Bhopal Samachar | No 1 hindi news portal of central india (madhya pradesh) - 🌐

Breaking

Home Top Ad

Post Top Ad

Sunday, July 10, 2022

Bhopal Samachar | No 1 hindi news portal of central india (madhya pradesh)

Bhopal Samachar | No 1 hindi news portal of central india (madhya pradesh)


GK in Hindi- साइलेंसर में ऐसा क्या होता है जो तेज आवाज बहुत कम हो जाती है

Posted: 10 Jul 2022 02:22 PM PDT

जब हम अपनी बाइक, कार या किसी भी व्हीकल को चलाते हैं तो उसमें से एक आवाज निकलती है। हम सभी जानते हैं कि यह आवाज इंजन में ईंधन से उर्जा उत्पन्न करने के दौरान होने वाले विस्फोटों के कारण निकलती है। हम यह भी जानते हैं कि यह आवाज काफी तेज होती है लेकिन एक साइलेंसर लगा देने के कारण यही आवाज काफी कम हो जाती है। आइए जानते हैं कि साइलेंसर में ऐसा क्या होता है जो इंजन की तेज आवाज को बहुत कम कर देता है। 

कुछ साथियों के लिए यह नई जानकारी हो सकती है। इंजन में से जो आवाज निकलती है वह ईंधन से उर्जा उत्पन्न करने के दौरान होने वाले विस्फोटों के कारण नहीं निकलती बल्कि एग्जॉस्ट के कारण निकलती है, लेकिन आम बोलचाल की भाषा में लोग यह मान लेते हैं कि वाहन के इंजन से निकलने वाली आवाज, बिल्कुल उसी प्रक्रिया से निकलती है, जैसे किसी आतिशबाजी या बंदूक की गोली से निकलती है। 

मोटर व्हीकल एक्ट के अनुसार किसी भी वाहन का शोर 80 डेसिमल से ज्यादा नहीं होना चाहिए। वाहनों के साइलेंसर शोर को कंट्रोल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। साइलेंसर में साउंड वेव्स को अपलोड करने के लिए एक विशेष प्रकार के फाइबरग्लास का उपयोग किया जाता है। यह फाइबर ग्लास तेज साउंड वेव्स के रास्ते में बाधा उत्पन्न करता है। इसके कारण उसकी गति कम हो जाती है और इसीलिए आवाज भी कम हो जाती है।

इन 4 राशि वालों के लिए अगला एक साल भाग्योदय प्रबल है - Rashifal 2022-23

Posted: 10 Jul 2022 01:55 PM PDT

देवताओं के गुरु बृहस्पति दिनांक 22 अप्रैल 2023 तक अपनी स्वराशि मीन में गोचर करेंगे। इस दौरान सभी 12 राशियों के लोग प्रभावित होंगे, 12 में से चार राशि वाले लोगों के लिए यह समय काफी शुभ और मंगलकारी है। इस दौरान इनका भाग्य है काफी प्रबल रहेगा। आइए जानते हैं वह चार राशियां कौन सी है जिन पर बृहस्पति देव की कृपा बरस रही है:-

मेष राशि पर बृहस्पति के गोचर का प्रभाव

आपको अपने विचारों में परिवर्तन नजर आएगा। पुराने निवेशों से अच्छा रिटर्न मिलने की संभावना है। युवाओं को करियर में सफलता मिलेगी। धन से संबंधित मामले अच्छे रहेंगे। पारिवारिक समस्याओं का समाधान होगा। अविवाहितों को विवाह प्रस्ताव मिल सकता है।

वृषभ राशि पर बृहस्पति के गोचर का प्रभाव

आने वाले एक साल तक गुरु ग्रह आपके जीवन में खुशियां लेकर आएंगे। करियर में तरक्की होगी। वैवाहिक जीवन सुखद रहेगा। सैलरी में बढ़ोतरी के साथ प्रमोशन मिल सकता है। व्यापारियों को साझेदारी के काम में मुनाफा होगा।

कर्क राशि पर बृहस्पति के गोचर का प्रभाव

भाग्य का पूरा साथ मिलेगा। हर कार्य में सफलता हासिल होगी। लंबे समय से अटके हुए काम पूरे होंगे। विदेशी या धार्मिक यात्रा से लाभ मिल सकता है। धन का आगमन होगा। अचल संपत्ति खरीदने का प्लान बना सकते है।

कन्या राशि पर बृहस्पति के गोचर का प्रभाव

अच्छे परिणामों का लाभ उठा पाएंगे। सितारे बुलंद रहने वाले हैं। आय में वृद्धि होने से आर्थिक स्थिति संभल जाएगी। घरवालों की उम्मीदों पर खरे उतरेंगे। कामकाज में बढ़ोतरी के आसार है। व्यक्ति खुशबू की तरह चारों तरफ महकेगा।

