दिव्य रश्मि न्यूज़ चैनल |
- 25 जून 2022, शनिवार का दैनिक पंचांग एवं राशिफल - सभी १२ राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन ? क्या है आप की राशि में विशेष ? जाने प्रशिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. प्रेम सागर पाण्डेय से |
- गुजरात दंगों को लेकर मोदी के खिलाफ दाखिल याचिका खारिज
- पीएम समेत कई नेताओं की मौजूदगी में मुर्मू ने किया नामांकन
- एकादशी पर रामलला को कराया गया फलाहार
- सिद्धांत विहीन सत्ता का हश्र
- मारुति सुजूकी की न्यू ब्रेजा
- सरकारी बचत योजनाओं पर बढ़ सकता है ब्याज
- यूपी में युवाओं को भाया अग्निपथ
- चीन ने दोस्त पाकिस्तान को दिया विकसित युद्धपोत
- रूस में विमान दुर्घटनाग्रस्त, चार की मौत
- अमेरिका के एसपीपी में नहीं शामिल होगा नेपाल
- यूक्रेन व रूस में अनाज बर्बाद न हो: गुटेरेस
- जीवन सेवानिवृत्ती के बाद
- विरासत में छिपी है अरवल का क्षेत्र करपी ( अरवल ) ।
- द्वापर युग के महान विभूति महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास-अशोक “प्रवृद्ध”
- उत्तराखण्ड में मुख्य सचिव पद पर भी महिला की तैनाती संभव
- हमसे बड़ा क्रिमिनल कौन है भाई: आजम खान
- आजमगढ़ में उत्साह से लोगों ने किया मतदान
- वनवासी नारी शक्ति को सम्मान
- पल्लवी पटेल पर आरोप
- कांग्रेस को एक रख पाएंगी प्रतिभा सिंह
- ताइवान ने चेतावनी देकर चीनी विमानों को खदेड़ा
- गिलगिट-बाल्टिस्तान चीन को सौंप सकता है पाकिस्तान
- मर्डोक चैथी बार दे रहे हैं तलाक
- ब्रिक्स से पहले भारतीय राजदूत ने चीन के विदेश मंत्री से की मुलाकात
| Posted: 24 Jun 2022 07:47 AM PDT 25 जून 2022, शनिवार का दैनिक पंचांगश्री गणेशाय नम: !! दैनिक पंचांग !! 🔅 तिथि द्वादशी रात्रि 01:51 🔅 नक्षत्र भरणी 12:18 PM 🔅 करण : कौलव 12:10 PM तैतिल 12:10 PM 🔅 पक्ष कृष्ण 🔅 योग सुकर्मा 05:12 AM 🔅 वार शनिवार ☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ 🔅 सूर्योदय 05:13 AM 🔅 चन्द्रोदय +02:37 AM 🔅 चन्द्र राशि मेष 🔅 सूर्यास्त 06:47 PM 🔅 चन्द्रास्त 03:35 PM 🔅 ऋतु वर्षा ☀ हिन्दू मास एवं वर्ष 🔅 शक सम्वत 1944 शुभकृत 🔅 कलि सम्वत 5124 🔅 दिन काल 01:44 PM 🔅 विक्रम सम्वत 2079 🔅 मास अमांत ज्येष्ठ 🔅 मास पूर्णिमांत आषाढ ☀ शुभ और अशुभ समय ☀ शुभ समय 🔅 अभिजित 11:24:31 - 12:19:27 ☀ अशुभ समय 🔅 दुष्टमुहूर्त 04:59 AM - 05:54 AM 🔅 कंटक 11:24 AM - 12:19 PM 🔅 यमघण्ट 03:04 PM - 03:59 PM 🔅 राहु काल 08:25 AM - 10:08 AM 🔅 कुलिक 05:54 AM - 06:49 AM 🔅 कालवेला या अर्द्धयाम 01:14 PM - 02:09 PM 🔅 यमगण्ड 01:35 PM - 03:18 PM 🔅 गुलिक काल 04:59 AM - 06:42 AM ☀ दिशा शूल 🔅 दिशा शूल पूर्व ☀ चन्द्रबल और ताराबल ☀ ताराबल 🔅 अश्विनी, भरणी, कृत्तिका, रोहिणी, आर्द्रा, पुष्य, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, शतभिषा, उत्तराभाद्रपद ☀ चन्द्रबल 🔅 मेष, मिथुन, कर्क, तुला, वृश्चिक, कुम्भ 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹💓🌹🌹🌹 पं. प्रेम सागर पाण्डेय् ,नक्षत्र ज्योतिष वास्तु अनुसंधान केन्द्र नि:शुल्क परामर्श - शनिवार दूरभाष 9122608219 / 9835654844 🌹 25 जून 2022, शनिवार का राशिफल 🌹मेष (Aries): साल का पहना दिन आर्थिक और व्यवसायिक दृष्टि से लाभदायी रहेगा। धन लाभ के साथ आप लंबी अवधि के लिए धन का आयोजन भी कर पाएंगे। अगर आप व्यापार से जुड़े हैं तो उसके विस्तार की योजना बना पाएंगे। शरीर और मन से तरोताजा महसूस करेंगे। आपका दिन मित्रों और स्वजनों के साथ आनंद-प्रमोद में बीतेगा। छोटी यात्रा या प्रवास भी हो सकता है। कोई धार्मिक या पूण्य का काम करेंगे। आज का दिन आपके लिए शुभ है। शुभ रंग = पींक शुभ अंक : 1 वृषभ (Tauras): आप अपनी वाणी से किसी को मंत्रमुग्ध कर लाभ ले पाएंगे और मेलजोल के सम्बंध बना सकेंगे। आपकी वैचारिक समृद्धि में बढ़ोतरी होगी और आपका मन प्रफुल्लित रहेगा। आप किसी शुभ कार्य को करने के लिए प्रेरित होंगे। आज मेहनत की अपेक्षा परिणाम कम मिलने पर भी दृढ़तापूर्वक आगे बढ़ेंगे। धन की व्यवस्थित योजना बनाने के लिए आज का दिन अनुकूल है। शुभ रंग = आसमानी शुभ अंक : 7 मिथुन (Gemini): आपके मन में भांति-भांति के विचार आएंगे और आप उन विचारों में खोए रहेंगे। आज बौद्धिक कार्यों से जुड़ना होगा, लेकिन वाद-विवाद में न उतरने की सलाह देते हैं। आज आप संवेदनशील रहेंगे। प्रवास के योग रहने पर भी यथासंभव प्रवास को टालें। पानी और तरल पदार्थों के मामले में सावधानी बरतें। मानसिक थकान की अनुभूति रहेगी और विचारों में असमंजस रहेगा। शुभ रंग = नीला शुभ अंक : 6 कर्क (Cancer): आज आपका दिन शुभ रहेगा। नए कार्य प्रारंभ करने के लिए दिन शुभ है। मित्रों और स्वजनों से भेंट होगी। पर्यटन की योजना बना सकते हैं। मन में प्रसन्नता छाई रहेगी। आज किए गए कार्य में सफलता प्राप्त होने के योग हैं। नौकरी या व्यापर में प्रतिस्पर्धियों पर विजय प्राप्त कर पाएँगे। आर्थिक लाभ होगा। सामाजिक मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। शुभ रंग = क्रीम शुभ अंक : 2 सिंह (Leo): आज आपका दिन आर्थिक रूप से लाभदायी रहेगा। खर्च अधिक होगा। दूर के लोगों से संदेश-व्यवहार से लाभ होगा। आज परिवारवालों का अच्छा सहयोग मिलेगा। स्त्री मित्र भी आपके सहायक होंगे। आंख या दांत संबंधी पीड़ा में राहत का अनुभव होगा। उत्तम भोजन प्राप्त होने के योग हैं। आप अपनी मधुर वाणी से किसी का भी मन जीत पाएंगे। कार्यो में सफलता मिलने की संभावना है। शुभ रंग = केशरी शुभ अंक : 7 कन्या (Virgo): आपका दिन मध्यम फलदायी होगा। विचारों की समृद्धि बढेगी। लाभकारी तथा मेलजोल भरे संबंध आप वाणी की सहायता से बना सकेंगे। व्यवसायिक रूप से दिन लाभदायी रहेगा। आपका स्वास्थ्य अच्छा और मन प्रसन्न रहेगा। आर्थिक लाभ ले सकेंगे। सुख और आनंद की प्राप्ति होगी। शुभ समाचार मिलेंगे। आनंददायी प्रवास होगा। उत्तम वैवाहिक सुख की अनुभूति होगी। शुभ रंग = नीला शुभ अंक : 6 तुला (Libra): अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखने के लिए सूचित करते हैं। असंयमित या अविचारी वर्तन आपको परेशानी में डाल सकता है। दुर्घटना से सावधान रहें। खर्च अधिक रहेगा। व्यवसायिक व्यक्तियों के साथ उग्र विवाद होने की संभावना है, इसलिए वाणी पर संयम रखें। वाद-विवाद में ना फंसे, कोर्ट-कचहरी के कार्य में सावधानी बरतें। सगे-सम्बंधियों के साथ अनबन के योग हैं। आध्यात्मिकता से सहायता मिल सकती है। शुभ रंग = क्रीम शुभ अंक : 7 वृश्चिक (Scorpio): आपका आज का दिन लाभदायी रहेगा। नौकरी-व्यवसाय में लाभ प्राप्त होगा। मित्रों के साथ भेंट हो सकती है। घूमने की योजना भी बन सकती है। विवाह योग्य युवक-युवतियों को योग्यपात्र मिल सकते हैं। पुत्र तथा पत्नी से लाभ होगा। विशेषकर स्त्री मित्रों से आज लाभ होगा। उपहार मिल सकते हैं। ऊपरी अधिकारी प्रसन्न रहेंगे। सांसारिक जीवन में आनंद का अनुभव करेंगे। शुभ रंग = पींक शुभ अंक : 1 धनु (Sagittarius): आज आप आर्थिक मामलों में उचित योजना बना सकेगें। अन्य लोगों की सहायता करने का प्रयत्न करेंगे। हर एक कार्य सफलतापूर्वक संपन्न होगा। व्यापार-विषयक योजना बनेगी। आनंद-प्रमोद के साथ दिन बीतेगा। व्यापार के हेतु प्रवास की संभावना है। उच्च पदाधिकारियों से लाभ होगा। पदोन्नति के योग हैं व मान-सम्मान बढ़ेगा। पिता और बड़े-बुजुर्गों से लाभ होगा। शुभ रंग = पीला शुभ अंक : 9 मकर (Capricorn): आज का आपका दिन मध्यम फलदायी रहेगा ऐसा प्रतीत होता है परंतु बौद्धिक कार्य करने के लिए आज का दिन शुभ है। आज लेखन प्रवृत्ति या साहित्य से जुड़ी कोई भी प्रवृत्ति अच्छी तरह से निभा पाएंगे। इसके लिए आप योजना भी बना सकेगें। सरकारी कार्यों में परिस्थिति प्रतिकूल महसूस होगी। शरीर में हल्की थकान रहेगी और मानसिक हालत भी ठीक नहीं होंगे। शुभ रंग = श्याम शुभ अंक : 3 कुंभ (Aquarius): आज अत्याधिक विचारों से मानसिक थकावट का अनुभव करेंगे। मन में क्रोध की भावना रहेगी जिसे दूर करने के प्रयास से अनिष्ट से बच सकेंगे। चोरी, अनैतिक कृत्यों, निषेधात्मक कार्यों तथा नकारात्मक विचारों से दूर रहें। वाणी पर संयम रखें। परिवार में किसी के विवाह होने की संभावना है। खर्च में वृद्धि होने के कारण हाथ तंग रहेगा। ईश्वर का नाम और आध्यात्मिक विचार आपके मन को शांत बनाएंगे। शुभ रंग = नीला शुभ अंक : 6 मीन (Pisces): आज के दिन आपके अंदर छिपे लेखक या कलाकार को अपनी कला दिखाने का अवसर मिलेगा। व्यवसाय में भागीदारी के लिए शुभ समय है। प्रतिदिन के क्रियाकलापों से निकलकर आप अपना समय आमोद प्रमोद में बीता सकेगें। स्वजन, मित्र के साथ पार्टी या पिकनिक का आयोजन होगा। नाटक, सिनेमा, मनोरंजन स्थल की भेंट करके निकटता प्राप्त कर सकते हैं। यश-कीर्ति में वृद्धि होगी। शुभ रंग = गुलाबी शुभ अंक : 5 प्रेम सागर पाण्डेय् ,नक्षत्र ज्योतिष वास्तु अनुसंधान केन्द्र ,नि:शुल्क परामर्श - रविवार , दूरभाष 9122608219 / 9835654844 हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| गुजरात दंगों को लेकर मोदी के खिलाफ दाखिल याचिका खारिज Posted: 24 Jun 2022 07:24 AM PDT गुजरात दंगों को लेकर मोदी के खिलाफ दाखिल याचिका खारिज
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2002 के गुजरत दंगा मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी समेत 64 लोगों को एसआईटी द्वारा क्लीन चिट दिए जाने को चुनौती देनेवाली याचिका खारिज कर दी है। यह याचिका जाकिया जाफरी ने दायर की थी। जाकिया जाफरी गुजरात दंगों मारे गए कांग्रेस सांसद एहसान जाफरी की पत्नी हैं। जस्टिस एम। खानविलकर, जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस सीडी रविकार की बेंच ने मामले को बंद करने संबंधी 2012 में सौंपी गई एसआईटी की रिपोर्ट के खिलाफ दायर याचिका को खारिज करने के विशेष मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा। सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा और कहा कि जाफरी की याचिका सुनवाई के योग्य नहीं है। जकिया जाफरी ने 2002 के गुजरात दंगों में एक बड़ी साजिश का आरोप लगाया था। कांग्रेस नेता और सांसद एहसान जाफरी 28 फरवरी, 2002 को अहमदाबाद की गुलबर्ग सोसाइटी में मारे गए 68 लोगों में शामिल थे। इससे एक दिन पहले गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस के एक डिब्बे में आग लगा दी गई थी, जिसमें 59 लोग मारे गए थे। इन घटनाओं के बाद ही गुजरात में दंगे भड़क गए थे। जकिया जाफरी ने एसआईटी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित 64 लोगों को मामले में दी गई क्लीन चिट को चुनौती दी थी। जाकिया ने हाईकोर्ट के पांच अक्टूबर, 2017 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें अदालत ने एसआईटी की रिपोर्ट के खिलाफ उनकी याचिका को खारिज कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल नौ दिसंबर को याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रखा था। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान एसआईटी ने कहा था कि जाकिया के अलावा किसी ने भी 2002 दंगे मामले में हुई जांच पर 'सवाल नहीं उठाए' हैं। इससे पहले जाकिया के वकील ने कहा था कि 2006 मामले में उनकी शिकायत है कि ''एक बड़ी साजिश रची गई, जिसमें नौकरशाही की निष्क्रियता और पुलिस की मिलीभगत थी और अभद्र भाषा एवं हिंसा को बढ़ावा दिया गया। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| पीएम समेत कई नेताओं की मौजूदगी में मुर्मू ने किया नामांकन Posted: 24 Jun 2022 07:22 AM PDT पीएम समेत कई नेताओं की मौजूदगी में मुर्मू ने किया नामांकननई दिल्ली। एनडीए की राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू ने आज नामांकन दाखिल कर कई राजनीतिक दलों के प्रमुखों से बातचीत की। एनडीए की राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू ने फोन कर कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी, पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी और एनसीपी प्रमुख शरद पवार से बात की और राष्ट्रपति चुनाव में उनकी उम्मीदवारी के लिए उनकी पार्टी का समर्थन मांगा है। एनडीए की राष्ट्रपति उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू ने आज अपना नामांकन दाखिल कर दिया है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत एनडीए के बड़े नेता और कई राज्यों के मुख्यमंत्री भी मौजूद थे। इससे पहले कल द्रौपदी मुर्मू ने पीएम मोदी से भी मुलाकात की थी। जानकारी के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राजनाथ सिंह, अमित शाह और बीजेपी अध्यक्ष जे पी नड्डा उनके प्रस्तावकों में शामिल रहे। उधर, वाईएसआर कांग्रेस ने भी राष्ट्रपति पद के लिए द्रौपदी मुर्मू को अपना समर्थन देने का ऐलान किया है। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी के दफ्तर से जारी एक विज्ञप्ति में द्रौपदी मुर्मू की उम्मीदवारी की सराहना की गई। विज्ञप्ति में कहा गया, 'यह एक अच्छा संकेत है कि स्वतंत्र भारत के इतिहास में आदिवासी समुदाय की एक महिला को राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार बनाया गया है। इसलिए, वाईएसआर कांग्रेस उन्हें अपना समर्थन देती है।' इससे पहले बीजू जनता दल ने भी द्रौपदी मुर्मू की उम्मीदवारी का समर्थन किया था। