता है तथा भारतीय लोकतंत्र और शासन को दुनिया में सर्वश्रेष्ठ बनाने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करता है।
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योगी आदित्यनाथ - आक्रामक साधु या बेहतरीन जननायक राजनेता

Posted: 25 Mar 2022 01:03 AM PDT

योगी आदित्यनाथ - आक्रामक साधु या बेहतरीन जननायक राजनेता

- मनोज कुमार मिश्र
उत्तर प्रदेश में आज 25 मार्च को योगी आदित्यनाथ जी पुनः मुख्यमंत्री पद को शपथ लेंगे। उत्तरप्रदेश आज इतिहास बनाने जा रहा है जब कोई मुख्यमंत्री पुनः जनता के द्वारा चुनकर वापस आएगा इससे पहले ये मौका उत्तर प्रदेश ने किसी को भी नहीं दिया था। यूँ तो कई ऐसे राजनेता हुए हैं जिन्होंने के बार उत्तर प्रदेश की बागडोर संभाली यथा कांग्रेस के स्व गोविंद बल्लभ पंत, चंद्रभानु गुप्ता, नारायण दत्त तिवारी, भारतीय क्रांति दल के चौधरी चरण सिंह, बसपा की मायावती, जनता दल/समाजवादी पार्टी के मुलायम सिंह इत्यादि परंतु लगातार 5 वर्षों का शासन करने के उपरांत पुनः जनता का विश्वास जीत कर सिर्फ योगी जी ही आये हैं। उत्तर प्रदेश की राजनीति बड़ी ही उथल पुथल वाली रही है। इस प्रदेश ने इस देश को लगभग सभी प्रधानमंत्री दिए हैं एक नरसिम्हाराव या मोरारजी देसाई को छोड़कर। अतः किसी राज नेता का प्रदेश में उत्थान न केवल प्रदेश की अपितु देश को भी एक निर्णायक दिशा दे जाता है। आज के दिन बीजेपी में योगी जी की छवि प्रखरवक्ता, जुझारू सेवक एवं तुरंत फैसले लेने वाले नायक की बन गयी है जिसे जनता का अपूर्व समर्थन प्राप्त है। ज्ञात हो कि उत्तर प्रदेश में धमाकेदार वापसी के साथ ही ब्ज्प ने अपने मत प्रतिशत में भी बढ़ोतरी दर्ज की है। जहां 2017 में उसे 39.67% मत मिले थे वहीँ 2022 में 41.29% मत मिले। बीजेपी ने इस बार अपनी 50 सीटें गंवा कर भी अपने प्रभामंडल का विस्तार किया है। जीती हुई 275 सीटों में से 255 पर खुद बीजेपी ने जीती हैं जो 403 सदस्यीय विधान सभा में बहुमत के 202 के आंकड़े से 53 सीट ज्यादा है। ओमप्रकाश राजभर के योगी सरकार को समर्थन देने से इस गठबंधन में 6 सीटों की और बढ़ोत्तरी हो गयी है। इस प्रकार बीजेपी गठबंधन दो तिहाई बहुमत के साथ सरकार बना रही है।
योगी की इस प्रचंड जीत ने बहुत सारे मिथक तोड़े हैं। जो उत्तर प्रदेश हर चुनाव में मुस्लिम मतों के लिए होने वाले जमावड़े और पीर फ़क़ीर औलिया और इमाम शाही इमामों की चरण वंदना के लिए जाना जाता था वो इस बार पूरी तरह भगवामय पाया गया। वोटों के लिए राजनीतिक पार्टी के नेतागण भभूत और भस्म रमाकर मंदिर मंदिर घूमते देखे गए। कांग्रेस के नेत्री प्रियंका वाड्रा तो संस्कृत के मंत्रोच्चार