MP NEWS- व्यावसायिक प्रशिक्षकों को 4 महीने से वेतन नहीं मिला, धमकियां मिल रही हैं

Posted: 10 Jul 2022 01:23 PM PDT

भोपाल।
नवीन व्यावसायिक शिक्षा के अंतर्गत स्कूलों में कार्यरत व्यावसायिक प्रशिक्षकों के साथ काफी बुरा बर्ताव किया जा रहा है। पिछले 4 महीने से वेतन नहीं दिया गया है। आउट सोर्स कंपनी कहती है कि लोक शिक्षण संचालनालय से मांगो या फिर दूसरी नौकरी ढूंढ लो। 

व्यावसायिक प्रशिक्षकों ने बताया कि उन्हें वैसे भी न्यूनतम वेतन मिलता है। 4 महीने से वह भी नहीं मिला है। इसके कारण परिवार की पूरी अर्थव्यवस्था गड़बड़ा गई है। बच्चों की फीस तक बकाया हो गई है। नियोक्ता कंपनी के अधिकारियों से बात करने की अनुमति नहीं है। कोऑर्डिनेटर से निवेदन करो तो धमकी देते हैं। अब तो कहने लगे कि अपनी सैलरी DPI Bhopal से मांगो हमसे नही। 

व्यावसायिक प्रशिक्षकों का शोषण केवल आउट और कंपनी नहीं कर रही। यदि कोई DPI BHOPAL में ई-मेल के माध्यम से निवेदन भर कर दे तो उसके निवेदन पर कोई विचार नहीं किया जाता बल्कि उसकी पूरी जानकारी कंपनी को दे दी जाती है। फिर कंपनी प्रताड़ित करना शुरू कर देती है। 

कर्मचारियों के परिजनों को 50 लाख अनुग्रह राशि और बंधन मुक्त अनुकंपा नियुक्ति दीजिए- कर्मचारी संघ

Posted: 10 Jul 2022 01:00 PM PDT

जबलपुर
। मध्य प्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ ने जारी विज्ञप्ति में बताया की त्रिस्तरीय पंचायत एवं नगरीय निकाय चुनाव 2022 में राज्य निर्वाचन आयोग की लचर व्यवस्था के चलते तहसीलदार सहित 04 कर्मचारियों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा है। 

निर्वाचन में लगे तहसीलदार एवं 3 अन्य कर्मचारियों को चुनाव के दौरान विभिन्न घटनाओं में असमय मत्यु हो गई। कर्मचारियों की मृत्यु के उपरांत राज्य निर्वाचन/आयोग जिला निर्वाचन अधिकारी की ओर से केवल औपचारिकता करते हुए मृतकों के परिवार को 8 लाख रूपये अनुग्रह राशि दी गई है, जो इस मंहगाई के दौर में पर्याप्त नहीं है। 

निर्वाचन आयोग द्वारा कर्मचारियों का शोषण बन्द कर मृतक कर्मचारियों के परिवार को सम्मानजनक अनुग्रह राशि के साथ-साथ 30 दिवस के अन्दर बंधन रहित अनुकम्पा नियुक्ति दी जावे। 

संघ के योगेन्द्र दुबे, अर्वेन्द्र राजपूत, अवधेश तिवारी, अटल उपाध्याय, मुकेश सिंह, मन्सूर बेग, आलोक अग्निहोत्री, सुरेन्द्र जैन, मनीष चौबे, योगेन्द्र मिश्रा, नितिन अग्रवाल, श्यामनारायण तिवारी, गगन चौबे, संदीप उरमलिया, प्रणव साहू, राकेश पाण्डे, मनीष लोहिया, मनीष शुक्ला, विनय नामदेव, प्रियांशु शुक्ला, धीरेन्द्र सोनी, मो0 तारिख, अब्दुल्ला चिश्तिी, संतोष तिवारी, महेश कोरी, सुदेश पाण्डे, शुभसंदेश सिंगौर, जे.पी. गुप्ता, आदि ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी,मध्यप्रदेश भोपाल से मांग की है कि चुनाव कार्य के दौरान मृतक कर्मचारियों के आश्रित परिवार के सदस्य के 50 लाख अनुग्रह राशि तथा परिवार के सदस्य को बंधन रहित अनुकम्पा नियुक्ति एक माह में दी जावे।

बॉलीवुड बर्बादी की तरफ क्यों बढ़ रहा है, पढ़िए पांच प्रमुख कारण- BOLLYWOOD REVIEWS