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाये जाने पर खुशी जताई थी। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| एकादशी पर रामलला को कराया गया फलाहार Posted: 24 Jun 2022 07:19 AM PDT एकादशी पर रामलला को कराया गया फलाहारअयोध्या (यूपी)। रामगरी अयोध्या में स्थित भगवान रामलला को बालक रूप में मानकर राम जन्मभूमि परिसर में पुजारी सेवा करते हैं। रामलला को गर्मी से बचाने के लिए एसी का उपयोग किया जा रहा है, तो ठंडी चीजों को भोजन में भी शामिल कराया गया है। आज एकादशी का मौका है ऐसे में रामलला को फलाहार का भोग लगेगा। यूं तो रामलला को दिन भर में तीन बार भोग लगाया जाता है, पहला बाल भोग सुबह श्रृंगार के बाद रामलला के पट जब आम भक्तों के लिए खुलते हैं उससे पहले उन्हें बाल भोग कराया जाता है। दोपहर में राजभोग के बाद पट बंद होते हैं। जो दोपहर में 2 बजे खुलते हैं और फिर रात्रि में संध्या भोग लगाया जाता है। बाल भोग में रामलला को पेड़ा और पंचमेवा का भोग लगाया गया तो वही दोपहर में रामलला को पकौड़ी हलवा दही और मौसमी फल आम का भोग समर्पित किया गया। एकादशी के मौके पर भगवान शाम को भी फलहार ही करेंगे। उन्हें शाम को सिंघाड़े के आटे का हलवा फलारी सब्जी और मिष्ठान फल का भोग लगाया जाएगा। एकादशी के मौके पर पूरा दिन भगवान को फलाहार का ही भोग अर्पित किया जाएगा। रामलला के प्रधान पुजारी कहते हैं कि भगवान को फलाहार बहुत पसंद है और एकादशी तिथि सभी तिथियों में सबसे उच्च है। इस दिन फलाहार कर भगवान विष्णु की आराधना करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 24 Jun 2022 07:16 AM PDT सिद्धांत विहीन सत्ता का हश्र(डॉ. दिलीप अग्निहोत्री-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा) उद्धव ठाकरे की अमर्यादित आकांक्षा पूरी हो चुकी है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्रियों की सूची में उनका शुमार हुआ। ये बात अलग है कि उन्हें शासन के धृतराष्ट्र के रूप में याद किया जाएगा बाला साहब ठाकरे की विरासत को रोंदते हुए वह मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुँचे थे। जबकि उत्तराधिकार में मिली राजनीतिक विरासत के अतिरिक्त उनके पास कुछ नहीं था। यही उनकी पहचान थी। यही उनकी विशेषता थी। वह मुख्यमंत्री तो बन गए थे,लेकिन अपनी विश्वसनीयता को पूरी तरह गँवा चुके हैं। यह प्रकरण क्षेत्रीय दलों के लिए भी एक सबक बन गया हैं। क्षेत्रीय दलों का संचालन राजतंत्र के अंदाज में होता है। इसमें भी युवराज होते हैं। समय आने पर इनका ही राजतिलक होता है। इसमें भी अपने पिता को अपदस्थ कर पूरी पार्टी पर नियन्त्रण कर लेने के भी उदाहरण है। कुछ समय एक नया ट्रेड चला हैं। यदि कोई भाजपा सरकार की तारीफ कर दे तो उसे भक्त घोषित कर दिया जाता है। जबकि वास्तविक भक्त तो परिवार आधारित दलों में होते हैं। यहां आंख मूँद कर युवराज की जय जय कार होती है। उसकी योग्यता क्षमता से किसी को मतलब नहीं होता है। इसी नियम के अंतर्गत उद्धव को बाल ठाकरे की विरासत मिली थी। संजय राउत जैसे लोगों को मुख्य सलाहकार उद्धव ने खुद बनाया था। परिणाम सामने है। सत्ता और पार्टी दोनों हांथ से निकल रही हैं। विद्रोह आंतरिक है। यही परिवार आधारित दलों के लिए सबक हैं। जय जय कार की भी एक सीमा होती है। उस सीमा के बाद धैर्य जबाब देने लगता है। विद्रोह करने वाले अपने को बालासाहब ठाकरे का सच्चा अनुयाई बता रहे हैं। उनका कहना है कि वह उद्धव की तरह हिन्दुत्व की विचारधारा का परित्याग नहीं कर सकते।सेक्युलर सरकार के नाम पर बेहिसाब भ्रष्टाचार होता रहा। शिवसेना का गठन तुष्टीकरण के लिए नहीं हुआ था। कुर्सी के लिए उद्धव ठाकरे कांग्रेस और एनसीपी के इशारों पर चल रहे थे। इसमे बालासाहब ठाकरे के विचारों का कोई महत्त्व नहीं रह गया था। उद्धव ने शिवसेना को उस मुकाम पर पहुँचा दिया था जहां वह पूरी तरह कांग्रेस एनसीपी की बी टीम बन कर रह गई थी। बालासाहब से प्रेरणा लेकर राजनीति करने वालों के लिए यह स्थिति असहनीय थी। उनके संख्या बल से स्पष्ट है कि उद्धव के विरुद्ध किस हाद तक नाराजगी थी। भाजपा ने भी गठबन्धन सरकार चलाने के लिए अपने कोर मुद्दों पर जोर न देना स्वीकार किया था। लेकिन उसने इन मुद्दों को कभी छोड़ा नहीं थी। भाजपा ने सदैव कहा कि ये उंसकी आस्था के मुद्दे है। जब भी वह इनपर अमल की क्षमता में होगी,उसे पूरा किया जाएगा। भाजपा ने इसे पूरा करके दिखा दिया। अनुच्छेद तीन सौ सत्तर, पैंतीस-ए, तीन तलाक पर रोक, राम मंदिर निर्माण आदि ऐसे ही मुद्दे थे। भाजपा के सक्षम होते ही इन्हें अंजाम तक पहुंचाया गया। लेकिन कमजोर होने के बाद भी भाजपा ने कभी कांग्रेस के सामने समर्पण नहीं किया था। जबकि उद्धव ठाकरे कमजोर संख्याबल के बाद कांग्रेस व एनसीपी की शरण मे चले गए थे। बाला साहब ठाकरे ने कांग्रेस की तुष्टिकरण नीतियों के जबाब में शिवसेना की स्थापना की थी। वह सदैव हिंदुत्व के मुद्दों को मुखरता से उठाते रहे। उन्होंने स्वयं सत्ता में जाना स्वीकार नहीं किया। भाजपा के साथ गठबंधन के बाद शिवसेना का आधार भी व्यापक हुआ था। जब पहली बार इस गठबंधन को सरकार बनाने का अवसर मिला तब बाला साहब को मुख्यमंत्री बनाने का प्रस्ताव किया गया था। लेकिन उन्होंने इसे अस्वीकार कर दिया। इसके बाद शिवसेना के मनोहर जोशी मुख्यमंत्री बने थे। उसी समय दो बातें तय हो गई थी, पहली यह कि भाजपा और शिवसेना महाराष्ट्र के स्वभाविक साथी है। यह गठबंधन स्थायी रहेगा। दूसरी बात यह कि दोनों में जिस पार्टी के विधायक अधिक होंगे, उसी पार्टी को मुख्यमंत्री पद मिलेगा। बाला साहब ठाकरे ने कभी यह कल्पना नहीं कि होगी कि उनके उत्तराधिकारी मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए कांग्रेस और शरद पवार के पीछे चलते नजर आएंगे। यह सरकार अनैतिक ही नहीं बल्कि संवैधानिक भावना का उल्लंघन करने वाली थी। भाजपा के साथ चुनाव लड़ना फिर स्वार्थ में चुनाव बाद गठबंधन से अलग हो जाना, अनैतिक था। क्योंकि इसका कोई सैद्धान्तिक या नीतिगत आधार नहीं था। भाजपा से करीब आधी संख्या कम होने के बाबजूद उद्धव खुद या अपने पुत्र को मुख्यमंत्री बनवाना चाहते थे। इस संदर्भ में हरियाणा और जम्मू कश्मीर का उदाहरण दिया गया था। जम्मू कश्मीर में भाजपा और पीडीपी ने एक दूसरे के विरोध में चुनाव लड़ा था। बाद में दोनों ने गठबन्धन सरकार बनाई थी। इसी प्रकार हरियाणा में भाजपा और दुष्यंत चैटाला की पार्टी ने एक दूसरे के खिलाफ विधानसभा चुनाव लड़ा था। बाद में इन्होंने भी मिल कर सरकार बनाई है। इन उदाहरणों से शिवसेना अपना बचाव नहीं कर सकती थी। जम्मू कश्मीर में भाजपा ने सरकार बनाने में कोई जल्दीबाजी नहीं दिखाई थी। कांग्रेस, पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस को गठबन्धन सरकार पर विचार का पूरा अवसर मिला। लेकिन इनके बीच सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद दो ही विकल्प थे। पहला यह कि पीडीपी व भाजपा के बीच गठबन्धन हो, दूसरा यह कि यहां राष्ट्रपति शासन लगाया जाए। राष्ट्रपति शासन के बाद चुनाव में भी ज्यादा उलटफेर की संभावना नहीं थी। जम्मू क्षेत्र में भाजपा का वर्चस्व था। घाटी में कांग्रेस, पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस को लड़ना था। ऐसे में भाजपा और पीडीपी ने न्यूनतम साझा कर्यक्रम तैयार किया। फिर सरकार बनाई। पीडीपी की संख्या ज्यादा थी, इसलिए महबूबा मुफ्ती मुख्यमंत्री बनी थी। हरियाणा में भी किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिला। भाजपा सबसे बड़ी पार्टी थी। दुष्यंत चैटाला ने समर्थन दिया। इस तरह बहुमत की सरकार कायम हुआ। दूसरी ओर महाराष्ट्र में जनादेश बिल्कुल स्पष्ट था। मतदाताओं ने भाजपा के नेतृत्व में शिवसेना गठबन्धन को पूर्ण जनादेश दिया था। उद्धव का स्वार्थ जनादेश पर भारी पड़ा। उन्होंने मतदाताओं के फैसले का अपमान किया था। इसके लिए उद्धव ने चुनाव पूर्व गठबन्धन को ठुकरा दिया। वह उन विरोधियों के पीछे दौड़ने लगे जिनकी नजर में शिवसेना साम्प्रदायिक थी। जबकि जनादेश भाजपा शिवसेना गठबंधन की सरकार के लिए था।लेकिन उद्भव इस कदर बैचैन थे कि उन्हें कांग्रेस एनसीपी की सच्चाई भी दिखाई नहीं दे रही थी। कांग्रेस की नजर में शिवसेना घोर साम्प्रदायिक और शिवसेना की नजर में कांग्रेस तुष्टिकरण की पार्टी रही है। दोनों की विरासत भी बिल्कुल अलग अलग रही है। शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे ने इसी आधार पर कांग्रेस का विरोध किया था। उन्होंने हिंदुत्व की प्रेरणा से शिवसेना की स्थापना की थी। शिवसेना को मुख्यमंत्री पद की सर्वाधिक कीमत चुकानी पड़ी। छप्पन सीट के साथ उसे मुख्यमंत्री की कुर्सी मिली थी जबकि उद्धव को मुख्यमंत्री बनाने वालों की संख्या सौ से अधिक थी। कांग्रेस और एनसीपी के सामने उद्धव आज्ञाकारी जैसा आचरण कर रहे थे। शिवसेना पर हिंदुत्व के एजेंडे को छोड़ने का दबाब बनाया गया था। उद्धव ने इसे शिरोधार्य किया था।अब इसी आधार पर शिवसेना में उद्धव विरोधियों का पडला भारी हो गया है। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब 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| Posted: 24 Jun 2022 07:13 AM PDT मारुति सुजूकी की न्यू ब्रेजाभारत की सबसे बड़ी कार निर्माता मारुति सुजुकी 30 जून को बिल्कुल नया ब्रेजा लॉन्च करने के लिए तैयार है। बुकिंग 20 जून से शुरू हुई थी। अब, मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस सब-कॉम्पैक्ट एसयूवी को बेहतरीन रिस्पॉन्स मिल रहा है। ब्रेजा को खरीदने के लिए ग्राहक कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट पर 11,000 रुपये की टोकन राशि का भुगतान करके या अपने नजदीकी मारुति सुजुकी एरिना डीलरशिप पर जाकर बुक कर सकते हैं। खास बात यह है कि मौजूदा विटारा ब्रेजा को बुक करने वाले ग्राहकों को नई ब्रेजा डिलीवरी की जाएगी। रिपोर्ट के मुताबिक, विटारा ब्रेजा के लिए अब तक 20,000 ऑर्डर पेंडिंग हैं। फाइनेंशियल एक्सप्रेस के साथ बातचीत में कंपनी के वरिष्ठ कार्यकारी निदेशक मार्केटिंग एंड सेल्स शशांक श्रीवास्तव ने खुलासा किया कि सभी ग्राहकों को ऑल-न्यू ब्रेजा की पेशकश की जाएगी। 2022 मारुति सुजुकी ब्रेजा को कई कॉस्मेटिक अपडेट, नए फीचर्स और अपडेट इंजन साथ लॉन्च किया जाएगा। ैन्ट में एक 1।5-लीटर नैचुरली-एस्पिरेटेड पेट्रोल इंजन होगा, जो ग्स्6 और म्तजपहं में भी मिलता है। यह इंजन 101 बीएचपी और 136।8 एनएम पीक टॉर्क विकसित करता है। इंजन को 5-स्पीड एमटी और 6-स्पीड टॉर्क-कन्वर्टर एटी के साथ पैडल शिफ्टर्स के साथ जोड़ा जाएगा। फीचर्स की बात करें तो इसमें छह एयरबैग, एक 360-डिग्री पार्किंग कैमरा, एक भ्न्क्, एक इलेक्ट्रिक सनरूफ समेत कई हाई-टेक फीचर्स देखने को मिलेंगे। कुछ अन्य विशेषताओं में एंड्रॉइड ऑटो, एप्पल कारप्ले और कनेक्टेड कार टेक, हवादार फ्रंट सीट आदि के साथ एक बड़ा फ्री-स्टैंडिंग टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम शामिल होगा। लॉन्च होने पर, नई 2022 मारुति सुजुकी ब्रेजा हुंडई वेन्यू, किआ सॉनेट और टाटा नेक्सॉन को टक्कर देगी। बीएसई ऑटो इंडेक्स में ब्रेकआउट के बाद, ज्यादातर ऑटो मेजर इस हफ्ते तेजी से चढ़ रहे हैं। पिछले 5 सत्रों में, टाटा मोटर्स के शेयर की कीमत 6 प्रतिशत से अधिक बढ़ी है जबकि मारुति सुजुकी के शेयरों में इस अवधि में 8 प्रतिशत से अधिक की तेजी देखने को मिली है। पिछले 5 सत्रों में महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयर की कीमत में 4 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, टीवीएस मोटर के शेयर की कीमत करीब 4।50 फीसदी बढ़ी है। शेयर बाजार के जानकारों के मुताबिक बीएसई ऑटो इंडेक्स में ब्रेकआउट के बाद ज्यादातर ऑटो शेयरों ने तेजी दिखाई है। यह ऑटो शेयरों में तेजी का एक प्रमुख कारण है। उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन के उतार-चढ़ाव से हाल ही में हुई बिकवाली के बाद ऑटो स्टॉक आकर्षक वैल्यूएशन पर उपलब्ध हैं। हाल के सत्रों में बाजारों में कमजोरी मुख्य रूप से अमेरिकी अर्थव्यवस्था में कमजोरी के कारण हुई है। इसलिए, एक बार जब बाजारों में पलटाव होगा, तो ऑटो स्टॉक भारतीय शेयर बाजार में तेजी लाने वाले सेक्टर में से एक होंगे। मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस समय ऑटो स्टॉक के फंडामेंटल मजबूत दिख रहे हैं। मांग में काफी तेजी है। वहीं, दूसरी तरफ कोरोना के बाद जब बाजार ने वापस तेजी दिखाई तो ज्यादातर ऑटो स्टॉक उसमें शामिल नहीं थे क्यों कि ऑटो शेयरों का नेशनल इकोनॉमी के साथ सीधा संबंध होता है। अब, कच्चा तेल अपने हाल के उच्च स्तर से नीचे आ रहा है। इसलिए, एक बार ट्रेंड रिवर्सल में ऑटो स्टॉक प्रमुख सेक्टरों में से एक होगा। एक्सपर्ट्स के मुताबिक ऑटो सेक्टर में टाटा मोटर, मारुति सुजुकी, महिंद्रा एंड महिंद्रा, टीवीएस मोटर ऐसे स्टॉक दिख रहे हैं जिन्हें अभी खरीदा जा सकता है। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| सरकारी बचत योजनाओं पर बढ़ सकता है ब्याज Posted: 24 Jun 2022 07:00 AM PDT सरकारी बचत योजनाओं पर बढ़ सकता है ब्याजपीपीएफ-सुकन्या जैसी छोटी बचत योजनाओं में पैसे लगाने वाले निवेशकों के लिए अच्छी खबर है। एफडी, रेपो रेट सहित अन्य ब्याज दरें बढ़ने के बाद अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि अब सरकारी बचत योजनाओं पर भी ब्याज बढ़ेगा। दरअसल, विभिन्न मेच्योरिटी वाली सरकारी प्रतिभूतियों पर यील्ड यानी प्रतिफल में बड़ा इजाफा हुआ है। सरकार की छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरें भी इन प्रतिभूतियों से जुड़ी होती हैं। ऐसे में पूरी संभावना है कि 30 जून को सरकार अगली तिमाही के लिए इन बचत योजनाओं की ब्याज दरों में इजाफा कर दे। महामारी के दबाव में पिछले दो साल से इन योजनाओं की ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। वैसे सरकार हर तिमाही में इनकी ब्याज दरों में बदलाव करती है। रेटिंग एजेंसी इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर का कहना है कि लघु बचत योजनाओं पर ब्याज दरें बढ़ने से वरिष्ठ नागरिकों, किसानों के साथ लड़कियों के नाम खोले जाने वाले सुकन्या निवेशकों को भी लाभ होगा। साथ ही इन योजनाओं में निवेश भी बढ़ेगा। नायर ने कहा, इससे डेट बाजार की उधारी पर भी रोक लगाने में मदद मिलेगी और बॉन्ड बाजार पर भी दबाव कम होगा। इतना ही नहीं सरकारी प्रतिभूतियों की बढ़ती यील्ड पर भी रोक लगाई जा सकेगी। उन्होंने अनुमान लगाया कि सरकार का कुल राजकोषीय घाटा चालू वित्तवर्ष में 1 लाख करोड़ रुपये से कम रह सकता है। सरकार ने इस महीने के आखिर में छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दरें बढ़ाईं तो करीब आधा दर्जन योजनाओं में निवेश करने वालों को इसका फायदा मिलेगा। इसमें पब्लिक प्रोविडेंट फंड यानी पीपीएफ, 1 से 3 साल और 5 साल वाली रिकरिंग डिपॉजिट (आरडी), वरिष्ठ नागरिक वय वंदन योजना, सुकन्या समृद्धि योजना, नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट (एनएससी), सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम और किसान विकास पत्र जैसी योजनाएं शामिल हैं। केंद्र सरकार किसानों की आर्थिक सहायता के लिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना चला रही है। उसने इस महीने की शुरुआत में इस स्कीम की 11वीं किस्त जारी की थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 करोड़ से अधिक किसानों को 21,000 करोड़ रुपये से अधिक जारी किए। हालांकि, अगर आप भी इस योजना का लाभ ले रहे हैं, तो याद रखें कि इसकी 12वीं किस्त प्राप्त करने के लिए आपको अपना ई-केवाईसी पूरा करना होगा। अगर अंतिम तारीख तक ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी करने में विफल रहते हैं, तो आप पीएम किसान की 12वीं किस्त प्राप्त करने के योग्य नहीं होंगे। इससे पहले, ई-केवाईसी पूरा करने की अंतिम तिथि 31 मई, 2022 थी। पीएम किसान की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, यह डेडलाइन 31 जुलाई, 2022 तक बढ़ाई गई है। अगर आप इस स्कीम की अगली यानी 12वीं किस्त बिना किसी रुकावट के पाना चाहते हैं, तो यह जांच लें कि आपकी केवाईसी अपडेट है या नहीं। अगर ई-केवाईसी अपडेट नहीं है, तो इसे जल्द करा लें। पीएम किसान योजना के तहत किसानों को हर साल 6,000 रुपये मिलते हैं। यह रकम 2,000 रुपये की तीन किस्तों में उनके अकाउंट में ट्रांसफर होती है। इस स्कीम से हर साल लाखों किसान लाभान्वित भी होते हैं। अगर आप भी इस स्कीम का लाभ ले रहे हैं, तो आपको डेडलाइन तक अपनी ई-केवाईसी करवानी होगी। अगर आप यह नहीं करते हैं, तो आपके पैसे अटक सकते हैं। पीएम किसान पोर्टल पर इसकी विस्तार से जानकारी दी गई है। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| यूपी में युवाओं को भाया अग्निपथ Posted: 24 Jun 2022 06:54 AM PDT यूपी में युवाओं को भाया अग्निपथ(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा) देश में सेना को और ज्यादा युवा बनाने के प्रयास में सरकार ने अग्निपथ योजना की घोषणा की थी। कुछ भ्रम और कुछ राजनीति के चलते इस योजना का पूरे देश में हिंसात्मक रूप से विरोध हुआ। देश की अरबों की सम्पत्ति आग के हवाले कर दी गयी। दूसरी तरफ केन्द्र सरकार और भाजपा की राज्य सरकारें अपने स्तर से समझाने का प्रयास भी कर रही थीं और हिंसा को भड़काने वालों पर कार्रवाई भी हो रही है। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ ने अग्निपथ योजना के बारे में युवाओं को बहुत अच्छी तरह से समझाया था। इटावा के लखना स्थित द्रोणाचार्य फिजिकल स्पोर्ट्स एकेडमी के युवाओं ने अग्निपथ योजना का समर्थन किया है। इस एकेडमी में कई युवा सेना में अपना भविष्य बनाने की तैयारी कर रहे हैं। इनमें से बहुतों का कहना है कि पहली बार इतनी बड़ी तादाद में भर्ती होने जा रही है, इसलिए युवाओं को सेना में भर्ती होने का सपना पूरा करना चाहिए। यहां पर प्रशिक्षण ले रहे युवआों ने अग्निपथ योजना के विरोध में ट्रेनों और बसों के जलाने की निंदा की और कहा कि किसी बात का विरोध करने के लिए हिंसा कोई रास्ता नहीं है। इससे पूर्व प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि युवा साथियों, अग्निपथ योजना आपके जीवन को नये आयाम प्रदान करने के साथ ही भविष्य को स्वर्णिम आधार देगी। आप किसी बहकावे में न आएं। योगी की अपील जिस तरह इटावा के लखना स्थित द्रोणाचार्य फिजिकल स्पोट्र्स एकेडमी के युवाओं को प्रोत्साहित कर रही है, उसी तरह अन्य युवाओं को भी अग्निपथ योजना की सार्थकता और सामयिकता समझ में आ जाएगी। भारतीय सेना में भर्ती के लिए घोषित अग्निपथ योजना को लेकर देश के कई हिस्सों में पिछले दिनों जहां भारी विरोध देखने को मिला, लेकिन उत्तर प्रदेश के इटावा में सैकड़ों युवाओं ने अग्निपथ योजना का समर्थन कर प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया है। इटावा के लखना स्थित द्रोणाचार्य फिजिकल स्पोर्ट्स एकेडमी में सेना में भर्ती होने के लिए युवा प्रशिक्षण ले रहे हैं, कई युवा सेना में अपना भविष्य बनाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। इन युवाओं का कहना कि सरकार द्वारा लाई गई अग्निपथ योजना का वो समर्थन करते हैं। सेना में भर्ती की तैयारी करने वाले कई युवाओं का मानना है कि पहली बार इतनी बड़ी तादाद में भर्ती आई है और इस भर्ती से ज्यादा युवाओं को सेना में जाने का अवसर मिलेगा। अग्निपथ योजना के विरोध में हुए हिंसक प्रदर्शन को लेकर वे कहते हैं कि महात्मा गांधी ने देश को आजादी दिलाने में अहम भूमिका निभाई और ये आजादी बिना हिंसा के जीती भी। हमें अगर किसी चीज का विरोध करना भी है तो हिंसा करना कोई रास्ता नहीं है, बल्कि शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करना चाहिए। हिंसा कोई रास्ता नहीं है। संजय साथ कहते हैं, अगर हमारे मां-बाप कड़ा फैसला लेते हैं तो क्या हम अपने घर में आग लगा देंगे। देश की संपत्ति हमारी संपत्ति है और इसको नुकसान पहुंचाना किसी भी सूरत में ठीक नहीं है। वहीं पेंशन को लेकर वे कहते हैं कि शायद 4 साल की नियुक्ति रक्षा बजट बढ़ाने को लेकर की जा रही है। अगर ऐसा है तो सभी नेताओं की भी पेंशन खत्म होनी चाहिए, इससे काफी रुपया बचेगा और उस रुपये को सेना के ऊपर लगा देना चाहिए। सेना में भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं का कहना था कि देशसेवा हमारे लिए सर्वोपरि है, लेकिन सरकार को उन युवाओं की ओर ध्यान देना होगा, जिन्होंने परीक्षा पास की है, जिनकी ज्वाइनिंग होनी थी, उनके लिए सरकार को कुछ जरूर सोचना चाहिए, क्योंकि कड़ी मेहनत करके उन्होंने सभी परीक्षाएं पास की हैं। हमें आशा है कि सरकार उन युवाओं के बारे में जरूर कुछ सोचेगी। सेना में जाने की तैयारी कर रही एक छात्रा ने कहा कि सरकार अगर इस योजना को लेकर आई है तो कहीं न कहीं कुछ सोच समझकर ही लाई होगी। छात्रा ने कहा कि हिंसा करना कोई रास्ता नहीं है। यह भर्ती काफी वक्त बाद आई है। इस भर्ती से ज्यादा से ज्यादा युवा सेना से जुड़ पाएंगे। द्रोणाचार्य अकादमी में मौजूद युवाओं ने कहा कि अग्निपथ के सर्टिफिकेट से सरकारी विभागों में निकलने वाली भर्तियों में कुछ प्रतिशत की छूट मिल सकती है। हम अग्निपथ स्कीम के समर्थन में है। वहीं द्रोणाचार्य एकेडमी के संचालक ने कहा कि देश की संपत्ति हमारी सबकी संपत्ति है और उसको इस तरह से तहस-नहस करना कहीं से भी उचित नहीं है। युवा अभी इस योजना को लेकर भ्रमित हैं। अग्निपथ योजना युवाओं के लिए फायदेमंद साबित होगी और अधिक युवाओं को इस योजना के तहत देश की सेवा करने का सौभाग्य प्राप्त होगा। यहां पर ध्यान देना होगा कि यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी युवाओं से 'अग्निपथ' योजना को लेकर किसी बहकावे में नहीं आने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि यह योजना युवाओं को राष्ट्र व समाज की सेवा के लिए तैयार करेगी। मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी केंद्र की 'अग्निपथ' योजना के खिलाफ कई स्थानों पर युवाओं के प्रदर्शन के बीच आई थी। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने ट्विटर पर लिखा, 'युवा साथियों, 'अग्निपथ योजना' आपके जीवन को नए आयाम प्रदान करने के साथ ही भविष्य को स्वर्णिम आधार देगी। आप किसी बहकावे में न आएं।' मुख्यमंत्री योगी ने एक अन्य ट्वीट में कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंशानुरूप 'अग्निपथ योजना' युवाओं को राष्ट्र व समाज की सेवा हेतु तैयार करेगी, उन्हें गौरवपूर्ण भविष्य का अवसर प्रदान करेगी। इसके साथ योगी ने युवाओं को आश्वस्त करने का प्रयास करते हुए कहा कि मां भारती की सेवा हेतु संकल्पित हमारे 'अग्निवीर' राष्ट्र की अमूल्य निधि होंगे। यूपी सरकार अग्निवीरों को पुलिस व अन्य सेवाओं में वरीयता देगी। जय हिंद! इससे पहले मुख्यमंत्री ने घोषणा की थी कि प्रदेश सरकार पुलिस और संबंधित सेवाओं में भर्ती के लिए 'अग्निवीरों' को प्राथमिकता देगी। केंद्र सरकार ने साढ़े 17 साल से 21 साल तक के युवाओं को चार साल के लिए सैन्य बलों में भर्ती करने के वास्ते 'अग्निपथ' योजना की घोषणा की थी। बाद में इस आयु सीमा को बढ़ाकर 23 साल कर दिया गया था। केंद्र सरकार की 'अग्निपथ' योजना को लेकर यूपी के आगरा, मेरठ, बुलंदशहर, बलिया समेत कई जिलों में विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। इस दौरान कई जगह हाईवे और रेल रूट बाधित हुआ है। इसके अलावा बिहार में केंद्र सरकार की सैन्य बलों में भर्ती की नई योजना 'अग्निपथ' के खिलाफ लगातार विरोध-प्रदर्शन जारी रहा। इस दौरान कई प्रदर्शनकारियों ने ट्रेनों में आग लगा दी और पथराव किया। प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे और रेलवे पटरियों पर धरना देने वाले युवाओं को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज भी किया। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| चीन ने दोस्त पाकिस्तान को दिया विकसित युद्धपोत Posted: 24 Jun 2022 06:50 AM PDT चीन ने दोस्त पाकिस्तान को दिया विकसित युद्धपोतबीजिंग। चीन और पाकिस्तान का दावा है कि टाइप 054ए फ्रिगेट स्टील्थ तकनीक से लैस है, जिससे यह किसी भी रडार को आसानी से चकमा दे सकता है। इस युद्धपोत में लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलें और एक मिनट में कई राउंड फायर करने वाली नेवल गन भी लगी हुई है। पाकिस्तान और चीन ने टाइप-054ए युद्धपोतों के लिए साल 2017 में डील की थी। इस करार के तहत पहला पोत पिछले साल अगस्त में तैयार हुआ था जिसके बाद लगभग एक साल तक इसका समुद्री परीक्षण किया गया है। पहले कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि चीन का बनाया हुआ यह युद्धपोत इतना धुआं छोड़ता है कि उसे आसानी से डिटेक्ट किया जा सकता है। हालांकि, बाद में चीन ने इस युद्धपोत के इंजन में काफी सुधार किया है। इसमें मिडियम रेंज की एयर डिफेंस मिसाइलें और टाइप 382 रडार भी लगा है। टाइप-054ए युद्धपोत चीनी नौसेना का मुख्य आधार है। इस तरह के कम से कम 30 युद्धपोत चीनी नौसेना में तैनात हैं। नेवल मिलिट्री स्ट्डीज रिसर्च इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ रिसर्च फेलो झांग जुनशे ने कहा कि नया फ्रिगेट टाइप 054ए पर आधारित है और यह चीन का सबसे उन्नत फ्रिगेट(लड़ाकू पोत) है। टाइप-054ए फ्रिगेट शिप को शंघाई के हुडोंग झोंगहुआ शिपयार्ड में तैयार किया गया है। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| रूस में विमान दुर्घटनाग्रस्त, चार की मौत Posted: 24 Jun 2022 06:46 AM PDT रूस में विमान दुर्घटनाग्रस्त, चार की मौतयारोस्लाव। रूस में रियाजान शहर के समीप एक सैन्य विमान के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने से चारर लोगों की मौत हो गयी जबकि पांच अन्य घायल हुए हैं। क्षेत्रीय अधिकारियों ने यह जानकारी दी। क्षेत्रीय अधिकारियों ने बताया कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार रियाजान के मिखाइलोवस्कॉय रोडवे के पास विमान दुर्घटना में चार लोगों की मौत हो गयी है और पांच लोग घायल हुए हैं। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहा उनकी हालत स्थिर बतायी गयी है। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| अमेरिका के एसपीपी में नहीं शामिल होगा नेपाल Posted: 24 Jun 2022 06:42 AM PDT अमेरिका के एसपीपी में नहीं शामिल होगा नेपालकाठमांडू। नेपाल एक बार फिर दो बड़ी महाशक्तियों के बीच फंसा हुआ नजर आ रहा है। चीन से नजदीकी रिश्तों के बीच नेपाल ने अमेरिकी सहयोग से इनकार कर दिया है। नेपाल ने अमेरिका के स्टेट पार्टनरशिप प्रोग्राम (एसपीपी) में शामिल न होने का फैसला किया है, जिसके लिए चीन ने उसकी पीठ थपथपाई है। चीन ने अमेरिका के स्टेट पार्टनरशिप प्रोग्राम का हिस्सा न बनने के नेपाल के फैसले का समर्थन किया है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने कहा कि एक दोस्त, नजदीकी पड़ोसी और रणनीतिक सहयोगी होने के नाते चीन नेपाल की सरकार के फैसले की सराहना करता है। उन्होंने कहा, "नेपाल को उसकी संप्रभुता, स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखने में चीन अपना समर्थन करना जारी रखेगा और स्वतंत्र और गुटनिरपेक्ष विदेश नीति के प्रति नेपाल की प्रतिबद्धता का समर्थन करेगा। चीन नेपाल के साथ मिलकर क्षेत्रीय सुरक्षा, स्थिरता और साझा समृद्धि की रक्षा के लिए काम करने को तैयार है।" अमेरिकी दूतावास के मुताबिक एसपीपी के तहत अमेरिकी नेशनल गार्ड और दूसरे देश की संस्था एक-दूसरे की मदद करते हैं। नेशनल गार्ड आपदा की स्थितियों में राहत और बचाव कार्य करता है। ऐसे में नेपाल ने भी इसका सहयोग लेने के लिए एसपीपी में शामिल होने का आग्रह किया गया था। एसपीपी को अमेरिका और चीन के बीच सैन्य सहयोग भी बताया जा रहा है जिसका लोगों और राजनीतिक दलों दोनों के बीच विरोध देखा गया। विरोध करने वालों का कहना था कि इसका असर नेपाल की गुटनिरपेक्ष और संतुलित विदेश नीति पर पड़ेगा। एसपीपी पर नेपाल में लंबे समय से बहस चल रही थी। हालांकि, नेपाल ने साल 2015 और 2017 में अमेरिका से खुद इसमें शामिल होने का आग्रह किया था। साल 2015 के भूकंप के बाद कई देशों की सेनाओं ने नेपाल को राहत और बचाव कार्यों में मदद की थी। अमेरिका ने साल 2019 में इसे मंजूरी दी थी। उस समय ये बताया गया था कि नेपाल की सेना ने अमेरिकी सरकार को एसपीपी के तहत मदद देने का आग्रह किया है ताकि आपदा प्रबंधन में उससे मदद मिल सके। प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा पर विपक्षी सीपीएन-यूएमएल और अपनी पार्टी का भारी दबाव था। संघीय मामलों के मंत्री राजेंद्र श्रेष्ठ ने भी फैसले के बाद ये साफ भी किया था कि अमेरिकी सरकार को इस फैसले की सूचना दी जाएगी और सभी बातचीत केवल विदेश मंत्रालय के जरिए होंगी। सेना के जरिए की गई सीधी बातचीत सही नहीं है। नेपाल के फैसले से पहले अमेरिकी दूतावास ने भी ट्वीट करके सैन्य सहयोग की बात को गलत बताया था। अमेरिका ने कहा था, "इसे अमेरिका और नेपाल के बीच सैन्य समझौता दिखाने वाले कुछ जगहों पर प्रकाशित दस्तावेज झूठे हैं। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| यूक्रेन व रूस में अनाज बर्बाद न हो: गुटेरेस Posted: 24 Jun 2022 06:38 AM PDT यूक्रेन व रूस में अनाज बर्बाद न हो: गुटेरेससंयुक्त राष्ट्र । संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने यूक्रेन और रूस से एक साथ अनाज का निर्यात किये जाने की वकालत की है। संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा है कि श्री गुटेरेस ने यूक्रेन और रूस से एक साथ अनाज के निर्यात के सौदे को लेकर बात की है। इससे पहले रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सुझाव दिया था कि अनाज निर्यात का सबसे आसान और कम खर्चीला मार्ग बेलारूस के माध्यम से है, हालांकि संयुक्त राष्ट्र ने हाल के दिनों में बेलारूस मार्ग के बारे में कोई बात नहीं की है। वहीं, रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा है कि श्री गुटेरेस के दृष्टिकोण से खाद्य संकट गहराता जा रहा है और विशेष रूप से विकासशील देशों के लिए समस्याएं पैदा कर रहा है। उन्होंने बताया कि वह (श्री गुटेरेस) शुरू में अनाज के निर्यात को पहले यूक्रेन और फिर रूस से बाहर करना चाहते थे। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 24 Jun 2022 03:56 AM PDT जीवन सेवानिवृत्ती के बादजय प्रकाश कुँवरमत कर तू अभिमान रे मनवा, मत कर तू अभिमान! झुठी तेरी शान रेमनवा, मत कर तू अभिमान!! कौड़ी कौड़ी तुमने जोड़ा, दायित्वों से मुख नहीं मोड़ा, उमर साठ तक भागा दौड़ा, खुद पर रहा गुमान!! मत कर तू अभिमान रे मनवा, मत कर तू अभिमान!! पत्नी कहती बहुत दिये हो, बच्चे कहते मौज किये हो, लेखा जोखा दिल ही जाने, साक्ष न कोई प्रमाण !! मत कर तू अभिमान रे मनवा, मत कर तू अभिमान !! खाकर निकलें टिफिन की चिंता, रोज की खिच खिच बात बात पर, समय से दफ्तर जाना होगा, यह थी तेरी आन,!! मत कर तू अभिमान रे मनवा, मत कर तू अभिमान !! ब्रत उपवास न तुमने जाना, कर्म को तुमने ईश्वर माना, अब उपवास तो करना सीखो, ब्रत त्योहार भी करना सीखो, खा लो जो कुछ मिल जाए सो, अहम जिद्द छोड़ना भी सीखो, पत्नी कहती अर्धांगिनी हूं मैं, तुम थके तो मैं भी थकी हूं, साथ दिया यदि मेरा तन तो, फिर खा लेना पकवान!! मत कर तू अभिमान रे मनवा, मत कर तू अभिमान!! पत्नी कहती, बच्चों का है अपना जीवन, उनको सुख से जी लेने दो, वे , पड़े रहे जो हममें तुममें, उनका भी होगा भारी मन, कहता नहीं किसी से कोई, पर जीवन की यह सच्चाई है, पिछली पीढ़ी क्या थी छोड़ो, नयी पीढ़ी पर अब बन आई है! कल तक तुम थे जलते लाइट, अब तुम केवल फ्यूज बल्ब हो, मत हांको की ये थे,वो थे , अब तो मौन हो रहना सीखो, कितनी थी औकात तुम्हारी, बीते दिन की बातें हैं वो, अब तो तुम न साहब ही हो, और न हो दरवान !! मत कर तू अभिमान रे मनवा, मत कर तू अभिमान!! तू समझे इज्जत थी तेरी, इज्जत तेरे पैसे की थी, आज भी तुम कुछ दे पाते तो, आज भी वैसी इज्जत पाते, न देते हो तो चुप हो जाओ, बिन पैसा अब यह फल पाओ, कोई न अपना कोई पराया, रिश्ता जो जिसके मन भाया, अगर याद करले कोई तो, बनी रहेगी तेरी पहचान !! मत कर तू अभिमान रे मनवा, मत कर तू अभिमान !! छत के नीचे पड़े रहो तुम, शान्ति से चुप रहना सीखो, खालो पीलो जो मिल जाए, चौथेपन में जी लो प्यारे, अब जीवन है सुनसान!! मत कर तू अभिमान रे मनवा, मत कर तू अभिमान !! भला बुरा सब सुनलो प्यारे, जीवन अब सब पर वारे न्यारे, तेरे गुण तब सब गायेंगे, फुल चढ़ाने सब आयेंगे, कुछ हंसेंगे, कुछ रोयेंगे, जब तुम पहुंचोगे श्मशान !! मत कर तू अभिमान रे मनवा, मत कर तू अभिमान !! अब झुठी तेरी शान रे मनवा,मत कर तू अभिमान !! हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| विरासत में छिपी है अरवल का क्षेत्र करपी ( अरवल ) । Posted: 23 Jun 2022 09:12 AM PDT विरासत में छिपी है अरवल का क्षेत्र करपी ( अरवल ) ।संस्कृति की पहचान उरवाल जिले के विरासत में छिपी हुई है । उक्त विचार जगदम्बा माई के विमोचन समारोह के अवसर पर भारतीय विरासत संगठन के अध्यक्ष सत्येन्द्र कुमार पाठक ने कहा कि अरवल जिले का करपी प्रखंड के करपी जगदम्बा स्थान मंदिर में अवस्थित मूर्तियां , नादी का शिवलिंग , तेरा का सहस्तरलिंगी शिवलिंग , पुराण का शिवलिंग , शाहरतेलपा का धिव लिंग , बेलखरा का सूर्यमूर्ति , शिवलिंग , , किंजर का शिव मंदिर , पन्तित का मूर्तियां , रामपुरचाय का पंचमुखी शिव लिंग , कुर्था प्रखंड के लारी गढ़ एवं शिवलिंग , कलेर प्रखंड के मदसरवा का च्यावनेश्वर शिवमंदिर , सोनभद्र वंशी प्रखण्डान्तर्गत खटांगी का भगगवन सूर्य की मूर्ति, गढ़ , पोंदिल का शिव लिंग , गढ़ , सचई का गढ़ ,, शिवमंदिर , मानिकपुर का सूर्य मूर्ति , वंशी का शिवलिंग ,शेरपुर का शिवलिंग अरवल प्रखंड के कगजीमहल्ला में अवस्थित पालकालीन शिवलिंग ,जनकपुर घाट का शिवलिंग , बुढ़वा महादेव बेलसार में विल्वेश्वर शिवलिंग ,अरवल सोन नद किनारे सम्मन साहेब का मजार , है । जगदम्बा माई के कैसेट एव यूट्यूब संगीत का विमोचन समारोह करपी में आयोजित संस्कृति की पहचान विरासत विचार गोष्टी में भारतीय विरासत संगठन के अध्यक्ष साहित्यकार व इतिहासकार सत्येन्द्र कुमार पाठक ने कहा कि सांस्कृतिक एवं पुरातत्विक धरोहर पहचान है । अरवल जिले में 24 विरासत विभिन्न क्षेत्रों में विखरी पड़ी है । सभी धरोहरें अरवल जिले की प्राचीन सभ्यता और संस्कृति है । करपी का जगदम्बा स्थान , पंचतीर्थ का शिव एवं भगवान विष्णु का पशनयुक्त चरण , मदश्रवा का च्यावनेश्वर शिव मंदिर , लारी गढ़ , किंजर का शिव मंदिर प्रमुख प्राचीन विरासत है । संगीतकार जीतू बाबा द्वारा लिखित एवं सुमित पाठक के स्वर में करपी जगदम्बा पर महिमा जगदम्बा माई के प्रस्तुति की गई । महिमा जगदम्बा माई के विन्दुओ पर साहित्यकार सत्येन्द्र कुमार पाठक के कहा कि संगीत और क्षेत्रीय लोक गीत में ग्रामीण संस्कृति छिपी हुई है । लोक गीत के माध्यम से प्राचीन विरासत की पहचान युवा वर्ग में फ़ैल रही है । इस अवसर पर गीतकार जीतू बाबा , लोक गायक सुमित पाठक , बिहार जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति के ट्रेनिंग अफसर प्रवीण कुमार पाठक , एस . एस .कॉलेज के प्रो. उर्वशी कुमारी , अशोक , सुधीर , नसर्मदेश्वर आदि ने विरासत पर अपने अपने विचार व्यक्त किए ।माई के प्रस्तुति की गई । महिमा जगदम्बा माई के विन्दुओ पर साहित्यकार सत्येन्द्र कुमार पाठक के कहा कि संगीत और क्षेत्रीय लोक गीत में ग्रामीण संस्कृति छिपी हुई है । लोक गीत के माध्यम से प्राचीन विरासत की पहचान युवा वर्ग में फ़ैल रही है । इस अवसर पर गीतकार जीतू बाबा , लोक गायक सुमित पाठक , बिहार जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति के ट्रेनिंग अफसर प्रवीण कुमार पाठक , एस . एस .कॉलेज के प्रो. उर्वशी कुमारी , अशोक , सुधीर , नसर्मदेश्वर सुधीर , धीरेंद्र कुमार पाठक आदि ने विरासत पर अपने अपने विचार व्यक्त किए । हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| द्वापर युग के महान विभूति महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास-अशोक “प्रवृद्ध” Posted: 23 Jun 2022 09:08 AM PDT द्वापर युग के महान विभूति महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास-अशोक "प्रवृद्ध"महाभारत रूपी ज्ञान के दीप को प्रज्वलित करने वाले विशाल बुद्धि के स्वामी नित्य नमनीय महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास महर्षि पराशर और माता सत्यवती के पुत्र थे। द्वापर युग की महान विभूति, महाभारत, अट्ठारह पुराण, श्रीमद्भागवत गीता, ब्रह्मसूत्र, मीमांसा जैसे अद्वितीय साहित्य दर्शन के प्रणेता वेदव्यास का जन्म आषाढ़ मास की पूर्णिमा की तिथि को उत्तराषाढ़ नक्षत्र में कालपी में यमुना के किसी द्वीप में हुआ था। जन्म के समय इनका रंग श्याम, काला होने के कारण इन्हें कृष्ण और द्वीप में जन्म होने के कारण द्वैपायन- कृष्ण द्वैपायन की संज्ञा प्राप्त हुई। कहीं- कहीं उनके तपस्या करने से काले रंग के हो जाने का उल्लेख भी है। ये वसिष्ठ मुनि के वंशज थे। वसिष्ठ के पुत्र थे शक्ति, शक्ति के पुत्र पराशर, और पराशर के पुत्र व्यास। व्यास ने जबाली ऋषि की पुत्री वाटिका से विवाह किया था। उनका शुक नाम का एक पुत्र भी था, जिन्होंने आगे चलकर योगी शुकदेव नाम से प्रसिद्ध होकर राजा परीक्षित को श्रीमद्भागवत की कथा सुनाई थी। कतिपय पौराणिक ग्रन्थों में वेदांत दर्शन, अद्वैतवाद के संस्थापक ऋषि पराशर के पुत्र वेदव्यास की पत्नी को आरुणी नाम से सम्बोधित किया गया है। लेकिन इससे उत्पन्न इनके पुत्र का नाम भी शुकदेव ही बताया गया है। वेदव्यास के पांच विद्वान शिष्य- पैल, जैमिन, वैशम्पायन, सुमन्तुमुनि और रोम हर्षण थे। जन्म लेते ही युवा हो जाने वाले कृष्ण द्वैपायन पैदा होते ही अपनी माता सत्यवती को उनके स्मरण करते ही उनके समक्ष उपस्थित हो जाने की बात कह और आज्ञा लेकर तपस्या करने चले गये थे। कृष्ण द्वैपायन धृतराष्ट्र, पाण्डु तथा विदुर के जन्मदाता थे और विपत्ति के समय सदैव छाया की भांति पाण्डवों का साथ भी दिया करते थे। द्वापर युग की अनेक घटनाओं के साथ ही महाभारत की क्रमानुसार घटित घटनाओं के साक्षी रहे वेदव्यास अपने आश्रम से ही हस्तिनापुर की समस्त गतिविधियों की सूचना प्राप्त कर लेते थे, अर्थात हस्तिनापुर की समस्त गतिविधियों की सूचना उन तक पहुंचती थी, और वे उन घटनाओं पर अपना परामर्श भी दिया करते थे। अंतर्द्वंद्व और संकट की स्थिति आने पर माता सत्यवती उनसे विचार- विमर्श हेतु स्वयं उनके आश्रम तक आती थी, अथवा उन्हें हस्तिनापुर के राजमहल में बुलवा लेती थी। महाभारत आदिपर्व 56/52 के अनुसार उन्होंने तीन वर्षों के अथक परिश्रम से महाभारत ग्रन्थ की रचना की थी- त्रिभिर्वर्षे: सदोत्थायी कृष्णद्वैपायनोमुनि:। महाभारतमाख्यानं कृतवादि मुदतमम्।। -महाभारत आदिपर्व 56/52 महाभारत ग्रन्थ का लेखन भगवान गणेश ने महर्षि वेदव्यास से सुन-सुनकर किया था। मान्यता है कि महर्षि वेदव्यास बोलते गए और श्रीगणेश इस ग्रन्थ को लिखते गए। महाभारत में अंकित कृष्ण द्वैपायन से सम्बन्धित आख्यान का वर्तमान में प्रचलित जातीय परम्परा से तुलनात्मक अध्ययन करने से स्पष्ट होता है कि कृष्ण द्वैपायन स्वयं वर्ण संकर थे। अर्थात वह एक अविवाहित मल्लाह की कन्या से एक ऋषि के वीर्य से उत्पन्न हुए थे। स्वयं सत्यवती ने इस घटना को अपने होने वाले पति महाराज शांतनु से भी छुपा कर रखा था। यह ठीक था कि ऋषियों की संगति में रहने से तथा धर्मशास्त्र और वेदादि ग्रन्थों के अध्ययन से वे महाज्ञानी हो गये थे, परन्तु जीवन भर उनके मन