भी चुनाव मंच पर करती पाई गईं। परंतु जनता ने इन नकली हिंदुओं से अपनी दूरी बनाई रखी। मुस्लिम वोट इस बार पूरी तरह अप्रासंगिक हो गया। जहकन मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका में थे वे सीटें स्वाभाविक तौर पर सपा की झोली में गईं पर जहां वे चु आवों का रुख मोड़ने की ताकत रखते थे वे सीटें इस बार बीजेपी के पास ही रहीं। यह देश की हिन्दू संस्कृति और चेतना का उभार है जो बीजेपी के लिए सहायक सिद्ध हो रहा है। उस पर योगी जी की प्रचंड प्रशासनिक छवि ने इस जीत को मूर्त रूप देने में कोई कसर नहीं रखी। कोरोना विभीषिका के इस कठिन दौर में गरीबो में मुफ्त राशन की आपूर्ति ने बहुत मदद की। कानून व्यवस्था में सुधार सभी को खुली आँखों से नज़र आया और रही सही कसर अदालती आदेशों का तोड़ निकाल कर प्रशासनिक अध्यदेशों ने कर दिया। प्रदेश में कोई बड़ा दंगा नहीं हुआ। प्रधान मंत्री आवास के वितरण में कोई धांधली नहीं हुई।
आखिर इस करिश्माई व्यक्तित्व वाले नेता की सफलता का रहस्य क्या है। जहां देश के सभी लोग मोदी जी को बेहद ईमानदार और कठोर प्रशासक के रूप में जानते है वहीं योगी जिनकी छवि मूलतः मुस्लिम वर्चस्व पर रोक लगाने वाले की है। कम ही लोग यह जानते हैं कि योगी जी गणित से स्नातकोत्तर हैं और 26 वर्ष की आयु से ही सांसद रहे हैं। गोरखपुर से 5 बार लगातार सांसद रहे योगी जी इस बार गोरखपुर से ही विधायक चुने गए हैं। अपने निडर प्रखर और दो टूक बयानों के लिए विपक्षियों के बीच हमेशा आलोचना और निंदा का पात्र बने योगी जी ने हर समस्या के मूल में जाकर उसका निदान खोजने की कोशिश की है। चाहे बच्चों में इंसेफेलाइटिस की समस्या हो या प्रदेश के गन्ना किसानों की भुगतान की समस्या, दंगे में सरकारी संपत्ति के विनाश का मामला हो या भूमि अतिक्रमण योगी जी ने अपने निर्णयों से जीवन के हरेक पहलू को छुआ है। किसी समय में विदेशी पत्र पत्रिकाओं से वायलेंट मोंक की उपाधि पाने वाले योगी जी ने अपने कार्य से बताया है कि उनकी इस देश को कितनी जरूरत है और शायद इस बात को बीजेपी का नेतृत्व भी समझ रहा है। देश के विभिन्न बीजेपी शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री ने योगी जी की राजनीति शुरू कर दी है चाहे वो आसाम के हेमंत विस्वा शर्मा हों या मध्यप्रदेश के मामा शिवराज सिंह या उत्तराखंड के पुष्कर सिंह धामी। आने वाले दिनों में देश की राजनीति बड़ी करकट बदलने वाली है शायद उसकी धुरी योगी के आने वाले दो साल तय करें। फिलहाल के लिए उनको मुबारकवाद और शुभकामनाएँ।
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पत्रकारिता जगत का स्तम्भ गणेशशंकर विद्यार्थी