Posted: 10 Jul 2022 12:51 PM PDT

1906 में बनी The Story of the Kelly Gang विश्व की पहली फ़ीचर फ़िल्म थी। तब से अब तक अनेकों भाषाओं में अनेकों फ़िल्म बनाई जा चुकीं हैं। पर सफल फ़िल्म बनाने का कोई तय फ़ॉर्म्युला अब तक किसी को नहीं मिला है। आज कल हिंदी फ़िल्में जिस तरह से पिट रही हैं, वो फ़िल्म से जुड़े लोगों के लिए बहुत नुकसानदेह हैं। वहीं कभी अपने अतिशयोक्ति से भरपूर मार धाड़ के लिए प्रख्यात दक्षिण भारत की फ़िल्में आज हिंदी पट्टे में भी बहुत अच्छा कर रही हैं, जो एक अच्छी बात है। 

ऑनलाइन स्ट्रीमिंग आने की वजह से लोगों को अब घर बैठे अच्छा चलचित्र देखने मिल रहा है। इसलिए हिंदी फ़िल्म निर्माताओं को समझना होगा कि अब सेट फ़ॉर्म्युला पर फ़िल्म नहीं चलेंगी। सेट फ़ॉर्म्युला जैसे रीमेक फ़िल्में चली तो लगातार रीमेक फ़िल्में ही बन रही थी। प्रेम कहानी से बाहर तो हिंदी सिनमा आज भी नहीं निकल पाया है। बायोपिक क्या सफल हुई, बायोपिक की बाड़ लग गई। 

बॉलीवुड, हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री भारत में सबसे बड़ी फ़िल्म इंडस्ट्री थी। पर हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री ने अपने बड़े होने की जिम्मेदारियाँ कभी नहीं निभाई। जब आपकी फ़िल्में चल रही थी तब आपको उन्हें अन्य भारतीय भाषाओं में डब करना चाहिए था। दक्षिण भारतीय फ़िल्म इंडस्ट्री ने इसमें पहल की और देखिए बाहुबली, पुष्पा जैसी कितनी ही फ़िल्में हिंदी में भी सफल रही। 

हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री ने धीरे धीरे अपने गाँव से जैसा रिश्ता ही तोड़ दिया। आम तौर पर हिंदी फ़िल्मों का नायक पैदाइशी आमिर होता है, विदेश घूमता है, उसके सब दीवाने होते है, एक मारता है तो दस गिर जाते हैं, उसके न तो संघर्ष की कोई कहानी होती है, न ही असल जिंदगी में वो उदार होता है, जिस आसानी से वो फ़िल्मों ने घुस जाता है बस उतनी ही आसानी से उसके साथ फ़िल्मों में चीजें हो जाती हैं। इससे आम आदमी उस नायक से जुड़ ही नहीं पता। 

शाहरुख़ खान को ही ले लीजिए, इन्हें तो लोग किसी फ़िल्मी परिवार का हिस्सा नहीं मानते। पर कितने लोग जानते हैं कि इनकी माता जी लतीफ़ फ़ातिमा खान एक सामाजिक कार्यकर्ता थी जिनका उठना बैठना इंदिरा गांधी के साथ था। ऐसे में शाहरुख़ का सीधे तौर पर फ़िल्मों से जुड़ा होना मायने नहीं रखता। हाँ उन्होंने मेहनत की अपनी जगह बनाई पर फ़िल्मों में आना तो आसान हो गया ना। हममें से कितने लोग आज मोदी जी से मिल सकते है। जबकि वो एक साधारण कार्यकर्ता से प्रधानमंत्री बने, वहीं इंदिरा गांधी से सीधे मिल पाना मतलब पकड़ तो थी। 

जितना आप एक कलाकार की फ़ैन फ़ालोइंग के कारण फ़िल्म बेच सकते थे वो आपने बेच ली और जो संगीत कभी आपकी फ़िल्मों की जान होता था, वो अब बस हल्ला हो कर रह गया है। आइटम नम्बर ठुसने और ये मानसिकता कि गालियाँ भर देने से युवा वर्ग खिंचा चला आएगा, इस चक्कर में आपने फ़ैमिली ऑडीयन्स भी गँवा दी। साथ ही हिंदी फ़िल्मों में भारतीय संस्कृति के सम्मान की जगह उसका मज़ाक़ बनाते दिखाया जाना आम सी बात हो गई। 