मस्तिष्क पर अपने जन्म का संस्कार बना रहा था। साथ ही महाभारत में वे अपनी माता की सन्तान की उच्छृंखलताओं को ही तो लिख रहे थे। इसलिए महाभारत की कथा लिखने में कहीं- कहीं अतिश्योक्ति अथवा अयुक्तियुक्त व्यवहार की सराहना भी दिखाई देती है। फिर भी महाभारत में उन्होंने इतिहास की छिटकन के साथ ही तत्कालीन समाज, राष्ट्र और राज्य की व्याख्या की है, जिससे उस काल की अवस्था व समाज को समझने में सहायता मिलती है। उल्लेखनीय है कि महाभारत की कथा का वह काल भारत में एक महान संकट का काल था। एक विदेशी संस्कृति का वैदिक संस्कृति से महान तथा भयंकर संघर्ष हुआ था। उसमें वैदिक संस्कृति तथा धर्म की विजय हुई थी। इन सभी विवरणियों को व्याख्या सहित और उसके कारणों का वर्णन वेदव्यास ने महाभारत में बहुत खूबसूरती से किया है। कौरवों और पांडवों में युद्ध भारतीय और अभारतीय संस्कृतियों और धर्मों के संघर्ष का प्रतीक था। इसमें भारतीय संस्कृति की विजय हुई थी। इसलिए कृष्ण द्वैपायन ने इस ग्रन्थ का नाम जय रखा था, अर्थात भारतीयता की जय की यह कथा थी। बाद में उनके शिष्यों ने इसमें और भी बहुत कुछ मिला दिया तो इसका नाम महाभारत रख दिया गया। दरअसल उस काल में भी सांस्कृतिक संघर्ष चलते थे, और उस संघर्ष के विषय में लिखना तत्कालीन विद्वानों के लिए आवश्यक था। वास्तव में महाभारत लिखने का उद्देश्य ही भारतीय और अभारतीय संस्कृतियों में संघर्ष के विषय में लिखना और उसके अंतर और संघर्ष का परिणाम बतलाना ही था। पौराणिक ग्रन्थों के अनुसार महर्षि व्यास त्रिकालज्ञ थे तथा दिव्य दृष्टि से देख इन्होंने जान लिया था कि कलियुग में धर्म क्षीण हो जायेगा। धर्म के क्षीण होने के कारण मनुष्य नास्तिक, कर्तव्यहीन और अल्पायु हो जायेगा। और एक विशाल वेद का सांगोपांग अध्ययन उनके सामर्थ्य से बाहर हो जायेगा। इसीलिए द्वापर युग में ही धर्म का ह्रास होते देख इन्होंने आदिकाल से ही श्रुति के रूप में चली आ रही परमेश्वरोक्त ग्रन्थ वेद का व्यास अर्थात विभाग कर दिया। जिसके कारण वेदव्यास की संज्ञा इन्हें प्राप्त हुई और ये कृष्ण द्वैपायन वेदव्यास बन गए। मान्यता है कि प्रत्येक युग में धर्म का एक-एक चरण लुप्त होता जाता है यह देखकर तथा मनुष्यों की आयु, शक्ति, बुद्धि और युग की अवस्था को देखकर लोक पर अनुग्रह की इच्छा से भगवान व्यास ने वेदों का विस्तार किया था। वेदों के विभाग करने के पश्चात ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद को क्रमशः अपने शिष्य पैल, जैमिन, वैशम्पायन और सुमन्तुमुनि को पढ़ाया और इनके प्रचार- प्रसार की व्यवस्था कराई। उन्होंने इस ज्ञान का अध्ययन अपने पुत्र शुकदेव को भी कराया। अष्टादश पुराणों को उन्होंने अपने शिष्य रोम हर्षण को पढ़ाया। व्यास के शिष्यों ने अपनी अपनी बुद्धि के अनुसार वेदों की अनेक शाखाएँ और उप शाखाएँ बना दीं। वेद में निहित ज्ञान के अत्यन्त गूढ़ तथा शुष्क होने के कारण वेद व्यास ने पाँचवें वेद के रूप में महाभारत की रचना की, और अपने शिष्यों को महाभारत का उपदेश दिया। श्रीमद्भागवत गीता विश्व के सबसे बड़े महाकाव्य महाभारत का ही एक अल्प अंश है। उनकी इस अलौकिक प्रतिभा के कारण ही उनको भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। उन्हें आदिगुरु कहा जाता है और उनके सम्मान में उनकी जन्म तिथि आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा और व्यास पूर्णिमा नाम से भी जाना जाता है। वैसे तो व्यास नाम के कई विद्वान हुए हैं, परन्तु चारों वेदों के प्रथम व्याख्याता व्यास ऋषि की पूजा आषाढ़ पूर्णिमा के दिन की जाती है। इस दिन वेदों का ज्ञान देने वाले आदिगुरू व्यास की स्मृति को बनाए रखने के लिए अपने-अपने गुरुओं को व्यास जी का अंश मानकर उनकी पूजा करने की परम्परा है। इस दिन केवल गुरु की ही नहीं अपितु कुटुम्ब में अपने से जो बड़ा है, अर्थात माता-पिता, भाई-बहन आदि को भी गुरुतुल्य समझ श्रद्धा भाव से पूजते हैं। पुराणोक्तियों के अनुसार प्रत्येक द्वापर युग में विष्णु, व्यास के रूप में अवतरित होकर वेदों के विभाग प्रस्तुत करते हैं। प्रथम द्वापर में स्वयं ब्रह्मा वेदव्यास हुए, द्वितीय में प्रजापति, तृतीय द्वापर में शुक्राचार्य, चतुर्थ में बृहस्पति वेदव्यास हुए। इसी प्रकार सूर्य, मृत्यु, इन्द्र, धनजंय, कृष्ण द्वैपायन अश्वत्थामा आदि अट्ठाईस वेदव्यास हुए। इस प्रकार अट्ठाईस बार वेदों का विभाजन किया गया। ऐसा माना जाता है कि वेद व्यास नाम वास्तविक नाम के बजाय एक उपनाम अथवा शीर्षक है क्योंकि कृष्ण द्वैपायन ने चार वेदों को संकलित किया था। पौराणिक ग्रन्थों के अनुसार महर्षि वेदव्यास स्वयं ईश्वर के स्वरूप थे। उनकी स्तुति करते हुए कहा गया है- व्यासाय विष्णुरूपाय व्यासरूपाय विष्णवे। नमो वै ब्रह्मनिधये वासिष्ठाय नमो नम:।। अर्थात् - व्यास विष्णु के रूप है तथा विष्णु ही व्यास है ऐसे वसिष्ठ-मुनि के वंशज का मैं नमन करता हूँ। वसिष्ठ के पुत्र थे शक्ति, शक्ति के पुत्र पराशर, और पराशर के पुत्र व्यास। पौराणिक मान्यता अनुसार सद्गुरु की कृपा से ईश्वर का साक्षात्कार भी संभव है और गुरु की कृपा के अभाव में कुछ भी संभव नहीं है। व्यास का शाब्दिक संपादक, वेदों का व्यास अर्थात विभाजन भी संपादन की श्रेणी में आता है। कथावाचक शब्द भी व्यास का पर्याय है। कथावाचन भी देश, काल, परिस्थिति के अनुरूप पौराणिक कथाओं का विश्लेषण भी संपादन है। भगवान वेदव्यास ने वेद के ऋचाओं को संकलन कर चार भागों में बांटा, 18 पुराणों और उपपुराणों की रचना की। ऋषियों के बिखरे अनुभवों को समाजभोग्य बना कर व्यवस्थित किया। पंचम वेद महाभारत की रचना आषाढ़ पूर्णिमा के दिन पूर्ण की और विश्व के सुप्रसिद्ध ग्रन्थ ब्रह्मसूत्र का लेखन इसी दिन आरंभ किया। तब देवताओं ने वेदव्यासजी का पूजन किया। तभी से व्यासपूर्णिमा मनायी जा रही है। वैदिक विद्वानों के अनुसार वेदांत दर्शन - ब्रह्मसूत्र के रचयिता बादरी ऋषि के पुत्र महर्षि वादरायण हैं, लेकिन पुरातन ग्रन्थों में पराशर नन्दन व्यास को महाशाल शौनकादि कुलपतियों तथा गुरुओं के भी परम गुरु साक्षात वादरायण माना गया है। पुराणों में व्यास परमपूज्य घोषित किये गए हैं। यतिधर्म समुच्चय में कहा है- देवं कृष्णं मुनिं व्यासं भाष्यकारं गुरोर्गुरूम। कतिपय विद्वानों के अनुसार कृष्ण द्वैपायण वेदव्यास वेद, पुराण, महाभारत, वेदान्त-दर्शन (ब्रह्मसूत्र), सैंकड़ों गीताएँ, शारीरिक सूत्र, योगशास्त्र के साथ ही कई व्यास स्मृतियों के रचयिता हैं। ऐसा माना जाता है कि वर्तमान का सम्पूर्ण विश्व विज्ञान एवं साहित्यिक वाङ्मय भगवान व्यास का उच्छिष्टत है। इसीलिए कहा गया है- व्यासोच्छिष्टं जगत्सर्वम् । यही कारण है कि कृष्ण द्वैपायण वेदव्यास के जन्म दिन आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा का विशेष महत्व माना गया है। महर्षि वेदव्यास को कौरव, पाण्डव आदि सभी गुरु मानते थे। इसलिए आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा व व्यास पूर्णिमा कहा जाता है। महर्षि वेदव्यास ने स्वयं भविष्योत्तर पुराण में गुरु पूर्णिमा के बारे में लिखा है- मम जन्मदिने सम्यक् पूजनीय: प्रयत्नत:। आषाढ़ शुक्ल पक्षेतु पूर्णिमायां गुरौ तथा।। पूजनीयो विशेषण वस्त्राभरणधेनुभि:। फलपुष्पादिना सम्यगरत्नकांचन भोजनै:।। दक्षिणाभि: सुपुष्टाभिर्मत्स्वरूप प्रपूजयेत। एवं कृते त्वया विप्र मत्स्वरूपस्य दर्शनम्।। अर्थात- आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को मेरा जन्म दिवस है। इसे गुरु पूर्णिमा कहते हैं। इस दिन पूरी श्रृद्धा के साथ गुरु को कपड़े, आभूषण, गाय, फल, फूल, रत्न, धन आदि समर्पित कर उनका पूजन करना चाहिए। ऐसा करने से गुरुदेव में मेरे ही स्वरूप के दर्शन होते हैं। महर्षि कृष्ण द्वैपायन वेदव्यास के जन्म से सम्बन्धित कथा महाभारत और फिर अनेक पुराणों में अंकित है। कथा के अनुसार अति प्राचीन काल में गंगा के क्षेत्र में पर्वत नाम का एक राजा रहता था। एक बार उसने बलपूर्वक एक सुंदर अप्सरा शुक्तिमति को अपने भवन में बंदी बना लिया। उसके इस पकड़े जाने और बलात्कार किए जाने का समाचार चेदि राज बसु को मिला तो उन्होंने पर्वत से युद्ध किया और शुक्तिमति को छुड़ा लिया। शुक्तिमती के पर्वत से दो जुड़वा सन्तान उत्पन्न हुई, एक लड़का और एक लड़की। लड़की का नाम गिरीका हुआ। गिरिका जब बड़ी हुई, तो चेदिराज बसु (वशु) ने उससे विवाह कर लिया। कतिपय पुराणों में इन्हें सुधन्वा संज्ञा से सम्बोधित किया गया है। महाराज चेदिराज अपने विमान में भ्रमण करने की बड़ी रूचि रखते थे। एक बार वे एक विमान में भ्रमण करते हुए बड़ी दूर निकल गए। दूर एक उद्यान में घूमते हुए, वहां के पुष्पों के मकरंद और सुगंधि से कामोद्दीपन होने से उनका वीर्य स्खलित हो गया। महाराज वशु ने जिनका विमान में भ्रमण करने से उपरिचर नाम पड़ गया था, अपने वीर्य को व्यर्थ जाने से बचाने के लिए उसको यंत्रों द्वारा अर्थात विधि पूर्वक सुरक्षित कर अपने विमान चालक श्येन द्वारा अपनी पत्नी गिरीका के पास भेज दिया। श्येन विमान में वीर्य लेकर राजधानी की और वेग से जा रहा था कि मार्ग में एक अन्य विमान से दुर्घटना हो गई, और वह सुरक्षित वीर्य गिर पड़ा। नीचे जल स्थल था और वहां ब्रह्माजी से श्रापित आद्रिका नाम की एक अप्सरा के हाथ में वह वीर्य पड़ गया। उसने उसको धारण कर लिया। इससे उसको दो संतान हुई। आद्रिका देवलोक से दण्डित और निष्कासित इस जल स्थल में मछेरों के बीच रहती हुई अति घृणित जीवन व्यतीत कर रही थी। वह उन मछेरों में वेश्या के रूप में रहती थी। देवलोक से निर्वासित होने से वीर्य सिंचन की क्रिया जानती थी। इसी कारण वह सुरक्षित वीर्य को पहचान गई और यह समझ गई कि यह किसी बड़े व्यक्ति का ही वीर्य होगा। उसको धारण कर सन्तानवती बन गई। उसको सन्तान होने में कष्ट होने लगा तो उसका पेट चीरकर सन्तान निकाली गई। यह दो बच्चे थे। एक लड़का और दूसरी लड़की। दाशराज, जो उन निषादों का राजा था, ने लड़की का पालन किया। और और लड़की का नाम सत्यवती रखा। बाल्यकाल से ही वह मछेरों में रहती थी। मछली उनका भोजन था। इसलिए उन सबके शरीर में से मछली की गंध आती थी। फिर भी सत्यवती अपने को एक राजा के वीर्य से अप्सरा की लड़की समझ मछेरों से विवाह के लिए तैयार नहीं होती थी। लेकिन कोई भला पुरुष शरीर में से निकलने वाली गंध के कारण उसके समीप नहीं फटकता था। एक दिन सत्यवती नौका में महर्षि पराशर को लेकर गंगा पार ले जा रही थी, तो महर्षि उस पर आसक्त हो गए और उससे संसर्ग करने की इच्छा व्यक्त की। सत्यवती ने उनसे संयोग में आपत्ति तो नहीं की, लेकिन वह विवाह कर ऋषि पत्नी बनने की इच्छा रखती थी। महर्षि ने उसे पत्नी बनाना तो स्वीकार नहीं किया, लेकिन उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि गर्भ ठहर गया तो वह सत्यवती की रक्षा करेंगे। उन्होंने यह भी वचन दिया कि इस गर्भ का किसी को पता नहीं चलेगा। सत्यवती मान गई। नौका में महर्षि पराशर ने सत्यवती के साथ संभोग किया तथा गंगा के बीच एक द्वीप पर सत्यवती की रक्षा का प्रबंध कर दिया। द्वीप में सत्यवती के गर्भ से एक पुत्र उत्पन्न हुआ। उस पुत्र को महर्षि पराशर ले गए। उन्होंने उसका पालन पोषण कर और उसे शिक्षा दीक्षा देकर विद्वान बना दिया। वही बाद में महर्षि कृष्ण द्वैपायन के नाम से विख्यात हुए। पराशर ने सत्यवती पर एक और उपकार किया उन्होंने चिकित्सा की और सत्यवती के शरीर की दुर्गंध को निकालकर शरीर में एक विचित्र प्रकार की सुगंधि भर दी। इस सुगंधि के कारण ही सत्यवती का देवव्रत के पिता शांतनु से विवाह संभव हो सका। और शांतनु ने सत्यवती को उसके पुत्र को हस्तिनापुर की गद्दी की उतराधिकारी बनाने का वचन दिया और जिसे पालन करने का देवव्रत ने आश्वासन दिया, वह तो जगत प्रसिद्ध एक पृथक कथा ही है । राजा वशु उपरिचर की यह कथा महाभारत में भी कुछ अंतर के साथ वर्णित है। महाभारत आदि पर्व के 63 वें अध्याय में अंकित राजा वसु उपरिचर की कथा के अनुसार इंद्र की आज्ञा से राजा वसु ने चेदि देश का आधिपत्य स्वीकार किया था। वे अत्यंत धर्मात्मा राजा थे। इंद्र ने इस भय से कि कहीं वे स्वर्ग प्राप्त न कर लें उन्हें पृथ्वी पर ही ऐश्वर्य भोग और प्रभाव उपलब्ध करा दिया था। उन्हें स्फटिक से बना एक विमान भी दिया गया था। जिस पर राजा वसु इच्छानुसार आकाश मार्ग से भ्रमण करते थे। इसी कारण उनका नाम उपरिचर अर्थात ऊपर चलने वाला पड़ गया। कथा है कि उनका वीर्यपात हो गया और उन्होंने उस स्खलित वीर्य को संरक्षित कर अपने विमान चालक के माध्यम से कर अपनी पत्नी के पास उसे धारण कर लेने के लिए भेजा। परन्तु विमान चालक से वह संरक्षित वीर्य गिर पड़ा और उनके उस वीर्य को यमुना स्थित मत्स्य द्वारा निगलने पर उस मत्स्य से एक पुत्र और एक पुत्री उत्पन्न हुए। पुत्र आगे चलकर मत्स्य राज बने जिन्हें राजा उपरिचर ने स्वीकार कर लिया था, किन्तु पुत्री जिसके शरीर से मछली की गंध आती थी। उसे दाश राज को ही दे दिया था कि वे उसे पुत्रीवत पालित करें। यही युवा होने पर सत्यवती या मत्स्यगंधा कहलायी। उपरिचर के ही एक पुत्र वृहद्रथ कालान्तर में मगध देश के शासक बने। कथा के अनुसार एक बार नाव द्वारा पराशर मुनि को यमुना नदी पार कराते समय मत्स्यगंधा के रूप सौन्दर्य को देखकर उस पर मोहित हो पराशर ऋषि ने उससे संसर्ग का प्रस्ताव किया। थोडा ना-नुकुर के बाद सत्यवती के मान जाने पर पराशर ने उसके शरीर से निकलने वाली गंध को दूर करने के लिए गंध के स्थान पर सुगंध का वर दे दिया और उससे संसर्ग किया। उनके संयोग से सत्यवती योजनगंधा बन गई और उसने एक पुत्र को जन्म दिया जो बाद में व्यास ऋषि बने। वे काले होने से कृष्ण और यमुना के द्वीप पर पले होने के कारण द्वैपायन कहलाये। उन्होंने वेदों का विस्तार किया था इस कारण उन्हें वेद व्यास कहा गया। पुराणों में इस कथा का अति विस्तार हुआ है और कृष्ण द्वैपायन वेदव्यास के महिमा गान के क्रम में इसे अलंकारिक रंग दे दिया गया है। पौराणिक कथाओं के अनुसार प्राचीन काल में सुधन्वा नाम के एक राजा थे। वे एक दिन आखेट के लिये वन गये। उनके जाने के बाद ही उनकी पत्नी रजस्वला हो गई। उसने इस समाचार को अपनी शिकारी पक्षी के माध्यम से राजा के पास भिजवाया। समाचार पाकर महाराज सुधन्वा ने एक दोने में अपना वीर्य निकाल कर पक्षी को दे दिया। पक्षी उस दोने को राजा की पत्नी के पास पहुँचाने के लिए आकाश में उड़ चला। मार्ग में उस शिकारी पक्षी को एक दूसरी शिकारी पक्षी मिल गया। दोनों पक्षियों में युद्ध होने लगा। युद्ध के दौरान वह दोना पक्षी के पंजे से छूट कर यमुना में जा गिरा। यमुना में ब्रह्मा के शाप से मछली बनी एक अप्सरा रहती थी। मछली रूपी अप्सरा दोने में बहते हुये वीर्य को निगल गई तथा उसके प्रभाव से वह गर्भवती हो गई। गर्भ पूर्ण होने पर एक निषाद ने उस मछली को अपने जाल में फँसा लिया। निषाद ने जब मछली को चीरा तो उसके पेट से एक बालक तथा एक बालिका निकली। निषाद उन शिशुओं को लेकर महाराज सुधन्वा के पास गया। महाराज सुधन्वा के पुत्र न होने के कारण उन्होंने बालक को अपने पास रख लिया जिसका नाम मत्स्यराज हुआ। बालिका निषाद के पास ही रह गई।