Posted: 25 Mar 2022 12:40 AM PDT

पत्रकारिता जगत का स्तम्भ गणेशशंकर विद्यार्थी

सत्येन्द्र कुमार पाठक 
गणेश शंकर विद्यार्थ भारतीय पत्रकार, भारतीय राष्ट्रीय सम्मेलन के नेता और स्वतंत्रता आंदोलन के कार्यकर्ता थे। वह असहयोग आंदोलन और भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति थे, जिन्होंने कभी विक्टॉर ह्यूगो के उपन्यास नाइंटी-थ्री का अनुवाद किया और ज्यादातर हिंदी भाषा के समाचार पत्र, प्रताप के संस्थापक-संपादक के रूप में जाने जाते हैं। गणेशशंकर 'विद्यार्थी' का जन्म आश्विन शुक्ल चतुर्दशी तिथि , रविवार विक्रम संवत 1947 ( 26 अक्टूबर 1890 ई.) को उत्तरप्रदेश के फतेहपुर जिले के हथगांव निवासी एवं मुंगावली एंग्लो वर्नाक्यूलर स्कूल के हेडमास्टर मुंशी जयनारायण की पत्नी गोमती देवी पुत्र थे । विद्यार्थी जी की 1905 ई. में भेलसा से अंग्रेजी मिडिल परीक्षा पास करने के बाद 1907 ई. में प्राइवेट परीक्षार्थी के रूप में कानपुर से एंट्रेंस परीक्षा पास करके आगे की पढ़ाई के लिए इलाहाबाद के कायस्थ पाठशाला कालेज में भर्ती हुए। अध्ययन में पत्रकारिता की ओर झुकाव हुआ और भारत में अंग्रेज़ी राज के यशस्वी लेखक पंडित सुन्दर लाल के हिंदी साप्ताहिक कर्मयोगी के संपादन में सहयोग देने लगे। कालेज में पढ़ने के बाद 1908 ई. में कानपुर के करेंसी आफिस में 30 रु. मासिक की नौकरी की। परंतु अंग्रेज अफसर से झगड़ा हो जाने के कारण उसे छोड़कर पृथ्वीनाथ हाई स्कूल, कानपुर में 1910 ई. तक अध्यापकी की। विद्यार्थी जी अध्यापन अवधि में सरस्वती, कर्मयोगी, स्वराज्य (उर्दू) तथा हितवार्ता (कलकत्ता) में लेख लिखने लगे थे । 1911 में विद्यार्थी जी सरस्वती में पं॰ महावीरप्रसाद द्विवेदी के सहायक के रूप में नियुक्त हुए। "अभ्युदय" में सहायक संपादक सितंबर, 1913 तक रहे। 9 नवम्बर 1913 को कानपुर से स्वयं अपना हिंदी साप्ताहिक प्रताप के प्रकाशन के समय से 'विद्यार्थी' जी का राजनीतिक, सामाजिक और प्रौढ़ साहित्यिक जीवन प्रारंभ हुआ। लोकमान्य तिलक को अपना राजनीतिक गुरु माना, किंतु राजनीति में गांधी जी के अवतरण के बाद आप उनके अनन्य भक्त हो गए। श्रीमती एनीं बेसेंट के 'होमरूल' आंदोलन में विद्यार्थी जी ने काम किया और कानपुर के मजदूर वर्ग के एक छात्र नेता हो गए। कांग्रेस के विभिन्न आंदोलनों में भाग लेने तथा अधिकारियों के अत्याचारों के विरुद्ध निर्भीक होकर "प्रताप" में लेख लिखने के संबंध में ये 5 बार जेल गए और "प्रताप" से कई बार जमानत माँगी गई। वे उत्तर प्रदेश के चोटी के कांग्रेस नेता हो गए। 1925 ई. में कांग्रेस के कानपुर अधिवेशन की स्वागत-समिति के प्रधानमंत्री हुए तथा 1930 ई. में प्रांतीय कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हुए। सन् 1930 ई. के सत्याग्रह आंदोलन के अपने प्रदेश के सर्वप्रथम "डिक्टेटर" नियुक्त हुए। साप्ताहिक "प्रताप" के प्रकाशन के 7 वर्ष बाद 1920 ई. में विद्यार्थी जी ने प्रताप को दैनिक कर दिया और "प्रभा" नाम की एक साहित्यिक तथा राजनीतिक मासिक पत्रिका प्रेस से प्रारम्भ की थी । "प्रताप" किसानों और मजदूरों का हिमायती पत्र रहा है । "चिट्ठी पत्री" स्तंभ "प्रताप" की विशेषता थी। विद्यार्थी ने कितने ही नवयुवकों को पत्रकार, लेखक और कवि बनने की प्रेरणा तथा ट्रेनिंग दी। ये "प्रताप" में सुरुचि और भाषा की सरलता पर विशेष ध्यान देते थे । विद्यार्थी जी ने जेल जीवन में इन्होंने विक्टर ह्यूगो के दो उपन्यासों, "ला मिजरेबिल्स" तथा "नाइंटी थ्री" का अनुवाद किया। हिंदी साहित्य सम्मलेन के 19 वें (गोरखपुर) अधिवेशन के ये सभापति चुने गए। विद्यार्थी जी बड़े सुधारवादी किंतु साथ ही धर्मपरायण और ईश्वरभक्त थे। कानपुर के सांप्रदायिक दंगे में 25 मार्च 1931 ई. को विद्यार्थी जी की हत्या कर दी गई । विद्यार्थी जी की कलम से उपजी पत्रकारिता राष्ट्रीय चेतना का माध्यम जीवंत है ।
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महादुष्ट है मुनि वेष