आप अपने देश के लोगों को तो मूर्ख समझ ही रहे है बल्कि आप ये भी भूल रहे हैं कि भारत से बाहर जो भारतीय हमारी संस्कृति से इन फ़िल्मों के बहाने जुड़े रहते थे वो भी आपसे नाराज़ होते चले जा रहे है। ऐसे में आप अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मार रहे है। 
फ़िल्में आम तौर पर अपने देश अपनी संस्कृति को अच्छे से प्रदर्शित कर विश्व पटल पर रखने का माध्यम होती है। इस कला को हॉलीवुड से सीखना चाहिए। हॉलीवुड अपने हिंसात्मक इतिहास को, अपनी अधनंगी संस्कृति को भी अच्छे से प्रदर्शित करता है। वो यक़ीन दिलाता है कि विश्व में कही भी कोई घटना हो तो अमेरिका ही रक्षा करेगा। वो विदेशों में घटी, घटनाओं पर भी फ़िल्म बनाते हैं और अपनी आमदनी बढ़ाने फ़िल्मों को कई भाषाओं में डब करके रिलीज़ करते हैं।  

हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री को किसने रोका है कि आप बड़ा नहीं सोच सकते। बनाओ विश्व स्तर की फ़िल्म और करो अंग्रेज़ी और अन्य भाषाओं में डब। उसके उल्टे बॉलीवुड वाले इंग्लिश फ़िल्म बनाते हैं जिसमें एक ऐसा किरदार जो असल जीवन में मिल जाए तो कभी अंग्रेज़ी ना बोले ऐसे किरदार से भी आप अंग्रेज़ी बुलवाते हैं। जिससे दर्शक जुड़ नहीं पाता। 

वहीं हॉलीवुड मल्टीवर्स पर फ़िल्म बना रहा है, जिसकी कल्पना हमारी संस्कृति और हमारे धर्म ग्रंथ ने बहुत पहले ही कर रखे है। ऐसे में हम क्यों कभी मल्टीवर्स को लेकर कोई बात नहीं कह सके। क्यूँकि हम शायद हम अपनी ही संस्कृति का मज़ाक़ उड़ाने में व्यस्त थे और पेड़, झरनों के नीचे अपने नायकों को नाचते दिखा कर ही खुश थे।
मल्टीवर्स क्या है और ये भारतीय संसृति से कैसे जुड़ा है ये अगले संस्करण में। ✒ लेखक - नितिन परिहार

कैदी को कोर्ट में पेश करने की जिम्मेदारी किसकी है, इंस्पेक्टर की या जेलर की, जानिए CrPC-270

Posted: 10 Jul 2022 12:26 PM PDT

दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 268 में बताया गया है कि राज्य सरकार कुछ विशेष परिस्थितियों में जेल में बंद कैदी को न्यायालय में पेश होने से रोक सकती है। सीआरपीसी की धारा 269 में बताया गया है कि जेल अधीक्षक भी कुछ विशेष परिस्थितियों में कैदी को कोर्ट पेशी पर भेजने से इंकार कर सकता है। अब प्रश्न उपस्थित होता है कि जेल में बंद कैदी को कोर्ट में पेश करने की जिम्मेदारी किसकी है। उसे गिरफ्तार करने वाले इंस्पेक्टर की या फिर जेलर की, आइए जानते हैं:-

दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 270 की परिभाषा

जब दण्ड प्रक्रिया संहिता,1973 की धारा 268 एवं 269 बंदी व्यक्ति पर लागू नहीं होती है, तब जेलर, कारागार में बंद व्यक्ति को निम्न प्रकार से न्यायालय के समक्ष हाजिर करेगा:-
1. जेल अधीक्षक का कर्तव्य हैं कि वह स्वंय की सुरक्षा या पुलिस की सुरक्षा पर बंदी कैदी को न्यायालय के समक्ष पेश करेगा।
2. जब तक सुनवाई पूरी नहीं हो जाती तब तक बंदी व्यक्ति को न्यायिक हिरासत एवं पुलिस सुरक्षा में रखा जाएगा।
3. न्यायालय जो भी आदेश बंदी व्यक्ति के पक्ष मे या विपक्ष में देगा उसके बाद ही बंदी व्यक्ति को न्यायिक हिरासत में लिया जाएगा।

अर्थात बंदी व्यक्ति की परीक्षा करवाने की जिम्मेदारी जेल के भारसाधक अधिकारी की होगी। उसके बाद न्यायालय जिस प्रकार का आदेश देगा, उसका पालन करते हुए कैदी को वापस जेल में बंद कर देगा या फिर जेल से रिहा कर देगा। इसके लिए उसे किसी इंस्पेक्टर या पुलिस अधीक्षक से किसी भी प्रकार की अनुमति की आवश्यकता नहीं है। Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article) :- लेखक बी.आर. अहिरवार (पत्रकार एवं लॉ छात्र होशंगाबाद) 9827737665

इसी प्रकार की कानूनी जानकारियां पढ़िए, यदि आपके पास भी हैं कोई मजेदार एवं आमजनों के लिए उपयोगी जानकारी तो कृपया हमें ईमेल करें। editorbhopalsamachar@gmail.com

Post Bottom Ad

Pages