उस के अंगों से मत्स्य गंध आने के कारण बाद में उसका नाम मत्स्यगंधा रखा गया। उस कन्या को सत्यवती के नाम से भी जाना जाता है। बड़ी होने पर नाव खेने का कार्य करने वाली उस युवती को एक बार पराशर मुनि को नाव पर बैठा कर यमुना पार करना पड़ा। पराशर मुनि सत्यवती रूप-सौन्दर्य पर आसक्त हो गये और बोले - देवि! मैं तुम्हारे साथ सहवास करना चाहता हूँ। यह सुन सत्यवती ने कहा, मुनिवर! आप ब्रह्मज्ञानी हैं और मैं निषाद कन्या, हमारा सहवास सम्भव नहीं है। यह सुन पराशर मुनि बोले, सुन्दरी! तुम चिन्ता मत करो। प्रसूति होने पर भी तुम कुमारी ही रहोगी। इतना कह कर उन्होंने अपने योगबल से चारों ओर घने कुहरे का जाल रच दिया और सत्यवती के साथ भोग किया। तत्पश्चात उसे आशीर्वाद देते हुये कहा, तुम्हारे शरीर से जो मछली की गंध निकलती है वह सुगन्ध में परिवर्तित हो जायेगी। शेष व्यास के जन्म की कथा पूर्ववत अन्य कथाओं की भांति ही है। महर्षि कृष्ण वेदव्यास और उनके ज्ञानी, त्रिकालग्य होने के सम्बन्ध में भांति- भांति की कथाएं व मान्यताएं प्रचलित हैं। पौराणिक ग्रन्थों में अंकित कथाओं के अनुसार महाभारत युद्ध के बाद महर्षि वेदव्यास ने अपने ऋषि बल से मृत योद्धाओं को एक रात के लिए पुनर्जीवित कर दिया था। महर्षि वेदव्यास की कृपा से ही धृतराष्ट्र, पांडु व विदुर का जन्म हुआ था। कौरवों का जन्म भी इनके आशीर्वाद से हुआ था। इन्हें सप्त व अष्टचिरंजीवियों में शामिल और आज भी जीवित माना जाता है। महर्षि वेदव्यास ने जब कलयुग का बढ़ता प्रभाव देखा तो उन्होंने ही पांडवों को स्वर्ग की यात्रा करने के लिए कहा था। महर्षि वेदव्यास ने ही संजय को दिव्य दृष्टि प्रदान की थी, जिससे संजय ने धृतराष्ट्र को पूरे युद्ध का वर्णन महल में ही सुनाया था। पांडवों को द्रौपदी के पूर्वजन्म की कथा भी महर्षि वेदव्यास ने ही सुनाई थी। इसके बाद ही पांडव द्रौपदी स्वयंवर में गए थे। महर्षि वेदव्यास ने तेरह वर्ष पहले ही कौरवों सहित संपूर्ण क्षत्रियों के नाश होने की बात युधिष्ठिर को बता दी थी। ऐसी मान्यता है कि व्यास आधुनिक उत्तराखंड में गंगा के तट पर रहते थे। यह स्थल महाभारत के पांच पांडवों के साथ ऋषि वशिष्ठ का भी अनुष्ठान घर था। भारत में महर्षि वेदव्यास का मन्दिर काशी से पांच मील की दूरी पर अवस्थित व्यासपुरी में विद्यमान है। महाराज काशी नरेश के रामनगर दुर्ग में भी पश्चिम भाग में व्यासेश्वर की मूर्ति विराजमान् है। जिसे स्थानीय लोग छोटा वेदव्यास के रूप में जानते हैं। मान्यता है कि वेदव्यास की यह सब से प्राचीन मूर्ति है। व्यासजी द्वारा काशी को शाप देने के कारण विश्वेश्वर ने व्यासजी को काशी से निष्कासित कर दिया था। तब व्यासजी लोलार्क मंदिर के आग्नेय कोण में गंगाजी के पूर्वी तट पर स्थित हुए। इस घटना का उल्लेख स्कन्द पुराण के काशी खंड में करते हुए कहा गया है- लोलार्कादं अग्निदिग्भागे, स्वर्घुनी पूर्वरोधसि। स्थितो ह्यद्य्यापि पश्चेत्स: काशीप्रासाद राजिकाम्।। -स्कंद पुराण, काशी खंड 96/201 हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews 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| उत्तराखण्ड में मुख्य सचिव पद पर भी महिला की तैनाती संभव Posted: 23 Jun 2022 09:00 AM PDT उत्तराखण्ड में मुख्य सचिव पद पर भी महिला की तैनाती संभवदेहरादून। उत्तराखंड में पहली बार विधानसभा स्पीकर के तौर पर एक महिला की ताजपोशी के बाद अब महिला को मुख्य सचिव पद भी मिल सकता है। सूत्रों के हवाले से बड़ी खबर यह है कि राज्य में अपर मुख्य सचिव के पद पर सेवारत राधा रतूड़ी को उत्तराखंड के आला नौकरशाह का पद मिल सकता है। इसकी वजह यह है कि मौजूदा चीफ सेक्रेट्री एसएस संधू को केंद्र में अहम जिम्मेदारी मिलने का रास्ता साफ हो चुका है। इसके बाद सीएस के पद के लिए राधा रतूड़ी का नाम आगे चल रहा है। मुख्य सचिव के पद के लिए सचिव वित्त सौजन्य ने भी डेप्यूटेशन के लिए अप्लाई किया है, लेकिन इस रेस में रतूड़ी का नाम आगे माना जा रहा है। चूंकि आईएएस कैडर में रतूड़ी सबसे वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी हैं, लेकिन मध्य प्रदेश कैडर की होने के चलते कैडर में बदलाव होने से वह अपने 1988 बैच के अधिकारियों से पिछड़ गई थीं। वर्तमान में रतूड़ी सीएमओ के साथ ही गृह और सचिवालय प्रशासन के लिए अपर मुख्य सचिव के तौर पर सेवाएं दे रही हैं। उत्तराखंड में पहले भी आईएएस अफसर महिलाएं बड़े पदों पर रह चुकी हैं, लेकिन मुख्य सचिव कभी नहीं बन सकीं। मार्च 24 में रिटायर होने जा रही रतूड़ी को यह इतिहास रचने का मौका मिलने की संभावना सबसे ज्यादा है। इस संभावना के पीछे सूत्रों के हवाले से खबरें ये भी हैं कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी रतूड़ी के नाम पर सहमति जता चुके हैं। बता दें कि रतूड़ी के पति अनिल रतूड़ी पहले डीजीपी के पद से रिटायर हुए थे। केंद्र सरकार में एसएस संधू को पीएमओ, रक्षा या विदेश मंत्रालय में अहम जिम्मेदारी मिलने के संकेत मिल रहे हैं, लेकिन अभी कुछ साफ नहीं है। खबरों की मानें तो डेपुटेशन के लिए संधू के बारे में आधिकारिक रूप से कुछ तय नहीं हुआ है, लेकिन इस तरह के संकेत जरूर मिल चुके हैं। इससे पहले भी संधू केंद्र में एनएचआई, मानव संसाधन मंत्रालय में बड़ी जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं, जो सीएम धामी की कोशिश से केंद्र से उत्तराखंड आए थे। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| हमसे बड़ा क्रिमिनल कौन है भाई: आजम खान Posted: 23 Jun 2022 08:58 AM PDT हमसे बड़ा क्रिमिनल कौन है भाई: आजम खानलखनऊ। रामपुर लोकसभा सीट के लिए आज उपचुनाव हो रहा है। कड़े सुरक्षा इंतजाम के बीच वोटिंग सुबह सात बजे से जारी है। इस बीच रामपुर सीट से सांसद रह चुके समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान एक बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि हमसे बड़ा क्रिमिनल कौन है भाई ? हम तो मानते हैं। हमारे साथ जो चाहे सलूक करे। हम तो मुर्गी, बकरी, भैंस, किताब, फर्नीचर डकैती के आरोपी हैं तो हमारे शहर को भी वैसा ही मान लिया गया है। तो जो चाहे करें। हमें तो सहना है। रहना है तो सहना है। बुधवार की रात का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा- हम तो सारी रात जागे हैं और हमारे प्रत्याशी संसद के सभी थाने गए हैं। सबसे ज्यादा अभद्र व्यवहार थाने गंज के इंस्पेक्टर ने किया और उसने लोगों के साथ मार-पीट भी की। अगर वोट प्रतिशत गिराई जाती है तो इसका इल्जाम पूरा प्रशासन पर आएगा। आपको बता दें कि आज यूपी की रामपुर और आजमगढ़ लोकसभा सीट के लिए उपचुनाव हो रहा है। रामपुर लोकसभा सीट आजम खान के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। विधानसभा चुनाव जीतने के बाद आजम खान ने इस सीट से इस्तीफा दे दिया था। रामपुर लम्बे समय से आजम खां का प्रभाव क्षेत्र रहा है और पार्टी ने रामपुर लोकसभा सीट के उपचुनाव का जिम्मा खां को ही सौंपा है। रामपुर लोकसभा क्षेत्र में 17 लाख से अधिक मतदाता हैं। यहां 50 प्रतिशत हिंदू मतदाता और करीब 49 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता हैं। वर्ष 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में सपा उम्मीदवार आजम खां ने भाजपा प्रत्याशी जयाप्रदा को एक लाख नौ हजार 997 मतों के भारी अंतर से पराजित किया था। रामपुर लोकसभा उपचुनाव में सीधा मुकाबला सपा के आसिम राजा और भाजपा के घनश्याम सिंह लोधी के बीच है। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| आजमगढ़ में उत्साह से लोगों ने किया मतदान Posted: 23 Jun 2022 08:56 AM PDT आजमगढ़ में उत्साह से लोगों ने किया मतदानलखनऊ। उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में लोकसभा उपचुनाव के लिए आज सुबह सात बजे से वोटिंग जारी है। जानकारी के मुताबिक सुबह 11 बजे तक आजमगढ़ में 19.84 प्रतिशत वोटिंग हुई थी। मतदान केंद्रों पर सुबह से ही मतदाताओं की लंबी कतार नजर आ रही है। यह सीट समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के इस्तीफे के बाद खाली हुई है। भारतीय जनता पार्टी ने इस सीट से भोजपुरी फिल्म स्टार दिनेश लाल यादव निरहुआ को टिकट दिया है। उन्होंने पिछले लोकसभा चुनाव में भी अखिलेश यादव को टक्कर दी थी लेकिन वे चुनाव हार गए थे।इस चुनाव में समाजवादी पार्टी ने धर्मेंद्र यादव को टिकट दिया है जबकि बसपा से शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली मैदान में हैं। हाल के विधानसभा चुनाव में आजमगढ़ की सभी चार विधानसभा सीटों- मुबारकपुर, सागदी, गोपालपुर और मेहनगर पर सपा ने जीत हासिल की थी। 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान सपा ने बसपा के गठबंधन में चुनाव लड़ा था और अखिलेश यादव इस सीट पर चुनाव जीते थे। उस चुनाव में अखिलेश यादव को 6. 21 लाख मत मिले थे, जबकि भाजपा के दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ को 3.61 लाख वोट मिले थे। चुनाव आयोग से प्राप्त जानकारी के मुताबिक सुबह 9 बजे तक आजमगढ़ में 9.21 फीसदी वोटिंग हुई थी। यहां वोटिंग शांतिपूर्ण तरीके से चल रही है। किसी तरह की अप्रिय घटना की कोई खबर नहीं है। आजमगढ़ सीट से अखिलेश यादव से पहले उनके पिता मुलायम सिंह यादव सांसद थे। इसलिये इस सीट का उपचुनाव समाजवादी पार्टी के लिये प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है। वहीं भारतीय जनता पार्टी की ओर से निरहुआ दूसरी बार चुनाव लड़ रहे हैं। उनके लिए भी यह चुनाव प्रतिष्ठा का सवाल बन चुका है। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 23 Jun 2022 08:54 AM PDT वनवासी नारी शक्ति को सम्मान(डॉ दिलीप अग्निहोत्री -हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा) सबका साथ सबका विकास की यात्रा आगे बढ़ी। इसमें एक नए अध्याय को जोड़ने की पटकथा बन चुकी है। पहली बार देश के सर्वोच्च पद पर इस समाज को प्रतिष्ठा मिलेगी। राजग उम्मीदवार द्रोपदी मुर्मू का राष्ट्रपति निर्वाचित होना तय है। बेहतर होता कि विपक्ष राष्ट्रीय सहमति में सहभागी होता। राजनीति अपनी जगह है। लेकिन कतिपय विषयों पर राष्ट्रीय सहमति भी दिखनी चाहिए।लेकिन वर्तमान विपक्षी नेताओं से इसकी उम्मीद करना बेमानी है। जब पाकिस्तान के विरुद्ध सर्जिकल स्ट्राइक हुई थी, तब भी विपक्ष अलग राग अलाप रहा था। डोकलाम में चीन से मुकाबले पर ये नेता राष्ट्रीय सहमति से अलग दिखाई दे रहे थे,जम्मू-कश्मीर में संवैधानिक सुधार के समय इनके और पाकिस्तान के बयानों में समानता झलक रही थी। यह चुनाव तो राजनीति का ही विषय है। विपक्ष को राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार उतारने का पूरा अधिकार है। लेकिन विपक्ष जानता है कि उसका उम्मीदवार विजयी नहीं हो सकता। यह केवल विरोध के लिए ही विरोध है। किन्तु इससे विपक्ष की मानसिकता एक बार फिर उजागर हुई है। आठ वर्षों से वह नरेंद्र मोदी के विरोध में बेचैन है। विपक्ष के लिए यह भटकाव का दौर है। दिलचस्प यह कि उसने कई वर्षो से वैचारिक भटकाव का सामना कर रहे नेता को अपना राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया है। ममता बनर्जी ने इस चुनाव को राष्ट्रीय राजनीति में अपना कद बढ़ाने का अवसर मान लिया है। इसके लिए उन्होंने सबसे पहले शरद पवार को किनारे लगाने का दांव चला था। उन्हें राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाने का प्रस्ताव किया गया। शरद पवार दुर्गति के लिए तैयार नहीं हुए। फारुख अब्दुल्ला भी इसी कारण अलग हो गए। जिनको उम्मीदवार बनाया गया, वह भी शायद भटकते भटकते थक गए हंै। भविष्य के लिए कोई उम्मीद भी नहीं बची है। चुनाव प्रचार के दौरान बहुत कुछ कहने का अवसर मिलेगा। मन हल्का हो जाएगा। पराजित होंगे, तो क्या नाम नहीं होगा। वस्तुतः विगत आठ वर्षों से विपक्षी दल बेचैन हैं। वह नरेंद्र मोदी सरकार के सार्थक विरोध का तरीका समझने में विफल है। उनके हमले का विपरीत असर होता है। नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता बढ़ जाती है। विपक्ष के समक्ष विश्वास का संकट आ जाता है। ऐसा नहीं कि नरेंद्र मोदी और उनके विरोधियों के बीच इस अंदाज का द्वन्द पहली बार हो रहा है। गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए भी मोदी को इसी प्रकार के विरोध का सामना करना पड़ता था।