Posted: 24 Mar 2022 08:23 AM PDT

महादुष्ट है मुनि वेष

      ---:भारतका एक ब्राह्मण.
         संजय कुमार मिश्र"अणु"
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अपने स्वार्थ में
वह अभी लगातार
निकल रहा वामी से
करने को जीवन पर वार
साथ के एक दो लोग
पाल रखा हैं उसीका रोग
जाकर जगह-जगह
बस उगल रहा है गरल
लगा दंभ का ललकार
कहना की हम हैं हित
जबकि आचरण है विपरीत
सब जान रहे हैं लोग
उसका उचित और अनुचित
उसका घर से लेकर द्वार
कहना बस खुद को महान
जैसाकि विवस्वान
कहता मैं सबको जानता हूँ
चाहे वो नया हो फिर  पुरान
एकदम पक्का लबार
न लोक-लाज है और न भय
गाल बजा रहा है कर निश्चय
बताता सबको गलत एक साथ
 लगाकर सबको पय
दे घृणित और निकृष्ट विचार
खोदता रहा है जो अबतक कब्र
वही खुदको बता रहा संरक्षक
निकलकर अपनी वामी से
देखो घुम रहा है तक्षक-भक्षक
बहाकर माया की अश्रुधार
करना होगा प्रतिकार
कुचलना होगा उसका फण
नहीं तो विषाक्त हो जायेगा
धरती का रक्षक कण-कण
उसे पहचान और कर प्रहार
इस बार  .......  बस एक बार
कर प्रतिकार   ... कर संहार
देखो रवि हुआ अस्त
और इधर बढ रहा राकेश
देख कुटिल मुस्कान सब गये जान
ये महादुष्ट है मुनि वेष


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वलिदाद, अरवल(बिहार)८०४४०२.
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चैत्र नवरात्रि पर्व में करें इन 10 नियमों का पालन, आप पर प्रसन्न रहेंगी मां भगवती

Posted: 24 Mar 2022 07:37 AM PDT

चैत्र नवरात्रि पर्व में करें इन 10 नियमों का पालन, आप पर प्रसन्न रहेंगी मां भगवती

【ज्योतिषाचार्य पं. नरेन्द्र कृष्ण शास्त्री】
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✍🏻चैत्र नवरात्रि पर्व 02 अप्रैल से प्रारंभ हो रहे है, इस बार चैत्र नवरात्रि 09 दिनों की है, जो लोग नवरात्रि में 09 दिनों का व्रत रहेंगे, वे 11 अप्रैल को पारण करेंगे, नवरात्रि का पर्वकाल मां दुर्गा देवी को प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए उत्तम माना जाता है ज्योतिषाचार्य पं. नरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने बताया कि यदि आप भी इस वर्ष चैत्र नवरात्रि का व्रत या पूजन रखना चाहते हैं, तो उसके व्रत, पूजन नियमों के बारे में जानना जरूरी है, नियमपूर्वक व्रत करने और सही विधि से पूजा करने से ही चैत्र नवरात्रि के व्रत सफल होते हैं, नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरुपों की आराधना की जाती है, आइए जानते हैं चैत्र नवरात्रि व्रत के नियमों के बारे में, ताकि आपको व्रत का पूर्ण फल प्राप्त हो और माता रानी की कृपा आपको मिल सके।
चैत्र नवरात्रि पर्वकाल के नियम
✍🏻1:- ज्योतिषाचार्य पं. नरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने बताया कि चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिन यानी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को कलश स्थापना या घटस्थापना करना चाहिए, कलश स्थापना के साथ हम मां दुर्गा का आह्वान करते हैं, ताकि मां दुर्गा हमारे घर पधारें और नौ दिनों तक हम उनकी विधि विधान से पूजा करें।
2:- कलश के पास ​एक पात्र में मिट्टी भरकर उसमें जौ बोना चाहिए, उसे नियमित जल देना चाहिए, जौ की जैसी वृद्धि होगी, उस आधार पर इस साल के जुड़े संकेत आप प्राप्त कर सकते हैं, वैसे भी मान्यता है कि जौ जितना बढ़ता है, उतनी मां दुर्गा की कृपा होती है।
3:- यदि आप अपने घर पर मां दुर्गा का ध्वज लगाते हैं, तो उसे चैत्र नवरात्रि में बदल दें।
4:- यदि आप नौ दिन व्रत नहीं रख सकते हैं, तो पहले और अंतिम दिन नवरात्रि व्रत रख सकते हैं।
5:- नवरात्रि के समय में कलश के पास मां दुर्गा के लिए अखंड ज्योति जलानी चाहिए, उसकी पवित्रता का ध्यान रखना चाहिए।
6:- नवरात्रि के समय में दुर्गा सप्तशती का पाठ करें, आप नहीं कर सकते हैं, तो किसी वैदिक ब्राह्मण की मदद ले सकते हैं।
7:- नवरात्रि में लाल वस्त्र, लाल रंग के आसन का उपयोग करें।
8:- नवरात्रि पूजा के समय माता रानी को लौंग, बताशे का भोग लगाएं, तुलसी और दूर्वा नहीं चढ़ाएं।
9:- नवरात्रि पूजा में नियमित रूप से सुबह और शाम को मां दुर्गा देवी की आरती करें।
10:- मां दुर्गा को गुड़हल का फूल बहुत प्रिय होता है, संभव हो तो पूजा में उसका ही उपयोग करें, गुड़हल न मिले, तो लाल रंग के फूल का उपयोग करें।
"ज्योतिष शास्त्र, वास्तुशास्त्र, वैदिक अनुष्ठान व समस्त धार्मिक कार्यो के लिए संपर्क करें:-ज्योतिषाचार्य:- पं. नरेन्द्र कृष्ण शास्त्री, संपर्क सूत्र:- 9993652408, 7828289428 कुंडली परामर्श शुल्क 251/- रुपये। Phone Pe, Google Pay, Paytm No.- 9993652408
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महादेवी वर्मा स्मृति सम्मान के लिए नामित हुई डा. नम्रता आनंद