इस विरोध से मोदी मजबूत और लोकप्रिय होते गए। उसी अनुपात में मुख्य विपक्षी कांग्रेस कमजोर होती गई लेकिन कांग्रेस ने इससे कोई सबक नहीं लिया। नरेंद्र मोदी गुजरात तक सीमित नहीं रहे। वह लगातार दूसरी बार भारी बहुमत से प्रधानमंत्री बने। कुछ भी हो, भाजपा की इस सफलता में सरकार की उपलब्धियों के साथ साथ विपक्ष का भी योगदान है। विपक्ष अपने इस योगदान से विगत आठ वर्षों में कभी विमुख नहीं हुआ। कई नेताओं में तो नरेंद्र मोदी के विरोध का हद दर्जे तक जुनून रहा है। उन्होंने जेएनयू में सरकार विरोधी नारे सुने, उनको समर्थन देने के लिए दौड़ पड़े। बाद में पता चला कि यहां भारत विरोधी नारे लग रहे थे।आजादी की मांग हो रही थी, टुकड़े टुकड़े होने की दुआ की जा रही थी। इस तरह विपक्ष ने अपना नुकसान किया। इसी तरह वह सीएए के उपद्रव को समर्थन देने पहुँच गया। बाद में पता चला कि कानून नागरिकता देने के लिए था और उपद्रव नागरिकता समाप्त करने के असत्य पर आधारित था। कथित किसान आंदोलन में विपक्षी नेता दौड़कर पहुँच गए थे। लेकिन मुद्दा यह उठा कि इन्होंने सत्ता में रहते हुए किसानों की भलाई में क्या किया था, इसके अलावा उनके समय में कितनी सरकारी खरीद होती थी, या न्यूनतम समर्थन मूल्य कितना था, उसका भुगतान कैसे होता था, आदि। यहीं दशा अग्निपथ पर है। विपक्ष ने हिंसक उपद्रव का समर्थक दिखाई दिया। जिन्होंने सत्ता में रहते हुए दस वर्ष तक सेना की अपेक्षित जरूरतों को पूरा नहीं किया, वह सेना को लेकर सवाल उठा रहे हैं। वह सरकारी नौकरियों की बात कर रहे हैं, लेकिन अपने समय की सरकारी भर्तियों पर बात नहीं करना चाहते। वैसे आमजन से कोई सच्चाई छुपी नहीं हैं। इसलिए तमाम प्रयासों के बाद भी विपक्ष के सभी नेता मिलकर भी नरेंद्र मोदी का मुकाबला करने में विफल हैं। पिछली बार भी राष्ट्रपति चुनाव में इन्हें मुँह की खानी पड़ी थी। इस बार भी वही इतिहास अपने को दोहराएगा। पिछली बार राजग ने निर्धन परिवार में जन्मे राम नाथ कोविंद को उम्मीदवार बनाया था। उनके मुकाबले के लिए विपक्ष ने जगजीवन राम की पुत्री को उम्मीदवार बनाया था। इस बार राजग ने निर्धन वनवासी परिवार में जन्म लेने वाली द्रोपदी मुर्मू को उम्मीदवार बनाया हैं। विपक्ष ने इनके विरोध में पूर्व नौकरशाह को उतारा हैं। वह राजनीति में कई पाले बदल चुके हैं।बताया जाता है कि नरेन्द्र मोदी सरकार में जगह न मिलने के बाद वह बागी हो गए थे।पिछले कई वर्षों से वह अंतद्र्वन्द्व में रहे हैं। दूसरी ओर द्रोपदी मुर्मू ने जीवन में बहुत संघर्ष किया लेकिन कभी विचलित नहीं र्हुइं। विचारधारा पर आधारित समाज सेवा के पथ पर चलती रहीं। भाजपा में उन्हें सम्मान मिला। जो दायित्व दिया गया, उसका बखूबी निर्वाह किया। द्रौपदी मुर्मू ने शिक्षिका के रूप में अपना करियर शुरू किया था।उनकी राजनीति पार्षद के रूप में शुरू हुई। फिर भाजपा के एसटी मोर्चा की राज्य उपाध्यक्ष बनीं। दो बार रायरंगपुर से विधायक बनीं। वह ओडिशा की भाजपा बीजद गठबंधन सरकार में मंत्री भी रहीं। झारखंड की राज्यपाल के रूप में उन्होंने कई उल्लेखनीय कार्य किए। उन्होंने झारखंड के विश्वविद्यालयों के लिए चांसलर पोर्टल शुरू कराया। इसके जरिये सभी विश्वविद्यालयों के कॉलेजों के लिए छात्रों का ऑनलाइन नामांकन शुरू कराया। राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार घोषित होने के बाद वह मयूरभंज जिले के रायरंगपुर में महादेव मंदिर पहुंचीं। उन्होंने भगवान शिव की पूजा-अर्चना की। इसके पहले महादेव मंदिर प्रागंण में झाड़ू लगाकर सफाई भी की। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| Posted: 23 Jun 2022 08:52 AM PDT पल्लवी पटेल पर आरोप(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा) देश भर में इस समय महाराष्ट्र की चचार्प हो रही है क्योंकि वहां बाला साहेब ठाकरे के ही कभी अतिविश्वसनीय रहे एकनाथ शिंदे ने चालीस से अधिक विधायकों को लेकर बगावत कर दी। इस तरह वहां सरकार और शिवसेना पार्टी दोनों इतिहास के महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़े हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी से कई दिनों से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) पूछतांछ कर रहा है लेकिन अब उसमें लोगों को रुचि नहीं है। इसके बजाय उत्तर प्रदेश में एक विधायक पर जिस तरह आरोप लगाए गये, उनकी चर्चा जरूर हो रही है। विधायक का नाम है पल्लवी पटेल जिन्होंने इसी साल सम्पन्न हुए विधानसभा चुनाव में प्रदेश के उपमुख्यमंत्री (डिप्टी सीएम) केशव प्रसाद मौर्य को सिराथू विधानभा क्षेत्र में पराजित कर दिया था। सिराथू के दिलीप पटेल ने एक शिकायत निर्वाचन आयोग में दर्ज करायी थी। केशव प्रसाद मौर्य को विधानसभा चुनाव में पराजित करने वाली पल्लवी पटेल पर आरोप लगाया गया है कि उन्हांेने अपने नामांकन पत्र में अपने खिलाफ दर्ज मुकदमों की जानकारी छिपायी थी। इस प्रकार क्षेत्र के मतदाताओं को गुमराह करने का आरोप लगा। मतदाताओं को गुमराह कौन कर रहा है, यह सचमुच एक यक्ष प्रश्न है। चुनाव आयोग ने पल्लवी पटेल को नोटिस भेजा। इस नोटिस को उन्हांेने चुनौती दी है। चुनाव से पहले पल्लवी पटेल को बहुत कम लोग जानते थे लेकिन चुनाव के बाद ज्यादा लोग जानने लगे हैं और अब चुनाव आयोग के नोटिस के बाद इस मामले में लोगों की दिलचस्पी भी बढ़ गयी है। प्रदेश में पिछड़े वर्ग के बड़े नेता रहे सोनेलाल पटेल की बड़ी बेटी पल्लवी अपनी मां के साथ अपने पिता के बनाए अपना दल के एक धड़े का नेतृत्व कर रही हैं जबकि उनकी छोटी बहन अनुप्रिया पटेल दूसरे धड़े के साथ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का हिस्सा हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट में कौशाम्बी की सिराथू विधानसभा सीट से सपा विधायक पल्लवी सिंह पटेल ने निर्वाचन आयोग के नोटिस को चुनौती दी है। उनकी याचिका की सुनवाई 23 जून को होगी। उन्होंने याचिका में निर्वाचन आयोग की नोटिस को चुनौती दी है। यह आदेश जस्टिस सुनीता अग्रवाल और जस्टिस विक्रम डी चैहान की खंडपीठ ने दिया है। दरअसल, सपा विधायक पल्लवी पटेल पर 2022 विधानसभा चुनाव में नामांकन पत्र में अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मुकदमे की जानकारी छिपाने का आरोप है। सिराथू के दिलीप पटेल की शिकायत पर निर्वाचन आयोग ने मामले में संज्ञान लिया। उसके बाद एसडीएम सिराथू ने पल्लवी को गत 18 व 25 मई और 3 जून को नोटिस देकर स्पस्टीकरण मांगा था। याचिका में इसी नोटिस को चुनौती दी गई है। आरोप है कि विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने अपने नामांकन पत्र में अपने खिलाफ दर्ज मुकदमों की जानकारी छिपाई और क्षेत्र के मतदाताओं को गुमराह कर अपने पक्ष में वोट हासिल किए। शिकायत में कहा गया है कि पल्लवी पटेल और उनके पति के खिलाफ लखनऊ में फर्जी दस्तावेजों के जरिए फ्लैट हड़पने का मुकदमा गोमतीनगर थाने में दर्ज है। इसके अलावा कानपुर में भी पैतृक मकान हड़पने का मुकदमा वहां की अदालत में चल रहा है। बीते विधानसभा चुनाव में अपने नामांकन फॉर्म में उन्होंने ये जानकारियां छिपाई हैं। पल्लवी पर यह भी आरोप लगाया गया है कि उन्होंने अपनी मां को राज्यसभा का सांसद बनाने का प्रलोभन देकर पारिवारिक संपत्ति हड़पने का प्रयास किया और चुनाव के दौरान चंदे में मिली रकम अपनी ससुराल जबलपुर भेज दी। इसी प्रकार उन्होंने अपना दल कमेरा पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष होते हुए समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा और विधायक निर्वाचित हुईं। इस प्रकार वर्तमान में वह दो दलों का प्रतिनिधित्व कर रही हैं, जो निर्वाचन आयोग के नियमों के विपरीत है। गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव में पल्लवी पटेल ने भाजपा प्रत्याशी और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को हराया था। यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान कौशांबी की हॉट सीट मानी जाने वाली सिराथू विधानसभा में दिलचस्प मुकाबला देखने को मिला। इस सीट पर भाजपा को बड़ा झटका लगा। प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को हार का सामना करना पड़ा। सपा की पल्लवी पटेल ने इस सीट पर 7337 वोट से जीत दर्ज की। पल्लवी को 105559 वोट मिले जबकि बीजेपी के केशव मौर्य (98727) को हार मिली। सिराथू सीट पर यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और सपा की पल्लवी पटेल सहित कुल 18 प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे। पल्लवी पटेल अपना दल (कमेरावादी) की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं। कौशांबी की मंझनपुर विधानसभा के कोरीपुर में उनकी ससुराल है। पल्लवी अपने परिवार के साथ कानपुर में रहती हैं। समाजवादी पार्टी से अपना दल (कमेरावादी) का गठबंधन हुआ तो पल्लवी पटेल को सिराथू सीट से केशव प्रसाद मौर्य के सामने मैदान में उतारा गया। पहले से ही माना जा रहा था कि इस सीट पर उनकी राह आसान नहीं होने वाली है लेकिन वो पूरी मजबूती के साथ लड़ीं। पल्लवी पटेल अपना दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वर्गीय सोनेलाल पटेल की बड़ी बेटी हैं। पिता के मरने के बाद उनकी बहन अनुप्रिया पटेल के बीच पारिवारिक विवाद हुआ तो पार्टी दो हिस्सों में बंट गई। पल्लवी पटेल ने अपनी मां के साथ मिलकर अपना दल (कमेरावादी) का गठन किया जबकि अनुप्रिया पटेल ने अपने पति के साथ मिलकर अपना दल(एस) के नाम से पार्टी बना ली। अनुप्रिया पटेल ने भाजपा से गठबंधन कर 2017 में ही पार्टी को सीट जिताने में कामयाबी हासिल की थी। इस बार के चुनाव में भी अनुप्रिया भाजपा के साथ तो पल्लवी पटेल ने सपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ा। वहीं इस सीट पर चुनाव प्रचार के दौरान तमाम उतार-चढ़ाव के दौर भी देखने को मिले। कई गांव में सपा और भाजपा के समर्थकों के बीच झड़पें भी हुईं। इन सबको दरकिनार कर आखिरकार पल्लवी पटेल ने डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को करारी शिकस्त दी। अपना दल एस की प्रमुख अनुप्रिया पटेल ने एक बार फिर अपनी मां को लेकर अपनी मंशा साफ कर दी थी। उन्होंने कहा कि मां के खिलाफ मेरी पार्टी चुनाव नहीं लड़ेगी। ऐसा इसलिए क्योंकि अनुप्रिया आज जहां भी हैं वह अपनी माता-पिता की बदौलत हैं। उन्होंने कहा कि पल्लवी मेरी बड़ी बहन है। एनडीए गठबंधन के खिलाफ पल्लवी खड़ी हैं। मैं उनके खिलाफ चुनाव लड़ रही हूं। उन्होंने पल्लवी को लेकर कहा कि उन्होंने पिता के सिद्धांतों की ऐसी की तैसी कर दी। अनुप्रिया पटेल ने कहा कि 2009 से पहले हम चारों बहनों ने राजनीति में कदम नहीं रखा था। अनुप्रिया ने कहा 2009 में अपने पिता के संघर्षों को आगे बढ़ाना है। मैं संकल्प लेती हूं कि पिता के सपनों को मरने नहीं दूंगी। आप लोगों ने मुझ पर भरोसा कर एक बेटी से नेता बना दिया। इसी प्रकार की अपील पल्लवी पटेल ने भी की थी। जनता ने उनकी अपील पर मुहर लगायी लेकिन सियासत में जनता की मुहर ही सब कुछ नहीं होती। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| कांग्रेस को एक रख पाएंगी प्रतिभा सिंह Posted: 23 Jun 2022 08:49 AM PDT कांग्रेस को एक रख पाएंगी प्रतिभा सिंह(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा) अपना दबदबा कायम करने के लिए कांग्रेस मंे गुटबाजी स्थायी रोग बन गया है। इसी साल गुजरात और हिमाचल प्रदेश मंे विधानसभा के चुनाव होने हैं। गुजरात में हार्दिक पटेल पर कांग्रेस ने बहुत भरोसा जताया था लेकिन उन्होंने राहुल और प्रियंका गांधी पर सीधे-सीधे उपेक्षा करने का आरोप लगाते हुए पार्टी छोड़ी और भाजपा का दामन थाम लिया है। इसी तरह हिमाचल प्रदेश मंे भी पूर्व अध्यक्ष अजय बहादुर से एक धड़ा नाराज था। कांग्रेस हाईकमान ने गुटबाजी दूर करने के लिए प्रतिमा सिंह को अध्यक्ष बना दिया है लेकिन गुटबाजी फिर भी खत्म नहीं हो रही। अभी एक विधायक ने इस बात को लेकर नाराजगी जतायी कि उन्हंे मंच पर चढ़ने नहीं दिया गया। बहरहाल, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने दावा किया है कि कांग्रेस मंे अब गुटबाजी नहीं है। प्रतिमा सिंह का यह दावा कितना सही है, इसका फैसला प्रदेश के विधानसभा चुनाव करेंगे। सवाल यह भी उठता है कि क्या कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और दिल्ली में बैठे आला नेताओं को पार्टी की अंदरूनी गुटबाजी दिख नहीं रही है या हालात ऐसे हो गए हैं कि कांग्रेस अध्यक्ष समेत दिल्ली में बैठे कांग्रेस के दिग्गज नेता इन हालातों को संभाल नहीं पा रहे हैं। वर्तमान हालात और आंकड़े बता रहे हैं कि कांग्रेस में गुटबाजी चरम पर है। पार्टी एक के बाद एक राज्य में अपना जनाधार खोती जा रही है। ऐसे में सवाल है राष्ट्रीय अध्यक्ष के सिर्फ एक इशारे पर मुख्यमंत्री तक बदल देने वाली कांग्रेस लगातार कई राज्यों में दो गुटों में बंटी अपनी पार्टी को एक साथ क्यों नहीं ला पा रही है। जानकारों की मानें तो इसके पीछे पार्टी नेतृत्व की कार्यशैली ही असली वजह है। पार्टी में जनाधार वाले नेताओं की बजाय उन नेताओं को पद दिया गया जो केंद्रीय नेतृत्व के करीब हैं लेकिन धरातल पर उनके पास अपना वोट बैंक नहीं है। ऐसे में भले ही केंद्रीय नेतृत्व का भरोसा पाकर पार्टी के ये नेता संगठन और सरकार में मुख्य पदों पर बैठ गए हों लेकिन जमीन पर उनकी पकड़ वो नहीं है जो उनके खिलाफ बोलने वाले नेताओं की है। जो नेता पार्टी नेताओं के खिलाफ बोल रहे हैं उनका अपना जनाधार है। ऐसे में कुछ गिने-चुने व्यक्तियों के खिलाफ बोलने वाले इन नेताओं के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई की जाती है तो रहा सहा जनाधार भी खिसक सकता है, जो फिलहाल पार्टी के पास है। यही बड़ा कारण है कि पार्टी उन नेताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं कर पा रही है जो लगातार ऐसे बयान दे रहे हैं जिसे अनुशासनहीनता की श्रेणी में माना जा सकता है। लोकसभा चुनाव में ही जहां पार्टी का एक धड़ा आम आदमी पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की बात कर रहा था, वहीं दूसरा धड़ा अकेले चुनाव लड़ने की बात कर रहा था। केजरीवाल ने 70 में से 62 सीटें जीतकर राजनीति में नया एजेंडा सेट किया है, तो कांग्रेस का वही धड़ा जो लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के साथ जाना चाहता था वह खुल कर बोल रहा है और अरविंद केजरीवाल की तारीफ कर रहा है। इसी तरह हिमाचल प्रदेश कांग्रेस की वर्ष 2022 में सत्ता वापसी की राह में गुटबाजी रोड़ा बनने लगी है। कांग्रेस के 22 विधायक कई गुटों में बंट गए हैं। अपने-अपने नेताओं की लॉबिंग के लिए कांग्रेस विधायक दिल्ली में डेरा डालते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत वीरभद्र सिंह के बाद सर्वमान्य नेता के तौर पर प्रदेश कांग्रेस में कोई विकल्प नहीं था। सुखविंद्र सुक्खू के गुट के विधायकों ने बीते दिनों दिल्ली में शक्ति प्रदर्शन किया। वीरभद्र सिंह के गुट में शामिल रहे दो विधायकों ने भी पाला बदलकर सुक्खू का दामन थाम लिया। वीरभद्र सिंह के साथ वैचारिक मतभेद रखने वाले सुक्खू का दायरा अब अपने गृह जिला हमीरपुर के साथ-साथ कांगड़ा, कुल्लू, शिमला, सोलन, किन्नौर और ऊना जिला के विधायकों तक बढ़ गया है। अर्की और जुब्बल कोटखाई में हुए उपचुनाव में सुक्खू के समर्थक विधायकों ने जीत दर्ज की है। सुक्खू ने इन दोनों सीटों पर खूब पसीना भी बहाया। दूसरा गुट नेता विपक्ष मुकेश अग्निहोत्री का है। इसके अलावा कुछ वरिष्ठ विधायक तटस्थ दिखे। उपचुनावों में मिली जीत से सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं के हौसले बुलंद जरूर हैं। करीब दो सप्ताह पहले ही भारत जोड़ो सद्भावना सम्मेलन में पहुंचीं पार्टी प्रदेशाध्यक्ष प्रतिभा सिंह के समक्ष ही दोनों गुटों की तल्खी सबके सामने आ गई थी। दोनों गुटों ने एक-दूसरे को नीचा दिखाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी थी।वर्चस्व और अपना दबदबा कायम करने के लिए दो धड़ों की लड़ाई चुनावी साल में कांग्रेस के लिए गले की फांस बन गई है। सिरमौर जिला कांग्रेस में चल रही अंदरूनी कलह बंद कमरे से सार्वजनिक मंच तक होते हुए पुलिस थाने तक पहुंच गई। बीते दिनों पार्टी के एक कार्यक्रम में उपजा विवाद इतनी दूर पहुंचेगा, इसको लेकर किसी ने नहीं सोचा होगा। लंबे समय से जिला कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष अजय बहादुर के खिलाफ कांग्रेस का एक धड़ा रुष्ट चल रहा था। इस धड़े का आरोप था कि अजय बहादुर पार्टी संगठन को मनमाने तरीके से हांक रहे हैं। सबसे ज्यादा विरोध शिलाई के विधायक हर्षवर्धन चैहान और नाहन से कांग्रेस के पूर्व प्रत्याशी अजय सोलंकी कर रहे थे। भारत जोड़ो सद्भावना सम्मेलन में पहुंचीं पार्टी प्रदेशाध्यक्ष प्रतिभा सिंह के समक्ष ही दोनों गुटों ने एक-दूसरे को नीचा दिखाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी थी। दुखी होकर प्रतिभा सिंह ने सम्मेलन को छोड़कर जाने की बात तक कह दी थी। विधानसभा चुनाव सिर पर हैं। कांग्रेस के बीच लड़ाई चाहे टिकट को लेकर हो या फिर वर्चस्व को लेकर, दोनों ही सूरतों में पार्टी को इसका नुकसान उठाना पड़ेगा। दरअसल, यह लड़ाई जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद को लेकर भी है। सिरमौर कांग्रेस का एक गुट नहीं चाहता था कि अध्यक्ष पद पर दूसरा गुट हावी हो। हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्षा एवं सांसद प्रतिभा सिंह का कहना है कि मौजूदा भाजपा सरकार ने अपने पांच वर्षों के कार्यकाल में सिर्फ और सिर्फ पूर्व की वीरभद्र सरकार के समय में शुरू हुए विकास कार्यों के उदघाटन ही किए हैं। यह बात उन्होंने सुंदरनगर में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में कही। प्रतिभा सिंह 22 जून को मंडी जिला के दौरे पर थीं और उन्हांेने पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं के साथ आगामी चुनावों को लेकर बैठक की हैं। प्रतिभा सिंह ने कहा कि जनता भली भांति जानती है कि प्रदेश में विकास किसने करवाया है और उसका उद्घाटन किसने किया। यदि भाजपा ने विकास किया होता तो उपचुनावों में जनता इस तरह से जवाब नहीं देती। प्रदेश की जनता जानती है कि विकास करना कांग्रेस पार्टी का ही काम है। वहीं, प्रतिभा सिंह ने पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी की बातों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि पार्टी में सब एकजुट हैं। सिरमौर में हुई घटना पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि वहां मंच पर इतने अधिक लोग चढ़ गए, जिस कारण बैठने के लिए जगह ही नहीं बची। ऐसे में जो विधायक हैं, उन्होंने मंच से किसी को हटाने की बजाय खुद ही नीचे बैठना उचित समझा। हालांकि, बाद में उन्हें मंच पर ही बैठाया गया, लेकिन इस घटना को गुटबाजी के साथ नहीं जोड़ा जा सकता। इस तरह कांग्रेस के पास उपचुनाव मंे जीत की ही संजीवनी है जो बिखराव मंे अपना प्रभाव नहीं डाल पाएगी। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| ताइवान ने चेतावनी देकर चीनी विमानों को खदेड़ा Posted: 23 Jun 2022 08:47 AM PDT ताइवान ने चेतावनी देकर चीनी विमानों को खदेड़ाताइपे। यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के कारण चीन को भी मौका दिखने लगा है। यही वजह है कि पिछले 19 दिनों में दो बार चीनी लड़ाकू विमानों ने ताइवान में घुसपैठ की है। चीन ने बुधवार को अपने 29 लड़ाकू विमान ताइवान की तरफ भेजें। हालांकि, ताइवानी वायु सेना ने चेतावनी देकर चीनी लड़ाकू विमानों को अपनी हवाई सीमा से बाहर खदेड़ दिया। चीन ताइवान के इलाके को खुद एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन जोन घोषित कर दिया है। चीन मानता है कि ताइवान उसका एक प्रांत है, जो अंततरू एक दिन फिर से चीन का हिस्सा बन जाएगा। दूसरी ओर, ताइवान खुद को एक आजाद मुल्क मानता है। उसका अपना संविधान है और वहां लोगों द्वारा चुनी हुई सरकार का शासन है। ताइवानी रक्षा मंत्रालय ने बताया कि उसके देश की वायु सेना ने चीन के 29 विमानों को चेतावनी देकर खदेड़ दिया। मंत्रालय ने बताया कि इस घुसपैठ में चीनी वायु सेना के सात जे-10 लडाकू विमान, पांच जे-16 लड़ाकू विमान और एक वाई-8 इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर विमान शामिल था। इन विमानों ने दक्षिण चीन सागर में ताइवान के नियंत्रण वाले प्रतास द्वीपसमूह के पास से उड़ान भरी थी। बता दें कि अमेरिका कई बार आशंका जता चुका है कि चीन ताइवान पर हमला कर सकता है। अमेरिका ने यह भी खुला ऐलान कर दिया है कि अगर ऐसा होता है तो वह ताइवान की मदद के लिए सेना भेजेगा। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| गिलगिट-बाल्टिस्तान चीन को सौंप सकता है पाकिस्तान Posted: 23 Jun 2022 08:45 AM PDT गिलगिट-बाल्टिस्तान चीन को सौंप सकता है पाकिस्तानइस्लामाबाद। चीन के कर्ज तले दबा पाकिस्तान हर दिन आर्थिक बदहाली के दलदल में फंसता जा रहा है। इस कर्ज से छुटकारा पाने के लिए पाकिस्तान ने कश्मीर के अवैध कब्जे वाला गिलगिट-बाल्टिस्तान इलाका चीन को सौंपने की तैयारी में है। ऐसा करने से पाकिस्तान को चीन का लोन चुका देने से कुछ राहत तो मिल सकती है। हालांकि अतंरराष्ट्रीय विरोध के साथ-साथ गिलगिट-बाल्टिस्तान में रहने वाले लोग इसके खिलाफ सड़क पर उतर सकते हैं। पहले से ही सीपीईसी को लेकर वहां के लोग नाराज चल रहे हैं। गिलगिट-बाल्टिस्तान इलाके में सरकार ने पहले से ही लोकल प्रशासन को कम ताकतें दे रखी हैं। वहीं, दूसरी ओर पिछले साल के अफगानिस्तान से निकलने के बाद अमेरिका इस स्थिति में नहीं है कि वह चीन को गिलगिट-बाल्टिस्तान का कब्जा करने दे। अमेरिकी नेता बॉब लान्सिया के मुताबिक- अगर गिलगिट-बाल्टिस्तान का इलाका भारत में होता या एक स्वतंत्र देश होता तो अमेरिका चीन को करारा जवाब देने में सक्षम होता। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| मर्डोक चैथी बार दे रहे हैं तलाक Posted: 23 Jun 2022 08:43 AM PDT मर्डोक चैथी बार दे रहे हैं तलाकवॉशिंगटन। ऑस्ट्रेलियाई- अमेरिकी बिजनेस टाइकून और मीडिया मुगल के नाम से दुनियाभर में मशहूर रूपर्ट मर्डोक एक बार फिर से तलाक लेने जा रहे हैं। छह साल पहले मर्डोक चैथी बार शादी के बंधन में बंधे थे। 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' में छपी खबर के अनुसार 91 वर्षीय मीडिया टाइकून रूपर्ट मर्डोक ने मॉडल एक्टर पत्नी जेरी हॉल से अलग होने का फैसला लिया है। यह रुपर्ट मर्डोक की चैथी शादी थी। उनकी पहली शादी पैट्रिसिया बुकर से हुई थी, जो 1956 से 1967 तक चली थी। इसके मर्डोक ने दूसरी शादी अन्ना मारिया टोर्व से की थी, जो 1967 से 1999 तक चली थी। मीडिया मुगल ने तीसरी शादी 1999 में वेंडी देंग से की थी, जो 2013 तक चली थी। रुपर्ट मर्डोक ने 2016 में जेरी हॉल से शादी की थी, जो 'बैटमैन' और 'द ग्रैजुएट' जैसी हॉलीवुड फिल्मों में काम कर चुकी हैं। बता दें कि रुपर्ट मर्डोक 14 बिलियन संपत्ति के मालिक हैं। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
| ब्रिक्स से पहले भारतीय राजदूत ने चीन के विदेश मंत्री से की मुलाकात Posted: 23 Jun 2022 08:41 AM PDT ब्रिक्स से पहले भारतीय राजदूत ने चीन के विदेश मंत्री से की मुलाकातबीजिंग। चीन में भारतीय राजदूत प्रदीप कुमार रावत ने राष्ट्रपति शी चिनफिंग की मेजबानी में बृहस्पतिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन से पहले चीनी विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की। मार्च में चीन में भारत के नए राजदूत के रूप में पदभार संभालने के बाद रावत की वांग के साथ यह पहली मुलाकात है। रावत और वांग के बीच हुई मुलाकात इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह 14वें ब्रिक्स सम्मेलन से पहले हुई है। इसके अलावा यह मुलाकात इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह दो साल पहले लद्दाख में पैदा हुए सैन्य गतिरोध के चलते द्विपक्षीय संबंधों में आई खटास के बीच हुई है। सैन्य स्तर की वार्ता के परिणामस्वरूप दोनों पक्षों ने पिछले साल पैंगोंग झील के उत्तरी और दक्षिणी किनारे और गोगरा क्षेत्र में सैनिकों के पीछे हटने की प्रक्रिया पूरी की थी। भारत लगातार यह मानता रहा है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर शांति और स्थिरता द्विपक्षीय संबंधों में समग्र प्रगति के लिए महत्वपूर्ण है। मुलाकात को लेकर चीनी विदेश मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में वांग के हवाले से कहा गया है, "चीन और भारत के साझा हित उनके मतभेदों से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं। दोनों पक्षों को एक-दूसरे को कमजोर करने के बजाय समर्थन करना चाहिए, एक-दूसरे के खिलाफ रक्षा क्षमता के बजाय सहयोग को मजबूत करना चाहिए और एक-दूसरे पर संदेह करने के बजाय आपसी विश्वास को बढ़ाना चाहिए।"चीनी विदेश मंत्री ने कहा, "दोनों पक्षों को द्विपक्षीय संबंधों को जल्द से जल्द स्थिर करने और पटरी पर लाने के लिए एक-दूसरे से बात करनी चाहिए। साथ ही संयुक्त रूप से विभिन्न वैश्विक चुनौतियों का समाधान करना चाहिए और चीन व भारत तथा विभिन्न विकासशील देशों के सामान्य हितों की रक्षा करनी चाहिए।" बीजिंग इस साल ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के पांच सदस्यीय समूह 'ब्रिक्स' के सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहा है। हमारे खबरों को शेयर करना न भूलें| हमारे यूटूब चैनल से अवश्य जुड़ें https://www.youtube.com/divyarashminews https://www.facebook.com/divyarashmimag |
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