Posted: 24 Mar 2022 07:31 AM PDT

महादेवी वर्मा स्मृति सम्मान के लिए नामित हुई डा. नम्रता आनंद

 जितेन्द्र कुमार सिन्हा
जीकेसी (ग्लोबल कायस्थ कॉन्फ्रेंस) द्वारा 26 मार्च को  महादेवी वर्मा की जयंती के अवसर पर नई दिल्ली में आयोजित महादेवी वर्मा स्मृति सम्मान के लिए राजकीय-राष्ट्रीय सम्मान से अंलकृत समाज सेविका डा. नम्रता आनंद को  नामित किया गया है।
इस सम्बंध में  नम्रता आनंद ने बताया कि महान कवियित्री, सुविख्यात लेखिका, पद्म विभूषण और पद्म भूषण सम्मान से अंलकृत महादेवी वर्मा की जयंती आयोजन नयी दिल्ली में 26 मार्च को होगी, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों स्थापित और प्रतिभावान 27 विभूतियों को सम्मानित किया जाएगा। 
उन्होंने बताया कि सामाजिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने के लिये  उनका नाम (डा. नम्रता आनंद) महादेवी वर्मा स्मृति सम्मान के लिए नामित किया गया है।
    डा. नम्रता आनंद सामाजिक संगठन दीदीजी फाउंडेशन की संस्थापिका और जीकेसी बिहार की प्रदेश अध्यक्ष हैं। डा. नम्रता आनंद शिक्षा-महिला सक्तीकरण और पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।डा. नम्रता आनंद को केन्द्रीय चयन समिति ने वर्ष 2004 में राष्ट्रीय विकास और सामाजिक सेवा में किये गये उत्कृष्ठ कार्य के लिये राष्ट्रीय यूथ अवार्ड सम्मान से सम्मानित किया गया।वर्ष 2008 में डा. नम्रता आनंद ने दीदीजी फाउंडेशन की नीवं रखी जिसके बैनर तले उन्होंने जल जीवन हरियाली, बेटी पढ़ाओं बेटी बचाओ, पर्यावरण, स्वच्छता, तंबाकू विरोधी अभियान, साक्षरता, रक्तदान, पल्स पोलिया प्रतिरक्षण ,कोरोना जागरूकता, महिला सशक्तीकरण, विकलांग लोगों के पुर्नवास समेत कई सामाजिक कार्य किये जिसके लिये उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति मिली। वर्ष  2019 में डा. नम्रता आनंद को माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार की सर्वश्रेष्ठ 20 शिक्षकों में सम्मानित किया था। डा. नम्रता आनंद पर्यावरण संरक्षण की मुहिम से भी जुड़ी हुयी है। सामाजिक संगठन रोटरी क्लब में भी डा: नम्रता आनंद सक्रिय भूमिका निभाती रही हैं।वर्ष 2021 में डा. नम्रता आनंद ने कुरथौल के फुलझड़ी गार्डेन में संस्कारशाला की स्थापना की। संस्कारशाला के माध्यम से गरीब और स्लम के बच्चों का नि:शुल्क शिक्षा, संगीत, सिलाई-बुनाई और डांस का प्रशिक्षण दिया जाता है। 
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25 मार्च 2022, शुक्रवार का दैनिक पंचांग एवं राशिफल - सभी १२ राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन ? क्या है आप की राशी में विशेष ? जाने प्रशिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. प्रेम सागर पाण्डेय से |

Posted: 24 Mar 2022 07:22 AM PDT

25 मार्च 2022, शुक्रवार का दैनिक पंचांग एवं राशिफल - सभी १२ राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन ? क्या है आप की राशी में विशेष ? जाने प्रशिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. प्रेम सागर पाण्डेय से |

25 मार्च 2022, शुक्रवार का दैनिक पंचांग


🔅 तिथि अष्टमी 10:35 PM

🔅 नक्षत्र मूल 04:56 PM

🔅 करण :

                बालव 11:09 AM

                कौलव 11:09 AM

🔅 पक्ष कृष्ण

🔅 योग वरियान +01:45 AM

🔅 वार शुक्रवार
☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ

🔅 सूर्योदय 05:47 AM

🔅 चन्द्रोदय +01:30 AM

🔅 चन्द्र राशि धनु

🔅 सूर्यास्त 06:03 PM

🔅 चन्द्रास्त 11:01 AM

🔅 ऋतु वसंत
☀ हिन्दू मास एवं वर्ष

🔅 शक सम्वत 1943 प्लव

🔅 कलि सम्वत 5123

🔅 दिन काल 12:13 PM

🔅 विक्रम सम्वत 2078

🔅 मास अमांत फाल्गुन

🔅 मास पूर्णिमांत चैत्र
☀ शुभ और अशुभ समय

☀ शुभ समय

🔅 अभिजित 11:31:27 - 12:20:23

☀ अशुभ समय

🔅 दुष्टमुहूर्त 08:15 AM - 09:04 AM

🔅 कंटक 01:09 PM - 01:58 PM

🔅 यमघण्ट 04:24 PM - 05:13 PM

🔅 राहु काल 10:24 AM - 11:55 AM

🔅 कुलिक 08:15 AM - 09:04 AM

🔅 कालवेला या अर्द्धयाम 02:47 PM - 03:36 PM

🔅 यमगण्ड 02:59 PM - 04:31 PM

🔅 गुलिक काल 07:20 AM - 08:52 AM

☀ दिशा शूल

🔅 दिशा शूल पश्चिम

☀ चन्द्रबल और ताराबल

☀ ताराबल

🔅 अश्विनी, भरणी, कृत्तिका, मृगशिरा, पुनर्वसु, आश्लेषा, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, विशाखा, ज्येष्ठा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, पूर्वाभाद्रपद, रेवती

☀ चन्द्रबल

🔅 मिथुन, कर्क, तुला, धनु, कुम्भ, मीन

🌹विशेष ~ श्रीशीतलाष्टमी व्रत। 🌹

पं.प्रेम सागर पाण्डेय् नक्षत्र ज्योतिष वास्तु अनुसंधान केन्द्र नि:शुल्क परामर्श - रविवार

25 मार्च 2022, शुक्रवार का दैनिक राशिफल

मेष (Aries): आप घर की बातों के प्रति अधिक ध्यान देंगे। परिजनों के साथ महत्वपूर्ण चर्चा करेंगे और घर की सजावट का विचार करेंगे। आज आपको अपने कार्य में संतोष का अनुभव होगा। स्त्रियों की और से सम्मान मिल सकता है। माता के साथ संबंध अच्छे रहेंगे। निरुत्साही न हों।

शुभ रंग = उजला

शुभ अंक : 4

वृषभ (Tauras): विदेश में स्थित स्नेहीजन और मित्रों के समाचार आपको खुशी देंगे। विदेश जाने के इच्छुक व्यक्ति के लिए अच्छा अवसर है। लंबे प्रवास का आयोजन हो सकता है। धार्मिक स्थल की यात्रा से मन प्रफुल्लित होगा। कार्यालय या व्यापार के स्थल पर कार्यभार अधिक रहेगा। फिर भी आर्थिक लाभ होने की संभावना है।

शुभ रंग = क्रीम

शुभ अंक : 2

मिथुन (Gemini): निषेधात्मक विचारों से दूर रहें। नए कार्य का प्रारंभ और रोग उपचार प्रारंभ करना हित में नहीं है। क्रोध की भावना पर नियंत्रण नहीं रखेंगे तो अनिष्टकर प्रसंग होने की संभावना है। खर्च अधिक होगा। धन के संकट का अनुभव होगा। आध्यात्मिकता और ईश्वर की प्रार्थना से राहत मिलेगी।

शुभ रंग = हरा

शुभ अंक : 3

कर्क (Cancer): वैभवी जीवनशैली और मनोरंजक प्रवृत्तियों से आज आप आनंदित रहेंगे। व्यवसायिक क्षेत्र में लाभ होगा। आरोग्य अच्छा रहेगा। मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। यात्रा या प्रवास का आयोजन कर सकेंगे।

शुभ रंग = पीक

शुभ अंक : 8

सिंह (Leo): पारिवारिक सदस्यों के साथ बात करते वक्त वाणी में संयम बरतें, इससे संघर्ष टाल सकेंगे। दैनिक कार्य में विघ्न आ सकते हैं। कार्य संपन्न होने में मदद मिलेगी। अधिक परिश्रम के बाद भी प्राप्ति कम होने से हताशा का अनुभव हो सकता है। माता की चिंता बनी रहेगी।

शुभ रंग = उजला

शुभ अंक : 4

कन्या (Virgo): आज के दिन आपको किसी भी तरह के कलह और चर्चा से दूर रहने की सलाह देते हैं। आकस्मिक खर्च की संभावना है। विद्यार्थियों को पढाई में बाधा आएगी। प्रियजन से हुई मुलाकात मन को आनंदित करेगी। पेट से सम्बंधित पीड़ा हो सकती है। शेयर-सट्टे में निवेश करने में सावधानी बरतें।

शुभ रंग = हरा

शुभ अंक : 3

तुला (Libra): आपके लिए समय शुभ है। मन में संवेदनशीलता अधिक रहेगी। शारीरिक स्फूर्ति का अभाव रहेगा। मानसिक बेचैनी भी रहेगी। धन और कीर्ति की हानि होगी। माता के स्वास्थ्य की चिंता रहेगी। निकट के सम्बंधियो के साथ झगड़े या विवाद के कारण मन को चोट पहुंचने के प्रसंग बनेंगे।

शुभ रंग = क्रीम

शुभ अंक : 2

वृश्चिक (Scorpio): नए कार्य के प्रारंभ के लिए आज का दिन शुभ है। दिनभर मन की प्रसन्नता बनी रहेगी। भाई-बंधुओं के साथ जरुरी चर्चा करेंगे। आर्थिक लाभ और भाग्यवृद्धि के योग हैं। छोटे प्रवास का आयोजन हो सकता है। मित्रों के साथ भेंट होने से मन प्रफुल्लित होगा। कार्य में सफलता मिलेगी।

शुभ रंग = पींक

शुभ अंक : 8

धनु (Sagittarius): आप का दिन मिश्र फलदायी है। असमंजस के कारण निर्णय लेना कठिन होगा। मन में चिंता रहेगी। परिजनों के साथ मनमुटाव न हो इसका ध्यान रखें। कार्य में अपेक्षित सफलता न मिलने से निराशा होगी। कार्यभार भी बढ़ सकता है। निरर्थक खर्च होगा।

शुभ रंग = उजला

शुभ अंक : 4

मकर (Capricorn): आज आप का प्रत्येक कार्य सरलता से पूर्ण होगा। कार्यस्थान पर आपकी प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। पदोन्नति के योग हैं। गृहस्थ जीवन में आनंद का वातावरण रहेगा। शारीरिक हानि के योग होने से संभल कर रहें तथा गिरने से बचें। मित्रो, स्नेहीजनों के साथ भेंट होगी।

शुभ रंग = आसमानी

शुभ अंक : 7

कुंभ (Aquarius): स्वास्थ्य के प्रति जागरुक रहने की सलाह देते हैं। कोर्ट-कचहरी के झंझट में न पड़ें। अनुचित स्थान पर पूंजी-निवेश न हो इसका ध्यान रखें। परिवार के सदस्य विरोधी व्यवहार कर सकते हैं। अकस्मात से दूर रहें। क्रोध पर संयम रखें। धन के खर्च का योग है।

शुभ रंग = क्रीम

शुभ अंक : 2

मीन (Pisces): आज आप पारिवारिक तथा सामाजिक बातों में विशेष लिप्त रहेंगे। मित्रों से भेंट होगी और उनके पीछे खर्च करना पड़ेगा। रमणीय स्थान पर प्रवास-पर्यटन की संभावना है। प्रत्येक क्षेत्र में आपको लाभ होगा। विवाह के इच्छुक व्यक्तियों को अच्छा जीवनसाथी मिलने का योग है।

शुभ रंग = उजला

शुभ अंक : 4 
प्रेम सागर पाण्डेय् ,नक्षत्र ज्योतिष वास्तु अनुसंधान केन्द्र ,नि:शुल्क परामर्श - रविवार , दूरभाष 9122608219 / 9835654844
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